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बिहार में जमीन के रिकॉर्ड होंगे दुरुस्त, 90 लाख जमाबंदियों की त्रुटियां होंगी दूर

पटना भू-अभिलेखों को अधिक शुद्ध, पारदर्शी और अद्यतन बनाने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का जमाबंदी अद्यतीकरण एवं नामांतरण उत्तराधिकार विशेष अभियान मंगलवार को शुरू हो गया। अभियान 31 अक्तूबर तक मिशन मोड में चलेगा। अभियान के तहत लगभग 90 लाख जमाबंदियों में सुधार होगा। राज्य में कुल साढ़े चार करोड़ जमाबंदी हैं। यानी हर पांचवें जमाबंदी में किसी न किसी तरह की त्रुटि है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों, समाहर्ताओं और बंदोबस्त पदाधिकारियों को पत्र जारी कर अभियान को समय से पूरा करने का निर्देश दिया है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि जमाबंदी में रैयत का नाम, पिता का नाम, खाता-खेसरा, रकबा, लगान अथवा अन्य विवरण मूल अभिलेख से अलग पाए जाने पर उसे दुरुस्त किया जाए। शून्य रकबा, शून्य लगान तथा मिसिंग सूचनाओं को भी अभियान के दौरान ठीक किया जाएगा। डिजिटाइज्ड जमाबंदी को मूल जमाबंदी पंजी की स्कैन प्रति से मिलाकर त्रुटियों का सुधार करने के साथ-साथ मृत जमाबंदीदारों के वैध उत्तराधिकारियों के नाम से उत्तराधिकार नामांतरण की कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने कहा है कि जमीन से जुड़े अभिलेखों में एक भी त्रुटि आम आदमी के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है। विधिसम्मत समाधान जरूरी: दिलीप जायसवाल राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि मृत जमाबंदीदारों के नाम पर वर्षों से चली आ रही जमाबंदियों का भी समाधान जरूरी है। वैध उत्तराधिकारियों की पहचान कर नियमानुसार नामांतरण होगा। बता दें कि मृत जमाबंदीदारों की पहचान के बाद राजस्व कर्मचारी वंशावली तैयार करेंगे। डीएम और कमिश्नर स्तर पर अभियान की निगरानी होगी। सीओ रोज रिपोर्ट भूमि सुधार उप-समाहर्ता और अपर समाहर्ता को देंगे। विभाग भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा करेगा। यह होता है नुकसान ● जमीन की खरीद-बिक्री और निबंधन में परेशानी ● नाम और जमाबंदी में अंतर होने पर रजिस्ट्री पर रोक ● किसान क्रेडिट कार्ड या जमीन पर लोन लेने में परेशानी ● नाम मेल नहीं खाने से हजारों किसान योजना से वंचित यह होगा लाभ ● आम जनता को दाखिल-खारिज, रजिस्ट्री और लोन में राहत ● भूमि विवादों में कमी आने से न्यायालयों पर बोझ कम होगा ● जमाबंदी साफ होगी तो सर्वे की गति तेज होगी और खतियान सही बनेगा

छत्तीसगढ़ में सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान की प्रगति तेज

छत्तीसगढ़ में सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान की प्रगति तेज मुख्य सचिव ने की कल्याणकारी योजनाओं के शत-प्रतिशत क्रियान्वयन की समीक्षा रायपुर  छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के अंतिम व्यक्ति और प्रत्येक पात्र परिवार तक जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से शुरू किए गए महत्वाकांक्षी सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान की प्रगति को लेकर आज उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। मुख्य सचिव ने इस दौरान सुघ्घर छत्तीसगढ़ डैश-बोर्ड पर दर्ज योजनाओं के क्रियान्वयन और पात्र हितग्राहियों को लाभान्वित किए जाने की चल रही कार्रवाई की विस्तार से समीक्षा की। डैश-बोर्ड के माध्यम से पारदर्शिता और निगरानी       सुघ्घर छत्तीसगढ़ ग्रामीण योजना के तहत शासन की विभिन्न योजनाओं के सभी पात्र हितग्राहियों को लाभान्वित करने के लिए एक विशेष राज्य-स्तरीय डैश-बोर्ड तैयार किया गया है। इस डैश-बोर्ड पर राज्य एवं केंद्र शासन की हितग्राही मूलक योजनाओं के सर्वेक्षित हितग्राहियों की सूची दर्ज है। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि इस राज्य-स्तरीय डैश-बोर्ड में शासन की सभी योजनाओं की जिलेवार संतृप्ति का स्पष्ट विवरण होना चाहिए, ताकि पारदर्शिता और त्वरित गति से योजनाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। प्रमुख योजनाओं की समीक्षा        बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने निम्नलिखित प्रमुख योजनाओं के संतृप्तिकरण की स्थिति पर अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली। प्रधानमंत्री किसान योजना एवं मृदा स्वास्थ्य कार्ड, राशन कार्ड एवं मुफ्त राशन वितरण, जॉब कार्ड एवं प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), महतारी वंदन योजना, कौशल विकास कार्यक्रम, प्रधानमंत्री जन-धन योजना व अन्य हितग्राही मूलक योजनाओं के साथ ही, भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा आयोजित बैठक के कार्यवाही विवरण के अनुसार संतृप्ति अभियान की प्रगति, ग्रेन्यूल आंकड़ों, बस्तर संभाग के अंतर्गत संतृप्तिकरण, नियद नेल्ला नार-2.0 और सुघ्घर छत्तीसगढ़ पोर्टल में राशन कार्ड के आधार पर हितग्राहियों की सूची की भी गहन समीक्षा की गई।        इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अंकित आनंद, सुशासन एवं अभिसरण और सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के संयुक्त सचिव मयंक अग्रवाल सहित पंचायत एवं ग्रामीण विकास और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

