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‘रूस की योजना, हमारी नहीं’—कनाडा में ट्रंप की गाज़ा पॉलिसी पर अमेरिकी सीनेटरों का जोरदार प्रहार

वाशिंगटन रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दृष्टिकोण के आलोचक कई सीनेटर ने शनिवार को कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बातचीत के दौरान उन्हें बताया कि जिस शांति प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए ट्रंप द्वारा कीव पर दबाव डाला जा रहा है वह असल में अमेरिकी योजना नहीं, बल्कि रूसियों की ‘‘इच्छा सूची'' है। यह 28-बिंदु वाला शांति प्रस्ताव ट्रंप प्रशासन और क्रेमलिन द्वारा तैयार किया गया था, जिसमें यूक्रेन को शामिल नहीं किया गया था। इस प्रस्ताव में कई ऐसे रूसी मांगों को शामिल किया गया है जिन्हें यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दर्जनों बार नकार दिया है। इसमें यूक्रेन द्वारा बड़े भूभागों को छोड़ना भी शामिल है।  ट्रंप का कहना है कि वह चाहते हैं कि यूक्रेन इस प्रस्ताव को अगले सप्ताह के अंत तक स्वीकार कर ले। अमेरिका के कई सीनेटर ने शनिवार को पहले कहा था कि इससे मॉस्को को उसके आक्रामकता के लिए इनाम मिलेगा और ऐसे दूसरे नेताओं को एक संदेश भी देगा जिन्होंने अपने पड़ोसियों को धमकाया है। इन सीनेटर का इस योजना के खिलाफ विरोध अन्य अमेरिकी कानून निर्माताओं की आलोचना के बाद सामने आया है, जिनमें कुछ रिपब्लिकन सीनेटर भी शामिल हैं। हालांकि इनमें से कोई भी इसे रोकने की शक्ति नहीं रखता। ये सीनेटर कनाडा में एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सम्मेलन में बोल रहे थे। इन सीनेटर में एक डेमोक्रेटिक, एक निर्दलीय और एक रिपब्लिकन शामिल थे। मेन के निर्दलीय सीनेटर एंगस किंग ने कनाडा में हैलीफ़ैक्स इंटरनेशनल सिक्योरिटी फोरम में एक पैनल चर्चा के दौरान कहा, ‘‘यह एक तरह से आक्रामकता को पुरस्कृत करने जैसा है। यह बिल्कुल साफ है। रूस द्वारा पूर्वी यूक्रेन पर दावा करने का कोई नैतिक, कानूनी, या राजनीतिक आधार नहीं है।'' सीनेट विदेश संबंध समिति सदस्य किंग ने इस प्रस्ताव की तुलना 1938 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री नेविल चेम्बरलेन के एडॉल्फ हिटलर के साथ हुए म्यूनिख समझौते से की, जो तुष्टीकरण का एक ऐतिहासिक असफल कार्य। किंग और डेमोक्रेटिक सेनेटर जीन शाहीन ने बाद में कहा कि उन्होंने और फोरम में उनके साथी सेनेटर ने रुबियो से बात की।  किंग ने कहा कि रुबियो ने उन्हें बताया कि यह योजना ‘‘प्रशासन की नहीं थी'' बल्कि ‘‘रूस की इच्छा सूची'' थी। शाहीन ने कहा कि रुबियो यूरोपी देशों और यूक्रेन के नेताओं से बातचीत के लिए जिनेवा जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि रुबियो ने उनसे और साउथ डकोटा से रिपब्लिकन सेनेटर माइक राउंड्स से बात की। शाहीन ने कहा, ‘‘यह एक रूसी प्रस्ताव है। इस योजना में कुछ ऐसा है जो पूरी तरह से अस्वीकार्य है।'' राउंड्स ने भी कहा, "यह हमारा शांति प्रस्ताव नहीं है। ऐसा लगता है जैसे इसे रूसी में लिखा गया हो।"    

