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ऐतिहासिक गुरुद्वारे को नुकसान पहुंचाने के आरोप पर SGPC सख्त, केंद्र से उठाई कार्रवाई की मांग

अमृतसर  पाकिस्तान के फरुखाबाद स्थित करीब 125 वर्ष पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा के एक हिस्से को बुलडोजर से गिराए जाने के मामले में नया खुलासा हुआ है। जानकारी के अनुसार, जिस स्थानीय कारोबारी ने गुरुद्वारे के ढांचे को ध्वस्त कराया, उसने संबंधित सरकारी विभागों से आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) अथवा अन्य वैधानिक अनुमति प्राप्त नहीं की थी। इस जानकारी के सामने आने के बाद सिख संगठनों में घटना को लेकर नाराजगी और बढ़ गई है। घटना के बाद शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने भारत सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। कमेटी ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर पाकिस्तान सरकार के समक्ष इस मुद्दे को प्रभावी ढंग से उठाने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित कराने की मांग की है। साथ ही दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई किए जाने की भी अपील की गई है। सिख समुदाय की भावनाओं को पहुंची ठेस एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व रखने वाले गुरुद्वारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं विश्वभर के सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाती हैं। उनका कहना है कि यदि किसी भी ऐतिहासिक धार्मिक स्थल से जुड़ा कोई निर्माण कार्य या बदलाव किया जाना हो, तो उसे निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही किया जाना चाहिए। प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्थानीय कारोबारी ने बिना आवश्यक सरकारी स्वीकृति के बुलडोजर चलवाकर गुरुद्वारे के ऐतिहासिक ढांचे के एक हिस्से को गिरा दिया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय सिख समुदाय और विभिन्न धार्मिक संगठनों ने इसका विरोध जताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई। पाकिस्तान सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग इस मामले पर भारत के विदेश मंत्रालय ने भी गंभीर चिंता व्यक्त की है। मंत्रालय ने पाकिस्तान सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने और क्षतिग्रस्त ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा को उसके मूल स्वरूप में पुनर्स्थापित करने की मांग की है। इसके साथ ही पाकिस्तान में स्थित सभी धार्मिक स्थलों, विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदायों के पूजा स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। गौरतलब है कि पाकिस्तान में स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारों और अन्य धार्मिक स्थलों के संरक्षण का मुद्दा समय-समय पर उठता रहा है। ऐसे में इस घटना ने एक बार फिर धार्मिक विरासत की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि पाकिस्तान सरकार इस मामले में क्या कार्रवाई करती है और जांच के बाद कौन से तथ्य सामने आते हैं।

धार्मिक परंपराओं में हिस्सा नहीं लेने पर ग्रामसभा का फैसला, धर्मांतरण कर चुके आदिवासी परिवार को गांव छोड़ने का निर्देश

