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पाकिस्तानी नेवी क्यों रह गई निष्क्रिय? भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन सिंदूर का राज खोला

नई दिल्ली  नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने मंगलवार को कहा कि मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बल के आक्रामक रुख के कारण पाकिस्तानी नौसेना को उसके बंदरगाहों के करीब रहने पर मजबूर होना पड़ा। भारतीय सेना ने जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद 7 मई को ऑपरेश सिंदूर के तहत जवाबी कार्रवाई की थी। एडमिरल त्रिपाठी ने अपने वार्षिक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भारतीय नौसेना ने पाकिस्तान के साथ तनाव के बाद पिछले सात-आठ महीनों में पश्चिमी अरब सागर सहित अन्य स्थानों पर उच्च पैमाने पर अपने जहाजों और पनडुब्बियों को तत्परता के साथ तैनात रखा है। नौसेना प्रमुख ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अब भी जारी है, लेकिन उन्होंने इस बारे में विस्तृत जानकारी देने से इनकार कर दिया। एडमिरल त्रिपाठी ने कहा, 'ऑपरेशन सिंदूर के दौरान विमानवाहक पोत की तैनाती समेत आक्रामक रुख और तत्काल कार्रवाई ने पाकिस्तानी नौसेना को उसके बंदरगाहों या मकरान तट के पास रहने के लिए मजबूर कर दिया।' नौसेना प्रमुख ने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' से पाकिस्तान पर वित्तीय दबाव पड़ा है, क्योंकि संघर्ष के बाद बड़ी संख्या में व्यापारिक जहाजों ने पाकिस्तान की यात्रा करने से परहेज किया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जाने वाले जहाजों के बीमा की लागत भी बढ़ गई है। सीजफायर में नौसेना की भूमिका वाइस एडमिरल के स्वामीनाथन ने मंगलवार को कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय नौसेना के आक्रामक कार्रवाई के रुख के कारण पाकिस्तान संघर्ष विराम का अनुरोध करने पर मजबूर हुआ। नौसेना दिवस से पहले मीडिया को संबोधित करते हुए वाइस एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बहुत ही कम समय में 30 से अधिक जहाजों और पनडुब्बियों को अभूतपूर्व तरीके से तैनात किया गया। नौसेना की पश्चिमी कमान के प्रमुख ने कहा, 'हमारे अग्रिम पंक्ति के जहाज, विमानवाहक पोत विक्रांत के ‘कैरियर बैटल ग्रुप’ के साथ में मकरान तट पर युद्ध के लिए तैयार थे।' कैरियर बैटल ग्रुप एक नौसैनिक समूह है जिसमें एक या अधिक विमान वाहक के साथ-साथ अन्य युद्धपोत जैसे विध्वंसक, फ्रिगेट और पनडुब्बियां शामिल होती हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना की आक्रामक तैनाती और रुख के कारण पाकिस्तानी नौसेना को अपने तट के करीब रहने के लिए मजबूर होना पड़ा। वाइस एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा, 'वास्तव में, भारतीय नौसेना द्वारा आक्रामक कार्रवाई करने के रुख को पाकिस्तान द्वारा युद्ध विराम का अनुरोध करने के महत्वपूर्ण कारकों में से एक माना जा सकता है।'  

शादी में देरी का मिला सुझाव, 19 साल के लड़के ने उठा लिया खौफनाक कदम—जानें पूरा मामला

मुंबई  महाराष्ट्र के ठाणे से हाल ही में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक लड़के ने कथित तौर पर इसीलिए अपनी जान दे दी क्योंकि वह एक लड़की से शादी करना चाहता था, लेकिन घरवालों ने उससे 21 साल की उम्र तक इंतजार करने को कहा था। लड़के की उम्र 19 साल थी। पुलिस ने मंगलवार को बताया कि लड़के ने परेशान होकर खुद की जान ले ली।   पुलिस ने बताया कि घटना 30 नवंबर को डोंबिवली इलाके में हुई। जानकारी के मुताबिक युवक झारखंड का रहने वाला था। वह पास की एक लड़की से प्यार करता था और उससे शादी करना चाहता था। मनपाड़ा पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने बताया कि उसके परिवार ने उससे शादी के लिए कानूनी तौर पर तय उम्र 21 साल होने तक इंतज़ार करने को कहा था, जिससे वह बेहद परेशान था। पुलिस ने बताया कि 30 नवंबर को युवक ने उसने कथित तौर पर अपने घर की छत से दुपट्टे का इस्तेमाल करके फांसी लगा ली। परिवार आनन फानन में उसे पास के एक अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने एक्सीडेंटल मौत का मामला दर्ज कर लिया है और घटना की जांच शुरू कर दी है।  

