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पुतिन का सुपरवेपन आर्सेनल: हाइपरसोनिक मिसाइलों से स्पेस तक जंग की तैयारी

नई दिल्ली रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक खतरनाक हथियारों को जमा कर रहे हैं. ये हथियार इतने भयानक हैं कि इन्हें दबाने मात्र से पूरा एक देश तबाह हो सकता है. रूस के वैज्ञानिक परमाणु ऊर्जा से चलने वाले ड्रोन, हाइपरसोनिक मिसाइलें, स्पेस में हमला करने वाले हथियार और परमाणु टॉरपीडो बना रहे हैं. पश्चिमी देशों के विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया 1962 की क्यूबा मिसाइल संकट के बाद अब सबसे ज्यादा परमाणु खतरे के करीब पहुंच गई है. पोसाइडन: समुद्र के अंदर का 'डूम्सडे' हथियार रूस का सबसे चर्चित हथियार पोसाइडन है. यह एक परमाणु ऊर्जा से चलने वाला विशाल अंडरवाटर ड्रोन है, जो छोटी पनडुब्बी जितना बड़ा है. यह हजारों किलोमीटर तक समुद्र के अंदर यात्रा कर सकता है. दुश्मन के तट के पास पहुंचकर यह फट सकता है. विस्फोट से विशाल रेडियोएक्टिव सुनामी उठ सकती है, जो तटीय शहरों और नौसैनिक अड्डों को पूरी तरह नष्ट कर देगी. पुतिन का दावा है कि इसे रोका नहीं जा सकता. पश्चिमी विशेषज्ञ इसे डूम्सडे वेपन कहते हैं. रूस ने हाल ही में इसका सफल परीक्षण किया है. इसे ले जाने वाली नई पनडुब्बी खाबारोवस्क भी तैयार हो रही है. बुरेवेस्तनिक: फ्लाइंग चेरनोबिल मिसाइल बुरेवेस्तनिक मिसाइल को फ्लाइंग चेरनोबिल भी कहा जाता है. यह परमाणु रिएक्टर से चलने वाली क्रूज मिसाइल है, जिसकी रेंज अनलिमिटेड बताई जाती है. पुतिन का कहना है कि यह कई दिनों तक उड़ सकती है. 2019 में इसके परीक्षण के दौरान रूस में विकिरण रिसाव हुआ था, जिसमें कई वैज्ञानिक मारे गए थे. फिर भी रूस इसे विकसित कर रहा है. पश्चिमी देश इसे बहुत खतरनाक मानते हैं क्योंकि इसमें रेडियोएक्टिव कचरा फैलने का खतरा है. सरमत: दुनिया की सबसे भयानक मिसाइल Sarmat या Satan-2 रूस की नई इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल है. यह 200 टन से ज्यादा भारी है. इसमें कई परमाणु वॉरहेड लगाए जा सकते हैं, जो अलग-अलग शहरों को निशाना बना सकते हैं. पुतिन ने हाल ही में इसका सफल परीक्षण किया और कहा कि साल के अंत तक इसे युद्ध के लिए तैयार कर लिया जाएगा. यह मिसाइल दक्षिणी ध्रुव से भी होकर दुश्मन पर हमला कर सकती है, जहां रडार नहीं होते. हाइपरसोनिक हथियार   एवनगार्ड: यह हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल है, जो 24 हजार किलोमीटर प्रति घंटे से भी तेज गति से दुश्मन पर टूट पड़ता है. बीच में अपना रास्ता बदल सकता है. किंझल: हवा से छोड़ी जाने वाली हाइपरसोनिक मिसाइल. यूक्रेन में इसका इस्तेमाल हो चुका है. जिरकॉन: समुद्र से छोड़ी जाने वाली हाइपरसोनिक मिसाइल, जो 11265 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जहाजों को डुबो सकती है. ये सभी मिसाइलें इतनी तेज हैं कि मौजूदा डिफेंस सिस्टम उन्हें रोक पाना मुश्किल है. स्पेस में युद्ध: सैटेलाइट ब्लाइंड करने वाला हथियार रूस संभवतः स्पेस में भी परमाणु हथियार विकसित कर रहा है. अमेरिका का आरोप है कि रूस एक ऐसा सैटेलाइट बना रहा है जो दुश्मन के सैटेलाइट को उड़ा या ब्लाइंड कर सकता है. इससे GPS, कम्युनिकेशन और सैन्य नेटवर्क बंद हो सकते हैं. रूस इससे इनकार करता है, लेकिन उसने UN में इस पर प्रस्ताव को वीटो कर दिया. पेरेसवेट लेजर और S-500 डिफेंस सिस्टम पेरेसवेट लेजर सिस्टम सैटेलाइट को अंधा कर सकता है. S-500 Prometheus सिस्टम स्टेल्थ विमान, बैलिस्टिक मिसाइल और स्पेस ऑब्जेक्ट्स को मारने का दावा करता है. क्यों बना रहा है रूस ये हथियार? पुतिन इन हथियारों को अजेय बताते हैं. ये हथियार न सिर्फ युद्ध जीतने के लिए हैं, बल्कि पश्चिमी देशों को डराने और उन्हें झुकाने के लिए भी हैं. रूस यूक्रेन युद्ध में फंसा है. लगातार परमाणु खतरे की बात कर रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया अब 1962 के बाद सबसे ज्यादा परमाणु खतरे में है. रूस के ये हथियार सिर्फ सुरक्षा नहीं, बल्कि आतंक फैलाने का हथियार बन गए हैं. पुतिन का सुपरवेपन आर्सेनल दुनिया के लिए बड़ी चिंता का विषय है. पोसाइडन, सरमत, बुरेवेस्तनिक और हाइपरसोनिक मिसाइलें परमाणु युद्ध के खतरे को बढ़ा रही हैं. यदि इनमें से कोई हथियार इस्तेमाल हुआ तो पूरा क्षेत्र तबाह हो सकता है.

