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पीएम मोदी इजरायल पहुंचे, फ्लाइट रडार पर ‘एअर इंडिया वन’ विमान की सर्चिंग हुई सबसे ज्यादा

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल पहुंच गए हैं. इजरायल यात्रा पर निकले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फ्लाइट लोकेशन को दुनिया में इस वक्त सबसे ज्यादा ट्रैक किया जा रहा है. दुनिया भर के विमानों के मूवमेंट पर नजर रखने वाला पॉपुलर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म फ्लाइटरडार के डेटा बताते हैं कि इस वक्त पीएम मोदी की फ्लाइट मूवमेंट को विश्व में सबसे ज्यादा ट्रैक किया जा रहा है.  पीएम नरेंद्र बुधवार को दो दिनों की इजरायल यात्रा पर निकले हैं. फ्लाइटरडार एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है जो लाइव फ्लाइट ट्रैकिंग करता है. इसका मुख्य काम है दुनिया भर में उड़ रहे विमानों की रियल-टाइम लोकेशन, स्पीड, ऊंचाई, रूट, फ्लाइट नंबर आदि दिखाना है. फ्लाइटरडार के अनुसार बुधवार शाम पौने चार बजे जब पीएम मोदी की फ्लाइट सऊदी अरब से जॉर्डन में एंट्री कर रही थी उस वक्त इसे 7184 लोग लाइव ट्रैक कर रहे थे.  पीएम मोदी का विमान इजरायल के लिए पाकिस्तान और ईरान के एयर स्पेस को पूरी तरह से एवॉइड कर रहे हैं. पीएम मोदी की फ्लाइट दिल्ली से निकलकर गुजरात होते हुए अरब सागर को पार कर ओमान पहुंचा, इसके बाद सऊदी अरब पहुंचा, यहां से उनका प्लेन सऊदी अरब के एयर स्पेस बीच से होकर गुजरा. इसके बाद उनका विमान जॉर्डन पहुंचा. जॉर्डन के बाद इजरायल की सीमा शुरू हो जाती है.  पीएम मोदी एयर इंडिया वन से इज़रायल जा रहे हैं.  यह भारत सरकार का विशेष विमान है, जो प्रधानमंत्री और अन्य उच्च पदाधिकारियों के लिए इस्तेमाल होता है. आमतौर पर यह Boeing 777-300ER या कभी-कभी दो विमानों का फ्लीट होता है, जो स्पेशल कॉन्फ़िगरेशन के साथ आता है. इस विमान में कमांड सेंटर, सिक्योर कम्युनिकेशन और डिफेंस सिस्टम्स शामिल होते हैं.  पीएम मोदी 25 फरवरी 2026 को सुबह पालम एयर फोर्स स्टेशन से रवाना हुए. उनका विमान तेल अवीव के बेन गुरियन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंड हुआ. भारत से इजरायल की डायरेक्ट फ्लाइट लगभग 6-7 घंटे की होती है. 

मुंबई में 25 बांग्लादेशी नागरिकों की गिरफ्तारी, कोलकाता-दिल्ली-गुजरात से होकर पहुंचे थे मुंबई

मुंबई   मुंबई के अंधेरी पश्चिम स्थित यारी रोड इलाके में वर्सोवा पुलिस स्टेशन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 25 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार ये सभी लोग अवैध रूप से भारत में रह रहे थे और पिछले कई वर्षों से मुंबई शहर में ठिकाना बनाए हुए थे। गिरफ्तार किए गए 25 लोगों में 21 ट्रांसजेंडर, 2 महिलाएं और 2 पुरुष शामिल हैं। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मुखबिर से सूचना मिली थी कि ये सभी लोग देर रात यारी रोड स्थित एक दरगाह में एकत्रित होने वाले हैं। सूचना के आधार पर वर्सोवा पुलिस की एंटी-टेरर सेल (एटीसी) टीम ने इलाके में छापा मारकर सभी को हिरासत में ले लिया। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से बड़ी संख्या में भारतीय और बांग्लादेशी दस्तावेज बरामद किए हैं। उन्होंने बताया कि प्राथमिक जांच में सामने आया है कि सभी आरोपी बांग्लादेश से अवैध रूप से पहले कोलकाता पहुंचे थे। इसके बाद वे दिल्ली और गुजरात होते हुए मुंबई आए। मुंबई पहुंचने के बाद आरोपियों ने फर्जी तरीके से भारतीय पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज भी बनवा लिए थे। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इन दस्तावेजों को तैयार कराने में किन लोगों की भूमिका रही और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन शामिल है। वर्सोवा पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और उन्हें वापस बांग्लादेश भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिकारियों के अनुसार, आगे की जांच जारी है ताकि इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों का भी पता लगाया जा सके और अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके। पुलिस का कहना है कि शहर में अवैध रूप से रह रहे लोगों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। इन लोगों से पूछताछ की जा रही है, जिससे शहर में और लोगों का पता लगाया जा सके। पुलिस अधिकारी ने बताया कि अवैध रूप से रह रहे लोगों को खोजने के लिए टीम पहले ही बनाई गई थी, जो लगातार इन लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है।

