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UP वृद्धावस्था पेंशन में बड़ा बदलाव, 1500-1500 रुपये की किस्त; पैसा नहीं आया तो ये करें

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के लाखों बुजुर्गों के लिए राहत भरी खबर है। योगी सरकार ने बुजुर्गों की पेंशन का नियम बदलते हुए नई किस्त व्यवस्था लागू कर दी है, जिसके तहत अब तीन महीने की कुल 3,000 रुपये की पेंशन राशि एक साथ मिलने के बजाय दो बराबर किस्तों (1500 और 1500) में सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जा रही है। सितंबर 2026 के दूसरे सप्ताह से राज्य के कई जिलों में इस नई व्यवस्था के तहत लाभार्थियों के खातों में पैसे आने शुरू हो गए हैं। सरकार की ओर से डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सीधे बुजुर्गों के खातों में पेंशन का पैसा ट्रांसफर किया जा रहा है। हालांकि, कई बार देखने में आता है कि सरकार की तरफ से पैसा जारी होने के बावजूद बहुत से बुजुर्गों के बैंक खातों में पेंशन की राशि नहीं पहुंच पाती। ऐसे में बुजुर्ग परेशान होकर दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर हो जाते हैं। UP Old Age Pension 2026 | अगर आपके खाते में भी इस बार पेंशन का पैसा नहीं आया है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आप घर बैठे या अपने नजदीकी जन सेवा केंद्र जाकर कुछ जरूरी काम करा लें, जिससे आपकी रुकी हुई पेंशन तुरंत खाते में आ जाएगी आइये सबसे पहले ये समझते हैं कि खाते में पैसा न पहुंचने के क्या कारण हैं- खाते में पैसा न आने के मुख्य कारण-     समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पेंशन का पैसा न अटकने का सबसे बड़ा कारण डॉक्यूमेंट्स का अपडेट न होना है। जैसे कि सरकार ने पेंशन में हो रहे फर्जीवाड़े को रोकने के लिए ई-केवाईसी अनिवार्य कर दिया है। जिन लाभार्थियों ने अभी तक बायोमीट्रिक या ओटीपी के जरिए ई-केवाईसी नहीं कराया है, उनकी किस्त रोक दी गई है।     पेंशन का पैसा अब केवल DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) मोड से भेजा जाता है। अगर आपका बैंक खाता आपके आधार कार्ड से सीडेड (लिक्ंड) नहीं है, तो पैसा खाते में नहीं आएगा।     इसके अलावा बैंक खाते में नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) मैपिंग एक्टिव न होना भी एक बड़ी वजह है।     नाम, स्पेलिंग, आईएफएससी कोड या बैंक खाता संख्या में कोई छोटी सी गलती होने पर भी भुगतान अटक जाता है। पेंशन न आने पर तुरंत करें ये काम 1- सबसे पहले वेबसाइट पर जाकर चेक करें स्टेटस सबसे पहले आपको यूपी समाज कल्याण विभाग की आधिकारिक वेबसाइट (sspy-up.gov.in) पर जाना होगा। वहां 'वृद्धावस्था पेंशन' वाले सेक्शन में जाकर 'आवेदक लॉगिन' पर क्लिक करें। अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर डालकर स्टेटस चेक करें। अगर स्टेटस में किसी प्रकार की त्रुटि (Error) दिख रही है, तो उसे तुरंत सही कराएं। 2. ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया पूरी करें अगर आपका ई-केवाईसी पेंडिंग है, तो इसे बिना देरी किए पूरा करें। इसे आप खुद अपने मोबाइल से पोर्टल पर जाकर आधार नंबर और ओटीपी के जरिए कर सकते हैं। यदि आपके पास स्मार्टफोनन नहीं है, तो नजदीकी सीएससी (जन सेवा केंद्र) पर जाकर बायोमीट्रिक (अंगूठे का निशान) देकर ई-केवाईसी को 5 मिनट में पूरा करा सकते हैं। 3. बैंक शाखा जाकर आधार और NPCI सीडिंग कराएं अगर आपका ई-केवाईसी पहले से पूरा है, फिर भी पैसा नहीं आया, तो अपनी बैंक शाखा में जाएं। वहां जाकर यह सुनिश्चित करें कि आपका खाता Aadhaar Seeded और DBT Enabled है या नहीं। बैंक कर्मचारी से बोलकर अपने खाते को NPCI से तुरंत लिंक करवाएं। 4. जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय में संपर्क करें यदि सारे डॉक्यूमेंट्स सही होने के बावजूद खाते में पैसा नहीं आ रहा है, तो अपने जिले के विकास भवन स्थित 'जिला समाज कल्याण अधिकारी' के कार्यालय में जाएं। वहां अपने आधार कार्ड, बैंक पासबुक और पेंशन रजिस्ट्रेशन नंबर की फोटोकॉपी के साथ एक आवेदन पत्र जमा करें। अधिकारी आपकी फाइल चेक करके समस्या का तुरंत समाधान कर देंगे। बुजुर्गों के लिए हेल्पलाइन सुविधा अगर आपको ऑनलाइन प्रक्रिया में कोई परेशानी आ रही है या आप चलकर दफ्तर नहीं जा सकते, तो उत्तर प्रदेश सरकार के समाज कल्याण विभाग के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 14567 या मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर कॉल कर सकते हैं। कॉल पर अपना रजिस्ट्रेशन नंबर बताकर आप अपनी पेंशन का स्टेटस जान सकते हैं और शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं। सरकार का कहना है कि किसी भी पात्र बुजुर्ग की पेंशन बंद नहीं की जाएगी। जैसे ही आप अपनी ई-केवाईसी और बैंक खाते की गड़बड़ी को सही करवा लेंगे, तो आपकी रुकी हुई पुरानी किस्त और नई किस्त दोनों एक साथ आपके खाते में भेज दी जाएंगी। इसलिए बिना देर किए अपनी बैंक डिटेल्स और केवाईसी तुरंत अपडेट करा लें।  

