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पालमपुर में खुला देश का दूसरा ट्यूलिप गार्डन, महसूस करें ‘देखा एक ख्वाब’ वाली फीलिंग

पालमपुर  हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में धौलाधार की वादियों में देश का दूसरा ट्यूलिप गार्डन सैलानियों के लिए खोल दिया गया है. कश्मीर के बाद देश का दूसरा और प्रदेश का पहला ट्यूलिप गार्डन कुछ वर्ष पूर्व पालमपुर में हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान में स्थापित किया गया था. यहां पर ट्यूलिप्स की विभिन्न प्रजातियों को लगाया जाता है.  यह गार्डन हिमाचल प्रदेश की प्राकृतिक सौंदर्य को बढ़ावा एवं पर्यटन को अग्रसर करने में मदद कर रहा है. गौर रहे कि कश्मीर में ट्यूलिप गार्डन में चर्चित ‘देखा एक ख्वाब को सिलसिले हुए’ गाना शूट हुआ था और यह गाना ट्यूलिप से जोड़ा जाता है. जानकारी के अनुसार, पालमपुर स्थित आईएचबीटी संस्थान केंद्र सरकार और सीएसआईआर ने 2022 को फ्लोरीकल्चर मिशन के तहत इस ट्यूलिप गार्डन का आगाज किया था. संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. भव्य भार्गव ने कहा कि इस बार ट्यूलिप की 6 किस्मों के  50000 पौधे लगाए गए है. उन्होंने बताया कि 5 साल में 23 लाख ट्यूलिप तैयार करने का लक्ष्य रखा है. सीएसआईआर ने 2022 को फ्लोरीकल्चर मिशन के तहत इस ट्यूलिप गार्डन का आगाज किया था. सीएसआईआर के निदेशक डॉ. सुदेश कुमार यादव ने बताया कि जब से यह गार्डन खोला गया है कि तब से अब तक 4 लाख से ऊपर दर्शक यहां आ चुके हैं. इस बार भी दर्शकों  का आंकड़ा एक लाख से अधिक रहने की संभावना है. डॉ. सुदेश कुमार यादव ने कहा कि  संस्थान कुछ कम्पनी के  के साथ मिलकर बल्ब प्रोडक्शन पर काम कर रहा हैं इसमें और ऑफ सीजन में ट्यूलिप लेने की कोशिश की जा रही है. इस वर्ष दिल्ली मुख्यालय में भी 1000 से ज्यादा ट्यूलिप लगाए गए है और उन्हें भी आम जनता के लिए खोला दिया गया है. संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. भव्य भार्गव ने कहा कि इस बार ट्यूलिप की 6 किस्मों के  50000 पौधे लगाए गए है.गौर रहे कि हालैंड में ट्यूलिप के फूलों की सबसे अधिक पैदावार होती है और वहीं से अन्य देश इन्हें आयात करते हैं. भारत में भी हालैंड से ही ट्यूलिप मंगवाए जाते रहे हैं. हालांकि, अब आईएचबीटी के वैज्ञानिकों के प्रयासों से देश में फूलों की खेती में एक बड़े बदलाव हुआ है.

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर: 8वें वेतन आयोग पर सरकार ने दी नई जानकारी

