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हादसे की दिल दहला देने वाली घटना: तेल इकट्ठा करते समय विस्फोट, 42 लोगों की दर्दनाक मौत

अबुजा मध्य नाइजीरिया में एक तेल टैंकर में हुए विस्फोट में कम से कम 42 लोगों की मौत हो गई है। एक सहायताकर्मी ने यह जानकारी दी। नाइजर राज्य आपातकालीन सेवा के प्रमुख अब्दुल्लाही बाबा आरा ने बताया कि हादसे में 52 अन्य लोग को चोटें आई हैं, जिनका एक अस्पताल में इलाज चल रहा है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण पलटे हुए टैंकर से तेल इकट्ठा करने के लिए दौड़े, जिसमें अचानक विस्फोट हो गया और भीषण आग लग गई। भीषण आग में कई लोग बुरी तरह जल गए और उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया और घायलों को इलाज के लिए पास के एक अस्पताल ले जाया गया। यह दुर्घटना नाइजर राज्य के कच्चा स्थानीय सरकारी क्षेत्र में बीडा-अगाई सड़क के किनारे एस्सान और बादेगी समुदायों के पास हुई। नाइजर के गर्वनर मोहम्मद उमरु बागो ने पीड़ितों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए इस घटना को ‘चिंताजनक, दुर्भाग्यपूर्ण और दयनीय’ बताया। गर्वनर के मुख्य प्रेस सचिव बोलोगी इब्राहिम ने एक बयान में कहा, “ यह बेहद निराशाजनक है कि कई जागरूकता अभियानों के बावजूद लोग गिरे हुए टैंकर के पास जाकर उसका सामान उठा रहे हैं। ” यह तेल टैंकर दक्षिणी नाइजीरिया के लागोस से उत्तर की ओर जा रहा था। देश में सड़क दुर्घटनाओं के लिए सड़कों की खराब स्थिति एक प्रमुख कारण है। इस साल जनवरी में नाइजर राज्य के ही सुलेजा के पास लगभग 60,000 लीटर पेट्रोल ले जा रहा एक ट्रक पलट गया, जिसमें कम से कम 86 लोगों की मौत हो गई और लगभग 70 अन्य घायल हो गए।

भारतीय मूल ड्राइवर के कारण अमेरिका में सड़क त्रासदी, 3 लोगों की मौत

वॉशिंगटन  अमेरिका में एक ट्रक ड्राइवर ने कई वाहनों को उड़ा डाला। तेजी रफ्तार ट्रक एक के बाद कई वाहनों को टक्कर मारता गया, जिनमें कइयों के परखच्चे उड़ गए। इस घटना में तीन लोगों की मौत हो गई है। इसका पूरा वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यह वीडियो उस ट्रक में लगे डैशकैम से ही रिकॉर्ड हुआ था, जिसे आरोपी चला रहा था। इस मामले में आरोपी जशनप्रीत सिंह है। अमेरिका में आरोप लग रहे हैं कि जशनप्रीत सिंह अवैध प्रवासी था और 2022 में अमेरिका में घुस आया था। इस तरह अमेरिका में अवैध प्रवासियों का मामला फिर से तूल पकड़ सकता है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इसके लिए जो बाइडेन की पॉलिसी को जिम्मेदार ठहराया है। फिलहाल 21 साल के जशनप्रीत सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है। उस पर नशे में गाड़ी चलाते हुए कत्ल के इरादे से लोगों को कुचलने का आरोप है। वीडियो में दिखता है कि सड़क पर ट्रैफिक काफी स्लो है। इसके बाद भी जशनप्रीत सिंह तेजी से ट्रक को आगे बढ़ाते हुए कई वाहनों को टक्कर मारता है। अमेरिकी मीडिया में दावा किया जा रहा है कि 2022 में जशनप्रीत सिंह अवैध रूप से अमेरिकी सीमा में घुसा था। उसे बॉर्डर पैट्रोल एजेंट्स ने हिरासत में भी लिया था। कहा जा रहा है कि जो बाइडेन प्रशासन के नियमों के चलते उसे छोड़ना पड़ा था। तब प्रशासन ने नियम बनाया था कि डिटेंशन पॉलिसी के अलावा भी लोगों को विकल्प होंगे और उनकी सुनवाई की जाएगी। जशनप्रीत सिंह ने जिस ट्रक से यह हादसा किया है, उसके ही डैशकैम का वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें दिखता है कि वह एक एसयूवी में जोरदार टक्कर मारता है, जिसमें सवार तीन लोगों की मौत हो जाती है। इसके अलावा कई लोग घायल भी हुए हैं। फिलहाल मृतकों की पहचान सामने नहीं आई है। इस हादसे में जशनप्रीत सिंह भी घायल है। इसके अलावा उसके साथ टायर चेंज करने में सहायता के लिए बैठा एक मैकेनिक भी घायल हुआ है। पुलिस का कहना है कि जशनप्रीत सिंह ने ट्रैफिक में कोई ब्रेक नहीं लगाया और स्पीड भी जस की तस बनी रही। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि वह नशे के प्रभाव में था और उसे होश ही नहीं था कि आखिर हो क्या रहा है। उसके नशे में होने की पुष्टि मेडिकल टेस्ट में हो चुकी है।  

