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बैंक घोटाले में ED की कार्रवाई तेज, AAP नेता दीपक सिंगला हिरासत में; आतिशी का BJP पर हमला

नई दिल्ली प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता दीपक सिंगला को गिरफ्तार कर लिया है. ईडी ने सोमवार सुबह सिंगला सहित कुछ अन्य लोगों से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की. यह कार्रवाई कथित बैंक लोन फ्रॉड और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई।  सूत्रों के अनुसार, एजेंसी कथित वित्तीय अनियमितताओं और संदिग्ध बैंक लोन ट्रांजैक्शन की जांच कर रही है. हालांकि इस मामले में अभी तक ED की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।  बताया जा रहा है कि कार्रवाई के दौरान कई दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन से जुड़े अहम सबूत खंगाले जा रहे हैं. फिलहाल दीपक सिंगला की ओर से इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।  वहीं दीपक सिंगला के ठिकानों पर ED की तलाशी पर AAP नेता और गोवा प्रभारी आतिशी ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, ‘गोवा में आप की बढ़ती लोकप्रियता के चलते बीजेपी के गोवा के सह प्रभारी दीपक सिंगला के यहां ED को भेजा है. ये ना सिर्फ वालेंटियर्स को डराने, बल्कि गोवा AAP संगठन के डाटा को हथियाने का प्रयास है।  दीपक सिंगला के आवास पर 2024 में भी हुई थी छापेमारी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के ठीक बाद, 27 मार्च 2024 को मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में मधु विहार (दिल्ली) स्थित उनके आवास और अन्य ठिकानों पर ईडी ने छापेमारी की थी। राम सिंह कौन हैं राम सिंह बाबा जी फाइनेंस एक वित्तीय मध्यस्थ बताए जा रहे हैं जिससे लोग बैंकिंग लेनदेन के रूप में अल्पकालिक ऋण लेते थे और एक निश्चित पूर्व-निर्धारित अवधि के बाद उसे बैंकिंग लेनदेन के रूप में ही लौटा देते थे। ईडी अब इस बात की जांच कर रही है कि लोगों से जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल कहां और कैसे किया गया। मामले में मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय गड़बड़ी की जांच की जा रही है। सिंगला आम आदमी पार्टी (AAP) की ओर से विश्वास नगर विधानसभा सीट से उम्मीदवार रह चुके हैं. वर्ष 2024 में भी एक जांच के सिलसिले में ED ने उनके ठिकानों पर छापा मारा था। इसी बीच ED ने एक अलग मामले में भी छापेमारी की है. यह मामला करीब 180 करोड़ रुपये के कथित निवेश घोटाले से जुड़ा है, जिसमें लोगों को निवेश के नाम पर ठगी का शिकार बनाया गया। अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली के सुभाष नगर स्थित बाबाजी फाइनेंस ग्रुप से जुड़े राम सिंह नामक व्यक्ति के परिसरों पर भी ED ने तलाशी ली. एजेंसी इस मामले में कथित धोखाधड़ी और मनी ट्रेल की जांच कर रही है. सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और लोगों से पूछताछ हो सकती है तथा जांच का दायरा बढ़ाया जा सकता है। 

