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भारत-ब्राजील रिश्तों में बड़ा मोड़! राष्ट्रपति लूला की यात्रा से खुलेंगे सहयोग के नए दरवाज़े

नई दिल्ली ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने पुष्टि की है कि वह फरवरी में आधिकारिक दौरे पर भारत आएंगे। भारत यात्रा के बाद वह अमेरिका जाएंगे, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे। राष्ट्रपति लूला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप से फोन पर बातचीत की है। दोनों नेताओं के बीच इस बात पर सहमति बनी है कि भारत और दक्षिण कोरिया की यात्राओं के बाद फरवरी में वॉशिंगटन में मुलाकात होगी, जिसकी तारीखें जल्द तय की जाएंगी। भारत यात्रा के दौरान राष्ट्रपति लूला के नई दिल्ली में होने वाले एआई शिखर सम्मेलन में भी भाग लेने की संभावना है। इससे पहले इस महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति लूला के बीच टेलीफोन पर बातचीत हुई थी। दोनों नेताओं ने भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने तथा आने वाले वर्ष में इसे नई ऊंचाइयों तक ले जाने की प्रतिबद्धता दोहराई थी। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि दोनों नेताओं ने व्यापार और निवेश, प्रौद्योगिकी, रक्षा, ऊर्जा, स्वास्थ्य, कृषि और जन-से-जन संपर्क सहित द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। इसके साथ ही उन्होंने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया और साझा चुनौतियों से निपटने के लिए सुधारित बहुपक्षवाद के महत्व पर जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति लूला को शीघ्र भारत आने का आमंत्रण भी दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुलाई 2025 में ब्राजील का दौरा किया था। इस दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार और निवेश, रक्षा एवं सुरक्षा, स्वास्थ्य और फार्मास्यूटिकल्स, अंतरिक्ष, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण, ऊर्जा सुरक्षा, बुनियादी ढांचा विकास, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और यूपीआई, पारंपरिक चिकित्सा, योग, खेल, संस्कृति और जन-से-जन संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा की थी। दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने, भारत-मर्कोसुर प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट के विस्तार और अगले पांच वर्षों में व्यापार को 20 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया। ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग की समीक्षा करते हुए, हाइड्रोकार्बन और नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश की व्यापक संभावनाओं पर भी सहमति बनी। इसके अलावा, महत्वपूर्ण खनिज, नई और उभरती प्रौद्योगिकियां, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सुपरकंप्यूटर, डिजिटल सहयोग और मोबिलिटी जैसे नए क्षेत्रों में सहयोग के अवसरों पर भी चर्चा हुई।

पंजाब में होगी विशाल रैली, अमित शाह करेंगे जनसभा को संबोधित

चंडीगढ़ अगले महीने भारतीय जनता पार्टी के दो बड़े नेता पंजाब दौरे पर आएंगे। महीने की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अंत में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पंजाब पहुंचेंगे। अमित शाह मोगा में एक विशाल रैली को भी संबोधित करेंगे। 1 फरवरी को श्री गुरु रविदास जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पंजाब दौरे पर आएंगे। इस दौरान वह डेरा सच्चखंड बल्लां में माथा टेकेंगे। इस संबंध में जानकारी केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने सांझा की। उन्होंने बताया कि 1 फरवरी को संसद में बजट सत्र होगा और उसके बाद प्रधानमंत्री सीधे पंजाब के लिए रवाना होंगे। उनके लगभग शाम चार बजे तक डेरा बल्लां पहुंचने की संभावना है। उन्होंने कहा कि श्री गुरु रविदास जी का प्रकाश पर्व पूरे देश के लिए एक पवित्र दिन है और इस अवसर पर प्रधानमंत्री का डेरा बल्लां में नतमस्तक होना संगत के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण होगा। उन्होंने कहा कि श्री गुरु रविदास जी की वाणी और उनके संदेश समाज को सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। अगले वर्ष श्री गुरु रविदास जी का 650वां प्रकाश पर्व बड़े स्तर पर मनाने की तैयारी की जा रही है। भाजपा सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी फरवरी महीने के अंतिम सप्ताह में पंजाब का दौरा करेंगे। शाह मोगा में भाजपा द्वारा आयोजित की जाने वाली रैली को संबोधित करेंगे। पार्टी सूत्रों के अनुसार अभी शाह के दौरे की तारीख तय नहीं हुई है, लेकिन यह निश्चित है कि उनका दौरा फरवरी के अंतिम सप्ताह में होगा। पार्टी के अंदरूनी स्तर पर कुछ नेताओं द्वारा अमित शाह की रैली को लेकर जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन आधिकारिक तौर पर कोर ग्रुप, प्रदेश पदाधिकारियों और जिला प्रधानों के साथ अभी तक इस रैली को लेकर कोई बैठक नहीं हुई है।