नई दिल्ली सरकार ने साफ कर दिया है कि 8वां केंद्रीय वेतन आयोग (8th Pay Commission) औपचारिक रूप से गठित किया जा चुका है और तय समय सीमा के भीतर अपनी सिफारिशें देगा। राज्यसभा में पूछे गए सवालों के लिखित जवाब में वित्त मंत्रालय ने मंगलवार बताया कि 3 नवंबर 2025 को आयोग के गठन की अधिसूचना जारी कर दी गई थी। सांसदों ने सरकार से यह जानना चाहा था कि आयोग किन-किन मुद्दों की समीक्षा करेगा और उसकी सिफारिशें लागू होने की संभावित समय-सीमा क्या होगी। क्या है डिटेल सरकार के मुताबिक, 8वां वेतन आयोग केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतनमान, भत्ते, पेंशन ढांचे और सेवा शर्तों की समीक्षा करेगा। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। यानी मौजूदा समय-सीमा को देखते हुए रिपोर्ट 2027 तक आने की संभावना है। हालांकि, सरकार ने फिलहाल यह नहीं बताया है कि सिफारिशें लागू करने का रोडमैप क्या होगा या कोई चरणबद्ध योजना तैयार की गई है या नहीं। सरकार के बजट पर कितना बोझ पड़ेगा संसद में यह सवाल भी उठा कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने से केंद्र सरकार के बजट पर कितना बोझ पड़ेगा। इस पर सरकार ने कहा कि फिलहाल लागत का आकलन करना संभव नहीं है। आयोग की सिफारिशें आने और सरकार द्वारा उन्हें स्वीकार किए जाने के बाद ही वास्तविक वित्तीय प्रभाव का अंदाजा लगाया जा सकेगा। इसका मतलब है कि बजटीय योजना आयोग की अंतिम रिपोर्ट के बाद ही बनेगी। 12 फरवरी 2026 को देशव्यापी हड़ताल इधर, कर्मचारी संगठनों ने सरकार पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। कन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज एंड वर्कर्स (CCGEW) ने 12 फरवरी 2026 को देशव्यापी एक दिन की हड़ताल का ऐलान किया है। उनकी मांगों में 20% अंतरिम राहत, 50% महंगाई भत्ते का मूल वेतन में विलय और एनपीएस खत्म कर पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू करना शामिल है। ऐसे में संसद के अंदर सवालों और सड़कों पर बढ़ते दबाव के बीच 8वें वेतन आयोग की कार्यवाही पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

खुशखबरी: भारत की ट्रेड डील में संशोधन, दाल हटाई गई सूची से और अन्य बदलाव भी हुए लागू