नारायणपुर  छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के एक गांव में धर्म परिवर्तन के विरोध में ग्रामीणों ने एक आदिवासी परिवार को गांव से बाहर कर दिया। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस ने दखल दिया। जिसके बाद ग्रामीणों और धर्म बदलने वाले आदिवासी परिवार के बीच समझौता हुआ। समझौते के अनुसार, आदिवासी परिवार को अपने मूल धर्म में लौटना होगा। पुलिस के अनुसार, परिवार के सदस्यों द्वारा अपनी मूल आदिवासी आस्था में लौटने पर सहमति जताने के बाद उन्हें दोबारा गांव में रहने की अनुमति दे दी गई। पुलिस के मुताबिक यह घटना जिले के खड़कागांव गांव की है। ईसाई धर्म अपना लिया था ग्रामीणों के अनुसार, आदिवासी समुदाय के सदस्य मंटू दुग्गा ने ईसाई धर्म अपना लिया था, जबकि उनके पुत्र मोहन दुग्गा कबीर पंथ का पालन कर रहे थे। ग्रामीणों ने दावा किया कि परिवार के प्रति कोई व्यक्तिगत दुर्भावना नहीं थी, लेकिन उन्होंने गांव की पारंपरिक आदिवासी धार्मिक परंपराओं में भाग लेना बंद कर दिया था। गांव में 12 लोग बदल चुके हैं धर्म ग्रामीण ने कहा, ‘‘हमने उनसे कई बार अपनी परंपराओं में लौटने का अनुरोध किया, लेकिन वे तैयार नहीं हुए। वर्षों तक समझाने के बाद ग्रामसभा में इस विषय पर चर्चा हुई और परिवार को गांव से बाहर करने का निर्णय लिया गया।’’ दावा किया कि गांव के करीब 12 परिवार अन्य धर्मों को अपना चुके हैं, लेकिन केवल दुग्गा परिवार को ही गांव से निकाला गया। विवाद का समाधान हो गया है और गांव में स्थिति शांतिपूर्ण है। परिवार ने अपनी मूल आदिवासी आस्था में लौटने पर सहमति जताई, जिसके बाद ग्रामीणों ने उन्हें गांव में रहने की अनुमति दे दी। सुशील नायक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीणों ने उपलब्ध कराया था मकान एक अन्य ग्रामीण राजमन कुमेटी ने आरोप लगाया कि परिवार को गांव में रहने के लिए जमीन और मकान उपलब्ध कराया गया था, लेकिन मूल आस्था में लौटने के लिए किए गए बार-बार के अनुरोध को उन्होंने स्वीकार नहीं किया। उन्होंने बताया कि परिवार का सामान घर से बाहर निकाल दिया गया था, हालांकि मकान को क्षति नहीं पहुंचाई गई।     ईसाई धर्म अपनाने पर ग्रामीणों ने परिवार को किया गांव से बाहर     पुलिस के दखल के बाद दोनों पक्षों के बीच हुआ समझौता     आदिवासी परिवार ने मूल धर्म में वापसी की कही है बात     धार्मिक परंपराओं में परिवार ने भाग लेना कर दिया था बंद कबीर पंथ का पालन करते हैं ग्रामीण उन्हें गांव में रहने से इसलिए रोका जा रहा है क्योंकि वह कबीर पंथ का पालन करते हैं, जो 15वीं शताब्दी के संत-कवि कबीर की शिक्षाओं पर आधारित धार्मिक परंपरा है। इस घटना की सूचना मिलने पर पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारी गांव पहुंचे और ग्रामीणों तथा परिवार के सदस्यों से बातचीत की। ग्रामीणों ने बताया कि परिवार ने पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए और समुदाय को आश्वासन दिया कि वह आगे भी आदिवासी रीति-रिवाजों और परंपराओं का पालन करेगा।  

दैनिक वेतनभोगियों को राहत, हाईकोर्ट ने ग्रेच्युटी का अधिकार माना; राज्य सरकार को झटका

