samacharsecretary.com

व्हाइट हाउस गोलीबारी के बाद Donald Trump बोले- United States Secret Service ने बहादुरी से संभाला हालात

वाशिंगटन. ईरान युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा में बड़ी चूक का मामला सामने आया है। वाइट हाउस में करेंस्पॉन्डेंट डिनर के दौरान उनके कक्ष के बाहर ही गोलीबारी होने लगी। इसके बाद सिक्रेट सर्विस ने तत्काल डोनाल्ड ट्रंप और अन्य लोगों को बाहर निकाला और सुरक्षित स्थान पर ले गए। बताया गया है कि इस मामले में एक संदिग्ध को पकड़ लिया है और किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं है। घटना के तुरंत बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर घटना की जानकारी देते हुए सीक्रेट सर्विस और एजेंसियों को धन्यवाद कहा है। बाहर निकालते वक्त गिर गए डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि डीसी में शाम के वक्त जो कुछ हुआ उसमें सीक्रेट सर्विस और अन्य एजेंसियों ने शानदार काम किया। उन्होंने तुरंत बहादुरी दिखाई। गोली चलाने वाले को पकड़ लिया गया है। एजेंसियां इस मामले में जल्द ही निर्णय लेंगी। इस घटना की वजह से इस शाम की सारी योजनाएं बदल गई हैं। बता दें कि सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो के मुताबिक जब डोनाल्ड ट्रंप को सीक्रेट सर्विस के एजेंट बाहर निकाल रहे थे, उस वक्त वह गिर गए। उन्हें संभाला गया और फिर सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। मेज के नीचे छिपे मेहमान रिपोर्ट के मुताबिक गोलीबारी की आवाज आते ही सुरक्षा एजेंसियों ने मेहमानों से मेज के नीचे छिपने को कहा। इसके बाद पूरे बैंक्वेट हॉल को घेर लिया गया। 'रास्ते से हटिए, छिप जाइए' जैसी आवाजें सुनने को मिल रही थीं। बता दें कि वाइट हाउस में राष्ट्रपति पत्रकारों के साथ डिनर का आयोजन करते हैं और इस दौरान उनके बीच संवाद भी होता है। हालांकि इस तरह की घटना की वजह से पूरे वाइट हाउस में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। अभी यह सामने नहीं आया है कि गोली चलाने वाला शख्स कौन था और उसका उद्देश्य क्या था। क्या है सीक्रेट सर्विस बता दें कि अमेरिका के राष्ट्रपति की सुरक्षा की जिम्मेदारी यूनाइटेड स्टेट्स सीक्रेट सर्विस (USSS) के पास रहता है। यह एक संघीय एजेंसी है जो कि होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट के अंडर आती है। इसकी शुरुआत 1865 में हुई थी। पहल यह नकली नोटों पर विराम लगाने का काम करती थी हालांकि 1901 में तत्कालीनी राष्ट्रपति विलियम मैकिन्ले की हत्या के बादइसे राष्ट्रपति की सुरक्षा का कार्यभार सौंप दिया गया। सीक्रेट सर्विस राष्ट्रपति, उनके परिवार, राष्ट्रपति उम्मीदवार, विदेशी राष्ट्राध्यक्षों की सुरक्षा में तैनात रहती है। सीक्रेट सर्विस के एजेंट सुरक्षा में हमेशा तैनात रहते हैं। राष्ट्रपति की विदेश यात्रा के दौरान भी सीक्रेट सर्विस के एजेंट उसके साथ जाते हैं। राष्ट्रपति के पहुंचने से पहले ही एजेंट सक्रिय हो जाते हैं और हर संभावित खतरे की जानकारी इकट्ठी करते हैं। इसके बाद ही राष्ट्रपति उस देश की यात्रा करते हैं।

