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अमेरिका वेनेजुएला पर कार्रवाई कर सकता है—डोनाल्ड ट्रंप ने दिया ऑपरेशन का संकेत

वॉशिंगटन कैरिबियन में कथित वेनेजुएला के ड्रग तस्करों की नावों पर अमेरिका के बार-बार हवाई हमलों के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका बहुत जल्द वेनेजुएला के अंदर रहने वाले 'बुरे लोगों' पर हमला करना शुरू कर देगा. मंगलवार की कैबिनेट मीटिंग में ट्रंप की टिप्पणी से वॉशिंगटन और काराकास के बीच और तनाव बढ़ने का इशारा मिलता है. ट्रंप ने कैबिनेट मीटिंग के दौरान कहा, 'हम जमीन पर भी ये हमले शुरू करने जा रहे हैं. जमीन पर हमला करना ज्यादा आसान है. हम जानते हैं कि बुरे लोग कहाँ रहते हैं, और हम यह बहुत जल्द शुरू करने जा रहे हैं.' ट्रंप की यह बात तब आई है जब उनके प्रशासन पर ड्रग तस्करी करने वाली नावों को निशाना बनाने के लिए किए गए हमले को लेकर कड़ी जांच हुई है, जिसमें अब तक 80 से ज्यादा लोग मारे गए हैं. बैठक में ट्रंप ने वॉर सेक्रेटरी पीट हेगसेथ का बचाव किया और कहा कि न तो उन्हें और न ही वॉर सेक्रेटरी को संदिग्ध ड्रग जहाज पर दूसरे हमले के बारे में पता था. अमेरिकी सेना ने 2 सितंबर को कैरिबियन में चल रहे एक संदिग्ध ड्रग जहाज पर एक और हमला किया था, जब शुरुआती हमले में जहाज पर सवार सभी लोग नहीं मारे गए थे. ट्रंप ने कहा, 'मुझे दूसरे हमले के बारे में नहीं पता था. मुझे लोगों के बारे में कुछ नहीं पता था. मैं इसमें शामिल नहीं था और मुझे पता था कि उन्होंने एक नाव ली थी, लेकिन मैं यह कहूंगा कि उन्होंने हमला किया था.' राष्ट्रपति ने कहा कि हेगसेथ हमले से संतुष्ट थे लेकिन उन्हें दूसरे हमले के बारे में पता नहीं था, जिसमें दो लोग शामिल थे. हेगसेथ ने अपने बचाव में कहा कि उन्होंने पहला हमला लाइव देखा था, लेकिन फिर अपनी अगली मीटिंग में चले गए. वॉर सेक्रेटरी ने आगे कहा कि उन्हें दूसरे हमले के बारे में कुछ घंटे बाद पता चला और उन्होंने किसी भी जिंदा को नहीं देखा. हेगसेथ ने कहा, 'कुछ घंटों बाद मुझे पता चला. मैंने खुद किसी को जिंदा नहीं देखा क्योंकि उस चीज में आग लगी हुई थी. इसे युद्ध का कोहरा कहते हैं. व्हाइट हाउस ने कहा है कि अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशन्स कमांड के कमांडर एडमिरल फ्रैंक एम 'मिच' ब्रैडली ने दूसरे हमले का आदेश दिया था.

भारत-रूस संबंधों में नई गति? पुतिन के आगमन से पहले मिले मजबूत आर्थिक संकेत

नई दिल्ली  भारत के दौरे पर आ रहे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पहले ही ये संकेत दे दिए हैं कि भारत के साथ उनके व्यापारिक संबंधों में कमी नहीं आने जा रही है. उनका ये बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को काटता है, जिसमें वे कई बार कह चुके हैं कि भारत अगले कुछ महीनों में रूस के साथ तेल के व्यापार को घटाने वाला है. व्लादिमीर पुतिन की ओर से दिए गए बयान ने साफ कर दिया है कि भारत-रूस के बीच ट्रेड बढ़ने वाला है और इसका फायदा भारतीय अर्थव्यवस्था को जरुर होगा. रूसी राष्ट्रपति का दौरा ऐसे वक्त में भारत में हो रहा है, जब रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत, अमेरिका की ओर से लगाए गए टैरिफ की मार झेल रहा है. इस दौरे के जरिये पुतिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ये मैसेज देना चाहते हैं कि भारत-रूस के संबंधों पर किसी भी टैरिफ का असर नहीं पड़ेगा, हालांकि रूस से मानता है कि मौजूदा हालात में भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव झेल रहा है. रूस की ओर से इसकी आलोचना भी की गई है. भारत को मालामाल करने वाले हैं पुतिन व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि वे भारत दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ऊर्जा, उद्योग, अंतरिक्ष, कृषि और कई अन्य क्षेत्रों में चल रहे नए संयुक्त प्रोजेक्ट पर बात करेंगे. वे इस दिशा में चल रहे प्रयासों पर विस्तार से चर्चा करेंगे- खासकर भारतीय सामानों के आयात को बढ़ाने को लेकर. पुतिन की ओर से कहा गया है कि उनका लक्ष्य चीन और भारत दोनों के साथ सहयोग को एक नए और उच्च स्तर तक ले जाना है. उन्होंने कहा है कि पिछले तीन वर्षों में रूस ने भारत और चीन जैसे विश्वसनीय और बड़े साझेदार देशों के साथ व्यापार को काफी बढ़ाया है और वे इसे आगे ले जाना चाहते हैं. पुतिन का ये आत्मविश्वास पश्चिमी देशों को चेताने वाला है. भारत के लिए रूस का निर्यात बाजार और खुल सकता है. उनका यह बयान भारत के साथ ट्रेड रिलेशन को लेकर बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका ने भारतीय सामानों को उसके बाजार में ले जाने पर भारी शुल्क लगा रखा है. पश्चिमी देशों को पुतिन का मैसेज भारत के साथ दोस्ती को लेकर पुतिन ने साफ तौर पर कहा है कि उनके बीच कई वर्षों से गहरी दोस्ती और रणनीतिक साझेदारी है, जो लगातार मजबूत हो रही है. उन्होंने अपने पश्चिमी देशों की नीतियों की आलोचना पर मुखर होकर कहा है कि आज की दुनिया अत्यधिक उथल-पुथल से गुजर रही है, जिसका कारण है पश्चिम की ओर से कुछ बाजारों पर जबरन एकाधिकार स्थापित करना. उन्होंने भारत के संदर्भ में कहा कि पश्चिम उन देशों पर दबाव डाल रहा है, जो स्वतंत्र और स्वायत्त नीतियां अपनाते हैं. पुतिन के मुताबिक पश्चिम किसी भी तरह की प्रतिस्पर्धा को बाजार से खत्म करना चाहता है.

