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लखनऊ से जारी आदेश: यूपी में पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर व्यापक ट्रांसफर

लखनऊ  योगी आदित्यनाथ सरकार में पुलिस और प्रशासनिक अफसरों के तबादलों का दौर जारी है। शनिवार को शासन ने दो आईपीएस अफसरों का ट्रांसफर किया। इससे पहले शुक्रवार को एक आईएएस और 19 पीसीएस अफसरों का तबादला किया गया था। गृह विभाग ने शनिवार को कौशांबी के एडिशनल एसपी राजेश कुमार सिंह तृतीय को उनके पद से हटाकर मेरठ में एडीजी ऑफिस भेज दिया गया। राजेश कुमार के स्थान पर अमिता सिंह को कौशांबी का नया एडिशनल एसपी बनाया गया है। अमिता सिंह लखनऊ में यूपी-112 में एएसपी के पद पर तैनात थीं। राम मोहन मीना बने प्रतापगढ़ के सीडीओ प्रदेश सरकार ने मुरादाबाद में संयुक्त मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात राम मोहन मीना को प्रतापगढ़ का मुख्य विकास अधिकारी बनाया है। नियुक्ति विभाग ने शुक्रवार को इसके आदेश जारी कर दिए। 19 वरिष्ठ पीसीएस अधिकारियों का तबादला प्रदेश सरकार ने शुक्रवार की देर शाम 19 पीसीएस अधिकारियों का तबादला कर दिया। छह अधिकारियों का पहले किया गया तबादला रद कर उन्हें नई तैनाती दी गई है। सुलतानपुर के मुख्य राजस्व अधिकारी आलोक कुमार वर्मा को अपर आयुक्त वाराणसी मंडल बनाया गया है। भातखंडे संस्कृति विवि की कुलसचिव व अपर निदेशक संस्कृति निदेशालय सृष्टि धवन को मुख्य राजस्व अधिकारी के पद पर सुलतानपुर भेजा गया है, जबकि एडीएम (वित्त राजस्व) गौतमबुद्धनगर के लिए स्थानांतरणाधीन सुशील प्रताप सिंह को अब भातखंडे संस्कृति विवि का कुलसचिव, संस्कृति निदेशालय के अपर निदेशक और लखनऊ विकास प्राधिकरण के संयुक्त सचिव का तिहरा चार्ज दिया गया है। दुर्गेश मिश्र को अपर नगर आयुक्त वाराणसी से अपर नगर आयुक्त गोरखपुर भेजा गया है। एडीएम (वित्त एवं राजस्व) सीतापुर के लिए स्थानांतरित बृजेश कुमार का तबादला रद कर उन्हें मेरठ में एडीएम सिटी बना रहने दिया गया है। अनिरुद्ध प्रताप सिंह एडीएम मेरठ से स्थानांतरणाधीन थे, अब इन्हें एडीएम (वित्त एवं राजस्व) मुजफ्फरनगर भेजा गया है। राजीव राज, नगर मजिस्ट्रेट उन्नाव को अब एडीएम (वित्त एवं राजस्व) जालौन बनाया गया है। मनोज कुमार सिंह, एसडीएम जालौन को अब उन्नाव का नगर मजिस्ट्रेट बनाया गया है। लोक सेवा आयोग प्रयागराज के उपसचिव गौरव रंजन श्रीवास्तव को अपर नगर आयुक्त गोरखपुर के पद पर भेजा गया है। अनुपम मिश्र एसडीएम चंदौली को लोक सेवा आयोग प्रयागराज का उपसचिव बनाया गया है। सीमा पांडेय का पुराना तबादला रद कर उन्हें अपर नगर आयुक्त वाराणसी बनाया गया है। नितीश कुमार सिंह स्थानांतरणाधीन को अब एडीएम (प्रशासन) बुलंदशहर बनाया गया है। प्रमोद कुमार पांडेय एडीएम (प्रशासन) बुलंदशहर को अपर आयुक्त आजमगढ़ मंडल के पद पर भेजा गया है। आयुष चौधरी मुख्य राजस्व अधिकारी गाजीपुर को एडीएम (वित्त एवं राजस्व) सीतापुर बनाया गया है। हरदोई के नगर मजिस्ट्रेट सुनील कुमार त्रिवेदी को मुख्य राजस्व अधिकारी गाजीपुर के पद पर भेजा गया है। संजय कुमार एसडीएम हाथरस को अब हरदोई का नगर मजिस्ट्रेट बनाया गया है। अजीत कुमार सिंह स्थानांतरणाधीन थे, उन्हें अब (एडीएम वित्त एवं राजस्व) गौतमबुद्धनगर बनाया गया है। त्रिभुवन, मुख्य राजस्व अधिकारी बलिया से एडीएम (वित्त एवं राजस्व) बदायूं बनाए गए हैं। सुरेश कुमार पाल, एडीएम वित्त एवं राजस्व बदायूं से मुख्य राजस्व अधिकारी बलिया के पद पर भेजा गया है।

