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25 लाख पौधों से शहर को बनाएंगे हरा-भरा, सिंहस्थ की तैयारी में 2 साल में पूरा होगा लक्ष्य

उज्जैन  शहर में नगर निगम को इस साल 10 लाख और अगले वर्ष 15 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य दिया है। इस तरह दो वर्षों में सिंहस्थ से पहले 25 लाख पौधारोपण कर शहर की हरियाली बढ़ाने की तैयारी है। इस अभियान के लिए नगर निगम और नगरीय प्रशासन विभाग संयुक्त रूप से बजट उपलब्ध कराएंगे। निगम के पास सड़क चौड़ीकरण के दौरान पेड़ काटने के एवज में मिले 2 करोड़ रुपए है। इसके अलावा शासन स्तर से भी अतिरिक्त फंड उपलब्ध कराया जाएगा। पौधारोपण के लिए शहर में खाली और अनुपयोगी जमीनों देख रहे हैं। नगर निगम द्वारा विभिन्न स्थानों का सर्वे कर सूची तैयार की जा रही है। जून से मानसून के साथ ही पौधारोपण अभियान की शुरुआत की जाएगी। इस बार निगम केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनकी देखरेख और संरक्षण पर भी विशेष फोकस रहेगा। पौधारोपण का कार्य ठेकेदार के माध्यम से कराया जाएगा, जिसे पौधे लगाने के बाद दो वर्षों तक उनकी सुरक्षा, सिंचाई और रखरखाव की जिम्मेदारी दी जाएगी। अभी विवि परिसर, तरणताल सहित 10 जगह चयनित की नगर निगम अपर आयुक्त संदीप शिवा के अनुसार प्रारंभिक चरण में विक्रम विश्वविद्यालय परिसर, तरणताल क्षेत्र, एमआर-5 रोड, चकोर पार्क सहित करीब 10 प्रमुख स्थलों का चयन किया है। इसके अलावा शहर के लगभग 400 उद्यानों में उपलब्ध खाली भूमि का उपयोग भी किया जाएगा। हर जोन में करीब 20 स्थानों को चिह्नित किया जाएगा, जिनमें सड़क किनारे, चौराहे और निगम की अन्य खाली जमीनें शामिल होंगी।

मध्य प्रदेश राज्य वफ्फ बोर्ड के अध्यक्ष से की मुलाकात

भोपाल अधिमान्य पत्रकार नेतृत्व समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डल्लू कुमार सोनी के द्वारा .मध्य प्रदेश राज्य वफ्फ बोर्ड के अध्यक्ष जनाब सन्वर पटेल जी का स्वागत किया।और उनसे समिति के संदर्भ में चर्चा की इस दौरान जिला अध्यक्ष इरशाद अहमद,एवं जिला सोसल मीडिया प्रभारी मो,शरीफ कुरैशी भी स्वागत एवं चर्चा के दौरान उपस्थित है। 

गोरस मोबाइल ऐप से पशुपालकों को मिलेगी जानकारी, बढ़ेगा दूध उत्पादन, पशुपालकों की आय में होगा इजाफा

भोपाल.  प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ ही पशुपालकों एवं किसानों को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से पशुओं को संतुलित आहार प्रबंधन की आसानी से जानकारी मिल सके, इसके लिए मुख्यपमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में विभाग द्वारा लगातार नवाचार किए जा रहे हैं। पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने एक ‘गोरस मोबाइल ऐप’ विकसित किया है। यह ऐप पशुपालकों को वैज्ञानिक आधार पर पशुओं के आहार प्रबंधन की सटीक जानकारी उपलब्ध कराएगा। इसके उपयोग से पशुओं का स्वास्थ्य तो बेहतर होगा ही, साथ में दूध उत्पादन में वृद्धि भी होगी। इससे पशुपालकों की आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। इसलिए तैयार कराया गया ऐप मध्यप्रदेश में 2 करोड़ से अधिक गाय एवं भैंसों का पालन किया जा रहा है, लेकिन अधिकांश पशुपालक अभी भी पारंपरिक तरीके से पशुओं को आहार देते हैं। वैज्ञानिक पद्धति से पोषण न मिलने के कारण पशुओं की उत्पादन क्षमता प्रभावित होती है, जिससे 20 से 30 प्रतिशत तक कम दूध उत्पादन, गर्भधारण में कठिनाई और बार-बार हीट जैसी समस्याएं सामने आती हैं। पशुपालकों की इन सभी समस्यामओं के समाधान के लिए पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने एक नवाचार किया है। ‘गोरस मोबाइल ऐप’ विकसित किया है। अब ऐप से पशुपालक जैसे ही अपने पशु से संबंधित जानकारी नस्ल, वजन, दुग्ध उत्पादन, गर्भावस्था की स्थिति, दुग्ध उत्पादन का महीना, पशुआहार दर्ज करेंगे, इसके आधार पर ऐप संतुलित आहार की मात्रा और प्रकार की जानकारी देगा। साथ ही यह भी बताएगा कि आहार में सुधार करने पर पशुपालक को एक ब्यांत में कितना आर्थिक लाभ मिलेगा। इसके अलावा, एप वर्तमान में दिए जा रहे आहार से संभावित नुकसान की जानकारी भी देगा। अवर्णित गाय एवं भैंसों के लिए नस्ल सुधार के सुझाव भी प्रदान करेगा। विभाग की यह पहल प्रदेश में वैज्ञानिक पशुपालन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्व। पूर्ण कदम मानी जा रही है। जल्द ही गूगल प्ले स्टोर पर होगा उपलब्ध होगा पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा विकसित किया गया एप जल्द ही गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध होगा, जो पूरी तरह से नि:शुल्क होगा। पशुपालक इसे अपने मोबाइल पर आसानी से डाउलनोड कर जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। ऐप की खासियत: यह पूरी तरह से हिंदी मोबाइल ऐप है। गाय, भैंस के लिए संतुलित आहार के बारे में सुझाव देगा। चुने हुए चारे संयोजन से अधिकतम दूध, न्यूनतम लागत। इंटरनेट के बिना भी पूरी तरह कार्यशील। 28 से अधिक स्थानीय चारों की विस्तृत जानकारी मौसम (गर्मी) और गर्भावस्था के अनुसार स्वचालित समायोजन गिर, साहीवाल, थारपारकर, मुर्रा, भदावरी एवं संकर नस्लों के लिए अलग-अलग मार्गदर्शन पशुपालकों को संभावित आर्थिक लाभ के बारे में मिलेगी जानकारी। अवर्णित गाय एवं भैंसों के लिए नस्ल सुधार की सलाह। पशुपालक ऐसे करें डाउनलोड गोरस मोबाइल ऐप को डाउनलोड करने के लिए पशुपालकों को सबसे पहले मोबाइल प्ले स्टोर पर जाना होगा। गोरस ऐप सर्च करें। डाउनलोड करने के बाद ऐप को इस्टॉल करने की अनुमति देगी। इसके बाद इस्टॉल पर क्लिक करें। फिर गूगल सिक्योरिटी को अनुमति दी। इसके बाद ऐप खोले। विभाग द्वारा कराया गया है तैयार प्रमुख सचिव पशुपालन एवं डेयरी विभाग श्री उमाकांत उमराव ने बताया कि प्रदेश के किसानों, पशुपालकों को मोबाइल पर ही पशुओं के पोषण संबंधी जानकारी मिल जाए। साथ ही वैज्ञानिक तरीके से पशुओं को आहार मिले, इसके लिए विभाग द्वारा गोरस मोबाइल ऐप तैयार कराया गया है। यह ऐप पूरी तरह से सरल हिंदी भाषा में विकसित किया है। जल्द ही पशुपालकों को गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध होगा।  

