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एटीएस अधिकारी बनकर साइबर शातिरों ने दंपती को डराया, लगातार कॉल पर रखकर ठगा

 मुजफ्फरपुर बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित भगवानपुर स्थित एलएन मिश्रा बिजनेस मैनेजमेंट कॉलेज के रिटायर कर्मचारी हरेंद्र कुमार व उनकी पत्नी कांति देवी को लगातार 17 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर साइबर शातिरों ने करीब 19 लाख रुपये ठग लिए। 26 मार्च की शाम साढ़े चार बजे से लेकर 11 अप्रैल तक उनको कॉल पर रखा। शातिर लगातार 24 घंटे कॉल पर रहा। इस दौरान मुश्किल से दो घंटे भी दंपती सोए नहीं पाते थे। इस संबंध में हरेंद्र ने साइबर थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। उन्होंने पुलिस को बताया है कि एंटी टेरेरिस्ट स्क्वैड (एटीएस) अधिकारी बनकर साइबर शातिरों ने उन्हें 26 मार्च को पहली बार व्हाट्सअप कॉल की। उसने आधार नंबर बताते हुए झांसा दिया कि आपके इस आधार से एक सिम निकाली गई है। इसका इस्तेमाल आतंकी गतिविधि में की गई है। इसी आधार से केनरा बैंक में एक खाता खोला गया है, जिसमें आतंकी गतिविधि के लिए लेनदेन किए गए हैं। इस तरह एटीएस अधिकारी बनकर गिरफ्तारी की बात बताकर डराने धमकाने लगा। लगातार कॉल पर रखा और इस दौरान वीडियो कॉलिंग भी की। इसके लिए अलग-अलग दो मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल साइबर शातिरों ने किया। 25 मार्च से पांच अप्रैल तक हरेंद्र के मोबाइल पर कॉल की गई। वहीं, उनकी पत्नी के मोबाइल नंबर पर पांच से 11 अप्रैल तक लगातार व्हाटसअप कॉल की गई। इस दौरान उसने कहा कि एक आवेदन दीजिए कि केस की जांच कर मुझे माफ कर दिया जाए। तब हरेंद्र ने यह आवेदन भी दिया। उसने कहा कि इसके लिए रिजर्व बैंक के निर्देशानुसार बैंक खाते में रुपये भेजने होंगे। डर के कारण हरेंद्र कुमार ने आरटीजीएस के माध्यम से साइबर शातिरों को रुपये भेजे। बीते 30 मार्च को हरेंद्र बैंक गए। केरला के कोची शहर में किकोरा एक्सपोर्ट लि. के खाते में 5.60 लाख रुपये लिए। 31 मार्च और एक अप्रैल को बैंक में क्लोजिंग के कारण लेनदेन बंद रहने पर पुन: दो अप्रैल को हरेंद्र को लाइन पर रखकर बैंक ले गया। मुम्बई के गोरेगांव स्थित जेटी शूकर प्रा.लि. के खाते में 7.10 लाख और कर्नाटक के अमीन रोड लाइन एंड इंटरप्राइजेज के खाते में 6.15 लाख रुपये आरटीजीएस के जरिए डालवाए। 18.85 लाख रुपये भेजने के बाद भी केस से निजात दिलाने के नाम पर और रुपये की मांग करने लगा तब हरेंद्र को साइबर ठगी और डिजिटल अरेस्ट का आभास हुआ। उन्होंने कॉल काटने के बाद रिश्तेदारों से संपर्क किया और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा बेटों ने बंधाया ढांढ़स ठगी के बाद जब सारी कहानी पुत्रों को बताई तो उन्होंने हरेंद्र और उनकी पत्नी को ढांढ़स बंधाया। उन्हें डर था कि शोक व खौफ में कहीं उनके माता-पिता आत्महत्या न कर लें। बेटों ने कहा, रुपये चला गया तो फिर आ जाएंगे। 17 दिनों तक जान जोखिम में, लगता था कुछ कर लेंगे रिटायर कर्मी हरेंद्र कुमार ने बताया कि उन्हें दो पुत्र है। एक इलाहाबाद और एक कोलकाता में बैंक में पोस्टेड है। सभी अपने परिवार के साथ उसी शहर में रहते हैं। वह पति-पत्नी सदर थाना के भगवानपुर यादव नगर के निकट श्रीकृष्ण बिहार कॉलोनी स्थित आवास में रहते हैं। बताया कि 17 दिनों के डिजिटल अरेस्ट के दौरान जान जोखिम में पड़ी रही। साइबर शातिरों के पास उनका केवल आधार कार्ड ही नहीं था। वह पूरे परिवार का ब्योरा लिए हुए थे। इस दौरान किसी रिश्तेदार की कॉल भी आई तो केवल खैरियत वगैर तक ही बात करने दिया। साइबर डीएसपी बोले डिजिटल अरेस्ट की एफआईआर दर्ज कर इंस्पेक्टर आशुतोष प्रसाद को जांच की जिम्मेवारी सौंपी गई है। बैंक खातों का डिटेल लिया जा रहा है। आशंका है कि फर्जी कंपनी के नाम म्यूल एकाउंट खोलकर ठगी की गई है। -हिमांशु कुमार, साइबर डीएसपी