नई दिल्ली India-US Trade Deal: भारत-अमेरिका ट्रेड डील में एक नया अपडेट हुआ है. अमेरिका ने भङारत के साथ हुई ट्रेड डील के फैक्टशीट में बड़ा बदलाव किया है. इस बदलाव से भारत को बड़ा फायदा होगा. दरअसल, वाइट हाउस ने फैक्टशीट में जो बदलाव किया है, उसके मुताबिक ट्रेड डील वाली लिस्ट से अब दाल हट गई है. पिछले हफ्ते भारत और अमेरिका ने अंतरिम व्यापार समझौते की घोषणा की थी. उस समय वाइट हाउस ने एक फैक्टशीट जारी की थी. उसमें कुछ बातें ऐसी थीं, जिनसे भारत को थोड़ी परेशानी हो सकती थी. इसे लेकर सवाल उठ रहे थे. लेकिन अब अमेरिका ने उस फैक्टशीट को अपडेट कर दिया है. ट्रेड डील वाली फैक्टशीट से कई चीजें हटा दी गई हैं या शब्द बदले गए हैं. इसमें सबसे अहम है दाल. जी हां, सबसे बड़ी खुशखबरी यह है कि दाल का जिक्र पूरी तरह हटा दिया गया है. पहले फैक्टशीट में साफ लिखा था कि भारत अमेरिकी दालों पर टैरिफ कम या खत्म करेगा. अब उस लिस्ट से ‘certain pulses’ शब्द निकाल दिए गए हैं. इसका मतलब साफ है कि भारत को अब अमेरिकी दालों पर टैरिफ घटाने की जरूरत नहीं है. भारतीय किसानों और दाल उत्पादकों के लिए यह बहुत अच्छी खबर है. पहला बड़ा बदलाव दाल दरअसल, बीते दिनों ही पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत हुई थी. इसके बाद अमेरिका और भारत के बीच ड्रेड डील पर सहमति बनी थी. इसके बाद एक फैक्टशीट जारी किया गया था. अब वाइट हाउस ने भारत के साथ हुए व्यापार समझौते का फैक्टशीट थोड़ा बदल दिया है. पहले की फैक्ट शीट में जो बातें लिखी गई थीं, अब उनमें से कुछ हिस्से हटा दिए गए हैं और कुछ शब्द भी बदल दिए गए हैं. पहला सबसे बड़ा बदलाव दाल ही है. दूसरा बड़ा बदलाव क्या? दूसरा बड़ा बदलाव है 500 अरब डॉलर खरीद का वादा. जी हां, भारत-अमेरिका ट्रेड डील के फैक्टशीट में पहले लिखा था कि भारत ‘committed’ है यानी वादा कर चुका है कि वह अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान खरीदेगा. अब शब्द बदलकर ‘intend’ कर दिया गया है यानी ‘इरादा है’. मतलब कि भारत ने कोई वादा नहीं किया है, बल्कि भारत इरादा रखता है. इरादा डील के हिसाब से बदल भी सकता है, मगर वादा नहीं. यहां भी राहत ही राहत इसके अलावा खरीद की लिस्ट से ‘Agricultural products’ भी हटा दिए गए हैं. अब सिर्फ एनर्जी, आईसीटी, कोयला और दूसरे उत्पादों का जिक्र है. यानी कृषि उत्पादों को खरीदने का कोई दबाव नहीं रहा. बदले हुए वर्जन में टेक्स्ट से खेती के सामान का ज़िक्र हटा दिया गया है. अब इसमें लिखा है, ‘भारत ज़्यादा अमेरिकी प्रोडक्ट खरीदने और $500 बिलियन से ज़्यादा की US एनर्जी, इन्फॉर्मेशन और कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी, कोयला और दूसरे प्रोडक्ट खरीदने का इरादा रखता है.’ और क्या बदलाव हुए? इसके अलावा, व्हाइट हाउस की अपडेटेड फैक्टशीट में भारत के अपने डिजिटल सर्विस टैक्स हटाने से जुड़ा टेक्स्ट भी हटा दिया गया है. पहले के टेक्स्ट में कहा गया था, ‘भारत अपने डिजिटल सर्विस टैक्स हटा देगा और डिजिटल ट्रेड में भेदभाव वाले या बोझिल तरीकों और दूसरी रुकावटों को दूर करने वाले मज़बूत बाइलेटरल डिजिटल ट्रेड नियमों पर बातचीत करने के लिए कमिटेड है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन पर कस्टम ड्यूटी लगाने पर रोक लगाने वाले नियम भी शामिल हैं. इसमें अब कहा गया है, ‘भारत ने डिजिटल ट्रेड के लिए भेदभाव वाले या बोझिल तरीकों और दूसरी रुकावटों को दूर करने वाले मज़बूत बाइलेटरल डिजिटल ट्रेड नियमों पर बातचीत करने का वादा किया है.’ राहत देने वाले हैं ये यूटर्न ये सारे बदलाव भारत के लिए राहत देने वाले हैं. अगर टैरिफ की बात करें तो भारत पर अब 18 फीसदी टैरिफ लग रहा है. यह पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन से कम है. यह समझौता लगभग एक साल की बातचीत के बाद हुआ. फरवरी 2025 से बातें चल रही थीं. पहले ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ लगा दिए थे. बाद में यह 18 फीसदी कर दिया गया. अब जब अमेरिका ने फैक्टशीट में ये बदलाव किए हैं तो लगता है कि भारत ने अपनी बात काफी मजबूती से रखी. भारत की दलीलों के कारण ही अमेरिका को कुछ बातें माननी पड़ीं. फैक्टशीट में बदलाव का क्या मतलब     दाल पर टैरिफ न घटाने का फैसला भारतीय किसानों के लिए बहुत बड़ा है. दाल हमारे देश में बहुत महत्वपूर्ण फसल है. अगर अमेरिकी दाल सस्ती होकर आती तो किसानों को नुकसान होता. अब वह खतरा टल गया.     500 अरब डॉलर की खरीद को भी ‘वादा’ से ‘इरादा’ बना दिया गया. इससे भारत पर कोई कानूनी बाध्यता नहीं रहेगी.     डिजिटल टैक्स पर भी भारत को तुरंत कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ेगी.  सिर्फ भविष्य में नियमों पर बात होगी. भारत का हित सर्वोपरि पहले समझौते की घोषणा के समय कुछ बातें थोड़ी सख्त लग रही थीं. लेकिन अब अमेरिका ने खुद अपनी लिस्ट को नरम कर दिया है. इससे साफ है कि भारत ने डील में अपना हित अच्छे से सुरक्षित रखा है. आगे जब पूरा डिटेल्ड समझौता आएगा तब और साफ होगा. लेकिन फिलहाल ये बदलाव भारत के लिए सकारात्मक हैं.

