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निकाय चुनाव से पहले BJP की धमाकेदार तैयारी, 100 पार्षद निर्विरोध और कई मंत्री संबंधी उम्मीदवार

मुंबई  महाराष्ट्र में 2 दिसंबर को होने वाले नगरपालिका और नगर पंचायत चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) को बड़ी चुनावी बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। पार्टी ने दावा किया है कि नामांकन वापसी की अंतिम तिथि पर 100 से अधिक पार्षद निर्विरोध चुने जा चुके हैं। राज्य BJP अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने शुक्रवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व का असर है कि इतने बड़े स्तर पर BJP उम्मीदवार बिना मतदान के ही जीत हासिल कर रहे हैं। शुक्रवार नाम वापसी का अंतिम दिन था। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही तीन नगरपालिका परिषदों में अध्यक्ष पद पर भी BJP उम्मीदवारों का निर्विरोध चुनाव हुआ है। रविंद्र चव्हाण ने इसे जनता के विकासोन्मुखी नीतियों पर विश्वास का प्रमाण बताया। इन निर्विरोध जीतों में से 49 उत्तरी महाराष्ट्र से, 41 पश्चिमी महाराष्ट्र से, चार कोकण क्षेत्र से, तथा मराठवाड़ा और विदर्भ से क्रमशः तीन-तीन पार्षद शामिल हैं। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, कुल 103 सीटें निर्विरोध जीती गईं, जिनमें 100 नगर सेवक और तीन नगर अध्यक्ष पद शामिल हैं। वंशवाद और दबाव के आरोपों से घिरी BJP बता दें कि 246 नगर परिषदों और 42 नगर पंचायतों के लिए मतदान 2 दिसंबर को होगा और परिणाम 3 दिसंबर को घोषित किए जाएंगे। लेकिन मतदान से पहले ही BJP की कई जीतों ने राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है। हालांकि, विपक्ष इन निर्विरोध जीतों को लेकर गंभीर आरोप लगा रहा है। उनका कहना है कि भाजपा नेताओं के रिश्तेदारों को जीत सुनिश्चित कराने के लिए विरोधी उम्मीदवारों पर दबाव डाला गया और प्रशासन का इस्तेमाल किया गया। उदाहरण के तौर पर, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के चचेरे भाई आल्हाद कलोटी चिखलदरा नगर पंचायत से पार्षद निर्विरोध चुने गए। कांग्रेस नेता यशोमती ठाकुर ने आरोप लगाया कि विपक्षी उम्मीदवारों को धमकाकर या लालच देकर हटाया गया। इसी तरह, जल संसाधन मंत्री गिरिश महाजन की पत्नी साधना महाजन को जामनेर नगर परिषद का अध्यक्ष पद निर्विरोध मिला, जहां नौ नामांकनों में से आठ वैध थे लेकिन बाकी सभी उम्मीदवारों ने वापसी कर ली। धुले जिले के डोंधिचा नगर पंचायत में मंत्री जयकुमार रावल की मां नयना कुंवर रावल 26 अन्य पार्षदों के साथ निर्विरोध चुनी गईं। विपक्षी उम्मीदवार शरयू भावसार का नामांकन खारिज होने के बाद वे बिना चुनाव मैदान के ही विजेता घोषित हुईं। भावसार ने आरोप लगाया कि मंत्री के दबाव में नामांकन रद्द किया गया। सोलापुर के अंगार नगर पंचायत में भाजपा के 17 उम्मीदवार सभी सीटें निर्विरोध जीतने वाले हैं। कई और नेता-परिवार भी चुनाव मैदान में या निर्विरोध विजेता सूत्रों के अनुसार BJP मंत्रियों और विधायकों- श्रम मंत्री आकाश फुंडकर, वस्त्र मंत्री संजय सवकारे, मंत्री अशोक उईके, पूर्व सांसद रामदास तडस, विधायक मंगेश चव्हाण और विधायक प्रकाश भरसकले के रिश्तेदार भी या तो चुनाव मैदान में हैं, या कई पहले ही निर्विरोध जीत चुके हैं। विपक्ष का तंज: BJP का वंशवाद ‘ग्राम पंचायत लेवल’ तक पहुंचा कांग्रेस, शरद पवार की NCP और शिवसेना (UBT) ने आरोप लगाया कि BJP की वंशवाद राजनीति अब पूरी तरह स्थानीय निकाय चुनावों तक पहुंच चुकी है। विपक्षी पार्टियों का दावा है कि पुलिस और प्रशासन पर असर डालकर विरोधियों को चुनाव से हटाया जा रहा है। महाराष्ट्र में स्थानीय चुनावों के लिए राजनीतिक तापमान अपने चरम पर है।