प्रदेश के सभी 75 जिलों में तैयार हो रही ‘साइबर सिंघम’ की फौज

लखनऊ.  उत्तर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ अब तकनीक और वैज्ञानिक जांच का शिकंजा और कसने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राज्य की पुलिसिंग को आधुनिक और परिणाम-उन्मुख बनाने के लिए उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस ( यूपीएसआईएफएस) में बड़े स्तर पर क्राइम सीन एक्सपर्ट तैयार किए जा रहे हैं। संस्थान में पांच चरणों में 500 विशेषज्ञों को प्रशिक्षित करने की योजना पर काम तेजी से चल रहा है, जिनमें अब तक 300 एक्सपर्ट तैयार हो चुके हैं और बाकी दो बैच का प्रशिक्षण जल्द पूरा कर लिया जाएगा। इस पहल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये प्रशिक्षित अधिकारी केवल अपने तक जानकारी सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि अपने-अपने कमिश्नरेट और जिलों में जाकर अन्य पुलिसकर्मियों को भी प्रशिक्षित करेंगे। यानी यूपीएसआईएफएस  में तैयार हो रहे ये एक्सपर्ट आगे पूरे प्रदेश में फॉरेंसिक पुलिसिंग की एक मजबूत श्रृंखला विकसित करेंगे। वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में ये अफसर वर्कशॉप आयोजित कर आरक्षी से लेकर निरीक्षक स्तर तक के अफसरों को क्राइम सीन मैनेजमेंट, साइबर फॉरेंसिक, डिजिटल साक्ष्य संरक्षण और वैज्ञानिक जांच की बारीकियां सिखाएंगे, जिससे पुलिस बल की समग्र कार्यक्षमता में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। घटनास्थल पर पहुंचते ही हर पहलू को सटीक तरीके से सुरक्षित किया जा सकेगा यूपीएसआईएफएस की यह पहल जांच प्रक्रिया को वैज्ञानिक आधार देने की दिशा में मील का पत्थर मानी जा रही है। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को पारंपरिक जांच के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों जैसे डिजिटल एविडेंस प्रिजर्वेशन, साइबर ट्रैकिंग, वैज्ञानिक सैंपलिंग और फॉरेंसिक एनालिसिस की गहन जानकारी दी जा रही है, ताकि घटनास्थल पर पहुंचते ही हर पहलू को सटीक तरीके से सुरक्षित और विश्लेषित किया जा सके। उत्तर प्रदेश में फॉरेंसिक आधारित पुलिसिंग को मिलेगी नई धार : डॉ. जी.के. गोस्वामी संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी के अनुसार, अभी फॉरेंसिक एक्सपर्ट के तीन बैचों के जरिए पुलिस कर्मियों और अफसरों को तकनीकी बारीकियों में दक्ष बनाया गया है। आगे चौथा बैच 27 अप्रैल से शुरू किया जाएगा और इसके बाद पांचवें चरण में बाकी विशेषज्ञ भी तैयार कर लिए जाएंगे। ये विशेषज्ञ प्रदेश के सभी कमिश्नरेट और 75 जिलों के अफसरों को बारीकियां सिखाएंगे। योगी सरकार की इस रणनीति से उत्तर प्रदेश में फॉरेंसिक आधारित पुलिसिंग को नई धार मिलने जा रही है। यह पहल प्रदेश को आधुनिक, तकनीक सक्षम और मजबूत कानून-व्यवस्था वाले राज्य के रूप में और सुदृढ़ करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

रायपुर: जल जीवन मिशन के तहत बुलगा में बदलाव, जीवंती बाई के घर तक पहुँचा स्वच्छ पेयजल