भगवंत मान के ‘नकली पगड़ी’ तंज पर भड़के नायब सैनी, गुरुओं और पंजाब की जनता से माफी की मांग

चंडीगढ़  पंजाब में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भाजपा के लिए अहम राजनीतिक चेहरा बनते जा रहे हैं। पंजाब में उनका लगातार दौरा, सिर पर सजी दस्तार और पंजाबी भाषा में मतदाताओं से संवाद अब मात्र सियासी सक्रियता नहीं रह गया, बल्कि राजनीति में पहचान और प्रतीक की बहस का हिस्सा बन गया है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने नायब सिंह सैनी की पगड़ी को ‘नकली’ बताकर एक अलग ही मुद्दे को हवा दे दी है, जिस पर अब दोनों दल आमने-सामने हो गए। नायब ने भी अपनी दस्तार को गुरुओं के सम्मान से जोड़ते हुए भगवंत मान पर पलटवार किए हैं। नायब सैनी जब पंजाब पहुंचते हैं तो उनका अंदाज स्थानीय रंग में नजर आता है। सिर पर पगड़ी और जुबान पर पंजाबी के जरिए वे पंजाबियों के बीच राजनीतिक संवाद कायम करने की कोशिश करते हैं। भाजपा के लिए यह पड़ोसी राज्य में नायब सैनी की स्वीकार्यता बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है। भगवंत मान ने इसी रणनीति पर निशाना साधा है। इस पूरे विवाद ने फिलहाल पंजाब की चुनावी सियासत में एक नया सवाल खड़ा कर दिया है- क्या पंजाब की राजनीति में पगड़ी सिर्फ पहचान का प्रतीक रहेगी या आने वाले चुनाव में यह राजनीतिक दावे और जवाबी दावों का हथियार भी बनेगी। भगवंत मान ने आरोप लगाया था कि नायब सैनी अपनी गाड़ी में पगड़ी रखते हैं और चंडीगढ़ व पंचकूला से उसे सिर पर रखकर पंजाब पहुंचते हैं। उन्होंने तंज कसा कि शायद सैनी को लगता है कि ‘नकली पगड़ी’ पहनकर वे पंजाबियों का दिल जीत लेंगे या कोई राजनीतिक फायदा हासिल कर लेंगे। मान का यह हमला दरअसल सैनी के पंजाब दौरे और स्थानीय पहचान के साथ उनके जुड़ाव की कोशिश पर सीधा राजनीतिक सवाल है। भगवंत मान के बयान पर नायब सैनी ने बेहद तीखा पलटवार किया है। उन्होंने पगड़ी को राजनीतिक पहनावा मानने की बजाय इसे सिख गुरुओं की परंपरा, सम्मान और लोगों के स्वाभिमान से जोड़ दिया। सैनी ने कहा कि पगड़ी गुरु रूप है। भगवंत मान ने दस्तार को नकली पगड़ी कहकर जनता का अपमान किया है। नायब सैनी ने दो कदम आगे बढ़ते हुए भगवंत मान से माफी मांगने की मांग कर डाली। उन्होंने कहा कि अगर मान ने दस्तार को ‘नकली पगड़ी’ कहा है तो उन्हें उस पवित्र स्थान पर जाकर माफी मांगनी चाहिए, जहां गुरुओं ने इस दस्तार को सजाया था। मान को पंजाब के लोगों से भी माफी मांगनी चाहिए। सैनी ने गुरुओं के बलिदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी कुर्बानियों की वजह से ही समाज और देश आज इस मुकाम पर है। पगड़ी की राजनीति पर इस तरह बदला माहौल यह पलटवार सैनी के लिए सिर्फ अपने ऊपर लगे आरोप का जवाब नहीं है। उन्होंने विवाद को धार्मिक और भावनात्मक प्रतीक से जोड़कर इसकी राजनीतिक जमीन ही बदल दी है। जहां मान का निशाना सैनी के ‘पंजाबी अंदाज’ पर था, वहीं सैनी ने जवाब में दस्तार के सम्मान को केंद्र में ला दिया है। मान का हमला भाजपा के दावे को चुनौती देने की कोशिश पंजाब में भाजपा लंबे समय से अपने राजनीतिक आधार का विस्तार करने की कोशिश कर रही है। हरियाणा भाजपा के प्रभारी डॉ. सतीश पुनिया को पंजाब भाजपा का नया प्रभारी बना दिया गया है। वे भी पगड़ी पहनकर पंजाब में निकल पड़े हैं। ऐसे में नायब सिंह सैनी का लगातार पंजाब दौरा पार्टी की रणनीति में खास महत्व रखता है। भाजपा इस कनेक्ट को राजनीतिक पूंजी में बदलना चाहती है। यही वजह है कि सैनी की पगड़ी अब उनके व्यक्तिगत पहनावे से आगे निकलकर राजनीतिक संदेश बन चुकी है। दूसरी ओर, भगवंत मान के लिए चुनौती यह है कि भाजपा पंजाब में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए ऐसे चेहरों और मुद्दों को सामने ला रही है, जो प्रदेश की भाषा और संस्कृति से जुड़ाव का दावा करते हैं। मान का हमला भाजपा के इसी राजनीतिक दावे को चुनौती देने की कोशिश है।