सोनम वांगचुक की पत्नी ने SC में पूछा: क्या अब हमारे अधिकार खत्म हो गए हैं?

नई दिल्ली राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत ऐहतियातन हिरासत में रखे गए ऐक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो ने राज्य और केंद्र की एजेंसियों पर मौलिक अधिकार हनन करने का आरोप लगाया है। सुप्रीम कोर्ट में की गई शिकायत में गीतांजलि ने आरोप लगाया है कि जब वह जोधपुर जेल में बंद अपने पति से मिलने जा रही थीं, तब खुफिया ब्यूरो और राजस्थान पुलिस के लोगों ने उनका पीछा किया और पति से मिलने के दौरान उन पर कड़ी निगरानी रखी। दायर शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य और उसकी एजेंसियां ​​उनके हर कदम पर नजर रखती हैं, हस्तक्षेप करती हैं और यहाँ तक कि उन्हें खिड़कियों पर पर्दे लगाकर गाड़ियों में ले जाती हैं। उन्होंने अदालत से सवाल किया कि क्या NSA के तहत प्रतिबंधित व्यक्ति के परिवार के सदस्य की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और कहीं भी आने-जाने की आजादी का अधिकार समाप्त हो जाता है। हवाई अड्डे पर उतरते ही रोक लिया गीतांजलि ने सुप्रीम कोर्ट को विस्तार से बताया है कि कैसे इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के अधिकारियों और राजस्थान पुलिस के अधिकारियों ने 7 अक्टूबर और 11 अक्टूबर को जोधपुर सेंट्रल जेल में अपने पति से मिलने जाने के दौरान उन्हें हवाई अड्डे पर उतरते ही रोक लिया था। उन्होंने एक हलफनामा दायर कर शिकायत की है कि दोनों यात्राओं के दौरान एजेंसियों के आचरण से भारत के एक स्वतंत्र नागरिक के रूप में उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मौलिक अधिकार प्रभावित हुए हैं। पति से मुलाकात के दौरान मेरे साथ रहे उन्होंने अदालत को बताया, "जैसे ही मैं प्लेन से उतरी और जोधपुर हवाई अड्डे से बाहर आई, वैसे ही आईबी और राजस्थान पुलिस के अधिकारी मेरे पास आ गए और मुझे अपनी कार में बैठने को कहा, जिसकी खिड़कियों पर सफेद पर्दे लगे थे। इससे सबकुछ ओझल हो गया। फिर वे मुझे मुलाकात के लिए जेल ले गए। ये अधिकारी मुझे जेल अधीक्षक के कार्यालय ले गए और पूरी मुलाकात के दौरान मेरे साथ रहे। हर मुलाकात से पहले, वे मुझसे मेरी यात्रा का विवरण और जोधपुर में मेरे ठहरने का समय पूछते थे।" जोधपुर में किसी और से मिलने नहीं दिया मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि गीतांजलि ने आरोप लगाया है कि जब वह पति सोनम वांगचुक से मिल रही थीं, तब पूरी मुलाकात के दौरान दो अधिकारी नजदीक में बैठे रहे और उनकी पूरी बात सुनते रहे। इतना ही नहीं अधिकारियों ने कानूनी सहायता के लिए पति के निर्देशों वाले नोट्स की तस्वीरें भी खींचीं। गीतांजलि ने आरोप लगाया है कि उन्हें जोधपुर में किसी और से मिलने नहीं दिया गया और जेल से निकलते ही उन्हें रेलवे स्टेशन तक ले जाया गया, जबकि ट्रेन खुलने में काफी समय था। उन्होंने कहा कि उनके एस्कॉर्ट भी उनके साथ ट्रेन में चढ़े और जोधपुर से आगे दो घंटे तक यात्रा करते रहे। बाद मेड़ता रोड जंक्शन पर उतर गए। पिछले महीने हुई थी वांगचुक की गिरफ्तारी बता दें कि सोनम वांगचुक को पिछले सितंबर में लेह में हुए हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA), 1980 के तहत 26 सितंबर को हिरासत में ले लिया गया था। इसके बाद उन्हें जोधपुर सेंट्रल जेल में स्थानांतरित कर दिया गया है। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे। लद्दाख को राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई थी। गीतांजलि ने सुप्रीम कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर रखी है। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन वी अंजारिया की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है।  