30 दिन में फाइल निपटाओ वरना सस्पेंशन तय: बिहार सरकार का सख्त संदेश

पटना बिहार में जनता की समस्याओं के समाधान का फाइल लटकाने वालों अफसरों पर कार्रवाई शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अफसरों को दो टूक शब्दों में संदेश था कि कि हर हाल में जनता की समस्याओं का समाधान कम से कम समय में करना पड़ेगा। सीएम के ऐलान के बाद पहला विकेट मुजफ्फरपुर में गिरा। जिले में एक राजस्व अधिकारी को लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। भूमि सुधार एवं राजस्व मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा है कि इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। मंत्री ठीक से काम करेगा तो अधिकाकारियों और कर्मचारियों को भी अपने दायित्यव का समय से पालन करना पड़ेगा। भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई है। इसी के तहत मुजफ्फरपुर के कुढनी में पदस्थापित राजस्व अधिकारी धर्मेंद्र कुमार को सस्पेंड कर दिया गया है। इस विभाग पर भ्रष्टाचार का सबसे अधिक आरोप लगता है। इसने कैंसर रोग की तरह विभाग को जकड़ लिया है। इसलिए एंटिबायोटिक से इलाज शुरू हो गया है। धर्मेंद्र कुमार पर कई बार काम में लापरवाही के आरोप लगे। यह सभी अधिकारियों के लिए एक मैसेज है। तीन महीनों तक हड़ताल के कारण काम काफी पीछे पड़ गया है। अधिकारियों को दिन रात एक करके इमानदारी के साथ काम करना पड़ेगा। जब मंत्री इमानदारी से काम करेंगे तो अधिकारियों और कर्मियों को भी अपने कार्य व्यवहार में सुधार लाना पड़ेगा। दिलीप जायसवाल ने कहा कि लापरवारी पर कार्रवाई यहीं नहीं रुकेगी। माननीय मुख्यमंत्री ने भी साफ कर दिया है कि जनता का काम सफर नहीं करना चाहिए। इसके लिए तीस दिनों का समय भी तय कर दिया गया है। इस समय सीमा का पालन होना चाहिए। जो कोताही बरतेंगे वे नप जाएंगे। उन्हें कोई नहीं बचा पाएगा। मुख्यमंत्री के निर्देश को जमीन पर उतारा जाएगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बीते 11 मई को ही साफ कर दिया था कि किसी भी फाइल को 30 दिनों में निष्पादित कर देना पड़ेगा। ऐसा नहीं करने पर 31वें दिन अधिकारी सस्पेंड हो जाएंगे। मुख्यमंत्री ने सहयोग पोर्टल और सहयोग हेल्पलाइन नंबर 1100 का भी शुभारंभ किया था। सोमवार को उन्होंने फिर से यह बात दोहराई। कहा कि फाइलों को अटकाना और भटकाना नहीं है। जो मामले न्यायालय से संबंधित हैं उनमें भी तीस दिनों के अंदर कोई ना कोई ऐक्शन दिखना चाहिए। अंतिम नहीं तो अंतरिम आदेश तो होना ही चाहिए। ऐसे मामलों में अधिकारियों को 10 दिन और 20 दिनों पर नोटिस दी जाएगी। 25वें दिन की नोटिस के बाद ऐसे अधिकारी खुद को निलंबित समझें।

हुड्डा को हाई कोर्ट से बड़ा झटका, AJL प्लॉट मामले में ED की अर्जी पर जारी हुआ नोटिस

चंडीगढ़. हरियाणा के बहुचर्चित एजेएल (एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड) प्लाट आवंटन मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा व अन्य आरोपितों की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती दिखाई दे रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पंचकूला की विशेष पीएमएलए अदालत द्वारा मनी लान्ड्रिंग मामले की कार्यवाही बंद करने के आदेश को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में चुनौती दी है। ईडी की ओर से दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका में न केवल निचली अदालत के 3 अप्रैल 2026 के आदेश को रद्द करने की मांग की गई है, बल्कि उस पर तत्काल अंतरिम रोक लगाने की भी अपील की गई है। पूरा मामला पंचकूला सेक्टर-6 स्थित प्लाट नंबर सी-17 से जुड़ा है, जिसे वर्ष 2005 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान एजेएल को दोबारा आवंटित किया गया था। आरोप है कि यह बहुमूल्य भूखंड वर्ष 1982 की पुरानी दरों करीब 91 रुपये प्रति वर्ग मीटर पर दिया गया, जबकि उस समय बाजार मूल्य कहीं अधिक था। जांच एजेंसियों के अनुसार इस निर्णय से सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा। इसी आधार पर ईडी ने वर्ष 2016 में धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया और वर्ष 2018 में लगभग 64 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति को कुर्क कर लिया था। मामले में महत्वपूर्ण मोड़ 25 फरवरी 2026 को आया, जब पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने मूल आपराधिक मामले में आरोपितों को राहत प्रदान की। इसके बाद पंचकूला की विशेष पीएमएलए अदालत ने यह कहते हुए ईडी की कार्यवाही समाप्त कर दी कि जब मूल अपराध ही समाप्त हो गया तो मनी लॉन्ड्रिंग की कार्यवाही स्वत टिक नहीं सकती। हालांकि अदालत ने यह छूट दी थी कि यदि भविष्य में सुप्रीम कोर्ट मूल मामले को बहाल करता है तो ईडी पुन कार्रवाई शुरू कर सकती है। अब ईडी ने हाई कोर्ट में दलील दी है कि पीएमएलए अदालत ने कानून की गलत व्याख्या की। एजेंसी के अनुसार मनी लॉन्ड्रिंग एक स्वतंत्र अपराध है और ‘विजय मदनलाल चौधरी’ मामले में सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट कर चुका है कि अपराध से अर्जित संपत्ति की जांच केवल मूल एफआईआर पर निर्भर नहीं रहती। ईडी ने यह भी बताया कि सीबीआई पहले ही हाई कोर्ट के फरवरी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे चुकी है, जहां नोटिस जारी हो चुका है। ऐसे में कार्यवाही बंद रहने से कुर्क संपत्ति मुक्त कराने की कोशिशें जांच को अपूरणीय क्षति पहुंचा सकती हैं। सोमवार को हाई कोर्ट के जस्टिस त्रिभुवन दहिया ने याचिका पर सुनवाई करते हुए भूपेंद्र सिंह हुड्डा व अन्य आरोपितों को आठ जुलाई के लिए नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