पूर्वी दिल्ली: संजय झील सूखने से मछलियों की बड़ी संख्या में मौत, पाइपलाइन खराबी बताई जा रही वजह

नई दिल्ली पूर्वी दिल्ली की संजय झील में सैकड़ों मछलियों की मौत हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि इसका कारण पानी की आपूर्ति में समस्याओं के चलते झील का सूखना हो सकता है। संजय झील के लिए दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) द्वारा पानी की आपूर्ति की जाती है। इस विशाल जल निकाय का प्रबंधन करने वाले दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने शुक्रवार को एक बयान में कहा, ‘‘झील के जलस्तर को बनाए रखने के लिए उपचारित पानी की आपूर्ति की जिम्मेदारी सरकारी स्वामित्व वाली एक जल आपूर्ति एजेंसी के पास है कोंडली से संजय झील में पानी पहुंचाने के लिए पाइपलाइन बिछाई गई थी डीडीए के अनुसार, पास के कोंडली मलजल शोधन संयंत्र (एसटीपी) से उपचारित पानी को संजय झील तक पहुंचाने के लिए पाइपलाइन बिछाई गई थी। घटनाक्रम से अवगत डीजेबी के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर ‘पीटीआई भाषा’ को बताया कि पाइपलाइन को हुए नुकसान और उसके बाद किए गए मरम्मत कार्यों के कारण झील में उपचारित पानी की आपूर्ति प्रभावित हुई है। मरम्मत कार्यों के कारण 3 महीनों से झील में पानी की आपूर्ति नहीं हो रही थी अधिकारी ने बताया कि मरम्मत कार्यों के कारण पिछले चार महीनों से झील में पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि लगभग चार महीने पहले जलाशय में पानी पहुंचाने वाली पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी, लेकिन तब तापमान इतना अधिक नहीं था और स्थिति नियंत्रण में थी। लेकिन अब भीषण गर्मी के कारण झील सूख गई है। जल विशेषज्ञ भीम सिंह रावत के अनुसार, डीजेबी की जल आपूर्ति लाइन में रिसाव के कारण झील के कुछ हिस्से सूख गए, जो बड़े पैमाने पर मछलियों की मौत का कारण हो सकता है। यमुना एक्टिविस्ट ने क्या कहा यमुना कार्यकर्ता और 'साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपल' के सदस्य रावत ने कहा, ‘‘हाल ही में झील की जल आपूर्ति पाइपलाइन में रिसाव हुआ, जिसके कारण झील का जलस्तर काफी कम हो गया है। रिसाव कब हुआ, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। अब तक झील के कुछ हिस्से पूरी तरह सूख चुके हैं। इसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर मछलियों की मौत हुई है।’’

534 सीएचसी को मिलेगा स्पेशियलिटी अस्पताल का दर्जा, राज्य स्वास्थ्य समिति ने जारी किया निर्देश

