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लोकभवन में तीन दिवसीय मेडिटेशन शिविर का आयोजन

रायपुर राज्यपाल  रमेन डेका की पहल पर लोकभवन में अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए तीन दिवसीय (3 जून से 5 जून तक) मेडिटेशन (ध्यान) शिविर का आयोजन किया गया है। शिविर का उद्देश्य अधिकारियों और कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य, एकाग्रता, कार्यक्षमता तथा तनाव प्रबंधन को सुदृढ़ बनाना है।             हार्टफुलनेस संस्था, अमलेश्वर के सहयोग से आयोजित इस शिविर के प्रथम दिन ध्यान के महत्व और उसके व्यावहारिक लाभों पर विस्तार से जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने बताया कि नियमित ध्यान से मानसिक शांति, सकारात्मक सोच, निर्णय क्षमता और कार्य के प्रति एकाग्रता में वृद्धि होती है, जिससे शासकीय कार्यों के निष्पादन में भी बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं।            शिविर के दौरान लोकभवन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए एक घंटे का विशेष ध्यान सत्र आयोजित किया गया, जिसमें सचिवालय के सभी अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए। प्रतिभागियों को ध्यान की विभिन्न विधियों का अभ्यास कराया गया तथा दैनिक जीवन में ध्यान को अपनाने के तरीकों की जानकारी दी गई।           हार्टफुलनेस संस्था के प्रशिक्षक विकास पाठक एवं  डी.एम. शर्मा ने प्रशिक्षण प्रदान करते हुए ध्यान को स्वस्थ, संतुलित और तनावमुक्त जीवन की प्रभावी साधना बताया। उन्होंने कहा कि नियमित मेडिटेशन व्यक्ति को आंतरिक शांति प्रदान करने के साथ-साथ कार्यस्थल पर उसकी उत्पादकता और सकारात्मकता को भी बढ़ाता है। तीन दिवसीय इस शिविर में आगामी दिनों में ध्यान, आत्म-जागरूकता, भावनात्मक संतुलन एवं तनाव प्रबंधन से संबंधित विभिन्न सत्र आयोजित किए

महिलाओं को मिली बड़ी राहत, साय सरकार की नीति से बढ़ीं महिला नामांतरण रजिस्ट्रियां

रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण की दिशा में उठाए गए कदमों के जमीन पर सकारात्मक परिणाम दिखने लगे हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर महिलाओं के नाम होने वाली भूमि व संपत्ति की रजिस्ट्री (पंजीयन) शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट देने और 12 प्रतिशत उपकर (Cess) को पूरी तरह समाप्त करने के निर्णय से बड़ा बदलाव आया है। शासन की इस बड़ी रियायत के चलते बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में महिलाओं के नाम पर संपत्ति खरीदने और पंजीयन कराने की होड़ सी मच गई है। आंकड़ों के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। एक महीने में रजिस्ट्री मामलों में 70 प्रतिशत की भारी वृद्धि जिला पंजीयक कार्यालय से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, यह छूट लागू होने के बाद मात्र एक महीने के भीतर महिलाओं के पक्ष में होने वाली रजिस्ट्रियों में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। अप्रैल 2026 जिले के पांचों उप पंजीयक कार्यालयों में महिलाओं के नाम पर कुल 309 दस्तावेज पंजीकृत हुए थे। मई 2026 यह संख्या बढ़कर 445 पहुंच गई, जो अप्रैल की तुलना में लगभग 70 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी को दर्शाती है।   ब्लॉकवार आंकड़ों पर एक नजर (अप्रैल बनाम मई 2026) रजिस्ट्री शुल्क में कटौती का लाभ उठाने में जिले के सभी क्षेत्र आगे रहे हैं, जिनमें शहरी इलाकों का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा। उप पंजीयक कार्यालय केवल बलौदाबाजार में अप्रैल 2026 में 78 और मई 2026 में बढ़कर 119 हो गया। इसी प्रकार पलारी में अप्रैल 2026 में 40  दस्तावेज बढ़कर मई 2026 में 56, सिमगा में 56 से बढ़कर 99, कसडोल में 24से बढ़कर 50 तथा भाटापारा में 111 से बढ़कर 121 दस्तावेज हो गए। यह वृद्धि दर्शाती है कि महिलाओं को दी गई पंजीयन शुल्क छूट का लाभ बड़ी संख्या में परिवार उठा रहे हैं। शहरी क्षेत्र बलौदाबाजार और भाटपारा के आकड़ों में अधिक वृद्धि देखी गई है। जिला पंजीयक विनोद कोचे ने बताया कि राज्य शासन की इस नीति का सीधा और त्वरित लाभ महिलाओं को मिल रहा है। संपत्ति खरीद की लागत काफी कम हो जाने से अब परिवार स्वेच्छा से महिलाओं के नाम पर जमीन और मकान पंजीकृत कराने के लिए प्रोत्साहित हो रहे हैं। इससे महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। वहीं, बलौदाबाजार के उप पंजीयक श्री विपुल श्रीवास्तव के अनुसार, अप्रैल 2026 से 12 प्रतिशत उपकर समाप्त होने से इस प्रक्रिया में और तेजी आई है। अकेले बलौदाबाजार कार्यालय में पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अब तक 107 अधिक दस्तावेजों का पंजीयन हो चुका है। खास बात यह है कि इससे जहां एक तरफ आम जनता को बड़ी आर्थिक राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ रजिस्ट्री की संख्या बढ़ने से शासन के राजस्व में भी वृद्धि हो रही है। अब महिलाओं के नाम संपत्ति खरीदना हुआ आसान योजना की लाभार्थी नमिता साहू ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए बताया कि महिलाओं के नाम रजिस्ट्री पर मिलने वाली इस छूट से उनके परिवार को बड़ा आर्थिक लाभ हुआ है। पहले रजिस्ट्री में भारी-भरकम खर्च देखकर लोग कतराते थे, लेकिन अब खर्च आधा होने से यह बेहद आसान हो गया है। इससे महिलाओं को न सिर्फ आर्थिक सुरक्षा मिल रही है, बल्कि संपत्ति पर उनका कानूनी अधिकार भी मजबूत हो रहा है। महिला सशक्तिकरण का नया अध्याय गौरतलब है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा के मार्गदर्शन में लिया गया यह फैसला प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक युगांतरकारी कदम साबित हो रहा है।

Ladli Behna Yojana की 37वीं किस्त को लेकर बड़ा अपडेट, इस तारीख तक आ सकते हैं पैसे