केसेट में तिरंगे की झलक, इजरायली मीडिया ने कहा – नमस्ते मोदी, ऐतिहासिक स्वागत तय

तेल अवीव पीएम मोदी के सत्ता में आने के बाद से यह बैरियर टूटा है और इजरायल से करीबी बढ़ी है। भारत-इजरायल के संबंधों में काफी करीबी आई है। बता दें कि इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने नरेंद्र मोदी को अपना प्रिय मित्र बताया है। उन्होंने कहा कि हमने कैबिनेट में भी अपने दोस्त के इजरायल आने को लेकर चर्चा की है। पीएम नरेंद्र मोदी इजरायल के दौरे पर निकल गए हैं। वह दो दिन इजरायल रहेंगे और इस दौरान वहां के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मिलेंगे। उनकी इस विजिट को लेकर इजरायल में काफी उत्साह देखा जा रहा है। वह इजरायल की संसद नेसेट (Knesset) को संबोधित करेंगे। ऐसा करने वाले वह भारत के पहले प्रधानमंत्री होंगे। इससे पहले 2017 में वह इजरायल गए थे और वह यहूदी मुल्क पहुंचने वाले भारत के पहले पीएम थे। अब संसद को संबोधित करने का रिकॉर्ड भी उनके नाम होगा। इस बीच इजरायल में भी सरकार से लेकर मीडिया तक में उनकी मौजूदगी को लेकर उत्साह है। इजरायल के बड़े अखबार येरूशलम पोस्ट ने उनका खास अंदाज में स्वागत किया है। पीएम नरेंद्र मोदी को समर्पित करते हुए एक अलग पेज ही येरूशलम पोस्ट ने प्रकाशित किया और इसका शीर्षक दिया है- नमस्ते मोदी। अखबार के एडिटर इन चीफ विका क्लेन ने अखबार का पहला पेज सोशल मीडिया पर शेयर किया है। इसमें नरेंद्र मोदी की तस्वीर दिख रही है। इसके अलावा पेज पर इजरायल और भारत के संबंधों से जुड़ी कई स्पेशल खबरें भी हैं। एक खबर का शीर्षक है, वेलकम मोदी। इसके अलावा एक अन्य हेडलाइन है- दिल्ली की येरूशलम से बढ़ती साझेदारी। अखबार ने मास्टहेड में नमस्ते हिंदी और हिब्रू दोनों भाषाओं में लिखा है। इसके साथ ही यह भी लिखा है कि दुनिया की दो प्राचीनतम सभ्यताएं अपने करीब आने का नया अध्याय लिख रही हैं। अखबार का पूरा पहला पेज ही भारत और इजरायल के रिश्तों को समर्पित है। इस बीच इजरायल की संसद को तिरंगे की रोशनी में रंग दिया गया है। इसकी भी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की गई हैं। नेसेट में पीएम नरेंद्र मोदी के संबोधन के दौरान पीएम नेतन्याहू समेत पूरी कैबिनेट मौजूद रहेगी। इजरायल और भारत के रिश्ते बीते कुछ सालों में तेजी से बढ़े हैं। लेकिन अब संसद को संबोधित करने का मौका मिलना भारत के लिए बड़ी बात है। लंबे समय तक भारत ने फिलिस्तीन और इजरायल के विवाद में कोई स्पष्ट राय रखने से दूरी बनाई है। नेतन्याहू बोले- कैबिनेट में भी हुई पीएम मोदी के आने की चर्चा भारत की राय टू-स्टेट सॉलूशन के पक्ष में रही है, लेकिन इजरायल के बहुत करीब आने से देश बचता रहा है। लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद से यह बैरियर टूटा है। भारत और इजरायल के संबंधों में काफी करीबी आई है। बता दें कि इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने नरेंद्र मोदी को अपना प्रिय मित्र बताया है। उन्होंने कहा कि हमने कैबिनेट में भी अपने दोस्त के इजरायल आने को लेकर चर्चा की है।  

ट्रंप का विवादास्पद दावा- ‘मैं न होता तो PAK के 3.5 करोड़ लोग होते मारे’, ऑपरेशन सिंदूर पर बयान

