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श्री अयोध्या धाम में स्वामी हर्याचार्य जी महाराज की पुण्यतिथि कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

– बोले योगी, सनातन धर्मावलम्बियों के लिए स्वर्ग भी तुच्छ, हम मोक्ष की कामना से करते हैं लोककल्याण के कार्य  – हर सनातनी का हो यही प्रण, धार्मिक प्रतीकों के साथ ही राष्ट्रीय प्रतीकों का भी हो सम्मान : योगी आदित्यनाथ  – सभी पूज्य संतों की यही थी अंतिम आशा, अयोध्या में बने भव्य श्रीराममंदिर : मुख्यमंत्री  – राम, कृष्ण, विश्वनाथ, गौ, गंगा, यमुना, सरयू हमारी आस्था के प्रतीक : योगी आदित्यनाथ – बर्बर विदेशी आक्रांताओं ने जिन धर्मस्थलों को किया था अपवित्र, अब उनका ससम्मान पुनर्प्रतिष्ठा होनी चाहिए : सीएम योगी अयोध्या श्री अयोध्या धाम में पूज्य स्वामी हर्याचार्य जी महाराज की 17वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शामिल होकर श्रद्धासुमन अर्पित किए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि उन्हें अयोध्या की पावन धरा को नमन करने का सौभाग्य मिल रहा है। अभी हाल ही में मॉरिशस के प्रधानमंत्री अयोध्या आए थे और उन्होंने पूछा कि कितने वर्ष बाद राम मंदिर का निर्माण हो रहा है। मैंने उन्हें बताया कि 500 वर्ष बाद। 500 वर्षों तक संतों और भक्तों ने संघर्ष किया और आज वह सपना साकार हुआ। संतों के बलिदान का किया स्मरण मुख्यमंत्री ने अयोध्या आंदोलन में संतों के योगदान को याद करते हुए कहा कि जिन्होंने अपने जीवन, स्वास्थ्य और सुख की परवाह किए बिना सिर्फ एक ध्येय बनाया, “रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे”, उन्हीं संतों की साधना और तप का परिणाम है कि आज अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनकर तैयार हुआ है।मुख्यमंत्री ने कहा कि पूज्य स्वामी हर्याचार्य जी महाराज का सानिध्य उन्हें कई अवसरों पर मिला। उनमें श्रीराम जन्मभूमि के लिए एक अदम्य जज्बा था और सनातन धर्म की एकता के लिए उनका योगदान अविस्मरणीय है। संतों की इच्छाओं का जिक्र योगी आदित्यनाथ ने परमहंस रामचंद्र दास जी महाराज और अन्य संतों की उन इच्छाओं का भी स्मरण किया, जिनकी एकमात्र कामना यही थी कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो। उन्होंने बताया कि उनके पूज्य गुरुदेव भी अपने अंतिम समय में इसी विषय पर चिंतित रहते थे और यही कहते थे कि अयोध्या में रामलला विराजमान हों। उन्होंने कहा कि अयोध्या, काशी, मथुरा या वो सभी धर्मस्थल जिन्हें गुलामी के कालखंड में बर्बर विदेशी आक्रांताओं ने अपवित्र किया था, अब उनका ससम्मान पुनर्प्रतिष्ठा होनी चाहिए। सनातन धर्म और राष्ट्रीय प्रतीक अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राष्ट्रीय जीवन में जिस प्रकार राष्ट्रीय प्रतीकों का महत्व है, उसी प्रकार धार्मिक जीवन में आस्था के प्रतीकों का महत्व है। अयोध्या, काशी, मथुरा जैसे धर्मस्थलों की पुनर्प्रतिष्ठा सनातन धर्म का संकल्प है। उन्होंने कहा कि हर सनातनी का यह प्रण होना चाहिए कि यदि हम अपने धार्मिक प्रतीकों का सम्मान कर रहे हैं तो हमें तिरंगे और संविधान जैसे राष्ट्रीय प्रतीकों का भी सम्मान करना होगा। हमारे सैनिकों के प्रति श्रद्धा का भाव ही सच्चे सनातनी की पहचान है। सनातन धर्म की विशेषता मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन धर्म का सार यही है कि जिसने उपकार किया उसके प्रति आभार प्रकट करना। गंगा, गौ, राम, कृष्ण, विश्वनाथ, गंगा-यमुना-सरयू हमारे प्रतीक हैं। सनातन धर्मावलंबियों ने जीवन के रहस्यों को गहराई से समझा है। हमने स्वर्ग को तुच्छ माना और मोक्ष को सर्वोच्च लक्ष्य माना। यही सन्यासियों और योगियों की पहचान है कि वे अपने व्यक्तिगत मोक्ष के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के उत्थान के लिए कार्य करते हैं। मुख्यमंत्री ने अंत में स्वामी हर्याचार्य जी महाराज के प्रति अपनी गहरी श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि उनका सानिध्य लंबे समय तक समाज को मार्गदर्शन देता रहेगा। इस अवसर पर अनेक संतजन, महंत और जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में श्रीमद्जगद्गुरू रामानंदाचार्य पूज्य स्वामी रामदेवेषाचार्य जी महाराज, दशरथ गद्दी के पूज्य महंत देवेन्द्र प्रसादाचार्य जी महाराज, राजकुमार दास जी महाराज, बुंदेलखंड के महंत अर्पितदास जी महाराज, जनार्दनदास जी महाराज, कृपालुदास जी महाराज, गिरीशदास जी महाराज, रामलखनदास जी महाराज, कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही, महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी, विधायक वेद प्रकाश गुप्ता सहित अत्यधिक संख्या में संत और श्रद्धालु मौजूद रहे।