साइबर ठगों का बड़ा नेटवर्क बेनकाब, लुधियाना में 450 फर्जी खातों से चल रहा था करोड़ों का खेल

लुधियाना  फिरोजपुर रोड पर दो साइबर ठगी सेंटरों पर रेड करने के बाद गिरफ्तार किए गए 132 आरोपितों से पूछताछ में कई अहम राजफाश हुए हैं। विदेश से होने वाली करोड़ों की ट्रांजेक्शन जिन बैंक खातों में की जाती थी, वे म्यूल अकाउंट्स हैं। पुलिस ने अभी तक 450 खातों को खंगाला है, जिनमें करोड़ों रुपये की ट्रांजेक्शन हुई है। अब पुलिस इन खातों की डिटेल्स को निकालने में जुटी है। वहीं, इस मामले में लुधियाना से दिल्ली और गुजरात गई पुलिस की टीमों ने चार किंगपिन गिरफ्तार किए हैं, जोकि इस ठगी के नेटवर्क को ऑपरेट कर रहे थे। पुलिस उन्हें लुधियाना लाकर पूछताछ करेगी। गौरतलब है कि 13 मई को साइबर सेल और दो थानों की टीम ने दो साइबर ठगी सेंटरों पर रेड की थी। यहां से पुलिस ने 132 आरोपितों को गिरफ्तार किया था और उनसे 1.07 करोड़ रुपये, 229 मोबाइल, 98 लैपटाप और 19 गाड़ियां बरामद की थीं। आरोपित नार्थ अमेरिका और यूरोप के लोगों को स्पैम और हैकिंग का डर दिखाकर उनके खाते खाली कर देते थे। किराये पर लिए खातों में ट्रांसफर हुए करोड़ों मामले की शुरुआती जांच में पुलिस को 300 खाते मिले थे, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती रही, वैसे-वैसे खातों की संख्या भी बढ़ती गई। अब इन खातों की संख्या 450 हो गई है। ये सभी खाते लोगों के आईडी प्रूफ का प्रयोग करके खुलवाए गए हैं। इसके बदले में खाता देने वाले लोगों को पांच से 10 हजार रुपये किराये के तौर पर हर माह दिए जाते हैं। पैसा घुमाने और ठगी के पैसे को ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था। ये खाते पंजाब, दिल्ली, गुजरात, बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों के नाम से खुले हुए हैं। अब पुलिस इन खातों की डिटेल को खंगालने में जुटी है, क्योंकि इन खातों में ही चार से पांच करोड़ रुपये की ट्रांजेक्शन हो चुकी है। पुलिस अब इन खाता धारकों की भी पड़ताल कर रही है। आईटी कंपनी का हवाला देकर लेते थे ऑफिस स्पेस आरोपित जहां भी ऑफिस लेते थे, वहां ये कहा जाता था कि उन्होंने आईटी कंपनी का ऑफिस खोलना है, जोकि रात में ज्यादा काम करते हैं, क्योंकि उनकी डीलिंग विदेशी लोगों से होती है। इसलिए उनका ऑफिस 24 घंटे खुला रहता था। यहां दो से तीन शिफ्ट में काम होता था। किराया जितना उन्हें बिल्डिंग का मालिक कहता था, उससे ज्यादा ही देते थे। म्यूल अकाउंट कैसे इस्तेमाल होते हैं?     किसी व्यक्ति से आनलाइन फ्राड किया जाता है। जैसे फर्जी काल, यूपीआइ फ्राड, निवेश स्कैम, लोन एप, ओटीपी स्कैम आदि।     ठगी का पैसा सीधे अपराधी के खाते में नहीं जाता बल्कि कई अलग-अलग बैंक खातों में भेजा जाता है।     पैसा तेजी से आगे ट्रांसफर किया जाता है, ताकि पुलिस या बैंक ट्रैक न कर सकें।     अंत में पैसा नकद निकाला जाता है, क्रिप्टो/सट्टेबाजी/हवाला आदि में भेज दिया जाता है। क्या है म्यूल अकाउंट? म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी चोरी या ठगी के पैसों को इधर-उधर ट्रांसफर करने, छिपाने या सफेद दिखाने के लिए करते हैं। खाते का मालिक कई बार जानबूझकर शामिल होता है, और कई बार उसे पता भी नहीं होता कि उसका अकाउंट अपराध में इस्तेमाल हो रहा है।  