गाज़ा में बढ़ी तबाही: महिलाओं-बच्चों सहित 24 की जान गई

गाजा इजराइल की सेना ने शनिवार को कहा कि उसने हमास आतंकवादियों के खिलाफ हवाई हमले किए हैं। वहीं, गाजा में स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि इजराइली हमले में कम से कम 44  लोग मारे गए और बच्चों सहित 80 लोग घायल हो गए। शिफा अस्पताल के प्रबंध निदेशक रामी महन्ना ने बताया कि गाजा शहर के रिमल इलाके में एक वाहन को निशाना बनाकर किये गए हमले में सात फलस्तीनी मारे गए और 18 अन्य घायल हो गए। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।  अस्पताल के निदेशक मोहम्मद अबू सेल्मिया ने बताया कि घायलों में ज़्यादातर बच्चे हैं। मध्य गाजा में अल-अवदा अस्पताल के पास एक मकान को निशाना बनाकर किए गए एक अन्य हमले में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई और 11 अन्य घायल हो गए। अस्पताल के अधिकारी ने बताया कि मध्य गाजा के नुसेरात शिविर में एक मकान पर हुए हमले में एक बच्चे की मौत हो गई और 16 अन्य घायल हो गए। अल-अक्सा अस्पताल के अनुसार, मध्य गाजा के दीर अल-बलाह में एक मकान को निशाना बनाकर किए गए हमले में एक महिला समेत तीन लोगों की मौत हो गई। इजराइली सेना ने एक बयान में कहा कि उसने हमास के खिलाफ हमले शुरू कर दिए हैं, क्योंकि एक ‘‘सशस्त्र आतंकवादी'' इजराइली नियंत्रण वाले इलाके में घुस आया और दक्षिणी गाजा में सैनिकों पर गोलीबारी की। बयान में कहा गया कि किसी भी सैनिक को चोट नहीं आई। सेना ने कहा कि आतंकवादी ने उस सड़क का इस्तेमाल किया, जिससे मानवीय सहायता क्षेत्र में पहुंचाई जाती है। एक अलग बयान में, इजराइल की सेना ने कहा कि उसके सैनिकों ने रफा क्षेत्र में तीन ‘‘आतंकवादियों'' को मार गिराया तथा दो अलग-अलग घटनाओं में उत्तरी गाजा में इजराइली कब्जे वाले क्षेत्रों में घुसकर सैनिकों की ओर बढ़ने वाले चार लोगों पर गोलीबारी की, जिसमें दो हमलावर मारे गए।    

ब्रैम्पटन हादसा: मकान में आग लगने से तीन पंजाबियों की दर्दनाक मौत, तीसरी मंजिल से कूदे कई लोग

वैंकूवर  कनाडा के ब्रैम्पटन शहर में बानस वे (Banis Way) स्थित एक किराये के घर में गुरुवार देर रात लगी भीषण आग में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि गर्भवती महिला समेत चार लोगों ने तीसरी मंजिल से छलांग लगाई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। मृतक और घायल सभी एक ही पंजाबी मूल के परिवार के बताये जा रहे हैं। परिवार के दो सदस्य अभी भी लापता हैं। आग में पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके इस घर का मालिक भी पंजाब का रहने वाला बताया जा रहा है। अग्निशमन विभाग को रात करीब ढाई बजे आग लगने की सूचना मिली। जब फायर ब्रिगेड टीम मौके पर पहुंची, तो घर की ऊपरी मंजिल पूरी तरह आग की चपेट में थी। अधिकारियों ने तुरंत आसपास के घर खाली करवाए और आग बुझाने का अभियान शुरू किया। मलबे से एक बच्चे सहित दो लोगों के शव बरामद हुए। गर्भवती महिला व एक 5 वर्षीय बच्चे सहित चार अन्य लोग तीसरी मंजिल की खिड़की से कूदकर बाहर निकले, लेकिन वे गंभीर रूप से घायल हो गए। इनमें से एक की हालत नाजुक बताई जा रही है। अग्निशमन कर्मी शुक्रवार शाम तक भी मलबे में तलाश अभियान चलाते रहे, ताकि लापता दो परिजनों का पता लगाया जा सके। आग से जुड़े हुए जड़वा (सेमी-डिटैच्ड) घर को भी भारी नुकसान हुआ है। ब्रैम्पटन के मेयर पैट्रिक ब्राउन ने जानकारी दी कि घर के विदेशी मालिक ने वर्ष 2020 में इसमें सब-यूनिट बनाने के लिए आवेदन किया था। निरीक्षण के लिए अधिकारी कई बार पहुंचे, लेकिन भीतर रहने वाले लोगों ने उन्हें अंदर जाने नहीं दिया। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक यह घर करीब छह वर्ष पहले भारत में रहने वाले व्यक्ति ने एक रियल्टर के माध्यम से खरीदा था और कभी स्वयं यहां नहीं आया। घर की देखभाल और किराये की जिम्मेदारी उसने ब्रैम्पटन में रहने वाले एक परिचित को सौंप रखी थी। पड़ोसियों ने बताया कि पीड़ित परिवार मालिक के बारे में पूछने पर जानकारी देने से बचता था। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है। जांच एजेंसियां विदेशी मालिक के संपर्क सूत्रों की पड़ताल कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार घर का मालिक पंजाब सरकार का एक अधिकारी है। ओंटारियो के मुख्यमंत्री ने हादसे में मारे गए लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। पीड़ित परिवार की आधिकारिक पहचान अभी जारी नहीं की गई है। स्थानीय समुदाय इस त्रासदी से स्तब्ध है और जांच पूरी होने का इंतजार कर रहा है।

