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रेल यात्रियों के लिए जरूरी खबर! भारतीय रेलवे ने रद्द की कई ट्रेनें, यहां देखें अपडेटेड लिस्ट

नई दिल्ली  भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा और ट्रैक के रखरखाव को ध्यान में रखते हुए आने वाले दिनों में कई ट्रेनों को रद्द करने और कुछ को डायवर्ट करने का फैसला लिया है। इस निर्णय से यात्रियों को असुविधा जरूर होगी, लेकिन रेलवे का कहना है कि यह कदम भविष्य में सुरक्षित और सुगम यात्रा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। रेलवे ने सभी यात्रियों से अपील की है कि यात्रा पर निकलने से पहले अपनी ट्रेन का स्टेटस आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर अवश्य चेक करें, ताकि किसी भी तरह की परेशानी से बचा जा सके। रद्द की गई ट्रेनें (Cancelled Trains) 12207 जम्मू–काठगोदाम गरीब रथ – 31 मार्च 2026 तक रद्द 12208 काठगोदाम–जम्मू गरीब रथ – 29 मार्च 2026 तक रद्द 12265 दिल्ली–जम्मू दुरंतो एक्सप्रेस – 31 मार्च 2026 तक रद्द 12266 जम्मू–दिल्ली दुरंतो एक्सप्रेस – 1 अप्रैल 2026 तक रद्द 14503 कालका–कटड़ा एक्सप्रेस – 31 मार्च 2026 तक रद्द 14504 कटड़ा–कालका एक्सप्रेस – 1 अप्रैल 2026 तक रद्द 14611 गोरखपुर–कटड़ा एक्सप्रेस – 27 मार्च 2026 तक रद्द 14612 कटड़ा–गोरखपुर एक्सप्रेस – 26 मार्च 2026 तक रद्द 22401 दिल्ली सराय रोहिल्ला–ऊधमपुर – 30 मार्च 2026 तक रद्द 22402 ऊधमपुर–दिल्ली सराय रोहिल्ला – 31 मार्च 2026 तक रद्द 22439 नई दिल्ली–कटड़ा वंदे भारत – 31 मार्च 2026 तक रद्द 22440 कटड़ा–दिल्ली वंदे भारत – 31 मार्च 2026 तक रद्द 22705 तिरुपति–जम्मू हमसफर – 31 मार्च 2026 तक रद्द 22706 जम्मू–तिरुपति हमसफर – 4 अप्रैल 2026 तक रद्द 26405 अमृतसर–कटड़ा वंदे भारत – 30 मार्च 2026 तक रद्द 26406 कटड़ा–अमृतसर वंदे भारत – 30 मार्च 2026 तक रद्द डायवर्ट की गई ट्रेनें (Diverted Trains) 19223 साबरमती–जम्मू एक्सप्रेस – अब 30 मार्च 2026 तक सिर्फ फिरोजपुर तक चलेगी 19224 जम्मू–साबरमती एक्सप्रेस – 1 अप्रैल 2026 तक फिरोजपुर से चलेगी 19415 साबरमती–कटड़ा एक्सप्रेस – 29 मार्च 2026 तक अमृतसर तक चलेगी 19416 कटड़ा–साबरमती एक्सप्रेस – 31 मार्च 2026 तक अमृतसर से चलेगी 20433 सियालदह–कटड़ा जम्मू मेल – 31 मार्च 2026 तक अंबाला तक चलेगी 20434 कटड़ा–सियालदह जम्मू मेल – 1 अप्रैल 2026 तक अंबाला से चलेगी 22941 इंदौर–ऊधमपुर एक्सप्रेस – 30 मार्च 2026 तक जम्मू तक चलेगी 22942 ऊधमपुर–इंदौर एक्सप्रेस – 1 अप्रैल 2026 तक जम्मू से चलेगी 14803 भुज–जम्मू एक्सप्रेस – 31 मार्च 2026 तक पठानकोट तक चलेगी 14804 जम्मू–भुज एक्सप्रेस – 1 अप्रैल 2026 तक पठानकोट से चलेगी रेलवे का यात्रियों के लिए संदेश उत्तर रेलवे ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय ट्रैक की मरम्मत, परिचालन सुधार और सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि यात्रा से पहले रेलवे की वेबसाइट www.indianrailways.gov.in या NTES मोबाइल ऐप पर अपनी ट्रेन की नवीनतम जानकारी जरूर देखें।

लोकल बॉडी चुनाव में वोटिंग विवाद: एक आदमी दो बार वोट कैसे डाल सकता है?

