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पीयूष गोयल का बड़ा बयान: देश में 2 लाख से अधिक स्टार्टअप रजिस्टर्ड, 21 लाख लोगों को मिला रोजगार

नई दिल्ली   देश में शुक्रवार को 'स्टार्टअप इंडिया' पहल को 10 साल पूरे हो चुके हैं। इस अवसर पर राष्ट्रीय राजधानी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें देश के प्रमुख स्टार्टअप उद्यमियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि आज भारत में करीब 2 लाख स्टार्टअप रजिस्टर्ड हैं। इन स्टार्टअप्स के जरिए अब तक 21 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल चुका है। भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम लगातार मजबूत हो रहा है और देश की आर्थिक प्रगति में अहम भूमिका निभा रहा है। पीयूष गोयल ने आगे कहा कि भारतीय स्टार्टअप आज 50 से ज्यादा अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। इनमें टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, एग्रीटेक, फिनटेक, ड्रोन टेक्नोलॉजी और डीप टेक जैसे क्षेत्र शामिल हैं। उन्होंने बताया कि पिछले बजट में सरकार ने 10 हजार करोड़ रुपए का 'फंड ऑफ फंड्स' घोषित किया था, जिसके जरिए हाई-टेक और डीप टेक स्टार्टअप्स को प्राथमिकता दी जा रही है। केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि देश के कुल स्टार्टअप्स में से करीब 50 प्रतिशत स्टार्टअप टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रहे हैं, जो इस बात का सबूत है कि उद्यमिता अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही। उन्होंने कहा कि कर्नाटक और तमिलनाडु अब ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग के बड़े केंद्र बनकर उभर रहे हैं। पीयूष गोयल के मुताबिक, दुनिया के 100 से ज्यादा देश भारत के साथ स्टार्टअप सेक्टर में साझेदारी करना चाहते हैं। सरकार इस दिशा में योजना बना रही है कि इन देशों के साथ सहयोग को कैसे आगे बढ़ाया जाए, ताकि भारतीय स्टार्टअप्स को वैश्विक स्तर पर और ज्यादा अवसर मिल सकें। इससे पहले केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि 'स्टार्टअप इंडिया' क्रांति को एक दशक पूरा हो गया है। यह एक साहसिक कदम था, जिसने भारत को बड़ा सोचने और उससे भी बड़ा करने की ताकत दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस दूरदर्शी पहल की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण देश में डीपीआईआईटी द्वारा मान्यता प्राप्त 2 लाख से अधिक स्टार्टअप्स और उनके द्वारा पैदा किए गए 21 लाख से ज्यादा रोजगार हैं। पीयूष गोयल ने कहा कि इस सफलता को यह तथ्य और खास बनाता है कि इससे टियर-2 और टियर-3 शहरों में उद्यमिता की भावना को नई ऊर्जा मिली है और युवाओं व महिलाओं को सशक्त बनाया गया है। राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस के अवसर पर उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों की यह यात्रा निरंतरता, समावेशिता और विकास को दर्शाती है, साथ ही भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम के उज्ज्वल भविष्य का भरोसा भी देती है।

अफगानिस्तान में भारत की एंट्री, कंगाल पाकिस्तान की दवा इंडस्ट्री को लगा बड़ा झटका

अफगानिस्तान अफगानिस्तान में इन दिनों एक दिलचस्प बदलाव देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर फजल अफगान नाम के एक अफगान ब्लॉगर की कहानी इस बदलाव की गवाह है। फजल को सिरदर्द के लिए 'पारोल' (तुर्की का ब्रांड) खरीदना था जिसकी कीमत 40 अफगानी थी। लेकिन फार्मासिस्ट ने उन्हें भारत में बनी वही दवा महज 10 अफगानी में दे दी। फजल का कहना है कि भारतीय दवा न केवल चार गुना सस्ती थी, बल्कि उसका असर भी बहुत तेज रहा। यह केवल एक व्यक्ति का अनुभव नहीं है, बल्कि पूरे अफगानिस्तान में भारतीय दवाएं अब पाकिस्तानी दवाओं की जगह ले रही हैं। क्यों टूटा पाकिस्तान का वर्चस्व? दशकों से अफगानिस्तान अपनी बुनियादी चिकित्सा जरूरतों के लिए पाकिस्तान पर निर्भर था। वहां की लगभग 70-80% दवाएं पाकिस्तान से आती थीं। लेकिन अक्टूबर-नवंबर 2025 में दोनों देशों के बीच हुई हिंसक सीमा झड़पों के बाद स्थितियां बदल गईं। अफगानिस्तान के उप प्रधानमंत्री अब्दुल गनी बरादर ने घटिया गुणवत्ता का हवाला देते हुए पाकिस्तानी दवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। अफगान व्यापारियों को भारत, ईरान और मध्य एशिया से विकल्प तलाशने को कहा गया। तोरखम और चमन जैसे प्रमुख सीमा व्यापारिक रास्तों के बंद होने से पाकिस्तान से होने वाली सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई। संकट के समय का सच्चा साथी भारत जब अफगानिस्तान दवाओं की कमी से जूझ रहा था, तब भारत ने मानवीय आधार पर मदद का हाथ बढ़ाया। नवंबर 2025 में भारत ने 73 टन जीवन रक्षक दवाओं की खेप काबुल भेजी। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने 108 मिलियन डॉलर की दवाएं भेजी थीं, जबकि 2025 के अंतिम महीनों में ही यह आंकड़ा 100 मिलियन को पार कर गया। भारत केवल दवाएं ही नहीं भेज रहा, बल्कि वहां अस्पतालों का निर्माण भी कर रहा है। काबुल में इंदिरा गांधी चिल्ड्रेन्स हॉस्पिटल (400 बेड) इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। जाइडस लाइफसाइंसेज का मेगा डील भारतीय फार्मा दिग्गज जाइडस लाइफसाइंसेज ने नवंबर 2025 में अफगानिस्तान के 'रोफी इंटरनेशनल ग्रुप' के साथ 100 मिलियन डॉलर का समझौता (MoU) किया है। इस समझौते के तहत भारत न केवल दवाएं निर्यात करेगा, बल्कि भविष्य में अफगानिस्तान में ही मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने के लिए तकनीक हस्तांतरण भी करेगा। इससे अफगानिस्तान की आयात पर निर्भरता कम होगी और वहां के लोगों को सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली दवाएं मिल सकेंगी।  