महाविस्फोट से दहला इजरायल! सैन्य ठिकाने से उठता रहा धुएं का गुबार, सीक्रेट अटैक की अटकलें तेज

यरूशलम.  इजरायल के यरूशलम के पास स्थित बेट शेमेश शहर में शनिवार देर रात एक भीषण विस्फोट हुआ। इस धमाके ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। सोशल मीडिया पर इसके जो वीडियो वायरल हो रहे हैं, वे बेहद डराने वाले हैं। ब्लास्ट इतना जोरदार था कि आसमान में कई मील दूर तक आग का एक विशाल गोला और मशरूम क्लाउड बनता दिखाई दिया। यह धमाका इजरायल की सरकारी डिफेंस कंपनी 'तोमर' के टेस्टिंग ग्राउंड में हुआ है, जो इजरायल के बेहद सीक्रेट रॉकेट और मिसाइल इंजन बनाती है। इजरायली प्रशासन इसे 'पहले से तय एक्सपेरिमेंट' बता रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय डिफेंस एक्सपर्ट्स इस थ्योरी को पचा नहीं पा रहे हैं। रात के 12:30 बजे कौन करता है प्री-प्लान टेस्ट? अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) के पूर्व विश्लेषक लैरी जॉनसन ने इजरायल के आधिकारिक दावों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एक्स पर मारियो नॉफाल को दिए एक इंटरव्यू में जॉनसन ने तीन अहम बातें कहीं, जो इजरायली दावे को संदिग्ध बनाती हैं। धमाके के तुरंत बाद एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को उस संवेदनशील इलाके में जाने से रोक दिया गया। अगर यह सामान्य टेस्ट था, तो रेस्क्यू टीमों को क्यों रोका गया? यह धमाका शनिवार की आधी रात (12:30 AM) को हुआ। इजरायल में शनिवार के दिन कोई भी रूटीन या सरकारी काम नहीं किया जाता है, जब तक कि वह कोई बेहद जरूरी सैन्य ऑपरेशन न हो। आधी रात को बिना किसी पूर्व चेतावनी के कोई देश अपनी आबादी के पास ऐसा खतरनाक ब्लास्ट नहीं करता। जॉनसन के मुताबिक, इस घटना के पीछे के सभी परिदृश्य इशारा कर रहे हैं कि मिडिल ईस्ट में एक बड़ा युद्ध बेहद करीब है और यह पूरी दुनिया के लिए बहुत बुरा संकेत है। क्या तबाह हो गई इजरायल की सबसे घातक मिसाइल बैटरी? इब्रानी (Hebrew) मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि धमाके का असर पास के 'सदोट मीचा' (Sdot Micha) एयरबेस तक भी हो सकता है, जो इजरायल का सबसे संवेदनशील मिसाइल ठिकाना है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस विस्फोट में इजरायल के सबसे आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम 'एरो-3' (Arrow-3) का एक बड़ा स्टॉक तबाह हो गया है। एरो-3 अंतरिक्ष की सीमा पर ही दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम है। रिपोर्ट के मुताबिक, रॉकेट मोटरों को बनाने में इस्तेमाल होने वाले 'सोडियम परक्लोरेट' केमिकल के स्टॉक में लापरवाही की वजह से आग लगी, जो इस महाविस्फोट में बदल गई। अगर दावों में सच्चाई है, तो इजरायल की दो प्रमुख एरो-3 बैटरियों में से एक को भारी नुकसान पहुंचा है। 2021 की घटना की यादें हुई ताजा लैरी जॉनसन ने याद दिलाया कि अप्रैल 2021 में भी इसी तोमर डिफेंस फैसिलिटी में ठीक ऐसा ही एक 'रहस्यमयी' धमाका हुआ था, जिसे तब भी इजरायल ने एक रुटीन टेस्ट बताया था। वीडियो में दिख रहा मशरूम क्लाउड इतना बड़ा था कि शुरुआत में चश्मदीदों को लगा कि यह कोई टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन का धमाका है। इजरायली सरकार अपने दावे पर कायम तमाम अटकलों और सोशल मीडिया पर चल रही दावों के बीच, इजरायली रक्षा मंत्रालय और तोमर कंपनी अपने रुख पर अडिग हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह एक नियंत्रित और तयशुदा प्रयोग था, इसमें किसी बाहरी ताकत का हाथ नहीं है। इस घटना में किसी के हताहत होने या सुरक्षा में सेंधमारी की खबर नहीं है।

