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पढ़ाई के साथ व्यक्तित्व निर्माण, सर्वोदय विद्यालयों में एनसीसी से निखर रहा भविष्य

लखनऊ योगी सरकार में प्रदेश के सर्वोदय विद्यालयों में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ उनके सर्वांगीण विकास के अवसर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों में राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) से विद्यार्थियों को जोड़कर उनमें अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और राष्ट्रसेवा की भावना विकसित की जा रही है। वर्तमान में पांच सर्वोदय विद्यालयों के 344 छात्र-छात्राएं एनसीसी प्रशिक्षण से जुड़े हैं। इटावा में एनसीसी की नई इकाई, 80 विद्यार्थियों को मिलेगा अवसर विद्यार्थियों को एनसीसी से जोड़ने की दिशा में इटावा के जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय कंधनी को 80 सीट की नई एनसीसी जूनियर डिवीजन इकाई आवंटित की गई है। विद्यालय में एनसीसी के निर्देशों के अनुसार प्रशिक्षण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इससे विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ अनुशासन और नेतृत्व विकास का नया मंच मिलेगा। वहीं इटावा के नगला हीरालाल विद्यालय में पहले से 50 कैडेट एनसीसी से जुड़े हुए हैं। पांच विद्यालयों में 344 कैडेट, प्रशिक्षण से बढ़ रहा आत्मविश्वास वर्तमान सत्र में बस्तौरा, रसड़ा (बलिया) में 50 विद्यार्थियों का चयन हुआ है, जिनमें 44 कैडेट 10 दिवसीय प्रशिक्षण के लिए गए हैं। नगला हीरालाल, इटावा में 50, भोजीपुरा, बरेली में 100, परसिया, मिर्जापुर में 66 और सर्वोदय बालिका विद्यालय मड़िहान, मिर्जापुर में 34 छात्राएं एनसीसी से जुड़ी हैं। इस तरह इन विद्यालयों में कुल 344 विद्यार्थी एनसीसी प्रशिक्षण का लाभ उठा रहे हैं। परेड से सामाजिक सेवा तक, व्यक्तित्व विकास का बन रहा आधार एनसीसी प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को परेड, शारीरिक प्रशिक्षण, शिविर, सामाजिक सेवा और साहसिक गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलता है। इससे उनमें टीम भावना, जिम्मेदारी, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता विकसित होती है। एनसीसी प्रमाणपत्र भी निर्धारित नियमों के तहत आगे विभिन्न शैक्षणिक और रोजगार अवसरों में उपयोगी हो सकते हैं। समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि सर्वोदय विद्यालयों में शिक्षा के साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। एनसीसी के माध्यम से बच्चों में अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्रसेवा की भावना मजबूत होगी। कंधनी जैसे विद्यालयों में एनसीसी इकाई का विस्तार विद्यार्थियों को नए अवसर देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्य सरगना सहित 6 साइबर ठग राजस्थान और बिहार से गिरफ्तार