 समस्तीपुर सात निश्चय- 3 अंतर्गत सुलभ स्वास्थ्य, सुरक्षित जीवन के तहत राज्य के 36 जिला अस्पतालों को सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और 534 प्रखंड सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) को स्पेशियलिटी अस्पताल के रूप में विकसित किया जाएगा। राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पांडेय ने इस संबंध में पत्र जारी किया है। स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई देने के लिए राज्य सरकार ने एक व्यापक और दूरगामी कार्ययोजना तैयार की है। योजना का मुख्य उद्देश्य आम लोगों को गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज के लिए बड़े शहरों या निजी अस्पतालों पर निर्भरता से राहत दिलाना है। इन अस्पतालों में हार्मोन रोग, तंत्रिका रोग, हृदय रोग, मूत्र रोग और गुर्दा रोग से संबंधित विशेष चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। पत्र के बाद समस्तीपुर जिले में तैयारी को लेकर प्रक्रिया शुरू हो गई है। रिपोर्ट के आधार पर राज्यभर में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की कार्ययोजना तैयार की जाएगी, ताकि लोगों को बड़े शहरों पर निर्भर हुए बिना अपने जिले में ही बेहतर इलाज मिल सके। सिविल सर्जन डॉ. राजीव कुमार ने बताया कि राज्य स्तर से पत्र जारी किया गया है। इस दिशा में रिपोर्ट देने को लेकर प्रक्रिया चल रही है। रिपोर्टिंग के लिए जारी किया गया दिशा-निर्देश राज्य स्वास्थ्य समिति ने दो अलग-अलग प्रारूप जिलों को भेजे हैं। प्रखंड स्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए जानकारी में आवश्यक आधारभूत सुविधाएं, उपलब्ध चिकित्सक, बेड, भवन, उपकरण, जांच सुविधा और जनसंख्या कवरेज शामिल है। इसमें विशेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या, आपरेशन थिएटर, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, पैथोलाजी, आक्सीजन, एंबुलेंस और दवा भंडारण जैसी सुविधाओं का ब्योरा देना अनिवार्य है। जिला अस्पतालों के लिए सुपर स्पेशियलिटी स्तर पर विशेषज्ञ चिकित्सक जैसे मेडिसिन, सर्जरी, स्त्री रोग, शिशु रोग, फिजियोथेरेपिस्ट, निश्चेतक, नेत्र रोग, हड्डी रोग, आंख-कान-गला रोग, हृदय रोग विशेषज्ञ और नेफ्रोलाजिस्ट की संख्या बताना आवश्यक है। इसके अलावा ब्लड बैंक, आईसीयू, एनआईसीयू, पीकू, ट्रामा सेंटर, माड्यूलर आपरेशन थिएटर, आधुनिक जांच मशीनें और बेड क्षमता का विवरण भी शामिल करना होगा। बेहतर इलाज उपलब्ध कराने की योजना यह पहल वर्ष 2025-30 के दौरान विकासात्मक और लोक कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और अनुश्रवण को मजबूत करने की दृष्टि से की जा रही है। राज्यभर में रिपोर्ट के आधार पर स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने और आम जनता को अपने जिले में ही बेहतर इलाज उपलब्ध कराने की योजना तैयार की जाएगी।  

नायब सरकार की नई पहल, DSR तकनीक अपनाने वाले किसानों को आर्थिक प्रोत्साहन

करनाल. कृषि उप निदेशक डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि लगातार गिरते हुए भू-जल स्तर को सुधारने के लिए विभाग की तरफ से जिला के किसानों से डीएसआर विधि से धान की बिजाई करने की अपील की गई है। विभाग द्वारा धान की सीधी बिजाई अपनाने हेतु किसानों को प्रेरित करने के लिए काफी व्यापक योजना बनाई गई है। विभाग द्वारा जिला में धान की सीधी बिजाई पर 30 हजार एकड़ का लक्ष्य रखा गया है जिसमें प्रति एकड़ 4500 रुपये अनुदान के तौर पर धान की सीधी बिजाई अपनाने वाले किसानों के खाते में डी.बी.टी. के माध्यम से दी जायेगी। किसान धान की सीधी बिजाई पर अनुदान हेतु मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर 15 जून तक अपना पंजीकरण करवा सकते है। इस योजना के अतिरिक्त डीएसआर मशीन भी इच्छुक किसानों को दिए जाने की योजना है। मशीन के कुल मूल्य का 50 प्रतिशत या 40 हजार रुपये है जो भी कम हो प्रति मशीन पर अनुदान के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए है। धान की सीधी बिजाई मशीन पर अनुदान के लिए किसान ट्रैक्टर की वैध आरसी के साथ मेरी फसल मेरा ब्यौरा, आधार कार्ड, परिवार पहचान पत्र, बैंक खाता संख्या इत्यादि जानकारी को साथ लेकर विभाग के पोर्टल पर आवेदन दे सकते है।

भीषण गर्मी के बीच झारखंड सरकार सख्त, सार्वजनिक जगहों पर मुफ्त पानी की व्यवस्था अनिवार्य