विद्यालयों में सुरक्षित और समावेशी माहौल पर जोर, हेल्थ दूत व प्रधानाध्यापकों को मिला प्रशिक्षण

 हजारीबाग हजारीबाग के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में विद्यालय स्वास्थ्य एवं कल्याण कार्यक्रम के तहत जेंडर विषय पर दो दिवसीय जिला स्तरीय गैर-आवासीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला का उद्देश्य विद्यालयों में जेंडर से जुड़े विषयों की समझ को मजबूत करना, संवेदनशीलता बढ़ाना और विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित, समान एवं समावेशी शैक्षणिक वातावरण तैयार करना रहा. इसमें जिले के चयनित 50 विद्यालयों के हेल्थ दूत, प्रधानाध्यापक और जिला स्तरीय साधनसेवियों (डीआरजी) ने भाग लिया. दो चरणों में आयोजित हुई कार्यशाला कार्यशाला का पहला चरण 15 सितंबर 2026 को आयोजित हुआ, जिसमें 50 विद्यालयों के स्वास्थ्य एवं आरोग्य दूत और जिला स्तरीय साधनसेवियों ने सहभागिता की. दूसरे चरण में 16 सितंबर को इन्हीं विद्यालयों के प्रधानाध्यापक और प्रभारी प्रधानाध्यापकों के लिए विशेष सत्र आयोजित किया गया. दोनों चरणों में प्रतिभागियों को विद्यालयों में जेंडर से जुड़े मुद्दों को समझने, विद्यार्थियों के बीच संवेदनशीलता विकसित करने और उनके साथ सकारात्मक एवं प्रभावी संवाद स्थापित करने के व्यावहारिक तरीके बताए गए. समावेशी विद्यालयी माहौल बनाने पर जोर कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण का भी महत्वपूर्ण स्थान है. ऐसे में सभी बच्चों के लिए समान अवसर, सम्मानजनक व्यवहार और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना जरूरी है. प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि जेंडर संबंधी जागरूकता बढ़ाने से विद्यालयों में भेदभाव कम होगा और विद्यार्थी खुलकर अपनी बात रख सकेंगे. प्रशिक्षण में विद्यालय स्तर पर अपनाए जाने वाले व्यवहारिक उपायों पर भी विस्तार से चर्चा की गई. कक्षा 6 से 12 तक के स्कूलों में चल रहा कार्यक्रम यह कार्यक्रम जिले के कक्षा 6 से 12 तक के सभी विद्यालयों में शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग और सेंटर फॉर कैटलाइजिंग चेंज (सी3) के संयुक्त प्रयास से संचालित किया जा रहा है. इसका उद्देश्य विद्यालयों में स्वास्थ्य, कल्याण और जेंडर समानता को बढ़ावा देना है, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक और सामाजिक वातावरण मिल सके. ये अधिकारी और विशेषज्ञ रहे मौजूद कार्यशाला में जिला शिक्षा परियोजना कार्यालय से संजय तिवारी, डायट से रंजीत वर्मा, सी3 संस्था से मोहम्मद जियाउद्दीन, शिखा भसीन, ओम प्रकाश सिंह और अभिनव कुमार ने प्रतिभागियों को मार्गदर्शन दिया. इसके अलावा जिले के डीआरजी, शिक्षक और अन्य शिक्षा कर्मियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई. कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने विद्यालयों में सीखे गए अनुभवों को लागू करने और विद्यार्थियों के लिए अधिक सुरक्षित, संवेदनशील तथा समावेशी शैक्षणिक माहौल तैयार करने का संकल्प लिया.  

