samacharsecretary.com

मध्य प्रदेश के स्कूल टीचर्स के लिए गुड न्यूज, शिक्षा विभाग का बड़ा प्रस्ताव; 15 दिन अतिरिक्त अवकाश की तैयारी

भोपाल  मध्य प्रदेश के 4 लाख शिक्षकों के लिए खुश खबरी है. सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले टीचर्स की गर्मियों की छुट्टियों को 15 दिन और बढ़ाया जा रहा है. स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा टीचर्स की छुट्टियों को 15 जून तक बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है. टीचर्स एसोसिएशन द्वारा शिक्षकों की छुट्टियां बढ़ाए जाने की मांग की जा रही थी, जिसे विभागीय मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने हरी झंडी दे दी है. प्रदेश में सरकारी स्कूल स्टूडेंट्स के लिए 23 जून से रीओपन होने जा रहे हैं। जनगणना ड्यूटी को अतिरिक्त छुट्टी का बनाया गया आधार प्रदेश में सरकारी टीचर्स की गर्मियों की छुट्टियां 1 मई से 31 मई तक निर्धारित थीं. हालांकि, इस बार गर्मियों की छुट्टियों के दौरान ही 7 मई से हायर सेकंडरी और हाई स्कूल की दूसरी बोर्ड परीक्षाएं शुरू हुईं, जो 27 मई तक चलीं. इसके अलावा जनगणना भी चलती रही. इसमें अधिकांश शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई थी. छुट्टियों के दौरान दूसरे सरकारी काम कराए जाने को आधार बनाकर शिक्षक संगठनों द्वारा स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप से मुलाकात की गई और शिक्षकों का ग्रीष्मकालीन अवकाश बढ़ाने की मांग की गई थी. शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष क्षत्रवीर सिंह राठौर के नेतृत्व में मंत्री को ज्ञापना सौंपा गया था। मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने दी हरी झंडी उधर स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह के मुताबिक, '' प्रदेश में स्कूली टीचर्स का ग्रीष्मकालीन अवकाश का समय बढ़ाया जा रहा है. शिक्षकों को 15 जून तक का अवकाश दिया जा रहा है. इसके लिए अधिकारियों को प्रस्ताव बनाने के लिए कहा गया है. जल्द ही इस संबंध में निर्णय लिया जाएगा.'' उधर विभाग द्वारा प्रस्ताव तैयार कर स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. संजय गोयल के पास इसे भेजा जाएगा. प्रमुख सचिव के अनुमोदन के बाद इस संबंध में आदेश जारी किया जाएगा। अब 23 जून को खुलेंगे स्कूल प्रदेश में पहले स्कूली शिक्षकों को 2 माह का ग्रीष्मकालीन अवकाश मिलता था, जिसे घटा कर 40 दिन कर दिया गया था. 2024-25 में शिक्षकों की छुट्टियों को 10 दिन और कम कर दिया गया. 2025 के बाद इस साल भी शिक्षकों को 31 दिन का अवकाश दिया गया. हालांकि, अब शिक्षकों के अवकाश को 15 दिन और बढ़ाया जा रहा है. प्रदेश में सरकारी स्कूल अब स्टूडेंट्स के लिए 23 जून को खुलेंगे।

सरकार के निशाने पर दिल्ली जिमखाना क्लब, सामने आया पूरा प्लान; 5 जून से होगी कार्रवाई

नई दिल्ली दिल्‍ली जिमखाना क्‍लब का अब इतिहास के पन्‍नों में दफन होना अब लगभग तय माना जा रहा है. जिम खाना क्‍लब को लेकर सरकार का पूरा प्‍लान सामने आया गया है. फिलहाल, जिमखाना क्‍लब के मौजूदा प्रबंधन को 5 जून तक का समय मिला हुआ है. यह मियाद पूरा होते ही सरकार की तरफ से एक्‍शन शुरू हो जाएगा. आपको बता दें कि केंद्र सरकार राजधानी के इस क्लब की जमीन वापस लेने की तैयारी में है।  सरकार का कहना है कि यह इलाका बेहद संवेदनशील और हाई सिक्योरिटी जोन में आता है, इसलिए यहां केवल सरकारी और प्रशासनिक कामकाज से जुड़ी सुविधाएं ही होनी चाहिए. सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस जमीन पर सरकारी दफ्तर और अधिकारियों के लिए आवासीय परिसर बनाने की योजना पर काम कर रही है. बताया जा रहा है कि यह सुविधा दिल्ली के मोती बाग इलाके की तरह विकसित की जा सकती है।  दरअसल, दिल्ली जिमखाना क्लब प्रधानमंत्री आवास लोक कल्याण मार्ग के पास स्थित है. सरकार का मानना है कि इस सुरक्षा क्षेत्र में यह एकमात्र ऐसा निजी संस्थान है, जहां आम सदस्यों की पहुंच बनी हुई है. इसी वजह से केंद्र सरकार ने क्लब की जमीन वापस लेने का फैसला किया है. केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि यह जमीन रक्षा ढांचे को मजबूत करने, सार्वजनिक सुरक्षा और जरूरी प्रशासनिक जरूरतों के लिए चाहिए. सरकार का कहना है कि इस इलाके का इस्तेमाल सार्वजनिक हित से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए किया जाएगा।  22 मई को भूमि एवं विकास कार्यालय यानी एलएंडडीओ ने दिल्ली जिमखाना क्लब को आदेश दिया था कि वह 5 जून तक जमीन सरकार को सौंप दे. आदेश में रणनीतिक और रक्षा जरूरतों का हवाला दिया गया था. हालांकि, इस फैसले को लेकर विवाद भी शुरू हो गया है. क्लब के कुछ सदस्यों, स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन और अन्य लोगों ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है. इन लोगों ने सरकार के फैसले का विरोध किया है. हाई कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और क्लब प्रबंधन दोनों को नोटिस जारी किया है।  दिल्ली जिमखाना क्लब का इतिहास काफी पुराना है. इसकी स्थापना 3 जुलाई 1913 को ब्रिटिश शासन के दौरान ‘इम्पीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब’ के नाम से हुई थी. उस समय यह क्लब अंग्रेज अधिकारियों और सैन्य अधिकारियों के लिए बनाया गया था. आजादी के बाद इसके नाम से ‘इम्पीरियल’ शब्द हटा दिया गया. क्लब की ज्यादातर मौजूदा इमारतें 1930 के दशक की बनी हुई हैं. 2022 में राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण यानी एनसीएलटी ने क्लब के प्रबंधन में 15 सरकारी निदेशकों की नियुक्ति को मंजूरी दी थी. यह फैसला क्लब में कथित गड़बड़ियों और कुप्रबंधन के आरोपों के बाद लिया गया था। 

