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लश्कर के पहलगाम अटैक के बाद अमेरिका का सख्त संदेश: भारत से गठबंधन ही सुरक्षित रास्ता

वाशिंगटन  अमेरिकी सांसद जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले का जिम्मेदार लश्कर-ए-तैयबा को बता रहे हैं। खास बात है कि अमेरिकी पक्ष यह टिप्पणी ऐसे समय पर आई है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के बीच रिश्ते मजबूत होते नजर आ रहे हैं। हाल ही में पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर वाइट हाउस गए थे। हाउस फॉरेन अफेयर्स साउथ एंड सेंट्रल एशिया सबकमेटी के अध्यक्ष बिल हुइजेंगा ने भारत के साथ रिश्तों को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका का रिश्ता अब सिर्फ जरूरी नहीं रह गया है, बल्कि यह 21वीं सदी की निर्णायक साझेदारी है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ऐसी दुनिया चाहता है, जहां लोकतंत्र से नियम बनें, तो भारत के साथ हमारी साझेदारी बेहद अहम है। विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, उन्होंने कहा, 'पहलगाम में भयानक हमले के लिए जिम्मेदार LeT और TRF को ट्रंप प्रशासन ने जुलाई 2025 में विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया है, जो आतंकवादी के खिलाफ जंग में हमारी प्रतिबद्धता को दिखाता है। फिर हमला कहीं भी क्यों न हुआ हो…।' चीन का भी लिया नाम हुइजेंगा ने कहा, 'चीन और रूस जैसी ताकतें बलपूर्वक सीमाएं बदल रही हैं और पड़ोसियों पर दबाव डाल रही हैं। यह इंडो-पैसेफिक से ज्यादा साफ कहीं नहीं देखा जा रहा है, जहां लगातार आक्रामक होता चीन क्षेत्रीय स्थिरता, वैश्विक समृद्धि और व्यापार के लिए जोखिम पैदा कर रहा है। …हम ऐसा नहीं होने दे सकते। भारत इन जोखिमों को पहले से जानता है।' उन्होंने कहा, '2020 से भारत के साथ साझा सीमा में चीनी बलों ने भारतीय सैनिकों को मारा है। भारत ने भी मजबूती से जवाब दिया है, चीन के सैन्य दबाव को कमजोर किया है और भारत और पड़ोसी भूटान में चीनी प्रभाव को कम किया है। आज भारत और अमेरिका के बीच सहयोग में में रक्षा, तकनीक, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और व्यापार शामिल हैं।' ऑपरेशन सिंदूर 22 अप्रैल को आतंकवादी ने पहलगाम में 26 सैलनियों की हत्या कर दी थी। इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सिंधु जल समझौता रोकने समेत कई फैसले लिए। इसके अलावा भारतीय सेना ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर का आगाज किया था, जिसके तहत पाकिस्तानी सीमा में प्रवेश कर आतंकी ठिकानों को तबाह किया था। इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच करीब 4 दिनों तक संघर्ष हुआ। पाकिस्तानी पक्ष के अनुरोध को बाद सीजफायर किया गया था।  

तेज बुखार में भी अमित शाह का जवाब तीखा, ‘वोट चोरी’ विवाद के बीच राहुल गांधी सदन छोड़ गए

