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सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शिक्षा निदेशालय का निर्देश: एचटेट पास न करने वाले शिक्षकों की सेवा समाप्त होगी

चंडीगढ़ हरियाणा के सरकारी स्कूलों में बिना हरियाणा शिक्षक पात्रता परीक्षा (एचटेट) पास किए पढ़ा रहे करीब 25 हजार शिक्षकों को अब एचटेट पास करना होगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि एक सितंबर 2025 को जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच साल से ज्यादा समय बाकी था, उनके लिए एचटेट अनिवार्य है। उन्हें अपने पढ़ाए जाने वाले विषय अथवा स्तर (पीआरटी, पीजीटी व टीजीटी) का एचटेट पास करना होगा। पास नहीं करने पर सेवा समाप्त की जा सकती है या अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सकती है। ऐसे सभी शिक्षकों को अगस्त 2028 तक एचटेट परीक्षा पास करनी होगी। एक सितंबर 2025 को सेवानिवृत्ति में पांच साल से कम समय बाकी होने वाले शिक्षकों को एचटेट से छूट दी गई है। ऐसे शिक्षक सामान्य रूप से सेवानिवृत्ति तक नौकरी कर सकेंगे। हालांकि, उन्हें आगे पदोन्नति नहीं मिलेगी। प्रमोशन के लिए संबंधित विषय का एचटेट पास करना होगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लागू हुआ नियम निदेशालय ने ये निर्देश सुप्रीम कोर्ट के अंजुमन इशात-ए-तलीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र राज्य व अन्य मामले में एक सितंबर 2025 को दिए आदेश के आधार पर जारी किए हैं। इस मामले में 29 मई 2026 को दाखिल पुनर्विचार याचिका पर भी आदेश हुआ था। हरियाणा के शिक्षकों की ओर से राहत के लिए दाखिल पुनर्विचार याचिका मई 2026 में खारिज हो चुकी है। साल में दो बार होगा एचटेट बिना एचटेट वाले शिक्षकों को परीक्षा पास करने के पर्याप्त अवसर देने के लिए शिक्षा निदेशालय ने हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड, भिवानी को साल में दो बार एचटेट आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। नियुक्ति और प्रमोशन पर भी सख्ती जिला शिक्षा अधिकारियों और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को सभी संबंधित शिक्षकों को नए नियमों की जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं। निदेशालय की स्थापना शाखाओं को कहा गया है कि शिक्षकों की नियुक्ति और पदोन्नति सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार ही की जाए। शिक्षक संगठन नाराज, सरकार से दखल की मांग हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के राज्य प्रधान प्रभू सिंह ने बताया हरियाणा में एचटेट की अधिसूचना 23 अगस्त 2010 को जारी हुई थी। यानी उससे पहले जो भी अध्यापक भर्ती हुए थे, उन्होंने पात्रता परीक्षा नहीं दी। ऐसे करीब 25 हजार अध्यापक होंगे। सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी, मगर वह खारिज हो गई थी। कई राज्यों ने अपने शिक्षकों को राहत दी है। हरियाणा सरकार से मांग है कि वे इसमें दखल देकर राहत दे।  

चंद्र-शुक्र युति: रांची समेत देश के कई हिस्सों में दिखा दुर्लभ आकाशीय संयोजन, क्या है ‘अर्थशाइन’?