भोपाल  मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना मध्य प्रदेश की महिलाओं के लिए चलाई जा रही एक महत्वपूर्ण योजना है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर माह 1500-1500 रुपए दिए जाते हैं। जून 2023 से मई 2026 तक महिलाओं के खातों में कुल 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से जमा की जा चुकी है। 13 मई 2026 को नरसिंहपुर जिले के ग्राम मुंगवानी से सीएम डॉ. मोहन यादव ने ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ की 36वीं किस्त जारी की थी। इसके तहत प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख 22 हजार 542 लाड़ली बहनों के बैंक खातों में 1,835 करोड़ से अधिक की राशि सिंगल क्लिक से अंतरित की गई। अब जून 2026 में 37वीं किस्त जारी की जाएगी। संभावना है कि 10 से 15 जून के बीच सीएम द्वारा किस्त की राशि जारी की जा सकती है, हालांकि फाइनल तारीख को लेकर आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। गौरतलब है कि मई 2023 में लाड़ली बहना योजना शुरूआत की गई थी। 10 जून 2023 को योजना की पहली किस्त जारी की गई थी। योजना के प्रारंभ में प्रत्येक पात्र महिला को 1,000 रुपये प्रतिमाह प्रदान किए जाते थे। अक्टूबर 2023 में इसे बढ़ाकर 1,250 रुपये प्रतिमाह किया गया। इसके बाद नवंबर 2025 से राशि में पुनः वृद्धि कर इसे 1,500 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया। वर्तमान में सामान्य हितग्राही महिलाओं को 1500 रुपए प्रतिमाह (18000 रु सालाना) दिए जाते हैं। सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त कर रही महिलाओं को 900 रुपये प्रतिमाह मिलते हैं। लाड़ली बहना योजना पर राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 में 14,726.05 करोड़ रुपये, वर्ष 2024-25 में 19,051.39 करोड़ रुपये तथा वर्ष 2025-26 में 20,318.53 करोड़ रुपये की राशि व्यय की गई। वर्ष 2026-27 में अप्रैल 2026 तक 1830.54 करोड़ रुपये की राशि की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लाडली बहना योजना में 23,882.81 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। इन्हें मिलता है योजना का लाभ:     मध्य प्रदेश की स्थानीय निवासी हो ।     विवाहित महिला के साथ निर्धन, विधवा, तलाकशुदा एवं परित्यक्ता महिलाएं भी योजना की पात्र हैं।     महिलाओं की आयु 21 से 60 वर्ष तक होनी चाहिए ।     स्वयं का बैंक खाता और बैंक खाते मे आधार लिंक एवं डीबीटी होना चाहिए।     समग्र पोर्टल पर आधार के डाटा का ओटीपी या बायोमेट्रिक के माध्यम से वेरिफाई किया होना चाहिए । ये योजना से बाहर :     स्वयं/ परिवार की सम्मिलित रूप से स्वघोषित वार्षिक आय 2.5 लाख से अधिक हो या आयकरदाता हो।     जिनके पास संयुक्त रूप से 5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि हो। ​     जिनके परिवार के पास चार पहिया वाहन (ट्रैक्टर को छोड़कर) हो।     स्वयं / परिवार का कोई भी सदस्य भारत सरकार अथवा राज्‍य सरकार के     शासकीय विभाग/ उपक्रम/ मण्‍डल/ स्‍थानीय निकाय में नियमित/स्‍थाईकर्मी/ संविदाकर्मी के रूप में नियोजित हो अथवा सेवानिवृत्ति उपरांत पेंशन प्राप्त कर रहा हो। लाभार्थी सूची में कैसे चेक करें अपना नाम     लाड़ली बहना की आधिकारिक वेबसाइट https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाएं।     वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ पर “आवेदन एवं भुगतान की स्थिति” वाले विकल्प पर     क्लिक करें।     दूसरे पृष्ठ पर पहुंचने के बाद, अपना आवेदन नंबर या सदस्य समग्र क्रमांक दर्ज करें।     कैप्चा कोड सबमिट करने के बाद, मोबाइल पर एक ओटीपी भेजा जाएगा।     मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी दर्ज करें और वेरिफाई करें।     ओटीपी वेरिफाई करने के बाद “सर्च” विकल्प पर क्लिक करें और आपका भुगतान स्थिति खुल जाएगी।  

