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IndiGo की दिक्कतों का फायदा? दूसरी कंपनी ने बढ़ाई 100 डेली फ्लाइट्स, जानें पूरा प्लान

नई दिल्ली  देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो (IndiGo) पर छाए संकट और यात्रियों की बढ़ती मांग के बीच स्पाइसजेट एयरलाइन (SpiceJet Airline) ने एक बड़ा फैसला लिया है। एयरलाइन ने मौजूदा सर्दियों के मौसम में प्रमुख रूटों पर बढ़ती मांग को देखते हुए अपनी सेवाओं को व्यापक रूप से बढ़ाने की योजना बनाई है। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय विमानन बाज़ार में पर्याप्त क्षमता सुनिश्चित करना है। हर रोज़ 100 अतिरिक्त उड़ानें स्पाइसजेट ने नियामक अनुमोदन (Regulatory Approval) मिलने पर मौजूदा विंटर शेड्यूल के दौरान हर रोज़ 100 अतिरिक्त फ्लाइट्स (Additional Flights) शुरू करने की योजना बनाई है। एयरलाइन ने पिछले दो महीनों में 17 विमानों को अपने सक्रिय संचालन (Active Operation) में शामिल किया है। यह विस्तार डैम्प-लीज (Damp-Lease) पर लिए गए विमानों और अपने खुद के विमानों को सेवा में वापस लाकर किया गया है। इस बढ़ी हुई खेप की उपलब्धता से स्पाइसजेट को ज्यादा मांग वाले रूटों पर अतिरिक्त क्षमता तैनात करने में मदद मिलेगी। स्पाइसजेट ने कहा है कि वह सर्दियों में मज़बूत और बढ़ती मांग देख रही है और इस विस्तार से भारतीय विमानन बाज़ार को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।     प्रमुख एयरपोर्ट्स पर आज 100 से ज़्यादा फ्लाइट्स रद्द भले ही स्पाइसजेट ने विस्तार की योजना बनाई हो लेकिन देश के दो प्रमुख हवाईअड्डों पर आज बड़ी संख्या में फ्लाइट्स रद्द होने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है:     चेन्नई एयरपोर्ट (Chennai Airport): यहां आज कुल 70 फ्लाइट्स रद्द की गई हैं जिनमें 37 आगमन (Arrival) की और 33 प्रस्थान (Departure) की उड़ानें शामिल हैं।     बेंगलुरु एयरपोर्ट (Bengaluru Airport): यहां  कुल 61 उड़ानें रद्द हुई हैं जिनमें 35 आगमन और 26 प्रस्थान की फ्लाइट्स शामिल हैं। चेन्नई और बेंगलुरु जैसे प्रमुख एयरपोर्ट्स पर इतनी बड़ी संख्या में उड़ानों का रद्द होना यात्रियों के लिए एक गंभीर समस्या खड़ी कर रहा है जिसके कारण स्पाइसजेट जैसे एयरलाइनों का विस्तार करना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।  

बंगाल में शाहजहां केस का गवाह निशाने पर, हमले में दो की हत्या – बढ़ी राजनीतिक हलचल

कोलकाता  भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर पश्चिम बंगाल की कानून व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के शासन में हो रही घटनाओं का जिक्र करते हुए शेख शाहजहां केस से जुड़े एक गवाह के साथ हुए हादसे का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह घटना राज्य में न्याय की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़ी करती है। पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली इलाके में एक दुखद हादसा हुआ, जिसमें शेख शाहजहां केस का मुख्य गवाह बुरी तरह घायल हो गया।  इस हादसे में दो अन्य लोगों की जान चली गई। घटना सुबह करीब सात बजे नजात इलाके में हुई, जब गवाह अपने बेटे के साथ कोर्ट में गवाही देने के लिए बसंती रोड पर जा रहा था। अचानक दूसरी दिशा से आ रहे एक ट्रक ने उसकी कार को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि भोला घोष के बेटे और ड्राइवर की मौके पर ही मौत हो गई। भोला घोष को पहले स्थानीय मिनाखान अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत गंभीर देखते हुए उन्हें कोलकाता के एक बड़े अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया। डॉक्टरों का कहना है कि उनकी स्थिति अब भी नाजुक बनी हुई है। अमित मालवीय ने अपने पोस्ट में दावा किया कि ट्रक को शेख शाहजहां का करीबी अब्दुल हलीम मोल्ला चला रहा था, जो अपने साथी नजरुल मोल्ला के साथ मौजूद था। मालवीय के मुताबिक, अब्दुल हलीम मोल्ला लंबे समय से सीबीआई की वांछित सूची में भगोड़े के रूप में दर्ज है। उन्होंने आरोप लगाया कि जेल में बंद शेख शाहजहां गवाहों को एक-एक करके निशाना बना रहा है ताकि केस कमजोर हो जाए। उन्होंने सवाल किया कि क्या इस सबके पीछे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का संरक्षण है, क्योंकि राज्य की पुलिस और प्रशासन इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं।