धर्म में कोई जाति-सीमा नहीं, हाईकोर्ट ने मंदिर में पुजारी नियुक्ति पर जताई स्पष्ट राय

तिरुअनंतपुरम मंदिर का पुजारी किसी खास जाति या फिर वंश से जुड़ा व्यक्ति होगा, यह धर्म सम्मत नहीं है। केरल हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए यह बात कही है। अदालत ने कहा कि यह हिंदू धर्म के ग्रंथों में कहीं भी वर्णित नहीं है कि किसी विशेष जाति का शख्स ही मंदिर का पुजारी हो सकता है या फिर किसी वंश का व्यक्ति ही बन सकता है। यदि कोई ऐसा चाहता है कि किसी खास जाति के लोग ही मंदिर के पुजारी हों तो उसे संविधान से भी कोई संरक्षण नहीं मिल सकता। जस्टिस राजा विजयराघवन और जस्टिस केवी जयकुमार ने त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड और केरल देवस्वम रिक्रूटमेंट बोर्ड की ओर से सिर्फ तंत्र विद्यालयों की ओर से अनुभव प्रमाण पत्र रखने वालों की भर्ती पर यह बात कही। केरल में अखिल केरल तंत्री समाजम नाम की एक सोसायटी है। इस सोसायटी से जुड़े करीब 300 परंपरागत तंत्री परिवार जुड़े हैं। यह स्कूल सिखाता है कि कैसे मंदिरों में पुजारियों को परंपराओं का निर्वाह करना चाहिए और पूजा करानी चाहिए। इसी को लेकर अर्जी दाखिल हुई थी कि आखिर किसी एक खास स्कूल या वंश परंपरा से निकले लोगों को ही पुजारी के रूप में कैसे भर्ती किया जा सकता है। अर्जी में सवाल उठाया गया कि आखिर यह मांग कैसे की जा सकती है कि किसी खास स्कूल से आपकी डिग्री होगी, तभी आपको पुजारी के रूप में भर्ती किया जाएगा। इस पर अदालत ने कहा है कि हिंदू धर्म में ऐसी कोई परंपरा या विधान नहीं है कि किसी जाति या वंश से जुड़े लोगों को ही मंदिर के पुजारी के रूप में भर्ती किया जाएगा। बेंच ने इस दौरान 1972 के सुप्रीम कोर्ट के सेशम्मल बनाम तमिलनाडु केस के फैसले का भी उदाहरण दिया। बेंच ने कहा कि तब अदालत ने कहा था कि अर्चक यानी मंदिर के पुजारियों की भर्ती एक सेकुलर निर्णय होता है। इसमें धर्म का कोई मसला नहीं होता और यह काम ट्रस्टी की ओर से किया जाता है। दरअसल सवाल यह भी उठा था कि जिस सोसायटी की डिग्रियों की बात की जा रही है, उसमें पढ़ने वाले तो सिर्फ ब्राह्मण हैं। इसलिए सभी को मौका देने के यह नियम खिलाफ है।  

दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर बैन, कारोबारियों पर बड़ी कार्रवाई

