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मोदी कैबिनेट विस्तार की चर्चाएं तेज, किस मंत्री की होगी छुट्टी और कौन बन सकता है नया चेहरा?

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में परिवर्तन की चर्चा काफी समय से हो रही है, लेकिन जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे और अमित शाह के राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद ये चर्चा तेज हो गई. कैबिनेट में बदलाव कब होगा, इसको लेकर भी दो तरह की चर्चाएं हो रही हैं. कहा जा रहा है कि 28 या 29 जून को कैबिनेट में फेरबदल हो सकता है या फिर मानसून सत्र के बाद बदलाव होगा. मानसून सत्र 21 जुलाई से 21 अगस्त तक चलेगा, फिर 21 अगस्त के बाद कैबिनेट में बदलाव संभव है।  ये पीएम मोदी के काम करने का स्टाइल है, आखिरी समय तक किसी को कुछ नहीं पता होता कि क्या होने वाला है. कैबिनेट रीशफल में भी यही दिख रहा है. चर्चाएं और कयास लग लग रहे हैं. अब आपको बताते हैं कि मोदी कैबिनेट रीशफल में किस किस को मौका मिल सकता है. और किस-किस का पत्ता कट सकता है।  सूत्रों के मुताबिक कहा जा रहा है कि… * उद्धव गुट और TMC से टूटे कुछ सांसदों को मौका मिल सकता है. * उद्धव गुट से आए संजय दीना पाटिल को जगह मिल सकती है. * एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे को कैबिनेट रैंक दिया जा सकता है. * TMC से आए काकोली घोष, सुदीप बंदोपाध्याय और शताब्दी रॉय की भी चर्चा है. तीनों में से कोई एक कैबिनेट में शामिल हो सकता है. * केंद्रीय मंत्री और यूपी बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी को संगठन में भेजा जा सकता है. पंकज चौधरी की जगह नया मंत्री बनाया जा सकता है. * दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को भी संगठन भेजा जा सकता है. हर्ष मल्होत्रा की जगह भी नया मंत्री बनाया जा सकता है. * इसके अलावा कई वरिष्ठ मंत्रियों को संगठन भेजा जा सकता है. * इनकी जगह युवा चेहरों को कैबिनेट में मौका दिया जा सकता है. यानी उद्धव ठाकरे और ममता बनर्जी का साथ छोड़कर आने वाले सांसदों को मौका मिल सकता है. तो वहीं कई पुराने वरिष्ठ नेताओं को वापस संगठन भेजा जा सकता है और उनकी जगह युवाओं को मौका मिल सकता है. यानी एक तरफ उद्धव ठाकरे और ममता बनर्जी हैं, जिनकी पार्टी ही टूट गई है, फिर भी पुराने कैबिनेट में फेरबदल की चर्चाओं के बीच पीएम मोदी ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को जन्मदिन की बधाई दी है।  25 जून को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का जन्मदिन था. पीएम मोदी ने कहा कि नेशनल एजुकेशन पॉलिसी लागू करने में धर्मेंद्र प्रधान की सराहनीय भूमिका है. पीएम मोदी की इस बधाई की बड़ी चर्चा हो रही है क्योंकि इंडी गठबंधन से लेकर कॉक्रोच पार्टी तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रही है. पेपर लीक के मामले पर धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ विपक्ष हमलावर है. ऐसे में पीएम मोदी के बधाई संदेश के कई मतलब निकाले जा रहे हैं। 

Pregnancy के बाद बढ़ा घर का किराया! मकान मालिक के फैसले के खिलाफ कोर्ट पहुंचा दंपती

सैन फ्रांसिस्को सैन फ्रांसिस्को के एक कपल ने अपने मकान मालिक के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया है, उनका आरोप है कि मकान मालिक ने उनके घर का किराया करीब 71% तक बढ़ा दिया. सबा और गोकसाल ओनी नाम के इस कपल का दावा है कि महीने के किराए में की गई 10,000 डॉलर (करीब 8.3 लाख रुपये) की यह भारी-भरकम बढ़ोतरी सिर्फ इसलिए की गई ताकि उन्हें मरीना स्थित अपना घर छोड़ने पर मजबूर किया जा सके।  इस जोड़े ने 'सैन फ्रांसिस्को स्टैंडर्ड' को बताया कि वे 'एविला स्ट्रीट' पर स्थित अपने तीन बेडरूम और तीन बाथरूम वाले घर की लीज रिन्यू कराने की तैयारी कर रहे थे. इसी दौरान उन्होंने मकान मालिक को यह जानकारी दी कि उनके घर दूसरा बच्चा आने वाला है. महिला का दावा है कि उसने मकान मालिक को भेजे एक टेक्स्ट मैसेज में लिखा था, “हमारे पास आपके साथ साझा करने के लिए एक बेहद खूबसूरत खबर है, हमारे घर नवंबर में दूसरा बच्चा आने वाला है।  ओनी परिवार करीब 10 महीने पहले ही इस घर में शिफ्ट हुआ था और वे अपनी नन्हीं बेटी के स्वागत के लिए इसी घर में रहना चाहते थे. 42 वर्षीय सबा एक बायोटेक स्टार्टअप की सीईओ हैं, जबकि 36 साल के गोकसाल नौकरी करने के साथ-साथ फैमिली एंड मैरिज थेरेपी में मास्टर डिग्री की पढ़ाई कर रहे  हैं।  खुशखबरी के बाद मिला 'रेंट शॉक' अगस्त में जैसे ही सबा ने मकान मालिक को अपने दूसरे बच्चे की खबर दी, मकान मालिक ने शुरुआत में उन्हें बधाई दी और कहा कि उनका फिलहाल सैन फ्रांसिस्को लौटने का कोई इरादा नहीं है. हालांकि, उन्होंने यह जरूर कहा कि वे इस प्रॉपर्टी को बेचने पर विचार कर रहे हैं. कुछ ही घंटों बाद बातचीत का रुख पूरी तरह बदल गया. मकान मालिक ने घर बेचने की बात की।   इसके कुछ हफ्ते बाद किराएदारों को नए किराए का एक प्रस्ताव मिला. इसमें कहा गया कि अगर वे एक साल और रुकना चाहते हैं, तो मासिक किराया 14,000 डॉलर से बढ़ाकर 24,000 डॉलर कर दिया जाएगा. मकान मालिकों ने जनवरी तक रुकने के लिए 18,000 डॉलर प्रति माह का एक अस्थायी विकल्प भी दिया।  किराए में इस अचानक और भारी बढ़ोतरी से ओनी परिवार दंग रह गया. कपल ने अपने तीन साल के बेटे का एडमिशन पास के ही एक प्लेस्कूल में करा दिया था और महीनों लगाकर घर को सजाया था. उन्होंने बताया कि किराए की इस मनमानी बढ़ोतरी के कारण उन्हें अपनी बेटी के जन्म से महज कुछ हफ्ते पहले नया घर ढूंढने के लिए मजबूर होना पड़ा. आखिरकार उन्होंने पास में ही एक दूसरा घर खरीद लिया, लेकिन वह आकार में छोटा था और इसके कारण उन्हें उस फर्नीचर को भी बेचना पड़ा जो उन्होंने एविला स्ट्रीट वाले घर के लिए खरीदा था।  कपल ने मकान मालिक के खिलाफ मुकदमा दायर किया. याचिका में आरोप लगाया गया कि मकान मालिकों का इरादा कभी भी बढ़ा हुआ किराया वसूलने का था ही नहीं. बल्कि, उन्होंने किराए की बढ़ोतरी को एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया ताकि परिवार को घर से निकाला जा सके और बिना किराएदारों के प्रॉपर्टी को आसानी से बेचा जा सके. उनके वकील  ने कहा कि उनकी फर्म के पास अब ऐसे मामले बहुत आ रहे हैं, जहां मकान मालिक किराएदारों को निकालने के लिए भारी किराया बढ़ा देते हैं।  किराएदारों का कहना है कि मकान मालिक कानूनी बेदखली के खर्च से बचने के लिए इस हथकंडे का इस्तेमाल करते हैं। 