महाभियोग मामले में झटका: जस्टिस यशवंत वर्मा की संसदीय कमेटी के खिलाफ अर्जी खारिज

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा को बड़ा झटका दिया है। शीर्ष अदालत ने अधजली नकदी मामले में महाभियोग प्रस्ताव पर उनके खिलाफ आरोपों की जांच कर रहे संसदीय पैनल के खिलाफ उनकी याचिका खारिज कर दी है। इस याचिका में उन्होंने लोकसभा स्पीकर द्वारा उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए बनाई गई संसदीय समिति की वैधता को चुनौती दी थी।   जस्टिस वर्मा ने समिति के गठन पर यह कहते हुए सवाल उठाया था कि उन्हें हटाने का प्रस्ताव राज्यसभा के उपसभापति ने खारिज कर दिया था। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एससी शर्मा की बेंच ने 8 जनवरी, 2026 को इस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब कोर्ट ने इस अर्जी को खारिज कर दिया है, जिससे संसदीय समिति को आगे बढ़ने की इजाजत मिल गई है। जजेज इन्क्वायरी एक्ट के तहत जांच समिति 16 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस वर्मा की दायर याचिका पर सुनवाई करने का फैसला किया था। इस याचिका में लोकसभा स्पीकर के उस कदम को चुनौती दी गई थी जिसमें उन्होंने जजों (जांच) एक्ट के तहत "एकतरफा" तरीके से उनके खिलाफ जांच के लिए एक कमेटी बनाई थी। सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने कोर्ट में जस्टिस वर्मा का प्रतिनिधित्व करते हुए कहा था कि 1968 के एक्ट की धारा 3(2) के तहत कमेटी का गठन कानून द्वारा समान रूप से व्यवहार किए जाने और सुरक्षा पाने के उनके अधिकार का उल्लंघन करता है। उन्होंने तर्क दिया कि हालांकि संसद के दोनों सदनों में उसी दिन हटाने के प्रस्ताव के नोटिस दिए गए थे, लेकिन स्पीकर ने एकतरफा तरीके से कमेटी का गठन किया। पिछली सुनवाई पर यानी 8 जनवरी को अदालत ने इस पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। पिछले साल अगस्त में लोकसभा अध्यक्ष ने बनाई थी कमेटी बता दें कि अगस्त 2025 में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन में महाभियोग प्रस्ताव आने के बाद जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यों वाले पैनल की घोषणा की थी। इस तीन सदस्यीय पैनल में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार, मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस मनिंदर मोहन और सीनियर एडवोकेट बीवी आचार्य शामिल हैं। मामला क्या? यह पैनल जस्टिस वर्मा के आवास से भारी मात्रा में अधजली नोटों के मिलने के बाद उनके खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव के बाद गठित की गई थी।पिछले साल मार्च में, दिल्ली में जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास पर लगी भीषण आग के बाद, कैश के बंडल मिले थे, जिनमें से कुछ 1.5 फीट से भी ज़्यादा ऊंचे थे। तत्कालीन चीफ जस्टिस ने इस घटना का संज्ञान लिया था और जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया था।  