सोशल मीडिया पर कड़ा नियम: फ्रांस में अब 15 साल से कम उम्र वालों का प्रवेश बंद

फ्रांस फ्रांस ने बच्चों और किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। देश की नेशनल असेंबली ने एक अहम विधेयक पारित किया है, जिसके तहत 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चे अब टिकटॉक, इंस्टाग्राम, फेसबुक और स्नैपचैट जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। सरकार का कहना है कि यह फैसला बच्चों की मानसिक सेहत को बचाने, साइबर बुलिंग पर रोक लगाने और युवाओं में बढ़ती हिंसा व गलत व्यवहार की प्रवृत्तियों को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है। उम्र सत्यापन अनिवार्य, नियम तोड़ने पर जुर्माना नए कानून के मुताबिक, सोशल मीडिया कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर उपयोगकर्ताओं की उम्र की सटीक जांच के लिए मजबूत तकनीकी व्यवस्था लागू करनी होगी। अगर कंपनियां इसमें विफल रहती हैं तो उन पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। फ्रांसीसी अधिकारियों का कहना है कि पिछले 10 वर्षों में 13 से 15 वर्ष के बच्चों में डिप्रेशन और आत्महत्या के मामलों में करीब 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जिसमें सोशल मीडिया की भूमिका को एक बड़ा कारण माना गया है। राष्ट्रपति मैक्रोन का समर्थन फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रोन ने इस विधेयक का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने इसे बच्चों और किशोरों की सुरक्षा की दिशा में जरूरी कदम बताया। मैक्रोन ने कहा कि युवा वर्ग को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के नकारात्मक प्रभाव से बचाना समय की मांग है और स्क्रीन टाइम को सीमित करना बेहद जरूरी हो गया है। संसद में भारी बहुमत से पास हुआ बिल यह विधेयक नेशनल असेंबली में रात भर चली लंबी बहस के बाद पारित किया गया। मतदान में 130 सांसदों ने इसके पक्ष में जबकि 21 सांसदों ने इसके खिलाफ वोट दिया। अब यह प्रस्ताव कानून बनने से पहले मंजूरी के लिए सीनेट में भेजा जाएगा। 2026 से लागू होंगे नए नियम सरकार की योजना है कि ये नए नियम सितंबर 2026 से शुरू होने वाले शैक्षणिक सत्र से नए सोशल मीडिया खातों पर लागू किए जाएं। वहीं, जो मौजूदा खाते उम्र सीमा को पूरा नहीं करते हैं, उन्हें साल के अंत तक बंद कर दिया जाएगा। यूरोपीय संघ की भूमिका भी अहम यूरोपीय आयोग ने कहा है कि इस कानून का प्रभावी क्रियान्वयन यूरोपीय संघ के नियमों और भरोसेमंद आयु-सत्यापन प्रणालियों पर निर्भर करेगा। इस कानून के तहत शैक्षणिक प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन शिक्षा सेवाएं और डिजिटल विश्वकोश को छूट दी गई है, ताकि बच्चों की पढ़ाई और जानकारी तक पहुंच प्रभावित न हो।  