TMC विधायक ने किया ऐलान: 6 दिसंबर को बंगाल में बाबरी मस्जिद की नींव रखी जाएगी

मुर्शिदाबाद पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद के निर्माण की तैयारी चल रही है। इसे लेकर तृणमूल कांग्रेस के विधायक हुमायूं कबीर के बयान पर राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है। टीएमसी MLA ने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की नींव 6 दिसंबर को रखने की घोषणा की। यह तारीख उत्तर प्रदेश के अयोध्या की बाबरी मस्जिद के विध्वंस की वर्षगांठ है। भरतपुर से विधायक ने पिछले साल इस मस्जिद का प्रस्ताव रखा था। हुमायूं कबीर ने एएनआई से बातचीत में शनिवार को कहा, 'हम 6 दिसंबर को मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद की नींव रखेंगे। इसे पूरा होने में तीन साल लगेंगे। विभिन्न मुस्लिम नेता इस आयोजन में भाग लेंगे।' भारतीय जनता पार्टी ने इसे लेकर तीखा हमला बोला है। इसने सत्तारूढ़ टीएमसी पर धर्म आधारित राजनीति और तुष्टिकरण करने का आरोप लगाया। बीजेपी नेता अग्निमित्रा पॉल ने कहा, 'कोई भी मंदिर या मस्जिद बना सकता है, लेकिन टीएमसी धर्म के नाम पर राजनीति करती है। 6 दिसंबर की तारीख चुनने के पीछे उनकी मंशा स्पष्ट है। सवाल यह है कि टीएमसी ने अब तक अल्पसंख्यकों के लिए क्या किया है?' TMC पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप बीजेपी नेता प्रियंका टिबरेवाल ने कहा कि टीएमसी का सेक्युलरिज्म धर्म-विशेष को लेकर है। उन्होंने कहा, 'जब वे बाबरी मस्जिद को फिर से स्थापित करने की बात करते हैं, तो मैं जानना चाहती हूं कि वे उस बाबरी मस्जिद में किसे बुलाएंगे? क्या वे उन रोहिंग्या लोगों को, जो अब SIR के डर से सीमा क्षेत्रों की ओर भाग रहे हैं? यह कुछ और नहीं बल्कि तुष्टिकरण की राजनीति है।' 6 दिसंबर को एकजुटता दिवस रैली निकालेगी TMC इस बीच, तृणमूल कांग्रेस 6 दिसंबर को एकजुटता दिवस रैली निकालने वाली है। इसकी तैयारियों की जिम्मेदारी पार्टी की युवा और छात्र शाखाओं को सौंपी गई है। बाबरी मस्जिद विध्वंस के विरोध में आयोजित इस रैली का आयोजन आमतौर पर तृणमूल का अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ करता रहा है, लेकिन इस बार आयोजन की जिम्मेदारी पार्टी की अन्य शाखाओं को देकर अहम बदलाव किया गया है। इस साल की रैली मध्य कोलकाता के मेयो रोड स्थित महात्मा गांधी प्रतिमा के पास होगी, जहां पार्टी एक बड़ी जनसभा की योजना बना रही है। सूत्रों ने बताया कि नेतृत्व चाहता है कि बड़ी संख्या में लोग जुटें क्योंकि यह कार्यक्रम ऐसे समय हो रहा है जब एसआईआर ने पूरे राज्य में राजनीतिक तनाव पैदा कर दिया है।

