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1 अप्रैल से लागू होगा नया नियम, डिजिटल पेमेंट के लिए करना होगा यह काम

मुंबई  मॉल या स्थानीय दुकान पर बहुत से लोग पेमेंट करने के लिए डिजिटल ट्रांजैक्शन या UPI का सहारा लेते हैं. अब डिजिटल ट्रांजैक्शन को लेकर एक नियम बदलने जा रहा है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आदेश के बाद बैंकों को टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) लागू करना होगा. सितंबर 2025 में जारी किए गए आदेश में 1 अप्रैल 2026 डेडलाइन लगी रखी है।  1 अप्रैल 2026 के बाद से ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के लिए सिर्फ एक वन टाइम पासवर्ड (OTP) पर निर्भर रहना काफी नहीं होगा. सभी ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के लिए कम से कम दो अलग और इंडिपेंडेंट वेरिफिकेशन फैक्टर से वेरिफाई करना होगा. क्रेडिट कार्ड में पहले से टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन पहले से लागू है. ये जानकारी मीडिया रिपोर्ट से मिली है।  ये होंगे ऑथेंटिकेशन के तरीके      पर्सनल आइडेंटिफिकेशन नंबर (PIN)     बायोमेट्रिक जैसे फिंगरप्रिंट या फेस रिकग्निशन     बैंकिंग ऐप के अंदर जनरेट होने वाले वर्चुअल टोकन     SMS आधारित OTP  इन्हें उदाहरण के रूप में समझें तो पेमेंट के लिए दो काम करने पड़ेंगे.     OTP + PIN (स्टैटिक)     बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन + डिवाइस बाइंडिंग     टोकन आधारित ऑथेंटिकेशन + पासवर्ड जैसे किसी दुकान से सामान खरीदा और पेमेंट के लिए उसको अपना डेबिट कार्ड दिया. इसके बाद जैसे ही सेल्स पर्सन पॉइंट ऑफ सेल (POS) से स्वाइप करेगा, उसके बाद यूजर्स को पिन एंटर करने के साथ अब OTP भी देना होगा. अब ऑनलाइन ट्रांजैक्शन को दो तरह से ऑथेंटिकेट करना होगा।  अब 1 अप्रैल के बाद से हर एक ट्रांजैक्शन के लिए कम से कम दो तरीकों से ऑथेंटिकेट करना होगा. ऐसे में साइबर साइबर ठगों पर लगाम लगेगी और अनऑथराइज्ड ट्रांजैक्शन पर लगाम लगेगी।  साइबर ठगों पर लगाम लगाने की कोशिश  साइबर ठगी के ऐसे बहुत से केस हैं, जहां विक्टिम के पर्सनल मोबाइल पर आने वाले बैंक ओटीपी को साइबर ठगों ने चालाकी से हासिल कर लिया. फिर उनके बैंक खाते को खाली कर डाला. फिशिंग स्कैम, सिम स्कैम और बहुत से स्कैम हाल के दिनों में बढ़े हैं।  इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन पर भी लागू होगा नियम RBI के दिशा-निर्देश में यह  साफ किया गया है कि 1 अक्टूबर 2026 तक इंटरनेशनल कार्ड-नॉट-प्रेजेंट ट्रांजैक्शन पर भी इसी तरह के ऑथेंटिकेशन नियम लागू किए जाएंगे। 

8वें वेतन आयोग का बड़ा ऐलान: कब होगा लागू, सैलरी में कितनी बढ़ेगी वृद्धि?