UK Politics Crisis: चुनावी हार के बाद पीएम कीर स्टारमर पर बढ़ा दबाव

नई दिल्ली ब्रिटेन में बड़ी राजनीतिक उथल-पुथल की वजह से प्रधानंत्री कीर स्टारमर अपना पद छोड़ने को तैयार हो गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने अपने करीबियों से कहा है कि वह इस्तीफा देने को तैयार हैं। डेली मेलकी रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री कीर स्टारमर अपने हिसाब से आगे का कदम उठाएंगे। उन्हें इस्तीफा कब देना है, इसका विचार भी वह खुद ही करेंगे। क्यों खतरे में है कीर स्टारमर की सरकार जानकारी के मुताबिक यूके की लेबर सरकार संकटों से जूझ रही है। लोगों की इस सरकार में विश्वास कम हो गया है। लेबर पार्टी के पीटर मैंडलसन का नाम एपस्टीन फाइल्स में आने केबाद लोगों ने लेबर पार्टी पर अविश्वास जताया और स्थानीय चुनावों में इसे बड़ी हार का सामना करना पड़ा। इसी वजह से कीर स्टारमर पर भी इस्तीफा देने का दबाव बढ़ गया है। गुरुवार को ब्रिटेन में क्षेत्रीय चुनाव हुए। यह चुनाव 136 क्षेत्रों में आयोजित किए गए। अंतिम नतीजों के अनुसार लेबर पार्टी ने परिषद की उन 2,200 से ज़्यादा सीटों में से लगभग 1,200 सीटें गंवा दीं, जिन पर पहले उसका कब्ज़ा था। दक्षिणपंथी 'रिफॉर्म यूके ' पार्टी स्पष्ट विजेता के तौर पर उभरी और उसने लगभग 1,400 सीटें जीतीं। बता दें कि लेबर पार्टी के ही 80 से ज्यादा सांसदों ने उनसे पद छोड़ने की अपील की है। बीते दिनों सरकार के तीन सदस्यों के इस्तीफा देने की बात भी सामने आई थी। निगेल फराज के नेतृत्व वाली रिफॉर्म यूके को चुनावों का सबसे बड़ा विजेता माना जा रहा है। स्काई न्यूज के अनुसार, इसने अब तक 1,422 सीटें जीती हैं। लेबर पार्टी 980 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि लिबरल डेमोक्रेट्स और कंजरवेटिव पार्टी क्रमशः 834 और 754 सीटों के साथ तीसरे और चौथे स्थान पर हैं।प्लाइड सिमरु, जो वेल्स की स्वतंत्रता के लिए प्रतिबद्ध एक मध्य-वामपंथी पार्टी है, 43 सीटों के साथ वेल्स सेनेड में सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। रिफॉर्म यूके 34 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर है जबकि लेबर पार्टी नौ सीटों के साथ बहुत पीछे तीसरे स्थान पर है। वेल्स में 27 साल सत्ता में रहने के बाद लेबर पार्टी ने पहले ही हार स्वीकार कर ली थी। स्टारमर ने इस्तीफा देने से कर दिया था इनकार वहीं स्कॉटलैंड में, स्कॉटिश नेशनल पार्टी ने सबसे अधिक 58 सीटें जीतीं लेकिन बहुमत के लिए आवश्यक 65 सीटों से पीछे रह गई। लेबर और रिफॉर्म यूके 17-17 सीटों पर बराबरी पर हैं जबकि कंजर्वेटिव पार्टी की सीटें घटकर 12 रह गईं। अपनी पार्टी के लिए निराशाजनक नतीजों के बावजूद, स्टारमर ने इस्तीफा देने से मना करते हुए कहा था कि वह पीछे नहीं हटेंगे और देश को अराजकता में नहीं धकेलेंगे।

युद्ध की आहट तेज! ईरान पर बड़े हमले की तैयारी, उड़ान भरते विमानों ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन

वाशिंगटन. डोनाल्ड ट्रंप ने पूरे संकेत दे दिए हैं कि अमेरिका ईरान पर 28 फरवरी से भी बड़ा हमला करने वाला है। जानकारी के मुताबिक अमेरिका के 11 एयरफोर्स – सी 17ए विमान मध्य एशिया से यूरोप की ओर उड़ान फर चुके हैं। 28 फरवरी को हुए हमले से पहले भी ऐसी ही गतिविधियां देखने को मिली थी। बताया गया था कि डोनाल्ड ट्रंप ने आखिरी समय में ईरान पर बड़े हमले को रद्द कर दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ अधिकारियों ने कहा कि अमेरका और इजरायल फिर से व्यापक सैन्य तैयारियां कर रहे हैं। अमेरिका के रक्षा मंत्री ने कहा था कि पेंटागन के पास कई योजनाएं हैं जिनमें जरूरत पड़ने पर युद्ध शुरू होना भी शामिल है।इसके अलावा परिस्थिति अनुसार सेना को कम या फिर वापस भी बुलाया जा सकता है। यूरेनियम के भंडार पर हो सकता है हमला रिपोर्ट में कहा गया कि अगर डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर हमला करते हैं तो इस बार सैन्य ठिकानों और बुनियादी ढांचों को निशाना बनाया जाएगा। इसके अलावा यूरेनियम के संभावित भंडार को भी टारगेट किया जा सकता है। बताया जा रहा है कि अमेरिका के 12 दिन के युद्ध के दौरान परमाणु ठिकाने तबाह हो गए थे लेकिन यूरेनियम के भंडार जमीन के नीचे दब गए थे। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप की शी जिनपिंग से मुलाकात के बाद भी युद्ध को लेकर कोई निष्कर्ष नहीं निकल पाया। मंगलवार को चीन से निकलने से पहले डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को धमकी दी और कहा कि अगर उसने समझौता नहीं किया तो उसे तबाह कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ईरान से युद्धविराम बहुत नाजुक स्थित में है और फिर कभी भी हमला करना पड़ सकता है। ईरान बोला- जवाब देने को तैयार अगर अमेरिका ईरान पर हमला करता है तो निश्चित तौर पर एक बार फिर युद्ध छि़ड़ सकता है। ईरान में संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगर गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका की हर हरकत का जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि गलत फैसलों का परिणाम भी गलत ही होता है। उधर पाकिस्तान के गृह मंत्री भी ईरान पहुंचे हुए हैं। जानकारी के मुताबिक वह ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों से मिलेंगे। पाकिस्तान शुरू से ही ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता कर रहा है। उसेक प्रयास के बाद इस्लामाबाद में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल मिले थे लेकिन कोई सार्थक परिणाम नहीं निकला था। अमेरिका और ईरान के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके और ऐसे में दोनों देशों के बीच दूसरे चरण की वार्ता नहीं हो पाई।

ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ा, ट्रंप बोले,शांति समझौता नहीं हुआ तो गंभीर परिणाम होंगे

अमेरिका अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि अगर शांति समझौता जल्द नहीं हुआ तो तेहरान के लिए बहुत बुरा समय आने वाला है। फ्रांसीसी ब्रॉडकास्टर को दिए गए टेलीफोनिक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि ईरान को समझौते में दिलचस्पी रखनी चाहिए। उनका बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता में बातचीत चल रही है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने नई दिल्ली में कहा कि ट्रंप प्रशासन से संदेश आए हैं जिसमें बातचीत जारी रखने की इच्छा जताई गई है, लेकिन अमेरिका पर गहरे अविश्वास की वजह से प्रक्रिया धीमी हो रही है। डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बावजूद ईरान ने अमेरिका पर दो बार हमला करने का आरोप लगाया है, खासकर परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी पुरानी वार्ताओं के दौरान। अराघची ने वाशिंगटन के विरोधाभासी संकेतों को बातचीत में बाधा बताया। उन्होंने चीन जैसे देशों के कूटनीतिक समर्थन का स्वागत किया और क्षेत्रीय शांति के लिए भारत की बड़ी भूमिका की मांग की। वहीं, ईरान के संसद स्पीकर और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर घालिबाफ ने कहा कि अमेरिका को ईरान के 14 सूत्री प्रस्ताव को स्वीकार करना चाहिए, नहीं तो उसे असफलता का सामना करना पड़ेगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले ईरानी प्रस्ताव को खारिज करते हुए युद्धविराम को जीवन रक्ष' पर बताया था। इस बीच, मध्य पूर्व में तनाव जारी है। इजरायल ने हाल ही में विस्तारित युद्धविराम के बावजूद दक्षिणी लेबनान में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। लेबनानी मीडिया के अनुसार, 50 किलोमीटर से ज्यादा दूर के दो दर्जन से अधिक गांवों पर हमले हुए। इजराइली सेना ने हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बताया और कई गांवों के लिए निकासी चेतावनी जारी की। इन हमलों से सैकड़ों नागरिक बेघर हो गए और सिदोन व बेरूत की ओर पलायन शुरू हो गया। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने युद्धविराम के विस्तार का स्वागत किया और सभी पक्षों से इसे पूरी तरह मानने की अपील की। युद्धविराम 17 अप्रैल को शुरू हुआ था और शुक्रवार को 45 दिनों के लिए बढ़ाया गया, लेकिन इसका उल्लंघन बार-बार हो रहा है। लेबनान के अनुसार, युद्ध शुरू होने से अब तक 2900 से ज्यादा लोग मारे गए, जिनमें युद्धविराम के बाद 400 से अधिक शामिल हैं। हिजबुल्लाह ने इजरायल पर हमले जारी रखे हैं। ईरान-अमेरिका वार्ता की सफलता न केवल क्षेत्रीय स्थिरता बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी अहम है। दोनों पक्षों को अविश्वास दूर कर ठोस कदम उठाने होंगे, वरना स्थिति और बिगड़ सकती है।

