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इंदौर से शुरू होगा 9वां राष्ट्रीय पोषण माह, 9 सितंबर से 8 अक्टूबर तक चलेगा अभियान; ये है थीम

हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ थीम पर 9 सितंबर से 8 अक्टूबर तक होगा राष्ट्रीय पोषण माह महिला बाल विकास मंत्री सुश्री भूरिया बुधवार को इंदौर में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह का करेंगी शुभारंभ पोषण मेले, रेसिपी प्रदर्शनी से लेकर बच्चों की शारीरिक माप और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के शत-प्रतिशत लाभ तक चलेंगे विशेष अभियान भोपाल  प्रदेश में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह-2026 का आयोजन 9 सितंबर से 8 अक्टूबर तक ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ थीम पर किया जाएगा। महिला बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया बुधवार को 9वें राज्य स्तरीय पोषण माह का इंदौर से शुभारंभ करेंगी। महिला बाल विकास मंत्री सुश्री भूरिया बुधवार को इंदौर में एक माह तक चलने वाले इस अभियान में स्थानीय एवं मौसमी खाद्य पदार्थों, पर्याप्त प्रोटीन, आहार विविधता, बच्चों के पोषण एवं प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल के साथ प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) का शत-प्रतिशत लाभ दिलाने पर विशेष जोर रहेगा। जिला, परियोजना, सेक्टर और आंगनवाड़ी स्तर पर गतिविधियों का आयोजन कर अधिक से अधिक समुदाय को इससे जोड़ा जाएगा। पोषण मेले में दिखेगी स्थानीय खाद्य विविधता पोषण माह के दौरान पंचायत भवनों, स्कूलों और सामुदायिक भवनों में पोषण मेले एवं रेसिपी प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी। इनमें टेक होम राशन (THR), गर्म पका भोजन (HCM), क्षेत्रीय पौष्टिक व्यंजन, स्थानीय दालें, चना, मूंगफली, सोया, दूध एवं दुग्ध उत्पाद, मिलेट्स और मौसमी सब्जियों से तैयार व्यंजनों का प्रदर्शन किया जाएगा। ‘Know Your Protein—अपने प्रोटीन को पहचानें’ अभियान के माध्यम से परिवारों को प्रोटीन के विभिन्न स्थानीय स्रोतों और संतुलित आहार के महत्व की जानकारी दी जाएगी। आंगनवाड़ी केंद्रों पर 3 से 6 वर्ष के बच्चों को स्थानीय एवं विविधतापूर्ण ताजा नाश्ता और गर्म पका भोजन उपलब्ध कराने के साथ उसकी गुणवत्ता, मात्रा और स्वच्छता की निगरानी में मातृ सहयोगिनी समितियों, पंचायतों और समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। आंगनवाड़ी केंद्रों पर साप्ताहिक मेन्यू बोर्ड प्रदर्शित किए जाएंगे और समुदाय को उपलब्ध भोजन एवं निर्धारित मेन्यू की जानकारी दी जाएगी। 11 सितंबर से बच्चों की शारीरिक माप, कुपोषित बच्चों की पहचान पोषण माह के दौरान 11 सितंबर से शारीरिक माप दिवसों का आयोजन कर जन्म से 6 वर्ष तक के बच्चों का वजन, लंबाई/ऊंचाई सहित आवश्यक शारीरिक माप लेकर पोषण ट्रैकर में प्रविष्टि की जाएगी। गंभीर तीव्र कुपोषण, मध्यम तीव्र कुपोषण और गंभीर रूप से कम वजन वाले श्रेणी के बच्चों की पहचान कर उन्हें आवश्यक पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जाएगा। नवीन चिन्हित बच्चों का c-MAM प्रोटोकॉल में पंजीयन कर साप्ताहिक फॉलोअप किया जाएगा। ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस के दौरान कुपोषित बच्चों की स्वास्थ्य जांच तथा आवश्यकता वाले बच्चों का समय पर रेफरल सुनिश्चित किया जाएगा। पोषण पुनर्वास केन्द्र से उपचार के बाद लौटे बच्चों का भी नियमित फॉलोअप किया जाएगा। 6 से 60 माह के गंभीर तीव्र कुपोषण बच्चों की भूख की जांच कर आवश्यकता अनुसार उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया जाएगा। पहले 1000 दिनों और बाल विकास पर विशेष फोकस अभियान में गर्भावस्था से बच्चे के जीवन के पहले 1000 दिनों तक पर्याप्त पोषण, स्तनपान, शिशु देखभाल और संवेदनशील पालन पोषण पर विशेष परामर्श दिया जाएगा। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा संशोधित गृह भेंट मॉड्यूल के अनुसार 0 से 3 वर्ष के बच्चों वाले परिवारों से संपर्क कर बच्चों के वृद्धि-विकास, प्रारंभिक उद्दीपन और खेल आधारित गतिविधियों के संबंध में अभिभावकों को जागरूक किया जाएगा। बाल चौपाल, कहानी, गीत, चित्रकला, रोल-प्ले, पपेट शो, कविता और खेल आधारित गतिविधियों के माध्यम से बच्चों के संज्ञानात्मक, भाषा, मोटर तथा सामाजिक-भावनात्मक विकास को प्रोत्साहित किया जाएगा। अभिभावकों को प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट बच्चों के साथ बात करने, खेलने, कहानी सुनाने और गाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। PMMVY के शत-प्रतिशत लाभ के लिए चलेगा विशेष अभियान राष्ट्रीय पोषण माह में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) के शत-प्रतिशत हितग्राहियों को लाभान्वित करने के लिए विशेष नामांकन एवं संतृप्ति अभियान चलाया जाएगा। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पात्र गर्भवती एवं धात्री महिलाओं की पहचान कर उनका पोर्टल पर समय सीमा में पंजीयन सुनिश्चित करेंगे। लंबित नेशनल पेमेंटस कॉपरेशन ऑफ इंडिया, फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम, सत्यापन, स्वीकृति और डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर से संबंधित प्रकरणों का निराकरण प्राथमिकता से किया जाएगा। पहले बच्चे की द्वितीय किश्त के लिए समय पर टीकाकरण की पोर्टल पर प्रविष्टि कराने तथा दूसरे प्रसव में बालिका जन्म होने पर पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन हेतु प्रेरित किया जाएगा। पीएमएमवीवीई की पात्रता, आवश्यक दस्तावेज, किश्त एवं आवेदन प्रक्रिया की जानकारी गांव-गांव और आंगनवाड़ी केंद्रों तक पहुंचाई जाएगी। योजना से लाभान्वित महिलाओं की सफलता की कहानियों के माध्यम से भी जन-जागरूकता बढ़ाई जाएगी।  ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ बनेगा जनभागीदारी का अभियान पोषण माह को केवल विभागीय गतिविधि तक सीमित न रखते हुए इसे जनभागीदारी का अभियान बनाया जाएगा। पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों, मातृ सहयोगिनी समितियों, आशा कार्यकर्ताओं, स्कूल शिक्षकों, विद्यार्थियों, स्थानीय रसोइयों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संस्थाओं को अभियान से जोड़ा जाएगा। समुदाय को आंगनवाड़ी केंद्रों की स्वच्छता, रखरखाव, कूड़ेदान एवं आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने में श्रमदान और सहयोग के लिए प्रेरित किया जाएगा। आंगनवाड़ी केंद्रों के बाहर बच्चों की ऊंचाई के अनुरूप दर्पण लगाने जैसे छोटे-छोटे नवाचारों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। ‘खेलो, सीखो और बढ़ो’ जैसी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों के प्रारंभिक विकास में परिवार और समुदाय की भूमिका मजबूत की जाएगी। किशोरी बालिकाओं के लिए किशोरावस्था में पोषण की आवश्यकता पर विशेष परामर्श सत्र भी आयोजित होंगे। विभागों के समन्वय से होगा व्यापक आयोजन राष्ट्रीय पोषण माह की गतिविधियां महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा, शिक्षा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, कृषि, आयुष, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, खेल एवं युवा कल्याण, पर्यावरण एवं वन, उद्यानिकी, नगरीय आजीविका मिशन, जनसंपर्क तथा जनजातीय कार्य विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों एवं संस्थाओं के समन्वय से आयोजित की जाएंगी। अभियान की गतिविधियों की जन आंदोलन डैशबोर्ड पर समयबद्ध प्रविष्टि की जाएगी। प्रत्येक गतिविधि की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें भी अपलोड की जाएंगी, जिससे अभियान की गतिविधियों की प्रभावी मॉनिटरिंग और मूल्यांकन किया जा सके।  