कैंपस में नमाज़ अदा करने पर हंगामा, हिंदू संगठनों का विरोध—छात्रों ने जताया खेद

मुंबई  महाराष्ट्र के कल्याण स्थित आइडियल कॉलेज में कुछ छात्रों ने खाली क्लासरूम में नमाज अदा की, जिसका वीडियो वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया। इस घटना से कॉलेज कैंपस में भारी तनाव की स्थिति बन गई। पुलिस के साथ-साथ दक्षिणपंथी संगठनों का ध्यान भी इस ओर गया। हालांकि, किसी तरह की हिंसा की खबर नहीं है और स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया है। वीडियो वायरल होने के बाद विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता कॉलेज पहुंचे। उन्होंने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। हिल लाइन पुलिस तुरंत कैंपस पहुंची और प्रदर्शनकारियों को शांत कराया।   कॉलेज प्रशासन के अनुसार, फार्मेसी डिपार्टमेंट के कुछ छात्रों ने खाली पड़ी क्लासरूम में कुछ मिनट के लिए नमाज पढ़ी थी। एक शख्स ने बताया, 'छात्रों का इरादा कोई विवाद पैदा करना या किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।' प्रशासन ने छात्रों को बुलाकर चर्चा की, जिसमें उन्होंने नमाज पढ़ने की बात स्वीकार की। उन्होंने कॉलेज प्रशासन और कार्यकर्ताओं से माफी मांग ली, ताकि गलतफहमी दूर हो सके। कॉलेज की ओर से क्या कहा गया कॉलेज प्रशासन ने दोहराया कि संस्थान के नियमों और अनुशासन का पालन सबसे ऊपर है। कॉलेज कैंपस में किसी भी तरह की धार्मिक गतिविधि की इजाजत नहीं है। भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए उचित कदम उठाए जाएंगे। इन छात्रों के खिलाफ भी उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने स्थिति पूरी तरह नियंत्रित होने के बाद कुछ देर कैंपस की निगरानी की और फिर चली गई। मामला फिलहाल शांत बताया जा रहा है।  