‘कुर्सी जाने का डर था, लेकिन मैंने इसे दायित्व समझकर किया…’, बोले PM मोदी

 नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि युवाओं की तरह उन्हें भी जोखिम लेना पसंद है. पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक भविष्य को खतरे में डालकर निर्णय लिए हैं, क्योंकि ये फैसले देश हित में थे. दिल्ली के भारत मंडपम में नेशनल स्टार्ट अप डे पर युवाओं से संवाद करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज हम स्टार्ट अप इंडिया के 10 साल पूरे होने का माइल स्टोन सेलिब्रेट कर रहे हैं. पीएम मोदी ने कहा कि भारत के युवाओं का फोकस देश की समस्याओं का समाधान करने पर है. सिर्फ 10 साल में स्टार्ट अप मीडिया मिशन एक क्रांति बन चुका है. भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट अप इको सिस्टम है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज जोखिम लेना जिंदगी की मुख्यधारा में शामिल हो चुका है. मंथली सैलेरी से आगे सोचने वालों को अब न सिर्फ एक्सेप्ट किया जाता है बल्कि उन्हें रिस्पेक्ट भी मिलता है. पीएम मोदी ने कहा कि याद कीजिए आज से 10 साल पहले हालत क्या थे. व्यक्तिगत प्रयास औऱ इनोवेशन के लिए बहुत गुंजाइश ही नहीं थे. हमने इसे चुनौती दी. हमने युवाओं को खुला आसामान दिया. आज नतीजा हमारे सामने है. 10 साल में ये क्रांति बन चुका है. युवाओं के रिस्क लेने की क्षमता का तारीफ करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि युवाओं की तरह उन्हें भी रिस्क लेना पसंद है. जोखिम लेने की प्रवृति की सराहना करते हुए पीएम मोदी ने कहा, "साथियो रिस्क टेकिंग पर मैं खास तौर पर जोर देता रहा हूं, क्योंकि ये मेरी भी पुरानी आदत है, जो काम कोई करने के लिए कोई तैयार नहीं होता, जो काम दशकों से पहले की सरकारों ने नहीं छूए, क्योंकि उनमें चुनाव हारने का, कुर्सी जाने का डर था. जिन कामों के लिए लोग आकर कहते थे. ये बहुत पॉलिटिकल रिस्क है. मैं उन कार्यों को अपना दायित्व समझकर जरूर करता था." प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि, "आप की तरह ही मेरा भी मानना है जो काम देश के लिए जरूरी है उसे किसी न किसी को तो करना ही होगा, किसी न किसी को रिस्क लेना ही होगा. नुकसान होगा तो मेरा होगा. लेकिन अगर फायदा होगा तो मेरे देश के करोड़ों परिवार का होगा."  पीएम ने कहा कि पिछले 10 सालों में ऐसा इको सिस्टम तैयार हुआ है जो इनोवेशन को बढ़ावा देता है.  भविष्य के उद्यमियों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज भारत में सवा सौ एक्टिव यनिकॉर्न है. जबकि 2014 में इनकी संख्या मात्र 4 थी. आज के स्टार्ट अप यूनिकॉर्न बन रहे हैं. ये बेहद अच्छी खबर है. पीएम मोदी ने कहा कि मेरे देश का नौजवान आज कंफर्ट जोन में अपनी जिंदगी गुजारने को तैयार नहीं है, उसे घिसी पिटी जिंदगी पसंद नहीं है .   

ऑपरेशन सिंदूर के बाद मुरीदके में कोई जगह नहीं बची, लश्कर के प्रमुख अब्दुल रऊफ ने किया खुलासा

 मुरीदके आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के सबसे प्रमुख नेताओं में से एक अब्दुल रऊफ ने एक समारोह के दौरान भारतीय मिसाइल हमलों की विनाशाकारी ताकत का कच्चा चिट्ठा खोला है। रऊफ ने स्वीकार किया कि 6 और 7 मई को हुए भारतीय हमलों ने उनके सबसे महत्वपूर्ण प्रशिक्षण केंद्र और मुख्यालय की कमर तोड़ दी है। मुरीदके में नए आतंकियों को संबोधित करते हुए रऊफ ने उस मंजर का वर्णन किया जिसे अब तक लश्कर छिपाने की कोशिश कर रहा था। उसने संगठन के 'हब' के रूप में इस्तेमाल होने वाली एक ठिकाने के विनाश के बारे में बताया। उसने कहा. "6-7 मई को जो हुआ, उसके बाद वह जगह अब मस्जिद नहीं रही। आज हम वहां बैठ भी नहीं सकते। वह पूरी तरह खत्म हो चुकी है। वह ढह गई है।" उसका यह बयान लश्कर की ओर से अब तक का सबसे बड़ा कबूलनामा है। आमतौर पर लश्कर जैसे संगठन अपनी कमजोरियों और नुकसान को छिपाते हैं, लेकिन रऊफ ने भारतीय स्ट्राइक की सटीकता को साबित कर दिया है। बाल-बाल बचे थे आतंकी अब्दुल रऊफ ने अपने संबोधन में एक और महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उसने बताया कि भारतीय मिसाइलों के गिरने से चंद लम्हे पहले ही वहां मौजूद ट्रेनी को कैंप से बाहर निकाला गया था। यह दर्शाता है कि भारतीय खुफिया एजेंसी और सेना के पास सटीक जानकारी थी और हमला इतना अचानक था कि लश्कर के पास संभलने का वक्त नहीं था। भारतीय सेना द्वारा मई के शुरुआती हफ्ते में चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' का लक्ष्य सीमा पार आतंकी बुनियादी ढांचे को नष्ट करना था। अब्दुल रऊफ वही कमांडर है जिसने हमले में मारे गए आतंकियों का अंतिम संस्कार कराया था। उन जनाजों की तस्वीरों ने पहले ही भारी नुकसान के संकेत दिए थे, लेकिन अब रऊफ के शब्दों ने इसकी आधिकारिक पुष्टि कर दी है।

