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5 हजार करोड़ की योजना से प्रदेश के शहरों में आएगा बदलाव, फंड का हुआ इंतजाम

भोपाल   केन्द्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा अर्बन चैलेंज फंड (यूसीएफ) की गाइडलाइन जारी होने के बाद अब प्रदेश के सभी नगरीय निकाय अपने यहां विकास कार्यों को गति देने करोड़ों की योजनाएं बना सकते हैं। प्रदेश के बड़े चारों नगर निगम जहां 2 हजार करोड़ तक की परियोजना बना सकते हैं, वहीं छोटी नगर परिषद 50 करोड़ की योजना बनाकर अपने यहां बदलाव ला सकती है। नगरीय विकास विभाग ने यूसीएफ में अपने हिस्से की राशि देने के लिए द्वारका योजना के 5 हजार करोड़ का फंड सुरक्षित रखा है। निकायों को केवल 10 से 15 प्रतिशत राशि देना पड़ेगी। 25 प्रतिशत केन्द्र, 50 प्रतिशत राशि बाजार से लेना जरूरी है और शेष 25 प्रतिशत में कुछ सहयोग राज्य सरकार करेगी और कुछ निकाय मिलाएंगे। भोपाल में शहरी सुधार कार्यशाला में यह जानकारी दी। प्रदेश के नगरीय निकायों में इसके लिए जरूरत के अनुसार कार्ययोजना बनाने का काम गुरुवार को शुरू हुआ। इसके लिए नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने शहरी सुधार कार्यशाला का आयोजन किया है। राजधानी में आयोजित यह कार्यशाला दो दिन चलेगी। "शहरी सुधार कार्यशाला" का प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दीप प्रज्ज्वलित कर विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर सुंदरलाल पटवा राष्ट्रीय नगर प्रबंधन संस्थान में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने प्रदेश के नगरीय निकायों के अधिकारियों को दूरदर्शी नेतृत्व और कर्मठता के साथ नगरों के कायाकल्प करने का आह्वान किया। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि जीवन में सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन केवल नियमों से नहीं, बल्कि उचित व्यवहार से चलता है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने शहरी केंद्रों को 'विकास केंद्र' के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को अब केवल सुदृढ़ सड़क और स्वच्छ जल तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें शहर में रोजगार के नए अवसर उत्पन्न करने की दिशा में भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। राजस्व वृद्धि पर विशेष बल शहरों के आर्थिक सुदृढ़ीकरण पर चर्चा करते हुए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भूमि मुद्रीकरण और भूमि के कुशल प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाला समय शहरीकरण का है। यदि अधिकारी पारदर्शिता और जन-भागीदारी के साथ नए कार्य करेंगे और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं देंगे, तो जनता भी कर वृद्धि जैसे निर्णयों में सहर्ष साथ देगी। अर्बल चेलेंज फंड और द्वारका योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के माध्यम से नगरीय निकायों के कायाकल्प की संभावना अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आगामी वर्ष के लिए एक सुव्यवस्थित कार्ययोजना तैयार करना और नियोजित विकास के साथ नागरिक जागरूकता विकसित करना इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने अर्बल चेलेंज फंड और द्वारका योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के माध्यम से नगरीय निकायों के कायाकल्प की संभावनाओं पर भी बल दिया। नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि विभाग एक परिवार और सामूहिक भावना के साथ कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी 16 नगर निगमों के आयुक्त, मुख्य नगरपालिका अधिकारी और वरिष्ठ अधिकारी इस कार्यशाला में सम्मिलित हैं। कार्यशाला का मुख्य केंद्र नागरिक संतुष्टि और मूलभूत सिद्धांतों पर कार्य करना है।