आंधी-बारिश के कहर पर एक्शन में CM योगी, बोले- फील्ड में उतरें अधिकारी, तुरंत करें राहत कार्य

 लखनऊ उत्तर प्रदेश में मौसम ने अचानक करवट ली और कई जिलों में तेज आंधी, भारी बारिश और आकाशीय बिजली ने जमकर तबाही मचाई. कहीं पेड़ गिरे, कहीं बिजली सप्लाई ठप हुई तो कई जगहों पर जान-माल का नुकसान भी हुआ. मौसम के इस कहर के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे मामले का संज्ञान लिया है।  सीएम योगी ने आंधी, अतिवृष्टि और बिजली गिरने से हुई जनहानि, पशुहानि और आर्थिक नुकसान पर दुख जताया है. मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए अधिकारियों को तुरंत राहत कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं।  सरकार की तरफ से साफ कहा गया है कि जिन परिवारों को नुकसान हुआ है, उनका तत्काल आंकलन किया जाए और 24 घंटे के भीतर अनुमन्य मुआवजा दिया जाए. पीड़ितों को राहत के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़े।  मुख्यमंत्री ने सभी वरिष्ठ अधिकारियों को फील्ड में उतरने का निर्देश दिया है. उन्होंने कहा कि अधिकारी सिर्फ दफ्तरों में बैठकर रिपोर्ट न लें, बल्कि प्रभावित इलाकों में जाएं, लोगों से बात करें और यह सुनिश्चित करें कि हर जरूरतमंद परिवार तक मदद पहुंचे।  सीएम योगी ने यह भी कहा कि जिन इलाकों में फसल, मकान या पशुधन को नुकसान हुआ है, वहां तुरंत सर्वे कराया जाए. साथ ही राहत राशि देने में किसी भी तरह की लापरवाही न बरती जाए।  बिजली गिरने और तेज आंधी की घटनाओं को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की भी अपील की गई है. प्रदेश के कई जिलों में मौसम खराब होने की वजह से पेड़ गिरने, बिजली आपूर्ति बाधित होने और ग्रामीण इलाकों में नुकसान की खबरें सामने आई हैं. प्रशासन की टीमें लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं. सरकार का कहना है कि प्रभावित लोगों को हर संभव मदद दी जाएगी और राहत कार्यों में तेजी लाई जाएगी। 