‘उनके हिस्से का प्रेम’ और ‘लेखक बनाने वाले’ में दिखा प्रेम, महत्वाकांक्षा और बाजार का व्यंग्य

‘उनके हिस्से का प्रेम’ और ‘लेखक बनाने वाले’ में दिखा प्रेम, महत्वाकांक्षा और बाजार का व्यंग्य टैगोर नाट्य महोत्सव के तीसरे दिन ‘संभव’ आर्ट ग्रुप, दिल्ली ने किया संतोष चौबे की दो चर्चित कहानियों का मंचन भोपाल  टैगोर नाट्य महोत्सव के तीसरे दिन मंगलवार को रवीन्द्र भवन में कथाकार संतोष चौबे की दो चर्चित कहानियों ‘उनके हिस्से का प्रेम’ और ‘लेखक बनाने वाले’ का प्रभावशाली मंचन किया गया। प्रख्यात रंग निर्देशक देवेन्द्र राज अंकुर के निर्देशन में हुई इन प्रस्तुतियों को दिल्ली के ‘संभव’ आर्ट ग्रुप ने मंच पर साकार किया। इसके अलावा कार्यक्रम में रंगसंवाद पत्रिका का विमोचन भी किया गया। वहीं मंच का संचालन अविजित सोलंकी ने किया। आयोजन टैगोर नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा, विश्वरंग फाउंडेशन और रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।  पहली प्रस्तुति ‘उनके हिस्से का प्रेम’ में एक संस्थान के बॉस के प्रेम संबंधों को अनूठे रंगमंचीय प्रयोग के माध्यम से सामने लाया गया। कहानी में ऑफिस की मेज, कलम, शीशा, कुर्सी और डायरी जैसे निर्जीव दिखाई देने वाले उपकरण उसके प्रेम संबंधों के साक्षी और पड़ताल करने वाले पात्रों की तरह उभरते हैं। इन वस्तुओं के माध्यम से बॉस के आधे-अधूरे प्रेम संबंधों की कहानी जिस तरह दर्शकों के सामने आती है, वह प्रस्तुति का विशेष आकर्षण रही। दूसरी प्रस्तुति ‘लेखक बनाने वाले’ में लेखकीय महत्वाकांक्षा और उसके बाजारू दोहन पर व्यंग्य किया गया। कहानी का मुख्य पात्र बैंक में नौकरी करने वाला व्यक्ति है, जो लिखता रहता है और लेखक बनने की इच्छा रखता है। अखबार में दिल्ली के एक ‘लेखक बनाओ केंद्र’ का विज्ञापन देखकर वह वहां पहुंचता है। केंद्र उससे पैसे लेकर उसकी एक सामान्य कविता को तैयार करवाने और उसकी झूठी प्रशंसा करने का प्रयास करता है। इस अनुभव से निराश और आक्रोशित होकर वह वहां से लौटता है और महसूस करता है कि लेखक बनाने के नाम पर ऐसे केंद्र लोगों की भावनाओं और लेखकीय आकांक्षा को पैसा कमाने का जरिया बना रहे हैं। कहानी इसी विडंबना और धोखे को व्यंग्यात्मक ढंग से सामने रखती है। दोनों प्रस्तुतियों में संतोष चौबे की कहानियों की विशिष्ट संवेदना और व्यंग्य को देवेन्द्र राज अंकुर की रंगमंचीय दृष्टि के माध्यम से प्रभावी रूप में प्रस्तुत किया गया। वस्तुओं को कथानक का हिस्सा बनाना और सामान्य जीवन की स्थितियों के भीतर छिपे सामाजिक द्वंद्व को मंच पर उभारना इन प्रस्तुतियों की खास विशेषता रही। लेखक : संतोष चौबे कवि, कथाकार और उपन्यासकार संतोष चौबे हिंदी के उन विरल साहित्यकारों में हैं, जो साहित्य और विज्ञान दोनों क्षेत्रों में समान रूप से सक्रिय रहे हैं। उनके छह कथा-संग्रह—‘हल्के रंग की कमीज’, ‘रेस्त्रां में दोपहर’, ‘नौ बिंदुओं का खेल’, ‘बीच प्रेम में गांधी’, ‘प्रतिनिधि कहानियां’ तथा ‘मगर शेक्सपियर को याद रखना’—और चार उपन्यास—‘राग केदार’, ‘क्या पता कामरेड मोहन’, ‘जल तरंग’ तथा ‘सपनों की दुनिया में ब्लेकहोल’—प्रकाशित एवं चर्चित हैं। उनके कविता-संग्रहों में ‘कहीं और सच होंगे सपने’, ‘कोना धरती का’, ‘इस अ-कवि समय में’ और ‘घर बाहर’ शामिल हैं। उनकी कहानियों का मंचन भारत भवन और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली सहित विभिन्न मंचों पर हो चुका है तथा उनकी रचनाएं देश की प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। निर्देशक : देवेन्द्र राज अंकुर दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर तथा राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से निर्देशन में विशेषज्ञता प्राप्त देवेन्द्र राज अंकुर देशभर की अनेक व्यावसायिक एवं शौकिया नाट्य मंडलियों के साथ निर्देशन कर चुके हैं। ‘संभव’ ग्रुप के संस्थापक सदस्य और ‘कहानी का रंगमंच’ के प्रणेता अंकुर अध्यापक, कैंप निर्देशक और नाट्य निर्देशक के रूप में देशभर की कार्यशालाओं से जुड़े रहे हैं। उन्होंने विभिन्न भाषाओं के नाटकों का हिंदी में अनुवाद किया है और रंगमंच विषयक लेखन भी किया है। रंग आलोचना पर उनकी सात से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हैं। टैगोर फेलोशिप प्राप्त प्रो. अंकुर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक रह चुके हैं। रंगमंच के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए उन्हें संगीत नाटक अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। मंच पर अमिताभ श्रीवास्तव, अमित सक्सेना, प्रकाश झा, गौरी देवल, रचिता वर्मा एवं सहज हरजाई मंच परे संगीत संचालन: आदित्य पटेल प्रकाश परिकल्पना एवं संचालन: राघव प्रकाश एवं राहुल चौहान लेखक: संतोष चौबे निर्देशन: देवेन्द्र राज अंकुर