महाराष्ट्र सड़क हादसे के घायलों से मिले विजय शर्मा, एम्स रायपुर पहुंचकर जाना हाल

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने एम्स रायपुर में महाराष्ट्र सड़क हादसे के घायलों से की मुलाकात विशेषज्ञ चिकित्सकों से उपचार की जानकारी लेकर बेहतर इलाज के दिए निर्देश रायपुर  महाराष्ट्र के भंडारा जिले में नागपुर-रायपुर राजमार्ग पर हुए सड़क हादसे में घायल कबीरधाम जिले के सहसपुर लोहारा क्षेत्र के लोगों से उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा ने एम्स रायपुर पहुंचकर मुलाकात की। मंगलवार देर शाम रायपुर एम्स पहुंचे शर्मा ने घायलों और उनके परिजनों से आत्मीयता से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली तथा उन्हें हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया।        उप मुख्यमंत्री शर्मा ने एम्स के विशेषज्ञ चिकित्सकों से भी मुलाकात कर घायलों के उपचार की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने चिकित्सकों से घायलों की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति, चल रहे उपचार और आगे की चिकित्सा प्रक्रिया के संबंध में चर्चा की तथा सभी घायलों को बेहतर से बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।        इस दौरान उप मुख्यमंत्री ने ग्राम बांधाटोला निवासी पांच वर्षीय लुकेश पटेल, दो वर्षीय डाली पटेल और 26 वर्षीय ललिता पटेल से मुलाकात कर उनका हाल जाना। मासूम बच्चों सहित हादसे में घायल लोगों और उनके परिजनों के बीच पहुंचकर शर्मा ने उन्हें ढांढस बंधाया और कहा कि इस कठिन समय में सरकार और प्रशासन उनके साथ खड़ा है। उप मुख्यमंत्री शर्मा हादसे के बाद लगातार परिवार जनों से संपर्क बनाए हुए हैं, अस्पताल में भर्ती से लेकर घायलों के उपचार तक निरंतर संपर्क कर पीड़ित परिवारों को सहायता प्रदान कर रहे हैं। दिवंगतों के घर पहुंचकर पहले ही जता चुके हैं संवेदना         उल्लेखनीय है कि हादसे के बाद उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कबीरधाम जिले में दुर्घटना में दिवंगत हुए पीड़ितों के घर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की थी। उन्होंने शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त की थीं और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया था। इसी दौरान उन्होंने हादसे में घायल लोगों के परिजनों से भी मुलाकात कर उनके उपचार की जानकारी ली थी।

खेलो इंडिया’ और ‘फिट इंडिया’ से युवाओं को मिल रहा खेलों में आगे बढ़ने का अवसर: सांसद हिमाद्री सिंह