हरियाणा में 2814 स्कूलों पर बड़ा एक्शन, 30 सितंबर तक गिरेंगी असुरक्षित इमारतें

चंडीगढ़ हरियाणा में सरकारी स्कूलों में असुरक्षित भवनों को ढहाकर नए कमरे बनाए जाएंगे। प्रदेश में 2814 स्कूल चिन्हित किए गए हैं, जहां कक्षाएं जर्जर कमरों में चल रही हैं। सभी असुरक्षित भवनों को गिराने के लिए 30 सितंबर तक का समय दिया गया है। इतना ही नहीं, मानसून के दौरान जिन 700 स्कूलों में जलभराव की समस्या आई थी, उनमें मिट्टी का भराव करने के साथ ही चहारदीवारी का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जल्द ही शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक लेंगे, जिसके चलते विभागीय अधिकारी कमियों को दूर करने में जुट गए हैं। 150 राजकीय विद्यालयों के नए भवन अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा 719 उत्कृष्ट विद्यालयों के सुदृढ़ीकरण पर काम शुरू हो गया है। इनमें संस्कृति माडल स्कूल, मुख्यमंत्री अर्ली इंग्लिश एंड एक्सीलेंस स्कूल तथा पीएम श्री विद्यालय शामिल हैं। सभी उत्कृष्ट विद्यालयों में नए भवन, अतिरिक्त कक्षाएं, पृथक शौचालय, मजबूत चहारदीवारी, खेल मैदान, विज्ञान व कंप्यूटर प्रयोगशालाएं, डिजिटल लैब, स्मार्ट कक्षाएं, पुस्तकालय, नया फर्नीचर, टैबलेट तथा अन्य आधुनिक शिक्षण संसाधन प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराए जाएंगे। हर जिले में एक माडल बाल-वाटिका बनाई जाएगी। हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद के निदेशक ने सभी अतिरिक्त उपायुक्तों, जिला शिक्षा अधिकारियों और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हुई बैठक में कहा है कि असुरक्षित इमारतों को ढहाने से लेकर बजट खर्च न करने वाले अफसरों पर सीधी कार्रवाई की जाएगी। 30 सितंबर तक स्कूल भवनों के सत्यापन, कंडम घोषित करने और ध्वस्तीकरण का काम पूरा करने को कहा गया है। 647 स्कूलों में मौसमी और 53 स्कूलों में स्थायी रूप से पानी भरने की समस्या से निजात पाने के लिए जिला शिक्षा अधिकारियों को मिट्टी भराव के लिए तुरंत नया बजट एस्टिमेट भेजने को कहा है। स्कूलों में बेकार पड़े कंप्यूटर और प्रिंटर सहित अन्य आइटी उपकरणों को निर्धारित पालिसी के तहत निपटाने के आदेश दिए गए हैं पौधरोपण में अंबाला सबसे आगे, फरीदाबाद और पलवल पिछड़े बैठक में 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान की समीक्षा में बताया गया कि हरियाणा में 12.50 लाख के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 8.25 लाख पौधे लगा दिए गए हैं। अंबाला जिला लक्ष्य का 119 प्रतिशत काम पूरा कर पहले स्थान पर है, जबकि फरीदाबाद में सिर्फ तीन प्रतिशत और पलवल में सिर्फ आठ प्रतिशत लक्ष्य हासिल हुआ है।  

मौत से पहले लिखी दो वसीयतों को लेकर 26 साल से विवाद, हाई कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

चंडीगढ़  पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने संपत्ति विवाद से जुड़े करीब 26 साल पुराने मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मृत्यु से कुछ दिन पहले बनाई गई दोनों वसीयतों को संदिग्ध माना है। अदालत ने कहा कि जब वसीयतकर्ता गंभीर रूप से बीमार हो और वसीयत बनाने के कुछ ही दिन बाद उसकी मृत्यु हो जाए, तो यह साबित करना जरूरी है कि वह वसीयत के समय स्वस्थ मानसिक स्थिति में था और उसने स्वतंत्र इच्छा से दस्तावेज तैयार किया था। इस मामले में ऐसा कोई विश्वसनीय प्रमाण सामने नहीं आया। जस्टिस परमोद गोयल ने मोहन सिंह की ओर से दायर नियमित दूसरी अपील खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। विवाद सलविंदर सिंह की संपत्ति को लेकर था जोकि अविवाहित और नि:संतान थे। अदालत ने खारिज किया दावा उनके भाइयों ने दावा किया कि सलविंदर ने एक अक्टूबर, 1991 को वसीयत बनाकर सभी भाइयों को संपत्ति में बराबर हिस्सा दिया था। वहीं, सलविंदर की देखभाल करने वाले मोहन सिंह ने दावा किया कि सलविंदर सिंह ने 25 सितंबर, 1991 को पूरी संपत्ति उनके नाम वसीयत कर दी थी। निचली अदालत ने 25 सितंबर की वसीयत को सही मानते हुए भाइयों का दावा खारिज कर दिया था। हालांकि प्रथम अपीलीय अदालत ने दोनों वसीयतों को संदिग्ध मानते हुए कहा कि संपत्ति का उत्तराधिकार वसीयत के बजाय कानून के अनुसार होगा। एक वसीयत आठ तो दूसरी मृत्यु से महज दो दिन पहले बनी थी हाई कोर्ट ने पाया कि सलविंदर सिंह की मृत्यु तीन अक्टूबर, 1991 को हुई थी। यानी मोहन सिंह के पक्ष में बताई गई वसीयत उनकी मृत्यु से महज आठ दिन पहले और दूसरे पक्ष की वसीयत मृत्यु से सिर्फ दो दिन पहले तैयार हुई थी। दोनों वसीयतें मूल रूप से अपंजीकृत थीं और 25 सितंबर की वसीयत को उनकी मृत्यु के बाद छह दिसंबर, 1991 को पंजीकृत कराया गया। अदालत ने कहा कि 25 सितंबर की वसीयत के समय सलविंदर सिंह अस्वस्थ थे और इलाज करा रहे थे। इसके बावजूद वसीयत के लेखक और गवाहों ने यह नहीं बताया कि वह तब स्वस्थ मानसिक स्थिति में थे और दस्तावेज को समझकर अपनी स्वतंत्र इच्छा से बना रहे थे। अदालत ने इसे गंभीर कमी माना। हाई कोर्ट ने वसीयत की तारीख अलग स्याही से लिखे जाने के साथ ही मृत्यु के बाद वसीयत पंजीकृत कराने का कारण स्पष्ट नहीं होने और गवाहों के स्टांप पेपर पर वसीयत तैयार किए जाने के दावे के विपरीत दस्तावेज का सादे कागज पर होने जैसी परिस्थितियों को भी महत्वपूर्ण माना। अदालत ने खारिज की दोनों वसीयत किसी को भी वैध वसीयत स्वीकार नहीं किया जा सकता हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मृतक का मोहन सिंह के साथ रहना और उनके द्वारा देखभाल किया जाना उनके पक्ष में एक सकारात्मक तथ्य जरूर था, लेकिन अकेले यह तथ्य वसीयत पर उठे संदेह को दूर करने के लिए पर्याप्त नहीं था। अदालत ने दोनों वसीयतों को संदिग्ध परिस्थितियों से घिरा मानते हुए कहा कि इनमें से किसी को भी सलविंदर सिंह की वैध वसीयत स्वीकार नहीं किया जा सकता।