‘रेड कार्पेट किसे?’ रोहिंग्याओं पर सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत की कड़ी नाराज़गी

नई दिल्ली  रोहिंग्या समुदाय से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार और याचिकाकर्ता दोनों से तीखे सवाल किए। अदालत ने स्पष्ट किया कि रोहिंग्याओं की कानूनी स्थिति तय किए बिना उनके अधिकारों पर चर्चा नहीं की जा सकती और यह भी पूछा कि क्या भारत सरकार ने कभी उन्हें ‘शरणार्थी’ घोषित किया है। सीजेआई ने तीखा सवाल करते हुए पूछा कि 'क्या घुसपैठियों के लिए रेड कार्पेट बिछाएं? दरअसल मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की पीठ एक हैबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मई महीने में दिल्ली पुलिस ने कुछ रोहिंग्या व्यक्तियों को हिरासत में लिया, जिसके बाद से उनका कोई पता नहीं चल रहा। साथ ही याचिका में मांग की गई कि यदि उनको उनके देश लौटाना हो, तो यह प्रक्रिया कानून के अनुसार ही होनी चाहिए। केंद्र के पास शरणार्थी घोषित करने का कोई आदेश है?- CJI लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, सुनवाई की शुरुआत में ही मुख्य न्यायाधीश ने केंद्र सरकार की ओर से किसी भी आधिकारिक अधिसूचना का अभाव उठाते हुए पूछा- भारत सरकार का कौन-सा आदेश है जो उन्हें ‘शरणार्थी’ घोषित करता है? ‘शरणार्थी’ एक विधिक परिभाषित शब्द है। यदि कोई व्यक्ति अवैध रूप से घुसपैठ करता है, तो क्या हमारे पास उसे यहां रखने की बाध्यता है? पीठ ने पूछा- अगर किसी का कानूनी दर्जा ही नहीं है और वह घुसपैठिया है, तो क्या हमारा दायित्व बनता है कि हम उसे यहां रखें? बेंच ने आगे कहा- अगर उनके पास भारत में रहने का कानूनी अधिकार नहीं है और वे घुसपैठिए हैं, तो क्या हम उत्तर भारत की बेहद संवेदनशील सीमा पर आए किसी घुसपैठिए का रेड कार्पेट बिछाकर स्वागत करें? याचिकाकर्ता की वकील ने स्पष्ट किया कि वे रोहिंग्याओं के लिए शरणार्थी दर्जा मांग ही नहीं रही हैं, बल्कि केवल यह मांग कर रही हैं कि किसी भी निर्वासन की प्रक्रिया कानून के मुताबिक हो। घुसपैठ कर प्रवेश करें और फिर अधिकार मांगें?- CJI इस पर CJI ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा- पहले आप अवैध रूप से घुसते हैं। सुरंग खोदकर या बाड़ काटकर भारत में दाखिल हो जाते हैं। फिर कहते हैं कि अब मैं आ गया हूं, इसलिए भारत के कानून मेरे ऊपर लागू हों और मुझे खाना, रहने की जगह, बच्चों को शिक्षा मिले। क्या हम कानून को इस तरह खींचना चाहते हैं? उन्होंने यह भी कहा कि भारत में पहले से करोड़ों गरीब नागरिक हैं जिन पर ध्यान देना आवश्यक है। हालांकि सीजेआई ने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही कोई अवैध रूप से घुस आया हो, उसे थर्ड डिग्री टॉर्चर नहीं दिया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता का तर्क- हम केवल वैधानिक प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं याचिकाकर्ता की वकील ने कहा कि वे न तो रोहिंग्याओं के लिए विशेष अधिकार मांग रही हैं और न ही किसी को वापस बुलाने की मांग है। याचिका का एकमात्र उद्देश्य है कि सरकार अपने ही बनाए निर्वासन प्रक्रिया का पालन करे। उनका कहना था कि अदालत पहले ही सलीमुल्लाह मामले (2020) में कह चुकी है कि रोहिंग्याओं को सिर्फ वहीं वापस भेजा जा सकता है जब प्रक्रिया कानून के अनुसार हो। ‘देश धर्मशाला नहीं है’- पहले की टिप्पणियां गौरतलब है कि इसी साल सुप्रीम कोर्ट ने श्रीलंकाई तमिल शरणार्थी से जुड़े एक अन्य मामले में कहा था कि भारत दुनिया की धर्मशाला नहीं बन सकता जहां हर तरफ से शरणार्थियों को स्वीकार किया जाए। इसके अलावा मई में अदालत ने एक और याचिका में यह टिप्पणी भी की थी कि रोहिंग्याओं को समुद्र में फेंकने की कहानी एक सुलेख कथा जैसी लगती है। सरकार ने PIL की ‘लोकस स्टैंडी’ पर उठाए सवाल सुनवाई में मौजूद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि याचिका एक ‘पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन’ के रूप में दायर की गई है, लेकिन इसे किसी प्रभावित व्यक्ति ने दाखिल नहीं किया। इस पर याचिकाकर्ता की वकील ने कहा कि PIL में ‘लोकस’ का प्रश्न नहीं उठता। पीठ ने कहा कि यह मुद्दा कई अन्य याचिकाओं से भी जुड़ा है, इसलिए इसे उन मामलों के साथ समग्र रूप से सुना जाएगा। अदालत ने संकेत दिया कि बिना कानूनी दर्जे वाले विदेशी नागरिकों से जुड़े मामले संवेदनशील और जटिल हैं, जिनमें कई लॉजिस्टिक मुद्दे शामिल होते हैं।