No-Cost EMI और एक्सचेंज ऑफर: क्या है असली कीमत, जानिए सब सच

नई दिल्ली इन दिनों शॉपिंग मॉल से लेकर Amazon Flipkart Jio Mart Myntra जैसे ईकॉमर्स प्लेटफॉर्म तक हर जगह फेस्टिव सीजन की धूम मची हुई है। शॉपिंग प्लेटफॉर्म ग्राहकों को लुभाने के लिए बेहतरीन ऑफर दे रहे हैं। ग्राहकों को सबसे अधिक नो-कॉस्ट ईएमआई लुभा रहा होता है। इसमें ग्राहक महंगे प्रोडक्ट जैसे मोबाइल फोन, फ्रिज, टीवी, वॉशिंग मशीन या अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स आसानी से किस्तों में खरीद सकते हैं। देखने में यह डील बहुत फायदेमंद लगती है क्योंकि इसमें ऐसा माना जाता है कि EMI पर कोई ब्याज नहीं लगता है। लेकिन सच क्या है, इसे समझना बेहद जरूरी है। फेस्टिव सेल हो या नया फोन लॉन्च, एक लाइन हर जगह कॉमन है. No-Cost EMI, सिर्फ 1,999 रुपये प्रति माह. या कहीं 0 रुपये डाउन पेमेंट. लेकिन क्या ये आपके लिए फायदेमंद है? ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से लेकर मॉल तक यही ऑफर आज स्मार्टफोन खरीदने का सबसे बड़ा ट्रिगर बन चुका है. इंडस्ट्री इंसाइडर या स्टैट्स कहते हैं कि आज भारत में लगभग हर दूसरा प्रीमियम फोन EMI पर खरीदने का ट्रेंड बन गया है. आसान मासिक किश्तों ने फोन खरीदना आसान जरूर किया है, लेकिन इसके साथ एक नया पैटर्न भी आ गया है. ये है Upgrade Trap जिसे आप डार्क पैटर्न का ही एक हिस्सा मान सकते हैं. पहले यूजर्स स्मार्टफोन खरीद कर उसे 3-4 साल तक इस्तेमाल करते थे. अब वही फोन 6-12 महीनों में बदल दिया जाता है. इसके पीछे सिर्फ टेक्नॉलॉजी की तेज़ रफ्तार का हाथ नहीं है, बल्कि आसान EMI विकल्पों का बड़ा रोल है. फोन सिर्फ डिवाइस नहीं, सब्सक्रिप्शन जैसा बन रहा है अब मार्केट में फोन सिर्फ डिवाइस के तौर पर नहीं बेचा जा रहा है, बल्कि उसे लगातार बदलने वाले प्रोडक्ट की तरह पेश किया जा रहा है. ग्राहक पूरा पैसा नहीं देता, सिर्फ मासिक किश्त. एक साल बाद नया मॉडल आता है. पुराना फोन एक्सचेंज होता है. नई EMI शुरू. कई लोग तो 10 साल से स्मार्टफोन की EMI भर रहे हैं, क्योंकि हर दो साल में फोन EMI पर ले लिया और EMI पे कर रहे हैं. लेकिन 10 साल तक फोन की EMI भरना समझदारी है?  इसका सीधा असर यह है कि ग्राहक लगातार किश्तों में फंसा रहता है और कंपनियों को हर साल नया खरीदार मिल जाता है. No-Cost EMI : नाम सुनने में अच्छा, असलियत में महंगा EMI मॉडल के साथ No-Cost EMI भी बड़ी चालाकी से जुड़ा हुआ है. नाम से लगता है कि ब्याज कोई नहीं है. लेकिन अगर आप वही फोन अपफ्रंट खरीदते, तो आमतौर पर सीधा डिस्काउंट मिल सकता है. EMI चुनते ही वह छूट चली जाती है. इंडस्ट्री के रिटेल चैनल से जुड़े लोगों का कहना है कि कई बार एक ही फोन अपफ्रंट खरीदने पर 5% से 7% तक सस्ता पड़ता है, लेकिन EMI विकल्प चुनते ही वही फोन पहले जैसा ही महंगा दिखता है. ऊपर से प्रोसेसिंग फी, GST और लेट पेमेंट कंडीशन्स भी जुड़ जाते हैं, जो पहली नज़र में साफ नहीं दिखते. Exchange ऑफर भी EMI के साथ जुड़ा हुआ है Upgrade Trap का दूसरा हिस्सा है Exchange Offer. पुराना फोन दो, 15,000 रुपये का फायदा लो.. जैसा ऑफर ग्राहक को एक्स्ट्रा फायदा देने जैसा लगता है. लेकिन इंडस्ट्री में काम करने वाले कहते हैं कि पुराने फोन की बाजार कीमत अक्सर उतनी नहीं होती जितना दावा किया जाता है. बाकी राशि बोनस के नाम पर EMI प्लान से जुड़ जाती है. यही वजह है कि एक्स भी EMI मॉडल को अट्रैक्टिव बनाने का हिस्सा बन गया है. डेटा कह रहा है… हम तेजी से बदल रहे हैं संख्या भी यही कहानी बयां करती है. मार्केट एनालिसिस बताते हैं कि भारत में 2024 तक लगभग 48% स्मार्टफोन खरीदें EMI या क्रेडिट विकल्पों पर हुई हैं. यह आंकड़ा 2019 के मुकाबले करीब 22% अधिक है. यानी तेजी से लोग अपफ्रंट खरीद की बजाय किश्त पर सवारी कर रहे हैं. इस रिपोर्ट में यह भी दिखाया गया है कि यूजर आज पुराने 30 महीनों की बजाय 6 से 12 महीनों के बीच फोन बदलते हैं. पहले फोन को लंबे समय तक रखना आम था, अब जल्दी-जल्दी अपग्रेड होना एक नया रिवाज बन चुका है. इसकी वजह सिर्फ लेटेस्ट फोन में दिए गए फीचर्स नहीं हैं, क्योंकि कई साल तक एक ही जैसे दिखने वाले फोन और एक जैसे ही फीचर्स आते रहते हैं. लेकिन यूजर्स को जब दिखता है कि पुराना फोन एक्स्चेंज करके EMI पर लेटेस्ट मॉडल को खरीदा जा सकता है, भले ही उसके लिए 2 साल तक EMI ही क्यों ना देना पड़े. इस चक्कर में यूजर कई बेसिक काम जो इंपॉर्टेंट होते हैं उसे स्किप करके फोन EMI पर खरीद लेता है.  असली कीमत… आपकी जेब पर फर्क आंकड़े यह भी बताते हैं कि अधिकांश No-Cost EMI योजनाओं में अपफ्रंट कीमत के मुकाबले ग्राहक 3% से 8% तक ज्यादा भुगतान कर रहे हैं, भले ही फॉर्मल इंट्रेस्ट चार्ज न किया गया हो. यह फर्क छोटा-सा लगता है, लेकिन जब इसे हजारों और लाखों लेन-देन में देखा जाता है, तो कस्टमर्स की जेब पर बड़ा असर होता है, खासकर मिड-रेंज सेगमेंट में, जहां यूजर हर रुपये की तुलना करते हैं. अगर किश्त चूक गई तो क्या? फाइनेंस सेक्टर के जानकार कहते हैं कि EMI अपने आप में गलत नहीं है. लेकिन जब कस्टमर टोटल कॉस्ट को समझे बिना सिर्फ मासिक किश्त देखकर फैसला करता है, तब समस्या शुरू होती है. अगर एक या दो किश्त चूक जाती हैं, तो लेट फी जुड़ जाती हैं और क्रेडिट स्कोर पर भी असर पड़ता है. इसका सीधा असर अगले लोन, क्रेडिट कार्ड तथा बैंकिंग ऑफर्स पर पड़ सकता है. हर महीने हिडन कॉस्ट लगते हैं और अगर EMI लेट हुई तो हर दिन के हिसाब से एक्स्ट्रा पैसे देने होते हैं.  हम क्यों इतना आसान क्रेडिट चुन रहे हैं भारत में मिडिल क्लास एस्पिरेशन, ऑनलाइन सेल कल्चर और आसान क्रेडिट ने मिलकर एक नया उपभोक्ता पैटर्न बना दिया है. स्मार्टफोन आज सिर्फ एक तकनीकी डिवाइस नहीं, बल्कि एक लाइफस्टाइल प्रोडक्ट बन चुका है जिसे बार-बार अपडेट किया जाता है. लोग EMI को आसान विकल्प मानते हैं क्योंकि उन्हें मंथली बर्डेन कम लगता है. लेकिन कई बार वही आसान राह, … Read more

