samacharsecretary.com

शक्ति सदन और मिशन वात्सल्य अनुदान ई-पोर्टल लॉन्च, मंत्री भूरिया ने किया शुभारंभ

मंत्री सुश्री भूरिया ने शक्ति सदन और मिशन वात्सल्य अनुदान ई-पोर्टल का किया शुभारंभ डिजिटल प्लेटफॉर्म से बढ़ेगी पारदर्शिता रियल टाइम मॉनिटरिंग और डेटा आधारित निर्णय होंगे आसान भोपाल  महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने मंगलवार को मंत्रालय में मिशन शक्ति के शक्ति सदन और मिशन वात्सल्य की अशासकीय बाल देखरेख संस्थाओं के लिए अनुदान ई-पोर्टल का शुभारंभ किया। सरकार ने प्रदेश में इन संस्थाओं को अनुदान देने की अब तक चली आ रही मैनुअल प्रक्रिया को डिजिटल व्यवस्था में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आवेदन, दस्तावेज अपलोड, प्रस्ताव परीक्षण, स्वीकृति, भुगतान और प्रगति की निगरानी सहित पूरी प्रक्रिया एक ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर होगी। फाइलों की जगह डिजिटल ट्रैकिंग, हर स्तर पर जवाबदेही ऑनलाइन पोर्टल से अनुदान प्रस्तावों की प्रक्रिया को ट्रैक किया जा सकेगा। संस्थाओं को बार-बार दस्तावेज और प्रस्ताव लेकर विभागीय कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम होगी। प्रस्तावों के परीक्षण और स्वीकृति की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी तथा भुगतान में लगने वाले समय को न्यूनतम करने में मदद मिलेगी। रियल टाइम मॉनिटरिंग से यह भी पता रहेगा कि किस संस्था का प्रस्ताव किस स्तर पर है। अनुदान व्यवस्था में आएगी गति, पारदर्शिता और जवाबदेही पोर्टल के लागू होने से अनुदान प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी तथा कागजी कार्यवाही कम होगी। डिजिटल रिकॉर्ड के कारण दस्तावेजों के संधारण और प्रस्तावों की निगरानी अधिक व्यवस्थित तरीके से की जा सकेगी। उपलब्ध डेटा के आधार पर विभाग को योजनाओं की प्रगति का आंकलन करने और आवश्यक निर्णय लेने में भी सुविधा होगी। 13 जिलों में 14 शक्ति सदन, 2,386 महिलाओं को मिला लाभ मिशन शक्ति में प्रदेश के 13 जिलों में 14 शक्ति सदन संचालित हैं। भोपाल, उज्जैन, नर्मदापुरम, जबलपुर, बालाघाट, खंडवा, ग्वालियर, बैतूल, मंडला, मुरैना, राजगढ़, पांढुर्णा और छतरपुर में संचालित इन शक्ति सदनों में कठिन परिस्थितियों में जीवनयापन करने वाली, निराश्रित, जेल से रिहा महिला कैदी, प्राकृतिक आपदा से प्रभावित तथा हिंसा से पीड़ित महिलाओं को आश्रय और पुनर्वास की सुविधाएं दी जाती हैं। शक्ति सदनों में महिलाओं को आश्रय, पोषण, वस्त्र, स्वास्थ्य सुविधा, कानूनी सलाह एवं सहायता सहित आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। विगत वर्ष 2,386 महिलाओं को इन सेवाओं का लाभ मिला। 130 बाल देखरेख संस्थाओं में 2,377 बच्चे मिशन वात्सल्य में किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार प्रदेश में 130 बाल देखरेख संस्थाएं संचालित हैं। इनमें 62 बाल गृह, 12 खुला आश्रय गृह, 35 विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण अभिकरण, 18 सम्प्रेक्षण गृह और 3 विशेष गृह शामिल हैं। इन संस्थाओं में वर्तमान में 2,377 बच्चे निवासरत हैं। इन संस्थाओं के माध्यम से देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले तथा विधि का उल्लंघन करने वाले बच्चों को संरक्षण उपलब्ध कराने के साथ उनके पारिवारिक पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। मिशन वात्सल्य के तहत वर्तमान में 79 अशासकीय बाल देखरेख संस्थाओं को अनुदान दिया जा रहा है, जिनमें 44 बाल गृह, 9 खुला आश्रय गृह और 26 विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण अभिकरण शामिल हैं। 16 सितम्बर को संस्थाओं के प्रबंधक-लेखापालों का प्रशिक्षण पोर्टल के संचालन और रिपोर्टिंग के लिए 16 सितम्बर 2026 को होटल मैनेजमेंट एवं इंस्टीट्यूट, भोपाल में तकनीकी प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। इसमें शक्ति सदन और बाल देखरेख संस्थाओं से प्रबंधक एवं लेखापाल सहित दो-दो प्रतिभागी शामिल होंगे। प्रशिक्षण में पोर्टल के संचालन, ऑनलाइन आवेदन, दस्तावेज अपलोड और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया समझाई जाएगी  

गांव से दुनिया के बाजार तक पहुंचेंगे यूपी के 3 हजार से अधिक उत्पाद, दीदियों को मिलेगी डिजिटल मार्केट की ताकत