अमेरिका की ईरान पर हमले की तैयारी, सैटेलाइट तस्वीरों ने किया बड़ा खुलासा

न्यूयॉर्क मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर चरम पर पहुंच गया है. सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि अमेरिकी सैन्य अड्डों पर लड़ाकू विमानों, टैंकरों और मिसाइल डिफेंस सिस्टम की संख्या तेजी से बढ़ रही है. प्लैनेट लैब्स और रॉयटर्स की तस्वीरों में कतर, जॉर्डन और सऊदी अरब के अड्डों पर बदलाव साफ दिख रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यह ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर हमले की तैयारी या जवाबी कार्रवाई से बचाव का संकेत हो सकता है.   अमेरिका-ईरान के बीच तनाव  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान से न्यूक्लियर डील चाहते हैं, लेकिन बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर भी रोक की मांग कर रहे हैं. ईरान ने साफ मना कर दिया है. ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर डील नहीं हुई तो अगला हमला बहुत बुरा होगा. पिछले साल अमेरिका ने ईरान के न्यूक्लियर साइट्स पर हमले किए थे. अब फिर तनाव बढ़ रहा है. ईरान अपनी न्यूक्लियर साइट्स को मिट्टी से ढक रहा है. टनल बंद कर रहा है, जो हमले की आशंका दिखाता है. सैटेलाइट तस्वीरों में क्या दिख रहा है? अल उदेद एयर बेस, कतर: अमेरिकी सेंट्रल कमांड का मुख्यालय. 17 जनवरी से 1 फरवरी के बीच विमानों की संख्या बढ़ी है. मोबाइल पैट्रियट मिसाइल लॉन्चर्स तैनात किए गए है, जो ईरान की मिसाइलों से बचाव के लिए हैं.  मुवाफक साल्टी एयर बेस, जॉर्डन: 25 जनवरी से 2 फरवरी के बीच दर्जनों F-15E फाइटर जेट्स, A-10 ग्राउंड अटैक विमान और MQ-9 ड्रोन आए. यह ईरान के करीब है.  प्रिंस सुल्तान एयर बेस, सऊदी अरब: C-5 गैलेक्सी और C-17 ट्रांसपोर्ट विमान दिखे, जो भारी सामान ले जाते हैं. अन्य जगहों जैसे ओमान और डिएगो गार्सिया में भी विमान बढ़े हैं. कुल मिलाकर फाइटर जेट्स, टैंकर और डिफेंस सिस्टम की तैनाती बढ़ी है. इसका मतलब क्या है?     ट्रंप प्रशासन साफ संदेश दे रहा है कि वह तैयार है.     यह हमले की तैयारी हो सकती है, क्योंकि इतनी तैनाती महंगी है.     या ईरान की जवाबी मिसाइलों से बचाव, क्योंकि ईरान ने पहले अल उदेद पर हमला किया था.     ईरान भी अपनी न्यूक्लियर साइट्स (जैसे इस्फहान) को मजबूत कर रहा है, टनल मिट्टी से भर रहा है. आगे क्या? बातचीत चल रही है, लेकिन दोनों तरफ तैयारी जोरों पर है. अगर हमला हुआ तो क्षेत्रीय युद्ध हो सकता है. एक्सपर्ट कहते हैं कि यह डिप्लोमेसी को मजबूत करने का दबाव भी हो सकता है. 