अमित शाह का विपक्ष पर वार: SIR मुद्दे पर झूठ की राजनीति बंद करें

नई दिल्ली  सांसद में शीतकालीन सत्र के दौरान केंद्रीय मंत्री अमित शाह विपक्ष पर गरजे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष SIR को लेकर झूठ फैला रहा है। EC एक संवैधानिक संस्था है और यह तब बनी थी, जब BJP नहीं बनी थी। अपनी बात को जारी रखते हुए शाह ने कहा कि विपक्ष के सदस्य बार- बार इस मुद्दे पर अपने विचार रख रहे थे, इसलिए उन्हें जवाब देना था। उन्होंने पहले के सभी एसआईआर (SIR) का गहन अध्ययन किया है और कांग्रेस की ओर से फैलाए गए "झूठ" का अपने तर्कों के आधार पर जवाब देना चाहते हैं। SIR पर चर्चा से इनकार का कारण अमित शाह ने लोकसभा में कहा कि बीते दो दिनों तक संसद की कार्यवाही ठीक से नहीं चल सकी और विपक्ष ने यह संदेश देने की कोशिश की कि सरकार चर्चा नहीं चाहती। इस पर उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट की। गृह मंत्री ने कहा, "हमने चर्चा के लिए 'ना' कहा, इसके पीछे कारण थे। विपक्ष की मांग थी SIR पर चर्चा की।" उन्होंने तर्क दिया, "यह (एसआईआर) चुनाव आयोग का काम है। अगर इस पर चर्चा होगी, तो जवाब कौन देगा?" शाह ने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है।   इसके अलावा शाह ने  बुधवार को लोकसभा में चुनाव सुधारों पर हो रही चर्चा का जवाब देते हुए, सदन की कार्यवाही बाधित होने और चर्चा से इनकार करने के आरोपों पर विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने साफ किया कि बीजेपी और एनडीए के लोग कभी भी बहस से पीछे नहीं हटते। उन्होंने बताया कि उन्होंने SIR पर चर्चा करने से मना क्यों किया था। चुनाव सुधार पर चर्चा को मिली सहमति गृह मंत्री ने बताया कि जब विपक्ष चुनाव सुधार के व्यापक मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार हुआ, तब सरकार ने सहमति दी। अमित शाह ने कहा कि चर्चा चुनाव सुधार पर तय हुई थी, लेकिन विपक्ष के सदस्यों ने बार-बार SIR पर ही अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जवाब तो उन्हें देना ही था।  अमित शाह ने यह स्पष्ट किया कि सरकार संसद को देश की सबसे बड़ी पंचायत मानती है और चर्चा के लिए हमेशा तैयार है, लेकिन विषय संवैधानिक सीमाओं के भीतर होना चाहिए।  

सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए, भारतीय रेलवे ने आरओबी/आरयूबी निर्माण को बढ़ाकर तीन गुना किया