रांची सोमवार की रात भारत के कई शहरों, विशेषकर रांची के आसमान में एक बेहद शानदार और अद्भुत खगोलीय नजारा देखने को मिला। सूर्यास्त के बाद पश्चिमी आसमान की ओर एक पतला अर्द्धचंद्र दिखाई दिया, जिसके ठीक पास तेज चमकता हुआ शुक्र ग्रह नजर आ रहा था। चांद और शुक्र की इस दुर्लभ नजदीकी ने शहरवासियों और खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। यह नजारा सूर्यास्त के तुरंत बाद कुछ सीमित समय के लिए ही दिखा, क्योंकि थोड़ी देर बाद दोनों क्षितिज के नीचे ओझल हो गए। क्या है 'अर्थशाइन' और 'आकल्टेशन'? इस खूबसूरत घटनाक्रम के दौरान चंद्रमा को ध्यान से देखने पर उसके अंधेरे हिस्से पर हल्की चमक भी दिखाई दे रही थी, जिसे खगोल विज्ञान की भाषा में 'अर्थशाइन' कहा जाता है। यह चमक वास्तव में पृथ्वी से परावर्तित होकर चंद्रमा तक पहुंचने वाली सूर्य की रोशनी है, जो चंद्रमा के अंधेरे हिस्से को हल्का रोशन करती है। साफ आसमान होने के कारण यह नजारा बिना दूरबीन के भी स्पष्ट देखा गया। इस खगोलीय घटनाक्रम के अगले चरण में कुछ क्षेत्रों से चंद्रमा शुक्र ग्रह को कुछ समय के लिए ढकता हुआ भी दिखाई दिया। इस प्रक्रिया को आकल्टेशन (Occultation) कहा जाता है। हालांकि, यह घटना हर स्थान से समान रूप से दिखाई नहीं देती, लेकिन सूर्यास्त के तुरंत बाद पश्चिमी क्षितिज की ओर नजर डालने वालों ने इस अद्भुत दृश्य का आनंद लिया। शहरवासियों में दिखा उत्साह इस खगोलीय घटना को लेकर रांची के लोगों में भारी उत्सुकता देखने को मिली। कई लोगों ने इस दुर्लभ दृश्य की खूबसूरत तस्वीरें अपने मोबाइल और कैमरे में कैद कीं और उन्हें इंटरनेट व सोशल मीडिया अकाउंट्स पर साझा किया। यह केवल दृष्टि-रेखा (Line of Sight) का प्रभाव है पर्यावरणविद नीतीश प्रियदर्शी ने बताया कि आसमान में चांद और शुक्र भले ही एक-दूसरे के बेहद करीब दिखाई दिए, लेकिन वास्तविकता में दोनों के बीच की दूरी बहुत विशाल है चंद्रमा पृथ्वी से लगभग 3.8 लाख किलोमीटर दूर है, जबकि शुक्र ग्रह करोड़ों किलोमीटर दूर है। इसे खगोल विज्ञान में 'मून-वीनस कंजंक्शन' कहा जाता है। संयोगवश यह नजारा सोमवार को स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, जिसे कई लोग एक आध्यात्मिक घटना भी मानते हैं, हालांकि यह पूरी तरह से एक खगोलीय घटनाक्रम है। किसी ज्योतिषीय प्रभाव का संकेत नहीं डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU), रांची के प्राध्यापक डॉ. अभय कृष्ण सिंह ने कहा कि 14 सितंबर का यह आकाशीय संयोजन खगोलीय दृष्टि से बेहद विशेष है। इसे 'चंद्र-शुक्र युति' कहा जाता है। कुछ क्षेत्रों में चंद्रमा ने शुक्र को ढक लिया, जिसे चंद्र-अवच्छादन (आकल्टेशन) कहते हैं। इसका महत्व किसी ग्रह के पृथ्वी पर प्रभाव में नहीं, बल्कि कक्षीय गति और सापेक्ष स्थिति में है। डॉ. सिंह ने स्पष्ट किया कि यह घटना किसी ज्योतिषीय प्रभाव का संकेत नहीं है, बल्कि सूर्य, पृथ्वी, चंद्रमा और शुक्र की नियमित कक्षीय गतियों का एक स्वाभाविक परिणाम है। आने वाले दिनों में भी शुक्र ग्रह शाम के आसमान का प्रमुख आकर्षण बना रहेगा। 18 सितंबर को शुक्र इस दर्शन-चक्र में अपनी अधिकतम चमक के बेहद करीब पहुंचेगा।  

शहरी निकाय चुनाव का रिपोर्ट कार्ड: दिग्गजों के लिए कितनी आसान रही राह? जानिए जीत-हार का पूरा गणित