संतों से भेंट कर दिगंबर अखाड़ा परंपरा को बताया संस्कृति की धरोहर, श्रद्धालुओं में दौरे को लेकर दिखी प्रसन्नता

अयोध्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को अयोध्या पहुंचे, जहां उन्होंने दिगंबर अखाड़े के पीठाधीश्वर महंत सुरेश दास महाराज का हालचाल जाना। मुख्यमंत्री ने महंत श्री के स्वास्थ्य लाभ की शुभकामनाएं देते हुए उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। दिगंबर अखाड़े पहुंचने पर मुख्यमंत्री का संतों और अखाड़ा परिवार ने पारंपरिक ढंग से स्वागत किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि महंत सुरेश दास जी का आध्यात्मिक और सामाजिक योगदान अयोध्या ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है। उनके स्वास्थ्य में निरंतर सुधार सभी के लिए सुखद संदेश है। मुख्यमंत्री ने अखाड़े में मौजूद संतों से भी भेंट की और संत परंपरा की निरंतरता को समाज की ऊर्जा और संस्कृति की धरोहर बताया।मुख्यमंत्री के इस दौरे से श्रद्धालुओं और संत समुदाय में प्रसन्नता का माहौल देखा गया।

अखिलेश यादव ने अयोध्या हार पर जताया दुख, कहा- देश में पैदा हो सकती है अस्थिरता

लखनऊ  समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शुक्रवार को भारत में नेपाल जैसी स्थिति पैदा होने की बात कही। उन्होंने सरकार और चुनाव आयोग पर वोट चोरी का आरोप लगाया और कहा कि जो पड़ोस में जो जनता करती दिख रही है, हो सकता है कि वह यहां भी करती दिखाई देगी। यही नहीं उनका कहना था कि अयोध्या के विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की जीत के पीछे भी धांधली थी। अखिलेश यादव ने कहा कि अयोध्या के चुनाव में 5000 लोग बाहर से लाए गए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की ज़िम्मेदारी है कि वोट चोरी न हो। पूरा देश जानता है कि इन्होंने रिवाल्वर निकाल कर वोट डाला गया था। उन्होंने कहा कि कुंदरकी के चुनाव में 77 फीसदी मतदान हुआ। अयोध्या के चुनाव में बाहर से लोग लाए गए। यहां वोट की डकैती हो रही है। नेपाल की तरह ही हो सकता है कि जनता सड़कों पर दिखाई दे। सिख समुदाय के एक डेलिगेशन से मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने मीडिया से बात की। उन्होंने कहा कि पंजाब में बाढ़ से बहुत नुकसान हुआ है, हमारी मांग है कि नुकसान की पूरी तरह भरपाई हो। विकास परियोजनाओं के लिए पहले पर्यावरण का ध्यान रखना चाहिए। अखिलेश यादव ने कहा कि पंचायती राज में 60 प्रतिशत कमीशन चल रहा है। एक बात साफ है- 2027 में आ रही है सपा, हमारी सरकार होगी अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार से कोई उम्मीद नहीं है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार में अंदरूनी लड़ाई चल रही है, भ्रष्टाचार पीक पर है। उन्होंने कहा कि लखनऊ को स्मार्ट सिटी में तीन नंबर पर पहुंचाने वाली एजेंसी पर एफआईआर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार जाएगी, तभी क्राइम जाएगा। उन्होंने कहा कि इस राज्य में किडनैपिंग बढ़ी है और क्राइम बढ़ा है। अखिलेश यादव ने कहा कि एक बात मैं कहने जा रहा हूं कि 2027 में सपा की सरकार आएगी। हम लोग सरकार बनाएंगे। 'हिरासत में मौतों का यूपी में बन रहा रिकॉर्ड' अखिलेश यादव ने कहा कि यूपी में हिरासत में मौतों का रिकॉर्ड बना रहा है। अब तक दूसरे लोग मारे जा रहे थे, अब उन्हें पता लग रहा होगा कि किसी अपने को खोने का दुख क्या होता है। उन्होंने गाजीपुर के सीताराम उपाध्याय की थाने में हुई पिटाई से मौत के प्रकरण की बात करते हुए कहा कि इसकी खुलकर निंदा होनी चाहिए। अखिलेश यादव ने कहा कि यह पता लगाया जाए कि आखिर इन घटनाओं के पीछे कौन है। उन्होंने कहा कि आज एक और किसी व्यक्ति ने मुख्यमंत्री आवास पर ज़हर खा लिया। यूपी के सीएम हाउस में जहर खाने का रिकॉर्ड बन रहा है। पंजाबी में लॉन्च हुआ अखिलेश यादव के लिए गाना इस दौरान अखिलेश यादव ने किसान आंदोलन के दौरान शहीद किसानों के परिजनों को सम्मानित किया। यही नहीं एक पंजाबी गीत भी अखिलेश यादव के लिए लॉन्च किया गया। इस पर अखिलेश यादव ने कहा कि इस गाने को 2027 में चलाना है। उन्होंने कहा कि सपा सरकार बनने पर सिखों के हितों का पूरा ख्याल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नेता जी ने भी सरकार में इस समुदाय से कैबिनेट मंत्री बनाया था।  