मुंबई  महाराष्ट्र में होने जा रहे लोकल बॉडी इलेक्शन यानी स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर एक ऐसा फैसला आया है जिसने मतदाताओं को हैरान कर दिया है. राज्य चुनाव आयोग के नए प्रावधान के तहत एक वोटर दो बार मतदान कर सकेगा. जी हां, आपने सही पढ़ा, एक ही व्यक्ति अब नगर परिषद और जिला परिषद दोनों के चुनाव में दो वोट डालने का अधिकार रखेगा. लेकिन यह बदलाव किसी गड़बड़ी या ‘डबल वोटिंग’ के लिए नहीं, बल्कि तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से किया गया है. आयोग का कहना है कि इससे मतदान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुव्यवस्थित होगी. कैसे होगा यह डबल वोटिंग सिस्टम? नई व्यवस्था के तहत मतदाता सूची में कुछ नामों के आगे स्टार (*) चिन्ह लगाया जाएगा. यही स्टार इस बात का संकेत होगा कि यह व्यक्ति दो अलग-अलग निकायों यानी नगर परिषद और जिला परिषद के लिए मतदान करने का पात्र है. इसलिए ऐसे मतदाता दो बार वोट डाल सकेंगे. एक बार नगर परिषद के लिए और और दूसरी बार जिला परिषद के लिए. राज्य चुनाव आयोग ने बताया कि यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटली ट्रैक की जाएगी, ताकि कोई मतदाता एक ही निकाय में दो बार वोट न डाल सके. आयोग के अधिकारियों के अनुसार, सिस्टम को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि डुप्लिकेट वोटर की पहचान तुरंत हो जाए. इसके लिए अलग डेटाबेस और मार्किंग सिस्टम बनाया गया है. क्यों किया जा रहा है ऐसा? महाराष्ट्र के कई जिलों में स्थानीय प्रशासनिक सीमाओं का पुनर्गठन हुआ है. इससे कुछ मतदाता ऐसे क्षेत्रों में आते हैं जहां वे दो अलग-अलग निकायों यानी जिला परिषद और नगर परिषद, दोनों के अंतर्गत आते हैं. ऐसे मतदाताओं को दो बार मतदान करने की अनुमति देना जरूरी हो गया है, ताकि उनकी दोनों स्तर की स्थानीय प्रतिनिधित्व प्रक्रिया में भागीदारी सुनिश्चित की जा सके. सरल शब्दों में कहें, तो यह सिस्टम उन्हीं मतदाताओं पर लागू होगा जो दोहरी प्रशासनिक सीमाओं में आते हैं, बाकी सभी मतदाता सामान्य रूप से एक ही बार वोट डालेंगे. डुप्लिकेट वोटरों की पहचान कैसे होगी? आयोग ने कहा है कि ‘डबल स्टार (*) चिन्ह’ उन्हीं नामों के आगे लगाया जाएगा, जो दोनों निकायों की मतदाता सूचियों में आते हैं. ऐसे वोटरों की पहचान एक डिजिटल वेरिफिकेशन सिस्टम के ज़रिए की जाएगी. मतदान केंद्र पर ई-लिस्ट और एप आधारित वेरिफिकेशन किया जाएगा, ताकि कोई भी व्यक्ति एक ही निकाय में बार-बार वोट न डाल पाए. चुनाव आयोग ने बताया क‍ि हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि स्टार मार्क्ड मतदाता वोट दो बार डालें, लेकिन अलग-अलग निकायों में. किसी भी स्थिति में वे एक ही जगह दो वोट नहीं डाल पाएंगे. डुप्लिकेट वोटरों के लिए अलग रिकॉर्ड आयोग ने बताया है कि डुप्लिकेट वोटरों का अलग रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा. मतदान के बाद, दोनों सूचियों को सिंक्रनाइज किया जाएगा ताकि कोई गड़बड़ी या दोहरी गिनती न हो. इसके लिए एक नया ऐप भी लॉन्च किया जा रहा है, जिससे मतदाता अपने नाम और मतदान केंद्र की जानकारी ले सकेंगे, अपने क्षेत्र के उम्मीदवारों की पूरी जानकारी पा सकेंगे. और यह भी देख सकेंगे कि उनका नाम किस निकाय की वोटर लिस्ट में शामिल है. इस बार आयोग ने महिलाओं के लिए भी खास इंतजाम किए हैं. ‘गुलाबी मतदान केंद्र’ बनाए जाएंगे, जहां सिर्फ महिला कर्मचारी और महिला पुलिसकर्मी तैनात रहेंगी. इससे महिलाओं को सुरक्षित माहौल में वोट डालने का मौका मिलेगा.