उत्तराखंड उत्तराखंड में दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर बड़ी पाबंदी लगने वाली है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने इस संदर्भ में केंद्र सरकार को सख्त सिफारिश भेजी है, जिसके बाद जल्द ही इस दिशा में कानूनी बदलाव हो सकते हैं। पिछले दिनों देश के विभिन्न हिस्सों में कफ सिरप के कारण बच्चों की मौतों के बाद केंद्र ने दवा निर्माण और बिक्री के नियमों को सख्त करने का फैसला किया है, जिसमें ऑनलाइन दवाओं की बिक्री और होम डिलीवरी पर नियंत्रण शामिल है। उत्तराखंड में 20 हजार से अधिक मेडिकल स्टोर हैं, जिनमें से कई ऑनलाइन दवाओं की बिक्री में लगे हुए हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान इस कारोबार ने जबरदस्त गति पकड़ी थी और तब से ऑनलाइन दवाओं का व्यापार करोड़ों रुपये का हो गया है। हालांकि, यह कारोबार नियंत्रण से बाहर हो चुका है और रिकॉर्ड रखना भी मुश्किल हो गया है। एफडीए के अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी का कहना है कि ऑनलाइन दवाओं की खरीद-फरोख्त के रिकॉर्ड छिपाने और गड़बड़ी की संभावना बहुत अधिक रहती है। किसने कौन-सी दवा कब और कहां से मंगाई, इस बात का सही ब्यौरा रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है, जिससे स्वास्थ्य सुरक्षा पर खतरा पैदा हो सकता है। इसी कारण कई राज्यों ने भी ऑनलाइन दवाओं पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। इस बदलाव के साथ ही ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट में संशोधन किया जाएगा, जिससे ऑनलाइन दवाओं की बिक्री और वितरण पर कड़े नियम लागू होंगे। सरकार की यह पहल मरीजों की सुरक्षा और दवाओं के उचित उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए अहम कदम माना जा रहा है। जल्द ही इस मामले में आधिकारिक घोषणा होने की उम्मीद है।

SIR का बड़ा ऐलान: नवंबर से पूरे भारत में होगा लागू, बिहार समेत कई राज्यों में पहले चरण की तैयारी

नई दिल्ली बिहार विधानसभा चुनाव से पहले इलेक्शन कमिशन ने SIR यानी गहन मतदाता पुनरीक्षण का अभियान शुरू किया था। इस पर खूब राजनीति हुई और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया था। अदालत की ओर से SIR को क्लीन चिट दी गई और कहा गया कि यह थोड़ा पहले किया जा सकता था। अब इसी बात से सबक लेते हुए चुनाव आयोग नवंबर की शुरुआत से ही देशव्यापी SIR शुरू करने जा रहा है। इसके तहत सबसे पहले उन राज्यों में SIR होगा, जहां 2026 में ही चुनाव होने वाले हैं। इसके अलावा भी कुछ अन्य राज्यों में भी SIR शुरुआती दौर में ही होगा। चुनाव आयोग की दो दिन की कॉन्फ्रेंस शुरू हुई है। इसमें यह आकलन भी किया गया कि देश में SIR की प्रक्रिया के लिए कितनी और कैसी तैयारी है। इसकी रिपोर्ट सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन आयुक्तों की ओर से पेश की गई। पूरा प्लान कॉन्फ्रेंस के समापन पर बताया जाएगा। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार SIR की प्रक्रिया देशव्यापी होगी, लेकिन इसे चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। पहले इसे असम, केरल, पुदुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में किया जाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि इन राज्यों में अगले साल ही चुनाव होने हैं। असम में तो NRC भी हो रही है। असम के निर्वाचन आयोग का कहना है कि एक बार NRC होने के बाद राज्य में SIR भी हो जाएगी। असम देश का इकलौता राज्य है, जहां NRC हुआ है। ऐसे में यह भी हो सकता है कि NRC पूरा होने का इंतजार हो और असम में SIR में थोड़ी देरी हो जाए। आगामी राष्ट्रव्यापी प्रक्रिया के लिए चुनाव आयोग मतदाताओं को केवल उस राज्य की ही नहीं, बल्कि किसी भी राज्य की अंतिम गहन पुनरीक्षण मतदाता सूची से अपने नामों के अंश प्रस्तुत करने की अनुमति दे सकता है, जहां वे वर्तमान में रहते हैं। बिहार एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता केवल बिहार की अंतिम गहन पुनरीक्षण मतदाता सूची से ही अंश प्रस्तुत कर सकते थे। देश में कहीं भी वोटर लिस्ट में हो नाम तो मिलेगा मौका, बिहार से क्या अलग दूसरे शब्दों में मुंबई में मतदाता के रूप में पंजीकृत पश्चिम बंगाल का कोई प्रवासी श्रमिक महाराष्ट्र में नामांकित रह सकता है, बशर्ते वह अपना नाम दिखा सके। इसके अलावा वह किसी ऐसे मतदाता से संपर्क स्थापित कर सके, जिसका नाम 2002 की पश्चिम बंगाल मतदाता सूची में शामिल हो। पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची का अंतिम गहन पुनरीक्षण 2002 में हुआ था और उस मतदाता को उस राज्य की मतदाता सूची में बने रहने के योग्य माना जाएगा, जहां वह वर्तमान में रह रहा है।