पुतिन दौरे में भारत में बन सकते हैं 120-140 स्टील्थ जेट, Su-57 डील की उम्मीद

 नई दिल्ली भारतीय वायुसेना (IAF) के लिए एक ऐतिहासिक मौका आ गया है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के 4-5 दिसंबर के भारत दौरे के दौरान Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट्स की डील हो सकती है. दुबई एयरशो 2025 में रूस ने भारत को पूरी तकनीक ट्रांसफर का वादा किया है, जिसमें इंजन, सेंसर और स्टील्थ मटेरियल सब शामिल हैं.  यह डील न सिर्फ वायुसेना को 5वीं पीढ़ी के जेट देगी, बल्कि फ्रांस के राफेल जेट्स के साथ इसकी जोड़ी (जुगलबंदी) भारत को एशिया का हवाई सुपरपावर बना देगी. इससे आईएएफ की ताकत 50-60% बढ़ जाएगी, खासकर ऑपरेशन सिंदूर (मई 2025) जैसे संघर्षों में.  डील का लेटेस्ट स्टेटस: पुतिन दौरे पर सबकी नजरें पुतिन का यह दौरा महज औपचारिक नहीं, बल्कि रक्षा समझौतों का बड़ा मंच बनेगा. क्रेमलिन स्पोक्सपर्सन दिमित्री पेस्कोव ने कन्फर्म किया कि Su-57 और अतिरिक्त S-400 एयर डिफेंस सिस्टम्स पर बात होगी. रूस की रोस्टेक कंपनी के सीईओ सर्गेई चेमेज़ोव ने दुबई एयरशो में कहा कि भारत को जो चाहिए, हम देंगे—चाहे Su-57 हो या S-400.  Su-57 का प्लान: शुरुआत में 50-60 रेडीमेड जेट्स रूस से आएंगे, फिर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के नासिक प्लांट पर 120-140 जेट्स लोकल प्रोडक्शन होगा. कीमत प्रति जेट 670-800 करोड़ रुपये, जो F-35 ($110 मिलियन) से सस्ता है. फुल टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (टीओटी) से भारत अपना वर्जन बना सकेगा, जिसमें ब्रह्मोस मिसाइल इंटीग्रेशन होगा.    राफेल का एक्सपैंशन: पहले से 36 राफेल हैं, अब 114 और F-4/F-5 वर्जन की डील पर फोकस. नेवी के लिए 26 राफेल-M भी आ रहे हैं. कुल लागत: 1 लाख करोड़ से ज्यादा, लेकिन मेक इन इंडिया से 60% पार्ट्स लोकल.     बैकग्राउंड: ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान ने राफेल को चुनौती दी, जहां चीनी J-10सी ने लंबी रेंज मिसाइल यूज की. इससे IAF के 31 स्क्वाड्रन (अधिकृत 42) का संकट सामने आया. S-500 मिसाइल शील्ड भी डिस्कस होगा, जो हाई-एल्टीट्यूड थ्रेट्स को हैंडल करेगा.   2028 तक 20 जेट्स प्रति साल प्रोडक्शन शुरू होगा, जो भारत को एक्सपोर्ट हब बना सकती है. राफेल: बहुमुखी योद्धा, जो युद्ध के हर मोर्चे पर राज करे राफेल फ्रांस का 4.5 जेनरेशन मल्टी-रोल फाइटर है, जो 2016 से भारतीय वायुसेना में तैनात है. ऑपरेशन सिंदूर में इसने पाकिस्तानी एयरबेस पर ब्रह्मोस स्ट्राइक्स किए. इसके विस्तृत फायदे…       उन्नत सेंसर और रडार: थेल्स आरबीई2 एईएसए रडार 200+ किमी दूर दुश्मन को डिटेक्ट करता है.सेंसर फ्यूजन से पायलट को 360° व्यू मिलता है, जो नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर में कमाल करता है.       मिसाइल पावर: मेटियोर बीवीआर मिसाइल (150-200 किमी रेंज) दुश्मन को दूर से नेस्तनाबूद करता है.  एससीएएलपी क्रूज मिसाइल गहरे हमलों के लिए, जबकि माइका शॉर्ट-रेंज डॉगफाइट में बेस्ट. भारत के अस्त्र और रुद्रम मिसाइल्स भी इंटीग्रेट हो सकते हैं.      लंबी रेंज और एंड्योरेंस: 3700 किमी रेंज, एयर रिफ्यूलिंग से 9000 किमी तक. हिमालय जैसे हाई-एल्टीट्यूड एरिया में परफेक्ट.      इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (ईडब्ल्यू): स्पेक्ट्रा सिस्टम दुश्मन रडार को जाम कर देता है, स्टील्थ जैसी सिक्योरिटी देता है.       