Pakistan से Paris तक फीका पड़ा चीन का एयर डिफेंस, जानिए क्यों घट रही है वैश्विक मांग

बीजिंग  पेरिस में दुनिया के सबसे बड़े ड‍िफेंस फेयर में से एक यूरोसैटरी खत्म हुआ. यहां अमेरिका, फ्रांस, इजरायल, साउथ कोरिया और चीन समेत दुनिया की बड़ी ड‍िफेंस कंपनियां अपने सबसे आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम लेकर पहुंचीं. चीन भी पूरे आत्मविश्वास के साथ गया. नोरिन्को ने स्काई ड्रैगन-100, यितियन-II, लेजर वेपन और एंटी-ड्रोन सिस्टम का प्रदर्शन किया. लेकिन क‍िसी ने द‍िलचस्‍पी नहीं द‍िखाई. सवाल ये क‍ि अगर चीनी सिस्टम इतने दमदार हैं, तो यूरोप और नाटो देशों की कतारें चीन के स्टॉल पर क्यों नहीं दिख रहीं? जवाब वॉर जोन में छ‍िपा है।  चीन के एयर डिफेंस सिस्टम का सबसे बड़ा ग्राहक पाकिस्तान है. पाकिस्तान के पास HQ-9/P जैसे लंबी दूरी के एयर डिफेंस सिस्टम हैं, जिन्हें चीन अपनी तकनीकी क्षमता का प्रतीक बताता है. यही वजह है कि जब भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव बढ़ा और भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, तब रक्षा विशेषज्ञों के बीच यह सवाल उठा कि पाकिस्तान के चीनी एयर डिफेंस सिस्टम का प्रदर्शन कैसा रहा।      भारत और पाकिस्तान, दोनों ने इस अभियान के बारे में अलग-अलग दावे किए. भारत ने सबूतों के साथ कहा क‍ि उसने चाइनीज एयर ड‍िफेंस स‍िस्‍टम की धज्‍ज‍ियां उड़ा दीं. इसके बाद से चीनी एयर ड‍िफेंस सिस्‍टम को लेकर शक गहराने लगा. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल पूछे जाने लगे क‍ि चीनी ड‍िफेंस स‍िस्‍टम क्‍या सच में पाक‍िसतान में प‍िट गया? किसी भी हथियार के लिए वास्तविक युद्ध उसकी सबसे बड़ी परीक्षा होता है और यही परीक्षा चीन के लिए असहज सवाल छोड़ गई।  पेरिस में चीन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यूरोसैटरी में चीन का उद्देश्य साफ था ग्लोबल साउथ के अलावा यूरोप में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाना. लेकिन रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह रास्ता आसान नहीं है. विशेषज्ञों का कहना है कि चीन की सबसे बड़ी ताकत उसकी कम कीमत है. अमेरिका या यूरोप के मुकाबले चीन अपने एयर डिफेंस सिस्टम काफी सस्ते में बेच सकता है. यही कारण है कि पाकिस्तान, मिस्र, अजरबैजान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान जैसे देशों ने चीनी सिस्टम खरीदे हैं. लेकिन यूरोप का बाजार सिर्फ कीमत नहीं देखता. वहां यह भी देखा जाता है कि हथियार असली युद्ध में कितना सफल रहा है, क्या वह नाटो नेटवर्क के साथ काम कर सकता है, उसकी लॉजिस्टिक्स कैसी हैं और लंबे समय तक उसका रखरखाव कितना भरोसेमंद रहेगा।  युद्ध ने बदल दिया एयर डिफेंस का गणित यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्षों ने दुनिया को दिखा दिया कि अब सिर्फ लड़ाकू विमान नहीं, बल्कि ड्रोन, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइलें भी युद्ध का चेहरा बदल रही हैं. इसी वजह से एयर डिफेंस बाजार अचानक दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता रक्षा बाजार बन गया है. अमेरिका के THAAD और Patriot, यूरोप के SAMP/T NG तथा दक्षिण कोरिया के M-SAM और L-SAM जैसे सिस्टम चर्चा में हैं।  दक्षिण कोरिया ने इस दौड़ में तेजी से जगह बनाई है. यूएई ने दावा किया कि उसके M-SAM सिस्टम ने ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों के दौरान 30 में से 29 लक्ष्यों को मार गिराया. इसके बाद सऊदी अरब और इराक जैसे देशों ने भी इसमें रुचि दिखाई।  चीन की असली दिक्कत सिर्फ तकनीक नहीं साउथ चाइना मार्निंग पोस्‍ट की र‍िपोर्ट के मुताबिक- रक्षा विशेषज्ञ बेन्स नेमेथ का कहना है कि कोई भी देश सिर्फ तकनीकी स्पेसिफिकेशन देखकर हथियार नहीं खरीदता. ग्राहक यह भी देखते हैं कि हथियार कितने युद्धों में इस्तेमाल हुआ, उसका रिकॉर्ड कैसा है, ट्रेनिंग और सपोर्ट कैसा मिलेगा और भविष्य में स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता कैसी रहेगी।  यही वजह है कि अमेरिकी और इजरायली सिस्टमों के पास वर्षों का युद्ध अनुभव है. यूरोपीय सिस्टमों के पास नाटो का भरोसा है. दक्षिण कोरिया तेजी से विश्वसनीय विकल्प बन रहा है. चीन के पास कीमत का फायदा जरूर है, लेकिन युद्ध में सिद्ध प्रदर्शन और रणनीतिक भरोसे के मामले में उसे अभी लंबा रास्ता तय करना है।  ईरान ने भी बढ़ाए सवाल विश्लेषकों ने ईरान का उदाहरण भी दिया है. ईरान की एयर ड‍िफेंस में रूसी और कुछ चीनी मूल के उपकरण शामिल हैं. हालिया अमेरिकी और इजरायली हमलों के दौरान ये स‍िस्‍टम ध्‍वस्‍त हो गए. हालांकि किसी एक सिस्टम पर सवाल उठाना ठीक नहीं, लेकिन माना गया क‍ि चीन के हथ‍ियार कामयाब नहीं हुए. ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह दूसरा मौका था, जब चीन के हथ‍ियारों पर सवाल उठे।  यूरोप को पसंद क्‍यों नहीं पेरिस एयर शो और यूरोसैटरी से सबसे बड़ा संदेश यही निकला कि यूरोप अभी भी चीन के बजाय अमेरिका, यूरोप और दक्षिण कोरिया की ओर ज्यादा भरोसा जता रहा है.रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में एयर डिफेंस का बाजार और बड़ा होगा. लेकिन जीत उसी की होगी जो सिर्फ मिसाइल नहीं, बल्कि रडार, सेंसर, कमांड एंड कंट्रोल और एंटी-ड्रोन तकनीक को एकीकृत समाधान के रूप में पेश करेगा।  चीन के लिए चुनौती अब सिर्फ हथियार बनाना नहीं है, बल्कि दुनिया को यह भरोसा दिलाना है कि उसके सिस्टम वास्तविक युद्ध में भी उतने ही प्रभावी हैं जितने वे रक्षा प्रदर्शनियों में दिखाई देते हैं. पाकिस्तान के अनुभव और यूरोप की हिचकिचाहट ने इस चुनौती को और कठिन बना दिया है. इसलिए पेरिस में भले चीन ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम की पूरी दुकान सजा दी हो, लेकिन सबसे बड़े और सबसे भरोसेमंद ग्राहकों का विश्वास जीतना उसके लिए अभी भी सबसे कठिन लड़ाई बना हुआ है।   