कोचिंग सेंटर विवाद के बाद बिहार में सियासत गर्म, छात्रों की पढ़ाई पर असर

पटना राजधानी पटना में खान ग्लोबल कोचिंग सेंटर में तोड़फोड़, मारपीट और बवाल की घटना से सभी हैरान हैं। खान सर ने छात्रों से कह दिया है कि कोचिंग सेंटर को अगले आदेश तक बंद रखा जाएगा। इधर अचानक कोचिंग सेंटर बंद होने से कई छात्र परेशान दिखे और खान सर के समर्थन में सड़क पर भी बैठ गए। इस पूरे हो-हंगामे ने सम्राट चौधरी सरकार का भी ध्यान खींचा है। बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने इस घटना के बाद स्पष्ट तौर से कहा है कि अब राज्य में कोचिंग संस्थानों के लिए नई नीति बनाई जाएगी। शिक्षा मंत्री ने साफ किया है कि सरकार चाहती है कि कोचिंग संस्थानों पर उसका नियंत्रण हो और भविष्य में ऐसी घटनाएं ना हों ताकि छात्रों को परेशानी ना झेलनी पड़े। खान सर के कोचिंग सेंटर में हुई घटना को लेकर शुरू से ही कहा जा रहा है कि यह दो कोचिंग संस्थानों के आपसी वर्चस्व का नतीजा है। खुद खान सर ने पास के ही एक अन्य कोचिंग सेंटर को इस पूरी घटना के लिए जिम्मेदार बताया। उनका कहना था कि छात्रों से कम फीस लेने की वजह से दूसरे कोचिंग सेंटर वाले नाराज चल रहे थे और उन्होंने पहले धमकी भी दी थी। बहरहाल इस तोड़फोड़ और बवाल के बाद सरकार ने अब सख्त रवैया अपनाने का ऐलान किया है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश कुमार तिवारी ने कहा है कि सरकार अगले तीन महीने में कोचिंग संस्थानों के लिए नई नीति बनाएगी। एक दूसरे को नीचा दिखाने के लिए कोचिंग सेंटर ये सब जो षड़यंत्र कर रहे हैं वो सब अब बंद हो जाएगा। कोचिंग संस्थानों पर नकेल कसेंगे। कोचिंग संस्थान सरकार के नियंत्रण में रहेंगे। शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह स्थिति चिंताजनक है। इससे छात्रों की पढ़ाई भी प्रभावित हो गई है। मंत्री ने आगे कहा कि मंगलवार को कोचिंग सेंटर पर हुए हमले के मामले में वो खुद डीजीपी से बात करेंगे और पूरे मामले की जांच करवाएंगे। जो भी इसमें दोषी पाया जाएग उसपर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि बिहार की सरकार विधि-व्यवस्था के नियंत्रण में जो भी बाधा होगी उसे दूर करेगी। जो गड़बड़ करेगा वो जेल के अंदर रहेगा और जिसने भी यह परिस्थिति उत्पन्न की है उसे पुलिस छोड़ेगी नहीं। पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में लिया आपको बता दें कि खान सर के कोचिंग सेंटर पर हुए हमले के मामले में पुलिस ताबड़तोड़ ऐक्शन ले रही है। अब तक तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है। इनमें एक शख्स एक अन्य कोचिंग सेंटर का डायरेक्टर बताया जा रहा है। पुलिस ने 4 लोगों पर नामजद और 15 अज्ञात लोगों पर केस दर्ज किया है। कोचिंग सेंटर पर हमले और तोड़फोड़ का वीडियो भी सामने आया है। इसमें कुछ लोग खान सर के गार्ड की बेरहमी से धुनाई करते और कोचिंग सेंटर पर ईंट फेंकते नजर आ रहे हैं। पुलिस सीसीटीवी के आधार पर आरोपियों पर कार्रवाई में जुटी हुई है।

सरगुजा के किसान देवानंद बने मिसाल, मनरेगा डबरियों से खेती और रोजगार को मिला नया सहारा

मनरेगा की आजीविका डबरियां बन रहीं ग्रामीण समृद्धि का आधार जल संरक्षण, मछली पालन और सिंचाई से किसानों की बढ़ रही आय, सरगुजा के किसान देवानंद बने सफलता की मिसाल रायपुर,  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ग्रामीण विकास और आजीविका संवर्धन की दिशा में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) बहुआयामी परिवर्तन का माध्यम बन रही है। योजना के तहत निर्मित ‘आजीविका डबरियां’ जल संरक्षण के साथ किसानों की आय बढ़ाने, भू-जल संवर्धन और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। सरगुजा जिले के ग्राम अडची के किसान देवानंद इसकी जीवंत मिसाल बनकर उभरे हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति मनरेगा से निर्मित एक डबरी ने बदल दी है। जनपद पंचायत अम्बिकापुर अंतर्गत ग्राम पंचायत अडची निवासी किसान देवानंद ने वर्ष 2025-26 में अपने खेत में आजीविका डबरी निर्माण का प्रस्ताव रखा था। ग्राम पंचायत द्वारा मनरेगा के अंतर्गत 2 लाख रुपये की लागत से 17×19 मीटर आकार की डबरी का निर्माण कराया गया। निर्माण कार्य के दौरान ग्रामीण मजदूरों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला, वहीं देवानंद को खेती और अतिरिक्त आय के नए अवसर प्राप्त हुए। आज यह डबरी वर्षा जल से भरकर उनके खेत की सबसे बड़ी ताकत बन गई है। डबरी के जल से वे अपनी फसलों और सब्जियों की समय पर सिंचाई कर रहे हैं, जिससे उत्पादन में वृद्धि हुई है। साथ ही उन्होंने डबरी में मछली पालन भी शुरू किया है। आगामी छह महीनों में पहली मछली फसल से उन्हें 15 से 20 हजार रुपये की अतिरिक्त आय मिलने की उम्मीद है। इस प्रकार एक ही परिसंपत्ति से सिंचाई और मत्स्य पालन दोनों के माध्यम से उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। देवानंद की डबरी केवल एक जल संरचना नहीं, बल्कि दीर्घकालिक आजीविका का मजबूत आधार बन चुकी है। मात्र 2 लाख रुपये के शासकीय निवेश से निर्मित यह परिसंपत्ति आगामी दो दशकों तक उनके परिवार को आर्थिक संबल प्रदान करेगी। उनकी सफलता से प्रेरित होकर गांव के अन्य किसान भी मनरेगा के माध्यम से डबरी निर्माण और मत्स्य पालन की ओर अग्रसर हो रहे हैं। सरगुजा जिले में किसानों की आय बढ़ाने और जल संरक्षण को मजबूत करने के उद्देश्य से डबरी निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जिले में अब तक 487 आजीविका डबरियां स्वीकृत की जा चुकी हैं, जिनमें से 422 का निर्माण पूर्ण हो चुका है। इन डबरियों के माध्यम से वर्षा जल का संचयन हो रहा है, भू-जल स्तर में सुधार आ रहा है, खेतों में नमी बनी रह रही है तथा किसानों को सिंचाई और मत्स्य पालन जैसे अतिरिक्त आजीविका साधन उपलब्ध हो रहे हैं। मनरेगा के अंतर्गत निर्मित आजीविका डबरियां आज ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी मॉडल बनकर उभर रही हैं। यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ा रही है, बल्कि जल सुरक्षा और सतत ग्रामीण विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