यूज़र्स के लिए खुशखबरी! संचार साथी ऐप डिलीट कर सकते हैं, रखना जरूरी नहीं

नई दिल्ली  संचार साथी ऐप को लेकर जारी विवाद के बीच सरकार ने कहा है कि इसे फोन में रखना जरूरी नहीं है। साथ ही यूजर इसे डिलीट भी कर सकते हैं। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को यह जानकारी दी है। दूरसंचार विभाग ने नवंबर में निर्देश जारी किया था कि भारत में इस्तेमाल हो रहे फोन में संचार साथी ऐप अनिवार्य होगा। विपक्ष ने इस ऐप के जरिए जासूसी के आरोप लगाए हैं।   सिंधिया ने कहा, 'इसके आधार पर न कोई जासूसी है, न कोई कॉल मॉनीटरिंग है। अगर आप चाहते हैं, तो इसे एक्टिवेट करें। अगर आप नहीं चाहते, तो इसे एक्टिवेट मत करो। अगर आप इसे अपने फोन में रखना चाहते हैं, तो रखो। अगर आप इसको डिलीट करना चाहते हो, तो डिलीट करो…। अगर आपको संचार साथी इस्तेमाल नहीं करना है, तो डिलीट कर दो। इसे डिलीट कर सकते हैं, कोई परेशानी नहीं है।' उन्होंने कहा, 'यह उपभोक्ता की सुरक्षा की बात है…। आपको डिलीट करना है, तो डिलीट कर दोगे आप। कोई अनिवार्य नहीं है। अगर आप इस ऐप का उपयोग नहीं करना चाहते, तो इस पर रजिस्टर मत करो। पर हर व्यक्ति को देश में नहीं मालूम कि चोरी से बचाने, फ्रॉड से बचाने के लिए यह ऐप है। हर व्यक्ति तक यह ऐप पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी है। अगर आपको डिलीट करना है, तो आप डिलीट कर दो। नहीं इस्तेमाल करना तो रजिस्टर मत करो। जब आप रजिस्टर नहीं करोगे, तो यह ऐक्टिवेट कैसे होगा।' विपक्ष पर साधा निशाना केंद्रीय मंत्री ने विरोध करने पर विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'जब विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं होता है और विपक्ष मुद्दा ढूंढना चाहता है, तो विपक्ष की मदद हम नहीं कर सकते। हमारी जिम्मेदारी है, उपभोक्ताओं की मदद और सुरक्षा की। क्या है संचार साथी। संचार साथी एक ऐप है, एक पोर्टल है। जिसके आधार पर हर एक उपभोक्ता अपनी सुरक्षा अपने हाथों से कर पाता है। यह जान भागीदारी का एक कदम है। इसमें लोगों को आपत्ति नहीं, बल्कि स्वागत करना चाहिए।' उन्होंने कहा, 'इसके आधार पर जब आप मोबाइल फोन खरीदते हो, उसके आधार पर आईएमईआई नंबर फेक है या असली है, इसका पता आप संचार साथी ऐप से कर सकते हैं। आज तक संचार साथी पोर्टल के 20 करोड़ डाउनलोड हुए हैं। ऐप के डेढ़ करोड़ से ज्यादा डाउनलोड हैं। यह सफल इसलिए है, क्योंकि देश का हर नागरिक इस अभियान का साथी बनना चाहता है। वह स्वयं जन भागीदारी के आधार पर अपनी सुरक्षा नियमित रूप से कर पाए।' उन्होंने जानकारी दी, 'आज तक करीब पौने दो करोड़ फर्जी कनेक्शन इस जन भागीदारी के आधार पर ही डिसकनेक्ट हुए हैं। करीब 20 लाख फोन जो चोरी हुए थे, उन्हें ट्रेस किया गया। साढ़े सात लाख चोरी फोन को उपभोक्ता के हाथ में वापस पहुंचाया। करीब 21 लाख फोन उपभोक्ता के पहचानने और रिपोर्ट करने के आधार पर ही डिसकनेक्ट हुए हैं…।'  