1 जुलाई से बदल जाएंगे LPG के कई नियम, गैस कनेक्शन, KYC और सिलेंडर बुकिंग पर पड़ेगा असर

 नई दिल्‍ली इंडेन गैस, भारत पेट्रोलियम और भारत गैस के LPG कस्‍टमर्स को बड़ा झटका लगने वाला है, क्‍योंकि 1 जुलाई से नया नियम लागू हो रहा है. आपको बुकिंग मे दिक्‍कत, गैस नेक्‍शन कटना और अन्‍य परेशानियां उठानी पड़ सकती है. लेकिन यह सभी एलपीजी यूजर्स के लिए नहीं होगी।  केंद्र सरकार ने हाल ही में एलपीजी नियम में संशोधन आदेश लागू किया है. नए नियम के तहत, जिनके पास पहले से ही PNG कनेक्शन है, उनका HP, Inden या भारत गैस LPG कनेक्शन एक महीने के भीतर काट दिया जाएगा, जो लोग स्वेच्छा से अपना LPG कनेक्शन छोड़ देते हैं, उन्हें पूरी तरह से नुकसान नहीं होगा. उन्हें एक कूपन मिलेगा जिससे वे जरूरत पड़ने पर बाद में अपना एलपीजी कनेक्शन फिर से एक्टिव कर सकेंगे।  मार्च में ही सरकार ने निर्देश दिया था कि जिन क्षेत्रों में पाइपलाइन के जरिए गैस पहुंचाने का बुनियादी ढांचा मौजूद है, वहां LPG यूजर्स को तीन महीने के भीतर PNG सिस्‍टम में बदलना होगा, नहीं तो उनका एलपीजी कनेक्शन काट दिया जाएगा. यह समय सीमा जून के अंत तक समाप्त हो रही है।  अगर पीएनजी सिस्‍टम वाले किसी भी क्षेत्र में रहने वाले जिन लोगों ने अभी तक स्विच नहीं किया है, उन्हें जल्द से जल्द कार्रवाई करनी चाहिए. इसके लिए आप अपने नजदीकी पीएनजी गैस कनेक्‍शन वाली कंपनी से संपर्क कर सकते हैं।  30 जून E-KYC जमा करने की लास्‍ट डेट इस नियम के अलावा, सभी एलपीजी कनेक्‍शन होल्‍डर्स के लिए ई-केवाईसी वेरिफाई करना भी जरूरी है, जिसकी लॉस्‍ट डेट 30 जून है. अगर आप इसे पूरा नहीं करते हैं, तो आपका कनेक्‍शन काटा जा सकता है. जिस कारण अगले सिलेंडर की बुकिंग करना मुश्किल हो जाएगा. जिन कस्‍टमर्स ने पहले ही अपना ई-केवाईसी पूरा कर लिया है, उन्‍हें आगे कुछ भी करने की आवश्‍यकता नहीं है।  कमर्शियल एलपीजी के पाबंदियों में छूट  सरकार ने पश्चिम एशिया में तनाव कम होने का हवाला देते हुए कमर्शियल एलपीजी सप्‍लाई पर लगे प्रतिबंधों को पहले ही हटा दिया है. इस कदम से अब घरेलू एलपीजी नियमों में भी इसी तरह की राहत मिलने की उम्मीदें बढ़ रही हैं।  दोबारा बुकिंग के नियम  फिलहाल, ग्राहकों को दोबारा बुकिंग कराने से पहले शहरों में 25 दिन और गांवों में 45 दिन का इंतजार करना पड़ता है. यह प्रतिबंध सरकार ने युद्ध के दौरान जमाखोरी रोकने और आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लागू किया था.  होर्मुज में परिचालन सामान्य होने के साथ ही, यह उम्मीद बढ़ रही है कि 1 जुलाई से यह अंतराल कम हो सकता है. हालांकि अभी तक इसकी कोई औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है। 