सीमा सुरक्षा बल की बड़ी कार्रवाई, 4.79 करोड़ की ड्रग्स के साथ चार तस्कर पकड़े गए

आइजोल  सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने मादक पदार्थों और अवैध हथियार नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई करते हुए उत्तर-पूर्व में एक बड़ी सफलता हासिल की। खुफिया सूचना के आधार पर बीएसएफ आइजोल और एक्साइज व नारकोटिक्स मिजोरम की संयुक्त टीम ने शनिवार को पश्चिम आइजोल क्षेत्र में ड्रग्स की बड़ी खेप बरामद करते हुए चार ड्रग पेडलरों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गए ड्रग पेडलरों में दो म्यांमार के नागरिक भी शामिल हैं। इस कार्रवाई के दौरान 5.89 किलोग्राम मेथामफेटामाइन और 41 ग्राम हेरोइन जब्त की गई, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 4.79 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है। बीएसएफ मिजोरम और कछार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस कार्रवाई की जानकारी दी। बीएसएफ मिजोरम और कछार ने एक्स पोस्ट में लिखा, "22 नवंबर 2025 को बीएसएफ इनपुट पर कार्रवाई करते हुए, बीएसएफ आइजोल और एक्साइज एंड नारकोटिक्स मिजोरम की एक जॉइंट टीम ने वेस्ट आइजोल में 4.79 करोड़ रुपए से ज्यादा कीमत का 5.89 किलो मेथामफेटामाइन और 41 ग्राम हेरोइन जब्त किया। म्यांमार के दो नागरिकों समेत चार ड्रग पेडलर पकड़े गए।" इससे पहले एक अन्य कार्रवाई में 20 नवंबर को बीएसएफ मणिपुर, महार रेजिमेंट और मणिपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने कांगपोकपी जिले में तलाशी अभियान चलाकर बड़ी मात्रा में हथियार और विभिन्न प्रकार के गोला-बारूद जब्त किए। यह ऑपरेशन उस चल रहे अभियान का हिस्सा था जिसका लक्ष्य राज्य में शांति और स्थिरता बहाल करना है। बीएसएप की मानें तो, "20 नवंबर 2025 को बीएसएफ मणिपुर, महार रेजिमेंट और मणिपुर पुलिस की एक जॉइंट टीम ने मणिपुर के कांगपोकपी जिले में एक सर्च ऑपरेशन किया और इलाके में शांति और अमन-चैन बहाल करने की चल रही कोशिशों के तहत हथियारों और अलग-अलग तरह के गोला-बारूद का एक बड़ा जखीरा जब्त किया।" वहीं, 19 नवंबर को बीएसएफ आइजोल और एक्साइज एंड नारकोटिक्स मिजोरम की जॉइंट टीम ने एनएच-6 पर दो संदिग्धों के पास से 25 करोड़ ररुपए से ज्ययादा कीमत का 14.905 किलो मेथामफेटामाइन और 707 ग्राम हेरोइन जब्त की थी। इस कार्रवाई के दौरान दो ड्रग पेडलर को भी गिरफ्तारर कर लिया गया था।

मणिपुर में मोहन भागवत का बयान: ‘हिंदू नहीं रहेगा तो दुनिया नहीं रहेगी’, भारत की सभ्यता की मजबूती पर जोर

 इम्फाल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत मणिपुर के दौरे पर हैं. शुक्रवार को उन्होंने अपने संबोधन में सभ्यता, समाज और राष्ट्र की शक्ति का जिक्र किया. इस दौरान मोहन भागवत ने कहा कि हमने समाज का एक बेसिक नेटवर्क बनाया है, उसके चलते हिंदू समाज रहेगा. 'अगर हिंदू नहीं रहेगा तो दुनिया नहीं रहेगी.' भागवत ने कहा, 'परिस्थिति का विचार तो सबको करना पड़ता है. परिस्थिति आती है और जाती है. दुनिया में सब देशों पर तरह-तरह की परिस्थिति आई, गई. कुछ देश उसमें समाप्त हो गए. यूनान, मिस्र और रोमां सब मिट गए यहां से, कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी.' 'हिंदू नहीं रहेगा तो दुनिया नहीं रहेगी' उन्होंने कहा, 'भारत एक अमर समाज, अमर सिविलाइजेशन का नाम है. बाकी सब आए, चमके और चले गए. लेकिन इन सबका उदय और अस्त हमने ही देखा. हम अभी भी हैं और रहेंगे क्योंकि हमने अपने समाज का एक बेसिक नेटवर्क बनाया है. उसके चलते हिंदू समाज रहेगा. हिंदू नहीं रहेगा तो दुनिया नहीं रहेगी. क्योंकि धर्म का सही अर्थ और मार्गदर्शन दुनिया को समय-समय पर हिंदू समाज ही देता है. यह हमारा ईश्वर प्रदत्त कर्तव्य है.' 'भारत में अस्त हुआ ब्रिटिश साम्राज्य का सूर्य'   भागवत ने कहा कि हर समस्या का अंत संभव है. उन्होंने नक्सलवाद का उदाहरण देते हुए कहा कि जब समाज ने तय किया कि अब यह बर्दाश्त नहीं होगा, तब यह खत्म हो गया. उन्होंने कहा, 'ब्रिटिश साम्राज्य का सूर्य अस्त नहीं होता था. लेकिन भारत में उनके सूर्यास्त की शुरुआत हुई. इसके लिए हमने 90 साल प्रयास किए. 1857 से 1947, उस लंबे समय तक स्वतंत्रता के लिए हम सब लोग लड़ते रहे. वह आवाज कभी हमने दबने नहीं दी. कभी कम हो गई, कभी बढ़ गई, लेकिन दबने कभी नहीं दी.' 'हमारी अर्थव्यवस्था आत्मनिर्भर होनी चाहिए' उन्होंने आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था पर जोर देते हुए कहा कि देश को ऐसा होना चाहिए कि वह किसी पर निर्भर न रहे. भागवत ने कहा, 'हमारी अर्थव्यवस्था पूरी तरह आत्मनिर्भर होनी चाहिए. हम किसी पर डिपेंडेंट नहीं होने चाहिए. हमारे पास इकोनॉमिक एबिलिटी, मिलिट्री एबिलिटी और नॉलेज एबिलिटी होनी चाहिए. यह बढ़नी चाहिए. हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि देश सुरक्षित रहे, समृद्ध रहे और कोई भी नागरिक दुखी, दरिद्र या बेरोजगार न हो. सब लोग देश के लिए काम करें और आनंद से जीवन जिएं.'