भरोसे के नाम पर साजिश: आंचल के पिता व भाई ने हत्या से पहले रचा ड्रामा, CCTV में कैद नाच

मुंबई  महाराष्ट्र के नांदेड़ में एक युवती के प्रेमी के शव से शादी करने का मामला चर्चा में है। इस मामले में आरोपी युवती के पिता और भाई ही हैं। खबर है कि जिस युवक की हत्या के आरोप में दोनों पर लगे हैं, युवती के पिता उस युवक के साथ ही कुछ महीनों पहले जश्न मना रहे थे। युवती ने पिता और भाई के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है और दोनों फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं। 21 साल की आंचल ममदीवार ने 20 साल के सक्षम ताटे के शव से विवाह कर लिया था। गुरुवार शाम आंचल के भाई हिमेश और सक्षम के बीच झगड़ा हुआ था। पुलिस का कहना है कि हिमेश ने सक्षम पर कथित तौर पर गोली चलाई जो उसकी पसलियों के आर-पार निकल गई, इसके बाद उसने उसके सिर पर टाइल से वार किया जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। उन्होंने बताया कि घटना के कुछ ही देर बाद हिमेश, उसका भाई साहिल (25) और पिता गजानन मामिडवार (45) को गिरफ्तार कर लिया गया। साथ नाच रहे थे मीडिया रिपोर्ट में एक वीडियो के हवाले से बताया गया है कि आंचल के पिता गजानन आंबेडकर जयंती मना रहे हैं। वीडियो में वह आंचल, सक्षम और उनके दोस्तों के साथ नाच रहे हैं। वीडियो में नजर आ रहा है कि कपल खुश है। जश्न के दौरान गजानन ने बेटी को गले लगाया था। वीडियो में नजर आ रहा है कि सक्षम के दोस्त आरोपी को कंधे पर उठा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों का कहना है कि आंचल के पिता और भाई ने हत्या से पहले सक्षम का भरोसा जीतने की साजिश रची थी। पुलिस ने उकसाया सोमवार को आंचल ने इतवारा थाने के दो पुलिसकर्मियों पर युवक की हत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया। मृतक के घर पर पहुंची युवती ने प्रेमी की हत्या के लिए अपने भाई को फांसी देने की अपील की। आंचल ने पीटीआई-वीडियो को बताया, 'हत्या वाले दिन, मेरा भाई हिमेश मुझे सुबह इतवारा थाने ले गया और सक्षम के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने को कहा।' युवती ने बताया कि उसने फर्जी शिकायत दर्ज कराने से इनकार कर दिया। आंचल ने कहा, 'पुलिस के दो अधिकारियों ने उसे (भाई को)यह कहकर उकसाया कि उसे दूसरे लोगों से लड़ने के बजाय उस आदमी को मार देना चाहिए जिससे मैं प्यार करती हूं।' उसने कहा कि उसके भाई हिमेश ने सक्षम की हत्या के बाद थाने वापस आने की चुनौती दी थी। आंचल ने कहा, 'मेरा भाई बहुत गुस्से में था। उसने पुलिस अधिकारियों से कहा कि वह सक्षम की हत्या करने के बाद थाने आएगा। फिर उसने उसे (सक्षम को) मार डाला। मेरी बस यही मांग है कि आरोपियों (उसके भाई और पिता) को भी उसी तरह मारा जाए जैसे सक्षम को मारा गया। अब मैंने उससे शादी कर ली है और उसके परिवार के साथ रहूंगी। मैं उनका ख्याल रखूंगी।'