30 साल से बंद सहकारी मंडली का कर्ज चुकाकर गांव को दिलाई राहत, 300 किसानों की हुई मदद

सावरकुंडला  गुजरात के अमरेली जिले के सावरकुंडला तालुका स्थित जीरा गांव में किसानों की 30 साल पुरानी पीड़ा का अंत हो गया है. 1995 में गांव की सेवा सहकारी मंडली के बंद होने के बाद करीब  300 किसान इस मंडली के कर्ज के बोझ तले दबे थे, जिसके चलते उन्हें अन्य बैंकों से भी फसल ऋण नहीं मिल पा रहा था. गांव के मूल निवासी और सूरत के सफल हीरा कारोबारी बाबूभाई चोडवाडिया उर्फ ​​जीरावाला किसानों की मदद के लिए आगे आए. बाबूभाई ने अपनी मां की पुण्यतिथि के अवसर पर यह अनुकरणीय कार्य करने का फैसला किया. उनकी मां की इच्छा थी कि उनकी संपत्ति का उपयोग ऐसी जगह किया जाए, जिससे उन्हें खुशी मिले. उन्होंने गांव के 290 किसानों का पिछले 30 सालों का कर्ज चुकाने के लिए ₹89 लाख की भारी-भरकम राशि दान की. यह राशि 1995 में किसानों के नाम पर फर्जी ऋण लेने के कारण लगी थी. बाबूभाई ने कहा कि उन्होंने अपनी मां की इच्छा पूरी की है और यह पट्टिका किसानों के दिलों में महसूस होगी. सार्वजनिक जीवन में होने के नाते, उन्होंने अन्य उद्योगपतियों को भी किसानों की मदद के लिए आगे आने की अपील की.  30 साल के दर्द से मिली मुक्ति आज जीरा गांव में, अमरेली सांसद भरत सुतारिया और सावरकुंडला-लिलिया विधायक महेश कसवाला सहित बैंक अधिकारियों की मौजूदगी में किसानों को 'अदेयता प्रमाण पत्र' (Due Certificate) प्रदान किए गए. किसान नाथाभाई शिरोया और महेशभाई दुधात ने  कहा कि इन 30 वर्षों में उनके 'काले बाल सफेद हो गए', लेकिन उन्हें ऋण नहीं मिल रहा था. उन्होंने बाबूभाई को भगवान के रूप में आया हुआ बताया और उनके परिवार को 10 गुना लाभ होने की कामना की. जीरा गांव की सरपंच दक्षाबेन चोडवाडिया ने कहा कि बाबूभाई ने ₹89 लाख का कर्ज चुकाकर उनके ससुर का अधूरा सपना पूरा किया है. सांसद भरत सुतारिया ने बाबूभाई की पहल की सराहना की और कहा कि यह अन्य गाँवों के लिए भी एक मिसाल है, जहाँ किसान ऐसी ही समितियों के कारण बोझ तले दबे हुए हैं. बाबूभाई जीरावाला की इस पहल ने न केवल 300 किसानों को कर्जमुक्त किया है, बल्कि उन्हें '7-12 कागज' (राजस्व रिकॉर्ड) पर लगे बोझ से भी मुक्ति दिलाई है, जिससे वे अब अन्य बैंकों से फसल ऋण ले सकेंगे.