चार नए लेबर कोड लागू, श्रमिकों को मिली ग्रेच्युटी, फ्री हेल्थ चेकअप और अन्य लाभ

नई दिल्ली:  देश में नए श्रम कानून (Labour laws) लागू हो गए. इसे लेबर सिस्टम में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव बताया जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने चार नई श्रम संहिताओं को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया है. सरकार का दावा है कि ये सिर्फ कानूनी अपडेट नहीं, बल्कि भारत के 40 करोड़ से ज्यादा कामगारों के जीवन में एक ऐतिहासिक क्रांति है. नई श्रम संहिताएं सबसे पहले हर वर्कर को टाइम पर मिनिमम वेतन की गारंटी देती हैं. अब देरी, मनमानी और शोषण की गुंजाइश खत्म होगी. युवाओं के लिए जॉब में नियुक्ति पत्र अनिवार्य कर दिया गया है ताकि नौकरी शुरू होते ही उनका अधिकार पक्का हो. महिलाओं के लिए Equal Pay का साफ नियम लागू होगा, जिससे कार्यस्थलों पर जेंडर बेस्ड भेदभाव पर लगाम लगेगी. सोशल सिक्योरिटी के दायरे में 40 करोड़ वर्कर्स आने से देश की कार्यशक्ति पहली बार इस पैमाने पर सुरक्षित होगी. फिक्स टर्म एम्प्लॉईस को सिर्फ एक साल की नौकरी के बाद ग्रेच्युटी का हक दिया गया है. यह बदलाव उन लाखों वर्कर्स के लिए राहत है जो कॉन्ट्रैक्ट पर काम करते हैं और स्थायी कर्मचारियों जैसी सुरक्षा नहीं पाते. 40 साल से ऊपर के हर वर्कर का सालाना फ्री हेल्थ चेक-अप अनिवार्य किया गया है. इसे सरकार वर्कफोर्स की दीर्घकालिक सेहत में निवेश मान रही है. ओवरटाइम करने वालों के लिए अब डबल वेतन का प्रावधान है, जिससे शोषण की आशंका खत्म होगी और अतिरिक्त मेहनत का सही मूल्य मिलेगा. New Labour Code 2025 : नई श्रम संहिताओं की खास बातें     सभी वर्कर्स को टाइम पर मिनिमम वेतन की गारंटी अब किसी भी कंपनी या नियोक्ता के लिए वेतन रोकना या देरी करना आसान नहीं रहेगा.     हर युवा को नियुक्ति पत्र अनिवार्य अब जॉइन करते ही Appointment Letter मिलेगा. जॉब सिक्योरिटी और क्लियर टर्म्स दोनों सुनिश्चित.     महिलाओं को Equal Pay और समान सम्मान जेंडर के आधार पर वेतन असमानता खत्म. सभी पदों पर बराबरी का अधिकार.     40 करोड़ कामगारों को सोशल सिक्योरिटी कवरेज देश की आधी से ज्यादा वर्कफोर्स पहली बार इतने बड़े सुरक्षा दायरे में.     फिक्स टर्म एम्प्लॉई को सिर्फ 1 साल बाद ग्रेच्युटी अब कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स भी 