निकाय चुनाव का बड़ा ऐलान: परिणाम अब कल नहीं, 21 दिसंबर को आएंगे

मुंबई  महाराष्ट्र में हो रहे निकाय चुनावों के शेड्यूल में राज्य निर्वाचन आयोग ने बड़ा बदलाव किया है. अब सभी नगर परिषद-नगर पालिकाओं के चुनाव परिणाम 21 दिसंबर को जारी किए जाएंगे. पहले ये नतीजे 3 दिसंबर को घोषित होने थे, लेकिन कुछ सीटों पर मतदान की तारीख आगे बढ़ने के कारण पूरी प्रक्रिया को एक साथ करने का फैसला लिया गया है. महाराष्ट्र में कुछ उम्मीदवारों के नामांकन रद्द होने के खिलाफ कोर्ट में चल रही अपीलों की वजह से 24 नगर परिषदों-नगर पंचायतों के अध्यक्ष पद पर चुनाव की तारीख बढ़ाकर 20 दिसंबर कर दी थी. वहीं बाकी सभी जगहों पर पहले तय कार्यक्रम के मुताबिक आज यानी 2 दिसंबर को ही मतदान हो रहा है. क्यों टालना पड़ा निकाय चुनाव? राज्य निर्वाचन आयोग ने 4 नवंबर को 246 नगर परिषदों और 42 नगर पंचायतों के लिए चुनाव की घोषणा की थी. लेकिन, जिन सीटों पर उम्मीदवारों ने जिला अदालत में अपील की थी और फैसला 23 नवंबर या उसके बाद आया, वहां चुनाव टालना पड़ा. कानून के अनुसार अगर अध्यक्ष पद पर अपील थी तो पूरे निकाय (अध्यक्ष सहित सभी सदस्य) का चुनाव एक साथ होगा, और अगर सिर्फ सदस्य पद पर अपील थी, तो सिर्फ उसी वार्ड का चुनाव बाद में कराया जाएगा. चुनाव आयोग ने क्या बताई नई तारीख? नई तारीखों वाला संशोधित कार्यक्रम सिर्फ इन्हीं प्रभावित सीटों के लिए है. इसके तहत नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख 10 दिसंबर दोपहर 3 बजे तक रखी गई है. उम्मीदवारों की अंतिम सूची और चुनाव चिन्ह 11 दिसंबर को जारी होंगे. मतदान 20 दिसंबर को सुबह 7.30 बजे से शाम 5.30 बजे तक होगा और मतगणना अगले दिन 21 दिसंबर को सुबह 10 बजे से शुरू होगी. जिन 24 नगर निकायों में अध्यक्ष पद सहित पूरा चुनाव 20 दिसंबर को होगा, उनमें ठाणे जिले की अंबरनाथ, अहमदनगर जिले की कोपरगांव, देवळाली प्रवरा, पाथर्डी और नेवासा, पुणे जिले की बारामती और फुरसुंगी-उरूळी देवाची, सोलापुर की अनगर और मंगळवेढा, सातारा की महाबळेश्वर और फलटण, छत्रपती संभाजीनगर की फुलंब्री, नांदेड़ की मुखेड और धर्माबाद, लातूर की निलंगा और रेणापूर, हिंगोली की बसमत, अमरावती की अंजनगांव सुर्जी, अकोला की बाळापूर, यवतमाल की यवतमाल, वाशिम की वाशिम, बुलढाणा की देऊलगांव राजा, वर्धा की देवली और चंद्रपुर की घुग्घूस शामिल हैं. इनके अलावा 76 नगर निकायों के 154 सदस्य पदों पर भी मतदान 20 दिसंबर को ही होगा. इनमें सबसे ज्यादा सीटें बदलापुर और तळेगांव दाभाड़े की छह-छह, परली की पांच, सिन्नर, खामगाव और अंबेजोगाई की चार-चार हैं. भुसावळ, पैठण, उदगीर, कामठी और हिंगणघाट जैसी जगहों पर भी तीन-तीन और चार-चार वार्डों का चुनाव टला है. राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिला कलेक्टरों को नया कार्यक्रम तुरंत लागू करने के निर्देश दे दिए हैं. जिन इलाकों में 2 दिसंबर को वोटिंग होनी है, वहां कोई बदलाव नहीं हुआ है. मतदाताओं से अपील की गई है कि वे अपने क्षेत्र की सही तारीख जरूर जांच लें ताकि उनका वोट न छूटे.