1 जुलाई से आपकी जेब पर असर! LPG, Credit Card और कारों से जुड़े 5 बड़े बदलाव जानिए

नई दिल्ली जून का महीना खत्म होने वाला है और 5 दिन बाद जुलाई महीने की शुरुआत हो जाएगी. हर महीने की तरह अगला महीना भी अपने साथ कई बड़े बदलावों (Rule Change From 1st July) को लेकर शुरू होने जा रहा है. इनमें एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बदलाव के साथ ही क्रेडिट कार्ड से जुड़े नियम भी बदलने जा रहे हैं. इसके अलावा कार के शौकीनों को महंगाई का झटका लगने वाला है. आइए ऐसे ही 5 बड़े बदलावों के बारे में जानते हैं।  पहला बदलाव: LPG सिलेंडर के दाम बदलेंगे हर महीने की पहली तारीख को देश के लोगों की नजर तेल कंपनियों द्वारा एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में किए जाने वाले संशोधन पर टिकी होती है, क्योंकि ये मामला सीधे घर की रसोई के बजट से जुड़ा हुआ है. अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते गहराई मिडिल ईस्‍ट टेंशन के बीच LPG Price Hike का कई बार झटका लगा. बीते 1 जून को भी कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर 53.50 रुपये महंगा हुआ था, जिसके बाद 19 Kg LPG Cylinder Price In Delhi 3113.50 रुपये का हो गया था. वहीं 5 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर पर भी महंगाई का बम फूटा था. हालांकि, 14 किलोग्राम वाले रसोई गैस सिलेंडर की कीमतें स्थिर रखी गई थीं।  दूसरा बदलाव: ATF की कीमतों में संशोधन जुलाई महीने की पहली तारीख से दूसरा बड़ा बदलाव हवाई सफर करने वाले यात्रियों से जुड़ा है. दरअसल, तेल कंपनियां न सिर्फ एलपीजी की कीमतों में संशोधन (LPG Price Change) करती हैं, बल्कि एयर टर्बाइन फ्यूल यानी ATF के दाम में भी बदलाव करती हैं. इसकी कीमत में होने वाली बढ़ोतरी हवाई यात्रा के खर्च में बढ़ोतरी करने वाली साबित होती है, तो वहीं इसमें गिरावट खर्च में कटौती का कारण बनती है।  तीसरा बदलाव: HDFC क्रेडिट कार्ड रूल  HDFC Bank का क्रेडिट कार्ड यूज करते हैं, तो फिर आपके लिए भी 1 जुलाई 2026 की तारीख बदलाव (Credit Card Rule Change) लेकर आ रही है. दरअसल, एचडीएफसी बैंक रेगैलिया गोल्ड क्रेडिट कार्ड यूजर्स को घरेलू एयरपोर्ट लाउंज की फ्री सर्विस जारी रखने के लिए तिमाही खर्च की नई लिमिट पूरी करनी होगी. ताजा संशोधन के मुताबिक, इस क्रेडिट कार्ड के यूजर्स को अगली तिमाही में इस फ्री सर्विस का लाभ लेने के लिए पिछली तिमाही में मिनिमम 60,000 रुपये खर्च करने होंगे।  चौथा बदलाव: फ्री में आधार अपडेट  जुलाई की पहली तारीख से UIDAI आधार कार्ड यूजर्स को राहत देने जा रहा है. रेग्युलेटर की ओर से जारी नोटिफिकेशन को देखें, तो Aadhaar Card पर आपकी ईमेल आईडी अपडेट नहीं है, तो 1 जुलाई से यह काम फ्री में होने वाला है. यूआईडीएआई आधार में ईमेल को अपडेट करने के लिए दिसंबर तक यानी 6 महीने के लिए फ्री सर्विस दे रहा है. इससे पहले इस काम को करने के लिए 75 रुपये का चार्ज लागू था।  पांचवां बदलाव: कार खरीदना होगा महंगा जुलाई के पहले दिन से कार खरीदारों को झटका लगने वाला है. KIA मोटर्स समेत कुछ ऑटोमोबाइल कंपनियां अपनी कारों के दाम बढ़ाने जा रही हैं. किआ ने अपनी कारों की कीमतों में 2 फीसदी तक की बढ़ोतरी का ऐलान किया है, तो वहीं Tata Motors भी ICE (इंटरनल कंबशन इंजन) और EV मॉडल्स की कीमतों में 1.5% तक की बढ़ोतरी करने की तैयारी में है। 

4 जुलाई पर वैश्विक नजरें, ईरान में खामेनेई को लेकर हलचल और अमेरिका में आजादी के जश्न की तैयारियां