नई दिल्ली  भारतीय रेलवे पर रोड ओवर ब्रिज/रोड अंडर ब्रिज (आरओबी/आरयूबी) के कार्यों की मंजूरी और क्रियान्वयन एक सतत् प्रक्रिया है। ऐसे कार्यों को ट्रेन संचालन में सुरक्षा और गतिशीलता पर प्रभाव और सड़क उपयोगकर्ताओं पर प्रभाव के आधार पर प्राथमिकता दी जाती है और उन्हें शुरू किया जाता है।   मालदा डिवीजन के अजीमगंज-न्यू फरक्का खंड में किमी 239/9-10 पर एलसी नंबर 43/एसपीएल/ई के बदले आरओबी के निर्माण कार्य को मंजूरी दे दी गई है। जनरल अरेंजमेंट ड्राइंग (जीएडी) और विस्तृत अनुमान तैयार करने का काम शुरू कर दिया गया है। पश्चिम बंगाल में स्वीकृत 302 आरओबी/आरयूबी कार्यों में से, 99 आरओबी/आरयूबी कार्य राज्य सरकार के कारण विलंबित हैं। विवरण इस प्रकार हैं:    आरओबी/आरयूबी कार्यों का पूरा होना और चालू होना विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है, जैसे एलसी को बंद करने के लिए सहमति देने में राज्य सरकारों का सहयोग, एप्रोच अलाइंमेंट को ठीक करना, सामान्य व्यवस्था ड्राइंग (जीएडी) की मंजूरी, भूमि अधिग्रहण, अतिक्रमण हटाना, उल्लंघनकारी उपयोगिताओं का स्थानांतरण, विभिन्न प्राधिकरणों से वैधानिक मंजूरी, परियोजना/कार्य स्थलों के क्षेत्र में कानून और व्यवस्था की स्थिति, जलवायु की स्थितियों के चलते विशेष परियोजना/क्षेत्र के लिए एक वर्ष में काम करने वाले दिनों की अवधि आदि। ये सभी कारक परियोजनाएं/कार्यों को पूरा होने के समय को प्रभावित करते हैं। रेलवे ने आरओबी/आरयूबी कार्यों में तेज़ी तेजी लाने के लिए निम्नलिखित उपाय किए हैं: (i) सुचारू कार्यान्वयन करने के लिए जनरल अरेंजमेंट ड्राइंग (जीएडी) को अंतिम रूप देने से पहले, संबंधित राज्य सरकार/सड़क स्वामित्व प्राधिकरण के साथ संयुक्त सर्वेक्षण किया जाता है। (ii) आरओबी/आरयूबी कार्यों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को हल करने के लिए रेलवे और राज्य सरकार के अधिकारियों की समय-समय पर बैठकें की जाती हैं। (iii) डिजाइन अनुमोदन के दौरान देरी से बचने के लिए रेलवे के हिस्सों पर सड़क के विस्तार, तिरछापन और चौड़ाई के विभिन्न संयोजनों के लिए सुपरस्ट्रक्चर ड्राइंग का मानकीकरण किया गया है। इसे एक सार-संग्रह के रूप में जारी किया गया है, जिसे शीघ्र योजना के लिए सीधे रेलवे लाइनों पर रोड ओवर ब्रिज के लिए अपनाया जा सकता है। (iv) जहां भी मुमकिन हो, रेलवे द्वारा आरओबी/आरयूबी कार्यों को एकल इकाई के आधार पर क्रियान्वयन करने की योजना है। अगर कोई सड़क स्वामित्व प्राधिकारी/राज्य सरकार चाहे तो रेलवे उन्हें एकल इकाई के आधार पर कार्य करने की अनुमति दे सकता है। यह जानकारी केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज लोकसभा में सवालों के लिखित जवाब में दी।

सऊदी अरब में मौसम की मार! मक्का–मदीना में भीषण बारिश से कयामती नज़ारा, रेड अलर्ट

रियाध  सऊदी अरब के मक्का, जेद्दा और आसपास के इलाकों में मंगलवार को अचानक इतनी तेज बारिश हुई कि कुछ ही मिनटों में सड़कें झील जैसी बन गईं। आमतौर पर गर्म और रेगिस्तानी माने जाने वाले इन क्षेत्रों में ऐसा दृश्य बहुत कम देखने को मिलता है। मंगलवार सुबह से ही काले बादल छाए हुए थे। दोपहर तक भारी बारिश शुरू हुई और पानी सड़कों पर भरने लगा। निचले इलाकों में हालात सबसे खराब रहे। कई जगह ट्रैफिक रुक गया और गाड़ियाँ पानी में डूबती नजर आईं। कई इलाकों में बिजली भी गुल हो गई।   सऊदी मौसम विभाग NCM ने पहले ही चेतावनी दी थी कि मक्का, जेद्दा, रबिघ, खुलाईस और आसपास के शहरों में बहुत तेज बारिश, ओले, तेज हवाएं और अचानक बाढ़ आने का खतरा है। अलर्ट के मुताबिक रात 1 बजे से दोपहर 1 बजे तक बारिश सबसे ज्यादा होने वाली थी और वैसा ही हुआ। कई लोगों को 2009 और 2011 की वही बादल फटने वाली भयंकर बाढ़ याद आ गई, जिसने बड़ी तबाही मचाई थी। इस बार भी बारिश ने हालात काफी बिगाड़ दिए। स्कूल बंद करने के आदेश  स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने सोमवार रात ही स्कूलों को बंद कर ऑनलाइन क्लास का आदेश दे दिया था। सिविल डिफेंस ने लोगों से साफ कहा है कि निचले इलाकों में न जाएं और बिना वजह बाहर न निकलें।सोशल मीडिया पर लोगों ने वीडियो शेयर कर बताया कि पानी कुछ ही मिनटों में कारों की बोनट तक पहुंच गया। जेद्दा में साल में कुछ बार ही बारिश होती है, इसलिए शहर की व्यवस्था अचानक इतनी बारिश संभाल नहीं पाती।   अंतरराष्ट्रीय इवेंट्स रद्द जेद्दा में चल रहे रेड सी इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल को अचानक रोकना पड़ा। निर्देशक डैरेन एरोनोफ्स्की स्टेज पर थे तभी बाहर तेज गर्जन शुरू हो गई। इसके बाद शाम के सारे कार्यक्रम रद्द कर दिए गए। हॉलीवुड एक्टर रिज़ अहमद का सत्र भी रद्द करना पड़ा।अमेरिकी दूतावास ने भी सुरक्षा कारणों से अपना गाला इवेंट रद्द किया।   आगे का मौसम कैसा रहेगा? मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि खराब मौसम अभी खत्म नहीं हुआ है। बुधवार और गुरुवार को मदीना, तबुक, अल जौफ और उत्तरी सीमाओं तक बारिश फैलने की संभावना है। कई जगह ओले और धूलभरी हवाएं भी चल सकती हैं।  