जोधपुर कांकाणी केस: सलमान खान समेत अन्य आरोपियों की अपील पर राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई आगे बढ़ी

जोधपुर जोधपुर के बहुचर्चित कांकाणी काला हिरण शिकार मामले में सोमवार को राजस्थान हाई कोर्ट में एक बार फिर हलचल देखने को मिली. बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान समेत अन्य फिल्मी सितारों से जुड़े इस चर्चित केस की सुनवाई न्यायाधीश रेखा बोराणा की अदालत में हुई.  कोर्ट से तैयारी के लिए मांगा समय सुनवाई के दौरान सलमान खान और अन्य कलाकारों सैफ अली खान, तब्बू, नीलम और सोनाली बेंद्रे की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने अदालत से अतिरिक्त समय मांगा है. बचाव पक्ष का कहना था कि मामले से जुड़े कुछ दस्तावेजों, तथ्यों का और अध्ययन किया जाना बाकी है, इसलिए उन्हें तैयारी के लिए समय दिया जाए. कोर्ट ने 13 जुलाई का दिया समय राज्य सरकार की अपील और सलमान खान की सजा के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई होनी थी. अधिवक्ता महिपाल बिश्नोई ने बताया कि दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को तय की है. काला हिरण शिकार का मामला साल 1998 में फिल्म 'हम साथ-साथ हैं' की शूटिंग के दौरान जोधपुर के कांकाणी गांव में काला हिरण शिकार का मामला सामने आया था. इस मामले में सलमान खान को 5 साल की सजा हुई थी.  मामले में सह आरोपी फिल्म अभिनेता सैफ अली खान, अभिनेत्री नीलम, तब्बू, सोनाली बेंद्रे और दुष्यंत सिंह को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था.   दो अपीलों पर सुनवाई हाेनी थी इनके बरी होने पर राज्य सरकार की तरफ से 'लीव टू अपील' दायर की गई थी, इसके अलावा सलमान खान की ट्रांसफर पिटीशन पर भी सुनवाई हुई.   विश्नोई समाज के अधिवक्ता महिपाल विश्नोई ने बताया कि जस्टिस रेखा बोराणा की कोर्ट में दो मुख्य अपीलों में सुनवाई होनी थी. पहली अपील सलमान खान की ओर से अधीनस्थ कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर की गई थी.  पूर्व में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट ने सलमान खान को 5 साल के कारावास और 25,000 रुपए के जुर्माने से दंडित किया था.  दूसरी अपील राज्य सरकार की ओर से सैफ अली खान, सोनाली बेंद्रे, तब्बू, नीलम और दुष्यंत सिंह को बरी किए जाने के खिलाफ पेश 'लीव टू अपील' में शामिल थी.  सह-अभियुक्तों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया था. राज्य सरकार ने इन्हें बरी करने के आदेश को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी है. एडवोकेट महिपाल विश्नोई ने बताया कि सलमान खान एवं सैफ अली खान के वकीलों ने बहस के लिए समय देने की मांग की, जिसे स्वीकार करते हुए हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई को 13 जुलाई को नियत की है.

