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यूके में बड़ा बदलाव: परमानेंट रेज़िडेंस के नियम हुए सख्त, 20 साल का इंतज़ार अनिवार्य

 ब्रिटेन सरकार ने देश में शरणार्थियों के लिए सबसे बड़े स्तर पर नीति बदलाव की घोषणा की है। इसके तहत अब शरणार्थियों की स्थिति स्थायी नहीं बल्कि अस्थायी होगी और स्थायी बसावट  के लिए इंतजार का समय पांच साल से बढ़ाकर 20 साल कर दिया जाएगा। यह कदम आधुनिक समय में देश की शरणार्थी नीतियों में सबसे व्यापक सुधार माना जा रहा है। सरकार का मकसद और प्रेरणा लेबर पार्टी की सरकार ने यह कदम अवैध छोटे नावों से फ्रांस से आने वाले प्रवासियों पर कड़े नियंत्रण के लिए उठाया है। इसका उद्देश्य मुख्य रूप से लोकप्रियता बढ़ाने वाले Reform UK पार्टी के प्रभाव को सीमित करना है, जिसने पिछले समय में प्रवास नीति को राष्ट्रीय एजेंडे का केंद्र बना दिया था। सरकार ने कहा कि इस नीति में डेनमार्क मॉडल से प्रेरणा ली गई है, जो यूरोप में सबसे सख्त प्रवास नीतियों वाला देश माना जाता है। वहां बढ़ती एंटी-इमिग्रेंट भावना के चलते कई देशों ने अपने नियमों को और कड़ा कर दिया है, हालांकि इस कदम की मानवाधिकार समूहों द्वारा आलोचना भी की गई है।     अब शरणार्थियों को मिलने वाला कर-आधारित समर्थन जैसे आवास और साप्ताहिक भत्ते केवल उन्हीं को मिलेगा जो काम कर रहे हैं या स्थानीय समुदायों और अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं।     जिन शरणार्थियों के पास काम करने की क्षमता है लेकिन वे काम नहीं करना चाहते, या जो कानून तोड़ते हैं, उन्हें अब ये समर्थन नहीं मिलेगा। शरणार्थी की सुरक्षा की स्थिति नियमित समीक्षा के तहत अस्थायी होगी और यदि मूल देश को सुरक्षित माना गया, तो यह रद्द भी की जा सकती है।     वर्तमान में यूरोप के अन्य देशों की तुलना में ब्रिटेन की प्रणाली काफी उदार मानी जाती है, जहां पांच साल बाद शरणार्थी स्वतः स्थायी निवास प्राप्त कर लेते हैं। अब इसे बदल दिया जाएगा। समीक्षा और स्थायी बसावट का नया समय होम सेक्रेटरी शबाना महमूद ने कहा कि अब शरणार्थियों की स्थिति हर दो साल छह महीने में समीक्षा की जाएगी। स्थायी बसावट की प्रक्रिया को लंबा कर 20 साल कर दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि सोमवार को इस नीति के और विवरण साझा किए जाएंगे, जिसमें यूरोपीय मानवाधिकार संधि के अनुच्छेद 5 से संबंधित अपडेट भी शामिल होंगे। सरकार का संदेश शबाना महमूद ने कहा, “हमारा उद्देश्य उन लोगों को प्राथमिकता देना है जो हमारे समाज और अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं। अब शरणार्थियों के लिए हमारा दृष्टिकोण समान अवसर, लेकिन जिम्मेदारी के साथ होगा।”

एयर इंडिया की चीन वापसी, 6 साल बाद उड़ान भरेगी मैत्री का संदेश

नईदिल्ली  भारत और चीन के बीच सीधी उड़ान शुरू होने जा रही है. देश की दिग्गज एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया (Air India) ने सोमवार को कहा कि वो लगभग छह साल बाद फरवरी 2026 से नई दिल्ली से चीन के लिए उड़ानें फिर से शुरू करेगी और अगले साल के अंत में मुंबई-शंघाई मार्ग शुरू करने की योजना बना रही है. एयर इंडिया ने शंघाई के लिए अपनी फ्लाइट की जानकारी साझा करते हुए बताया कि सभी आवश्यक मंजूरी के मिल जाने के बाद 1 फरवरी 2026 से इनकी शुरुआत की जाएगी.  48वां अंतर्राष्ट्रीय डेस्टिनेशन शंघाई, एयर इंडिया ग्रुप द्वारा सेवा प्रदान करने वाला 48वा अंतर्राष्ट्रीय डेस्टिनेशन है. ये भारत में किसी भी अन्य एयरलाइन की तुलना में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक यात्रियों को ट्रेवल करने की सर्विस देता है. एयर इंडिया अपने ट्विन-aisle​बोइंग 787-8 विमान का इस्तेमाल करके दिल्ली और शंघाई के बीच सप्ताह में चार बार उड़ान भरेगी, जिसमें बिजनेस क्लास में 18 फ्लैट बेड और इकोनॉमी क्लास में 238 सीटें हैं.  आर्थिक महाशक्तियों के बीच एक सेतु' एयर इंडिया के CEO और MD कैंपबेल विल्सन ने कहा कि हमारी दिल्ली-शंघाई सेवाओं की बहाली एक रूट लॉन्च से कहीं अधिक है. ये दो महान, प्राचीन सभ्यताओं और आधुनिक आर्थिक महाशक्तियों के बीच एक सेतु है. एयर इंडिया में हमें दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण हवाई गलियारों में से एक को फिर से जोड़ने पर खुशी है. 