खेलो इंडिया एवं फिट इंडिया से युवाओं को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का मिल रहा अवसर- सांसद  हिमाद्री सिंह खेल से खिलाड़ियों का होता है शारीरिक एवं मानसिक विकास- विधायक मनीषा सिंह  खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन से खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का मिलता है अवसर- विधायक  जयसिंह मरावी गुड शेफर्ड कॉन्वेंट स्कूल शहडोल में राज्य स्तरीय बास्केटबाल प्रतियोगिता का आयोजन शहडोल   गुड शेफर्ड कॉन्वेंट स्कूल, शहडोल में 70वीं राज्य स्तरीय अंडर-17 बालक एवं बालिका बास्केटबाल प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। प्रतियोगिता के शुभारंभ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव ने वर्चुअल माध्यम से संबोधित कर खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दीं। प्रतियोगिता में प्रदेश के 09 संभागों की टीमें सहभागिता कर रही हैं। कार्यक्रम में अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं खेल ध्वज का ध्वजारोहण कर प्रतियोगिता का शुभारंभ किया गया।  शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद श्रीमती हिमाद्री सिंह ने कहा कि खेल हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। खेलों के माध्यम से युवाओं को अपनी प्रतिभा को पहचानने और उसे निखारने का अवसर मिलता है। खेलो इंडिया एवं फिट इंडिया जैसे अभियानों के माध्यम से प्रदेश एवं देश के युवाओं को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए बेहतर अवसर प्राप्त हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलों के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार हुआ है और विभिन्न खेल विधाओं में युवा अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन कर रहे हैं। सांसद ने कहा कि राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं के आयोजन से खिलाड़ियों को उच्च स्तर के खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने और अपनी खेल प्रतिभा को और बेहतर बनाने का अवसर मिलता है। उन्होंने प्रतियोगिता में शामिल सभी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि खिलाड़ी पूरी खेल भावना, अनुशासन एवं एकाग्रता के साथ प्रतियोगिता में भाग लें और अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन करें। उन्होंने कहा कि हार-जीत से अधिक महत्वपूर्ण खेल भावना और निरंतर प्रयास है। खिलाड़ियों को प्रतियोगिता से सीख लेकर भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रयास करना चाहिए। विधायक जयसिंहनगर श्रीमती मनीषा सिंह ने कहा कि खेल केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि खिलाड़ियों के शारीरिक एवं मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नियमित रूप से खेल गतिविधियों में सहभागिता करने से युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास, एकाग्रता, नेतृत्व क्षमता एवं टीम भावना का विकास होता है। खेल खिलाड़ियों को चुनौतियों का सामना करने और विपरीत परिस्थितियों में भी निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य स्तरीय बास्केटबाल जैसी प्रतियोगिताओं का आयोजन शहडोल जिले के लिए गौरव का विषय है। इससे जिले के खिलाड़ियों को प्रदेश के विभिन्न संभागों से आए प्रतिभावान खिलाड़ियों के साथ खेलने और उनसे सीखने का अवसर प्राप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवा प्रतिभाओं को बेहतर मंच प्रदान करते हैं तथा खिलाड़ियों को अपने प्रदर्शन में सुधार करने के लिए प्रेरित करते हैं। विधायक श्री जयसिंह मरावी ने कहा कि खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ ही आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में प्रदेश के विभिन्न संभागों से खिलाड़ियों के शामिल होने से उन्हें एक-दूसरे की खेल प्रतिभा को देखने और उनसे सीखने का अवसर मिलता है। ऐसे आयोजन खिलाड़ियों में प्रतिस्पर्धा की भावना के साथ-साथ आपसी भाईचारा एवं खेल भावना को भी मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रतिभा के साथ नियमित अभ्यास, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति आवश्यक है। खिलाड़ियों को प्रतियोगिता में जीत और हार को समान भाव से स्वीकार करते हुए अपने प्रदर्शन में लगातार सुधार के लिए प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज के खिलाड़ी ही भविष्य में जिला, प्रदेश, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं। कार्यक्रम को श्रीमती अमिता चपरा एवं श्री संतोष लोहानी ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती प्रभा मिश्रा, कमिश्नर शहडोल संभाग श्रीमती सुरभि गुप्ता, कलेक्टर श्री पार्थ जायसवाल, सीईओ जिला पंचायत श्री शिवम प्रजापति, नगर पालिका अध्यक्ष श्री घनश्याम जायसवाल, जनपद अध्यक्ष सोहागपुर श्रीमती हीरावती कोल, जिला योजना समिति की सदस्य श्रीमती अमिता चपरा, श्री संतोष लोहानी, श्री सौरभ गोले, संयुक्त संचालक शिक्षा श्री उमेश धुर्वे, जिला शिक्षा अधिकारी श्री अतुल चौधरी, सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग श्री आनन्द राय सिन्हा, डीपीसी श्री अमरनाथ सिंह, कार्यक्रम में गुड शेफर्ड कॉन्वेंट स्कूल की प्राचार्य श्रीमती लीना रोज मैरी, पूर्व बास्केटबाल खिलाड़ी श्री जसबीर सिंह, भूतपूर्व सैनिक श्री जगदीश प्रसाद गुप्ता एवं श्री विष्णुप्रसाद विश्वकर्मा सहित पत्रकार, सहित अन्य अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

108 एंबुलेंस कर्मचारियों ने काला बिल्ला लगाकर जताया विरोध, 28 सितंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल

 रांची  108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा के कर्मचारियों का चरणबद्ध आंदोलन मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। झारखंड प्रदेश एंबुलेंस कर्मचारी संघ के आह्वान पर राज्यभर में कर्मचारियों ने काला बिल्ला लगाकर ड्यूटी करते हुए विरोध दर्ज कराया। संघ का कहना है कि कर्मचारी आपातकालीन सेवा को प्रभावित किए बिना अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार और संबंधित विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। संघ ने आरोप लगाया कि 108 एंबुलेंस कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर लगातार सरकार और विभाग का ध्यान आकृष्ट कराया जा रहा है। इसके बावजूद समाधान की दिशा में पहल नहीं होने से कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है। संघ ने कहा कि कर्मचारी मरीजों तक समय पर आपातकालीन सेवा पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं पर सरकार की चुप्पी चिंता का विषय है। जिला स्तर से सरकारी माध्यम से संचालन की मांग संघ की प्रमुख मांगों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक के द्वारा दिए गए निर्देशों का अनुपालन करते हुए जिला स्तर पर सरकारी माध्यम से 108 एंबुलेंस सेवा का संचालन शुरू करना शामिल है। इसके अलावा सम्मान फाउंडेशन एजेंसी द्वारा सेवा से हटाए गए कर्मचारियों को संबंधित जिलों में पुन सेवा में बहाल करने की मांग की गई है। कर्मचारियों ने ईपीएफ, ईएसआई, ओवरटाइम, ग्रेच्युटी और न्यूनतम वेतन समेत सभी श्रमिक एवं वैधानिक अधिकार सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई है। 25 को पूर्ण हड़ताल, 28 से अनिश्चितकालीन आंदोलन संघ ने आंदोलन का चरणबद्ध कार्यक्रम भी जारी किया है। इसके तहत 14 से 19 सितंबर तक काला बिल्ला लगाकर काम करते हुए विरोध जारी रहेगा। इसके बाद 19 सितंबर को कैंडल मार्च, 21 सितंबर को भिक्षाटन, 23 सितंबर को धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। संघ के अनुसार, 25 सितंबर को राज्यभर में एक दिवसीय पूर्ण हड़ताल की जाएगी। इस दौरान नामकुम स्थित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन भी प्रस्तावित है। मांगों पर समाधान नहीं होने की स्थिति में 28 सितंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी गई है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष नीरज तिवारी ने कहा कि एंबुलेंस कर्मचारियों ने हमेशा आपातकालीन सेवा को प्राथमिकता दी है और अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन किया है। इसके बावजूद उनकी जायज और लंबे समय से लंबित मांगों पर सरकार की ओर से ठोस पहल नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सरकार से कर्मचारियों के साथ तत्काल वार्ता कर समस्याओं के समाधान की दिशा में कदम उठाने की मांग की।  