महाराष्ट्र में केसरिया तूफान: मुंबई-पुणे-नागपुर सब फतह, किसके नाम जाएगी ऐतिहासिक जीत?

मुंबई महाराष्ट्र के निकाय चुनाव में भाजपा की प्रचंड लहर देखने को मिल रही है। देश के सबसे अमीर नगर निकाय बीएमसी में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जहां अब तक शिवसेना का दबदबा रहा करता था। 227 सीटों में से 158 के अब तक रुझान आए हैं और भाजपा अकेले ही 65 पर आगे। उसकी सहयोगी एकनाथ शिंदे की शिवसेना 18 पर आगे है, जबकि उद्धव सेना 52 पर आगे है। यह रुझान यदि नतीजों में बदले तो भाजपा की यह विक्ट्री ऐसी होगी कि हिस्ट्री रच दी जाएगी। ऐसा पहली बार होगा, जब बीएमसी में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी होगी। यहां की सत्ता में सबसे आगे रहने का उसका पुराना सपना रहा है, जो अब पूरा होता दिख रहा है।   इसी तरह नागपुर की बात करें को यहां भी भाजपा बेहद मजबूत होकर उभरी है। जिले के 151 वार्डों में से 94 पर अकेले भाजपा ही आगे है। अब तक 129 सीटों के ही रुझान सामने आए हैं। इसलिए माना जा रहा है कि कुल 151 सीटों के रुझान आने तक भाजपा अपने ही दम पर सेंचुरी लगा सकती है। वहीं भाजपा की सहयोगी एकनाथ शिंदे की शिवसेना को अब तक 2 सीटों पर ही बढ़त मिली है। आरएसएस के मुख्यालय वाले इस शहर में भाजपा के मुकाबले कोई दूर-दूर तक नहीं है और दूसरे नंबर वाली कांग्रेस महज 31 सीटों पर ही आगे है। इस तरह बीएमसी में ठाकरे परिवार का वर्चस्व खत्म होता दिख रहा है तो वहीं पुणे, नागपुर समेत कई शहरों में भाजपा का जलवा रहेगा। ब्रांड फडणवीस होगा और मजबूत, गठबंधन में भी बढ़ेगी पावर ऐसा ही हाल पुणे का भी है। पुणे में भाजपा फिलहाल 47 सीटों पर आगे है। उसके अलावा अन्य सभी दल मिलकर भी 22 सीटों पर ही आगे हैं। इस तरह अजित पवार और शरद पवार मिलकर भी भाजपा के आगे पस्त हैं। भाजपा की यह विक्ट्री हिस्ट्री रचने वाली है। यह जीत सीएम देवेंद्र फडणवीस का कद पार्टी में बढ़ा देगी। इसके अलावा गठबंधन के अंदर भी वह और मजबूत हो जाएंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि अजित पवार अलग लड़कर पराजित हो रहे हैं। इसके अलावा एकनाथ शिंदे की शिवसेना की रफ्तार भी सुस्त है। साफ है कि देवेंद्र फडणवीस का कद इससे बढ़ेगा और उनका ब्रांड मजबूत होगा। ठाकरे ब्रदर्स हारते दिख रहे हैं अस्तित्व की लड़ाई, वर्चस्व पहले ही खत्म यह चुनाव ठाकरे ब्रदर्स के लिए अस्तित्व के लिए संघर्ष वाला था, जिस लड़ाई को वह हारते दिख रहे हैं। अब आने वाले चुनावों में उद्धव सेना के लिए और मुश्किल होगा। ठाकरे परिवार की पावर पूरे महाराष्ट्र में कभी नहीं रही। लेकिन कुछ इलाकों में वह हमेशा मजबूत थी और इनमें मुंबई तो उसका गढ़ था। अब यहां की हार उसे गहरा दर्द देने वाली है।