CM मोहन का बहनों को तोहफा: लाड़ली बहना योजना की 28वीं किस्त में 1.26 करोड़ खातों में पहुँचे ₹1541 करोड़

पेटलावद मध्य प्रदेश की करोड़ों लाड़ली बहनों का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार, 12 सितंबर को झाबुआ जिले के पेटलावद से लाड़ली बहना योजना की 28वीं किस्त जारी कर दी है। इस बार योजना के तहत 1.26 करोड़ महिला लाभार्थियों के खातों में 1541 करोड़ रुपए से ज्यादा भेजे गए हैं।  पेंशनधारियों को भी राहत महिला लाभार्थियों के साथ ही मुख्यमंत्री ने 53.48 लाख से ज्यादा पेंशनधारियों (pensioners) के खातों में भी 320.89 करोड़ रुपए की राशि डाली। इस कदम से बुजुर्गों और पेंशन पाने वालों की जिंदगी में आर्थिक राहत की उम्मीद जगी है। गृहिणियों को मिला सिलेंडर रीफिल सहयोग कार्यक्रम में 31 लाख से ज्यादा महिलाओं को गैस सिलेंडर (gas cylinder) रीफिलिंग के लिए 48 करोड़ रुपए की राशि ट्रांसफर की गई। यह मदद खासतौर पर गृहिणियों (housewives) को मिलेगी, जो महंगे सिलेंडर खर्च से परेशान रहती हैं। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में 345.34 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाले विकास कार्यों (development works) का शिलान्यास और लोकार्पण भी किया। इसमें सड़क (roads), शिक्षा (education), स्वास्थ्य (health) और पेयजल (drinking water) जैसी जरूरी सुविधाओं से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। दीपावली के बाद से मिलेंगे 1500 मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की है कि दीपावली के बाद से हर महिला को 1500 रुपए  दिए जाएंगे। यह राशि 2028 तक बढ़कर 3000 रुपए हो जाएगी, जो महिलाओं को आर्थिक रूप से और मजबूत बनाने में मदद करेगी। लाड़ली बहना योजना की विशेषताएं     लाड़ली बहना योजना (Ladli Behna Yojana) राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को सीधे बैंक खाते में सहायता राशि भेजी जाती है। इस बार 12 सितंबर को योजना की किस्त जारी की गई, जो आमतौर पर 10-11 तारीख को दी जाती थी। ऐसे में इस बार की राशि के आने में एक दिन का विलम्ब देखने को मिला है। एमपी लाड़ली बहना योजना की 28वीं किस्त पर एक नजर…     सीएम मोहन यादव ने 12 सितंबर को झाबुआ जिले के पेटलावद से लाड़ली बहना योजना की 28वीं किस्त जारी की। इसमें 1.26 करोड़ महिलाओं के खातों में 1541 करोड़ रुपए भेजे गए।     31 लाख से अधिक महिलाओं को गैस सिलेंडर रिफिलिंग के लिए 48 करोड़ रुपए जारी किए गए।     दीपावली के बाद हर महिला को 1500 रुपए दिए जाएंगे, जो 2028 तक बढ़कर 3000 रुपए हो जाएंगे।     लाड़ली बहना योजना का लाभ उन महिलाओं को मिलता है, जो मध्य प्रदेश की निवासी हों और जिनके परिवार में आयकर दाता या सरकारी कर्मचारी न हों। पात्रता और आवेदन प्रक्रिया लाड़ली बहना योजना का लाभ सिर्फ उन्हीं महिलाओं को मिलता है, जो मध्य प्रदेश की निवासी हों और जिनके परिवार का कोई सदस्य आयकर दाता न हो या सरकारी कर्मचारी न हो। योजना का लाभ विवाहित, तलाकशुदा, या विधवा महिलाओं को मिलता है। अगर किसी महिला को योजना से संबंधित कोई समस्या हो या सहायता राशि न मिल रही हो, तो वह 0755 2700800 हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकती है। इसके अलावा, वे लाडली बहना योजना के ऑफिशियल पोर्टल cmladlibahna.mp.gov.in पर भी जाकर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकती हैं। लाडली बहना योजना: कब म‍िलेंगे 1500 रुपये मुख्‍यमंत्री लाडली बहना योजना की 28वीं क‍िस्‍त का पैसा 1.26 करोड़ मह‍िलाओं के खाते में ट्रांसफर कर द‍िया गया है। मुख्‍यमंत्री डॉक्‍टर मोहन यादव ने झाबुआ के पेटलावद से मह‍िलाओं के खाते में 1541 करोड़ रुपये ट्रांसफर क‍िए। इस दौरान उन्‍होंने फ‍िर से दोहराया कि‍ भैया दूज के बाद मह‍िलाओं के खाते में 1500 रुपये आने लगेंगे। हेलिकॉप्टर से अस्पताल पहुंचाने की योजना गरीब व जरूरतमंद लोगों को मेडिकल इमरजेंसी के समय बड़े शहर के अस्पतालों तक पहुंचाने के लिए हेलिकॉप्टर योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत हेलिकॉप्टर से मरीज को अस्पताल पहुंचाया जाएगा। इसका पूरा खर्च सरकार उठाती है। कब मिलेंगे 1500, कैसे पहुंचेंगे 3000, सीएम ने खुद बताया     दिवाली के बाद भाई दूज के तुरंत बाद से हर महीने मिलेंगे 1500 रुपये     2026 से महिलाओं को 2000 रुपये महीना मिलेंगे     2027 से लाडली बहनों को 2500 रुपये मिलना शुरू हो जाएगा     2028 से लाडली बहनों की राशि को बढ़ाकर 3000 रुपये कर दिया जाएगा LPG गैस रिफिल का पैसा भी ट्रांसफर लाडली बहना योजना और सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के अलावा 31 लाख से अधिक बहनों को एलपीजी सिलेंडर रीफिलिंग की 48 करोड़ रुपये भी भेज दिए गए हैं। झाबुआ जिले के पेटलावद में 345.34 करोड़ के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन किया। पेंशनधारकों के खाते में भी पहुंचा पैसा लाडली बहना योजना के अलावा सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के तहत 53.48 लाख लाभार्थियों के खाते में 320.89 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए हैं। प्रदेश में बुजुर्गों, दिव्यांगों व महिलाओं के लिए कई तरह की पेंशन योजना चलाई जा रही हैं। लाडली बहना की 28वीं क‍िस्‍त ट्रांंसफर, ऐसे चेक करें स्‍टेटस मुख्‍यमंत्री लाडली बहना योजना की 28वीं क‍िस्‍त जारी कर दी गई है। अगर आपके मोबाइल पर मैसेज नहीं आया है तो ऑफ‍िश‍ियल पोर्टल https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाकर आवेदन एवं भुगतान की स्‍थ‍ित‍ि पर जाकर चेक कर सकते हैं। लाडली बहना योजना की 28वीं क‍िस्‍त जारी, चेक करें मोबाइल लाडली बहना योजना की 28वीं क‍िस्‍त का पैसा ट्रांसफर कर द‍िया गया है। मुख्‍यमंत्री मोहन यादव ने स‍िंगल क्‍ल‍िक के माध्‍यम से 1541 करोड़ रुपये मह‍िलाओं के खाते में भेज द‍िए हैं। Ladli Behna Yojana: 25 मार्च से शुरू हुए थे फॉर्म भरना लाडली बहना योजना की शुरुआत 25 मार्च, 2023 से हुई थी। इसके बाद बहुत सारे नाम योजना से हटाए भी गए। वर्तमान में 1.26 करोड़ महिलाओं को इस योजना का पैसा मिल रहा है। हालांकि 2023 से ही नए रजिस्ट्रेशन बंद पड़े हैं। लाडली बहना योजना: अंतिम सूची में नाम है या नहीं, ऐसे चेक करें लाडली बहना योजना की 28वीं किस्त का पैसा किसी भी समय खाते में आने वाले हैं। आपका नाम अंतिम सूची में है या हट गया है, इसका पता आप ऑनलाइन कर सकते हैं। ऑफिशियल पोर्टल पर आपको अंतिम सूची के टैब पर क्लिक करना होगा। … Read more