बिलासपुर  छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय से दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के पक्ष में एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला आया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि दैनिक वेतन भोगी के रूप में दी गई सेवाओं के लिए भी कर्मचारी ग्रेच्युटी पाने के हकदार हैं। जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की एकल पीठ ने इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा दायर की गई याचिकाओं के पूरे बैच को खारिज कर दिया है। विवाद जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ के विभिन्न संभागों में कार्यरत रहे कर्मचारियों सदानंद मानिकपुरी, बाबूलाल साहू, नैन सिंह क्षत्रिय, शैलेंद्र तिवारी व अन्य से जुड़ा है। इन कर्मचारियों ने दैनिक वेतन भोगी के रूप में लंबी सेवाएं दी थीं, जिसके बाद उन्हें नियमित किया गया था। ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 के तहत सक्षम प्राधिकारी और अपीलीय प्राधिकारी ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें दैनिक वेतन भोगी अवधि की भी ग्रेच्युटी देने का आदेश दिया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं। राज्य सरकार का पक्ष: शासकीय अधिवक्ता विनय पांडे ने तर्क दिया कि इसी तरह के एक मामले धनसाई साहू बनाम छत्तीसगढ़ राज्य में सुप्रीम कोर्ट ने इस कानूनी बिंदु को तीन जजों की बड़ी बेंच को रेफर किया है। चूंकि मामला देश की सर्वोच्च अदालत के समक्ष लंबित है, इसलिए हाई कोर्ट को इस मामले की सुनवाई तब तक टाल देनी चाहिए। कर्मचारियों की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता विनोद देशमुख ने सुप्रीम कोर्ट के ही ''''नेत्राम साहू बनाम छत्तीसगढ़ राज्य 2018 फैसले का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही यह तय कर चुका है कि कल्याणकारी राज्य में वर्षों तक कम वेतन पर काम लेने के बाद कर्मचारियों को ग्रेच्युटी से वंचित करना न्याय का मज़ाक होगा। हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण निष्कर्ष हाई कोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष को सही ठहराते हुए राज्य सरकार की दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में मुख्य रूप से दो बातें साफ कीं। सुप्रीम कोर्ट के अशोक सदारंगानी 2012 मामले का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि सिर्फ इस आधार पर मामले को अनिश्चितकाल के लिए नहीं टाला जा सकता कि कोई संदर्भ बड़ी बेंच के पास लंबित है। जब तक कोई बड़ी बेंच पुराना फैसला बदल नहीं देती, तब तक पुराना कानून ही लागू रहेगा। कोर्ट ने पूर्व के फैसलों को दोहराते हुए कहा कि यदि किसी कर्मचारी ने 22-25 साल तक दैनिक वेतन भोगी के रूप में निरंतर सेवा दी है और बाद में उसे नियमित किया गया है, तो विभाग को स्वेच्छा से उसे ग्रेच्युटी का भुगतान करना चाहिए, न कि उसे अदालतों के चक्कर काटने पर मजबूर करना चाहिए। भविष्य का रास्ता हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की सभी 9 रिट याचिकाएं खारिज कर दी हैं। हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि भविष्य में सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बेंच द्वारा जो भी अंतिम फैसला आएगा, वह दोनों पक्षों पर बाध्यकारी होगा। यदि भविष्य में स्थिति बदलती है, तो राज्य सरकार के पास नए सिरे से कानूनी विकल्प चुनने की स्वतंत्रता होगी। इस फैसले से प्रदेश के हजारों ऐसे कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है जो अपने सेवाकाल का एक लंबा हिस्सा दैनिक वेतन भोगी के रूप में बिता चुके हैं।

श्रीरामानुज संस्कृत परिसर बनेगा वैदिक अध्ययन और भारतीय दर्शन का प्रमुख केंद्र: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