SIR सिस्टम ने कर दिखाया कमाल: 37 साल बाद मिला लापता बड़ा बेटा, पढ़िए पूरी कहानी

कोलकाता  पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में SIR के दौरान एक कमाल की घटना हुई। मतदाता सूची की संशोधन प्रक्रिया ने लगभग चार दशक से बिछड़े एक परिवार को फिर से मिला दिया। चक्रवर्ती परिवार ने 1988 में अपने बड़े बेटे विवेक चक्रवर्ती को खो दिया था। घर से निकलने के बाद विवेक का कोई अता-पता नहीं चला। बरसों तक खोजबीन की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। अब तक उन्हें उम्मीद ही नहीं थी कि कभी फिर मिलन होगा। मगर, एसआईआर अभियान ने वो दरवाजा खोल दिया जो वे बंद समझ चुके थे।   विवेक के छोटे भाई का नाम प्रदीप चक्रवर्ती है। वह उसी इलाके के बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) हैं। एसआईआर के दौरान हर फॉर्म पर उनका नाम और मोबाइल नंबर छपा था। विवेक का बेटा कोलकाता में रहता है जो अपने चाचा के बारे में कुछ नहीं जानता था। उसने दस्तावेजों के लिए मदद मांगने की खातिर प्रदीप को फोन किया। पहले कागजात को लेकर बातें हुईं, लेकिन धीरे-धीरे परिवार की कड़ियां जुड़ने लगीं। प्रदीप ने बताया, 'मेरा बड़ा भाई आखिरी बार 1988 में घर आया था। उसके बाद से गायब है। हमने हर जगह ढूंढा। मगर, उसने सारे रिश्ते तोड़ दिए। जब इस लड़के के जवाब हमारे परिवार की उन बातों से मिलने लगे जो सिर्फ हम ही जानते हैं, तब मुझे एहसास हुआ कि मैं अपने भतीजे से बात कर रहा हूं।' आखिर कैसे खुला पूरा राज इस तरह 37 साल से लापता चक्रवर्ती परिवार का बड़ा बेटा मिल गया। दोनों तरफ खुशी की लहर थी। इसके बाद प्रदीप ने खुद विवेक से बात की। 37 साल की खामोशी के बाद दो भाइयों की आवाजें एक-दूसरे तक पहुंचीं। भावुक होकर विवेक ने कहा, 'इस भावना को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। 37 लंबे साल बाद मैं आखिरकार घर लौट रहा हूं। मैंने घर के सभी लोगों से बात कर ली है। खुशी से भरा हुआ हूं। मैं चुनाव आयोग को धन्यवाद देता हूं, क्योंकि एसआईआर प्रक्रिया न होती तो यह मिलन कभी संभव नहीं होता।' इस तरह मतदाता सूची संशोधन अभियान ने न सिर्फ वोटर लिस्ट को दुरुस्त किया, बल्कि एक टूटे परिवार को फिर से जोड़ दिया।  

चंडीगढ़ प्रशासन पर प्रस्तावित विधेयक टला, सरकार ने सत्र से किया बाहर

नई दिल्ली  केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ की वैधानिक स्थिति बदलने के बारे में आ रही रिपोर्टों के बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बयान जारी किया है। इसमें कहा गया कि अभी चंडीगढ़ के लिए केंद्र की ओर से कानून बनाने की प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास विचाराधीन है। इस संबंध में संसद के शीतकालीन सत्र में विधेयक लाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। इन रिपोर्टों के कारण सियासी हलकों में गरगर्मी बढ़ी हुई थी। इसे देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि चंडीगढ़ के साथ पंजाब या हरियाणा के परंपरागत संबंधों को बदलने के बारे में कोई बातचीत नहीं चल रही है।   पोस्ट में कहा गया, 'चंडीगढ़ के लिए सिर्फ केंद्र सरकार की ओर से कानून बनाने की प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रस्ताव अभी केंद्र सरकार के स्तर पर विचाराधीन है। इस प्रस्ताव पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। इस प्रस्ताव में किसी भी तरह से चंडीगढ़ की शासन-प्रशासन की व्यवस्था या चंडीगढ़ के साथ पंजाब या हरियाणा के परंपरागत संबंधों को बदलने की कोई बात नहीं है। चंडीगढ़ के हितों को ध्यान में रखते हुए सभी हितधारकों से पर्याप्त विचार विमर्श के बाद ही उचित निर्णय लिया जाएगा। इस विषय पर चिंता की आवश्यकता नहीं है। आने वाले संसद के शीतकालीन सत्र में इस आशय का कोई विधेयक प्रस्तुत करने की केंद्र सरकार की कोई मंशा नहीं है।' पंजाब के सीएम मान की तीखी प्रतिक्रिया इससे पहले, मीडिया रिपोर्टों में कहा गया कि सरकार केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ की वैधानिक स्थिति बदलने की दिशा में काम कर रही है। इससे चंडीगढ़ के प्रशासक के रूप में पंजाब के राज्यपाल के अधिकार कम हो जाएंगे। यह कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार चंडीगढ़ में दिल्ली की तरह उपराज्यपाल का पद सृजित कर सकती है। इस पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि यह एक बड़ा अन्याय है। भाजपा सरकार पंजाब की राजधानी छीनने की साजिश कर रही है। उन्होंने कहा, ‘चंडीगढ़ पहले भी पंजाब का अभिन्न हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा। कोई भी व्यक्ति या संस्था इससे इनकार नहीं कर सकता कि मातृ राज्य होने के नाते पंजाब का अपनी राजधानी चंडीगढ़ पर पूरा अधिकार है।’  