सहकारी समिति में बिना किसी परेशानी के मिला उर्वरक, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का जताया आभार

खरीफ सीजन में किसानों को समय पर मिल रही खाद, सखौली के किसान कमलेश ने जताया संतोष सहकारी समिति में बिना किसी परेशानी के मिला उर्वरक, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का जताया आभार रायपुर,  राज्य शासन की किसान हितैषी पहल और कृषि विभाग की सतत निगरानी के परिणामस्वरूप किसानों को खरीफ सीजन के लिए आवश्यक उर्वरकों की सुगम उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत समय पर खाद उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे खेती-किसानी की तैयारियों को गति मिली है। सरगुजा जिले के विकासखंड अम्बिकापुर अंतर्गत ग्राम पंचायत सखौली के किसान कमलेश राजवाड़े ने उर्वरक वितरण व्यवस्था पर संतोष व्यक्त करते हुए बताया कि उन्हें समिति केंद्र में बिना किसी परेशानी के आवश्यक खाद उपलब्ध हो गया। उन्होंने कहा कि समिति पहुंचने पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उनका परमिट तत्काल जारी किया गया तथा आवश्यक उर्वरक भी आसानी से प्राप्त हो गया। कमलेश राजवाड़े ने बताया कि उनके पास लगभग 2 एकड़ कृषि भूमि है, जिसमें वे खरीफ सीजन में धान की खेती करते हैं। इसके अलावा वे वर्ष के अन्य समय में आलू, गोभी और टमाटर जैसी सब्जियों का उत्पादन भी करते हैं। उन्होंने बताया कि समिति से उन्हें खेती की आवश्यकता के अनुसार 2 बोरी यूरिया, 1 बोरी इफको (उर्वरक) तथा 1 बोरी राखड़ खाद प्राप्त हुआ है। समय पर उर्वरक उपलब्ध होने से फसल प्रबंधन में सुविधा होगी और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था के तहत समिति केंद्र में उर्वरक प्राप्त करने में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ा। पारदर्शी और सुव्यवस्थित वितरण प्रणाली से किसानों का समय बच रहा है तथा खेती की तैयारियां समय पर पूरी हो पा रही हैं। उर्वरकों की समयबद्ध उपलब्धता से प्रसन्न किसान कमलेश राजवाड़े ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर की गई व्यवस्थाओं से खेती-किसानी के कार्यों में काफी सुविधा हुई है। राज्य शासन द्वारा किसानों को समय पर कृषि आदान उपलब्ध कराने के प्रयासों का सीधा लाभ ग्रामीण अंचलों के किसानों को मिल रहा है।

