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संसद में महिला आरक्षण पर सियासी झटका: संविधान संशोधन बिल गिरा, बहुमत से रह गया दूर

नई दिल्ली. लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन बिल यानी 131वें संविधान संशोधन विधेयक पर दो दिनों तक लगातार चली चर्चा के बाद आज (शुक्रवार, 17 अप्रैल को) शाम हुई वोटिंग में ये बिल गिर गया है। यानी ये संविधान संशोधन बिल लोकसभा से पारित नहीं हो सका। कुल 298 सांसदों ने इस बिल के पक्ष में मतदान किया, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया। मतदान में कुल 528 सांसदों ने हिस्सा लिया। सांसदों के इस संख्या के हिसाब से बिल के पारित होने के लिए दो तिहाई यानी 352 वोटों की दरकार थी, जो नहीं मिल सका। बता दें कि लोकसभा में किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। बिल के पक्ष में पड़े वोटों की बात करें तो सत्ता पक्ष के पास कुल 293 सांसदों का समर्थन हासिल था, जबकि उससे पांच वोट ज्यादा मिले लेकिन विपक्ष के बड़े दलों ने एकजुट होकर इस बिल के लिए जरूरी दो तिहाई संख्या बल जुटने नहीं दिया। इस तरह लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को संसद के निचले सदन में पारित नहीं हो पाया। सरकार ने इस विधेयक के साथ 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' को भी सदन में चर्चा और पारित कराने के लिए रखा था, लेकिन उन्हें भी आगे नहीं बढ़ाया जा सका। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि संविधान संशोधन विधेयक के पारित नहीं होने के बाद अब इससे संबंधित दोनों विधेयकों 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' को आगे नहीं बढ़ा सकते।

महंगाई भत्ते में 4% बढ़ोतरी का अनुमान, आपकी मंथली सैलरी में ये बदलाव आएगा

  नई दिल्‍ली सरकारी कर्मचारियों को लंबे समय से महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का इंतजार है. कर्मचारियों का कहना है कि हर साल मार्च-अप्रैल के दौरान जनवरी का बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता जारी हो जाता है, लेकिन इस बार अभी तक महंगाई भत्ता नहीं आया है. लेकिन उम्‍मीद बनी हुई है. जल्‍द ही सरकार महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का ऐलान कर सकती है।  अगर आप सरकारी कर्मचारी हैं और अपनी सैलरी स्लिप पर नजर रखते हैं, तो महंगाई भत्ता (DA) में होने वाली अगली बढ़ोतरी आपके दिमाग में जरूर होगी. साथ ही ये बढ़ोतरी कितनी होगी, आंकड़े क्‍या कह रहे हैं और आपकी मंथली सैलरी में इजाफा कितना हो सकता है? यह सभी सवाल भी आपके दिमाग में चल रहे हैं, आइए जानते हैं।  कितनी हो सकती है बढ़ोतरी मौजूदा अनुमानों के अनुसार, आगामी महंगाई भत्ता (DA) में 2% से 4% की वृद्धि हो सकती है. इसका मतलब है कि कुल महंगाई भत्ता (DA) में थोड़ी बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे पिछले कई सालों से चली आ रही इसकी स्थिर वृद्धि जारी रहेगी. यह बढ़ोतरी पहले महीने के दौरान थोड़ी लग सकती है, लेकिन सालाना आधार पर देखें तो यह एक बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है।  कैसे तय होता है महंगाई भत्ता?  इस बढ़ोतरी का अनुमान मनमाने तरीके से नहीं लगाया जाता है, बल्कि सीपीआई आंकड़ों पर निर्भर करता है. कंज्‍यूमर प्राइस इंडेक्‍स (CPI-IW) के 12 महीने के एवरेज पर बेस एक तय नियम के आधार पर महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी की जाती है. इस बार महंगाई स्थिर है, लेकिन थोड़ी धीमी गति से बढ़ रही है, इसलिए महंगाई भत्ता में बढ़ोतरी एक सीम‍ित दायरे में रहने की संभावना है।  बैंकबाजार के सीईओ अदिल  शेट्टी इसे सरल शब्दों में समझाते हैं कि DA में संशोधन फॉर्मूला-आधारित होते हैं और CPI-IW के 12 महीने के एवरेज से जुड़े होते हैं. मौजूदा रुझान लगभग 2% से 4% की मामूली तेजी दिखा रहे हैं, जिससे कुल DA 60% या उससे थोड़ा ऊपर पहुंच जाएगा।  इससे आपकी सैलरी पर क्या असर पड़ेगा? महंगाई भत्ते में मामूली प्रतिशत की बढ़ोतरी भी आपकी सैलरी में इजाफा कर सकती है. 18,000 रुपये के मूल वेतन पर, DA से प्रति माह लगभग 360 से 540 रुपये की बढ़ोतरी हो सकती है, जबकि 29,200 रुपये कमाने वाले व्यक्ति को लगभग 584 से 876 रुपये का लाभ हो सकता है।  इसके अलावा, 56,100 रुपये जैसे हाई सैलरी पर मंथली इजाफा 1,100 रुपये से अधिक हो सकती है. 2.5 लाख रुपये के मूल वेतन वाले सीनियर एम्‍प्‍लाई के लिए, लाभ हर महीने 5,000 रुपये से 7,500 रुपये तक हो सकती है. शेट्टी बताते हैं कि एक साल के दौरान, यह नियमित बढ़ोतरी बिना किसी भूमिका में बदलाव के आय में एक बड़ी उछाल दे सकती है।  महंगाई पर निर्भर  विशेषज्ञों का कहना है कि अंतिम आंकड़ा आने वाले महीनों में महंगाई के व्यवहार पर निर्भर करेगा. महंगाई भत्ता वृद्धि भले ही बहुत बड़ी न हो, लेकिन यह अपना उद्देश्य पूरा करती रहेगी. समय के साथ, ये छोटी-छोटी बढ़ोतरी जुड़ती जाती हैं, जिससे ऐसे माहौल में एक स्थिर वित्तीय सुरक्षा मिलती है डेली यूज की लागत लगातार बढ़ती रहती हैं। 