सपोर्ट विंग्स की ‘न्यू माइंड, न्यू इंडिया’ पहल, भोपाल में 45 से अधिक बच्चों को शिक्षा और सुरक्षा के प्रति किया जागरूक

 सपोर्ट विंग्स की 'न्यू माइंड, न्यू इंडिया' पहल, भोपाल में 45 से अधिक बच्चों को शिक्षा और सुरक्षा के प्रति किया जागरूक भोपाल  युवाओं के नेतृत्व में सामाजिक बदलाव की अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए सपोर्ट विंग्स ने 6 सितंबर 2026 को भोपाल के न्यू अंबेडकर नगर, कोलार रोड में 'न्यू माइंड, न्यू इंडिया' पहल का सफल आयोजन किया। इस पहल का उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा, जागरूकता, शिक्षा और समग्र कल्याण को बढ़ावा देना था। इस कार्यक्रम में सपोर्ट विंग्स के 15 वालंटियर्स ने 45 से अधिक बच्चों के साथ समय बिताया। बच्चों के साथ इंटरैक्टिव गतिविधियों, शैक्षिक संवाद और जागरूकता सत्रों के माध्यम से उन्हें कई महत्वपूर्ण विषयों के बारे में सरल और बाल-सुलभ तरीके से जानकारी दी गई। बच्चों को व्यक्तिगत सुरक्षा, गुड टच और बैड टच, व्यक्तिगत सीमाओं और आत्म-जागरूकता जैसे अहम विषयों से अवगत कराया गया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों में सीखने के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने पर भी जोर दिया गया। वालंटियर्स द्वारा बच्चों को पढ़ाई से जुड़ी सामग्री वितरित की गई और उनके लिए नींबू पानी, व्हाइट सॉस पास्ता, समोसे और बिस्किट सहित भोजन और जलपान की व्यवस्था भी की गई। खेल, बातचीत और मित्रवत संवाद के माध्यम से वालंटियर्स ने एक खुशनुमा और स्वागत भरा माहौल बनाया, जहां बच्चे खुलकर भाग ले सके, सीख सके और अपनी बात कह सके। इस पहल ने बच्चों को अधिक आत्मविश्वासी, जागरूक और अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा के बारे में खुलकर बात करने के लिए प्रोत्साहित किया। इस पहल के बारे में सपोर्ट विंग्स की डायरेक्टर राजलक्ष्मी बानिक ने कहा, “हर बच्चे को ऐसा वातावरण मिलना चाहिए जहां वह सीख सके, आगे बढ़ सके और आत्मविश्वास महसूस कर सके। 'न्यू माइंड, न्यू इंडिया' के माध्यम से हमारा लक्ष्य सीखने और जागरूकता को बच्चों के लिए रोचक बनाना है, साथ ही उन्हें अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा और आत्म-मूल्य को समझने के लिए प्रेरित करना है। हमें विश्वास है कि आज के छोटे और सकारात्मक प्रयास कल एक उज्जवल और आत्मविश्वासी भविष्य का निर्माण करेंगे।” यह कार्यक्रम शिक्षा, जागरूकता, देखभाल और सामुदायिक जुड़ाव को एक साथ लाने वाला एक सार्थक अनुभव रहा, जो बच्चों और वालंटियर्स दोनों के लिए यादगार बना। सपोर्ट विंग्स के बारे में: सपोर्ट विंग्स एक युवा-नेतृत्व वाला संगठन है जो भारत के 80 से अधिक शहरों में सक्रिय है। यह संगठन लीडरशिप प्रोग्राम, इंटर्नशिप, वालंटियरिंग के अवसरों और समुदाय-आधारित पहलों के माध्यम से युवाओं को सशक्त बना रहा है, ताकि वे जिम्मेदार चेंजमेकर बन सकें।