वराह मार्च को लेकर धार में तनाव, पुलिस ने कसा शिकंजा; 7 गिरफ्तार, समिति बोली- तय समय पर होगा कार्यक्रम

धार  धार शहर में आज 15 सितंबर को प्रस्तावित वराह मार्च को लेकर पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। सनातन प्रहरी समिति ने दोपहर 2 बजे पीजी कॉलेज से विजय कीर्ति मंदिर तक बाइक रैली निकालने का आह्वान किया था। प्रशासन ने रैली निरस्त कर दी है।  वराह मार्च को लेकर 7 लोग गिरफ्तार अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय डावर ने बताया कि वराह मार्च बाइक रैली का आह्वान किया गया था, जिसे प्रशासन ने निरस्त कर दिया है। पुलिस के अनुसार, कानून व्यवस्था की स्थिति बनने की संभावना को देखते हुए 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। लाट मस्जिद यानी विजय मंदिर आज बंद कानून व्यवस्था की दृष्टि से लाट मस्जिद यानी विजय मंदिर को भी मंगलवार को ASI ने बंद रखा है। जिस स्थल तक वराह मार्च ले जाने की घोषणा की गई थी, उसे हिंदू समाज विजय मंदिर और मुस्लिम समाज लाट मस्जिद के नाम से संबोधित करता है। मुस्लिम समाज के लोग यहां नमाज अदा करते हैं, जबकि हिंदू समाज की ओर से दशहरा पर्व पर मिलन समारोह आयोजित किया जाता है। संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने आज इस संरक्षित स्थल को बंद रखने का निर्णय लिया है। CCTV, हाईराइज बिल्डिंग और ड्रोन से निगरानी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय डावर के मुताबिक, पूरे शहर में पुलिस की निगरानी बढ़ाई गई है। CCTV कैमरों, हाईराइज बिल्डिंग और ड्रोन के माध्यम से शहर की निगरानी की जा रही है। संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन ने शहर के बाहर से आने वाले लोगों से भी धार नहीं आने की अपील की है। इससे पहले पुलिस-प्रशासन ने शहर में लगाए गए वराह मार्च से जुड़े पोस्टर और बैनर भी हटवा दिए थे।. मुस्लिम समाज की वाहन रैली की अनुमति भी निरस्त इसी दिन मुस्लिम समाज की ओर से भी वाहन रैली निकालने को लेकर आवेदन दिया गया था। प्रशासन ने उसकी अनुमति भी निरस्त कर दी है। पुलिस-प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था को देखते हुए धार शहर में किसी भी प्रकार की रैली या अन्य आयोजन की अनुमति नहीं दी गई है। शहर में पहले से धारा 163 लागू है। भोजशाला के बाद वराह मार्च को लेकर बढ़ी संवेदनशीलता भोजशाला से जुड़े मामलों के बाद अब वराह मार्च को लेकर भी धार में माहौल संवेदनशील बना हुआ है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून व्यवस्था बिगाड़ने, संरक्षित इमारत को नुकसान पहुंचाने या किसी भी तरह की अनधिकृत गतिविधि करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस के मुताबिक शहर में स्थिति सामान्य है। दोपहर 2 बजे प्रस्तावित मार्च के समय सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी रहेगी और पुलिस बल लगातार निगरानी बनाए रखेगा। विजय मंदिर की तीन लेयर में बैरिकेडिंग संरक्षित इमारत विजय मंदिर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इमारत की पूरी तरह बैरिकेडिंग की गई है। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है। सुरक्षा के लिए तीन लेयर में बैरिकेडिंग की गई है। पुलिस के एएसआई सहित जवान मौके पर लगातार निगरानी कर रहे हैं। प्रशासन की ओर से चेतावनी बैनर भी लगाया गया है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि इमारत को किसी भी प्रकार की क्षति पहुंचाने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

62,500 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का मामला: सुप्रीम कोर्ट में आज की सुनवाई टली, निगम दाखिल कर चुका हलफनामा