दूसरी बड़ी विमान घटना: अजित पवार प्लेन के बाद Air India की उड़ान में खौफनाक झटके

मुंबई महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार की विमान हादसे में मौत की खबर के बाद देशभर में दहशत का माहौल है। इसी बीच राजस्थान की राजधानी जयपुर से भी एक गंभीर घटना सामने आई है। बुधवार को जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एयर इंडिया के एक विमान की पहली लैंडिंग असफल हो गई, जिससे विमान में बैठे यात्रियों की सांसें थम गईं। हालांकि, पायलट की सूझबूझ से दूसरे प्रयास में विमान को सुरक्षित उतार लिया गया। यह विमान दिल्ली से जयपुर के लिए रवाना हुआ था और दोपहर लगभग 1 बजे जयपुर पहुंचा। 1:05 बजे पायलट ने रनवे पर लैंडिंग की कोशिश की, लेकिन किसी तकनीकी या अन्य कारण से विमान रनवे को छूते ही दोबारा हवा में चला गया। अचानक हुई इस घटना से यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई और लोग घबराने लगे। इसके बाद विमान करीब 10 मिनट तक आसमान में चक्कर लगाता रहा। दूसरे प्रयास में विमान को सुरक्षित तरीके से रनवे पर उतार लिया गया, जिसके बाद यात्रियों और उनके परिजनों ने राहत की सांस ली। विमान में मौजूद थे कांग्रेस के बड़े नेता इस विमान में पंजाब के पूर्व डिप्टी सीएम और राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा भी सवार थे। एयरपोर्ट पर पहले से ही राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा सहित कई वरिष्ठ नेता उनके स्वागत के लिए मौजूद थे। जब पहली बार विमान की लैंडिंग फेल होने की खबर मिली, तो एयरपोर्ट पर मौजूद कांग्रेस नेताओं में भी चिंता और बेचैनी साफ नजर आई। लेकिन विमान के सुरक्षित उतरते ही सभी ने राहत महसूस की। एयरपोर्ट प्रशासन में मचा हड़कंप इस घटना के बाद जयपुर एयरपोर्ट प्रशासन में हड़कंप मच गया। अधिकारियों ने तुरंत मामले की जांच शुरू कर दी है। यह पता लगाया जा रहा है कि आखिर किन कारणों से पहली लैंडिंग के दौरान विमान को वापस उड़ान भरनी पड़ी। अधिकारियों का कहना है कि अगर पायलट ने समय रहते सही फैसला नहीं लिया होता, तो बड़ा हादसा हो सकता था। अजित पवार हादसे से जुड़ा संदर्भ गौरतलब है कि इसी दिन सुबह महाराष्ट्र के पुणे स्थित बारामती एयरपोर्ट पर भी एक बड़ा हादसा हुआ था। वहां लैंडिंग के दौरान अजित पवार का चार्टर्ड विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में अजित पवार समेत कुल 5 लोगों की मौत हो गई थी। बताया गया कि रनवे साफ नजर नहीं आने के कारण पायलट ने पहले विमान को ऊपर ले जाने की कोशिश की थी, लेकिन दोबारा लैंडिंग के दौरान विमान क्रैश हो गया।

नए भारत की नई उड़ान : राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद नितिन नवीन ने गिनाईं उपलब्धियां