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध समेत आठ युद्धों को रोकने के अपने दावे को दोहराया. हालांकि, उन्होंने अपने 'स्टेट ऑफ द यूनियन' संबोधन में एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि उन्होंने भारत के ऑपरेशन सिंदूर को रोककर 3.5 करोड़ लोगों की जान बचाई थी. ट्रंप ने दावा किया कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उनसे कहा था कि अगर उन्होंने हस्तक्षेप नहीं किया होता तो पिछले साल भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 3.5 करोड़ लोग मारे गए होते. ट्रंप का यह बयान भारत के खिलाफ मई 2025 में चार दिवसीय सैन्य संघर्ष के दौरान पाकिस्तान के बैकफुट पर होने का स्पष्ट संकेत देता है. डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा, 'अपने पहले 10 महीनों में, कंबोडिया और थाईलैंड समेत मैंने आठ युद्ध रुकवाए. ये मजाक नहीं है. पाकिस्तान और भारत के बीच परमाणु युद्ध हो सकता था. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने मुझसे कहा कि अगर मैं हस्तक्षेप न करता तो 3.5 करोड़ लोगों की मौत होती.' ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले 'स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन' के दौरान अपनी उपलब्धियों का बखान करते हुए ये दावे किए. ट्रंन ने इन आठ युद्धों को रोकने का किया दावा डोनाल्ड ट्रंप ने जिन युद्धों को सुलझाने का दावा किया है, उनमें- इजरायल और हमास, इजरायल और ईरान, मिस्र और इथियोपिया, भारत और पाकिस्तान, सर्बिया और कोसोवो, रवांडा और कांगो, आर्मेनिया और अजरबैजान, कंबोडिया और थाईलैंड के बीच के संघर्ष शामिल हैं. भारत ने पाकिस्तान के साथ चार दिवसीय संघर्ष के दौरान दोनों देशों के बीच सीजफायर कराने में भूमिका निभाने के ट्रंप के दावों को बार-बार खारिज किया है. संघर्ष को रोकने में ट्रंप की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चुटकी लेते हुए इससे इनकार किया था. भारत ने ट्रंप के दावे को हर बार किया खारिज उनसे पूछा गया था कि पाकिस्तान के साथ सैन्य संघर्ष के दौरान यूएस कहां था? मतलब अमेरिका की क्या भूमिका थी. इस पर कूटनीतिक भाषा में जवाब देते हुए जयशंकर ने कहा था, 'यूएस, यूनाइटेड स्टेट्स आफ अमेरिका में था.' उनके इस जवाब का मतलब था कि अमेरिका का भारत पाकिस्तान सीजफायर में कोई भूमिका नहीं थी. भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने भी सीजफायर में किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप को खारिज किया था. उन्होंने कहा था, 'पाकिस्तान के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन (DGMO) ने हॉटलाइन पर अपने भारतीय समकक्ष से संपर्क किया और संघर्ष खत्म का अनुरोध किया, जिसके परिणामस्वरूप दोनों देशों के बीच युद्धविराम समझौता हुआ.'

राष्ट्रपति ट्रंप का बयान- इनकम टैक्स के बदले टैरिफ आ रहा है, विदेशी कर रहे हैं भुगतान

 वाशिंगटन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में पहली बार अमेरिकी कांग्रेस में वार्षिक 'स्टेट ऑफ द यूनियन' संबोधन दे रहे हैं. ट्रंप ने अपने कार्यकाल में देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का दावा किया. उन्होंने कहा कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था पहले कभी इतनी तेजी से नहीं बढ़ी और दावा किया कि देश को पहले डेड कहा जाता था, अब हम सबसे आगे हैं. ट्रंप ने यह भी दोहराया कि उन्होंने 'ड्रिल, बेबी, ड्रिल' का अपना वादा निभाया है. यह नारा अमेरिकी राष्ट्रपति और अन्य रिपब्लिकन नेताओं द्वारा अमेरिका में तेल और गैस ड्रिलिंग को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा दूसरे देशों पर लगाए गए टैरिफ को असंवैधानिक बताकर खारिज करने के बाद डोनाल्ड ट्रंप अपने फैसले को जायज ठहराने के लिए तरह-तरह के पैंतरे आजमा रहे हैं. यूएस सुप्रीम कोर्ट ने स्वीपिंग टैरिफ खत्म किया तो ट्रंप ने 15% ग्लोबल टैरिफ का एलान कर दिया. अब यूएस कांग्रेस में अपने संबोधन में उन्होंने टैरिफ को इनकम टैक्स का सब्सिट्यूट बता दिया. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, 'मेरा मानना ​​है कि विदेशी देशों द्वारा चुकाए जा रहे ये टैरिफ, हमारे देश में इनकम टैक्स की आधुनिक प्रणाली को काफी हद तक प्रतिस्थापित कर देंगे, जिससे मेरे देशवासियों पर से एक बड़ा वित्तीय बोझ कम हो जाएगा.' स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन में राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी पुरुष हॉकी के ओलंपिक हीरो कॉनर हेलेब्यूक को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'प्रेसिडेंशियल मेडल ऑफ फ्रीडम' से सम्मानित करने की घोषणा की. अमेरिकी पुरुष हॉकी टीम के खिलाड़ी ट्रंप के संबोधन के दौरान यूएस कैपिटल में मौजूद थे. अमेरिका ने 2026 विंटर ओलंपिक के फाइनल में कनाडा को हराकर 46 साल बाद हॉकी में स्वर्ण पदक जीता. अमेरिकी सीमा अब सुरक्षित और दुश्मन डरे हुए हैं: ट्रंप डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिकी सीमा अब सुरक्षित है और दुश्मन डरे हुए हैं. उन्होंने कहा, 'हमारी सेना और पुलिस पहले से कहीं अधिक मजबूत है, और वैश्विक मंच पर अमेरिका को एक बार फिर सम्मान प्राप्त है.'अमेरिकी राष्ट्रपति ने इमिग्रेशन का मुद्दा उठाया, जो उनके चुनाव अभियान के प्रमुख मुद्दों में से एक था, और अपने प्रशासन के दौरान इसमें महत्वपूर्ण बदलाव का दावा किया. उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले एक साल में अमेरिका-मेक्सिको सीमा पर घातक फेंटानिल की तस्करी में रिकॉर्ड 56 प्रतिशत की गिरावट आई है. ट्रंप ने कहा कि अवैध आव्रजन और मादक पदार्थों की तस्करी पर अंकुश लगाने के प्रयासों से परिणाम मिले हैं, और उन्होंने दावा किया कि चार साल तक बेरोकटोक सीमा पार करने के बाद, अब अमेरिका के पास देश के इतिहास की 'सबसे मजबूत और सुरक्षित सीमा' है. उन्होंने कहा कि आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल के अंत तक मेक्सिको के साथ लगने वाली अमेरिकी सीमा पर अवैध घुसपैठ रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई थी. महंगाई पिछले पांच वर्षों में सबसे निचले स्तर पर: ट्रंप ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान महंगाई पर काबू पाने का दावा किया. उन्होंने अपने पूर्ववर्ती, जो बाइडेन के कार्यकाल के दौरान देश के इतिहास में सबसे भीषण महंगाई होने का आरोप लगाया. अमेरिकी संसद को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि उनके प्रशासन ने 12 महीनों के भीतर महंगाई को पिछले पांच वर्षों में सबसे निचले स्तर पर ला दिया है. उन्होंने यह भी दावा किया कि चुनाव के बाद से शेयर बाजार ने 53 बार सर्वकालिक उच्च स्तर दर्ज किया है और कहा कि उनकी सरकार ने अपने पहले वर्ष में 18 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का निवेश आकर्षित किया है.