 रांची झारखंड में भीषण गर्मी और लू (हीटवेव) के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों सहित पंचायत प्रतिनिधियों को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया है. मुख्यमंत्री ने जनहित को सर्वोपरि बताते हुए साफ किया है कि इस संकट की घड़ी में प्रशासन पूरी संवेदनशीलता, तत्परता और मानवीय दृष्टिकोण के साथ काम करें, ताकि राज्य के किसी भी नागरिक को पानी की किल्लत का सामना न करना पड़े. सार्वजनिक जगहों पर मुफ्त पानी की व्यवस्था का निर्देश मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के सभी उपायुक्तों (DC), पुलिस अधीक्षकों (SP), थाना प्रभारियों, अंचलाधिकारियों (CO), प्रखंड विकास पदाधिकारियों (BDO) और पंचायत प्रतिनिधियों को कड़ा निर्देश जारी किया है. इसके तहत सभी सरकारी कार्यालयों के बाहर और प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर आम जनता और राहगीरों के लिए पेयजल (पीने के पानी) की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है. मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया है कि पानी की व्यवस्था वाली जगहों पर स्पष्ट सूचना (साइनबोर्ड) भी प्रदर्शित की जाए, ताकि राहगीरों को इसकी जानकारी आसानी से मिल सके और उन्हें भीषण गर्मी में राहत मिले. जल संकट वाले इलाकों में तुरंत चापाकल मरम्मत के आदेश झारखंड में गहराते जल संकट पर काबू पाने के लिए मुख्यमंत्री ने सभी जिला उपायुक्तों को सीधी जिम्मेदारी सौंपी है. उन्होंने आदेश दिया है कि जहां कहीं भी पानी की किल्लत या संकट की स्थिति उत्पन्न हो रही है, वहां बिना किसी देरी के तत्काल टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए. इसके साथ ही गांवों और शहरों में खराब पड़े चापाकलों की तुरंत मरम्मत कराने और अन्य वैकल्पिक जल स्रोतों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं. मुख्यमंत्री ने कहा- ‘पानी की कमी न हो सोशल मीडिया पर जारी अपने इस महत्वपूर्ण निर्देश में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रशासनिक संवेदनशीलता पर जोर दिया है. उन्होंने कहा कि झारखंड के किसी भी गांव, टोला या मोहल्ले में पेयजल की कमी के कारण आम लोगों को परेशानी नहीं होनी चाहिए और इसे सुनिश्चित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस भीषण गर्मी के दौर में आम जनता के हितों की रक्षा करना और उन्हें मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना ही सरकार और प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है.

दर्दनाक हादसा! जालंधर में मकान गिरा, एक मजदूर की जान गई; 3 लोग मलबे से निकाले गए

जालंधर. जालंधर के बस्ती शेख स्थित मोहल्ला चाय आम में शनिवार को दर्दनाक हादसा हो गया। इलाके में स्थित एक पुराने और जर्जर मकान की छत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के समय मकान के अंदर कई लोग मौजूद थे। छत गिरते ही इलाके में जोरदार आवाज सुनाई दी और लोगों में अफरा-तफरी मच गई। हादसे में करीब 50 वर्षीय मजदूर रावत की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मकान काफी समय से खस्ता हालत में था। दीवारों और छत में पहले से दरारें दिखाई दे रही थीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मकान की हालत को लेकर पहले भी चिंता जताई गई थी, लेकिन समय रहते इसकी मरम्मत नहीं करवाई गई। शनिवार को अचानक छत गिरने से अंदर मौजूद लोग मलबे के नीचे दब गए। आसपास के लोगो ंने राहत कार्य शुरू किया हादसे की सूचना मिलते ही आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू किया। लोगों ने अपने स्तर पर मलबा हटाकर दबे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया। इसके बाद पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची टीमों ने घायलों और मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया। डाक्टरों ने गंभीर रूप से घायल रावत को मृत घोषित कर दिया। वहीं हादसे में घायल हुए तीन अन्य लोगों का उपचार अस्पताल में किया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई। पुराने मकानों की जांच की मांग उठी घटना के बाद इलाके में शोक और दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पुराने और जर्जर मकानों की समय-समय पर जांच करवाई जाए ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके। लोगों का कहना है कि कई पुराने मकान अब भी गिरने की स्थिति में हैं, जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। सूचना मिलने पर थाना पांच की पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया है। प्रशासन की ओर से भी इलाके में पुराने और जर्जर भवनों का सर्वे करवाने की बात कही जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे भवनों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