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा साइबर अपराधों के विरुद्ध लगातार कार्यवाही की जा रही है। इसी क्रम में मंदसौर पुलिस ने साइबर ठगी के एक संगठित अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए मुख्य सरगना सहित 6 आरोपियों को गिरफ्तार करने में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर की गई इस कार्रवाई में सामने आया कि गिरोह देश के अलग-अलग हिस्सों से मेट्रिमोनियल साइट्स के माध्यम से लोगों को विश्वास में लेकर ठगी करता था। प्रारंभिक जांच में गिरोह द्वारा 11 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी और 150 से अधिक साइबर घटनाओं को अंजाम दिए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 22 एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 30 मोबाइल सिम एवं 5 एटीएम कार्ड जब्त किए हैं। विभिन्न बैंक खातों में जमा 8 लाख रुपये से अधिक की राशि को फ्रीज कराया है। जिले के शामगढ़ निवासी पीड़िता मेट्रिमोनियल वेबसाइट पर अपना प्रोफाइल अपडेट करने के बाद साइबर ठगों के संपर्क में आई थी। आरोपी ने स्वयं को NRI बताकर पीड़िता से शादी करने का विश्वास दिलाया। नकली फोटो और कथित परिजनों के माध्यम से व्हाट्सएप पर बातचीत कर पीड़िता का विश्वास हासिल किया गया। इसके बाद विदेश से गिफ्ट भेजने, गिफ्ट कस्टम में पकड़े जाने तथा कस्टम ड्यूटी एवं प्रोसेसिंग फीस के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में राशि जमा कराई गई। इस तरह पीड़िता से 7 लाख 50 हजार रुपये की ठगी की गई। शिकायत मिलने पर थाना शामगढ़ में प्रकरण दर्ज कर जांच प्रारंभ की गई। पुलिस अधीक्षक मंदसौर  विनोद कुमार मीना के निर्देशन में प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए विशेष टीम गठित की गई। टीम ने लगभग दो माह तक तकनीकी साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया और साइबर ठगी से जुड़े डिजिटल एवं बैंकिंग नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ा। लगातार किए गए तकनीकी विश्लेषण से आरोपियों की जानकारी प्राप्त होने के बाद पुलिस टीम ने योजनाबद्ध तरीके से राजस्थान के जयपुर में दबिश देकर आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ एवं विवेचना में सामने आए तथ्यों के आधार पर गिरोह के एक अन्य सदस्य एवं मुख्य सरगना को बिहार के अरवल जिले से गिरफ्तार किया गया। 150 से अधिक म्यूल बैंक खाते और सिम के जरिए चल रहा था नेटवर्क जांच में सामने आया कि साइबर ठगी का यह नेटवर्क अलग-अलग स्तर पर काम कर रहा था। गिरोह द्वारा 150 से अधिक म्यूल बैंक अकाउंट एवं म्यूल मोबाइल सिम का उपयोग किया गया। अधिकांश मोबाइल सिम आगरा, फिरोजाबाद, दिल्ली एवं बिहार से प्राप्त की गई थीं, जबकि कुछ सिम एवं बैंक खाते भोपाल से भी प्राप्त कर उपयोग किए गए। गिरोह के सदस्य अलग-अलग राज्यों में ठगी की रकम निकालते थे। निश्चित समय अंतराल के बाद वह अपने स्‍थान बदल लेते थे। बैंक खाते फ्रीज होने पर संबंधित मोबाइल फोन, सिम, पासबुक एवं एटीएम आदि नष्ट कर दिए जाते थे और अगली ठगी के लिए नए मोबाइल, सिम एवं बैंक खातों का उपयोग किया जाता था। गिरोह का एक मुख्य व्यक्ति विभिन्न बैंक खातों में जमा राशि की जानकारी रखता था और सदस्यों को राशि निकालने तथा निर्धारित खातों में जमा करने के निर्देश देता था। मध्यप्रदेश पुलिस आमजन से अपील करती है कि अनजान व्यक्तियों द्वारा भेजे गए लिंक पर क्लिक न करें। मेट्रिमोनियल साइट, ऑनलाइन ट्रेडिंग, निवेश, गिफ्ट अथवा किसी अन्य आकर्षक प्रस्ताव के माध्यम से किए जा रहे संपर्क में सावधानी बरतें। किसी भी व्यक्ति के साथ ओटीपी, पिन, पासवर्ड एवं अन्य गोपनीय जानकारी साझा न करें। साइबर फ्रॉड होने पर तत्काल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें अथवा cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।  

रावी नदी के बदलते बहाव से बॉर्डर सुरक्षा की चुनौती, पूर्व अधिकारी ने शाह को दिए 7 सुझाव