भारत ने चीन को निर्यात में 67% की बढ़ोतरी की, भेजी गईं ये महत्वपूर्ण चीजें

 नई दिल्‍ली टैरिफ दबाव और ग्‍लोबल टेंशन के बावजूद भारत एक्‍सपोर्ट सेक्‍टर में तरक्‍की कर रहा है. दिसंबर महीने के दौरान भारत ने शानदार उछाल दर्ज की है. वाणिज्य मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत ने चीन को निर्यात करने के मामले में गजब की तेजी दिखाई है. सिर्फ दिसंबर महीने में भारत का चीन को निर्यात साल-दर-साल आधार पर 67.35% बढ़कर 2.04 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है. इस महीने में भारत ने चीन को सबसे ज्‍यादा इलेक्ट्रॉनिक्स, समुद्री और कृषि उत्पादों की खेप भेजी है. इसके अलावा, तेल आधारित खाद्य पदार्थों, समुद्री उत्पादों, दूरसंचार उपकरणों और मसालों के निर्यात में भी तेज ग्रोथ देखी गई है.  अप्रैल से दिसंबर तक भारत का चीन को एक्‍सपोर्ट वहीं अप्रैल से दिसंबर  2025 के दौरान भी चीन को मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट में अच्‍छी उछाल रही है, जो पिछले साल इसी अवधि में 10.42 अरब डॉलर से बढ़कर 14.25 अरब डॉलर हो गया. इसी तरह,  दिसंबर महीने में भी साल दर साल के आधार पर ज्‍यादा तेजी आई है, लेकिन नंबर की तुलना में दिसंबर में थोड़ा एक्‍सपोर्ट कम हुआ है. वहीं अप्रैल से नवंबर तक के भारत का चीन को एक्‍सपोर्ट $12.22 बिलियन (करीब ₹1 लाख 85 करोड़) रहा.  साल 2025 में चीन को भारत का एक्‍सपोर्ट साल 2025 के दौरान भी भारत का चीन को एक्‍सपोर्ट में इजाफा हुआ है. चीनी सीमा शुल्क के सालाना आंकड़ों के अनुसार, 2025 में भारत से चीन को कुल निर्यात लगभग $19.75 बिलियन रहा, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 9.7 फीसदी की उछाल है.  भारत ने क्‍या-क्‍या चीजें चीन को भेजा?   भारत ने सबसे ज्‍यादा चीन को पेट्रोलियम उत्पाद (Petroleum Products) भेजा है. इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक सामान जैसे मोबाइल और फोन के पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, OLED फ्लैट-पैनल डिस्प्ले मॉड्यूल्स, एल्यूमिनियम और स अल्युमिनियम उत्पाद, सल्फर एवं रासायनिक कच्चा माल, कुछ एग्री प्रोडक्‍ट्स और फूड आइट्मस आदि शामिल है. समुद्री उत्पादों का निर्यात भी चीन तक बढ़ा है. इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में, प्रमुख वस्तुओं में प्रिंटेड सर्किट बोर्ड, फ्लैट पैनल डिस्प्ले मॉड्यूल और टेलीफोनी के लिए अन्य विद्युत उपकरण में मजबूत बढ़ोतरी हुई है.  चीन के साथ व्‍यापार घाटा भी बढ़ा  आंकड़ों के अनुसार दिसंबर महीने में चीने से आयात 20 फीसदी बढ़कर 11.7 अरब डॉलर हो गया है. चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से दिसंबर के दौरान, भारत का चीन को निर्यात 36.7% बढ़कर 14.24 अरब डॉलर हो गया, जबकि आयात 13.46% बढ़कर 95.95 अरब डॉलर हो गया. इसके चलते नौ महीने की अवधि में चीन के साथ व्यापार घाटा बढ़कर 81.71 अरब डॉलर हो गया.   