जयपुर राजस्थान के 309 नगरीय निकायों के नतीजों ने सोमवार को शहरी राजस्थान का राजनीतिक मूड साफ कर दिया। भाजपा ने वार्डों की जीत और स्पष्ट बहुमत वाले निकायों की संख्या में बढ़त बनाई है, लेकिन कांग्रेस भी कई जगह मजबूत स्थिति में रही। कुल मत प्रतिशत में भी भाजपा और कांग्रेस के बीच करीब एक फीसदी का ही अंतर रहा। भाजपा को 35.30 और कांग्रेस को 34.36 फीसदी मत मिले। नतीजों ने भाजपा और कांग्रेस के दिग्गज नेताओं की जमीनी पकड़ का भी इम्तिहान ले लिया। कई नेताओं के अपने बूथ और वार्ड में ही पार्टी को हार का सामना करना पड़ा, तो कुछ के प्रभाव क्षेत्र में पार्टी ने मजबूत प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री, प्रदेशाध्यक्ष, मंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों और नेता प्रतिपक्ष तक किसी का गढ़ बचा तो किसी के इलाके में सियासी जमीन खिसकती नजर आई। खास यह रही कि कई जगह व्यक्तिगत प्रभाव और पार्टी के सामूहिक प्रदर्शन के बीच भी बड़ा अंतर दिखाई दिया। ऐसे में निकाय चुनाव के नतीजे दिग्गजों के लिए स्थानीय पकड़ का रिपोर्ट कार्ड भी बन गए हैं। मुख्यमंत्रीभजनलाल शर्मा: इनके बगरू विधानसभा के वार्ड 64 में भाजपा जीती। खुद के सांगानेर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के प्रदर्शन का स्ट्राइक रेट 71% रहा। गृह जिले भरतपुर में वार्ड 41 में भाजपा प्रत्याशी ने जीत दर्ज की है। उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचन्द बैरवा उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा: जयपुर के सांगानेर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड 50 में भाजपा के प्रत्याशी प्रहलाद चांवला जीते। बैरवा का मतदान क्षेत्र दूदू के ग्रामीण क्षेत्र में है, लेकिन निवास सुमेर नगर में रहते हैं। मंत्री राज्यवर्धन राठौड़: झोटवाड़ा क्षेत्र वार्ड 28 का खुद का वार्ड हार गए। यहां से कांग्रेस प्रत्याशी विजयी हुए। वार्ड में नतीजा पार्टी के पक्ष में नहीं रहा, जिसने स्थानीय स्तर पर सियासी समीकरणों में अलग संकेत दिया। मंत्री कन्हैयालाल चौधरी: मालपुरा विधानसभा क्षेत्र के टोडारासिंह नगर पालिका के वार्ड 5 और बूथ संख्या पांच दोनों पर भाजपा प्रत्याशी जीते। चारों निकायों में पार्टी बोर्ड बनाने में सफल रही, स्पष्ट बहुमत मिला। वन मंत्री संजय शर्मा: अपने बूथ के साथ ही खुद के वार्ड में भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। वार्ड 50 में कांग्रेस की रजनी सैनी की जीत से पार्टी के प्रदर्शन पर सवाल खड़े हुए। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे: झालावाड नगर परिषद के वार्ड 5 में भाजपा प्रत्याशी ने निर्विरोध जीत दर्ज की। नगर परिषद में कांग्रेस ने 29 सीटें को जीतकर चौंकाया। पिछली बार यहां भाजपा का बोर्ड था। उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी: वार्ड 141 के सिटी पैलेस स्थित बूथ पर मतदान किया था, यहां भाजपा प्रत्याशी विजयी हुए। विद्याधर नगर विधानसभा में भाजपा को 22 में से 12 सीटें मिली, दो के परिणाम बाकी हैं। मंत्री किरोड़ीलाल मीना: सवाईमोधापुर परिषद में भाजपा का पूर्ण बहुमत आया है। चुनाव के दौरान स्वाइन फ्लू से ग्रसित रहे, इस बीच दो दिन नगर परिषद में चुनाव प्रचार में रहे। उनका खुद का मत पंचायत क्षेत्र में है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर: वार्ड 52 के बूथ पर भाजपा को बढ़त मिली, लेकिन वार्ड से हार का सामना करना पड़ा। उनके विधानसभा क्षेत्र के छह वार्डों में नतीजों ने स्थानीय पकड़ की अलग तस्वीर दिखाई। स्पीकर वासुदेव देवनानी: अपने वार्ड 37 के बूथ के साथ ही खुद के वार्ड में भी भाजपा ने जीत दर्ज की। यहां भाजपा प्रत्याशी विजयी रहीं। अजमेर नगर निगम में भाजपा बहुमत हासिल नहीं कर पाई। कांग्रेस ने बढ़त बनाई। कांग्रेस के दिग्ग्जों का रिपोर्ट कार्ड पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत: गृह वार्ड 88 में भाजपा ने कांग्रेस को झटका दिया। सरदारपुरा विधानसभा क्षेत्र में कुल 26 वार्ड हैं। हालांकि, जोधपुर निगम में भाजपा-कांग्रेस का मुकाबला बराबरी पर टिका हुआ है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह: ये अपना वोट पंचायत में डालेंगे, लेकिन अपने निवास क्षेत्र सीकर में पार्टी का प्रदर्शन मजबूत रहा। सीकर में कांग्रेस की जीत ने पार्टी के प्रभाव को निकाय चुनाव में भी कायम रखा। विधायक प्रमोद जैन भाया: बारां के वार्ड 34 के निवासी है, जहां कांग्रेस तीसरे नम्बर पर रही। यहां आप प्रत्याशी ने जीत दर्ज की। भाया का वोट ग्रामीण क्षेत्र में है, लेकिन यहां निवासी करते हुए पार्टी को जीता नहीं पाए। पूर्व मंत्री बीडी कल्ला: बूथ महेश सदन में कांग्रेस आगे रही और वार्ड में भी कांग्रेस की सरिता व्यास ने जीत दर्ज की। उनके विधानसभा क्षेत्र के 39 वार्डों में से कांग्रेस ने 23 सीटें जीती हैं। विश्वेन्द्र सिंह: खुद के वार्ड 48 से कांग्रेस प्रत्याशी रामेश्वर सैनी हार गए। जबकि निर्दलीय प्रत्याशी मानवेंद्र सिंह जीते हैं। निर्दलीय की जीत पार्टी से नाराजगी या वोटों के बिखराव, पार्टी में इसकी चिंता शुरू हो गई। विधायक सचिन पायलट: खुद के वार्ड 97 को जीता नहीं पाए। यहां से भाजपा प्रत्याशी विजयी हुए। हालांकि, टोंक विधायक के रूप में कांग्रेस ने मजबूत प्रदर्शन किया। टोंक परिषद में काग्रेस को बहुमत मिला। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली: अपने ही प्रभाव क्षेत्र में झटका लगा। वार्ड 29 से भाजपा प्रत्याशी ने जीत दर्ज की। न तो बूथ जीता पाए और न ही वार्ड को। भाजपा की जीत से स्थानीय स्तर पर सियासी समीकरणों पर चर्चा चल रही है। विधायक शांति धारीवाल: कोटा में वार्ड 41 में कांग्रेस के मंगल तम्बोली विजयी रहे, लेकिन बूथ जीता नहीं पाए। बूथ पर भाजपा प्रत्याशी ने जीत दर्ज की। इनके विधड्डानसभा क्षेत्र में कुल 30 वार्ड हैं। पूर्व स्पीकर डॉ. सी.पी. जोशी: नाथद्वारा के वार्ड 21 से आते हैं, लेकिन अपने ही वार्ड में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। यहां भाजपा प्रत्याशी ने जीत दर्ज कर कांग्रेस के मजबूत माने जाने वाले इलाके में सेंध लगा दी।  

कम यात्री, बढ़ता खर्च… भोपाल मेट्रो ने घटाए फेरे, अब सामान्य दिनों में 41 ट्रिप ही होंगी