CDS ने बद्रीनाथ में चारधाम यात्रा की तैयारियों की की समीक्षा, 3 दिन में शुरू होगी यात्रा

बद्रीनाथ  उत्तराखंड में 19 अप्रैल से शुरू हो रही चारधाम यात्रा से पहले तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में देश के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) अनिल चौहान गुरुवार को बदरीनाथ धाम पहुंचे, जहां उन्होंने यात्रा व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। उनके दौरे को सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। सीडीएस अनिल चौहान सबसे पहले बदरीनाथ हेलीपैड पहुंचे, जहां पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान अधिकारियों ने चारधाम यात्रा को लेकर किए गए इंतजामों की विस्तृत जानकारी दी। बैठक में सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, तीर्थयात्रियों की सुविधाएं और आपदा से निपटने की तैयारियों पर विशेष चर्चा हुई। सीडीएस ने स्पष्ट कहा कि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए और सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह सुचारू रहनी चाहिए। तैयारियों का जायजा लिया उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा उत्तराखंड की पहचान और पर्यटन की रीढ़ है, इसलिए इसमें आने वाले श्रद्धालु यहां से सकारात्मक और आध्यात्मिक अनुभव लेकर जाएं, यह सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत रखने और हर स्थिति से निपटने के लिए सतर्क रहने के निर्देश भी दिए। सूर्य देवभूमि चैलेंज 2.0 का शुभारंभ इसी दौरान सीडीएस अनिल चौहान ने गढ़वाल के हिमालयी क्षेत्र में भारतीय सेना द्वारा आयोजित ‘सूर्य देवभूमि चैलेंज 2.0’ प्रतियोगिता का भी विधिवत शुभारंभ किया। 16 से 20 अप्रैल तक आयोजित होने वाली इस साहसिक प्रतियोगिता का उद्देश्य खेलों के माध्यम से विरासत संरक्षण, पर्यटन और सीमांत क्षेत्रों के विकास को बढ़ावा देना है। ‘वाइब्रेंट विलेज योजना’ के तहत यह आयोजन सीमावर्ती गांवों में रोजगार और पर्यटन को नई गति देने की पहल माना जा रहा है। प्रतियोगिता में 113 किलोमीटर की दौड़ होगी करीब 113 किलोमीटर लंबी इस चुनौतीपूर्ण यात्रा में तीन प्रमुख केदार—कल्पेश्वर, रुद्रनाथ और तुंगनाथ को शामिल किया गया है। प्रतियोगिता में कुल 300 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें 200 पुरुष और महिलाएं तथा 100 सेवा कर्मी शामिल हैं। विभिन्न आयु वर्ग के प्रतिभागियों के लिए कुल 14 लाख रुपये की पुरस्कार राशि भी निर्धारित की गई है। चारधाम यात्रा का काउंटडाउन यह प्रतियोगिता तीन चरणों में पूरी होगी। पहले दिन हेलंग से कलगोठ तक 36 किलोमीटर, दूसरे दिन कलगोठ से मंडल तक 39 किलोमीटर और तीसरे दिन मंडल से ऊखीमठ तक 38 किलोमीटर की कठिन दूरी तय की जाएगी। यह आयोजन न सिर्फ साहसिक खेलों को बढ़ावा देगा, बल्कि उत्तराखंड के दूरस्थ इलाकों को भी नई पहचान दिलाने में मदद करेगा। चारधाम यात्रा का काउंटडाउन भी शुरू हो चुका है। 19 अप्रैल को यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खुलेंगे, जबकि 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। इसे देखते हुए सभी विभाग तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं, ताकि यात्रा सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके।