IAS पदों पर IPS नियुक्ति पर हाईकोर्ट ने तेलंगाना सरकार से पूछा कारण

हैदराबाद IAS यानी भारतीय प्रशासनिक सेवा कैडर के पदों पर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों की नियुक्ति पर तेलंगाना हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है। अदालत में एक रिट याचिका दाखिल हुई थी, जिसमें कहा गया था कि इस तरह की नियुक्तियां नियमों का उल्लंघन करती हैं। उच्च न्यायालय ने इस तरह के फैसलों के पीछे कानूनी वजह बताने के लिए कहा है। मामले पर अगली सुनवाई के लिए 10 दिसंबर तारीख तय की गई है। हैदराबाद के एक वकील और सामाजिक कार्यकर्ता वाडला श्रीकांत ने एक रिट याचिका दाखिल की है। याचिकाकर्ता के वकील विजय गोपाल का कहना है कि सरकार का फैसला और खासतौर से जीओ 1342 (जारी 26 सितंबर) जारी करना और उन केंद्रीय कानूनों का उल्लंघन है, जो दो भारतीय सेवाओं की अलग-अलग भूमिकाओं और जिम्मेदारियों के बारे में बताते हैं। इस याचिका में विशेष रूप से तीन अधिकारियों का जिक्र किया गया है। ये IPS अधिकारी उन पदों को संभाल रहे हैं, जो आमतौर पर IAS कैडर के पास होते हैं। इनमें IPS स्टीफन रविंद्र हैं, जो सिविल सप्लाइज कमिश्नर और एक्स ऑफिशियो प्रधान सचिव के तौर पर काम कर रहे हैं। इनके अलावा IPS शिखा गोयल, जो विजिलेंस एंड एनफोर्समेंट में महानिदेशक हैं। साथ ही हैदराबाद के पूर्व आयुक्त सीवी आनंद का नाम है, जो गृह विभाग का विशेष मुख्य सचिव बनाया गया है। एडवोकेट गोपाल का कहना है कि इस तरह की क्रॉस कैडर नियुक्तियां IAS (Fixation of Cadre Strength) Regulations, 2016 जैसे नियमों का उल्लंघन करती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, IPS अधिकारियों की प्रधान सचिव रैंक पर नियुक्तियों की प्रथा साल 2014 में बीआरएस सरकार के समय से चली आ रही है। सरकार की तरफ से पेश हुए वकील राहुल रेड्डी ने अदालत से अतिरिक्त समय की मांग की थी।

आसाराम की जमानत पर सवाल, पीड़िता के पिता ने सुप्रीम कोर्ट से मांगी कार्रवाई

शाहजहांपुर  यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी कथावाचक आसाराम इलाज के लिए जमानत पर छूटा है. आसाराम की जमानत के खिलाफ शाहजहांपुर के रहने वाले पीड़िता के पिता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. पीड़िता के पिता का आरोप है कि आसाराम के गुर्गे उन्हें और उनके परिवार को धमका रहे हैं और जान से मारने की धमकी दे रहे हैं. मामले में शुक्रवार को सुनवाई हो सकती है. पीड़ित परिवार का क्या कहना? पीड़िता के पिता का कहना है कि अगर आसाराम जमानत पर बाहर रहा तो उनके परिवार के खिलाफ कोई बड़ा षड्यंत्र रचा जा सकता है. पीड़िता के पिता का कहना है कि आसाराम जब भी जेल से छूटता है तो वह गवाहों को गोली मरवाता है या फिर उन्हें गायब करवा देता है. पिता के पिता का कहना है कि आसाराम सुरेशानंद, भोलानंद और मुख्य गवार राहुल सचान को गायब करवा चुका है, जिनका आज तक पता नहीं चल पाया है.  पीड़ित परिवार की सुरक्षा में 6 पुलिसकर्मी तैनात पीड़िता के पिता का कहना है कि वह बीमारी का बहाना बनाकर जेल से बाहर निकलता है और गवाहों और उनके परिवार को अपने गुर्गों के जरिए धमकता है. अगर वह बीमार है तो जेल के अंदर रहकर ही उसका इलाज हो सकता है जैसे बाकी कैदियों का होता है. उन्होंने कहा कि आसाराम को इलाज के नाम पर विशेष ट्रीटमेंट दिया जा रहा है. पीड़िता के पिता ने आशंका जाहिर की है कि अगर आसाराम जमानत पर बाहर रहा तो उनके परिवार को जान का बड़ा खतरा हो सकता है. हालांकि पीड़िता के परिवार की सुरक्षा के लिए 6 पुलिसकर्मी तैनात हैं. कोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद की सजा बता दें कि शाहजहापुर की पीड़िता ने दुष्कर्म के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई थी. जिस पर कोर्ट ने आसाराम को उम्रकैद की सजा सुनाई. हाल ही में आसाराम को इलाजे के लिए 6 महीने की जमीनत मिली है. इसके बाद वह जमानत पर जेल से बाहर आया है. इसी के बाद पीड़िता के पिता ने खतरे की आशंका जताते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और आसाराम की जमानत रद्द करने की मांग की है. 