भारत-स्पेसिफिक फायदे: मेक इन इंडिया से 60% लोकलाइजेशन, जॉब्स क्रिएशन. नेवी-एयरफोर्स इंटीग्रेशन से एकरूपता. ट्रेनिंग आसान, क्योंकि पहले से 36 जेट्स हैं. कीमत: 1,000 करोड़ प्रति यूनिट, लेकिन मेंटेनेंस कम.     राफेल की स्ट्रेंथ: तुरंत उपलब्धता और कॉम्बैट-प्रूवन परफॉर्मेंस. Su-57: स्टील्थ का राजा, अदृश्य हमलावर जो दुश्मन को सोचने न दे Su-57 (Felon) रूस का 5वीं जेनरेशन स्टील्थ फाइटर है, जो 2020 से रूसी एयरफोर्स में है. भारत के लिए एक्सपोर्ट वर्जन Su-57E. ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह जरूरी हो गया, क्योंकि पाकिस्तान के J-10सी ने लंबी रेंज दिखाई.     स्टील्थ टेक्नोलॉजी: रडार क्रॉस-सेक्शन 0.1 वर्ग मीटर, जो J-20 से बेहतर. इंटरनल वेपन बे से अदृश्य रहते हुए हमला.       सुपर मैन्युवरेबिलिटी: 3डी थ्रस्ट वेक्टरिंग इंजन (एएल-51) से हवा में 180° टर्न, डॉगफाइट में अजेय. सुपरक्रूज (1975 km/hr बिना आफ्टरबर्नर) से तेज पहुंच.       हाइपरसोनिक वेपन्स: आर-37एम मिसाइल (300-400 किमी रेंज) पाक/चीनी जेट्स को दूर से मार गिराएगी. ब्रह्मोस-ए और हाइपरसोनिक मिसाइल्स इंटीग्रेट हो सकती हैं.      एडवांस्ड एवियोनिक्स: एन-036 बेलका एईएसए रडार + आईआरएसटी सेंसर से 400 किमी डिटेक्शन. सेंसर फ्यूजन से एआई-बेस्ड थ्रेट एनालिसिस.       भारत के लिए स्पेशल: Su-30एमकेआई (260 जेट्स) से 70-80% कॉमन पार्ट्स, मेंटेनेंस आसान. फुल सोर्स कोड एक्सेस से अस्त्र, रुद्रम इंटीग्रेशन हो सकता है.      लोकल प्रोडक्शन से एएमसीए प्रोजेक्ट को बूस्ट. कीमत सस्ती, डिलीवरी 2028 तक. Su-57 की ताकत: 5जी टेक और लो कॉस्ट, जो भारत को इंडिपेंडेंट बनाएगा. जुगलबंदी का कमाल: राफेल-Su-57 से वायुसेना बनेगी अजेय दोनों जेट्स की जोड़ी भारतीय वायुसेना को लेयर्ड स्ट्रक्चर देगी—राफेल मीडियम-वेट वर्कहॉर्स, Su-57 लॉन्ग-रेंज स्टील्थ स्ट्राइकर.     तकनीकी एकीकरण: Su-30 से मैच, लॉजिस्टिक्स 50% कम. राफेल का ईडब्ल्यू + Su-57 का स्टील्थ से हाइब्रिड फोर्स. मेटियोर (150 किमी) + आर-37एम (300 किमी) से बीवीआर वॉर में डोमिनेंस.       स्क्वाड्रन बूस्ट: 3-5 नए स्क्वाड्रन (36-54 जेट्स) बनेंगे, मिग-21 जैसे पुराने बाहर. टू-फ्रंट वॉर (चीन-पाक) में राफेल क्विक स्ट्राइक, Su-57 डीप पेनेट्रेशन.       इकोनॉमिक गेन: लोकल मैन्युफैक्चरिंग से 1 लाख जॉब्स, एक्सपोर्ट पोटेंशियल. AMCA को टेक बूस्ट मिलेगा.        ऑपरेशनल एज: हिमालय में Su-57 की मैन्युवरेबिलिटी, इंडियन ओशन में राफेल की एंड्योरेंस काम आएगी. कुल ताकत: 50% इजाफा, हवाई वर्चस्व सुनिश्चित होगी.  विशेषज्ञ कहते हैं यह जोड़ी J-20 और J-35 को काउंटर करेगी.  चीन और पाकिस्तान पर डायरेक्ट इम्पैक्ट: बैलेंस ऑफ पावर शिफ्ट यह डील चीन-पाकिस्तान के लिए रेड अलर्ट है, खासकर ऑपरेशन सिंदूर के बाद जहां पाक ने चीनी हार्डवेयर यूज किया.  चीन पर असर: चीन के 200+ J-20 स्टील्थ जेट्स हैं, लेकिन Su-57 की थ्रस्ट वेक्टरिंग और 300 किमी मिसाइल से एज मिलेगा. लद्दाख बॉर्डर पर दो-मोर्चा वॉर में भारत मजबूत होगा. इंडियन ओशन में चीनी नेवी को चेक करना आसान होगा, जहां Su-57 पैट्रोलिंग करेगा. अगर चीन J-35 एक्सपोर्ट करता है, तो भारत का काउंटर तैयार. रूस-भारत टाई से चीन की स्ट्रैटेजी कमजोर होगी.    पाकिस्तान पर असर: पाक के JF-17 और J-10सी (PL-15 मिसाइल, 200 किमी) पुराने पड़ जाएंगे. 2025 अंत तक पाक को 40 J-35 मिल सकते हैं, लेकिन Su-57 की 300 किमी रेंज से एयरबेस दूर से नष्ट. ऑपरेशन सिंदूर में पाक को झटका लगा; अब यह डील उसे डराएगी. भारत का हवाई बैलेंस शिफ्ट, पाक-चीन अलायंस को चैलेंज मिलेगा. … Read more