150 करोड़ के नगर निगम घोटाले का खुलासा, फर्जी खातों के जरिए उड़ाए करोड़ों रुपये

पंचकूला/चंडीगढ़. पंचकूला नगर निगम में करीब 150 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में निकाली रकम का इस्तेमाल लग्जरी गाड़ियों की खरीद, अचल संपत्तियों में निवेश और कई स्तरों पर धन के ट्रांसफर के लिए किया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा विशेष अदालत में रखी गई रिपोर्ट के मुताबिक मुख्य आरोपित कोटक महिंद्रा बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक और डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पुष्पिंदर सिंह ने इस धन से बीएमडब्ल्यू 7 सीरीज, महिंद्रा थार, महिंद्रा स्कॉर्पियो-एन और एक मोटरसाइकिल खरीदी। मार्च में मामला उजागर होने से पहले इन सभी संपत्तियों और वाहनों को बेच दिया गया। इससे पूर्व ईडी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कोटक महिंद्रा बैंक के पूर्व डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पुष्पिंदर सिंह को गिरफ्तार कर लिया। एजेंसी ने अदालत में उन्हें इस पूरे कथित घोटाले का ‘मास्टरमाइंड’ बताते हुए दावा किया कि बैंकिंग सिस्टम और पद का इस्तेमाल कर नगर निगम की रकम को अवैध तरीके से बाहर निकाला गया। जांच एजेंसी के अनुसार नगर निगम पंचकूला के नाम पर दो बैंक खाते – 2015073031 और 2046279112 कथित रूप से जाली दस्तावेजों के जरिए खोले और संचालित किए गए। ईडी के अनुसार रजत दहरा को 88.17 करोड़, स्वाति तोमर को 31.58 करोड़, कपिल कुमार को 2.36 करोड़ और विनोद कुमार को 1.41 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए। 10 से 12 चेकों पर किए साइन कपिल कुमार ने जांच एजेंसी को बताया कि रजत दहरा ने बताया कि अच्छी नौकरी दिलाने का भरोसा देकर उसके नाम पर बैंक खाता खुलवाया और पुष्पिंदर सिंह के घर पर उससे 10-12 चेकों पर हस्ताक्षर करवा लिए। स्वाति तोमर ने बयान में कहा कि उसे भी बैंक खाते खुलवाने के लिए तैयार किया गया। उसके मुताबिक पुष्पिंदर सिंह और उनकी पत्नी प्रीति ठाकुर के प्रभाव में उसने पीएनबी, आइसीआइसीआइ और आइडीएफसी बैंक में खाते खुलवाए। स्वाति ने यह भी कहा कि उसने कभी पुष्पिंदर सिंह, प्रीति ठाकुर, रजत दहरा, आर्यन सिंह, समर मोहन रंगा, सनी गर्ग, प्रियंका गर्ग या उनसे जुड़ी संस्थाओं को कोई कर्ज नहीं दिया और कई लाभार्थियों को वह जानती तक नहीं थी। आरोपितों को नौ जून तक रिमांड पर भेजा पुष्पिंदर सिंह ने 2020 से 2023 के बीच रजत दहरा और स्वाति तोमर से 33 करोड़ रुपये ऋण के रूप में मिलने की बात स्वीकार की, जिनका उपयोग कथित तौर पर वाहन और संपत्तियां खरीदने में किया गया। पूर्व नगर निगम लेखा अधिकारी विकास कौशिक के हवाले से एजेंसी ने कहा कि नगर निगम और बैंक के बीच होने वाला भौतिक संवाद पुष्पिंदर सिंह और बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर दिलीप राघव के जरिए होता था। पहली जून को पुष्पिंदर सिंह की ओर से अदालत में कहा गया कि धनशोधन निवारण कानून की धारा 19 की शर्तें पूरी नहीं हुईं और हिरासत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। इसके बावजूद विशेष अदालत ने अंतिम लाभार्थियों और धन के प्रवाह की जांच के लिए उन्हें 9 जून तक ईडी रिमांड पर भेज दिया।