चंडीगढ़  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से शुरू की गई प्रहार (पीआरएएचएएआर) राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी नीति और रणनीति को पंजाब की सीमा पर जमीनी स्तर पर लागू करने की जरूरत है। पंजाब के पूर्व विशेष मुख्य सचिव केबीएस सिद्धू ने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर रावी दरिया से लगती सीमा की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ सीमा क्षेत्र के गांवों की समस्याओं को दूर करने के लिए सात सुझाव दिए हैं। उन्होंने पत्र की प्रति पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया और मुख्यमंत्री भगवंत मान को भी भेजी है। सिद्धू ने कहा कि केंद्र सरकार ने आतंकवाद से निपटने के लिए व्यापक रणनीति तैयार की है, लेकिन इसका असर सीमा के अंतिम छोर तक पहुंचना जरूरी है। उन्होंने अपने सुझावों को प्रहार के सात स्तंभों से जोड़ते हुए पंजाब की सीमा की मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर उपाय करने की बात कही है। सिद्धू पंजाब में बतौर बटाला के जिला मजिस्ट्रेट, अमृतसर के उपायुक्त और अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। रावी नदी के बदलते बहाव से सुरक्षा चुनौती सिद्धू ने रावी दरिया के नदी क्षेत्र को विशेष चुनौती बताते हुए कहा कि नदी लगभग हर मानसून में अपना रास्ता बदलती है। ऐसे में नदी के बीच बाड़ लगाना संभव नहीं है। उन्होंने ब्रह्मपुत्र में इस्तेमाल हो रहे व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन सिस्टम को रवि और सतलुज के नदी वाले हिस्सों तक विस्तार देने का सुझाव दिया। उनके अनुसार बाढ़ से निपटने के लिए बाड़ की डिजाइन सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और पंजाब के सिंचाई विभाग को मिलकर तैयार करनी चाहिए। वर्ष 2025 की बाढ़ में गुरदासपुर के सीमावर्ती क्षेत्र में सीमा चौकियों और बाड़ को नुकसान पहुंचने का भी उन्होंने उल्लेख किया। ड्रोन से नशे की तस्करी पर तकनीकी निगरानी सिद्धू ने सीमा पर ड्रोन के खतरे से निपटने के लिए कई स्तर वाली काउंटर-ड्रोन व्यवस्था बनाने की मांग की है। ड्रोन से बरामद सामान के आंकड़ों के आधार पर एआई की मदद से संभावित ड्रॉप जोन की पहचान करने और जिला पुलिस व प्रशासन से मिलने वाली सूचनाओं को राष्ट्रीय खुफिया सूचना तंत्र से जोड़ने का सुझाव दिया है। उन्होंने सीमा जिलों में नशे और आतंकवाद से जुड़े मामलों के लिए विशेष अदालतें और नजदीक फोरेंसिक प्रयोगशालाएं स्थापित करने की बात कही। साथ ही नशामुक्ति, पुनर्वास और सीमा क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार को भी राष्ट्रीय नशा विरोधी अभियान में पर्याप्त महत्व देने का सुझाव दिया। मकौड़ा पत्तन पर स्थायी पुल की मांग सीमा क्षेत्र के गांवों की समस्याओं को उठाते हुए सिद्धू ने गुरदासपुर के मकौड़ा पत्तन पर स्थायी पुल बनाने की मांग की है। फिलहाल रवि पार बसे गांवों के लोग मौसमी पोंटून पुल पर निर्भर हैं। उन्होंने बाड़ के पार खेती करने वाले किसानों के लिए उचित गेट टाइमिंग और मुआवजे की व्यवस्था करने का सुझाव दिया। सीमा ब्लाकों में शिक्षकों, डाक्टरों और राजस्व कर्मचारियों के लिए कठिन क्षेत्र प्रोत्साहन तथा सीमा गांवों से अधिक संख्या में बॉर्डर विंग होम गार्ड भर्ती करने की भी मांग की गई है। उन्होंने उपायुक्त और एसडीएम स्तर के अधिकारियों को भी प्रहार रणनीति का प्रशिक्षण देने का सुझाव दिया। सिद्धू ने कहा कि हर गिराए गए ड्रोन का पूरा दस्तावेज तैयार किया जाना चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के पक्ष में इसका इस्तेमाल हो सके। उन्होंने करतारपुर गलियारे को मानवीय संपर्क का माध्यम बनाए रखने की बात भी कही।

विधान परिषद चुनाव को लेकर NDA की रणनीति तैयार, 8 सीटों पर मिलकर चुनाव लड़ेंगे घटक दल