भारत ने दिखाई मजबूती, रूस के साथ खड़े होकर दुश्मनों को किया पीछे

नई दिल्ली रूस-यूक्रेन के बीच जब युद्ध शुरू हुआ था, तो पश्चिमी देशों ने कसम खा ली थी कि वे रूस को दुनिया में बिल्कुल अकेला कर देंगे. उस पर पाबंदियों की ऐसी झड़ी लगाई गई कि लगा रूस की अर्थव्यवस्था ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगी. लेकिन आज तस्वीर बिल्कुल उलट चुकी है. रूस को अलग-थलग करने चले देश आज खुद बंटे हुए नजर आ रहे हैं और रूस की तो मानो चांदी हो गई है. इस पूरी कहानी में गेमचेंजर बना है भारत. भारत ने जिस तरह पश्चिमी देशों के भारी दबाव के बावजूद रूस से सस्ता तेल खरीदना जारी रखा, उसने दुनिया के कई अन्य देशों को भी हिम्मत दी है. अब भारत की तरह ही कई और देश रूस के साथ डटकर खड़े हो गए हैं. स्थिति यह आ गई है कि जो देश कल तक रूस के पक्के दुश्मन बने हुए थे और हर दिन नई पाबंदियां लगाने की वकालत करते थे, वे भी अब पीछे हटते दिख रहे हैं. भारत का दांव- हम वहीं से खरीदेंगे, जहां फायदा होगा रूस-यूक्रेन युद्ध के शुरुआत से ही अमेरिका और यूरोपीय देशों ने भारत पर भारी दबाव बनाया था कि वह रूस से तेल न खरीदे. उनका तर्क था कि रूस से तेल खरीदकर भारत एक तरह से इस युद्ध को फंड कर रहा है. लेकिन भारत ने अपनी विदेश नीति को बिल्कुल साफ रखा. भारत सरकार का सीधा सा स्टैंड था, हमारे लिए हमारे देश की 140 करोड़ की आबादी सबसे पहले है. अगर हमें कहीं से सस्ता तेल मिलेगा, जिससे हमारे देश में पेट्रोल-डीजल के दाम काबू में रहें और महंगाई न बढ़े, तो हम वहीं से तेल खरीदेंगे. आज भी यही खबर आ रही कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद नहीं कर रहा है. भारत के इस नेशन फर्स्ट वाले रवैये ने दुनिया को एक बड़ा संदेश दिया. दुनिया को समझ आ गया कि एनर्जी स‍िक्‍योर‍िटी किसी भी देश का पहला अधिकार है और इसके लिए किसी महाशक्ति के आगे झुकने की जरूरत नहीं है. भारत का यही स्टैंड अब दुनिया के कई देशों के लिए रोल मॉडल बन गया है. अब हंगरी बोला- दबाव के आगे नहीं झुकेंगे भारत ने जो रास्ता दिखाया, अब यूरोपीय देश हंगरी भी उसी पर पूरी ताकत से चल पड़ा है. हंगरी ने यूरोपीय यूनियन की आंखों में आंखें डालकर साफ कह दिया है कि वह रूस से तेल खरीदने के मामले में किसी के दबाव में नहीं आएगा. हंगरी के विदेश मंत्री पीटर सिज्जार्टो ने दो टूक कहा, हम मौजूदा विकल्पों से ज्यादा महंगे और कम भरोसेमंद ऊर्जा स्रोत खरीदने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं हैं. उनका सीधा सा मतलब था कि जब रूस हमें सस्ता और भरोसेमंद तेल और गैस दे रहा है, तो हम सिर्फ यूरोप की राजनीति के चक्कर में कहीं और से महंगा तेल क्यों खरीदें? सिज्जार्टो ने इसे देश का अध‍िकार बताया. यानी यह हंगरी का अपना फैसला है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतें कैसे पूरी करे, इसमें कोई दूसरा देश दखल नहीं दे सकता. हंगरी के इस रुख ने यूरोप के उन देशों की नींद उड़ा दी है जो रूस