डिजिटल रिकॉर्ड की रफ्तार तेज: एसआईआर के दूसरे चरण में 47.5 करोड़ फॉर्म अपलोड, 11 दिसंबर तक कर सकेंगे ई-एफ सबमिट

नई दिल्ली भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दूसरे चरण ने एक और महत्वपूर्ण मुकाम हासिल कर लिया है। आयोग द्वारा दी गई ताजा जानकारी के अनुसार, देशभर में 47.5 करोड़ से अधिक यानी 93 प्रतिशत से ज्यादा एन्यूमरेशन फॉर्म (ईएफ) का डिजिटलाइजेशन पूरा हो चुका है। इस अभियान के तहत 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रहे व्यापक मतदाता सत्यापन कार्य में 99.83 प्रतिशत यानी 50.88 करोड़ से भी अधिक मतदाताओं तक फॉर्म पहुंचाए जा चुके हैं। आयोग ने बताया कि एन्यूमरेशन फॉर्म भरने और जमा करने की अंतिम तारीख 11 दिसंबर है। यानी मतदाताओं के पास अब भी कुछ दिन बचे हैं, जिसमें वे अपने विवरण की पुष्टि, सुधार या बदलाव करा सकते हैं। निर्वाचन आयोग द्वारा जारी दैनिक बुलेटिन के अनुसार, लक्षद्वीप, गोवा, अंडमान-निकोबार जैसे छोटे राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में 100 प्रतिशत फॉर्म वितरण का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में भी 99 प्रतिशत से अधिक फॉर्म वितरित हो चुके हैं। डिजिटलाइजेशन में सर्वाधिक प्रगति लक्षद्वीप, गोवा और अंडमान-निकोबार में दिखी है, जहां 97 से 100 प्रतिशत तक फॉर्म डिजिटाइज हो चुके हैं। सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश में 13.27 करोड़ फॉर्म (85 प्रतिशत) डिजिटलाइज्ड हो चुके हैं, जबकि फॉर्म वितरण 99.87 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। देशभर में 5,32,828 बीएलओ और 12 लाख से अधिक बूथ लेवल एजेंट्स इस अभियान में सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। ईसीआई का स्पष्ट उद्देश्य है कि हर योग्य नागरिक का नाम मतदाता सूची में हो, अनुचित/दोहराई गई प्रविष्टियां हटें और चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी और मजबूत बने। आयोग ने राजनीतिक दलों से भी आग्रह किया है कि वे अधिक बीएलओ नियुक्त करें ताकि फॉर्म की समीक्षा और सत्यापन में सहयोग किया जा सके। मतदाता अपने बीएलओ या ऑनलाइन माध्यम से फॉर्म भरकर जमा कर सकते हैं। आयोग ने नागरिकों से अपील की है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार न करें और समय रहते अपने विवरण सत्यापित कर दें ताकि आने वाले चुनावों के लिए सूची पूरी तरह तैयार हो सके।

दुनिया की सबसे बड़ी एयर मिस्ट्री: MH370 की खोज 11 साल बाद फिर सुर्खियों में!