‘ये लोग देश के गद्दार, समानता नहीं चाहते’- ओवैसी ने किया UCC का विरोध तो भड़के संगीत सोम

‘कितनी भी ताकत लगा लो, UCC आकर रहेगा’- UCC पर ओवैसी-अखिलेश को संगीत सोम की दो टूक 'ये लोग देश के गद्दार, समानता नहीं चाहते'- ओवैसी ने किया UCC का विरोध तो भड़के संगीत सोम UCC को लेकर सियासी घमासान तेज, ओवैसी-अखिलेश के विरोध पर बरसे पूर्व BJP विधायक संगीत सोम लखनऊ  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के NDA शासित राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने के ऐलान के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने UCC को भारत की विविधता खत्म करने की साजिश बताया है। जिसपर भाजपा के पूर्व विधायक संगीत सोम ने तीखा पलटवार करते हुए कहा है कि देश में रहना है तो देश के कानून को मानना पड़ेगा। उन्होंने UCC को महिलाओं को न्याय और समानता देने वाला कानून बताया। ओवैसी पर संगीत सोम का तीखा हमला संगीत सोम ने कहा कि ओवैसी जैसे लोग देश में कट्टरपंथी राजनीति करते हैं। उन्हें समझना होगा कि देश में रहना है तो देश के कानून को मानना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि UCC ऐसा कानून है, जो भारत में महिलाओं को न्याय देता है और समानता की बात करता है। संगीत सोम ने आरोप लगाया कि ओवैसी जैसे लोगों को समानता पसंद नहीं है। उन्होंने कहा, ''ये लोग देश के गद्दार हैं। ये देश में समानता नहीं चाहते।'' उन्होंने दावा किया कि भारत के लोग UCC चाहते हैं। संगीत सोम ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने अगर कहा है कि UCC लागू होगा तो विरोध करने वाले लोग कितनी भी ताकत लगा लें, UCC लागू होकर रहेगा। अखिलेश यादव पर भी साधा निशाना UCC को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव की टिप्पणी पर भी संगीत सोम ने हमला बोला। दरअसल अखिलेश यादव ने UCC का मतलब ''अंडरग्राउंड कम्युनल कांस्पिरेसी'' बताया है। इसपर संगीत सोम ने कहा कि अखिलेश यादव के पास कोई काम नहीं है। वह ट्विटर-ट्विटर खेलते हैं। संगीत सोम ने कहा कि अखिलेश यादव के पास टीवी पर गेम खेलने और ट्विटर पर खेलने के अलावा कोई काम नहीं है। उन्होंने दावा किया कि मुलायम सिंह यादव की कृपा से अखिलेश यादव एक बार मुख्यमंत्री बन गए, लेकिन अब वह मुख्यमंत्री नहीं बन सकते। सोम ने यह भी कहा कि अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश की राजनीति में कभी नहीं आ सकते। 40 साल से UCC की मांग का दावा संगीत सोम ने कहा कि UCC की मांग पिछले 40 साल से होती रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा बाबा साहब के संविधान के रास्ते पर चलकर उनके बताए कार्यों को पूरा करने का काम कर रही है और आगे भी करती रहेगी। UCC को मुस्लिमों के खिलाफ बताए जाने पर सोम ने कहा कि अगर पूरे देश में UCC नहीं आई तो असमानता होगी। उनके मुताबिक समानता के लिए यह कानून जरूरी है। उन्होंने कहा कि UCC नहीं आने से देश में हिंदू-मुस्लिम का बैलेंस खराब होगा और राहुल गांधी तथा अखिलेश यादव यही चाहते हैं। अमित शाह ने कहा है तो UCC आकर रहेगा- सोम पूर्व भाजपा विधायक ने कहा कि विरोध की राजनीति के चलते ओवैसी जैसे लोग पहले अपमानित होंगे और फिर UCC की वकालत करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग संविधान लेकर घूमते हैं, लेकिन संविधान का एक पन्ना भी नहीं खोलते। संगीत सोम ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह साफ कर चुके हैं कि जिन राज्यों में NDA की सरकार है, वहां UCC लाया जाएगा। उन्होंने कहा, ''अब अगर कोई नहीं लाना चाहता है तो ना लाएं। हम 29 से पहले लाएंगे। अखिलेश, ओवैसी, राहुल कितनी भी ताकत लगा लें, UCC आकर रहेगा।'' उन्होंने यह भी कहा कि ये लोग बेनकाब हो चुके हैं और देश की भलाई के लिए कोई काम नहीं करते। गौरतलब है कि गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले देश के सभी NDA शासित 21 राज्यों में UCC लागू कर दिया जाएगा। उनके इस बयान के बाद UCC को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