 पटना बिहार में विधान परिषद की आठ सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर एनडीए ने अब अपनी चुनावी तैयारी तेज कर दी है। बुधवार को पटना स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में गठबंधन के घटक दलों के प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता एक मंच पर जुटे। बैठक में चुनावी रणनीति के साथ-साथ सहयोगी दलों के बीच बेहतर तालमेल और संगठनात्मक समन्वय पर चर्चा हुई। एनडीए नेताओं ने साफ किया कि चुनाव में गठबंधन एकजुट होकर मैदान में उतरेगा। बैठक के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने सभी आठ सीटों पर एनडीए की जीत का दावा किया। अब नजर इस बात पर है कि गठबंधन अपनी साझा रणनीति को चुनावी मैदान में किस तरह उतारता है। 8 सीटें और NDA का एक ही लक्ष्य, जीत के लिए क्या बनी रणनीति? बैठक में भाजपा, जदयू, लोजपा (रामविलास), आरएलएम और हम के नेताओं ने हिस्सा लिया। सहयोगी दलों के बीच चुनावी तैयारियों को लेकर विस्तार से मंथन किया गया। संगठन से लेकर कार्यकर्ताओं के स्तर तक समन्वय मजबूत करने पर जोर दिया गया। गठबंधन की कोशिश है कि चुनाव में अलग-अलग दलों की ताकत को एक साझा रणनीति के तहत इस्तेमाल किया जाए। सरावगी ने कहा कि सभी घटक दल मिलकर चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने उम्मीदवारों की जीत के लिए पूरी ताकत से काम करने की बात कही। BJP दफ्तर में जुटे सहयोगी, ‘एकजुट NDA’ का दिया संदेश बैठक में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी के साथ जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा भी मौजूद रहे। लोजपा (रामविलास) के प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार और आरएलएम के प्रदेश अध्यक्ष आलोक कुमार सिंह ने भी हिस्सा लिया। हम की ओर से प्रदेश उपाध्यक्ष प्रो. डीएन सिन्हा बैठक में शामिल हुए। इसके अलावा सत्ता पक्ष के मुख्य सचेतक संजीव चौरसिया और संजय गांधी समेत कई नेता मौजूद रहे। बैठक से गठबंधन के घटक दलों के बीच चुनावी तालमेल का संदेश देने की कोशिश हुई। नेताओं ने साझा रणनीति के साथ चुनाव लड़ने पर जोर दिया। सरावगी का बड़ा दावा—‘सभी आठ सीटों पर जीत तय’ बैठक के बाद संजय सरावगी ने कहा कि एनडीए पूरी मजबूती के साथ विधान परिषद चुनाव में उतरेगा। उन्होंने गठबंधन के भीतर बेहतर समन्वय और साझा रणनीति की बात कही। सरावगी के मुताबिक सभी घटक दल एक साथ चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने सभी उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करने का दावा किया। एनडीए नेताओं ने भी बैठक में सभी आठ सीटों पर जीत का भरोसा जताया। अब चुनावी मैदान में इस दावे को संगठन और वोट में बदलना गठबंधन के सामने अहम चुनौती होगी। ‘किसी को समस्या है तो CM तक बात पहुंचाएं’, सरावगी का संदेश बैठक में गठबंधन के भीतर संवाद और समन्वय के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। सरावगी ने कहा कि एनडीए की कार्यशैली सामूहिक निर्णय और आपसी संवाद पर आधारित है। उन्होंने कहा कि किसी घटक दल के नेता या कार्यकर्ता को कोई समस्या या सुझाव हो तो वह वरिष्ठ नेताओं के सामने अपनी बात रख सकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मिलकर भी अपनी बात रखने की बात कही। सरावगी के मुताबिक संवाद के जरिए समस्याओं का समाधान करना गठबंधन की प्राथमिकता है। इस बयान के जरिए सहयोगी दलों के बीच समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया गया। विकास के मुद्दों को भी चुनावी अभियान में ले जाएगा NDA बैठक में सरकार के विकास और जनकल्याणकारी कामों को जनता तक पहुंचाने की रणनीति पर भी चर्चा हुई। एनडीए नेताओं ने रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में किए गए कार्यों को चुनावी संवाद का हिस्सा बनाने की बात कही। गठबंधन का जोर सरकार की उपलब्धियों को कार्यकर्ताओं के जरिए लोगों तक पहुंचाने पर रहेगा। इसके लिए घटक दलों के संगठन के बीच तालमेल बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। यानी विधान परिषद चुनाव की तैयारी सिर्फ उम्मीदवारों और सीटों तक सीमित नहीं रखी जा रही है। गठबंधन संगठन और सरकार के कामकाज, दोनों को चुनावी रणनीति में जोड़ने की तैयारी में है। अब सीटों के बाद नजर उम्मीदवारों और जमीन की रणनीति पर एनडीए ने आठों सीटों पर जीत का दावा तो कर दिया है, लेकिन चुनावी प्रक्रिया में कई स्तरों पर रणनीति अहम होगी। घटक दलों के बीच समन्वय, उम्मीदवारों का चयन और संगठन की सक्रियता चुनाव की दिशा तय करने वाले पहलू होंगे। बैठक में इन सभी मोर्चों पर साझा तैयारी का संदेश दिया गया। गठबंधन के नेताओं ने कार्यकर्ताओं को भी एकजुट होकर काम करने की बात कही। अब देखना होगा कि बैठक में बनी रणनीति जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी ढंग से लागू होती है। फिलहाल विधान परिषद की आठ सीटों ने बिहार की सियासत में एनडीए के भीतर चुनावी हलचल तेज कर दी है।