रूस के मुख्य गैस प्लांट पर यूक्रेन का ड्रोन हमला, सप्लाई में बड़ा व्यवधान

मॉस्को  रूस-यूक्रेन युद्ध शांत होने की जगह भड़कता ही जा रहा है। दक्षिणी रूस में एक प्रमुख गैस प्रसंस्करण संयंत्र पर यूक्रेन ने ड्रोन से हमला कर दिया। इसके कारण कजाकिस्तान से गैस की आपूर्ति अस्थायी रूप से रोक दी गई। रूसी अधिकारियों ने रविवार को इसकी जानकारी दी है। ओरेनबर्ग स्थित यह संयंत्र विश्व के सबसे बड़े गैस उत्पादन और प्रसंस्करण संयंत्रों में से एक है। इसकी वार्षिक क्षमता 45 अरब क्यूबिक मीटर है और यह कजाकिस्तान के कराचगनाक क्षेत्र से गैस कंडेन्सेट को संसाधित करता है। इसे वहां की सरकारी कंपनी गैजप्रोम चलाती है। क्षेत्रीय गवर्नर येवगेनी सोलंतसेव के अनुसार, ड्रोन हमलों से संयंत्र की एक कार्यशाला में आग लग गई और संयंत्र का कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। कजाक ऊर्जा मंत्रालय ने रविवार को कहा कि गैजप्रोम की सूचना के अनुसार, ड्रोन हमले के कारण संयंत्र अस्थायी रूप से कजाकिस्तान की गैस को संसाधित करने में असमर्थ है। यूक्रेन की जनरल स्टाफ ने बयान में कहा कि ओरेनबर्ग संयंत्र में आग लगी और एक गैस प्रसंस्करण और शोधन इकाई क्षतिग्रस्त हुई। यूक्रेन ने हाल के महीनों में रूसी ऊर्जा सुविधाओं पर हमले तेज कर दिए हैं, जिन्हें वह मास्को के युद्ध प्रयास को वित्तपोषित करने वाला और सीधे समर्थन देने वाला मानता है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन से यह संकेत दिया कि शांति स्थापित करने के लिए उसे रूस से खोई हुई भूमि छोड़नी पड़ सकती है। फॉक्स न्यूज को दिए साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन कुछ न कुछ ले ही लेंगे और अमेरिका ही ऐसा देश है जो युद्ध जीतकर छोड़ देता है। उन्होंने टॉमहॉक मिसाइलें यूक्रेन को देने के बारे में अनिर्णायक रुख अपनाया और अमेरिकी हथियारों के भंडार के संरक्षण की चिंता जताई। यूक्रेनी अभियोजक दावा कर रहे हैं कि रूस नागरिक इलाकों को निशाना बनाने के लिए अपने हवाई निर्देशित बमों को बदल रहा है। खार्किव क्षेत्र में रूस ने नए रॉकेट-संचालित बम UMPB-5R का इस्तेमाल किया, जो 130 किलोमीटर तक उड़ सकता है। डोनिप्रोपेत्रोव्स्क क्षेत्र में रूसी ड्रोन हमले में कम से कम 11 लोग घायल हुए और कई इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं। रूस ने कोयला खदान पर भी हमला किया, जिसमें 192 खनिक सुरक्षित निकाले गए। यूक्रेनी जनरल स्टाफ ने रूस के समारा क्षेत्र में नोवोकुइबिशेव्स्क तेल रिफाइनरी पर ड्रोन हमले का दावा भी किया। रूसी रक्षा मंत्रालय ने बताया कि उसने रात भर 45 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए।