अब ग्लोबल मार्केट में दिग्गज कंपनियों को टक्कर देंगी यूपी की दीदियां अब गांव से दुनिया के बाजार तक पहुंचेंगे तीन हजार से अधिक उत्पाद ओएनडीसी, ई-सरस, प्रेरणा मार्ट, मीशो, अमेजन और फ्लिपकार्ट के जरिए मंगा सकेंगे स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद योगी सरकार में दीदियों को अब मिलेगी ब्रांडिंग, बिक्री और डिजिटल बाजार की ताकत 543 प्रेरणा सरस स्टोर और स्थानीय उत्पादों के लिए ऑनलाइन-ऑफलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म तैयार लखनऊ  प्रदेश की महिलाएं अब ग्लोबल मार्केट में दिग्गज कंपनियों को टक्कर देंगी। सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को बड़े बाजार से जोड़ने के लिए 543 प्रेरणा सरस स्टोर स्थापित किए गए हैं। वहीं 3,000 से अधिक उत्पादों के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म विकसित किए गए हैं। इससे ग्रामीण उत्पादों को ब्रांडिंग, बिक्री और डिजिटल बाजार की ताकत देने का रास्ता खुला है। अब स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद ओएनडीसी, ई-सरस, प्रेरणा मार्ट, मीशो, अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए बड़े बाजार तक पहुंच सकेंगे। जनपद और ब्लॉक स्तर पर स्थापित प्रेरणा सरस स्टोर जहां स्थानीय उत्पादों को व्यवस्थित बिक्री मंच दे रहे हैं, वहीं डिजिटल प्लेटफॉर्म उनकी पहुंच गांव और जिले से बाहर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक बढ़ाने का माध्यम बन रहे हैं। छोटे उद्यमों का विस्तार करने का अवसर मिलेगा : अरुण कुमार स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए उत्पादन के बाद बाजार तक पहुंच उनकी उद्यमिता की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है। योगी सरकार ने इस कड़ी को मजबूत करने के लिए स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग, मार्केटिंग और बिक्री का नेटवर्क तैयार किया है। इससे समूहों को केवल उत्पाद तैयार करने के बजाय बाजार की मांग समझकर अपने छोटे उद्यमों का विस्तार करने का अवसर मिलेगा। ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार के अनुसार, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को केवल बचत और ऋण तक सीमित रखने के बजाय उन्हें उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर है। उत्पादन के साथ पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार से जुड़ाव बढ़ने से ग्रामीण महिलाओं के छोटे उद्यमों को विस्तार का अवसर मिल रहा है। स्थानीय उत्पादों को दूर बैठे ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा डिजिटल बाजार की दिशा में बिजनौर राज्य एग्रीगेशन सेंटर के माध्यम से ऑनलाइन विपणन कार्य शुरू किया जा चुका है। अलग-अलग समूहों के उत्पादों को एक मंच पर लाकर उनकी बिक्री और बाजार तक पहुंच को व्यवस्थित करने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे स्थानीय उत्पादों को दूर बैठे ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा। खासकर किसी जिले या क्षेत्र विशेष की पहचान वाले उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने में यह व्यवस्था मददगार होगी। बाजार से जुड़ाव से बनेगी ब्रांड वैल्यू स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए बाजार तक पहुंच सिर्फ बिक्री बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि उत्पाद की पहचान और ब्रांड वैल्यू बनाने का अवसर भी है। प्रेरणा सरस स्टोर और ऑनलाइन-ऑफलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए उत्पादन से आगे बढ़कर ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर जोर दिया जा रहा है। मिशन निदेशक अरुण कुमार के मुताबिक, बाजार से जुड़ाव महिलाओं को अपने उत्पादों की मांग समझने और उसी के अनुरूप उत्पादन व विपणन की दिशा तय करने का अवसर देता है। इससे समूहों की गतिविधियां केवल आजीविका तक सीमित न रहकर छोटे उद्यमों का रूप ले सकती हैं। लोकल हुनर की ग्लोबल उड़ान 3,000 से अधिक उत्पादों के लिए 543 प्रेरणा सरस स्टोर, मार्केटिंग प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन विपणन ग्रामीण महिला उद्यमिता के बदलते स्वरूप की तस्वीर पेश करते हैं। गांव में तैयार उत्पाद अब गांव में ही बिकने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि स्टोर से डिजिटल प्लेटफॉर्म और स्थानीय बाजार से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचेंगे। यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश की ग्रामीण ‘दीदियों’ के स्थानीय हुनर को बाजार, पहचान और ब्रांड वैल्यू देने के साथ उन्हें लोकल से ग्लोबल कारोबार की दिशा में आगे बढ़ाने का नया रास्ता तैयार कर रही है।

झारखंड के युवाओं को राज्य में ही तकनीकी प्रशिक्षण देने के लिए एचटीआई के पुनरुद्धार का प्रस्ताव तैयार