कुआलालंपुर विमान हादसों की रहस्यमयी कड़ी में मलेशिया का MH370 आज भी सबसे अनसुलझा रहस्या बना हुआ है, जिसमें एक पूरा विमान आसमान से अचानक गायब हो गया था। हादसे को 11 साल से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद आज तक इसका कोई पुख्ता जवाब नहीं मिला है। अब मलेशिया सरकार ने इसकी तलाश फिर से शुरू करने का फैसला किया है। मलेशियाई अधिकारियों ने घोषणा की है कि मलेशिया एयरलाइंस की उड़ान MH370 के मलबे की खोज 30 दिसंबर 2025 से एक बार फिर शुरू हो रही है। उस विमान में 227 यात्री और 12 क्रू मेंबर सहित कुल 239 लोग सवार थे। कुआलालंपुर से बीजिंग जा रही मलेशिया एयरलाइंस की फ्लाइट MH370 8 मार्च 2014 की सुबह टेकऑफ के कुछ ही देर बाद बिना किसी डिस्ट्रेस कॉल या संकेत के रडार से गायब हो गई। इसके बाद विमानन इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा और लंबा सर्च ऑपरेशन चला, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। कई तरह के सिद्धांत और षड्यंत्रकारी थ्योरी भी सामने आईं। अब मलेशिया के परिवहन मंत्रालय ने कहा है कि अमेरिकी कंपनी ओशन इन्फिनिटी दक्षिणी हिंद महासागर के तल पर फिर से व्यापक खोज शुरू करेगी। यह नया सर्च अभियान 30 दिसंबर 2025 से शुरू होकर रुक-रुक कर लगभग 55 दिन तक चलेगा। इस साल मार्च में ही मलेशिया सरकार ने ओशन इन्फिनिटी के साथ नया करार किया था। पीड़ित परिवारों को मिलेगी मानसिक सुकून विमान में सवार 239 लोगों में सबसे ज्यादा 153 यात्री चीन के थे। इन परिवारों ने पिछले कई सालों से मलेशिया सरकार पर खोज फिर शुरू करने का दबाव बनाए रखा है। कई रिश्तेदार आज भी इंतजार में हैं कि कम से कम उनके प्रियजनों के अवशेष या मलबा मिल जाए, ताकि उन्हें यह समझ आए कि आखिर उनके अपनों के साथ क्या हुआ। सरकार इस खोज को परिवारों को अंतिम जवाब देने की कोशिश मान रही है। मलेशिया को कोई वित्तीय बोझ नहीं यह सर्च ऑपरेशन 'No Find, No Fee' आधार पर होगा, यानी अगर विमान या उसका विश्वसनीय मलबा नहीं मिला तो मलेशिया सरकार को एक भी रुपया खर्च नहीं करना पड़ेगा। कंपनी को 70 मिलियन अमेरिकी डॉलर तभी मिलेंगे जब MH370 का मुख्य मलबा या ठोस सबूत मिलेगा। यह वही शर्त 2018 के असफल अभियान में भी थी। इस बार ज्यादा सटीक जगह पर तलाश ओशन इन्फिनिटी ने 2018 के बाद लगातार नए सैटेलाइट डेटा, समुद्री धाराओं के मॉडल और ड्रिफ्ट एनालिसिस का अध्ययन किया है। इसके आधार पर अब खोज क्षेत्र को और छोटा व सटीक कर दिया गया है, जहां विशेषज्ञों के अनुसार विमान के मिलने की सबसे ज्यादा संभावना है। अब तक क्या-क्या हो चुका है? 2014-2017: मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया और चीन ने मिलकर 1,20,000 वर्ग किमी क्षेत्र खंगाला था, लेकिन कुछ मिला नहीं। 2018: ओशन इन्फिनिटी ने 25000 वर्ग किमी क्षेत्र खोजा। एक बार फिर असफलता हाथ लगी

भारत को रोकने की भूल भारी पड़ेगी: जयशंकर का तीखा बयान—‘दीवार खड़ी की तो सबसे बड़ा नुकसान US-Europe का’

नई दिल्ली  विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को दो टूक कहा कि वैसे देश सबसे बड़े लूज़र होंगे, जो सीमा पार प्रोफेशनल्स के फ्लो में बहुत ज़्यादा रुकावटें डाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में दूसरे देशों को यह समझाने की ज़रूरत है कि टैलेंट (प्रतिभाओं) का इस्तेमाल आपसी फायदे के लिए ही है। मोबिलिटी पर एक कॉन्क्लेव के इंटरैक्टिव सेशन में उनकी यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सरकार की इमिग्रेशन पॉलिसी पर सख्ती के बीच आई है। ट्रंप प्रशासन ने नई नीति के तहत H-1B वीज़ा पर भारी भरकम फीस लगा दी है और इमिग्रेशन नियमों को कड़ा कर दिया है ताकि विदेशी प्रोफेशनल्स अमेरिका न पहुंच सकें।   जयशंकर ने कहा कि सीमाओं के पार पेशेवरों के प्रवाह में बहुत अधिक बाधाएं पैदा करने वाले देशों को “कुल मिलाकर नुकसान” ही होगा। गतिशीलता पर एक सम्‍मेलन में आयोजित संवादात्मक सत्र के दौरान दिए गए उनके बयान ट्रंप प्रशासन की आव्रजन पर सख्ती के अनुरूप अमेरिका द्वारा एच-1बी वीजा पर नया शुल्क लगाने के फैसले की पृष्ठभूमि में आए हैं। जयशंकर ने कहा, “अगर वे प्रतिभा के प्रवाह में बहुत ज्यादा रुकावटें खड़ी करते हैं, तो उन्हें कुल मिलाकर नुकसान होगा। खासकर अगर आप उन्नत विनिर्माण के युग में प्रवेश कर रहे हैं, तो आपको और ज्यादा प्रतिभा की जरूरत होगी।” वह एच-1बी वीजा कार्यक्रम पर चिंताओं सहित आव्रजन से जुड़े व्यापक मुद्दों पर पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर दे रहे थे। किसी देश का नाम लिए बगैर जयशंकर ने कहा कि भारत को अन्य देशों को यह समझाने की जरूरत है कि “सीमा पार प्रतिभा का इस्तेमाल हमारे पारस्परिक लाभ के लिए है”। उन्होंने कहा, “अक्सर उद्यमिता और प्रौद्योगिकी के अग्रणी लोग ही गतिशीलता के पक्ष में दलील देते हैं। इसके विपरीत, वे लोग जिनके पास कोई राजनीतिक आधार या संबोधित करने के लिए एक निश्चित मतदाता वर्ग होता है, वे इसका विरोध कर सकते हैं। हालांकि, अंततः वे किसी न किसी प्रकार के समझौते पर पहुंच ही जाएंगे।” जयशंकर ने कुछ देशों में प्रतिभाओं की गतिशीलता के लिये प्रतिरोध को कुछ कंपनियों द्वारा चीन से अपने विनिर्माण केंद्र स्थानांतरित करने के प्रयासों से भी जोड़ा। एच-1बी वीजा कार्यक्रम के तहत, कंपनियां अमेरिका में काम करने के लिए विशेष कौशल वाले विदेशी कर्मचारियों की भर्ती करती हैं, शुरुआत में यह अवधि तीन साल के लिए होती है, जिसे तीन और वर्षों के लिए बढ़ाया जा सकता है। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) के अनुसार, हाल के वर्षों में स्वीकृत सभी एच-1बी आवेदनों में से लगभग 71 प्रतिशत आवेदन भारतीयों के थे। जयशंकर ने कहा, “यदि कई विकसित देशों में नौकरियों पर दबाव है, तो उसका कारण यह नहीं है कि उन क्षेत्रों में लोग बाहर से आए। असल वजह यह है कि उन्होंने अपनी विनिर्माण गतिविधियां बाहर जाने दीं – और आप जानते हैं, कहां।” उन्होंने कहा, “यदि लोगों के लिए यात्रा करना कठिन हो जाता है, तो भी काम रुकने वाला नहीं है। यदि लोग यात्रा नहीं करेंगे, तो काम बाहर जाएगा।” जयशंकर ने कानूनी गतिशीलता के महत्व पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा, “एक वैश्वीकृत दुनिया में, मुझे लगता है कि जब हम अपने बाहरी संबंधों, खासकर आर्थिक संबंधों की बात करते हैं, तो हम अक्सर व्यापार पर ही ध्यान केंद्रित करते हैं। इसमें कुछ भी गलत नहीं है।” उन्होंने कहा, “लेकिन हम अक्सर काम और उससे जुड़ी गतिशीलता की उपेक्षा करते हैं। आपको यह समझाने के लिए कि हम किस चीज पर पर्याप्त ध्यान नहीं देते। पिछले साल, भारत में 135 अरब अमेरिकी डॉलर का धन प्रेषण हुआ। यह अमेरिका को हमारे निर्यात का लगभग दोगुना है।” इसके साथ ही जयशंकर ने अवैध आवाजाही के प्रति भी आगाह किया और इसके संभावित परिणामों की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा, “यदि आप मानव तस्करी और इससे जुड़े सभी अपराधों को देखें, तो अक्सर इसमें विभिन्न प्रकार के एजेंडे वाले लोग शामिल होते हैं, जैसे राजनीतिक एजेंडा, अलगाववादी एजेंडा, वे सभी इसके अवैध कारोबार में शामिल हो जाते हैं।”  