कम समय, कम खर्च और आसान प्रक्रिया—साविता ने महसूस किया पंजीयन सेवाओं में बदलाव

रायपुर कभी संपत्ति की रजिस्ट्री के लिए अधिक समय लगना और उसके बाद नामांतरण के लिए अलग से प्रक्रिया पूरी करना नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बनता था। पंजीयन सेवाओं में किए गए सुधारों से अब यह तस्वीर बदल रही है। सरगुजा जिले के सीतापुर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम जमकानी निवासी श्रीमती साविता पैंकरा ने इस बदलाव को स्वयं महसूस किया। कम समय में उनकी रजिस्ट्री पूरी हुई, महिला होने के कारण पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत मिली, पंजीयन के बाद नामांतरण की प्रक्रिया तत्काल आगे बढ़ी और रजिस्ट्री की प्रति भी सीधे मोबाइल पर प्राप्त हो गई। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद में उन्होंने अपना अनुभव साझा किया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी की पहल से पंजीयन सेवाओं को सरल, सुगम, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए तकनीक आधारित सुधार किए गए हैं। महिलाओं को पंजीयन शुल्क में राहत देने के साथ रजिस्ट्री और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं को डिजिटल माध्यम से आसान बनाया जा रहा है। इन सुधारों से नागरिकों का समय और खर्च कम होने के साथ कार्यालयों की अनावश्यक दौड़भाग भी घट रही है। पहले एक दिन में नहीं होता था काम, अब कम समय में पूरी हुई रजिस्ट्री श्रीमती साविता पैंकरा ने बताया कि पहले संपत्ति पंजीयन की प्रक्रिया में अधिक समय लगता था और कई बार एक दिन में काम पूरा नहीं हो पाता था। नई व्यवस्था में उन्हें कम समय में पंजीयन की प्रक्रिया पूरी होने की सुविधा मिली। महिला हितग्राही होने के कारण पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत से रजिस्ट्री का खर्च भी कम हुआ। इस तरह साविता को एक साथ दोहरी राहत मिली—एक ओर शुल्क में बचत हुई, वहीं दूसरी ओर कम समय में पंजीयन पूरा होने से समय और अनावश्यक दौड़भाग से भी राहत मिली। रजिस्ट्री के साथ नामांतरण ने खत्म किया अलग प्रक्रिया का इंतजार पंजीयन के बाद नामांतरण की प्रक्रिया को भी अधिक सुविधाजनक बनाया गया है। ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था के माध्यम से रजिस्ट्री होने के बाद राजस्व अभिलेखों में नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ती है। इससे नागरिकों को नामांतरण के लिए अलग से आवेदन करने और संबंधित कार्यालयों में बार-बार जाने की आवश्यकता कम हुई है। श्रीमती साविता पैंकरा को भी इस सुविधा का लाभ मिला। पंजीयन के बाद उनके नाम से नामांतरण की प्रक्रिया तत्काल आगे बढ़ी। इससे संपत्ति की रजिस्ट्री के बाद अलग से नामांतरण के लिए इंतजार और कार्यालयीन प्रक्रिया की परेशानी कम हुई। मोबाइल पर मिली रजिस्ट्री की प्रति, डिजिटल सुविधाओं ने आसान किया काम तकनीक के उपयोग से पंजीयन की प्रक्रिया को अधिक सरल और पारदर्शी बनाया गया है। आधार आधारित प्रमाणीकरण के माध्यम से क्रेता, विक्रेता और गवाहों की पहचान सत्यापित की जाती है। ऑनलाइन अपॉइंटमेंट, ऑनलाइन भुगतान और डिजिटल दस्तावेज जैसी सुविधाओं से नागरिकों के लिए रजिस्ट्री की प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक हुई है। पंजीयन शुल्क का भुगतान नेट बैंकिंग और यूपीआई जैसे डिजिटल माध्यमों से भी किया जा सकता है। श्रीमती साविता को रजिस्ट्री पूरी होने के बाद उसकी प्रति सीधे मोबाइल पर प्राप्त हुई। इससे पंजीकृत दस्तावेज प्राप्त करने की प्रक्रिया भी उनके लिए आसान हुई। साविता की कहानी—बदलती पंजीयन व्यवस्था का जमीनी अनुभव श्रीमती साविता पैंकरा का अनुभव पंजीयन सेवाओं में आए बदलाव की जमीनी तस्वीर प्रस्तुत करता है। कम समय में रजिस्ट्री, महिलाओं को पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की राहत, ऑटोम्यूटेशन से आसान नामांतरण और मोबाइल पर रजिस्ट्री की प्रति—इन सुविधाओं ने उनके लिए पूरी प्रक्रिया को पहले की तुलना में अधिक सहज बनाया। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से पंजीयन विभाग हितग्राहियों से सीधे संवाद कर इन्हीं बदलावों के अनुभव और सुझाव संकलित कर रहा है। साविता की कहानी बताती है कि तकनीक और प्रक्रिया के सरलीकरण से पंजीयन सेवा अब कम समय, कम खर्च और अधिक सुविधा की दिशा में आगे बढ़ रही है।

