संबल’ योजना से न्याय व्यवस्था को मिलेगी मजबूती, सामुदायिक सहभागिता पर जोर
‘संबल’ से न्याय तक पहुंच और सामुदायिक सहभागिता को मिलेगा नया आयाम पुलिस, सिविल सोसायटी एवं एनजीओ के समन्वय से न्याय सुलभता और जनसुरक्षा को और प्रभावी बनाने पर मंथन मध्यप्रदेश पुलिस के अपराध अनुसंधान विभाग (CID) एवं सामुदायिक पुलिसिंग शाखा द्वारा ‘न्याय सुलभता, समाज कार्य और सामुदायिक पुलिस सहभागिता’ पर राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित भोपाल मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अपराध नियंत्रण एवं कानून-व्यवस्था के साथ-साथ समाज के प्रत्येक वर्ग को न्याय और सुरक्षा की बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए सामुदायिक सहभागिता को निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी दिशा में मध्यप्रदेश पुलिस के अपराध अनुसंधान विभाग (CID) एवं सामुदायिक पुलिसिंग शाखा के संयुक्त तत्वावधान में आज 08 सितंबर को आर.सी.वी.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, भोपाल के स्वर्ण जयंती सभागार में ‘संबल—न्याय सुलभता, समाज कार्य एवं सामुदायिक पुलिस सहभागिता’ विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि विशेष पुलिस महानिदेशक, अपराध अनुसंधान विभाग पंकज श्रीवास्तव रहे। विशिष्ट अतिथियों में कमिश्नर उच्च शिक्षा विभाग प्रबल शिपहा, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सुसुमन श्रीवास्तव, कानूनविद् एवं विशेष वक्ता श्रीमती रचना त्यागी, कोडी इंस्टीट्यूट कनाडा की प्रो. सारिका सिन्हा, मध्यप्रदेश महिला आयोग के सचिव सुरेश तोमर, पुलिस आयुक्त, नगरीय पुलिस भोपाल संजय कुमार तथा उप पुलिस महानिरीक्षक, सामुदायिक पुलिसिंग डॉ. विनीत कपूर उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि मार्च 2026 में मध्यप्रदेश पुलिस की सामुदायिक पुलिसिंग शाखा द्वारा ‘संबल’ नाम से सामुदायिक सुरक्षा पर एक सम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसमें आपराधिक न्याय क्षेत्र में कार्यरत समुदाय-आधारित गैर सरकारी संगठनों (NGOs) के कार्यों व अनुभवों को साझा किया गया था। इस पहल में सामाजिक कार्य से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों को भी जोड़ा गया, ताकि पुलिस, आपराधिक न्याय व्यवस्था और सामाजिक कार्य के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं के बीच स्थायी समन्वय एवं सहयोग का मॉडल विकसित किया जा सके। UNFPA के सहयोग से आयोजित वर्तमान सम्मेलन उसी दिशा में एक अगला कदम है, जिसका उद्देश्य पुलिस, आपराधिक न्याय व्यवस्था, विधिक सेवाओं, नागरिक समाज, गैर-सरकारी संगठनों एवं शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय विकसित कर नागरिकों, विशेषकर महिलाओं, बच्चों एवं अपराध के पीड़ितों तक न्याय और सहायता की पहुंच को अधिक प्रभावी बनाना है। सम्मेलन में मध्यप्रदेश के 75 से अधिक गैर-सरकारी संगठनों, बाल संरक्षण से जुड़े पुलिस अधिकारियों, जिला पुलिस प्रमुखों, सामुदायिक पुलिसिंग अधिकारियों, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रतिनिधियों, अभियोजन अधिकारियों, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों तथा सामाजिक कार्य एवं विधि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने सहभागिता की। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए मुख्य अतिथि विशेष पुलिस महानिदेशक, अपराध अनुसंधान विभाग पंकज श्रीवास्तव ने सामुदायिक पुलिसिंग को पुलिसिंग का अभिन्न हिस्सा बनाने तथा पुलिस एवं गैर-शासकीय संगठनों के बीच स्थायी एवं संस्थागत समन्वय तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि मार्च 2026 के कार्यक्रम के बाद प्रदेश में सक्रिय गैर-शासकीय संगठनों की जानकारी संकलित कर पुलिस अधिकारियों एवं इकाइयों तक पहुंचाई गई है, जिससे महिला, बच्चे, बुजुर्ग, मानसिक एवं शारीरिक रूप से कमजोर तथा अन्य जरूरतमंद व्यक्तियों को पुलिस कार्रवाई के साथ आश्रय, उपचार, पुनर्वास एवं अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि सामुदायिक पुलिसिंग अपराध नियंत्रण के साथ-साथ कमजोर एवं वंचित वर्गों की सुरक्षा, सामाजिक सहयोग और विश्वास निर्माण से भी जुड़ी है। स्वास्थ्य, शिक्षा, पुनर्वास, महिला-बाल सुरक्षा एवं मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एनजीओ पुलिस के प्रभावी सहयोगी बन सकते हैं। उन्होंने वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में महिलाओं की स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के लिए एनजीओ के प्रयासों को आंतरिक सुरक्षा एवं विश्वास निर्माण का उदाहरण बताया तथा मानसिक रूप से अस्वस्थ एवं निराश्रित व्यक्तियों के संरक्षण-पुनर्वास और घरेलू हिंसा पीड़ित महिलाओं को सहायता में पुलिस-एनजीओ समन्वय को महत्वपूर्ण बताया। महिला सशक्तिकरण योजनाओं के सामाजिक प्रभाव का अध्ययन कर घरेलू हिंसा एवं महिलाओं के विरुद्ध गंभीर अपराधों में कमी का आकलन करने की आवश्यकता भी बताई। उन्होंने ग्राम एवं नगर रक्षा समितियों तथा प्रशिक्षित नागरिक स्वयंसेवकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए बड़े धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन, यातायात एवं जनसुरक्षा में उनकी सहभागिता को आवश्यक बताया। वर्ष 2028 के उज्जैन सिंहस्थ के लिए अभी से प्रशिक्षण, योजना एवं समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। पुलिस आयुक्त, नगरीय पुलिस भोपाल संजय कुमार ने कहा कि पुलिस जब थाने या कार्यालय में होती है, तो सामान्यतः उसके सामने किसी विवाद के दो पक्ष होते हैं—पीड़ित और आरोपी। दोनों पक्षों को संतुष्ट करना कठिन होता है। इसके विपरीत, समुदाय के साथ मिलकर कार्य करने से ऐसी कई स्थानीय समस्याओं की जानकारी समय रहते मिल जाती है, जिनका समाधान कम प्रयास में प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मोहल्लों में खुले में नशा करना, अवैध शराब की गतिविधियां, महिलाओं के लिए असुरक्षित स्थान, असामाजिक तत्वों का जमावड़ा अथवा किसी स्थान पर लगातार होने वाली दुर्घटनाएं जैसी कई समस्याएं ऐसी होती हैं, जिनकी शिकायत प्रायः थाने या पुलिस कार्यालय तक नहीं पहुंचती। समुदाय के साथ निरंतर संवाद और सहभागिता से पुलिस को इन समस्याओं की जमीनी जानकारी मिलती है और समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है। संजय कुमार ने कहा कि सामुदायिक पुलिसिंग में पुलिस, नागरिक, सिविल सोसाइटी, सामाजिक संगठन तथा आपराधिक न्याय व्यवस्था से जुड़े सभी स्टेकहोल्डर्स मिलकर कार्य करते हैं। इससे जमीनी स्तर की समस्याओं को समझने, आपसी गलतफहमियां दूर करने और पुलिस सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलती है। उप पुलिस महानिरीक्षक डॉ. विनीत कपूर ने कहा कि सामुदायिक पुलिसिंग को मजबूत करने के लिए प्रदेश के प्रत्येक जिले में नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं तथा ग्राम एवं नगर रक्षा समितियों, कम्युनिटी सेफ्टी वॉलंटियर्स, विशेष किशोर पुलिस इकाइयों एवं लगभग 93 गैर-शासकीय संगठनों के प्रतिनिधियों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है। उन्होंने कहा कि न्याय की सुलभता केवल अपराध दर्ज करने तक सीमित नहीं, बल्कि अपराध की संभावना कम करने तथा पीड़ित एवं जरूरतमंद व्यक्ति को समय पर सहायता उपलब्ध कराने से भी जुड़ी है। डॉ कपूर ने POCSO Act एवं किशोर न्याय व्यवस्था में सपोर्ट पर्सन, चाइल्ड केयर संस्थाओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के माध्यम से नागरिक समाज की सहभागिता के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए महिलाओं एवं अन्य वंचित वर्गों के लिए सहयोग तंत्र मजबूत करने तथा बाल … Read more