नई दिल्ली लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के “वोट चोरी” आरोपों पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जोरदार पलटवार किया। सूत्रों के अनुसार जब गृह मंत्री लोकसभा में बोल रहे थे उस समय वह बुखार से ग्रस्त थे। उनके शरीर का तापमान 102 डिग्री था। सदन की कार्यवाही से ठीक पहले डॉक्टरों ने उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया और बुखार कम करने की दवाइयां दीं। बुखार के बावजूद अमित शाह ने करीब डेढ़ घंटे का भाषण दिया और विपक्ष के हर आरोप वोट चोरी, स्पेशल रिविजन इंस्पेक्शन (SIR) और चुनाव आयोग में नियुक्तियों पर विस्तृत और आक्रामक तरीके से जवाब दिया।   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अमित शाह की सराहना करते हुए कहा कि उनका भाषण उत्कृष्ट, तथ्यपूर्ण और विपक्ष के झूठों को उजागर करने वाला था। आपको बता दें कि राहुल गांधी हाल के दिनों में कई मंचों पर “वोट चोरी” का मुद्दा उठा चुके हैं और इसे “हाइड्रोजन बम” तक कह चुके हैं। बिहार चुनाव से पहले उन्होंने इस मुद्दे पर रैली भी की थी और सोमवार को संसद के शीतकालीन सत्र में फिर से इसे उठाया। सदन में चर्चा के दौरान गृह मंत्री शाह ने राहुल गांधी को चुनौती देते हुए कहा कि कोई उन्हें यह नहीं बता सकता कि उन्हें किस क्रम में क्या बोलना चाहिए। उन्होंने विपक्ष पर दोहरी नीति अपनाने का भी आरोप लगाया। अमित शाह ने कहा, “जब आप जीतते हैं, नई पोशाक पहनकर शपथ लेते हैं और सूची बिल्कुल ठीक लगती है। लेकिन जब बिहार की तरह जमीन खिसक जाती है तब अचानक मतदाता सूची में गड़बड़ी दिखने लगती है। यह दोहरा चरित्र अब नहीं चलेगा।” आपको बता दें कि अमित शाह जब जवाब देने लगे तो कुछ ही देर में राहुल गांधी संसद की अगुवाई में विपक्ष संसद छोड़कर बाहर चला गया। SIR पर भी दिया विस्तार से जवाब अमित शाह ने कहा कि SIR पर संसद में चर्चा होना आवश्यक नहीं था, लेकिन उन्होंने विपक्ष की मांग मानकर बहस में हिस्सा लिया ताकि यह दिखाया जा सके कि सरकार किसी भी मुद्दे से भाग नहीं रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोप चुनाव आयोग को आधिकारिक रूप से सौंपे ही नहीं गए थे।  

US में आया ट्रंप का ‘गोल्ड कार्ड’ मॉडल: कौन ले सकेगा फायदा, ग्रीन कार्ड से कैसे अलग?

वाशिंगटन  संयुक्त राज्य अमेरिका ने एक बड़ा और विवादास्पद बदलाव करते हुए एक नया इमिग्रेशन प्रोग्राम शुरू किया है। इसे ‘गोल्ड कार्ड’ नाम दिया गया है। इसके तहत कोई भी विदेशी नागरिक 10 लाख अमेरिकी डॉलर अमेरिकी खजाने में जमा कराकर स्थायी निवासी बन सकता है। यह घोषणा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को की है। इसके साथ ही इस ‘गोल्ड कार्ड’ वीजा के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू हो चुके हैं। वाइट हाउस इसे उच्च कौशल वाले विदेशी कर्मचारियों को तेज-तर्रार प्रक्रिया से अमेरिका में रखने का एक नया साधन बता रहा है। ‘गोल्ड कार्ड’ एक नया वीजा आधारित इमिग्रेशन प्रोग्राम है जो अमेरिका में कानूनी स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड जैसा) प्रदान करता है। दोनों में फर्क सिर्फ इतना है कि इसमें न तो पारिवारिक स्पॉन्सर की जरूरत है और न ही रोजगार/नियोक्ता स्पॉन्सरशिप की। यह पूरी तरह वित्तीय योगदान पर आधारित है। गोल्ड कार्ड पाने वाले आवेदकों को आगे चलकर अमेरिकी नागरिकता के लिए सामान्य प्रक्रिया के अनुसार आवेदन करने का अधिकार भी मिलेगा। कितना खर्च आएगा? व्यक्तिगत गोल्ड कार्ड के लिए 1,000,000 अमेरिकी डॉलर यानी कि लगभग 8.4 करोड़ रुपये देने होंगे। इनमें 15,000 डॉलर का नॉन-रिफंडेबल प्रोसेसिंग शुल्क भी शामिल है। जांच के के बाद यह राशि अमेरिकी ट्रेजरी को उपहार के रूप में जमा करानी होती है। किसी कर्मचारी को स्पॉन्सर करने के लिए कंपनी को 2,000,000 डॉलर की दर से प्रति व्यक्ति की दर से जमा करना होगा। इनमें 15,000 डॉलर की प्रोसेसिंग शुल्क भी शामिल है। कंपनियां चाहें तो यह 20 लाख डॉलर किसी दूसरे कर्मचारी को “ट्रांसफर” भी कर सकती है। इसके लिए 1% वार्षिक मेंटेनेंस शुल्क और 5% ट्रांसफर शुल्क देना होगा। यह पैसा जाता कहां है? संपूर्ण राशि सीधे अमेरिकी ट्रेजरी में जाती है, जिसे वाइट हाउस अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक वित्त को मजबूत करने का तरीका बता रहा है। गोल्ड कार्ड और ग्रीन कार्ड में अंतर ग्रीन कार्ड कई मार्गों से मिलता है। परिवार, रोजगार, असाधारण प्रतिभा, डाइवर्सिटी लॉटरी, शरण/शरणार्थी स्थिति या निवेश आधारित नौकरी-निर्माण मॉडल के जरिए ग्रीन कार्ड का रास्ता खुलता है। लेकिन गोल्ड कार्ड में नियम बेहद सरल है। सरकार को बड़ी रकम दीजिए और स्थायी निवास पाएं। ग्रीन कार्ड में सरकार को सीधे करोड़ों रुपये नहीं देने पड़ते हैं। निवेशक-वीजा में भी पैसा व्यवसाय में निवेश होता है, न कि सरकार को उपहार के रूप में पैसे देने होते हैं। गोल्ड कार्ड इसे पलट देता है। सीधा पैसा दीजिए और स्थायी निवासी बन जाइए। ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया में वर्षों लग सकता है। जटिल दस्तावेज, कोटा और लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। किसके लिए है यह वीजा? यह कार्यक्रम अत्यंत संपन्न व्यक्तियों और मल्टीनेशनल कंपनियों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। सामान्य प्रवासियों के लिए यह रास्ता नहीं है। व्यक्तियों और कंपनियों दोनों के लिए गोल्ड कार्ड वीजा आवेदन अब अमेरिकी सरकारी पोर्टल पर लाइव हैं। यह प्रोग्राम अमेरिका की इमिग्रेशन नीति में शायद सबसे बड़ा वित्त-आधारित बदलाव माना जा रहा है। इससे राजनीतिक और नैतिक बहस तेज होने की संभावना है।  