किन देशों में महिलाओं की आबादी पुरुषों से अधिक? जानें आंकड़ों के साथ

नई दिल्ली वर्षों से वैश्विक लैंगिक विमर्श शिक्षा, रोजगार और राजनीति में समानता पर केंद्रित रहा है। लेकिन इसी दौरान एक और महत्वपूर्ण बदलाव धीरे-धीरे आकार ले रहा है। जनसंख्या में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ रही है। कई देशों में अब पुरुषों की तुलना में महिलाएं अधिक हैं। यह बदलाव अचानक नहीं आया, बल्कि आबादी के बूढ़े होने, प्रवासन और जीवनशैली में बदलाव के चलते धीरे-धीरे विकसित हुआ है। संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक मामलों विभाग (UN DESA) और विश्व बैंक के 2024 के जनसंख्या आंकड़ों के अनुसार, पूर्वी यूरोप, एशिया के कुछ हिस्सों और दक्षिणी अफ्रीका में महिलाओं की संख्या स्पष्ट रूप से पुरुषों से अधिक है। यूरोप में यह असंतुलन सबसे अधिक दिखाई देता है। लातविया, लिथुआनिया और यूक्रेन जैसे देशों में हर 100 पुरुषों पर 116 से 118 महिलाएं हैं। यह दुनिया में सबसे अधिक है। इसके पीछे प्रमुख कारण पुरुषों की औसतन कम आयु, रोजगार के लिए पुरुषों का बड़े पैमाने पर प्रवास और उम्रदराज आबादी में महिलाओं की अधिक हिस्सेदारी है। रूस और बेलारूस में स्थिति इससे मिलती-जुलती है। वहीं पुर्तगाल, फ्रांस और जर्मनी जैसे पश्चिमी यूरोपीय देशों में भी महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में अधिक है, हालांकि अंतर अपेक्षाकृत कम है। इसका कारण मुख्य रूप से महिलाओं की औसतन 4-6 वर्ष अधिक आयु है। एशिया में नेपाल और हांगकांग में स्पष्ट रुझान नेपाल में बड़ी संख्या में पुरुष विदेशों में रोजगार के लिए जाते हैं, जिससे देश की आबादी में महिलाओं का अनुपात बढ़ जाता है। हांगकांग में महिलाओं की लंबी आयु और पुरुषों की कम सर्वाइवल दर के चलते वर्षों से यह लैंगिक अंतर बना हुआ है। अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका लेसोथो और नामीबिया में पुरुषों का दक्षिण अफ्रीका की खदानों और औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने जाना आम है। इससे घरेलू आबादी में महिलाएं बहुसंख्यक हो जाती हैं। अर्जेंटीना और उरुग्वे जैसे दक्षिण अमेरिकी देशों में उम्रदराज आबादी के कारण बुजुर्ग आयु वर्ग में महिलाओं की संख्या पुरुषों से कहीं अधिक है। दुनियाभर में कुल मिलाकर पुरुषों और महिलाओं की संख्या लगभग बराबर है। हर 100 महिलाओं पर लगभग 101 पुरुष हैं। लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, यह संतुलन पूरी तरह महिलाओं की ओर झुक जाता है। विशेष रूप से 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में अधिकांश देशों में महिलाओं की संख्या स्पष्ट रूप से अधिक है। यह जनसांख्यिकीय परिवर्तन समाज और अर्थव्यवस्था दोनों पर गहरा प्रभाव डालता है। इन आंकड़ों के पीछे सच्चाई यह है कि महिलाएं अधिक समय तक जीवित रहती हैं और कई देशों में वे आबादी की संरचना को नया आकार दे रही हैं।  

SC की केंद्र को फटकार: WHO 50 को खतरनाक कहता है, दिल्ली-NCR 450 पर कैसे?