श्रीरामानुज संस्कृत परिसर वैदिक अध्ययन, भारतीय दर्शन, ज्ञान परम्परा के अध्ययन-अध्यापन और शोध का बनेगा महत्वपूर्ण केंद्र : उप मुख्यमंत्री शुक्ल श्रीरामानुज संस्कृत परिसर में 243 पदों के सृजन का प्रस्ताव शीघ्र करें तैयार भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय के श्रीरामानुज संस्कृत परिसर, लक्ष्मण बाग, रीवा के सशक्तीकरण एवं संस्थागत विकास संबंधी प्रस्तावों की समीक्षा की। बैठक में अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा अनुपम राजन उपस्थित थे। बैठक में श्रीरामानुज संस्कृत परिसर, रीवा में अध्ययन-अध्यापन, शोध, प्रकाशन, परीक्षा, प्रशासनिक एवं विस्तार गतिविधियों के सुचारु संचालन के लिए शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं गैर-शैक्षणिक पदों के सृजन के प्रस्ताव पर चर्चा की गई। परिसर के लिए कुल 243 पदों के सृजन तथा उनकी पूर्ति तीन वर्षों में चरणबद्ध रूप से किए जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसमें 117 शैक्षणिक, 4 प्रशासनिक तथा 122 गैर-शैक्षणिक पद सम्मिलित हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि श्रीरामानुज संस्कृत परिसर संस्कृत, वैदिक अध्ययन, भारतीय दर्शन, प्राचीन शास्त्रों तथा भारतीय ज्ञान परम्परा के अध्ययन-अध्यापन और शोध का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। परिसर में आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध होने से विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध मार्गदर्शन और आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं प्राप्त होंगी। उन्होंने परिसर के संधारण एवं शैक्षणिक गतिविधियों के विस्तार के लिए आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पदों की स्वीकृति से श्रीरामानुज संस्कृत परिसर में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मानकों के अनुरूप शैक्षणिक वातावरण विकसित होगा। साथ ही संस्कृत भाषा, वैदिक ज्ञान, भारतीय दर्शन और पारम्परिक विद्या प्रणालियों के संरक्षण, संवर्धन एवं व्यापक प्रसार को नई गति मिलेगी। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि श्रीरामानुज संस्कृत परिसर, लक्ष्मण बाग, रीवा की स्थापना मध्यप्रदेश शासन द्वारा 5 अक्टूबर 2023 को की गई थी। परिसर में संस्कृत, वैदिक अध्ययन तथा भारतीय शास्त्रों एवं भारतीय ज्ञान परम्परा से संबंधित विषयों में अध्ययन-अध्यापन एवं शोध कार्य संचालित किए जा रहे हैं। वर्तमान में परिसर में शैक्षणिक एवं प्रशासनिक गतिविधियों का संचालन सीमित मानव संसाधनों से किया जा रहा है। परिसर में वेद, वेदान्त दर्शन, व्याकरण, साहित्य, ज्योतिष, संस्कृत, योग, पुराणेतिहास, धर्मशास्त्र, वास्तुशास्त्र, संगीत, मानविकी, पौरोहित्य, हिन्दू अध्ययन, भारतीय ज्ञान परम्परा और शिक्षाशास्त्र सहित विभिन्न विभागों की स्थापना एवं सुदृढ़ीकरण का प्रस्ताव है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने इन विभागों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग मानकों के अनुरूप प्रोफेसर, सह प्राध्यापक एवं सहायक प्राध्यापक के पद सृजित किए जाने के लिए प्रस्ताव शीघ्र तैयार करने के निर्देश दिए।  

पाथरी एनीकट निर्माण कार्य के लिए 3.32 करोड़ रूपए स्वीकृत

पाथरी एनीकट निर्माण कार्य के लिए 3.32 करोड़ रूपए स्वीकृत रायपुर, छत्तीसगढ़ शासन जल संसाधन विभाग द्वारा बस्तर जिले के विकासखण्ड-बकावण्ड की मारकण्डी नदी में ग्राम पाथरी के समीप पाथरी एनीकट निर्माण कार्य के लिए 3 करोड़ 32 लाख 39 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के प्रस्तावित कार्यों के पूर्ण हो जाने पर क्षेत्र में निस्तारी, पेयजल, भू-जल संवर्धन एवं किसानों द्वारा स्वयं के साधन से 50 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ और 30 हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसलों के लिए सिंचाई सुविधा मिलेगी। योजना के निर्माण कार्यों को कराने के लिए मुख्य अभियंता गोदावरी कछार जल संसाधन विभाग जगदलपुर को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।

31 एल्डरमैन की नियुक्ति, 3 जिलों के 8 निकायों में नई जिम्मेदारियां; राजनांदगांव निगम में 8 नाम शामिल