जबलपुर में एडवांस धनुष तोप का सफल ट्रायल, अब पोकरण में होगा परीक्षण

जबलपुर देशभर में सेना के लिए तोप निर्माण में अग्रणी जबलपुर की गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) ने एक और कमाल कर दिखाया है। जीसीएफ ने भारतीय सेना की सहायता के लिए धनुष तोप का एडवांस वर्जन बना दिया है। इसमें अनेक मॉडर्न फीचर्स जोड़े हैं। यह नाटो मानक के अनुसार हैं। 40 से 42 किमी तक गोला दागने वाली 155 एमएम 52 कैलिबर की माउंटेड व टो गन की सेना ने रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) मांगी है। जीसीएफ अधिकारी बताते हैं कि एडवांस धनुष तोप ट्रायल में सफल रही है। यह भारतीय सेना के सैन्य अभियानों के लिए काफी मददगार साबित हो सकती है। हाल ही में सीपीइ इटारसी में माउंटेड गन के प्रोटोटाइप की स्ट्रक्चरल फायरिंग की। इसके अंतर्गत 20 से अधिक गोले दागे गए थे। खास बात यह है कि सभी गोले निशाने पर लगे। सैन्य अधिकारियों के अनुसार अब टो गन के प्रोटोटाइप का परीक्षण राजस्थान के पोकरण में किया जाएगा। प्रोटोटाइप के परीक्षण की तैयारियों को तेजी से अंतिम रूप दिया जा रहा है। देश की पहली तोप, सटीक लक्ष्य साधने फायर कंट्रोल सिस्टम एडवांस कर वजन कम करने गति बढ़ाने के लिए 6 बाइ 6 वाहन पर माउंट किया गया गन कैरिज फैक्ट्री ने 2016 में माउंटेड 155 एमएम 52 कैलीबर तोप का प्रोटोटाइप तैयार किया था। उस समय यह देश की पहली माउंटेड तोप थी। अब जो तोप तैयार की है, उसकी तकनीक में बहुत अंतर है। इस नई तोप में ऑटोमैटिक एमुनेशन हैंडलिंग जोड़ा है। सटीक लक्ष्य साधने फायर कंट्रोल सिस्टम एडवांस कर वजन कम करने गति बढ़ाने के लिए 6 बाइ 6 वाहन पर माउंट किया गया है। एडवांस धनुष तोप में ऑटोमैटिक एम्युनिशन हैंडलिंग है। जबलपुर में बनी माउंटेड गन को स्वदेशी 6 बाइ 6 के ट्रक पर माउंट किया है। इससे भारतीय सेना और मजबूत होगी। माउंटेड गन की प्रमुख खासियत एडवांस फायर कंट्रोल सिस्टम ऑटोमैटिक एम्युनिशन हैंडलिंग नाटो मानक पर बेस्ड प्रोटोटाइप 6 बाइ 6 ट्रक पर माउंटेड सिस्टम एडवांस इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम 40 से 42 किमी मारक क्षमता स्वदेशी ट्रक पर माउंटेड

