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बेंगलुरु में पीएम मोदी की यात्रा से पहले हड़कंप, विस्फोटक सामग्री बरामद

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र की बेंगलुरु यात्रा के दौरान सुरक्षा एजेंसियों में उस समय हड़कंप मच गया, जब उनके निर्धारित रूट के पास से जिलेटिन की छड़ें बरामद हुईं. यह घटना शहर के बाहरी इलाके कनकपुरा रोड की बताई जा रही है, जहां प्रधानमंत्री को एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए गुजरना था. विस्फोटक सामग्री मिलने के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत अलर्ट मोड में आ गईं और पूरे इलाके में सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया. पुलिस ने इस मामले में एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लिया है. उससे फिलहाल गुप्त स्थान पर पूछताछ की जा रही है. शुरुआती जांच के बाद सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है ताकि प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान किसी भी तरह की चूक न हो. सुरक्षा जांच के दौरान मिलीं जिलेटिन स्टिक्स यह घटना रविवार सुबह की बताई जा रही है. बेंगलुरु के कग्गलीपुरा इलाके के पास थाथागुनी क्षेत्र में सुरक्षा जांच चल रही थी, तभी पुलिस को संदिग्ध विस्फोटक सामग्री दिखाई दी. यह स्थान उस मार्ग के बेहद करीब है, जहां से प्रधानमंत्री का काफिला गुजरने वाला था. इसी रास्ते से आगे Art of Living Foundation केंद्र भी पड़ता है, जहां प्रधानमंत्री का कार्यक्रम निर्धारित था. पुलिस सूत्रों के मुताबिक जिलेटिन की छड़ें एक पुल के पास कंपाउंड वॉल के किनारे फेंकी गई थीं. सूचना मिलते ही बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वायड को मौके पर बुलाया गया. इलाके की घेराबंदी कर पूरी जांच की गई. राहत की बात यह रही कि विस्फोटक सामग्री प्रधानमंत्री के काफिले के वहां पहुंचने से पहले ही बरामद कर ली गई. धमकी भरे फोन कॉल से शुरू हुआ पूरा मामला इस पूरे मामले की शुरुआत एक संदिग्ध फोन कॉल से हुई. जानकारी के अनुसार तड़के सुबह एक अज्ञात व्यक्ति ने स्थानीय पुलिस स्टेशन में कॉल कर दावा किया कि एचएएल एयरपोर्ट और आर्ट ऑफ लिविंग सेंटर के आसपास विस्फोट हो सकते हैं. फोन कॉल मिलते ही सुरक्षा एजेंसियां हरकत में आ गईं और बताए गए इलाकों में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया. हालांकि एचएएल एयरपोर्ट के आसपास कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली, लेकिन कनकपुरा रोड के पास जिलेटिन स्टिक्स बरामद होने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया. तकनीकी जांच और मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस ने एक संदिग्ध व्यक्ति को कोरामंगला इलाके के एक घर से हिरासत में लिया. पहले भी कर चुका है ऐसी हरकतें पूछताछ में सामने आया है कि पकड़ा गया व्यक्ति पहले भी वीआईपी दौरों के दौरान इसी तरह के धमकी भरे कॉल कर चुका है. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक अतीत में भी उसे हिरासत में लिया गया था, लेकिन उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने की बात सामने आने पर चेतावनी देकर छोड़ दिया गया था. हालांकि इस बार मामला ज्यादा गंभीर माना जा रहा है क्योंकि सिर्फ धमकी ही नहीं दी गई, बल्कि मौके से वास्तविक विस्फोटक सामग्री भी बरामद हुई है. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आरोपी ने यह विस्फोटक सामग्री कहां से हासिल की और उसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है. पुलिस कई एंगल से कर रही जांच मामले की जांच फिलहाल वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की निगरानी में चल रही है. डीसीपी स्तर के अधिकारी संदिग्ध और उसके परिवार के सदस्यों से पूछताछ कर रहे हैं. जांच एजेंसियों का मुख्य फोकस जिलेटिन स्टिक्स के स्रोत और उन्हें वहां रखने के उद्देश्य का पता लगाना है. इसके साथ ही पुलिस इस संभावना की भी जांच कर रही है कि कहीं यह किसी संगठित साजिश का हिस्सा तो नहीं था. अधिकारियों का कहना है कि मामले को बेहद संवेदनशील मानते हुए हर एंगल से जांच की जा रही है ताकि भविष्य में इस तरह की किसी सुरक्षा चूक को रोका जा सके.