पानी पर बढ़ी सियासत, रावी-ब्यास विवाद के बीच पंजाब सरकार का बड़ा कदम

चंडीगढ़. पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में रावी व ब्यास नदी के लंबे समय से चले आ रहे जल विवाद को हल करने के लिए जस्टिस विनीत सरन (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता वाला ट्रिब्यूनल ने रविवार को पंजाब का दौरा किया। इस दौरान पंजाब सरकार ने ट्रिब्यूनल के समक्ष राज्य में घटती जल उपलब्धता, सीमावर्ती क्षेत्रों में नहरों के पानी की कमी और पाकिस्तान की ओर से सतलुज में आ रहे प्रदूषित पानी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। अधिकारियों ने ट्रिब्यूनल को बताया कि मौजूदा स्थिति में पंजाब के पास पानी की बहुत कमी है। इससे वह अपने राज्य की जरूरतों को भी पूरा नहीं कर पा रहा। ऐसे में नदियों का जल आवंटन नए सिरे से होना चाहिए। जल संसाधन विभाग की ओर से ट्रिब्यूनल को विभिन्न स्थलों का दौरा करवाकर मौजूदा हालात से भी अवगत कराया गया। सीएम भगवंत मान ने अमृतसर में ट्रिब्यूनल के सदस्यों को रात्रिभोज दिया। तीन सदस्यीय ट्रिब्यूनल शनिवार शाम अमृतसर पहुंचा था और रविवार को हरिके हेडवर्क्स, फिरोजपुर के बल्लेवाल हेडवर्क्स तथा हुसैनीवाला क्षेत्र का निरीक्षण किया। पंजाब सरकार के अधिकारियों ने ट्रिब्यूनल को रावी-ब्यास नदियों में मौजूदा जल प्रवाह, नहरों में पानी की उपलब्धता और राज्य के विभिन्न हिस्सों में उसके उपयोग का ब्यौरा दिया। टीम ने पानी की कुल आवक, निकासी और वितरण प्रणाली की समीक्षा की। पंजाब सरकार ने ट्रिब्यूनल को यह भी बताया कि सीमावर्ती बेल्ट में नहरों में पानी की कमी लगातार बढ़ रही है। कई क्षेत्रों में किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा, जिससे खेती प्रभावित हो रही है। सरकार ने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा जल बंटवारा पुराने आंकड़ों पर आधारित है, जबकि नदियों में पानी की उपलब्धता में पिछले चार दशकों में काफी कमी आई है। अधिकारियों ने ट्रिब्यूनल के समक्ष आंकड़े रखे कि वर्ष 1981 में रावी-ब्यास नदियों में 17.17 एमएएफ पानी उपलब्ध था, जो वर्ष 2021 में घटकर लगभग 13 एमएएफ रह गया। राज्य सरकार ने कहा कि कम होती जल उपलब्धता को देखते हुए पानी के बंटवारे की व्यवस्था की नए सिरे से समीक्षा की जानी चाहिए। दौरे के समापन के बाद ट्रिब्यूनल अब राजस्थान का दौरा करेगा, जहां संबंधित क्षेत्रों का निरीक्षण कर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। पंजाब सरकार को उम्मीद है कि जमीनी निरीक्षण के दौरान रखे गए तथ्यों से राज्य के दावे को मजबूती मिलेगी। पाकिस्तान से आ रहे प्रदूषित पानी का मुद्दा भी उठाया सरकार ने दौरे के दौरान ट्रिब्यूनल को फिरोजपुर के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी ले जाया गया, जहां पाकिस्तान के कसूर क्षेत्र से सतलुज नदी में आने वाले प्रदूषित पानी का असर दिखाया। अधिकारियों ने बताया कि कसूर के चमड़ा उद्योगों से निकलने वाला दूषित पानी सीमा पार कर पंजाब के हिस्से में पहुंचता है, जिससे नदी के पानी की गुणवत्ता प्रभावित है। इससे खेती, पशुपालन और स्थानीय आबादी पर भी असर पड़ रहा है। राज्य सरकार ने इसे जल संसाधनों के उपयोग से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए ट्रिब्यूनल के समक्ष रखा।

तेज रफ्तार बनी काल! जगदलपुर हाईवे पर बस हादसे में एक की मौत, कई यात्री जख्मी

जगदलपुर. जगदलपुर: बस्तर के नेशनल हाइवे 30 में यात्री बस अनियंत्रित होकर पलट गई है. इस हादसे में 1 महिला की मौत हो गई. कई यात्री घायल हैं. जिस महिला की मौत हुई है वह टीचर है. बस में कुल 34 यात्री सवार थे. मिली जानकारी के अनुसार रॉयल ट्रेवल्स की बस रायपुर से कोंटा के लिए निकली थी. इसी दौरान बस्तर में तड़के सुबह हादसे का शिकार हो गई.बालेंगा कोसा सेंटर के पास बस अनियंत्रित होकर पलट गई. वाहन पलटने से यात्रियों को काफी नुकसान हुआ है. घटना में एक महिला यात्री की बस में दबने से मौत हो गई है. डिमरापाल अस्पताल में घायलों का इलाज वहीं बस पलटने से लगभग 10 से 15 यात्री घायल हैं. जिन्हें 108 व निजी वाहनों से डिमरापाल अस्पताल पहुंचाया गया है. जहां उनका इलाज जारी है. बताया जा रहा है कि घायलों की स्थिति खतरे से बाहर है. सुकमा में टीचर के पद पर पदस्थ थी महिला इधर मृतका के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है और परिजनों को इसकी सूचना दे दी गई है. परिजनों की उपस्थिति में पोस्टमॉर्टम प्रकिया सम्पन्न कराने के बाद शव उन्हें सौंप दिया जाएगा. मृतका का नाम पदमनी चंद्रवंशी है. जो कवर्धा की निवासी है. सुकमा जिले के दोरनापाल में शिक्षिका का काम करती थी. 