नर्मदा संरक्षण के लिये जरूरी है सरकार एवं समाज में समन्वय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नर्मदा नदी जीवनदायिनी नदियों में से एक है। नर्मदा नदी के संरक्षण के लिए शासन एवं समाज के बीच समन्वय अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि माँ नर्मदा के उद्गम स्थल के संरक्षण एवं संवर्धन के लिये प्रभावी प्रयास किए जाएँ तथा नदी तटों पर अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही सतत रूप से की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अमरकंटक की अखंडता बनाए रखने के लिए अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों तथा विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के प्रतिनिधियों द्वारा जन जागृति बढ़ाई जाए, इससे उद्गम स्थल का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज अमरकंटक में नर्मदा समग्र मिशन की बैठक में अधिकारियों के निर्देशित कर रहे थे। बैठक में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री दिलीप अहिरवार, कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल, अध्यक्ष नर्मदे हर सेवा न्यास एवं मध्यप्रदेश कोल विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष (कैबिनेट मंत्री दर्जा) रामलाल रौतेल, पूर्व जनपद अध्यक्ष पुष्पराजगढ़ हीरा सिंह श्याम सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अमरकंटक क्षेत्र में वनों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिये किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि स्थानीय प्रजाति के पौधे, वन औषधि पौधों का प्राथमिकता के साथ रोपण किया जाए। वन विभाग के अधिकारियों ने अवगत कराया कि अमरकंटक क्षेत्र में प्राकृतिक वनों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। अमरकंटक के प्राकृतिक स्वरूप को निखारने के लिए स्थानीय प्रजाति साल, महुआ, ऑवला, चार, हर्रा, गुलबकावली आदि स्थानीय प्रजातियों के पौधों का रोपण कर उन्हें बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे भूमिगत जल स्तर में वृद्धि हो तथा स्थानीय वन प्राकृतिक रूप से संरक्षित रह सकें। यह भी बताया गया कि वन विभाग की रोपणी में 2.50 लाख से अधिक पौधे उपलब्ध हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अमरकंटक में नए निर्माण कार्यों पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अमरकंटक क्षेत्र में अनियंत्रित कंक्रीट निर्माण को प्रतिबंधित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अमरकंटक तथा नर्मदा उद्गम स्थल पर अवैध अतिक्रमण के विरुद्ध समय-समय पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश कलेक्टर को दिए। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नर्मदा नदी में प्रदूषण, अपशिष्ट जल निकासी एवं जल प्रबंधन व्यवस्थाओं की समीक्षा की। इस पर अधिकारियों ने बताया कि अमरकंटक में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जा चुका है तथा यह सुनिश्चित करने के लिये सतत प्रयास किए जा रहे हैं कि प्रदूषित जल नर्मदा नदी में न मिले। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अमरकंटक एक प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन नगरी है, जहाँ अनेक आध्यात्मिक एवं पौराणिक मंदिर स्थित हैं। उन्होंने कहा कि यहाँ स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहरी व्यक्तियों द्वारा भी बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य किए जा रहे हैं, जिन्हें नीति-नियमों के अनुरूप व्यवस्थित किया जाना आवश्यक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अमरकंटक क्षेत्र में प्लास्टिक एवं शराब के उपयोग पर कठोर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अमरकंटक में “नो मूवमेंट” एवं “नो कंस्ट्रक्शन” जोन निर्धारित किया जाए, जिससे क्षेत्र की पवित्रता, पर्यावरणीय संतुलन एवं सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अमरकंटक में सीमेंट एवं कंक्रीट का निर्माण ना हो इसका अधिकारी विशेष ध्यान रखे जाने के निर्देश पर कलेक्टर हर्षल पंचोली ने अवगत कराया कि अमरकंटक क्षेत्र का ड्रोन सर्वे पूर्व में कराया जा चुका है। इसमें यदि कोई अवैध निर्माण कार्य पाया जाता है, तो उस पर प्रशासन द्वारा त्वरित कार्रवाई की जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि अमरकंटक विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण, नगर परिषद तथा अमरकंटक मंदिर के विकास के लिये कमिश्नर की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। इस समिति के माध्यम से समय-समय पर अमरकंटक के विकास एवं संवर्धन से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं एवं बिंदुओं पर चर्चा की जाती है। बैठक में ट्रैकिंग रूट, अग्नि सुरक्षा की मॉनिटरिंग एवं प्रबंधन, वन उत्पादों के प्रबंधन, जैव विविधता के संरक्षण एवं संवर्धन, वन्यजीवों के मूवमेंट एवं उनकी स्थिति सहित अमरकंटक के मंदिरों, तालाबों एवं घाटों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की गई तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गए। समीक्षा बैठक में जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष पद्मसे सम्मानित मोहन नागर ने नर्मदा समग्र मिशन के तहत समाज के सहयोग से संचालित की जाने वाली नर्मदा नदी के घाटों की साफ-सफाई तथा सहायक नदियों एवं घाटों में जन सहभागिता से किए जाने वाले श्रमदान कार्यों की जानकारी दी। अपर मुख्य सचिव नगरीय प्रशासन एवं आवास संजय दुबे ने अमरकंटक में विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों एवं आगामी योजनाओं की जानकारी दी। अपर मुख्य सचिव योजना आर्थिकी एवं सांख्यिकी संजय शुक्ला द्वारा नर्मदा नदी के समग्र विकास के लिए बनाई गई कार्य योजना एवं उपलब्धियों से अवगत कराया। मुख्य सचिव वन संदीप यादव ने वन विभाग द्वारा जैव विविधिता, यूकेलिप्टस के प्लांटेशन को हटाकर स्थानीय प्रजाति के पौधरोपण के संबंध में जानकारी दी। बैठक में शहडोल संभाग की कमिश्नर सुरभि गुप्ता, पुलिस महानिरीक्षक सुचैत्रा एन, डीआईजी सविता सुहाने, पुलिस अधीक्षक मोतिउर रहमान, वनमण्डलाधिकारी डेविड व्यंकटेश, जिला पंचायत सीईओ श्रीमती अर्चना कुमारी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जगन्नाथ मरकाम सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।  