एयरपोर्ट सर्वर फेल! बेंगलुरु में उड़ानें रुकीं, दिल्ली सहित कई शहरों में यात्रियों की मुश्किलें बढ़ीं

नई दिल्ली  बुधवार सुबह देश के कई प्रमुख हवाई अड्डों पर चेक-इन सिस्टम अचानक ठप्प होने के कारण यात्रियों को भारी परेशानी का सामने करना पड़ा। इसके अलावा कुछ टेक्नीकल खराबी के चलते भी बेंगलुरु एयरपोर्ट पर 42 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। Microsoft आउटेज की आशंका पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार वाराणसी एयरपोर्ट पर एक नोटिस जारी कर बताया गया कि यह समस्या Microsoft Windows की ग्लोबल आउटेज के कारण आई है, जिससे एयरपोर्ट के आईटी और चेक-इन सिस्टम प्रभावित हुए हैं। हालांकि, माइक्रोसॉफ्ट या एयरलाइंस की ओर से इस पर तत्काल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया। तकनीकी गड़बड़ी के चलते कई जगह एयरलाइंस को मजबूरन मैनुअल चेक-इन और बोर्डिंग प्रक्रिया पर निर्भर होना पड़ा। वाराणसी में इंडिगो, स्पाइसजेट, अकासा एयर और एयर इंडिया एक्सप्रेस सहित कई एयरलाइनों की सेवाएं प्रभावित हुईं। हैदराबाद और बेंगलुरु में अफरा-तफरी का माहौल     हैदराबाद के राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी का माहौल रहा, जहाँ सुबह-सुबह हेल्पडेस्क के सामने यात्रियों की भारी भीड़ जमा हो गई। यहाँ 7 डिपार्चर और 12 अराइवल उड़ानें रद्द हुईं।     बेंगलुरु में भी कई उड़ानें देरी से चलीं। इंडिगो ने परिचालन संबंधी चुनौतियों का हवाला देते हुए कुल 42 उड़ानें रद्द कीं, जिनमें 22 अराइवल और 20 डिपार्चर शामिल थे।     दिल्ली एयरपोर्ट ने भी सोशल मीडिया पर एक एडवाइजरी जारी कर बताया कि कुछ घरेलू एयरलाइंस परिचालन संबंधी चुनौतियों से जूझ रही हैं, जिससे शेड्यूल प्रभावित हो सकता है। एयरलाइंस का अपडेट और राहत के प्रयास एयर इंडिया ने जानकारी दी कि थर्ड-पार्टी सिस्टम अब बहाल कर दिया गया है और सभी एयरपोर्ट्स पर चेक-इन सामान्य रूप से चल रहा है। वहीं इंडिगो ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से तकनीकी दिक्कतें, भीड़भाड़ और ऑपरेशनल आवश्यकताओं के कारण देरी और कैंसलेशन बढ़े हैं। प्रभावित यात्रियों को वैकल्पिक उड़ान या रिफंड की सुविधा दी जा रही है।   बता दें कि पिछले महीने भी दिल्ली एयरपोर्ट पर AMSS सिस्टम में खराबी के कारण 800 से ज़्यादा उड़ानें देर से चली थीं, जिससे एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स को मैनुअली काम करना पड़ा था।