रामलला की शरण में मॉरीशस सरकार, प्रधानमंत्री डॉ. नवीन चंद्र रामगुलाम का भव्य स्वागत

श्रीरामलला के दरबार में प्रधानमंत्री रामगुलाम ने टेका मत्था रामलला की शरण में मॉरीशस सरकार, प्रधानमंत्री डॉ. नवीन चंद्र रामगुलाम का भव्य स्वागत  एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया अभिनंदन, ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक कार्यक्रमों से गूंजी अयोध्या  भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पहुंचे श्रीराम जन्मभूमि मंदिर  रामलला की आरती उतारी, मंदिर निर्माण कार्यों का किया अवलोकन अयोध्या  प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या शुक्रवार को एक विशेष अवसर की साक्षी बनी, जब मॉरीशस के प्रधानमंत्री डॉ. नवीन चंद्र रामगुलाम अपनी पत्नी वीना रामगुलाम और करीब 30 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ यहां पहुंचे। प्रधानमंत्री रामगुलाम ने सबसे पहले भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर में पत्नी के साथ विधि-विधान से दर्शन-पूजन कर लोककल्याण की कामना की। वह भूटान के प्रधानमंत्री के बाद दूसरे राष्ट्राध्यक्ष बने, जिन्होंने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में रामलला के दर्शन-पूजन किए। दोपहर करीब 12 बजे महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री अपनी पत्नी वीना रामगुलाम और 30 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ पहुंचे। मुख्यमंत्री योगी बने स्वागत-अभिनंदन के सूत्रधार एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं मौजूद रहे और उन्होंने प्रधानमंत्री का औपचारिक स्वागत किया। योगी ने फूलों का गुलदस्ता और स्मृति चिह्न भेंट कर ‘अतिथि देवो भवः’ की परंपरा निभाई। एयरपोर्ट परिसर में रेड कार्पेट बिछाकर, मंत्रोच्चारण और पारंपरिक कलश-आरती से प्रधानमंत्री का अभिनंदन किया गया। इस दौरान ढोल-नगाड़ों और शंखनाद की गूंज ने वातावरण को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया। रामलला के दरबार में भावविभोर प्रधानमंत्री एयरपोर्ट से निकलने के बाद प्रधानमंत्री का काफिला भारी सुरक्षा घेरे के बीच सीधे श्रीराम जन्मभूमि मंदिर पहुंचा। वहां उन्होंने पत्नी के साथ रामलला की आरती उतारी और लंबे समय तक प्रभु का दर्शन करते रहे। शीश नवाकर भगवान राम से दोनों देशों के रिश्तों की मजबूती का आशीर्वाद मांगा। करीब आधा घंटे तक परिसर में रहकर उन्होंने मंदिर निर्माण कार्यों का अवलोकन किया। इस दौरान कई बार उनके मुख से “जय श्रीराम” के उद्घोष गूंजे। पीएम का आगमन सांस्कृतिक एकता का प्रतीक: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मॉरीशस के प्रधानमंत्री का यह दौरा भारत और मॉरीशस के बीच सांस्कृतिक एकता का जीवंत प्रतीक है। वहीं, प्रधानमंत्री डॉ. रामगुलाम ने भी अयोध्या की पवित्र धरती पर आने पर अपनी गहरी प्रसन्नता व्यक्त की और भगवान राम के प्रति आस्था प्रकट की। राम मंदिर परिसर में हुआ विशेष आयोजन राम मंदिर परिसर में प्रधानमंत्री डॉ. नवीन चंद्र रामगुलाम और उनके प्रतिनिधिमंडल के लिए टाटा कंपनी की ओर से मंदिर निर्माण से जुड़ी एक विशेष लघु फिल्म प्रदर्शित की गई। करीब दो मिनट की इस प्रस्तुति में मंदिर की भव्यता, शिल्पकला और निर्माण की अद्भुत झलक दिखाई गई। फिल्म की जानकारी और विवरण सीडीओ कृष्ण कुमार सिंह ने विस्तार से प्रस्तुत किया। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं प्रधानमंत्री को राम मंदिर का मॉडल भेंट कर सम्मानित किया। वहीं, प्रधानमंत्री की पत्नी वीना रामगुलाम को अंगवस्त्र विशेष सम्मान प्रदान किया गया। इस क्षण ने पूरे माहौल को और अधिक गरिमामय बना दिया। भारत-मॉरीशस संबंधों की पृष्ठभूमि भारत और मॉरीशस के बीच संबंध सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गहराई से जुड़े हुए हैं। मॉरीशस की आबादी का बड़ा हिस्सा भारतीय मूल का है और वहां रामायण, भगवान राम और भारतीय परंपराओं के प्रति विशेष आस्था देखी जाती है। मॉरीशस के त्योहार, साहित्य और सांस्कृतिक जीवन में रामकथा आज भी जीवंत है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री रामगुलाम का यह अयोध्या दौरा दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने वाला माना जा रहा है। एयरपोर्ट पर अतिथि देवो भव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद प्रधानमंत्री का स्वागत किया, रेड कार्पेट, तिलक, पुष्पवर्षा और पारंपरिक आरती से हुआ अभिनंदन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों व ढोल-नगाड़ों ने माहौल को सजा दिया था। वहीं प्रधानमंत्री रामगुलाम भी अपने स्वागत से भावविभोर होकर इसे अविस्मरणीय बताया। तगड़ी रही सुरक्षा व्यवस्था अयोध्या में प्रधानमंत्री के आगमन पर तगड़े सुरक्षा इंतजाम। एयरपोर्ट से लेकर मंदिर तक चप्पे-चप्पे पर पुलिस व सुरक्षा बल तैनात, सीसीटीवी से पूरे मार्ग की निगरानी। मंदिर परिसर में पुलिस बल और एटीएस की टीमों ने कमान संभाल रखी थी।