शिकारा से जल मेट्रो तक: 900 करोड़ का प्रोजेक्ट श्रीनगर में लाएगा बदलाव

 श्रीनगर  डल झील का सन्नाटा, उसके ऊपर तैरता शिकारा जिस पर बैठकर सैलानी झील की लहरों में खो जाते हैं. यही शिकारा, श्रीनगर की पहचान, उसका दिल और उसकी रूह रहा है. इसी पर बैठकर मोहब्बतें शुरू हुईं, कविताएं लिखी गईं और तस्वीरों में कश्मीर की खूबसूरती कैद हुई. लेकिन अब यही झील, वक्त के साथ एक नए दौर में कदम रख रही है. क्योंकि शिकारे के पास अब उसका आधुनिक साथी आ रहा है- हाइब्रिड मेट्रो, जो कश्मीर की झीलों को नई रफ्तार और नई पहचान देने जा रही है. दरअसल, जम्मू-कश्मीर सरकार और भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण मिलकर 900 करोड़ रुपये की श्रीनगर जल मेट्रो परियोजना शुरू कर रहे हैं.  इसका मकसद है डल झील और झेलम नदी के जलमार्गों को एक आधुनिक, पर्यावरण-हितैषी ट्रांसपोर्ट सिस्टम में बदलना. यह मेट्रो केरल की कोच्चि वाटर मेट्रो से प्रेरित है, जो देश में अपनी तरह की पहली सफल जल मेट्रो है. अब श्रीनगर उसी मॉडल पर चलने जा रहा है, ताकि यहां के लोगों को ट्रैफिक से राहत मिले और सैलानियों को एक नया अनुभव.  शिकारे की जगह इलेक्ट्रिक नावें परंपरागत शिकारों के बीच अब उतरेंगी इलेक्ट्रिक-हाइब्रिड नावें, जो ना सिर्फ प्रदूषण कम करेंगी, बल्कि झील के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा भी करेंगी. डल झील में 5 रूट और 10 टर्मिनल बनाए जाएंगे, जबकि झेलम नदी पर 2 रूट और 8 टर्मिनल होंगे. यानी कुल 18 जल स्टेशन, जो शहर को एक छोर से दूसरे छोर तक जोड़ेंगे. सोचिए, जहां कभी सैलानी गुलाबों से सजे शिकारे पर बैठते थे, वहीं अब हाइब्रिड मेट्रो की आरामदायक सीटों से वे पूरे श्रीनगर का नजारा देख पाएंगे. विकास के साथ नई उम्मीदें इस परियोजना से न सिर्फ ट्रांसपोर्ट सिस्टम सुधरेगा, बल्कि रियल एस्टेट और पर्यटन पर भी बड़ा असर पड़ेगा. डल झील और झेलम के किनारे जो टर्मिनल बनेंगे, उनके आसपास की जमीनों की कीमतें बढ़ने की उम्मीद है. क्योंकि जहां कनेक्टिविटी बढ़ती है, वहां विकास अपने आप आता है. स्थानीय लोगों के लिए यह रोजगार का नया जरिया भी बनेगा, इसके अलावा नाव संचालन, मेंटेनेंस और स्टेशन सर्विसेज जैसे नए अवसर भी खुलेंगे. आने वाला श्रीनगर कैसा होगा? परियोजना अब अपने शुरुआती लेकिन ठोस चरण में है. अक्टूबर 2025 में इसके लिए समझौता हो चुका है और अब विस्तृत योजना, मंजूरियां और निर्माण का खाका तैयार किया जा रहा है. दिशा बिल्कुल साफ है कि श्रीनगर अब सिर्फ झीलों का शहर नहीं रहेगा, बल्कि जल मेट्रो वाला आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल शहर बनने की राह पर है. जो शिकारे कभी घाटी की रूह थे, अब हाइब्रिड मेट्रो उसी रूह में नई रफ्तार भरने जा रही है.  झील वही रहेगी, पानी वही होगा, लेकिन पहचान बदल जाएगी. ऐसे में श्रीनगर एक बार फिर अपने नए रूप में दुनिया के सामने खड़ा होगा.

नॉर्थ कोरिया में नई चाल? किम जोंग उन अब अमेरिका से वार्ता को राजी — दक्षिण कोरिया की रिपोर्ट