H-1B वीजा नियम सख्त, संयुक्त राज्य अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों की सैलरी बढ़ेगी

नई दिल्ली  अमेरिका में नौकरी करने का सपना देखने वाले भारतीय पेशेवरों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। अमेरिकी श्रम विभाग ने एच1बी वीजा धारकों के न्यूनतम वेतन में 30 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव पेश किया है। प्रशासन का तर्क है कि यह कदम अमेरिकी नागरिकों के रोजगार और उनके वेतन हितों की रक्षा के लिए उठाया गया है, ताकि विदेशी कामगार कम वेतन पर उनकी जगह न ले सकें। श्रम विभाग के अनुसार, मौजूदा वेतन स्तर लगभग 20 साल पहले तय किए गए थे, जो आज के समय में प्रासंगिक नहीं रह गए हैं। नए प्रस्ताव 'इम्प्रू¨वग वेज प्रोटेक्शन' के तहत एंट्री-लेवल से लेकर अनुभवी पेशेवरों तक, सभी चार श्रेणियों के वेतन में वृद्धि की जाएगी। जहां पहले एंट्री-लेवल (लेवल-1) के लिए न्यूनतम वेतन 73,279 डालर था, उसे बढ़ाकर 97,746 डालर करने का प्रस्ताव है। इसी तरह, सबसे अनुभवी पेशेवरों (लेवल-4) का वेतन 1,44,202 डालर से बढ़कर 1,75,464 डालर हो सकता है। यह बदलाव न केवल एच1बी बल्कि एच1बी1, ई-3 और प्रोग्राम इलेक्ट्रानिक रिव्यू मैनेजमेंट (पीईआरएम) जैसे प्रोग्राम्स पर भी लागू होगा। इस प्रस्ताव ने उद्योग जगत में एक नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि वेतन में इस भारी बढ़ोतरी से छोटी कंपनियों के लिए विदेशी प्रतिभाओं, खासकर फ्रेशर्स को नियुक्त करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। इस प्रस्ताव पर 26 मई तक आम जनता की राय मांगी गई है, जिसके बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। गौरतलब है कि 2020 में भी ट्रंप प्रशासन ने बिना किसी पूर्व सूचना के ऐसे बदलाव की कोशिश की थी, जिसे कानूनी चुनौतियों के कारण रोकना पड़ा था। हाल ही में, सितंबर 2025 में एक राष्ट्रपति आदेश के जरिये एच1बी उम्मीदवारों पर एक लाख डालर का शुल्क भी लगाया गया था। अब वेतन वृद्धि का यह नया प्रस्ताव विदेशी पेशेवरों के लिए अमेरिका की राह को और भी चुनौतीपूर्ण बनाने वाला साबित हो सकता है।

सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट पर सख्त हुए सूर्यकांत, फेक न्यूज फैलाने वालों को दी चेतावनी

 नई दिल्ली भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सोशल मीडिया पर उनके नाम से प्रसारित किए जा रहे एक जातिवादी और भ्रामक बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इस तरह की पोस्ट को नीच, ढीठ और शरारतपूर्ण बताते हुए चेतावनी दी है कि ऐसा करने वालों के खिलाफ कानून की पूरी शक्ति के साथ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सीजेआई ने स्पष्ट किया कि देश के सर्वोच्च न्यायिक पद के साथ एक काल्पनिक उद्धरण जोड़ना न केवल बेईमानी है, बल्कि सामाजिक उकसावे की एक जानबूझकर की गई साजिश है। सीजेआई ने विशेष रूप से एक्स पर @UnreservedMERIT नामक एक अकाउंट द्वारा किए गए पोस्ट का उल्लेख किया। इस पोस्ट में हिंदी में एक बयान को CJI सूर्यकांत के नाम से प्रचारित किया जा रहा था, "अगर कोई समाज अपने लोगों के बीच से IAS, IPS, CJI, राष्ट्रपति और PM पैदा करने के बाद भी खुद को शोषित ही मानता है तो गलती ब्राह्मणों की नहीं बल्कि उसकी अपनी मानसिकता की है।" CJI का कड़ा रुख मुख्य न्यायाधीश ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इन दावों को पूरी तरह से निराधार, दुर्भावनापूर्ण और स्पष्ट रूप से गलत करार दिया। उन्होंने इसे संवैधानिक मूल्यों का अपमान बताते हुए कहा, "देश के चीफ जस्टिस के नाम से एक काल्पनिक उद्धरण बनाना सरासर बेईमानी, जानबूझकर किया गया सामाजिक उकसावा और संवैधानिक मूल्यों के प्रति अवमानना है। इस तरह का गैर-जिम्मेदाराना आचरण न्यायपालिका और कानून के शासन में जनता के विश्वास की नींव को कमजोर करता है।" CJI ने सभी जिम्मेदार नागरिकों, मीडिया संगठनों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों से आग्रह किया है कि वे इस तरह की झूठी और मनगढ़ंत सामग्री को साझा या प्रचारित करने से बचें। उन्होंने चेतावनी दी कि यह फर्जी टिप्पणी उनके विचारों और चरित्र को नहीं दर्शाती है। कानून की पूरी ताकत का होगा सामना बयान में अंत में यह स्पष्ट किया गया कि जो लोग इस तरह की फर्जी खबरों और भ्रामक टिप्पणियों को फैला रहे हैं, उन्हें कानून की पूरी ताकत का सामना करना होगा। CJI के कार्यालय ने इस मामले को गंभीर मानहानि और न्यायिक कार्यालय की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला कृत्य माना है।