देश में लगाए जाएंगे 1.25 करोड़ पौधे, यूपी को मिला 15 लाख पौधरोपण का लक्ष्य

सेवा पर्व: यूपी में 15 लाख पौधरोपण कराएगी योगी सरकार  17 सितंबर से दो अक्टूबर तक मनाया जाएगा सेवा पर्व  देश में लगाए जाएंगे 1.25 करोड़ पौधे, यूपी को मिला 15 लाख पौधरोपण का लक्ष्य  17 सितंबर को प्रदेश के 34 नगर वन में कम से कम होंगे 100-100 पौधरोपण  पर्यावरण संरक्षण जागरूकता अभियान, वर्षा जल संचयन समेत अनेक अभियान भी चलाए जाएंगे हर जनपद में प्रभागीय वनाधिकारी बनाए गए नोडल अधिकारी लखनऊ 17 सितंबर से दो अक्टूबर तक सेवा पर्व मनाया जाएगा। इस दौरान देश में 1.25 करोड़ पौधे लगाए जाएंगे। इसमें से योगी सरकार प्रदेश में 15 लाख पौधरोपण कराएगी। 17 सितंबर को पर्व के शुभारंभ पर प्रदेश के 34 नगर वन में कम से कम 100-100 पौधरोपण कराया जाना अनिवार्य है। इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण जागरूकता अभियान, वर्षा जल संचयन समेत अनेक अभियान भी चलाए जाएंगे। हर जनपद में प्रभागीय वनाधिकारी इसके नोडल अफसर होंगे।   जनसहभागिता से सभी 75 जनपदों में होगा आयोजन   प्रमुख सचिव (वन-पर्यावरण) अनिल कुमार ने बताया कि यूपी के लिए 15 लाख पौधरोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने मुख्यालय के अधिकारियों समेत सभी प्रभागीय वनाधिकारियों को निर्देशित किया कि यूपी के सभी 75 जनपदों में जनसहभागिता के माध्यम से पौधरोपण कराया जाए। इसके लिए प्रजातियों का चयन कर लिया जाए। सभी पौधरोपण स्थलों के फोटोग्राफ व एमआईएस डेटा के साथ Meri Life पोर्टल पर अपलोड किया जाए। जिला वृक्षारोपण समिति अन्य विभागों से सामंजस्य स्थापित करते हुए पौधों की सुरक्षा व रखरखाव भी सुनिश्चित करेगी।  34 नगर वन-वाटिका में कम से कम 100-100 पौधे लगाना अनिवार्य  पौधरोपण महाभियान-2025 के मिशन निदेशक दीपक कुमार ने बताया कि सेवा पर्व के शुभारंभ पर 17 सितंबर को यूपी के 34 नगर वन-वाटिका में कम से कम 100-100 पौधे लगाना अनिवार्य है।  इसके अतिरिक्त विभाग के सभी कार्यालयों, वन निगम के समस्त डिपो में स्वच्छता तथा प्राणि उद्यान व सफारी में सिंगल यूज प्लास्टिक बैन करने को लेकर भी अभियान चलेगा। विभिन्न पक्षी अभयारण्यों में सफाई अभियान, पर्यावरण संरक्षण जागरूकता, वर्षा जल संचयन व जल स्रोत के संरक्षण पर जागरूकता अभियान भी चलेगा। प्रत्येक प्रभाग में नर्सरी एक्शन प्लान पर कार्यशाला होगी। जिला स्तर पर विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत को लेकर प्रबुद्ध वर्ग संवाद में वन-वन्यजीव संरक्षण, हरीतिमा संवर्धन, जैव विविधता आदि विषयों पर डीएफओ प्रतिभाग भी करेंगे। जनपदीय मेले व प्रदर्शनियों में वन विभाग का भी सहयोग रहेगा। आयोजन को लेकर तैयारी की जा रही है।  यूपी को मिला 15 लाख पौधरोपण का लक्ष्य  सेवा पर्व के अंतर्गत 1.25 करोड़ पौधरोपण किया जाना है। इसमें उत्तर प्रदेश को 15 लाख पौधरोपण के लक्ष्य मिला है।  सर्वाधिक लक्ष्य वाले 10 राज्य  ओडिशा- 20 लाख  उत्तर प्रदेश- 15 लाख  असम- 11.50 लाख  गुजरात-11 लाख  छत्तीसगढ़-11 लाख  मध्य प्रदेश- 8 लाख  महाराष्ट्र- 7 लाख  आंध्र प्रदेश- 7 लाख  राजस्थान- 7 लाख  बिहार- 5 लाख

तीन साल में यूपीआईटीएस ने आंकड़ों और प्रभाव में खुद को दोगुना से ज्यादा किया मजबूत

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो : तीन साल में बढ़ा आकार, बढ़ी पहचान तीन साल में यूपीआईटीएस ने आंकड़ों और प्रभाव में खुद को दोगुना से ज्यादा किया मजबूत  2023 से 2025 तक इस मेगा आयोजन में प्रदर्शकों और विज़िटर्स की संख्या में हुआ भारी इजाफा  यूपीआईटीएस में विदेशी खरीदारों की बढ़ती उपस्थिति ने उत्तर प्रदेश को दिलाई वैश्विक पहचान प्रदेश की औद्योगिक, कृषि और सांस्कृतिक ताकत को दुनिया के सामने रखने का मंच बना यूपीआईटीएस  हर साल बढ़ रही प्रदर्शकों, खरीदारों और विज़िटर्स की संख्या राज्य के औद्योगिक परिदृश्य के विस्तार का दे रही संकेत  यूपीआईटीएस 2025 में 400 से बढ़कर 500 विदेशी खरीदारों की भागीदारी का रखा गया है लक्ष्य 25 से 29 सितंबर के बीच होने वाले मेगा आयोजन के लिए क्यूआर कोड आधारित एप से होगा स्मार्ट रजिस्ट्रेशन  लखनऊ  उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) ने महज़ तीन वर्षों में खुद को देश और दुनिया के व्यापार मानचित्र पर स्थापित कर लिया है। 