 नई दिल्‍ली 8वें वेतन आयोग को लेकर सरकार ने एक बड़ा अपडेट जारी किया है. लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए सरकार ने 8वें वेतन आयोग को लेकर कुछ स्‍पष्‍टता दी है, लेकिन अभी पूरी जानकारी उपलब्‍ध नहीं है. संसद में सरकार ने बताया है कि कबतक आठवां वेतन आयोग लागू हो सकता है।  वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि सरकार ने 3 नवंबर, 2025 को औपचारिक रूप से 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की स्थापना की. उन्होंने आगे कहा कि आयोग को केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों की सैलरी, भत्ते और पेंशन पर अपनी सिफारिशें रिपोर्ट पेश करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है।  उन्‍होंने 8वें वेतन आयोग कब लागू होगा? सवाल का जवाब देते हुए कहा कि यह तभी पता चल पाएगा, जब रिपोर्ट पेश की जाएगी और उसे एक्‍सेप्‍ट किया जाएगा. इसके बाद तय हो सकेगा कि इस आयोग को कब से लागू किया जाए? खैर अभी आयोग इसपर रिपोर्ट तैयार कर रहा है।  8वें वेतन आयोग पर फीडबैक  जानकारी के मुताबिक, 8वें वेतन आयोग को लेकर आयोग एक तरह से काम नहीं कर रहा है. यह अलग-अलग कैटेगरी से एक्टिव तरीके से सुझाव पाने की कोशिश कर रहा है. माईगॉव पोर्टल पर 18 तरह के सवाल अपलोड किए गए हैं. मंत्रालयों, विभागों, राज्य सरकारों, कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, यूनियनों, शिक्षाविदों और यहां तक ​​कि लोगों से भी फीडबैक मांगा गया है. फीडबैक देने का लास्‍ट डेट 31 मार्च 2026 है और सिर्फ ऑनलाइन तरीके से ही फीडबैक लिया जाएगा।  कब होगा सैलरी में इजाफा?  सैलरी को लेकर कहा गया है कि 8वां वेतन आयोग लागू होने में भले ही देरी हो जाए, लेकिन 1 जनवरी 2026 से ही इसे प्रभावी माना जाएगा. हालांकि कर्मचारियों तक इसका लाभ पहुंचने में ज्‍यादा समय लग सकता है. जेनजेडसीएफओ के संस्थापक सीए मनीष मिश्रा ने संभावित देरी की वजह बताई है।  उनका कहना है कि यह सच है कि कागजों पर 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होने वाला है, लेकिन व्यवहार में बढ़ी हुई सैलरी संभवतः कर्मचारियों के बैंक खातों में 2026 के अंत तक या वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान ही पहुंचेगी, ठीक वैसे ही जैसे पिछले वेतन आयोगों के बाद देरी हुई थी।  कर्मचारियों को मिलेगी बकाया राशि  उन्‍होंने यह भी बताया कि 8वें वेतन आयो के तहत बकाया भुगतान की भी संभावना है. संशोधित वेतन का भुगतान भले ही बाद में किया जाएग, लेकिन इसका कैलकुलेशन 1 जनवरी 2026 से की जाएगी. इसी दिन 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल समाप्‍त हो रहा है।  कितनी बढ़ जाएगी सैलरी?  वेतन बढ़ोतरी की बात करें तो अभी तक कोई अधिकारिक जानकारी इसे लेकर नहीं आई है, लेकिन शुरुआती अनुमानों से बढ़ोतरी का संकेत मिलता है. कर्मा मैनेजमेंट ग्लोबल कंसल्टिंग सॉल्यूशंस के मैनेजिंग डायरेक्‍टर और मुख्य विजन अधिकारी प्रतीक वैद्य ने कहा कि उम्‍मीद पिछले रुझानों और वर्तमान आर्थिक के हिसाब से दिख रही हैं।  उन्‍होंने कहा कि सैलरी बढ़ोतरी के दो फैक्‍टर नजर आ रहे हैं, जिसमें पूर्व आयोग का कार्य और आज की अर्थव्‍यवस्‍था शामिल हैं. 6वें वेतन आयोग के तहत करीब 40 फीसदी सैलरी बढ़ी थी, जबकि 7वें वेतन आयोग के तहत 23 से 25 फीसदी के आपास बढ़ोतरी देखी गई थी, जिसमें 2.57 फिटमेंट फैक्‍टर है. इसी बात पर 8वां वेतन आयोग के तहत भी सैलरी निर्भर करती है।  एक्‍सपर्ट ने कहा कि यह सिर्फ अनुमान है, अंतिम फैसला कई आंकड़ों पर निर्भर करता है. उन्‍होंने समझाया कि 8वें आयोग के लिए ज्‍यादातर अनुमानां में 20 से 35 फीसदी की बढ़ोतरी की बात कही गई है, जिसमें फिटमेंट फैक्‍टर 2.4 से 3 के बीच और बेसिक सैलरी शामिल है. लेकिन अंतिम आंकड़ा अगले 12 से 18 महीनों में महंगाई, टैक्‍स की उपलब्‍धता और राजनीतिक इच्‍छा पर निर्भर करता है। 