चुनावी वादों ने खोली जापान की सच्चाई: वह तस्वीर जो दुनिया नहीं देखती

टोक्यो  यह खबर तो आपको भी पता चल गई होगी कि जापान में संपन्‍न हुए हालिया चुनाव में लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता सनाए तकाची ने 75.7 फीसदी सीटों पर कब्‍जा जमाकर जीत हासिल की है. यह दूसरे विश्‍व युद्ध के बाद किसी भी जापानी नेता को मिला सबसे बड़ा समर्थन है. इस चुनाव ने न सिर्फ जापान की सत्‍ता को ग्‍लोबल चर्चा का विषय बना दिया, बल्कि दुनिया के सामने जापान की ऐसी तस्‍वीर भी पेश की जिसके बारे में ज्‍यादातर लोगों को पता ही नहीं है. हमें आपको यही लगता होगा कि विकसित देशों की सूची में शामिल जापान आर्थिक प्रगति का रोल मॉडल है, लेकिन इस बार के चुनाव में की गई घोषणाओं ने जापान की पिछड़ी तस्‍वीर भी दुनिया के सामने रखी. दूसरा विश्‍व युद्ध समाप्‍त होने के बाद जापान साल 1960 से 1980 के बीच इकनॉमिक सुपरपॉवर बनकर उभरा. 90 के दशक तक जापान की जीडीपी ग्रोथ जी-7 में शामिल अन्‍य देशों के मुकाबले काफी तेज रही थी. इसके बाद से ही जापान की अर्थव्यवस्‍था पर दबाव बढ़ने लगा और आज तो यह भयंकर आर्थिक संकट में घिर चुका है. 60 से 70 और 70 से 80 के दशक में जापान की जीडीपी ग्रोथ 16.4 फीसदी और 17.9 फीसदी रही थी. साल 2010 से 2024 तक जापान की जीडीपी ग्रोथ शून्‍य से भी 2.4 फीसदी नीचे रही यानी फिलहाल वहां मंदी चल रही है. दुनिया में सबसे ज्‍यादा सरकारी कर्ज जापान इस समय आगे कुआं और पीछे खाई वाली स्थिति में है. एक तो उसकी जीडीपी ग्रोथ माइनस में चल रही है, जबकि सरकारी कर्ज जीडीपी के मुकाबले 230 फीसदी पहुंच गया है. यह दशकों से चले आ रहे घाटे वाले खर्चों का नतीजा है. जापान की नई प्रधानमंत्री सनाए तकाची ने अपने चुनावी वादों में अतिरिक्‍त खर्चों को घटाने और टैक्‍स कम करने का ऐलान किया था. इसके बाद से ही जापान के बॉन्‍ड मार्केट में हलचल बढ़ गई है. फिलहाल बॉन्‍ड यील्‍ड 3.56 फीसदी के साथ रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया है. इसे जापान के लिए डेट क्राइसिस की शुरुआत माना जा रहा है, जो ग्‍लोबल इकनॉमी के लिए जोखिम पैदा कर सकता है. कमजोर मुद्रा बन रही परेशानी जापान की मुद्रा येन भी लगातार कमजोर हो रही है, जो फिलहाल डॉलर के मुकाबले कई साल के निचले स्‍तर पर पहुंच गई है. जापान ने ब्‍याज दरों में बढ़ोतरी की है, जिससे आयात महंगा हो रहा है और महंगाई भी बढ़ रही है. अमेरिका के साथ टैरिफ वॉर की वजह से निर्यात में कमी आ रही और निवेश भी कमजोर पड़ा है. फिलहाल सबकुछ बैंक ऑफ जापान पर निर्भर करता है, जो आने वाले समय के लिए नीतियां निर्धारित करेगा और जापान को बेहतर बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है. गरीबों के लिए चुनावी वादे प्रधानमंत्री सनाए तकाची ने चुनावी वादों में गरीबों और निम्‍न आय वर्ग के लिए कई घोषणाएं की हैं. उनका कदम महंगाई से निपटने और स्थिर मजदूरी और बढ़ते खर्च से निपटने के लिए है. इस कड़ी में पीएम ने खाद्य उत्‍पादों पर 8 फीसदी का कंजप्‍शन टैक्‍स भी दो साल के लिए खत्‍म कर दिया है. इससे गरीब परिवारों के लिए भोजन की लागत कम होगी और उनके जीवन यापन में सुधार आएगा. साथ ही टैक्‍स छूट का दायरा भी बढ़ाए जाने की तैयारी है, ताकि निम्‍न आय वर्ग वालों की बचत को बढ़ाया जा सके.  

राहुल गांधी के Epstein Files बयान पर हरदीप पुरी का पलटवार, कहा– आरोपों में कोई सच्चाई नहीं