2023 में हुए पहले आयोजन से लेकर 2025 के तीसरे संस्करण तक यह शो हर साल आकार, प्रभाव और भागीदारी के लिहाज से और भव्य होता जा रहा है। प्रदर्शकों, विज़िटर्स और विदेशी खरीदारों की लगातार बढ़ती संख्या इस बात का प्रमाण है कि यूपी अब निवेश, व्यापार और वैश्विक पहचान के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर शुरू हुए यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का तीसरा संस्करण 25 से 29 सितंबर के बीच ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में होने जा रहा है। यह केवल प्रदर्शनी नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश की औद्योगिक, कृषि और सांस्कृतिक ताकत को दुनिया के सामने रखने का मंच बन गया है। हर साल इसमें प्रदर्शकों, खरीदारों और विज़िटर्स की बढ़ती संख्या यह दर्शाती है कि राज्य का औद्योगिक परिदृश्य किस तरह विस्तार पा रहा है। 2023 : प्रथम संस्करण से मिली नई दिशा उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS) की शुरुआत वर्ष 2023 में हुई। इसका उद्घाटन महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया था। यह आयोजन राज्य के उद्योग जगत के लिए एक ऐतिहासिक कदम साबित हुआ। इसमें करीब 70 हजार B2B विज़िटर्स पहुंचे, जिनमें उद्योग और कारोबार जगत के बड़े नाम शामिल थे। 2 लाख 37 हजार बी2सी विज़िटर्स ने घरेलू बाजार के प्रति गहरी दिलचस्पी दिखाई। वहीं, 1914 प्रदर्शक (एग्जिबिटर्स) ने अपने उत्पादों और सेवाओं का प्रदर्शन किया। 400 से अधिक विदेशी खरीदार (फॉरेन बायर्स) ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार के नए अवसरों को तलाशा। इस पहले ही आयोजन ने यूपी के उत्पादों को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई और स्थानीय उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जोड़ने का अवसर दिया। 2024 : दूसरे संस्करण में और भी भव्य आयोजन पहले संस्करण की सफलता ने 2024 के आयोजन को और बड़े पैमाने पर पेश करने की राह दिखाई। इस बार उद्घाटन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने किया। आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि यूपीआईटीएस का प्रभाव और दायरा लगातार बढ़ रहा है। इस दौरान, बी2बी विज़िटर्स की संख्या 1 लाख से अधिक रही, यानी लगभग दोगुनी बढ़त। वहीं, बी2सी विज़िटर्स की संख्या 3 लाख के पार पहुंच गई। 2122 प्रदर्शकों ने हिस्सा लिया, जो पिछले साल से बढ़ोतरी का स्पष्ट संकेत है। इसके अतिरिक्त, इस मेगा इवेंट में 350 से अधिक विदेशी खरीदार शामिल हुए, जिनकी मौजूदगी ने राज्य के कारोबार को और अधिक अंतरराष्ट्रीय अवसर दिए। दूसरे संस्करण ने यह साबित कर दिया कि यूपीआईटीएस अब केवल राष्ट्रीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार का प्रमुख मंच बन चुका है। 2025 : तीसरे संस्करण से नई ऊंचाइयों की ओर अब 2025 का तीसरा संस्करण आयोजित होने जा रहा है और यह पिछले दोनों आयोजनों से कहीं ज्यादा भव्य और बड़ा होने वाला है। आयोजकों ने जिन लक्ष्यों को सामने रखा है, वे इसकी बढ़ती ताकत को स्पष्ट करते हैं। इस बार 5 लाख से अधिक कुल विज़िटर्स आने की उम्मीद है। इनमें 2.5 लाख बी2बी विज़िटर्स और 3 लाख बी2सी विज़िटर्स शामिल होंगे। प्रदर्शकों की संख्या बढ़कर 2500 से अधिक हो जाएगी। 500 से अधिक विदेशी खरीदार आने की संभावना है, जिनके लिए अलग से समर्पित मीटिंग हॉल बनाए गए हैं। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया अब क्यूआर कोड आधारित मोबाइल एप से होगी, जिससे पारदर्शिता और सुविधा सुनिश्चित होगी। तीसरा संस्करण इस बात का प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश अब अंतरराष्ट्रीय व्यापार मानचित्र पर अपनी अलग और मजबूत पहचान बनाने की ओर तेजी से बढ़ रहा है।    