रायगढ़ दौरे पर वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, प्रमुख विकास परियोजनाओं का किया निरीक्षण

वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने रायगढ़ की प्रमुख विकास परियोजनाओं का किया निरीक्षण मरीन ड्राइव, नया बस स्टैंड, किसान राइस मिल ऑक्सीजोन और दूध डेयरी ऑक्सीजोन के कार्यों की प्रगति की समीक्षा गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निर्माण कार्य सुनिश्चित करने अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश रायपुर  वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने रायगढ़ शहर में संचालित विभिन्न महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं का स्थल निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने मरीन ड्राइव, नए बस स्टैंड, किसान राइस मिल परिसर में विकसित किए जा रहे ऑक्सीजोन तथा दूध डेयरी ऑक्सीजोन के निर्माण कार्यों का अवलोकन किया। चौधरी ने अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों को निर्देशित किया कि सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण हों तथा गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए। वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से रायगढ़ शहर को आधुनिक और सुव्यवस्थित आधारभूत सुविधाएं मिलेंगी। मरीन ड्राइव शहरवासियों के लिए आकर्षक सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित होगा, नया बस स्टैंड यात्रियों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करेगा, जबकि ऑक्सीजोन परियोजनाएं पर्यावरण संरक्षण के साथ नागरिकों को स्वच्छ और हरित वातावरण उपलब्ध कराएंगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य विकास कार्यों के माध्यम से नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना है। इसके लिए सभी परियोजनाओं की नियमित निगरानी की जा रही है ताकि जनता को जल्द से जल्द इनका लाभ मिल सके। इस अवसर पर संबंधित विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और निर्माण एजेंसियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