Census 2027: ऑनलाइन प्रक्रिया में तकनीक का इस्तेमाल, जानें पूरी जानकारी

भोपाल  देश की डिजिटल कुंडली यानी जनगणना 2027 का आगाज गुरुवार से हो गया है। इस बार आपको प्रगणक के घर आने और घंटों पूछताछ का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। स्व-गणना के जरिए अब नागरिक खुद पोर्टल पर अपनी और अपने परिवार की जानकारी अपडेट कर सकते हैं। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया में एक यूनिक एसई आईडी सबसे अहम कड़ी होगी, जिसे संभालकर रखना आपकी जिम्मेदारी होगी। 34 सवालों के जवाब और लोकेशन का मैप ऑनलाइन जनगणना की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए इसे तकनीक से जोड़ा गया है। इसमें मोबाइल नंबर और ईमेल पर ओटीपी वेरिफिकेशन के साथ ही गूगल मैप के जरिए घर की सटीक लोकेशन भी दर्ज करनी होगी। परिवार के सदस्यों की शिक्षा, रोजगार और सामाजिक-आर्थिक स्थिति से जुड़े करीब 34 सवालों के जवाब देने होंगे। डिजिटल जनगणना: ऐसे करें खुद का पंजीकरण चरण प्रकिया स्टेप 1-2 पोर्टल पर मोबाइल नंबर/ईमेल दर्ज कर ओटीपी से वेरिफिकेशन। स्टेप 3-4 परिवार के मुखिया का विवरण और गूगल मैप पर घर की लोकेशन। स्टेप 5-6 सदस्यों की संख्या, शिक्षा, रोजगार और आय से जुड़े 34 सवालों के जवाब। स्टेप 7-8 जानकारी का प्रीव्यू कर फाइनल सबमिट और 'एसई आइडी' सुरक्षित करना। क्यों जरूरी है आइडी: मई माह में जब प्रगणक आपके घर सत्यापन के लिए आएगा, तो आपको बस यह आइडी दिखानी होगी। भूल गए तो क्या होगा: यदि आप आइडी गुम कर देते हैं या नहीं दिखा पाते, तो आपकी ऑनलाइन मेहनत बेकार जाएगी। प्रगणक को दोबारा शुरुआत से आपका डेटा मैनुअल भरना पड़ेगा। ग्राउंड जीरो पर तैयारी: प्रगणकों को मिल रही ट्रेनिंग एक तरफ नागरिक ऑनलाइन डेटा भर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन ने सत्यापन के लिए प्रगणकों और पर्यवेक्षकों की फौज तैयार कर ली है। शहर में आइआइटीटीएम और शिक्षा महाविद्यालय हजीरा में सघन प्रशिक्षण चल रहा है। ग्रामीण इलाकों में तहसील और विकासखंड स्तर पर मास्टर ट्रेनर्स कर्मचारियों को डिजिटल डेटा हैंडलिंग के गुर सिखा रहे हैं। 30 अप्रैल तक चलेगी स्व-गणना की प्रक्रिया मध्यप्रदेश में 16 से 30 अप्रैल तक ऑनलाईन स्व-गणना का कार्य होगा। एक से 30 मई तक मकान सूचीकरण होगा। यह प्रक्रिया डिजिटल रूप से होगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में जनगणना 2027 की प्रक्रिया के शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री निवास के समत्व भवन में आयोजित कार्यक्रम में यह विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व-गणना पोर्टल se.census.gov.in पर प्रारंभिक पंजीकरण कर प्रदेश में स्व-गणना प्रक्रिया का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों की प्रक्रिया नहीं बल्कि राष्ट्र के भविष्य को सही दिशा देने का महत्वपूर्ण कदम है। इससे हम जान सकेंगे कि विकास की धारा समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक सुगमता से पहुंच रही है या नहीं। यह जनगणना हमारी अगली पीढ़ी के उज्जवल भविष्य के लिए है।