सहमति की उम्र नहीं, फिर भी किया शोषण: नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को आजीवन कारावास

कोलकाता  कलकत्ता हाईकोर्ट ने POCSO एक्ट के तहत एक 23 वर्षीय युवक को 12 साल की बच्ची के साथ यौन संबंध बनाने के आरोप में आजीवन कारावास और 2 लाख रुपये जुर्माने की सजा को बरकरार रखा है। जस्टिस राजशेखर मंथा और जस्टिस अजय कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि नाबालिग बच्ची यौन संबंधों के परिणामों को नहीं समझ सकती और वह वैध सहमति देने में असमर्थ होती है, भले ही वह प्यार या शादी के झूठे वादे में विश्वास कर ले। मामला 2015-2017 का है। पीड़िता उस समय सिर्फ 12 साल की थी जब आरोपी ने उसके साथ कथित प्रेम-संबंध शुरू किया। आरोपी की उम्र उस समय 23 साल थी। बाद में उसने शादी का झूठा वादा देकर नाबालिग क साथ बार-बार शारीरिक संबंध बनाए। पीड़िता ने अदालत में स्वीकार किया कि वह आरोपी से प्यार करती थी और शादी की उम्मीद में संबंध बनाती रही, लेकिन जैसे ही उसे गर्भ ठहरा तो आरोपी ने जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया। तब 15 साल की उम्र में यानी 2017 में लड़की के परिवार ने POCSO के तहत शिकायत दर्ज कराई। बार एंड बंच की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी ने बचाव में तीन मुख्य तर्क दिए। पहला- यौन संबंध कथित तौर पर दो साल पहले हुआ था, फिर शिकायत में इतनी देरी क्यों? दूसरा- डीएनए रिपोर्ट में सिर्फ यह लिखा है कि 'उसके जैविक पिता होने से इनकार नहीं किया जा सकता', यानी रिपोर्ट निष्कर्षात्मक नहीं है। तीसरा- पीड़िता की उम्र भी साबित नहीं हुई है।' हाईकोर्ट ने सभी दलीलें खारिज कर दीं: 1. देरी पर: अदालत ने कहा कि बच्ची आरोपी से प्यार करती थी और शादी की उम्मीद में चुप रही। गर्भ ठहरने के बाद जब आरोपी ने मुंह फेर लिया तब शिकायत हुई। अदालत ने कहा- बच्ची को यौन संबंधों के परिणामों की जानकारी नहीं होती। देरी प्राकृतिक और स्वाभाविक है। 2. सहमति पर: पीठ ने दोहराया- पीड़िता नाबालिग थी और वैध एवं कानूनी रूप से सहमति देने में असमर्थ थी। वह आरोपी के शादी के वादे पर भरोसा करती रही। 3. डीएनए रिपोर्ट पर: अदालत ने कहा- 'नहीं इनकार किया जा सकता’ का मतलब यह नहीं कि आरोपी निर्दोष है। यह रिपोर्ट पीड़िता के बयान की पुष्टि करती है और साक्ष्यों की श्रृंखला को पूरा करती है। 4. उम्र पर: जन्म प्रमाण-पत्र रिकॉर्ड पर था और बचाव पक्ष ने उचित समय पर आपत्ति नहीं की थी, इसलिए पीड़िता की नाबालिग होने में कोई संदेह नहीं। अदालत ने पाया कि आरोपी के कृत्य POCSO की धारा 5(j)(ii) एवं 5(l) के तहत अग्रेवेटेड पेनेट्रेटिव सेक्शुअल असॉल्ट की श्रेणी में आते हैं, जिसकी सजा धारा 6 के तहत न्यूनतम 20 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक है। सियालदह ट्रायल कोर्ट ने दी गई आजीवन कारावास एवं 2 लाख रुपये जुर्माने की सजा को हाईकोर्ट ने पूरी तरह बरकरार रखा। पीड़िता को तुरंत मुआवजा दिलाने के लिए खंडपीठ ने अतिरिक्त निर्देश दिए:     राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (SLSA) 15 दिनों के अंदर जुर्माने की 90% राशि यानी 1.80 लाख रुपये पीड़िता को देगा।     इसके अलावा SLSA अपने कोष से अलग से 2 लाख रुपये और देगा।     यदि भविष्य में आरोपी जुर्माना भरता है तो SLSA को राशि वापस मिल जाएगी। अदालत ने इस मामले में बच्चियों के साथ रोमांटिक रिलेशनशिप के नाम पर होने वाले यौन शोषण पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि नाबालिग की हां कानूनी रूप से कभी सहमति नहीं मानी जा सकती, चाहे वह कितना भी प्यार क्यों न जताए।