अमृतसर के दुर्ग्याणा मंदिर में सोशल मीडिया रील पर बवाल, धार्मिक भावनाएं आहत होने का आरोप

अमृतसर. अमृतसर के श्री दुर्ग्याणा तीर्थ की परिक्रमा में एक युवक और युवती द्वारा पंजाबी गीत पर वीडियो बनाने का मामला विवादों में घिर गया है। इस घटना को लेकर धार्मिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। श्री राम बालाजी धाम के प्रमुख एवं जगतगुरु स्वामी अशनील जी महाराज ने इस घटना को धार्मिक मर्यादा के विरुद्ध बताते हुए इसे बेअदबी की श्रेणी में रखा है। अशनील महाराज ने श्री दुर्ग्याणा प्रबंधक कमेटी के नेतृत्व पर भी सवाल उठाए हैं। स्वामी अशनील जी महाराज ने कहा कि परिक्रमा क्षेत्र जैसे पवित्र स्थान पर युवक और युवती द्वारा पंजाबी गीत पर कथित रूप से अनुचित तरीके से अभिनय करते हुए वीडियो बनाना अत्यंत निंदनीय है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं धार्मिक स्थलों की गरिमा और मर्यादा को प्रभावित करती हैं। उनके अनुसार यदि समय रहते सख्त कार्रवाई की जाती तो ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होती।  थोड़े समय में कई घटनाएं आई सामने उन्होंने यह भी कहा कि पहले भी कुछ मामलों में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप लगे थे, लेकिन उन घटनाओं में भी कठोर कदम नहीं उठाए गए। इसी कारण ऐसे मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। स्वामी अशनील जी महाराज ने कमेटी नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जिम्मेदारी तय करने की मांग की और कहा कि धार्मिक स्थलों की मर्यादा बनाए रखना प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। युवक-युवती ने स्वीकार की गलती दूसरी ओर, श्री दुर्गायाणा प्रबंधक कमेटी के महासचिव अरुण खन्ना ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वीडियो सामने आने के बाद संबंधित युवक और युवती ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांग ली है। उन्होंने बताया कि पारिवारिक सदस्यों ने भी इस घटना पर खेद व्यक्त किया और भविष्य में ऐसी गलती न होने का भरोसा दिया है। अरुण खन्ना ने अपील की कि बच्चों को धार्मिक स्थलों की मर्यादा और परंपराओं के प्रति जागरूक करें। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने की होड़ में किसी भी धार्मिक स्थल की गरिमा से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक स्थानों पर आने वाले सभी श्रद्धालुओं को मर्यादा और अनुशासन का पालन करना चाहिए।

दिल्ली अग्निकांड अपडेट: बेसमेंट का दरवाजा बंद होने से बढ़ी तबाही, 37 लोगों को बचाया गया

नई दिल्ली  राजधानी के भीषण अग्निकांड में अब तक 21 लोगों को मौत हो चुकी है। मालवीय नगर के रेस्टोरेंट में लगी आग के मामले में 37 लोगों को बचाया जा चुका है। जैसे-जैसे रेस्क्यू और जांच आगे बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे एक से हैरान कर देने वाले खुलासे हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि जिस बिल्डिंग में आग लगी, उसके बेसमेंट का मुख्य दरवाजा बंद था। आग लगने के शायद इसी हड़बड़ी में कई लोग तीसरी मंजिल से नीचे कूद गए। अब सवाल उठ रहा है कि 21 जान लेने वाली इस लापरवाही का जिम्मेदार कौन है? घायलों को लगीं तीन तरह की चोटें अग्निकांड में घायल लोगों को दो-तीन तरह की चोटें आई हैं। घायलों में से कुछ लोगों को स्मॉग की वजह से लंग्स में इंजरी हुई है। वहीं, दूसरी तरफ कुछ लोग बर्निंग का शिकार हुए हैं। जो लोग तीसरी मंजिल से कूदे हैं, उन्हें हड्डी की चोट आई है। कूदने वाले लोगों को बचाने के लिए स्थानीय लोगों ने नीचे गद्दा भी बिछाया था। जिन 21 लोगों की मौत हुई है, उसमें 9 महिलाएं और 9 पुरुषों की पुष्टि हो चुकी है। बाकी की पहचान की जा रही है। मरने वालों में ज्यादा अफ्रीकी नागरिक आम आदमी पार्टी के नेता सोमनाथ भारती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कहा कि आज सुबहमेरे विधानसभा क्षेत्र हौजरानी में एक बहुमंजिला इमारत में भीषण आग लग गई। मरने वालों में ज्यादा अफ्रीकी नागरिक हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगने के बाद रेस्टोरेंट में धुआं भर गया, जिसकी वजह से कई लोग बेहोश हो गए। मौके पर पहुंची पुलिस, दमकल विभाग और एंबुलेंस कर्मियों ने लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। तीन लोगों को बेसमेंट से निकाला गया बताया जा रहा है कि दमकल विभाग को सुबह करीब 8.50 बजे मालवीय नगर के 'लेमन ग्रीन रेस्टोरेंट' में आग लगने की सूचना मिली थी। आग बुझाने के लिए दमकल की 10 गाड़ियां और आपातकालीन वाहन मौके पर भेजे गए। बेसमेंट से 3 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया था। आशंका जताई जा रही है कि मृतकों की संख्या अभी और बढ़ सकती है। फिलहाल आग लगने का स्पष्ट कारण नहीं पता चल सका है।  

