samacharsecretary.com

टीपू-अकबर से ‘ग्रेट’ हटाने पर सियासी घमासान, CM हिमंता का बयान सुर्खियों में

  एनसीईआरटी ने इतिहास के पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव किया है। एनसीईआरटी ने बादशाह अकबर और टीपू सुल्तान  जैसे महत्वपूर्ण मुगल शासकों  के सामने से महान (ग्रेट) शब्द को हटा दिया है। यह फैसला लंबे समय से चल रही उस बहस को आगे बढ़ाता है, जिसमें भारतीय इतिहास को सही और संतुलित नजरिए से दिखाने की मांग की जा रही थी। एनसीईआरटी के इस फैसले का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) नेता सुनील आंबेकर और असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने स्वागत किया है। वहीं एनसीईआरटी के इस फैसले का विपक्ष ने विरोध किया है। हालांकि अभी ये सिर्फ दावा किया जा रहा है। एनसीईआरटी ने फिलहाल इसपर कुछ भी प्रतिक्रिया नहीं दी है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने अपनी खुशी जताते हुए कहा कि बहुत अच्छा हुआ है… मैंने अभी देखा नहीं है कि ऐसा हुआ। लेकिन अगर ये काम कर दिया गया है तो NCERT को मेरी ओर से धन्यवाद। आगे वह बोले- “टीपू-इपू को मारो एकदम, जहाँ भेजना है उधर भेज दो। समुद्र में फेंक दो। वहीं RSS नेता सुनील आंबेकर ने कहा कि कक्षा 9, 10 और 12 की किताबों में ये संशोधन अगले साल से लागू होंगे। इन बदलावों से नई पीढ़ी को इतिहास की पूरी सच्चाई बताने में मदद मिलेगी। RSS नेता ने साफ किया कि किसी भी ऐतिहासिक व्यक्ति को किताबों से पूरी तरह हटाया नहीं गया है। इसके बजाय उनके अच्छे और बुरे.. यानी सकारात्मक और क्रूर, दोनों कामों का सही मूल्यांकन पेश किया गया है।   इतिहास की किताबों में सकारात्मक बदलाव RSS नेता सुनील आंबेकर के दावे के अनुसार, NCERT की इतिहास की पाठ्यपुस्तकों से अब मुगल शासक अकबर और मैसूर के शासक टीपू सुल्तान के नाम के साथ जुड़े ‘महान’ जैसे विशेषण हटा दिए गए हैं। यह फैसला इस विचार पर आधारित है कि किसी भी शासक को ‘महान’ कहने से पहले उसके सभी तरह के कामों और भारतीय समाज पर पड़े उनके प्रभाव का निष्पक्ष मूल्यांकन होना चाहिए। किस क्लास की किताबों में हुआ बदलाव? दावा किया गया है कि NCERT ने कुल 15 कक्षाओं की पाठ्यपुस्तकों में से 11 कक्षाओं की किताबों में ये सकारात्मक बदलाव लागू कर दिए हैं। कक्षा 9, 10 और 12 की किताबों में ये संशोधन अगले शैक्षणिक वर्ष से पूरी तरह से लागू किए जाएंगे। यह बदलाव धीरे-धीरे लागू किया जा रहा है। इससे छात्रों और शिक्षकों को नए सिलेबस के साथ तालमेल बिठाने में आसानी होगी।