नई जनगणना से बदलेंगे यूपी के शहर, शहरी सीमा का विस्तार अब पक्का

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की शहरी सीमा अब फिलहाल नहीं बढ़ाई जाएगी। जनगणना होने के बाद ही शहरी सीमाओं का विस्तार करने और नए निकायों के बनाने पर सहमति बनी है। जनगणना कराने से पहले शहरी और ग्रामीण सीमाओं का दायरा तय किया जाता है। इसके आधार पर शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की जनगणना कराई जाती है। जनगणना निदेशालय ने नगर विकास विभाग को पत्र भेजकर सीमाओं, वार्डों और मलिन बस्तियों के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी है। इसके आधार पर जनगणना का प्रारूप तय किया जाएगा। प्रदेश में मौजूदा समय 762 नगर निकाय हैं। निकायों को ही शहरी क्षेत्र माना जाता है। इसमें मौजूदा समय 22 फीसदी आबादी रहती है। नगर विकास विभाग शहरी सीमा का विस्तार करते हुए इस आबादी को 30 से 35 फीसदी करना चाहता है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के लिए शहरी सीमा बढ़ाने की सिफारिश की गई है। नगर विकास विभाग सीमा विस्तार करना चाहता था, लेकिन बताया जा रहा है कि जनगणना के चलते इस प्रक्रिया को फिलहाल रोक दिया गया है। बताया जा रहा है कि नई जनगणना के बाद शहरी सीमा का विस्तार किया जाएगा। जनगणना निदेशालय ने नगर विकास विभाग को पत्र भेजकर शहरी सीमा के बारे में पूरी जानकारी मांगी है। नई जनगणना के लिए एक जनवरी 2010 के बाद नगर क्षेत्र की सीमा में विस्तार या किसी प्रकार का बदलाव की पूरी जानकारी मांगी गई है। इसमें निकायों में स्थित वार्डों, सीमा विस्तार व अन्य बदलावों की सूचना, वार्डों व उनमें आने वाले मुहल्लों, कालोनियों की सूची और सीमाओं को चिह्नांकन कराने, नगर समूह व वाह्य विकास की पहचान कराने के साथ ही मलिन बस्तियों की सूची मांगी गई है। जनगणना निदेशालय के पत्र के बाद निदेशक स्थानीय निकाय अनुज कुमार झा ने इस संबंध में निकायों को पत्र भेजा है। इसमें निकायवार पूरी जानकारी विस्तृत रिपोर्ट के साथ देने को कहा गया है। इससे यह तय माना जा रहा है कि निकायों की सीमा विस्तार फिलहाल के लिए रोक दी गई है। यह माना जा रहा है कि नई जनगणना का काम पूरा होने के बाद अब विस्तार किया जाएगा।  