सोल  उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन अमेरिका से बातचीत को इच्छुक हैं और जल्द ही वाशिंगटन में ये मुलाकात हो सकती है। दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसी (एनआईएस) की कुछ रिपोर्ट्स के हवाले से योनहाप न्यूज एजेंसी ने ये दावा किया है। योनहाप न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण कोरियाई एजेंसी को लगता है कि उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच एक समिट होने की संभावना बहुत ज्यादा है। एजेंसी का अनुमान है कि यह बैठक अगले साल मार्च में अमेरिका और दक्षिण कोरिया के जॉइंट मिलिट्री ड्रिल के बाद हो सकती है।  रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल इंटेलिजेंस सर्विस (एनआईएस) पर पार्लियामेंट्री ऑडिट के बाद, सांसद ली सेओंग-क्वेन ने पत्रकारों से कहा, "एनआईएस का मानना ​​है कि किम जोंग उन अमेरिका के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं और जब हालात सही होंगे तो वे अमेरिका से संपर्क साधेंगे।" हालांकि व्हाइट हाउस ने समिट की संभावना को लेकर टिप्पणी का आग्रह किया, लेकिन उसका उन्हें जवाब नहीं मिला। उत्तर कोरियाई नेता किम कह चुके हैं कि अगर वॉशिंगटन न्यूक्लियर हथियारों को खत्म करने की मांग छोड़ दे तो वह अमेरिका से बात करने को तैयार हैं, लेकिन जब पिछले हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण कोरिया दौरे के दौरान बातचीत का ऑफर दिया तो उन्होंने (किम) सार्वजनिक रूप से कोई जवाब नहीं दिया। पिछले हफ्ते एपीईसी समिट से पहले दक्षिण कोरिया दौरे पर आए ट्रंप ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा था: "हम वापस आएंगे, और बहुत जल्द, उत्तर कोरिया से मिलेंगे।" प्योंगयांग के न्यूक्लियर हथियारों के जखीरे को लेकर बातचीत टूटने से पहले ट्रंप और किम ने 2018 और 2019 में शिखर वार्ता की थी। उत्तर कोरिया पर इन हथियारों के साथ-साथ अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों को लेकर भी कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगे हुए हैं। योनहाप ने बताया कि संसदीय सत्र के बाद एक और सांसद ने पत्रकारों से कहा कि किम को कोई बड़ी स्वास्थ्य समस्या नहीं लगती है, हालांकि पहले ऐसी खबरें थीं कि उन्हें हाई ब्लड प्रेशर हो सकता है। सांसद ने कहा कि उत्तर कोरियाई नेता की किशोर बेटी किम जू ए, उनकी संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर अपनी स्थिति मजबूत कर रही है, हालांकि पिछले 60 दिनों से वह लाइमलाइट से दूर है।

हेगसेथ की साउथ कोरिया यात्रा के दौरान नॉर्थ का दहशतभरा संदेश — दागे कई रॉकेट

वाशिंगटन  दक्षिण कोरिया ने खुलासा किया है कि उत्तर कोरिया ने अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ की सीमा पर यात्रा से महज एक घंटा पहले करीब 10 तोपखाने के रॉकेट दागे। ये रॉकेट पीली सागर (Yellow Sea) की दिशा में छोड़े गए थे, जो उत्तर कोरियाई मल्टी-रॉकेट लॉन्चर सिस्टम से फायर किए गए। दक्षिण कोरियाई संयुक्त स्टाफ (JCS) के मुताबिक, यह घटना हेगसेथ और उनके दक्षिण कोरियाई समकक्ष अह्न ग्यु-बैक के संयुक्त सुरक्षा क्षेत्र (JSA) में दौरा शुरू होने से ठीक पहले घटी, जो डीएमजेड (Demilitarized Zone) का हिस्सा है।   रिपोर्ट के अनुसार, 1 नवंबर को दोपहर करीब 3 बजे उत्तर कोरिया ने 'करीब 10 और तोपखाने के रॉकेट गोले' दागे, जब दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) शिखर सम्मेलन के दौरान ग्योंगजू में द्विपक्षीय शिखर वार्ता कर रहे थे। उधर, हेगसेथ ने मंगलवार को अह्न ग्यु-बैक के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वाशिंगटन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वादे को पूरा करने के लिए दक्षिण कोरिया को अमेरिकी शिपयार्ड में न्यूक्लियर-पावर्ड सबमरीन बनाने में सहायता देने के लिए 'जानबूझकर' अंतर-विभागीय प्रयास करेगा। जब दक्षिण कोरिया में तैनात अमेरिकी सेनाओं को ताइवान जलडमरूमध्य में किसी आपात स्थिति में तैनाती की संभावना के बारे में पूछा गया, तो पेंटागन प्रमुख ने कहा कि अमेरिका क्षेत्रीय संकटों के लिए अपने सैनिकों के 'लचीलापन' पर विचार करेगा और जोर दिया कि फोकस उत्तर कोरिया को रोकने पर बना रहेगा। बता दें कि दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने पिछले सप्ताह APEC शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से अनुरोध किया था कि सियोल को पारंपरिक हथियारों से लैस पनडुब्बियों के लिए न्यूक्लियर ईंधन की सप्लाई की अनुमति दी जाए, ताकि उत्तर कोरियाई और चीनी जहाजों पर बेहतर निगरानी रखी जा सके। योनहाप की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि हम अपने सहयोगियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं और यह सुनिश्चित करने पर केंद्रित हैं कि डीपीआरके (उत्तर कोरिया) का खतरा कोरिया गणराज्य (दक्षिण कोरिया) के लिए खतरा न बने। हम परमाणु निवारण को पहले की तरह मजबूती से जारी रखेंगे। उन्होंने उत्तर कोरिया को उसके आधिकारिक नाम डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया के संक्षिप्त रूप से संबोधित किया। योनहाप के अनुसार, ट्रंप ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि उन्होंने दक्षिण कोरिया को फिलाडेल्फिया शिपयार्ड में न्यूक्लियर-पावर्ड सबमरीन (SSN) बनाने की मंजूरी दे दी है, जिसका संचालन दक्षिण कोरियाई कंपनी हनवा ओशन द्वारा किया जाता है। 29 अक्टूबर को एक सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप ने ऐलान किया कि दक्षिण कोरिया-अमेरिका गठबंधन पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गया है और इसी आधार पर, मैंने उन्हें न्यूक्लियर-पावर्ड सबमरीन बनाने की स्वीकृति दे दी है। एक अन्य पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि दक्षिण कोरिया अपनी न्यूक्लियर-पावर्ड सबमरीन का निर्माण फिलाडेल्फिया शिपयार्ड में करेगी, जो अच्छे पुराने अमेरिका में स्थित है।