नई दिल्ली संसद के बजट सत्र की शुरुआत बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के संयुक्त सदनों को संबोधित करने के साथ हुई। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अभिभाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत विकास के नए आयाम लिख रहा है। नितिन नवीन ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, "दोनों सदनों में अभिभाषण पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने स्पष्ट रूप से बढ़ते हुए भारत की तस्वीर को बयां किया है। किस प्रकार भारत विकास के नए आयाम लिख रहा है। पीएम मोदी की सरकार किसान, मजदूर, युवा हर वर्ग की चिंता कर रही है।" उन्होंने कहा कि भारत सबसे तेजी से बढ़ती आर्थिक शक्ति बन रहा है। जिस प्रकार से आज चावल उत्पादन में भारत 150 मिलियन टन से आगे बढ़कर विश्व का सबसे बड़ा उत्पादक केंद्र बन गया, उसी प्रकार से मछली उत्पादन में भी हम दुनिया के दूसरे नंबर के देश बन गए हैं। कहीं न कहीं ये ग्रोथ हमें स्पष्ट रूप से इंडिकेट करता है कि भारत विकास के पथ पर किस प्रकार से आगे बढ़ रहा है।" राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि आधारभूत संरचना का ग्रोथ देखने को मिल रहा है। इसके साथ ही हम मेडिकल सर्विसेज और हेल्थ एजुकेशन को प्रमोट कर रहे हैं। यह भारत के बढ़ते हुए विकास का मापदंड बन रहा है। साथ ही लुक ईस्ट के हमारे संकल्प को भी राष्ट्रपति ने दोहराया है कि हम ईस्ट के विकास के प्रति संकल्पित हैं। हमारे जितने भी राज्य ईस्ट में हैं, चाहे वह नॉर्थ ईस्ट हो, बिहार, बंगाल, ओडिशा या झारखंड, इन सभी राज्यों के ग्रोथ से भारत का विकास ग्रोथ बढ़ रहा है। राष्ट्रपति ने भारत के बढ़ते विकास को पूरी तरह से संबोधित किया है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा, ''पिछले 11 सालों में हमारी सरकार ने पीएम मोदी के नेतृत्व में गरीबी हटाने की योजनाओं के जरिए गरीबों को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए जिस तरह से काम किया है, उन सभी बातों का जिक्र राष्ट्रपति ने किया।" उन्होंने कहा कि अलग-अलग क्षेत्र में किस तरीके से हम लोगों ने विकास किया है, वह सब लोग जान रहे हैं। पिछले 11 सालों में हमारी सरकार अच्छा काम कर रही है। इसमें कोई दो राय नहीं है। हमारी सरकार ने गरीब कल्याण की योजनाओं को धरातल पर उतारने का काम किया है। महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार के निधन पर चिराग पासवान ने कहा, "ये कुछ ऐसी बातें हैं जिन पर यकीन नहीं होता कि ऐसा सच में हुआ है। अजीत पवार न सिर्फ जमीन से जुड़े नेता थे, बल्कि अपने विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ थी। उनका जाना न सिर्फ महाराष्ट्र के लिए, बल्कि देश की राजनीति के लिए भी एक बहुत बड़ी क्षति है। मेरी पार्टी की ओर से मैं उन्हें श्रद्धांजलि देता हूं और भगवान से प्रार्थना करता हूं कि पूरे परिवार को दुख की इस घड़ी से उबरने की शक्ति दे।"