भारत ने खेला बड़ा दांव, होर्मुज जीता, अब रूस से मिलेगा LNG का खजाना

नईदिल्ली /मॉस्को  मिडिल ईस्ट में मची भीषण तबाही की आग अब भारत की रसोई से लेकर फैक्ट्रियों तक पहुंच चुकी है. रॉयटर्स की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार ने अपनी तेल और गैस कंपनियों को साफ कह दिया है कि वे रूस से एलएनजी (LNG) खरीदने के लिए अपनी कमर कस लें. यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से इसे भारत का अब तक का सबसे बड़ा ‘पॉलिसी चेंज’ माना जा रहा है. मिडिल ईस्ट के बिगड़ते हालात ने दुनिया भर के देशों को मजबूर कर दिया है कि वो तेल और गैस के लिए दूसरे विकल्प तलाशें. हालांकि, भारत को हॉर्मुज के रास्ते से ‘फ्री पास’ मिला हुआ है, लेकिन सरकार एनर्जी सप्लाई के मामले में अब कोई भी रिस्क लेने के मूड में नहीं है।  Oil Prices को काबू में रखने का निकाला उपाय कतर के ‘रास लफ्फान’ गैस हब पर हमलों से उत्पादन सालों के लिए पिछड़ गया है. 19 मार्च को नई दिल्ली में रूसी ऊर्जा उप-मंत्री पावेल सोरोकिन और हरदीप सिंह पुरी के बीच हुई बैठक में एलएनजी सप्लाई फिर से शुरू करने पर सहमति बनी है।  अमेरिका से शुरू हुई क्या बात? भारत ने अमेरिका के साथ बातचीत शुरू कर दी है ताकि रूसी गैस खरीदने पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का असर न पड़े. अमेरिका पहले ही भारत को रूसी कच्चा तेल खरीदने के लिए 30 दिनों का वेवर दे चुका है ताकि ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतें काबू में रहें।  अब भारत एलएनजी के लिए भी ऐसी ही छूट चाहता है. हालांकि, जानकारों का कहना है कि इस बार रूस के साथ होने वाला सौदा 2012 के GAIL-Gazprom समझौते जितना सस्ता नहीं होगा, क्योंकि अब यह पूरी तरह ‘सेलर्स मार्केट’ है।  भारत-रूस क्रूड ऑयल ट्रेड S&P ग्लोबल और अन्य एजेंसियों ने दुनिया भर में गैस की कमी की चेतावनी दी है. होर्मुज संकट और कतर में तबाही के कारण इस साल ग्लोबल सप्लाई में 35 मिलियन टन की कमी आ सकती है. कतर और यूएई के नए गैस प्रोजेक्ट्स अब 3 से 5 साल की देरी से चल सकते हैं. भारत पहले ही फरवरी के बाद से रूस से 5-6 करोड़ बैरल कच्चा तेल खरीद चुका है और अब कुकिंग गैस यानी LPG के साथ-साथ एलएनजी के लिए भी रूस पर भरोसा बढ़ा रहा है। 

भारत बना ड्रोन और क्रूज मिसाइलों का काल, दुश्मन आसमान में जलकर राख होंगे

नई दिल्ली भारत की रक्षा ताकत में अब एक और बड़ा और खतरनाक इजाफा हो गया है. रक्षा मंत्रालय ने नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में 858 करोड़ रुपए के दो बड़े एग्रीमेंट साइन किए हैं.  इनका सीधा मकसद भारत के आसमान और समंदर की सुरक्षा को पूरी तरह से अभेद्य बनाना है. इंडियन आर्मी को रूस का टुंगुस्का एयर डिफेंस सिस्टम मिलने वाला है।  यह सिस्टम दुश्मन के विमानों, ड्रोन्स और क्रूज मिसाइलों को पलक झपकते ही हवा में खाक कर देगा. इसके साथ ही इंडियन नेवी के P8I एयरक्राफ्ट के मेंटेनेंस के लिए भी एक बड़ी डील हुई है. बोइंग इंडिया डिफेंस प्राइवेट लिमिटेड के साथ यह करार भारत में ही होगा. इससे देश के आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया विजन को एक बहुत बड़ा बूस्ट मिलेगा. भारत अब हर तरह के खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।  ‘445 करोड़ में रूस से मिला एयर डिफेंस सिस्टम’ भारतीय सेना को अब टुंगुस्का एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम मिलेगा. इसके लिए रूस की कंपनी के साथ 445 करोड़ रुपए का बड़ा एग्रीमेंट साइन हुआ है. यह आधुनिक मिसाइल सिस्टम भारत की एयर डिफेंस पावर को कई गुना बढ़ा देगा. दुश्मन का कोई भी विमान, ड्रोन या क्रूज मिसाइल अब भारत की सीमा में घुस नहीं पाएगा. इससे रूस और भारत का रक्षा सहयोग भी और ज्यादा मजबूत हुआ है।  ‘नेवी के P8I एयरक्राफ्ट के लिए बोइंग से हुई डील’ भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए भी बड़ा कदम उठाया गया है. नौसेना के P8I विमान की जांच और मेंटेनेंस के लिए एक अहम समझौता हुआ है. यह एग्रीमेंट 413 करोड़ रुपए में बोइंग इंडिया डिफेंस प्राइवेट लिमिटेड के साथ साइन किया गया है. यह काम पूरी तरह से भारत में ही किया जाएगा।  ‘मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत को मिला बूस्ट’ P8I विमानों का मेंटेनेंस देश के अंदर ही होने से बहुत बड़ा फायदा होगा. इससे मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान को भारी ताकत मिलेगी. देश में ही मेंटेनेंस की आधुनिक सुविधाएं काफी मजबूत होंगी. भारत अब रक्षा उपकरणों के रखरखाव के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भर नहीं रहेगा. यह डिफेंस सेक्टर में स्वदेशीकरण की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। 