भोपाल  भोपाल के रहवासी इलाकों में कारोबार के मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में तय सुनवाई टल गई है। जस्टिस के अवकाश पर होने के कारण अब सुनवाई बाद में होगी। हालांकि अभी तारीख तय नहीं है। भोपाल के रहवासी इलाकों में 62 हजार 500 प्रतिष्ठान हैं, जिनको लेकर आज फैसला आने की उम्मीद थी। नगर निगम भी अब तक की एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश कर चुका है। वहीं, रहवासी सीलिंग की कार्रवाई को झूठी बताते हुए रिकॉर्ड पेश करेंगे। बता दें कि 5 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नगर निगम ने पूरे शहर में ऐसे प्रतिष्ठानों को नोटिस दिए थे, जो आवासीय क्षेत्र में चल रहे थे। करीब 15 दिन तक नोटिस देने का दौर चला। इस दौरान लिस्टेड 62 हजार 500 में से 8084 प्रतिष्ठानों को नोटिस दिए गए थे। फिर 3 दिन तक 190 प्रतिष्ठान बंद किए थे। विरोध के बाद रुकी कार्रवाई, नया शपथ-पत्र पेश     हालांकि, शहर में व्यापारियों ने निगम की कार्रवाई के विरोध में लगातार बड़े स्तर पर प्रदर्शन किए थे, जिसके निगम ने कार्रवाई को रोक दिया। 15 सितंबर को होने वाली सुनवाई में पेश करने के लिए जो शपथ-पत्र तैयार किया था, उसमें शहरभर में 7,951 प्रतिष्ठानों को आवासीय क्षेत्रों में कारोबार करते हुए चिह्नित करने और उन्हें नोटिस जारी करने की बात सामने आई थी।     आंकड़ों के इस अंतर ने कार्रवाई की रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए थे। सूत्रों के अनुसार, नवदुनिया ने इस विसंगति को सामने लाने के बाद निगम ने अपने रिकार्ड का दोबारा मिलान किया और शपथ-पत्र में कार्रवाई की जानकारी को लेकर बदलाव कर नया शपथ-पत्र न्यायालय के सामने पेश किया है। प्रदेश सरकार की समिति पर भी होगी सुनवाई     बता दें कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर निगम प्रशासन ने अरेरा कालोनी, रोहित नगर, बावड़िया कलां में नोटिस देने की कार्रवाई शुरू की थी, जिसके बाद एक अगस्त को इन क्षेत्रों में दो प्रतिष्ठानों को सील और 99 के स्वेच्छा बंद करने के पंचनामे बनाए थे। दो अगस्त को प्रदेश सरकार ने इस मामले में एक समिति गठित कर दी थी, जिसके बाद निगम ने अपनी कार्रवाई रोक दी और बंद किए गए प्रतिष्ठान भी खुल गए।     सुप्रीम कोर्ट ने सरकार द्वारा बनाई गई इस समिति को प्रथम दृष्टया अवमानना मानते हुए समिति गठित करने के मूल दस्तावेज पेश करने को कहा था। अब 15 सितंबर को होने वाली सुनवाई में निगम की कार्रवाई के साथ ही प्रदेश सरकार की इस समिति को लेकर भी स्थिति स्पष्ट हो सकती है। व्यापारी सड़क पर उतरे तो कार्रवाई रोकी निगम की सीलिंग और नोटिस देने के विरोध में जब व्यापारी सड़क पर उतरे तो कार्रवाई रोक दी गई थी। पिछले 15 दिन से कार्रवाई नहीं हुई। दूसरी ओर, रहवासी निगम के जिम्मेदारों पर पक्षपात का आरोप लगा रहे हैं। याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने कहा कि निगम की एक्शन टेकन रिपोर्ट पर आपत्ति की है। हमने सुप्रीम कोर्ट में अपने दस्तावेज पेश किए हैं। जिसमें बताया गया कि निगम ने झूठी कार्रवाई की। जिन प्रतिष्ठानों को सील किया गया, वे फिर से खुल गए। यह है मामला- सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश भोपाल में आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त के पहले सप्ताह में सुनवाई की थी। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को बड़ा झटका देते हुए राज्य सरकार द्वारा गठित 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। साथ ही इस मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से दुकान संचालकों को मिले सभी राहत आदेश (स्टे ऑर्डर) निरस्त कर दिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि उसके निर्देश पर चल रही जांच में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी। इस दौरान नगर निगम को कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करना है। इसके चलते ही नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई की गई। अब तक हुई कार्रवाई की रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश की जा चुकी है। रहवासियों की यह मांग     रहवासी इलाकों में कमर्शियल गतिविधियां गलत है। इन्हें बंद किया जाए।     कमर्शियल गतिविधि होने से आवासीय क्षेत्र में व्यवधान जैसे- शोर, भीड़ और सार्वजनिक शांति भंग जैसी स्थितियां बन रही हैं।     असामाजिक तत्वों की गतिविधियां भी बढ़ रही हैं। इस वजह से सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।     स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता हो रही है। बढ़ते ट्रैफिक की वजह से हादसों का खतरा बना रहता है।

कला को राजसिंहासन से ऊपर रखा, महाराजा चक्रधर सिंह ने रायगढ़ घराने को दिलाई विश्व पहचान: राज्यपाल