बॉर्डर बदल सकता है! राजनाथ सिंह के संकेत पर शुरू हुई नई राजनीतिक बहस

नई दिल्ली  सिंध क्षेत्र आज भारत का हिस्सा नहीं है। लेकिन हो सकता है कि सीमाएं बदल जाएं और यह क्षेत्र फिर से भारत का हिस्सा बन जाए। यह बातें रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने एक कार्यक्रम के दौरान कहीं। बता दें कि सिंधु नदी के करीब स्थित सिंध प्रांत 1947 में बंटवारे के बाद पाकिस्तान में चला गया था। इस दौरान वहां रहने वाले सिंधी लोग भारत में बस गए थे। रक्षामंत्री ने कहा कि सिंधी हिंदुओं, खासतौर पर लालकृष्ण आडवाणी की पीढ़ी के लोगों ने आज तक भारत से सिंध के अलगाव को स्वीकार नहीं किया है। उन्होंने कहा कि आडवाणी जी ने इस बात का जिक्र अपनी किताब में भी किया है। राजनाथ सिंह ने कहा कि केवल सिंध में ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में हिंदू सिंधु नदी को पवित्र मानते हैं। सिंध के बहुत से मुसलमान भी मानते हैं कि सिंधु नदी का पानी मक्का के आब-ए-जमजम से कम पवित्र नहीं है। उन्होंने कहा कि यह बातें आडवाणी जी की किताब में हैं। राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि आज भले ही सिंध भारत का हिस्सा नहीं है, लेकिन सभ्यतात्मक रूप से सिंध हमेशा भारत का हिस्सा रहेगा। जहां तक जमीन का सवाल है, सीमाएं बदल सकती हैं। कौन जाने, कल सिंध फिर से भारत में शामिल हो जाए। रक्षामंत्री ने कहा कि हमारे सिंध के लोग, जो सिंधु नदी को पवित्र मानते हैं, हमेशा हमारे अपने रहेंगे। चाहे वे कहीं भी रहें, वे हमेशा हमारे होंगे। इससे पहले 22 सितंबर को मोरक्को में भारतीय समुदाय के साथ बातचीत के दौरान सिंह ने कहा था कि उन्हें विश्वास है कि भारत बिना किसी आक्रामक कदम उठाए पीओके वापस पा सकता है, क्योंकि पीओके के लोग कब्जा करने वालों से स्वतंत्रता की मांग कर रहे हैं। सिंह ने कहा था कि पीओके अपने आप हमारा होगा। पीओके में मांगें शुरू हो गई हैं, आपने नारेबाजी तो सुनी ही होगी।

त्रिपक्षीय सहयोग पर जोर: आईबीएसए बैठक में मोदी, लूला और रामाफोसा की संयुक्त सहभागिता

जोहान्सबर्ग भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को जोहान्सबर्ग में भारत-ब्राजील-दक्षिण अफ्रीका (आईबीएसए) नेताओं की बैठक में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने ग्लोबल साउथ के लिए भाग लेने वाले देशों के त्रिपक्षीय सहयोग और प्रतिबद्धता पर चर्चा की। पीएम मोदी के साथ इस बैठक में ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा और दक्षिण अफ्रीका के प्रेसिडेंट सिरिल रामाफोसा भी मौजूद थे। फिलहाल, दक्षिण अफ्रीका ही आईबीएसए की अध्यक्षता कर रहा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार आईबीएसए एक ऐसा फोरम है जो भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका को एक साथ लाता है, जो एक जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। यह तीन अलग-अलग महाद्वीपों के तीन बड़े लोकतंत्र और बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं। इसके बाद, इस समूह को औपचारिक रूप दिया गया और इसका नाम आईबीएसए डायलॉग फोरम रखा गया। तीनों देशों के विदेश मंत्री 6 जून, 2023 को ब्रासीलिया में मिले और 'ब्रासीलिया घोषणा' जारी की। बता दें, 20 नवंबर को पीएम मोदी के दक्षिण अफ्रीका दौरे पर एक खास मीडिया ब्रीफिंग में, विदेश मंत्रालय में आर्थिक संबंध विभाग के सचिव सुधाकर दलेला ने कहा, "जैसा कि आप सभी जानते हैं, भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका तीन महाद्वीपों के तीन लोकतंत्र हैं, जो सभी ग्लोबल साउथ से हैं। और हमारे पास कोऑपरेशन के तीन पिलर के आस-पास आपस में कोऑर्डिनेट करने का एक बहुत ही यूनिक फोरम है। एक है राजनीतिक कोऑर्डिनेशन। दूसरा है त्रिपक्षीय कोऑपरेशन जो हम करते हैं, जिसमें पीपल-टू-पीपल कॉन्टैक्ट शामिल है। और तीसरा, हम ग्लोबल साउथ के देशों के लिए आईबीएसए के तौर पर मिलकर क्या करते हैं, खासकर आईबीएसए फंड के जरिए खाने और भूख के मामले में।" उन्होंने आगे कहा, "यह बैठक, हालांकि समिट के दौरान हो रही है, एक छोटी मीटिंग होगी। मुझे पूरा भरोसा है कि तीनों नेता इस बात की समीक्षा करेंगे कि हमने हाल के दिनों में सहयोग के इन तीन पिलर के तहत क्या किया है। मैं यह भी कहना चाहूंगा कि इसी साल सितंबर में, न्यूयॉर्क में यूएनजीए के दौरान, आईबीएसए के विदेश मंत्रियों ने भी मुलाकात की थी और कुछ ऐसे बिंदुओं पर बयान जारी किया था जिन पर हम एक जैसी सोच वाले देशों के तौर पर आपस में चर्चा करते रहते हैं।" पीएम मोदी ने रविवार को जोहान्सबर्ग में जी20 समिट के दौरान दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति रामफोसा के साथ बैठक की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किए गए वीडियो में दोनों नेता बैठक शुरू करने से पहले एक-दूसरे का गर्मजोशी से स्वागत करते दिख रहे हैं। मीटिंग में विदेश मंत्री एस जयशंकर और आर्थिक विभाग के विदेश सचिव सुधाकर दलेला समेत दूसरे अधिकारी मौजूद थे।