 रांची झारखंड के युवाओं के लिए तकनीकी प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र रहे एचईसी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (एचटीआई) को फिर से शुरू करने की तैयारी तेज हो गई है। एचईसी प्रबंधन ने संस्थान को पुनर्जीवित करने के लिए प्रस्ताव तैयार किया है। इसके तहत एचटीआई के भवन और संस्थान को निजी एजेंसी को देने पर विचार किया जा रहा है, ताकि यहां दोबारा शिक्षण एवं प्रशिक्षण शुरू कराया जा सके। प्रस्ताव को एचईसी बोर्ड आफ डायरेक्टर्स के समक्ष अगली बैठक में रखा जाएगा। बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद एचईसी प्रबंधन नेशनल काउंसिल फार वोकेशनल ट्रेनिंग (एनसीवीटी) से एचटीआई की संबद्धता फिर से बहाल कराने की प्रक्रिया शुरू करेगा। संबद्धता मिलने के बाद संस्थान को नए स्वरूप में संचालित करने के लिए एजेंसी का चयन किया जायेगा। इससे लंबे समय से बंद पड़े एचटीआई में फिर से तकनीकी प्रशिक्षण की राह खुल सकती है। युवाओं को नहीं जाना पड़ेगा दूसरे राज्यों में एचटीआई के दोबारा शुरू होने का सबसे बड़ा लाभ झारखंड के युवाओं को मिलेगा। फिलहाल औद्योगिक प्रशिक्षण के लिए राज्य के कई युवाओं को दूसरे शहरों और राज्यों का रुख करना पड़ता है। एचटीआई में प्रशिक्षण शुरू होने पर उन्हें अपने ही राज्य में रोजगारपरक तकनीकी शिक्षा मिल सकेगी। प्रबंधन का मानना है कि संस्थान को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप विकसित कर कुशल तकनीशियन तैयार किए जा सकते हैं। इससे युवाओं के लिए एचईसी समेत राज्य और देश की औद्योगिक कंपनियों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को निजी उद्योगों, मैन्यूफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग और तकनीकी सेवा क्षेत्रों में भी काम मिल सकता है। पांच ट्रेड में हर साल 200 युवाओं को मिलता था प्रशिक्षण एचटीआई में पहले आईटीआई के तहत इलेक्ट्रिशियन, फीटर, मशीनिस्ट, कोपा और वेल्डर ट्रेड संचालित होते थे। इलेक्ट्रिशियन, फीटर और मशीनिस्ट दो वर्षीय, जबकि कोपा और वेल्डर एक वर्षीय ट्रेड थे। दो शिफ्ट में संचालित प्रशिक्षण में पांचों ट्रेडों में हर वर्ष करीब 200 युवाओं का नामांकन होता था। यहां प्रशिक्षण लेने वाले कई युवा एचईसी के अलावा देश की बड़ी औद्योगिक कंपनियों में काम कर रहे हैं। कुछ प्रशिक्षुओं के विदेशों में काम करने की भी जानकारी है। ऐसे में संस्थान के पुन: शुरू होने से राज्य में तकनीकी मानव संसाधन तैयार करने की क्षमता मजबूत हो सकती है। 2022-23 से बंद है नया नामांकन एचईसी की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण पिछले कुछ वर्षों में एचटीआई का संचालन प्रभावित हुआ। वर्ष 2022-23 से यहां नए विद्यार्थियों का नामांकन बंद हो गया। इसके बाद एनसीवीटी ने पहले कोपा और वेल्डर ट्रेड की संबद्धता समाप्त की। बाद में इलेक्ट्रिशियन, फीटर और मशीनिस्ट ट्रेड भी डिफिलिएट हो गए। इस तरह सभी पांच ट्रेड बंद हो गए। वर्तमान में संस्थान में केवल दो कर्मचारी कार्यालय और अभिलेखों की देखरेख के लिए तैनात हैं। 150 से अधिक मशीनें, चोरी से बढ़ी चिंता लंबे समय से बंद संस्थान में उपकरणों की सुरक्षा भी बड़ी चुनौती बन गई है। कर्मचारियों के अनुसार परिसर से कई उपकरण चोरी हो चुके हैं। संस्थान का ट्रांसफार्मर तक गायब हो गया है। मशीनों के मोटर और अन्य उपकरणों के साथ लेथ मशीनों के पुर्जे भी चोरी होने की बात सामने आई है। एचटीआई में 150 से अधिक छोटी-बड़ी मशीनें हैं। ऐसे में प्रबंधन के सामने संस्थान को दोबारा शुरू करने के साथ उसकी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना भी जरूरी होगा। प्रस्तावित निजी एजेंसी के माध्यम से संचालन शुरू होने पर संस्थान की मशीनों और आधारभूत संरचना का उपयोग फिर से प्रशिक्षण के लिए किया जा सकेगा। एचईसी कर्मचारियों के वीपीएफ भुगतान व सेटलमेंट का मामला मंत्रालय पहुंचा एचईसी कर्मचारियों के वालंटरी प्रोविडेंट फंड (वीपीएफ) अंशदान की वापसी और उससे जुड़े सेटलमेंट का मामला अब भारी उद्योग मंत्रालय तक पहुंच गया है। मंत्रालय के सीपीएसई-एचईसी से संबंधित अनुभाग ने इस मामले में एचईसी के सीएमडी को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है। मंत्रालय की ओर से भेजे गए पत्र में एचईसी कर्मचारी व श्रमिक नेता लालदेव सिंह की ओर से भेजे गए छह सितंबर के ई-मेल का उल्लेख किया गया है। ई-मेल में वीपीएफ अंशदान की वापसी तथा कर्मचारियों से संबंधित सेटलमेंट के मुद्दे उठाए गए हैं। मंत्रालय ने संबंधित ई-मेल को एचईसी प्रबंधन को अग्रसारित करते हुए मामले में अपने स्तर से आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। पत्र की प्रति एचईसी के उपाध्यक्ष (मानव संसाधन) को भी भेजी गई है। इससे कर्मचारियों के वीपीएफ से जुड़े लंबित मामलों के समाधान की उम्मीद बढ़ी है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से विभिन्न वित्तीय देनदारियों और सुविधाओं को लेकर समस्याएं बनी हुई हैं। ऐसे में मंत्रालय की ओर से पत्र भेजे जाने को महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अब एचईसी प्रबंधन द्वारा मामले की जांच कर वीपीएफ अंशदान की वापसी और संबंधित सेटलमेंट पर क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर कर्मचारियों की नजर है।