VIDEO वायरल: पाक आर्मी स्पोक्सपर्सन ने प्रेस ब्रीफिंग में महिला पत्रकार से की अभद्र हरकत

इस्लामाबाद  पाकिस्तानी सेना के जनरल का एक वीडियो सामने आने के बाद इंटरनेट पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। दरअसल इस वीडियो में पाकिस्तान के इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस के डायरेक्टर जनरल और सैन्य प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी एक महिला पत्रकार को आंख मारते नाराज आ रहे हैं। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक वायरल वीडियो कथित तौर पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकार अबसा कोमल जनरल चौधरी से पाक के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को लेकर सवाल पूछ रही थीं। पत्रकार ने कहा, “आपने आज कहा कि वह (इमरान खान) राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं, देश विरोधी हैं और दिल्ली के इशारों पर काम कर रहे हैं। यह पहले से कैसे अलग है या क्या हम आगे इस पर कोई डेवलपमेंट की उम्मीद करें?” इस गंभीर सवाल का मजाकिया जवाब देते हुए जनरल ने कहा, "और एक चौथा पॉइंट जोड़ लें वह एक ‘जेहनी मरीज’ (मानसिक रोगी) भी हैं।" इसके बाद वह मुस्कुराए और पत्रकार को देख कर आंख मारी, जिसका वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गया। हालांकि लाइव हिन्दुस्तान स्वतंत्र रूप से वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है। भड़के लोग पाकिस्तानी जनरल का वीडियो वायरल होते ही यूजर्स का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने इस पर आश्चर्य जताया है कि कोई वर्दी पहना हुआ शख्स, सार्वजनिक रूप से इस तरह की हरकत कैसे कर सकता है। एक यूजर ने लिखा, “ये कूल बनने की कोशिश कर रहे हैं। इनको ये नहीं पता कि इनको कोई सीरियसली नहीं लेता।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “यह दिखाता है कि उनकी सेना कितनी गैर-पेशेवर है। वर्दी में कोई इस तरह सार्वजनिक रूप से किसी को आंख कैसे मार सकता है?" वहीं एक अन्य ने लिखा कि इस तरह के लोग पाकिस्तान सेना के जनरल हैं तो कोई आश्चर्य नहीं है कि उनका देश किस स्थिति में हैं।

थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा पर भारी लड़ाई, 6 लाख शरणार्थी, ड्रोन, रॉकेट और टैंक से हमला