राजनांदगांव राज्य सरकार ने नगरीय निकायों में नामांकित पार्षदों (एल्डरमैन) की आधिकारिक सूची जारी कर दी है। इस घोषणा के तहत तीनों जिलों के 8 निकायों में कुल 31 एल्डरमैन नियुक्त किए गए हैं, जिनमें 11 महिलाएं भी शामिल हैं। राजनांदगांव नगर निगम में कुल 8 एल्डरमैन नियुक्त किए गए हैं, जिनमें युवा चेहरों को प्राथमिकता दी गई है। नवनियुक्त सदस्यों में नागेश यदु, करूणा राजपूत, हर्ष रामटेके, सूर्यकांत श्रीवास, मंजू यादव, भीष्म देवांगन, कृति बोरकर और देवाशीष झा शामिल हैं। राजनांदगांव नगर निगम के अतिरिक्त अन्य नगरीय निकायों में भी एल्डरमैन नियुक्त किए गए हैं। डोंगरगढ़ नगर पालिका में लक्ष्मी नारायण अग्रवाल, जितेंद्र हिरवानी, सविता दरगड़, पूजा नामदेव और लक्ष्मी यादव को जिम्मेदारी मिली है। डोंगरगांव नगर पंचायत में 3 एल्डरमैन नियुक्त डोंगरगांव में गुलशन हिरवानी, दयानंद सेन और राजीव वैष्णव नियुक्त हुए हैं। छुरिया नगर पंचायत में संगीता यादव, गुरप्रीत सिंह भाटिया और नीतीश सिन्हा को एल्डरमैन बनाया गया है। एलबी नगर में राजेंद्र तिवारी, घमोतीन चंद्रवंशी और रेखराम यादव को नियुक्त किया गया है। छुईखदान नगर पंचायत में एल्डरमैन की नियुक्ति जबकि छुईखदान नगर पंचायत में राजू ऊके, किरण गुप्ता और अर्जुन महोबिया को जिम्मेदारी दी गई है। गंडई नगर पंचायत में टेकन देवांगन, राजेश जायसवाल और अशोक देवांगन, और अंबागढ़ चौकी नगर पंचायत में देव नारायण कुंभकार, सैयद अजहरूद्दीन और कुंजलता हरमुख को एल्डरमैन पद पर नियुक्त किया गया है।

CG Judicial Transfer: 17 न्यायिक अधिकारियों का ट्रांसफर, ओमप्रकाश जायसवाल बने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार

रायपुर  छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट प्रशासन ने राज्य की उच्च न्यायिक सेवा संवर्ग में एक बड़ा फेरबदल किया है। हाईकोर्ट रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी आदेश के तहत प्रदेश के 17 उच्च न्यायिक सेवा अधिकारियों का तबादला किया गया है। यह आदेश हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है। ​इस प्रशासनिक फेरबदल में कई महत्वपूर्ण नियुक्तियां की गई हैं। ​महत्वपूर्ण नियुक्तियां: हाईकोर्ट लीगल सर्विस कमेटी के सचिव ओम प्रकाश जायसवाल को हाईकोर्ट में नया रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल बनाया गया है। वहीं, जगदलपुर के प्रथम जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत को जगदलपुर में ही स्पेशल जज एनआईए (NIA) कोर्ट की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ​हाईकोर्ट और अकादमी में बदलाव: बलौदाबाजार के प्रधान जिला न्यायाधीश अब्दुल जाहिद कुरैशी को हाईकोर्ट में रजिस्ट्रार विजलेंस नियुक्त किया गया है। इसके अलावा, बलौदाबाजार के राकेश कुमार वर्मा को छत्तीसगढ़ न्यायिक अकादमी बिलासपुर में एडिशनल डायरेक्टर और रूपनारायण पात्रे को हाईकोर्ट लीगल सर्विस कमेटी का सचिव बनाया गया है। ​जिलों के जिला न्यायाधीश बदले: सूरजपुर की प्रधान जिला न्यायाधीश विनिता वारनेर का तबादला बलौदाबाजार किया गया है, जबकि सूरजपुर परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश थामस एक्का अब सूरजपुर के नए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश होंगे। इसके साथ ही हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार न्यायिक सुमित कपूर को रायपुर का जिला एवं सत्र न्यायाधीश बनाया गया है। ​इस फेरबदल में रायपुर, जगदलपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज और सारंगढ़ सहित कई जिलों के अतिरिक्त व जिला न्यायाधीशों के प्रभार बदले गए हैं, जिससे न्यायिक कामकाज को और अधिक गति मिलने की उम्मीद है।