रायपुर : जल जीवन मिशन से संवरी बुलगा की तस्वीर, जीवंती बाई के घर तक पहुँचा शुद्ध पेयजल समय की हो रही बचत, घर-घर पहुंच रहा शुद्ध पेयजल रायपुर जल जीवन मिशन ने छत्तीसगढ़ के बुलगा (Bulga) जैसे गांवों में घर-घर स्वच्छ पेयजल पहुंचाकर जीवन स्तर को बदल दिया है। बुलगा गाँव में अब हर घर में नल का कनेक्शन है, जिससे ग्रामीण महिलाओं को दूर से पानी लाने की मेहनत से मुक्ति मिली है।           ग्रामीण अंचलों में शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए संचालित ’जल जीवन मिशन’ अब ग्रामीणों के जीवन में खुशहाली का नया आधार बन रहा है। कभी पानी के लिए लंबी दूरी तय करने वाली महिलाओं के आंगन में आज नल से जल की धार बह रही है। इसी बदलाव की एक बानगी सरगुजा जिले के लूण्ड्रा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बुलगा में देखने को मिली है। मीलों का सफर थमा, आंगन में आई खुशहाली           बुलगा निवासी श्रीमती जीवंती बाई ने बताया कि एक समय था जब पीने के साफ पानी का इंतजाम करना दिन का सबसे कठिन कार्य था। पानी के लिए उन्हें घर से काफी दूर जाना पड़ता था, जिससे समय की बर्बादी और शारीरिक थकान होती थी। “पहले पानी लाने के लिए बहुत लंबा लाइन लगाना  पड़ता था, लेकिन अब हमारे घर में नल का कनेक्शन लग गया है। अब सुबह और शाम दोनों वक्त नियमित रूप से शुद्ध पानी घर पर ही मिल जाता है। समय की बचत से खेती- किसानी को मिल रहा बढ़ावा नल कनेक्शन लग जाने से जीवंती बाई के परिवार के समय की बड़ी बचत हो रही है। उन्होंने बताया कि पानी लाने में जो वक्त खराब होता था, अब उस समय का उपयोग वे खेती-किसानी और अन्य घरेलू कार्यों में कर रही हैं। इससे न केवल उनकी जीवनशैली सुधरी है, बल्कि आर्थिक गतिविधियों के लिए भी अतिरिक्त समय मिल रहा है। शासन की योजना के लिए जताया आभार           गांव के हर घर में पाइपलाइन के माध्यम से पानी पहुंचने पर जीवंती बाई ने हर्ष व्यक्त किया है। उन्होंने इस जनकल्याणकारी योजना के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का विशेष रूप से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की इस पहल से ग्रामीण महिलाओं का जीवन अब पहले से कहीं अधिक सुगम और सम्मानजनक हो गया है।              जिला प्रशासन और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के समन्वित प्रयासों से लुण्ड्रा के दूरस्थ अंचलों में जल जीवन मिशन के लक्ष्य तेजी से पूरे किए जा रहे हैं, ताकि हर ग्रामीण परिवार को ’शुद्ध जल-स्वच्छ पेयजल’ प्राप्त हो सके।

वन क्षेत्रों के पास स्टोन माइनिंग पर सख्ती, हाईकोर्ट ने सरकार का फैसला किया रद्द

रांची झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के जंगलों और वन भूमि के आसपास होने वाली पत्थर माइनिंग (Stone Mining) और स्टोन क्रशर (Stone Crusher) के संचालन को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है. चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने सरकार द्वारा पहले घटा दी गई न्यूनतम दूरी को निरस्त कर दिया है. अब नए आदेश के तहत, वन भूमि की सीमा से स्टोन माइनिंग के लिए 500 मीटर और स्टोन क्रशर के लिए 400 मीटर की न्यूनतम दूरी का पालन करना अनिवार्य होगा. विशेषज्ञ समिति पर उठाए सवाल सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें दूरी को 500 मीटर से घटाकर 250 मीटर करने का समर्थन किया गया था. कोर्ट ने पाया कि यह निर्णय बिना किसी ठोस वैज्ञानिक अध्ययन के लिया गया था. खंडपीठ ने टिप्पणी की कि सरकार द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति में वन और पर्यावरण क्षेत्र के जानकारों की कमी थी. कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि पर्यावरणीय नुकसान को कम करने के लिए ‘सतर्कता का सिद्धांत’ अपनाना जरूरी है. राष्ट्रीय उद्यानों के लिए 1 किमी का सुरक्षा घेरा हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय उद्यानों (National Parks) और वन्यजीव अभ्यारण्यों (Wildlife Sanctuaries) के चारों ओर एक किलोमीटर का ‘इको सेंसिटिव जोन’ (ESZ) पूरी तरह प्रभावी रहेगा. यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के निर्देशों के अनुरूप जारी रहेगी ताकि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में किसी भी प्रकार का मानवीय हस्तक्षेप या प्रदूषण न फैले. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को मिला ‘टास्क’ कोर्ट ने झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) को एक विस्तृत सर्वे करने का आदेश दिया है. बोर्ड को उन सभी माइनिंग और क्रशर यूनिट्स की सूची तैयार करनी होगी, जिन्हें पहले की रियायती दूरी के आधार पर अनुमति दी गई थी. यह सर्वे रिपोर्ट 1 जून 2026 तक अदालत में जमा करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 18 जून को निर्धारित की गई है, तब तक हाईकोर्ट का यह अंतरिम आदेश प्रभावी रहेगा.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान पाने वाले IPS डॉ. संतोष कुमार सिंह की सराहना, PMO और अजीत डोभाल ने किया सम्मानित