सरकार द्वारा प्रदेश में नई तहसीलें, सीमाओं का नया निर्धारण शुरू

भोपाल  मध्यप्रदेश सरकार ने प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। तहसीलों की सीमाएं नए सिरे से तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राजधानी भोपाल से इसकी शुरुआत हुई। भोपाल में अभी तीन तहसीलों में 8 नजूल क्षेत्र हैं। इन क्षेत्रों को ही तहसील का दर्जा देते हुए आम जनता की सुविधा के अनुसार इनकी सीमाएं नए सिरे से तय की जाएगी। इसके लिए बाकायदा जनता से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। इस संबंध में अगले दो माह तक जनता से सुझाव लिए जाएंगे। 15 जून 2026 तक पुनर्गठन आयोग के पोर्टल पर जाकर सुझाव दिए जा सकते हैं। इसलिए ये प्रक्रिया सरकार का मानना है कि तहसीलों के पुनर्गठन से राजस्व, नामांतरण, जाति-आय प्रमाण पत्र, भूमि संबंधी मामलों सहित अन्य प्रशासनिक सेवाएं लोगों को आसानी से मिल सकेंगी। आम जनता को अपने राजस्व या प्रशासनिक कार्यों के लिए बहुत दूर न जाना पड़े। सुझाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रस्ताव तैयार कर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। भोपाल में पुनर्गठन इसलिए जरूरी भोपाल के कई ग्रामीण क्षेत्र ऐसे हैं, जहां के निवासियों को तहसील कार्यालय पहुंचने 50-60 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। पुनर्गठन से कार्यालय उनके करीब आएंगे। भोपाल की हुजूर जैसी तहसीलें बहुत बड़ी हैं, जिनका प्रबंधन कठिन है। इन्हें काटकर छोटी और व्यवस्थित इकाइयां बनाना। खसरा, खतौनी और जाति प्रमाण पत्र जैसे कामों के लिए 10-15 किमी के भीतर कार्यालय मिलेगा। बावडिय़ा कलां जैसे क्षेत्रों को हटाकर चंदनपुरा और मेंडोरा जैसे क्षेत्रों को जोडऩे का प्रस्ताव है। एमपी नगर, गोविंदपुरा और बैरागढ़ जैसे नजूल क्षेत्रों की सीमाओं को भी फिर से परिभाषित किया जा रहा है। भोपाल के लिए विशेष प्रस्ताव संभागायुक्त के माध्यम से शासन को भेजे जा चुके हैं। भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के मुताबिक शासन की मंशा के अनुसार प्रस्ताव भेजे गए थे। अब इन पर प्रक्रिया बढ़ी है। आमजन को इसमें अपने हिस्सेदारी करना चाहिए। बैरागढ़ नजूल पहुंचे कलेक्टर, फाइल की पेंडेंसी की डिटेल ली भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने जिले का कामकाज समझने की शुरुआत बैरागढ़ नजूल कार्यालय से की। नजूल पहुंचकर उन्होंने उपस्थित कर्मचारियों से उनके नाम व काम को लेकर पूछताछ की। राजस्व प्रकरण से जुड़ी फाइल भी उठाई। उसकी पेंडेंसी के बारे में पूछा। ऑनलाइन प्रक्रिया में ऑफलाइन फाइल का क्या काम, इस पर भी चर्चा की। पूरी तरह से ई- ऑफिस सिस्टम लागू करने व ऑनलाइन ही काम करने को कहा। वे नजूल शहर वृत्त भी गए। इस दौरान तहसीलदार हर्षविक्रम सिंह, आलोक पारे, प्रेमप्रकाश गोस्वामी भी उपस्थित रहे।