बंगाल में SIR को लेकर ममता का पलटवार, दूसरे फेज की शुरुआत पर उठाया अहम कदम

कोलकाता  पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की शुरुआत हो चुकी है। इस पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का रवैया भी सामने आया है। ममता ने एसआईआर के दूसरे चरण की शुरुआत का विरोध करते हुए कोलकाता में रैली निकाली है। ममता की पार्टी, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने इस प्रक्रिया को भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग द्वारा की गई ‘चुपचाप अदृश्य हेराफेरी’ करार दिया है। 3.8 किमी लंबी रैली अपने भतीजे और तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के साथ मुख्यमंत्री ने रेड रोड स्थित बीआर अंबेडकर की प्रतिमा से 3.8 किलोमीटर लंबी रैली शुरू की। यह मार्च रवींद्रनाथ टैगोर के पैतृक घर जोरासांको ठाकुर बाड़ी पर समाप्त होगा। हजारों की संख्या में तृणमूल समर्थक रैली मार्ग पर उमड़ पड़े, वे पार्टी के झंडे लहरा रहे थे, नारे लगा रहे थे और रंग-बिरंगे पोस्टर लिए हुए थे। लोगों का अभिवादन अपनी विशेष पहचान सफेद सूती साड़ी और चप्पल पहने बनर्जी ने रैली का नेतृत्व किया और बीच-बीच में बालकनी और फुटपाथों पर खड़े लोगों का अभिवादन करने के लिए रुकीं। मुख्यमंत्री के बाद अभिषेक बनर्जी भी आए और उन्होंने भीड़ की ओर हाथ हिलाकर अभिवादन किया। उनके साथ तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मंत्री भी थे। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल सहित 11 अन्य राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) मंगलवार को शुरू हुआ। चुनाव आयोग के बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) ने गणना फॉर्म वितरित करने और मतदाताओं की जानकारी एकत्रित करने के लिए घरों का दौरा करना शुरू कर दिया है। राज्य के बाहर रहने वाले निवासियों के लिए आयोग ने गणना फॉर्म भरने की ऑनलाइन सुविधा प्रदान की है , हालांकि तकनीकी समस्याओं के कारण ऑनलाइन सेवा अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के एक अधिकारी ने कहा कि समस्या का समाधान किया जा रहा है और एक-दो दिन में यह सुविधा उपलब्ध होने की उम्मीद है।  

क्राउन प्रिंस के US दौरे से पहले ट्रंप का बड़ा इशारा — क्या सऊदी अरब मानेगा अब्राहम समझौते पर?