ओड्डार मान्छे  थाईलैंड और कंबोडिया की ताजा लड़ाई तीसरे दिन में पहुंच चुकी है. दो ताकतवर एशियाई देशों की ये लड़ाई नाजुक मोड़ में पहुंच गई है. यहां रॉकेट, ड्रोन, F-16 जेट्स, आर्टिलरी, एंटी एयर मिसाइल का इस्तेमाल किया जा रहा है. जंग की वजह से मात्र तीन दिन में ही दोनों देशों में 6 लाख से ज्यादा लोगो को अपना घर छोड़ना पड़ा है. जंग में अबतक 13 सैनिकों की मौत हो चुकी है.  दक्षिण-पूर्व एशिया के दोनों पड़ोसी देशों के अधिकारियों ने बुधवार को एक-दूसरे पर उकसावे की कार्रवाई का आरोप लगाया है. थाईलैंड के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता सुरसंत कोंगसिरी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों को बताया कि सात प्रांतों में 400,000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है. उन्होंने कहा, "हमने सुरक्षा के लिए एक बड़े खतरे का अंदाजा लगाया था, जिसकी वजह से आम लोगों को बड़ी संख्या में सुरक्षित जगहों पर जाना पड़ा." थाई सेना ने यह भी बताया कि बुधवार सुबह कंबोडिया से दागे गए रॉकेट सुरिन में फानोम डोंग राक अस्पताल के पास गिरे, जिसके बाद मरीजों और अस्पताल के कर्मचारियों को बंकर में छिपना पड़ा.  थाईलैंड के अखबार द नेशन की रिपोर्ट के मुताबिक कंबोडिया ने चोंग बोक-चोंग आन मा पर 80 से ज़्यादा ड्रोन हमले किए. BM-21 रॉकेट और टैंक से फायरिंग की. यहां 171,000 लोगों ने चार सीमावर्ती प्रांतों में शरण ली है.  थाई सेना ने थाई-कंबोडियाई सीमा पर भारी लड़ाई वाली रात का ब्यौरा दिया है, जिसमें बताया गया है कि कंबोडियाई सेना ने चोंग बोक और चोंग आन मा में थाई ठिकानों पर 80 से ज़्यादा ड्रोन हमले, BM-21 रॉकेट और टैंक से फायरिंग की.  10 दिसंबर, 2025 को सुबह 9 बजे के अपडेट में थाईलैंड की सेना ने कहा है कि कंबोडिया ने  हिल 677 की ओर 80 से ज़्यादा ड्रोन भेजे. फू मकुआ इलाके पर कब्ज़ा करने की कोशिश में BM-21 मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर से फायरिंग की. इसके अलावा थाई सेना का दावा है कि कंबोडिया ने  प्रीह विहार पर अपनी पोजीशन से टैंक और सीधे फायरिंग वाले हथियारों का इस्तेमाल करके कंथारालक जिले पर भी हमला किया.  थाई सेना ने चोंग चोम के दक्षिण में एक एंटी-ड्रोन साइट को नष्ट कर दिया.  वहीं पड़ोसी देश कंबोडिया के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय की प्रवक्ता मैली सोचियाटा ने कहा, "पांच प्रांतों में 101,229 लोगों को सुरक्षित ठिकानों और रिश्तेदारों के घरों में पहुंचाया गया है." कंबोडियन मीडिया ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन द्वारा चलाई जाने वाली वेबसाइट कंबोडियननेस ने बताया कि थाई F-16 जेट्स ने देश के दो इलाकों पर हमला किया, जबकि तीन अन्य इलाकों में थाई गोलाबारी जारी रही.  दक्षिण-पूर्वी एशिया के ये पड़ोसी देश अपनी 800 किलोमीटर लंबी सीमा पर कई जगहों पर भिड़ते रहते हैं. इसमें कई एतिहासिक मंदिर शामिल हैं.  इससे पहले जुलाई में दोनों देशों के बीच पांच दिनों तक चली लड़ाई चली थी. जिसमें दर्जनों लोग मारे गए थे और सीमा के दोनों ओर लगभग 300,000 लोग विस्थापित हो गए थे. इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और मलेशिया के सहयोग से दोनों के बीच सीजफायर पर सहमति बनी थी. अब ट्रंप ने एक बार फिर से दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की बात कही है. 

VHP की बड़ी मांग: जनगणना में सभी लोग खुद को हिंदू के रूप में रजिस्टर कराएं

बेंगलुरु  VHP यानी विश्व हिंदू परिषद ने आगामी जनगणना में सभी से खुद को हिंदू के तौर पर दर्ज कराने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इसके जरिए हिंदू समाज में बंटवारे की कोशिश को रोकना है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को बांटने की प्रयासों को रोकना है और एकजुट रहना है। इस दौरान उन्होंने कहा कि देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की पहचान के लिए मापदंड होना चाहिए।  अध्यक्ष अरुण कुमार ने जनगणना में सभी को हिंदू के तौर पर दर्ज कराने की यह वजह बताई है। उन्होंने कहा, 'कर्नाटक में लिंगायतों के कुछ वर्ग, आदिवासी इलाकों में सारणा और जाटवों के कुछ वर्ग और सामान्य में कुछ एससी एसटी में खुद को हिंदू पक्ष बताने के लिए अभियान चला रहे हैं। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हिंदू समाज को बांटने वाले ऐसे प्रयास असफल हों और हम एकजुट रहें।' दिल्ली में आयोजित बैठक में उन्होंने कहा कि धार्मिक अल्पसंख्यकों को तय करने के लिए जो नियम हैं, उनपर दोबारा विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'अल्पसंख्यकों को सिर्फ आबादी के आधार पर तय नहीं किया जा सकता। इसमें यह भी देखा जाना चाहिए कि किसी विशेष धर्म का पालन करने वालों ने पिछड़ेपन या दबाव का सामना किया है, जिसके चलते उन्हें विशेष अधिकार दिए जाएं।' कुमार ने फ्रीडम ऑफ रिलीजन एक्ट लागू किए जाने की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि हिंदू मंदिरों को सरकार के नियंत्रण से आजाद किया जाए और हिंदू समुदाय को तत्काल सौंप दिया जाए। उन्होंने ड्रग्स के खिलाफ भी अभियान तेज करने की अपील की है। जनगणना की क्या तैयारी भारत के रजिस्ट्रार जनरल (RGI) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आगामी जनगणना के लिए जनगणना अधिकारियों की नियुक्ति 15 जनवरी 2026 तक पूरी करने का निर्देश दिया है। परिपत्र के अनुसार, इस डेटा संग्रह कवायद के लिए प्रगणक और पर्यवेक्षक मुख्य जनगणना अधिकारी होंगे। इसमें कहा गया है कि लगभग 700-800 की आबादी के लिए एक प्रगणक को नियुक्त किया जाएगा और प्रत्येक छह प्रगणकों पर एक पर्यवेक्षक होगा। आपात स्थितियों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षित प्रगणक और पर्यवेक्षक भी रखे जाएंगे। आगामी जनगणना 2027 में देश भर में जनगणना के कार्य को समय पर पूरा करने के लिए लगभग 30 लाख फील्ड अधिकारी तैनात किए जाएंगे। आरजीआई ने इन सभी गतिविधियों की निगरानी और प्रबंधन के लिए 'जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली (CMS) नामक एक वेब पोर्टल भी विकसित किया है। दो चरणों में होगी जनगणना जनगणना 2027 दो चरणों में होगी। इसमें पहला चरण, मकान सूचीकरण और आवास गणना अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच होगा और दूसरा चरण जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में होगा। यह कवायद डिजिटल होगी और इसमें 30 अप्रैल को राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति के निर्णय के अनुसार, जाति गणना को भी शामिल किया जाएगा।