ईंधन पर टैक्स घटा, आम लोगों को राहत: पेट्रोल ₹10 और डीजल ₹10 तक सस्ता – बिंदल

शिमला शिमला भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि 26 मार्च 2026 को जारी भारत सरकार के आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन के माध्यम से पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में ऐतिहासिक कमी की गई है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय वैश्विक संकट और पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता के बीच लिया गया है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मजबूत और जनहितकारी नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है। डॉ. बिंदल ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना (Notification No. 05/2026-Central Excise एवं संबंधित संशोधन नियम 02/2026) के अनुसार पेट्रोल (Motor Spirit) पर उत्पाद शुल्क को ₹13 प्रति लीटर से घटाकर ₹3 प्रति लीटर कर दिया गया है, जबकि डीजल (High Speed Diesel) पर उत्पाद शुल्क ₹10 प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दिया गया है। इससे देश के 140 करोड़ नागरिकों को सीधी राहत मिलेगी और महंगाई पर नियंत्रण में मदद मिलेगी। उन्होंने आगे कहा कि केंद्र सरकार ने दूरदर्शिता दिखाते हुए ईंधन की देश में उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए रणनीतिक कदम भी उठाए हैं। डीजल पर ₹21.5 प्रति लीटर तथा एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर ₹29.5 प्रति लीटर का निर्यात शुल्क लगाया गया है, ताकि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद देश में ईंधन की कमी न हो और कीमतें नियंत्रित रहें। डॉ. बिंदल ने कहा कि यह निर्णय स्पष्ट करता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार हर परिस्थिति में “जनहित सर्वोपरि” के सिद्धांत पर कार्य करती है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत सरकार ने आम नागरिक को राहत देने का कार्य किया है, जो ‘ईज ऑफ लिविंग’ को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके विपरीत, डॉ. बिंदल ने हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि जहां एक ओर केंद्र सरकार टैक्स घटाकर जनता को राहत दे रही है, वहीं प्रदेश की कांग्रेस सरकार पेट्रोल और डीजल पर ₹5 प्रति लीटर तक सेस लगाने की योजना बना रही है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय पूरी तरह जनविरोधी है और प्रदेश की जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार पहले ही डीजल पर ₹10.40 प्रति लीटर टैक्स लगाकर हजारों करोड़ रुपये जनता से वसूल चुकी है और अब ₹5 अतिरिक्त सेस लगाकर आम आदमी, किसान, बागवान, व्यापारी और परिवहन क्षेत्र को और अधिक प्रभावित करने की तैयारी कर रही है। डॉ. बिंदल ने कहा कि यह स्पष्ट अंतर है – एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार है जो टैक्स कम कर राहत देती है, और दूसरी ओर कांग्रेस की सरकार है जो नए-नए कर लगाकर जनता की जेब पर बोझ डालती है। उन्होंने अंत में कहा कि भाजपा इस जनविरोधी सेस का कड़ा विरोध करेगी और हिमाचल प्रदेश की जनता के हितों की रक्षा के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी।