नई दिल्ली दिल्ली-NCR में खतरनाक स्तर पर पहुंच चुके वायु प्रदूषण के मामले में सुप्रीम कोर्ट  ने सोमवार को सुनवाई के दौरान कड़ा रुख अपनाया और केंद्र सरकार को महत्वपूर्ण निर्देश दिए। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ जिसमें जस्टिस विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया भी शामिल थे ने समस्या के समाधान के लिए दीर्घकालिक और व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।  सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी CJI गवई ने मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को स्पष्ट सलाह दी कि वह सभी हितधारकों को एक साथ बुलाकर इस गंभीर समस्या का समाधान निकाले। CJI ने कहा, "अल्पकालिक कार्रवाई से समस्या हल नहीं होगी। हमें व्यापक दीर्घकालिक समाधान चाहिए।" कोर्ट ने निर्माण कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने जैसे अल्पकालिक उपायों पर चिंता व्यक्त की। CJI ने कहा, "हम निर्माण पूरी तरह बंद नहीं कर सकते… इससे यूपी-बिहार के मजदूरों पर सीधा असर पड़ता है। हम सिर्फ एक पक्ष को देखकर आदेश नहीं दे सकते। जमीन पर ऐसे निर्देशों से कई लोग प्रभावित होते हैं।" सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया कि वह पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और अन्य NCR राज्यों को शामिल करके एक संयुक्त रणनीति तैयार करे।

देश में Zen-G को लेकर तनाव: प्रदर्शनकारियों और पुलिस में हुई पत्थरबाज़ी

मेक्सिको सिटी मेक्सिको सिटी की सड़कों पर एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने देशभर का ध्यान अपनी ओर खींचा। हजारों युवा प्रदर्शनकारी गलियों और चौकों में उतर आए और अपराध तथा भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने गुस्से का इज़हार किया। इस आंदोलन में सिर्फ युवा ही नहीं, बल्कि विभिन्न उम्र के लोग भी शामिल हुए, जिन्होंने अपने-अपने मुद्दों के लिए आवाज उठाई। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि प्रदर्शन का एक हिस्सा चीन समर्थक राष्ट्रपति के खिलाफ भी था। पुलिस से भिड़ंत और चोटें प्रदर्शन तेज होने के बाद हिंसक मोड़ भी लिया। प्रदर्शनकारियों ने पत्थर, डंडे और चेन के सहारे पुलिस पर हमला किया। मेक्सिको सिटी के सुरक्षा सचिव पाब्लो वैजेक के अनुसार, इस झड़प में लगभग 120 लोग घायल हुए, जिनमें 100 पुलिसकर्मी शामिल हैं। इस हिंसा में 20 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया। एक 29 वर्षीय व्यवसायी ने कहा कि उन्हें अधिक सुरक्षा की आवश्यकता महसूस हो रही है। वहीं, एक 43 वर्षीय महिला फिजिशियन ने प्रदर्शन में शामिल होकर सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के लिए अधिक फंड की मांग की। उन्होंने कहा कि आज डॉक्टरों को मार दिया जाता है और इसके लिए कोई जवाबदेही नहीं होती। हत्याओं का डर और सामाजिक गुस्सा हाल के दिनों में मेक्सिको में कई हाई-प्रोफाइल हत्याओं ने जनता को हिला कर रख दिया है। इनमें पश्चिमी राज्य मिचोआकैन के मेयर की हत्या भी शामिल है। प्रदर्शन में शामिल कुछ लोग उनके समर्थन में भी आए। एक नागरिक, रोजा मारिया एविला ने कहा, “यह राज्य मर रहा है। मेयर को इसलिए मारा गया क्योंकि वह युवा अपराधियों से निपटने के लिए अधिकारियों को भेजता था। वह अपराधियों का मुकाबला करने की हिम्मत रखते थे।” प्रदर्शन की विविधता शनिवार को हुए इस विरोध प्रदर्शन में विभिन्न उम्र और पेशों के लोग शामिल थे। युवा प्रदर्शनकारियों ने ऊर्जा और गुस्से का प्रदर्शन किया, जबकि अनुभवी नागरिकों ने अपने अनुभव और समाजिक मुद्दों को उठाया। इस तरह यह प्रदर्शन केवल जेन-जी का आंदोलन नहीं बल्कि एक व्यापक सामाजिक चेतना का प्रतीक बन गया।

अब पेंशनर्स को नहीं लगानी होगी लाइन: UIDAI ने बताया डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट बनाने का आसान तरीका