1500 किमी दूर मिला लापता डॉग! समुद्र तट से गायब होकर कर दिया सबको हैरान

नई दिल्ली चीन से इमोशनल कहानी सामने आई है, जिसने दुनिया भर के लोगों का दिल छू लिया है। एक लैब्राडोर पपी, जिसका नाम ‘सितंबर’ है। वह तीन महीने पहले अपनी मालकिन से बिछड़ गया था। मालकिन ने हर संभव प्रयास किए, लेकिन सितंबर कहीं नहीं मिला। आखिरकार, वह 1500 किलोमीटर दूर एक दूसरे प्रांत में मिला। दोनों का मिलन किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं लगा। समुद्र किनारे से गायब हुआ सितंबर शेडोंग प्रांत की रहने वाली गाओ अपने कुत्ते 'सितंबर' के साथ 13 अगस्त को किंगदाओ बीच पर घूमने गई थीं। भीड़-भाड़ के बीच सितंबर अचानक नजरों से ओझल हो गया। गाओ ने घबराकर सीसीटीवी कैमरे चेक करवाए, जिसमें दिखा कि सितंबर किसी दूसरे कुत्ते और उसके मालिक के साथ चलता हुआ बीच से दूर निकल गया। यह देखकर गाओ ने कुत्ते को खोजने की हर संभव कोशिश की। ऑनलाइन पोस्ट्स डालीं, एनिमल शेल्टर्स में चक्कर लगाए और कई लोगों से मदद मांगी, लेकिन सफलता नहीं मिली। एक अजनबी ने बदली कहानी की दिशा 1500 किलोमीटर दूर हुनान प्रांत के चांग्शा में एक महिला झोउ ने बारिश के दौरान एक कुत्ते को आवारा कुत्तों के साथ भटकते हुए देखा। उसे कुत्ते पर दया आ गई। वह उसको अपने घर ले आई। झोउ ने सोशल मीडिया पर कुत्ते का वीडियो पोस्ट किया। बताया कि यह किसी का खोया हुआ पालतू जानवर है। किस्मत देखिए, यह वीडियो सीधा गाओ तक पहुंचा। वीडियो देखते ही वह भावुक होकर रो पड़ीं, क्योंकि वह सितंबर ही था।   गाओ का साझा किया दर्द गाओ ने कहा कि किसी ने सितंबर को चुरा लिया था या कोई पर्यटक उसे अपने साथ ले गया होगा। तीन महीने की जुदाई ने उसे तोड़ दिया था, लेकिन आखिरकार उसे पता चला कि सितंबर सुरक्षित है, तो वह खुशी से भर उठीं।

‘रूस की योजना, हमारी नहीं’—कनाडा में ट्रंप की गाज़ा पॉलिसी पर अमेरिकी सीनेटरों का जोरदार प्रहार