संतोष चौबे को मानद डॉक्टरेट की उपाधि

संतोष चौबे को मानद डॉक्टरेट की उपाधि शिक्षा, विज्ञान संचार और सामाजिक उद्यमिता में योगदान के लिए बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में 21 सितंबर को प्रदान की जाएगी मानद उपाधि भोपाल  शिक्षा, सामाजिक उद्यमिता, साहित्य, विज्ञान संचार और भारतीय भाषाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए संतोष चौबे को बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय, गढ़वा, झारखंड द्वारा मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया जाएगा। विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में 21 सितंबर 2026 को उन्हें यह सम्मान प्रदान किया जाएगा। समारोह विश्वविद्यालय के गुरुपद संभवन रामजी ऑडिटोरियम में आयोजित होगा। विश्वविद्यालय की अकादमिक काउंसिल और गवर्निंग बॉडी ने शिक्षा, साहित्य, सामाजिक उद्यमिता, विज्ञान संचार और रचनात्मक लेखन के क्षेत्र में चौबे के विशिष्ट योगदान को मान्यता देते हुए इस सम्मान के लिए उनका चयन किया है। विश्वविद्यालय के अनुसार, यह उपाधि उनके उल्लेखनीय योगदान और उपलब्धियों के प्रति सम्मान और सराहना का प्रतीक है। शिक्षा और सामाजिक उद्यमिता के क्षेत्र में चार दशक से अधिक का योगदान संतोष चौबे ने वर्ष 1985 में ऑल इंडिया सोसायटी फॉर इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कंप्यूटर टेक्नोलॉजी (आईसेक्ट) की स्थापना की। इसका उद्देश्य शहरी और ग्रामीण भारत के बीच डिजिटल विभाजन को कम करना तथा शिक्षा और तकनीक की पहुंच को व्यापक बनाना था। उनके नेतृत्व में आईसेक्ट ने ग्रामीण, आदिवासी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में शिक्षा, कौशल एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण, तकनीकी शिक्षा और वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में व्यापक कार्य किया। एनआईटी, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियर चौबे ने शिक्षा को सामाजिक बदलाव और सशक्तीकरण के माध्यम के रूप में आगे बढ़ाया। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उनके मार्गदर्शन में रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय बिलासपुर, डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय वैशाली, डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय खंडवा, एआईएसईसीटी विश्वविद्यालय हजारीबाग और स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों का विकास हुआ। इन संस्थानों में शिक्षा को कौशल विकास, शोध, नवाचार, उद्यमिता और उद्योगोन्मुखी शिक्षा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है। हिंदी में विज्ञान संचार के अग्रणी हस्ताक्षर संतोष चौबे की पहचान एक प्रतिष्ठित विज्ञान लेखक और विज्ञान संचारक के रूप में भी रही है। उनकी वर्ष 1986 में प्रकाशित पुस्तक ‘कंप्यूटर: एक परिचय’ ने हिंदी में तकनीकी शिक्षा और कंप्यूटर जागरूकता के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने साहित्य और विज्ञान के बीच संवाद को मजबूत करते हुए कविता, कथा, उपन्यास और लोकप्रिय विज्ञान लेखन के क्षेत्र में निरंतर कार्य किया है। साहित्य की विविध विधाओं में सक्रिय कवि, कथाकार और उपन्यासकार संतोष चौबे हिंदी के उन साहित्यकारों में हैं, जिन्होंने साहित्य और विज्ञान दोनों क्षेत्रों में समान रूप से सक्रिय भूमिका निभाई है। उनके छह कथा-संग्रह—‘हल्के रंग की कमीज’, ‘रेस्त्रां में दोपहर’, ‘नौ बिंदुओं का खेल’, ‘बीच प्रेम में गांधी’, ‘प्रतिनिधि कहानियां’ तथा ‘मगर शेक्सपियर को याद रखना’—प्रकाशित एवं चर्चित हैं। उनके चार उपन्यास ‘राग केदार’, ‘क्या पता कामरेड मोहन’, ‘जल तरंग’ और ‘सपनों की दुनिया में ब्लेकहोल’ प्रकाशित हुए हैं। उनके कविता-संग्रहों में ‘कहीं और सच होंगे सपने’, ‘कोना धरती का’, ‘इस अ-कवि समय में’ और ‘घर बाहर’ शामिल हैं। उनकी कहानियों का मंचन भारत भवन और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली सहित विभिन्न मंचों पर हो चुका है और उनकी रचनाएं देश की प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। भारतीय भाषाओं और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति भी उनका उल्लेखनीय योगदान रहा है। विश्वविद्यालय की मानद उपाधि के लिए तैयार प्रशस्ति-पत्र में उनके साहित्यिक और वैज्ञानिक लेखन के साथ भारतीय भाषाओं एवं संस्कृति को बढ़ावा देने के प्रयासों को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित शिक्षा, विज्ञान, नवाचार, सामाजिक उद्यमिता और साहित्य के क्षेत्र में संतोष चौबे के योगदान को विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से मान्यता मिली है। उन्हें राष्ट्रीय नवाचार पुरस्कार, श्वाब फाउंडेशन सोशल एंटरप्रेन्योर ऑफ द ईयर अवॉर्ड और राष्ट्रीय साक्षरता पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।

ग्रेटर नोएडा में जाम से मिलेगी राहत, हापुड़ बाईपास तक 105 मीटर चौड़ी सड़क और जेवर एयरपोर्ट तक एलिवेटेड रोड