नई दिल्ली हर साल नवंबर आते ही पेंशनर्स के लिए लाइफ सर्टिफिकेट जमा करना एक चुनौती बन जाता है। पहले बुजुर्गों को अपने बैंक, सरकारी दफ्तर या पेंशन विभाग के चक्कर लगाने पड़ते थे। लंबी लाइनें, कागजी दस्तावेजों की जद्दोजहद और यात्रा की कठिनाई बुजुर्गों के लिए थकाने वाली होती थी। लेकिन अब UIDAI ने इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और घर बैठे करने योग्य बना दिया है। अब पेंशनर्स सिर्फ अपने मोबाइल फोन का उपयोग करके घर बैठे डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (Digital Life Certificate – DLC) तैयार कर सकते हैं। दो ऐप से आसान होगा पूरा प्रोसेस UIDAI ने बताया कि डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट तैयार करने के लिए दो मोबाइल ऐप्स की जरूरत होती है: ➤ AadhaarFaceRD ऐप: फेस ऑथेंटिकेशन के लिए ➤ JeevanPramaan ऐप: लाइफ सर्टिफिकेट बनाने के लिए ➤ ये दोनों ऐप्स एंड्रॉइड मोबाइल में आसानी से डाउनलोड किए जा सकते हैं। प्रक्रिया इतनी सरल है कि बुजुर्ग इसे स्वयं कर सकते हैं या घर के किसी सदस्य की हल्की मदद से पूरा कर सकते हैं। फेस ऑथेंटिकेशन सबसे पहले AadhaarFaceRD ऐप डाउनलोड करना होता है। इस ऐप की मदद से आपका चेहरा आधार डेटाबेस से मिलाया जाता है और आपकी पहचान की पुष्टि की जाती है। यह प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित है और इसमें OTP या फिंगरप्रिंट की जरूरत नहीं पड़ती। बस मोबाइल कैमरा की मदद से चेहरे को स्कैन करना होता है। JeevanPramaan ऐप में जानकारी भरें फेस ऑथेंटिकेशन के बाद पेंशनर्स को JeevanPramaan ऐप खोलना होता है। यहां उन्हें कुछ बुनियादी जानकारी भरनी होती है: ➤ आधार नंबर ➤ पेंशन का प्रकार ➤ बैंक खाता विवरण ➤ मोबाइल नंबर इसके बाद उसी मोबाइल नंबर पर एक OTP आएगा। इसे दर्ज करने के बाद ऐप आपका चेहरा एक बार फिर स्कैन करेगा। जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी होती है, ऐप डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट जेनरेट कर देता है। सबमिट बटन दबाने के बाद प्रमाण पत्र तैयार जब पेंशनर्स सबमिट बटन दबाते हैं, तो उनका डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट सरकारी सिस्टम में जमा हो जाता है। साथ ही इसे मोबाइल और ईमेल पर भी प्राप्त किया जा सकता है। इस पूरी प्रक्रिया का फायदा: ➤ 100% डिजिटल और पेपरलेस ➤ किसी लाइन में खड़े होने की जरूरत नहीं ➤ बैंक या सरकारी दफ्तर जाने की आवश्यकता नहीं ➤ बुजुर्ग भी आसानी से घर बैठे लाइफ सर्टिफिकेट तैयार कर सकते हैं  

किसान सम्मान निधि की 21वीं किश्त 19 नवंबर को, हर किसान को 2-2 हजार रुपए मिलेंगे

नई दिल्ली पीएम किसान सम्मान निधि योजना केंद्र सरकार की लोकप्रिय योजनाओं में शामिल है। इस योजना से मध्यप्रदेश के लाखों किसानों को सालाना 6000 रुपए की आर्थिक सहायता मिलती है। 3 किस्तों में मिलने वाली ये राशि 4-4 महीने के अंतराल पर पात्र किसानों के खातें में डायरेक्ट आ जाती है। अब तक योजना के तहत किसानों को 20 किस्ते जारी कि जा चुकी हैं। अब किसानों के खातें में योजना की 21वीं किस्त(PM Kisan 21th Installment) ट्रांसफर की जाएगी।  इस योजना के तहत छोटे और सीमांत किसानों को 2-2 हजार रुपए की तीन किस्तें साल में (कुल 6000 रुपए) दी जाती हैं। यह राशि लाभार्थियों के बैंक खातों जमा कर दी जाती है। कुछ राज्यों को पहले ही मिल चुकी 21वीं किस्त केंद्र सरकार ने कुछ राज्यों में 21वीं किस्त पहले ही जारी कर दी है। 26 सितंबर 2025 को पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के किसानों को ये किस्त दी गई, क्योंकि इन राज्यों में बाढ़ और भूस्खलन से हुए नुकसान की भरपाई के लिए अग्रिम राहत दी गई थी। इसके अलावा 7 अक्टूबर 2025 को जम्मू-कश्मीर के किसानों को भी ये किस्त मिल चुकी है। बाकी राज्यों को नवंबर में भुगतान होने की उम्मीद है। इस योजना के तहत किसानों के खाते में हर साल तीन किश्तों में 2-2 हजार रुपए ट्रांसफर किए जाते हैं। पहली किस्त अप्रैल-जुलाई के बीच, दूसरी किस्त अगस्त-नवंबर और तीसरी किस्त दिसंबर-मार्च के बीच जारी की जाती है। 2 अगस्त को 20वीं किस्त जारी की गई थी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2 अगस्त को किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना की 20वीं किस्त जारी की थी। PM मोदी वाराणसी उत्तर प्रदेश से 9.7 करोड़ किसानों के अकाउंट में 20वीं किस्त के रूप में 20.84 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए थे। PM-किसान योजना 2019 में शुरू हुई थी PM-Kisan योजना फरवरी 2019 में शुरू हुई थी। इसके तहत पात्र किसानों को हर साल 6,000 रुपए की आर्थिक मदद दी जाती है, जो तीन किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए भेजी जाती है। अभी देशभर में 10 करोड़ से ज्यादा किसान इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। पीएम किसान योजना की 21वीं किस्त जानकारी के अनुसार, 2 अगस्त को योजना से जुड़े देशभर के किसानों के खाते में 20वीं किस्त जारी कि गई थी। अब 3 महीने का समय में बीत चुका है। ऐसे में करोड़ों किसान 21वीं किस्त(PM Kisan 21th Installment) का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। बता दें कि, केंद्र सरकार 19 नवंबर को पीएम किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त जारी करेगी। 21वीं किस्त का लाभ मध्यप्रदेश सहित देशभर के 9 करोड़ से अधिक पात्र किसानों को मिलने वाला है। इस किस्त के लिए सरकार कुल 18 हजार करोड़ रुपए की राशि हस्तांतरित करेगी। पात्रता की मुख्य शर्तें     आवेदक मध्य प्रदेश के स्थायी निवासी हो     वे किसान, जिनके पास कृषि योग्य भूमि हो     दो हेक्टेयर या उससे कम भूमि हो     आवेदक किसान के पास आधार कार्ड हो     बैंक अकाउंट होना भी अनिवार्य है     पीएम किसान के लिए फार्मर आइडी अनिवार्य