प्लेन क्रैश के कुछ मिनट पहले पायलट की चेतावनी उजागर, रनवे गायब होने की दहशत

बारामती महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और एनसीपी प्रमुख अजित पवार का बुधवार सुबह बारामती में हुए विमान हादसे में निधन हो गया। दिग्गज नेता लियरजेट 45 नामक प्रावइेट जेट से जा रहे थे, जोकि लैंडिंग से पहले क्रैश हो गया और हादसे में सवार सभी पांच लोगों की जान चली गई। हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, नेता विपक्ष राहुल गांधी समेत देशभर के तमाम नेताओं ने दुख जताया है। प्लेन ने पहली बार लैंडिंग की कोशिश की थी, लेकिन उसे गो-अराउंड करके दोबारा आना पड़ा था। पहली बार में पायलट ने कहा था कि रनवे दिखाई नहीं दे रहा है, लेकिन बाद में गो-अराउंड के बाद रनवे दिख गया था।   विमान हादसा आज सुबह 8.46 बजे हुआ। सुबह 8.18 मिनट पर प्लेन ने बारामती एयरपोर्ट से संपर्क स्थापित किया था। यह दिल्ली स्थित वीएसआर वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी का जेट प्लेन था, जिसे अजित पवार इस्तेमाल कर रहे थे। सुबह लगभग 8.10 मिनट पर मुंबई से प्लेन ने उड़ान भरी। मुंबई और बारामती के बीच की दूरी लगभग 256 किलोमीटर है और विमान को 45 मिनट का समय लगता है। बारामती एयरपोर्ट से विमान लगभग 56 किलोमीटर की दूरी पर था, जब उससे संपर्क किया गया। प्लेन को पुणे द्वारा कंट्रोल लोकल एयर ट्रैफिक कंट्रोलर को दे दिया गया। इसके बाद विमान को उड़ा रहीं कैप्टन शंभवी पाठक को स्थानीय मौसम की जानकारी दी गई। पायलट ने हवाओं और विजिबिलिटी के बारे में पूछा और उन्हें बताया गया कि हवाएं शांत हैं और विजिबिलिटी तीन हजार मीटर है। इसके बाद विमान ने रनवे 11 के फाइनल अप्रोच पर रिपोर्ट किया और कहा कि उन्हें रनवे दिखाई नहीं दे रहा है। इसके बाद, उन्होंने गो-अराउंड किया। 'रनवे अभी दिखाई नहीं दे रहा' गो-अराउंड एक स्टैंडर्ड प्रोसीजर है, जिसके तहत पायलट जब सफल लैंड नहीं कर पाता है तो वह दोबारा हवा में उड़कर, वापस चक्कर लगाकर लैंडिंग की कोशिश करता है। एविएशन सेक्टर में यह कोई विफलता नहीं, बल्कि इसे सेफ्टी उपाय माना जाता है। गो-अराउंड के बाद, विमान से उसकी स्थिति के बारे में पूछा गया और पायलट ने रनवे 11 के फाइनल अप्रोच पर रिपोर्ट किया। उनसे रनवे दिखने पर रिपोर्ट करने के लिए कहा गया। उन्होंने जवाब दिया रनवे अभी दिखाई नहीं दे रहा है, जब रनवे दिखेगा तो कॉल करेंगे। कुछ सेकंड बाद उन्होंने बताया कि रनवे दिखाई दे रहा है। विमान को 08.43 बजे पर रनवे 11 पर उतरने की अनुमति दी गई, हालांकि, उन्होंने लैंडिंग क्लीयरेंस का रीडबैक नहीं दिया। सीसीटीवी कैमरे में कैद हुआ भयावह मंजर रिपोर्ट की मानें तो सुबह 8.43 मिनट पर प्लेन साइलेंट हो गया था, यानी कि उसने सिग्नल भेजना बंद कर दिया था। इस दौरान विमान की गति लगभग 237 किलोमीटर प्रति घंटे की थी। प्लेन भी जमीन से लगभग एक किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ रहा था। इसके बाद सुबह 8.46 बजे एयरपोर्ट से कुछ दूरी पर ही विमान क्रैश हो गया। घटनास्थल के पास लगे एक सीसीटीवी में हादसे के बाद धुएं का गुबार उठता हुआ दिखाई दे रहा है। बता दें कि कंपनी के पास इस फ्लीट में सात लियरजेट 45 एयरक्राफ्ट (एक दुर्घटनाग्रस्त), पांच Embraer 135BJ एयरक्राफ्ट, चार King Air B200 एयरक्राफ्ट और एक Pilatus PC-12 एयरक्राफ्ट शामिल हैं। पिछला रेगुलेटरी ऑडिट डीजीसीए द्वारा फरवरी 2025 के महीने में किया गया था और कोई लेवल-I फाइंडिंग जारी नहीं की गई थी।  

शताब्दी समारोह में पीएम मोदी का संदेश: आर्य वैद्यशाला ने आयुर्वेद को दिया नया जीवन