खैबर पख्तूनख्वा में आसिम मुनीर को लेकर घमासान, विपक्ष की तीखी चेतावनी सेना को

पेशावर  पाकिस्तान में आसिम मुनीर को भारत के ऑपरेशन सिंदूर में मात खाने के बाद फील्ड मार्शल बनाया गया है। इसके अलावा चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का दर्जा भी संविधान संशोधन करके मिला है। जानकार मानते हैं कि पाकिस्तान ने ऐसा इसलिए किया है ताकि भारत से मिली हार को छिपाया जा सके और जनता में गलत जानकारी देकर ही सही, सेना और सरकार का भरोसा कायम रहे। फिर भी इमरान खान के नेतृत्व वाली विपक्षी पार्टी पीटीआई से सेना की अदावत जारी है। यहां तक कि गुरुवार को तो खैबर पख्तूनख्वा की विधानसभा में आसिम मुनीर के पोस्टर लहराए जाने पर विवाद छिड़ गया।   इसके अलावा पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता की ओर से इमरान खान और खैबर के सीएम सोहैल आफरीदी के खिलाफ बयान देने पर भी विवाद मचा है। सदन में पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज की महिला विधायक सोबिया शाहिद ने फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के पोस्टर लहराए। इस पर स्पीकर सुरैया बीबी ने मार्शलों को आदेश दिया कि वे आसिम मुनीर के पोस्टरों को हटाएं। इसके अलावा उन्होंने पीएमएल-एन की विधायक से भी कहा कि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ सेना का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनका आपकी पार्टी से कोई ताल्लुक नहीं है। उन्होंने कहा कि आप अपनी परफॉर्मेंस के बारे में बात करें। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की तस्वीरें लहराने का क्या मतलब है। वहीं पीटीआई के विधायकों ने कहा कि इस देश में गंभीर समस्याएं हैं। गरीबी, आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता है। इसके बाद भी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी पीटीआई नेतृत्व के खिलाफ बयान देते हैं। विशेष तौर पर इमरान खान और सीएम सोहैल आफरीदी के खिलाफ उन्होंने जो बोला है, उससे खैबर पख्तूनख्वा के लोगों में गुस्सा है। पीटीआई के विधायक हुमायूं खान ने कहा कि आखिर सेना के लोगों को राजनीतिक मसले में बोलने की क्या जरूरत है। खान ने कहा कि कुछ लोग यहां राष्ट्रपति शासन लगवाने की बात भी कर रहे हैं, लेकिन खैबर पख्तूनख्वा में इससे संकट ही पैदा होगा और लोग ऐसी स्थिति को स्वीकार नहीं करेंगे।  