विजय बने मुख्यमंत्री, तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन पर पीएम मोदी ने दी बधाई

तमिलनाडु तमिलनाडु में 10 मई से विजय थलापति का राज शुरू हो चुका है। विजय के ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें तमिलनाडु का पद भार ग्रहण करने के लिए बधाई दी और साथ ही केंद्र सरकार की तरफ से पूरी मदद करने का भरोसा भी दिलाया। उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, "श्री सी. जोसेफ विजय को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर बहुत बधाई। उनके आगामी कार्यकाल के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं। केंद्र सकार तमिलनाडु सरकार और वहां के लोगों की भलाई के लिए लगातार काम करती रहेगी।"    तमिलनाडु की नई नवेली सरकार को बधाई देने के साथ ही एक दूसरे कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी कांग्रेस को एक परजीवी पार्टी बताते हुए अन्य विपक्षी पार्टियों को चेताया भी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस दशकों तक डीएमके के साथ खड़ी रही, लेकिन हवा बदलते ही उसने पाला भी बदल लिया। कांग्रेस को लेकर चेताया कर्नाटक में एक कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने कहा, "तमिलनाडु की मौजूद स्थिति को देखिए। वहां पर पिछले पच्चीस से तीस वर्षों तक कांग्रेस और डीएमके के बीच घनिष्ठ संबंध रहे। डीएमके के साथ गठबंधन ने कई बार कांग्रेस को संकटों से उबारा। वास्तव में, 2014 से पहले दस वर्षों तक कांग्रेस का जो शासन चला, वह काफी हद तक डीएमके के समर्थन के कारण ही कायम रहा। लेकिन जैसे ही राजनीतिक हवा ने रुख बदला, कांग्रेस पार्टी ने डीएम के को धोखा दे दिया। सत्ता की लालसा में चूर कांग्रेस ने पहले ही मौके पर डीएमके को छुरा घोंपा। अब कांग्रेस को राजनीतिक रूप से प्रासंगिक बने रहने के लिए एक और पार्टी की जरूरत है, जिसके सहारे वह आगे बढ़ सके।" विजय की ऐतिहासिक शपथ इससे पहले, अभिनेता से राजनेता बने थलापति विजय ने रविवार सुबह चेन्नई के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में हुए एक भव्य कार्यक्रम में पद और गोपनीयता की शपथ ली। उनके साथ ही नौ नए मंत्रियों ने भी शपथ ली। इस दौरान हजारों की संख्या में समर्थक वहां मौजूद थे। लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी वहां पर पहुंचे। शपथ के साथ ही विजय तमिलनाडु के नौवें मुख्यमंत्री बन चुके हैं। अपने पहले ही भाषण में उन्होंने साफ कर दिया कि सत्ता का एक ही केंद्र होगा, और वह स्वयं विजय ही होंगे। गौरतलब है कि हाल ही में संपन्न तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और 234 सदस्यीय विधानसभा में 108 सीटें जीतीं। बाद में पार्टी को विदुथलाई चिरुथाइगल काची (VCK) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) का समर्थन मिला, जिससे उसकी सीटों की संख्या 120 हो गई और उसने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया। विजय का शपथ ग्रहण तमिलनाडु में एक बड़ा राजनीतिक बदलाव है, क्योंकि लगभग 70 वर्षों में यह पहली बार है कि डीएमके-एआईएडीएमके गठबंधन से बाहर की कोई सरकार राज्य में सत्ता में आई है।

असम में NDA की बड़ी जीत: 102 सीटों के साथ फिर सत्ता में वापसी, हिमंता बिस्वा सरमा बने विधायक दल के नेता