ईरान का बड़ा ऐलान: होर्मुज में ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम और फीस वसूली की तैयारी

नई दिल्ली होर्मुज को लेकर ईरान फिर एक बार नया ऐलान कर दिया है जिससे दुनियाभर के कई देशों पर इसका असर पड़ सकता है। वैश्विक तेल सप्लाई के लिए अहम माने जाने वाले होमूर्ज के लिए ईरान नया ट्रैफिक सिस्टम लगाने की तैयारी कर रहा है। ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने शनिवार को घोषणा की है कि ईरान ने होर्मुज में समुद्री यातायात को नियंत्रित करने के लिए एक प्रोफेशनल मैकेनिज्म तैयार किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर किए गए एक पोस्ट में अजीजी ने बताया कि ईरान अंतर्राष्ट्रीय व्यापार सुरक्षा की गारंटी के दायरे में रहते हुए, एक निर्धारित मार्ग के माध्यम से होर्मुज में यातायात प्रबंधन के लिए इस योजना को लेकर आया है, जिसका जल्द ही खुलासा किया जाएगा। फीस भी वसूलेगा ईरान अजीजी के अनुसार, इस नई व्यवस्था का लाभ केवल उन्हीं पक्षों को मिलेगा जो ईरान के साथ सहयोग कर रहे हैं। इस सिस्टम के तहत दी जाने वाली विशेष सेवाओं के लिए जरूरी शुल्क भी वसूला जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि यह समुद्री फ्रीडम प्रोजेक्ट के ऑपरेटरों के लिए पूरी तरह से बंद रहेगा। ऐसे में एक बार फिर तनाव और बढ़ने की आशंका है। 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल ने ईरानी क्षेत्र पर हमले शुरू किए थे। अमेरिका-ईरान ने सात अप्रैल को युद्धविराम की घोषणा की, लेकिन अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी कर दी, जबकि ईरान ने होर्मुज से गुजरने के लिए नए ट्रैफिक सिस्टम लगाने नियमों की घोषणा की है। इससे पहले ईरान ने कहा है कि होर्मुज में बाधा आने और वैश्विक अर्थव्यवस्था के बिगड़ने के लिए सिर्फ वे जिम्मेदार हैं जिन्होंने पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू किया है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत और स्थायी प्रतिनिधि आमिर सईद इरावानी ने कहा, ईरान पर एक साल से भी कम समय में दो गैर-कानूनी हमले हुए हैं, जिससे वह 'दो गहरे और आपस में जुड़े हुए' तरीकों से प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि इन हमलों में महिलाओं और बच्चों सहित हजारों लोगों की मौत हुई और नागरिक, आर्थिक, ऊर्जा समेत कई चीजों में नुकसान हुआ। सैन्य अभियान खत्म होने के बाद भी इस संघर्ष के परिणाम बरकरार रहेंगे। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि क्षेत्रीय और वैश्विक अस्थिरता के मूल कारणों की जांच होनी चाहिए। इरावानी ने कहा, वर्तमान अस्थिरता अचानक नहीं हुई। इसके पीछे इजरायली शासन और अमेरिका द्वारा थोपे गए सैन्य संघर्ष और अवैध हमलों का हाथ है। उन्होंने जोर दिया कि ईरान के तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल यूनिट पर हुए सीधे हमलों ने वैश्विक ऊर्जा और सप्लाई को प्रभावित किया है। इसके अलावा प्रतिबंधों और अमेरिकी समुद्री नाकेबंदी ने वैश्विक व्यापार और पण्य बाजार को चोट पहुंचाई थी।

बंगाल में बुलडोजर एक्शन तेज, हावड़ा स्टेशन के बाहर अवैध दुकानों पर चला प्रशासन का डंडा