के.के. मुहम्मद का विवादित बयान—ज्ञानवापी पर मुस्लिम दावा खत्म करने और हिंदू पक्ष से नई मांग न करने की अपील

नई दिल्ली आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के पूर्व रीजनल डायरेक्टर केके मुहम्मद ने मंदिर-मस्जिद विवादों में संयम बरतने की अपील की है. उन्होंने कहा है कि चर्चा के सेंटर में अब सिर्फ तीन जगहें- राम जन्मभूमि, मथुरा और ज्ञानवापी होनी चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि मुसलमानों को अपनी मर्जी से ये जगहें सौंप देनी चाहिए. केके मुहम्मद ने हिन्दुओं से कहा कि वे अब नया दावा न करें. ​​उन्होंने जोर देकर कहा कि दावों को बढ़ाने से सिर्फ और अधिक दिक्कतें पैदा होंगी. केके मुहम्मद की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब मंदिर-मस्जिद विवाद से जुड़ी कई याचिकाएं देश भर की अदालतों में पेंडिंग हैं.  मुहम्मद ने बताया कि राम जन्मभूमि के अलावा मथुरा और ज्ञानवापी दो और जगहें हैं जो "हिंदू समुदाय के लिए उतनी ही ज़रूरी हैं जितनी मुसलमानों के लिए मक्का और मदीना हैं." अयोध्या विवाद लेफ्ट प्रोपेगैंडा की वजह से पैदा हुआ: केके मुहम्मद अयोध्या विवाद पर बात करते हुए केके मुहम्मद ने 1976 में बीबी लाल की अगुआई में बाबरी मस्जिद की खुदाई में खुद के शामिल होने के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि यह विवाद एक कम्युनिस्ट इतिहासकार के असर की वजह से बढ़ा. उनके मुताबिक कम्युनिस्ट इतिहासकारों ने मुस्लिम कम्युनिटी को इस बात के लिए मनाया कि वे मस्जिद के नीचे मंदिर होने के सबूत को खारिज कर दें.  मुहम्मद के मुताबिक ज्यादातर मुसलमान शुरू में विवादित जगह पर मंदिर बनाने की इजाजत देकर मामले को सुलझाने के पक्ष में थे.  मुहम्मद ने कहा कि इतिहासकार आर्कियोलॉजिस्ट नहीं थे और खुदाई के किसी भी स्टेज पर वह उस जगह पर नहीं गया थे. उन्होंने झूठी बातें फैलाने की आलोचना की और उस समय लोगों की राय पर असर डालने वालों के बीच सीधी जानकारी की कमी की ओर इशारा किया.   "उस बहुत जरूरी समय में एक कम्युनिस्ट इतिहासकार ने इन सब चीजों में दखल दिया और फिर मुस्लिम समुदाय को यकीन दिलाया कि प्रोफेसर लाल ने उस जगह की खुदाई की थी और उन्हें ऐसा कुछ नहीं मिला जिससे मंदिर के पहले से होने का पता चले. तो यह उनकी बनाई हुई चीज थी. इसलिए मुसलमानों के पास कोई और रास्ता नहीं था." उन्होंने कहा, "वे कभी उस जगह पर नहीं गए थे, न खुदाई से पहले, न खुदाई के दौरान और न ही खुदाई के बाद. इसलिए बिना सब्जेक्ट जाने, वे इस तरह की झूठी कहानियां फैला रहे थे. इसलिए किसी को तो इसका जवाब देना ही था. इसलिए पहली बार प्रोफेसर बीबी लाल जिन्होंने टीम को लीड किया था, ने इसका करारा जवाब दिया." मंदिर-मस्जिद बहस के बड़े मुद्दे पर केके मुहम्मद ने सावधानी बरतने की सलाह देते हुए कहा, "हमें बहुत सावधान रहना चाहिए." उन्होंने राम जन्मभूमि के साथ-साथ मथुरा और ज्ञानवापी को हिंदू समुदाय के लिए खास महत्व वाली जगहों के तौर पर पहचाना और मुसलमानों के लिए उनकी अहमियत मक्का और मदीना जितनी बताई.  उन्होंने आगे कहा, "इसलिए मुसलमानों को अपनी मर्जी से ये तीन जगहें सौंप देनी चाहिए." धार्मिक जगहों से जुड़ी दूसरी याचिकाओं के बारे में सवालों के जवाब में केके मुहम्मद ने कहा, "इन तीनों के अलावा हिंदू समुदाय की तरफ से कोई और मांग नहीं आनी चाहिए." उन्होंने चेतावनी दी कि और दावे करने से समस्या हल नहीं होगी और आगे टकराव का खतरा रहेगा.  केके मुहम्मद ने कहा, "देश में एकता लाने का एकमात्र हल यह होना चाहिए कि ये तीनों जगहें हिंदू समुदाय को दे दी जाएं और हिंदू आगे से जगहों की लंबी लिस्ट लेकर आना बंद कर दें. इससे समस्या हल नहीं होगी." उन्होंने दोनों समुदायों से संयम और समझौते की जरूरत पर जोर दिया.  उन्होंने ऐसी मांगों को लेकर अंदरूनी कंट्रोल की कमी पर भी कमेंट किया और कहा, "हिंदू समुदाय के अंदर की समस्या को कंट्रोल करने वाला कोई नहीं है." उन्होंने ताजमहल के बारे में कुछ हिंदू ग्रुप्स के आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया और उन्हें "पूरी तरह से झूठा" बताया. मुहम्मद ने जगह के ऐतिहासिक ट्रांसफर के बारे में विस्तार से बताया, यह देखते हुए कि यह असल में राजा मान सिंह का महल था, जिसे बाद में जय सिंह और फिर शाहजहां को ट्रांसफर कर दिया गया और इसके सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट्स बीकानेर और जयपुर म्यूज़ियम में सुरक्षित रखे गए हैं. उन्होंने ऐसे दावों को कट्टर हिंदू ग्रुप्स की यह दावा करने की एक और कोशिश बताया कि सब कुछ उनका है.  'BJP के 11 साल ASI के लिए एक काला युग' सांस्कृतिक विरासत के बचाव पर केके मुहम्मद ने कहा कि सरकार से जो उम्मीदें थीं खासकर जगहों की सुरक्षा को लेकर, वे "पूरी नहीं हुईं." उन्होंने मौजूदा समय को "आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया का काला युग" बताया, और खास तरक्की न होने की आलोचना की. उन्होंने आगे कहा कि चंबल में बटेश्वर मंदिर कॉम्प्लेक्स में उनका अपना रेस्टोरेशन का काम हाल के सालों में काफी धीमा हो गया है, काफी कोशिशों के बावजूद पिछले ग्यारह सालों में सिर्फ दस मंदिरों का ही रिस्टोरेशन किया जा सका है.   