की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ना चाहते थे. हंगरी यह बात अच्छे से जानता है कि अगर उसने रूस से तेल और गैस लेना बंद कर दिया, तो उसके देश में हाहाकार मच जाएगा, महंगाई आसमान छूने लगेगी और इंडस्ट्रीज बंद होने की कगार पर आ जाएंगी. इसलिए उसने कूटनीति से ज्यादा अपने देश की अर्थव्यवस्था को चुना है. यूरोपीय यूनियन में फूट: पाबंदियों पर नहीं बन पा रही बात एक समय था जब यूरोपीय यूनियन रूस के खिलाफ पाबंदियों का नया पैकेज लाने के लिए बस एक इशारे का इंतजार करता था. लेकिन अब हालात बदल गए हैं. खुद यूरोपीय यूनियन ने मान लिया है कि फिलहाल रूस पर नई पाबंदियां लगाने के मामले में कोई फैसला नहीं हो पाएगा. ईयू की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने सोमवार को ब्रसेल्स में अपनी बेबसी जाहिर की. उन्होंने कहा, यूरोपीय देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में रूस के खिलाफ प्रस्तावित नए पाबंदियों के पैकेज पर सहमति नहीं बन पाएगी. इसका सबसे बड़ा कारण हंगरी का लगातार विरोध है. नियम के मुताबिक, यूरोपीय यूनियन में कोई भी बड़ा फैसला तभी लागू होता है जब सभी सदस्य देश उस पर सहमत हों. हंगरी ने वीटो पावर का इस्तेमाल करके ईयू के मंसूबों पर पानी फेर दिया है. जर्मनी की छटपटाहट: ‘हंगरी को मनाएंगे’ हंगरी के इस कड़े रुख से जर्मनी जैसे बड़े यूरोपीय देश काफी नाराज और परेशान हैं. जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल ने अपनी भड़ास निकालते हुए कहा कि वे हंगरी से अपनी जिद छोड़ने की अपील करेंगे. वाडेफुल ने कहा, मुझे नहीं लगता कि हंगरी के लिए अपनी आजादी और यूरोपीय संप्रभुता के संघर्ष को धोखा देना सही है. हम एक बार फिर से बुडापेस्ट और ब्रसेल्स में हंगरी के सामने अपनी दलीलें रखेंगे और उनसे अपने रुख पर पुनर्विचार करने को कहेंगे. लेकिन कूटनीति के जानकार मानते हैं कि जर्मनी की यह अपील शायद ही कोई असर दिखाए. यूरोप के कई देश अब अंदर ही अंदर यह समझ चुके हैं कि बिना रूसी ऊर्जा के उनका गुजारा मुश्किल है. ऊपर से वे आदर्शवाद की बातें करते हैं, लेकिन अंदर से उनकी अर्थव्यवस्थाएं भी सस्ते ईंधन के लिए तरस रही हैं. ट्रंप फैक्टर ने यूरोप को भारत के करीब ला दिया इस पूरी कहानी में एक और बहुत बड़ा और दिलचस्प एंगल है, और वो है अमेरिका का ट्रंप फैक्टर. डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां हमेशा से अमेरिका फर्स्ट की रही हैं. उनका अंदाज मनमानी भरा रहा है. वे कब किस देश से कैसा व्यवहार करेंगे, यह कोई नहीं जानता. ट्रंप कई बार यूरोपीय देशों को धमका चुके हैं कि वे अपनी सुरक्षा का खर्च खुद उठाएं, अमेरिका हमेशा उनका बिल नहीं भरेगा. ट्रंप की इसी मनमानी और अनिश्चितता ने यूरोपीय देशों को डरा दिया है. यूरोप को अब लगने लगा है कि अमेरिका के भरोसे बैठकर रूस से पूरी तरह दुश्मनी मोल लेना अक्लमंदी नहीं है. अगर कल को अमेरिका ने हाथ खींच लिया, तो यूरोप बीच मझधार में फंस जाएगा. यही वजह है कि अब … Read more