अरुणाचल में खाई में गिरा मजदूरों से भरा ट्रक, 17 की मौत की संभावना

अंजाव अरुणाचल प्रदेश में गुरुवार को बड़ा हादसा हो गया। इसकी खबर आज सामने आई है। वहां एक ट्रक खाई में गिर गया। हादसे में 17  लोगों की मौत की खबर है। ये सारे असम के मजदूर थे। बताया जा रहा है कि इस हादसे में सिर्फ एक मजदूर की जान बची है। उसी की सूचना के आधार पर खबर सामने आई है।हादसा भारत-चीन बॉर्डर के पास हयुलियांग–चगलागम रोड पर हुआ। अंजाव जिले के डिप्टी कमिश्नर मिलो कोजिन ने हादसे की पुष्टि की है। अभी तक 13 बॉडीज रिकवर की जा चुकी है।  डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि हादसा बेहद खतरनाक पहाड़ी मोड़ पर हुआ। सड़क बहुत संकरी है और कई हिस्सों में ढलान काफी तेज है। मजदूर इस इलाके में चल रहे बॉर्डर रोड निर्माण कार्य के लिए जा रहे थे। कैसे हुआ हादसा ? अंजाव जिले के डिप्टी कमिश्नर मिलो कोजिन ने पुष्टि की कि हादसा बेहद खतरनाक पहाड़ी मोड़ पर हुआ. उन्होंने बताया कि सड़क बहुत संकरी है और कई हिस्सों में ढलान काफी तेज है. मजदूर इस इलाके में चल रहे बॉर्डर रोड निर्माण कार्य के लिए जा रहे थे. हादसे के बाद आसपास के ग्रामीणों ने सबसे पहले मौके पर पहुंचकर मदद शुरू की. बाद में पुलिस, जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन और सेना की टीमों ने रेस्क्यू शुरू किया. खाई बहुत गहरी होने के कारण बचाव मुश्किल हो रहा है. कई मजदूरों को खाई में नीचे फंसे देखा गया है जिन तक पहुंचने में समय लग रहा है. स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि ट्रक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है और कई मजदूरों के शरीर खाई में अलग-अलग हिस्सों में मिले हैं. इंडो-चीन बॉर्डर से जुड़े सड़क पर हुआ हादसा यह इलाका अपनी मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों के लिए जाना जाता है. इंडो-चीन बॉर्डर से जुड़े सड़क प्रोजेक्ट पर काम करने वाले मजदूरों को रोजाना बेहद खतरनाक रास्तों से गुजरना पड़ता है. कई बार खराब मौसम, भूस्खलन और संकरी सड़कें हादसों की वजह बनती हैं. अधिकारियों ने कहा कि घटना की जांच की जाएगी ताकि यह पता चले कि ट्रक तेज रफ्तार में था या सड़क की हालत वजह बनी. प्रशासन ने परिवारों से संपर्क भी शुरू कर दिया है और उन्हें पूरी मदद देने का भरोसा दिया है. पहाड़ी इलाके में हादसा यह हादसा समुद्र तल से करीब 10 हजार फीट की ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाके में हुआ। यहां सड़क बहुत संकरी और खतरनाक बताई जा रही है। मजदूर अरुणाचल से असम के तिनसुकिया जिले के छाट (पोरा घर) की ओर जा रहे थे, तभी वाहन फिसलकर ढलान से नीचे जा गिरा। शवों को निकालने में दिक्कत आ रही NDRF की टीम अभी भी मौके पर तैनात है, लेकिन खाई बहुत गहरी होने और सीमित संसाधनों की वजह से शवों को निकालने में मशक्कत करनी पड़ रही है। खराब मौसम और अत्यधिक ऊंचाई की वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन काफी धीमी गति से चल रहा है। अरुणाचल और असम पुलिस की जॉइंट टीम हादसे की जांच और रेस्क्यू में लगी है। 