गूगल पर घिरा विवाद: एपस्टीन केस के पीड़ितों ने डेटा दिखाने का लगाया आरोप

वॉशिंगटन सीएनबीसी के मुताबिक जेफरी एपस्टीन के पीड़ित एक समूह ने गूगल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। गूगल पर आरोप है कि कंपनी के एआई टूल्स और सर्च इंजन ने उनकी पर्सनल पहचान और कॉन्टैक्ट जानकारी ऑनलाइन दिखा दी। इसकी वजह से उन्हें शोषण, धमकियां और फिर से मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा। जाने डोई नामक एक पीड़ित ने अपनी तरह अन्य पीड़ितों के हवाले से अमेरिका के फेडरल कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि गूगल प्लेटफॉर्म के जरिए नाम, ईमेल एड्रेस और फोन नंबर समेत बहुत ही संवेदनशील जानकारी दिखा दी गई है। हालांकि, इसे हटाने के लिए कई बार अपील भी की गई थी। शिकायत के मुताबिक ये खुलासे तब हुए जब पीड़ितों ने अपनी जानकारी प्राइवेट रखने की कोशिश की थी। मुकदमे में इस मामले का पता 2025 के आखिर और 2026 की शुरुआत में अमेरिकी न्यायिक विभाग द्वारा बड़ी संख्या में डॉक्यूमेंट्स जारी करने के बाद लगाया गया है। जारी किए गए रिकॉर्ड में लगभग 100 एपस्टीन पीड़ितों की अनजाने में पहचान हो गई थी। हालांकि सरकार ने बाद में गलती को पहचाना और मटीरियल वापस लेने की कोशिश की, लेकिन संवेदनशील डेटा पहले ही ऑनलाइन फैल चुका था। पीड़ितों का आरोप है कि गूगल ने इस समस्या के बारे में अलर्ट किए जाने के बाद भी अपने सर्च रिजल्ट्स और एआई-जेनरेटेड रिस्पॉन्स के जरिए यह जानकारी दिखाना जारी रखा। शिकायत में कहा गया है कि लगातार इस खुलासे से पीड़ितों को नया तनाव हो गया है। मुकदमे में कहा गया है, “अजनबी उन्हें कॉल करते हैं, ईमेल करते हैं, उनकी फिजिकल सेफ्टी के लिए खतरा पैदा करते हैं और उन पर एपस्टीन के साथ मिलकर साजिश करने का आरोप लगाते हैं जबकि असल में वे (पीड़ित शिकायतकर्ता) एपस्टीन के शिकार हैं।” यह कानूनी कार्रवाई एआई तकनीक, प्राइवेसी और उन प्लेटफॉर्म की जवाबदेही को लेकर बढ़ती चिंताओं को दिखाती है जो संवेदनशील जानकारी इकट्ठा करते हैं और दिखाते हैं। दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक का नाम लेकर, मुकदमा बिना फिल्टर वाले एआई रिस्पॉन्स और सर्च रिजल्ट के संभावित नतीजों को दिखाता है जो पहले से ही संवेदनशील या नुकसानदायक डेटा को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाते हैं। कानूनी जानकारों का कहना है कि इस केस के नतीजे का असर टेक कंपनियों के पर्सनल डेटा को संभालने के तरीके पर पड़ सकता है, खासकर उन मामलों में जब अपराध के शिकार या संवेदनशील सरकारी रिकॉर्ड शामिल हों। पीड़ित ऐसे उपाय ढूंढ रहे हैं जो आगे के खुलासे को रोक सकें और उनकी पहचान के बार-बार सामने आने से होने वाली परेशानी के लिए गूगल को जिम्मेदार ठहरा सकें।