एमपी में 14 जिलों और 42 मोहल्लों के अटपटे नाम बदलने की मांग, भोपाल भी शामिल

भोपाल   जब नाम बदलने का दौर चल ही रहा है तो लगे हाथ इनके नाम भी बदल दीजिए ना हुजूर। शुरुआत हुजूर शब्द से ही करते हैं। मध्यप्रदेश में दो तहसीलों के नाम हुजूर है। पहली हुजूर तहसील भोपाल जिले में है, तो दूसरी रीवा जिले में। एक जैसा नाम होने के कारण कई बार बड़ी गफलत की स्थिति बन जाती है। तहसील हुजूर बनी हुई है अजूबा राजधानी भोपाल की तहसील हुजूर में तो अजूबा यह कि इस नाम का कोई नगर, बस्ती या मोहल्ला तक नहीं है, फिर भी आधा भोपाल हुजूर तहसील में आता है। सिर्फ तहसील ही नहीं, भोपाल में तो एक विधानसभा सीट का नाम भी हुजूर है। कुछ साल पहले ही बनी इस सीट की भौगोलिक परिस्थिति भी विचित्र है। इसका एक सिरा सीहोर जिले के नजदीक है, तो दूसरा रायसेन जिले के सर्पाकार क्षेत्र वाली इस सीट के तहत अधिकांश हिस्सा ग्रामीण मतदाताओं का आता है। हुजूर सीट का नामकरण संभवत: तहसील हुजूर के कारण ही किया गया है, लेकिन इसमें दूसरी तहसीलों का भी कुछ क्षेत्र समाहित है। तो हुजूर, यह शब्द वैसे भी सामंतवादी सम्मान और गुलामी की मानसिकता को प्रदर्शित करता है, इसे बदला जा सकता है। क्या जातिसूचक नाम भी बदले जाएंगे? प्रदेश कांग्रेस के नेता भूपेंद्र गुप्ता ने कुछ समय पहले मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जातिसूचक नामों वाले मोहल्लों का नाम बदलने की मांग की थी। कुछ नाम हैं, लोहारपुरा, सुनारपुरा, ढीमरखेड़ा, गुजरपुरा, तेलीपुरा, चमारपुरा, चमारटोला, ब्राह्मणपुरा, कायस्थपुरा, लखेरापुरा, दांगी मोहल्ला, भाटखेड़ी, इस्लाम मोहल्ला, कसाईपुरा, पवारखेड़ा, कोठा, खिड़किया, जाटखेड़ी, बंजारा, बंजारी आदि। ये अटपटे नाम बंदरकोल, बाबा की बरोली, बैसनपुर, बाराती, बौना, चंडी, चिल्लाखुर्द, दाढ़, घोड़ाबंद, चोरघटा (रीवा), चटाईपुरा (भोपाल), झुंड (शिवपुरी), ठीकरी (बड़वानी), फुटेरा (दमोह), भड़भडिय़ा (नीमच), लंगोटी, लालबर्रा (बालाघाट), चोली (खरगोन), चोरपुरा (मुरैना), बिहार (झाबुआ), बालमपुर (भोपाल), कुडिय़ा (सतना)। नाम बदलने की प्रक्रिया किसी भी मोहल्ले, गांव या शहर का नाम बदलने की सरकारी प्रक्रिया निर्धारित है। सबसे पहले स्थानीय निकाय से प्रस्ताव पारित कराकर जिला प्रशासन को भेजा जाता है। जिला प्रशासन से यह प्रस्ताव राज्य सरकार को और फिर केंद्र सरकार को भेजा जाता है। केंद्रीय गृह मंत्रालय से मंजूरी के बाद इसका गजट नोटिफिकेशन होता है। अब तक बदले गए नाम पुराना नाम – नया नाम होशंगाबाद – नर्मदापुरम नसरूल्लागंज – भैरुंदा फंदा – हरिहरनगर गंजबासौदा -वासुदेवनगर मुलताई – मूलतापी कांटाफोड़ – कांतापुर गजनीखेड़ी – चामुंडा महानगरी मौला – मोहनपुरा मौलाना – विक्रम नगर जहांगीरपुर – जगदीशपुर मिर्जापुर – मीरापुर सलामतपुरा – श्रीरामपुरा रेहमानपुरा – हनुमानपुरा इनके नाम में बदलाव की मांग पुराना नाम – नया नाम भोपाल – भोजपाल कटनी – कनकपुर जैसीनगर – जयशिव नगर औबेदुल्लागंज – हिरानिया विदिशा – वैदवती बेगमगंज – सियावास गौहरगंज – कलियाखेड़ी शमशाबाद – सूर्यनगर नूरगंज – रूपनगर सीहोर – सिद्धपुर उज्जैन – अवंतिका नगरी दतिया – दिलीपनगर महेश्वर – महिष्मती जबलपुर – जबालिपुरम