महिला जजों की मौजूदगी में CJI गवई का खुला बयान— बताई वह कमी जो पूरी न हो सकी

नई दिल्ली  निवर्तमान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बीआर गवई अपने पद से रिटायर हो रहे हैं। इससे पहले उन्होंने अपने मन की बात करते हुए कहा कि उन्हें इस बात का मलाल रहेगा कि वह सुप्रीम कोर्ट में किसी महिला जज को नियुक्त नहीं कर सके। आपको बता दें कि गवई के कार्यकाल के दौरान सुप्रीम कोर्ट में पांच न्यायाधीशों को नियुक्त किया गया और वे सभी पुरुष थे।   सीजेआई गवई ने कहा, "मुझे इस बात का खेद है कि मैं सुप्रीम कोर्ट में किसी महिला जज को नहीं ला पाया, लेकिन हमने महिला जजों की सिफारिश की जिसमें सुप्रीम कोर्ट की वकील भी शामिल थीं।" उन्होंने जब इस बात का उल्लेख किया तो समारोह में न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना भी मौजूद थीं। वह भारत की पहली महिला चीफ जस्टिस बनेंगी। आपको बता दें कि यह विदाई समारोह 18 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट के लेडीज बार रूम में आयोजित किया गया था। समारोह में 17 न्यायाधीशों ने भाग लिया। वरिष्ठ अधिवक्ता महालक्ष्मी पावनी ने समारोह का आयोजन किया। उन्होंने सीजेआई गवई के नेतृत्व की विनम्रता, सुलभता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता के लिए सराहना की। अपने विदाई भाषण में सीजेआई गवई ने सभी को धन्यवाद दिया और कहा कि यह दिल्ली में उनका पहला विदाई समारोह था। उन्होंने अदालत में अनजाने में किसी को ठेस पहुंचाने के लिए माफी भी मांगी। इस अवसर पर उनकी विरासत संभालने वाले देश के अगले मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि सीजेआई गवई ने संस्था का नेतृत्व एक गतिशील तरीके से किया। सीजेआई बीआर गवई के कार्यकाल में सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किए गए पांच पुरुष न्यायाधीशों में न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया, न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई, न्यायमूर्ति ए.एस. चंदुरकर, न्यायमूर्ति आलोक अराधे और न्यायमूर्ति विपुल मनभाई पंचोली शामिल हैं।  

चौंकाने वाला खुलासा: सरकारी स्कूल के पास बरामद हुआ विस्फोटकों का बड़ा स्टॉक

अल्मोड़ा  उत्तराखंड के एक गांव में सरकारी स्कूल के पास भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद हुआ है। जिलेटिन नामक विस्फोटक पदार्थ की छड़ें मिलने से अल्मोड़ा जिले की पुलिस अलर्ट पर है। पुलिस ने बताया, उन्हें जिलेटिन की 161 छड़े मिली हैं, जिनका वजन 20 किलोग्राम से ज्यादा है। ये छड़े झाड़ियों में छिपी थीं, जो कि डबरा गांव में सरकारी हायर सेकेंड्री स्कूल के पास मिली हैं। ये सब उस समय हो रहा है, जब हरियाणा में कुछ दिनों पहले करीब 3000 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री मिली थी। जानकारी के मुताबिक, स्कूल के प्रिंसपल सुभाष सिंह की नजर झाड़ियों में रखी जिलेटिन की छड़ों पर पड़ी थीं। उन्होंने जैसे ही इतनी बड़ी मात्रा में रखीं छड़ों को देखा, तो शक हुआ और फिर पुलिस को सूचित किया। पुलिस तुरंत मौका स्थल पर पहुंची और इलाके को घेर लिया। जल्द से जल्द ऊधम सिंह नगर और नैनीताल जिले से बॉम स्क्वॉड और डॉग स्क्वॉड की टीम को बुलाया गया और इलाके की छानबीन शुरू कर दी गई। बम निरोधक दल को मिला भारी मात्रा में विस्फोटक एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, खोजबीन शुरू हुई तो जिलेटिन की छड़ों वाले पैकेट मिलने शुरू हो गए। कई छड़ें उसी झाड़ियों में मिली, जबकि कुछ उस जगह से 20 फीट दूर मिलीं। इसके बाद बम निरोधक दस्ते ने उन छड़ों को जब्त कर लिया और सील करके सुरक्षित जगह पर ले गए। SSP देवेंद्र पिंचा ने बताया- "डाबरा गांव में सरकारी स्कूल के पास से जिलेटिन की 161 छड़े बरामद की गई हैं। मौके पर पहुंची पुलिस, बम निरोधक दस्ते ने इलाके की पूरी तरह छानबीन की है।" क्या होती हैं जिलेटिन की छड़ें, कितनी घातक? आपको बताते चलें कि जिलेटिन की छड़ें विस्फोटक होती हैं। इसका इस्तेमाल खनन के दौरान या कंस्ट्रक्शन के दौरान पहाड़ी चट्टानों को तोड़ने के लिए किया जाता है। अभी तक इस बात का पता नहीं चला है कि इन छड़ों को यहां क्यों लाया गया था। जांच दल इसके पीछे की वजह को जानने में लगी हुई है। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट 1908 की धारा 4(a) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 288 के तहत केस दर्ज किया है। दिल्ली कार धमाके के बाद से सख्ती बढ़ी दिल्ली में लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट और विस्फोटक मटीरियल की भारी ज़ब्ती के बाद पूरे देश में सिक्योरिटी इंफ्रास्ट्रक्चर अलर्ट पर है। सूत्रों का कहना है कि कुछ टेरर मॉड्यूल बड़े शहरों में सीरियल ब्लास्ट की प्लानिंग कर रहे थे। इस कारण देश के अलग-अलग हिस्सों में भी तलाशी अभियान चलाए जा रहे हैं। छोटी सी भी संदिग्ध गतिविधि को पैनी नजरों से जांचा-परखा जा रहा है।  