महिला आरक्षण लागू होने के बाद 6 राज्यों में 400 से ज्यादा सीटें, लोकसभा चुनाव में आएगी बड़ी बदलाव

नई दिल्ली महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से ही लागू करने की तैयारी है। इसके लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सीटों में 50 फीसदी का इजाफा किया जा रहा है। अब तक 543 सांसद देश के लिए नीतियां बनाते थे और अब इनकी संख्या 816 हो जाएगी। फिर भी उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, बिहार और बंगाल जैसे राज्य पहले की तरह ही ताकतवर होंगे और उनके सांसदों की संख्या का अनुपात वैसा ही रहेगा। हालांकि अब कुल सीटों का ही नंबर बढ़ जाने के चलते देश के 6 राज्यों में ही इतनी सीटें होंगी कि आंकड़ा 400 पार पहुंच जाएगा। इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बंगाल, बिहार, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश शामिल हैं। उत्तर प्रदेश में फिलहाल 80 सांसद हैं और अब यहां से 120 सांसद चुनकर दिल्ली जाएंगे। इसी तरह बंगाल का आंकड़ा 42 से बढ़कर 63 होगा तो वहीं महाराष्ट्र में 48 की बजाय 72 सांसद चुने जाएंगे। बिहार से 40 के स्थान पर 60 लोकसभा एमपी होंगे तो वहीं मध्य प्रदेश का आंकड़ा 29 से बढ़कर 44 हो जाएगा। इस तरह इन 6 राज्यों की ही सीटों को मिला लें तो आंकड़ा 418 का होता है। ऐसे में केंद्र सरकार किस दल या गठबंधन की होगी, यह तय करने में इन 6 राज्यों का महत्वपूर्ण रोल होगा। अब भी राजनीतिक जुमले के तौर पर कहा जाता है कि लखनऊ से ही दिल्ली का रास्ता तय होता है। इस स्थिति में कोई बदलाव अब भी नहीं होगा। इसके अलावा महाराष्ट्र, बंगाल, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश और बिहार जैसे राज्य भी पहले की तरह ही ताकतवर बने रहेंगे। इस दौरान सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि साउथ इंडिया के राज्यों की स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा। खुद होम मिनिस्टर अमित शाह ने गुरुवार को लोकसभा में बताया कि 28 सीटों वाले कर्नाटक में अब 42 सांसद चुने जाएंगे। इसके आंध्र प्रदेश की संख्या 25 से बढ़कर 38 हो जाएगी और केरल में 20 की बजाय 30 सांसद रहेंगे। एक तिहाई सीटें पर कैसे लागू होगा महिलाओं का आरक्षण बता दें कि महिला आरक्षण लागू होते ही सभी राज्यों की एक तिहाई सीटों से महिलाएं ही चुनी जाएंगी। इस तरह यूपी में 120 में से 40 सांसद महिला होंगी। इसके अलावा बिहार में यह आंकड़ा 20 का होगा। इस आरक्षण को रोटेशन के तहत लागू करने की तैयारी है। वहीं एससी और एसटी वर्ग की महिलाओं को उस वर्ग की तय सीटों में से ही 33 फीसदी की हिस्सेदारी दी जाएगी। हालांकि विपक्ष का कहना है कि मुस्लिम और ओबीसी वर्ग की महिलाओं के लिए भी कुछ प्रावधान किया जाए।

बारिश का अलर्ट 13 राज्यों में, 4 प्रदेशों में हीटवेव की चेतावनी; आज का मौसम कैसा रहेगा?

नई दिल्ली भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज देश के कई राज्यों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। देश के 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश के लिए यह अनुमान लगाया गया है। वहीं, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित छह राज्यों के लिए लू का अलर्ट भी जारी किया गया है। मौमस एजेंसी का कहना है कि पूर्वोत्तर भारत के राज्यों असम और मेघालय में आज अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है। इसके अलावा, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में गरज के साथ बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग का कहना है कि जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश में आज ओलावृष्टि की संभावना है। इसके अलावा, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और राजस्थान में बिजली कड़कने के साथ हल्की बारिश हो सकती है। इन राज्यों में हीटवेव की चेतावनी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और कर्नाटक अलग-अलग हिस्सों में आज लू चलने की बहुत संभावना है। आंध्र प्रदेश, तटीय कर्नाटक, गुजरात, केरल, कोंकण और गोवा, ओडिशा और तमिलनाडु में मौसम काफी गर्म और उमस भरा रहेगा। आपको बता दें कि कल देश का सबसे अधिक तापमान उत्तर प्रदेश के बांदा में 44.4°C दर्ज किया गया । विदर्भ, मराठवाड़ा और दिल्ली के अधिकांश हिस्सों में तापमान 40°C से 44°C के बीच रहा। न्यूनतम तापमान की बात करें तो मैदानी इलाकों में सबसे कम न्यूनतम तापमान उत्तर प्रदेश के सरसावा में 14.0°C दर्ज किया गया। मौसम विभाग के कहना है कि अगले तीन दिनों के दौरान पूर्वोत्तर भारत और पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में व्यापक बारिश की संभावना है। गुजरात और प्रायद्वीपीय भारत के पश्चिमी हिस्सों में छिटपुट बारिश हो सकती है। जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के बागवानों को फलदार पेड़ों को बचाने के लिए ओला-नेट का उपयोग करने की सलाह दी गई है।