बाइक पर सवार होकर नक्सलियों के गढ़ रहे गांवों में पहुंचे कलेक्टर-सीईओ

रायपुर. बस्तर के सुदूर वनांचलों से डर और उपेक्षा का अंधेरा अब छंटने लगा है, और इसकी गवाह बनी सुकमा की वो तस्वीरें जहां जिले के मुखिया खुद दुर्गम रास्तों की परवाह किए बिना जनता के द्वार पहुंचे रहे हैं। कलेक्टर अमित कुमार और जिला सीईओ मुकुन्द ठाकुर ने कोंटा विकासखंड के धुर नक्सल प्रभावित रहे और पहुंचविहीन गांवों भेज्जी, मैलापुर, दंतेशपुरम, बुर्कलंका, गछनपल्ली, बोदराजपदर और डब्बाकोंटा का ऐतिहासिक दौरा किया। सालों से मुख्यधारा से कटे इन गांवों के उबड़-खाबड़ और पथरीले रास्तों पर जब अधिकारियों का काफिला मोटरसाइकिल पर सवार होकर निकला, तो यह सिर्फ एक निरीक्षण नहीं, बल्कि ग्रामीणों के मन में प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति अटूट विश्वास जगाने का सफर बन गया। आजादी के बाद पहली बार किसी कलेक्टर को अपने बीच पाकर ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे। चौपाल पर संवाद और 'सुशासन परिसर' की सराहना अधिकारियों ने बुर्कलंका में बन रहे 'सुशासन परिसर' का बारीकी से निरीक्षण किया। कलेक्टर श्री अमित कुमार ने दुर्गम घने जंगलों के बीच बसे इस गांव में बने परिसर की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए इसे प्रेरणादायी बताया। इस बहुद्देशीय परिसर में एक ही बाउंड्रीवाल के भीतर स्कूल, आंगनबाड़ी, पंचायत भवन, पीडीएस सेंटर और सामुदायिक भवन को समेटा गया है, जो ग्रामीणों को एक ही छत के नीचे सारी मूलभूत सुविधाएं देने का बेहतरीन मॉडल है। सुशासन शिविर के दौरान मैलासुर पंचायत में अधिकारियों ने जमीन पर बैठकर सरपंच, पटेल, मुखिया और ग्रामीणों से सीधा संवाद किया, सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत जानी और निर्माणाधीन कार्यों को समय पर पूरा करने का संकल्प दोहराया। स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी सौगातें प्रशासन का सबसे बड़ा फोकस ग्रामीणों की सेहत और बच्चों की शिक्षा पर रहा। कलेक्टर ने संवेदनशील पहल करते हुए भेज्जी पंचायत में उप स्वास्थ्य केंद्र की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई, जबकि मैलासुर में इसके लिए तत्काल जगह चिन्हित करने के निर्देश दिए। गछनपाल्ली में स्वास्थ्य कर्मियों के रहने के लिए स्टाफ क्वार्टर को मंजूरी दी गई, ताकि चौबीसों घंटे इलाज की सुविधा मिल सके। शिक्षा की लौ को मजबूत करने के लिए दंतेषपुरम में निर्माणाधीन प्राथमिक शाला भवन को बारिश के मौसम से पहले हर हाल में पूरा करने का निर्देश शिक्षा विभाग को दिया गया, साथ ही अंदरूनी इलाकों के स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर सख्त रुख अपनाया गया। पेयजल, आजीविका और कृषि को मिला नया जीवन गांवों में खुशहाली और आत्मनिर्भरता लाने के लिए कलेक्टर ने आजीविका के नए द्वार खोले। मैलासुर और दंतेषपुरम के ग्रामीणों की मांग पर मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए तालाबों का चिन्हाँकन किया गया और ग्रामीणों को मछली बीज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। पानी की किल्लत को दूर करने के लिए दंतेषपुरम में एक नए डैम और तालाब निर्माण की बड़ी स्वीकृति दी गई, साथ ही क्रेड़ा विभाग को पानी टंकी बनाने के निर्देश दिए गए। मैलासुर और बोदराजपदर में पेयजल संकट को खत्म करने के लिए नए हैंडपंप और बोरिंग की तत्काल मंजूरी दी गई। पीएचई विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि जिन गांवों में जल जीवन मिशन का काम पूरा हो चुका है, वहां बिना देरी किए तत्काल जलापूर्ति शुरू की जाए। जहाँ काम पूरा नहीं हुआ है वहां तेजी से कार्य पूरा कर ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाये। कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि दूरस्थ और पहुंचविहीन गांवों में 'सुशासन परिसर' और बुनियादी सुविधाओं का निर्माण वाकई प्रेरणादायी है। कलेक्टर ने कहा कि हमारा मुख्य उद्देश्य नक्सलवाद के प्रभाव से मुक्त हो चुके इन अंतिम छोर के गांवों तक विकास की रफ्तार पहुंचाना है। बारिश से पहले स्कूल, अस्पताल, सड़क, पुल-पुलिया और जल जीवन मिशन से जुड़े सभी निर्माण कार्यों को पूरी गुणवत्ता के साथ समयसीमा में पूरा किया जाएगा, ताकि हर ग्रामीण तक शासन की योजनाओं का सीधा लाभ पहुंच सके। सड़कों से जुड़ेंगे दिल और रास्ते, विकास की रफ्तार होगी तेज बस्तर के विकास में सबसे बड़ी बाधा रहे पहुंचविहीन रास्तों को अब पक्की सड़कों की मजबूती मिलने जा रही है। कलेक्टर ने बोदराजपदर, मैलासुर, दंतेशपुरम, गछनपल्ली और बुर्कलंका को मुख्य सड़कों से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजेएसवाई) का तत्काल प्रस्ताव तैयार कर आवश्यक कार्रवाई करने के कड़े निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए। आरईएस विभाग द्वारा डब्बाकोंटा में निर्माणाधीन आश्रम का भी मुआयना किया गया। मोटर साइकिल के पहियों से शुरू हुआ प्रशासन का यह सफर सुकमा के इन दूरस्थ अंचलों में विकास की नई इबारत लिख गया है, जो यह साबित करता है कि नक्सलवाद के खात्मे के बाद अब बस्तर की पहचान बंदूक से नहीं, बल्कि सुशासन और समृद्धि से हो रही है। केलक्टर के निरीक्षण के दौरान एसडीएम कोंटा सुभाष शुक्ला, जनपद सीईओ सुमित ध्रुव, एडिशनल एसपी मनोज तिर्की, कार्यपालन अभियंता पीएमजेएसवाई रविंद्र ताती, महिला एवं बाल विकास अधिकारी रितिश टंडन, बीएमओ डॉ. दीपेश चंद्राकर सहित अन्य जिलाधिकारी मौके पर उपस्थित थे।