भाजपा का अब BMC में मेयर, बहुमत लाकर BJP ने बजाई डंका, उद्धव की लग गई लंका

मुंबई  बीएमसी चुनाव रिजल्ट के रुझानों में अबकी बार भाजपा सरकार की झलक दिख गई है. बीएमसी में पहली बार भाजपा का कब्जा होता दिख रहा है. उद्धव की शिवसेना संग क्लोज फाइट के बाद भाजपा ने लंबी छलांग लगा दी है. बीएमसी चुनाव 2026 के रुझानों में भाजपा वाला महायुति 109 सीटों से आगे चल रहा है. वहीं ठाकरे ब्रदर्स 64 सीटों पर सिमटते दिख रहे हैं. रुझानों अगर ऐसे ही नतीजों में बदलते हैं  बीएमसी यानी बृहन्मुंबई नगर निगम   चुनाव के रिजल्ट में भाजपा बाला साहेब ठाकरे की विरासत को खत्म करती दिख रही है. ठाकरे दोनों भाई अपने किले को बचाने आए थे, मगर ऐसा लग नहीं रहा कि बीएमसी का ताज बच पाएगा. भाजपा और शिंदे वाली शिवसेना बीएमसी पर कब्जा जमाते दिख रहे हैं. बीएमसी चुनाव 2026 के लिए आज सुबह 10 बजे सो वोटों की गिनती जारी है. अभी केवल रुझान आएं हैं, दोपहर के बाद बीएमसी चुनाव के नतीजे साफ हो जाएंगे. बीएमसी चुनाव रिजल्ट के लिए मतगणना स्थल पर सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था है. बीएमसी चुनाव में सभी ‘एग्जिट पोल’ ने भाजपा-शिवसेना गठबंधन की स्पष्ट जीत और शिवसेना (यूबीटी)-महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) की हार का अनुमान जताया है. ‘माई एक्सिस इंडिया’ के ‘एग्जिट पोल’ के अनुसार, भाजपा-शिवसेना गठबंधन देश की वाणिज्यिक राजधानी में 131-151 सीट जीतकर 42 फीसदी मत प्रतिशत हासिल करने की स्थिति में है. वहीं, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के शिवसेना (उबाठा)-मनसे-राकांपा (एसपी) गठबंधन के 58-68 सीट जीतने और 32 फीसदी मत प्रतिशत हासिल करने की उम्मीद है.  अरुण गवली की बेटी चुनाव हारीं गैंगस्टर से राजनेता बने अरुण गवली की बेटी योगिता गवली 2026 के बीएमसी चुनाव हार गई हैं. सियासत में गवली परिवार की अगली पीढ़ी की यह चुनावी शुरुआत असफल रही है. योगिता गवली ने बायकुला-चिंचपोकली क्षेत्र के वार्ड नंबर 207 से अपने पिता अरुण गवली द्वारा स्थापित क्षेत्रीय पार्टी अखिल भारतीय सेना (ABS) के टिकट पर चुनाव लड़ा था.  बीजेपी को बहुमत मिला बीजेपी में पहली बार बीजेपी + को बहुमत मिल गया है. ताजा रुझानों में बीजेपी + 115 सीटों पर आगे चल रहा है. इससे पहले लगातार यह सवाल पूछा जा रहा था कि क्या राज और उद्धव के हाथ मिलाने से बीजेपी को नुकसान होगा लेकिन चुनावी रुझानों ने साफ कर दिया है कि अब उद्धव गुट की शिवसेना की विदाई अब तय है. अभी तक 201 सीटों के रुझान आ गए हैं जिसमें से बीजेपी + को 115 तथा उद्धव सेना गठबंधन को 68 सीटें मिलती दिख रही है. इसके अलावा 10 सीटों पर कांग्रेस है. RSS के गढ़ में भाजपा की लहर नागपुर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गढ के तौर पर देखा जाता है। इसी शहर से संघ की स्थापना हुई थी और यहीं पर उसका मुख्यालय भी बीते 100 सालों से है। इसलिए भाजपा भी यहां जीत की उम्मीद रखती रही है। शुक्रवार को आए निकाय चुनाव के नतीजों में में भाजपा की यह उम्मीद सिरे चढ़ती दिख रही है। अब तक आए रुझानों में कुल 151 वार्डों में से 94 पर अकेले भाजपा ही आगे है। अब तक 129 सीटों के ही रुझान सामने आए हैं। इसलिए माना जा रहा है कि कुल 151 सीटों के रुझान आने तक भाजपा अपने ही दम पर सेंचुरी लगा सकती है। वहीं भाजपा की सहयोगी एकनाथ शिंदे की शिवसेना को अब तक 2 सीटों पर ही बढ़त मिली है। यह शहर इसलिए भी अहम है क्योंकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यहीं के हैं और नितिन गडकरी भी इसी शहर से सांसद हैं। अब तक के रुझानों में एनसीपी को महज 1 सीट पर बढ़त है। इसके अलावा कांग्रेस 31 सीटों पर लीड के साथ दूसरे नंबर पर है। लेकिन हालात ऐसे हैं कि भाजपा के मुकाबले कोई भी दूर-दूर तक नहीं दिख रहा है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना को तो सिर्फ एक ही सीट पर बढ़त मिली है। भाजपा को बीएमसी में भी बड़ा फायदा होता दिख रहा है और दशकों के बाद ठाकरे परिवार का वर्चस्व मुंबई की सत्ता से खत्म हो जाएगा। पुणे और बीएमसी में भी भाजपा की लहर, उद्धव और पवार पस्त बीएमसी में भाजपा 65 सीटों पर आगे है, जबकि शिंदे की शिवसेना 18 पर आगे चल रही है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना 52 सीटों पर आगे चल रही है और कांग्रेस को महज 11 सीटों पर ही लीड है। अब बात पुणे की करें तो यहां भी नागपुर जैसे ही हालात हैं। भाजपा गठबंधन को अब तक 47 सीटों पर लीड मिली है, जबकि शरद पवार और अजित पवार की एनसीपी मिलकर भी 15 सीटों पर ही आगे हैं। कांग्रेस को तो 4 सीटों पर ही बढ़त मिल पाई है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना सिर्फ एक सीट पर आगे चल रही है। बता दें कि पुणे में अपनी ताकत ज्यादा बताते हुए अजित पवार गठबंधन से अलग राह पर चले थे। अब जो रुझान हैं, वह पवार परिवार को झटका देने वाले हैं। बहुमत के करीब बीजेपी बीएमसी में भारतीय जनता पार्टी पहली बार बहुमत के करीब पहुंच गई है. अभी तक 227 में से 172 सीटों के रुझान आए हैं जिसमें से 108 पर बीजेपी गठबंधन आगे है जबकि उद्धव शिवसेना गठबंधन महज 56 सीटों पर ही आगे चल रहा है और 3 पर कांग्रेस आगे है. बहुमत का आंकड़ा 114 का है. मुंबई में बीजेपी गठबंधन की 'महा-बढ़त', जमाई 'सेंचुरी' बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के 227 वार्डों के लिए जारी मतगणना में अब तस्वीर साफ होने लगी है. ताजा रुझानों के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाला 'महायुति' गठबंधन की बढ़त 102 सीटों की हो गई है. वहीं, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) और राज ठाकरे की मनसे का गठबंधन (UBT+) फिलहाल 57 सीटों पर ही आगे चल रहा है. नवाब मलिक के भाई चुनाव हारे एनसीपी शरद पवार के उम्मीदवार और नवाब मलिक के भाई कप्तान मलिक वार्ड 165 से चुनाव हार गए हैं. यहां से कांग्रेस के अशरफ आज़मी जीत गए हैं. इसके अलावा मुंबई में 7 उम्मीदवार विजेता घोषित किए गए हैं जिसमें शिवसेना के 3 उम्मीदवार शामिल हैं.  बीएमसी चुनाव रिजल्ट 2026 के रुझानों में भाजपा शतक के करीब पहुंच चुकी है. बीएमसी चुनाव में महायुति … Read more