तेहरान  जुलाई की शुरुआत में दुनियाभर में बड़ी हलचल देखी जा सकती है. अमेरिका एक तरफ जहां बड़े जोर-शोर से चार जुलाई को अपना स्वतंत्रता दिवस मना रहा होगा. वहीं, ईरान अपने सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई को अंतिम विदाई दे रहा होगा. इन दोनों ही घटनाओं पर दुनियाभर की नजरें होंगी।  चार जुलाई को अमेरिका की आजादी की 250वीं वर्षगांठ होगी. ऐसे में अमेरिका में हफ्तेभर तक कार्यक्रम किए जाएंगे. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह चार जुलाई को नेशनल मॉल में होने वाले दुनिया के सबसे शानदार आयोजन को संबोधित करेंगे।  वहीं, ईरान तीन से पांच जुलाई तक आयुतल्लाह अली खामेनई को अंतिम विदाई दे रहा है. उनके जनाजे में करोड़ों लोगों के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है. अगर ऐसा होता है तो यह दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा जनसैलाब होगा. इससे पहले 1989 में ईरान के पहले सर्वोच्च नेता रुहोल्लाह खुमैनी के जनाजे में तकरीबन एक करोड़ लोग जुटे थे. उनके उत्तराधिकारी अली खामेनेई पश्चिम एशिया के सबसे लंबे समय तक सत्ता में रहने वाले प्रमुख थे. इस साल 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हवाई हमलों में उनकी हत्या कर दी गई थी।  अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर 13,000 से अधिक हवाई हमले किए, जिसके कारण आयतुल्लाह को अंतिम विदाई देना बेहद जोखिम भरा हो गया था. हालांकि आठ अप्रैल से अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम लागू है. इसके बाद 17 जून को राष्ट्रपति ट्रंप और उनके ईरानी समकक्ष मसूद पेजेश्कियान ने युद्ध समाप्त करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर साइन किए. दोनों देशों के बीच स्थायी शांति के लिए बातचीत जारी है।  बता दें कि ईरान ने अंतिम संस्कार के लिए तीन, चार और पांच जुलाई की तारीखें यूं ही नहीं चुनी हैं. इतिहास बताता है कि ईरान अक्सर अमेरिका को संदेश देने के लिए प्रतीकात्मक तारीखों का इस्तेमाल करता रहा है. चार नवंबर 1979 को ईरानी छात्रों ने ईरान स्थित अमेरिकी दूतावास पर कब्जा कर 66 अमेरिकी नागरिकों को बंधक बना लिया था. 444 दिनों तक चला यह संकट 20 जनवरी 1981 को खत्म हुआ था. लेकिन इसके ठीक उसी दिन जब तत्कालीन राष्ट्रपति जिमी कार्टर व्हाइट हाउस छोड़ रहे थे. कार्टर ने बंधकों को छुड़ाने की पूरी कोशिश की. अप्रैल 1980 में उन्होंने एक सैन्य बचाव अभियान भी शुरू किया, लेकिन ईरानी रेगिस्तान में एक अमेरिकी हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस हो गया, जिसमें पांच अमेरिकी सैनिक मारे गए और ये मिशन फेल  हो गया।  इस बंधक संकट ने कार्टर की राष्ट्रपति पद की छवि को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया. उनकी दोबारा चुनाव जीतने की उम्मीद खत्म हो गई और रोनाल्ड रीगन के सत्ता में आने का रास्ता साफ हो गया. बंधकों की रिहाई के लिए वही तारीख चुनना ईरान का कार्टर को आखिरी राजनीतिक झटका देना था, ताकि जीत का श्रेय उन्हें न मिल सके।  45 साल भी अमेरिका-ईरान आमने-सामने ट्रंप के नेतृत्व में चला पांच सप्ताह का युद्ध ईरान को काफी कमजोर जरूर कर गया, लेकिन अमेरिका अपने अमेरिका अपना प्रमुख लक्ष्य हासिल नहीं कर सका. ना तो ईरान में सत्ता परिवर्तन हुआ, ना उसने उच्च संवर्धित यूरेनियम छोड़ा, ना परमाणु कार्यक्रम समाप्त किया, ना क्षेत्रीय सहयोगी संगठनों का समर्थन खत्म किया और ना ही अपनी बैलिस्टिक मिसाइल परियोजना छोड़ी. इसे विपरीत, ईरान ने होर्मुज को अवरुद्ध कर दिया, जहां से दुनिया की लगभग 25 फीसदी तेल की सप्लाई होती है।  ईरान की बात करें तो यहां सत्ता पर कट्टरपंथी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स काउंसिल (IRGC) का प्रभाव और मजबूत हो गया है. उनके लिए खामेनेई की अंतिम विदाई दुनिया को कई संदेश देने का अवसर है. अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि खामेनेई को उनके पैतृक शहर मशहद में दफनाया जाएगा या फिर तेहरान स्थित करीब दो अरब डॉलर की लागत से बने रुहोल्लाह खुमैनी मकबरे में लेकिन यह तय माना जा रहा है कि पूरा आयोजन राजनीतिक संदेश देने के उद्देश्य से किया जाएगा।  ईरान पर हमला 21वीं सदी के सबसे भीषण बमबारी ऑपरेशन में से एक रहा. लेकिन इसके बावजूद ईरानी शासन कायम है. उसने अरबों डॉलर की सैन्य और बुनियादी ढांचे की क्षति उठाई, कई युद्धपोत और विमान गंवाए लेकिन दुनिया की सबसे ताकतवर सैन्य शक्ति को निर्णायक जीत हासिल नहीं करने दी।  लाखों-करोड़ों लोगों की भीड़ किसी भी सरकार के लिए वैधता और जनसमर्थन का प्रतीक होती है. इसे ट्रंप से बेहतर शायद ही कोई समझता हो. 2017 में उन्होंने मीडिया की उस रिपोर्टिंग की आलोचना की थी, जिसमें कहा गया था कि उनके शपथ ग्रहण समारोह में बराक ओबामा के 2009 के समारोह से कम भीड़ आई थी।  ईरानी शासन ने 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद सबसे बड़े जनआंदोलनों का सामना किय.। पहले 2017 में महसा अमीनी आंदोलन और फिर दिसंबर 2025 में आर्थिक संकट के खिलाफ बड़े विरोध प्रदर्शन हुए. दोनों आंदोलनों को सरकार ने कठोर बल प्रयोग के जरिए दबा दिया लेकिन जब अमेरिका और ईरान के ये दोनों बड़े आयोजन समाप्त हो जाएंगे, तब भी ईरान का सवाल ट्रंप के सामने सबसे बड़ी चुनौती बना रहेगा।  जिस ईरान को रोनाल्ड रीगन पूरी तरह नहीं संभाल पाए, वही चुनौती आज ट्रंप के सामने है. बता दें कि ट्रंप, रोनाल्ड रीगन को अपने जीवन का सर्वश्रेष्ठ अमेरिकी राष्ट्रपति बताते हैं. रीगन शीत युद्ध के अंत से लेकर सोवियत संघ के विघटन जैसे ऐतिहासिक घटनाओं के साक्षी रहे लेकिन ईरान उनके लिए भी कठिन साबित हुआ. उन्होंने सार्वजनिक रूप से कार्टर सरकार द्वारा लगाए गए हथियार प्रतिबंध को जारी रखा, लेकिन उनकी सरकार ने गुप्त रूप से ईरान को हथियार भी बेचे।  यही मामला आगे चलकर ईरान-कॉन्ट्रा के नाम से मशहूर हुआ, जिसने 1981 से 1986 के बीच उनकी सरकार को गहरे संकट में डाल दिया. मार्च 1987 में रीगन ने राष्ट्र के नाम संबोधन में इस मामले की पूरी जिम्मेदारी लेते हुए कहा था कि जो शुरुआत ईरान के साथ रणनीतिक संवाद के रूप में हुई थी, वह आखिरकार बंधकों के बदले हथियारों के सौदे में बदल गई. हालांकि, रीगन पर महाभियोग नहीं चला और उनकी लोकप्रियता फिर बढ़ गई।  अमेरिकी अर्थव्यवस्था अब भी बढ़ रही है, लेकिन महंगाई चिंता का विषय बनी हुई है. दूसरी ओर ट्रंप की लोकप्रियता 37 से … Read more