अमेरिका से अरब तक महक रही बासमती: कैसे भारत ने जीता ग्लोबल राइस मार्केट

वाशिंगटन  सुबह का सूरज जब पंजाब के हरे-भरे खेतों पर चमकता है, तो हवा में एक अनोखी खुशबू फैल जाती है। ये खुशबू है बासमती चावल की- लंबे दाने, बारीक सुगंध और स्वाद का वो राज जो सदियों से भारत की मिट्टी से निकलकर दुनिया के हर कोने तक पहुंच रहा है। आज, जब आप अमेरिका के किसी रेस्तरां में बिरयानी का मजा लेते हैं या सऊदी अरब के किसी घर में चावल की थाली सजती है, तो उसके पीछे भारत का स्वाद जुड़ा होता है। ‘इंडियन राइस एक्सपोर्ट्स फेडरेशन’ के आंकड़ों के अनुसार, भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है और वैश्विक बाजार में 28 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है। वह शीर्ष निर्यातक भी है, जिसकी 2024-25 में वैश्विक निर्यात में 30.3 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। भारत चावल की जो किस्में वैश्विक स्तर पर निर्यात करता है, उनमें ‘सोना मसूरी’ अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे बाजारों में पसंद की जाती है। लेकिन भारत का ये दबदबा रातोंरात नहीं बना। ये एक लंबी ऐतिहासिक यात्रा की कहानी है जो सिंधु घाटी से शुरू होकर आज के जीन-एडिटेड बीजों तक का सफर तय कर चुकी है। आइए, इस खुशबू की कहानी को विस्तार से समझते हैं। भारतीय चावल की चर्चा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया दावे से शुरू हुई है। ट्रंप ने कहा है कि भारत को अमेरिकी बाजार में चावल डंप करना (सस्ते दामों पर बेचना) नहीं चाहिए और वह इस मामले से निपट लेंगे। ट्रंप ने चेतावनी दी कि टैरिफ लगाकर इस समस्या का आसानी से हल निकल जाएगा। ट्रंप ने सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘वाइट हाउस’ में खेती और कृषि क्षेत्र के प्रतिनिधियों तथा अपने कैबिनेट के प्रमुख सदस्यों खासकर वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और कृषि मंत्री ब्रूक रोलिन्स के साथ एक गोलमेज बैठक की। लुइसियाना में अपने परिवार के कृषि कारोबार ‘केनेडी राइस मिल’ का संचालन करने वाली मेरिल केनेडी ने ट्रंप से कहा कि देश के दक्षिणी हिस्से में चावल उत्पादक वास्तव में संघर्ष कर रहे हैं और अन्य देश अमेरिकी बाजार में चावल डंप कर रहे हैं यानी कि बेहद सस्ते दामों पर चावल बेच रहे हैं। जब ट्रंप ने पूछा कि कौन से देश अमेरिका में चावल सस्ते दामों पर बेच रहे हैं तो राष्ट्रपति के बगल में बैठीं केनेडी ने जवाब दिया- भारत और थाइलैंड; यहां तक कि चीन भी प्यूर्टो रिको में चावल सस्ते दामों पर बेच रहा है। प्यूर्टो रिको कभी अमेरिकी चावल का सबसे बड़ा बाजार हुआ करता था। हमने कई वर्षों से प्यूर्टो रिको में चावल नहीं भेजे हैं। ट्रंप ने फिर बेसेंट की ओर देखते हुए कहा- भारत, मुझे भारत के बारे में बताइए। भारत को ऐसा करने की अनुमति क्यों है? उन्हें टैरिफ देना होगा। क्या उन्हें चावल पर छूट मिली हुई है? इस पर बेसेंट ने कहा- नहीं सर, हम अभी उनके साथ व्यापार सौदे पर बातचीत कर रहे हैं। केनेडी ने ट्रंप को यह भी बताया कि भारत के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में एक मामला चल रहा है। ट्रंप ने कहा कि