100 रुपए की बचत से शुरू हुआ सफर, आटा-दाल चक्की ने शशिकला को बनाया आत्मनिर्भर

​रायपुर "मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है; पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।" आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की यह कहावत छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में पूरी तरह चरितार्थ हो रही है। जीवन में बड़ा बदलाव लाने के लिए हमेशा किसी बड़ी पूंजी की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि दृढ़ संकल्प, अनवरत मेहनत और सही मार्गदर्शन से छोटी-सी शुरुआत भी सफलता की एक नई इबारत लिख सकती है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम बिलाईगढ़ की निवासी मती शशिकला साहू की कहानी आज प्रदेश की लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा की एक नई किरण बनकर उभरी है। कभी साधारण आर्थिक परिस्थितियों के बीच परिवार की छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए सीमित रहने वाली शशिकला, आज स्वयं की आटा और दाल चक्की की एक सफल उद्यमी के रूप में स्थापित हो चुकी हैं। 'सेवा संकल्प अभियान' के दौरान सामने आई उनकी यह प्रेरक यात्रा राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और महिला श्रमशक्ति के अनूठे मेल की सुंदर मिसाल पेश करती है।           ​ पति  रूपनारायण साहू के साथ पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए शशिकला के मन में लंबे समय से स्वयं की आय का एक स्थायी साधन खड़ा करने की तीव्र इच्छा थी। उनकी इस सोच को धरातल पर उतारने का अवसर तब मिला, जब उन्होंने 11 सितंबर 2018 को गांव के 'दुर्गा स्वयं सहायता समूह' से जुड़कर स्वावलंबन की दिशा में अपना पहला कदम बढ़ाया। इस सफर की शुरुआत बेहद सामान्य थी, जहाँ उन्होंने समूह में हर महीने महज 100 रुपये की छोटी बचत से शुरुआत की। अनुशासन और नियमितता के बल पर जमा की गई यही छोटी-सी राशि आगे चलकर उनके स्वरोजगार की मजबूत बुनियाद बनी।          ​ छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन 'बिहान' से जुड़ने के बाद शशिकला को वित्तीय प्रबंधन के साथ-साथ आजीविका के नए रास्ते तलाशने का दिशा-निर्देश मिला। समूह में उनके अनुशासित योगदान को देखते हुए छह महीने के भीतर बैंक द्वारा समूह को 1 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया। इस आर्थिक संबल ने शशिकला के सपनों को नई उड़ान दी और उन्होंने इस राशि से गांव में ही अपनी पहली आटा चक्की स्थापित की। इससे न केवल ग्रामीणों को अपने ही गांव में गेहूं पिसाने की सुविधा मिलने लगी, बल्कि शशिकला को भी अपने घर-परिवार के पास रहकर ही 150 से 200 रुपये की दैनिक आय होने लगी। इस प्रारंभिक सफलता से मिले आत्मविश्वास ने उनके हौसले को और बढ़ा दिया।        ​ व्यवसाय की बढ़ती मांग को देखते हुए शशिकला ने अपने काम का विस्तार करने का फैसला किया और बैंक से दूसरी बार ऋण लेकर दाल और गेहूं पिसाई के लिए अलग-अलग आधुनिक मशीनें लगाईं। इस विस्तार से उनकी सेवाओं का दायरा बढ़ा और आमदनी में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई। आज वे इस प्रसंस्करण इकाई के जरिए प्रतिदिन 200 से 300 रुपये तक कमा रही हैं, जिससे उनकी मासिक आय लगभग 9 हजार रुपये तक पहुँच गई है। जो सफर महज 100 रुपये की मासिक बचत से शुरू हुआ था, वह आज एक समृद्ध स्वरोजगार का रूप ले चुका है।         ​ अपनी इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए मती शशिकला साहू भावुक होकर कहती हैं कि बिहान योजना ने उनके जीवन को एक नई दिशा और पहचान दी है। इससे उन्हें आर्थिक संबल तो मिला ही है, साथ ही समाज में सिर उठाकर जीने का आत्मविश्वास भी हासिल हुआ है। आज वे अपने परिवार के महत्वपूर्ण निर्णयों में बराबरी की भागीदार हैं और इसके लिए वे बिहान योजना तथा छत्तीसगढ़ सरकार का हृदय से आभार व्यक्त करती हैं। सारंगढ़-बिलाईगढ़ के दूरस्थ अंचल से उभरी शशिकला साहू की यह कहानी यह सिद्ध करती है कि जब योजना से मिला अवसर मेहनत और संकल्प से जुड़ता है, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक क्रांतिकारी बदलाव आता है। आज शशिकला न केवल खुद आत्मनिर्भर हैं, बल्कि पूरे गांव की महिलाओं के लिए स्वावलंबन का एक चमकता हुआ प्रतीक बन चुकी हैं।

हर घर जल रिपोर्टेड गांवों में 2 अक्टूबर को आयोजित होंगे जल अर्पण कार्यक्रम, पूर्ण योजनाएं संचालन के लिए ग्राम पंचायतों को सौंपी जाएंगी