अमेरिका-ईरान युद्ध का असर: 3 करोड़ लोग होंगे गरीब, पूरी दुनिया में मचेगी हलचल

  नई दिल्ली अमेरिका-ईरान के बीच 50 दिन से ज्यादा समय चले युद्ध में हालांकि फिलहाल सीजफायर चल रहा है, लेकिन ग्लोबल टेंशन बरकरार है. इस जंग का असर दुनिया के तमाम देशों में तेल-गैस संकट (Oil-Gas Crisis) के रूप में देखने को मिला, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट बंद हो गया. इन सबसे बीच संयुक्त राष्ट्र के विकास प्रमुख की ओर से बड़ी चेतावनी दी गई है, जिसमें कहा गया है कि US-Iran War से पैदा हो रहे हालातों के चलते करीब 3 करोड़ लोग गरीबी में जा सकते हैं. रिपोर्ट में इसके पीछे की बड़ी वजहों का भी जिक्र किया गया है।  साल के अंत तक दिखेगा बड़ा असर रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र के ग्रोथ चीफ अलेक्जेंडर डी क्रू ने मिडिल ईस्ट के खतरनाक प्रभाव की तरफ फोकस किया है और बड़ी चेतावनी जारी की है. उन्होंने कहा है कि US-Iran War के चलते होर्मुज स्ट्रेट से मालवाहक जहाजों के लगातार फंसने  के कारण सिर्फ ईंधन ही नहीं, बल्कि फर्टिलाइजर्स की सप्लाई भी प्रभावित हुई है, जो कि एग्रीकल्चर प्रोडक्शन पर सीधे असर डाल रही है. इस साल के अंत में फसलों की पैदावार पर इसका असर साफ देखने को मिलेगा।  क्रू ने आगे कहा कि भले ही अमेरिका और ईरान का ये युद्ध कल ही खत्म क्यों न हो जाए, लेकिन इसके पहले से ही दिख रहे प्रभाव आगे भी जारी रहेंगे, जो दुनिया के 30 मिलियन या 3 करोड़ से ज्यादा लोगों को गरीबी में धकेल सकते हैं. इस संघर्ष के अप्रत्यक्ष प्रभावों से आने वाले महीनों में खाद्य असुरक्षा बढ़ने की आशंका बनी हुई है।  ग्लोबल फूड क्राइसिस का डर  संयुक्त राष्ट्र के फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन (FAO) ने भी बीते सप्ताह कुछ ऐसी ही चेतावनी जारी की थी और इसमें कहा गया था कि मिडिल ईस्ट युद्ध के चलते होर्मुज स्ट्रेट में लंबे समय तक चलने वाला संकट ग्लोबल फूड क्राइसिस (Global Food Crisis) का कारण बन सकता है।  एफएओ के मुताबिक, भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका, सोमालिया, सूडान, तंजानिया, केन्या और मिस्र जैसे देशों में सबसे ज्यादा जोखिम नजर आ रहा है. रिपोर्ट में कहा गया कि कुछ ही महीनों में खाद्य असुरक्षा का कोहराम देखने को मिलने लगेगा और सबसे बड़ी बात ये है कि इसके बारे में ज्यादा कुछ कर भी नहीं सकते हैं।  GDP पर दबाव, दुनिया संकट में संयुक्त राष्ट्र विकास (UNDP) चीफ डी क्रू का कहना है कि Iran War के असर के चलते पहले ही ग्लोबल जीडीपी का 0.5% से 0.8% तक नष्ट हो चुका है. उन्होंने कहा कि जिन चीजों को बनने में दशकों का समय लग जाता है, उन्हें नष्ट होने के लिए आठ हफ्ते चलता यूएस-ईरान युद्ध ही काफी रहा।  बीते 28 फरवरी इस युद्ध की शुरुआत हुई थी, जबकि अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर स्ट्राइक शुरू की थी और ईरान के पलटवार के बाद दुनिया की लाइफलाइन वाले जाने वाले तेल-गैस रूट अवरुद्ध हो गई और एनर्जी समेत जरूरी सामग्रियों की सप्लाई चेन टूट सी गई। 

Donald Trump की मौजूदगी में फायरिंग, United States Secret Service की सतर्कता से टला बड़ा हादसा

वाशिंगटन. वाशिंगटन हिल्टन होटल में शनिवार की रात 8:45 बजे (अमेरिकी समय के अनुसार) के करीब कॉरेस्पोंडेंट डिनर कार्यक्रम के दौरान जोरदार फायरिंग की आवाज सुनाई दी। इस कार्यक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी शामिल हुए थे। इस घटना की जानकारी मिलते ही राष्ट्रपति सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे सीक्रेट सर्विस के एजेंट ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया और अमेरिकी राष्ट्रपति को सुरक्षित वहां से बाहर निकाल लिया। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल किसी के घायल होने की कोई सूचना नहीं है। इस घटना पर राष्ट्रपति ट्रंप की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। इस घटना के करीब एक घंटे बाद उन्होंने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया कि एक शूटर को पकड़ लिया गया है। ट्रंप ने आगे कहा, "डीसी में आज की शाम काफी गहमागहमी भरी रही। सीक्रेट सर्विस और कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने शानदार काम किया है।" रॉयटर्स के लिए काम करने वाले एक फ्रीलांस फोटोग्राफर ने आंखोदेखा हाल बताते हुए कहा कि होटल के भीतर फायरिंग की चार से छह राउंड आवाज सुनाई दी। हालांकि ये आवाजें मुख्य डाइनिंग हॉल के बिल्कुल पास नहीं थीं, लेकिन इनकी तीव्रता ने सभी को चौंका दिया। कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि होटल परिसर के भीतर एक सशस्त्र हमलावर देखा गया था, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभाल लिया। जैसे ही आवाजें सुनाई दीं, मेहमानों ने चिल्लाना शुरू कर दिया। "गेट डाउन, गेट डाउन!" हॉल में मौजूद लगभग 2,600 मेहमान अपनी मेजों के नीचे छिप गए। इस घटना के बाद डोनाल्ड ट्रंप की पत्नी और अमेरिका की पर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को भी कार्यक्रम स्थल से सुरक्षित निकाल लिया गया। सुरक्षाकर्मियों द्वारा मंच से हटाए जाने से कुछ ही देर पहले मेलानिया ने भीड़ में किसी बात पर प्रतिक्रिया दी और उनके चेहरे पर चिंता के भाव दिखाई दिए। The empty stage is seen after President Donald Trump and other top leaders were evacuated from an annual dinner of White House correspondents on Saturday night(, April 25, 2026, in Washington/ AP Photo/Zeke Miller) प्रेस पूल ने सीक्रेट सर्विस के हवाले से बताया कि ट्रंप के डिनर के दौरान हुई कथित गोलीबारी के बाद एक संदिग्ध को हिरासत में ले लिया गया। यह सुरक्षा घटना उस कमरे के बाहर हुई, जहां राष्ट्रपति ट्रंप और अन्य अधिकारी डिनर कर रहे थे। सीक्रेट सर्विस और अन्य अधिकारी बैंक्वेट हॉल पहुंचे। सैकड़ों मेहमान मेजों के नीचे छिपकर अपनी जान बचाने की कोशिश करने लगे। क्या होता है कॉरेस्पोंडेंट डिनर? वाशिंगटन डीसी में हर साल कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर का आयोजन किया जाता है, जिसकी मेज़बानी वाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन करता है। इस समारोह में पत्रकार, राजनेता और हॉलीवुड की मशहूर हस्तियां एक साथ जुटती हैं। यह समारोह प्रेस की आजादी का जश्न मनाता है, पत्रकारिता की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्तियां जुटाता है और इसमें हल्के-फुल्के अंदाज में राजनेताओं की रोस्टिंग (व्यंग्या) किया जाता है। अक्सर इसमें अमेरिका के राष्ट्रपति भी शामिल होते हैं।

पिन और ओटीपी की सुरक्षा खतरे में, नया AI बैंकिंग डेटा चोरी करने में सक्षम, भारत में मची हलचल

नई दिल्ली क्या दुनिया के बैंकों में कोई चोर घुस चुका है? क्या बैंक अकाउंट और कंप्यूटरों का सारा डेटा खतरे में आने वाला है? क्या सारे पासवर्ड किसीको पता चल चुके हैं या पता चल सकते हैं? पूरी दुनिया में खलबली क्यों मची हुई है? आपने भी खबर शायद देखी हो कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने दिल्ली में एक बहुत महत्वपूर्ण बैठक बुलाई. और देश के बड़े-बड़े बैंकों के प्रमुखों, रिजर्व बैंक के अधिकारियों और IT मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ भी बैठक की. बैंकों को किस खतरे के लिए तैयार रहने के लिए कहा जा रहा है? ये सबको समझने की ज़रूरत है. वित्त मंत्री कह रही हैं कि ये खतरा पहले आए किसी भी खतरे से बहुत अलग है और बहुत गंभीर भी हो सकता है. अभी हुआ तो कुछ नहीं है लेकिन बैंकों को बहुत सतर्क रहना होगा, तैयारी करनी होगी और आपस में बेहतर तरीके से मिलकर काम करना होगा. तो क्या है ये खतरा? इस खतरे का नाम है क्लॉड मिथोस. क्लॉड का नाम तो आपने सुना हो शायद. अमेरिका की एक AI यानी आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस कंपनी है जिसका नाम है ऐंथ्रॉपिक. उसने क्लॉड नाम का AI मॉडल बनाया था जो काफी लोग इस्तेमाल करते हैं आपने भी किया हो शायद. तो इस कंपनी ने एक नया AI मॉडल बनाया क्लॉट मिथोस के नाम से. ये किसलिए बनाया? तो इसका मकसद ये था कि कंपियनों के, बैंकों के, सरकारों के ये किसी के भी जो कंप्यूटर सिस्टम होते हैं उनमें आप जानते ही हैं कि हैकरों का खतरा बना रहता है. कंप्यूटर को हैक कर लेते हैं, किसी के अकाउंट को हैक कर लेते हैं, मतलब कंप्यूटर के अंदर घुसकर डकैती कर लेते हैं ऐसे हैकर. कई कंपनियों की वेबसाइट ठप कर देते हैं, कभी किसी के बैंक के अकाउंट से पैसा साफ कर देते हैं. इसलिए सब कहते रहते हैं कि पासवर्ड बदलते रहा करो, हैकरों से बचाने के लिए अलग-अलग सॉफ़्टवेयर भी मिलने लगे बाज़ार में . ऐंथ्रॉपिक के क्लॉड मिथोस से हिली दुनिया हैकर लोग भी असल में शातिर लोग होते हैं जो कंप्यूटर के अंदर का सब सिस्टम समझते हैं. मतलब वो दिमाग लगाते हैं कि सॉफ्टवेयर के अंदर कैसे घुसना है. कमजोर कड़ी पकड़ते हैं. जैसे वो फिल्मों में नहीं होता कि म्यूज़ियम में चार लेवल की सुरक्षा के बीच हीरा पड़ा हुआ है और चोर पूरा नक़्शा ले कर प्लैन बना कर हीरा चुराने निकल पड़ता है. जब तक सायरन बजता है चोर हीरा ले कर गायब हो चुका होता है. तो हैकर लोग यही काम कंप्यूटर में घुस कर करते हैं. तो ऐंथ्रॉपिक कंपनी ने सोचा कि चोरों से दो कदम आगे रहने के लिए क्यों ना AI को लगा दिया जाए. कंप्यूटर के अंदर कौनसी कमजोर कड़ी है ये AI ढूंढ कर बता दे तो? जैसे चोर तिजोरी का ताला तोड़कर घुसता है या ताले का कॉम्बिनेशन बनाकर तिजोरी खोलता है, वैसे ही तो हैकर लोग पासवर्ड को तोड़कर कंप्यूटर के सिस्टम में घुस जाते हैं. तो AI को अगर इस काम में लगा दें तो वो तो आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस से तो महीनों का काम मिनटों में हो सकता है. AI मॉडल बता देगा कि कहां से हैकर सेंध लगा सकते हैं और कंपनी अपने आप को वहां से मजबूत कर लेगी. सेर को सवा सेर मिल जाएगा. चोर डाल-डाल तो AI पात-पात. तो ये AI मॉडल बनाया ऐंथ्रॉपिक कंपनी ने, क्लॉड मिथोस. और फिर क्या हुआ? 30-30 पुरानी कमजोरी झट से पकड़ में आई कंपनी ने मॉडल को टेस्ट किया. और टेस्ट किया तो कंपनी खुद ही दंग रह गई. AI ने झट से बड़ी से बड़ी कंपनियों के सॉफ़्टवेयर में कहां-कहां छेद है बता दिया. 20-20, 30-30 साल से जो कमज़ोर कड़ियां पड़ी हुई थीं कई कंप्यूटर नेटवर्क में क्लॉड मिथोस ने झट पकड़ लीं. आप कहोगे कि इसपर तो ख़ुश होना चाहिए था. वो तो ठीक है लेकिन कंपनी घबरा भी गई. कंपनी ने ऐलान किया कि टेस्टिंग में जो पता चला है उसके बाद हमने फ़ैसला किया है कि क्लॉड मिथोस को बाज़ार में नहीं उतारा जाएगा. कंपनी ने इतना ख़र्च करके एक चीज़ बनाई लेकिन वो अपने बनाए मॉडल से ही डर गई. क्यों डर गई? क्योंकि उसने देखा कि ये तो कोई भी पासवर्ड, कोई भी सिक्यूरिटी, कोई भी कंप्यूटर का ताला कुछ ही देर में तोड़ कर कंप्यूटर के अंदर घुस जाता है. तो ये किसी के हाथ लग गया और सोचो किसी बैंक के सिस्टम में घुस गया तो सारे अकाउंट ही साफ़ कर के निकल जाएगा? इसको तो कोई पासवर्ड रोक ही नहीं पा रहा? मतलब बनाया तो इसे था चोरी के रास्ते पहचानकर उनको ठीक करने के लिए. लेकिन अगर ये ख़ुद चोरी करने पर आ जाए तो इसको कौन रोकेगा? कहने को तो ये एक सामान्य AI मॉडल है जो लिखने-पढ़ने में, कोडिंग करने में और सोचने में बहुत तेज़ है, लेकिन सबसे ख़ास बात ये है कि कंप्यूटर सुरक्षा के मामले में ये इंसानों से भी ज्यादा स्मार्ट है . क्लॉड मिथोस ताले को खोल देगा मतलब मान लो आपके घर का ताला बहुत पुराना है और उसमें छोटी-छोटी कमज़ोरियाँ हैं जिन्हें पहले किसी ने नहीं देखा. क्लॉड मिथोस बिना किसी मदद के उस ताले को खोलने का तरीका खुद ढूँढ लेता है. इसी तरह ये कंप्यूटर के सॉफ्टवेयर ऐसी कमजोरियाँ पकड़ लेता है जिनके बारे में दुनिया को अभी तक पता भी नहीं है. फिर ये कमजोरियों को जोड़कर पूरा हैकिंग का तरीक़ा भी खुद बना सकता है. इसने टेस्टिंग में एक वेब ब्राउज़र में चार कमज़ोरियाँ मिलाकर ऐसा हमला बनाया कि ब्राउज़र और कंप्यूटर दोनों की सुरक्षा तोड़ दी. ऐसा काम करने के लिए 10-15 साल के अनुभव वाला कोई साइबर एक्सपर्ट चाहिए होता था, लेकिन ये AI मॉडल अकेला और बहुत तेजी से इसको कर सकता है . गलत हाथों में पड़ जाए तो… कंपनी ने खुद टेस्ट किया तो हज़ारों ऐसी कमज़ोरियां मिलीं. ये इतना ख़तरनाक है कि अगर ग़लत हाथों में पड़ जाए तो किसी बैंक के सिस्टम में घुस जाए, किसी सरकार के सिस्टम में घुस जाए, किसी अस्पताल के सिस्टम में घुस जाए, किसी कंपनी … Read more

8वें वेतन आयोग के तहत सैलरी में बड़ी बढ़ोतरी, 18 हजार से अब 72,000 रुपये तक पहुंच सकती है सैलरी

नई दिल्ली 8वें वेतन आयोग का गठन हो चुका है, लेकिन अभी तक इसे लागू नहीं किया गया है. आयोग 18 महीने में इसपर विस्‍तार से रिपोर्ट बनाकर सरकार को सौंपे‍गी, जिसके बाद विचार-विमर्श करने के बाद इसे लागू किया जाएगा. इसी बीच, अभी कर्मचारी संगठनों की तरफ से सुझाव दिए जा रहे हैं कि आयोग को 8वें वेतन आयोग के तहत क्‍या-क्‍या बदलाव करने चाहिए?  कुछ दिन पहले नेशनल काउंसिल के मजदूर संघ (एनसी-जेसीएम) की ओर से मांग रखी गई थी कि 8वें वेतन आयोग के तहत कर्मचारियों की न्‍यूनतम सैलरी 18,000 रुपये से बढ़ाकर 69,000 रुपये कर दी जाए. इसके साथ ही फिटमेंट फैक्‍टर को 3.83 की जाए, लेकिन अब खबर आ रही है कि कर्मचारियों की मिनिमम सैलरी 72,000 रुपये रखी जाए और फिटमेंट फैक्‍टर को 4.0 कर दिया जाए।  क्‍या 72,000 रुपये हो जाएगी मिनिमम सैलरी?  इंडिया टुडे के मुताबिक, ये अधिकारिक मांग वाला आंकड़ा नहीं है. 8वें वेतन आयोग के तहत केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के प्रमुख प्रतिनिधि निकायों में से एक एनसी-जेसीएम ने सिर्फ मिनिमम सैलरी बढ़ोतरी की मांग  69,000 रुपये की है. फिर सवाल उठता है कि 72,000 रुपये की मांग आई कहां से।  रिपोर्ट के मुताबिक, यह सट्टा बाजार में अनुमान पर आधारित दिखाई देता है. कुछ मामलों में, कुछ कर्मचारी स्तरों के लिए अनुमानित वेतन 72,000 रुपये के करीब पहुंच जाता है, जिसे फिर एक मुख्य आंकड़े के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है. यह आधिकारिक तौर पर प्रस्तुत न्यूनतम मूल वेतन की मांग के समान नहीं है।  72,000 रुपये सैलरी का अनुमान गलत  मिनिमम सैलरी का कैलकुलेशन कई चीजों पर निर्भर करता है. इसमें ग्रेड, अलाउंस और लेवल आदि शामिल हैं. ऐसे में 72,000 रुपये म‍िनिमम सैलरी होना मुश्किल दिखता है. इसे सिर्फ एक सार्वजनिक मंच पर बोलने के लिए कहा जा सकता है, लेकिन यह कोई प्रस्‍ताव या सही कैलकुलेशन नहीं है।  फिलहाल, सरकार ने आठवें वेतन आयोग के तहत किसी भी अंतिम वेतन संरचना की घोषणा नहीं की है. कर्मचारी प्रतिनिधियों, विभागों और हितधारकों से परामर्श के बाद सिफारिशें तैयार की जाएंगी, और किसी भी वेतन संशोधन को लागू करने से पहले आधिकारिक मंजूरी की आवश्यकता होगी।  बता दें आठवें वेतन आयोग पर नजर रखने वाले लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को अभी अनुमानित सैलरी को सही नहीं मानना चाहिए. अधिकार‍िक ऐलान के बाद ही स्‍पष्‍ट हो पाएगा कि कर्मचारियों की सैलरी में कितनी बढ़ोतरी हो सकती है।   

15 देशों से गैस की सप्लाई, सरकार ने उठाया LPG संकट का समाधान

  नई दिल्ली होर्मुज टेंशन (Hormuz Tension) जारी है, इसे लेकर अमेरिका और ईरान में ठनी हुई है. भले ही मिडिल ईस्ट युद्ध में अभी दोनों देशों के बीच सीजफायर चल रहा है, लेकिन तेल-गैस की सप्लाई पर संकट बरकरार है. भारत में खासतौर पर एलपीजी क्राइसिस (LPG Crisis India) से निपटने के लिए सरकार ने तमाम कदम उठाए हैं और उनका फायदा भी मिल रहा है।  सरकार द्वारा उठाए गए इन कदमों में घरेलू एलपीजी प्रोडक्शन में इजाफे के साथ ही सिर्फ खाड़ी देशों पर निर्भरता न रखकर अन्य देशों से गैस का आयात शामिल है. अब सरकारी तेल कंपनियों ने स्पॉट मार्केट से खरीदारी भी शुरू कर दी है, ताकि किसी भी स्थिति में देश के लोगों को सप्लाई में कमी की दिक्कतों का सामना न करना पड़े।   स्पॉट मार्केट में खरीदारी शुरू! वेस्ट एशिया में तनाव के कारण गैस सप्लाई अभी भी बाधित चल रही है. टीओआई की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि इसे घरों और कमर्शियल जगहों पर एलपीजी गैस सिलेंडर की डिमांड को पूरा करने के लिए स्पॉट मार्केट से खरीदारी शुरू की गई है. यहां से लगातार LPG कार्गो हासिल किए जा रहे हैं।  इससे जुड़े सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि भारत की सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने देश में एलपीजी सप्लाई सुचारू रखने के लिए अमेरिका से टाइअप भी किया है. स्पॉप मार्केट से एलपीजी कार्गो जून और जुलाई में भारत पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।  'जहां से मिलेगी, हम खरीदेंगे LPG' रिपोर्ट में पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मिनिस्ट्री की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा के हवाले से कहा गया है कि अमेरिका-इजरायल और ईरान में लड़ाई शुरू होने से पहले भारत अपनी LPG ज़रूरत का लगभग 60% इम्पोर्ट करता था. लेकिन एलपीजी संकट के बीच सरकार द्वारा घरेलू प्रोडक्शन बढ़ाने के दिए गए आदेश के चलते उत्पादन में बड़ा इजाफा हुआ है और भारत की इंपोर्ट डिपेंडेंसी कम हुई है।  उन्होंने बताया कि सरकार की प्राथमिकता घरेलू सप्लाई को पूरा करना है और इसके लिए जहां से भी मुमकिन होगा, वहीं से कार्गो मंगाया जाएगा. मंत्रालय की ओर से शेयर किए गए आंकड़ों को देखें, तो भारत में रोजाना करीब 80,000 टन LPG की जरूरत है।  वहीं देश में घरेलू एलपीजी प्रोडक्शन करीब 20 फीसदी बढ़कर अब 46,000 टन किया जा चुका है. इसके अलावा बाकी की जरूरत की गैस अब कई देशों से आ रही है. पहले जहां 10 देशों से एलपीजी आयात किया जाता था, तो अब ऐसे देशों की संख्या बढ़कर 15 हो गई है।  अब इन देशों से ज्यादा आयात युद्ध से पहले भारत की जरूरत की 90% एलपीजी तमाम खाड़ी देशों से होती थी. इनमें UAE, कतर, सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन और ओमान शामिल थे. वहीं LPG Crisis के बीच इंपोर्ट डेस्टिनेशंस में विविधिकरण के सरकार के प्लान बी (Modi Govt Plab-B ) के चलते अब लेकिन अब ज्यादातर खरीदारी अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा, अल्जीरिया और रूस जैसे देशों से हो रही है. बीते दिनों सरकार की ओर से साफ किया गया था कि करीब 8 लाख टन एलपीजी का कार्गो पहले ही सुरक्षित कर लिया गया है और रास्ते में है। 

सरकार का नया फैसला: 1 मई से लागू होगा ऑनलाइन गेमिंग का नया नियम, क्या बदलेगा?

नई दिल्ली ऑनलाइन गेमिंग का नया नियम 1 मई से लागू हो जाएगा। सरकार ने इसकी पूरी तैयारी कर ली है। नए नियम में कई ऑनलाइन गेम को छूट मिली है तो कुछ गेम पर सख्ती की गई है। MeitY यानी इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मिनिस्ट्री ने ऑनलाइन गेमिंग के नए नियमों को लेकर अधिसूचना जारी की है। इस अधिसूचना से भारत में ऑनलाइन गेमिंग ऑथिरिटी बनाने का रास्ता साफ हो गया है। नए नियम के साथ प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग एक्ट लागू हो जाएगा। रजिस्ट्रेशन की झंझट खत्म केंद्रीय आईटी सचिव एस कृष्णन ने आधिसूचना जारी करते हुए कहा कि नए नियम के तहत ज्यादातर ऑनलाइन गेम को भारत में रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं होगी। सरकार ने पहले ही रियल मनी यानी जुए वाले गेम्स को प्रतिबंधित कर दिया है। ऑनलाइन गेम्स पर अब निगरानी केवल स्पेशल कंडीशन में ही लागू किया जाएगा। हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि esports गेम्स के लिए पहले की तरह ही रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। सरकार का मकसद भारत में ई-स्पोर्ट्स और ऑनलाइन गेमिंग को बढ़ावा देना है। आईटी सचिव ने बताया कि सरकार ने जहां तक संभव हुआ पूरे सिस्टम को हल्का-फुल्का रखने की कोशिश की है। ज्यादातर गेम, जिसमें मनी यानी पैसे से जुड़े ट्रांजैक्शन नहीं होते हैं उन्हें बिना रजिस्ट्रेशन के काम करने की आजादी दी गई है। हालांकि, अगर गेमिंग कंपनी चाहे तो वो रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं यानी यह प्रक्रिया ऑप्शनल कर दी गई है। ई-स्पोर्ट्स को बढ़ावा नए नियमों में आईटी सचिव एस कृष्णन ने कहा कि अधिकतर ऑनलाइन गेम को रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं होगी। रियल मनी गेम पहले से ही और प्रतिबंधित किए जा चुके हैं। ऑनलाइन गेम को रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं होगी। नए नियम के तहत ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग पर पाबंदी लगाई गई है। वहीं भारत में ई-स्पोर्ट्स और ऑनलाइन गेमिंग को बढ़ावा दिया गया है। उन्होंने आगे कहा कि निगरानी केवल कुछ विशेष परिस्थितियों में ही शुरू की जाएगी। हालांकि, 'ईस्पोर्ट्स' के लिए अनिवार्य रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता होगी। गेम को क्लासीफाई तीन कंडिशन में किया जाएगा     पहली स्थिति में अथॉरिटी स्वयं इस पर निर्णय लेगी।     दूसरी स्थिति ईस्पोर्ट्स गेम्स से जुड़ी है।     तीसरी स्थिति में, केंद्र सरकार किसी स्पेशल कैटेगरी के सोशल गेम्स को अधिसूचित कर सकता है। यूजर्स को क्या होगा फायदा? 1 मई से नए नियम प्रभावी होने से यूजर्स को भी कई फायदे होंगे। यूजर्स को बेहतर सुरक्षा मिलेगी। यूजर्स की सेफ्टी और डेटा प्रोटेक्शन को लेकर काम किया गया है। इन तीन कंडीशन में क्लासिफाई किए जाएंगे गेम्स     पहली स्थिति में ऑथिरिटी स्वंय यानी सुओ मोटू इस पर निर्णय लेगी कि गेम को रजिस्ट्रेशन कराना चाहिए या नहीं।     दूसरी स्थिति में ई-स्पोर्ट्स गेम्स को शामिल किया गया है।     वहीं, तीसरी स्थिति में केंद्र सरकार किसी स्पेशल कैटेगरी के सोशल गेम्स को अधिसूचित कर सकती है। इन गेम्स पर होगी सख्ती     सरकार ने पहले से ही रियल मनी और गेम्बलिंग वाले गेम्स को प्रतिबंधित किया है। ऐसे में किसी भी रियल मनी वाले गेम की पहचान करके उसे बैन किया जाएगा।     ई-स्पोर्ट्स वाले गेम्स के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। नए नियम से गेमर्स को कई तरह के फायदे मिलने वाले हैं। वो अब बेहद सुरक्षित इन्वायरोमेंट में ऑनलाइन गेम्स को खेल पाएंगे। किसी भी तरह के वित्तीय घाटे की कोई संभावना नहीं रहेगी। यही नहीं, यूजर्स के डेटा प्रोटेक्शन और सेफ्टी को लेकर भी सख्ती की गई है, जिसकी वजह से उनका डेटा पूरी तरह से सुरक्षित होगा। सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग के नियम को लेकर पिछले साल अक्टूबर 2025 में फीडबैक मांगा था।

जनगणना 2027 में डिजिटल तकनीक का होगा इस्तेमाल, नीति निर्माण को मिलेगा नया आयाम

नई दिल्ली  भारत की जनगणना 2027 देश की पहली पूरी तरह 'डिजिटल जनगणना' होगी। इसमें मोबाइल के जरिए डेटा जुटाया जाएगा, जिससे सही और विस्तृत जानकारी मिलेगी और बेहतर नीति बनाने में मदद मिलेगी।  एक आधिकारिक फैक्ट-शीट में यह जानकारी दी गई। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि इस जनगणना में कई नई सुविधाएं होंगी, जैसे कि सेंसस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (सीएमएमएस) पोर्टल के जरिए लगभग रियल-टाइम निगरानी, खुद से जानकारी भरने का विकल्प और जियो-रेफरेंस्ड क्षेत्रों का व्यापक उपयोग। राजनैतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 30 अप्रैल 2025 को हुई अपनी बैठक में जनगणना 2027 में जातिगत गणना को शामिल करने का निर्णय लिया। इससे पहले 2011 की जनगणना तक केवल अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) की ही व्यवस्थित गणना होती थी। इस पूरी प्रक्रिया के लिए 11,718.24 करोड़ रुपए का बजट तय किया गया है और डेटा सुरक्षा के लिए मजबूत इंतजाम किए गए हैं।जनगणना 2027 को दो चरणों में किया जाएगा, ताकि पूरे देश में व्यवस्थित और व्यापक तरीके से डेटा इकट्ठा किया जा सके। सरकार के अनुसार, सुरक्षित डेटा सेंटर और बड़े कार्यबल की मदद से यह जनगणना भरोसेमंद जानकारी देगी, जिससे लक्षित और समावेशी नीति बनाना आसान होगा। बयान में आगे कहा गया है कि जनगणना से जनसंख्या के रुझानों को सही तरीके से समझने में मदद मिलती है और इससे भोजन, पानी, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में बेहतर योजना बनाई जा सकती है। यह स्थानीय स्तर पर भी सटीक जानकारी देता है, ताकि सरकारी योजनाओं को सही जगह तक पहुंचाया जा सके। स्वतंत्रता के बाद यह देश की आठवीं जनगणना होगी, जो पहले से ज्यादा अपडेट और विस्तृत जानकारी देगी। इससे बदलती सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार योजना बनाना आसान होगा। जनगणना देश या किसी विशिष्ट क्षेत्र के सभी व्यक्तियों से संबंधित जनसांख्यिकीय, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक आंकड़ों के संग्रह, संकलन, विश्लेषण और प्रसार की प्रक्रिया है। जनगणना के माध्यम से एकत्रित सूचनाओं का विशाल भंडार इसे योजनाकारों, प्रशासकों, शोधकर्ताओं और अन्य डेटा उपयोगकर्ताओं के लिए आंकड़ों का सबसे समृद्ध स्रोत बनाता है। जनगणना गवर्नेंस के लिए एक महत्वपूर्ण आधार के रूप में कार्य करती है, जो राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों में साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में सक्षम बनाती है। यह दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना होगी और डिजिटल तकनीक, मजबूत डेटा सुरक्षा और आसान प्रक्रियाओं के साथ यह डेटा-आधारित नीति निर्माण को और मजबूत बनाएगी।

गुजरात में 26 अप्रैल को 9000 सीटों के लिए निकाय चुनाव, जानें तारीख और शेड्यूल

गांधीनगर गुजरात में 26 अप्रैल के दिन स्थानीय निकाय चुनाव के लिए मतदान होगा. राज्य की 15 महानगरपालिका, 84 नगरपालिका, 13 नगरपालिका में उपचुनाव, 34 जिला पंचायत, 260 तालुका पंचायत की 9000 सीटों के लिए मतदान होना है. गुजरात विधानसभा 2027 के चुनाव के पहले स्थानीय निकाय का चुनाव सभी राजनीतिक पक्षों के लिए सेमीफाइनल माना जा रहा है।  देश के गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह वोटिंग करने अहमदाबाद आ रहे हैं. गांधीनगर के सांसद और देश के गृह मंत्री अमित शाह अहमदाबाद महानगरपालिका के नारनपुरा वार्ड नंबर-9 के मतदाता है।  अमित शाह वोटिंग करने 11 बजे नारणपुरा में स्थित नारणपुरा सब जोनल ऑफिस में पहुंचेंगे. अमित शाह के अलावा गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल 11 बजे अहमदाबाद में स्थित शिलज प्राथमिक स्कूल में वोटिंग करेंगे. तो गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी सूरत के इच्छानाथ में स्थित सेंट्रल स्कूल में वोटिंग करेंगे।  चुनाव के दिलचस्प आंकड़े बता दें कि गुजरात में होने वाले स्थानीय निकाय के चुनाव में उम्मीदवारों की संख्या के लिहाज से बीजेपी सबसे आगे है, जहां उसके 9 हजार 237 प्रत्याशी मैदान में हैं, जबकि कांग्रेस के 8 हजार 443 और आम आदमी पार्टी के 5 हजार 261 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं. राज्य में 26 अप्रैल को 30 हजार मतदान केंद्रों और 50 हजार बूथों पर वोटिंग होगी. जिसके बाद परिणाम 28 अप्रैल को घोषित होगा।  हालांकि स्थानीय निकाय चुनाव में मतदान से पहले ही 730 सीटें निर्विरोध घोषित हुईं है. जिनमें 715 सीटें बीजेपी को मिलीं थी. जो पार्टी के चुनावी इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है. क्योंकि पिछले निकाय चुनावों में निर्विरोध सीटों का आंकड़ा करीब 240 सीटों के आसपास था. इस बार जो सीटें निर्विरोध हुई उनमें 15 नगर निगमों की 43 सीटें शामिल हैं, इन सभी पर बीजेपी ने जीत दर्ज की है।  इसके अलावा, नगरपालिका की 385 सीटें निर्विरोध हुई हैं, जिनमें 370 सीटें बीजेपी, 12 कांग्रेस और 3 निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गई हैं. तालुका पंचायत की 251 सीटें और जिला पंचायत की 51 सीटें भी निर्विरोध घोषित हुई है।  सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम गुजरात में आयोजित होनेवाले स्थानीय निकाय के चुनाव को लेकर गुजरात पुलिस ने सुरक्षा के मद्देनजर तैयारियां पूर्ण की हैं. राज्य के 30 हजार मतदान केंद्रों और 50 हजार बूथों पर वोटिंग शांतिपूर्ण माहौल में हो, इसलिए राज्य में 59 हजार 525 होमगार्ड, जीआरडी जवानों और 41 हजार 383 जवानों की फोर्स को डिप्लॉय किया गया है. पुलिस की ओर से संवेदनशील इलाकों में पेट्रोलिंग करके और सीसीटीवी कैमरा के माध्यम से नजर रखी जाएगी।   

अमेरिका ने लिया बड़ा फैसला: रूस-ईरान के तेल पर छूट खत्म, अब कोई राहत नहीं मिलेगा

नई दिल्ली  यूरोपीय संघ (EU) के व्यापार आयुक्त मारोस सेफकोविक ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि अमेरिका अब भविष्य में रूस पर लगे तेल प्रतिबंधों में कोई नई ढील नहीं देगा। यह बयान अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के साथ हुई उनकी उच्च स्तरीय बैठक के बाद आया है। रॉयटर्स के मुताबिक सेफकोविक ने बताया कि अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के साथ बातचीत में उन्हें यह समझाया गया कि यह राहत केवल कुछ गरीब और तेल आयात पर निर्भर देशों की मुश्किल स्थिति को देखते हुए दी गई थी। भारत पर इसका असर दिखाई दे सकता है। प्रतिबंधों में राहत और उसका कारण हाल ही में अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा रूसी तेल पर प्रतिबंधों में दी गई ढील पर यूरोपीय संघ ने चिंता जताई थी। इस पर चर्चा के दौरान ये बातें सामने आईं:     अमेरिका ने हाल ही में रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की लोडिंग और बिक्री के लिए जारी 'जनरल लाइसेंस' को 16 मई तक के लिए बढ़ा दिया है।     अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के अनुसार, यह राहत होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने के कारण पैदा हुई किल्लत को देखते हुए दी गई थी।     सेफकोविच ने बताया कि कई कम आय वाले देश तेल की कमी के कारण अत्यधिक कठिन स्थिति का सामना कर रहे हैं। इन देशों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह अल्पकालिक कदम उठाया गया था। ईरान-इजरायल तनाव का असर एशियाई अर्थव्यवस्थाएं विशेष रूप से तेल की कमी से जूझ रही हैं। 28 फरवरी से ईरान के खिलाफ शुरू हुए सैन्य अभियानों और अमेरिका-ईरान के बीच तनावपूर्ण संघर्ष विराम के कारण खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति बाधित हुई है। मेरा स्पष्ट मानना है कि भविष्य में इस तरह की ढील दोबारा नहीं दी जाएगी। यह केवल उन देशों की मदद के लिए था जो वर्तमान वैश्विक संकट के कारण सबसे अधिक असुरक्षित हैं। बेसेंट का यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजराइल युद्ध को लेकर दुनिया चिंतित है और होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार संकट में हैं। अमेरिका ने कच्चे तेल की कीमतें 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजारों को स्थिर करने के इरादे से मार्च में रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री के लिए छूट दी थी। इसके बाद बेसेंट ने 'व्हाइट हाउस' (अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय) में कहा था कि प्रतिबंधों से दी गई राहत की अवधि बढ़ाने की उनकी कोई योजना नहीं है लेकिन इसके दो ही दिन बाद वित्त मंत्रालय ने छूट की अवधि बढ़ा दी थी।  वित्त मंत्री ने वैश्विक ऊर्जा बाजार पर अमेरिका-इजराइल युद्ध के असर और अन्य विषयों पर 'एसोसिएटेड प्रेस' से साक्षात्कार में अपने रुख में पहले आए बदलाव की वजह बताई। बेसेंट ने कहा कि पिछले सप्ताह विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की बैठकों के दौरान ''10 से अधिक बेहद कमजोर और गरीब देशों ने मुझसे आकर कहा, क्या आप मदद कर सकते हैं?' उन्होंने कहा, ''यह उन कमजोर और गरीब देशों के लिए था लेकिन मुझे नहीं लगता कि हम एक और बार अवधि का विस्तार करेंगे। मुझे लगता है कि समुद्र में मौजूद रूसी तेल का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल हो चुका है।' मारोस सेफकोविच, यूरोपीय व्यापार आयुक्त उर्वरक संकट पर भी हुई चर्चा तेल के अलावा, सेफकोविच और बेसेंट ने उर्वरक (Fertilizer) आपूर्ति श्रृंखला में आ रही बाधाओं पर भी गहन चर्चा की:     यूरोप और अफ्रीका: दोनों नेताओं ने अफ्रीका में उर्वरक की कमी को चिंताजनक स्थिति बताया।     G20 से अपील: बेसेंट ने G20 देशों, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक से आग्रह किया है कि वे गरीब देशों को उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए समन्वित कार्रवाई करें। भारत पर कितना बड़ा असर? वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का 30% से 35% कच्चा तेल रूस से आयात कर रहा है। अमेरिका द्वारा दोबारा ढील न देने के संकेत भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को निम्नलिखित तरीकों से प्रभावित कर सकते हैं:     भारत अपना लगभग आधा तेल खाड़ी देशों से मंगाता है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है। अमेरिका-ईरान तनाव के कारण यह रास्ता असुरक्षित है।     जब खाड़ी से सप्लाई बाधित हुई, तब भारत ने रूस से आयात बढ़ाकर (मार्च में रिकॉर्ड 20 लाख बैरल प्रतिदिन) अपनी कमी पूरी की। अब अगर रूसी तेल पर भी सख्ती बढ़ती है, तो भारत के पास विकल्पों की भारी कमी हो जाएगी।     भारत अपनी कृषि के लिए रूस और अन्य क्षेत्रों से उर्वरक आयात पर निर्भर है। तेल के साथ-साथ उर्वरक आपूर्ति बाधित होने से भारत की खाद्य सुरक्षा और खेती की लागत पर बुरा असर पड़ सकता है।     भारत को अब अन्य विकल्पों जैसे अफ्रीका, वेनेजुएला या सीधे अमेरिका से तेल आयात बढ़ाने पर विचार करना पड़ सकता है, जो रूस के मुकाबले काफी महंगा पड़ सकता है।