राज्यसभा के उपसभापति बने हरिवंश, पीएम मोदी की उपस्थिति में हुआ चुनाव

नई दिल्ली राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह चुने गई हैं. इतिहास में यह पहली बार है जब किसी को भी लगातार तीसरी बार बिना किसी विरोध के राज्यसभा का उपसभापति चुना गया है.  इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी खुद मौजूद थे. राजनीति में कई बार ऐसे मौके आते हैं जब सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव की जगह सहमति नजर आती है. राज्यसभा के उपसभापति पद का चुनाव ऐसा ही एक पल लेकर आया, जहां बिना किसी मुकाबले के फैसला हो गया. हरिवंश नारायण सिंह का लगातार तीसरी बार इस पद पर चुना जाना सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सदन की कार्यशैली और राजनीतिक समीकरणों का संकेत भी है. दिलचस्प यह रहा कि इस अहम मौके पर नरेंद्र मोदी खुद सदन में मौजूद रहे, जिससे इस चुनाव की अहमियत और बढ़ गई।  बिना विपक्षी उम्मीदवार के चुनाव जीतना किसी भी संसदीय प्रक्रिया में एक खास स्थिति होती है. यह या तो राजनीतिक रणनीति का हिस्सा होता है या फिर सहमति की मजबूरी. इस बार भी ऐसा ही देखने को मिला, जब विपक्ष ने कोई नामांकन दाखिल नहीं किया और राज्यसभा में उपसभापति का चुनाव लगभग तय हो गया. इससे यह भी साफ हुआ कि मौजूदा राजनीतिक माहौल में सत्ता पक्ष की पकड़ मजबूत बनी हुई है।  तीसरी बार उपसभापति बने हरिवंश, विपक्ष ने नहीं उतारा उम्मीदवार     हरिवंश नारायण सिंह को राज्यसभा का उपसभापति तीसरी बार चुना गया है. उन्हें इस बार निर्विरोध चुना गया, क्योंकि विपक्ष की ओर से कोई भी उम्मीदवार मैदान में नहीं उतरा. निर्धारित समय सीमा तक कोई नामांकन नहीं आने के कारण उनका चयन लगभग तय हो गया था।      इस चुनाव के लिए कुल पांच प्रस्ताव दाखिल किए गए थे. इनमें जगत प्रकाश नड्डा, निर्मला सीतारमण और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने उनका नाम आगे बढ़ाया. यह प्रस्ताव विभिन्न दलों के नेताओं द्वारा समर्थित थे, जिससे उनकी उम्मीदवारी को व्यापक समर्थन मिला।      संसदीय परंपरा के अनुसार, इन प्रस्तावों को सदन में पेश किया जाएगा और वॉइस वोट के जरिए मंजूरी दी जाएगी. एक प्रस्ताव के पारित होते ही बाकी प्रस्ताव स्वतः समाप्त हो जाते हैं. ऐसे में यह प्रक्रिया औपचारिकता भर रह जाती है, लेकिन इसकी राजनीतिक अहमियत कम नहीं होती।      इससे पहले हरिवंश नारायण सिंह को 2018 में पहली बार इस पद के लिए चुना गया था और 2020 में उन्हें दूसरी बार मौका मिला. अब तीसरी बार इस पद पर उनकी वापसी उनके अनुभव और स्वीकार्यता को दर्शाती है।      हरिवंश नारायण सिंह एक बार फिर राज्यसभा के सदस्य बने हैं. शुक्रवार को उन्होंने बतौर राज्यसभा सांसद शपथ ली. बीते कई वर्षों से हरिवंश नारायण सिंह राज्यसभा के उपसभापति रहे हैं. उनका कार्यकाल पूरा होने पर उन्हे राज्यसभा के लिए नॉमिनेट किया गया है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर इसकी जानकारी दी थी।      