रायपुर  छत्तीसगढ़ कैडर के IPS अफसर और रायपुर पुलिस मुख्यालय के DIG डॉ. संतोष कुमार सिंह (Dr. Santosh Kumar Singh) ने इंटरनेशनल लेवल पर अपनी एकेडमिक अचीवमेंट से छत्तीसगढ़ और देश का मान बढ़ाया है। उनकी हालिया प्रकाशित रिसर्च बुक "Institutionalization of Peacebuilding: Functioning of the United Nations Peacebuilding Commission in Sierra Leone & Burundi" की देश के टॉप ऑफिशियल्स ने जमकर तारीफ की है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने डॉ. सिंह को पत्र लिखकर उनके काम की सराहना की है। डॉ. संतोष कुमार सिंह की यह बुक मुख्य रूप से अफ्रीका के दो देशों सिएरा लियोन और बुरुंडी में संयुक्त राष्ट्र (UN) के शांति स्थापना आयोग की भूमिका पर आधारित है। यह बुक इंटरनेशनल लेवल पर शांति बहाली के लिए किए जा रहे एफर्ट्स और उसमें आने वाले इंस्टीट्यूशनल चैलेंजेस (Institutional Challenges) का एक डिटेल एनालिसिस करती है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने डॉ. संतोष कुमार सिंह को पत्र लिखकर उनके डीप रिसर्च वर्क की तारीफ की है। डोभाल ने लिखा कि यह बुक संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना आयोग के काम करने के तरीके को समझने के लिए एक शानदार बैकग्राउंड तैयार करती है। उन्होंने कहा कि आज के संघर्षपूर्ण ग्लोबल सिनेरियो में इस तरह के 'नए दृष्टिकोण' (New Approach) की काफी ज्यादा जरूरत है। 

बलौदाबाजार : डीएव्ही मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल में प्रवेश हेतु आवेदन 28 अप्रैल तक

बलौदाबाजार जिले में संचालित डीएव्ही मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल में प्री प्राथमिक क़ी प्रारंभिक कक्षा में प्रवेश हेतु आवेदन 28 अप्रैल तक निर्धारित किया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी से प्राप्त जानकारी के अनुसार डीएव्ही मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल सकरी, छरछेद एवं टिकुलिया में 8 प्रतिशत निःशुल्क शासकीय कोटा के लिये आरक्षित है जिसमें प्रत्येक स्कूल में 7 सीट अनुसूचित जति एवं जनजाति वर्ग के बीपीएल श्रेणी के लिए आरक्षित है। इन स्कूलों में प्री प्राथमिक क़ी प्रारंभिक कक्षा में प्रवेश हेतु निर्धारित तिथि तक आवेदन सम्बधित स्कूल अथवा जिला शिक्षा अधिकारी कार्यलय में जमा किया जा सकता है।

सरकारी सहायता से मिला ₹10 लाख का ऋण, प्रिटिंग प्रेस का खड़ा किया सफल कारोबार

‘मुख्यमंत्री युवा योजना’ से मिली स्वरोजगार की राह, इटावा के बिलाल हसन बने सफल उद्यमी सरकारी सहायता से मिला ₹10 लाख का ऋण, प्रिटिंग प्रेस का खड़ा किया सफल कारोबार उत्तर प्रदेश में युवाओं के लिए कारगर साबित हो रहीं योगी सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं स्वरोजगार को बढ़ावा देकर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही योगी सरकार लखनऊ योगी सरकार की हितकारी योजनाओं से आज उत्तर प्रदेश का युवा आत्मनिर्भर बन रहा है। यह योजनाएं स्वरोजगार को बढ़ावा देकर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही है। इसी विजन को धरातल पर उतारते हुए जनपद इटावा के गाड़ीपुरा निवासी बिलाल हसन ने सरकारी योजना के सहयोग से खुद का कारोबार खड़ा किया है।  बिलाल हसन ने बताया कि उन्होंने जिला उद्योग केंद्र के माध्यम से पूर्ण जानकारी लेकर ‘मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना’ के तहत ₹10 लाख का ऋण प्राप्त किया। योजना के माध्यम से मिली सरकारी वित्तीय सहायता से उन्होंने अपना प्रिटिंग प्रेस और फ्लेक्स का व्यवसाय शुरू किया। वित्तीय सहायता और सरकारी सहयोग मिलने पर उन्होंने अपने व्यवसाय को सफलतापूर्वक स्थापित किया और लगातार आगे बढ़ा रहे हैं।  अपने उद्यम के माध्यम से बिलाल हसन न केवल आत्मनिर्भर बने, बल्कि आज वे 50 से 60 हजार रूपए महीना कमाई कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने 5 अन्य लोगों को रोजगार देकर उनकी आर्थिक स्थिति को भी मजबूती दी है।   योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में संचालित ‘मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना’ शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए एक सशक्त पहल बनकर उभरी है। इस योजना के माध्यम से युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए आसान ऋण और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं, बल्कि युवा खुद रोजगार देने वाले भी बन रहे हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में छोटे-छोटे उद्योग स्थापित हो रहे हैं, जिससे प्रदेश के आर्थिक विकास को गति मिल रही है। ‘मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना’ के तहत विनिर्माण क्षेत्र में अधिकतम ₹25 लाख तक का ऋण तथा सेवा क्षेत्र में अधिकतम ₹10 लाख तक का ऋण कुल परियोजना लागत के अनुसार अनुदान भी सब्सिडी के रूप में दिया जाता है। इच्छुक व्यक्ति जिला उद्योग केंद्र के माध्यम से पूर्ण जानकारी लेकर इस योजना का लाभ ले सकता हैं और उद्यमी बनने का सपना साकार कर सकता है।

राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश, दोहरी नागरिकता मामले में नया मोड़

लखनऊ कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी की दोहरी नागरिकता से जुड़े मामले में मुश्किलें बढ़ गई हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश आदेश दिया है। हाईकोर्ट की बेंच ने शुक्रवार को सुनवाई के बाद उनके खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया है। राहुल गांधी पर भारत के साथ-साथ ब्रिटेन की भी नागरिकता रखने का आरोप है। इसके खिलाफ विग्नेश शिशिर ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी और दावा किया था कि राहुल के पास दो देशों के पासपोर्ट हो सकते हैं, जोकि भारतीय कानून का उल्लंघन है। इसी को लेकर लंबे समय से हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। कोर्ट ने सरकार से रिकॉर्ड पेश करने को कहा था। इससे पहले, लखनऊ की विशेष MP/MLA अदालत के 28 जनवरी राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने वाली उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ शिशिर फिर से कोर्ट पहुंचे थे। MP/MLA अदालत ने कहा था कि वह नागरिकता के मुद्दे पर फैसला करने के लिए सक्षम नहीं है। याचिकाकर्ता राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और इस मामले में उनके खिलाफ विस्तृत जांच की मांग कर रहे हैं। उन्होंने बीएनएस, सरकारी गोपनीयता अधिनियम, विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम के तहत राहुल गांधी पर कई आरोप लगाए हैं। इस मामले की पहले सुनवाई करते हुए, पीठ ने केंद्र सरकार से पूछा था कि राहुल की ब्रिटिश नागरिकता के खिलाफ मिली शिकायत पर उसने क्या कार्रवाई की है। राहुल गांधी के मुकदमे में सुनवाई फिर टली वहीं, गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ अभद्र टिप्पणी के मामले में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर जारी मानहानि केस की सुनवाई फिर टल गई है। याची के वकील सन्तोष पाण्डेय ने शुक्रवार को मौका लिया जिस पर एमपी – एमएलए कोर्ट के मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा ने सुनवाई 22 अप्रैल को सुनिश्चित करने का आदेश दिया है। राहुल की वायस रिकार्डिंग को विधि विज्ञान प्रयोगशाला से सत्यापित कराने की मांग पर सुनवाई में मुकदमा कई तारीखों से लम्बित है। कर्नाटक के बंगलूरू में आठ मई 2018 को एक जनसभा के दौरान केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर आपत्तिजनक टिप्पणी के आरोप में भाजपा नेता विजय मिश्र ने राहुल गांधी के खिलाफ चार अगस्त 2018 को मानहानि का मुकदमा दायर किया था। लखनऊ की अदालत ने खारिज कर दी थी याचिका यह शिकायत शुरू में रायबरेली की विशेष सांसद-विधायक अदालत में दायर की गई थी, लेकिन शिकायतकर्ता विग्नेश की याचिका पर, इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय की लखनऊ पीठ ने 17 दिसंबर, 2025 को उक्त आपराधिक शिकायत मामले को रायबरेली से लखनऊ स्थानांतरित कर दिया था. लखनऊ की सांसद-विधायक अदालत ने 28 जनवरी, 2026 को उक्त याचिका खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने उच्‍च न्‍यायालय का रुख किया था। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सियान गुड़ी का किया शुभारंभ, बुजुर्गों के साथ कैरम खेलकर बढ़ाया हौंसला