वाशिंगटन रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दृष्टिकोण के आलोचक कई सीनेटर ने शनिवार को कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बातचीत के दौरान उन्हें बताया कि जिस शांति प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए ट्रंप द्वारा कीव पर दबाव डाला जा रहा है वह असल में अमेरिकी योजना नहीं, बल्कि रूसियों की ‘‘इच्छा सूची'' है। यह 28-बिंदु वाला शांति प्रस्ताव ट्रंप प्रशासन और क्रेमलिन द्वारा तैयार किया गया था, जिसमें यूक्रेन को शामिल नहीं किया गया था। इस प्रस्ताव में कई ऐसे रूसी मांगों को शामिल किया गया है जिन्हें यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दर्जनों बार नकार दिया है। इसमें यूक्रेन द्वारा बड़े भूभागों को छोड़ना भी शामिल है।  ट्रंप का कहना है कि वह चाहते हैं कि यूक्रेन इस प्रस्ताव को अगले सप्ताह के अंत तक स्वीकार कर ले। अमेरिका के कई सीनेटर ने शनिवार को पहले कहा था कि इससे मॉस्को को उसके आक्रामकता के लिए इनाम मिलेगा और ऐसे दूसरे नेताओं को एक संदेश भी देगा जिन्होंने अपने पड़ोसियों को धमकाया है। इन सीनेटर का इस योजना के खिलाफ विरोध अन्य अमेरिकी कानून निर्माताओं की आलोचना के बाद सामने आया है, जिनमें कुछ रिपब्लिकन सीनेटर भी शामिल हैं। हालांकि इनमें से कोई भी इसे रोकने की शक्ति नहीं रखता। ये सीनेटर कनाडा में एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सम्मेलन में बोल रहे थे। इन सीनेटर में एक डेमोक्रेटिक, एक निर्दलीय और एक रिपब्लिकन शामिल थे। मेन के निर्दलीय सीनेटर एंगस किंग ने कनाडा में हैलीफ़ैक्स इंटरनेशनल सिक्योरिटी फोरम में एक पैनल चर्चा के दौरान कहा, ‘‘यह एक तरह से आक्रामकता को पुरस्कृत करने जैसा है। यह बिल्कुल साफ है। रूस द्वारा पूर्वी यूक्रेन पर दावा करने का कोई नैतिक, कानूनी, या राजनीतिक आधार नहीं है।'' सीनेट विदेश संबंध समिति सदस्य किंग ने इस प्रस्ताव की तुलना 1938 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री नेविल चेम्बरलेन के एडॉल्फ हिटलर के साथ हुए म्यूनिख समझौते से की, जो तुष्टीकरण का एक ऐतिहासिक असफल कार्य। किंग और डेमोक्रेटिक सेनेटर जीन शाहीन ने बाद में कहा कि उन्होंने और फोरम में उनके साथी सेनेटर ने रुबियो से बात की।  किंग ने कहा कि रुबियो ने उन्हें बताया कि यह योजना ‘‘प्रशासन की नहीं थी'' बल्कि ‘‘रूस की इच्छा सूची'' थी। शाहीन ने कहा कि रुबियो यूरोपी देशों और यूक्रेन के नेताओं से बातचीत के लिए जिनेवा जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि रुबियो ने उनसे और साउथ डकोटा से रिपब्लिकन सेनेटर माइक राउंड्स से बात की। शाहीन ने कहा, ‘‘यह एक रूसी प्रस्ताव है। इस योजना में कुछ ऐसा है जो पूरी तरह से अस्वीकार्य है।'' राउंड्स ने भी कहा, "यह हमारा शांति प्रस्ताव नहीं है। ऐसा लगता है जैसे इसे रूसी में लिखा गया हो।"    