इसे बहुत आसानी से निपटाया जा सकता है। उन्होंने कहा- यह उन देशों पर टैरिफ लगाकर बहुत जल्दी हल हो जाएगा, जो अवैध रूप से सामान भेज रहे हैं। प्राचीन जड़ें: चावल का भारत से वैश्विक सफर अब आते हैं असली कहानी पर- भारत और चावल का इतिहास। चावल की कहानी भारत की सभ्यता से जुड़ी है। पुरातत्वविदों के अनुसार, 5000 साल से ज्यादा पुरानी सिंधु घाटी सभ्यता (लगभग 2500 ईसा पूर्व) में चावल की खेती के प्रमाण मिलते हैं। लोथल और राखीगढ़ी जैसे स्थलों पर मिले अवशेष बताते हैं कि हमारे पूर्वज नदियों के किनारे इस अनाज को उगा रहे थे। वेदों में भी 'अन्न' के रूप में चावल का जिक्र है, जो न सिर्फ भोजन था बल्कि पूजा-अर्चना का हिस्सा भी। संस्कृत में इसे 'अक्षत' कहा जाता है, जो अमरता का प्रतीक है। प्राचीन काल में चावल व्यापार का माध्यम बना। रोमन साम्राज्य से लेकर अरब व्यापारियों तक, भारतीय चावल मसालों के साथ जहाजों पर लादा जाता। लेकिन असली मोड़ आया मुगल काल में। कहा जाता है कि जहांगीर के समय (17वीं शताब्दी) बासमती चावल को 'बासमती' नाम मिला, जिसका मतलब है 'महकदार' या 'सुगंधित'। हालांकि इतिहास में इसको लेकर अलग-अलग दावे हैं। खैर, ये चावल हिमालय की तलहटी में उगता था- पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के मैदानों में। मुगलों ने इसे राजसी भोजनों का हिस्सा बनाया और जल्द ही ये यूरोप पहुंच गया। ब्रिटिश राज में चावल निर्यात औपचारिक रूप ले चुका था। 19वीं शताब्दी के अंत तक, भारत ब्रिटेन को चावल सप्लाई कर रहा था, जो औद्योगिक क्रांति के दौरान मजदूरों का मुख्य भोजन था। स्वतंत्रता के बाद, 1950-60 के दशक में हरित क्रांति ने चावल उत्पादन को आसमान पर पहुंचा दिया। भारत रत्न एम.एस. स्वामीनाथन जैसे वैज्ञानिकों ने हाइब्रिड बीज, उर्वरकों और सिंचाई (जैसे पंजाब में नहरें) से उत्पादन को दोगुना कर दिया। 1960 में जहां भारत 50 मिलियन टन चावल पैदा करता था, वहीं आज ये 150 मिलियन टन को पार कर चुका है। इस क्रांति ने न केवल भुखमरी को रोका, बल्कि यह निर्यात का आधार बनी। 1970-80 के दशक में भारत ने अफ्रीका और मध्य पूर्व को सस्ता चावल भेजना शुरू किया, जो आज भी उसके प्रमुख बाजार हैं। वैश्विक बाजार में उभार: चुनौतियां और जीत 1990 के दशक में भारत ने चावल निर्यात में थाइलैंड और वियतनाम को पछाड़ना शुरू किया। वजह? विविधता- बासमती की प्रीमियम खुशबू और नॉन-बासमती का सस्तापन। 2000 तक भारत वैश्विक निर्यात का 20% हिस्सा ले चुका था। लेकिन चुनौतियां भी आईं। 2007-11 और 2023 में एल नीनो जैसी सूखे की वजह से भारत ने निर्यात प्रतिबंध लगाए, जिससे वैश्विक कीमतें 15 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। ये कदम घरेलू खाद्य सुरक्षा के लिए थे, लेकिन दुनिया को याद दिला दिया कि भारत के बिना चावल बाजार अधूरा है। फिर भी, भारत ने दबदबा बनाए रखा। 2011 से भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक है। 2023 में OEC के आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने 11 बिलियन डॉलर का चावल निर्यात किया, जिसमें सऊदी अरब, ईरान और इराक प्रमुख खरीदार थे। बेनिन जैसे अफ्रीकी देशों ने नॉन-बासमती चावल … Read more