मचाडो ने व्हाइट हाउस में ट्रंप को सौंपा अपना नोबेल पुरस्कार, वेनेजुएला संकट पर हुई चर्चा

वाशिंगटन वेनेजुएला की विपक्षी नेता और नोबेल प्राइज विजेता मारिया कोरीना मचाडो और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात आखिरकार हो गई. वेनेजुएला में हुए एक्शन के बाद इस मीटिंग पर सबकी नजर थी. मीटिंग के बाद मचाडो ने बड़ा दावा किया. वह बोलीं कि उन्होंने मीटिंग के दौरान ट्रंप को अपना नोबेल शांति पुरस्कार पदक भेंट किया, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि क्या उन्होंने वास्तव में इसे स्वीकार किया. मचाडो लंच मीटिंग के लिए गुरुवार को व्हाइट हाउस पहुंचीं थीं.  यह बैठक वेनेजुएला के राजनीतिक भविष्य को लेकर चल रही तीव्र बहस के बीच हुई, जो इस महीने की शुरुआत में अमेरिका के नेतृत्व में पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद हुई है. एक घंटे से अधिक चली चर्चा के बाद जब मचाडो व्हाइट हाउस से निकलीं, तो उनका जोरदार स्वागत समर्थकों ने किया. उन्होंने समर्थकों से कहा, 'हम राष्ट्रपति ट्रंप पर भरोसा कर सकते हैं,' जिसके बाद कुछ लोगों ने 'धन्यवाद, ट्रंप' के नारे लगाए और फिर वाशिंगटन में अन्य बैठकों के लिए रवाना हो गईं. यह पूछे जाने पर कि क्या ट्रंप ने उनके द्वारा दिया गया पदक स्वीकार कर लिया है, मचाडो ने जवाब देने से इनकार कर दिया. यह कदम कई हफ्तों से चल रही अटकलों और ट्रंप को पुरस्कार देने की उनकी पिछली सार्वजनिक टिप्पणियों के बाद आया है. हालांकि, नोबेल शांति पुरस्कार देने वाली संस्था पहले ही साफ कर चुकी है कि नियमों के अनुसार पुरस्कार को हस्तांतरित या साझा नहीं किया जा सकता है. ट्रंप ने मचाडो को दिया गिफ्ट वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो व्हाइट हाउस से एक गिफ्ट बैग लेकर बाहर निकलीं, जिस पर प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप का नाम लिखा था. बैग को मचाडो ने अपने पर्स के साथ हाथ में पकड़ा हुआ था. इस लाल रंग के बैग पर प्रेसिडेंट के सिग्नेचर हो रखे हैं. बैग में आखिर क्या है, ये अभी साफ नहीं है. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने मचाडो को वेनेजुएला के कई लोगों की एक उल्लेखनीय और साहसी आवाज बताया, लेकिन साथ ही यह भी दोहराया कि उनके नेतृत्व की संभावनाओं के बारे में ट्रंप का आकलन बदला नहीं है. ट्रंप पहले भी कह चुके हैं कि नेतृत्व करने के लिए उन्हें घरेलू समर्थन प्राप्त नहीं है. मचाडो को US से मिला-जुला सपोर्ट नोबेल पुरस्कार विजेता होने और लोकतंत्र की मुखर वकालत करने के बावजूद, मचाडो को अमेरिकी अधिकारियों से मिला-जुला समर्थन मिला है. ट्रंप ने तेल और अन्य मुद्दों पर सहयोग के लिए रोड्रिगेज की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा की है, जबकि कुछ अमेरिकी सांसदों ने मचाडो पर भरोसा जताया है. गुरुवार की बैठक माचाडो की महीनों बाद वॉशिंगटन में पहली सार्वजनिक उपस्थिति थी. सुरक्षा को खतरे के चलते उन्हें वेनेजुएला छोड़ना पड़ा था. मादुरो समर्थक सर्वोच्च न्यायालय ने माचाडो को वेनेजुएला के 2024 के राष्ट्रपति चुनाव लड़ने से रोक दिया था. स्वतंत्र पर्यवेक्षकों का कहना है कि विपक्ष समर्थित एडमंडो गोंजालेज ने निर्णायक जीत हासिल की, हालांकि मादुरो ने जीत की घोषणा कर सत्ता पर अपना कब्जा बनाए रखा. डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस मर्फी, जिन्होंने मचाडो से मुलाकात की, ने बताया कि मचाडो ने सांसदों को बताया कि वेनेजुएला में दमनकारी व्यवस्था मादुरो काल से बनी हुई है. उन्होंने अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज को एक 'कुशल नेता' बताया, जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन से और अधिक मजबूत होती जा रही हैं. ट्रंप ने पहले कहा था कि उनकी प्राथमिकता वेनेजुएला के तेल तक अमेरिकी पहुंच सुनिश्चित करना और देश की अर्थव्यवस्था को संभालना है. मादुरो के बाद सरकार संभाल रहीं रोड्रिगेज की उन्होंने बार-बार तारीफ की है.