एमपी में लघु उद्योगों में महिलाएं भी बना रही हैं कमाल, 8.87 लाख में से हर चौथा उद्योग महिला के पास, 6 साल में रोजगार 6 गुना बढ़ा

भोपाल  देश में महिला आरक्षण को लेकर चर्चा के बीच अब महिलाओं की आर्थिक ताकत के आंकड़े भी सामने आ रहे हैं। मध्य प्रदेश में महिलाओं ने सिर्फ घर तक खुद को सीमित नहीं रखा बल्कि कारोबार की दुनिया में भी अपनी मजबूत पहचान बनाई है। हाल ही में सामने आए आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य में हर चौथा लघु उद्योग अब महिलाओं के हाथ में है, जो बदलाव की साफ तस्वीर दिखाता है। यह आंकड़े लोकसभा में पेश किए गए हैं, जिन्हें सांसद विजय सिंह बघेल ने सामने रखा। इन आंकड़ों से यह साफ हो गया है कि महिलाएं अब सिर्फ नौकरी करने तक सीमित नहीं हैं बल्कि खुद रोजगार देने वाली बन रही हैं। एमपी में 8.87 लाख MSME 28 फरवरी 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में कुल 8,87,087 पंजीकृत MSME इकाइयां हैं। इनमें से 2,28,959 इकाइयों का संचालन महिलाएं कर रही हैं। यानी प्रदेश की लगभग हर चौथी MSME इकाई महिला उद्यमियों के हाथ में है, जो आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत संकेत है। 6 साल में 6 गुना बढ़ा महिला रोजगार महिला उद्यमियों की बढ़ती संख्या का असर रोजगार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। वर्ष 2020-21 में जहां MSME क्षेत्र में 1,53,493 महिलाएं कार्यरत थीं, वहीं 2026 तक यह संख्या बढ़कर 10,07,995 हो गई है। यह छह गुना से अधिक की वृद्धि दर्शाती है कि महिलाएं न केवल खुद आगे बढ़ रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं। 6 साल में 10 लाख महिलाओं को मिला काम महिला उद्यमियों की बढ़ती संख्या का असर रोजगार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। आंकड़ों के मुताबिक साल 2020-21 में MSME सेक्टर में काम करने वाली महिलाओं की संख्या 1,53,493 थी। लेकिन 28 फरवरी 2026 तक यह आंकड़ा बढ़कर 10,07,995 पहुंच गया। यानी सिर्फ 6 सालों में 6 गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। यह दिखाता है कि महिलाएं न केवल खुद बिजनेस शुरू कर रही हैं बल्कि दूसरी महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं। इससे राज्य में आर्थिक गतिविधियां भी तेजी से बढ़ रही हैं। उद्यम पोर्टल के बाद तेजी से बढ़ी संख्या महिला उद्यमियों की संख्या में यह उछाल अचानक नहीं आया बल्कि इसके पीछे सरकारी पहल भी बड़ी वजह है। उद्यम पोर्टल लॉन्च होने के बाद महिलाओं ने बड़ी संख्या में अपने बिजनेस रजिस्टर कराए। 2020-21 में जहां महिला स्वामित्व वाले MSME की संख्या सिर्फ 14,239 थी, वहीं 2022-23 में यह बढ़कर 2,07,795 हो गई। 2023-24 में यह संख्या और बढ़कर 7,44,746 तक पहुंच गई। हालांकि ताजा आंकड़ों के अनुसार 2025-26 में 2,28,959 यूनिट्स पंजीकृत हैं, जो अब भी एक मजबूत संख्या मानी जा रही है। देश में भी महिलाओं का बढ़ता दबदबा अगर पूरे देश की बात करें तो महिला उद्यमिता तेजी से बढ़ रही है। MSME रजिस्ट्रेशन के मामले में महाराष्ट्र सबसे आगे है, जहां सबसे ज्यादा यूनिट्स पंजीकृत हैं। वहीं महिला नेतृत्व वाले MSME में आंध्र प्रदेश शीर्ष पर है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु भी इस मामले में मजबूत स्थिति में हैं। देशभर में उद्यम पोर्टल पर अब तक 3.07 करोड़ से ज्यादा महिला उद्यमी MSME पंजीकृत हो चुके हैं, जो महिलाओं के बढ़ते योगदान को दिखाता है। उद्यम पोर्टल से मिली गति वर्ष 2020-21 में उद्यम पोर्टल शुरू होने के बाद महिला उद्यमियों की संख्या में तेजी आई। उस समय 14,239 महिला स्वामित्व वाले MSME थे। 2022-23 में यह बढ़कर 2,07,795 और 2023-24 में 7,44,746 तक पहुंच गई। 2025-26 में यह संख्या 2,28,959 पर दर्ज की गई है। राष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ रहा महिलाओं का दबदबा देशभर में भी महिला उद्यमिता तेजी से आगे बढ़ रही है। उद्यम पोर्टल पर अब तक 3.07 करोड़ महिला नेतृत्व वाले MSME पंजीकृत हो चुके हैं। महाराष्ट्र MSME पंजीकरण में अग्रणी है, जबकि महिला नेतृत्व वाले उद्यमों में आंध्र प्रदेश शीर्ष पर है। उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु भी इस सूची में मजबूत स्थिति में हैं। आर्थिक सशक्तिकरण की नई तस्वीर एमपी के ये आंकड़े बताते हैं कि महिलाएं अब सिर्फ घर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्यवसाय और उद्योग में भी अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं। यह बदलाव नारी शक्ति के सशक्त और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बढ़ते कदम को दर्शाता है। एमपी में महिला उद्यमियों की संख्या ऐसे बढ़ी     2020-21: उद्यम पोर्टल लॉन्च होने के बाद पहले वर्ष में राज्य में महिला स्वामित्व वाले एमएसएमई की संख्या 14,239 थी ।     2022-23: यह संख्या बढ़कर 2,07,795 तक पहुंच गई ।     2023-24: वर्ष 2023-24 में राज्य में महिला उद्यमियों की संख्या अपने उच्चतम स्तर 7,44,746 पर पहुंच गई ।     2025-26: 28 फरवरी 2026 तक के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में महिला नेतृत्व वाले 2,28,959 एमएसएमई पंजीकृत हैं। देश में सबसे ज्यादा एमएसएमई महाराष्ट्र में एमएसएमई और महिला नेतृत्व में अग्रणी राज्ययदि राष्ट्रीय स्तर पर तुलना करें, तो एमएसएमई पंजीकरण के मामले में महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है, जहां कुल पंजीकृत इकाइयों की संख्या सबसे अधिक है । वहीं, महिला नेतृत्व वाले एमएसएमई (Woman-owned MSMEs) के मामले में आंध्र प्रदेश ने बाजी मारी है, जो देश में सर्वाधिक महिला उद्यमियों वाला राज्य बना हुआ है। इन अग्रणी राज्यों की सूची में उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु भी अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए हैं। पूरे देश की बात करें तो उद्यम पोर्टल पर अब तक 3.07 करोड़ महिला नेतृत्व वाले एमएसएमई पंजीकृत हो चुके हैं, जो देश की अर्थव्यवस्था में महिलाओं के बढ़ते योगदान को प्रमाणित करते हैं।