कनाडा जाने वाले छात्रों के लिए बड़ा अपडेट, स्टडी वीजा में बढ़ी फाइनेंशियल जरूरत

चंडीगढ़  स्टडी वीजा पर कनाडा जाने वाले पंजाबियों को अब ज्यादा पैसे खर्चने पड़ेंगे। अब पढ़ने जाने वाले स्टूडेंट्स को अपने रहने-खाने सहित अन्य व्यवस्थाओं के लिए बैंक बैलेंस 17 लाख रखना होगा। इमीग्रेशन रिफ्यूजी सिटिजनशिप कनाडा डिपार्टमेंट (IRCC) ने नए नियम लागू होगा। कनाडा सरकार का कहना है कि देश में बढ़ रही महंगाई के चलते ये निर्णय लिया गया है। पहले कनाडा स्टडी के लिए जाने वाले स्टूडेंट्स को 15 लाख के करीब सालाना बैंक बैलेंस मेंटेन रखना जरूरी था। IRCC के अनुसार 31 अगस्त तक अप्लाई कर चुके स्टूडेंट्स पर नए नियम लागू नहीं होंगे। 1 सितंबर 2026 से अप्लाई कर रहे स्टूडेंट्स पर नए नियमों के तहत अब कनाडाई यूनिवर्सिटी या कॉलेज में दाखिला लेने से पहले अपनी वित्तीय मजबूती साबित करने करने के लिए पहले से लगभग 2 लाख रुपए ज्यादा बैंक बैलेंस दिखाना होगा। कॉलेज फीस और ट्रेवल खर्च के अतिरिक्त दिखाना हो बैलेंस कनाडा सरकार की आधिकारिक वेबसाइट (canada.ca) पर जारी ताजा नोटिफिकेशन के अनुसार, अब सिंगल एप्लीकेंट (अकेले जाने वाले छात्र) को लिविंग एक्सपेंस यानी रहने-खाने के खर्च के तौर पर कम से कम 23,448 कनाडाई डॉलर (CAD) का फंड दिखाना अनिवार्य होगा। भारतीय रुपए में यह रकम करीब 17 लाख रुपए बैठती है। इस रकम में कॉलेज की ट्यूशन फीस और भारत से कनाडा आने-जाने का ट्रैवल खर्च शामिल नहीं है। ट्यूशन फीस और यात्रा खर्च का हिसाब इस निर्धारित राशि से अलग रहेगा। परिवार के 4 मेंबर के साथ दिखाने होंगे 30 लाख इमिग्रेशन विभाग (IRCC) के आधिकारिक डेटा चार्ट के मुताबिक, यदि छात्र के साथ उनके परिवार के सदस्य भी कनाडा जाते हैं, तो उसी हिसाब से फंड की सीमा बढ़ जाएगी। दो लोगों के परिवार के लिए यह सीमा 29,185 CAD (20.10 लाख), तीन सदस्यों के लिए 35,880 CAD (24.74 लाख) और चार सदस्यों के परिवार के लिए 43,562 CAD (30.04 लाख) तय की गई है। इसके बाद परिवार के प्रत्येक अतिरिक्त सदस्य के जुड़ने पर 6,315 कनाडाई डॉलर (4.35 लाख) का अतिरिक्त फंड बैंक खाते में दिखाना अनिवार्य होगा। हालांकि, ये नियम क्यूबेक प्रांत को छोड़कर पूरे कनाडा में लागू होंगे, क्योंकि क्यूबेक अपने लिविंग एक्सपेंस के नियम अलग से तय करता है। महंगाई के चलते कनाडा सरकार ने बढ़ाया बजट IRCC की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, इस फैसले का मुख्य मकसद कनाडा में रह रहे अंतरराष्ट्रीय छात्रों को वित्तीय संकट और महंगाई से बचाना है। बीते कुछ वर्षों में कनाडा के प्रमुख शहरों में रेंट (मकान का किराया), ग्रोसरी और बेसिक यूटिलिटीज के दाम काफी तेजी से बढ़े हैं। पुराना फंड पैरामीटर मौजूदा महंगाई दरों के हिसाब से काफी कम पड़ रहा था, जिसके चलते कई विदेशी छात्रों को वहां जाकर पार्ट-टाइम जॉब्स पर पूरी तरह निर्भर रहना पड़ता था या रहने-खाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। वीजा अप्लाई से पहले इन बातों का रखें ध्यान अब 1 सितंबर 2026 के बाद वीजा फाइल जमा करने वाले सभी छात्रों को तीन अलग-अलग मदों में अपना फंड प्रूफ देना होगा। पहला, पहले साल की पूरी ट्यूशन फीस; दूसरा तय लिविंग एक्सपेंस दिखाना होगा जो सिंगल छात्र के लिए 23,448 डालर है। तीसरा, भारत से कनाडा आने-जाने का टिकट खर्च। विशेषज्ञों की सलाह है कि कनाडाई वीजा के रिजेक्शन से बचने के लिए छात्र अपने स्पॉन्सर या बैंक स्टेटमेंट में आधिकारिक वेबसाइट द्वारा तय राशि से थोड़ा अधिक ही बैलेंस मेंटेन रखें, ताकि एप्लीकेशन में कोई अड़चन न आए। कनाडा में 10 लाख पंजाबी रह रहे कनाडा में पंजाबी मूल के लोगों की कुल संख्या लगभग 9.4 लाख से 10 लाख के बीच है, जो वहां की कुल आबादी का करीब 2.6% है।