प्रधानमंत्री ने महाकवि सुब्रमण्यम भारती को उनकी जयंती पर दी श्रद्धांजलि

नईदिल्ली   मोदी ने कहा कि उनकी कविताओं ने साहस का संचार किया और उनके विचारों में अनगिनत लोगों के मन पर अमिट छाप छोड़ने की शक्ति थी, जिसने भारत की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय चेतना जागृत की।  प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि  भारती ने एक न्यायपूर्ण और समावेशी समाज के निर्माण की दिशा में कार्य किया और तमिल साहित्य को समृद्ध बनाने में उनका योगदान अतुलनीय है।  मोदी ने ‘एक्स’ पर अलग-अलग पोस्ट में लिखा: “महाकवि सुब्रमण्यम भारती को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। उनके काव्यों ने साहस का संचार किया और उनके विचारों में अनगिनत लोगों के मन पर अमिट छाप छोड़ने की शक्ति थी। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय चेतना को जागृत किया। उन्होंने एक न्यायपूर्ण और समावेशी समाज के निर्माण की दिशा में कार्य किया। तमिल साहित्य को समृद्ध बनाने में भी उनका योगदान अतुलनीय है।”

फरार लूथरा ब्रदर्स को थाईलैंड में हिरासत में लिया गया, गोवा अग्निकांड में 25 मौतों के बाद शुरू हुआ प्रत्यर्पण प्रक्रिया

पणजी  भारत के अनुरोध पर थाईलैंड पुलिस ने फुकेट में लूथरा भाइयों को हिरासत में ले लिया है. पिछले दिनों गोवा में नाइटक्लब में अग्निकांड में 25 लोगों की जान चली गई थी. लूथरा ब्रदर्स इस नाइटक्लब के फाउंडर हैं और हादसे के बाद फरार थे. पिछले हफ्ते 6 दिसंबर को गोवा के अरपोरा में स्थित बिर्च बाय रोमियो नाइटक्लब में आग लगने से बड़ा हादसा हो गया था. इस घटना में 25 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी और कई लोग घायल भी हुए थे. घटना के बाद क्लब के फाउंडर ब्रदर्स फुकेट भाग गए थे. मामले में उन्हें आरोपी बनाया गया है. पुलिस ने एक्शन लेते हुए नाइटक्लब अग्निकांड के मुख्य आरोपियों गौरव और सौरभ लूथरा के पासपोर्ट सस्पेंड कर दिए हैं. पासपोर्ट इसलिए सस्पेंड किया गया कि वे फुकेट से आगे कहीं और नहीं जा सकें. अधिकारियों का कहना है कि यह कदम एक बड़ी उपलब्धि है, जिससे इंटरपोल और कूटनीतिक चैनलों के जरिए भारत के लिए उनका प्रत्यर्पण आसान हो सकता है. हालांकि, अब उन्हें हिरासत में ले लिया गया, जो एक बड़ा एक्शन है. सूत्रों ने  बताया, "विदेश मंत्रालय को लूथरा ब्रदर्स के पासपोर्ट कैंसिल करने का औपचारिक अनुरोध गोवा सरकार की तरफ से मिला था." इंटरपोल ने मंगलवार को दोनों भाइयों के खिलाफ ‘ब्लू कॉर्नर नोटिस’ जारी किया था. कोर्ट से राहत नहीं… मामले के बाद लूथरा ब्रदर्श ने कोर्ट में अंतरिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी. अग्निकांड मामले में बुधवार को अदालत ने लूथरा ब्रदर्स को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया और उनकी याचिका पर सुनवाई गुरुवार को तय की गई है. सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा और तनवीर अहमद मीर अदालत में भाइयों की तरफ से पेश हुए. उनके वकील ने कहा, 'मैं कह रहा हूं कि मैं भारत वापस आना चाहता हूं, और वे मुझे गिरफ्तार करना चाहते हैं. मुझे ‘witch-hunting’ का डर है.'  