गाज़ा में बढ़ी तबाही: महिलाओं-बच्चों सहित 24 की जान गई

गाजा इजराइल की सेना ने शनिवार को कहा कि उसने हमास आतंकवादियों के खिलाफ हवाई हमले किए हैं। वहीं, गाजा में स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि इजराइली हमले में कम से कम 44  लोग मारे गए और बच्चों सहित 80 लोग घायल हो गए। शिफा अस्पताल के प्रबंध निदेशक रामी महन्ना ने बताया कि गाजा शहर के रिमल इलाके में एक वाहन को निशाना बनाकर किये गए हमले में सात फलस्तीनी मारे गए और 18 अन्य घायल हो गए। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।  अस्पताल के निदेशक मोहम्मद अबू सेल्मिया ने बताया कि घायलों में ज़्यादातर बच्चे हैं। मध्य गाजा में अल-अवदा अस्पताल के पास एक मकान को निशाना बनाकर किए गए एक अन्य हमले में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई और 11 अन्य घायल हो गए। अस्पताल के अधिकारी ने बताया कि मध्य गाजा के नुसेरात शिविर में एक मकान पर हुए हमले में एक बच्चे की मौत हो गई और 16 अन्य घायल हो गए। अल-अक्सा अस्पताल के अनुसार, मध्य गाजा के दीर अल-बलाह में एक मकान को निशाना बनाकर किए गए हमले में एक महिला समेत तीन लोगों की मौत हो गई। इजराइली सेना ने एक बयान में कहा कि उसने हमास के खिलाफ हमले शुरू कर दिए हैं, क्योंकि एक ‘‘सशस्त्र आतंकवादी'' इजराइली नियंत्रण वाले इलाके में घुस आया और दक्षिणी गाजा में सैनिकों पर गोलीबारी की। बयान में कहा गया कि किसी भी सैनिक को चोट नहीं आई। सेना ने कहा कि आतंकवादी ने उस सड़क का इस्तेमाल किया, जिससे मानवीय सहायता क्षेत्र में पहुंचाई जाती है। एक अलग बयान में, इजराइल की सेना ने कहा कि उसके सैनिकों ने रफा क्षेत्र में तीन ‘‘आतंकवादियों'' को मार गिराया तथा दो अलग-अलग घटनाओं में उत्तरी गाजा में इजराइली कब्जे वाले क्षेत्रों में घुसकर सैनिकों की ओर बढ़ने वाले चार लोगों पर गोलीबारी की, जिसमें दो हमलावर मारे गए।    

ब्रैम्पटन हादसा: मकान में आग लगने से तीन पंजाबियों की दर्दनाक मौत, तीसरी मंजिल से कूदे कई लोग

वैंकूवर  कनाडा के ब्रैम्पटन शहर में बानस वे (Banis Way) स्थित एक किराये के घर में गुरुवार देर रात लगी भीषण आग में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि गर्भवती महिला समेत चार लोगों ने तीसरी मंजिल से छलांग लगाई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। मृतक और घायल सभी एक ही पंजाबी मूल के परिवार के बताये जा रहे हैं। परिवार के दो सदस्य अभी भी लापता हैं। आग में पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके इस घर का मालिक भी पंजाब का रहने वाला बताया जा रहा है। अग्निशमन विभाग को रात करीब ढाई बजे आग लगने की सूचना मिली। जब फायर ब्रिगेड टीम मौके पर पहुंची, तो घर की ऊपरी मंजिल पूरी तरह आग की चपेट में थी। अधिकारियों ने तुरंत आसपास के घर खाली करवाए और आग बुझाने का अभियान शुरू किया। मलबे से एक बच्चे सहित दो लोगों के शव बरामद हुए। गर्भवती महिला व एक 5 वर्षीय बच्चे सहित चार अन्य लोग तीसरी मंजिल की खिड़की से कूदकर बाहर निकले, लेकिन वे गंभीर रूप से घायल हो गए। इनमें से एक की हालत नाजुक बताई जा रही है। अग्निशमन कर्मी शुक्रवार शाम तक भी मलबे में तलाश अभियान चलाते रहे, ताकि लापता दो परिजनों का पता लगाया जा सके। आग से जुड़े हुए जड़वा (सेमी-डिटैच्ड) घर को भी भारी नुकसान हुआ है। ब्रैम्पटन के मेयर पैट्रिक ब्राउन ने जानकारी दी कि घर के विदेशी मालिक ने वर्ष 2020 में इसमें सब-यूनिट बनाने के लिए आवेदन किया था। निरीक्षण के लिए अधिकारी कई बार पहुंचे, लेकिन भीतर रहने वाले लोगों ने उन्हें अंदर जाने नहीं दिया। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक यह घर करीब छह वर्ष पहले भारत में रहने वाले व्यक्ति ने एक रियल्टर के माध्यम से खरीदा था और कभी स्वयं यहां नहीं आया। घर की देखभाल और किराये की जिम्मेदारी उसने ब्रैम्पटन में रहने वाले एक परिचित को सौंप रखी थी। पड़ोसियों ने बताया कि पीड़ित परिवार मालिक के बारे में पूछने पर जानकारी देने से बचता था। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है। जांच एजेंसियां विदेशी मालिक के संपर्क सूत्रों की पड़ताल कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार घर का मालिक पंजाब सरकार का एक अधिकारी है। ओंटारियो के मुख्यमंत्री ने हादसे में मारे गए लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। पीड़ित परिवार की आधिकारिक पहचान अभी जारी नहीं की गई है। स्थानीय समुदाय इस त्रासदी से स्तब्ध है और जांच पूरी होने का इंतजार कर रहा है।