बिहार में आज तय होगा सत्ता का मालिक, लोकभवन सजा और तैयारियां पूरी

 पटना बिहार के लिए आज यानि मंगलवार का दिन बड़ा रहने वाला है. प्रदेश के मुखिया नीतीश कुमार इस्तीफा दे सकते हैं और साथ ही नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है. इस कड़ी में एनडीए (नेशनल डेमोक्रेटिक एलायंस) ने राजधानी पटना में विधयक दल की अहम बैठक बुलाई है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ऑब्जर्वर के तौर पर पहुंचेंगे।  14 अप्रैल को शाम 4 बजे पटना के विधानसभा भवन के सेंट्रल हॉल में एनडीए के सभी विधायक एक साथ बैठेंगे. इसे विधायक दल की बैठक कहते हैं. इसी बैठक में तय होगा कि एनडीए का नेता कौन होगा यानी बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा. जिस नेता को सबसे ज्यादा समर्थन मिलेगा उनके नाम पर सहमति बनेगी।  शपथ ग्रहण कब और कहां होगा? 15 अप्रैल को सुबह 11 बजे पटना के लोकभवन में शपथ ग्रहण समारोह होगा. लोकभवन बिहार सरकार का एक बड़ा सरकारी भवन है जहां ऐसे बड़े कार्यक्रम होते हैं. वहां तैयारियां जोरों पर हैं और काम को आखिरी रूप दिया जा रहा है।  सम्राट चौधरी का नाम क्यों आया? सूत्रों के मुताबिक लोकभवन के अधिकारियों ने डिप्टी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियों की जानकारी दी. इससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि वो इस पूरी प्रक्रिया में एक अहम भूमिका में हैं।  नए मुख्यमंत्री का नाम अभी क्यों तय नहीं? यह सवाल सबके मन में है. एनडीए के गठबंधन में कई पार्टियां हैं और सभी की अपनी-अपनी पसंद होती है. इसीलिए पहले विधायक दल की बैठक होती है जहां सभी मिलकर एक नाम पर सहमति बनाते हैं. उसके बाद ही मुख्यमंत्री का चेहरा सामने आता है. कल की बैठक के बाद यह रहस्य खुल जाएगा।   

योगी सरकार में मंत्री पद पर सवर्ण और पश्चिम यूपी पर होगा फोकस, एक नेता की नियुक्ति तय

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार का कैबिनेट विस्तार होने की तैयारी है। लखनऊ से दिल्ली तक यह वीकेंड काफी गहमागहमी वाला रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े अचानक ही लखनऊ पहुंचे और एक के बाद एक कई नेताओं से मुलाकात की। इसके अलावा सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ संगठन महामंत्री धर्मपाल एवं प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की मुलाकात हुई। यही नहीं पंकज चौधरी ने दिल्ली में भी मुलाकातें की हैं। माना जा रहा है कि विनोद तावड़े ने सीएम योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक एवं केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात की है। इनसे राज्य के कामकाज पर बात की गई और मंत्री बनाए जाने को लेकर भी चर्चा हुई। यही नहीं विनोद तावड़े की मुलाकात पूर्व प्रदेश अध्यक्षों रमापति राम त्रिपाठी और सूर्यप्रताप शाही से भी हुई। इसके अलावा पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी, पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह जैसे नेता भी उनसे मिले। ये सारी बैठकें फीडबैक के लिए हुईं और मंथन हुआ कि कौन से नेता मंत्री बन सकते हैं। इसके अलावा किन लोगों को निगमों, सहकारी संस्थाओं आदि में पद देकर नवाजा जा सकता है। इस बीच चर्चा है कि पश्चिम यूपी से आने वाले पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का मंत्री बनना तय है। वह प्रदेश अध्यक्ष पद से हटे हैं और जाट नेता हैं। बिरादरी का पश्चिम यूपी में अच्छा असर है। ऐसे में पार्टी चाहेगी कि उन्हें कोई अहम विभाग देकर समाज में एक संदेश दिया जाए। 6 मंत्रियों के लिए एंट्री की संभावना, कौन हैं रेस में उत्तर प्रदेश सरकार में फिलहाल 54 मंत्री हैं। इनमें से 21 कैबिनेट मंत्री हैं और 14 राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं। इसके अलावा 19 राज्यमंत्री हैं। अब भी 6 मंत्री और बन सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि विधानसभा की कुल क्षमता के 15 फीसदी के बराबर का मंत्री परिषद हो सकता है। यूपी में आखिरी कैबिनेट विस्तार मार्च 2024 में हुआ था। सूत्रों का कहना है कि अब होने वाले कैबिनेट विस्तार में कुछ लोगों को सरकार से संगठन में भेजा सकता है। इसके अलावा सालों से संगठन में मेहनत कर रहे कुछ लोग मंत्री पद पा सकते हैं। यही नहीं आयोग और निगमों में भी पद दिए जा सकते हैं। दिल्ली से लखनऊ तक मंथन, किन्हें मिलेगा जिम्मा और कौन बाहर कहा जा रहा है कि राज्य में कुछ नियुक्तियों को लेकर दिल्ली और लखनऊ के बीच मतभेद की स्थिति है। ऐसे में इस बार नियुक्तियां ऐसी करने पर विचार हो रहा है कि कहीं भी नाराजगी का स्कोप ना रहे। इसके अलावा मंत्री परिषद के गठन में पश्चिम यूपी पर फोकस करने की तैयारी है। ऐसा इसलिए क्योंकि सीएम, दोनों डिप्टी सीएम और प्रदेश अध्यक्ष में से सभी मध्य अथवा पूर्वी यूपी के हैं। ऐसे में पश्चिम यूपी के किसी नेता को अहमियत मिल सकती है। वहीं सामाजिक समीकरण की बात की जाए तो ओबीसी और दलित के अलावा सवर्ण समाज पर भी फोकस रह सकता है। यूजीसी रूल्स वाले विवाद के बाद सवर्णों में नाराजगी के चर्चे हैं। ऐसी स्थिति में भाजपा सरकार इन्हें 2027 से पहले निश्चित तौर पर साधना चाहेगी।