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सियान गुड़ी का किया शुभारंभ : बुजुर्गों के साथ कैरम खेलकर वरिष्ठजनों का बढ़ाया हौंसला वरिष्ठ नागरिकों के लिए डे-केयर सुविधा से सुसज्जित केंद्र : योग, स्वास्थ्य, मनोरंजन और कौशल विकास की मिलेगी एक ही छत के नीचे सुविधा रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज जशपुर में वरिष्ठ नागरिकों के लिए विकसित अत्याधुनिक डे-केयर केंद्र ‘सियान गुड़ी’ का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने बुजुर्गों के साथ कैरम खेलकर उनका उत्साह बढ़ाया और आत्मीय संवाद स्थापित किया। मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर वरिष्ठजन अत्यंत प्रसन्न नजर आए तथा उन्होंने राज्य सरकार द्वारा विकसित ‘सियान गुड़ी’ के लिए आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर बुजुर्गों को फूड बास्केट वितरित किए तथा धार्मिक पुस्तक, शॉल एवं श्रीफल भेंटकर उनका सम्मान किया। उन्होंने समाज में वरिष्ठजनों के सम्मान और उनकी देखभाल के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और पारिवारिक मूल्यों के लिए जाना जाता है, लेकिन वर्तमान में समाज तेजी से बदल रहा है। एकल परिवार की बढ़ती प्रवृत्ति, रोजगार के लिए युवाओं का पलायन और व्यस्त जीवनशैली के कारण अनेक बुजुर्ग दिन के समय अकेलेपन और उपेक्षा का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह अकेलापन केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इन्हीं चुनौतियों के समाधान के लिए ‘डे-केयर सेंटर – सियान गुड़ी’ की परिकल्पना की गई है। यह भवन वरिष्ठ नागरिकों के लिए सम्मान, आत्मीयता और सक्रियता का एक सशक्त केंद्र बनेगा, जहां वे सुरक्षित वातावरण में दिन व्यतीत कर नई ऊर्जा और उत्साह प्राप्त कर सकेंगे। मुख्यमंत्री ने केंद्र का निरीक्षण करते हुए यहां उपलब्ध सुविधाओं की सराहना की और इसे वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक आदर्श पहल बताया। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि सियान गुड़ी’ के माध्यम से राज्य सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को अधिक सम्मानजनक, सक्रिय और खुशहाल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जो सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करते हुए पारिवारिक मूल्यों को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा। उल्लेखनीय है कि जशपुर में रणजीता स्टेडियम के पीछे भागलपुर रोड स्थित यह ‘सियान गुड़ी’ केंद्र वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक समग्र डे-केयर यूनिट के रूप में विकसित किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य उन्हें एक ही स्थान पर बहुआयामी सेवाएं उपलब्ध कराना है। यहां योग, प्राणायाम, मनोरंजन, सांस्कृतिक एवं सामुदायिक गतिविधियां, डिजिटल एवं वित्तीय साक्षरता तथा कौशल विकास प्रशिक्षण की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य जांच, बेसिक दवाओं की उपलब्धता, टेली कंसल्टेशन, स्वास्थ्य जागरूकता सत्र, फिजियोथैरेपी और व्यायाम की भी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इसके अतिरिक्त केंद्र में वरिष्ठ नागरिकों को कानूनी एवं पारिवारिक परामर्श भी प्रदान किया जाएगा। उपेक्षा या दुर्व्यवहार की स्थिति में नेशनल हेल्पलाइन नंबर 14567 तथा राज्य स्तरीय सियान हेल्पलाइन नंबर 155326 के माध्यम से त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। सुविधाओं की दृष्टि से ‘सियान गुड़ी’ को अत्याधुनिक रूप दिया गया है, जहां बाधारहित वातावरण, व्हील चेयर सुविधा, आरामदायक बैठने की व्यवस्था, जेंडर पृथक एवं दिव्यांग अनुकूल शौचालय, सामूहिक गतिविधियों के लिए विशाल हॉल, पुस्तकालय एवं शांत रीडिंग कॉर्नर उपलब्ध हैं। इसके साथ ही टीवी, रेडियो, सीसीटीवी, बायोमैट्रिक उपस्थिति प्रणाली, प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण डेस्क, मासिक चिकित्सकीय परामर्श, फिजियोथैरेपी कॉर्नर तथा टेलीमेडिसिन सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। इस केंद्र में प्रतिदिन 6 से 8 घंटे तक वरिष्ठ नागरिकों के लिए योग, व्यायाम, चाय-नाश्ता, भोजन, मनोरंजन, जीवन कौशल एवं पुनः कौशल विकास प्रशिक्षण, स्वास्थ्य परीक्षण, सांस्कृतिक कार्यक्रम, समूह चर्चा तथा कानूनी एवं सामाजिक जागरूकता से जुड़े विविध कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे।  इस अवसर पर अध्यक्ष छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल रामप्रताप सिंह, विधायक पत्थलगांव श्रीमती गोमती साय, जशपुर विधायक श्रीमती रायमुनी भगत, नगर पालिका उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव, प्रबल प्रताप सिंह जूदेव, सरगुजा संभाग के कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा, पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार झा, कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक लाल उमेंद सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं वरिष्ठजन उपस्थित थे।