गैंगस्टर नेटवर्क में टर्किश हथियारों की बढ़ती पैठ, जिगाना और PX-5 पिस्टल पर एजेंसियों की नजर

कुरुक्षेत्र  गांव रतनगढ़ के पास एसटीएफ द्वारा मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किए गए दोनों शूटरों से बरामद हथियार एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय हथियार नेटवर्क की ओर गंभीर संकेत दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि आरोपितों के कब्जे से पीएक्स-5 टर्किश पिस्टल बरामद की गई हैं। पिछले कुछ समय से भारत में सक्रिय गैंगस्टर नेटवर्क में टर्किश हथियारों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। जानकारी के अनुसार, जोराकी, रेटे और जिगाना जैसी टर्किश पिस्टल्स अब अलग-अलग राज्यों में अपराधियों के बीच लगातार देखी जा रही हैं। हथियारों के प्रवेश के लिए एक संगठित सप्लाई चेन सक्रिय सूत्रों के अनुसार, ये टर्किश पिस्टल्स मूल रूप से तुर्किये में स्पोर्ट्स शूटिंग और सेल्फ-डिफेंस के लिए वैध रूप से तैयार की जाती हैं, लेकिन बाद में इनका बड़ा हिस्सा अवैध तस्करी नेटवर्क के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंच जाता है। यहां से यह हथियार यूरोप, पश्चिम एशिया और बाल्कन देशों के रास्ते होते हुए दक्षिण एशिया तक लाए जाते हैं। भारत में इन हथियारों के प्रवेश के लिए एक संगठित सप्लाई चेन सक्रिय है, जिसमें हथियारों को छोटे-छोटे खेपों में अलग-अलग देशों के डीलरों तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद इन्हें सीमा पार तस्करी, कोरियर नेटवर्क, फर्जी बिलिंग और छिपे हुए लाजिस्टिक चैनलों के जरिए भारत लाया जाता है। कई मामलों में इन्हें पार्ट्स में अलग-अलग भेजकर बाद में असेंबल करने की भी बात सामने आई है। गैंगस्टरों की पसंद बनी टर्की मेड जिगाना पिस्टल जिगाना पिस्टल, जिसे तुर्किये की ड्यूरेबल और हाई-रिलायबिलिटी सेमी-आटोमैटिक पिस्टल माना जाता है और हाल के वर्षों में गैंगस्टर नेटवर्क में खास तौर पर चर्चित रही है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इन टर्किश हथियारों का बढ़ता उपयोग संगठित अपराध के बदलते स्वरूप और अंतरराष्ट्रीय हथियार सप्लाई नेटवर्क की सक्रियता को दर्शाता है। सुरक्षा एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने में जुटी हैं कि आखिर ये आधुनिक टर्किश हथियार किन अंतरराष्ट्रीय रास्तों से भारत में प्रवेश कर रहे हैं और किन स्थानीय संपर्कों के जरिए गैंगस्टरों तक पहुंच रहे हैं। टीटी-30 और ग्लाक इससे पहले थी मनपसंद विदेशी हथियारों के मामले में इससे पहले गैंगस्टरों के बीच टीटी-30 और ग्लाक पिस्टल सबसे ज्यादा लोकप्रिय मानी जाती थीं। लंबे समय तक रूस के टीटी-30 (स्टार-30 के नाम से भी जाना जाता) के चाइनीज माडल भारत के गैंग नेटवर्क में खूब इस्तेमाल हुए। वहीं पिछले कुछ सालों से आस्ट्रिया मेड ग्लाक गैंगस्टरों के बीच काफी लोकप्रिय थी। हालांकि अब पुराने टीटी और ग्लाक की जगह अब टर्की मेड पिस्टल्स जैसे जिगाना और अन्य हाई-एंड माडल तेजी से ले रहे हैं।