ग्रेटर नोएडा  ग्रेटर नोएडा में बढ़ते औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों के बीच यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने की तैयारी है. ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) ने मालवाहक और यात्री वाहनों की आवाजाही को अलग करने का प्रस्ताव रखा है. इसके तहत हापुड़ बाईपास तक 105 मीटर चौड़ी सड़क बनाने और मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स हब से जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक छह लेन की एलिवेटेड रोड बनाने की योजना पर चर्चा हुई है।  ग्रेटर नोएडा की कनेक्टिविटी को और मजबूत करने के लिए GNIDA ने हापुड़ बाईपास तक करीब 105 मीटर चौड़ी सड़क बनाने का प्रस्ताव दिया है. अधिकारियों के मुताबिक, इस सड़क के निर्माण से नोएडा-ग्रेटर नोएडा और गंगा एक्सप्रेसवे के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी और दोनों के बीच सफर का समय घटकर करीब 30 से 45 मिनट रह सकता है।  प्रस्ताव के तहत मौजूदा कनेक्टिविटी को करीब 15 किलोमीटर तक आगे बढ़ाकर ग्रेटर नोएडा को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा, इससे क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों और आवागमन को गति मिलने की उम्मीद है।  लॉजिस्टिक्स हब से एयरपोर्ट तक एलिवेटेड रोड GNIDA ने मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स हब (MMLH) से जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक छह लेन की एलिवेटेड रोड बनाने का भी प्रस्ताव रखा है. यह सड़क वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के समानांतर बनाई जाएगी।  इस कॉरिडोर को मुख्य रूप से मालवाहक वाहनों की आवाजाही के लिए इस्तेमाल करने की योजना है. इससे लॉजिस्टिक्स हब से निकलने वाले सामान को सीधे एयरपोर्ट के एयर कार्गो टर्मिनल तक पहुंचाया जा सकेगा. इससे माल परिवहन में समय की बचत होने के साथ शहर की सड़कों पर भारी वाहनों का दबाव भी कम होने की उम्मीद है।  मास्टर प्लान 2041 में बदलाव की तैयारी ये सभी प्रस्ताव ग्रेटर नोएडा मास्टर प्लान 2041 में संशोधन की योजना का हिस्सा हैं. इसका मुख्य उद्देश्य शहर में मालवाहक और यात्री वाहनों की आवाजाही को अलग-अलग करना है. सोमवार को लखनऊ में औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता की अध्यक्षता में हुई बैठक में इन प्रस्तावों पर चर्चा की गई. बैठक में औद्योगिक विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार भी मौजूद रहे।  GNIDA के मुताबिक, मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स हब और मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब ग्रेटर नोएडा की आने वाली प्रमुख परियोजनाओं में शामिल हैं, इनके विकसित होने के बाद क्षेत्र में माल ढुलाई की क्षमता बढ़ने और लॉजिस्टिक्स हब से एयरपोर्ट के बीच यातायात व्यवस्था अधिक सुगम होने की उम्मीद है।  कुल मिलाकर, प्रस्तावित सड़क और एलिवेटेड कॉरिडोर ग्रेटर नोएडा में फ्रेट ट्रैफिक को यात्री यातायात से अलग करने की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं। इससे औद्योगिक क्षेत्रों, लॉजिस्टिक्स हब, गंगा एक्सप्रेसवे और जेवर एयरपोर्ट के बीच कनेक्टिविटी को नया बूस्ट मिल सकता है।   

पंजाब चुनाव को लेकर BJP का मेगा प्लान, मोदी-शाह और नितिन नवीन बढ़ाएंगे सियासी हलचल

 चंडीगढ़  पंजाब विधानसभा चुनाव में अब करीब छह महीने का समय शेष है और भाजपा ने प्रदेश में अपनी चुनावी गतिविधियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने सितंबर और अक्टूबर में अपने शीर्ष नेतृत्व के कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करनी शुरू कर दी है।राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संभावित कार्यक्रमों को लेकर पार्टी स्तर पर तैयारियां चल रही हैं। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी अक्टूबर में तीन दिन पंजाब में रह सकते हैं। हालांकि, अभी दौरे की तारीख तय नहीं हुई है। पार्टी का प्रयास है कि उनके कार्यक्रम को अमृतसर, जालंधर, लुधियाना और पटियाला के आसपास केंद्रित किया जाए। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार प्रधानमंत्री पहले दिन माझा क्षेत्र के कई विधानसभा क्षेत्रों से रोड शो के माध्यम से गुजर सकते हैं। उनके रात्रि विश्राम के लिए राधा स्वामी सत्संग ब्यास के मुख्यालय पर विचार किया जा रहा है। प्रधानमंत्री की जनसभा को लेकर भी पार्टी में मंथन चल रहा है। भाजपा के कुछ नेता बठिंडा अथवा पटियाला में जनसभा कराने के लिए राष्ट्रीय नेतृत्व से संपर्क में हैं। बठिंडा से पटियाला तक रोड शो की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय और भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व मिलकर दौरे की अंतिम रूपरेखा तैयार करेगा। केंद्र की घोषणाओं पर भी मंथन प्रधानमंत्री के दौरे को चुनावी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी स्तर पर यह आकलन किया जा रहा है कि केंद्र सरकार पंजाब के लिए किन योजनाओं, परियोजनाओं या घोषणाओं की घोषणा कर सकती है। इसके साथ ही जनता के समक्ष रखे जाने वाले संभावित वादों पर भी मंथन शुरू हो गया है। 18 सितंबर से नशे और कानून-व्यवस्था के खिलाफ यात्रा इसी कड़ी में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 18 सितंबर को पठानकोट से पंजाब में नशे और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर यात्रा की शुरुआत करेंगे। भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव में नशे और बिगड़ती कानून-व्यवस्था को प्रमुख मुद्दा बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। 19 से 21 सितंबर के बीच प्रदेश के अन्य हिस्सों से भी यात्राएं निकाली जाएंगी। इन यात्राओं की संभावित शुरुआत श्री केसगढ़ साहिब, तलवंडी साबो और फाजिल्का से किए जाने पर विचार चल रहा है। यात्रा के दौरान बाइक रैली भी निकाली जाएगी। पार्टी की योजना इन यात्राओं को प्रदेश के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों तक ले जाने की है। यात्राओं का समापन जालंधर में प्रस्तावित है। यहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बड़ी रैली को संबोधित कर सकते हैं। उनकी रैली 29 या 30 सितंबर को होने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि तारीख अभी अंतिम नहीं है। यात्राओं के नेतृत्व के लिए एक दर्जन से अधिक केंद्रीय मंत्रियों, राष्ट्रीय पदाधिकारियों और वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी देने की तैयारी है। मंगलवार को नई दिल्ली में होने वाली बैठक में यात्रा के कार्यक्रम, तीन अन्य शहरों से निकलने वाली यात्राओं और अमित शाह की रैली की तारीख पर अंतिम निर्णय होने की संभावना है। बैठक में प्रदेश प्रभारी डा सतीश पूनिया, प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों और प्रदेश संगठन मंत्री मंथरी श्रीनिवासुलु के शामिल होने की संभावना है। अमित शाह के भी बैठक में शामिल होने की उम्मीद है।

परीक्षा में नकल पर DAVV का सख्त एक्शन, मोबाइल की जांच के लिए बनेगी स्पेशल इन्वेस्टिगेशन कमेटी