भारतीय सेना ने खरीदा BvS10 सिंधु ऑल-टेरेन व्हीकल, L&T–BAE के साथ हुआ समझौता

 नई दिल्ली भारतीय सेना ने लंबे इंतजार के बाद एक बड़ा कदम उठाया है. सेना ने लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड (L&T) और BAE सिस्टम्स के साथ BvS10 सिंधु नाम के ऑल-टेरेन व्हीकल (AATV) की खरीद के लिए समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. यह अनुबंध 19 नवंबर 2025 को हुआ है. L&T कंपनी BAE सिस्टम्स के साथ मिलकर इनका निर्माण करेगी. यह वाहन विशेष रूप से भारत की जरूरतों के लिए तैयार किया गया है. इसे हिमालय जैसे ऊंचे इलाकों, रेगिस्तान, दलदली जमीन और पानी में चलाने के लिए डिजाइन किया गया है. BvS10 सिंधु BAE सिस्टम्स के मूल BvS10 प्लेटफॉर्म का अपग्रेडेड वर्जन है, जिसे भारत के लिए अनुकूलित किया गया है. अनुबंध की मुख्य बातें L&T कंपनी गुजरात के हजीरा में स्थित अपने आर्मर्ड सिस्टम्स कॉम्प्लेक्स में इन वाहनों का निर्माण करेगी. BAE सिस्टम्स हैग्लुंड्स (स्वीडन) कंपनी तकनीकी और डिजाइन सहायता देगी, जो मूल BvS10 की निर्माता है. यह एशिया में BvS10 का पहला बड़ा ऑर्डर है. अनुबंध में कितने वाहनों की संख्या और कीमत का खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन यह भारतीय सेना की क्षमता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है. BvS10 सिंधु वाहन की विशेषताएं BvS10 सिंधु एक आर्टिकुलेटेड (दो हिस्सों वाला) ऑल-टेरेन बख्तरबंद वाहन है, जो जमीन, पानी और बर्फ पर चल सकता है. यहां इसकी मुख्य स्पेसिफिकेशन हैं…     इंजन: 5.9 लीटर इन-लाइन सिक्स-सिलेंडर टर्बो डीजल इंजन (कमिंस कंपनी का), जो 250-285 हॉर्सपावर पैदा करता है.     स्पीड: जमीन पर 65 किमी/घंटा तक, पानी में 5 किमी/घंटा.     वजन: करीब 10,500 किलोग्राम (लड़ाई के लिए तैयार).     पेलोड क्षमता: 5-8 टन तक सामान या हथियार ले जा सकता है.     क्षमता: 14 सैनिकों तक बैठा सकता है.     आकार: लंबाई 8 मीटर, चौड़ाई 2.2 मीटर, ऊंचाई 2.5 मीटर.     क्षमताएं: 45 डिग्री की चढ़ाई चढ़ सकता है. 2 मीटर की खाई पार कर सकता है. बर्फ और दलदल में आसानी से चलता है. यह एम्फीबियस है यानी पानी में तैर सकता है. यह वाहन ठंडे मौसम और कठिन इलाकों के लिए बनाया गया है, जो लद्दाख और हिमालय जैसे क्षेत्रों में भारतीय सेना के लिए बहुत उपयोगी होगा. क्यों जरूरी है यह अनुबंध? भारतीय सेना को ऊंचे पहाड़ी इलाकों में सैनिकों और सामान को ले जाने के लिए मजबूत वाहनों की जरूरत है. BvS10 सिंधु जैसे वाहन दुश्मन के हमलों से बचाते हैं. तेजी से मूवमेंट करने में मदद करते हैं. यह मेक इन इंडिया कार्यक्रम का हिस्सा है, क्योंकि वाहन भारत में ही बनेंगे. इससे रोजगार बढ़ेगा और देश की रक्षा क्षमता मजबूत होगी. L&T पहले भी K9 वज्र-टी जैसे हथियार बना चुकी है, जो हजीरा में ही बनते हैं. BAE सिस्टम्स दुनिया की बड़ी रक्षा कंपनी है, जो कई देशों को ऐसे वाहन सप्लाई करती है. यह अनुबंध भारतीय सेना को और मजबूत बनाएगा. सीमा पर चुनौतियों से निपटने में मदद करेगा.

रूस-यूक्रेन युद्ध में ट्रंप की एंट्री: 28 पॉइंट प्लान पेश, जेलेंस्की ने दी पहली प्रतिक्रिया