Giribala Singh Arrest: 6 घंटे की लंबी पूछताछ के बाद CBI ने किया गिरफ्तार

भोपाल  ट्विशा शर्मा केस में सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई की है।छह घंटे से अधिक समय तक पूछताछ के बाद सीबीआई की टीम ने पूर्व जज गिरिबाला सिंह को सीबीआई की टीम ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया जा रहा है। वहां उनका मेडिकल करवाया जाएगा। इसके सीबीआई कोर्ट में उनकी पेशी होगी। पूछताछ के बाद हुई गिरफ्तारी दरअसल, एमपी हाईकोर्ट ने देर रात उनकी अग्रिम जमानत रद्द कर दी थी। इसके बाद सुबह साढ़े 10 बजे के करीर सीबीआई की टीम उनके घर में प्रवेश की थी। उसके बाद से लगातार उनसे पूछताछ चल रही थी। पूछताछ के दौरान गिरिबाला सिंह ने अपने खराब स्वास्थ्य का भी हवाला दिया था। इस दौरान गिरिबाला सिंह के वकीलों ने डॉक्टरों के पर्चे भी प्रस्तुत किए। बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती गिरिबाला सिंह पूछताछ के दौरान घर के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस जवानों की तैनाती थी। उनसे तमाम सवाल सीबीआई ने पूछे हैं जो ट्विशा के केस से संबंधित हैं। सीबीआई के अधिकारियों के साथ-साथ घर में एसआईटी की टीम भी मौजूद है। इसके साथ ही सीबीआई की तकनीकी टीम भी घर में मौजूद है। एजेंसी घर का पूरा वर्चुअल री-कंस्ट्रक्शन कर रही है इससे पहले CBI ने कटारा हिल्स स्थित घर में ट्विशा शर्मा के अंतिम घंटों को फिर से रचने के लिए 'टनल व्यू' जांच पद्धति का इस्तेमाल किया. जांच एजेंसी घर का पूरा वर्चुअल री-कंस्ट्रक्शन कर रही है, ताकि ट्विशा के आखिरी समय की हर गतिविधि को समझा जा सके और यह पता लगाया जा सके कि कौन कब घर में आया या गया. इसके लिए सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल डेटा, कॉल डिटेल और इंटरनेट रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की जा रही है।  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने रद्द की थी जमानत याचिका CBI ने इस सप्ताह की शुरुआत में मध्यप्रदेश पुलिस से  ट्विशा मामले की जांच अपने हाथ में ले ली है. पेशे से वकील समर्थ सिंह इसके बाद से फिलहाल सीबीआई की हिरासत में हैं.  इससे पहले मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को उनकी बहू ट्विशा शर्मा की दहेज मृत्यु के मामले में दी गई अग्रिम जमानत रद्द कर दी थी. बुधवार को जारी आदेश में निचली अदालत द्वारा 15 मई के आदेश के जरिए दी गई राहत को रद्द कर दिया गया था. अदालत ने यह टिप्पणी की कि जमानत देते समय केस डायरी और गवाहों के बयानों से जुड़े अहम तथ्यों पर ठीक से विचार नहीं किया गया था।  ट्विशा शर्मा केस की टाइमलाइन     ट्विशा शर्मा ने 12 मई को ससुराल में दी थी जान     13 मई को परिजनों ने आरोप लगाया कि उसकी हत्या हुई     गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह पर एफआईआर की मांग को लेकर परिजनों ने किया प्रदर्शन     इसके बाद परिजनों ने दोबारा पोस्टमार्टम की मांग की     भोपाल कोर्ट से याचिका हो गई खारिज     परिजनों ने सीबीआई जांच की मांग को लेकर सीएम से मुलाकात की     दोबारा पोस्टमार्टम के लिए परिजनों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई     हाईकोर्ट ने दोबारा पोस्टमार्टम के आदेश दिए     सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी     दिल्ली एम्स की टीम ने ट्विशा शर्मा के शव का किया पोस्टमार्टम     सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले में संज्ञान लिया     इसके बाद ट्विशा के पति समर्थ सिंह ने सरेंडर किया     सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू की     हाईकोर्ट से गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत खारिज समर्थ सिंह को भी लेकर पहुंची थी सीबीआई दरअसल, गिरिबाला सिंह पूछताछ से पहले सीबीआई की टीम समर्थ सिंह को भी लेकर घर पहुंची थी। बताया जाता है कि गिरिबाला और समर्थ सिंह को आमने-सामने बैठाकर भी पूछताछ की गई थी। कोर्ट में पेशी के बाद गिरिबाला सिंह को सीबीआई रिमांड पर ले सकती है। उठ रहे हैं कई सवाल वहीं, ट्विशा शर्मा की मौत को लेकर कई सवाल हैं। इसमें सबसे अहम सवाल उसकी मौत की टाइमिंग को लेकर है। पुलिस की डायरी में मौत की टाइमिंग कुछ और है। वहीं, सीसीटीवी फुटेज में कुछ और टाइम दर्ज है। ऐसे में तमाम तकनीकी साक्ष्यों की जांच को इकट्ठा कर रही है। एसआईटी ने भी अभी तक की जांच रिपोर्ट सीबीआई को सौंप दी है। इसके बाद सीबीआई अपने तरीके से जांच कर रही है। ट्विशा शर्मा मौत मामला: अब तक की बड़ी बातें      12 मई 2026 को भोपाल के कटारा हिल्स स्थित ससुराल में ट्विशा शर्मा मृत पाई गईं थी.     शुरुआती जांच में मौत का कारण फांसी बताया गया, लेकिन परिवार ने साजिश और दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाया.     पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज उत्पीड़न और क्रूरता की धाराओं में मामला दर्ज हुआ.     मामले की गंभीरता और विवाद के बाद जांच सीबीआई को सौंप दी गई.      सीबीआई ने भोपाल पहुंचकर केस दोबारा दर्ज किया और सभी दस्तावेज, डिजिटल सबूत व फोरेंसिक रिपोर्ट अपने कब्जे में ली     एजेंसी ने घटनास्थल का निरीक्षण कर पूरे घर की जांच और क्राइम सीन को समझने की प्रक्रिया शुरू की     जांच में सीसीटीवी फुटेज, कॉल रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा और अन्य डिजिटल सबूत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं     सुप्रीम कोर्ट ने मामले में निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करने के लिए सीबीआई को केस सौंपा     सीबीआई ने पति और सास से पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए और जांच को आगे बढ़ाया।     ताजा कार्रवाई में सीबीआई ने सास गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार कर लिया, जिससे मामले में जांच तेज हो गई है जस्टिस देव नारायण मिश्रा ने भोपाल की एक सत्र अदालत द्वारा दी गई अग्रिम जमानत को रद्द कर दिया. उन्होंने यह टिप्पणी की कि निचली अदालत केस डायरी, गवाहों की गवाही और व्हाट्सअप बातचीत जैसे अहम सबूतों की ठीक से जांच करने में नाकाम रही।  हाई कोर्ट ने मामले की समीक्षा करने के बाद पाया कि इस आदेश में गंभीर कमियां थीं. बेंच ने यह भी पाया कि ट्रायल कोर्ट ने केस डायरी में दर्ज गवाहों की अहम गवाही … Read more

वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी बोले- शिक्षा, संगठन और संस्कार समाज विकास की सबसे बड़ी ताकत