भोपाल  राजधानी भोपाल में मेट्रो के संचालन पर हो रहे भारी खर्च और सीमित आय के दबाव के बीच मेट्रो प्रबंधन ने एक नया दांव चला है। यात्रियों की संख्या बढ़ाने के लिए 15 मिनट की फ्रीक्वेंसी पर दिनभर 62 से 70 फेरे चलाने वाले प्रबंधन ने अब घाटा बढ़ता देख चुपचाप फेरों की संख्या में बड़ी कटौती कर दी है। 13 सितंबर को जारी संशोधित समय-सारणी के मुताबिक 15 सितंबर से नान-पीक आवर्स में मेट्रो के फेरे कम कर दिए गए हैं, जिसे प्रबंधन ने आंशिक संशोधन बताकर पेश किया है। जानकारी के अनुसार सामान्य दिन सोमवार से शनिवार 21 फेरे कम किए हैं। वहीं रविवार व अवकाश के दिन 6 फेरे कम किए हैं। खाली कोचों को दौड़ाना प्रबंधन की जेब पर पड़ रहा भारी     जबकि वर्तमान में रोजाना 500 से 700 यात्री मेट्रो में सफर कर रहे हैं, रविवार और अवकाश के दिनों में यह आंकड़ा 1000 से 1200 तक पहुंच रहा है। हालांकि, वर्तमान खर्च और आय का स्पष्ट ब्योरा देने से प्रबंधन अब भी बच रहा है।     सूत्रों की मानें तो मामूली इजाफे के बावजूद खाली कोचों को दौड़ाना प्रबंधन की जेब पर भारी पड़ रहा है। यही वजह है कि 17 अगस्त को सप्ताह के सभी दिनों में हर 15 मिनट की सेवा का दावा करने वाले प्रबंधन ने अब सुबह 11:30 से शाम 5:00 बजे तक फ्रीक्वेंसी को 30 मिनट कर दिया है। इससे सामान्य दिनों में दिनभर के फेरे 62 से घटकर सीधे 41 रह गए हैं। ऐप भी नहीं हो रहा अपडेट     एक तरफ मेट्रो यात्रियों की संख्या बढ़ाने पर पूरा जोर दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ प्रबंधन के अफसरों की लापरवाही देखिए कि एमपी मेट्रो का ऐप पर समय सारणी को अपडेट नहीं किया जा रहा है। लाखों रुपये खर्च करके एमपी मेट्रो का ऐप अप्रैल 2026 में लॉन्च हुआ था, लेकिन उसके बाद से लेकर अब तक ऐप को अपडेट नहीं किया गया है। ऐप पर आज भी वहीं पुराना टाइम टेबल दर्शाया जा रहा है।     इसके चलते मेट्रो में यात्रा करने वाले यात्रियों को सही जानकारी नहीं मिल पा रही है। ऐप में एम्स से मेट्रो के चलने का समय 9.30 बजे दर्शया जा रहा है। जबकि एम्स से मेट्रो सुबह 11 बजे रवाना होती है। सुभाष नगर से पहली मेट्रो वर्तमान में 11.30 बजे रवाना होती है, लेकिन ऐप में समय सुबह 8.50 दर्शाया जा रहा है। ऐसे घटाए गए फेरे     17 अगस्त की व्यवस्था: सुबह 11:30 से रात 7:30 बजे तक हर 15 मिनट में ट्रेनें चलीं। दिनभर में कुल 62 फेरे तय थे।     15 सितंबर की नई व्यवस्था: सुबह 11:30 से शाम 5:00 बजे तक फ्रीक्वेंसी 15 मिनट से बढ़ाकर 30 मिनट कर दी गई। इससे इस अवधि में सिर्फ 22 फेरे रह गए। शाम 5 से 7:30 बजे तक (15 मिनट के अंतराल पर) 19 फेरे चलेंगे। यानी कुल 41 फेरे ही होंगे।     कटौती का गणित: सामान्य दिनों में सीधे 21 फेरे कम किए गए, जबकि रविवार को 70 की जगह 64 फेरे यानी 6 फेरे कम चलेंगे। दावों के बीच फेरों का गणित     वर्तमान राइडरशिप: रोजाना 500 से 700 यात्री, रविवार-अवकाश में 1000 से 1200 तक।     शुरुआती ट्रेंड: पहले हफ्ते हजारों में भीड़, एक महीने बाद 150 से 300 पर सिमटी।     सोमवार से शनिवार कटौती: 17 अगस्त को तय 62 फेरे से घटाकर अब 41 फेरे किए सीधे 21 फेरे कम।     रविवार के फेरे: 70 फेरे से घटाकर 64 फेरे किए 6 फेरे कम।     नया टाइम टेबल: सुबह 11:30 से शाम 5:00 बजे तक हर 30 मिनट में, शाम 5:00 से 7:30 बजे तक हर 15 मिनट में संचालन। इनका कहना है पहले 15 मिनट में मेट्रो एक फेरा लग रहा थी, अब 30 मिनट में मेट्रो एक फेरा लगा रही है। नया टाइम टेबल लोगों की डिमांड को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इससे फेरों की संख्या कम हुई है। एस कृष्ण चैतन्य, एमडी, एमपी मेट्रो  

बिजली कटौती को लेकर पंजाब में बढ़ा आक्रोश, किसान-उद्योगपति सड़कों पर; सरकार ने लिया बड़ा फैसला