मनोनीत किए जाने के उपरांत शुक्रवार को उन्होंने राज्यसभा सदस्य के तौर पर शपथ ली. राज्यसभा में यह उनका तीसरा कार्यकाल है. प्रख्यात पत्रकार रहे हरिवंश का यह नया कार्यकाल वर्ष 2032 तक चलेगा. शुक्रवार को सामने आई अधिसूचना में बताया गया था कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 80 के खंड (3) के साथ पठित खंड (1) के उपखंड (क) के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए राष्ट्रपति ने हरिवंश को राज्यसभा के लिए नामित किया है. पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के राज्यसभा से हाल ही में रिटायर होने के बाद संसद के उच्च सदन में यह एक सीट खाली हो हुई थी।  गौरतलब है कि संविधान के अनुसार राष्ट्रपति राज्‍यसभा में 12 सदस्यों को नामित या मनोनीत कर सकती हैं. राज्यसभा के ये सदस्‍य साहित्‍य, विज्ञान, कला और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में विशेष ज्ञान या अनुभव के आधार पर मनोनीत किए जाते हैं. इससे पहले नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने हरिवंश नारायण सिंह राज्यसभा सांसद बनाया था. लेकिन इस बार जेडीयू ने उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया और हरिवंश को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा राज्यसभा सांसद मनोनीत किया गया।  राज्यसभा में हरिवंश का कार्यकाल 9 अप्रैल को खत्म हो चुका था. 10 अप्रैल से उनका नया कार्यकाल शुरू हुआ है. हरिवंश को पहली बार जेडीयू ने अप्रैल 2014 में बिहार से पहली बार राज्यसभा में भेजा था. 9 अगस्त 2018 को उन्हें राज्यसभा का उपसभापति बनाया गया. गौरतलब है कि शुक्रवार को ही नीतीश कुमार ने भी राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली. नई दिल्ली में राज्यसभा के सभापति व उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने उन्हें राज्यसभा सांसद के तौर पर शपथ दिलाई।  इस मौके पर राज्यसभा में नेता सदन व केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन, कांग्रेस के जयराम रमेश, जेडीयू व भाजपा नेता मौजूद रहे. नीतीश कुमार के इस शपथग्रहण के साथ ही बिहार की सियासत में भी एक ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत हो गई है।  गौरतलब है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्य विधान परिषद के सदस्य थे. लेकिन राज्यसभा के लिए निर्वाचन के बाद उन्होंने 30 मार्च को विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. नीतीश कुमार बीते मार्च महीने में संसद के उच्च सदन के लिए बिहार से निर्वाचित हुए थे।  हरिवंश नारायण सिंह का निर्विरोध चुना जाना क्या दर्शाता है? यह दिखाता है कि सदन में उनके प्रति व्यापक स्वीकार्यता है. जब विपक्ष उम्मीदवार नहीं उतारता, तो इसका मतलब होता है कि या तो वह मुकाबले की स्थिति में नहीं है या फिर वह इस पद को लेकर सहमति बनाना चाहता है. यह राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है, जहां विपक्ष किसी बड़े मुद्दे पर फोकस रखना चाहता है. और लगातार तीसरी बार चुना जाना अपने आप में इतिहास है।  उपसभापति का पद कितना महत्वपूर्ण होता है? राज्यसभा के उपसभापति का पद बेहद अहम होता है. यह व्यक्ति सभापति की अनुपस्थिति में सदन की कार्यवाही चलाता है. सदन में अनुशासन बनाए रखना, बहस को सुचारु रूप से आगे बढ़ाना और नियमों का पालन सुनिश्चित करना इसकी जिम्मेदारी होती है. इसलिए इस पद पर अनुभवी और संतुलित व्यक्ति का होना जरूरी माना जाता है।  क्या इस चुनाव में कोई राजनीतिक संदेश छिपा है? हां, यह चुनाव कई संकेत देता है. एक तरफ यह सत्ता पक्ष की मजबूती … Read more

इंडोनेशिया में हेलीकॉप्टर हादसा, लापता विमान का मलबा बरामद, 8 की मौत

 कालीमंतन  इंडोनेशिया के पश्चिम कालीमंतन प्रांत से एक बेहद दुखद खबर आई है। पिछले कुछ समय से लापता एक निजी हेलीकॉप्टर का मलबा वीरवार यानि कि बीते दिन सुदूर और घने वन क्षेत्र में बरामद कर लिया गया है। इस दुर्घटना में सवार सभी 8 लोगों की मौत हो गई है। दुर्गम इलाका होने के कारण बचाव दल को शवों को निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। वहीं बचाव दल के अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल नूर्रचमन गिंधा द्राधिज़्या ने बताया कि फिलहाल चार लोगों के शवों को सफलतापूर्वक निकाल लिया गया है और उन्हें बॉडी बैग में रखा गया है जबकि तीन अन्य अभी भी हेलीकॉप्टर के मलबे के अंदर हैं।" शिन्हुआ के अनुसार, अंतिम पीड़ित की तलाश जारी है। इंडोनेशियाई राष्ट्रीय पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार हेलीकॉप्टर की पहचान पीटी मैथ्यू एयर एयरबस एच-130 (पीके-सीएफएक्स) के रूप में हुई है। शिन्हुआ ने उड़ान विवरण के हवाले से बताया कि हेलीकॉप्टर में आठ लोग सवार थे। शिन्हुआ के अनुसार अधिकारियों ने बताया कि अंधेरा और दुर्गम भूभाग के कारण बचाव कार्य अस्थायी रूप से रोक दिया गया है और आज फिर से शुरू किया जाएगा।   द्राधिज़्या ने आगे कहा, "हम कल सुबह भी बचाव कार्य जारी रखेंगे, जिसमें हेलिकॉप्टर के मलबे को काटकर अंदर फंसे शवों को निकालने के प्रयास भी शामिल हैं।" इससे पहले, इंडोनेशियाई राष्ट्रीय पुलिस ने कहा था कि सेकाडाऊ के घने जंगलों में मलबा मिलने के बाद संयुक्त बचाव दल सक्रिय रूप से निकासी अभियान में जुट गए हैं। इंडोनेशियाई वायु सेना के एक सुपर प्यूमा हेलिकॉप्टर ने वीरवार को स्थानीय समयानुसार दोपहर लगभग 3:25 बजे अंतिम ज्ञात संपर्क बिंदु से लगभग तीन किलोमीटर दूर मलबे (जिसे विमान की पूंछ का हिस्सा माना जा रहा है) को सबसे पहले देखा। राष्ट्रीय खोज एवं बचाव एजेंसी (बासारनास) के संचालन एवं तैयारी उप प्रमुख एडी प्राकोसो ने कहा, "हवाई निगरानी से संभावित स्थान का पता चल गया है। हमने बचाव अभियान में सहायता के लिए ये निर्देशांक जमीनी इकाइयों को भेज दिए हैं।"  वहीं स्थानीय निवासियों के सहयोग से जमीनी दल दुर्घटनास्थल तक पहुंचने के लिए कठिन भूभाग और अप्रत्याशित मौसम की स्थिति का सामना कर रहे हैं। स्थानीय निवासियों ने इससे पहले बुकिट पुंतक क्षेत्र में एक विस्फोट की आवाज सुनने की सूचना दी थी। बचाव अभियान जारी रहने के दौरान अधिकारियों ने बचाव कार्य में सहयोग के लिए पास के हुलु पेनीती गांव में एम्बुलेंस भी तैनात कर दी थीं।

डोनाल्ड ट्रंप का यूरेनियम देने वाला दावा झूठा, ईरान ने किया खंडन

तेहरान  इजरायल और लेबनान के बीच घोषित 10 दिन का युद्धविराम शुरू होते ही लड़खड़ा गया है. जैसे ही सीजफायर लागू हुआ, बेरूत के दक्षिणी इलाकों से गोलियों और रॉकेट दागे जाने की आवाजें आने लगीं, जिसने इस समझौते की स्थिरता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीजफायर लागू होने के कुछ ही देर बाद करीब आधे घंटे तक भारी गोलीबारी और रॉकेट-प्रोपेल्ड ग्रेनेड (RPG) दागे जाने की आवाजें सुनी गईं. आसमान में लाल ट्रेसर बुलेट्स दिखाई दीं, जिससे इलाके में दहशत फैल गई।  यह युद्धविराम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर घोषित किया गया था, जो इजरायल और ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के बीच हफ्तों से चल रही भीषण लड़ाई को रोकने के लिए किया गया था. हालांकि, सीजफायर लागू होते ही हालात फिर बिगड़ते नजर आए. लेबनानी मीडिया के अनुसार, दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में इजरायल की ओर से गोलाबारी जारी रही, जबकि कुछ जगहों पर मशीनगनों से फायरिंग भी सुनाई दी. इससे साफ संकेत मिलता है कि जमीन पर हालात अब भी पूरी तरह नियंत्रण में नहीं हैं।  सीजफायर से पहले भी हुई लड़ाई सीजफायर से ठीक पहले भी दोनों पक्षों के बीच हमले जारी थे. उत्तरी इजरायल में रॉकेट हमलों के बाद जवाबी कार्रवाई में इजरायली सेना ने हिजबुल्लाह के लॉन्चर ठिकानों को निशाना बनाया था. इस बीच, सीजफायर लागू होते ही बड़ी संख्या में लोग बेरूत के दक्षिणी इलाकों में लौटने लगे. सड़कों पर भीड़, गाड़ियों की कतारें और हिजबुल्लाह के झंडे व पोस्टर दिखाई दिए. हालांकि, हिजबुल्लाह और लेबनानी प्रशासन ने लोगों को चेतावनी दी थी कि वे जल्दबाजी में वापस न लौटें, क्योंकि इलाके में अनफटे बम और अन्य खतरे मौजूद हो सकते हैं।  डोनाल्ड ट्रंप ने इस युद्धविराम को शांति प्रक्रिया की दिशा में पहला कदम बताया था और उम्मीद जताई थी कि यह आगे स्थायी समझौते का रास्ता खोलेगा. उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि इजरायल और लेबनान के नेताओं के बीच ऐतिहासिक बातचीत हो सकती है. लेकिन सीजफायर के पहले ही घंटे में हुई हिंसा ने यह साफ कर दिया है कि जमीन पर हालात बेहद नाजुक हैं और यह समझौता कभी भी टूट सकता है. वहीं ट्रंप ने कहा है कि ईरान यूरेनियम एनरिचमेंट करने से पीछे हटने को तैयार है।  ईरान क्या कह रहा है? वहीं दूसरी तरफ ईरान ने अमेरिका के साथ संभावित बातचीत को लेकर अपना रुख और सख्त कर लिया है, जिससे पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है. पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर के तेहरान दौरे के बाद ईरान ने साफ संकेत दिया है कि अब बिना ठोस फ्रेमवर्क के कोई भी नई बातचीत बेकार होगी. ईरानी न्यूज एजेंसी तस्नीम के मुताबिक, तेहरान ने कहा कि अमेरिका को पहले अपने वादे पूरे करने होंगे और अपनी ‘अत्यधिक मांगों’ को वापस लेना होगा. यह बयान साफ करता है कि दोनों देशों के बीच मतभेद अभी भी गहरे हैं और बातचीत की राह आसान नहीं है। 

पुतिन BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे, भारत और रूस के रिश्तों को मिलेगी नई ताकत

नई दिल्ली रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए एक बार फिर से भारत का दौरा करेंगे। बता दें कि इससे पहले उन्होंने दिसंबर 2025 में भारत का दौरा किया था। ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका और नए सदस्य देशों) के नेताओं की यह वार्षिक बैठक आर्थिक सहयोग, व्यापार, वैश्विक शासन और भू-राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा करने के लिए आयोजित की जाती है। यह बैठक सितंबर के महीने में हो सकती है। रूस की समाचार एजेंसी टास ने बुधवार को क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव के हवाले से बताया कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस साल के अंत में भारत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में निश्चित रूप से भाग लेंगे। अभी तक शिखर सम्मेलन की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है, लेकिन TASS ने पहले भारतीय सरकार के एक सूत्र के हवाले से बताया था कि यह 12-13 सितंबर को होने वाला है। ब्रिक्स में अब 11 देश हो गए शामिल ब्रिक्स वर्तमान में 11 सदस्य देशों का एक प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय संगठन है। इसकी शुरुआत 2006 में चार देशों (ब्राजील, रूस, भारत और चीन) के साथ हुई थी, जिसे तब 'ब्रिक' (BRIC) कहा जाता था। लेकिन 2010 में इसमें दक्षिण अफ्रीका शामिल हो गया जिसके बाद इसे ब्रिक्स कहा जाने लगा। लेकिन अब कुछ और देशों को इससे जोड़ा गया है जिनमें मिश्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, यूएई और इंडोनेशिया शामिल हैं। चौथी बार भारत कर रहा ब्रिक्स की मेजबानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह सम्मेलन सितंबर में (संभावित रूप से 12-13 सितंबर) आयोजित होगा। भारत BRICS की चौथी बार मेजबानी कर रहा है। इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में भी मेजबानी कर चुका है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि राष्ट्रपति पुतिन "निश्चित रूप से" सम्मेलन में शामिल होंगे। रूसी समाचार एजेंसी TASS ने भी इस खबर की पुष्टि की है। भारत ने पुतिन को आधिकारिक निमंत्रण भेजा है और दोनों देशों के बीच कोई बाधा नहीं है। ब्रिक्स में शामिल हैं ये देश BRICS में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका जैसे प्रमुख उभरते अर्थव्यवस्थाओं वाले देश शामिल हैं। हाल के वर्षों में इस समूह का विस्तार हुआ है और नए सदस्य भी जुड़े हैं। यह मंच वैश्विक आर्थिक सहयोग, व्यापार वृद्धि, बहुपक्षीय सुधारों, ग्लोबल गवर्नेंस और भू-राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा के लिए महत्वपूर्ण है। वर्तमान समय में विश्व स्तर पर अनिश्चितता, ऊर्जा संकट, व्यापार युद्ध और क्षेत्रीय तनाव के बीच यह सम्मेलन विशेष महत्व रखता है। भारत की अध्यक्षता का थीम “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” है, जो लोगों-केंद्रित और मानवता-प्रथम दृष्टिकोण पर आधारित है।  भारत-रूस की रणनीतिक साझेदारी होगी और मजबूत पुतिन की यह यात्रा भारत-रूस की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगी। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, रक्षा, व्यापार और प्रौद्योगिकी सहयोग पहले से ही मजबूत है। इससे पहले दिसंबर 2025 में भी पुतिन भारत यात्रा की थी। उस दौरान प्रधानमंत्री मोदी के साथ उन्होंने वार्षिक शिखर सम्मेलन में शिरकत की थी। अब BRICS सम्मेलन में पुतिन की उपस्थिति से ग्लोबल साउथ की आवाज और मजबूती मिलेगी। यह बैठक उभरती अर्थव्यवस्थाओं को वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका बढ़ाने का अवसर देगी। इससे पहले दिसंबर में भारत आए थे पुतिन इससे पहले, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4-5 दिसंबर, 2025 को 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए नई दिल्ली आए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका जोरदार स्वागत किया था। इस यात्रा के दौरान आर्थिक संबंधों, ऊर्जा सहयोग और रक्षा क्षेत्र को मजबूत करने पर चर्चा की गई थी। नेताओं ने भारत और रूस के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के प्रति अपने समर्थन की पुष्टि की थी।  

कनाडा में डिपोर्टेशन का अलर्ट, खालिस्तानी समर्थकों पर कार्रवाई की तैयारी

टोरंटो कनाडा में इमिग्रेंट्स और शरणार्थियों को लेकर सख्ती लगातार बढ़ती जा रही है. सरकार ने बड़ी संख्या में शरणार्थियों और अस्थायी रूप से रह रहे लोगों को नोटिस जारी करना शुरू कर दिया है, जिसमें संकेत दिया गया है कि वे अब देश में रहने के पात्र नहीं हो सकते और उन्हें वापस लौटने की तैयारी करनी पड़ सकती है. इस कार्रवाई का असर खालिस्तान समर्थक आधार पर किए गए कुछ दावों पर भी पड़ सकता है।  पहले जहां कनाडा ऐसे मामलों में खतरे के आधार पर आसानी से शरण दे देता था, वहीं अब सरकार का रुख सख्त होता दिखाई दे रहा है. दरअसल, Immigration, Refugees and Citizenship Canada (IRCC) ने करीब 30,000 शरणार्थी आवेदकों को “प्रोसीजरल फेयरनेस लेटर्स” भेजे हैं. इन नोटिसों में कहा गया है कि उनके दावे शरण के तय मानकों पर खरे नहीं उतर सकते. साथ ही आवेदकों को सीमित समय में अतिरिक्त जानकारी और सबूत पेश करने का मौका दिया गया है।  हालांकि सरकार ने साफ किया है कि ये “डिपोर्टेशन ऑर्डर” नहीं हैं, लेकिन कई मामलों में चेतावनी दी गई है कि अगर आवेदक अयोग्य पाए जाते हैं, तो उन्हें जल्द से जल्द कनाडा छोड़ना पड़ सकता है, अन्यथा उनके खिलाफ निर्वासन की कार्रवाई हो सकती है।  इस पूरी कार्रवाई के पीछे नया कानून Bill C-12 है, जिसने शरण आवेदन के नियमों को पहले से कहीं ज्यादा सख्त बना दिया है. इसके तहत, जो लोग कनाडा आने के एक साल के भीतर शरण के लिए आवेदन नहीं करते, उनके केस को Immigration and Refugee Board of Canada (IRB) तक नहीं भेजा जाएगा।  इसके अलावा, जो लोग अमेरिका से अनियमित तरीके से सीमा पार कर कनाडा पहुंचे और 14 दिनों के भीतर दावा नहीं किया, वे भी अपात्र माने जा सकते हैं।  इमिग्रेशन विशेषज्ञों का कहना है कि इस कार्रवाई का असर भारतीय आवेदकों पर भी पड़ सकता है. कनाडा के इस नए नियम से जो इस तरह के मूवमेंट से जुड़े हैं उनपर कैंची चल सकती है. भारत के संदर्भ में कनाडा की ये पॉलिसी अहम साबित हो सकती है, क्योंकि बड़ी संख्या में खालिस्तान समर्थक भारत से भागकर कनाडा में छिपे हुए हैं।  विशेषज्ञों और वकीलों ने इस प्रक्रिया पर गंभीर चिंता जताई है. उनका कहना है कि कई मामलों में आवेदकों को आमने-सामने सुनवाई का मौका नहीं मिल रहा और उन्हें अपना पक्ष कागजों के जरिए ही रखना पड़ रहा है. इससे उनकी स्थिति और जोखिम को ठीक से समझ पाना मुश्किल हो जाता है और गलत फैसलों की संभावना बढ़ सकती है।  कुल मिलाकर, कनाडा की यह सख्ती उसकी शरणार्थी नीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है. भले ही सरकार इसे मास डिपोर्टेशन नहीं मान रही, लेकिन जमीनी स्तर पर हजारों लोग अब अनिश्चितता में हैं और उन्हें अपने भविष्य को लेकर गंभीर चिंता सता रही है।