भारतीय न्यायपालिका को विदेशी उदाहरणों की ज़रूरत क्यों? CJI-डिज़िग्नेट सूर्यकांत ने उठाया अहम सवाल

नई दिल्ली  भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने शनिवार को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्वदेशी न्यायशास्त्र को अपनाने की दिशा में बल दिए जाने को एक स्वाभाविक कदम बताया। उन्होंने कहा कि 75 वर्षों में न्यायालय ने जो मजबूत और आधिकारिक न्याय-निर्णय का संग्रह बनाया है, उसके बाद अब समय आ गया है कि सर्वोच्च न्यायालय अपनी स्वयं की न्यायिक विचारधारा को गहरा करे।   न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि भारतीय न्यायपालिका के लिए अपने स्वयं के दर्शन पर निर्भर रहना क्यों आवश्यक है। उन्होंने कहा, "सुप्रीम कोर्ट के हजारों ऐतिहासिक निर्णय देने के 75 वर्षों के बाद जब हमारे निर्णयों को अन्य विभिन्न क्षेत्राधिकारों द्वारा उद्धृत किया जा रहा है और जब हमने अपने दम पर न्यायिक ज्ञान का भंडार अर्जित कर लिया है। हमें अपने देश से संबंधित किसी भी मुद्दे पर राय बनाते समय दूसरे देशों के निर्णयों को क्यों देखना चाहिए?" उन्होंने जोर दिया कि भौगोलिक, स्थानीय, सामाजिक, और राजनीतिक परिदृश्य जैसे महत्वपूर्ण कारक अन्य देशों में भिन्न हो सकते हैं, इसलिए भारत को अपनी परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं का न्यायशास्त्र विकसित करने की आवश्यकता है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि CJI के रूप में उनकी तत्काल प्राथमिकताओं में लंबी अवधि से लंबित मामलों को निपटाना और संस्थागत सुधारों को आगे बढ़ाना शामिल है। उनकी प्राथमिकता विशेष रूप से सात और नौ न्यायाधीशों वाली संवैधानिक पीठों का गठन करना है, ताकि महत्वपूर्ण मामलों का शीघ्र निपटारा किया जा सके। उन्होंने लंबित मामलों की संख्या (90,000 तक) को स्वीकार किया लेकिन वह इसे लेकर आशावादी हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि हाल ही में न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता के साथ दिए गए उनके एक निर्णय में ऐसे निर्देश थे, जिससे अंततः 1,000 मामले निपटाए जा सकेंगे। उनका लक्ष्य लंबित मामलों को शून्य तक लाना नहीं है, लेकिन स्थिति को प्रबंधनीय बनाना है। उन्होंने कहा कि वह सर्वोच्च न्यायालय में सभी रिक्तियों को भरेंगे, हालांकि उन्होंने महिला प्रतिनिधित्व पर अभी विचार नहीं किया है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार का कर मामलों के प्रति व्यावहारिक दृष्टिकोण है और 5 करोड़ के लिए मुकदमेबाजी नहीं लड़ी जानी चाहिए। उन्होंने अंतिम राय बनाने के लिए एक ऐसे तंत्र के विकास की आवश्यकता पर बल दिया जिससे समय बर्बाद न हो। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने CJI कार्यालय से जुड़े दबावों और सोशल मीडिया की आलोचना पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि CJI के पद के लिए व्यक्ति को सोशल मीडिया की टिप्पणियों से अलग रहने की आवश्यकता होती है। उन्होंने जोर देकर कहा, "न्यायाधीश या CJI दबाव में नहीं आ सकते और नहीं आना चाहिए। मैं कभी दबाव में नहीं रहा। एकमात्र तरीका है कि सोशल मीडिया की टिप्पणियों को अनदेखा करें।"  