गुवाहाटी असम में हिमंता बिस्वा सरमा लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनेंगे. हिमंता बिस्वा सरमा को बीजेपी विधायक दल का नेता चुन लिया गया है.  गुवाहटी में आयोजित विधायक दल की बैठक में केंद्रीय पर्यवेक्षक जेपी नड्डा ने हिमंता के नाम की घोषणा की. अब 12 मई को हिमंता बिस्वा सरमा का गुवाहटी में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. असम में विधायक दल के लिए आए 8 प्रस्ताव विधायक दल की बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा- विधायक दल के नेता के लिए कुल 8 प्रस्ताव आए. पहला प्रस्ताव रंजीत कुमार दास, दूसरा प्रस्ताव विश्वजीत, तीसरा प्रस्ताव अंजता नियो, चौथा प्रस्ताव रामेश्वर तेली, पांचवां प्रस्ताव राजदीप राय, छठा प्रस्ताव अशोक सिंघल, सातवां प्रस्ताव पीयूष हजारिका, और आठवां प्रस्ताव चक्रधर गोगोई की तरह से आया. सभी 8 प्रस्तावों में केवल हिमंता का नाम जेपी नड्डा ने आगे कहा कि सभी 8 प्रस्तावों को हमारे दो-दो विधायकों ने समर्थन दिया है. हमारे एनडीए के सभी विधायक यहां उपस्थित है. अतुल बोरा ने भी अपना प्रस्ताव दिया है. सहयोगी दलों के नेता और विधायकों ने भी समर्थन दिया है. इन सभी प्रस्तावों में एक ही नाम है. हिमंता बिस्वा सरमा. ऐसे में हिमंता बिस्वा सरमा को विधायक दल का नेता चुना गया. असम में हिमंता ने पूरे चुनाव की बागडोर संभाली थी. 126 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी ने अकेले दम पर 82 सीटें जीती हैं. जबकि सहयोगी दलों को मिलकार 102 सीटों पर एनडीए ने जीत दर्ज की है.

तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव: द्रविड़ दलों का 50 साल पुराना दबदबा खत्म, नई सत्ता की शुरुआत

 तमिलनाडु तमिलनाडु की राजनीति में रविवार को एक नया युग की शुरूआत हो गई है। 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) के संस्थापक जोसेफ विजय ने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। यह राज्य में पहली बार है जब किसी गैर-द्रविड़ पार्टी ने सरकार बनाई है। नई सरकार के गठन के साथ ही डीएमके और एआईएडीएमके का दशकों पुराना दबदबा खत्म हो गया है। विजय के साथ में  9 और मंत्रियों ने सपथ ली है। अब विजय को 13 मई तक विधानसभा में अपना बहुमत साबित करना होगा। विजय के साथ जिन नौ मंत्रियों ने सपथ ली है आइये उनके बार में हम आपको बताते है। एन आनंद 61 साल के एन आनंद को लोग 'बुसी आनंद' के नाम से भी जानते हैं। वह विजय के सबसे भरोसेमंद साथी माने जाते हैं। साल 2006 में वह पुडुचेरी से विधायक चुने गए थे। अब उन्होंने चेन्नई की टी नगर सीट से जीत हासिल की है। वह टीवीके के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं और पहले विजय रसिगर मंदरम के प्रमुख  के तौर पर काम कर चुके हैं। आधव अर्जुना बास्केटबॉल खिलाड़ी और बिजनेसमैन रहे आधव अर्जुना अब राजनीति में सक्रिय हैं। वह बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष भी हैं। वह वीसीके पार्टी छोड़कर टीवीके में शामिल हुए थे। पार्टी के महासचिव के रूप में उन्होंने चुनाव अभियान में बड़ी भूमिका निभाई और चेन्नई की विल्लिवाक्कम सीट से जीत दर्ज की। राजमोहन अरुमुगम डिजिटल प्लेटफॉर्म 'पुट चटनी' से मशहूर हुए राजमोहन ने युवाओं और नए वोटरों को पार्टी से जोड़ने में मदद की। प्रचार सचिव के तौर पर उन्होंने सोशल मीडिया और यूट्यूब वीडियो के जरिए पार्टी की नीतियों को लोगों तक पहुँचाया। उनके मजाकिया अंदाज और रील्स को युवाओं ने काफी पसंद किया। सी टी आर निर्मल कुमार 44 साल के निर्मल कुमार टीवीके की डिजिटल रणनीति के मुख्य चेहरा हैं। उनके पास बीजेपी और एआईएडीएमके के सोशल मीडिया सेल में काम करने का अनुभव है। उन्होंने व्हाट्सएप और मीम नेटवर्क का एक बड़ा जाल तैयार किया, जिससे 2025 और 2026 के दौरान डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पार्टी का दबदबा बना रहा। के जी अरुणराज पूर्व आईआरएस अधिकारी और डॉक्टर अरुणराज ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेकर टीवीके जॉइन की। वह पार्टी में प्रचार और नीति के महासचिव हैं। उन्होंने तमिलनाडु, बिहार और महाराष्ट्र में आयकर विभाग में सेवा दी है। उन्होंने तिरुचेंगोडु सीट से चुनाव जीता है। के ए सेंगोट्टैयन 50 साल से ज्यादा का राजनीतिक अनुभव रखने वाले सेंगोट्टैयन पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेता हैं। वह एआईएडीएमके के दिग्गज नेता रहे हैं और नवंबर 2025 में टीवीके में शामिल हुए। उन्होंने गोबीचेट्टीपलयम सीट से नौवीं बार जीत हासिल की है। वह पार्टी की कार्यकारी समिति के मुख्य समन्वयक हैं। कीर्तना एस कीर्तना एस विजय की कैबिनेट में फिलहाल इकलौती महिला मंत्री हैं। चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनके पास 22.6 लाख रुपये की संपत्ति और 12.8 लाख रुपये की देनदारी है। उनकी सालाना कमाई 6.4 लाख रुपये है और उन पर कोई भी आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। पी वेंकटरमणन 48 साल के वेंकटरमणन ने मायलापुर सीट से 70,070 वोटों के साथ जीत दर्ज की है। वह पोस्ट ग्रेजुएट हैं और उन पर कोई आपराधिक केस नहीं है। उनके पास कुल 5.4 करोड़ रुपये की संपत्ति है, जिसमें 3.2 करोड़ रुपये की चल संपत्ति शामिल है। केटी प्रभु पेशे से डेंटिस्ट डॉ. केटी प्रभु ने शिवगंगा की करैकुडी सीट से चुनाव जीता है। वह पोस्ट ग्रेजुएट हैं और उनकी कुल संपत्ति 11.4 करोड़ रुपये है। उनकी सालाना आय 54.6 लाख रुपये है और उन पर 3.3 करोड़ रुपये की देनदारी है।