 इंदौर  देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में नकल प्रकरणों की जांच अब नई व्यवस्था के जरिए की जाएगी। परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों से जब्त किए गए मोबाइल महीनों तक बंद पड़े रहने से उनकी बैटरी डिस्चार्ज हो जाती हैं। ऐसे में अनुचित संसाधनों की जांच समिति के सामने सबसे बड़ी दिक्कत यह रहती है कि मोबाइल में यह पता नहीं चल पाता कि विद्यार्थी ने परीक्षा के दौरान कितने प्रश्नों के उत्तर फोन देखकर लिखे थे। इससे नकल प्रकरणों पर उचित निर्णय लेने में देरी होती है। अब इस समस्या से निपटने के लिए विश्वविद्यालय अलग से मोबाइल जांच समिति बनाएगा। कार्यपरिषद ने भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। विश्वविद्यालय में सालभर स्नातक और स्नातकोत्तर की 780 से अधिक वार्षिक और सेमेस्टर परीक्षाएं होती हैं। इनमें औसतन 250 से 300 नकल प्रकरण सामने आते हैं। कई मामलों में विद्यार्थियों के पास गाइड, पाठ्यपुस्तक या अन्य सामग्री के पन्ने मिलते हैं। इन पन्नों के आधार पर यह आसानी से पता लगाया जा सकता है कि परीक्षा में किस तरह नकल की गई। इसलिए ऐसे मामलों में निर्णय लेना अपेक्षाकृत आसान होता है। फोन में क्या देखा, कितने सवालों के जवाब मिले सबसे ज्यादा परेशानी मोबाइल से जुड़े मामलों में आती है। परीक्षा केंद्र से जब्त मोबाइल विश्वविद्यालय में जांच होने तक लंबे समय तक बंद रखे जाते हैं। इस दौरान बैटरी खत्म हो जाती है। मोबाइल चालू नहीं होने पर समिति यह देख नहीं पाती कि विद्यार्थी ने फोन में क्या देखा और उससे कितने सवालों के जवाब लिखे। कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई ने बताया कि परीक्षा में मोबाइल लेकर आना ही नियमों के खिलाफ है। इसके बावजूद यदि प्रश्नपत्र हल करते समय किसी विद्यार्थी के पास मोबाइल मिलता है तो उड़नदस्ता या केंद्राध्यक्ष नकल प्रकरण बनाता है। इसी को देखते हुए नई समिति बनाई जा रही है। नई समिति का काम सिर्फ जब्त मोबाइल की तुरंत जांच कर नकल से जुड़े तथ्य जुटाना होगा। इससे प्रकरणों की जांच में तेजी आएगी।

MP को मिलेगी हाईस्पीड कनेक्टिविटी की सौगात, बैतूल-खंडवा फोरलेन से अहमदाबाद-वड़ोदरा तक आसान होगी राह

इंदौर  बैतूल से खंडवा के बीच फोरलेन प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल चुकी है. यह प्रोजेक्ट इंदौर और नागपुर के बीच की दूरी को बेहद कम कर देगा. दोनों शहरों के बीच का सफर 6 घंटे में पूरा हो जाएगा. यह परियोजना बैतूल-खंडवा-वडोदरा कॉरिडोर का हिस्सा है, जिससे मध्य प्रदेश की गुजरात और महाराष्ट्र से कनेक्टिविटी और मजबूत हो जाएगी. इस फोरलेन के बनने से नागपुर, जलगांव, भुसावल, अकोला, वाशिम, हिंगोली, नांदेड़ जैसे शहर कनेक्ट होंगे. वहीं गुजरात के अहमदाबाद, वडोदरा जैसे बड़े शहरों से सीधी कनेक्टिविटी हो जाएगी. इसलिए यह प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश के लिए अहम है, क्योंकि आने वाले समय में यह प्रदेश के लिए गेमचेंजर बनेगा।  इंदौर से नागपुर का सफर 6 घंटे में होगा बैतूल से खंडवा फोरलेन बनने से सबसे बड़ा फायदा इंदौर नागपुर रूट पर होगा. केंद्र सरकार के प्रोजेक्ट दस्तावेज में इस कॉरिडोर को इंदौर और नागपुर एयरपोर्ट, इंदौर के मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क और बैतूल-खंडवा के प्रमुख रेलवे स्टेशनों से जोड़ने वाली कड़ी बताया गया है. इंदौर से पहले सीधे बैतूल तक का सफर होगा. इसके बाद बैतूल से नागपुर का सफर तय किय जाएगा. पहले इंदौर से नागपुर जाने में 13 से 14 घंटे का समय लगता था. क्योंकि पूरा रूट 2 लेन हाईवे था. यह नया मार्ग सीधे नेशनल NH-47, NH-753 और NH-52 जैसी बड़ी सड़कों को आपस में इंटरलिंक करदेगा. इंदौर से हरदा-बैतूल होते हुए नागपुर जाने वाले ट्रैफिक को इस अपग्रेडेशन से सीधी मदद मिलेगी. इस फोरलेन के बनने से पूरा मार्ग एक्सप्रेसवे में अपग्रेड हो जाएगा. जिससे इंदौर से नागपुर का सफर 6 घंटे में पूरा कर लिया जाएगा. इसलिए इंदौर से नागपुर और दक्षिण भारत के बीच का सफर भी बेहद आसान हो जाएगा।  एमपी की गुजरात और महाराष्ट्र तक कनेक्टिविटी     मध्य प्रदेश: बैतूल खंडवा फोरलेन हाईवे से इंदौर, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, बड़वानी जैसे शहर सीधे कनेक्ट हो जाएंगे.      महाराष्ट्र: नागपुर, जलगांव, भुसावल, अकोला, वाशिम, हिंगोली और नांदेड़ जैसे शहरों के लिए भी राह आसान हो जाएगी.      गुजरात: इस प्रोजेक्ट से एमपी के खंडवा का सीधा कनेक्शन अहमदाबाद, वड़ोदरा जैसे बड़े शहरों से भी हो जाएगा.  मध्य प्रदेश के शहरों को फायदा यह कॉरिडोर मध्य प्रदेश के भीतर एक मजबूत कनेक्टिविटी जाल तैयार करेगा, क्योंकि इससे एमपी के कई बड़े शहर आपस में कनेक्ट होंगे. बैतूल, छिंदवाड़ा और नागपुर की तरफ से आने वाला ट्रैफिक खंडवा होते हुए इंदौर और भोपाल की तरफ बेहद आसानी से और कम समय में पूरा किया जा सकेगा. खंडवा, खरगोन और बड़वानी: निमाड़ अंचल के ये तीनों प्रमुख जिले इस हाईवे के जरिए सीधे बैतूल और छिंदवाड़ा से कनेक्ट हो जाएंगे।  सिंहस्थ-2028 में भी फायदा बैतूल-खंडवा-जुलवानिया फोरलेन से मध्य प्रदेश के मालवा और निमाड़ की कनेक्टिविटी भी मजबूत हो जाएगी. उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ-2028 के आयोजन के हिसाब से यह प्रोजेक्ट अहम साबित होगा. क्योंकि उज्जैन में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग और खंडवा जिले के मंधाता में ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के बीच भारी ट्रैफिक को सुचारू रूप से प्रबंधित करने में मदद करेगा. जिससे सिंहस्थ में महाराष्ट्र और गुजरात की तरफ से आने वाले यात्रियों को इस फोरलेन का फायदा होगा. इसलिए यह प्रोजेक्ट आने वाले समय में मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के व्यापारिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा।  बैतूल-खंडवा फोरलेन को केंद्र की मंजूरी  बैतूल से खंडवा के बीच बनने वाले इस प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार ने जून 2026 में मंजूरी दे दी है. इस परियोजना के लिए 4415.60 करोड़ रुपए का बजट तय किया गया है. जिसकी कुल दूरी 233.653 किलोमीटर होगी. फिलहाल इसे 4 लेन में विकसित किया जाएगा. जबकि भविष्य में इसे 6 लेन बनाने की योजना है. ताजा अपडेट के मुताबिक नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) इस प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार की जा रही है. जिसे मंजूरी मिलते ही इस पर काम शुरू हो जाएगा. जनवरी 2027 से इसका काम शुरू होने की संभावना है. खास बात यह है कि सभी ब्लैक स्पॉट्स खत्म होंगे, जिससे गाड़ियां 100 किलोमीटर की रफ्तार से चलेगी. वर्तमान में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को पूरा किया जा रहा है. उम्मीद जताई जा रही है कि साल 2029 के अंत तक या 2030 की शुरुआत में यह हाईवे पूरी तरह से बनकर तैयार हो जाएगा। 