नई दिल्ली लोकसभा में बजट पर चर्चा के दौरान आज कांग्रेस संसद राहुल गांधी ने Epstein Files का जिक्र करते हुए सरकार पर हमला बोला। राहुल गांधी ने दावा किया कि अमेरिका के जस्टिस डिपार्टमेंट के पास मौजूद इन दस्तावेजों में एक केंद्रीय मंत्री और एक प्रमुख उद्योगपति का नाम शामिल है। सदन को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि एक खास उद्योगपति अभी तक जेल से बाहर क्यों है, जबकि उसका नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवादित फाइलों में है। उन्होंने सीधे तौर पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम लेते हुए पूछा, "मंत्री जी बताएं कि उस उद्योगपति को एपस्टीन से किसने मिलवाया था?" सदन के बाहर भी राहुल ने दोहराया कि भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता खतरे में है और सरकार बाहरी दबाव में काम कर रही है। इन आरोपों को खारिज करते हुए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने साफ किया कि राहुल गांधी का हमला पूरी तरह से बेबुनियाद है। उन्होंने बताया कि साल 2014 में जब वे एक अंतरराष्ट्रीय संस्था (IPI) से जुड़े थे और न्यूयॉर्क में थे, तब एक प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में उनकी जेफरी एपस्टीन से दो-तीन बार औपचारिक मुलाकात हुई थी। जेफरी एपस्टीन अमेरिका का एक बदनाम फाइनेंसर था, जिस पर नाबालिगों के यौन शोषण और मानव तस्करी के आरोप थे। उसकी मृत्यु के बाद जारी की गई फाइलों में दुनिया भर की कई नामचीन हस्तियों, राजनेताओं और वैज्ञानिकों के नाम शामिल हैं, जो कभी न कभी उसके संपर्क में रहे थे।  

क्या घर बैठे अपडेट हो सकता है बच्चे का आधार? जानें नया तरीका, जब ऐप में न मिले सुविधा

नई दिल्ली बच्चों के आधार कार्ड नए UIDAI ऐप पर अपडेट हो सकते हैं लेकिन बायोमेट्रिक डिटेल्स अपडेट कराने के लिए आपको आधार सेंटर जाना होगा। क्या आपको अपने बच्चे का आधार अपडेट कराना है? सरकार ने 5 साल से बड़े बच्चों का आधार अपडेट कराना अनिवार्य कर दिया है। बता दें कि इसे MBU यानी कि Mandatory Biometric Update कहते हैं। इस उम्र से पहले बनने वाले आधार में बच्चों का बायोमेट्रिक डेटा जैसे कि आंखों का स्कैन (आईरिस स्कैन) और उंगलियों के निशान नहीं लिए जाते। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ये ऑप्शन आपको UIDAI के ऐप में मिल जाएगा? क्या आप ऑनलाइन घर बैठे बच्चों का MBU करवा सकते हैं? इसका जवाब है नहीं। दरअसल नए आधार ऐप में आप आधार से जुड़ी कुछ जानकारी अपडेट करवा सकते हैं लेकिन बायोमेट्रिक डिटेल्स ऐप से अपडेट नहीं कराई जा सकती। क्या होता है MBU? MBU का मतलब है Mandatory Biometric Update, जो कि बच्चों के आधार कार्ड के लिए होता है। 5 साल से कम उम्र के बच्चों का आधार कार्ड बनवाते समय उनके बायोमेट्रिक डेटा नहीं लिए जाते। बच्चों का आधार कार्ड माता-पिता के आधार से लिंक होता है। हालांकि 5 साल की उम्र के बाद आधार को अपडेट कराना जरूरी होता है। इसे ही MBU कहते हैं। नए आधार ऐप से हो पाएगा काम? हाल ही में UIDAI ने नया आधार ऐप लॉन्च किया था। इसमें कई तरह के फीचर्स दिए गए हैं। मसलन मोबाइल नंबर और पता बदलने का ऑप्शन इस ऐप में दिया गया है। हालांकि बायोमेट्रिक अपडेट के लिए यूजर को आधार सेंटर विजिट करना पड़ता है। सेंटर पर ही क्यों अपडेट होता है डेटा? सवाल उठता है कि आखिर बायोमेट्रिक डेटा आधार सेंटर पर ही क्यों अपडेट होता है? ऐसा इसलिए क्योंकि बायोमेट्रिक डेटा लेने के लिए कुछ खास मशीनों जैसे कि फिंगरप्रिंट रीडर, आईरिस स्कैनर आदि की जरूरत पड़ती है। यह डिवाइस सेंटर पर मौजूद होते हैं और इसके लिए शख्स या बच्चे का सेंटर पर मौजूद होना जरूरी हो जाता है। वहीं नाम या पता जैसी जानकारी ऐप पर भी जरूरी डॉक्यूमेंट सबमिट करके अपडेट हो सकती है। Aadhaar ऐप ऐसे करेगा मदद हालांकि ऐसा नहीं है कि आधार ऐप बच्चे का आधार अपडेट कराने में बिल्कुल मदद नहीं कर सकती। अगर आप नया आधार ऐप इस्तेमाल करते हैं, तो ऐप में नीचे मौजूद Help ऑप्शन के जरिए मदद ले सकते हैं।     Help सेक्शन में आपको FAQ और CONTACT US का ऑप्शन मिलता है।     आप CONTACT US ऑप्शन के जरिए अपने पास मौजूद आधार सेंटर का पता लगा सकते हैं।     इसके अलावा बच्चों के स्कूलों और पोस्ट ऑफिस में भी MBU का काम किया जा रहा है। आप इन दो जगहों पर भी बच्चे की बायोमेट्रिक डिटेल्स आधार में अपडेट करवा सकते हैं।