जालंधर पंजाब में बिजली कटौती को लेकर हाहाकार मच गया है। बिजली कटों से परेशान लोगों सड़कों पर उतर आए। वहीं राजनीतिक दलों ने भी सरकार का विरोध किया। लगातार बढ़ते विरोध के बीच सरकार ने पीएसपीसीएल के सीएमडी आईएएस बसंत गर्ग को हटा दिया और उनकी जगह गुरकीरत किरपाल सिंह को नया सीएमडी नियुक्त कर दिया।  सरकार का दावा-संकट खत्म वहीं विरोध के बीच बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने दावा किया कि पंजाब ने बिजली संकट पर काबू पा लिया है। 13 सितंबर सुबह सात बजे से बिजली की कमी के कारण कोई कट नहीं लगाया गया और आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक तथा कृषि क्षेत्र को 24 घंटे बिजली मिल रही है।  सौंद के अनुसार, दो निजी ताप विद्युत संयंत्रों की तकनीकी खराबियां दूर कर दी गई हैं और एक अन्य निजी प्लांट से करीब 100 मेगावाट बिजली मिलनी शुरू हो गई है। किसानों को सिंचाई के लिए आठ के बजाय 10 घंटे बिजली देने का भी दावा किया गया। उन्होंने बिजली संकट के लिए केंद्र से कोयले में कटौती और पंजाब के हिस्से की करीब 1,000 मेगावाट बिजली नहीं मिलने को भी कारण बताया। मंत्री ने कहा कि राज्य के पास करीब 17,000 मेगावाट तक की मांग पूरी करने की क्षमता है। जगह-जगह फूटा गुस्सा सोमवार को पटियाला में पावरकॉम मुख्यालय की ओर बढ़ रहे कांग्रेसियों को रोकने के लिए पुलिस ने पानी की बौछारें मारीं और प्रदेश कांग्रेस प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया। जगरांव में किसानों ने चार घंटे धरना देने के बाद जगरांव-जालंधर मार्ग जाम कर दिया। फरीदकोट में भी किसानों ने पावरकॉम कार्यालय का घेराव किया।    लुधियाना में डाइंग उद्योगपतियों ने वर्धमान चौक पर लुधियाना-चंडीगढ़ रोड जाम किया। उन्होंने रोजाना करीब 14 घंटे बिजली कटौती का आरोप लगाया। उद्योगपतियों के अनुसार इससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है और श्रमिक फैक्टरियां छोड़ रहे हैं। उन्होंने बिजली की दर करीब आठ से बढ़कर 9.50 रुपये प्रति यूनिट होने और एक फैक्टरी का बिल 15 लाख से बढ़कर 18 लाख रुपये तक पहुंचने का दावा किया। रिकॉर्ड 17,405 मेगावाट मांग, 1,478 मेगावाट उत्पादन ठप पंजाब में सोमवार को बिजली की मांग 17,405 मेगावाट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। 18 जुलाई को 17,452 मेगावाट की सर्वाधिक मांग दर्ज हुई थी। मांग के दबाव के बीच करीब 1,478 मेगावाट उत्पादन क्षमता प्रभावित रही। रोपड़, लहरा मोहब्बत और तलवंडी साबो थर्मल की कुछ इकाइयां कम क्षमता पर चलीं, जबकि पानी की कमी से हाइडल की पांच इकाइयां बंद रहीं। पावरकॉम के मुताबिक इसके बावजूद उद्योग, शहर और गांव में कोई कट नहीं लगाया गया।     

प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और किसानों की मेहनत का पर्व है नुआखाई : मुख्यमंत्री साय

नुआखाई समृद्ध कृषि परंपरा, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और अन्नदाता के परिश्रम का उत्सव : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्यमंत्री ने नुआखाई पर्व की दी हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं रायपुर   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नई फसल के स्वागत और प्रकृति के अनुपम उपहार के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने वाले पावन पर्व नुआखाई के अवसर पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अन्नदाता किसानों की सुख-समृद्धि, अच्छी फसल और सभी परिवारों की खुशहाली की मंगलकामना की है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नुआखाई समृद्ध कृषि संस्कृति और लोक परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। नई फसल के आगमन की खुशी में मनाया जाने वाला यह पर्व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, अन्न के सम्मान और किसान के अथक परिश्रम के प्रति आदर का भाव प्रकट करता है। खेतों में उपजी नई फसल केवल किसान की मेहनत का प्रतिफल नहीं, बल्कि प्रकृति की कृपा और हमारी कृषि प्रधान संस्कृति की समृद्धि का भी प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति में खेती-किसानी केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि हमारे सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है। हमारे अनेक पर्व और परंपराएं कृषि चक्र, प्रकृति और लोकजीवन से गहराई से जुड़ी हुई हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नुआखाई अपनी मिट्टी, अपनी जड़ों और अपनी गौरवशाली परंपराओं से जुड़े रहने की प्रेरणा देता है। यह पर्व सामाजिक आत्मीयता, पारिवारिक एकजुटता और आपसी सद्भाव को भी मजबूत करता है। नई फसल की खुशियां जब परिवार और समाज मिलकर साझा करते हैं, तब लोकसंस्कृति और अधिक जीवंत तथा समृद्ध होती है। मुख्यमंत्री साय ने नुआखाई के पावन अवसर पर कामना करते हुए कहा कि प्रकृति की कृपा छत्तीसगढ़ पर सदैव बनी रहे। हमारे किसान साथियों के खेत हरे-भरे और फसलों से लहलहाते रहें, अन्न के भंडार भरें तथा अन्नदाताओं के घर-आंगन में समृद्धि आए। प्रदेश के प्रत्येक परिवार के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली का संचार हो तथा आपसी प्रेम, भाईचारा और सद्भाव निरंतर मजबूत होता रहे।