छात्रों की पढ़ाई होगी आसान, ‘ई-ज्ञानसेतु’ YouTube चैनल पर मिलेंगे गुणवत्तापूर्ण वीडियो कंटेंट; 9 सितंबर को शुभारंभ

ई-ज्ञानसेतु YouTube चैनल पर विद्यार्थियों को मिलेंगे गुणवत्तापूर्ण ई-वीडियो कंटेंट मंत्री परमार 9 सितंबर को करेंगे ई-ज्ञानसेतु YouTube चैनल का शुभारंभ उच्च शिक्षा विभाग द्वारा क्षेत्रीय भाषाओं में शासकीय विश्वविद्यालय, महाविद्यालय के प्राध्यापकों एवं सहायक प्राध्यापकों से तैयार कराया गया है कंटेंट भोपाल  मध्यप्रदेश के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण डिजिटल अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने की दिशा में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा तैयार किए जा रहे ई-वीडियो कंटेंट अब 9 सितंबर 2026 से e-GyanSetu YouTube Channel पर उपलब्ध होंगे। ई- वीडियो कंटेंट के प्रकाशन का उच्च शिक्षा मंत्री इन्दर सिंह परमार द्वारा 9 सितंबर को शाम 5 बजे शुभारंभ किया जाएगा। कार्यक्रम का लाइव प्रसारण Google Meet एवं e-GyanSetu YouTube Channel के माध्यम से होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020 की भावना के अनुरूप तथा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं मंत्री परमार के मार्गदर्शन में प्रदेश के संभागीय मुख्यालयों में स्थापित 10 डिजिटल स्टूडियो के माध्यम से स्नातक स्तर के विभिन्न विषयों एवं पाठ्यक्रमों के लिए ई-कंटेंट तैयार किया जा रहा है। इस पहल के अंतर्गत कला, विज्ञान, वाणिज्य सहित विभिन्न विषयों के वीडियो व्याख्यान तैयार किए जा रहे हैं। अब तक 2,305 वीडियो शूट किए जा चुके हैं, जिनमें से 954 वीडियो का एडिटिंग कार्य पूर्ण हो चुका है । ई-वीडियो कंटेंट को विद्यार्थियों के लिए अधिक प्रभावी और रोचक बनाने के लिए ग्राफिक्स एवं डिजिटल विजुअल्स का उपयोग किया गया है। वीडियो की शैक्षणिक एवं विषयगत गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। ये वीडियो प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में कार्यरत प्राध्यापकों एवं सहायक प्राध्यापकों द्वारा तैयार किए जा रहे हैं। वीडियो की प्रमाणिकता एवं गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए तैयार ई-कंटेंट का विषयवस्तु, पाठ्यक्रमानुरूपता एवं शैक्षणिक गुणवत्ता के आधार पर Validation Board द्वारा परीक्षण एवं सत्यापन किया जाता है। सत्यापन के बाद ही वीडियो को विद्यार्थियों के लिए e-GyanSetu YouTube Channel पर प्रकाशित किया जाएगा। ई-कंटेंट निर्माण में प्रदेश की भाषाई विविधता का भी ध्यान रखा गया है। विद्यार्थियों की सुविधा के लिए बघेली, बुंदेली, मराठी तथा संस्कृत सहित क्षेत्रीय भाषाओं में भी वीडियो तैयार किए गए हैं। इससे अलग-अलग भाषाई पृष्ठभूमि वाले विद्यार्थियों तक डिजिटल अध्ययन सामग्री पहुँचाने में मदद मिलेगी। मंत्रालय में आयोजित बैठक में मंत्री परमार के समक्ष तैयार ई-कंटेंट वीडियो प्रदर्शित किए गए थे। बैठक में हुई चर्चा के दौरान मंत्री द्वारा वीडियो को शीघ्र e-GyanSetu YouTube Channel पर अपलोड एवं प्रकाशित किए जाने के निर्देश दिए गए। e-GyanSetu पर उपलब्ध वीडियो के माध्यम से विद्यार्थी अपनी सुविधा के अनुसार मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट अथवा अन्य डिजिटल माध्यमों से अध्ययन कर सकेंगे। इससे विद्यार्थियों को विषयवस्तु को दोहराने, कठिन टॉपिक्स को पुनः समझने तथा अपनी सीखने की गति के अनुसार अध्ययन करने की सुविधा मिलेगी। ई-कंटेंट निर्माण, एडिटिंग एवं सत्यापन की प्रक्रिया निरंतर जारी है। सत्यापन पूर्ण होने वाले वीडियो को चरणबद्ध रूप से e-GyanSetu YouTube Channel पर प्रकाशित किया जाएगा। इस पहल से प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण डिजिटल अध्ययन सामग्री की उपलब्धता को और व्यापक बनाने में सहायता मिलेगी।  