बिजली बिल के बकायेदारों के खिलाफ चलेगा बड़ा अभियान, छह माह से दस साल तक के डिफॉल्टर्स पर होगी कुर्की

लखनऊ उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में लोग बिजली बिलों के बकाएदार हैं। मध्यांचल विद्युत निगम के अंतर्गत आने वाले जिलों में तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। निगम की सितम्बर 2026 में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि करीब 15.65 लाख उपभोक्ताओं ने बिजली कनेक्शन लेने के बाद से आज तक एक बार भी बिल जमा नहीं किया है। इन बकायेदारों में छह माह से लेकर 10 साल तक पुराने उपभोक्ता शामिल हैं, जिन पर 10 हजार रुपये से लेकर पांच लाख रुपये तक का भारी-भरकम बकाया है। अब इनके खिलाफ बड़ा अभियान चलाया जाएगा। कुर्की तक की कार्रवाई की जाएगी। विभाग की नौ सितम्बर की रिपोर्ट के मुताबिक जानकीपुरम 661, गोमतीनगर 145, अमौसी 8342, लखनऊ सेंट्रल जोन 40, सीतापुर जोन 3,35,962, रायबरेली जोन 1,12,073, अयोध्या जोन 3,66,298, देवीपाटन जोन 3,78,204, बरेली-एक जोन 1,14,749 और बरेली-दो जोन 2,48,726 है। यानि 15,65,200 बकायेदार है। विभाग द्वारा कई बकायेदारों को कुर्की के नोटिस जारी किये जा चुके हैं, फिर भी न तो उनसे वसूली हो सकी है और न ही उनके बिजली कनेक्शन काटे गए हैं। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की इस लापरवाही के कारण निगम को अरबों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। एमडी ने सभी संबंधित एक्सईएन और एसडीओ को निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे डिफाल्टरों के खिलाफ तत्काल अभियान चलाकर वसूली की जाए। यदि बकाया राशि जमा नहीं की जाती है, तो उनके कनेक्शन काटने के साथ-साथ कुर्की की विधिक कार्रवाई में तेजी लाई जाएगी। बिजली संकट को लेकर उपभोक्ता परिषद आक्रोशित वहीं, कोयले की कमी की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की स्थिति को राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने पहले से तैयारियों में बरती गई लापरवाही बताया है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि हर साल सितंबर में बारिश और जलभराव जैसी स्थिति होती है। हालांकि, दिक्कत इस बार केवल इसलिए हुई क्योंकि पावर कॉरपोरेशन ने अपनी तैयारियां पूरी नहीं रखी थीं। उन्होंने कहा कि यूपी में 2000 से 3000 मेगावॉट बिजली की कमी पहले ही बनी हुई थी, लेकिन सोमवार को यूपीएसएलडीसी के आंकड़ों के मुताबिक लंबे समय के लिए बंद हुईं और मशीनों की वजह से यह कमी 5340 मेगावॉट हो गई है। ओबरा-सी की यूनिट-1 व यूनिट-2, मेजा यूनिट-1 और हरदुआगंज की यूनिट-9 से उत्पादन नहीं हो रहा है। इसके अलावा रोजा यूनिट-2, अनपरा यूनिट-7, घाटमपुर यूनिट-1, हरदुआगंज एक्सटेंशन-2 की यूनिट-1 और जवाहरपुर यूनिट-2 भी बंद है। यह कोयले की उपलब्धता में कमी के बजाय प्रबंधन में की गई चूक का नतीजा है। सितंबर 2025 में प्रदेश ने 30,255 मेगावॉट अधिकतम बिजली आपूर्ति की गई थी, जबकि इस साल सितंबर में आपूर्ति करीब 25,000-26,000 मेगावॉट के आसपास बनी है, जबकि जरूरत 27,000-29,000 मेगावॉट है।