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को केरल स्थित आर्य वैद्यशाला चैरिटेबल अस्पताल के शताब्दी समारोह में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद को सहेजने, संरक्षित करने और आगे बढ़ाने में आर्य वैद्यशाला का महत्वपूर्ण योगदान है। आर्य वैद्यशाला के संस्थापक वैद्यरत्नम पी एस वरियर को याद करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आयुर्वेद के प्रति उनका दृष्टिकोण और लोक कल्याण के लिए उनका समर्पण आज भी हमें प्रेरित करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "केरला की आर्य वैद्यशाला, भारत की उस उपचार परंपरा का जीवंत प्रतीक है, जिसने सदियों से मानवता की सेवा की है। भारत में आयुर्वेद किसी एक काल या एक क्षेत्र में सीमित नहीं रहा। हर दौर में इस प्राचीन चिकित्सा पद्धति ने जीवन को समझने, संतुलन बनाने और प्रकृति के साथ तालमेल बिठाने का रास्ता दिखाया है। आज आर्य वैद्यशाला 600 से अधिक आयुर्वेदिक औषधियों का निर्माण करती है, देश के अलग-अलग क्षेत्रों में संस्था के अस्पताल आयुर्वेदिक तरीके से मरीजों का इलाज कर रहे हैं, जिनमें दुनिया के 60 से अधिक देशों के मरीज शामिल होते हैं।" उन्होंने कहा कि आर्य वैद्यशाला ने ये भरोसा अपने काम से बनाया है। जब लोग कष्ट में होते हैं, तो आप सभी उनके लिए बहुत बड़ी उम्मीद बनते हैं। पीएम मोदी ने कहा, "आर्य वैद्यशाला के लिए सेवा सिर्फ एक विचार नहीं है। ये भावना उनके कार्य, दृष्टिकोण और संस्था में भी दिखाई देती है। संस्था का चैरिटेबल हॉस्पिटल पिछले 100 वर्षों से निरंतर लोगों की सेवा में जुटा है। इसमें अस्पताल से जुड़े सभी लोगों का योगदान है।" इस कार्य के लिए पीएम मोदी ने अस्पताल के वैद्य, डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और अन्य सभी लोगों का अभिनंदन किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने सरकार की पहलों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश में लंबे समय तक प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों को साइलो में देखा जाता रहा। पिछले 10-11 सालों में इस अप्रोच में बड़ा बदलाव हुआ है। अब स्वास्थ्य सेवाओं को होलिस्टिक नजरिए से देखा जा रहा है। आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथिक, सिद्ध और योग, इन सबको हम एक छाता के नीचे लाए हैं, और इसके लिए विशेष तौर पर आयुष मंत्रालय बनाया गया है। नेशनल आयुष मिशन के तहत 12 हजार से अधिक आयुष वेलनेस सेंटर्स खोले गए। पीएम मोदी ने कहा कि सरकार की नीतियों का स्पष्ट प्रभाव आयुष सेक्टर पर दिखाई दिया है। आयुष विनिर्माण क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ा है और इसका विस्तार हुआ है। भारतीय पारंपरिक वेलनेस को दुनिया तक पहुंचाने के लिए सरकार ने आयुष निर्यात संवर्धन परिषद की स्थापना की है। उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश है कि आयुष प्रोडक्ट और सेना को वैश्विक बाजारों में बढ़ावा मिल सके। साल 2014 में भारत से लगभग 3 हजार करोड़ रुपए के आयुष और हर्बल प्रॉडक्ट्स एक्सपोर्ट होते थे। वहीं अब भारत से 6500 करोड़ रुपए के आयुष और हर्बल प्रॉडक्ट्स एक्सपोर्ट होने लगे हैं। इसका बहुत बड़ा फायदा देश के किसानों को भी हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आयुर्वेद के माध्यम से भारत में सदियों से इलाज का काम होता रहा है, लेकिन ये भी दुर्भाग्य रहा है कि हमें देश में और ज्यादातर विदेशों में लोगों को आयुर्वेद का महत्व समझाना पड़ता है। इसकी एक बड़ी वजह एविडेंस बेस्ड रिसर्च और रिसर्च पेपरों की कमी है। जब साइंस के सिद्धांतों पर आयुर्वेदिक पद्धति को परखा जाता है, तो लोगों का भरोसा और मजबूत होता है। उन्होंने आह्वान किया कि हमें बदलते समय के अनुसार, आयुर्वेद में आधुनिक टेक्नॉलजी और एआई का उपयोग भी बढ़ाना चाहिए। बीमारी की संभावनाओं का पता लगाने और अलग-अलग पद्धितियों से इलाज के लिए काफी कुछ इनोवेटिव किया जा सकता है।