महाराजा चक्रधर सिंह की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचा रहा चक्रधर समारोह: राज्यपाल रमेन डेका महाराजा चक्रधर सिंह ने कला को राज-सिंहासन से ऊपर रखा, रायगढ़ घराने को दिलाई विश्व पहचान  23 सितम्बर तक रामलीला मैदान में देश-प्रदेश के कलाकार देंगे प्रस्तुतियां रायपुर,   राज्यपाल रमेन डेका ने संगीत, नृत्य और कला की समृद्ध परंपरा से जुड़ी रायगढ़ की धरती पर 41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह का सोमवार को महाराजा चक्रधर की तैलचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर विधिवत भव्य शुभारंभ किया। राज्यपाल रमेन डेका ने समारोह का शुभारंभ करते हुए कहा कि यह आयोजन केवल कला प्रस्तुतियों का मंच नहीं, बल्कि महाराजा चक्रधर सिंह की कला-साधना और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। 14 से 23 सितम्बर तक रामलीला मैदान में आयोजित समारोह में देश-प्रदेश के ख्यातिप्राप्त कलाकारों के साथ स्थानीय प्रतिभाएं भी गायन, वादन, नृत्य और लोककला की प्रस्तुतियां देंगी। राज्यपाल ने कलाकारों का किया सम्मान           शुभारंभ अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका ने समारोह में प्रस्तुति देने वाले कलाकारों का सम्मान किया। पद्मडॉ. उषा बारले, पद्मअनुज शर्मा सहित अन्य कलाकारों और कला गुरु स्वर्गीय वेदमणि सिंह ठाकुर के शिष्यों ने प्रस्तुतियां दीं। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने समारोह की सांस्कृतिक गरिमा को और ऊंचाई प्रदान की।           राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि चक्रधर समारोह महाराजा चक्रधर सिंह की कला साधना और उनकी दूरदृष्टि को स्मरण करने का अवसर है। रायगढ़ भारतीय शास्त्रीय कलाओं की महत्वपूर्ण धरोहर भूमि है और रायगढ़ घराने के कथक ने देश ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। महाराजा चक्रधर सिंह ने राजसिंहासन से अधिक महत्व कला को दिया। उन्होंने कलाकारों को संरक्षण दिया और संगीत, नृत्य एवं साहित्य को आमजन के जीवन से जोड़ने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि महाराजा चक्रधर सिंह की कृतियां ‘नर्तन सर्वस्व’, ‘तालतोय निधि’ और ‘राग रत्न मंजूषा’ आज भी कला और साहित्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण धरोहर हैं। उन्होंने अपनी साधना से यह सिद्ध किया कि कला किसी एक स्थान या केंद्र की मोहताज नहीं होती। जहां निरंतर साधना होती है, वही स्थान कला का तीर्थ बन जाता है। रायगढ़ की पहचान आज संगीत, घुंघरुओं की झंकार, तबले की थाप और नृत्य की भाव-भंगिमाओं से जुड़ी है।             राज्यपाल ने कहा कि चक्रधर समारोह अब केवल एक शासकीय या संस्थागत आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह रायगढ़ की सांस्कृतिक धड़कन बन चुका है। देश के प्रतिष्ठित कलाकारों के साथ स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिलना इस समारोह की विशेषता है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी में अपनी जड़ों के प्रति जुड़ाव पैदा करते हैं। युवाओं को परंपरा के साथ नवाचार को जोड़ते हुए कला को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पंथी, राउत नाचा, भरथरी, सुआ, करमा सहित आदिवासी नृत्य और लोकगीत हमारी सांस्कृतिक विविधता की पहचान हैं। भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी विविधता में एकता है और चक्रधर समारोह इसी सांस्कृतिक एकता का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है। विकास के साथ सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण जरूरी      राज्यपाल ने कहा कि विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखना भी जरूरी है। रायगढ़ औद्योगिक विकास के साथ-साथ अपनी कला और संस्कृति के लिए भी जाना जाता है। पिछले वर्ष समारोह ने अपने 40 वर्ष पूरे किए और अब 41वां समारोह नई ऊर्जा और नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। ऐसे आयोजन सांस्कृतिक पुनर्जागरण का माध्यम बनते हैं और कला को समाज से जोड़ने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि कला और संस्कृति केवल हमारी पहचान नहीं, बल्कि पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को भी गति देने का माध्यम हैं। आज के डिजिटल युग में भी नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहना चाहिए। अपनी जड़ों से जुड़ाव पिछड़ापन नहीं, बल्कि हमारी पहचान और ताकत है। चक्रधर समारोह अतीत को याद करने के साथ-साथ उस विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण प्रयास है। महाराजा चक्रधर सिंह की अमूल्य रचनाओं और ग्रंथों का संरक्षण हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी- राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह       41वें चक्रधर समारोह के पावन अवसर पर राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह ने सभी को गणेश चतुर्थी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने समारोह में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका की गरिमामयी उपस्थिति के लिए हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके आगमन से समारोह की गरिमा और बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि चक्रधर समारोह की गौरवशाली परंपरा रही है कि इसका शुभारंभ राज्यपाल के करकमलों से होता है। राज्यसभा सांसद सिंह ने कहा कि महाराजा चक्रधर सिंह का जन्म 19 अगस्त 1905 को हुआ था। उन्होंने ऐसे समय भारतीय कला, संगीत और संस्कृति के संरक्षण का महत्वपूर्ण कार्य किया, जब हमारी अनेक सांस्कृतिक परंपराएं अपने मूल स्वरूप से दूर होती जा रही थीं। भारतीय संगीत और कला की उस गौरवशाली परंपरा को, जो मंदिरों, धार्मिक अनुष्ठानों और मांगलिक अवसरों के साथ जनजीवन से जुड़ी रही है, उसके मूल स्वरूप में संरक्षित रखने के लिए महाराजा चक्रधर सिंह ने उल्लेखनीय प्रयास किए। उन्होंने कहा कि महाराजा चक्रधर सिंह केवल एक शासक नहीं, बल्कि भारतीय कला और संस्कृति के महान संरक्षक थे। उनकी रचनाएं और उनके द्वारा सृजित ग्रंथ भारतीय संगीत एवं कला जगत की अमूल्य धरोहर हैं। इन महत्वपूर्ण ग्रंथों का संरक्षण, अध्ययन और व्यापक प्रचार-प्रसार आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस महान सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें। राज्यसभा सांसद सिंह ने बताया कि उन्होंने महाराजा चक्रधर सिंह की महत्वपूर्ण रचनाओं और ग्रंथों के संरक्षण एवं प्रकाशन का विषय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष भी रखा है, जिस पर प्रधानमंत्री ने विशेष रुचि दिखाई है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में इन अमूल्य ग्रंथों के प्रकाशन की दिशा में केंद्र सरकार द्वारा महत्वपूर्ण पहल की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार तथा राज्य सरकार भारतीय संस्कृति, कला और गौरवशाली विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं। महाराजा चक्रधर सिंह ने जिस उद्देश्य के साथ भारतीय कला और संस्कृति की महान परंपरा को संरक्षित और समृद्ध किया, उसे … Read more