जलभराव को लेकर योगी सरकार सख्त, नगरीय निकायों को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में बारिश के दौरान जलभराव की समस्या से आमजन को राहत दिलाने के लिए योगी सरकार ने नगरीय निकायों को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए हैं। नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने प्रदेश के सभी नगरीय क्षेत्रों में जल निकासी व्यवस्था की नियमित निगरानी और संवेदनशील इलाकों में पहले से आवश्यक इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मंत्री ए.के. शर्मा ने अधिकारियों से कहा कि वाराणसी सहित प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में जल निकासी व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। प्रत्येक संवेदनशील क्षेत्र को चिन्हित कर वहां नालों, सीवर लाइनों और पम्पिंग स्टेशनों की स्थिति की पहले से समीक्षा की जाए। जहां कहीं भी जल निकासी की व्यवस्था में कमी दिखाई दे, वहां तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जाए। अधिकारी संभावित जलभराव वाले क्षेत्रों में पहले से आवश्यक तैयारियां पूरी रखें। नगर विकास मंत्री ने स्पष्ट किया कि शासन की ओर से अधिकारियों को पर्याप्त संसाधन और दिशा-निर्देश उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ऐसे में कार्यों के क्रियान्वयन में लापरवाही या उच्चाधिकारियों के निर्देशों की अनदेखी स्वीकार नहीं होगी। किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय करते हुए कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार नागरिकों को बेहतर, सुगम और सुरक्षित नगरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। एके शर्मा ने कहा कि वाराणसी जैसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण शहर में जल निकासी, सीवर और स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाना सरकार की प्राथमिकता है। जलभराव के तत्काल समाधान के साथ इसके स्थायी निराकरण के लिए भी प्रभावी कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है। योगी सरकार की प्राथमिकता आमजन को राहत और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। वाराणसी में हुई कार्रवाई इसी जवाबदेही का संदेश है कि जनहित के कार्यों में जिम्मेदारी से समझौता करने वालों के खिलाफ शासन सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।

बिना चंदा लिए आयोजित होगी रांची के नामकुम स्टेशन की दुर्गा पूजा, दान पेटी के पैसों से होगी गरीबों की मदद

रांची  दुर्गापूजा को लेकर राजधानी में तैयारियां शुरू हो गई हैं। नामकुम स्टेशन के समीप जय माता दी क्लब की ओर से इस वर्ष आकर्षक और भव्य पूजा पंडाल का निर्माण कराया जाएगा। खास बात यह होगी कि इस बार पंडाल जयपुर के प्रसिद्ध हवा महल की तर्ज पर तैयार किया जाएगा। पंडाल श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा। क्लब के अध्यक्ष विनोद सिंह ने बताया कि इस वर्ष दुर्गापूजा के लिए पंडाल को भव्य रूप देने की तैयारी है। जयपुर के हवा महल की तर्ज पर बनने वाले पंडाल की चौड़ाई करीब 70 फीट और ऊंचाई 55 फीट होगी। पंडाल परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखा जाएगा। पूजा के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है। बिना चंदा होगी पूजा, नहीं लिया जाएगा एक रुपया क्लब की ओर से इस वर्ष पूजा आयोजन के लिए किसी भी व्यक्ति से चंदा नहीं लिया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि यह पूजा रांची ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड में अपने तरह की विशेष पूजा होगी, जहां चंदा नहीं लिया जाता है। इसके लिए पूजा समिति की ओर से पंडाल परिसर में एक दान पेटी रखी जाएगी। श्रद्धालु अपनी इच्छा के अनुसार इसमें सहयोग राशि डाल सकेंगे। वहीं दान पेटी में जमा होने वाली पूरी राशि का उपयोग किसी जरूरतमंद और गरीब परिवार की बेटी की शादी में सहयोग के लिए किया जाएगा। क्लब का उद्देश्य पूजा के साथ सामाजिक सेवा को भी बढ़ावा देना है। पूजा के दौरान लगातार चार दिनों तक भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा। इसमें श्रद्धालुओं को प्रसाद उपलब्ध कराया जाएगा। 18 से 20 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान जय माता दी क्लब की ओर से दुर्गापूजा आयोजन की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। पंडाल, विद्युत सज्जा, पूजा और अन्य व्यवस्थाओं को मिलाकर इस बार करीब 18 से 20 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। आयोजकों के अनुसार पूजा को भव्य बनाने के साथ सामाजिक सरोकार को भी प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं पूजा समिति की ओर से सुरक्षा को लेकर सीसीटीवी कैमरा व सुरक्षा दल का गठन किया गया है। यह सुरक्षा दल 24 घंटे मां भवानी के भक्तों की सेवा में तत्पर रहेंगे।     प्रत्येक साल नामकुम स्टेशन का पूजा पंडाल सबसे चर्चित पूजा पंडालों में एक होता है। हर बार श्रद्धालुओं के लिए खास होता है। इस बार 4 दिनों तक भंडारा का आयोजन किया जाएगा। भंडारे के माध्यम से जरूरतमंदों तक मां का प्रसाद पहुंचाने का प्रयास होगा। मां से मांगी गई मुराद हर साल पुरी होती है, इसे लिए यह पंडाल मां भवानी को समार्पित होगा। – विनोद सिंह, अध्यक्ष, जय माता दी क्लब, नामकुम स्टेशन  

जिला परिषद, पंचायत समिति और सरपंच पदों के लिए आरक्षण लॉटरी अब चुनाव बाद होगी जारी