कारोबारी सेटलमेंट के बाद भी केस चलाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CBI की कार्रवाई खारिज

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के कारोबारी विजय कुमार केला को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के कारोबारी की अपील स्वीकार करते हुए सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर, चार्जशीट और निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया है. मामले में कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि यदि बैंक लोन अकाउंट का सेटलमेंट आपसी सहमति से हो चुका है और उस पर डेब्ट्स रिकवरी ट्रिब्यूनल की मुहर लग चुकी है, तो उसके बाद कर्जदार के खिलाफ धोखाधड़ी का क्रिमिनल केस चलाना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है. शीर्ष कोर्ट ने कहा कि कमर्शियल विवादों के निपटारे के बाद भी यदि आपराधिक मुकदमे चलते रहेंगे तो देश के आर्थिक सिस्टम पर इसका बुरा असर पड़ेगा और लोग बैंकों के साथ वन-टाइम सेटलमेंट करने से कतराएंगे. यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की बेंच सुनाया. दरअसल, रायपुर निवासी विजय कुमार केला के खिलाफ सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर चार्जशीट पेश की थी. जिसे लेकर कारोबारी ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी लगाई थी. केला ने बताया कि फर्म मेसर्स मोहन ट्रेडर्स को उनके बड़े भाई स्वर्गीय परमानंद केला संभालते थे. फर्म ने यूको बैंक से लोन लिया, जो वर्ष 2009 तक 8 करोड़ रुपए हो गया था. इस लोन के बदले रायपुर के अमलीडीह और बोरियाखुर्द की संपत्तियां गिरवी रखी गई थीं. नवंबर 2009 में परमानंद केला के आकस्मिक निधन के बाद कारोबार ठप हो गया और लोन की किस्तें जमा नहीं की जा सकीं. इसके चलते 31 दिसंबर 2010 को बैंक ने इस खाते को एनपीए घोषित कर दिया और बकाया लोन की वसूली के लिए डीआरटी, जबलपुर में केस पेश किया. डीआरटी में मामला लंबित रहने के दौरान दोनों पक्षों में 6.49 करोड़ रुपए के बकाया के बदले 4.25 करोड़ रुपए में फुल एंड फाइनल सेटलमेंट तय हुआ. शिकायत खाता बंद होने के करीब ढाई साल बाद फरवरी 2018 में यूको बैंक के जोनल हेड ने सीबीआई में शिकायत करते हुए आरोप लगाया, कि केला ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर लोन लिमिट बढ़वाने के लिए सीए की फर्जी ऑडिट रिपोर्ट पेश की थी और कीमती संपत्तियों को मुक्त कराकर बैंक के पास एक अतिक्रमण वाली जमीन गिरवी रख दी. CBI ने केस दर्ज कर रायपुर की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी, जिस पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी रोक लगाने से इनकार कर दिया, तब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था.