रेलवे की नई सुविधा: सिर्फ 20 रुपये में यात्रियों को मिलेगा बेडरोल पैक, देखें पूरी गाइडलाइन

नई दिल्ली  ट्रेन से सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए भारतीय रेलवे ने एक बड़ा बदलाव शुरू किया है। अब तक बेडरोल की सुविधा केवल एसी कोच तक ही सीमित थी, लेकिन अब रेलवे इस सुविधा को स्लीपर कोच तक भी पहुंचाने जा रहा है। इससे वे यात्री भी लंबी दूरी के सफर में आराम पा सकेंगे, जो बिना तैयारी के यात्रा पर निकलते हैं या भारी सामान लेकर चलना नहीं चाहते। रेलवे ने इस सुविधा को ऑन-डिमांड सर्विस के तौर पर शुरू करने का फैसला किया है। यानी आपको बेडरोल तभी मिलेगा, जब आप चाहेंगे और उसके लिए एक छोटा सा चार्ज देंगे। स्लीपर क्लास में बेडरोल अब ऑन-डिमांड स्लीपर कोच में बेडरोल फ्री में नहीं दिया जाएगा, बल्कि इसकी अलग से कीमत तय की गई है। इसका फायदा उन यात्रियों को होगा जो: अचानक यात्रा पर निकलते हैं अपना बेडरोल घर से नहीं लाना चाहते हल्के सामान के साथ यात्रा करना पसंद करते हैं रेलवे का उद्देश्य है कि किराया बढ़ाए बिना स्लीपर यात्रा को और आरामदायक बनाया जाए। यदि यात्रियों से अच्छा रिस्पॉन्स मिला, तो यह सुविधा धीरे-धीरे और ट्रेनों में बढ़ाई जाएगी। 20 रुपये में क्या मिलेगा? रेलवे ने स्लीपर बेडरोल के लिए तीन अलग विकल्प तय किए हैं: सिर्फ चादर – 20 रुपये एक साफ-सुथरी चादर कंबल, तकिया या कवर इसमें शामिल नहीं यह विकल्प उनके लिए सही है जिन्हें सिर्फ सोने के लिए चादर चाहिए। सिर्फ तकिया कवर 30 रुपये एक तकिया पिलो कवर यदि चादर घर से लाई है तो यह पैक काफी उपयोगी होगा। कहां से शुरू हो रही है यह सुविधा? फिलहाल रेलवे इसे ट्रायल बेसिस पर कुछ खास ट्रेनों में शुरू कर रहा है। अभी कुल 10 ट्रेनें इस लिस्ट में शामिल हैं: 12671/12672 – नीलगिरी सुपरफास्ट एक्सप्रेस 12685/12686 – मैंगलोर सुपरफास्ट एक्सप्रेस 16179/16180 – मन्नारगुड़ी एक्सप्रेस 20605/20606 – तिरुचेंदुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस 22651/22652 – पालघाट एक्सप्रेस 20681/20682 – सिलंबु सुपरफास्ट एक्सप्रेस 22657/22658 – तांबरम–नागरकोइल सुपरफास्ट एक्सप्रेस 12695/12696 – त्रिवेंद्रम सुपरफास्ट एक्सप्रेस 22639/22640 – अल्लेप्पी एक्सप्रेस 16159/16160 – मैंगलोर एक्सप्रेस  

समावेशी भारत का संकल्प: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बोलीं, विकास तभी पूरा जब दिव्यांग बनें बराबरी के हिस्सेदार

नई दिल्ली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को विश्व दिव्यांग दिवस के मौके पर राष्ट्रपति भवन में साल 2025 के राष्ट्रीय पुरस्कार वितरित किए। ये सम्मान उन लोगों और संस्थाओं को दिए गए जिन्होंने दिव्यांगजनों को सशक्त बनाने में बेहतरीन काम किया। समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने साफ कहा, “दिव्यांगजन दया के नहीं, बराबरी के हकदार हैं। समाज और देश का विकास तभी पूरा माना जाएगा, जब हर दिव्यांग व्यक्ति उसमें बराबर का हिस्सेदार बने। ये कोई एहसान या दान का काम नहीं, बल्कि हम सबका फर्ज है।” इस साल की थीम है – “सामाजिक प्रगति के लिए दिव्यांगता-समावेशी समाज को बढ़ावा देना”।  राष्ट्रपति ने कहा कि ये थीम बिल्कुल सही दिशा दिखाती है। भारत अब पुरानी कल्याण वाली सोच से निकलकर अधिकार और सम्मान वाली सोच अपना रहा है। 2015 में “दिव्यांगजन” शब्द को अपनाकर सरकार ने यही संदेश दिया था कि ये लोग कमजोर नहीं, बल्कि दैवीय शक्ति वाले हैं। राष्ट्रपति ने सरकार की कोशिशों की तारीफ की। उन्होंने बताया कि देश में साइन लैंग्वेज रिसर्च, मेंटल हेल्थ रिहैबिलिटेशन और स्पोर्ट्स ट्रेनिंग के लिए कई राष्ट्रीय संस्थान बनाए गए हैं। अब तक लाखों दिव्यांगजनों को यूनिक डिसेबिलिटी आईडी कार्ड मिल चुका है, जिससे उन्हें नौकरी, शिक्षा और यात्रा में आरक्षण व सुविधाएं आसानी से मिल रही हैं। उन्होंने समाज से अपील करते हुए कहा कि सरकार अकेले सब कुछ नहीं कर सकती। हमें अपने घर, मोहल्ले, स्कूल और ऑफिस में दिव्यांगजनों को साथ लेकर चलना होगा। उनकी इज्जत और आत्मनिर्भरता बढ़ाना हर नागरिक का कर्तव्य है। राष्ट्रपति ने पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी और कहा, “आप सबने साबित कर दिया कि अगर मौका मिले तो दिव्यांगजन किसी से पीछे नहीं रहते। आप सब समाज के लिए मिसाल हैं। इस मौके पर केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार, राज्य मंत्री रामदास आठवले और प्रतिभा पाटिल समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