रामपुर कोर्ट सख्त, आजम खान की सजा 3 साल बढ़ी; अब्दुल्ला आजम पर जुर्माना भी बढ़ाया

रामपुर सपा नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान को अब फर्जी पैन कार्ड केस में 10-10 साल की सजा काटनी होगी। रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने शनिवार को दोनों की सजा को तीन-तीन साल के लिए बढ़ा दिया। पहले इस मामले में आजम खान और अब्दुल्ला आजम खान को 7-7 साल की सजा मिली थी। मामले में दिसंबर 2025 में उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से सजा बढ़ाने के लिए अपील की गई थी। अपने फैसले में अदालत ने दोनों के ऊपर 5-5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की रकम पहले 50-50 हजार रुपये थी। आजम खान और अब्दुल्ला आजम खान फिलहाल रामपुर की ही जेल में बंद हैं। दो पैन मामले में आजम की सजा 7 से 10 साल हुई, अब्दुल्ला पर जुर्माना बढ़ाया सपा के राष्ट्रीय महासचिव मोहम्मद आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को 17 नवंबर को अब्दुल्ला आजम के दो पैनकार्ड मामले में एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट से सात साल की सजा हुई थी। जिससे असंतुष्ट अभियोजन पक्ष ने एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट में अपील दाखिल की थी। जिस पर सुनवाई हुई और शनिवार को सरकार की अपील को स्वीकार करते हुए सजा में बढ़ोतरी की है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में सपा नेता आजम खां की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। विवादित बयान मामले में आजम को 2 साल की सजा आपको बता दें इससे पहले ये तनखइया हैं…इनसे मत डरियो…इंशा अल्लाह इनसे जूते साफ कराऊंगा…लोकसभा चुनाव के दौरान आजम खान के इस विवादित बयान पर एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने आजम खां को दोषी करार देते हुए दो साल की सजा से दंडित किया था। अदालत ने 20 हजार रुपयों का जुर्माना भी लगाया है। मालूम हो कि 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में आजम खान समाजवादी पार्टी से प्रत्याशी थे। इस दौरान भोट थाना क्षेत्र में आयोजित रोड शो के दौरान आजम का एक विवादित बयान का वीडियो वायरल हुआ था। तत्कालीन रामपुर के डीएम को लेकर विवादित बयान दिया था जिसमें आजम खान तत्कालीन जिलाधिकारी पर निशाना साधते हुए कहते सुनाई दे रहे थे कि ये तनखइया हैं, इनसे मत डरियो, उन्हीं के साथ गठबंधन है जो जूते साफ करा लेती हैं, इंशा अल्लाह चुनाव बाद इनसे जूते साफ कराऊंगा….। आजम के इस वीडियो पर दिल्ली में चुनाव आयोग ने संज्ञान लिया और राज्य निर्वाचन आयोग से रिपोर्ट तलब की थी। राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारी से रिपोर्ट मांगते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए थे, जिस पर तत्कालीन जिलाधिकारी एवं वर्तमान में कमिश्नर मुरादाबाद आन्जनेय कुमार सिंह के आदेश पर तत्कालीन एसडीएम टांडा एवं चमरौआ विस क्षेत्र के एआरओ घनश्याम त्रिपाठी की ओर से भोट थाने में केस दर्ज कराया था। 12 जून को झूठे शपथ पत्र मामले में सुनवाई आजम खान के बेटे और पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम से जुड़े झूठे शपथ पत्र मामले की सुनवाई 12 जून को होगी। रामपुर की अदालत ने इस मामले में प्रशासन से अब्दुल्ला आजम की उम्र से संबंधित दस्तावेज तलब किए हैं। अभियोजन पक्ष की दलील अभियोजन पक्ष की तरफ से पैरवी कर रहीं अधिवक्ता सीमा राणा ने कोर्ट के फैसले को न्याय की जीत बताया. उन्होंने कोर्ट में दलील दी कि फर्जीवाड़ा और संवैधानिक दस्तावेजों में हेरफेर एक गंभीर मामला है. इसमें कड़ी सजा की जरूरत है. कोर्ट ने सीमा राणा की दलील को स्वीकार करते हुए, आजम खान की सजा को तीन साल बढ़ा दिया और दोनों पर भारी जुर्माना भी लगाया।  क्या है मामला? बीजेपी नेता आकाश सक्सेना की तरफ से शिकायत की गई थी की. आकाश सक्सेना ने आरोप लगाया था कि अब्दुल्ला आजम ने अपने पिता के राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए दो अलग-अलग जन्म तिथि का पैन कार्ड बनवाया. इस फर्जीवाड़े के तहत आजम खान ने अब्दुल्ला का पासपोर्ट भी बनवाया और यूपी की स्वार सीट से चुनाव भी लड़वाया. इस मामले में हाईकोर्ट ने अब्दुल्ला आजम का निर्वाचन रद्द कर दिया था। 