मैक्सिको का 50% टैरिफ अटैक, भारत और अन्य देशों पर नया दबाव, अमेरिका से टक्कर

 नई दिल्ली दुनिया में एक बार फिर टैरिफ वॉर (Tariff War) होती नजर आ रही है. अमेरिका ने जहां तमाम देशों पर टैरिफ में इजाफा कर उन्हें झटका दिया था, तो अब बार मैक्सिको की है. मैक्सिको ने बड़ा कदम उठाते हुए चीन समेत कई एशियाई देशों से आने वाले सामानों पर हाई टैरिफ (Maxico 50% Tariff) लगाने का फैसला किया है, जो अमेरिका की तरह ही 50% तक होगा. सीनेट ने इस प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है और ये नए टैरिफ अगले साल यानी 2026 से लागू होने वाले हैं. इससे खासतौर पर उन देशों को बड़ा झटका लगने वाला है जिनका मैक्सिको के साथ को ट्रेड समझौता नहीं है. 2026 से लागू होगा हाई टैरिफ रिपोर्ट के मुताबिक, मैक्सिको द्वारा बढ़ाया गया ये टैरिफ अगले साल 2026 से लागू होगा. उसके इस फैसले से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों में चीन, भारत, साउथ कोरिया, थाइलैंड और इंडोनेशिया सबसे ऊपर हैं. इन सभी देशों से आने वाले ऑटो पार्ट्स, टेक्सटाइल, स्टील समेत अन्य सामानों पर अगले साल से मैक्सिको 50% तक टैरिफ वसूलेगा. सीनेट में पास किए गए प्रस्ताव के मुकाबिक, इसके अलावा कई सामानों पर टैरिफ को बढ़ाकर 35 फीसदी तक किया गया है. 35% तक किया जा रहा है. इस टैरिफ बढ़ाने वाले विधेयक के पक्ष में मैक्सिको की सीनेट ने 76 वोट पड़े, जबकि विरोध में 5 वोट रहे. इसके अलावा 35 अनुपस्थित वोटों के साथ इसे पारित कर दिया गया.  मैक्सिको ने क्यों उठाया ये कदम?  दरअसल, अमेरिका की रह ही मैक्सिको ने भी टैरिफ बढ़ाने का यह कदम अपने स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया है. हालांकि, इसका असर कितना होगा ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा. हालांकि, व्यापार समूहों ने  इस टैरिफ हाइक का जमकर विरोध भी किया है. रिपोर्ट के अनुसार, Maxico Tariff Hike के इस कदम को लेकर विश्लेषकों और प्राइवेट सेक्टर ने तर्क दिया है कि यह फैसला दरअसल संयुक्त राज्य अमेरिका को खुश करने और अगले वर्ष 3.76 अरब डॉलर का अतिरिक्त राजस्व उत्पन्न करने के लिए लिया गया है, क्योंकि मेक्सिको अपने राजकोषीय घाटे को दूर करने का प्रयास कर रहा है. 1400 सामानों पर लगेगा टैरिफ मैक्सिको सीनेट द्वारा मंजूर किया गया ये संशोधित विधेयक में पहले प्रस्ताव की तुलना में कम उत्पाद श्रेणियां शामिल हैं. लगभग 1,400 आयतित सामानों पर शुल्क लगाने वाले विधेयक को पहले के रुके हुए संस्करण से नरम किया गया है, क्योंकि इनमें से कई सामानों पर टैरिफ की दर को कम 50% से कम रखा गया है. हालांकि, मैक्सिको ने पहले भी चीनी सामानों पर टैरिफ बढ़ाने का ऐलान किया था और अमेरिका को खुश करने की कोशिश की थी, लेकिन इसका कुछ ज्यादा असर देखने को नहीं मिला था.