ICT बांग्लादेश का फैसला: शेख हसीना को सुनाई गई मौत की सजा

ढाका  शेख हसीना के मामले में इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रि्ब्यूनल की ओर से फैसला दे दिया गया है. उन्हें कोर्ट की ओर से मौत की सजा सुनाई गई है. पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना पर मानवता के खिलाफ अपराध और हत्या जैसे कुल 5 मामले चल रहे थे, जिस पर तीन सदस्यीय ट्राइब्यूनल ने अपना 453 पन्नों का फैसला सुना दिया है.  उन्हें अलग-अलग मामलों में आईटीसी ने दोषी करार दिया है और मौत की सजा सुनाई है.  ट्रिब्यूनल को जस्टिस मोहम्मद गुलाम मुर्तजा मजूमदर लीड कर रहे थे. आईसीटी जज के मुताबिक ये मामला काफी बड़ा था, ऐसे में फैसला भी 6 भाग में सुनाया गया है. जस्टिस मुर्तजा की अगुवाई वाली ट्रिब्यूनल में जस्टिस मोहम्मद शफीउल आलम महमूद और जस्टिस मोहम्मद मोहितुल हक एनाम चौधरी भी हैं. ट्रिब्यूनल ने एक मामले में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को अपनी मौत तक जेल में रखने का भी फैसला दिया. ट्रिब्यूनल ने कहा है कि हमने मानवाधिकार संगठन और अन्य संगठनों की कई रिपोर्ट्स पर विचार किया है. हमने क्रूरताओं का विवरण भी दिया है. शेख हसीना ने मानवता के खिलाफ अपराध किए. ट्रिब्यूनल ने फैसले में यह भी कहा है कि बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी मारे गए हैं. शेख हसीना ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हेलीकॉप्टर से बम गिराने के आदेश दिए थे.  ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा है कि अवामी लीग के कार्यकर्ता कथित रूप से सड़कों पर उतर आए और पार्टी नेतृत्व की पूरी जानकारी में सुनियोजित हमले किए. ट्रिब्यूनल के फैसले के बाद बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हालात बिगड़ गए हैं. शेख हसीना के समर्थक सड़कों पर उतर आए और प्रोटेस्ट शुरू कर दिया. अदालत के इस फैसले को बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास का अनोखा क्षण माना जा रहा है, क्योंकि यह पहली बार है जब देश की सर्वोच्च राजनीतिक पद पर रही नेता के खिलाफ इस स्तर का फैसला सुनाया गया. बांग्लादेश में पहली बार इंटरनेशनल क्राइम्स ट्राइब्यूनल किसी तत्कालीन प्रधानमंत्री के खिलाफ फैसला सुनाया गया है. ट्राइब्यूनल ने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना, पूर्व गृह मंत्री असदुज्जामान खान कमाल, और पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल-मामुन के खिलाफ चल रहे मामले में फैसला पढ़ा. सा में साबित की जा सके. यह बताया जा रहा है कि किस तरह से शेख हसीना ने छात्रों के प्रोटेस्ट को आतंकी गतिविधि के रूप में पेश करने की कोशिश की. शेख हसीना और अन्य ने रची आपराधिक साजिश ट्रिब्यूनल ने कहा कि ज्यादातर मौतें बांग्लादेशी सुरक्षाबलों की ओर से आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले घातक धातु के छर्रों से भरी सेना की बंदूकों से चली गोलियों के कारण हुईं. शेख हसीना की सरकार में सेना, पुलिस और आरएबी ने न्याय प्रक्रिया से हटकर हत्याएं कीं. शेख हसीना और अन्य आरोपियों ने संयुक्त रूप से आपराधिक साजिश रची थी. ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि शेख हसीना के साथ ही इस मामले में पूर्व गृह मंत्री असदुज्जामान खान कमाल और पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल मामून भी आरोपी हैं. ट्रिब्यूनल ने कहा कि तीनों ने मिलकर मानवता के खिलाफ अपराध किए. राजनीतिक नेतृत्व की ओर से दिए गए सीधे आदेशों की वजह से प्रदर्शनकारियों और अन्य नागरिकों के मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन हुआ. ट्रिब्यूनल के मुताबिक करीब 1400 लोगों की हत्या की गई और 11 हजार से अधिक लोग हिरासत में लिए गए, गिरफ्तार किए गए.  ट्रिब्यूनल ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने भी देखा कि राजनीतिक नेतृत्व के निर्देश पर हिरासत में यातनाएं दी गईं. ऐसी घटनाओं की कई रिपोर्ट्स भी हैं. बड़ी संख्या में ऐसे वीडियो भी जब्त किए गए हैं और इन्हें खंगाला जा रहा है. ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि इन वीडियोज से पता चलता है कि किस तरह प्रदर्शनकारियों की गोली मारकर हत्या की गई. इनमें से कई वीडियो यूट्यूब चैनलों पर दिखाए भी जा चुके हैं. एक ऐसे गवाह ने भी ट्रिब्यूनल के सामने गवाही दी, जिसका चेहरा विकृत कर दिया गया था. घायलों के इलाज नहीं करने के दिए गए निर्देश- ट्रिब्यूनल ट्रिब्यूनल ने कहा कि कई वीडियो में हेलीकॉप्टर से लोगों पर गोलीबारी भी दिखी है. घायलों को अस्पताल में भर्ती नहीं करने के निर्देश भी दिए गए थे. एक वीडियो में दिखा कि एक प्रदर्शनकारी की दोनों आंखों से खन बह रहा था और वह मदद की गुहार लगाता रहा. कुछ प्रदर्शनकारियों को पांच मीटर की दूरी से गोली मारी गई, कई को कई गोलियां मारी गईं. ट्रिब्यूनल ने कहा कि अस्पतालों ने उन्हें भर्ती करने से इनकार कर दिया. गवाहियों से यह भी सामने आया कि डॉक्टर्स को निर्देश दिया गया था कि वे किसी भी घायल को भर्ती न करें और पहले से भर्ती मरीजों को भी न छोड़ें. डॉक्टर्स की गवाही से स्पष्ट है कि पुलिस-प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों के इलाज में बाधा डाली. कुछ डॉक्टर्स को पोस्टमार्टम रिपोर्ट बदलने के लिए मजबूर किया गया और धमकाया गया. शेख हसीना ने दिए थे प्रदर्शनकारियों को मारने के आदेश- ट्रिब्यूनल ट्रिब्यूनल ने कहा कि 18 जुलाई को गोली लगने से घायल हुए 200 से अधिक मरीज अस्पतालों में पहुंचे थे. 19 जुलाई को भी करीब इतने ही मरीज अस्पताल पहुंचे थे. ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि शेख हसीना ने प्रदर्शनकारियों को मारने के आदेश दिए थे. सबूत इतने ठोस हैं कि दुनिया की किसी भी अदालत में इन्हें पेश किया जाए, अधिकतम सज़ा ही मिलती. यह साबित होता है कि आरोपियों ने अपराध किया है और वे अधिकतम सज़ा के पात्र हैं. ट्रिब्यूनल ने कहा कि शेख हसीना अधिकतम सजा की हकदार हैं. ट्रिब्यूनल ने यह भी बताया कि शेख हसीना के खिलाफ कौन-कौन से साक्ष्य मिले हैं. फैसले से पहले पूरे मामले को पढ़कर रिकॉर्ड में रखा गया, इसलिए प्रक्रिया लंबी चली और फैसला आने में समय लगा. राजधानी ढाका में पुलिस को हिंसक प्रदर्शन की स्थिति में प्रदर्शनकारियों को गोली मारने के आदेश दिए गए हैं. शेख हसीना ने फैसले से पहले अपने समर्थकों को भेजे वीडियो संदेश में खुद पर लगे आरोपों को गलत बताया और कहा कि फैसला दे दें, मुझे परवाह नहीं है. किन मामलों में शेख हसीना को मिली सजा? शेख हसीना तीन आरोपों में दोषी पाई गई हैं –     भड़काऊ बयान देना … Read more