शिक्षा, संगठन और संस्कार से ही समाज की प्रगति संभव: वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ​जांजगीर-चांपा के कापन और बलौदा में सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल हुए वित्त मंत्री ​अघरिया और स्वर्णकार समाज के सामुदायिक भवनों का लोकार्पण ​10वीं और 12वीं के मेधावी छात्र-छात्राओं को किया सम्मानित ​रायपुर छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री एवं जांजगीर-चांपा जिले के प्रभारी मंत्री ओ.पी. चौधरी आज जांजगीर-चाम्पा जिले के कापन और नगर पंचायत बलौदा में आयोजित सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कापन में अखिल भारतीय अघरिया समाज के क्षेत्रीय सभा सह सामुदायिक भवन का उद्घाटन किया। वहीं, बलौदा के जंगलवा डबरी में स्वर्णकार समाज के 'स्वर्ण मंडपम' सामुदायिक भवन का लोकार्पण किया। ​शिक्षा और संस्कारों से सशक्त बनेगी नई पीढ़ी         कापन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री चौधरी ने कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित कर उनका उत्साह बढ़ाया। इस अवसर पर उन्होंने कहा, "शिक्षा समाज की प्रगति का सबसे सशक्त माध्यम है। नई पीढ़ी को बेहतर शिक्षा, संस्कार और अवसर उपलब्ध कराकर ही समाज को आगे बढ़ाया जा सकता है।" ​उन्होंने आगे कहा कि ऐसे आयोजन समाज में एकजुटता, सकारात्मक सोच और सामुदायिक भावना को मजबूत करते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश निरंतर विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है और समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए जनकल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। एकजुटता ही समाज की वास्तविक शक्ति          कार्यक्रम को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह ने कहा कि अघरिया समाज शिक्षा, कृषि और सामाजिक विकास के क्षेत्र में हमेशा अग्रणी रहा है। किसी भी समाज की वास्तविक शक्ति उसकी एकजुटता में ही निहित होती है। वहीं, पूर्व संसदीय सचिव अंबेश जांगड़े ने कहा कि यह नवनिर्मित भवन सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के संचालन के लिए एक सशक्त मंच साबित होगा। ​बलौदा में 'स्वर्ण मंडपम' का लोकार्पण             नगर पंचायत बलौदा में आयोजित स्वर्ण मंडपम सामुदायिक भवन के लोकार्पण समारोह में वित्त मंत्री ने स्वर्णकार समाज द्वारा सामाजिक विकास के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। इस अवसर पर सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े, पूर्व सांसद श्रीमती कमला देवी पाटले, पूर्व विधायक चुन्नीलाल साहू सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, समाज के पदाधिकारी और स्थानीय नागरिक उपस्थित थे।

पीएम सूर्य घर योजना से बड़ी राहत! 39,975 उपभोक्ताओं के खातों में पहुंची ₹311 करोड़ से ज्यादा सब्सिडी

पीएम सूर्य घर योजना में 39 हजार 975 उपभोक्ताओं के खातों में पहुंची 311 करोड़ से अधिक की सब्सिडी योजना में तीन किलोवॉट के सौर संयंत्र लगाने पर मिल रही 78 हजार की सब्सिडी भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी क्षेत्रान्तर्गत आने 16 जिलों में पीएम सूर्य घर योजना के तहत अब तक कुल 39 हजार 975 उपभोक्ता पंजीकृत हुए हैं। इनके खातों में 311 करोड़ 64 लाख से अधिक की राशि सब्सिडी के रूप में जमा कराई जा चुकी है। कंपनी ने कहा है कि प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन उपरांत विद्युत वितरण कंपनी में रजिस्टर्ड अधिकृत वेंडर से ही सौर ऊर्जा संयंत्र लगवाएं। पीएम सूर्य घर योजना में एक किलोवॉट सोलर संयन्त्र लगाने पर 30 हजार रूपये, दो किलोवॉट सोलर संयंत्र लगाने पर 60 हजार रुपए तथा तीन किलोवॉट या उससे अधिक के सोलर संयन्त्र स्थापना पर 78 हजार रुपए की सब्सिडी केन्द्र सरकार द्वारा दी जा रही है। कहां करें आवेदन पीएम सूर्य घर योजना का शुभारंभ 13 फरवरी 2024 को हुआ था। योजना में शामिल होने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसके लिए पीएम सूर्य घर योजना की वेबसाइट pmsuryaghar.gov.in पर जाकर आवेदन किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त अधिक जानकारी के लिए कंपनी की वेबसाइट portal.mpcz.in अथवा उपाय ऐप, वॉट्स ऐप चेटबॉट व टोल फ्री नं, 1912 पर भी संपर्क किया जा सकता है। कंपनी से प्राप्त जानकारी में बताया गया है कि उपभोक्ताओं को समय पर सब्सिडी मिले इसके लिए वेंडर और उपभोक्ता दोनों को ध्यान रखना होगा कि उनके बैंक खाते में नाम, आधार कार्ड में नाम तथा बिजली बिल में नाम एक समान होना चाहिए। 1 दिसंबर 2024 से स्थापित होने वाले प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना अंतर्गत सौर संयंत्रों में केवल स्मार्ट मीटर ही लगाए जा रहे हैं, जो कि मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा एस.ओ.आर. रेट पर उपभोक्ताओं को प्रदान किए जा रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं द्वारा सोलर वेंडर को किए जाने वाले भुगतान में लगभग 6 से 8 हजार रूपये तक की कमी परिलक्षित हो रही है।  