कनाडा भेजे जा रहे थे 89 हथियार, अमेरिकी एजेंसियों ने पकड़ा बड़ा तस्करी नेटवर्क

नई दिल्ली संयुक्त राज्य अमेरिका से कनाडा में 89 हथियार की तस्करी के प्रयास में एक पाकिस्तानी नागरिक सहित तीन लोगों पर अमेरिका में आरोप तय किए गए हैं। इन बरामद हथियारों में से कम से कम 17 हथियार चोरी के बताए जा रहे हैं। दक्षिणी न्यूयॉर्क जिले के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका के अटॉर्नी कार्यालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, यह गिरफ्तारियां गुरुवार को स्टेट रूट 90 पर न्यूयॉर्क स्टेट पुलिस द्वारा की गई एक वाहन चेकिंग के दौरान हुईं। अधिकारियों ने बताया कि पूछताछ के दौरान वाहन में सवार लोगों के असंगत और गोलमोल जवाबों से पुलिस को शक हुआ, जिसके बाद वाहन की तलाशी ली गई। अधिकारियों ने हथियारों का एक बड़ा जखीरा बरामद किया, जिसमें कार की पिछली सीट के नीचे छिपाए गए कई अतिरिक्त हथियार भी शामिल थे। फर्जी दस्तावेज वाले आरोपियों की पहचान आरोपियों की पहचान 22 वर्षीय कनाडाई नागरिक मलिक ब्रोमफील्ड, 25 वर्षीय पाकिस्तानी नागरिक फैजान अली और 22 वर्षीय कमाल सलमान के रूप में हुई है। तीनों को बाद में व्हाइट प्लेन्स में संघीय मजिस्ट्रेट जज के सामने पेश किया गया, जहां से उन्हें हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया। अधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि फैजान अली के पास किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर जारी किया गया एक एक्सपायर पाकिस्तानी राष्ट्रीय ड्राइविंग परमिट मौजूद था। 15 साल तक की हो सकती है जेल आरोपियों पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनमें अमेरिका से हथियारों की तस्करी, हथियारों का बिना लाइसेंस व्यापार, चोरी के हथियारों का अंतरराज्यीय परिवहन और आग्नेयास्त्रों को अवैध रूप से अपने पास रखना शामिल है। इसके अलावा, मलिक ब्रोमफील्ड पर एक विदेशी नागरिक द्वारा अवैध रूप से हथियार रखने का अतिरिक्त आरोप भी लगाया गया है। अभियोजकों के अनुसार, इन आरोपों के तहत 5 से 15 साल तक की अधिकतम वैधानिक जेल की सजा का प्रावधान है, हालांकि अंतिम सजा का निर्धारण अदालत द्वारा किया जाएगा। इन गिरफ्तारियों की आधिकारिक घोषणा अमेरिकी अटॉर्नी जे क्लेटन, एफबीआई के असिस्टेंट डायरेक्टर इन चार्ज जेम्स सी. बार्नकल जूनियर और एटीएफ (ATF) के स्पेशल एजेंट इन चार्ज ब्रायन डिगिरोलामो ने की। क्या है पूरा मामला? अमेरिकी अटॉर्नी क्लेटन ने कहा कि जैसा कि आरोप है, प्रतिवादियों को देश से बाहर तस्करी करने के लिए 80 से अधिक बंदूकों को ले जाते हुए पकड़ा गया है, जिनमें शॉर्ट-बैरल राइफलें और चोरी के हथियार शामिल हैं। वहीं, बार्नकल ने कहा कि दो विदेशी नागरिकों सहित इन आरोपियों ने कथित तौर पर हथियारों को कनाडा ले जाने का प्रयास करके सार्वजनिक सुरक्षा को भारी खतरे में डाला है। डिगिरोलामो ने अवैध हथियारों की तस्करी से पैदा होने वाले खतरों के बारे में भी कड़ी चेतावनी दी। अधिकारियों ने बताया कि इस जांच में एनवाईएसपी ट्रूप एफ कम्युनिटी स्टेबिलाइजेशन यूनिट, एफबीआई की न्यूयॉर्क हडसन वैली सेफ स्ट्रीट्स टास्क फोर्स और शराब, तंबाकू, आग्नेयास्त्र व विस्फोटक ब्यूरो का संयुक्त प्रयास शामिल था।