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही प्रशासन एक्शन मोड में है. शनिवार आधी रात को हावड़ा स्टेशन के बाहर गंगा घाट और बस स्टैंड के पास अवैध रूप से बनी दुकानों पर प्रशासन का बुलडोजर चला. इस बीच बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने साफ कर दिया है कि राज्य में किसी भी तरह का अवैध निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. मीडिया  को दिए इंटरव्यू में अतिक्रमण के खिलाफ चल रहे इस अभियान को लेकर मंत्री दिलीप घोष ने कहा, 'बुलडोजर अब पूरे देश में चलेगा. जहां कहीं भी अवैध निर्माण होगा, वहां बुलडोजर तैनात किया जाएगा.' उन्होंने आगे कहा कि बंगाल में जो नई सरकार सत्ता में आई है, उसने पहले ही दिन से इस प्रक्रिया की शुरुआत कर दी है. 'किसी भी तरह का अतिक्रमण कतई बर्दाश्त नहीं ' मंत्री ने अवैध काम करने वालों को चेतावनी और सलाह देते हुए कहा, 'मैं उन सभी लोगों से अपील करता हूं जो किसी भी तरह की अवैध गतिविधियों में शामिल हैं, वो कानून के दायरे में रहकर अपना काम करें. अगर वो ऐसा करते हैं, तो सरकार उन्हें पूरा सहयोग देगी. हम सरकारी जमीन पर किसी भी तरह का अतिक्रमण कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे.' टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ दर्ज हुई FIR को लेकर दिलीप घोष ने कहा, 'ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी और उनके नेताओं ने हमेशा तानाशाही रवैया अपनाया है. उस समय लोग सिर्फ डर की वजह से शिकायत दर्ज नहीं करवा पाते थे.' दिलीप घोष ने आगे कहा कि अब हालात बदल चुके हैं. लोग अब शिकायत करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और पुलिस भी उन शिकायतों पर कार्रवाई करने के लिए तैयार बैठी है. इसलिए अब पीड़ितों को न्याय जरूर मिलेगा. हावड़ा स्टेशन के बाहर भारी सुरक्षा में चला बुलडोजर बता दें कि शनिवार आधी रात को हावड़ा स्टेशन पर सालों से फुटपाथ और सार्वजनिक रास्तों पर कब्जा जमाकर चल रही दुकानों को हटाने के लिए बड़ा अभियान चलाया गया. ये पूरा क्षेत्र रेलवे परिसर के अधीन आता है, इसलिए कार्रवाई के दौरान IOW विभाग, रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) और हावड़ा सिटी पुलिस के आला अधिकारी भारी बल के साथ मौके पर तैनात रहे. अवैध मदरसों पर भी होगी सख्त कार्रवाई अल्पसंख्यक मामले और मदरसा शिक्षा मंत्री क्षुदिराम टुडू ने भी अवैध धार्मिक और शैक्षणिक निर्माणों को लेकर सरकार का रुख साफ किया. उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि पश्चिम बंगाल में जितने भी मदरसे अवैध रूप से चलाए जा रहे हैं, उन सभी को खत्म किया जाएगा. इसके साथ ही, जो लोग भी ऐसे अवैध मदरसों को संचालित कर रहे थे, उनके खिलाफ सरकार सख्त कार्रवाई करेगी.

भोजशाला में गूंजे मंत्रोच्चार, हाई कोर्ट फैसले के बाद पहली बार विशेष पूजा

धार धार की ऐतिहासिक भोजशाला में पूजा करने को लेकर शनिवार रात को ASI ने गाइडलाइन जारी की थी. इसके बाद आज सुबह से ही हिन्दू पक्ष के लोग हाथ में मां वाग्देवी की तस्वीर लेकर भोजशाला मंदिर पहुंचे और पूजा अर्चना शुरू की. इस मौके पर भोजशाला के गर्भगृह में रंगोली बनाकर उसे आकर्षक तरीके से सजाया गया. इसके पहले उस जगह को गोमूत्र से धोकर पवित्र किया गया. वहीं भोजशाला के बाहर ज्योति मंदिर में अखंड जोत को भी स्थापित किया गया. मंदिर में सूर्योदय से मंत्रोच्चार भी शुरू हो गया है. वहीं भक्त अपने आप को इस खुशी के माहौल को रोक नहीं पाए और जमकर थिरके और अपनी खुशी का इजहार किया. इस तरह से आज यहां पर पूजा शुरू हो गई. भोजशाला पहुंचे कई दिग्गज केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर और मांडू के संत महामंडलेश्वर निसर्ग दास जी महाराज भी भोजशाला में पूजा अर्चना के लिए पहुंचे. वहीं कलेक्टर राजीव रंजन मीना और एसपी सचिन शर्मा भी भोजशाला पहुंचे और उन्होंने पूजा भी की. भोज उत्सव समिति के महामंत्री सुमित चौधरी ने इस मौके पर कहा, 'आज सुबह सूर्योदय से ही हिन्दू समाज और भोज उत्सव समिति के सभी कार्यकर्ता पहुंच चुके हैं.' उन्होंने आगे बताया, 'सुबह से ही देवी अनुष्ठान शुरू हो चुका है. भोजशाला का शुद्धिकरण हो रहा है. 11:45 पर पूरा हिन्दू समाज यहां महाआरती करेगा.' केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने कहा, 'मैं जनता को बधाई देती हूं. मैं जिला पंचायत अध्यक्ष थी, तभी जब शुक्रवार (जुमा) आता था तब तनाव का माहौल रहता था. अब तनाव खत्म हो गया है. कोई भी व्यक्ति जब चाहे तब आ सकता है. अब इंतजार खत्म हो गया है और वो दर्शन कर सकते है.' सावित्री ठाकुर ने आगे बताया कि सीएम मोहन यादव ने भी कहा है कि मंदिर को और अच्छे तरीके से विकसित किया जाएगा, ताकि देश-प्रदेश से लोग यहां आए और दर्शन करें. SP सचिन शर्मा ने कहा, 'धार जिले के बारे में हाई कोर्ट के फैसले के बाद और पूजा के खास रीति-रिवाजों और समय के बारे में मिनिस्ट्री ऑफ कल्चर की तरफ से जारी गाइडलाइंस के हिसाब से कल एक कोऑर्डिनेशन मीटिंग हुई थी. आज हो रही पूजा-पाठ मीटिंग में लिए गए फैसलों का पूरी तरह से पालन करते हुए की जा रही है. हमने भी आज इसमें हिस्सा लिया. सुरक्षा के नजरिए से, पिछले चार-पांच दिनों से लगातार लोगों की तैनाती पूरी तरह से असरदार है.' शर्मा ने आगे कहा, हमने इन इलाकों में शांति, 'सद्भाव और भाईचारा बनाए रखने के लिए लगातार मौजूदगी बनाए रखी है. हम हाई कोर्ट के फैसले के बारे में लगातार जागरूकता फैला रहे हैं. हम उन सभी लोगों की तारीफ करते हैं जो नियमों का पालन कर रहे हैं. इसके उलट, जो कोई भी इन नियमों को तोड़ने की सोचेगा, उसके खिलाफ हम सबसे सख्त कार्रवाई करेंगे. हम हर मोहल्ले में जाकर खुद जाकर बातचीत करेंगे ताकि ये पक्का हो सके कि आगे की सभी कार्रवाई जारी किए गए निर्देशों का पूरी तरह से पालन करते हुए और उन्हें आगे बढ़ाते हुए की जाए.'

होर्मुज संकट के बीच दुनिया पर महंगाई का खतरा, ट्रंप ने खत्म की रूसी तेल छूट

नई दिल्ली होर्मुज संकट के बीच, ट्रंप के एक और फैसले से अब दुनिया भर में तेल की कीमतें ऊपर जाने वाली हैं. कच्‍चे तेल के दाम बढ़ने से भारत समेत पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल और अन्‍य एनर्जी के प्राइस बढ़ जाएंगे, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा आ गया है. दरअसल, वैश्विक तेल संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने रूसी कच्चे तेल की खरीद पर दी गई अस्थाई प्रतिबंध में मिली छूट को रिन्यू करने से इनकार कर दिया है. इस कारण अब ये छूट समाप्‍त हो चुकी है. भारत के लिए यह बड़ा झटका माना जा रहा है, क्‍योंकि भारत मिडिल ईस्‍ट संकट के बीच रूस से निर्बाध तेल हासिल कर रहा था.   साथ ही वैश्विक तेल बाजार के लिए भी बड़ा झटका है, क्‍योंकि रूस कच्‍चे तेल का बड़ा निर्यातक है, जिससे दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल और ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका दिख रही है. अमेरिका ने लगाए हैं कड़े प्रतिबंध रूस-यूक्रेन जंग के कारण अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूसी तेल पर कई कड़े प्रतिबंध लगाए हैं. हालांकि, मार्च 2026 में ईरान जंग शुरू होने और होर्मुज ब्लॉकेड होने के बाद ग्‍लोबल मार्केट में तेल की भारी कमी हो गई थी. जिसके बाद, बाजार को संतुलित बनाए रखने के लिए ट्रंप सरकार ने मार्च में एक खास छूट दी थी, जो 16 मई तक बढ़ाया गया था. यह छूट सिर्फ उन तेलों पर थी, जो समंदर में टैंकरों पर लोड किए गए थे. हालांकि, इसके बाद से ही यूरोपीय देश इस छूट का लगातार विरोध कर रहे थे. उनका मानना था कि तेल बिक्री से मिलने वाला पैसा रूस के युद्ध फंड को मजबूत कर रहा है. अब इस विरोध के बाद ट्रंप सरकार ने शनिवार को छूट को समाप्‍त कर दिया.   भारत का यूरोप से तेल आयात मार्च 2026 से अप्रैल 2026 के बीच भारत के यूरोप से तेल आयात ज्यादा रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, मार्च 2026 में पश्चिम एशिया संकट और Strait of Hormuz में तनाव बढ़ने के बाद भारत ने रूसी तेल आयात में भारी बढ़ोतरी दर्ज की है. मार्च 2026 में भारत के कुल कच्‍चे तेल का करीब 4.5 मिलियन बैल हर दिन आयात किया है. इनमें से करीब 50% हिस्सा रूस का था और मिडिल ईस्‍ट से सप्‍लाई 61 फीसदी तक गिर गई थी. गौरतलब है कि अप्रैल 2026 में रूस भारत का सबसे बड़ा कच्‍चा तेल सप्‍लायर बना रहा. भारत के कच्‍चा तेल फरवरी के मुकाबले करीब 85 फीसदी स्‍तर पर रहे. अप्रैल में रूसी कच्‍चे तेल का आयात लगभग 1.57 मिलियन बैरल हर दिन तक रहे, जो मार्च के मुकाबले करीब 20% कम थे. भारत में बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम कुछ दिन पहले ही भारत ने पेट्रोल और डीजल के दाम में 3 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया था. साथ ही सीएनजी की कीमत भी बढ़ा दी थी. हालांकि, एक्‍सपट्स का कहना है कि अगर तेल की कीमतें ऊपर बनी रहती हैं तो पेट्रोल-डीजल के दाम फिर से बढ़ सकते हैं.