JPSC-JSSC परीक्षा विवाद: नियुक्त अधिकारियों को हटाने पर रोक के बाद आज फिर हाईकोर्ट में सुनवाई

रांची  झारखंड हाई कोर्ट में मंगलवार को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 11-13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी नियुक्ति परीक्षा तथा बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) नियुक्ति परीक्षा और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की सीजीएल परीक्षा से हुई नियुक्तियों को रद करने के मामले में सुनवाई होगी। पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने इन नियुक्तियों के जरिए काम करने वाले पदाधिकारियों को हटाए जाने के सरकार के आदेश पर रोक लगा दी थी और सीआइडी की जांच रिपोर्ट तलब की थी। अब मंगलवार को इन परीक्षाओं के माध्यम से नियुक्त अधिकारियों को वेतन नहीं मिलने के मामले में भी सुनवाई की उम्मीद जताई जा रही है। पूर्व में हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने इन परीक्षाओं को रद करने के राज्य सरकार द्वारा 18 अगस्त को जारी आदेश पर रोक लगा दी है। सरकार के आदेश से इन नवनियुक्त पदाधिकारियों की नियुक्ति रद हो गई थी। कोर्ट के आदेश के बाद फिलहाल ये सभी अपने पद पर बने हुए हैं। पूर्व में हुई सुनवाई में अदालत ने कहा था कि इस मामले में प्रथम दृष्टया प्रतीत होता है कि सरकार ने नैसर्गिक न्याय का पालन नहीं किया है। इसलिए उक्त पदों पर नियुक्त हुए अभ्यर्थियों को अगले आदेश तक नौकरी से नहीं हटाया जाए। अदालत ने राज्य सरकार से जवाब मांगा था। अदालत ने सरकार को कहा था कि वह बताए कि सीआईडी की अबतक की जांच में ऐसा कौन सा तथ्य सामने आया था, जिसके आधार पर सरकार ने इतना कड़ा निर्णय लिया है। सरकार द्वारा नियुक्ति रद किए जाने के बाद हाई कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल करते हुए सरकार की उस अधिसूचना को चुनौती दी गई है, जिनमें जेपीएससी की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा, खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी नियुक्त, सीडीपीओ और जेएसएससी सीजीएल परीक्षा को रद करने का निर्णय लिया गया था। बता दें कि सरकार ने उन सभी परीक्षाओं को रद करने का फैसला लिया है, जिसमें टीडीपीएल की भूमिका रही है। इन चारों परीक्षाओं में चूंकि नियुक्ति हो चुकी थी, जिस कारण ने राज्य सरकार के आदेश पर रोक लगा दी है।