व्हाइट हाउस का बयान: ‘भारत टेक्नोलॉजी का पावरहाउस’, लेकिन AI पर दी चेतावनी

वाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रमुख विज्ञान सलाहकार ने कहा है कि भारत एक ‘तकनीकी महाशक्ति’ है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को आगे बढ़ाने की व्हाइट हाउस की योजना में उसकी अहम भूमिका है. उन्होंने भारत की इंजीनियरिंग क्षमता और तेजी से बढ़ते इकोसिस्टम की सराहना की. राष्ट्रपति के सहायक और व्हाइट हाउस के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नीति कार्यालय के निदेशक माइकल क्रैटसिओस ने फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में कहा, ‘भारत एक तकनीकी महाशक्ति है.’ विकासशील देशों को क्या चेतावनी दे रहे? हाल ही में इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में शामिल होकर लौटे टॉप अमेरिकन साइंटिफिक एडवाइजर ने कहा, ‘भारत हर साल बड़ी संख्या में इंजीनियर तैयार करता है, उसके पास मजबूत घरेलू प्रतिभा है और वह अच्छे उत्पाद और एप्लिकेशन विकसित कर रहा है.’ उन्होंने कहा कि विकसित और विकासशील देशों के बीच AI अपनाने की रफ्तार में अंतर हर दिन बढ़ रहा है. उनके मुताबिक दुनिया को मोटे तौर पर दो श्रेणियों में देखा जा सकता है और दोनों के लिए अलग तरह के उपायों की जरूरत है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर विकासशील देश स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा ढांचा, कृषि और आम नागरिकों से जुड़ी सरकारी सेवाओं जैसे क्षेत्रों में AI को प्राथमिकता नहीं देंगे, तो वे एक अहम मोड़ पर पीछे छूट सकते हैं. व्हाइट हाउस इस दिशा में ‘अमेरिकन AI एक्सपोर्ट्स प्रोग्राम’ को आगे बढ़ा रहा है. क्रैटसिओस ने कहा कि अब तक विकासशील देशों के सामने एक कठिन विकल्प होता था, लेकिन यह कार्यक्रम उन्हें बेहतर तकनीक, वित्तीय सहायता और लागू करने में सहयोग का नया रास्ता देता है. उन्होंने ‘वास्तविक AI स्वायत्तता’ का मतलब समझाते हुए कहा कि इसका अर्थ है सर्वोत्तम तकनीक का अपने लोगों के हित में उपयोग करना और वैश्विक बदलावों के बीच अपने देश की दिशा खुद तय करना. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह रणनीति किसी एक प्रतिस्पर्धी देश के खिलाफ नहीं है. उन्होंने कहा, ‘यह इस बात के बारे में है कि यूनाइटेड स्टेट्स के पास दुनिया की सबसे अच्छी एआई टेक्नोलॉजी है और कई देश इसे अपने इकोसिस्टम में चाहते हैं.’ भारत को बताया मजबूत पार्टनर मानकों के बारे में उन्होंने कहा कि एआई के अगले चरण में ‘एजेंट’ महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. ये एजेंट किस तरह आपस में संवाद करें और मिलकर काम करें, इसके लिए एक समान मानकों की जरूरत होगी. इसके लिए अमेरिकी संस्थान NIST ने पहल शुरू की है, ताकि ये सिस्टम्स सुरक्षित और प्रभावी तरीके से साथ काम कर सकें. वित्तीय संसाधन भी एक बड़ी चुनौती हैं, खासकर उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए. क्रैटसिओस ने कहा कि एआई का पूरा ढांचा महंगा होता है. इसमें ‘डेटा सेंटर्स, सेमीकंडक्टर्स, पावर जेनरेशन’ जैसी बुनियादी सुविधाएं जरूरी होती हैं. उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन यूएस इंटरनेशनल डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन, एक्सपोर्ट इंपोर्ट बैंक और दूसरी एजेंसियों के ज़रिए सपोर्ट जुटा रहा है. उन्होंने एक यूएस टेक कॉर्प्स की भी घोषणा की. उन्होंने कहा, ‘ये पीस कॉर्प्स वॉलंटियर्स की तरह होंगे, बस फोकस टेक्नोलॉजी पर होगा. हम टेक्निकल बैकग्राउंड वाले ऐसे लोगों की तलाश कर रहे हैं जो एआई सॉल्यूशन्स को इम्प्लीमेंट करने में मदद करना चाहते हैं.’ क्रैट्सियोस ने कहा कि भारत ‘लंबे समय से इस मामले में एक मजबूत पार्टनर रहा है कि यूनाइटेड स्टेट्स विदेशों में टेक्नोलॉजी कैसे शेयर करता है.’ उन्होंने बताया कि अमेरिकी बड़ी तकनीकी कंपनियों के भारत में डाटा सेंटर और शोध केंद्र मौजूद हैं, जिससे दोनों देशों के बीच एआई क्षेत्र में सहयोग और गहरा हो रहा है.

SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट के दखल का TMC ने किया स्वागत, EC पर लगाए बड़े आरोप

कोलकाता पश्चिम बंगाल में होने वाले चुनाव को लेकर सरगर्मियां जारी है। इसी कड़ी में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस ने भारत निर्वाचन आयोग पर गंभीर आरोप लगाया है। तृणमूल कांग्रेस ने एक्स पर लिखा है, भारत निर्वाचन आयोग ने बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के संचालन पर अपना नियंत्रण प्रभावी रूप से खो दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा लगातार आग्रह किए जाने पर इसके नियम और शर्तें सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्पष्ट रूप से निर्धारित की जा रही हैं। आज एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए सर्वोच्च न्यायालय को चुनाव आयोग की घोर अक्षमता और प्रशासनिक विफलता के कारण उत्पन्न भारी गतिरोध को दूर करने के लिए पड़ोसी राज्यों के न्यायाधीशों की तैनाती की अनुमति देने के लिए विवश होना पड़ा। यह हस्तक्षेप अपने आप में बहुत कुछ कहता है। कोर्ट ने दोहराया कि चुनाव आयोग द्वारा अधिसूचित या बाद में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्वीकृत सभी दस्तावेज, जिनमें आधार और माध्यमिक प्रवेश पत्र शामिल हैं, लंबित दावों और आपत्तियों के निपटान के लिए स्वीकार किए जाने चाहिए। यह स्पष्ट निर्देश भाजपा-चुनाव आयोग द्वारा मनमाने ढंग से नियमों को बदलने और दस्तावेजी मानकों में हेरफेर करने के प्रयास को विफल कर देता है। बंगाल में मतदाताओं को चुनिंदा रूप से निशाना बनाने, डराने-धमकाने और परेशान करने की साजिश एक बार फिर न्यायिक बाधा से टकरा गई है। चुनाव आयोग जैसे संस्थानों को कानून की सीमाओं के भीतर कार्य करना चाहिए, न कि पक्षपातपूर्ण हितों के इशारे पर। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में जारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) की प्रक्रिया में ओडिशा और झारखंड के न्यायिक अफसर शामिल किए जाने के आदेश जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर विवाद पर जारी सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इनके खर्च का वहन निर्वाचन आयोग को करने का आदेश भी दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को 28 फरवरी को पश्चिम बंगाल की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने की अनुमति दी है। कोर्ट के इस फैसले का तृणमूल कांग्रेस ने स्वागत किया है।

पश्चिम बंगाल की 6 कोर्ट को उड़ाने की धमकी, अफरातफरी के बीच सर्च ऑपरेशन जारी

कोलकाता पश्चिम बंगाल की 6 जिला अदालतों में मंगलवार दोपहर बम की धमकी से हड़कंप मच गया। कोलकाता के सिटी सिविल एंड सेशंस कोर्ट, बैंकशॉल कोर्ट सहित हुगली जिले के चिनसुराह, पश्चिम बर्दवान के आसनसोल व दुर्गापुर और मुर्शिदाबाद के बेरहामपुर अदालतों को ई-मेल के जरिए बम प्लांट होने की सूचना मिली। इन धमकियों के कारण अदालतों को तुरंत खाली कराया गया और न्यायिक कार्य प्रभावित हुआ। पुलिस ने स्निफर डॉग्स, बम डिस्पोजल स्क्वाड और अन्य सुरक्षा टीमों को मौके पर भेजा। दोपहर 2 बजे तक की तलाशी में कहीं भी कोई विस्फोटक सामग्री नहीं मिली, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि ये धमकियां फर्जी या हूक ई-मेल थीं। हालांकि, कई अन्य अदालतों में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया गया ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। यह घटना ठीक उसी समय हुई जब राज्य के न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के बाद स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभ्यास में शामिल हो रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच मतदाता सूची संशोधन को लेकर उत्पन्न विवाद और अविश्वास की स्थिति में असाधारण कदम उठाया। इसने आदेश दिया था कि ओडिशा और झारखंड के कुछ न्यायिक अधिकारियों को बंगाल के लगभग 250 कार्यरत और सेवानिवृत्त जिला स्तर के न्यायाधीशों के साथ मिलाकर SIR प्रक्रिया में लगाया जाए। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य में करीब 60 लाख मतदाताओं से जुड़े विवादित दावों (जैसे लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी या अनमैप्ड कैटगरी) का समयबद्ध निपटारा करना है। अदालतों में जजों की व्यस्तता और सुरक्षा की जिम्मेदारी इसी अभ्यास से जुड़ी हुई मानी जा रही है। ई-मेल की जांच के लिए साइबर क्राइम विंग सक्रिय पुलिस और प्रशासन ने इन धमकियों को गंभीरता से लिया और ई-मेल के स्रोत की जांच के लिए साइबर क्राइम विंग को सक्रिय किया। दुर्गापुर कोर्ट के जिला जज देवप्रसाद नाथ ने इसे संभावित हूक बताया और कहा कि सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत ही अदालत खाली की गई। राज्य के मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती, डीजीपी पीयूष पांडे और कोलकाता पुलिस कमिश्नर सुप्रतिम सरकार ने नबन्ना में बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आश्वासन दिया कि SIR अभ्यास किसी भी कीमत पर प्रभावित नहीं होगा। उन्होंने न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का वादा किया। राज्य सरकार पर सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही सुरक्षा प्रदान करने का स्पष्ट निर्देश दिया था। SIR को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर यह घटना पश्चिम बंगाल में SIR अभ्यास के दौरान बढ़ते तनाव को दर्शाती है, जहां राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। फर्जी बम धमकियां शायद SIR प्रक्रिया को बाधित करने या न्यायिक अधिकारियों को डराने की कोशिश हो सकती हैं। हालांकि कोई नुकसान नहीं हुआ, लेकिन इससे सुरक्षा व्यवस्था की मजबूती और सतर्कता की आवश्यकता उजागर हुई है। SIR का कार्य समय पर पूरा करने के लिए सभी पक्षों को सहयोग करना होगा ताकि मतदाता सूची का निष्पक्ष संशोधन सुनिश्चित हो सके।  