अफवाहों से तरबूज बाजार बेहाल, बिक्री घटी; किसान और व्यापारी दोनों परेशान

भोपाल गर्मी के मौसम में सबसे ज्यादा खाए जाने वाले फलों में शामिल तरबूज इस बार डर की वजह से बाजार में मार झेल रहा है। महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में तरबूज खाने के बाद कथित मौतों की खबरें सामने आने के बाद लोगों ने इसे खरीदना कम कर दिया है, जिसका सीधा असर बिक्री और कीमतों पर पड़ा है। बाजार में मांग घटी, कीमतों में बड़ी गिरावट इन घटनाओं और सोशल मीडिया पर फैली खबरों के बाद भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर जैसे शहरों में तरबूज की मांग तेजी से घट गई है। थोक और खुदरा दोनों बाजारों में बिक्री कम होने से किसानों और छोटे फल विक्रेताओं को नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई जगहों पर दाम 20 से 30 प्रतिशत तक नीचे आ गए हैं। पहले जो तरबूज 18–20 रुपए किलो बिक रहा था, वह अब 12–13 रुपए किलो तक पहुंच गया है, जबकि थोक में कीमत 7–8 रुपए किलो तक गिर गई है। संदिग्ध मामलों से बढ़ी चिंता मुंबई के पायधुनी इलाके में अप्रैल के अंत में एक परिवार की मौत के बाद मामला चर्चा में आया, जहां खाने के बाद अचानक सभी की तबीयत बिगड़ गई थी। बाद में फोरेंसिक रिपोर्ट में तरबूज में जिंक फॉस्फाइड जैसे जहरीले रसायन के संकेत मिलने की बात सामने आई, हालांकि जांच अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। इसके अलावा मध्यप्रदेश के श्योपुर में भी इसी तरह का मामला सामने आया, जहां तरबूज खाने के बाद दो लोगों की मौत हो गई थी और सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। मंडियों में माल, लेकिन ग्राहक गायब भोपाल की करोंद फल मंडी में रोजाना 15 से 20 मिनी ट्रक तरबूज पहुंच रहा है। थोक व्यापारी मोहम्मद सैफुद्दीन का कहना है कि पिछले 15-20 दिनों में बिक्री पर बड़ा असर पड़ा है। उन्होंने बताया, ‘पहले 25-30 क्विंटल तरबूज वाली गाड़ी सुबह तक खाली हो जाती थी, लेकिन अब दोपहर तक भी मुश्किल से बिकती है। मजबूरी में दाम घटाने पड़ रहे हैं। अगर ये खबरें नहीं आतीं तो इतनी गर्मी में बिक्री दोगुनी होती और भाव 25-30 रुपए किलो तक पहुंच जाते।’ इंदौर में भी स्थिति अलग नहीं है। फार्मिंग इन्फ्लूएंसर नीलेश पाटीदार के मुताबिक सोशल मीडिया पर वायरल खबरों ने पूरे बाजार को प्रभावित किया है। उनका कहना है कि अच्छी गुणवत्ता वाले तरबूज के दाम सामान्य स्थिति में 17-18 रुपए किलो तक जाते, लेकिन अभी 10-12 रुपए से ऊपर नहीं पहुंच पा रहे। सबसे ज्यादा मार छोटे विक्रेताओं पर फुटपाथ पर फल बेचने वाले छोटे व्यापारियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। भोपाल के अशोका गार्डन में ठेला लगाने वाले राजू बताते हैं कि गर्मी के मौसम में तरबूज ही उनकी कमाई का सबसे बड़ा सहारा होता है, लेकिन इस बार बिक्री आधी रह गई है। राजू कहते हैं, ‘वीडियो और खबरें वायरल होने के बाद लोग खरीदने से डर रहे हैं। जो ग्राहक आते भी हैं, वे पूछते हैं कि इसमें कुछ मिलाया तो नहीं गया।’ किसानों की मेहनत पर पानी फिर रहा खंडवा जिले के किसान अजय सिंह गुर्जर ने बताया कि इस बार मौसम अच्छा होने से उत्पादन बढ़िया हुआ और किसानों को अच्छी कमाई की उम्मीद थी। लेकिन अचानक मांग घटने से हालात बिगड़ गए। उन्होंने कहा, ‘मंडी में दाम इतने गिर गए कि लागत निकालना मुश्किल हो गया। कई व्यापारी खेत से माल उठाने ही नहीं पहुंचे। कई जगह 5-6 रुपए किलो तक भाव आ गए। मजबूरी में फसल खेतों में ही खराब हो गई।’ खरीदारों में डर, बदल रही आदतें भोपाल में पढ़ाई कर रहे एक छात्र के अनुसार, ऐसी खबरों के बाद लोग तरबूज खरीदने से बच रहे हैं या फिर बहुत सावधानी से चुनकर खरीद रहे हैं। कई ग्राहक अब इसकी जगह अन्य फलों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे बाजार में मांग और भी कम हो गई है। मंडियों में माल ज्यादा, ग्राहक कम भोपाल की करोंद फल मंडी में रोजाना कई ट्रक तरबूज पहुंच रहे हैं, लेकिन बिक्री धीमी पड़ गई है। व्यापारियों का कहना है कि पहले पूरा माल सुबह तक बिक जाता था, लेकिन अब दिनभर में भी पूरा स्टॉक खत्म नहीं हो रहा। मजबूरी में दाम घटाने पड़ रहे हैं। इंदौर में भी स्थिति लगभग ऐसी ही है, जहां अच्छे क्वालिटी के तरबूज भी सामान्य कीमत से काफी कम दाम पर बिक रहे हैं। फूड सेफ्टी विभाग अलर्ट मामले सामने आने के बाद भोपाल, जबलपुर समेत कई शहरों में फूड सेफ्टी विभाग ने जांच अभियान चलाया। एहतियात के तौर पर कई जगह सैंपलिंग की गई है। भोपाल के फूड सेफ्टी अधिकारी पंकज श्रीवास्तव के मुताबिक दुकानों और गोदामों से तरबूज, आम समेत कई फलों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। कुछ जगहों पर कृत्रिम रूप से फल पकाने में इस्तेमाल किए जा रहे संदिग्ध केमिकल भी जब्त किए गए हैं। घर पर ऐसे करें तरबूज की जांच भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के अनुसार तरबूज में कृत्रिम रंग या मिलावट की पहचान घर पर भी की जा सकती है।     कॉटन टेस्ट: तरबूज के लाल हिस्से पर सफेद कॉटन या टिशू पेपर रगड़ें। अगर कॉटन गहरा लाल या चटक गुलाबी हो जाए तो कृत्रिम रंग होने की आशंका हो सकती है।     वाटर टेस्ट: तरबूज का छोटा टुकड़ा पानी से भरे ग्लास में डालें। यदि पानी तुरंत लाल या गुलाबी होने लगे तो यह मिलावट का संकेत हो सकता है। इसके अलावा तरबूज के अंदर बड़े क्रैक, ज्यादा सफेद-पीले रेशे या असामान्य रूप से चमकदार सतह भी कृत्रिम पकाने के संकेत माने जाते हैं। विशेषज्ञ भरोसेमंद दुकानदार से ही ताजा फल खरीदने की सलाह दे रहे हैं।