वॉशिंगटन  सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) 18 नवंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करने और द्विपक्षीय बातचीत करने के लिए वाइट हाउस जा रहे हैं। इससे इस बात की संभावना बढ़ गई है कि सऊदी अरब अब्राहम अकॉर्ड में शामिल हो सकता है। वाइट हाउस के एक अधिकारी ने सोमवार को क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के यात्रा की जानकारी दी है। क्राउन प्रिंस की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब डोनाल्ड ट्रंप सऊदी अरब को अब्राहम अकॉर्ड में शामिल होने वाले देशों की सूची में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। साल 2020 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान इजरायल के साथ संबंधों को सामान्य बनाने के लिए संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, सूडान और मोरक्को के साथ समझौते किए थे। हालांकि, फिलिस्तीनी राज्य के दर्जे पर ठोस कदम न उठाए जाने के कारण सऊदी अरब अब तक इस अब्राहम अकॉर्ड में शामिल होने से हिचकिचाता रहा है। अब माना जा रहा है कि उनकी अमेरिकी यात्रा में ये हिचकिचाहट दूर हो सकती है। इसके संकेत खुद ट्रंप ने भी दिए हैं। ट्रंप ने क्या दिए संकेत? डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को सीबीएस के "60 मिनट्स" कार्यक्रम में एक साक्षात्कार में कहा कि उनका मानना ​​है कि सऊदी अरब अंततः इस समझौते में शामिल हो जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस महीने की शुरुआत में यह भी कहा था कि उन्हें जल्द ही अब्राहम अकॉर्ड के विस्तार की उम्मीद है और उम्मीद है कि सऊदी अरब भी इस समझौते में शामिल होगा। अगस्त में, उन्होंने मध्य पूर्वी देशों के इस समझौते में शामिल होने के महत्व पर भी जोर दिया था। अमेरिका-सऊदी रक्षा समझौते पर भी चर्चा इस दौरे के दौरान ट्रंप और क्राउन प्रिंस अमेरिका-सऊदी रक्षा समझौते पर भी चर्चा कर सकते हैं। दो हफ़्ते पहले ख़बर दी थी कि सलमान की यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच इस तरह के समझौते पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि “क्राउन प्रिंस के आने पर कुछ समझौते पर हस्ताक्षर करने पर चर्चा चल रही है, लेकिन अभी विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।” तेल और सुरक्षा की गजब साझेदारी बता दें कि सऊदी अरब ने अपने देश की रक्षा के लिए औपचारिक अमेरिकी गारंटी और उन्नत अमेरिकी हथियारों तक पहुँच की माँग की है। सऊदी अरब अमेरिकी हथियारों के सबसे बड़े ग्राहकों में से एक है, और दोनों देशों ने दशकों से इस व्यवस्था के आधार पर मज़बूत संबंध बनाए रखे हैं। अमेरिका सऊदी अरब से तेल की आपूर्ति करता है और बदले में वाशिंगटन सऊदी को सुरक्षा प्रदान करता है। मई में ट्रंप की रियाद यात्रा के दौरान, अमेरिका ने सऊदी अरब को लगभग 142 अरब डॉलर का हथियार पैकेज बेचने पर सहमति जताई थी। ट्रंप ने सलमान द्वारा 600 अरब डॉलर के निवेश के वादे का भी स्वागत किया था और मज़ाक में कहा था कि यह 1 ट्रिलियन डॉलर होना चाहिए।

सीमा पर दुखद हादसा! LoC पर गोली चलने से भारतीय सैनिक ने गंवाई जान

पुंछ  जिले में ड्यूटी दौरान एक जवान के शहीद होने की खबर मिली है। जानकारी के मुताबिक, जिले में नियंत्रण रेखा पर दुर्घटनावश चली गोली से जवान शहीद हो गया। जानकारी के मुताबिकि, जिले में भारत पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर स्थित जलास क्षेत्र में सोमवार को दुर्घटनावश गोली चलने से भारतीय सेना का एक जवान नायक अमरजीत सिंह पुत्र रमेश कुमार निवासी गांव जंजनवाला तहसील नरवाना जिला जिंद हरियाणा शहीद हो गया।  शव को पुलिस एवं सेना द्वारा पुंछ के राजा सुखदेव सिंह जिला अस्पताल लाया गया जहां मैडिकल सुप्रिडेंट डॉ. मोहम्मद शफीक की देखरेख में शव का पोस्टमार्टम करवाया गया और उसके उपरांत कानूनी कार्रवाई करने के साथ ही शव को सैना को सोंप दिया। जहां से उसे आज अंतिम संस्कार के लिए उसके घर भेजा जाएगा।  