आज कूच बिहार व जलपाईगुड़ी में जनसभाओं को संबोधित करेंगे सीएम योगी

आज फिर पश्चिम बंगाल के चुनावी रण में उतरेंगे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज कूच बिहार व जलपाईगुड़ी में जनसभाओं को संबोधित करेंगे सीएम योगी बांकुरा में रोड शो के माध्यम से भाजपा के पक्ष में माहौल बनाएंगे मुख्यमंत्री सीएम योगी की सभाओं में उमड़ रही भारी भीड़ से बढ़ा कार्यकर्ताओं का उत्साह लखनऊ पश्चिम बंगाल के चुनावी परिदृश्य में शनिवार को एक बार फिर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सक्रिय मौजूदगी देखने को मिलेगी। पार्टी के स्टार प्रचारकों में शामिल योगी का यह दौरा रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें वे उत्तर से दक्षिण तक फैले तीन जिलों में लगातार कार्यक्रमों के जरिए चुनावी माहौल को धार देंगे। दो जनसभाओं को करेंगे संबोधित निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री दोपहर 12 बजे कूच बिहार जिले की माथाभांगा विधानसभा क्षेत्र में पहुंचकर भाजपा प्रत्याशी निशीथ प्रमाणिक के समर्थन में जनसभा को संबोधित करेंगे। सीमावर्ती इस क्षेत्र में भाजपा अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है और मुख्यमंत्री योगी की सभा को इसी दिशा में एक अहम कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। इसके बाद योगी आदित्यनाथ का हेलीकॉप्टर जलपाईगुड़ी जिले की धूपगुड़ी विधानसभा की ओर रुख करेगा, जहां वे दोपहर 1:20 बजे भाजपा उम्मीदवार नरेश चंद्र राय के पक्ष में जनसभा करेंगे। उत्तर बंगाल की इस बेल्ट में पार्टी ने पिछले चुनावों में जो आधार तैयार किया था, उसे और सुदृढ़ करने पर इस बार खास जोर है। बांकुरा में करेंगे रोड शो दिन के अंतिम चरण में मुख्यमंत्री शाम 4:15 बजे बांकुरा पहुंचेंगे, जहां भाजपा प्रत्याशी नीलाद्री शेखर दाना के समर्थन में उनका रोड शो प्रस्तावित है। बांकुरा, जो कि जंगलमहल क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, वहां रोड शो के जरिए शक्ति प्रदर्शन की तैयारी है। स्थानीय स्तर पर इसकी व्यापक तैयारियां की गई हैं और बड़ी भीड़ जुटने के संकेत मिल रहे हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि योगी आदित्यनाथ की सभाओं में हाल के दिनों में उमड़ रही भीड़ ने कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरा है।  योगी की सभाओं में उमड़ रही भीड़ से बढ़ा कार्यकर्ताओं का उत्साह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनसभाओं में उमड़ रही भीड़ इस चुनाव में एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखी जा रही है। सभास्थलों पर हालात ऐसे बन रहे हैं कि लोगों में मुख्यमंत्री की एक झलक पाने की जबरदस्त उत्सुकता दिखाई दे रही है। कई जगहों पर भीड़ इतनी अधिक हो रही है कि पैर रखने तक की जगह नहीं बच रही। सभा शुरू होने से काफी पहले ही लोग पहुंचकर अपनी जगह सुनिश्चित कर रहे हैं और अंत तक डटे रहते हैं। यह नजारा न केवल स्थानीय स्तर पर भाजपा के बढ़ते जनाधार की ओर इशारा करता है, बल्कि कार्यकर्ताओं के मनोबल को भी नई ऊर्जा दे रहा है।

बकाया भुगतान नहीं करने पर सरकारी दफ्तर में कुर्की, मचा हड़कंप

 करौली राजस्थान के करौली कलेक्ट्रेट में  उस वक्त हड़कंप मच गया, जब कोर्ट की एक टीम अचानक सामान जब्त करने पहुंच गई. मामला इतना बढ़ गया कि टीम ने अल्प बचत अधिकारी के कार्यालय में रखी उनकी कुर्सी तक कुर्क कर ली. सरकारी दफ्तर में हुई इस कार्रवाई को देख वहां मौजूद कर्मचारी और अधिकारी दंग रह गए. दरअसल, यह पूरा मामला एक पुराने वित्तीय विवाद का नतीजा है, जिसमें अदालत के आदेश की पालना न होने पर यह सख्त कदम उठाना पड़ा. आखिर क्या है पूरा मामला? यह पूरी कहानी हिण्डौन के रहने वाले राजेश कुमार गुप्ता से जुड़ी है. राजेश ने अपर जिला एवं सत्र न्यायालय (ADJ Court) में एक शिकायत दर्ज कराई थी. उनका दावा था कि अल्प बचत योजना के तहत उनके 1.91 लाख रुपये विभाग के पास बकाया हैं. सिर्फ पैसा ही नहीं, राजेश ने 780 ग्राम चांदी और 33 ग्राम सोने के आभूषणों का भी दावा कोर्ट के सामने रखा था. अदालत में लंबी सुनवाई चली, लेकिन जब विभाग की ओर से कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कुर्की का वारंट जारी कर दिया. कलेक्ट्रेट में कुर्सी की जब्ती हिण्डौन कोर्ट के आदेश पर करौली कोर्ट की टीम कलेक्ट्रेट स्थित अल्प बचत अधिकारी के दफ्तर पहुंची. टीम का नेतृत्व सेल अमीन तस्लीम हसन कर रहे थे. उस समय वहां जिला कोषाधिकारी अवधेश कुमार भी मौजूद थे. कोर्ट की टीम ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए दफ्तर का सामान समेटना शुरू किया. देखते ही देखते अधिकारी की कुर्सी को भी जब्त कर लिया गया. सरकारी दफ्तर से अधिकारी की कुर्सी उठाकर ले जाना विभाग की बड़ी किरकिरी माना जा रहा है. 'हक के लिए लड़ता रहूंगा' इस कार्रवाई के बाद परिवादी राजेश कुमार गुप्ता ने बताया कि वे लंबे समय से न्याय के लिए भटक रहे थे. उन्होंने कहा कि कोर्ट का यह फैसला उनके हक में आया है और फिलहाल अधिकारी की कुर्सी को कुर्क किया गया है. राजेश के मुताबिक, यह तो बस शुरुआत है, यदि उनका बकाया पैसा और सोना-चांदी नहीं मिला, तो आगे की कार्रवाई भी न्यायालय के निर्देशानुसार ही की जाएगी.