सऊदी अरब हादसा: असदुद्दीन ओवैसी ने बताया—मेरी ही लोकसभा के थे सभी लोग

नई दिल्ली सऊदी अरब में भीषण बस हादसे में 42 भारतीयों के मारे जाने की खबर मिली है। इस बीच AIMIM के नेता और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी इसके बारे में जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि मुझे इस हादसे की खबर मिली है। दो ट्रैवल एजेंसियों के माध्यम से मक्का और मदीना की यात्रा पर गए 42 लोग मेरे ही लोकसभा क्षेत्र के थे। उन्होंने कहा कि इस हादसे में एक व्यक्ति के बचने और बाकी सभी के मारे जाने की खबर मिली है। यह हादसा उस वक्त हुआ, जब जायरीनों से भरी बस मक्का से मदीना की ओर जा रही थी। इसी दौरान एक डीजल टैंकर से बस की भिड़ंत हो गई और वह देखते ही देखते जल उठी। असदुद्दीन ओवैसी ने बताया कि मैंने रियाद स्थित भारतीय दूतावास के डिप्टी चीफ अबू जॉर्ज से बात की है। उन्होंने भरोसा दिया है कि वे पूरी घटना के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं और हरसंभव मदद दी जाएगी। इसके अलावा मैंने हैदराबाद स्थित उन दोनों ट्रैवल एजेंसियों से भी बात की है, जिनके माध्यम से ये लोग गए थे। अब मैंने उनकी पूरी डिटेल रियाद स्थित एम्बेसी और विदेश सचिव को दी है। इस हादसे का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें दिख रहा है कि बस कैसे धू-धूकर जल रही है। पीएम नरेंद्र मोदी ने इस हादसे पर दुख जताया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस घटना में मदद का भरोसा दिया है और कहा कि विदेश मंत्रालय सक्रिय है। पीएम नरेंद्र मोदी ने एक्स पर लिखा, 'मेरी प्रार्थनाएं उन परिवारों के साथ हैं, जिन्होंने अपने प्रिय जनों को खो दिया है। मैं घायलों के तेजी से रिकवर होने की कामना करता हूं। रियाद स्थित हमारे दूतावास और जेद्दाह स्थित कौंसुलेट से पूरी सहायता की जाएगी। हमारे अधिकारी सऊदी अरब की अथॉरिटीज के संपर्क में हैं।' इस घटना के बाद एक कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है, जहां 24 घंटे संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा हेल्पलाइन नंबर 8002440003 भी जारी किया गया है।  

बांग्लादेश में उथल-पुथल: फैसले से पहले ढाका में सुरक्षा कड़ी, विभिन्न क्षेत्रों में हिंसक घटनाओं की रिपोर्ट