चुनावी विवाद बढ़ा: सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक पार्टियों के रजिस्ट्रेशन को लेकर चुनाव आयोग को नोटिस जारी

पटना  बिहार चुनाव से पहले चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है. राजनीतिक दलों के रजिस्ट्रेशन और रेगुलेशन पर कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस भेजा है. मामले पर कोर्ट ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा है. बता दें कि कोर्ट में एक याचिका दाखिल हुई थी. इसमें याचिकाकर्ता ने कोर्ट से धर्मनिरपेक्षता, पारदर्शिता और राजनीतिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक दलों के रजिस्ट्रेशन और रेगुलेशन के लिए नियम बनाने के निर्देश देने की मांग की है. याचिका दाखिल होते ही सुप्रीम कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लिया है. 4 सप्ताह में मांगा जवाब याचिका को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है. इसके लिए कोर्ट ने आयोग को 4 सप्ताह का समय दिया है. याचिका में केंद्र को राजनीति में भ्रष्टाचार, जातिवाद और अपराधीकरण के खतरे को कम करने के लिए कदम उठाने का निर्देश देने की भी मांग की गई है.   राजनीतिक दल बनेंगे पक्षकार सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को गंभीरता से लिया है. याचिका के बाद कोर्ट ने चुनाव आयोग और राजनीतिक पार्टियों पर सख्ती दिखाई है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा है कि मामले में सभी रजिस्टर्ड राजनीतिक दलों को पक्षकार बनाया जाए. कोर्ट के इस रुख से साफ है कि राजनीतिक दलों के रजिस्ट्रेशन और रेगुलेशन को लेकर काफी सजग है. क्यों दाखिल हुई याचिका? एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय ने याचिका दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि 13 जुलाई को इनकम टैक्स ने दो राजनीतिक दलों इंडियन सोशल पार्टी और युवा आत्म निर्भर दल पर रेड डाली, तो 500 करोड़ की ब्लैक मनी का पता चला। याचिका में तर्क दिया गया है कि ऐसे में फर्जी राजनीतिक दल न केवल लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं, बल्कि कट्टर अपराधियों, अपहरणकर्ताओं, मादक पदार्थों के तस्करों और मनी लॉन्ड्रिंग करने वालों से भारी मात्रा में धन लेकर उन्हें पदाधिकारी नियुक्त करके देश की छवि भी खराब कर रहे हैं।  

लाल फीताशाही के जाल में फंसी वीर सौरभ गर्ग की स्मृति, HHRC ने उठाया सवाल

हरियाणा हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने जींद के पिल्लुखेड़ा के शहीद सौरभ गर्ग को सम्मान दिलाने में हुई देरी को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही करार दिया है। आयोग ने शुक्रवार को सुनवाई के बाद मुख्य सचिव हरियाणा को छह सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं। 8 दिसंबर, 2012 को सर्द सुबह पिल्लुखेड़ा में गैस सिलेंडर रिसाव से लगी आग में फंसे 11 लोगों की जान बचाते हुए सौरभ गर्ग ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। पड़ोसी होने के बावजूद उन्होंने सीढ़ी लगाकर सभी महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। जब सभी सुरक्षित हो गए तभी सिलेंडर में विस्फोट हुआ और सौरभ लपटों में समा गए। आयोग ने इस बलिदान को मानवता के सर्वोच्च आदर्श का प्रतीक बताया। शौर्य की इस घटना की संस्तुति उपायुक्त जींद ने एक सप्ताह में ही गृह विभाग को भेज दी थी। इसके बाद 2012 से 2024 तक कई पत्राचार हुए। विधानसभा में शोक प्रस्ताव और प्रधानमंत्री कार्यालय के पत्र तक भेजे गए। लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते नामांकन समय पर आगे नहीं बढ़ा। परिणामस्वरूप सौरभ राष्ट्रीय जीवन रक्षा पुरस्कार से वंचित रह गए। आयोग की कड़ी टिप्पणी आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) ललित बत्रा की पीठ ने कहा, ‘यह देरी पूरी तरह प्रशासनिक लापरवाही और उदासीनता का परिणाम है। इससे परिवार और समाज दोनों के साथ अन्याय हुआ।’ आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल 5 लाख की आर्थिक सहायता बलिदान के सम्मान का विकल्प नहीं हो सकती। सरकार को दिए ये निर्देश     मुख्य सचिव छह सप्ताह में देरी की जिम्मेदारी तय करें।     गृह मंत्रालय से विशेष छूट लेकर राष्ट्रीय पुरस्कार हेतु नाम भेजा जाए।     राज्य सरकार अपने स्तर पर सौरभ गर्ग को साहसिक पुरस्कार देने पर विचार करे।     मुख्यमंत्री स्वयं संज्ञान लेकर सर्वोच्च स्तर पर कार्रवाई सुनिश्चित करें। स्मारक रखरखाव पर भी फटकार शिकायतकर्ता पिता चंद्रभान ने आयोग को बताया कि शहीद सौरभ गर्ग स्मारक की देखरेख नहीं हो रही। इस पर आयोग ने मार्केट कमेटी पिल्लुखेड़ा को सफाई, लाइटिंग, बागवानी, पानी की सुविधा, बेंच और नियमित निरीक्षण की व्यवस्था करने के आदेश दिए। आयोग ने कहा कि सौरभ गर्ग का बलिदान केवल उनके परिवार के लिए ही नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका संदेश है कि साहस, मानवता और निस्वार्थ सेवा कभी अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।