लव जिहाद और बहुविवाह पर हिमंत सरमा का कड़ा रुख, जल्द होगा नया कानून लागू

गुवाहाटी  असम की भाजपा नेतृत्व वाली सरकार आगामी विधानसभा सत्र में लव जिहाद और बहुविवाह को लेकर कानून बनाने की तैयारी कर रही है। हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार अगले सत्र में इन दोनों पर विधेयक पेश करने जा रही है। सीएम ने बुधवार को बताया, "अगला विधानसभा सत्र ऐतिहासिक होगा क्योंकि कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाएंगे। बहुविवाह और लव जिहाद पर प्रतिबंध के साथ-साथ हमारे सत्रों का संरक्षण, चाय बागानों के श्रमिकों को भूमि अधिकार देने सहित अन्य विधेयक शामिल हैं।" उन्होंने आगे कहा, "अगले विधानसभा सत्र में हम लव जिहाद, बहुविवाह और सत्र संरक्षण के खिलाफ कई नए विधेयक लाएंगे। चाय बागानों के श्रमिकों के भूमि अधिकारों पर चर्चा के साथ ही और भी कई विधेयक पेश किए जाएंगे।" असम कैबिनेट ने पहले ही असम सत्र संरक्षण और विकास बोर्ड विधेयक, 2025 को मंजूरी दी है। यह एक निकाय होगा, जिसका उद्देश्य सत्रों और उनके भूमि-संपत्ति का संरक्षण, प्रबंधन, रखरखाव और सतत विकास सुनिश्चित करना है। असम के सत्र वैष्णव मठ हैं, जो धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जीवन के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। इनकी स्थापना 16वीं सदी में हुई थी। मुख्यमंत्री सरमा ने बताया, "इस विधेयक के तहत एक आयोग स्थापित किया जाएगा, जो सत्र भूमि को अतिक्रमण और विवादों से बचाएगा, पारदर्शी शासन के माध्यम से और विरासत पर्यटन व सत्र कला के माध्यम से सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा।" विधेयक के अनुसार आयोग के तहत सत्रों की सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल संग्रह के माध्यम से सुरक्षित किया जाएगा, जिसमें भूमि, कलाकृतियां और पांडुलिपियों का विवरण होगा, जिससे वैश्विक स्तर पर उनकी पहुंच और संरक्षण सुनिश्चित होगा। आयोग का अध्यक्ष हाईकोर्ट से सेवानिवृत्त न्यायाधीश होंगे। सदस्य सचिव भूमि अधिग्रहण और सुधार निदेशक, असम होंगे। इसके अलावा, दो सदस्य राज्य सरकार द्वारा नामांकित सत्र संस्थानों के प्रतिनिधि होंगे और एक सदस्य भूमि प्रशासन में अनुभवी सेवानिवृत्त सिविल सेवा अधिकारी (सचिव स्तर या उससे ऊपर) होगा।

ब्रहमोस मिसाइल और राफेल के साथ ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान में आतंकियों के ठिकानों को निशाना बनाया