ढाका  बांग्लादेश भयानक हिंसा के मुहाने पर खड़ा है. आज पूर्व पीएम शेख हसीना को उनके कथित अपराधों के लिए इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल सजा सुनाएगी. इस फैसले को ढाका में बड़े स्क्रीन पर लाइव दिखाया जाएगा. इसके अलावा इसे फेसबुक पर भी देखा जा सकेगा. इससे पहले बांग्लादेश में जबर्दस्त टेंशन है. मोहम्मद यूनुस की सरकार ने इस दौरान हिंसा, आगजनी करने वालों को देखते ही गोली मारने का आदेश दिया है. बांग्लादेश में शेख हसीना की पार्टी को प्रतिबंधित कर दिया गया है और उनकी पार्टी चुनाव नहीं लड़ सकती है. इस बीच फैसले से पहले शेख हसीना ने एक भावुक ऑडियो मैसेज दिया है. शेख हसीना ने कहा कि, "अन्याय करने वालों को एक दिन बंगाल की धरती पर जनता सजा देगी. इसलिए मैं सबको बता दूं कि डरने की कोई बात नहीं है. मैं जिंदा हूं. मैं ज़िंदा रहूंगी. मैं देश की जनता का साथ दूंगी. और अगर इंशाअल्लाह इन अपराधियों को बंगाल की धरती पर सजा दूंगी." वहीं 78 वर्षीय शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने कहा कि अगर उनकी पार्टी पर प्रतिबंध नहीं हटाया गया, तो उनकी पार्टी अवामी लीग के समर्थक फरवरी में होने वाले राष्ट्रीय चुनाव में बाधा डालेंगे. उन्होंने चेतावनी दी कि विरोध प्रदर्शन हिंसा में बदल सकता है.  सजीब वाजेद ने कहा, "हमें ठीक-ठीक पता है कि फ़ैसला क्या आने वाला है. वे इसे टीवी पर दिखा रहे हैं. वे उसे दोषी ठहराएंगे, और शायद उसे मौत की सजा भी सुनाएंगे." बता दें कि बांग्लादेश के सरकारी वकील ने 78 वर्षीय हसीना के लिए मृत्युदंड की मांग की है. वाशिंगटन डी.सी. में रहने वाले वाजेद ने कहा, "वे मेरी मां का क्या कर सकते हैं? मेरी मां भारत में सुरक्षित हैं. भारत उन्हें पूरी सुरक्षा दे रहा है." यूनुस के सलाहकार के घर हमला इस बीच बांग्लादेश में कई जगहों से हिंसा और प्रदर्शन की खबरें मिल रही हैं. ढाका में मोहम्मद यूनुस के सलाहकार सैयद रिजवाना हसन के घर के बाहर क्रूड बमों से हमला किया गया है. यहां आगजनी भी हुई है.  वहीं कॉक्सबाजार में भी हिंसा की खबरें हैं. यहां शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया है. कई शहरों में हंगामा और हिंसा की खबरें हैं.  बांग्लादेश में शूट एट साइट का ऑर्डर  इधर शेख हसीना के खिलाफ फैसला आने से पहले छिटपुट आगजनी और देसी बम से हमलों के बीच ढाका और अन्य क्षेत्रों में रात भर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण-बांग्लादेश के फैसले से पहले हसीना की अब भंग हो चुकी अवामी लीग द्वारा दो दिवसीय बंद की घोषणा की खबरों के बाद अधिकारियों ने कड़ी सैन्य, अर्धसैनिक और पुलिस चौकसी का आदेश दिया है.  रविवार रात अज्ञात लोगों ने एक पुलिस स्टेशन परिसर के वाहन डंपिंग कॉर्नर में आग लगा दी और अंतरिम सरकार प्रमुख प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस के सलाहकार परिषद के एक सदस्य के आवास के बाहर दो देसी बम विस्फोट किए. इसके अलावा राजधानी में कई चौराहों पर विस्फोट भी किए गए. ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने हिंसक प्रदर्शनकारियों को देखते ही गोली मारने के लिए कहा है.  ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस आयुक्त एसएम सजात अली ने रविवार देर रात कहा, "मैंने वायरलेस पर कहा है कि जो कोई भी बस में आग लगाता है या जान से मारने के इरादे से देसी बम फेंकता है, उसे गोली मार दी जानी चाहिए. यह अधिकार हमारे कानून में स्पष्ट रूप से दिया गया है." ढाका में 10 नवंबर के बाद से कई गुप्त हमले हुए हैं, जिनमें मीरपुर में यूनुस द्वारा स्थापित ग्रामीण बैंक मुख्यालय के प्रवेश द्वार पर देसी बम विस्फोट भी शामिल है. अधिकारियों ने बताया कि बैंक की कई शाखाओं को भी पेट्रोल बम और आगजनी का निशाना बनाया गया. अज्ञात हमलावरों ने पिछले सप्ताह कई खड़ी बसों में भी आग लगा दी, जिससे एक वाहन के अंदर सो रहे चालक की मौत हो गई. शेख हसीना के अलावा कौन-कौन हैं आरोपी बांग्लादेश के इस चर्चित में मामले में तीन आरोपी है. शेख हसीना इस समय भारत में निर्वासित जीवन गुजार रही हैं. दूसरे आरोपी पूर्व गृह मंत्री  असदुज्जमां खान कमाल है और तीसरे आरोपी पूर्व पुलिस प्रमुख अब्दुल्ला अल मामून है. अब्दुल्ला अल मामून ने व्यक्तिगत रूप से मुकदमे का सामना किया और "सरकारी गवाह" बनकर ज़ाहिर तौर पर रियायत की मांग की.  बांग्लादेश के सरकारी गाजी एमएच तमीम ने रविवार को कहा, "हमने हसीना के लिए अधिकतम संभव सजा की मांग की है. हमने पिछले साल के हिंसक सड़क विरोध प्रदर्शनों के शहीदों और घायलों के परिवारों में वितरित करने के लिए दोषियों की संपत्ति जब्त करने का भी अनुरोध किया है." सरकारी वकीलों ने कहा है कि फैसले का सरकारी बीटीवी पर सीधा प्रसारण किया जाएगा और ढाका में कई स्थानों पर बड़े स्क्रीन पर इसे प्रदर्शित करने की व्यवस्था की गई है.  अदालत के इस फैसले को लाइव भी दिखाया जाएगा. शेख हसीना पर क्या क्या आरोप हैं पूर्वी पीएम शेख हसीना 2024 में छात्र-नेतृत्व वाले जुलाई विद्रोह के दौरान सत्ता से हटीं थीं. उन पर बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT-BD) ने मानवता के खिलाफ अपराधों के पांच प्रमुख आरोप लगाए हैं. ये आरोप मुख्य रूप से 2024 के जुलाई-अगस्त महीनों में प्रदर्शनकारियों पर हुए कथित दमन से जुड़े हैं, जिसमें अनुमानित 1,400 से अधिक मौतें हुईं.  ट्रिब्यूनल ने 10 जुलाई 2025 को इन आरोपों को औपचारिक रूप से फ्रेम किया था, शेख हसीना पर ये मुकदमा उनकी अनुपस्थिति में चला था.  शेख हसीना पर हत्या, हत्या का प्रयास, यातना और अन्य अमानवीय कृत्यों का आरोप है. शेख हसीना के 14 जुलाई 2024 के प्रेस ब्रीफिंग के बाद, पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल और पूर्व पुलिस महानिदेशक चौधरी अब्दुल्लाह अल-मामून ने कथित रूप से असुरक्षित छात्र प्रदर्शनकारियों पर हमलों को भड़काया. इसमें आंदोलनकारी अबू सायेद की नजदीक से गोली मारकर हत्या शामिल है.  इस दौरान तत्कालीन सरकार ने घातक हथियारों, हेलीकॉप्टरों और ड्रोनों के उपयोग का आदेश देकर छात्र प्रदर्शनकारियों को दबाया. इसमें सुपीरियर कमांड जिम्मेदारी, साजिश, सहायता और सुविधा शामिल है.