CM योगी से चेक पाकर भावुक हुए अनुदेशक, बोले- सरकार ने हमें सम्मान दिया

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों चेक पाकर भावुक हुए अनुदेशक, कहा- सरकार ने दिया सम्मान लोकभवन में आयोजित समारोह में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए 14 अनुदेशकों को दिया गया बढ़े हुए मानदेय का चेक अब मानदेय 17 हजार रुपये प्रतिमाह और कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिलने से अनुदेशकों में खुशी की लहर  लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्यरत हजारों अंशकालिक अनुदेशकों को बड़ी सौगात देते हुए उनके मानदेय में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की है। इसके बाद प्रदेशभर के अनुदेशकों में खुशी की लहर है। रविवार को लखनऊ स्थित लोकभवन सभागार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों चेक पाकर अनुदेशकों के चेहरे भी खुशी से खिल उठे। सभी अनुदेशकों ने एक स्वर में मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार ने उनकी वर्षों पुरानी मांग पूरी कर उन्हें सम्मान देने का काम किया है। अनुदेशकों का 9 हजार से बढ़कर 17,000 रुपये हुआ मानदेय दरअसल 24717 अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय वृद्धि 1 अप्रैल 2026 से 9 हजार रुपये बढ़ाकर 17 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया है। इस उपलक्ष्य में लोकभवन में अनुदेशक सम्मान समारोह एवं चेक वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।  आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चयनित 14 अनुदेशकों को चेक वितरित कर उन्हें सम्मानित किया। मुख्यमंत्री के हाथों चेक पाकर अनुदेशकों के चेहरे खिल उठे। उन्होंने इसे योगी सरकार की संवेदनशीलता और शिक्षा कर्मियों के प्रति सम्मान की भावना बताया। रायबरेली की अनुदेशक शिखा सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री के हाथों चेक पाकर उन्हें बेहद खुशी हुई है।  मानदेय 17 हजार रुपये होने से बड़ी राहत मिलेगी- अनुदेशक शिखा सिंह ने बताया कि पहले 9 हजार रुपये में परिवार चलाना मुश्किल होता था, लेकिन अब सीधे 17 हजार रुपये मानदेय मिलने से बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार ने अनुदेशकों की समस्याओं को गंभीरता से समझा है। ऐसे ही लखनऊ के कौशलेन्द्र सिंह चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री ने न केवल मानदेय बढ़ाया है बल्कि अनुदेशकों के लिए 5 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा भी लागू किया है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार पहले भी अनुदेशकों का मानदेय बढ़ा चुकी है और इस बार एक साथ 8 हजार रुपये की वृद्धि कर सरकार ने बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री का यह निर्णय अनुदेशकों के आत्मसम्मान और आर्थिक मजबूती दोनों को बढ़ाएगा। पहली बार हमारे लिए इतना भव्य सम्मान समारोह- अनुदेशक अयोध्या के उपेंद्र कुमार शुक्ला ने कहा कि सेवा में आने के बाद पहली बार अनुदेशकों के लिए इतना भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया गया है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से कम मानदेय में कार्य करने के बावजूद अनुदेशक पूरी निष्ठा से बच्चों को शिक्षित कर रहे थे, लेकिन अब सरकार ने उनकी मेहनत को सम्मान दिया है। वहीं गोरखपुर के देवेंद्र लाल ने कहा कि पहले 7 हजार रुपये में जीवन यापन बेहद कठिन था, लेकिन योगी सरकार ने पहले इसे 9 हजार और अब 17 हजार रुपये तक पहुंचाकर बड़ी राहत दी है।  मुख्यमंत्री ने होलिस्टिक रिपोर्ट कार्ड का किया विमोचन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया। उन्होंने 'होलिस्टिक रिपोर्ट कार्ड’ का विमोचन किया। जिसे बाल वाटिका से कक्षा 8 तक के विद्यार्थियों के लिए तैयार किया गया है। इस रिपोर्ट कार्ड में केवल शैक्षणिक प्रदर्शन ही नहीं बल्कि विद्यार्थियों के शारीरिक, सामाजिक, भावनात्मक, संज्ञानात्मक और व्यक्तित्व विकास का भी समग्र मूल्यांकन किया जाएगा। इसे नई शिक्षा नीति के अनुरूप एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इन 14 अनुदेशकों को सौंपे चेक मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए अनुदेशकों को चेक सौंपे। इनमें गोरखपुर के देवेंद्र लाल, वाराणसी के सुभाष सिंह, अयोध्या के उपेंद्र कुमार शुक्ला, लखीमपुर खीरी के प्रवीण राणा, रायबरेली की शिखा सिंह, बाराबंकी की हिना खातून और दीप्ति वर्मा, सीतापुर की प्राची मिश्रा, हमीरपुर के कामता प्रसाद राजपूत, लखनऊ के कौशलेन्द्र सिंह और सुमित पाल, अलीगढ़ की सलोनी कसेरे, उन्नाव की रश्मि यादव तथा हरदोई की रश्मि सिंह शामिल रहे। योगी सरकार ने 2022 में भी 2 हजार रुपये बढ़ाया था मानदेयः संदीप सिंह इस अवसर पर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में हुए व्यापक सुधारों को लेकर बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा के लिए 9,645 तथा कार्यानुभव शिक्षा के लिए 6,192 अनुदेशक कार्यरत हैं, जो विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वर्ष 2022 में सरकार ने अनुदेशकों का मानदेय 7 हजार रुपये से बढ़ाकर 9 हजार रुपये किया था और अब इसे बढ़ाकर 17 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। इसे शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत कर्मियों के हित में सरकार का बड़ा कदम माना जा रहा है। मंत्री संदीप सिंह ने बताया कि प्रदेश में शिक्षा के आधुनिकीकरण की दिशा में भी तेजी से काम किया जा रहा है। वर्तमान में 1,129 विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी संचालित हैं, जहां विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही प्रदेश में 746 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय संचालित हैं और शेष सभी ब्लॉकों में भी बालिकाओं के लिए आवासीय विद्यालय स्थापित करने की कार्ययोजना पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 1,64,882 बच्चों को निःशुल्क सहायक उपकरण भी वितरित किए गए हैं।