कैंपस में नमाज़ अदा करने पर हंगामा, हिंदू संगठनों का विरोध—छात्रों ने जताया खेद

मुंबई  महाराष्ट्र के कल्याण स्थित आइडियल कॉलेज में कुछ छात्रों ने खाली क्लासरूम में नमाज अदा की, जिसका वीडियो वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया। इस घटना से कॉलेज कैंपस में भारी तनाव की स्थिति बन गई। पुलिस के साथ-साथ दक्षिणपंथी संगठनों का ध्यान भी इस ओर गया। हालांकि, किसी तरह की हिंसा की खबर नहीं है और स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया है। वीडियो वायरल होने के बाद विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता कॉलेज पहुंचे। उन्होंने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। हिल लाइन पुलिस तुरंत कैंपस पहुंची और प्रदर्शनकारियों को शांत कराया।   कॉलेज प्रशासन के अनुसार, फार्मेसी डिपार्टमेंट के कुछ छात्रों ने खाली पड़ी क्लासरूम में कुछ मिनट के लिए नमाज पढ़ी थी। एक शख्स ने बताया, 'छात्रों का इरादा कोई विवाद पैदा करना या किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।' प्रशासन ने छात्रों को बुलाकर चर्चा की, जिसमें उन्होंने नमाज पढ़ने की बात स्वीकार की। उन्होंने कॉलेज प्रशासन और कार्यकर्ताओं से माफी मांग ली, ताकि गलतफहमी दूर हो सके। कॉलेज की ओर से क्या कहा गया कॉलेज प्रशासन ने दोहराया कि संस्थान के नियमों और अनुशासन का पालन सबसे ऊपर है। कॉलेज कैंपस में किसी भी तरह की धार्मिक गतिविधि की इजाजत नहीं है। भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए उचित कदम उठाए जाएंगे। इन छात्रों के खिलाफ भी उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने स्थिति पूरी तरह नियंत्रित होने के बाद कुछ देर कैंपस की निगरानी की और फिर चली गई। मामला फिलहाल शांत बताया जा रहा है।  