फ्यूल मैनेजमेंट फेलियर पर थाई पीएम ने मानी गलती, देश से मांगी माफी

बैंकॉक थाइलैंड के प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नवीराकुल ने ईंधन संकट की जिम्मेदारी लेते हुए देश से माफी मांगी है। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दोनों हाथ जोड़कर कहा कि मिस मैनेजमेंट के चलते आम लोगों को तकलीफ उठानी पड़ी, जिसका उन्हें कष्ट है। इसके साथ ही उन्होंने ईरान के साथ हुए अहम समझौते की भी जानकारी दी। बैंकॉक स्थित गवर्नमेंट हाउस में पश्चिम एशिया में एक महीने से जारी संघर्ष के बाद के हालात पर चर्चा करने के लिए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई गई। उन्होंने बताया कि थाईलैंड ने ईरान के साथ एक समझौता किया है, जिसके तहत उसके तेल टैंकर अब होर्मुज से सुरक्षित गुजर सकेंगे। पीएम ने बताया कि इस समझौते से देश में ईंधन को लेकर बनी चिंता कम होगी। मीडिया के सामने ही प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नविराकुल ने थाईलैंड में ईंधन कुप्रबंधन के लिए माफी मांगी है। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व संकट की वजह से हुई दिक्कतें सोच से ज्यादा लंबी चलीं। उन्होंने प्राइस कैपिंग के विचार का उल्लेख भी किया। 'बैंकॉक पोस्ट' के अनुसार, प्रेस के सामने वो हाथ जोड़कर खड़े हुए और कहा, "फ्यूल मैनेजमेंट से हुई गड़बड़ी के लिए मैं लोगों से माफी मांगता हूं।" अपने फैसले को सही करार देते हुए कहा कि पंपों पर प्राइस कैप खत्म करने से पड़ोसी देशों में तेल की स्मगलिंग रोकने और फ्यूल की कमी को कम करने में मदद मिलेगी। दरअसल, बुधवार रात, थाई लोग छह-बहत (टीएचबी/थाई मुद्रा) प्रति लीटर की कीमत बढ़ने से हैरान थे। इसके बाद स्टेट ऑयल फ्यूल फंड की घोषणा के बाद गुरुवार सुबह 5 बजे नई कीमतें लागू होने से पहले पेट्रोल भरवाने की होड़ मच गई, जिससे देश भर में सर्विस स्टेशनों पर लंबी लाइनें लग गईं। अचानक हुई बढ़ोतरी को लेकर सरकार की बहुत आलोचना हुई। हालांकि ऑयल फ्यूल फंड ऑफिस ने बाद में इस तेज बढ़ोतरी को कई वजहों का नतीजा बताया, पीएम अनुतिन शनिवार तक इस फैसले पर चुप थे। 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ यूएस-इजरायल संघर्ष शुरू होने के बाद पहले 15 दिनों में, सरकार ने जनता पर बोझ कम करने के लिए फ्यूल की कीमतों पर कैप लगाने की कोशिश की, यह अनुमान लगाते हुए कि युद्ध ज्यादा दिन नहीं चलेगा। युद्ध के पहले तीन हफ्तों में ऑयल फंड ने कीमतों पर सब्सिडी देने में 20 बिलियन बहत खर्च किए, और एक बार जब रोजाना की सब्सिडी की लागत 2 बिलियन बहत तक पहुंच गई तो परेशानी शुरू हो गई। अनुतिन ने कहा, "जैसे हालात है उसमें ये सब जल्द खत्म नहीं होने वाला, इसलिए सरकार को कुछ उपायों में बदलाव करना पड़ा है, और कम आय वाले मजदूरों, किसानों और (ट्रांसपोर्ट) ऑपरेटर्स पर ध्यान देना पड़ा है।" उन्होंने बताया कि प्राइस-कैप खत्म करने का मतलब पूरी तरह से फ्लोटिंग कीमतें नहीं हैं, बल्कि सब्सिडी रेट को कम करना है—24 बहत प्रति लीटर से 16 बहत तक। यह ग्लोबल मार्केट की स्थितियों को बेहतर ढंग से दिखाएगा। पीएम ने कहा कि 77 मिलियन लीटर रोजाना की रिफाइनिंग कैपेसिटी के साथ, थाईलैंड के पास 67 मिलियन लीटर के औसत फ्यूल कंजम्पशन को पूरा करने के लिए काफी आपूर्ति है, लेकिन हाल ही में पैनिक बाइंग ने रोजाना की डिमांड को 82 मिलियन लीटर तक बढ़ा दिया है—जो औसत से 22 फीसदी ज्यादा है। अनुतिन के मुताबिक अब हालात काबू में हैं, लेकिन जनता से अपील की गई कि वे रोज एक लीटर बचाने की कोशिश करें।

संघर्ष के साये में तेल आपूर्ति जारी, भारत आ रहे जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरेंगे

नई दिल्ली पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए पेट्रोलियम उत्पाद लेकर आ रहे दो और जहाजों के शनिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की संभावना है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। हाल ही में ईरान ने अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते संघर्ष के बाद इस जलमार्ग पर 'पूर्ण नियंत्रण' होने का दावा किया है, जिससे क्षेत्र में अनिश्चितता और बढ़ गई है। सूत्रों के अनुसार, भारतीय नौसेना के युद्धपोत प्रमुख बंदरगाहों के पास तैनात किए गए हैं ताकि जरूरत पड़ने पर जहाजों को सहायता दी जा सके। आने वाले दिनों में और जहाजों के इस रास्ते से भारत पहुंचने की उम्मीद है। इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि यह जलमार्ग भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान जैसे 'मित्र देशों' के लिए खुला हुआ है। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने शुक्रवार को बताया कि एलपीजी से भरे चार जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर भारत पहुंच चुके हैं। मंत्रालय ने यह भी भरोसा दिलाया कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए संबंधित देशों के साथ लगातार संपर्क में है ताकि जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके। एक संयुक्त मंत्रालयी प्रेस ब्रीफिंग में पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने कहा कि सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और सभी संबंधित पक्षों के साथ समन्वय कर रही है। उन्होंने बताया कि पिछले 24 घंटों में खाड़ी क्षेत्र में किसी भारतीय जहाज या भारतीय नाविक से जुड़ी कोई घटना सामने नहीं आई है और सभी सुरक्षित हैं। सिन्हा ने यह भी कहा कि इस समय फारस की खाड़ी में करीब 20 भारतीय झंडे वाले जहाज काम कर रहे हैं, जिनमें लगभग 540 भारतीय क्रू मेंबर मौजूद हैं और सभी सुरक्षित हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देश के सभी बंदरगाहों पर कामकाज सामान्य रूप से चल रहा है और कहीं भी जाम या रुकावट की कोई जानकारी नहीं है। हालांकि, कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि संघर्ष शुरू होने के बाद इस जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही सीमित कर दी गई है। ईरान केवल कुछ जहाजों को ही गुजरने की अनुमति दे रहा है, जिससे देरी हो रही है और कुछ जहाज फंसे हुए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का एक बेहद अहम ऊर्जा मार्ग है, जहां से लगभग 20 प्रतिशत वैश्विक पेट्रोलियम व्यापार गुजरता है। इसलिए यहां का कोई भी तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर डाल सकता है।