रेलवे का करिश्मा! इस जगह पर चार दिशाओं से गुजरती ट्रेनें, लेकिन हादसा ज़ीरो

नई दिल्ली   सोचिए, एक ऐसी जगह जहां उत्तर से दौड़ती ट्रेन दक्षिण की ओर जा रही ट्रेन को काटे, पश्चिम की रेल पूरब की ओर बढ़े — और फिर भी सब कुछ सुचारू रूप से चलता रहे! कोई रुकावट नहीं, कोई हादसा नहीं। सुनने में असंभव लगता है न? लेकिन यह अजूबा बिल्कुल हकीकत है — और यह जगह है महाराष्ट्र का नागपुर, जहां मौजूद है भारत का अनोखा “डायमंड क्रॉसिंग”। एक स्टेशन, चार दिशाएं, एक ही बिंदु नागपुर जंक्शन भारत के सबसे प्रमुख रेलवे नेटवर्कों में से एक है। यहां देश के चार बड़े रेल मार्ग — मुंबई-हावड़ा, दिल्ली-चेन्नई, काजीपेट-नागपुर, और नागपुर-इटारसी — एक दूसरे को इस तरह काटते हैं कि ऊपर से देखने पर पटरियों का आकार बिल्कुल हीरे (डायमंड) जैसा दिखता है। इसी कारण इस स्थान को ‘डायमंड क्रॉसिंग’ नाम मिला। यह संरचना केवल देखने में ही आकर्षक नहीं, बल्कि रेलवे इंजीनियरिंग की बारीकी और तकनीकी कौशल का अद्भुत उदाहरण भी है। यहां रोज़ाना सैकड़ों एक्सप्रेस, सुपरफास्ट और मालगाड़ियां गुजरती हैं — फिर भी किसी तरह का व्यवधान नहीं होता।  कैसे बचती हैं ट्रेनें टकराने से? यह सवाल अक्सर लोगों के मन में उठता है कि जब इतनी ट्रेनें एक साथ यहां से गुजरती हैं, तो फिर दुर्घटना कैसे नहीं होती। इसका जवाब है — अत्याधुनिक नियंत्रण प्रणाली और मानवीय सतर्कता का अद्भुत संगम।   इंटरलॉकिंग सिस्टम यहां इंटरलॉकिंग सिस्टम लागू है, जो एक समय में केवल एक ट्रेन को ही क्रॉसिंग पॉइंट पार करने की अनुमति देता है। इस प्रणाली से यह सुनिश्चित होता है कि किसी भी ट्रेन को गलत ट्रैक पर सिग्नल न मिले। स्वचालित सिग्नलिंग तकनीक नागपुर का डायमंड क्रॉसिंग ऑटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम से जुड़ा है। जैसे ही एक ट्रेन क्रॉसिंग पार करती है, सिस्टम तुरंत अगले ट्रैक के सिग्नल को सक्रिय कर देता है। यह व्यवस्था ट्रेन की दिशा, गति और समय को ध्यान में रखकर सिग्नल बदलती है — जिससे हर सफर सुचारू और सुरक्षित बनता है। मानवीय सतर्कता तकनीक के साथ-साथ यहां रेलवे कर्मचारियों की निगरानी भी बराबर जारी रहती है। सिग्नल ऑपरेटर और स्टेशन मास्टर लगातार ट्रेनों की स्थिति पर नज़र रखते हैं। यह तालमेल तकनीक और मानव दक्षता के बीच संतुलन का उत्कृष्ट उदाहरण है। रेलवे इंजीनियरिंग का गौरव नागपुर का यह क्रॉसिंग केवल एक रेल संरचना नहीं, बल्कि यह दर्शाता है कि भारतीय रेलवे ने सुरक्षा, योजना और तकनीकी प्रबंधन में कितना शानदार विकास किया है। चार दिशाओं से आने वाली गाड़ियों को बिना किसी बाधा के पार करवाना, एक सटीक गणित और मशीनरी की बेहतरीन समझ का परिणाम है।