विज्ञान मंथन यात्रा: सतना के 17 छात्रों को ISRO और श्रीहरिकोटा जाने का अवसर, चयन व्यंकट-वन स्कूल से

सतना  मध्यप्रदेश के सतना के मेधावी छात्रों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है। मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (MP CST) की विज्ञान मंथन यात्रा के तहत व्यंकट-वन स्कूल के 17 स्टूडेंट्स का सिलेक्शन हुआ है। ये होनहार बच्चे अब बेंगलुरु स्थित ISRO हेडक्वार्टर और श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर की सैर करेंगे। 95% से ज्यादा नंबर लाने वाले इन छात्रों को रॉकेट साइंस और अंतरिक्ष की बारीकियों को लाइव समझने का शानदार मौका मिलेगा। छात्र 20 से 27 अप्रैल तक देश की प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के बेंगलुरु (कर्नाटक) मुख्यालय और श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश) स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC) की सैर करेंगे। दल के लिए रसायन विज्ञान के शिक्षक डॉ. रामानुज पाठक और भौतिक विज्ञान की शिक्षिका नविता जायसवाल को ग्रुप हेड नियुक्त किया गया है, जिनके नेतृत्व में विद्यार्थी प्रयोग, अवलोकन और विश्लेषण की वैज्ञानिक पद्धति को प्रत्यक्ष रूप से समझेंगे। 95% से अधिक अंक लाने वाले विद्यार्थियों का होता है चयन एमपी सीएसटी की विज्ञान मंथन यात्रा के लिए प्रदेश के एमपी बोर्ड, सीबीएसई और आईसीएसई के विज्ञान संकाय के 10वीं, 11वीं और 12वीं के मेधावी छात्र-छात्राओं का चयन होता है। इसमें वे विद्यार्थी पात्र होते हैं जिन्होंने अपनी पिछली कक्षा में 95 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त किए हों। विज्ञान मंथन के लिए चयनित विद्यार्थियों के लिए बाद में एक परीक्षा भी आयोजित की जाती है। इस परीक्षा में सफल होने वाले प्रतिभागियों को 5 साल तक प्रतिमाह 1200 से 1500 रुपए की छात्रवृत्ति भी प्रदान की जाती है। व्यंकट-वन स्कूल के इन विद्यार्थियों को मिला अवसर एक्सीलेंस स्कूल व्यंकट-1 से चयनित छात्र-छात्राओं में 12वीं कक्षा से तोषी गौतम, पल्लवी राठौड़, ऋषिका त्रिपाठी और रुद्राक्ष त्रिपाठी शामिल हैं। 11वीं कक्षा से आदित्य पांडेय, अखंड प्रताप यादव, कंचन चौधरी, रितिक तिवारी और नेहा पटेल का चयन हुआ है। वहीं, 10वीं कक्षा से कृष्णा गुप्ता, मोहिना गुप्ता, प्राची कुशवाहा, राधे गुप्ता और अंशराज सिंह तोमर को यह अवसर मिला है। प्राचार्य बोले- नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देना है उद्देश्य एक्सीलेंस स्कूल के प्राचार्य केएस बघेल ने बताया कि, "मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा आयोजित विज्ञान मंथन यात्रा का उद्देश्य राज्य में वैज्ञानिक चेतना का प्रसार और नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देना है। स्कूली बच्चों में वैज्ञानिक प्रतिभा की पहचान, उनमें वैज्ञानिक समझ को सुदृढ़ करना और उन्हें वैज्ञानिक विकास की सक्रिय भागादारी के प्रति प्रेरित करना है।" यह 11वीं पंचवर्षीय योजना के तहत राज्य सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजना है। ISRO-श्रीहरिकोटा टूर का पूरा शेड्यूल ये शानदार साइंटिफिक जर्नी 20 अप्रैल से शुरू होकर 27 अप्रैल तक चलेगी। इस दौरान बच्चे बेंगलुरु स्थित इसरो (ISRO) के मुख्यालय का दौरा करेंगे। साथ ही वे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC) भी जाएंगे। वहां वे देखेंगे कि रॉकेट और सैटेलाइट कैसे काम करते हैं। इस टीम की लीडरशिप केमिस्ट्री के टीचर डॉ. रामानुज पाठक करेंगे। उनके साथ फिजिक्स की टीचर नविता जायसवाल भी मौजूद रहेंगी। व्यंकट-वन स्कूल के इन बच्चों ने किया नाम रोशन     व्यंकट-वन स्कूल के कई होनहार बच्चों ने इस लिस्ट में जगह बनाई है।      12वीं कक्षा से तोषी, पल्लवी, ऋषिका और रुद्राक्ष का चयन हुआ है।      11वीं से आदित्य, अखंड, कंचन, रितिक और नेहा को अवसर मिला है।      वहीं 10वीं कक्षा से कृष्णा, मोहिना, प्राची, राधे और अंशराज शामिल हैं।      ये सभी बच्चे अंतरिक्ष विज्ञान को करीब से देखने के लिए उत्साहित हैं। किसे मिलता है विज्ञान मंथन यात्रा का मौका इस यात्रा के लिए चयन की प्रक्रिया बहुत ही कड़ी होती है। केवल वही छात्र इसके लिए एलिजिबल होते हैं जिनके नंबर 95% से अधिक हों। इसमें एमपी बोर्ड, सीबीएसई और आईसीएसई के विज्ञान छात्र शामिल होते हैं। 10वीं, 11वीं और 12वीं कक्षा के मेधावी छात्रों को प्रॉयोरिटी दी जाती है। ये बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने की एक बहुत अच्छी पहल है। साइंटिफिक कॉन्शसनेस को बढ़ावा देना है लक्ष्य विज्ञान मंथन यात्रा (Vigyan Manthan Yatra) सिर्फ एक टूर या सैर-सपाटा नहीं है। चयनित विद्यार्थियों के लिए बाद में एक विशेष परीक्षा आयोजित की जाएगी। जो छात्र इस परीक्षा को पास करेंगे, उन्हें स्कॉलरशिप दी जाएगी। उन्हें अगले 5 साल तक पर मंथ 12 सौ से 15 सौ रुपए मिलेंगे।  इससे उनकी आगे की पढ़ाई में काफी मदद मिल सकेगी। स्कूल के प्राचार्य केएस बघेल ने इस अचीवमेंट पर खुशी जताई है। उन्होंने बताया कि इस टूर का मेन ऑब्जेक्टिव साइंटिफिक कांशसनेस फैलाना है। ये योजना 11वीं फाइव ईयर प्लान के तहत शुरू की गई थी। ISRO क्या है? ISRO का फुल फॉर्म Indian Space Research Organisation है। सरल शब्दों में कहें तो यह भारत की एक सरकारी संस्था  है जो अंतरिक्ष यान, सैटेलाइट और रॉकेट बनाने का काम करती है। इसका हेडक्वार्टर बेंगलुरु में है। इसरो का काम है नई-नई टेक्नोलॉजी विकसित करना, जैसे कि चंद्रयान या मंगलयान। यह वो 'दिमाग' है जो पूरी प्लानिंग करता है कि भारत स्पेस की दुनिया में कैसे आगे बढ़ेगा। श्रीहरिकोटा क्या है? श्रीहरिकोटा असल में एक जगह का नाम है, जो आंध्र प्रदेश के तट पर स्थित एक छोटा सा आइलैंड है। यहां पर इसरो का Sathish Dhawan Space Centre (SDSC) बना हुआ है। आप इसे भारत का 'रॉकेट पोर्ट' कह सकते हैं। इसरो जो भी रॉकेट या सैटेलाइट बनाता है, उसे लॉन्च करने के लिए श्रीहरिकोटा लाया जाता है। यहां से रॉकेट अंतरिक्ष में उड़ान भरते हैं। समुद्र के किनारे होने के कारण यह जगह रॉकेट लॉन्चिंग के लिए सबसे सुरक्षित और सही मानी जाती है।