पंजाब पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 1,234 गैंगस्टर मॉड्यूल ध्वस्त; विदेशों से 10 भगोड़ों को लाया गया भारत

चंडीगढ़  पंजाब सरकार ने गैंगस्टरों और नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई को तेज करते हुए अब तक की गई पुलिस कार्रवाई के आंकड़े साझा किए हैं। सरकार की ओर से सोमवार को ‘गैंगस्टरों पर वार’ और ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ अभियान को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई। इस दौरान गैंगस्टरों और नशा तस्करों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई की जानकारी दी गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के निर्देशों पर पंजाब पुलिस ने अब तक 1,234 गैंगस्टर मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है। इसके साथ ही विदेशों में छिपे 10 भगोड़ों को डिपोर्ट करवाकर भारत लाया गया है। पुलिस की कार्रवाई का उद्देश्य पंजाब में सक्रिय गैंगस्टर नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करना और अपराध पर प्रभावी ढंग से लगाम लगाना है। नशा तस्करी के रूट पर भाजपा को घेरा प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने नशे की तस्करी को लेकर भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर गुजरात स्थित मुंद्रा पोर्ट पर ध्यान दिया जाए तो पंजाब में नशे की समस्या लगभग खत्म हो जाएगी। उन्होंने दावा किया कि पंजाब पुलिस ने मुंद्रा पोर्ट से नशे की बड़ी खेप बरामद की है और करीब 3,000 किलो नशा वहां जब्त किया गया था। मान ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमा से तस्करी रोकना मुख्य रूप से केंद्र की जिम्मेदारी है, फिर भी पंजाब सरकार ने अपने फंड से एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि 532 किलोमीटर लंबी सीमा के पार से पंजाब में नशा भेजने की कोशिशें जारी हैं। उनके मुताबिक सरकार ने केवल गिरफ्तारियों पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि नशा और गैंगस्टर नेटवर्क की पहचान, सप्लाई चेन को तोड़ने, वित्तीय माध्यमों को रोकने और अपराधियों को कानून के कठघरे में लाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस बिना किसी राजनीतिक प्रभाव के कार्रवाई कर रही है। विपक्ष पर 'गिद्धों वाली राजनीति' का आरोप मान ने कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा पर पंजाब को लेकर सकारात्मक एजेंडा पेश करने के बजाय राजनीतिक लाभ के लिए घटनाओं का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने विपक्ष की राजनीति को 'गिद्धों वाली राजनीति' बताते हुए कहा कि लोग विवाद नहीं, समाधान चाहते हैं। साथ ही उन्होंने कांग्रेस और अकाली दल पर पहले गैंगस्टरों को राजनीतिक संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब को कुछ घटनाओं के आधार पर बदनाम नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य देश का प्रवेश द्वार और भारत का गौरव है। सरकार पंजाब को सुरक्षित, नशामुक्त और खुशहाल बनाने के लिए अपनी कार्रवाई जारी रखेगी तथा किसी भी शरारती तत्व को राज्य की शांति और सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा। मान ने बताया कि 2022 से एजीटीएफ ने 1.24 लाख गैंगस्टरों और उनके सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई की है। उनके अनुसार 1,170 हथियार, 15 हथगोले, 858.26 किलो हेरोइन, 480.26 किलो अफीम, 3,056.85 ग्राम सोना और 1.28 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए हैं। पंजाब पुलिस ने दूसरे देशों से 18 गैंगस्टरों को डिपोर्ट कराया है। उन्होंने कहा कि सरकार का रोडमैप स्पष्ट है और नशों, गैंगस्टरों तथा संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। वहीं, नशा तस्करों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत अब तक 60,582 एफआईआर दर्ज की गई हैं। नशे के कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ वित्तीय कार्रवाई करते हुए करीब 366 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है।सरकार ने दावा किया कि पंजाब में फिलहाल अमन-शांति पूरी तरह कायम है और राज्य की सुरक्षा को लेकर सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।   पंजाब की शांति और कानून-व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी व्यक्ति या संगठन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि गैंगस्टरों और नशा तस्करों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और पंजाब की धरती पर अपराध तथा नशे के नेटवर्क को किसी भी कीमत पर पनपने नहीं दिया जाएगा।