भाजपा की चार्जशीट से गरमाया बंगाल: ममता सरकार पर गंभीर आरोप

कोलकाता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी सरकार के खिलाफ चार्जशीट जारी की है। इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह चार्जशीट टीएमसी सरकार के 15 सालों के काले कारनामों का संकलन है। भाजपा ने 40 पन्नों की चार्जशीट 'टीएमसी के 15 साल, पश्चिम बंगाल लहूलुहान' में तृणमूल कांग्रेस सरकार के 15 साल की खामियों को गिनाया है। इसमें घुसपैठ, व्यापक भ्रष्टाचार और संस्थागत पतन, वित्तीय कुप्रबंधन, प्रशासनिक विफलता, कानून व्यवस्था, महिला सुरक्षा, कृषि संकट, स्वास्थ्य सेवा का पतन और घोटालों का जिक्र है। चार्जशीट में आरोप लगाए गए हैं कि टीएमसी समर्थित सिंडिकेट घुसपैठियों को 'वोट बैंक' बनाने में मदद करने के लिए नकली आईडी कार्ड उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और जनसांख्यिकी खतरे में पड़ रही है। पश्चिम बंगाल की 2,216.7 किलोमीटर लंबी सीमा में से 569 किलोमीटर सीमा पर अभी भी बाड़ नहीं लगी है, जिसका कारण टीएमसी सरकार की ओर से घुसपैठ को बढ़ावा देने के लिए जमीन अधिग्रहण में की गई देरी है। 'बंगाल में सिंडिकेट राज' का आरोप लगाते हुए भाजपा ने कहा है कि कोयला, पीडीएस, एसएससी और मनरेगाजैसे क्षेत्रों में संस्थागत भ्रष्टाचार व 'कट-मनी' (कमीशन) की संस्कृति सभी नागरिक सेवाओं में फैल चुकी है। भाजपा ने चार्जशीट में दावा किया कि बंगाल में 2016 से अब तक 300 राजनीतिक हत्याएं और 13,000 से ज्यादा हत्या के प्रयास हुए। मुर्शिदाबाद, मोमिनपुर और महेशतला में बार-बार सांप्रदायिक अशांति फैली। महिलाओं के खिलाफ अपराधों का जिक्र करते हुए भाजपा ने आरोप लगाया कि पार्क स्ट्रीट से लेकर संदेशखाली तक न्याय दिलाने में सरकार विफल रही है। बंगाल में अकेले 2023 में महिलाओं के खिलाफ 34,738 अपराध दर्ज किए गए। भाजपा ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल से 6,688 कंपनियों का पलायन और 18,450 एमएसएमई बंद हुए हैं। इसी कारण बड़े पैमाने पर पूंजी का पलायन हुआ है। वहीं, बेरोजगारी दर के कारण 40 लाख से ज्यादा युवाओं को पलायन करने पर मजबूर होना पड़ा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा, "यह चार्जशीट बंगाल की जनता की ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ लगाई हुई है, जिसे भाजपा एक आवाज दे रही है। एक प्रकार से आने वाले चुनाव में बंगाल की जनता को तय करना है कि भय को चुनना है या भरोसे को चुनना है।" उन्होंने कहा कि यह चार्जशीट, सोनार बांग्ला का स्वप्न दिखाकर सिंडिकेट राज स्थापित कर बंगाल की जनता का शोषण करने वाले शासन की कहानी है। टीएमसी के कुशासन में बंगाल भ्रष्टाचार की प्रयोगशाला बन चुका है। ऊपर से नीचे तक आपराधिक सिंडिकेट जनता को परेशान कर रहे हैं। विकास के अभाव में बंगाल उद्योग के लिए एक प्रकार से कब्रिस्तान बन चुका है। अमित शाह ने कहा कि इस बार बंगाल की जनता ने तय किया है कि प्रचंड बहुमत के साथ प्रदेश में भाजपा की सरकार बनाई जाएगी। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि 6 मई को पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनेगी और 45 दिन में सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जो भूमि उपलब्ध करानी है, वह भारत सरकार को बंगाल की भाजपा सरकार उपलब्ध करा देगी और हम घुसपैठ को रोकेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि ढेर सारी भर्तियों में जो घोटाले हुए, उनमें कई युवाओं की उम्र सीमा समाप्त हो चुकी है। हम इसमें 5 साल का रिलैक्सेशन देंगे, और जिन युवाओं की भर्ती के लिए उम्र सीमा समाप्त हो चुकी है, उन्हें एसएससी भर्तियों में मौका भी देंगे, साथ ही पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करेंगे।