900 किलोमीटर की पदयात्रा कर हेमंत सूर्यवंशी पहुंचे बृजभूषण शरण सिंह से मिलने, MLA ने किया स्वागत

मुंबई महाराष्ट्र के हेमंत सूर्यवंशी ने प्रेम, श्रद्धा और समर्पण की एक अनोखी मिसाल पेश की है। पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के प्रति अपने स्नेह और सम्मान के चलते हेमंत सूर्यवंशी उज्जैन (मध्य प्रदेश) से उत्तर प्रदेश के विश्नोहरपुर तक करीब 900 किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर पहुंचे। बृजभूषण के बड़े बेटे विधायक प्रतीक भूषण सिह ने हेमंत का जोरदार स्वागत किया। उनकी यह यात्रा क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।   हेमंत सूर्यवंशी मूल रूप से महाराष्ट्र के निवासी हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने 8 जनवरी को पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के जन्मदिन के अवसर पर उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन किए और उनके दीर्घायु व स्वस्थ जीवन की कामना की। इसके बाद उन्होंने पैदल ही गोंडा के विश्नोहरपुर की ओर अपनी यात्रा शुरू की। यात्रा के दौरान हेमंत सूर्यवंशी लगातार पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह की तस्वीर अपने साथ रखे रहे। उन्होंने बताया कि इसी तस्वीर के कारण उन्हें रास्ते भर लोगों का भरपूर सहयोग, सम्मान और आतिथ्य मिलता रहा। कई स्थानों पर लोगों ने उनके ठहरने, भोजन और आराम की व्यवस्था की, जिससे उनकी लंबी और कठिन यात्रा अपेक्षाकृत सहज हो सकी। करीब एक हजार किलोमीटर की यह पदयात्रा पूरी कर जब हेमंत सूर्यवंशी विश्नोहरपुर पहुंचे, तो उनका जोरदार स्वागत किया गया। बृजभूषण के बड़े बेटे विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने हेमंत सूर्यवंशी का स्वागत करते हुए उनके समर्पण और भावनात्मक लगाव की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज के समय में इस तरह का समर्पण और श्रद्धा दुर्लभ है। हेमंत सूर्यवंशी की इस यात्रा को लोग प्रेम, विश्वास और आस्था का प्रतीक मान रहे हैं। उनकी पदयात्रा यह संदेश देती है कि सच्चा सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव किसी भी दूरी को छोटा बना सकता है। क्षेत्र में उनकी इस अनोखी पहल की हर ओर सराहना हो रही है।  

साइंटिफिक रिपोर्ट ने खोला राज! सबरीमाला में चोरी नहीं बदले पैनल, रासायनिक तरीके से गायब हुआ सोना