दिल्ली में अवैध इमारतों पर MCD का एक्शन, 2,453 भवनों का सर्वे, 14 गिराने के आदेश

नई दिल्ली  सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने खतरनाक और अवैध रूप से बनी इमारतों के खिलाफ सोमवार को भी कार्रवाई जारी रखी। 40 इमारतों में तोड़फोड़ की गई, जबकि 8 प्रॉपर्टी सील की गईं। इसके अलावा बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन करने के आरोप में 14 इमारतों को गिराने के ऑर्डर पास किए गए। अधिकारियों ने बताया कि सत्य निकेतन में खतरनाक बिल्डिंग को तोड़ने का काम लगातार चल रहा है। 5वीं और चौथी मंजिल पूरी तरह तोड़ी जा चुकी है, जबकि तीसरी मंजिल को तोड़ने का काम चल रहा है। अधिकारी के अनुसार, मंगलवार को तीसरी मंजिल टूटने के बाद बिल्डिंग पर JCB से कार्रवाई शुरू की जाएगी। बिल्डिंग को पूरी तरह जमीन से मिलाने के बाद दूसरी खतरनाक इमारतों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू होगी। अब तक सर्वे में करीब 2,453 इमारतों की पहचान हुई MCD ने सोमवार को तोड़फोड़ की कार्रवाई के दौरान करोल बाग जोन के टीसी कैंप, ब्लॉक-टी, पांडव नगर, ईस्ट पटेल नगर, रेगरपुरा, करोल बाग, माता रामेश्वरी, नेहरू नगर और नारायणा इंडस्ट्रियल एरिया, फेज-I में भी कार्रवाई की। ईस्ट जोन में ईस्ट विनोद नगर, मयूर बिहार फेज-दो, रघुबरपुरा और गांधी नगर के धर्मपुरा समेत विभिन्न इलाकों में कार्रवाई की गई। 2,453 इमारतों का सर्वे MCD के सर्वे में अब तक करीब 2,453 इमारतों की पहचान की गई है, जिनमें नियमों के उल्लंघन और सुरक्षा से जुड़ी कमियां सामने आई हैं। इन इमारतों में आगे भी जांच और कार्रवाई का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। कई इलाकों में जारी रहेगी कार्रवाई अधिकारियों के अनुसार, सर्वे के दौरान खतरनाक और अवैध निर्माण वाली इमारतों को चिन्हित किया जा रहा है। रिपोर्ट के आधार पर संबंधित प्रॉपर्टी के खिलाफ तोड़फोड़, सीलिंग या अन्य जरूरी कार्रवाई की जाएगी।

UP वृद्धावस्था पेंशन में बड़ा बदलाव, 1500-1500 रुपये की किस्त; पैसा नहीं आया तो ये करें

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के लाखों बुजुर्गों के लिए राहत भरी खबर है। योगी सरकार ने बुजुर्गों की पेंशन का नियम बदलते हुए नई किस्त व्यवस्था लागू कर दी है, जिसके तहत अब तीन महीने की कुल 3,000 रुपये की पेंशन राशि एक साथ मिलने के बजाय दो बराबर किस्तों (1500 और 1500) में सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जा रही है। सितंबर 2026 के दूसरे सप्ताह से राज्य के कई जिलों में इस नई व्यवस्था के तहत लाभार्थियों के खातों में पैसे आने शुरू हो गए हैं। सरकार की ओर से डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सीधे बुजुर्गों के खातों में पेंशन का पैसा ट्रांसफर किया जा रहा है। हालांकि, कई बार देखने में आता है कि सरकार की तरफ से पैसा जारी होने के बावजूद बहुत से बुजुर्गों के बैंक खातों में पेंशन की राशि नहीं पहुंच पाती। ऐसे में बुजुर्ग परेशान होकर दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर हो जाते हैं। UP Old Age Pension 2026 | अगर आपके खाते में भी इस बार पेंशन का पैसा नहीं आया है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आप घर बैठे या अपने नजदीकी जन सेवा केंद्र जाकर कुछ जरूरी काम करा लें, जिससे आपकी रुकी हुई पेंशन तुरंत खाते में आ जाएगी आइये सबसे पहले ये समझते हैं कि खाते में पैसा न पहुंचने के क्या कारण हैं- खाते में पैसा न आने के मुख्य कारण-     समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पेंशन का पैसा न अटकने का सबसे बड़ा कारण डॉक्यूमेंट्स का अपडेट न होना है। जैसे कि सरकार ने पेंशन में हो रहे फर्जीवाड़े को रोकने के लिए ई-केवाईसी अनिवार्य कर दिया है। जिन लाभार्थियों ने अभी तक बायोमीट्रिक या ओटीपी के जरिए ई-केवाईसी नहीं कराया है, उनकी किस्त रोक दी गई है।     पेंशन का पैसा अब केवल DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) मोड से भेजा जाता है। अगर आपका बैंक खाता आपके आधार कार्ड से सीडेड (लिक्ंड) नहीं है, तो पैसा खाते में नहीं आएगा।     इसके अलावा बैंक खाते में नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) मैपिंग एक्टिव न होना भी एक बड़ी वजह है।     नाम, स्पेलिंग, आईएफएससी कोड या बैंक खाता संख्या में कोई छोटी सी गलती होने पर भी भुगतान अटक जाता है। पेंशन न आने पर तुरंत करें ये काम 1- सबसे पहले वेबसाइट पर जाकर चेक करें स्टेटस सबसे पहले आपको यूपी समाज कल्याण विभाग की आधिकारिक वेबसाइट (sspy-up.gov.in) पर जाना होगा। वहां 'वृद्धावस्था पेंशन' वाले सेक्शन में जाकर 'आवेदक लॉगिन' पर क्लिक करें। अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर डालकर स्टेटस चेक करें। अगर स्टेटस में किसी प्रकार की त्रुटि (Error) दिख रही है, तो उसे तुरंत सही कराएं। 2. ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया पूरी करें अगर आपका ई-केवाईसी पेंडिंग है, तो इसे बिना देरी किए पूरा करें। इसे आप खुद अपने मोबाइल से पोर्टल पर जाकर आधार नंबर और ओटीपी के जरिए कर सकते हैं। यदि आपके पास स्मार्टफोनन नहीं है, तो नजदीकी सीएससी (जन सेवा केंद्र) पर जाकर बायोमीट्रिक (अंगूठे का निशान) देकर ई-केवाईसी को 5 मिनट में पूरा करा सकते हैं। 3. बैंक शाखा जाकर आधार और NPCI सीडिंग कराएं अगर आपका ई-केवाईसी पहले से पूरा है, फिर भी पैसा नहीं आया, तो अपनी बैंक शाखा में जाएं। वहां जाकर यह सुनिश्चित करें कि आपका खाता Aadhaar Seeded और DBT Enabled है या नहीं। बैंक कर्मचारी से बोलकर अपने खाते को NPCI से तुरंत लिंक करवाएं। 4. जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय में संपर्क करें यदि सारे डॉक्यूमेंट्स सही होने के बावजूद खाते में पैसा नहीं आ रहा है, तो अपने जिले के विकास भवन स्थित 'जिला समाज कल्याण अधिकारी' के कार्यालय में जाएं। वहां अपने आधार कार्ड, बैंक पासबुक और पेंशन रजिस्ट्रेशन नंबर की फोटोकॉपी के साथ एक आवेदन पत्र जमा करें। अधिकारी आपकी फाइल चेक करके समस्या का तुरंत समाधान कर देंगे। बुजुर्गों के लिए हेल्पलाइन सुविधा अगर आपको ऑनलाइन प्रक्रिया में कोई परेशानी आ रही है या आप चलकर दफ्तर नहीं जा सकते, तो उत्तर प्रदेश सरकार के समाज कल्याण विभाग के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 14567 या मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर कॉल कर सकते हैं। कॉल पर अपना रजिस्ट्रेशन नंबर बताकर आप अपनी पेंशन का स्टेटस जान सकते हैं और शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं। सरकार का कहना है कि किसी भी पात्र बुजुर्ग की पेंशन बंद नहीं की जाएगी। जैसे ही आप अपनी ई-केवाईसी और बैंक खाते की गड़बड़ी को सही करवा लेंगे, तो आपकी रुकी हुई पुरानी किस्त और नई किस्त दोनों एक साथ आपके खाते में भेज दी जाएंगी। इसलिए बिना देर किए अपनी बैंक डिटेल्स और केवाईसी तुरंत अपडेट करा लें।  