रांची में साइंस, एआई और रोबोटिक्स पर फोकस, राज्य में शुरू होंगी तीन नई योजनाएं

रांची  राज्य में रोबोटिक्स, इंटरनेट आफ थिंग्स, ब्लाक चेन, बायोटेक्नोलाजी, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) को बढ़ावा देने के लिए इस वर्ष तीन बड़ी योजनाएं शुरू होंगी। इनमें रोबोटिक्स फेस्टिवल तथा साइंस एंड टेक्नोलाजी क्विज के आयोजन से लेकर राष्ट्रीय गणित दिवस तथा राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित करने की योजना सम्मिलित हैं। इन तीनों योजनाओं के संचालन की जिम्मेदारी झारखंड काउंसिल आफ साइंस टेक्नेालाजी एंड इनोवेशन (जेसीएसटीआई) को दी गई है। कैबिनेट की स्वीकृति के बाद उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने इन तीनों योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर संकल्प एवं दिशा-निर्देश जारी कर दिया है। साइंस एंड टेक्नोलाजी क्विज का आयोजन तीन श्रेणियों के विद्यार्थियों के बीच होगा। पहली श्रेणी में आठवीं से 10वीं कक्षा के स्कूली विद्यार्थी, दूसरी श्रेणी में 11वीं एवं 12वीं के विद्यार्थी के साथ आइटीआइ के विद्यार्थी तथा तीसरी श्रेणी के क्विज में पालीटेक्निक संस्थानों के विद्यार्थी सम्मिलित होंगे। ऑनलाइन जीतें हजारों के पुरस्कार पहले चरण में ऑनलाइन क्विज प्रतियोगिता होगी, जबकि दूसरे एवं अंतिम चरण में में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता लिखित होगी। अंतिम चरण में प्रथम पुरस्कार 50 हजार रुपये, द्वितीय पुरस्कार 30 हजार रुपये तथा तृतीय पुरस्कार 20 हजार रुपये दिए जाएंगे। जिला स्तर पर प्रोत्साहन पुरस्कार के रूप में पांच हजार रुपये दिए जाएंगे। इसी तरह, प्रत्येक वर्ष 22 दिसंबर को राष्ट्रीय गणित दिवस तथा 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के आयोजन के लिए ''सर जैनेंद्र चंद्र घोष स्कीम फार साइंस एंड टेनोलाजी इंपारटेंस योजना'' शुरू होगी। 24 अंगीभूत कालेजों, 15 तकनीकी संस्थानों तथा 34 पालीटेक्निक में इन दोनों दिवसों के आयोजन के लिए एक-एक लाख रुपये सभी चयनित संस्थानों को अनुदान के रूप में दिए जाएंगे। सबसे बड़ी बात यह है कि इस तरह के कार्यक्रमों के आयोजन के लिए बाद में केंद्र से भी अनुदान मिल सकता है। इसी तरह, राज्य स्तर पर पहली बार रोबोटिक्स फेस्टिवल भी आयोजित किया जाएगा। इसमें भी पुरस्कार से लेकर तकनीकी सहायता के प्रविधान योजना में किए गए हैं। तीनों योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए निदेशक, तकनीकी शिक्षा की अध्यक्षता में कमेटी गठित की जाएगी। किस योजना पर कितनी राशि होगी खर्च     साइंस एंड टेक्नोलाजी क्विज : 30 लाख     राष्ट्रीय गणित दिवस तथा राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का आयोजन : 3.21 करोड़     रोबोटिक्स फेस्टिवल : 1.54 करोड़