तमिलनाडु में नए दौर की शुरुआत: विजय का पहला आदेश बना चर्चा का केंद्र

तमिलनाडु  तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में रविवार को शपथ लेने के बाद विजय ने अपने पहले आदेश पर हस्ताक्षर किए। इस आदेश में 200 यूनिट मुफ्त बिजली, नशीली दवाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने जैसे अहम फैसले शामिल हैं। मुख्यमंत्री के रूप में अपने पहले आधिकारिक आदेश में (टीवीके) के प्रमुख विजय ने राज्य में 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने की घोषणा की। इसके साथ ही, नशीली दवाओं के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक हेल्पलाइन के साथ विशेष बल के गठन का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका पूरा ध्यान शिक्षा, स्वास्थ्य और पानी जैसे बुनियादी मुद्दों पर रहेगा। विजय ने जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि किसानों और मछुआरों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। सब कुछ अच्छा होगा। भाषण से जीता जनता का दिल विजय ने अपने जोशीले और भावुक भाषण की शुरुआत अपने चिर-परिचित तमिल वाक्यांश एन नेंजिल कुदियिरुक्कुम से की। वह अपने अभिनय करियर के दौरान भी अक्सर प्रशंसकों को संबोधित करने के लिए इस वाक्य का इस्तेमाल करते रहे हैं। यह वीडियो भी देखें अपने संघर्ष को याद करते हुए उन्होंने कहा कि एक सहायक निर्देशक का बेटा अब मुख्यमंत्री बन गया है। मैं गरीबी और भूख को करीब से जानता हूं, मैं किसी शाही परिवार से नहीं आता। मैंने जीवन में कई कठिनाइयों का सामना किया है और कई लोगों ने मुझे अपमानित भी किया। मैं आपके बेटे, आपके भाई जैसा हूं। आपने मुझे अपने दिल में जगह दी है और मुझे स्वीकार किया है। विपक्ष पर साधा निशाना जनता से झूठे वादे न करने का आश्वासन देते हुए विजय ने पिछली सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि DMK सरकार ने राज्य का खजाना पूरी तरह खाली कर दिया है और हमने 10 लाख करोड़ रुपये के भारी कर्ज के साथ सत्ता संभाली है। हम जनता के पैसे से एक फूटी कौड़ी भी नहीं लेंगे और न ही किसी को राज्य को लूटने की इजाजत देंगे। राज्य में वास्तविक, धर्मनिरपेक्ष और सामाजिक न्याय के एक नए युग की शुरुआत का वादा करते हुए, मुख्यमंत्री विजय ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रवीण चक्रवर्ती, वामपंथी नेता एम.ए. बेबी सहित अपने सभी राजनीतिक सहयोगियों का उनके समर्थन के लिए धन्यवाद दिया।

जमात नुसरत अल-इस्लाम वल मुस्लिमीन ने ली हमलों की जिम्मेदारी, राजधानी बामको पर भी मंडराया खतरा

नई दिल्ली माली से जिहादी हमलों की खबर सामने आ रही है। पिछले कुछ दिनों में हुए अलग-अलग हमलों में कम से कम 70 लोग मारे गए हैं। हालांकि, कुछ स्थानीय अधिकारियों का अनुमान है कि मरने वालों की संख्या 80 से अधिक हो सकती है। इन हमलों की जिम्मेदारी अल-कायदा से जुड़े संगठन जमात नुसरत अल-इस्लाम वल मुस्लिमीन (JNIM) ने ली है। संगठन ने शुक्रवार को कई हमले किए। इससे पहले बुधवार को गांवों पर हुए छापों में कम से कम 30 लोगों की जान चली गई थी। माली के सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, JNIM उन गांवों को निशाना बना रहा है जिन्होंने स्थानीय समझौतों पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था। इस त्रासदी के बाद स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा है। समाचार एजेंसी एएफपी (AFP) के अनुसार, एक स्थानीय युवा नेता ने सेना पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, "हमारे दिलों से खून बह रहा है। पास में सेना की टुकड़ियों के होने और बार-बार मदद की गुहार लगाने के बावजूद उन्होंने हस्तक्षेप नहीं किया।" जेल पर हमला यह हिंसा उस घटना के बाद और तेज हुई है, जिसमें हथियारबंद लड़ाकों ने राजधानी बामको से लगभग 60 किमी दूर स्थित केनीरोबा सेंट्रल जेल पर हमला बोल दिया था। यह एक नवनिर्मित जेल है जिसमें लगभग 2,500 कैदी बंद हैं। इनमें कम से कम 72 ऐसे कैदी शामिल हैं जिन्हें माली अधिकारियों ने अत्यधिक खतरनाक श्रेणी में रखा है। बामको की घेराबंदी की धमकी हालात तब और चिंताजनक हो गए जब JNIM ने पिछले हफ्ते घोषणा की कि वह राजधानी बामको की ओर जाने वाली सड़कों पर चेकपॉइंट स्थापित कर शहर की पूर्ण घेराबंदी करने का इरादा रखता है। सैन्य स्थिति और गठबंधन माली की सेना के कमांडर जिब्रिला मैगा ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वीकार किया कि खतरा अभी भी मौजूद है। 25-26 अप्रैल से हमलों में तेजी आई है, जब JNIM ने कथित तौर पर तुआरेग-बहुल अजावाद लिबरेशन फ्रंट (FLA) के साथ हाथ मिला लिया। अप्रैल में हुए बड़े हमलों में माली के रक्षा मंत्री सादियो कैमारा मारे गए थे और इसके बाद माली के नेतृत्व के साथ खड़े रूसी सैनिकों को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण उत्तरी शहर किडल से पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा था। फिलहाल, माली की सेना का दावा है कि वह विद्रोहियों की गतिविधियों को बाधित करने के लिए सक्रिय रूप से अभियान चला रही है, लेकिन जमीनी हकीकत और बढ़ती मौतें सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रही हैं।