भारतीय रक्षा शक्ति में बड़ा इजाफा: 1000 किलो बम का सफल निर्माण, दुश्मन देशों में हड़कंप

नई दिल्ली सैन्य रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भारत ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारत ने 1000 किलो का बम बनाया है। भारत ने न सिर्फ ये बम बनाया है बल्कि इसका सफल परीक्षण भी कर लिया है। इस स्वदेशी बम को ‘गौरव’ नाम दिया गया है, जो लक्ष्य को दूर से ही सटीकता के साथ नष्ट करने में सक्षम है। DRDO ने Su-30MKI फाइटर जेट से ‘गौरव’ लॉन्ग रेंज ग्लाइड बम का सफल परीक्षण किया है। 1000 किलो वजनी यह देसी बम दुश्मन की वायु सुरक्षा सीमा के बाहर से सटीक हमला करेगा। DRDO ने इस हथियार को दो स्वरूपों में तैयार किया है। पहला वर्जन Gaurav-PCB है, जिसे मजबूत संरचनाओं और जमीनी बंकरों को भेदने के लिए तैयार किया गया है। यह पहाड़ी इलाकों में ऑपरेशन की स्थिति में उपयोगी साबित हो सकता है। दूसरा संस्करण Gaurav-PF है, जिसका उपयोग खुले ठिकानों, सैन्य तैनाती या रणनीतिक लक्ष्य पर एक साथ कई हिस्सों में नुकसान पहुंचाने के लिए किया जाएगा। ‘गौरव’ वह हथियार है, जो विमान को जोखिम में डाले बिना दुश्मन पर प्रहार कर सकता है। यह हवा से छोड़े जाने के बाद काफी दूरी तक ग्लाइड करता है और ठीक उसी स्थान पर जाकर वार करता है, जहां लक्ष्य मौजूद हो। ज्यादा दूरी से हमला करने की वजह से यह दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को चुनौती देता है। इसका भारी वजन और उच्च विनाश क्षमता इसे बंकर, किलेबंद ठिकानों और पहाड़ी ठिकानों पर बेहद कारगर बनाती है। Su-30MKI के साथ ‘गौरव’ का जुड़ना भारतीय वायुसेना का Su-30MKI पहले से ही कई एडवांस हथियारों से लैस है। इसके साथ Rudram मिसाइल, SAAW हथियार प्रणाली और BrahMos-A पहले से जुड़े हैं और अब ‘गौरव’ के जुड़ जाने से यह विमान लंबी दूरी से जमीन पर हमला करने में और भी सक्षम हो गया है। यह संयोजन वायु सेना को आधुनिक युद्ध के लिए ऐसी क्षमता देता है, जिसे दुनिया की बड़ी सेनाएं भी महत्व देती हैं। भारत क्यों तेजी से बना रहा है अपने इंजन और डिफेंस सिस्टम फाइटर जेट इंजन के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भरता लंबे समय से भारत की बड़ी चुनौती रही है। यही कारण है कि तेजस Mk2 और AMCA जैसे स्वदेशी लड़ाकू विमानों के प्रोजेक्ट में देरी हुई। अब सरकार और DRDO दोनों मिलकर अपने इंजन और हथियार प्रणाली को देश में ही विकसित करने पर जोर दे रहे हैं। बम, मिसाइल, रडार, एयर डिफेंस सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर तकनीक। ऐसे सभी क्षेत्रों में तेज प्रगति हो रही है ताकि आने वाले वर्षों में भारत पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सके।