रेल यात्रियों के लिए बड़ी खबर! बिलासपुर जोन की 5 ट्रेनें कई दिनों तक कैंसिल, सफर से पहले देखें पूरी सूची

बिलासपुर दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल में ट्रैक की मरम्मत और सुरक्षा से जुड़े काम के लिए 3 जुलाई से 17 नवंबर तक हर मंगलवार और शुक्रवार मेगा ब्लॉक रहेगा। इसका असर बिलासपुर जोन से होकर गुजरने वाली कई ट्रेनों पर पड़ेगा। मेगा ब्लॉक के कारण हैदराबाद-रक्सौल, टाटानगर-इतवारी-टाटानगर और बिलासपुर-टाटानगर-बिलासपुर समेत 5 प्रमुख ट्रेनें अलग-अलग तारीखों में 20 से 40 दिन तक रद्द रहेंगी। कुछ ट्रेनें बीच रास्ते से चलाई जाएंगी। वहीं, कुछ का रूट बदला जाएगा और कई ट्रेनें तय समय से देरी से चल सकती हैं। रेलवे के मुताबिक, चक्रधरपुर मंडल के कंसबहाल और धारुआडीही सेक्शन में अप और डाउन लाइन पर ट्रैक की मरम्मत और सुरक्षा का काम किया जाएगा। इसी वजह से मेगा ब्लॉक किया जा रहा है। इसका असर दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे से होकर गुजरने वाली ट्रेनों पर भी पड़ेगा। ऐसे में झारखंड, बिहार, तेलंगाना और महाराष्ट्र जाने वाले यात्रियों को सफर के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। यात्रियों को यात्रा से पहले अपनी ट्रेन का स्टेटस जरूर जांच लेने की सलाह दी गई है।साउथ बिहार एक्सप्रेस बीच रास्ते तक ही चलेगी आरा-दुर्ग 13288 साउथ बिहार एक्सप्रेस तय तारीखों पर आरा से चलकर राउरकेला तक ही जाएगी। वहीं 13287 दुर्ग-आरा साउथ बिहार एक्सप्रेस दुर्ग के बजाय राउरकेला से रवाना होगी। यानी दोनों ट्रेनें दुर्ग और राउरकेला के बीच रद्द रहेंगी। 5 प्रमुख ट्रेनें अलग-अलग तारीखों में रहेंगी रद्द मेगा ब्लॉक के कारण हैदराबाद-रक्सौल एक्सप्रेस, टाटानगर-इतवारी-टाटानगर एक्सप्रेस, बिलासपुर-टाटानगर-बिलासपुर एक्सप्रेस समेत कुल पांच प्रमुख ट्रेनों का संचालन अलग-अलग तिथियों में 20 से 40 दिनों तक प्रभावित रहेगा। रेलवे ने बताया कि ट्रैक की सुरक्षा और भविष्य में सुरक्षित रेल संचालन सुनिश्चित करने के लिए यह कार्य आवश्यक है। इन ट्रेनों के रद्द होने से झारखंड, बिहार, तेलंगाना, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के हजारों यात्रियों को यात्रा की योजना बदलनी पड़ सकती है। चक्रधरपुर मंडल में होगा ट्रैक अपग्रेडेशन रेलवे के अनुसार चक्रधरपुर मंडल के कंसबहाल और धारुआडीही सेक्शन में अप और डाउन दोनों लाइनों पर ट्रैक की मरम्मत, रखरखाव और सुरक्षा संबंधी कार्य किए जाएंगे। इन कार्यों के लिए नियमित मेगा ब्लॉक लिया जाएगा ताकि भविष्य में ट्रेनों का संचालन अधिक सुरक्षित और सुचारु बनाया जा सके। इसी वजह से दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे से होकर गुजरने वाली कई लंबी दूरी की ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहेगा। साउथ बिहार एक्सप्रेस बीच रास्ते तक ही चलेगी रेलवे ने बताया कि 13288 आरा-दुर्ग साउथ बिहार एक्सप्रेस निर्धारित तिथियों में आरा से राउरकेला तक ही संचालित होगी। वहीं 13287 दुर्ग-आरा साउथ बिहार एक्सप्रेस दुर्ग की बजाय राउरकेला से रवाना होगी। इसका मतलब है कि दुर्ग और राउरकेला के बीच दोनों दिशाओं में ट्रेन सेवा अस्थायी रूप से बंद रहेगी, जिससे इस रूट के यात्रियों को वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी। कई ट्रेनों का बदला जाएगा रूट मेगा ब्लॉक के दौरान कुछ ट्रेनों को वैकल्पिक मार्ग से चलाया जाएगा। 18478 ऋषिकेश-पुरी उत्कल एक्सप्रेस निर्धारित तिथियों पर ईब–झारसुगुड़ा रोड–संबलपुर सिटी–कटक मार्ग से संचालित होगी। इसी तरह 13288 आरा-दुर्ग साउथ बिहार एक्सप्रेस भी कुछ विशेष दिनों में टाटानगर-गमहारीया के स्थान पर कांड्रा-सीनी मार्ग से होकर दुर्ग पहुंचेगी। इससे यात्रियों के यात्रा समय में भी बदलाव संभव है। यात्रियों को हो सकती है परेशानी, पहले जांचें ट्रेन का स्टेटस रेलवे अधिकारियों ने बताया कि मेगा ब्लॉक की अवधि में कई ट्रेनों के समय में बदलाव, रूट डायवर्जन और आंशिक निरस्तीकरण की स्थिति बन सकती है। इसलिए यात्रियों को सलाह दी गई है कि स्टेशन जाने से पहले अपनी ट्रेन का अपडेट अवश्य जांच लें, ताकि अनावश्यक परेशानी से बचा जा सके। विशेष रूप से झारखंड, बिहार, तेलंगाना, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को अपनी यात्रा योजना पहले से तैयार करने की सलाह दी गई है। इन ट्रेनों का बदलेगा रास्ता 18478 ऋषिकेश-पुरी उत्कल एक्सप्रेस तय तारीखों पर ईब-झारसुगुड़ा रोड-संबलपुर सिटी-कटक मार्ग से चलेगी। वहीं 13288 आरा-दुर्ग साउथ बिहार एक्सप्रेस कुछ विशेष तिथियों पर टाटा-गमहारीया की जगह कांड्रा-सीनी मार्ग से दुर्ग पहुंचेगी।