पंजाब में RTE के तहत प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन शुरू, एजुकेशन डिपार्टमेंट ने लिंक किया लाइव पोर्टल

चंडीगढ़  पंजाब में राइट टू एजुकेशन एक्ट के तहत प्राइवेट स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटों पर गरीब व डिसएडवांटेज्ड स्टूडेंट्स के एडमिशन का प्रोसेस शुरू हो गया। एजुकेशन डिपार्टमेंट में एडमिशन के लिए पोर्टल लाइव कर दिया है। गरीब व डिसएडवांटेज्ड स्टूडेंट्स पोर्टल पर अप्लाई करके किसी भी प्राइवेट स्कूल में एडमिशन ले सकेंगे। स्टूडेंट्स सिर्फ एंट्री क्लास में ही फ्री एडमिशन ले सकेंगे। डिपार्टमेंट ने राज्यभर के स्कूलों को एंट्री क्लास में 25 फीसदी सीटें रिजर्व रखने के आदेश भी दिए हैं। जो भी इलिजिबल स्टूडेंट प्राइवेट स्कूल्स में एडमिशन लेना चाहता है उसे इस पोर्टल पर ऑनलाइन अप्लाई करते हुए आवश्यक दस्तावेज भी अपलोड करने होंगे। दस्तावेज अपलोड न होने पर वह फ्री सीट का हकदार नहीं होगा। प्राइवेट स्कूल्स में फ्री एडमिशन के लिए क्या क्राइटीरिया होगा, जानिए…     आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS): प्राइवेट स्कूलों में फ्री एडमिशन व स्टडी के लिए आर्थिक तौर पर कमजोर स्टूडेंट्स इलिजिबल होंगे। EWS स्टूडेंट्स के लिए 25 प्रतिशत में से 12.5% सीटें रिजर्व रहेंगी। दाखिले के वक्त पेरेंट्स को इनकम और प्रॉपर्टी सर्टिफिकेट देना होगा। बिना इनकम सर्टिफिकेट के इस कैटागिरी में बच्चे का एडमिशन नहीं होगा।     डिसएडवांटेज्ड ग्रुप्स: प्राइवेट स्कूलों में ईडब्न्ल्यूएस के अलावा डिसएडवांटेज्ड ग्रुप के स्टूडेंट्स भी फ्री एडमिशन के लिए इलिजिबल होंगे।  उनके लिए भी 25 प्रतिशत में से 12.5 प्रतिशत सीटें रिजर्व रहेंगी। इसमें अनुसूचित जाति (SC), ओबीसी, वार विडो के बच्चे, दिव्यांग, स्पेशल चाइल्ड, अनाथ बच्चे शामिल होंगे।     नाइवरहुड स्कूल: स्टूडेंट को एडमिशन के लिए कम से कम दो स्कूलों के नाम भरने होंगे। पहला ऑप्शन 0 से 3 किलोमीटर के दायरे में होना चाहिए जबिक दूसरा ऑप्शन 3-6 किलोमीटर के दायरे में होना चाहिए।     बस का खर्च पेरेंट्स खुद उठाएंगे: एडमिशन पोर्टल पर ही डिपार्टमेंट ने स्पष्ट कर दिया है कि एडमिशन के लिए पेरेंट्स को नजदीकी स्कूल सलेक्ट करना होगा। अगर वो स्कूल दूर सलेक्ट करते हैं तो स्कूल बस का खर्च उन्हें अपने स्तर पर उठाना होगा।     ऐज क्राइटीरिया: डिपार्टमेंट ने एंट्री क्लास में एडमिशन के लिए मिनिमम ऐज क्राइटीरिया फिक्स किया है। नर्सरी में एडमिशन के लिए 3 साल, केजी में 4 साल, यूकेजी में 5 साल और फर्स्ट में 6 साल होने जरूरी हैं। स्टूडेंट्स की यह उम्र 1 अप्रैल 2026 को पूरी होनी चाहिए। एडमिशन प्रक्रिया को स्टेपवाइज जानिए…     ऑनलाइन करना होगा आवेदन: प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन के सिर्फ ऑनलाइन प्रक्रिया से ही होगा। स्कूल सीधे अपने स्तर पर एडमिशन नहीं देंगे। rte.epunjabschool.gov.in पोर्टल पर एडमिशन के लिए ऑनलाइन अप्लाई करना होगा।     रजिस्ट्रस्टेशन करना जरूरी: पेरेंट्स को एडमिशन के लिए पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना जरूरी होगा। रजिस्ट्रेशन के बाद ऑनलाइन ही फार्म भरना होगा। आखिर में उसमें डॉक्यूमेंट अपलोड करने होंगे। पूरी प्रक्रिया अपनाने के बाद फाइनल सब्मिशन होगा।     