लाखों बहनों का भाई होना मेरा सौभाग्य : मंत्री सारंग

भोपाल  भाई-बहन के अपार स्नेह और विश्वास के प्रतीक विश्व के सबसे बड़े 'नरेला रक्षाबंधन महोत्सव' का मंगलवार को भव्य समापन हुआ। सहकारिता, खेल और युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग को इस वर्ष 1 लाख 89 हजार 159 बहनों ने रक्षासूत्र बांधकर आशीर्वाद प्रदान किया। बहनों की इस विराट सहभागिता ने पिछले वर्ष के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया। वर्ष 2025 में 1 लाख 84 हजार 632 बहनों ने सारंग को राखी बांधी थी, जबकि इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 1 लाख 89 हजार 159 हो गई। इस प्रकार महोत्सव ने एक बार फिर अपने ही पुराने रिकॉर्ड को तोड़ते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया। उल्लेखनीय है कि नरेला रक्षाबंधन महोत्सव पहले ही विश्व रिकॉर्ड के रूप में दर्ज हो चुका है। इस वर्ष बड़ी संख्या में विभिन्न धर्मों की बहनों की सहभागिता रही। मंत्री सारंग ने बहनों को संबोधित करते हुए कहा कि लाखों बहनों का भाई होना मेरा सबसे बड़ा सौभाग्य है। उन्होंने कहा कि बहनों का यही विश्वास और स्नेह मुझे क्षेत्र के समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य करने की शक्ति और प्रेरणा देता है। आगे उन्होंने कहा कि बहनों के आशीर्वाद से हर वर्ष इस महोत्सव का स्वरूप लगातार व्यापक होता जा रहा है और यह महोत्सव अब विश्वव्यापी रक्षाबंधन महोत्सव के रुप में अपनी पहचान बना चुका है। 18 वर्षों से कायम है स्नेह और विश्वास की परंपरा मंत्री सारंग ने कहा कि नरेला रक्षाबंधन महोत्सव भाई-बहन के रिश्ते में निहित प्रेम, विश्वास और सामाजिक एकजुटता का जीवंत प्रतीक बन चुका है। पिछले 18 वर्षों से नरेला विधानसभा के सभी 17 वार्डों सहित भोपाल के विभिन्न क्षेत्रों की बहनें इस आयोजन में उत्साहपूर्वक शामिल होती आ रही हैं। उन्होंने कहा कि हर वर्ष बढ़ती बहनों की संख्या इस बात का प्रमाण है कि यह आयोजन अब एक पारिवारिक परंपरा का स्वरूप ले चुका है। आगे उन्होंने कहा कि लाखों बहनें अपने ‘भैया’ विश्वास के प्रति स्नेह व्यक्त करने के लिए उत्साह के साथ पहुंचती हैं और रक्षासूत्र बांधकर अपना आशीर्वाद प्रदान करती हैं। विभिन्न धर्मों की बहनों ने की सहभागिता नरेला रक्षाबंधन महोत्सव-2026 में विभिन्न धर्मों की बहनों ने मंत्री सारंग को रक्षासूत्र बांधकर सामाजिक समरसता का संदेश दिया। मंत्री सारंग ने कहा कि विविधता में एकता ही भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता है। बड़ी संख्या में GenZ बहनें हुई शामिल नरेला रक्षाबंधन महोत्सव में बड़ी संख्या में GenZ बहनों की उत्साहपूर्वक भागीदारी की। GenZ बहनों ने पूरे उत्साह और आत्मीयता के साथ मंत्री सारंग को राखी बांधकर आशीर्वाद दिया। महोत्सव में युवा पीढ़ी का भारतीय परंपराओं एवं सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ाव की झलक दिखाई दी। लाखों बहनों का आशीर्वाद सबसे बड़ी ताकत समापन अवसर पर मंत्री विश्वास कैलाश सारंग बहनों के अपार स्नेह और आत्मीयता से भाव-विभोर नजर आए। उन्होंने कहा कि लाखों बहनों का आशीर्वाद मेरी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि नरेला परिवार की बहनें हर वर्ष लाखों की संख्या में पहुंचकर मुझे अपना स्नेह और आशीर्वाद प्रदान करती हैं। बहनों का यही विश्वास और स्नेह मुझे नरेला क्षेत्र के समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य करने की शक्ति और प्रेरणा देता है। मंत्री सारंग ने कहा कि रक्षाबंधन केवल रक्षासूत्र बांधने का पर्व नहीं बल्कि एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी, सम्मान, सुरक्षा और विश्वास का संकल्प लेने का भी अवसर है। नरेला रक्षाबंधन महोत्सव ने इसी भावना को व्यापक सामाजिक सरोकार से जोड़ते हुए एक ऐसी मिसाल कायम की है, जिसमें जनप्रतिनिधि और जनता के बीच का रिश्ता एक आत्मीय पारिवारिक रिश्ते में बदल जाता है। बहनों के आशीर्वाद से टूटा पिछला रिकॉर्ड वर्ष 2025 में 1 लाख 84 हजार 632 बहनों ने सारंग को राखी बांधी थी, जबकि इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 1 लाख 89 हजार 159 हो गई। पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए स्थापित हुआ यह नया कीर्तिमान केवल संख्या का रिकॉर्ड नहीं बल्कि बहनों के अटूट स्नेह, विश्वास और आशीर्वाद का प्रमाण है। 18 वर्षों की इस स्नेहिल परंपरा ने यह संदेश दिया है कि जब रिश्तों में विश्वास और समाज में अपनत्व हो, तो कोई भी आयोजन जनआंदोलन का स्वरूप ले सकता है। नरेला रक्षाबंधन महोत्सव इसी आत्मीयता, विश्वास और सामाजिक समरसता की भावना के साथ एक बार फिर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। अंतिम दिन भी हज़ारों बहनों ने बांधे रक्षासूत्र महोत्सव के अंतिम दिन मंगलवार को वार्ड क्रमांक 38 एवं 77 में आयोजित कार्यक्रमों में भी बहनों का उत्साह देखते ही बनता था। अपने ‘भैया’ विश्वास सारंग को रक्षासूत्र बांधने के लिए बहनें बड़ी संख्या में पहुंचीं और लंबी कतारों में अपनी बारी का इंतजार करती रहीं। अंतिम दिन आयोजित कार्यक्रम में 28 हजार 742 बहनों ने सारंग को रक्षासूत्र बांधा। मंत्री सारंग ने भी प्रत्येक बहन से रक्षासूत्र बंधवाकर उनका आशीर्वाद लिया और सभी बहनों के प्रति आभार व्यक्त किया।