सड़क पर चलते ही बजेगा संगीत! भारत के इस शहर में शुरू हुआ ‘मेलोडी रोड’ प्रयोग

मुंबई क्या आपने कभी सोचा है कि जिस सड़क पर आप गाड़ी चला रहे हैं, वही आपके लिए सुरीला संगीत बजाने लगे? भारत में यह कल्पना अब हकीकत बन चुकी है। देश में पहली बार एक ऐसी सड़क तैयार की गई है, जहां टायरों की गड़गड़ाहट नहीं, बल्कि मधुर संगीत सुनाई देगा। इस अनूठी पहल से न सिर्फ ड्राइविंग का अनुभव बदलेगा, बल्कि यह सड़क सुरक्षा की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में इस जादुई सफर की शुरुआत की गई है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को मुंबई के नवनिर्मित कोस्टल रोड (Coastal Road) पर इस 'मेलोडी रोड' खंड का उद्घाटन किया। समुद्र के किनारे सफर का आनंद अब संगीत के साथ दोगुना हो जाएगा। कैसे काम करती है यह जादुई तकनीक? यह कोई लाउडस्पीकर का कमाल नहीं, बल्कि हंगरी की एक विशेष तकनीक है। इसे वैज्ञानिक तरीके से डिजाइन किया गया है…     खास मार्किंग: सड़क के एक निश्चित हिस्से पर विशेष प्रकार की बारीक खांचें (Grooves) बनाई गई हैं।     संगीत का ट्रिगर: जैसे ही गाड़ी के टायर इन खांचों के ऊपर से गुजरते हैं, घर्षण (Friction) से एक खास फ्रीक्वेंसी पैदा होती है जो संगीत की धुन में बदल जाती है।     स्पीड की शर्त: संगीत का पूरा आनंद तभी मिलता है जब वाहन की गति 60 किलोमीटर प्रति घंटा हो। यदि गाड़ी इससे तेज या धीमी होगी, तो धुन बदल जाएगी। सुरक्षा और मनोरंजन का मेल फिलहाल इसे कोस्टल रोड के कुछ मीटर के हिस्से में प्रयोग के तौर पर शुरू किया गया है। सरकार की योजना भविष्य में इसकी लंबाई बढ़ाने और अन्य प्रमुख सड़कों पर भी इसे लागू करने की है। यह तकनीक न केवल मनोरंजन करती है, बल्कि ड्राइवर को एक निश्चित गति सीमा (60 kmph) बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित भी करती है, जिससे हादसों का खतरा कम होता है।