राहुल गांधी के विदेश दौरे पर सियासत गर्म: भाजपा का व्यंग्य, कंगना ने कहा— ‘दम नहीं उस इंसान में’

नई दिल्ली  लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की संसद सत्र के बीच संभावित जर्मनी यात्रा ने राजनीतिक हलकों में हंगामा मचा दिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्हें 'विदेश नायक' और 'पर्यटन नेता' करार दिया है। वहीं अभिनेत्री व भाजपा सांसद कंगना रनौत ने राहुल पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि 'उस इंसान में कोई दम नहीं है'। यह विवाद तब भड़का जब इंडियन ओवरसीज कांग्रेस (आईओसी) ने घोषणा की है कि राहुल गांधी 15 से 20 दिसंबर तक जर्मनी जाएंगे। बता दें कि संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से शुरू हुआ था और 19 दिसंबर को समाप्त होगा। इंडियन ओवरसीज कांग्रेस ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर कर राहुल गांधी के बर्लिन दौरे की जानकारी दी। आईओसी जर्मनी के अध्यक्ष बलविंदर सिंह ने बताया कि राहुल गांधी 17 दिसंबर को बर्लिन में यूरोपीय देशों के आईओसी नेताओं से मुलाकात करेंगे। इस कार्यक्रम में एनआरआई मुद्दों, कांग्रेस पार्टी को मजबूत करने और पार्टी की वैचारिक पहुंच बढ़ाने पर चर्चा होगी। कार्यक्रम में सैम पित्रोड़ा और डॉ. अरती कृष्णा जैसे वरिष्ठ नेता भी शामिल होंगे। राहुल गांधी की विदेश यात्राओं का इतिहास रहा है, जहां वे अक्सर भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं के कमजोर होने और भाजपा-आरएसएस द्वारा संस्थाओं पर कब्जा जैसे मुद्दों को उठाते रहे हैं। कंगना बोलीं- उस इंसान में कोई दम नहीं राहुल गांधी के जर्मनी दौरे पर बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने कहा- मैं उनके दौरों पर नजर नहीं रखती, न ही उनके बारे में कोई खबर पढ़ती हूं। तो मैं उनके दौरों के बारे में क्या कह सकती हूं? लेकिन यह सबके लिए साफ है कि उनकी पार्टी सिंगल डिजिट में क्यों आ गई है। मैं इस तरह के इंसान पर कोई कमेंट नहीं करना चाहती क्योंकि आप जानते हैं कि उस इंसान में कोई दम नहीं है, कोई कैरेक्टर की ताकत नहीं है… भाजपा का तंज- विदेश नायक और भारत बदनामी टूर भाजपा ने राहुल गांधी की यात्रा को संसदीय जिम्मेदारियों से बचने का बहाना बताते हुए जोरदार हमला बोला। पार्टी के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने एक्स पर पोस्ट कर कहा- एक बार फिर विदेश नायक वही कर रहे हैं जो वह सबसे अच्छा करते हैं! विदेश दौरे पर जा रहे हैं! संसद 19 दिसंबर तक चल रही है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक राहुल गांधी 15 से 20 दिसंबर तक जर्मनी जाएंगे! राहुल LoP हैं – लीडर ऑफ पर्यटन। बिहार चुनावों के दौरान भी वह विदेश में थे और फिर जंगल सफारी में। पूनावाला ने एएनआई से बात करते हुए कहा, 'राहुल गांधी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि LOP का मतलब 'पर्यटन' (टूरिज्म) का लीडर है। राहुल गांधी एक गैर-गंभीर नेता हैं। लोग काम कर रहे हैं, और वह छुट्टियों के मूड में हैं…जब संसद 19 तारीख तक सेशन में है, तब भी वह विदेश जा रहे हैं। तो उनकी प्राथमिकताएं साफ हैं। अब मुझे नहीं पता कि वह किस वजह से जर्मनी जा रहे हैं, लेकिन हो सकता है कि वह सिर्फ भारत के खिलाफ जहर उगलने जा रहे हों। तो एक बार फिर, वह अपनी छुट्टियों के लिए और भारत को बदनाम करने के लिए विदेश जा रहे हैं।' भाजपा का यह हमला उस समय आया जब संसद में चुनाव सुधारों पर बहस चल रही है। मंगलवार को राहुल गांधी ने लोकसभा में वोट चोरी का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग पर भाजपा से सांठगांठ का इल्जाम लगाया था। भाजपा ने पलटवार में कहा कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में संवैधानिक संशोधनों से संस्थाओं को कमजोर किया था।