SIR सिस्टम ने कर दिखाया कमाल: 37 साल बाद मिला लापता बड़ा बेटा, पढ़िए पूरी कहानी

कोलकाता  पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में SIR के दौरान एक कमाल की घटना हुई। मतदाता सूची की संशोधन प्रक्रिया ने लगभग चार दशक से बिछड़े एक परिवार को फिर से मिला दिया। चक्रवर्ती परिवार ने 1988 में अपने बड़े बेटे विवेक चक्रवर्ती को खो दिया था। घर से निकलने के बाद विवेक का कोई अता-पता नहीं चला। बरसों तक खोजबीन की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। अब तक उन्हें उम्मीद ही नहीं थी कि कभी फिर मिलन होगा। मगर, एसआईआर अभियान ने वो दरवाजा खोल दिया जो वे बंद समझ चुके थे।   विवेक के छोटे भाई का नाम प्रदीप चक्रवर्ती है। वह उसी इलाके के बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) हैं। एसआईआर के दौरान हर फॉर्म पर उनका नाम और मोबाइल नंबर छपा था। विवेक का बेटा कोलकाता में रहता है जो अपने चाचा के बारे में कुछ नहीं जानता था। उसने दस्तावेजों के लिए मदद मांगने की खातिर प्रदीप को फोन किया। पहले कागजात को लेकर बातें हुईं, लेकिन धीरे-धीरे परिवार की कड़ियां जुड़ने लगीं। प्रदीप ने बताया, 'मेरा बड़ा भाई आखिरी बार 1988 में घर आया था। उसके बाद से गायब है। हमने हर जगह ढूंढा। मगर, उसने सारे रिश्ते तोड़ दिए। जब इस लड़के के जवाब हमारे परिवार की उन बातों से मिलने लगे जो सिर्फ हम ही जानते हैं, तब मुझे एहसास हुआ कि मैं अपने भतीजे से बात कर रहा हूं।' आखिर कैसे खुला पूरा राज इस तरह 37 साल से लापता चक्रवर्ती परिवार का बड़ा बेटा मिल गया। दोनों तरफ खुशी की लहर थी। इसके बाद प्रदीप ने खुद विवेक से बात की। 37 साल की खामोशी के बाद दो भाइयों की आवाजें एक-दूसरे तक पहुंचीं। भावुक होकर विवेक ने कहा, 'इस भावना को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। 37 लंबे साल बाद मैं आखिरकार घर लौट रहा हूं। मैंने घर के सभी लोगों से बात कर ली है। खुशी से भरा हुआ हूं। मैं चुनाव आयोग को धन्यवाद देता हूं, क्योंकि एसआईआर प्रक्रिया न होती तो यह मिलन कभी संभव नहीं होता।' इस तरह मतदाता सूची संशोधन अभियान ने न सिर्फ वोटर लिस्ट को दुरुस्त किया, बल्कि एक टूटे परिवार को फिर से जोड़ दिया।  

चंडीगढ़ प्रशासन पर प्रस्तावित विधेयक टला, सरकार ने सत्र से किया बाहर

नई दिल्ली  केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ की वैधानिक स्थिति बदलने के बारे में आ रही रिपोर्टों के बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बयान जारी किया है। इसमें कहा गया कि अभी चंडीगढ़ के लिए केंद्र की ओर से कानून बनाने की प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास विचाराधीन है। इस संबंध में संसद के शीतकालीन सत्र में विधेयक लाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। इन रिपोर्टों के कारण सियासी हलकों में गरगर्मी बढ़ी हुई थी। इसे देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि चंडीगढ़ के साथ पंजाब या हरियाणा के परंपरागत संबंधों को बदलने के बारे में कोई बातचीत नहीं चल रही है।   पोस्ट में कहा गया, 'चंडीगढ़ के लिए सिर्फ केंद्र सरकार की ओर से कानून बनाने की प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रस्ताव अभी केंद्र सरकार के स्तर पर विचाराधीन है। इस प्रस्ताव पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। इस प्रस्ताव में किसी भी तरह से चंडीगढ़ की शासन-प्रशासन की व्यवस्था या चंडीगढ़ के साथ पंजाब या हरियाणा के परंपरागत संबंधों को बदलने की कोई बात नहीं है। चंडीगढ़ के हितों को ध्यान में रखते हुए सभी हितधारकों से पर्याप्त विचार विमर्श के बाद ही उचित निर्णय लिया जाएगा। इस विषय पर चिंता की आवश्यकता नहीं है। आने वाले संसद के शीतकालीन सत्र में इस आशय का कोई विधेयक प्रस्तुत करने की केंद्र सरकार की कोई मंशा नहीं है।' पंजाब के सीएम मान की तीखी प्रतिक्रिया इससे पहले, मीडिया रिपोर्टों में कहा गया कि सरकार केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ की वैधानिक स्थिति बदलने की दिशा में काम कर रही है। इससे चंडीगढ़ के प्रशासक के रूप में पंजाब के राज्यपाल के अधिकार कम हो जाएंगे। यह कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार चंडीगढ़ में दिल्ली की तरह उपराज्यपाल का पद सृजित कर सकती है। इस पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि यह एक बड़ा अन्याय है। भाजपा सरकार पंजाब की राजधानी छीनने की साजिश कर रही है। उन्होंने कहा, ‘चंडीगढ़ पहले भी पंजाब का अभिन्न हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा। कोई भी व्यक्ति या संस्था इससे इनकार नहीं कर सकता कि मातृ राज्य होने के नाते पंजाब का अपनी राजधानी चंडीगढ़ पर पूरा अधिकार है।’