रायपुर: केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी से महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की सौजन्य भेंट

रायपुर : केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी से महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने की सौजन्य भेंट बस्तर संभाग में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, पोषण सेवाओं के विस्तार एवं महिला सशक्तिकरण पर हुई सार्थक चर्चा  रायपुर  छत्तीसगढ़ की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने नई दिल्ली में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री माननीय श्रीमती अन्नपूर्णा देवी से सौजन्य भेंट कर महिला एवं बाल विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की।     इस दौरान मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने अपने हालिया बस्तर संभाग प्रवास की जानकारी साझा करते हुए क्षेत्र में किए गए निरीक्षणों, जनसंवाद कार्यक्रमों तथा जमीनी स्तर पर प्राप्त अनुभवों एवं निष्कर्षों से केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया। उन्होंने बस्तर के दूरस्थ एवं जनजातीय अंचलों में संचालित योजनाओं की प्रगति, चुनौतियों एवं संभावनाओं की भी जानकारी दी।     बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, दूरस्थ क्षेत्रों में पोषण सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, आंगनबाड़ी सेवाओं के विस्तार, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, महिलाओं के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण तथा आगामी जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के सफल संचालन को लेकर सकारात्मक एवं सार्थक चर्चा हुई।     मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि केंद्रीय मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी का मार्गदर्शन एवं सुझाव प्रदेश में महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं को और अधिक प्रभावी, समावेशी एवं जनोन्मुखी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र एवं राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से महिलाओं और बच्चों के समग्र विकास को नई गति मिलेगी।