टॉप 10 बंदरगाहों में चीन का दबदबा, भारत की मौजूदगी गायब

नई दिल्ली  आज समुद्री बंदरगाह वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं, क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर रोजमर्रा के सामान तक इन्हीं के जरिए दुनिया भर में पहुंचते हैं. वैश्विक समुद्री व्यापार के मोर्चे पर एक चौंकाने वाली तस्वीर उभर रही है. जो भारत के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है. साल 2024 के आंकड़े बताते हैं कि दुनिया के सबसे व्यस्त बंदरगाहों की सूची में चीन ने एकतरफा दबदबा बना लिया है. खास बात यह है कि दुनिया के सबसे बिजी पोर्ट्स की टॉप 20 लिस्‍ट में भारत का एक भी बंदरगाह शामिल नहीं है।  विजुएल कैपिटेलिस्‍ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 में दुनिया भर के बंदरगाहों ने कुल 743 मिलियन शिपिंग कंटेनरों (TEUs) की प्रोसेसिंग की. इस कुल ट्रैफिक का आधे से ज्यादा हिस्सा केवल शीर्ष 20 बंदरगाहों से होकर गुजरा. इन 20 बंदरगाहों में सबसे ज्‍यादा नाम चाइनीज पोर्ट्स के हैं। दुनिया के 10 सबसे व्यस्त बंदरगाहों में से 7 अकेले चीन के पास हैं. वैश्विक कंटेनर ट्रैफिक में चीन की हिस्सेदारी 40% से भी अधिक हो चुकी है. दुनिया के सबसे बिजी 20 बंदरगाहों की सूची में शंघाई बंदरगाह 51.5 मिलियन TEUs की प्रोसेसिंग के शीर्ष पर है। सिंगापुर बंदरगाह ने 2024 में 41.1 मिलियन TEUs का प्रबंधन कर दूसरा स्‍थान हासिल किया. यह शंघाई की तुलना में 10 मिलियन से भी कम है. तीसरे स्थान पर चीन का निंगबो-झोउशान पोर्ट है, जिसने 39.3 मिलियन TEUs का ट्रैफिक संभाला. यानी टॉप 3 में से दो पायदान केवल चीन के पास हैं।  चीन का शेनझेन 33.4 मिलियन TEUs के साथ चौथे और क़िंगदाओ पोर्ट 30.9 मिलियन TEUs के साथ पांचवें स्थान पर काबिज है. छठे नंबर पर भी चीन का ही ग्वांगझोउ बंदरगाह है, जिसने 26.1 मिलियन TEUs का व्यापार संभाला। सातवें स्थान पर दक्षिण कोरिया का बुसान पोर्ट जरूर आता है, लेकिन आठवें स्थान पर फिर से चीन का तियानजिन बंदरगाह 23.3 मिलियन TEUs के साथ अपनी जगह पक्की कर चुका है. मध्य पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ देशों ने भी इस शीर्ष सूची में अपनी जगह बनाई है, लेकिन उनकी संख्या चीन के मुकाबले नगण्य है।  संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का जेबेल अली बंदरगाह 15.5 मिलियन TEUs के साथ नौवें और मलेशिया का पोर्ट क्लांग 14.6 मिलियन TEUs के साथ दसवें स्थान पर है।  इन देशों की मौजूदगी के बावजूद, पहले से दसवें पायदान तक चीन की सात बंदरगाहों की मौजूदगी वैश्विक समुद्री मार्ग पर उसके 'कब्जे' को ही बयां करती है।  यूरोप के गौरव माने जाने वाले बंदरगाह भी अब एशियाई बंदरगाहों की तुलना में काफी पीछे छूटते नजर आ रहे हैं. नीदरलैंड का रॉटरडैम पोर्ट 13.8 मिलियन TEUs के साथ 11वें स्थान पर है, जबकि इसके ठीक बाद चीन का हांगकांग बंदरगाह 13.7 मिलियन TEUs के साथ 12वें स्थान पर मौजूद है. बेल्जियम का एंटवर्प-ब्रुग्स पोर्ट 13.5 मिलियन TEUs के साथ 13वें पायदान स्‍थान पर है।  चीन का शियामेन बंदरगाह 12.3 मिलियन TEUs के साथ 14वें स्थान पर है. मलेशिया का तंजुंग पेलेपास पोर्ट भी इतने ही ट्रैफिक के साथ बराबरी पर खड़ा है. अमेरिका, जो दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने का दावा करता है, उसका लॉस एंजेलिस बंदरगाह मात्र 10.3 मिलियन TEUs के साथ 16वें स्थान पर है।  मोरक्को के टैंगर-मेड पोर्ट ने 10.2 मिलियन TEUs के साथ टॉप पोर्ट्स की सूची में 17वें स्थान पर काबिज है. इसके ठीक बाद फिर से चीन का ताइकांग बंदरगाह 9.7 मिलियन TEUs के साथ 18वें पायदान पर खड़ा है. अमेरिका का लॉन्ग बीच पोर्ट 9.6 मिलियन TEUs के साथ 19वें और और थाईलैंड का लैम चाबांग बंदरगाह 20वें स्थान पर हैं।  भारत के किसी भी बंदरगाह का नाम टॉप 20 की सूची में शामिल न होना यह दर्शाता है कि इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स के मामले में अभी हमें एक लंबी दूरी तय करनी है.  भारत अपने बंदरगाहों के आधुनिकीकरण पर काम कर रहा है, लेकिन चीन जिस गति से समंदर पर अपनी बादशाहत कायम कर चुका है, उससे मुकाबला करना एक बड़ी चुनौती होगी।