ये सर्टिफिकेट जरूरी: ऑन लाइन फार्म भरते वक्त पेरेंट्स को बच्चे का बर्थ सर्टिफिकेट या अस्पताल का रिकार्ड, आंगनबाड़ी रिकार्ड अपलोड करना होगा। अगर कुछ भी उपलब्ध नहीं है तो पेरेंट्स को मजिस्ट्रेट से अटेस्टेड एफिडेविट देना होगा। रेजिडेंस सर्टिफिकेट के तौर पर आधार, वोटर आईडी, बिजली बिल पानी का बिल या राशन कार्ड अपलोड करना होगा। वहीं इलिजिबिलिटी के लिए कास्ट सर्टिफिकेट, इनकम सर्टिफिकेट, दिव्यांग सर्टिफिकेट, वार विडो या अनाथ का सर्टिफिकेट अपलोड करना होगा।     गलत जानकारी दी तो कानूनी कार्रवाई: ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन व फार्म भरते समय गलत जानकारियां दी गई या फिर कोई फर्जी डॉक्यूमेंट लगाए गए तो बच्चे का एडमिशन रद्द कर दिया जाएगा और अभिभावकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। डिपार्टमेंट किसी भी लेवल पर दस्तावेजों की वेरिफिकेशन कर सकता है। स्कूलों के लिए गाइड लाइन – कोई स्क्रीनिंग टेस्ट या कैपिटेशन फीस नहीं – RTE बच्चों के साथ कोई भेदभाव नहीं – उन्हें अलग कक्षा या अलग समय पर नहीं पढ़ाया जाएगा – लाइब्रेरी, कंप्यूटर, खेलकूद और अन्य सुविधाओं में बराबर अधिकार – कक्षाएं समावेशी और सुरक्षित रखनी होंगी – स्कूलों को पोर्टल पर नामांकन और उपस्थिति नियमित अपडेट करनी होगी। स्कूलों को फीस ऐसे मिलेगी -सरकार स्कूल को प्रति बच्चा व्यय या वास्तविक फीस जो भी कम होगा उसे देगी। -स्कूल को इसके लिए अलग बैंक खाता खोलना होगा, जिसमें केवल RTE राशि आएगी। -सरकार से सब्सिडी ले चुके स्कूलों को सरकार कोई राशि नहीं देगी। ऐसे कर सकेंगे शिकायत आरटीई से संबंधित शिकायतों के निवारण के लिए जिला शिक्षा अधिकारी शिकायत निवारण अधिकारी होंगे। अगर कोई आवेदन रद्द होता है तो एक सप्ताह के अंदर पेरेंट्स को लिखित शिकायत देनी होगी। जिला शिक्षा अधिकारी को 15 दिन में शिकायत का निपटारा करना होगा। जिला शिक्षा अधिकारी के फैसले के खिलाफ पंजाब स्टेट कमिशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट के पास अपील कर सकेंगे। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी को समय समय पर स्कूलों की जांच करनी होगी। अभिभावकों और स्कूलों के लिए अहम बातें यह SOP सिर्फ 2026-27 सत्र के लिए है, लेकिन विभाग समय-समय पर इनमें संशोधन कर सकता है। पंजाब में 1500 से ज्यादा प्राइवेट स्कूल पोर्टल पर रजिस्टर हो चुके हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने अपील की है कि पेरेंट्स तय समय पर सही दस्तावेज अपलोड करके बच्चों का रजिस्ट्रेशन करवाएं। स्कूल प्रबंधन बच्चों के साथ किसी तरह का भेदभाव न करें। भेदभाव करने की स्थिति में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हाईकोर्ट ने फटकार लगाई तो शुरू किया पोर्टल पंजाब के प्राइवेट स्कूल्स में आरटीई के तहत एडमिशन न होने का मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में पहुंचा। कोर्ट के आदेश पर पिछले साल सरकार ने सभी प्राइवेट स्कूल प्रिंसिपल्स को 25 प्रतिशत सीटें खाली रखने के आदेश दिए लेकिन उन सीटों पर एडमिशन ही नहीं करवाए। कोर्ट ने फटकार लगाई तो एजुकेशन डिपार्टमेंट ने आरटीई पोर्टल पर स्कूलों की रजिस्ट्रेशन करवाई और अब एडमिशन का लिंक लाइव कर दिया।