जनसंख्या बढ़ाने का नया फॉर्मूला, ज्यादा बच्चे पैदा करने पर मिलेगा कैश

अमरावती आंध्र प्रदेश की चंद्र बाबू नायडू सरकार राज्य की जनसंख्या को बढ़ाने के लिए प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने ऐलान किया है कि उनकी सरकार ने तीसरा बच्चा पैदा करने वाले दंपत्ति को 30,000 और चौथा बच्चा पैदा करने वाले दंपति को 40,000 रुपए की प्रोत्साहन राशि देने की योजना बनाई है। बता दें, पिछले कुछ दशकों में उत्तर भारत के राज्यों की जनसंख्या तेजी के साथ बढ़ी है लेकिन दक्षिण भारत के राज्य इस मामले में पीछे रहे हैं। ऐसे में अब लोकसभा परिसीमन की चर्चाओं के बीच इन राज्यों में जनसंख्या एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है। आंध्र प्रदेश की जनसंख्या को बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहे मुख्यमंत्री चंद्र बाबू नायडू ने श्रीकाकुलम जिले में इस नई नवेली योजना का जिक्र किया। उन्होंने कहा, "मैंने एक नया निर्णय लिया है। हम तीसरे बच्चे के जन्म के तुरंत बाद 30,000 रुपये और चौथे बच्चे के जन्म पर 40,000 रुपये देंगे। क्या यह सही निर्णय नहीं है?" गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है, जब नायडू ने बच्चों के पैदा होने पर प्रोत्साहन राशि देने का ऐलान किया है। इससे पहले नायडू सरकार ने दूसरा बच्चा पैदा होने पर 25 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि देने का प्रस्ताव दिया था। दूसरा बच्चा पैदा करने पर 25 हजार का प्रस्ताव: सीएम नायडू मुख्यमंत्री ने 5 मार्च को आंध्र प्रदेश विधानसभा को सूचित किया था कि राज्य सरकार अब दूसरा बच्चा पैदा करने वाले दंपत्तियों को 25,000 रुपए प्रोत्साहन राशि देने पर विचार कर रही है। इस घोषणा के बाद स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव ने बताया था कि सरकार ने तीसरे और उससे अधिक बच्चों वाले परिवारों को भी यह प्रोत्साहन देने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि लोग एक ही बच्चा पैदा कर रहे हैं। कई लोग दूसरा बच्चा केवल इसलिए पैदा करते हैं क्योंकि पहला बच्चा लड़का नहीं होता है। अगर पहला बच्चा लड़का हो जाए, तो यह भी दूसरा बच्चा न करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग बच्चों को बोझ मानने लगे हैं। हमें इस धारणा को खत्म करना होगा। उन्होंने तर्क दिया कि बच्चे एक संपत्ति हैं और वह इसे साबित करके रहेंगे। घटती जनसंख्या का असर अर्थव्यवस्था पर पड़ता है: नायडू एनडीए के महत्वपूर्ण घटक नायडू ने चेतावनी दी कि राज्य की जनसंख्या वृद्धि दर घट रही है। अगर ऐसा ही स्तर जारी रहा, तो जनसंख्या में कमी देखने को मिलेगी। उन्होंने कहा कि जनसंख्या तभी स्थिर रहेगी जब औसत प्रजनन दर प्रति महिला 2.1 बच्चे हों। अगर ऐसा नहीं होता है, तो जनसंख्या कम होने का खतरा रहता है। उन्होंने दावा किया कि कई देशों में घटती जनसंख्या और बढ़ती उम्र वाली आबादी ने उनकी अर्थव्यवस्थाओं को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। गौरतलब है कि पिछले दशकों में उत्तर भारत के राज्यों में जनसंख्या तेजी के साथ बढ़ी है। दूसरी तरफ दक्षिण भारत के राज्यों में यह कम रही है। इसकी वजह से राजनीतिक स्तर पर भी इसका असर दिखाई देता है। लोकसभा का अंतिम परिसीमन भी इसी जनसंख्या विवाद की वजह से 1971 की जनगणना के आधार पर हुआ था। वहीं, हाल ही में जब केंद्र सरकार द्वारा परिसीमन विधेयक लाया गया, तो दक्षिण भारत के राज्यों ने इसका जनसंख्या के आधार पर भी विरोध किया था। दक्षिण भारतीय राज्यों का मानना है कि उन्होंने राष्ट्रीय नीति का पालन करते हुए जनसंख्या नियंत्रण उपायों को बेहतर ढंग से अपनाया है। ऐसी स्थिति में उन्हें परिसीमन के रूप में इसकी सजा नहीं मिलनी चाहिए। क्योंकि अगर जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होता है, तो इन राज्यों में लोकसभा की सीटें सीमित हो जाएंगी। राज्यों की इस चिंता को दूर करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा भरोसा दिलाया गया था कि केवल जनसंख्या के आधार पर सीटों का बंटवारा नहीं होगा। लेकिन इसके बाद भी जनसंख्या को लेकर यह लड़ाई बनी हुई है।