जयपुर निर्वाचन आयोग को इस कार्यक्रम में बदलाव करने के संबंध में सुझाव दिया था, जिसपर आयोग आने बदलाव करने का फैसला लिया है। पंचायती राज विभाग की ओर से राज्य निर्वाचन आयोग को अवगत कराया गया था कि शहरी निकाय चुनाव में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के निर्वाचन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही पंचायती राज संस्थाओं की आरक्षण लॉटरी निकाली जाए। गौरतलब है कि ग्रामीण राजस्थान के सियासी गलियारों में पंचायती राज चुनावों को लेकर काफी लंबे समय से सरगर्मी बनी हुई है। तय शेड्यूल के मुताबिक 17 सितंबर को जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए और 18 सितंबर को ग्राम पंचायतों के सरपंच व वार्ड पंचों के लिए जिला मुख्यालयों पर पारदर्शी लॉटरी प्रणाली से आरक्षण तय किया जाना था। आरक्षण की स्थिति साफ होने के बाद ही चुनाव लड़ने के इच्छुक ग्रामीण नेता और कार्यकर्ता अपनी-अपनी दावेदारी पक्की करने वाले थे। लेकिन अब इस पूरी प्रक्रिया के टलने से चुनाव लड़ने का इंतजार कर रहे प्रत्याशियों को थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा। जल्द ही नई तिथियों की औपचारिक घोषणा कर दी जाएगी। समझिए मुख्य वजह पंचायती राज संस्थाओं की आरक्षण लॉटरी की तारीखें आगे बढ़ाने के पीछे सबसे मुख्य कारण शहरी निकायों (नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिका) में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के लिए चल रही चुनाव प्रक्रिया है: 17 सितंबर का निकाय शेड्यूल: 17 सितंबर 2026 को शहरी निकाय चुनाव में अध्यक्ष (मेयर/सभापति/अध्यक्ष) पद के नामांकन पत्रों की संवीक्षा का महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्य होना तय है। 18 सितंबर का निकाय शेड्यूल: 18 सितंबर 2026 को प्रत्याशियों द्वारा नाम वापसी और अंतिम उम्मीदवारों को चुनाव चिन्हों का आवंटन किया जाना है। प्रशासनिक अमले की व्यस्तता: जिला कलेक्टर, उपखंड अधिकारी (SDO), तहसीलदार और पुलिस महकमा पूरी तरह से निकाय चुनाव की व्यवस्थाओं में व्यस्त रहेगा। एक ही समय पर निकाय चुनाव और पंचायती राज लॉटरी दोनों का संचालन करना प्रशासनिक दृष्टिकोण से बेहद चुनौतीपूर्ण था। अब तक का प्रस्तावित कार्यक्रम पंचायती राज विभाग द्वारा पहले से तैयार किए गए खाके के अनुसार, राज्य में पंचायती राज संस्थाओं के आम चुनाव को हर हाल में 15 नवंबर 2026 तक पूरा कराया जाना कानूनी रूप से अनिवार्य है। पुरानी समय-सीमा: 17 सितंबर को जिला परिषद-पंचायत समिति और 18 सितंबर को सरपंचों के लिए लॉटरी निकलने के तुरंत बाद राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव की औपचारिक अधिसूचना जारी करने वाला था। संशोधित प्रक्रिया: अब माना जा रहा है कि निकाय चुनाव में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के चुनाव (21-22 सितंबर) संपन्न होने के तुरंत बाद ही पंचायती राज के लिए नई लॉटरी तिथियों का ऐलान किया जाएगा। 15 नवंबर की डेडलाइन: तिथियों में मामूली बदलाव के बावजूद राज्य निर्वाचन आयोग का लक्ष्य 15 नवंबर 2026 तक सभी चरणों की मतदान प्रक्रिया पूरी कराकर नए जनप्रतिनिधियों का गठन करने का रहेगा। ग्रामीण क्षेत्रों और दावेदारों पर क्या पड़ेगा असर? राजस्थान के ग्रामीण अंचल में सरपंच और पंचायत समिति सदस्य बनने का सपना देख रहे स्थानीय युवाओं और वरिष्ठ नेताओं की नजरें पूरी तरह से इस आरक्षण प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं। जब तक यह तय नहीं हो जाता कि कौन सी सीट महिला, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) या सामान्य श्रेणी के लिए आरक्षित होगी, तब तक प्रत्याशी अपने स्तर पर प्रचार अभियान पूरी तरह शुरू नहीं कर पा रहे हैं। लॉटरी टलने से दावेदारों में थोड़ा असमंजस जरूर बढ़ा है, लेकिन प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यह केवल कुछ ही दिनों की देरी है। निकाय चुनाव संपन्न होते ही सितंबर के अंतिम सप्ताह में ही नई आरक्षण सूची जारी कर दी जाएगी, जिससे उम्मीदवारों को अपनी चुनावी रणनीति बनाने के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा

एआई आधारित वॉइस चैटबॉट और ई-जनसुनवाई व्यवस्था का अवलोकन कर अधिकारियों को दिए आवश्यक दिशा-निर्देश