बिजली हादसों से बचने सतर्क रहें, सामाजिक जिम्मेदारियों के निर्वहन में करें कंपनी का सहयोग

आमजन सामाजिक दायित्‍वों के निर्वहन के साथ कंपनी का करें सहयोग विद्युत दुर्घटनाओं से बचाव के प्रति सतर्कता बरतें भोपाल विद्युत वितरण कंपनियों ने कतिपय प्राकृतिक और मानवीय कारणों से होने वाली विद्युत दुर्घटनाओं से बचाव के लिए आमजनों और उपभोक्‍ताओं से अपील की है कि वे विद्युत लाइनों, वितरण ट्रांसफार्मरों तथा अन्‍य विद्युतीय उपकरणों से किसी भी प्रकार की छेड़छाड न करें तथा सजगता और सतर्कता बरतते हुए अपने दैनिक कार्यों का निर्वहन करें। आमजन अमूल्‍य जीवन और विद्युत सुरक्षा की ओर विशेष ध्यान देते हुए पूर्व से विद्यमान विद्युतीय उपकरणों, लाइनों तथा वितरण ट्रांसफार्मरों के समीप भवन निर्माण, कालोनी के निर्माण और रोड के विस्तार के दौरान विद्युत सुरक्षा के मापदण्डों के अनुसार उचित दूरी का ध्यान रखें। विद्युत उपकरणों के साथ छेड़खानी करना या उन्‍हें नुकसान पहुंचाना अथवा चुराकर ले जाना कानूनी अपराध है और इसके लिए जुर्माने और सजा का प्रावधान है। आम लोगों से अपील की गयी है कि वे इस प्रकार की घटना होने पर तत्‍काल इसकी सूचना नजदीकी विद्युत वितरण केन्द्र पर दें। साथ ही इस प्रकार से गैर कानूनी कार्य करने वालों को रोकने के लिए आमजन अपना सामाजिक दायित्‍व समझकर इस तरह की अव्‍यवस्‍थाओं पर अंकुश लगाने में कंपनी का सहयोग करें। अक्सर यह देखने में आया है कि कालोनी के विद्युतीकरण के दौरान कालोनाइज़र अपनी सुविधा से बिजली के खम्बों को लगा देता है तथा सड़क विस्तार के दौरान सड़क को ऊंचा कर दिया जाता है। कई बार यह पाया जाता है कि रोड ऊंची कर ली जाती है परन्तु बिजली के खम्बों से रोड के बीच का विस्तार और दूरी को ध्यान में नहीं रखा जाता तथा सुरक्षा के नियमों को अनदेखा कर दिया जाता है। फलस्वरूप दुर्घटना की आशंका बनी रहती है और कभी-कभी दुर्घटनाएं हो भी जाती है। कंपनी ने कहा है कि भवन निर्माण और विस्तार के दौरान यदि कोई भवन निर्माता/संस्था निर्धारित प्रावधान के अनुसार काम नहीं करता है तो संबंधित संस्थाओं अथवा व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही की जाए। कंपनी ने अपने मैदानी अधिकारियों को निर्देशित किया है कि विद्युत लाइनों की पेट्रोलिंग कराते समय यदि कहीं रोड, भवन, स्ट्रक्चर का निर्माण नियम विरूद्ध होता हुआ पाया जाता है तो संबंधित उपभोक्ता, एजेन्सी और भवन स्वामी को विद्युत अधिनियम 2003 के अनुसार सुरक्षित अंतराल रखने के लिये रजिस्टर्ड नोटिस जारी करें तथा नोटिस की अवधि के दौरान सुरक्षित अंतराल बनाये रखने के लिये कार्यवाही नहीं किये जाने पर उसके विरूद्ध वैधानिक प्रक्रिया के अनुसार त्वरित कार्यवाही किया जाना सुनिश्चित करें। नई लाइनों के निर्माण में रोड, भवन या स्ट्रक्चर से नियमानुसार निर्धारित सुरक्षित दूरी रखते हुए ही कार्य कराए जाएं। विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत बनने वाली सड़क मार्गों के ऊपर से गुजरने वाली लाइनों का अंतराल यदि प्रस्तावित सड़क के कारण कम हो रहा है तो विद्युत लाइन के खम्बों की ऊंचाई बढ़ाने का प्रस्ताव कम्पनी के प्रचलित नियमानुसार संबंधित एजेन्सी को नोटिस के साथ भेजें और साथ ही सुनिश्चित करें कि निर्धारित सुरक्षित अंतराल मेन्टेन करने के बाद ही उस लोकेशन पर सड़क निर्माण हों।  