भारत की बड़ी तैयारी से ड्रैगन और पाक में हलचल, Su-57 से बदलेगा ताकत का संतुलन?

वाशिंगटन ऑपरेशन सिंदूर के महज कुछ महीनों बाद ही भारतीय रक्षा गलियारों में नई हलचल देखने को मिल रही है। 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू हुआ यह ऑपरेशन भारत-पाकिस्तान के बीच हवाई संघर्ष का एक बड़ा सबक बन गया, जहां स्टील्थ और डिटेक्शन की क्षमता ने युद्ध की दिशा तय की। अब सूत्रों के हवाले से खबर आई है कि भारतीय वायु सेना अपनी ताकत को अगले स्तर पर ले जाने के लिए रूस के पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट सुखोई Su-57 की खरीद पर गंभीरता से विचार कर रही है। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, अगर डील आगे बढ़ी तो वायु सेना शुरुआत में 36 से 40 Su-57 जेट्स का ऑर्डर दे सकती है। यह कदम चीन के J-20 और संभावित पाकिस्तान को मिलने वाले स्टील्थ जेट्स के जवाब में एक मजबूत ब्रिज कैपेबिलिटी के रूप में देखा जा रहा है, खासकर जब भारत का अपना एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) 2035 के आसपास ही सेवा में आएगा। दरअसल, हवाई युद्ध अब एक ऐसे दौर में पहुंच चुका है जहां युद्ध क्षमता से ज्यादा पता लगने (डिटेक्शन) की क्षमता निर्णायक साबित हो गई है। सुखोई Su-57 जैसे पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान उन्नत स्टील्थ क्षमताओं से युक्त हैं, जिससे दुश्मन सेनाओं के लिए इनका पता लगाना बहुत मुश्किल हो जाता है। पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों में कई स्टील्थ फीचर्स होते हैं, जैसे रडार से बचाव के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया एयरफ्रेम। यह फ्रेम रडार, अवशोषक सामग्री से बना होता है। इन अत्याधुनिक विमानों में 'कम दृश्यता' के लिए विशेष हथियार, उन्नत सेंसर फ्यूजन और सुपरक्रूज क्षमताएं भी शामिल होती हैं। क्यों खास है 5वीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर Su-57? सुखोई की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, Su-57 में कई विशेषताएं हैं। वेबसाइट में कहा गया है कि यह पांचवीं पीढ़ी का विमान एक पूरी तरह नए, गहन रूप से एकीकृत एवियोनिक्स सिस्टम से लैस है, जिसमें युद्ध उपयोग और बुद्धिमान चालक दल सहायता के लिए उच्च स्तर का स्वचालन है। विमान के ऑन-बोर्ड उपकरण इसे न केवल स्वतंत्र रूप से काम करने में सक्षम बनाते हैं, बल्कि जमीनी नियंत्रण प्रणालियों के साथ तथा टास्क फोर्स के हिस्से के रूप में वास्तविक समय में डेटा का आदान-प्रदान करने में भी सक्षम बनाते हैं। सुखोई के अनुसार, यह जेट हवा से हवा और हवा से सतह पर मार करने वाले विभिन्न प्रकार के गोला-बारूद का इस्तेमाल कर सकता है, जिससे यह लड़ाकू और हमलावर दोनों भूमिकाएं निभा सकता है। रडार, इन्फ्रारेड और दृश्य तरंगदैर्ध्य में कम दृश्यता के कारण Su-57 गुप्त (स्टील्थ) कार्रवाई करने में सक्षम है। Su-57 की सहायक विद्युत इकाई के बारे में बताया गया है कि यह उच्च तैनाती स्वायत्तता प्रदान करती है, जमीनी परीक्षण के दौरान कम ईंधन खपत करती है और मुख्य इंजनों के जीवनकाल को बचाती है। सुखोई ने कहा है कि विमान में लगी ऑक्सीजन निष्कर्षण इकाई भी विमान के संचालन की उच्च स्वायत्तता सुनिश्चित करती है। जनरेटर-प्रकार की तटस्थ गैस प्रणाली वाली विस्फोट-रोधी ईंधन टैंक प्रणाली अन्य उपायों के साथ मिलकर विमान की उच्च स्तरीय युद्ध क्षमता सुनिश्चित करती है।