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों और बाद में जवाबी कार्रवाई के दौरान वहां के सैन्य प्रतिष्ठानों पर सुखोई-30 लड़ाकू विमानों के जरिये ब्रह्मोस मिसाइलें दागी गई थीं। ये मिसाइलें अचूक साबित हुईं। इसने बहावलपुर में लश्कर-ए-तैयबा और मुरीदके में जैश-ए-मोहम्मद समेत नौ आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया था। हाल में सामने आए एक सरकारी दस्तावेज से स्पष्ट तौर पर ऐसे संकेत मिलते हैं। इसके अनुसार वायुसेना और थल सेना द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की सीमा के निकटवर्ती क्षेत्रों में राफेल और सुखोई की स्क्वाड्रन तैनात की गई थी। ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत के दिन ही कच्छ से लेकर कश्मीर तक सीमावर्ती क्षेत्र में बाकायदा वायुसेना ने अभ्यास का ऐलान भी किया था, जो छह मई की रात किए गए ऑपरेशन सिंदूर की तैयारी थी। हाल में ऑपरेशन सिंदूर के लिए वायुसेना के पायलटों को वीर चक्र से सम्मानित करने के उपलक्ष्य में एक विस्तृत गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया। इसमें ऑपरेशन सिंदूर के नाम लिए बगैर पायलटों की बहादुरी का वर्णन किया गया है। यह विवरण दर्शाता है कि किस प्रकार एयरफोर्स की राफेल और सुखोई की स्क्वाड्रनों ने बहादुरी के साथ इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। वीर चक्र से सम्मानित पायलट राफेल और सुखोई दोनों स्क्वाड्रनों से हैं। राफेल ने कई पाकिस्तानी विमानों को गिराया विवरण से संकेत मिलते हैं कि सुखोई से ब्रह्मोस के जरिये जमीनी लक्ष्यों को निशाना बनाया गया, जबकि राफेल का इस्तेमाल उस क्षेत्र में एयर डिफेंस के लिए किया गया। राफेल ने पाकिस्तान के कई हमलों को नाकाम किया और उसके कई विमानों को मार गिराया। दोनों लड़ाकू विमानों के पायलटों ने अपने-अपने कार्य को बाखूबी अंजाम दिया, जिसके लिए उन्हें युद्धकाल का तीसरा बड़ा पुरस्कार वीर चक्र प्रदान किए गए।

मोदी नहीं जाएंगे आसियान समिट में! ट्रंप से संभावित मीटिंग की चर्चा तेज, जानें भारत की ओर से कौन जाएगा

नईदिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मलेशिया में होने वाले आसियान शिखर सम्मेलन में शामिल नहीं होंगे. आसियान समिट की शुरुआत रविवार यानी 26 अक्टूबर से हो रही है. पीएम मोदी अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के कारण आसियान शिखर सम्मेलन से संबंधित बैठकों में भाग लेने के लिए संभवत: मलेशिया नहीं जाएंगे. इस मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों की मानें तो भारत की ओर से विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर इस बैठक में हिस्सा लेंगे और भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे. यहां बताना जरूरी है कि इस आसियान बैठक में डोनाल्ड ट्रंप भी आ रहे हैं. ऐसे में संभावना थी कि अगर मोदी जाते हैं तो ट्रंप संग उनकी मुलाकात हो सकती है. मगर अब मुलाकात का इंतजार बढ़ गया है. दरअसल, आसियान (दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन) शिखर सम्मेलन 26 से 28 अक्टूबर तक कुआलालंपुर में आयोजित किया जा रहा है. आसियान शिखर सम्मेलन से संबंधित विचार-विमर्श में भारत की भागीदारी के स्तर पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. सूत्रों ने बताया कि भारत ने मलेशिया को सूचित किया है कि एस जयशंकर आसियान बैठकों में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे. आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी के डिजिटल माध्यम से भाग लेने की संभावना है. ट्रंप हो रहे शामिल प्रधानमंत्री ने पिछले कुछ वर्षों में आसियान-भारत शिखर सम्मेलन और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया है. मलेशिया ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ-साथ आसियान के कई संवाद साझेदार देशों के नेताओं को भी आमंत्रित किया है. डोनाल्ड ट्रंप 26 अक्टूबर को दो दिवसीय यात्रा पर कुआलालंपुर जाएंगे. सूत्रों ने बताया कि शुरुआती योजना के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी की मलेशिया के साथ-साथ कंबोडिया की यात्रा पर भी विचार किया जा रहा था, चूंकि वह मलेशिया नहीं जा रहे हैं, इसलिए कंबोडिया की प्रस्तावित यात्रा स्थगित कर दी गई है. क्या है आसियान आसियान-भारत संवाद संबंध 1992 में एक क्षेत्रीय साझेदारी की स्थापना के साथ शुरू हुए. ये दिसंबर 1995 में पूर्ण संवाद साझेदारी और 2002 में शिखर सम्मेलन स्तर की साझेदारी में परिवर्तित हुए. इन संबंधों को 2012 में रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया. आसियान के 10 सदस्य देश इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपीन, सिंगापुर, थाईलैंड, ब्रुनेई, वियतनाम, लाओस, म्यांमा और कंबोडिया हैं.