मुंबई में इमरजेंसी लैंडिंग, हैदराबाद से कुवैत जा रही इंडिगो फ्लाइट को बम की धमकी मिलने के बाद

मुंबई  हैदराबाद से कुवैत जा रही इंडिगो की फ्लाइट की मुंबई में इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई है. बताया जा रहा है कि फ्लाइट में 'बम' की धमकी भरा ईमेल मिला था, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए फ्लाइट की मुंबई में इमरजेंसी लैंडिंग करा ली. सुरक्षा एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं. विमान को एयरपोर्ट के आइसोलेशन बे (Isolation Bay) में भेज दिया है. प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंगलवार सुबह इंडिगो की एक फ्लाइट ने हैदराबाद के राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से कुवैत के लिए उड़ान भरी थी. फ्लाइट के उड़ान भरने के बाद हैदराबाद एयरपोर्ट को एक धमकी भरा ईमेल मिला था, जिसमें विमान में बम होने की धमकी थी. इसके बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) ने फ्लाइट को तुरंत मुंबई डायवर्ट कर दिया, जहां फ्लाइट की सुरक्षित लैंड हो चुकी है और सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है. यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है. अधिकारियों ने बताया कि लैंडिंग के बाद विमान को आइसोलेशन पार्क (अलग पार्किंग) में ले जाया गया, जहां बम डिस्पोजल स्क्वायड, सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF) और अन्य सुरक्षा टीमों ने पूर्ण जांच शुरू कर दी. प्रारंभिक रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक कोई संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक नहीं मिला है.