नई दिल्ली  रूस और यूक्रेन के बीच काफी लंबे समय से संघर्ष जारी है, जो खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में हमास और इजरायल के बीच शांति समझौता करा दिया। अब उनकी कोशिशें रूस और यूक्रेन के लिए शुरू हो गई हैं। ट्रंप ने रूस के साथ मिलकर यूक्रेन में युद्ध खत्म करने के लिए 28 प्वाइंट्स में ड्राफ्ट तैयार किया है। गाजा के लिए ट्रंप ने 20 सूत्रीय प्लान तैयार किया था। वहीं, यूक्रेन के लिए 28 सूत्रीय पीस प्लान तैयार किया गया है। ट्रंप के इस 28 सूत्रीय पीस प्लान पर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की की प्रतिक्रिया भी आ गई है। एक तरफ यूक्रेन के अधिकारियों ने ट्रंप के इस ड्राफ्ट को बेतुका, अस्वीकार्य और अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला बताया है। वहीं, जेलेंस्की ने भी कहा कि वह रूस के साथ जंग खत्म करने के लिए अमेरिका के 'विजन' पर उनके साथ काम करने को तैयार हैं। प्लान के अनुसार कीव पूर्वी यूक्रेन के डोनेट्स्क इलाके के उन बड़े इलाकों को छोड़ देगा, जिन पर अभी भी उसका कंट्रोल है। इसके अलावा, वह अपने सैनिकों की संख्या कम करेगा। इसके अलावा, इस प्लान में जो सबसे अहम बात कही गई, वो यह है कि यूक्रेन नाटो में शामिल न होने का वादा करेगा। हालांकि, इसके लिए जेलेंस्की पहले ही मना कर चुके हैं। ऐसे में अब देखना है कि क्या ट्रंप के इस 28 सूत्रीय समझौते को यूक्रेन मानता है या नहीं। पीस प्लान के अनुसार यूक्रेन के क्रीमिया, लुहांस्क और डोनेट्स्क इलाकों को असल में रूस का हिस्सा माना जाएगा। इसमें अपनी मिलिट्री की संख्या को लिमिट करने और समय के साथ मॉस्को पर लगे बैन हटाने का भी प्रस्ताव है। यूक्रेन को 100 दिनों में चुनाव कराने होंगे और नाटो मेंबरशिप की कोई भी उम्मीद छोड़नी होगी। यूक्रेन को अमेरिका की सिक्योरिटी गारंटी मिलेगी। हालांकि, इसके लिए वॉशिंगटन को पैसे देने होंगे। अमेरिका को यूक्रेन को फिर से बनाने और वहां इन्वेस्ट करने के लिए मुनाफे का 50 फीसदी भी मिलेगा और बैन हटने के बाद रूस के साथ इकोनॉमिक पार्टनरशिप भी करेगा। जेलेंस्की के ऑफिस ने एक बयान में कहा कि यूक्रेन को ऑफिशियली वॉशिंगटन से एक ड्राफ्ट प्लान मिला है, जिसके बारे में अमेरिका की तरफ से माना जा रहा है कि इससे डिप्लोमेसी को फिर से मजबूत करने में मदद मिल सकती है। अमेरिका और रूस के दूतों का बनाया 28 पॉइंट का पीस प्लान गाजा सीजफायर पर आधारित है। इसका मकसद यूक्रेन पर रूस के बड़े पैमाने पर हमले को खत्म करना है। पीस प्लान में क्रेमलिन की जानी-मानी रियायतों की मांगों को बताया गया है, जिससे कीव ने बार-बार इनकार किया है। इन्हीं मांगों की वजह से दोनों देशों के बीच अब तक जंग जारी है।

COP30 ब्राजील: पवेलियन में आग लगने से मचा हड़कंप, घटना स्थल पर मौजूद थे UN चीफ और भूपेंद्र यादव