कौन बनेगा जयपुर का नया मेयर? सुनील कोठारी समेत 5 नामों पर चर्चा

जयपुर जयपुर नगर निगम चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद अब गुलाबी नगरी की सियासत का केंद्र मेयर की कुर्सी बन गया है। 150 वार्डों वाली जयपुर नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 78 सीटों पर शानदार जीत हासिल करते हुए स्पष्ट बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। बहुमत का आंकड़ा 76 का था, जिसे पार करते ही भाजपा के खेमे में जश्न का माहौल है। वहीं कांग्रेस को इस चुनाव में 53 सीटों से ही संतोष करना पड़ा है और 15 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत का परचम लहराया है। बहुमत हासिल करने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी के अंदर नए मेयर के नाम को लेकर बैठकों और राजनीतिक लामबंदी का दौर बेहद तेज हो गया है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार 21 सितंबर 2026 को मेयर पद के लिए अप्रत्यक्ष मतदान होगा, लेकिन उससे पहले शहर के सियासी गलियारों में 5 प्रमुख नामों की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। जयपुर नगर निगम की मेयर सीट इस बार अनारक्षित श्रेणी में है, जिसका मतलब है कि किसी विशेष वर्ग या जाति का कानूनी बंधन नहीं है। यही वजह है कि संगठन में मजबूत पैठ रखने वाले अनुभवी नेताओं से लेकर संघ पृष्ठभूमि के दिग्गजों तक का दावा काफी मजबूत माना जा रहा है। सुनील कोठारी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से सीधे जुड़े सुनील कोठारी को इस समय पार्टी का सबसे प्रबल और फ्रंटरनर दावेदार माना जा रहा है। संगठन के प्रति उनकी निष्ठा, बेदाग छवि और निर्विवाद व्यक्तित्व के कारण पार्टी आलाकमान किसी भी प्रकार की आंतरिक गुटबाजी को रोकने के लिए उनके नाम पर अंतिम मुहर लगा सकता है। पुनीत कर्णावत मेयर पद की इस दौड़ में दूसरा सबसे बड़ा और स्वाभाविक नाम निवर्तमान डिप्टी मेयर पुनीत कर्णावत का है। कर्णावत ने वार्ड 76 से एक बार फिर शानदार जीत दर्ज की है। उनके पास नगर निगम के प्रशासनिक तंत्र और शहर के विकास कार्यों को संचालित करने का पुराना और व्यावहारिक अनुभव मौजूद है। यदि प्रदेश नेतृत्व अनुभव और शहर के पुराने सियासी समीकरणों को प्राथमिकता देता है तो पुनीत कर्णावत का पलड़ा काफी भारी हो सकता है। विमल अग्रवाल तीसरे नंबर पर वरिष्ठ भाजपा नेता विमल अग्रवाल हैं, जिन्होंने वार्ड 135 से 7,115 वोटों के रिकॉर्ड मार्जिन से जीत हासिल की है। जयपुर के व्यापारिक और वैश्य समुदाय में उनकी गहरी पकड़ है, जिसके चलते उनका दावा भी काफी मजबूत बनकर उभरा है। शैलेंद्र भार्गव चौथे दावेदार के रूप में पूर्व शहर अध्यक्ष शैलेंद्र भार्गव का नाम चर्चा में है, जिन्होंने वार्ड 43 से कड़े मुकाबले में जीत हासिल की है। संगठन में लंबे समय तक काम करने का उनका अनुभव और पार्टी नेतृत्व के साथ बेहतर तालमेल उनके पक्ष में जाता है। सरप्राइज चेहरा पांचवें विकल्प के रूप में पार्टी किसी सरप्राइज महिला चेहरे को भी आगे कर सकती है। हालांकि जयपुर की पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल चुनाव हारकर इस रेस से बाहर हो चुकी हैं, लेकिन यदि पार्टी आलाकमान किसी युवा या वरिष्ठ महिला पार्षद को मौका देकर चौंकाना चाहे तो किसी वरिष्ठ महिला पार्षद के नाम पर विचार किया जा सकता है। किसे और क्यों मिल सकती है तरजीह? जयपुर का मेयर कौन बनेगा, इसका अंतिम फैसला भारतीय जनता पार्टी का केंद्रीय और प्रादेशिक नेतृत्व पार्षदों के रुख को ध्यान में रखकर करेगा। जयपुर में भाजपा की राजनीति में हमेशा से संगठन और संघ लॉबी का बड़ा प्रभाव रहा है। सुनील कोठारी को संघ का समर्थन प्राप्त होने के कारण उनकी दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है। वहीं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार शहर के विकास कार्यों को गति देने के लिए प्रशासनिक रूप से सक्षम और अनुभवी चेहरे के रूप में पुनीत कर्णावत पर भी दांव लगा सकती है। दूसरी ओर वैश्य और व्यापारी वोट बैंक जयपुर में भाजपा की रीढ़ माना जाता है। इस वर्ग को साधे रखने के लिए रिकॉर्ड वोटों से जीतने वाले विमल अग्रवाल का नाम भी प्रमुखता से विचारधीन है। फिलहाल सभी 78 निर्वाचित भाजपा पार्षदों को एकजुट रखने और किसी भी प्रकार की क्रॉस वोटिंग को रोकने के लिए पार्टी ने अपनी रणनीति तैयार कर ली है। 21 सितंबर को होने वाली वोटिंग के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि जयपुर की कमान अगले पांच सालों के लिए किस दिग्गज के हाथों में सौंपी जाती है। जयपुर में कैसे होगा मेयर का चुनाव? राजस्थान में आम जनता सीधे तौर पर मेयर का चुनाव नहीं करती है। यहां नगर निगम के निर्वाचित पार्षद ही अपने मताधिकार का प्रयोग करके मेयर का चुनाव करते हैं। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से तय कार्यक्रम के अनुसार यह पूरी अप्रत्यक्ष चुनाव प्रक्रिया इस प्रकार संचालित होगी: अधिसूचना और नामांकन (15-16 सितंबर): निर्वाचन आयोग द्वारा 15 सितंबर को चुनाव की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। मेयर पद के लिए उम्मीदवारी पेश करने वाले प्रत्याशी 16 सितंबर तक अपना नामांकन पत्र दाखिल कर सकते हैं। नामांकन पत्रों की जांच और वापसी (18 सितंबर): 17 सितंबर को नामांकन पत्रों की संवीक्षा होगी और 18 सितंबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। इसके तुरंत बाद चुनाव मैदान में डटे अंतिम उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी जाएगी। पार्षदों की वोटिंग (21 सितंबर): मेयर पद के लिए मुख्य मतदान 21 सितंबर 2026 को आयोजित होगा। इस दिन नगर निगम मुख्यालय पर रिटर्निंग ऑफिसर की देखरेख में सभी 150 निर्वाचित पार्षदों की विशेष बैठक बुलाई जाएगी। वोटिंग का समय और मतगणना: मतदान सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक बैलेट पेपर के जरिए गुप्त रूप से कराया जाएगा। दोपहर 2 बजे वोटिंग खत्म होते ही वोटों की गिनती शुरू होगी और 21 सितंबर की शाम तक जयपुर के नए मेयर के नाम की आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी। क्या किसी 'बाहरी' व्यक्ति को भी मेयर बना सकती है BJP? जयपुर के राजनीतिक हलकों में इस बात की भी चर्चा चल रही है कि क्या भाजपा किसी ऐसे नेता को मेयर बना सकती है जो इस बार पार्षद का चुनाव नहीं जीता है। कानूनी और तकनीकी दृष्टिकोण से इसका जवाब 'हाँ' है। राजस्थान नगर पालिका (संशोधन) नियमों के अनुसार कोई भी व्यक्ति जो वार्ड पार्षद नहीं है या … Read more

सुरक्षा व्यवस्था होगी मजबूत: मानниयों के लिए आएंगी सब-मशीनगन और स्कूलों में बनेंगी आईसीटी लैब्स