India-China Border: आदिवासियों का बड़ा दावा, सीमा क्षेत्र में चीन की गतिविधियों को लेकर बढ़ी चिंता

नईदिल्ली  भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाके से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले के स्थानीय 'नाह' आदिवासी समुदाय ने दावा किया है कि चीन इस क्षेत्र में उनकी जमीन हथिया रहा है। उन्होंने दावा किया है कि नियंत्रण रेखा (LAC) के पास चीनी सेना ने भारतीय जमीन पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे किए हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक इसे लेकर आदिवासी संगठन 'नाह वेलफेयर सोसाइटी' ने जिला प्रशासन को एक आधिकारिक ज्ञापन सौंपा है। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 6 सालों के अंदर चीनी सेना ने उनके पूर्वजों की खेती और मवेशियों को चराने वाले जमीन के एक बहुत बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक स्थानीय लोगों ने बताया कि, चीन पिछले 10 से 15 सालों से इस इलाके में धीरे-धीरे पैर पसार रहा था, लेकिन 2020 के बाद से उसकी रफ्तार बहुत ज्यादा बढ़ गई है। किन इलाकों पर कब्जा? आदिवासी संगठन ने अपर सुबनसिरी के 'ताक्सिंग' क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पांच अलग जगहों पर चीन की संदिग्ध और आक्रामक गतिविधियों की सूची प्रशासन को सौंपी है। उनके मुताबिक 2020 तक ये इलाके पूरी तरह उनके नियंत्रण में थे, लेकिन अब इस पर चीन का नियंत्रण है। ये इलाके हैं- ओयिंग- यह स्ट्रेटेजिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण इलाका है। पोत्रंग (झील): यह स्थानीय लोगों के लिए एक पवित्र तीर्थ स्थल माना जाता है। तिन्दिनतांग (टीजी): ताक्सिंग हेडक्वार्टर के बिल्कुल नजदीक स्थित इलाका। पनिआर (चुजार्टा क्षेत्र): स्थानीय आदिवासियों का पारंपरिक क्षेत्र। मरपन (मर्नाफे): यहां चीनी सैनिकों की आवाजाही देखी गई है। 'भारतीय सीमा में चीनी सड़कें और मिलिट्री कैंप' नाह वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष केरु चादर ने अपने ज्ञापन में बेहद चौंकाने वाले दावे किए हैं। उन्होंने एक बयान में कहा, "हमें अपनी भारतीय सेना पर पूरा भरोसा है और वे सालों से हमारी जमीन की रक्षा कर रहे हैं, लेकिन ये कोशिशें काफी साबित नहीं हो रही हैं। ताक्सिंग क्षेत्र में चीनी पीएलए (PLA) जिस इरादे और बिजली की रफ्तार से आगे बढ़ रही है, वह बेहद खतरनाक है।" उन्होंने आगे कहा, “हम हर दिन, इंच-दर-इंच अपनी मातृभूमि को चीन के हाथों खो रहे हैं। चीनी सेना ने भारतीय क्षेत्र के भीतर पक्की सड़कें और अपने मिलिट्री कैंप तक बना लिए हैं।” इस मामले पर नाचो विधानसभा क्षेत्र के विधायक नाकाप नालो ने भी अपनी चिंता व्यक्त की है। विधायक नालो ने एक बयान में कहा, "यह सीधे तौर पर देश की सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ा मुद्दा है। स्थानीय लोगों ने जो आरोप लगाए हैं, जिला प्रशासन और सेना को उसकी आधिकारिक तौर पर पुष्टि करनी चाहिए।" वहीं इस पूरे मामले पर फिलहाल अरुणाचल प्रदेश की सरकार या केंद्र सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। भारत का अभिन्न हिस्सा है अरुणाचल गौरतलब है कि चीन अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा नहीं मानता। वह इसे 'जांगनान' (दक्षिण तिब्बत) कहता है और इस पर अपना ऐतिहासिक दावा ठोकता है। अपनी संप्रभुता दिखाने के लिए चीन अक्सर अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नए चीनी नाम जारी करता है, वहां के नागरिकों को स्टेपल वीजा देता है और सीमा के पास बुनियादी ढांचे का निर्माण करने की भी कोशिश करता है। हालांकि भारत ने कई मौकों पर यह स्पष्ट कर दिया है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है और नाम बदलने से जमीनी हकीकत नहीं बदल सकती।

चीन दौरे पर उठे सवालों के बीच बांग्लादेश के विदेश मंत्री का जवाब, बोले- PM भीख का कटोरा लेकर नहीं गए