8वें वेतन आयोग के तहत कर्मचारियों को ₹9 लाख तक एरियर, जानिए फॉर्मूला

नई दिल्ली केंद्रीय कर्मचारी आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार कर रहे हैं। वैसे तो वेतन आयोग की सिफारिशें आने में एक साल से भी ज्यादा लगेंगे लेकिन लोग अपनी सैलरी का कैल्कुलेशन अभी से करने लगे हैं। दरअसल, वेतन आयोग की सिफारिशें फिटमेंट फॉर्मूले के तहत लागू होने की उम्मीद है। वहीं, सिफारिशें एक जनवरी 2026 से लागू होंगी तो ऐसे में कर्मचारियों को उम्मीद है कि उन्हें एरियर भी मिलेगा। एरियर की अवधि 18 से 24 महीनों तक की हो सकती है। अब सवाल है कि आखिर कितना तक एरियर मिल सकता है। आइए फिटमेंट फॉर्मूले के अलग-अलग आंकड़ों के हिसाब से समझ लेते हैं। लाखों रुपये का एरियर लेवल 1 से लेवल 5 तक के कर्मचारियों के लिए यह एरियर लाखों रुपये में मिल सकता है। अगर 1 जनवरी 2026 को प्रभावी तिथि मानते हुए 20 महीनों का एरियर लिया जाए और फिटमेंट फैक्टर 2.0, 2.15, 2.28 या 2.57 के आधार पर गणना की जाए, तो लेवल 1 से 5 तक के कर्मचारियों को एकमुश्त बड़ी रकम मिलने की संभावना बनती है। 9 लाख रुपये से ज्यादा एरियर मान लीजिए कि सातवें वेतन आयोग के तहत लेवल 1 कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 18,000 रुपये है। वहीं,लेवल 5 कर्मचारियों की सैलरी 29,200 रुपये है। अब आठवें वेतन आयोग के तहत कर्मचारियों का 20 महीने का एरियर 3.60 लाख रुपये से 9.17 लाख रुपये तक बन जाता है। यह कैल्कुलेशन फिटमेंट फैक्टर 2.0, 2.15, 2.28 और 2.57 के आधार पर किया गया है। बता दें कि एरियर की गणना का तरीका सीधा होता है। इसमें 7वें वेतन आयोग के तहत मौजूदा बेसिक पे पर स्वीकृत फिटमेंट फैक्टर लागू कर नई बेसिक सैलरी तय की जाती है। इसके बाद पुरानी और नई सैलरी के बीच का मासिक अंतर निकाला जाता है और उसे देरी के महीनों की संख्या से गुणा किया जाता है। आमतौर पर एरियर में बेसिक पे का अंतर और संशोधित वेतन के अनुसार महंगाई भत्ते (DA) का अंतर शामिल होता है। मांगे गए हैं सुझाव हाल ही में 8वें केंद्रीय वेतन आयोग ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट लॉन्च कर दी है। आयोग ने MyGov पोर्टल पर एक संरचित प्रश्नावली के जरिए मंत्रालयों, विभागों, केंद्रीय कर्मचारियों और अन्य हितधारकों से सुझाव भी मांगे हैं। मतलब ये कि आप वेतन आयोग को किसी भी तरह के सुझाव दे सकते हैं। अगर सुझाव सही होंगे तो उस पर अमल भी किया जा सकता है। बता दें कि केंद्र सरकार ने जनवरी 2025 में 8वें वेतन आयोग की घोषणा की थी, जबकि वित्त मंत्रालय ने 3 नवंबर को इसकी अधिसूचना जारी की।

थाईलैंड के डे-केयर सेंटर में गोलीबारी, 22 बच्चों समेत 34 की हत्या

बैंकाक थाईलैंड से दहशतगर्दी की बड़ी घटनाएं सामने आई हैं. यहां दो अलग-अलग घटनाओं में 34 लोगों की हत्या कर दी गई है, जिसमें 22 बच्चे शामिल हैं. इन घटनाओं ने पूरे देश को झकझोर दिया है. सामने आया है कि एक पूर्व पुलिस अधिकारी ने डे-केयर सेंटर में घुसकर 34 लोगों की हत्या कर दी. इसके अलावा साउथ थाईलैंड के हाट याई में मौजूद एक स्कूल में 18 साल के युवक ने फायरिंग कर दो लोगों को गंभीर रूप से घायल कर दिया और एक महिला कर्मचारी को बंधक बना लिया. इसे थाईलैंड के इतिहास की सबसे भयावह घटना के तौर पर देखा जा रहा है. एक पूर्व पुलिस अफसर ने एक डे-केयर सेंटर में अंधाधुंध फायरिंग कर दी. इस हमले में कम से कम 22 बच्चों और 12 वयस्कों की मौत हो गई. स्थानीय प्रशासन के अनुसार, यह देश के इतिहास की सबसे घातक मास शूटिंग है. घटना के बाद पूरे इलाके में शोक पसर गया और लोगों में गुस्सा भी है.  पुलिस मामले की जांच कर रही है और हमले के पीछे की मंशा का पता लगाने की कोशिश कर रही है.