तबादलों को लेकर गरमाई सियासत, ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को घेरा

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि राज्य में आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के तबादले के जरिए भाजपा को विधानसभा चुनावों में फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। पश्चिम बर्दवान जिले के रानीगंज में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपा ने सभी सीमाएं पार कर दी हैं और अब एक 'लक्ष्मण रेखा' तय होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग, जिसे उन्होंने 'वैनिशिंग कमीशन' कहा, ने राज्य के 50 से 100 अधिकारियों का तबादला कर उन्हें केरल और तमिलनाडु भेज दिया है।  ममता बनर्जी ने कहा कि ये अधिकारी स्थानीय हालात से भली-भांति परिचित थे, लेकिन उन्हें हटाकर बाहर भेज दिया गया। उनके मुताबिक, यह कदम जनता पर दबाव बनाने, अवैध धन, नशीले पदार्थों और बाहरी गुंडों के प्रवेश को आसान बनाने के लिए उठाया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इससे दंगों को भड़काने की कोशिश हो रही है। उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाने के मुद्दे पर भी भाजपा को घेरा और कहा कि इस मामले में भी सीमाएं लांघी जा रही हैं। उन्होंने साफ कहा कि लोकतंत्र में एक मर्यादा होनी चाहिए और उसे पार नहीं किया जाना चाहिए। ममता बनर्जी ने मुर्शिदाबाद जिले के रघुनाथगंज में राम नवमी के जुलूस के दौरान हुई झड़पों का जिक्र करते हुए प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि फिलहाल प्रशासन चुनाव आयोग के नियंत्रण में है, इसलिए उन्हें इन घटनाओं के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "मेरे सभी अधिकारियों का तबादला कर दिया गया है और अब रघुनाथगंज में दंगे भड़काए जा रहे हैं। दुकानों में लूटपाट हुई और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। जब समय आएगा, तो हम हिंसा भड़काने वालों को नहीं छोड़ेंगे।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अगर भाजपा सत्ता में आती है, तो बुलडोजर की राजनीति शुरू हो जाएगी और लोगों को बेघर कर दिया जाएगा। बेहाला में बुलडोजर कार्रवाई का जिक्र करते हुए ममता बनर्जी ने प्रभावित लोगों से माफी मांगी और भरोसा दिलाया कि उनकी दुकानों और संपत्तियों का पुनर्निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने भाजपा पर दोहरे मापदंड अपनाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एक ओर भाजपा तृणमूल कांग्रेस को भ्रष्ट कहती है, वहीं दूसरी ओर खुद अवैध कोयला खनन से पैसा जुटाती है। रैली के दौरान ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल की सांप्रदायिक सौहार्द की परंपरा को भी दोहराया। उन्होंने कहा कि यहां सभी धर्मों के लोग मिलकर राम नवमी, दुर्गा पूजा, ईद और क्रिसमस जैसे त्योहार मनाते हैं। इसके साथ ही उन्होंने रानीगंज के भूस्खलन प्रभावित इलाकों के लिए पुनर्वास पैकेज की घोषणा की। उन्होंने कहा कि जो लोग इन जोखिम भरे क्षेत्रों से सुरक्षित स्थान पर जाना चाहते हैं, उन्हें 10 लाख रुपए और दो फ्लैट दिए जाएंगे। सरकार स्थानांतरण का पूरा खर्च भी उठाएगी। उन्होंने बताया कि अब तक 2,000 फ्लैट बनाए जा चुके हैं और 4,000 और बनाने की योजना है। ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि यह पूरी प्रक्रिया स्वैच्छिक होगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस प्रस्ताव पर विचार करें, क्योंकि किसी बड़े भूस्खलन से हजारों लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है।