ढाका  अक्सर 'भीख का कटोरा' की चर्चा पाकिस्तान के संदर्भ में होती है, पाकिस्तान अमूमन दुनिया भर से मदद मांगने के लिए जाता रहता है. लेकिन इस बार ये चर्चा बांग्लादेश को लेकर हो गई. चर्चा भी ऐसी हुई कि बांग्लादेश के विदेश मंत्री बुरा मान गए. दरअसल बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के चीन दौरे पर एक अजीब विवाद पैदा हो गया है. मीडिया की ओर से बार बार चीन से मिलने वाली आर्थिक मदद पर सवाल पूछने पर बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने चिढ़ते हुए कहा कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान चीन कोई भीख का कटोरा लेकर नहीं गए हैं. वे वहां दोनों देशों के बीच संबंधों की दशा-दिशा तय करने गए हैं।  बांग्लादेश के विदेश मंत्री पीएम के दौरे पर ढाका में पत्रकारों से बात कर रहे थे. उन्होंने कहा कि किसी भी देश का नेता 'भीख का कटोरा' लेकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में शामिल नहीं होते हैं।  बीजिंग से मिलने वाली सीधी प्रोजेक्ट सहायता के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए विदेश मंत्री ने कहा, "आपने नकद राशि मिलने की बात की. भाइयों, कृपया ऐसे सवाल न पूछें; इससे हमें बहुत शर्मिंदगी होती है।  "प्रधानमंत्री दोनों देशों के बीच संबंधों की दिशा, विषय-वस्तु, कद, दायरा और गहराई तय करने के लिए वहां गए थे. सरकार का कोई भी प्रमुख दूसरे देश के नेता के साथ कागज और पेंसिल लेकर नहीं बैठता और न ही वे कोई भीख का कटोरा लेकर जाते हैं. कृपया थोड़ी आत्म-सम्मान बनाए रखें।  खलीलुर ने ये बातें  विदेश मंत्रालय में आयोजित एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहीं, जो प्रधानमंत्री की हालिया मलेशिया और चीन यात्राओं के संबंध में थी।  बता दें कि बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में भारी जीत के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी  की सरकार के मुखिया तारिक अपनी पहली विदेश यात्रा पर निकले और 21 जून को मलेशिया पहुंचे. अगले दिन वह उत्तर-पूर्वी चीन के शहर डालियान गए।  वहाां वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम की सालाना बैठक में शामिल होने के बाद, वह तीन दिन की राजकीय यात्रा शुरू करने के लिए बुधवार को बीजिंग पहुंचे।  इस यात्रा के दौरान तारिक ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रीमियर ली कियांग के साथ उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय बातचीत की. ढाका और बीजिंग ने अलग-अलग क्षेत्रों में 17 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं।  दोनों देशों के  बीच 13 समझौते पर हस्ताक्षर हुए.  इनमें तीस्ता नदी मास्टर प्लान, तकनीकी सहायता के लिए चीन का समर्थन.  मोंगला पोर्ट और अनवारा के पास आर्थिक क्षेत्र का विकास. बुनियादी ढांचा जिनमें सड़कें, पुल, रेलवे, ऊर्जा, पर्यावरण-अनुकूल विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और मानव संसाधन विकास में सहयोग शामिल है। 

China in Mongla Port: हिंद महासागर में बढ़ी चीन की मौजूदगी, भारत ने सेशेल्स के साथ मजबूत की रणनीतिक बढ़त