आधुनिक तकनीक और नई नीतियों के दम पर योगी सरकार का बड़ा कृषि विजन

योगी सरकार स्मार्ट कृषि, आधुनिक तकनीक और बाजार उन्मुख नीतियों से प्रदेश को बनाएगी कृषि विकास का राष्ट्रीय मॉडल   – वर्ष 2047 तक वैश्विक कृषि केंद्र बनेगा उत्तर प्रदेश, विश्वस्तरीय कृषि हब बनेगा उत्तर प्रदेश – विश्व बैंक समर्थित यूपी एग्रीज परियोजना से पिछड़े क्षेत्रों में कृषि और मत्स्य पालन को मिल रहा बढ़ावा लखनऊ  योगी सरकार कृषि क्षेत्र में तेजी से बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रही है। योगी सरकार स्मार्ट कृषि, आधुनिक तकनीक, बाजार-उन्मुख नीतियों और किसानों की आय बढ़ाने वाली योजनाओं के माध्यम से प्रदेश को देश का अग्रणी कृषि मॉडल बनाने की दिशा में काम कर रही है। योगी सरकार का वर्ष 2047 तक उत्तर प्रदेश को सतत, उच्च-मूल्य एवं निर्यात-उन्मुख कृषि का वैश्विक केंद्र बनाने का लक्ष्य है।   राष्ट्रीय कृषि निर्यात में प्रदेश की हिस्सेदारी को 15 प्रतिशत से अधिक तक ले जाने का लक्ष्य  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2047 के लिए कृषि क्षेत्र के व्यापक लक्ष्य भी निर्धारित किए हैं। योगी सरकार का लक्ष्य अनाज, दलहन और तिलहन की उत्पादकता में कई गुना वृद्धि करना है। फसल तीव्रता को 250 प्रतिशत से अधिक तक पहुंचाने, फसलोपरांत नुकसान को 4 प्रतिशत से कम करने और राष्ट्रीय कृषि निर्यात में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी को 15 प्रतिशत से अधिक तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही जैविक खेती के दायरे को भी तेजी से बढ़ाने की योजना है। वहीं कृषि उत्पादकता बढ़ाने, कृषि निर्यात को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन देने और आधुनिक तकनीकों को खेती से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी का परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख कृषि क्षेत्र में मॉडल बनकर उभरा है। उत्तर प्रदेश खाद्यान्न, गेहूं, आलू, गन्ना, सब्जियों और शहद के उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर है। कृषि क्षेत्र में प्रदेश का योगदान लगातार बढ़ रहा है और कृषि सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में उत्तर प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर पहुंच चुका है। वर्तमान में प्रदेश का कृषि सकल मूल्य वर्धन लगभग 4.66 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो प्रदेश की जीएसवीए का लगभग 15.7 प्रतिशत है। कृषि निर्यात में 2.13 गुना वृद्धि दर्ज की गई  वर्ष 2017 से 2025 के बीच कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज की गई हैं। इस दौरान गेहूं की पैदावार में 16 प्रतिशत, अनाज उत्पादन में 17 प्रतिशत, तिलहन उत्पादन में 34 प्रतिशत और दलहन उत्पादन में 26 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। योगी सरकार ने कृषि क्षेत्र को केवल उत्पादन तक सीमित न रखते हुए इसे बाजार और निर्यात से जोड़ने की दिशा में भी बड़े कदम उठाए हैं। प्रदेश से कृषि निर्यात में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई है। कृषि निर्यात में 2.13 गुना वृद्धि दर्ज की गई है और वित्तीय वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर लगभग 7,139 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। योगी सरकार किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने, कृषि उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने और निर्यात मानकों के अनुरूप उत्पादन को बढ़ावा देने पर काम कर रही है। कुल सिंचित क्षेत्र में 33 प्रतिशत की वृद्धि  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिंचाई और फसल विविधीकरण को भी प्राथमिकता दी है। सूक्ष्म सिंचाई व्यवस्था के विस्तार से किसानों को कम पानी में अधिक उत्पादन का लाभ मिल रहा है। प्रदेश में कुल सिंचित क्षेत्र में 33 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। तिलहन क्षेत्रफल में 141 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि दलहन उत्पादन में 17 प्रतिशत और अनाज उत्पादन में 36 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इससे किसानों की आय में सुधार के साथ खेती अधिक लाभकारी बन रही है। इसके अलावा स्मार्ट कृषि, ड्रोन तकनीक, डिजिटल कृषि सेवाएं, जैविक खेती और कृषि आधारित स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन देकर खेती को आधुनिक बनाया जा रहा है। साथ ही विश्व बैंक समर्थित यूपी एग्रीज परियोजना भी प्रदेश के कृषि विकास मॉडल का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही है। लगभग 325 मिलियन डॉलर की इस परियोजना के माध्यम से पूर्वांचल और बुंदेलखंड के 28 जिलों में कृषि और मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि, आधुनिक तकनीकों का विस्तार और कृषि उत्पादन में 30 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी सुनिश्चित करना है। इससे पिछड़े क्षेत्रों के किसानों को विशेष लाभ मिल रहा है।