रायपुर: यूरिया का प्रभावी विकल्प बन रही हरी खाद, जशपुर में 600 हेक्टेयर पर किया गया प्रदर्शन

रायपुर : यूरिया का प्रभावी विकल्प बन रही हरी खाद, जशपुर में 600 हेक्टेयर में प्रदर्शन रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में टिकाऊ और जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी क्रम में जशपुर जिले में रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के उद्देश्य से हरी खाद के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषि विभाग द्वारा जशपुर जिले के सभी विकासखंडों में इस वर्ष 600 हेक्टेयर क्षेत्र में हरी खाद का प्रदर्शन किया जा रहा है। किसानों से अपील की गई है कि वे कृषि विभाग के मैदानी अमले से संपर्क कर हरी खाद तकनीक अपनाएं, जिससे मिट्टी की सेहत में सुधार के साथ दीर्घकालीन उत्पादकता सुनिश्चित हो सके। हरी खाद के अंतर्गत ढेंचा, सनई, मूंग, उड़द और बरसीम जैसी फसलों को खेत में उगाकर 40 से 50 दिन बाद जुताई कर मिट्टी में मिला दिया जाता है। इसके पश्चात 2 से 3 सप्ताह बाद मुख्य फसल की बुवाई की जाती है। यह प्रक्रिया मिट्टी में प्राकृतिक पोषक तत्वों की पूर्ति करती है। हरी खाद के उपयोग से मिट्टी में नाइट्रोजन, पोटाश एवं अन्य आवश्यक पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ती है, साथ ही जैविक पदार्थों में वृद्धि होती है। इससे मिट्टी की जलधारण क्षमता बेहतर होती है और भूमि भुरभुरी एवं अधिक उपजाऊ बनती है। हरी खाद अपनाने से रासायनिक उर्वरकों, विशेषकर यूरिया, की आवश्यकता में कमी आती है। विशेषज्ञों के अनुसार, हरी खाद का उपयोग कम लागत में अधिक लाभ देने वाला उपाय है, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायक है। राज्य सरकार द्वारा इस दिशा में किए जा रहे प्रयास किसानों को आत्मनिर्भर और खेती को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं।

राजस्थान विधानसभा में अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम कल

जयपुर राजस्थान विधानसभा में कल अंतर्राष्ट्रीय ट्रेनिंग प्रोग्राम होगा. इसमें बांग्लादेश, भूटान, घाना, केन्या, श्रीलंका, तंजानिया और जाम्बिया सहित कुल 17 देशों के 43 प्रतिभागी भाग लेंगे. यह 37वां अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम लोकसभा सचिवालय के पार्लियामेंट्री रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसी द्वारा आयोजित किया जा रहा है. इस दौरान प्रतिभागी राज्य की विधायी प्रक्रिया, संसदीय परंपराओं और कार्यप्रणाली से अवगत कराया जाएगा. साथ ही प्रतिभागियों का पीठासीन अधिकारियों और विधानसभा सचिव के साथ संवाद, विधि विशेषज्ञों से मुलाकात और राज्य के प्रमुख विधि संस्थानों का दौरा भी निर्धारित है. ITEC के तहत होगा कार्यक्रम कार्यक्रम का विषय इंटरनेशनल लेजिस्लेटिव ड्राफ्टिंग है, जिसका उद्देश्य प्रतिभागियों को विधायी मसौदा तैयार करने की वैचारिक समझ, कौशल और तकनीकी ज्ञान प्रदान करना है. यह आयोजन भारत सरकार के विदेश मंत्रालय की भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (ITEC) योजना के अंतर्गत संचालित हो रहा है. कल आएगा प्रतिनिधिमंडल विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने बताया कि 18 अप्रैल को विदेशी प्रतिनिधियों का दल राजस्थान विधानसभा के सदन, भवन और राजनीतिक आख्यान संग्रहालय का भ्रमण करेगा. उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से विदेशी प्रतिनिधियों को राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से भी परिचित कराया जाएगा, जिसके तहत स्थानीय दर्शनीय स्थलों का भ्रमण शामिल है. संसदीय सहयोग को मिलेगी मजबूती इस पहल से विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों को भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को समझने का मौका मिलेगा. प्रतिनिधिमंडल राज्यों की विधायी प्रणाली को नजदीक से समझने का अवसर मिलेगा. साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संसदीय सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान को मजबूती मिलेगी.