पंजाब में झमाझम बारिश का दौर, 4 दिन यलो अलर्ट जारी; तापमान गिरा, बिजली की मांग भी घटी

अमृतसर  मानसून की सक्रियता से पंजाब के अधिकतर हिस्से बुधवार देर रात हुई बारिश से तर हो गए। बारिश के बाद राज्य के अधिकतम तापमान में गिरावट दर्ज की गई और सबसे अधिक पारा 35.2 डिग्री सेल्सियस रोपड़ में रिकॉर्ड हुआ।  मौसम विभाग के अनुसार अधिकतम तापमान सामान्य से 2.5 डिग्री नीचे पहुंच गया है, जबकि न्यूनतम तापमान में 3.6 डिग्री की कमी आने से यह सामान्य से 3.4 डिग्री नीचे दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने बताया कि मानसून पंजाब के अधिकतर हिस्सों में आगे बढ़ चुका है। अगले छह दिनों तक गरज-चमक के साथ बारिश और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। विभाग ने पांच जुलाई से चार दिनों के लिए भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। इससे आने वाले दिनों में तापमान में छह डिग्री तक और गिरावट आ सकती है। बारिश के आंकड़ों में फरीदकोट में 89.0 मिमी, लुधियाना में 82.5 मिमी, फिरोजपुर में 68.0 मिमी, मोगा में 57.5 मिमी और बठिंडा में 56.0 मिमी वर्षा दर्ज की गई। वीरवार को अमृतसर का तापमान 33.1 डिग्री, लुधियाना का 33.2 डिग्री, पटियाला का 32.4 डिग्री और बठिंडा का 34.9 डिग्री रहा। सबसे कम न्यूनतम तापमान 20.8 डिग्री बठिंडा में दर्ज किया गया। बारिश से घटी बिजली की मांग पंजाब में मानसून की एंट्री के साथ हुई बारिश ने बिजली की मांग में बड़ी राहत दी है। वीरवार को प्रदेश में अधिकतम बिजली मांग घटकर 15682 मेगावाट दर्ज की गई। इससे एक दिन पहले बुधवार को यह 17112 मेगावाट थी। यानी 24 घंटे में बिजली की मांग 1430 मेगावाट कम हो गई। पिछले कई दिनों से भीषण गर्मी और धान की सिंचाई के पीक सीजन के कारण मांग लगातार 17 हजार मेगावाट से ऊपर बनी हुई थी। रिकॉर्ड मांग के चलते पावरकाम पर बिजली आपूर्ति का दबाव बढ़ गया था। घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ताओं को अघोषित कटौती का सामना करना पड़ रहा था जबकि खेतीबाड़ी के लिए दिन में केवल चार घंटे बिजली आपूर्ति मिल रही थी। बुधवार रात हुई बारिश के बाद तापमान में गिरावट आने से एसी का उपयोग कम हुआ और सिंचाई के लिए ट्यूबवेलों की जरूरत भी घटी। इससे बिजली की मांग में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। वीरवार को इस मांग को पूरा करने के लिए पावरकाम के पास अपने सभी स्रोतों से 5222 मेगावाट बिजली उपलब्ध रही। इसमें सरकारी थर्मल प्लांटों से 1695 मेगावाट, हाइडल परियोजनाओं से 810 मेगावाट और निजी थर्मल संयंत्रों से 2682 मेगावाट बिजली मिली। शेष करीब 10648 मेगावाट बिजली नॉर्दर्न ग्रिड से ली गई। हालांकि रोपड़ थर्मल प्लांट की 210 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट और रणजीत सागर बांध की 150 मेगावाट क्षमता वाली एक यूनिट बंद रहने से 360 मेगावाट उत्पादन प्रभावित रहा। पावरकाम अधिकारियों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक बारिश जारी रहने की संभावना है जिससे बिजली की मांग और कम रह सकती है।