लखनऊ  यूपी में सांसदों और विधायकों की सुरक्षा में तैनात गनर जल्द नई सब-मशीनगन से लैस होंगे। शासन ने माननीयों के सुरक्षाकर्मियों को नए असलहे उपलब्ध कराने के लिए 5.59 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। गृह विभाग ने इसका आदेश जारी किया है। जनप्रतिनिधियों के सुरक्षाकर्मियों के लिए नाइन एमएम की 800 सब-मशीनगन और 2.56 लाख कारतूस खरीदे जाएंगे। एक सब-मशीनगन की कीमत 60 हजार रुपये होगी। पुलिस मुख्यालय से शासन को भेजी गई एक रिपोर्ट के बाद अयोध्या के श्रीराम मंदिर सहित हाईकोर्ट, लोकभवन और मेट्रो स्टेशनों जैसे संवेदनशील स्थानों पर स्नाइपरों की तैनाती की जाएगी। शासन ने तीन स्नाइपर राइफल खरीदने की भी वित्तीय स्वीकृति दी है। एक रायफल की कीमत 10.76 लाख रुपये होगी। महिला वाहिनियों के लिए पिस्टल और असाल्ट राइफल इसके अलावा पीएसी की नवगठित महिला वाहिनियों को स्वचलित असलहे दिए जाएंगे। पुलिस आधुनिकीकरण योजना के तहत पीएसी की तीन महिला वाहिनियों के लिए 373 पिस्टल और 90 असाल्ट राइफल खरीदी जाएंगी। पीआरडी जवानों का बढ़ेगा ड्यूटी भत्ता उधर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में डेढ़ दर्जन से अधिक प्रस्तावों को मंजूरी के लिए रखा जा सकता है। इसमें प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) के जवानों का ड्यूटी भत्ता रोजाना 500 से 600 करना शामिल है। इसके अलावा कैशलेस इलाज की सुविधा देने संबंधी प्रस्ताव पर भी मुहर लग सकती है। जिसकी संख्या 27 हजार से अधिक बताई जा रही है। चौथी बार मानदेय बढ़ाने जा रही है सरकार योगी सरकार पीआरडी जवानों का चौथी बार मानदेय बढ़ाने जा रही है। 8 मार्च 2019 को 250 से बढ़ाकर 375 रुपये रोजाना किया गया था। इसके बाद 6 जनवरी 2022 को इसे बढ़ाकर 395 रुपये कर दिया गया। 15 अप्रैल 2025 को इसे 500 रुपये कर दिया गया। अब इसमें 100 रुपये और बढ़ाने का प्रस्ताव है। स्वास्थ्य सेवाओं पर भी फोकस इसके अलावा वाहनों की फिटनेस के लिए नई नीति, उत्तर प्रदेश खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति और चित्रकूट एक्सप्रेस का संशोधित प्रस्ताव सहित अन्य शामिल है। कैबिनेट की बैठक में इसके अलावा भूतपूर्व सैनिकों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर करने संबंधी प्रस्ताव को भी मंजूरी मिल सकती है। अंशदायी स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत पालीक्लीनिकों के निर्माण के लिए ग्राम पंचायत या स्थानीय प्राधिकरणों की भूमि स्थानीय सैन्य प्राधिकरण सेंट्रल कमांड भारत सरकार को मुफ्त दिए जाने का प्रस्ताव है। स्कूल को दिए जाएंगे दो-दो लाख रुपये बेसिक शिक्षा विभाग के 14 हजार स्कूलों में स्मार्ट क्लास के लिए आईसीटी लैब के लिए 300 करोड़ रुपये धनराशि देने संबंधी प्रस्ताव भी है। प्रत्येक स्कूल को दो-दो लाख रुपये दिए जाएंगे।

हिमाद्री सिंह और नरेंद्र सिंह मरावी का विवाह विच्छेद, आपसी सहमति से लिया अलग होने का फैसला

भोपाल  मध्य प्रदेश में शहडोल से भाजपा सांसद हिमाद्री सिंह का भाजपा नेता नरेंद्र सिंह मरावी से विवाह विच्छेद हो गया। अनूपपुर जिले के राजेंद्रग्राम न्यायालय ने दोनों की आपसी सहमति से तीन सितंबर 2026 को हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 13-बी के तहत विवाह विच्छेद की डिक्री पारित की है। उनकी शादी 23 नवंबर 2017 को हुई थी। 20 जून 2019 को बेटी का जन्म हुआ। इसके बाद छोटी-छोटी बातों को लेकर पति-पत्नी के बीच विवाद होने लगे। दोनों पांच मई 2021 से अलग रह रहे थे। बेटी के पालन-पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य और वैवाहिक खर्च की जिम्मेदारी हिमाद्री की होगी। उन्होंने मरावी से भरण-पोषण या गुजारा भत्ता नहीं मांगा है। बता दें कि कोर्ट ने दोनों को छह महीने का समय दिया था। दोनों ने कोर्ट को बताया कि पति-पत्नी के रूप में साथ रहना संभव नहीं है। परिवार की परंपरागत सीट, केंद्रीय मंत्री रहे पिता 38 वर्षीय हिमाद्री सिंह 2019 से लगातार सांसद हैं। उनके पिता दलबीर सिंह परस्ते भी इसी सीट से 1980, 1984 और 1991 में तीन बार लोकसभा सांसद निर्वाचित हुए और केंद्रीय मंत्री भी बने। मां राजेश नंदिनी सिंह 1993 में विधानसभा और 2009 में लोकसभा चुनाव जीत चुकी हैं। दिलचस्प संयोग यह है कि 2009 के लोकसभा चुनाव में राजेश नंदिनी ने भाजपा प्रत्याशी नरेंद्र सिंह मरावी को 13 हजार 415 वोटों से हराया था। पिता के निधन के बाद हिमाद्री ने 2016 में कांग्रेस के टिकट पर शहडोल लोकसभा उपचुनाव लड़ा, लेकिन भाजपा के ज्ञान सिंह से हार गईं। 23 नवंबर 2017 को हिमाद्री और नरेंद्र का विवाह हुआ। इसके बाद लोकसभा चुनाव से ठीक पहले 20 मार्च 2019 को उन्होंने कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया।