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नगरीय प्रशासन विभाग ने उप मुख्यमंत्री साव की घोषणा के अनुपालन में प्रतिमाएं लगाने स्वीकृत किए 10.60 करोड़

रायपुर देश के पहले उद्योग मंत्री, प्रख्यात शिक्षाविद और राष्ट्रवादी विचारक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को अक्षुण्ण रखने राज्य के संभागीय और जिला मुख्यालय वाले सभी नगरीय निकायों में उनकी मूर्ति स्थापित की जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव द्वारा इस संबंध में की गई घोषणा के अनुपालन में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा ऐसे 32 नगरीय निकायों में डॉ. मुखर्जी की प्रतिमा लगाने 10 करोड़ 60 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं।  नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा लगाने और इसके परिसर के सौंदर्यीकरण के लिए 5 संभागीय मुख्यालयों रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, जगदलपुर और अंबिकापुर के लिए 50-50 लाख रुपए स्वीकृत किए हैं। वहीं जिला मुख्यालय वाले 27 नगरीय निकायों के लिए 30-30 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं। जिला मुख्यालय वाले नगरीय निकायों में 4 नगर निगम और 23 नगर पालिका शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि 6 जुलाई को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती है। उप मुख्यमंत्री साव की घोषणा के बाद विभाग ने तत्परता दिखाते हुए नगरीय निकायों में मूर्ति स्थापना के लिए राशि स्वीकृति के प्राविधिक आदेश जारी कर दिए हैं। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि प्रख्यात शिक्षाविद एवं राष्ट्रवादी विचारक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्र की एकता, अखंडता एवं सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रखर पुरोधा थे। "एक देश, एक निशान, एक विधान और एक प्रधान” के संकल्प की अगुआई करते हुए भारत की एकता और अखंडता के लिए उन्होंने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।  श्री साव ने कहा कि डॉ. मुखर्जी के विचार आज भी समाज और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं। प्रदेश के प्रमुख नगरीय क्षेत्रों में उनकी प्रतिमाओं की स्थापना से नागरिकों, विशेषकर युवाओं को उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व से प्रेरणा प्राप्त होगी। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को देश के सबसे युवा कुलपति होने का गौरव प्राप्त है। मात्र 23 वर्ष की उम्र में सबसे युवा सीनेट सदस्य होने के 10 वर्ष बाद सिर्फ 33 वर्ष की युवावस्था में कलकत्ता विश्वविद्यालय जैसे विख्यात शिक्षण संस्थान के कुलपति बन शिक्षा के क्षेत्र में भी उन्होंने अभूतपूर्व योगदान दिया। उनकी प्रतिमा को देखकर युवा पीढ़ी उनके इस योगदान को भी याद कर प्रेरणा हासिल करेगी। श्री साव ने कहा कि प्रतिमा स्थापना के साथ-साथ परिसर का आकर्षक एवं व्यवस्थित सौंदर्यीकरण भी किया जाएगा, जिससे शहरों में बेहतर सार्वजनिक स्थल विकसित होंगे तथा नागरिकों को स्वच्छ, सुंदर एवं प्रेरणादायी वातावरण उपलब्ध होगा। उन्होंने संबंधित नगरीय निकायों के अधिकारियों को सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं, ताकि नागरिकों को शीघ्र ही इन विकसित स्थलों का लाभ मिल सके।

त्योहारी सीजन से पहले महंगी हुई चीनी, एथेनॉल डिमांड ने बढ़ाईं कीमतें; ₹4,700 प्रति क्विंटल तक पहुंचे रेट

ग्वालियर त्योहारी सीजन की दस्तक से पहले ही आम आदमी की रसोई का स्वाद कड़वा होने लगा है। शकर के दाम में ऐतिहासिक तेजी हुई है। थोक में शकर 4,650 से 4,700 रुपए प्रति क्विंटल तो फुटकर बाजार में कीमत 48 से 49 रुपए प्रति किलो पहुंच गई। शकर खांडसारी एसोसिएशन ग्वालियर के मनीष बांदिल की मानें तो जुलाई की शुरुआत के साथ ही भाव अप्रत्याशित उछले हैं। राष्ट्रीय व्यापारिक कल्याण बोर्ड के सदस्य रमेश खंडेलवाल ने बताया, गन्ने के समर्थन मूल्य में वृद्धि व एथेनॉल उत्पादन पर सरकार का बढ़ता जोर इसका कारण है। इससे मिलों का फोकस शकर उत्पादन से हटकर एथेनॉल पर हो गया। इन तीन कारणों से महंगी हुई मिठास  एथेनॉल उत्पादन पर बढ़ता जोर: सरकार पेट्रोल में मिश्रण के लिए एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। इसमें बड़े पैमाने पर गन्ने का उपयोग हो रहा है। चीनी (Sugar Price Ethanol Production) मिलों में कच्चे माल की सप्लाई प्रभावित हुई। गन्ने के समर्थन मूल्य में वृद्धि: अधिकांश राज्यों में गन्ने का समर्थन मूल्य बढऩे से उत्पादन लागत में इजाफा हुआ है। इसका सीधा असर शकर की कीमतों पर दिख रहा है। 12 साल में सबसे कम जून की बारिश: इस वर्ष जून में 12 साल की तुलना में सबसे कम वर्षा हुई। देश में सामान्य से 38त्न कम वर्षा व जुलाई में भी कमजोर मानसून की आशंका से शकर उत्पादन 80 लाख टन तक कम हो सकता है। कैसे बनाया जाता है एथेनॉल? भारत में किससे तैयार हो रहा? एथेनॉल बनाने वाली सामग्री को फीड स्टॉक (Sugar Price Hit Record 2026) कहा जाता है। कई तरह के एथेनॉल उत्पादन संयंत्र अलग-अलग फीडस्टॉक का उपयोग करते हैं। इसके लिए मक्का, गेहूं या अन्य प्रकार के कच्चे माल का इस्तेमाल किया जाता है। इन सभी से एथेनॉल बनाने की प्रक्रिया एक ही जैसी होती है। जबकि भारत में गन्ने का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह प्रक्रिया उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे गन्ना उत्पादक राज्यों में शुरू होती है। पकने के बाद गन्नों की कटाई की जाती है। इसके बाक प्रसंस्करण के लिए चीनी मिलों और डिस्टिलरी में ले जाया जाता है। जानें गन्ने से एथेनॉल बनाने की प्रक्रिया से पेट्रोल पंप तक का सफर     चीनी मिल में गन्नों को पेराई मशीनों में डाला जाता है। यह गन्ने का रस निचोड़ लेती हैं। यह रस चीनी और एथेनॉल के उत्पादन के लिए आधार सामग्री तैयार होती है।     गन्ने के रस को संशोधित कर चीनी बनाई जाती है। इसी प्रक्रिया के दौरान गुड़, नामक एक गाढ़ा गहरे रंग का सिरप उप उत्पाद के रूप में मिलता है। गुड़ परम्परागत रूप से भारत में एथेनॉल उत्पादन के लिए सबसे महत्वपूर्ण कच्चे माल में से माना जाता है।     मॉडर्न एथेनॉल संयंत्र गुड़ और गन्ने के रस दोनों से एथेनॉल का उत्पादन किया जा सकता है। इन कच्चे माल को आसवन संयंत्रो तक पहुंचाया जाता है जहां इनले जैव ईंधन एथेनॉल शुरू किया जाता है।     कच्चे माल के मिश्रण में सबसे पहले खमीर उठाया जाता है। फिर सूक्ष्मजीव शर्करा का सेवन करते हैं और प्राकृतिक किण्वन प्रक्रिया द्वारा उन्हें अल्कोहल में बदला जाता है। उत्पादन की विधियों (Sugar Price break record 2026) के आधार पर यह चरण चंद घंटों से लेकर कुछ दिन तक का हो सकता है।     किण्वित द्रव में अल्कोहल, पानी और अन्य यौगिक होते हैं। अब आसवन विधि से अल्कोहल को अलग कर लिया जाता है और फिर सांद्रित किया जाता है। इस विधि से उच्च शुद्धता वाला एथेनॉल तैयार होता है।     संयंत्र से निकाले जाने से पूर्व एथेनल की गुणवत्ती की कड़ी जांच होती है। इसके बाद उत्पादक शुद्धता स्तर, रासायनिक संरचना और ईंधन के मानकों के अनुपालन की जांच कर सुनिश्चित करते हैं कि उत्पाद सरकारी विनिर्देशों के पूरा करता है या नहीं।      मंजूरी के बाद एथेनॉल को टैंकरों के माध्यम से तेल विपणन कंपनियों के डिपो तक पहुंचाया जाता है। ये सुविधाएं ईंधन के उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले मिश्रण प्रक्रिया संभालती हैं।     अंतिम चरण में अनुमोदित मिश्रण अनुपात के मुताबिक एथनॉल (Sugar Price Hike making fuel) को पेट्रोल में मिलाया जाता है। फिर इस मिश्रित ईंधन को देशभर के पेट्रोल पंपों पर वितरित कर दिया जाता है।  

भाजपा विधायक को बड़ा झटका, 4 साल की सजा सुनाई; पीड़ित को ₹25 लाख मुआवजा देने के निर्देश

मुजफ्फरपुर/नई दिल्ली दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने शनिवार को बिहार के बीजेपी विधायक राजू कुमार सिंह को 2018 के चर्चित हर्ष फायरिंग मामले में चार साल की सजा सुनाई. वह फिलहाल बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की साहेबगंज विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक हैं. इस घटना में एक महिला डॉक्टर की मौत हो गई थी. कोर्ट ने विधायक पर 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. स्पेशल जज विशाल गोगने ने सजा का ऐलान करते हुए कहा कि दोषी को आईपीसी की धारा 304 पार्ट-II के तहत चार साल की साधारण कैद और आर्म्स एक्ट के तहत दो महीने की सजा दी जाती है।  कोर्ट ने यह भी कहा कि जुर्माने की राशि पीड़िता के परिवार को मुआवजे के तौर पर दी जाएगी. बिहार के साहेबगंज से बीजेपी विधायक राजू कुमार सिंह ने कोर्ट से प्रोबेशन पर रिहाई की मांग की थी. उन्होंने दलील दी थी कि उनका किसी की जान लेने का इरादा नहीं था और जनप्रतिनिधि के तौर पर उनका रिकॉर्ड बेदाग रहा है. राजू कुमार सिंह (56 वर्षीय) को आईपीसी की धारा 304 पार्ट-II यानी गैर इरादतन हत्या के अपराध में दोषी ठहराया गया. इसके अलावा उन्हें आर्म्स एक्ट के तहत लाइसेंस की शर्तों के उल्लंघन का भी दोषी पाया गया।  हर्ष फायरिंग में गई थी महिला डॉक्टर की जान यह घटना 31 दिसंबर 2018 की है, जब राजू कुमार सिंह ने दिल्ली के वसंत कुंज स्थित अपने फार्महाउस में न्यू ईयर पार्टी आयोजित की थी. जश्न के दौरान राजू कुमार सिंह ने हर्ष फायरिंग की, जिसमें डॉ. अर्चना गुप्ता को गोली लग गई. वह गंभीर रूप से घायल हो गईं और अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. मामले की जांच के बाद दिल्ली पुलिस ने राजू कुमार सिंह के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था. इसके बाद अदालत ने उन्हें दोषी करार दिया और अब सजा का ऐलान किया है।  राउज एवेन्यू कोर्ट ने 6 जून को अपने 97 पन्नों के फैसले में कहा था कि उत्सव और जश्न के दौरान की जाने वाली हर्ष फायरिंग देश में एक गंभीर समस्या बन चुकी है, जो अक्सर लोगों की जान ले लेती है. कोर्ट ने कहा था कि यह मामला भी ऐसी ही एक दुखद घटना का उदाहरण है, जहां बिहार के कई बार विधायक रहे राजू कुमार सिंह की कथित लापरवाह हर्ष फायरिंग के कारण न्यू ईयर पार्टी में शामिल एक महिला की मौत हो गई. कोर्ट ने उपलब्ध सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर माना कि राजू कुमार सिंह ने ही वह गोली चलाई थी, जिससे अर्चना गुप्ता की मौत हुई. राउज एवेन्यू कोर्ट ने  इस मामले में सजा का ऐलान 7 जुलाई, 2026 को किया।  अब राजू कुमार सिंह की विधायकी जानी तय चूंकि राजू कुमार सिंह को दो साल से अधिक की सजा सुनाई गई है, इसलिए जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत उनकी विधायकी पर अयोग्यता लागू हो सकती है. ऐसे में बिहार विधानसभा की उनकी सदस्यता समाप्त की जा सकती है. अब यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उन्हें ऊपरी अदालत से दोषसिद्धि पर राहत मिलती है या नहीं. भारत में सांसद (MP) या विधायक (MLA) की सदस्यता जाने का नियम जनप्रतिनिधित्व कानून (Representation of the People Act), 1951 की धारा 8 के तहत तय होता है. अगर किसी सांसद या विधायक को दो साल या उससे अधिक की सजा किसी आपराधिक मामले में मिलती है, तो उसकी सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द हो जाती है।  यह नियम सुप्रीम कोर्ट के 2013 के ऐतिहासिक फैसले (लिली थॉमस केस) के बाद लागू हुआ था. पहले दोषी जनप्रतिनिधियों को अपील के लिए कुछ समय मिल जाता था, लेकिन अब सजा होते ही अयोग्यता लागू हो जाती है. हालांकि, अगर ऊपरी अदालत (हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट) सजा पर स्टे (Stay on Conviction) दे दे, तो सदस्यता बच सकती है. सिर्फ सजा पर रोक (Stay on Sentence/Bail) पर्याप्त नहीं मानी जाती, बल्कि दोषसिद्धि पर रोक जरूरी होती है। 

‘सुपर अल नीनो’ से निपटने की तैयारी, धमतरी में कृषक मित्रों को अल्प वर्षा प्रबंधन का दिया गया प्रशिक्षण

​रायपुर : 'सुपर अल नीनो' की चुनौती: धमतरी में कृषक मित्रों को मिला अल्प वर्षा से निपटने का गुरुमंत्र ​वैज्ञानिक खेती, सीधी बुवाई और फसल बीमा से सुरक्षित होगी किसानों की उपज,गांव-गांव फैलेगा जागरूकता का संदेश रायपुर जलवायु परिवर्तन और 'सुपर अल नीनो' (Super El Niño) के कारण संभावित अल्प एवं अनियमित वर्षा की चुनौती से निपटने के लिए धमतरी के कृषि विभाग में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। एक्सटेंशन रिफॉर्म्स 'आत्मा' योजना के तहत आयोजित इस विशेष सत्र में जिलेभर के कृषक मित्रों को आधुनिक तकनीकों, वैज्ञानिक खेती और फसल बीमा के प्रति जागरूक किया गया, ताकि वे इस ज्ञान को गांव-गांव तक पहुंचा सकें। ​विपरीत मौसम में भी बेहतर प्रबंधन, विशेषज्ञों की सलाह      ​प्रशिक्षण में कृषि वैज्ञानिकों और विभागीय अधिकारियों ने कम वर्षा की स्थिति में फसलों को बचाने के लिए कई महत्वपूर्ण रणनीतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कृषक मित्रों को प्रेरित किया गया कि वे अपने क्षेत्रों में जाकर किसानों को समय रहते जागरूक करें।      ​वैज्ञानिकों ने विपरीत मौसम की परिस्थितियों से निपटने के लिए पारंपरिक फसलों के स्थान पर कम अवधि में तैयार होने वाली धान की किस्मों, दलहनी (दालें) और तिलहनी फसलों को प्राथमिकता देने की सलाह दी। पानी की बचत के लिए वैज्ञानिक तरीके से 'डायरेक्ट सीडेड राइस' (धान की सीधी बुवाई) तकनीक अपनाने पर जोर दिया गया। इसी तरह खेतों में उपलब्ध पानी का सही उपयोग, संतुलित पोषण प्रबंधन और मिट्टी की नमी को लंबे समय तक बनाए रखने के व्यावहारिक उपाय बताए गए। ​      प्रशिक्षण कार्यक्रम में अनुविभागीय कृषि अधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि अभियांत्रिकी विशेषज्ञ, आत्मा के डिप्टी प्रोजेक्ट डायरेक्टर, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक सहित आत्मा योजना के जिला व विकासखंड स्तरीय अधिकारी- कर्मचारी और कृषक मित्र उपस्थित थे। ​फसल बीमा बनेगा किसानों का सुरक्षा कवच       ​प्राकृतिक आपदाओं और सूखे के जोखिम से किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए 'प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना' पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। योजना के जिला प्रबंधक ने धान, उड़द, मूंग, कोदो, कुटकी और रागी जैसी अधिसूचित फसलों की बीमा प्रक्रिया, पात्रता और अंतिम तिथि की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कृषक मित्रों से अपील की कि वे अंतिम तिथि से पहले अधिक से अधिक किसानों का फसल बीमा सुनिश्चित कराएं ताकि किसी भी नुकसान की भरपाई हो सके। ​उत्पादन और आय बढ़ाना मुख्य लक्ष्य           ​कार्यक्रम के समापन पर अधिकारियों ने कृषक मित्रों का आह्वान किया कि वे इस प्रशिक्षण में सीखी गई आधुनिक कृषि तकनीकों और शासकीय योजनाओं की जानकारी को ग्रामीण स्तर पर प्रभावी ढंग से प्रसारित करें। जब किसान वैज्ञानिक सलाह के अनुरूप खेती करेंगे, तभी विपरीत मौसम में भी जिले का कृषि उत्पादन और किसानों की आय सुरक्षित रह सकेगी।

आधुनिक और जैविक खेती अपनाने का संदेश, किसानों को योजनाओं की दी गई जानकारी

रायपुर सहकारिता सप्ताह के अंतर्गत शनिवार को दंतेवाड़ा जिले के संयुक्त कलेक्टरेट भवन के सभाकक्ष में कृषक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक  चैतराम अटामी थे। संगोष्ठी में बड़ी संख्या में किसान, जनप्रतिनिधि तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। विधायक  अटामी ने कहा कि सहकारिता की भावना ग्रामीण विकास और कृषि समृद्धि की मजबूत नींव है। उन्होंने किसानों से खेती के इस महत्वपूर्ण मौसम में आपसी सहयोग से रोपाई और अन्य कृषि कार्य समय पर पूरा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इससे श्रमिकों की कमी की समस्या दूर होगी और खेती की लागत कम होने के साथ उत्पादन भी बढ़ेगा। जल संरक्षण और जैविक खेती पर दिया जोर विधायक  अटामी ने किसानों को वर्षा जल संरक्षण के लिए डबरी और अन्य जल संरचनाओं का निर्माण करने की सलाह दी। उन्होंने अनुभवी किसानों के मार्गदर्शन में आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने तथा जैविक खेती को बढ़ावा देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक और प्राकृतिक खेती से उत्पादन बढ़ने के साथ भूमि की उर्वरता भी बनी रहती है। शासकीय योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार किसानों के हित में अनेक योजनाएं संचालित कर रही हैं। किसानों को इन योजनाओं की जानकारी लेकर उनका अधिक से अधिक लाभ उठाना चाहिए, ताकि खेती लाभकारी बने और उनकी आय में वृद्धि हो। खेती के साथ पौधरोपण का भी दिया संदेश विधायक  अटामी ने किसानों से खेतों और आसपास के क्षेत्रों में अधिक से अधिक पौधरोपण करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पेड़-पौधे पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने पौधरोपण को जनभागीदारी का अभियान बनाने की अपील की। किसानों को योजनाओं और आधुनिक तकनीकों की दी गई जानकारी संगोष्ठी में कृषि, पशुधन विकास, मत्स्य, उद्यानिकी तथा सहकारिता विभाग के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, जैविक खेती, पशुपालन, मत्स्य पालन, उद्यानिकी तथा सहकारिता से जुड़ी शासकीय योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। साथ ही किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। कार्यक्रम के दौरान विधायक  चैतराम अटामी ने छह किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) वितरित कर शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में कृषि एवं सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने किसानों को विभिन्न कृषि योजनाओं और सहकारी गतिविधियों की जानकारी भी प्रदान की। कार्यक्रम में कृषि विभाग के उप संचालक  सूरज पंसारी, पशुधन विकास विभाग के उप संचालक डॉ. योगेश मिश्रा, मत्स्य विभाग के सहायक संचालक  योगेश देवांगन, उद्यानिकी विभाग के उद्यान अधीक्षक  प्यारे लाल जुरी, प्रगतिशील जैविक कृषक  सुरेश कुमार नाग, कृषक संघ के अध्यक्ष  मधुसूदन ठाकुर, सहकारिता विभाग के सहायक आयुक्त  गौतम ठाकुर, सहकारिता विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

श्रीअन्न के उत्पादन को दें प्राथमिकता

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्राकृतिक खेती में बड़ा स्कोप है। यह बड़े मुनाफे का काम है। किसानों को चाहिए कि वे परम्परागत खेती के स्थान पर जैविक एवं प्राकृतिक खेती अपनायें। मुख्यमंत्री ने इस साल अल्प वर्षा की आशंका को देखते हुए प्रदेश के किसानों से अपील की है कि वे अपने कृषि कार्यों की वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक योजना बनाएं तथा कम अवधि और कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों को विशेष प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा एवं कृषि उत्पादन को सुरक्षित बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां कर रही है। कृषि, उद्यानिकी एवं संबंधित विभागों के माध्यम से जिलेवार सतत समीक्षा और आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में जल संरक्षण और जल के विवेकपूर्ण उपयोग का विशेष महत्व है। किसान भाई-बहन खेतों में उपलब्ध नमी का संरक्षण करें, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दें और सूक्ष्म सिंचाई पद्धतियों का अधिकाधिक उपयोग करें। कृषि वैज्ञानिकों एवं कृषि विभाग द्वारा जारी तकनीकी सलाह का पालन करते हुए परिस्थितियों के अनुरूप फसल चयन करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से विशेष रूप सेअन्न (मोटा अनाज) जैसे कोदो, कुटकी, रागी, ज्वार, बाजरा सहित अन्य कम पानी में सफलतापूर्वक पैदा होने वाली फसलों का रकबा बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ये फसलें जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के अनुरूप होने के साथ कम लागत, अधिक पोषण एवं किसानों की आय वृद्धि के बेहतर विकल्प की दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार भीअन्न के उत्पादन, प्रसंस्करण एवं विपणन को निरंतर प्रोत्साहित कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों में वैज्ञानिक कृषि पद्धतियां अपनाकर ही उत्पादन और आय को सुरक्षित रखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश का अन्नदाता अपने अनुभव, परिश्रम और आधुनिक तकनीकों के समन्वय से हर चुनौती का सफलतापूर्वक सामना करने में सक्षम है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को आश्वस्त किया कि प्रदेश सरकार हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ी है। किसानों को आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन, कृषि आदान उपलब्ध कराने तथा परिस्थितियों के अनुरूप हर संभव सहयोग सुनिश्चित करने के लिए सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं। सरकार का प्रयास है कि किसी भी किसान को कठिनाई का सामना न करना पड़े। कृषि उत्पादन प्रभावित न हो और किसानों के हित भी हर तरह से सुरक्षित रहें। मुख्यमंत्री ने कहा है कि कृषि और अन्नदाता प्रदेश के साथ देश के अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। किसानों की आय बढ़ाने और आधुनिक जरूरतों के अनुसार उन्हें सभी सुविधाएं उपलब्ध कराना हमारा कर्तव्य है। इसी आशय से प्रदेश में वर्ष 2026 कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। किसानों को कर रहे जागरूक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को मानसून और बारिश की अपडेट्स के लिए सोशल मीडिया आधारित मैसेजिंग सिस्टम पर विशेष जोर दिया है। बारिश कम होने की स्थिति में बीज उपचार, बुवाई की तकनीक, कम पानी में उपज देने वाली फसलों जैसे- बाजरा, ज्वार, उड़द, मूंग, अरहर, कोदो-कुटकी की खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है। ऐसी फसलें कम पानी और कम अवधि में बेहतर उत्पादन के लिए अच्छा विकल्प हैं। इसके अलावा किसानों को मोबाइल पर मैसेज भेजकर भी मौसम के पूर्वानुमान से जुड़ी सलाह दी जा रही है।  

शरबती गेहूं के दाम में ऐतिहासिक उछाल, 7 साल का रिकॉर्ड टूटा; आटे की कीमत बढ़ने के संकेत

भोपाल  इस साल थाली की रोटी न सिर्फ स्वाद में 'शाही' होगी, बल्कि जेब पर भी भारी पड़ने वाली है। अपनी मिठास और चमक के लिए मशहूर 'शरबती' गेहूं ने इस बार बाजार में ऐसा जलवा बिखेरा है कि दाम पिछले 7 साल के उच्चतम स्तर पर जा पहुंचे हैं। बारिश व ओलावृष्टि के कारण फसल क्या बिगड़ी, शरबती के तेवर (MP Sharbati Wheat Price) ही बदल गए। शहर में प्रीमियम 5500 से लेकर 6200 रुपए प्रति क्विंटल तक बिक चुका। कारोबारियों की मानें तो दीपावली का त्योहार आते-आते यह आंकड़ा 6500 रुपए के पार निकल जाएगा। आवक की चमक और मौसम की मार वर्तमान में मध्यप्रदेश के ग्वालियर शहर की मंडियां सीहोर, आष्टा, गंजबासौदा और अशोकनगर के शरबती गेहूं से गुलजार तो हैं, लेकिन इस बार आवक में वो दम नहीं है। अप्रेल-जून के सीजन में अमूमन होने वाली 1.50 लाख क्विंटल की आवक इस बार सिमटती दिख रही है। वजह साफ है-बेमौसम बारिश से गेहूं दागी हो गया, जिससे बढिय़ा क्वालिटी के गेहूं की किल्लत हो गई है। शरबती के शौकीनों पर पड़ेगा सीधा असर विशेष स्वाद और मुलायम रोटियों के लिए पसंद किए जाने वाले शरबती गेहूं के उपभोक्ताओं को इस बार अतिरिक्त खर्च के लिए तैयार रहना होगा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सीमित आपूर्ति, बेहतर गुणवत्ता (MP Sharbati Wheat Quality) की कमी और त्योहारी मांग बढऩे से आने वाले महीनों में कीमतों में और तेजी आ सकती है। ब्रांडेड आटा भी हुआ 'लाल' थोक बाजार में शरबती गेहूं की बढ़ती कीमतों का असर अब खुदरा बाजार तक पहुंच गया है। ब्रांडेड कंपनियों के पांच किलो आटे के पैकेट 210 से 240 रुपए तक बिक रहे हैं। इससे घरेलू रसोई का मासिक बजट (MP Sharbati Wheat price impact on kitchen budget) और अधिक प्रभावित हो रहा है। हालांकि, सामान्य मिल क्वालिटी के लोकमन गेहूं के दाम अपेक्षाकृत स्थिर बने हुए हैं। दीनारपुर अनाज मंडी में लोकमन का भाव 2,450 से 2,550 रुपए प्रति क्विंटल के बीच है और प्रतिदिन लगभग 500 क्विंटल की आवक दर्ज की जा रही है। सात वर्षों में ऐसे बढ़ा शरबती का रुतबा  वर्ष – दाम 2020 – 3,500- 3,800 2021 – 3,600-4,000 2022 – 4,200-4,600 2023 – 4,400-4,800 2024 – 4,800-5,200 2025 – 5,400-5,800 2026 – 5,500-6,200 नोट : दाम प्रति क्विंटल में

डी.डी. अस्पताल का ऑपरेशन थियेटर और आईसीयू सील

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार आम नागरिकों को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और जवाबदेह स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के संकल्प के साथ लगातार कार्य कर रही है। इसी प्रतिबद्धता का परिचय देते हुए गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में गंभीर चिकित्सीय लापरवाही के आरोपों की जांच के बाद जिला प्रशासन ने डी.डी. अस्पताल, सेमरा के विरुद्ध कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करते हुए उसके ऑपरेशन थियेटर एवं आईसीयू वार्ड को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया है। साथ ही अस्पताल का पंजीयन (लाइसेंस) अस्थायी एवं सशर्त रूप से निरस्त कर दिया गया है। कलेक्टर एवं पर्यवेक्षी प्राधिकारी डॉ. संतोष कुमार देवांगन द्वारा नर्सिंग होम एक्ट तथा छत्तीसगढ़ राज्य उपचर्यागृह एवं रोगोपचार संबंधी स्थापनाएं अनुज्ञापन अधिनियम, 2020 के प्रावधानों के तहत यह कार्रवाई की गई है। राज्य सरकार की स्पष्ट नीति है कि मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह कार्रवाई 22 जून 2026 को गंभीर अवस्था में जिला अस्पताल से सिम्स बिलासपुर रेफर की गई प्रसूता ज्योति सोनवानी के उपचार से जुड़े मामले की जांच के बाद की गई। घटना के पश्चात परिजनों और नागरिकों द्वारा उठाई गई शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त जांच टीम गठित कर अस्पताल का विस्तृत निरीक्षण कराया। जांच के दौरान अस्पताल में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। निरीक्षण में पाया गया कि गंभीर मरीजों के उपचार के दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों और प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की पर्याप्त उपलब्धता नहीं थी। गंभीर मरीजों के उपचार के लिए आवश्यक संसाधनों का भी अभाव पाया गया। इसके अतिरिक्त आयुष्मान भारत योजना के हितग्राहियों से अतिरिक्त शुल्क लिए जाने संबंधी शिकायतें भी जांच के दायरे में आईं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा सिविल सर्जन-सह-मुख्य अस्पताल अधीक्षक द्वारा किए गए पुनः निरीक्षण में यह भी पाया गया कि एक्लेम्प्सिया जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज का उपचार आवश्यक विशेषज्ञों एवं पर्याप्त चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में किया गया। अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ, एनेस्थेटिस्ट तथा पोस्ट ऑपरेटिव देखभाल के लिए आवश्यक चिकित्सकीय व्यवस्था उपलब्ध नहीं होने के बावजूद गंभीर मरीजों का उपचार किया जा रहा था, जिसे जांच में गंभीर लापरवाही माना गया। प्रकरण में अस्पताल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था। प्राप्त जवाब और जांच प्रतिवेदनों के परीक्षण के बाद प्रशासन ने पाया कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा प्रस्तुत कई तथ्य जांच में सही नहीं पाए गए तथा संबंधित अधिनियमों के विभिन्न प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है। जांच के दौरान एक अन्य गंभीर प्रसूता के उपचार में भी लापरवाही के तथ्य सामने आए। सभी तथ्यों, जांच प्रतिवेदनों और संबंधित अधिकारियों की अनुशंसाओं के आधार पर जिला प्रशासन ने डी.डी. अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर एवं आईसीयू वार्ड को तत्काल प्रभाव से सील करने तथा अस्पताल का पंजीयन अस्थायी एवं सशर्त रूप से निरस्त करने का आदेश जारी किया। आदेश की प्रतिलिपि स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, पुलिस अधीक्षक, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सहित संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही आधारित प्रशासन की कार्यशैली को भी रेखांकित करती है। राज्य सरकार लगातार यह सुनिश्चित कर रही है कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों तथा चिकित्सीय लापरवाही या नियमों के उल्लंघन के मामलों में बिना किसी भेदभाव के सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि जनता के स्वास्थ्य और जीवन से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी और प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रशासन पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करता रहेगा।

होर्मुज संकट पर PM मोदी का बड़ा बयान, बोले- भारतीय कूटनीति से 40 देशों से मिला तेल, संभले हालात

जोधपुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को राजस्थान पहुंचे. PM मोदी ने राजस्थान में कहा कि जंग के चलते पूरी दुनिया पर असर हुआ है. भारत ने सही फैसले लिए, सही रणनीति बनाई और अपनी कूटनीतिक ताकत का सकारात्मक इस्तेमाल किया, और इसी वजह से भारत इस संकट से उबरने में सफल रहा. भारत ने संकट का समय रहते आकलन किया है. पीएम मोदी ने बताया कि पश्चिम एशिया युद्ध के दौरान हमने 40 देशों से ईंधन प्राप्त किया।  प्रधानमंत्री ने कहा, जब कुछ ताकतें अफवाहें फैलाने की कोशिश कर रही थीं, तब संकट से निपटने के लिए अभूतपूर्व प्रयास किए जा रहे थे। PM मोदी ने कहा कि भारत ने संसाधनों का संतुलित इस्तेमाल किया है. उन्होंने बताया आज जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का भी उद्घाटन किया गया है।  स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से संकट में थे- PM मोदी PM मोदी ने कहा, भारत LPG आयात पर 60% तक निर्भर है. पश्चिम एशिया में युद्ध के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) बंद होने के बाद हम एक बड़े संकट की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन हमारे प्रयासों ने हमें इस संकट से उबरने में मदद की, राजस्थान की इस धरती ने हमें इससे उबरने में मदद की।  इसके अलावा PM मोदी ने कहा, राजस्थान में कांग्रेस सरकार के असहयोग के कारण रिफाइनरी का काम ठप पड़ा था, लेकिन राज्य में सत्ता में आने के बाद डबल इंजन वाली सरकार के कारण, हम आज रिफाइनरी का उद्घाटन करने में सफल रहे।  राजस्थान को जोधपुर एयरपोर्ट और जयपुर मेट्रो देंगे नई उड़ान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि राजस्थान हर रोज विकास के नए आयाम छू रहा है। जोधपुर एयरपोर्ट और जयपुर मेट्रो फेज-2 के उदघाटन इसी का उदाहरण है। जोधपुर एयरपोर्ट और जयपुर मेट्रो राजस्थान को नई उड़ान दे रहे हैं। अब राजस्थान हरियाणा लाए शेखावाटी के लिए पानी पीएम मोदी ने आगे कहा कि अभी भजनलाल शर्मा बड़े भावुक होकर पानी के काम का वर्णन कर रहे थे। राजस्थान हरियाणा दोनों में भाजपा की सरकार है। पहली बार आपसी सहमति से समाधान निकाले गए। हरियाणा और राजस्थान सरकार मिलकर शेखावाटी क्षेत्र तक पानी पहुंचाएंगे। वसुंधरा राजे के साथ पहले मिलकर किया राजस्थान के पानी का सपना साकार पीएम मोदी ने सूर्य उर्जा के बाद पानी के संकट पर बात की। उन्होंने कहा कि राजस्थान में पानी लाने के लिए हमने पहले भी प्रयास किया और अब भी प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं गुजरात के रास्ते वसुंधरा राजे के कार्यकाल में राजस्थान का पानी का सपना साकार किया। राजस्थान पर सूर्य देवता की कृपा, हमने सोलर पार्क का काम चलाया प्रधानमंत्री ने कहा कि राजस्थान पर सूर्य देवता की कुछ ज्यादा ही कृपा है। लिहाजा यहां इस बात का फायदा उठाते हुए सरकार को विश्वस्तरीय सोलर पार्क बनाने का काम चल रहा ह। यहां पीएम सूर्यघर बिजली योजना के तहत 1.5 लाख से ज्यादा घरों, कुसुम योजना के तहत 65 हजार से ज्यादा सोलर पंप किसानों को दिए गए हैं। किसानों को लेकर की बात पीएम मोदी ने आगे कहा कि दुनिया में युद्ध और अशांति से हमारे किसानों के लिए भी चुनौतियां पैदा हुई। उन्होंने कहा कि यूक्रेन युद्ध के बाद एक यूरिया की बोरी 3000 हजार के ऊपर पहुंच गई। पीएम मोदी ने खाद का जिक्र करते हुए कहा कि जो दुनिया में 3000 की बोरी थी, वो हमने अपने किसानों को 300 रुपए में दे दी। तेल कंपनियों को हआ ₹75,000 का घाटा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद देश में दाम नहीं बढ़ाए गए। अप्रैल से जून तक हमारी सरकारी तेल कंपनियों को ₹75,000 करोड़ का भारी नुकसान हुआ। यह घाटा इतना बड़ा है कि इसमें देश में एक पूरी नई रिफाइनरी खड़ी की जा सकती थी, लेकिन इसकी जिम्मेदारी सरकार ने उठाई। सरकारी खजाने से तेल कंपनियों के घाटे को कम किया गया भारत में नहीं आई सप्लाई की कोई दिक्कत पीएम मोदी ने कहा कि भारत में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित नहीं होने दी गई। छोटी-मोटी दिक्कतों को छोड़ दें, तो पूरे देश में सप्लाई पूरी तरह सामान्य और सुचारू रही। दूसरे देशों में 40 प्रतिशत तक हुआ पेट्रोल में इजाफा पीएम मोदी ने कहा कि वैश्विक संकट के दौरान देशों में पेट्रोल की कीमतों में 40 से 50 प्रतिशत तक का भारी इजाफा हुआ। हाहाकार मच गया, लेकिन भारत ने फिर भी स्थिरता बनाई रखी। पेट्रोल-डीजल के दामों को लेकर जमकर राजनीति की गई और अफवाहें फैलाई गईं। उनके ये मंसूबे और साजिशें पूरी तरह असफल रहीं। युद्ध संकट में एलपीजी उत्पादन की बढ़ाई गई क्षमता पीएम मोदी ने बताया कि वैश्विक युद्ध संकट के दौरान देश में रसोई गैस की कमी न हो, इसके लिए कदम उठाया गया। देश की जिन रिफाइनरियों ने अपने इतिहास में कभी एलपीजी (LPG) का उत्पादन नहीं किया था, उन्हें आपातकालीन स्थिति में तुरंत री-कॉन्फ़िगर (तैयार) किया गया।एलपीजी उत्पादन की क्षमता बढ़ाई गई। एलपीजी सप्लाई कट गई तो राजस्थान से मिली सीख पीएम मोददी ने इस दौरान कहा कि 'अचानक युद्ध के हालातों के कारण स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से आने वाली देश की 90 एलपीजी प्रतिशत सप्लाई कट गई, तब राजस्थान की इस धरती की सीख काम आई। हमने तुरंत रिफाइनरी के काम पर फोकस किया और युद्ध स्तर पर घरेलू रसोई गैस का उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए'। राजस्थान की धरती ने चुनौतियों को भी चैलेंज देना सिखाया: पीएम मोदी बालोतरा के पचपदरा में जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने राजस्थान के शौर्य और परिश्रम को सलाम किया। पीएम ने इस दौरान वैश्विक स्तर पर हुए युद्ध संकटों का जिक्र करते हुए कहा, ' राजस्थान की धरती ने हमें हर मुश्किल से लड़ना और चुनौतियों को भी चैलेंज देना सिखाया है। जोधपुर से शुरू हुई 'उड़ान' योजना से आने वाले दिनों में छोटे शहरों को करेगी एयर कनेक्ट जोधपुर में नए टर्मिनल के उद्घाटन के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संशोधित 'उड़ान' (UDAN) योजना पर बात रखी। उन्होंने कहा कि जोधपुर में संशोधित उड़ान में आने वाले दिनों में छोटे शहरों को एयर कनेक्टिविटी देगा। राजस्थान में इतनी गर्मी में इतने लोगों को आना भाजपा के प्रयासों पर विश्वास बालोतरा के … Read 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समलैंगिक संबंध का झांसा, फिर ब्लैकमेल! मथुरा पुलिस ने पकड़ा शातिर गैंग, शर्म के कारण चुप रहते थे पीड़ित

मथुरा  ग्राइंडर एप के माध्यम से लोगों को समलैंगिक संबंधों के बहाने सुनसान स्थानों पर बुलाकर उनसे लूट और डकैती करने वाले सात डकैतों को थाना जैंत पुलिस ने धर दबोचा है। धौरेरा के जंगलों में की गई कार्रवाई में पुलिस ने इनके पास से 10 मोबाइल और 51,500 रुपये नकद तथा घटना में प्रयोग की जाने वाली दो मोटर साइकिल जब्त की हैं। पिछले कुछ समय से ग्राइंडर नाम के मोबाइल एप के माध्यम से एक गिरोह युवकों से संपर्क कर उन्हें समलैंगिक संबंधों के लिए उकसा रहा था। कई युवक इनकी बातों में आकर फंसकर इनके बताए सुनसान स्थानों पर पहुंच जाते थे। ग्राइंडर मोबाइल एप के माध्यम से युवकों को फंसाते थे गिरोह के सदस्य मुख्य रूप से धौरेरा के जंगलों में बुलाया जाता था। इस गिरोह ने वहां गिरोह का एक सदस्य उस युवक के साथ संबंध बनाता था, जबकि कोई अन्य सदस्य मोबाइल से इस कृत्य की वीडियो बना लेता था। बस वहीं गिरोह के अन्य सदस्य आकर युवक को घेर लेते थे और उसके मोबाइल और पर्स में रखी नकदी को लूट लेते थे। इतना ही नहीं, मोबाइल में पासवर्ड पूछकर उस युवक के एकाउंट से भी रुपये ट्रांसफर कर लेते थे। धौरेरा के जंगलों में युवकों के साथ मारपीट कर उनको लूटते थे मोबाइल की वीडियो देखकर चुपचाप सामान दे दिया तो ठीक, वरना गिरोह के सदस्य उस युवक के साथ मारपीट करते थे। लुटे-पिटे युवक शर्म के कारण इस बारे में किसी को कुछ बता नहीं पाते थे। लेकिन इस गिरोह का शिकार बने एक युवक ने जैंत पुलिस को इसकी जानकारी दी। फिर पुलिस ने युवक के लूटे हुए मोबाइल की लोकेशन के आधार पर धौरेरा के जंगल में दबिश दी। शर्म के कारण चुप्पी साध जाते थे युवक पुलिस ने वहां से सुनील निवासी ग्राम बैना जमनीपुर, थाना अगयाऊ बाजार, भोजपुर बिहार, सूरज निवासी ग्राम धारुहेड़ा रेवाड़ी, हरियाणा दोनों हाल निवासीगण दावानल कुंड, लाडली धाम गेस्टहाउस, गौरी गोपाल गोशाला वृंदावन, रवि और कृष्णा निवासीगण संत कॉलोनी, सोम आश्रम, वृंदावन, भूपेंद्र निवासी ग्राम नंदा गढ़ी थाना राया, प्रवीण निवासी दत्ता वास, थाना सादाबाद हाथरस और राजेश सिंह निवासी गांव मंगरौन थाना मंगरौन, दमोह मप्र, दोनों हाल निवासी संत कॉलोनी, सोम आश्रम के पास, वृंदावन को गिरफ्तार किया गया। थानाध्यक्ष जैंत सोनू कुमार ने मामले में कार्रवाई की गई है।