बेलेम ब्राजील के बेलेम शहर में चल रहे 30वें यूएन क्लाइमेट चेंज कॉन्फ्रेंस (सीओपी30) के एक पवेलियन में आग लग गई। इस घटना के बाद फायर डिपार्टमेंट ने लोगों को वहां से बचाकर निकाला। कार्यक्रम के आयोजक ने बताया कि यह घटना ब्लू जोन में हुई। ब्लू जोन वो इलाका है, जहां इंटरनेशनल स्टैंड और ऑफिशियल बातचीत के लिए बनाए गए कमरे हैं। हालांकि, तसल्ली की बात यह है कि जैसे ही आग लगने की खबर फैली, लोगों को सुरक्षित तरीके से एग्जिट गेट से बाहर निकाल लिया गया। आग की इस घटना में कम से कम 21 लोग घायल हो गए। वहीं कार्यक्रम में मौजूद हजारों लोगों के बीच अफरातफरी का माहौल बन गया। लोग अपनी सुरक्षा के लिए इधर-उधर भागने लगे। न्यूज एजेंसी ने बताया कि ब्राजील के टूरिज्म मंत्री सेल्सो सबिनो ने कहा कि आग स्थानीय समयानुसार दोपहर 2 बजे के लगभग में लगी थी और दोपहर करीब 2:30 बजे तक उसपर काबू पा लिया गया था। अब तक किसी के घायल होने की खबर नहीं है। बेलेम के पारा के गवर्नर हेल्डर बारबाल्हो ने स्थानीय मीडिया को बताया कि इमरजेंसी टीमें अभी घटना के दो संभावित कारणों की जांच कर रही हैं, एक कारण जनरेटर फेल होना हो सकता है, या फिर दूसरा कारण कॉन्फ्रेंस के लिए बनाए गए स्टैंड में से किसी एक में शॉर्ट सर्किट हो सकता है। बता दें, जब आग लगने की यह घटना घटी, उस समय यूएन सेक्रेटरी-जनरल एंटोनियो गुटेरेस वेन्यू पर मौजूद थे और उन्हें यूनाइटेड नेशंस डिपार्टमेंट ऑफ सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ने तुरंत बाहर निकाल लिया। यूएन सीओपी30 ऑर्गनाइजिंग कमिटी ने कहा कि सभी घायलों का धुएं में सांस लेने की वजह से मौके पर ही इलाज किया गया और उनकी हालत पर नजर रखी जा रही है। इसके अलावा भारत के पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और भारतीय डेलीगेशन भी आग लगने के समय ब्लू जोन के अंदर थे। हालांकि, सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। बता दें, भारत के केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव भी ब्राजील के बेलेम में संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (यूएनएफसीसीसी) के तहत 30वें कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (सीओपी30) में शामिल होने पहुंचे हुए हैं। इस दौरान केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने जापान के पर्यावरण मंत्री हिरोताका इशिहारा से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने जॉइंट क्रेडिटिंग मैकेनिज्म (जेसीएम) को असरदार तरीके से लागू करने के साथ ही भारत-जापान सहयोग के दूसरे खास एरिया पर चर्चा की। भूपेंद्र यादव ने सीओपी 30 के दौरान जापानी पर्यावरण मंत्रालय द्वारा आयोजित 11वीं जेसीएम पार्टनर देशों की मीटिंग में भी हिस्सा लिया।

कृषि क्षेत्र में आएगा बड़ा बदलाव, किसानों को समृद्ध बनाएगा AI: नितिन गडकरी का बयान

नागपुर  केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) किसानों को समृद्ध बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है और इससे उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है। नागपुर में आयोजित हुए एग्रोविजन 2025 में बोलते हुए गडकरी ने कहा कि आज के समय पर खेती में तेजी से एआई का उपयोग हो रहा है। इससे पहले पता चल जाता है कि फसल में कौन-से कीड़े लगने वाले हैं, कौन-सी बीमारी लग सकती है, मिट्टी को कौन-सी खाद की आवश्यकता है, कितने पानी की जरूरत है और इससे उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है। उन्होंने आगे कहा कि हमने हाल ही संतरे का एक सेमिनार रखा था, जिसमें देश-विदेश की तकनीक बताई गई। उसमें 250 रुपए का प्रवेश शुल्क रखा गया था और इसमें 650 से ज्यादा किसान आए थे। इससे क्षेत्र में संतरा उत्पादकता में बड़ा लाभ हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि 16 वर्षों से यह कृषि प्रदर्शनी हो रही है। इससे हजारों किसानों को लाभ हो रहा है। पहले विदर्भ किसान आत्महत्याओं का क्षेत्र बन गया था। किसानों को इस संकट से बाहर निकालने के लिए प्रदर्शनी को शुरू किया गया था। उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए और उन्हें सक्षम बनाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक और कृषि विकास की दिशा में काम करना जरूरी था। मीडिया से बातचीत करते हुए कि एआई से किसानों को बड़े स्तर पर फायदा होगा। इससे कौन-सी बीमारी लग सकती है। इसका पहले ही पता लग जाएगा। कौन-से एनपीके की जरूरत इसका भी अनुमान लगा जा सकती है और वहीं, कितना पानी देना है। इसकी भी जानकारी मिल सकती है। उन्होंने आगे कहा कि कृषि से जुड़े उपकरणों में तेजी से बदलाव हो रहा है। अब सीएनजी और इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर का चलन तेजी से बढ़ रहा है। भारत का खाद्यान्न उत्पादन बीते 10 वर्षों में 106 मिलियन टन बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 357.73 मिलियन टन हो गया है, जो कि वित्त वर्ष 2015-16 में 251.54 मिलियन टन था। सरकार के मुताबिक, चावल उत्पादन बढ़कर 1,501.84 लाख टन हो गया है, जो कि पिछले साल के उत्पादन 1,378.25 लाख टन से 123.59 लाख टन अधिक है। गेहूं का उत्पादन भी बढ़कर 1,179.45 लाख टन हो गया है, जो कि पिछले साल के उत्पादन 1,132.92 लाख टन से 46.53 लाख टन अधिक है। मूंग का उत्पादन बढ़कर 42.44 लाख टन, सोयाबीन का 152.68 लाख टन और मूंगफली का 119.42 लाख टन हो गया है।