हरियाणा में 2814 स्कूलों पर बड़ा एक्शन, 30 सितंबर तक गिरेंगी असुरक्षित इमारतें

चंडीगढ़ हरियाणा में सरकारी स्कूलों में असुरक्षित भवनों को ढहाकर नए कमरे बनाए जाएंगे। प्रदेश में 2814 स्कूल चिन्हित किए गए हैं, जहां कक्षाएं जर्जर कमरों में चल रही हैं। सभी असुरक्षित भवनों को गिराने के लिए 30 सितंबर तक का समय दिया गया है। इतना ही नहीं, मानसून के दौरान जिन 700 स्कूलों में जलभराव की समस्या आई थी, उनमें मिट्टी का भराव करने के साथ ही चहारदीवारी का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जल्द ही शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक लेंगे, जिसके चलते विभागीय अधिकारी कमियों को दूर करने में जुट गए हैं। 150 राजकीय विद्यालयों के नए भवन अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा 719 उत्कृष्ट विद्यालयों के सुदृढ़ीकरण पर काम शुरू हो गया है। इनमें संस्कृति माडल स्कूल, मुख्यमंत्री अर्ली इंग्लिश एंड एक्सीलेंस स्कूल तथा पीएम श्री विद्यालय शामिल हैं। सभी उत्कृष्ट विद्यालयों में नए भवन, अतिरिक्त कक्षाएं, पृथक शौचालय, मजबूत चहारदीवारी, खेल मैदान, विज्ञान व कंप्यूटर प्रयोगशालाएं, डिजिटल लैब, स्मार्ट कक्षाएं, पुस्तकालय, नया फर्नीचर, टैबलेट तथा अन्य आधुनिक शिक्षण संसाधन प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराए जाएंगे। हर जिले में एक माडल बाल-वाटिका बनाई जाएगी। हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद के निदेशक ने सभी अतिरिक्त उपायुक्तों, जिला शिक्षा अधिकारियों और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हुई बैठक में कहा है कि असुरक्षित इमारतों को ढहाने से लेकर बजट खर्च न करने वाले अफसरों पर सीधी कार्रवाई की जाएगी। 30 सितंबर तक स्कूल भवनों के सत्यापन, कंडम घोषित करने और ध्वस्तीकरण का काम पूरा करने को कहा गया है। 647 स्कूलों में मौसमी और 53 स्कूलों में स्थायी रूप से पानी भरने की समस्या से निजात पाने के लिए जिला शिक्षा अधिकारियों को मिट्टी भराव के लिए तुरंत नया बजट एस्टिमेट भेजने को कहा है। स्कूलों में बेकार पड़े कंप्यूटर और प्रिंटर सहित अन्य आइटी उपकरणों को निर्धारित पालिसी के तहत निपटाने के आदेश दिए गए हैं पौधरोपण में अंबाला सबसे आगे, फरीदाबाद और पलवल पिछड़े बैठक में 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान की समीक्षा में बताया गया कि हरियाणा में 12.50 लाख के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 8.25 लाख पौधे लगा दिए गए हैं। अंबाला जिला लक्ष्य का 119 प्रतिशत काम पूरा कर पहले स्थान पर है, जबकि फरीदाबाद में सिर्फ तीन प्रतिशत और पलवल में सिर्फ आठ प्रतिशत लक्ष्य हासिल हुआ है।