16 से 20 सितंबर तक झारखंड में बारिश के आसार, कई जिलों में वज्रपात का अलर्ट

रांची झारखंड में 1 से 15 सितंबर के बीच बारिश सामान्य से करीब 5% कम है. रांची स्थित भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार 1 से 15 सितंबर तक झारखंड में मानसून सामान्य के करीब रहा, लेकिन राज्य में अब भी वर्षा की कमी बनी हुई है. इस अवधि में राज्य में 871.9 मिमी बारिश दर्ज की गयी, जबकि सामान्य वर्षा 920.8 मिमी होनी चाहिए थी. इसका मतलब यह कि पूरे राज्य में सितंबर के पहले पखवाड़े तक करीब 5% कम बारिश हुई है. मौसम विभाग के आंकड़े बताते हैं कि कुछ जिलों में अच्छी बारिश हुई, जबकि कई जिले अब भी सामान्य से काफी पीछे हैं. पाकुड़ में सिर्फ 48% हुई बारिश आईएमडी के जिलावार आंकड़ों के अनुसार, झारखंड के नौ जिलों में वर्षा की कमी 20% से अधिक रही है. सबसे अधिक कमी पाकुड़ में 48% दर्ज की गई. इसके अलावा चतरा में 36%, देवघर में 31%, गुमला में 29%, साहिबगंज में 26%, कोडरमा में 25%, गिरिडीह और हजारीबाग में 24-24% तथा गढ़वा में 22% कम बारिश रिकॉर्ड हुई है. पश्चिमी सिंहभूम बना सबसे ज्यादा बारिश वाला जिला राज्य में सबसे बेहतर स्थिति पश्चिमी सिंहभूम की रही, जहां सामान्य से 42% अधिक वर्षा दर्ज की गयी. इसके अलावा रांची में 13%, सरायकेला-खरसावां में 12%, लातेहार में 11%, पूर्वी सिंहभूम में 4% और लोहरदगा में 2% अधिक बारिश हुई है. धनबाद, दुमका, खूंटी और रामगढ़ में बारिश सामान्य के आसपास बनी रही. 16 सितंबर को जामा में हुई सबसे ज्यादा बारिश दैनिक मौसम बुलेटिन के अनुसार, पिछले 24 घंटों में राज्य में एक स्थान पर भारी बारिश दर्ज की गयी. दुमका जिले के जामा में सबसे अधिक 65 मिमी वर्षा हुई. इसके अलावा मसानजोर में 63.2 मिमी, जारमुंडी में 52 मिमी और महारो में 49.4 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गयी. बहरागोड़ा सबसे गर्म, लातेहार सबसे ठंडा पिछले 24 घंटों में राज्य का सबसे अधिक अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस बहरागोड़ा एडब्ल्यूएस में दर्ज किया गया. सबसे कम न्यूनतम तापमान 20.1 डिग्री सेल्सियस लातेहार एडब्ल्यूएस में रिकॉर्ड हुआ. रांची में अधिकतम तापमान 31.1 डिग्री और न्यूनतम 22.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. अगले पांच दिनों तक कैसा रहेगा मौसम आईएमडी के अनुसार 16 से 20 सितंबर तक पूरे झारखंड में सामान्यतः बादल छाये रहेंगे. अधिकांश जिलों में एक-दो स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. अगले तीन दिनों तक अधिकतम तापमान में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है. रांची में अगले पांच दिनों तक अधिकतम तापमान 30 से 31 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22 से 23 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है. 19 सितंबर के आसपास बनेगा नया सिस्टम मौसम विभाग के अनुसार उत्तर थाईलैंड के ऊपर सक्रिय ऊपरी चक्रवाती परिसंचरण 18 सितंबर तक उत्तर अंडमान सागर की ओर बढ़ेगा. इसके प्रभाव से 19 सितंबर के आसपास निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है, जो बाद में दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश तट की ओर बढ़ सकता है. कई जिलों में तेज हवा और वज्रपात का अलर्ट 16 से 20 सितंबर तक अलग-अलग दिनों में राज्य के कई हिस्सों में गरज-चमक, वज्रपात और 30 से 40 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवा चलने की चेतावनी जारी की गयी है.