मध्‍यप्रदेश पुलिस ने किया e-Zero FIR, फर्जी कॉल सेंटर, म्यूल अकाउंट व ऑनलाइन ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश

भोपाल. आधुनिक तकनीक, त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली एवं सुनियोजित रणनीति के माध्यम से मध्यप्रदेश पुलिस लगातार सायबर अपराधियों पर शिकंजा कस रही है। पुलिस ने देवास ओर विदिशा में सायबर अपराधों के विरुद्ध अलग-अलग प्रकरणों में प्रभावी कार्यवाही करते हुए सायबर ठगी में संलिप्त आरोपियों पर सख्त कार्रवाई कीगयी। देवास में “e-Zero FIRके तहत अंतर्राज्‍यीय सायबर ठग गिरोह का पर्दाफाश जिले में दिनांक 02 जनवरी को दर्ज एक प्रकरण में फरियादी के मोबाइल पर “RTOChalan. apk”नामक संदिग्ध लिंक भेजकर मोबाइल हैक कर 7 लाख 98 हजार रुपए की ठगी की गई थी। प्रकरण में थाना नाहर दरवाजा में अपराध पंजीबद्ध कर तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुलिस टीम द्वारा 1600 किलोमीटर दूर हावड़ा (पश्चिम बंगाल) एवं 800 किलोमीटर दूर दिल्ली से जुड़े संगठित गिरोह के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के कब्जे से 4 लाख 96 हजार 500 रुपए नगद एवं 02 एंड्रॉइड मोबाइल फोन जप्त किए गए हैं। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में लागू “e- ZeroFIR”प्रणाली के अंतर्गत ₹1,00,000/- से अधिक की सायबर ठगी की शिकायत 1930 हेल्पलाइन अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज होते ही स्वतः सायबर मुख्यालय भोपाल में पंजीबद्ध की जाती है, जिसे संबंधित जिले में जीरो एफआईआर के रूप में दर्ज कर त्वरित विवेचना प्रारंभ की जाती है। इस प्रणाली के माध्यम से “गोल्डन ऑवर”में बैंक खातों को फ्रीज कर डिजिटल साक्ष्य संकलित किए जाते हैं, जिससे ठगी गई राशि की रिकवरी की संभावना में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। विदिशा में 5 वर्षों से संचालित फर्जी कॉल सेंटर ध्वस्त कर मास्टरमाइंड को किया गिरफ्तार राज्य सायबर पुलिस मुख्यालय भोपाल द्वारा प्राप्त मुखबिर सूचना के आधार पर विदिशा जिले के गंजबासोदा क्षेत्र में संचालित एक फर्जी कॉल सेंटर पर दबिश देकर आरोपी एवं उसकी महिला सहकर्मी को गिरफ्तार किया गया ।  आरोपी  द्वारा विगत 4-5 वर्षों से “QuikrJob”के नाम पर फर्जी कॉल कर अभ्यर्थियों से रजिस्ट्रेशन, इंटरव्यू एवं ज्वाइनिंग किट के नाम पर राशि विभिन्न खातों में जमा कराकर सुनियोजित तरीके से ठगी की जा रही थी। दबिश के दौरान मौके से 20 मोबाइल फोन, 01 लैपटॉप, 12 सिम कार्ड, 11 एटीएम कार्ड, 03 पासबुक, 02 चेकबुक, 01 पेन ड्राइव, डाटा रजिस्टर एवं अन्य दस्तावेज जब्त किए गए हैं। दोनों आरोपियों  के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) एवं आईटी एक्ट की धाराओं के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है। रतलाम— मल्टी-स्टेट फ्रॉड में प्रयुक्त म्यूल अकाउंट का खुलासा, 03 आरोपी गिरफ्तार जिले में साइबर अपराधों के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत रतलाम पुलिस ने बड़ी सफलता प्राप्त करते हुए एक मल्टी-स्टेट साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े म्यूल अकाउंट का खुलासा किया है। साइबर सेल टीम द्वारा “Operation MATRIX (Mule Account Tracking, Removal Investigation Exercise)”के अंतर्गत कार्रवाई करते हुए, NCRP एवं JCCT पोर्टल से प्राप्त जानकारी के आधार पर फेडरल बैंक के एक संदिग्ध खाते की जांच की गई। जांच में यह खाता प्रथम मित्तल (23 वर्ष, निवासी माणकचौक, रतलाम) के नाम पर संचालित पाया गया, जिसमें 47 लाख  75 हजार 301 रूपए की संदिग्ध राशि जमा हुई थी। जांच में स्पष्ट हुआ कि यह खाता म्यूल अकाउंट के रूप में उपयोग किया जा रहा था, जिसका उपयोग साइबर अपराधियों द्वारा ऑनलाइन ठगी एवं आर्थिक अपराधों में धन के प्रवाह को छिपाने हेतु किया जाता है। प्रकरण की जांच में यह भी सामने आया कि उक्त खाता तमिलनाडु के कोयंबटूर निवासी के.सी. श्रीधर के साथ हुए “डिजिटल अरेस्ट स्कैम” से जुड़ा है, जिसमें कुल 67 लाख 75 हजार 301 रूपएकी ठगी की गई थी और उसकी आंशिक राशि इसी खाते में ट्रांसफर हुई थी। प्रथम दृष्टया अपराध सिद्ध होने पर थाना माणकचौक में प्रकरण पंजीबद्ध कर प्रथम मित्तल सहित उसके सहयोगी हेमंत रायक उर्फ मोनू (निवासी रुद्राक्ष कॉलोनी) एवं शुभम रेडा उर्फ चीकू (निवासी नगरवास) को गिरफ्तार किया गया। इटारसी- वर्क फ्रॉम होम टास्क के नाम पर साइबर ठगी का खुलासा वर्क फ्रॉम होम टास्क के नाम पर ऑनलाइन धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के विरुद्ध थाना इटारसी पुलिस ने प्रभावी कार्रवाई करते हुए 03 आरोपियों को गिरफ्तार किया ‍है। दिनांक 02जनवरी को फरियादिया को व्हाट्सएप के माध्यम से वर्क फ्रॉम होम का लालच देकर टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ा गया, जहां होटल-रेस्टोरेंट रेटिंग के टास्क दिए गए। प्रारंभ में छोटे-छोटे भुगतान (1हजार 40रूपए , 3 हजार 900रूपए , 1 हजार 350) देकर विश्वास अर्जित किया गया, इसके बाद अधिक राशि निवेश करने के नाम पर 3लाख 36 हजार 800रूपए की धोखाधड़ी की गई। विवेचना के दौरान साइबर सेल नर्मदापुरम एवं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस टीम ने अंतरराज्यीय कार्रवाई करते हुए राजस्थान के बीकानेर से आरोपी एहसान अली उर्फ प्रिंस तथा मध्यप्रदेश के नीमच से मोहम्मद फरहान एवं मुसरफ को गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से ठगी की राशि एवं प्रयुक्त मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा की गई इन कार्यवाहियों से स्पष्ट है कि सायबर अपराधों के विरुद्ध पुलिस पूर्णतः सतर्क, तकनीकी रूप से सक्षम एवं त्वरित कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है। आमजन से अपील की गई है कि किसी भी संदिग्ध लिंक, कॉल अथवा मैसेज से सतर्क रहें तथा साइबर फ्रॉड की स्थिति में तत्काल 1930 हेल्पलाइन अथवा राष्ट्रीय सायबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।