भीषण गर्मी में MP में बियर की किल्लत, सरकार और ठेकेदारों के आंकड़ों में बड़ा फर्क

भोपाल  मध्य प्रदेश में इस बार गर्मियों का सीजन बियर के शौकीनों के लिए काफी मायूस करने वाला साबित हो रहा है। राज्य में बियर की सप्लाई में भारी गिरावट आई है, जिससे कई बड़े शहरों के आउटलेट्स खाली पड़े हैं। इस संकट की मुख्य वजह आबकारी विभाग द्वारा इसी साल फरवरी में रायसेन स्थित एक निजी मैन्युफैक्चरिंग और बॉटलिंग यूनिट को बंद किया जाना है। इस फैक्ट्री के बंद होने से बाजार में अचानक बड़ा गैप आ गया, जिसकी भरपाई समय रहते नहीं की जा सकी। सरकार का दावा बनाम इंडस्ट्री की हकीकत आबकारी कमिश्नर दीपक सक्सेना के मुताबिक, विभाग ने मुस्तैदी दिखाते हुए दूसरे राज्यों और स्थानीय डिस्टिलरीज से बैकअप अरेंजमेंट किया है। सरकार का दावा है कि शुरुआती 45% के घाटे को अब घटाकर सिर्फ 14% पर ले आया गया है। हालांकि, शराब कारोबारियों और इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जमीनी स्तर पर यह किल्लत अभी भी 45% के आसपास बनी हुई है, क्योंकि सरकार समय पर वैकल्पिक टेंडर जारी करने में नाकाम रही। दरअसल, पीक सीजन में राज्य में रोजाना दो लाख क्रेट बियर की मांग रहती है, जिसमें से आधी सप्लाई अकेले रायसेन की इसी बंद पड़ी यूनिट से होती थी। मध्य प्रदेश का सिस्टम उत्तर प्रदेश जैसा नहीं है, जहां कंपनियां सीधे ठेकेदारों से संपर्क करती हैं। यहां सरकार के मदर डिपो से सप्लाई होती है। जब सरकार हमसे भारी आबकारी ड्यूटी लेती है, तो मांग के मुताबिक स्टॉक देना भी उसी की जिम्मेदारी है। विभाग रायसेन प्लांट के बंद होने के बाद के हालात का अंदाजा लगाने में पूरी तरह फेल रहा। देशव्यापी है बियर की कमी इसके अलावा, भोपाल के सहायक आबकारी आयुक्त वीरेंद्र सिंह धाकड़ ने बताया कि बियर की कमी इस बार देशव्यापी है। इस साल नए सिरे से हुए ठेकों और नीलामी में देरी के कारण वेंडर गर्मियों के लिए एडवांस स्टॉक जमा नहीं कर पाए। रही सही कसर छोटे कस्बों के वेंडर्स ने पूरी कर दी, जिन्होंने प्रीमियम बियर के बड़े स्टॉक पहले ही बुक कर लिए, जिससे भोपाल जैसे मुख्य शहरों में हाई-एंड ब्रांड्स की भारी कमी हो गई है।  