नई दिल्ली  हिंद महासागर में इन दिनों बड़ी भू-राजनीतिक शतरंज बिछी हुई है. एक तरफ चीन अपने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के जरिए बंदरगाहों, लॉजिस्टिक्स और समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार निवेश कर रहा है. पाकिस्तान का ग्वादर, श्रीलंका का हम्बनटोटा, जिबूती में नौसैनिक अड्डा और अब बांग्लादेश के मोंगला पोर्ट तक उसकी पहुंच इस रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है. दूसरी ओर भारत भी अब सिर्फ समुद्र की निगरानी तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि हिंद महासागर में अपने भरोसेमंद साझेदारों का मजबूत नेटवर्क तैयार कर रहा है।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेशेल्स यात्रा इसी बड़ी रणनीति का अहम हिस्सा मानी जा रही है. पहली नजर में सेशेल्स एक छोटा सा द्वीपीय देश दिखता है. करीब 460 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल और लगभग एक लाख की आबादी वाले इस देश को देखकर शायद ही कोई अंदाजा लगाए कि इसकी रणनीतिक अहमियत कितनी बड़ी है. लेकिन पश्चिमी हिंद महासागर में फैले इसके 115 द्वीप ऐसे समुद्री इलाके में स्थित हैं, जहां से दुनिया के सबसे व्यस्त व्यापारिक समुद्री मार्ग गुजरते हैं।  सेशेल्स केवल एक मित्र नहीं, समुद्री सुरक्षा का अहम साझेदार एशिया, अफ्रीका और पश्चिम एशिया को जोड़ने वाले इन रास्तों से हर दिन लाखों बैरल कच्चा तेल, एलएनजी, कंटेनर कार्गो और जरूरी सामान दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है. भारत के विदेशी व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा भी इन्हीं समुद्री मार्गों पर निर्भर है. यही वजह है कि नई दिल्ली के लिए सेशेल्स केवल एक मित्र देश नहीं, बल्कि समुद्री सुरक्षा के लिए सबसे अहम साझेदार बन चुका है. दिलचस्प बात यह है कि जमीन के लिहाज से छोटा होने के बावजूद सेशेल्स का विशेष आर्थिक क्षेत्र करीब 13 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है।  इस विशाल समुद्री इलाके की निगरानी किसी भी छोटे देश के लिए आसान नहीं होती. भारत ने इसी जरूरत को समझते हुए पिछले कई वर्षों में सेशेल्स को डोर्नियर समुद्री निगरानी विमान, तेज गश्ती नौकाएं, तटीय निगरानी रडार नेटवर्क, हाइड्रोग्राफिक सर्वे और सैन्य प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं. इससे न केवल सेशेल्स की समुद्री क्षमता बढ़ी है, बल्कि पूरे पश्चिमी हिंद महासागर में भारत की निगरानी और साझेदारी भी मजबूत हुई है।  चीन की बढ़ती भूमिका को करेगा काउंटर यह पूरी रणनीति ऐसे समय में सामने आ रही है, जब चीन हिंद महासागर में अपनी मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है. बीते एक दशक में बीजिंग ने बंदरगाहों, औद्योगिक परियोजनाओं और समुद्री बुनियादी ढांचे में अरबों डॉलर का निवेश किया है. पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट, श्रीलंका के हम्बनटोटा बंदरगाह और अफ्रीका के जिबूती में उसकी मौजूदगी पहले ही भारत की रणनीतिक चिंताओं का हिस्सा रही है. अब बांग्लादेश के मोंगला पोर्ट तक चीन पहुंचने जा रहा है. चीन की इस भूमिका को भारत इसे व्यापक परिप्रेक्ष्य में देख रहा है. भारत जानता है कि भविष्य की प्रतिस्पर्धा केवल जमीन पर नहीं, बल्कि समुद्र में भी तय होगी।  हालांकि, भारत का जवाब चीन की तरह कर्ज आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल नहीं है. भारत की रणनीति भरोसे, क्षमता निर्माण और साझा विकास पर आधारित है. विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने भी साफ कहा है कि भारत किसी भी देश में वही परियोजना आगे बढ़ाता है, जिसे वहां की सरकार और जनता की सहमति प्राप्त हो. यही कारण है कि सेशेल्स के साथ रक्षा सहयोग के साथ-साथ डिजिटल गवर्नेंस, स्वास्थ्य, शिक्षा, जलवायु परिवर्तन, अक्षय ऊर्जा, पर्यटन और ब्लू इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी तेजी से बढ़ रही है।  प्रधानमंत्री मोदी की 2015 की यात्रा ने दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा दी थी. उसी दौरान कोस्टल सर्विलांस रडार सिस्टम की शुरुआत हुई, जिसने समुद्री गतिविधियों की रियल टाइम निगरानी को नई मजबूती दी. भारत ने डोर्नियर विमान और अन्य रक्षा उपकरण देकर सेशेल्स की समुद्री निगरानी क्षमता बढ़ाई. अब 2026 की यह यात्रा दोनों देशों के बीच 50 वर्षों के राजनयिक संबंधों को नई ऊंचाई देने की कोशिश है।  भारत की बदलती समुद्री सोच इस यात्रा का एक और अहम संदेश भारत की बदलती समुद्री सोच है. 2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने ‘सागर’ यानी सेक्युरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीजन का विजन दिया था. अब इसे ‘महासागर’ यानी म्यूचुअल एंड होलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सेक्युरिटी एंड ग्रोथ एक्रॉल रीजन के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है. इसका मतलब सिर्फ नौसैनिक सहयोग नहीं, बल्कि डिजिटल कनेक्टिविटी, सप्लाई चेन, जलवायु सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, खाद्य सुरक्षा और आर्थिक साझेदारी को भी समुद्री रणनीति का हिस्सा बनाना है. सेशेल्स इस व्यापक रणनीति का सबसे मजबूत उदाहरण बनकर उभरा है. भारत और सेशेल्स के रिश्ते केवल रणनीति तक सीमित नहीं हैं. दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध भी दो सदियों से अधिक पुराने हैं. भारतीय मूल के हजारों लोग आज भी सेशेल्स की अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, व्यापार और प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।  यही सामाजिक जुड़ाव दोनों देशों की साझेदारी को और मजबूत बनाता है. बदलती वैश्विक राजनीति में हिंद महासागर का महत्व लगातार बढ़ रहा है. जो देश इस समुद्री क्षेत्र में मजबूत साझेदारी और भरोसेमंद उपस्थिति बनाएगा, वही आने वाले वर्षों में क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित करेगा. ऐसे में यदि चीन मोंगला, ग्वादर और हम्बनटोटा के जरिए अपनी रणनीतिक पहुंच बढ़ा रहा है, तो भारत भी सेशेल्स जैसे विश्वसनीय साझेदारों के साथ अपने समुद्री सुरक्षा तंत्र को मजबूत कर रहा है। 

पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था पर CM शुभेंदु अधिकारी का बड़ा ऐलान, दो नए विधेयकों से गुंडाराज पर होगा वार

कलकत्ता पश्चिम बंगाल विधानसभा में कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार के दो नए विधेयक पेश किए जाने से पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सख्त संदेश दिया. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार राज्य में कानून का राज स्थापित करेगी और गुंडाराज का खात्मा करेगी।  मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि AJUP विधायक हुमायूं कबीर के खिलाफ उनके कथित भड़काऊ और नफरत फैलाने वाले भाषण को लेकर एफआईआर दर्ज कर ली गई है. उन्होंने कहा कि पिछले सप्ताह मुर्शिदाबाद में हुमायूं कबीर के दो भाषणों पर पहले ही उनकी पार्टी के विधायक ने सदन में आपत्ति उठाई थी।  'नफरत फैलाने वालों पर लगाम लगाने का वक्त' सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा, 'अब बहुत हो चुका. ऐसे लोगों को सबक सिखाने का समय आ गया है.' उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले राज्य में कमजोर मुख्यमंत्री होने की वजह से लोग मनमानी बातें करते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि हुमायूं कबीर के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की गई हैं और कानून अपना काम करेगा. उन्होंने कहा, 'मैं सदन को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि कोई भी इस तरह की भाषा बोलने की हिम्मत न करे।  उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष का मकसद मुर्शिदाबाद उपचुनाव से पहले मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण करना है ताकि उनके बेटे को चुनाव में फायदा मिल सके. इस दौरान उन्होंने संदेशखाली के 'शेख शाहजहां' और 'फाल्टा के पुष्पा' का उदाहरण देते हुए कहा कि कानून से कोई भी ऊपर नहीं है।  'पुलिस किसी को नहीं छोड़ेगी' मुख्यमंत्री ने कहा कि 'उनकी सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि भविष्य में कोई भी इस तरह की भाषा बोलने की हिम्मत न करे. सुवेंदु अधिकारी ने कहा, "संदेशखाली के शेख शाहजहां को याद कीजिए, उनके भड़काऊ बयानों का क्या अंजाम हुआ. 'फाल्टा के पुष्पा' को भी याद कीजिए, जिसने कहा था 'झुकेगा नहीं'. पुलिस किसी को नहीं छोड़ेगी।  मुख्यमंत्री ने कहा कि वह अगले सप्ताह मुर्शिदाबाद का दौरा करेंगे और यह साबित करेंगे कि कानून अपना काम करेगा. उन्होंने हुमायूं कबीर को चेतावनी देते हुए कहा, "अपनी बयानबाजी पर लगाम लगाइए. नफरत फैलाने वाला कोई भी बयान देने से पहले 25 बार सोचिए. पुलिस आपको नहीं छोड़ेगी।