तिरुवनंतपुरम सबरीमाला सोना चोरी मामले में नई वैज्ञानिक जांच ने कई अहम सवालों पर विराम लगा दिया है। इसरो के वैज्ञानिक परीक्षणों में पुष्टि हुई है कि गर्भगृह (संनिधानम) के दरवाजे के पैनल बदले नहीं गए थे, बल्कि तांबे की चादरों पर चढ़ी सोने की परत को रासायनिक प्रक्रिया के जरिए उतारा गया था। ये निष्कर्ष विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंपे गए हैं और बुधवार को केरल हाईकोर्ट के समक्ष भी रखे गए। इससे गर्भगृह के ढांचे को पूरी तरह बदलने या अंतरराष्ट्रीय गिरोहों को सौंपे जाने जैसी अटकलों को खारिज कर दिया गया है। इसरो के विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के वैज्ञानिकों ने विस्तृत सामग्री विश्लेषण के बाद अदालत को बताया कि सबरीमाला में लगे दरवाजों के पैनल मूल तांबे की चादरें ही हैं। जांच में यह भी साफ हुआ कि चोरी किया गया हिस्सा ठोस सोना नहीं था, बल्कि तांबे के ऊपर चढ़ी सोने की परत थी, जिसे पहले ठोस सोने के पैनल समझा जा रहा था। वैज्ञानिकों के अनुसार, गर्भगृह के दरवाजे का लकड़ी का ढांचा, जिसे स्थानीय भाषा में ‘कट्टिल’ कहा जाता है, वह भी पूरी तरह मूल पाया गया है। हालांकि, जिन चादरों को हटाकर बाद में दोबारा लगाया गया था, उनके नमूनों में सोने की मात्रा में स्पष्ट कमी पाई गई है। इससे यह साबित होता है कि तांबे को नुकसान पहुंचाए बिना सोने को अलग किया गया। पैनलों पर दिखाई देने वाले बदलावों को लेकर उठी शंकाओं पर वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि ये परिवर्तन रासायनिक प्रतिक्रियाओं के कारण हुए हैं, न कि पैनल बदलने की वजह से। सोना निकालने में इस्तेमाल होने वाला पारा (मरकरी) और अन्य रासायनिक घोल चादरों की सतह की रासायनिक संरचना को प्रभावित करते हैं, जिससे रंग और बनावट में फर्क नजर आता है। वैज्ञानिकों ने यह भी कहा कि इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि मूल चादरों को हटाकर नई चादरें लगाई गई हों। एसआईटी ने हाईकोर्ट को बताया है कि जांच अभी जारी है और पुराने गर्भगृह दरवाजे से लिए गए नमूनों का तुलनात्मक विश्लेषण किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इन सभी परीक्षणों को शामिल करते हुए अंतिम संयुक्त रिपोर्ट जल्द ही सौंप दी जाएगी। माना जा रहा है कि यह वैज्ञानिक गवाही जांच की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी और अब जांच का फोकस सोना निकालने की प्रक्रिया और इसके पीछे जिम्मेदार लोगों की पहचान पर केंद्रित होगा।

बौद्ध बनकर अल्पसंख्यक कोटा लेने की कोशिश, सुप्रीम कोर्ट नाराज़— CJI की तीखी टिप्पणी

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बौद्ध धर्म अपनाने वाले हिंदू अपर कास्ट युवक के अल्पसंख्यक आरक्षण की मांग करने पर कड़ी फटकार लगाई। सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने इसे नया तरीके का फ्रॉड करार दिया। अदालती सुनवाइयों को रिपोर्ट करने वाली वेबसाइट बार एंड बेंच के अनुसार, निखिल कुमार पूनिया ने याचिका दायर कर अल्पसंख्यक उम्मीदवार के आधार पर एडमिशन की मांग की। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने पूछा कि आप कौन से पूनिया हैं? आप किस अल्पसंख्यक समुदाय से हैं? सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, ''मैं आपसे सीधे-सीधे पूछता हूं, आप कौन से पूनिया हैं?'' इस पर निखिल के वकील ने जवाब दिया कि जाट पूनिया हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि तब कैसे अल्पसंख्यक हुए? सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उसने (निखिल) बौद्ध धर्म अपना लिया है और यह उसका अधिकार है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने फटकार लगाते हुए कहा कि वाओ, यह तो नया तरीके का फ्रॉड है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार को सख्त आदेश दिया। उसने कहा कि राज्य उसे अल्पसंख्यक सर्टिफिकेट जारी करने के लिए गाइडलाइंस की जानकारी दे और बताए कि क्या ऊंची जाति के जनरल कैटेगरी के उम्मीदवार बौद्ध धर्म अपनाने के बाद अल्पसंख्यक सर्टिफिकेट हासिल कर सकते हैं। कोर्ट ने हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी से जवाब मांगा है।