जयपुर अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रशिक्षण एवं एचसीएम रीपा की महानिदेशक श्रेया गुहा ने राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन 181 एवं संपर्क पोर्टल की कार्यप्रणाली का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने राज्य स्तरीय डैशबोर्ड का बारीकी से अवलोकन करते हुए आमजन की समस्याओं के पारदर्शी, त्वरित एवं प्रभावी समाधान के लिए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। एआई आधारित वॉइस चैटबॉट की कार्यप्रणाली परखी निरीक्षण के दौरान महानिदेशक ने संपर्क पोर्टल पर संचालित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित वॉइस चैटबॉट की कार्यप्रणाली को परखा। उन्होंने कहा कि चैटबॉट के माध्यम से मिल रहे ग्रीवेंस रिस्पॉन्स सराहनीय हैं। साथ ही उन्होंने निर्देश दिए कि वॉइस चैटबॉट के जरिए ग्रीवांस रिड्रेसल व्यवस्था में और अधिक सकारात्मक एवं गुणात्मक सुधार लाया जाए, ताकि परिवादियों को सहजता से अपनी बात रखने और त्वरित समाधान का लाभ मिल सके। केंद्र प्रवर्तित योजनाओं के लिए पृथक श्रेणीकरण का सुझाव गुहा ने समीक्षा के दौरान सुझाव दिया कि भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित एवं केंद्र प्रवर्तित योजनाओं के लाभ से संबंधित प्राप्त होने वाली परिवेदनाओं को अलग से श्रेणीबद्ध किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे योजनाओं से जुड़े प्रकरणों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित हो सकेगी और पात्र लाभार्थियों तक उनका हक समयबद्ध रूप से पहुंच सकेगा। ई-जनसुनवाई में सीधे सुनीं आमजन की समस्याएं महानिदेशक ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आधारित ई-जनसुनवाई व्यवस्था का भी प्रत्यक्ष अवलोकन किया। उन्होंने जनसुनवाई के माध्यम से जुड़े परिवादियों की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ सुना और संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राप्त प्रकरणों का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। निरीक्षण के दौरान विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं आईटी विंग के तकनीकी विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

योगी सरकार की ग्रीन मोबिलिटी को मिली रफ्तार, नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो की 100 ई-बसों का शानदार प्रदर्शन

लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ग्रीन मोबिलिटी और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन के विजन का असर नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो के संचालन प्रतिफल (राजस्व) में लगातार दिखाई दे रहा है। सितंबर के प्रथम 13 दिनों में डिपो की 100 ई-बसों ने कुल 2.96 लाख किलोमीटर का परिचालन कर 1.99 लाख से अधिक यात्रियों को सेवा प्रदान की और 61.75 लाख से अधिक का राजस्व अर्जित किया। इस अवधि में प्रति बस प्रतिदिन परिचालन, यात्री संख्या और आय के आधार पर अगस्त की तुलना में बेहतर औसत दैनिक प्रदर्शन दर्ज किया गया। नियमित संचालन प्रारंभ होने के बाद 20 जून से 13 सितंबर 2026 तक तीनों प्राधिकरणों की ई-बसों ने कुल 15.12 लाख किलोमीटर से अधिक का परिचालन किया। इस दौरान 7.18 लाख से ज्यादा यात्रियों ने ई-बस सेवा का लाभ उठाया, जिससे कुल 2.24 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व अर्जित किया गया। जून से सितंबर तक बढ़ता गया ई-बसों का कारोबार नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो के अधिकारियों के मुताबिक 20 से 30 जून के 11 दिनों में 100 ई-बसों ने 1.47 लाख किलोमीटर का परिचालन कर 28,053 यात्रियों को सेवा दी और 9.07 लाख रुपये का राजस्व अर्जित किया। जुलाई में परिचालन बढ़कर 4.79 लाख किलोमीटर, यात्री संख्या 1.50 लाख और राजस्व 47.93 लाख तक पहुंच गया। अगस्त में बसों ने 5.89 लाख किलोमीटर की दूरी तय की और 3.40 लाख यात्रियों को सेवा दी। इस महीने 1.05 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ। सितंबर के प्रथम 13 दिनों में ही 2.96 लाख किलोमीटर परिचालन, 1.99 लाख यात्रियों और 61.75 लाख का राजस्व प्राप्त किया। अगस्त के 190.21 किलोमीटर प्रति बस प्रतिदिन के मुकाबले सितंबर में यह बढ़कर 227.78 किलोमीटर हो गया। इसी प्रकार यात्री प्रति बस प्रतिदिन की संख्या 109.79 से बढ़कर 153.68 और आय प्रति बस प्रतिदिन 3,414.86 से बढ़कर 4,750.20 रुपये हो गई। आय प्रति किलोमीटर भी 17.95 से बढ़कर 20.85 रुपये हो गई है। चारों अवधियों को मिलाकर 20 जून से 13 सितंबर तक कुल 15.12 लाख किलोमीटर से अधिक का परिचालन हुआ, जबकि 7.18 लाख यात्रियों ने ई-बस सेवा का लाभ लिया। इस दौरान कुल 2.24 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया गया। नोएडा प्राधिकरण की 50 बसों ने सितंबर में बनाया बेहतर दैनिक प्रदर्शन नोएडा प्राधिकरण की 50 बसों ने सितंबर के प्रथम 13 दिनों में 1.50 लाख किलोमीटर का परिचालन कर 1.04 लाख से अधिक यात्रियों को सेवा दी। इस दौरान 31.45 लाख का राजस्व प्राप्त हुआ। प्रति बस प्रतिदिन परिचालन 231.17 किलोमीटर, यात्री संख्या 160.14 और आय 4,839.17 रुपये रही। आय प्रति किलोमीटर भी 20.93 पहुंच गई। अगस्त की तुलना में दैनिक परिचालन और यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। ग्रेटर नोएडा में यात्री संख्या और आय ने पकड़ी तेज रफ्तार ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 25 बसों ने सितंबर के प्रथम 13 दिनों में 77,110 किलोमीटर की दूरी तय की और 53,194 यात्रियों को सफर कराया। इससे 16.17 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। प्रति बस प्रतिदिन परिचालन 237.26 किलोमीटर और यात्री संख्या 163.67 रही। आय प्रति किलोमीटर 20.98 रुपये व आय प्रति बस प्रतिदिन 4,978.15 रुपये दर्ज की गई। तीनों प्राधिकरणों में ग्रेटर नोएडा प्रति बस प्रतिदिन परिचालित किलोमीटर, यात्री संख्या, आय प्रति किलोमीटर व आय प्रति बस प्रतिदिन के आधार पर शीर्ष पर रहा। यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में भी बढ़ा ई-बसों का उपयोग यमुना प्राधिकरण की 25 बसों ने सितंबर के प्रथम 13 दिनों में 68,749 किलोमीटर का परिचालन किया और 42,497 यात्रियों को सेवा दी। इस अवधि में 14.11 लाख रुपये का राजस्व अर्जित हुआ। प्रति बस प्रतिदिन परिचालन 211.54 किलोमीटर, यात्री संख्या 130.76 और आय प्रति बस प्रतिदिन 4,344.32 रुपये रही। आय प्रति किलोमीटर 20.54 रुपये दर्ज हुई, जिससे इस क्षेत्र में भी ई-बस सेवा के मजबूत होते उपयोग का परिणाम दिख रहा है। सीएम योगी के विजन से मिली ग्रीन मोबिलिटी को मजबूती मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जून 2026 में नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो का उद्घाटन और ई-बसों को हरी झंडी दिखाते हुए एनसीआर में स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में कदम बढ़ाया था। उनका विजन नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र को ग्रीन मोबिलिटी से जोड़ते हुए जेवर एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी मजबूत करना है। बॉक्स नोएडा में बनेगा कमांड सेंटर, होगी लाइव निगरानी यूपीएसआरटीसी मुख्यालय लखनऊ के मुताबिक नोएडा में तीनों प्राधिकरणों से जुड़ी इलेक्ट्रिक बसों के लिए कमांड सेंटर बनाने की तैयारी भी चल रही है। इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। प्रस्तावित 24 घंटे संचालित कंट्रोल रूम से ई-बसों की लाइव निगरानी की जाएगी। इससे बसों के संचालन, रूट और सेवाओं पर लगातार नजर रखने के साथ यात्रियों को बेहतर और व्यवस्थित सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

कर्मचारी की सहमति के बिना प्रतिनियुक्ति पर हाई कोर्ट सख्त, जगदलपुर-बिलासपुर ट्रांसफर आदेश पर रोक

बिलासपुर  जगदलपुर नगर निगम के एक कर्मचारी को उसकी सहमति लिए बिना बिलासपुर नगर निगम में प्रतिनियुक्ति पर भेजने के मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत प्रदान की है। कोर्ट ने 4 अगस्त 2026 के उस आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है, जिसके तहत कर्मचारी को नगर निगम जगदलपुर से नगर निगम बिलासपुर भेजा गया था। यह मामला गोविंदनारायण सिंह विरुद्ध छत्तीसगढ़ शासन एवं अन्य का है। सुनवाई जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की अदालत में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मनोज चौहान, शासन की ओर से अधिवक्ता आकांक्षा वर्मा तथा प्रतिवादी क्रमांक दो और तीन की ओर से अधिवक्ता ए.एस. कछवाहा उपस्थित हुए। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 की धारा 58(5) और 58(6) में एक नगर निगम से दूसरे नगर निगम में कर्मचारी की प्रतिनियुक्ति के संबंध में सुरक्षा प्रावधान हैं। सामान्यतः प्रतिनियुक्ति के लिए संबंधित कर्मचारी की सहमति आवश्यक होती है। अंतरिम व्यवस्था के तहत रोक शासन ने इसका विरोध करते हुए धारा 58(5) का हवाला दिया, जिसमें कहा गया कि प्रतिनियुक्ति आदेश जारी करने से पहले कर्मचारी की सहमति लेना अनिवार्य नहीं है। हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि कर्मचारी को उसकी सहमति के बिना प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया है। हालांकि, कोर्ट ने धारा 58(5) और 58(6) की व्याख्या पर कोई अंतिम राय नहीं दी। अंतरिम व्यवस्था के तहत, कोर्ट ने 4 अगस्त 2026 के प्रतिनियुक्ति आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। मामले को चार सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।