रायपुर जल जीवन मिशन के अंतर्गत हर घर जल रिपोर्टेड ऐसे गांव जहां काम पूर्ण हो चुके है और 15 दिनों का सफल ट्रायल रन पूरा हो चुका है, उन गांवों में 2 अक्टूबर को गांधी जयंती पर जल अर्पण कार्यक्रमों का आयोजन कर पेयजल योजनाओं को संचालन के लिए ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित किए जाएंगे। जल जीवन मिशन के संचालक ने सभी कलेक्टरों को परिपत्र जारी कर इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। मिशन संचालक द्वारा कलेक्टरों को जारी परिपत्र में कहा गया है कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत जिले के ऐसे 'हर घर जल' (HGJ) रिपोर्टेड ग्राम, जहाँ पेयजल आपूर्ति योजनाओं से संबंधित कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण हो चुके हैं, किन्तु अब तक न तो उनका 'हर घर जल' (HGJ) प्रमाणीकरण हुआ है और न ही संबंधित ग्राम पंचायत एवं समुदाय को योजनाओं का हस्तांतरण किया गया है, ऐसे सभी 'हर घर जल' रिपोर्टेड ग्रामों में पेयजल आपूर्ति योजनाओं का न्यूनतम 15 दिनों का सफल ट्रायल रन पूर्ण करते हुए 'हर घर जल' प्रमाणीकरण एवं "जल अर्पण दिवस" कार्यक्रम के माध्यम से योजनाओं को संबंधित ग्राम पंचायत एवं समुदाय को निर्धारित हैंडओवर-प्रोटोकॉल के अनुसार विधिवत हस्तांतरण किया जाना है। मिशन संचालक ने 2 अक्टूबर को ग्राम पंचायतों में आयोजित विशेष ग्राम सभा के दौरान अधिक से अधिक 'हर घर जल' रिपोर्टेड ग्रामों में "जल अर्पण" कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जलापूर्ति योजनाओं के हस्तांतरण हेतु निर्धारित हैंडओवर-प्रोटोकॉल के अनुसार आवश्यक मापदंडों का पूर्व सत्यापन एवं नियमानुसार दस्तावेजीकरण समय-सीमा में पूर्ण करने को कहा है, ताकि विशेष ग्राम सभा में हस्तांतरण एवं प्रमाणीकरण की कार्यवाही सुचारू रूप से संपन्न हो सके। मिशन संचालक ने जल अर्पण कार्यक्रम के माध्यम से हस्तांतरित योजनाओं एवं 'हर घर जल' प्रमाणन से संबंधित ग्रामों की सभी अद्यतन प्रगति/डॉटा/रिपोर्ट, पूर्णता प्रमाण-पत्र, ओएंडएम मैनुअल, एज-बिल्ट ड्राइंग्स (As-built drawings), जल गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट और प्रिवेन्टिव मेन्टेनेंस शेड्यूल (Preventive Maintenance Schedule) इत्यादि को जल जीवन मिशन के आईएमआईएस पोर्टल (Jal Arpan Digital Module) पर नियमित एवं समयबद्ध रूप से एंट्री सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टरों को आईएमआईएस पोर्टल में ये सभी प्रविष्टियां जल अर्पण कार्यक्रम के आयोजन के एक सप्ताह के भीतर अनिवार्य रूप से पूर्ण करने को कहा गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि पर किसानों को दी बधाई

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के हित में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विपणन सीजन 2027-28 के लिए रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि को मंजूरी दी है। इसमें गेहूं, जौ, चना, मसूर, सरसों और कुसुम की फसलें शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह वृद्धि अन्नदाताओं को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य प्राप्त करने में मदद करेगी। इससे उनकी आय में वृद्धि होगी, जिससे कृषि क्षेत्र को और अधिक मजबूती मिलेगी। प्रधानमंत्री  मोदी के किसान हितैषी निर्णय से समृद्धि आयेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान हितैषी इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री  मोदी का हार्दिक आभार माना और अन्नदाताओं के हित में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय के लिए किसानों को बधाई दी है।  

नवाचार और नई कार्ययोजनाओं से बढ़ेगा मत्स्य उत्पादन : राज्यमंत्री पंवार

भोपाल  मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  नारायण सिंह पंवार की अध्यक्षता में मत्स्य महासंघ की कामकाज समिति की 115वीं बैठक संपन्न हुई। बैठक में वर्ष 2027-28 के प्रस्तावित बजट का अनुमोदन किया गया। राज्यमंत्री  पंवार ने महासंघ के जलाशयों में सहकारी समितियों को सदस्यता देने से पहले उनका परीक्षण करने के निर्देश दिए, ताकि पात्र और वास्तविक समितियों को ही सदस्यता मिल सके। उन्होंने वर्तमान में कार्यरत समितियों द्वारा किए जा रहे कार्यों का भी नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए। राज्यमंत्री  पंवार ने महासंघ द्वारा संचालित मछुआ कल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा के दौरान हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ समय पर नहीं मिलने पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को हितग्राहियों को लाभ देने की समय-सीमा निर्धारित करने और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। राज्यमंत्री  पंवार ने मध्यप्रदेश सहकारी सोसायटी अधिनियम, 1960 की धारा 43 और महासंघ की उपविधियों के अंतर्गत निधियों की समीक्षा में कहा कि भवन निधि एवं विकास निधि का उपयोग कर महासंघ की रिक्त भूमि पर आवश्यक निर्माण कार्यों के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। राज्यमंत्री  पंवार ने महासंघ के जलाशयों में उत्पादन की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि नवीन कार्ययोजनाओं और नवाचारों के माध्यम से मत्स्य उत्पादन तथा महासंघ की आय बढ़ाने की दिशा में कार्य करें। साथ ही उन्होंने मछुआ कल्याण योजनाओं और विकासात्मक गतिविधियों का विस्तार करने के भी निर्देश दिए। बैठक में सचिव  स्वतंत्र कुमार सिंह, प्रबंध संचालक  अनुराग चौधरी, संचालक  मनोज कुमार पथरोलिया सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

हर पंचायत में होगा खेल मैदान, गांवों में बनेंगे अटल ज्ञान केंद्र; CM भजनलाल का बड़ा ऐलान

बाड़मेर बाड़मेर जिले के बाछड़ाऊ में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बुधवार को 2 हजार 824 करोड़ रुपए के 1 हजार 013 विकास कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण किया। सभा को संबोधित करते हुए सीएम ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने राजस्थान की हालत टूटे-फूटे मकान जैसी कर दी थी। कांग्रेस नेताओं को स्वार्थी बताते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लोग किसी के नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार गांवों के विकास और लोगों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए लगातार काम कर रही है। सरकार का प्रयास है कि हर गांव में पक्की सड़क हो। उन्होंने कहा कि राजस्थान अब बिजली लेने वाला नहीं, बल्कि बिजली देने वाला राज्य बन गया है। पेपर लीक को लेकर कांग्रेस पर निशाना सीएम ने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल पर निशाना साधते हुए कहा कि उस समय युवा परेशान थे और लगातार पेपर लीक के मामले सामने आते थे। उन्होंने सभा में मौजूद लोगों से पूछा कि अब पेपर लीक होता है क्या? इस पर लोगों ने नहीं में जवाब दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार जन-जन के लिए काम कर रही है और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हर पंचायत में खेल मैदान और गांवों में अटल ज्ञान केंद्र मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि ऐसी कोई पंचायत नहीं होगी, जहां खेल मैदान नहीं हो। उन्होंने राजस्थान के गांवों में अटल ज्ञान केंद्र बनाए जाने की भी घोषणा की। सीएम ने कहा कि सरकार का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के साथ शिक्षा, खेल और अन्य सुविधाओं को मजबूत करना है 2,824 करोड़ के 1,013 कामों का शिलान्यास-लोकार्पण बाछड़ाऊ पहुंचने पर मुख्यमंत्री का मंत्री केके विश्नोई, विधायक आदूराम मेघवाल, बाड़मेर विधायक प्रियंका चौधरी, सिवाना विधायक हमीर सिंह, जैसलमेर विधायक छोटूसिंह, पोकरण विधायक महंत प्रताप पुरी और किसान आयोग अध्यक्ष सीआर चौधरी सहित जनप्रतिनिधियों ने स्वागत किया। जिला कलेक्टर चिन्मयी गोपाल और पुलिस अधीक्षक चुनाराम ने भी सीएम की अगवानी की। पारंपरिक गैर नृत्य के जरिए मुख्यमंत्री का स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान 2,824 करोड़ रुपए की लागत के 1,013 विकास कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण किया। इसके अलावा जोधपुर संभाग के आठ जिलों के लिए करीब 2,700 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की सौगात देने की बात भी कही गई। मुख्यमंत्री का बाड़मेर दौरा पंचायती राज चुनाव से पहले राजनीतिक और संगठनात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण रहा। कार्यक्रम में उन्होंने बाड़मेर, जैसलमेर और बालोतरा जिले के पार्टी कार्यकर्ताओं से संवाद कर संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनावों की तैयारियों को लेकर चर्चा की।