भारत ने 5th जेन फाइटर जेट से किया अमेरिका को चौंका, DRDO ने तोड़ा अहम कारनामा

बेंगलुरु  यह बात सभी को पता है कि भारत लड़ाकू विमानों की कमी से जूझ रहा है. उसके पास मौजूदा समय में स्क्वाड्रन की संख्या 42 से घटकर 30 पर आ गई है. लेकिन, सबसे बड़ी चुनौती नए फाइटर जेट्स हासिल करने की है. दरअसल, फाइटर जेट्स कोई वाशिंग मशीन या रेफ्रिजरेटर नहीं होते हैं कि कोई व्यक्ति मार्केट गया और उसे खरीदकर लेते आया. बल्कि, ये बेहद जटिल तकनीक वाले विमान हैं और भारत की कोशिश है कि वह अब भविष्य में स्वदेशी फाइटर जेट्स का इस्तेमाल करे. इस दिशा में भारत अपने तेजस प्रोग्राम के साथ पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान AMCA यानी एम्का प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है. अब इस एम्का प्रोजेक्ट में देसी वैज्ञानिकों को एक बड़ी सफलता मिली है. दरअसल, डीआरडीओ ने मॉर्फिंग विंग टेक्नोलॉजी का सफल परीक्षण किया है. यह एक ऐसी टेक्नोलॉजी है जो दुनिया के कुछ चुनिंदा कंपनियों जैसे एयरबस और नासा के पास है. एक तरह से इस तकनीक पर अमेरिका और यूरोप का कब्जा है. चीन और रूस जैसे देश भी पांचवी पीढ़ी के फाइटर जेट्स बना चुके हैं लेकिन, उनके पास भी ऐसी सटीक तकनीक होने को लेकर सवाल किए जाते हैं. पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स के लिए क्यों जरूरी है ये तकनीक? फिफ्थ जेन फाइटर जेट के लिए यह एक बहुत बड़ी टेक्नोलॉजी है. इस टेक्नोलॉजी में फाइटर जेट अपने फंख पक्षियों की तरह समेट सकते है. उसको छोटा-बड़ा कर सकते हैं. जरूरत पड़ने पर उसे छिपा सकते हैं. वह आसमान में संतुलित स्थित पाने लेने के बाद अपने फंख को पूरी तरह छिपा सकते हैं. यह सब कुछ सेकेंडों के भीतर होता है. ऐसे में ये विमान आसानी से दुश्मन के राडार से बच जाएंगे. पंख समेटने के कारण उनका आकार भी काफी सिमट जाएगा. पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट के लिए यह एक बहुत बड़ी तकनीकी जरूरत है. दुनिया के कुछ चुनिंदा देशों की चुनिंदा कंपनियों के पास ही यह तकनीक उपलब्ध है. डीआरडी ने बनाया अपना तकनीक इस तकनीक को डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने विकसित किया है. इसका सफल परीक्षण किया जा चुका है. आने वाले वक्त में इसे फाइटर जेट्स के साथ जोड़ा जाएगा. जानकारों का कहना है कि इस तकनीक का सीधा फायदा एम्का प्रोजेक्ट के साथ-साथ मानव रहित विमानों के विकास में मिलेगा. क्या है यह तकनीक दरअसल, यह एक बेहद खास तकनीक है. इसमें फंख एक खास धातु से बने होते है. जो एक विशेष तापमान पर गर्म होने के बाद फैल जाते हैं और ठंडा होने पर सिकुड़ जाते हैं. लेकिन, गर्म या ठंडा होने की यह पूरी प्रक्रिया सेकेंडों में पूरी होती है. यानी ये फंस फैलने के कुछ ही सेकेंड के भी अपने मूल आकार में आ जाते हैं. फाइटर जेट को जब उड़ान भरना होते हैं या उसको हवा के दबाव को मैनेज करना होता है तो वह हीट बढ़ाकर इन फंखों की साइज बढ़ा देते हैं. इस तकनीक को शेप मेमोरी अलॉय कहा जाता है. इस तकनीक की एक और बड़ी खासियत है कि इसमें पारंपरिक पंखों की तहत कोई कट या जोड़ नहीं होते. इस कारण इनके राडार की नजर में आना और मुश्किल हो जाता है. इस तकनीक में फंखे प्रति सेकेंड 35 डिग्री की रफ्तार से अपना आकार बदलते हैं. ये मात्र 0.17 सेकेंड में पूरे शेप चेंज कर लेते है. इसका मतलब यह है कि एक ही मिशन में विमान टेकऑफ पर ज्यादा वजन लिफ्ट करने के लिए कैंबर बढ़ा सकेगा. क्रूज में ड्रैग कम करने लिए रेंज बढ़ा सकेगा. डॉगफाइट यानी फाइटर जेट्स के बीच सीधी भिड़ंत के वक्त तेजी से अपना आकार बदलकर दुश्मन को चमका दे सकेगा. क्या थी सबसे बड़ी चिंता? इस तकनीक को लेकर सबसे बड़ी बात यह कही जाती है कि इसमें बहुत अधिक ऊर्जा की खपत होती है. ये ऊर्जा पंखों को गर्म या ठंडा करने में इस्तेमाल होती है. ऐसे में विमान पर बोझ बढ़ जाता था. इस समस्या के समाधान के लिए एक एडाप्टिव पावर अलोकेशन एल्गोरिदम तैयार किया गया है जो जरूरत के हिसाब से बिजली को इंटेलिजेंटली बांटता है. इसका नतीजा यह हुआ कि विमान के एक्टिव सेगमेंट को ही पावर मिलती है. बाकी सेगमेंट्स पर भार नहीं पड़ता है. इस तरह इस पूरे टेस्ट में महज 5.6 फीसदी अतिरिक्त ऊर्जा की खपत हुई.