योगी कैबिनेट में फेरबदल की तैयारी तेज, अप्रैल में फैसला

 लखनऊ उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल के विस्तार के साथ ही भाजपा संगठन को दुरुस्त करने की उलटी गिनती शुरु हो गई है। यह सब अप्रैल महीने में ही होगा। बीते पखवारे लखनऊ से लेकर दिल्ली तक भाजपा के प्रदेश और शीर्ष नेतृत्व के बीच गहन मंथन के बाद अब बदलाव और विस्तार पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मुहर लगनी है। भाजपा उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष और भारत सरकार में मंत्री पंकज चौधरी की शुक्रवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री के साथ मुलाकात प्रस्तावित है। उनकी हरी झंडी के बाद लखनऊ में तैयारी प्रारंभ होगी। रविवार या सोमवार को मंत्रिमंडल विस्तार होने की पूरी संभावना है। इसके बाद संगठन के नये पदाधिकारियों की सूची जारी कर दी जाएगी। दिल्ली में गुरुवार को समीकरणों को फिर मथा गया। राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी व प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह के साथ बैठक कर सभी पहलुओं को समझा। इससे पहले इन सभी ने भाजपा के थिंक टैंक माने जाने वाले अमित शाह के साथ मंत्रिमंडल और संगठन विस्तार पर मंथन किया। भारतीय जनता पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में संगठन और सरकार के सियासी समीकरण को दुरुस्त कर लेना चाहती है। अब भाजपा उत्तर प्रदेश में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। जिसके तहत योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल और प्रदेश संगठन में भी फेरबदल होगा। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह की पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से भेंट के बाद मंत्रिमंडल विस्तार और भाजपा उत्तर प्रदेश संगठन में बदलाव हो जाएगा। भाजपा प्रमुख कार्यकर्ताओं और नेताओं को निगम आयोग और बोर्ड में समायोजन करना चाहती है, इससे पहले सभासदों और नगर पंचायत सदस्यों को भी मनोनीत किया गया था। संगठन से ज्यादातर नेताओं की विदाई तय भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने उत्तर प्रदेश को लेकर संगठन महामंत्री बीएम संतोष, भाजपा यूपी के अध्यक्ष पंकज चौधरी, संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह और यूपी के प्रभारी राष्ट्रीय संगठन मंत्री विनोद तावड़े के साथ बैठक की। इसके बाद यूपी बीजेपी संगठन की नई टीम फाइनल कर दी गई। महामंत्री और उपाध्यक्ष पदों पर जमे ज्यादातर नेताओं की विदाई तय हो गई है। इसके साथ युवा मोर्चा का नया अध्यक्ष और प्रवक्ताओं की सूची पर भी विचार किया गया। ज्यादा चर्चा मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर क्षेत्रीय अध्यक्षों व प्रदेश पदाधिकारियों का नाम तय होने के साथ ही वहीं निगम, आयोग व बोर्ड में समायोजन करना है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में ज्यादा चर्चा मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर है। सबसे ज्यादा बदलाव स्वतंत्र प्रभार के मंत्रियों में होने की संभावनाएं हैं। तीन से चार चेहरों को हटाकर संगठन में लाने पर मंथन किया गया है। पिछले दो माह की तस्वीर देखें कि लखनऊ में आरएसएस के सर संघचालक मोहन भागवत ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह के अलावा उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक के साथ बैठक कर चुके हैं। अप्रैल में ही सभी कसरतों को किया जाएगा पूरा इसके बाद संघ और भाजपा के बड़े पदाधिकारियों की बैठक सीएम योगी आदित्यनाथ के आवास पर हुई। अब राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े ने दो दिन लखनऊ में रुककर प्रदेश अध्यक्ष व प्रदेश महामंत्री संगठन से मिलकर सभी बिंदुओं पर चर्चा की। दोनों उप मुख्यमंत्रियों से अलग-अलग मिले थे। इसके बाद तत्काल बाद दिल्ली में फिर बैठक से साफ है कि पार्टी अप्रैल में ही सभी कसरतों को पूरा कर लेगी। मंत्रिमंडल में होगा बड़ा बदलाव माना जा रहा है कि योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल में 12-14 बदलाव होंगे। संगठन और शीर्ष नेतृत्व ने मंत्रियों के चार वर्ष के कार्य की समीक्षा करने के साथ क्षेत्र में उनके कामों का खाका तैयार किया है। मंत्री के काम काज के आकलन के बाद नॉन या लेस परफॉर्मर मंत्रियों की कैबिनेट से छुट्टी हो सकती है और उनकी जगह पर नए चेहरों को मंत्री बनाया जा सकता है।  

विवेक खंड-2 में 410 कारों की अंडरग्राउंड पार्किंग बनाने की योजना

 लखनऊ  गोमती नगर के विवेक खंड दो में भूमिगत पार्किंग बनाने के लिए गोमती नगर जनकल्याण महासमिति ने प्रयास तेज कर दिए हैं। विवेक खंड दो में बनने वाली यह ऐसी भूमिगत पार्किंग होगी जो आधुनिक सुविधाओं से जहां लैस होगी, वहीं गोमती नगर के विवेक खंड दो व आसपास क्षेत्र का जाम पूरी तरह नियंत्रित करने में सहायक भी होगी। इसमें स्मार्ट व्हीकल गाइडेंस एंड नेविगेशन होगा। आधुनिक सिक्योरिटी और सर्विलांस की सुविधा भी। आटोमेटेड पार्किंग के साथ ही वैलेट सिस्टम भी होगा। एसेस कंट्रोल, इलेक्ट्रानिक व्हीकल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुविधा सहित अन्य सुविधाओं से यह परिसर लैस होगा। खासबात है कि विवेक खंड दो स्थित लक्ष्मण मण्डपम के सामने स्थित पार्क में यह पार्किंग बनाने का प्रस्ताव है। महासमिति के महासचिव डा. राघवेंद्र शुक्ल कहते हैं कि प्रस्ताव बनकर तैयार है, लखनऊ विकास प्राधिकरण को इसे बनाना है। जल्द ही लोकार्पण इसका होना है। इस प्रयास से पत्रकारपुरम से लेकर विवेक खंड दो, तीन, रेलवे स्टेशन, मिठाई वाला चौराहे के आसपास के व्यापारी व ग्राहक अपने चार पहिया वाहन खड़ा कर सकेंगे। भूमिगत पार्किंग में चार पहिया वाहन 410 खड़े हों सकेंगे और दो पहिया वाहन 84 खड़े हो जाएंगे। पार्किंग का कुल क्षेत्र 14,176 वर्ग फिट का होगा। यह अपर ग्राउंड व लोअर ग्राउंड में बनाई जाएगी। महासिमित के अध्यक्ष प्रो (डा.) बीएन सिंह और सचिव संजय निगम कहते हैं कि गोमती नगर में सरकारी महिला डिग्री कालेज का स्थान तो है लेकिन डिग्री कालेज खुलवाने का प्रयास जारी है। महिला डिग्री कालेज में ही ला कालेज की स्थापना भी की जाएगी। उद्देश्य होगा कि छात्राओं को एक छत के नीचे उच्च शिक्षा मिल सके। इसके अलावा गोमती नगर में रेलवे स्टेशन तो खुल गया है, इससे गोमती नगर, इंदिरा नगर, चिनहट, शहीद पथ सहित चार लाख से अधिक आबादी को लाभ मिल रहा है। भविष्य में मुंशी पुलिया तक जाने वाली मेट्रो को विस्तार देते हुए गोमती नगर से भी जोड़ने की जरूरत है। निगम कहते हैं कि अगर यह सुविधा मिल जाए तो गोमती नगर भी चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट के साथ ही नए व पुराने लखनऊ से मेट्रो के जरिए गोमती नगर से जुड़ा जाएगा। लखनऊ मेट्रो का विस्तार राजधानी में केंद्र व प्रदेश सरकार कर रही है। पुराने लखनऊ में मेट्रो का विस्तार इसी की बानगी है। समिति सदस्य कर्नल एएन पांडे व पीआर पांडे ने बताया कि विक्रांत खंड में जर्जर सड़कों एवं नालों के फिर से निर्माण को लेकर आवाज उठाई जा चुकी है। उम्मीद है कि कार्यदायी संस्थाएं जल्द ही इस दिशा में काम करेंगी। महासमिति सदस्य केके मौर्य और सी गोपाल कृष्णन नायर ने बताया कि विनीत खंड पांच और छह में पुरानी सीवर पाइपलाइन को बदलना और विकास खंड पांच में जिम जैसे कार्य भी महासमिति की सूची में प्राथमिकता है। इन पर जल्द ही काम होगा।