दिल्ली में अलर्ट मोड: पुतिन का खाना साथ लाने का फैसला, NSG–SWAT और रूसी कमांडो संभालेंगे सुरक्षा

नई दिल्ली  रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4-5 दिसंबर को चार साल बाद भारत आ रहे हैं, और इस हाई-प्रोफाइल यात्रा के लिए दिल्ली को पूरी तरह हाई-सिक्योरिटी ज़ोन में बदल दिया गया है। रूस के लगभग 130 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ आने वाले पुतिन के लिए भारतीय और रूसी सुरक्षा एजेंसियां मिलकर मल्टी-लेयर सिक्योरिटी कवच तैयार कर चुकी हैं। दिल्ली किले में बदली  हाल ही में दिल्ली में हुए ब्लास्ट के बाद सुरक्षा पहले ही अलर्ट पर थी, अब पुतिन के दौरे को देखते हुए इसे और सख्त किया गया है। मुख्य सुरक्षा एजेंसियां NSG कमांडोज, SWAT टीमें, पैरामिलिट्री फोर्सेज, दिल्ली पुलिस स्पेशल यूनिट्स, रूसी स्पेशल सिक्योरिटी ग्रुप, रूसी एडवांस टीम के 50 से अधिक कमांडोज पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं और उन्होंने रूट, होटल, वेन्यू और सिक्योरिटी प्वाइंट्स की माइक्रो-इंस्पेक्शन की है। रूसी राष्ट्रपति की पर्सनल सिक्योरिटी  पुतिन की सुरक्षा दुनिया की सबसे एडवांस मानी जाती है, और भारत में भी उसी प्रोटोकॉल को लागू किया जा रहा है। उनका खाना रूस से ही आएगा, कई सुरक्षा जांचों के बाद ही परोसा जाएगा। पुतिन की टीम के पास पोर्टेबल सिक्योरिटी किट है, जो हमेशा कार व होटल में साथ रहेगी। सबसे अंदरूनी सुरक्षा घेरा मास्को से आए सुरक्षा अधिकारी संभालेंगे।  टेक्नोलॉजी बेस्ड सिक्योरिटी      दिल्ली में सुरक्षा का सारा फोकस हाई-टेक मॉनिटरिंग पर है      एंटी-ड्रोन गन्स की तैनाती     हवा में लगातार उड़ते निगरानी ड्रोन     हजारों सीसीटीवी कैमरे     पुतिन के काफिले को ट्रैक करने के लिए फेस रिकग्निशन सिस्टम     दिल्ली पुलिस कंट्रोल रूम से 24×7 रियल-टाइम कोऑर्डिनेशन     खुफिया एजेंसियां भी किसी संभावित खतरे की निगरानी में लगातार लगी हुई हैं। ट्रैफिक और एरिया सैनिटाइजेशन  दिल्ली पुलिस के टॉप अफसर पूरे रूट को सैनिटाइज कर रहे हैं। पुतिन की मूवमेंट के दौरान कुछ रास्तों पर टेम्परेरी डायवर्जन किया है। आम लोगों का ध्यान रखते हुए पहले से ट्रैफिक एडवाइजरी जारी।  जिस स्थान पर पुतिन रुकेंगे, उसकी लोकेशन सुरक्षा कारणों से गोपनीय  रखी गई है। दौरे का एजेंडा     रक्षा,ऊर्जा, स्पेस और S-400 जैसे बड़े सौदे     भारत–रूस वार्ता में   प्रमुख मुद्दे शामिल होंगे      S-400 मिसाइल सिस्टम की नई डील     Su-57 फाइटर जेट पर बातचीत     ऊर्जा क्षेत्र में तेल आयात बढ़ाना     असैन्य परमाणु सहयोग में विस्तार     स्पेस और ट्रेड पर नई साझेदारी हाई अलर्ट क्यों?  यह यात्रा यूक्रेन युद्ध के बाद पुतिन का पहला भारत दौरा है, इसलिए वैश्विक स्तर पर भी यह बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।नवंबर 2025 में दिल्ली में हुए ब्लास्ट के बाद सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही हाई अलर्ट पर थीं।पुतिन की यात्रा को देखते हुए एक बार फिर अतिरिक्त प्रोटोकॉल लागू कर दिए गए हैं, ताकि किसी भी तरह की चूक की गुंजाइश न रहे। ोपुतिन का यह दौरा केवल एक राजनयिक यात्रा नहीं, बल्कि भारत-रूस साझेदारी के नए दौर की तैयारी माना जा रहा है।सुरक्षा व्यवस्था पहले से कहीं अधिक कड़ी है और पूरे 30 घंटे तक दिल्ली एक किलाबंद राजधानी की तरह काम करेगी। दोनों देशों की नज़रें अब इस बात पर हैं कि पुतिन की यात्रा में कौन से बड़े रणनीतिक फैसले सामने आते हैं