कर्मचारियों को तोहफ़ा: अब रोटी-कपड़ा-मकान के साथ डिजिटल खर्च भी होगा न्यूनतम वेतन में शामिल

नई दिल्ली  सरकारी कर्मचारियों की सैलरी का आधार अब बदल सकता है। 8वें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारी यूनियनों ने एक अहम मांग रखी है। न्यूनतम वेतन तय करते समय मोबाइल रिचार्ज, इंटरनेट डेटा और वाई-फाई जैसे डिजिटल खर्च अपनी गणना में शामिल किए जाएं। उनका कहना है कि आज के समय में डिजिटल सेवाएं जरूरत बन चुकी हैं और इन्हें अनदेखा नहीं किया जा सकता। यूनियनों की दलील रोटी, कपड़ा, मकान काफी नहीं डिजिटल खर्च भी जरूरी कर्मचारी संगठनों ने आयोग को भेजे सुझाव में कहा कि आज सरकारी दफ्तरों से लेकर घर के काम तक सब मोबाइल और इंटरनेट पर निर्भर हैं। सरकारी ऐप्स, ऑनलाइन फॉर्म, डिजिटल पेमेंट, ई-ऑफिस इन सबके लिए डेटा और फोन अनिवार्य हो चुके हैं। अब तक न्यूनतम वेतन की गणना में सिर्फ ये चीजें शामिल होती थीं: भोजन  कपड़े मकान बिजली-पानी बच्चों की शिक्षा साधारण मनोरंजन लेकिन यूनियनों का दावा है डिजिटल भारत के दौर में मोबाइल, डेटा पैक और इंटरनेट भी बुनियादी जरूरतों की लिस्ट में शामिल होना चाहिए। नया प्रस्ताव परिवार की पूरी जरूरत के आधार पर सैलरी तय हो राष्ट्रीय परिषद–जेसीएम (स्टाफ साइड) ने सुझाव दिया है कि न्यूनतम वेतन तय करते समय यह देखा जाए कि: एक वयस्क को रोज कितनी कैलोरी की जरूरत होती है पति-पत्नी और दो बच्चों के परिवार के खर्च पूरे हों कपड़ों, जूतों-चप्पलों और त्योहार/सामाजिक अवसरों पर होने वाले खर्च का भी हिसाब जोड़ा जाए  सबसे ज़रूरी मोबाइल बिल, इंटरनेट सब्सक्रिप्शन, डेटा पैक और ओटीटी जैसी डिजिटल सेवाओं को भी लागत में शामिल किया जाए उनका कहना है कि यह आज की वास्तविक जीवन लागत का हिस्सा है, इसलिए इसे नज़रअंदाज़ करना गलत होगा। 7वें वेतन आयोग से क्या है फर्क? 7वें वेतन आयोग में न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये तय किया गया था। यह 1957 के पुराने भारतीय श्रम सम्मेलन के फॉर्मूले पर आधारित था, जिसमें डिजिटल खर्चों का कोई उल्लेख नहीं था। उस समय मोबाइल और इंटरनेट आम जरूरत नहीं थे। लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है— ऑनलाइन क्लासेज़ डिजिटल पेमेंट सरकारी ऐप स्मार्टफोन पर आधारित दफ्तर का काम इन सबने मोबाइल और इंटरनेट को दैनिक जरूरत बना दिया है। यूनियन का कहना है कि अगर इन खर्चों को शामिल किया गया तो न्यूनतम सैलरी में बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है। 8वें वेतन आयोग से बढ़ सकती है सैलरी? जानकारों के मुताबिक, डिजिटल खर्च जुड़ने पर न्यूनतम वेतन में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी संभव है। फिटमेंट फैक्टर भी बढ़ सकता है, जिससे बेसिक और कुल सैलरी दोनों पर असर पड़ेगा।  8वां वेतन आयोग बना चुकी है। यह अपनी विस्तृत रिपोर्ट 2026–27 तक पेश करेगा। कर्मचारी उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार आयोग आधुनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नई गणना प्रणाली बनाएगा।