Chandigarh में बड़ा बदलाव! अब ग्रुप हाउसिंग सोसायटी बनाकर बेचे जाएंगे फ्लैट

चंडीगढ़ चंडीगढ़ में अब लोग प्लॉट खरीदकर फेवरेट डिजाइन की कोठी नहीं बनवा सकेंगे। चंडीगढ़ प्रशासन अब शहर में प्लॉटेड डेवलपमेंट नहीं करेगा, यानी लोगों को प्लॉट नहीं बेचे जाएंगे। इसकी जगह अब केवल ग्रुप हाउसिंग यानी फ्लैट्स बनाने की परमिशन दी जाएगी। चंडीगढ़ प्रशासन ने संशोधित मास्टर प्लान में इसे शामिल करने का सुझाव दिया गया है। इससे सिटी की अब हॉरिजॉन्टल की जगह वर्टिकल ग्रोथ होगी। इतना ही नहीं, फेज-II के सेक्टरों में जो भी खाली प्लॉट क्लस्टर बचे हैं, उन्हें अब व्यक्तिगत प्लॉट के बजाय ग्रुप हाउसिंग के लिए फिर से प्लान किया जाएगा। इतना जरूर है कि 1 से 30 सेक्टर को छोड़कर ही मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बन पाएंगी। ऐसा इसलिए क्योंकि यह एरिया हेरिटेज में शामिल है। इसके अलावा अब मिक्स्ड लैंड जमीन का एरिया भी बढ़ाया जाएगा। वहीं, पार्किंग की दिक्कत का भी हल निकालने की तैयारी है। कुल मिक्स्ड लैंड यूज क्षेत्र 252 एकड़ (0.89%) से बढ़कर 428 एकड़ (1.5%) हो गया है। जानिए, प्रशासन ने ये फैसला क्यों लिया चंडीगढ़ देश की आजादी के बाद बसा पहला प्लांड सिटी है। इसकी नींव 1952 में रखी गई थी। इसके बाद, 1 नवंबर 1966 को पंजाब के पुनर्गठन के समय इसे एक केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया और यह पंजाब व हरियाणा दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी बना। वर्ष 1976 में चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड गठित किया गया। लेकिन अब यह लगभग पूरी तरह बस गया है। साथ ही जमीन की कमी दिख रही है। इसी चीज को मद्देनजर रखते हुए संशोधित मास्टर प्लान में यह चीज शामिल की गई। फेज-II में सेक्टर-43 (सब-सिटी सेंटर) वाला एरिया आता है। यहां लगभग 78 एकड़ खाली क्षेत्र है, जिसे विकास मार्ग के साथ एकीकृत करते हुए मिश्रित भूमि उपयोग के तहत लाया गया है। फेज-II के विभिन्न सेक्टरों में कई खाली पॉकेट्स और बिना बिके खाली प्लॉटों के क्लस्टर होने का उल्लेख है। हालांकि इनका कोई एक विशिष्ट कुल क्षेत्रफल नहीं दिया गया है, लेकिन इन्हें अब व्यक्तिगत प्लॉट के बजाय ग्रुप हाउसिंग के लिए फिर से प्लान करने का निर्देश है। जानिए, इस फैसले के बाद किस तरह की इमारतें बनेंगी फेज-III के सेक्टरों में लगभग 146 एकड़ जमीन खाली पड़ी है, जिसे अब 4 से 6 मंजिला फ्लैटों वाले हाई-डेंसिटी हाउसिंग के लिए इस्तेमाल करने का प्रस्ताव है। फेज-III और बाहरी इलाके में व्यक्तिगत प्लॉटों का आवंटन पूरी तरह बंद (डिसकंटीन्यू) कर दिया गया है। यहां अब घनी आबादी वाले 4 से 6 मंजिला फ्लैट्स बनाए जाएंगे, ताकि ज्यादा लोगों को घर मिल सके। चंडीगढ़ प्रशासन ने के विभिन्न सेक्टरों में लगभग 215 एकड़ जमीन हाउसिंग बोर्ड दी है, जिसे अभी विकसित किया जाना बाकी है। गांव मलोया के पास 178 एकड़ जमीन आवासीय उपयोग के लिए प्रस्तावित है, जहां हाई-राइज इमारतें बनाने की योजना है। इंडस्ट्रियल एरिया में जोनिंग एरिया इंडस्ट्रियल एरिया फेज-I और फेज-II में जमीन के बेहतर उपयोग के लिए FAR (फ्लोर एरिया रेश्यो) बढ़ाकर 2.0 कर दिया गया है। साथ ही, ग्राउंड कवरेज 60% तय की गई है। 2 कनाल तक के प्लॉटों के लिए अधिकतम ऊंचाई 68 फीट 3 इंच निर्धारित की गई है। 2 कनाल (5 से 15 मरला) तक के प्लॉट मालिक अब ‘आर्किटेक्चरल कंट्रोल’ या ‘जोनिंग फ्रेमवर्क’ में से किसी एक विकल्प को चुन सकेंगे। हालांकि, यदि वे बढ़े हुए एफएआर 2.0 का लाभ लेना चाहते हैं, तो उन्हें जोनिंग फ्रेमवर्क अपनाना अनिवार्य होगा। अब औद्योगिक प्लॉटों के भीतर ही श्रमिकों, लेबर और सुरक्षा गार्डों के रहने के लिए हॉस्टल या डॉरमेट्री बनाने की अनुमति दी गई है। 1 एकड़ तक के प्लॉटों में यह सुविधा कुल स्वीकृत FAR का 5% तक और 1 एकड़ से बड़े प्लॉटों में 2.5% तक सीमित होगी। इन कमरों का उपयोग केवल मजदूरों के रहने के लिए किया जा सकेगा। इन्हें किराये या अन्य व्यावसायिक उपयोग के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। पार्किंग के संकट से बचाएगा यह फार्मूला लोगों को पार्किंग के संकट से बचाने के लिए अब स्टिल्ट पार्किंग बनाई जाएगी। फेज-II के सेक्टरों के लिए स्टिल्ट पार्किंग को इमारत की निर्धारित ऊंचाई से छूट दी गई है, ताकि परिसर के भीतर ही पार्किंग की सुविधा मिल सके। फेज-III और पेरिफेरी में इसे कुल ऊंचाई में गिना जाएगा। इंटिग्रेटेड रेजिडेंशियल हाउसिंग में कुल पार्किंग स्थान घरों के संचित फर्श क्षेत्रफल के कम से कम 30% के बराबर होना चाहिए। स्टिल्ट के नीचे पार्किंग के लिए 7 फीट 6 इंच की स्पष्ट ऊंचाई होनी चाहिए। इस क्षेत्र का उपयोग घरों की संख्या बढ़ाने या उप-विभाजन के लिए नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा कॉमर्शियल, इंडस्ट्रियल व अन्य एरिया के लिए भी प्लानिंग की गई है। इंडस्ट्रियल एरिया फेज-III के लगभग 60 एकड़ अविकसित क्षेत्र को अब ‘मिक्स्ड लैंड यूज’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके तहत आवासीय, व्यावसायिक, संस्थागत और सांस्कृतिक गतिविधियों को शामिल किया जाएगा, ताकि क्षेत्र का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।