samacharsecretary.com

इजरायल को लेकर सीरिया का खुला कबूलनामा, राष्ट्रपति बोले – डरते हैं, समझौते की जरूरत

न्यूयॉर्क संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में संबोधन के लिए अपनी पहली ऐतिहासिक यात्रा पर पहुंचे सीरिया के नए राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने चेतावनी दी कि यदि इजरायल उनकी अंतरिम सरकार के साथ ऐसा सुरक्षा समझौता नहीं करता, जो सीरिया की संप्रभुता को सुरक्षित रखे, तो पूरा मध्य-पूर्व एक नए दौर की उथल-पुथल में घिर सकता है। हालांकि इस दौरान उन्होंने ये भी स्वीकार किया कि उनके देश को इजरायल से डर लगता है और वे इजरायल के लिए कोई खतरा नहीं हैं। लंबे समय तक सत्ता में रहे बशर अल-असद को दिसंबर में उखाड़ फेंकने के बाद शरा ने सीरिया की सत्ता संभाली थी। पूर्व जिहादी रह चुके शरा ने स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता इजरायल के साथ सुरक्षा समझौता है, लेकिन उन्होंने यहूदी देश पर आरोप लगाया कि वह जानबूझकर बातचीत को टाल रहा है और सीरिया की हवाई और जमीनी सीमाओं का उल्लंघन जारी रखे हुए है। शरा ने मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट के एक कार्यक्रम में कहा, “हम इजरायल के लिए कोई समस्या खड़ी नहीं कर रहे हैं। हमें इजरायल से डर है, नाकि इजरायल को हम से। इजरायल की तरफ से बातचीत में देरी और हमारी सीमाओं का उल्लंघन कई तरह के जोखिम खड़े कर रहे हैं।” उन्होंने सीरिया के बंटवारे की किसी भी चर्चा को खारिज करते हुए कहा कि उनकी सरकार ड्रूज अल्पसंख्यक के हितों की रक्षा कर रही है। शरा ने कहा ने कहा, “जॉर्डन दबाव में है, और सीरिया के बंटवारे की कोई भी बात इराक और तुर्की को भी नुकसान पहुंचाएगी। इससे हम सभी फिर से वहीं लौट जाएंगे, जहां से शुरुआत हुई थी।” उन्होंने याद दिलाया कि सीरिया अभी-अभी डेढ़ दशक लंबे युद्ध से निकला है। अमेरिका की मध्यस्थता और “डि-एस्केलेशन” समझौता अमेरिका के सीरिया मामलों के विशेष दूत टॉम बरैक ने संकेत दिया कि सीरिया और इजरायल एक “डि-एस्केलेशन” समझौते के करीब हैं। इस समझौते के तहत इजरायल सीरिया पर हवाई हमले और घुसपैठ रोक देगा, जबकि सीरिया इस बात पर सहमत होगा कि वह इजरायल सीमा के पास कोई भारी मशीनरी या सैन्य उपकरण नहीं तैनात करेगा। बरैक के अनुसार, यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापक सुरक्षा समझौते की दिशा में पहला कदम होगा। उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि सभी पक्ष अच्छे विश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं।” गोलान हाइट्स और ड्रूज समुदाय पर तनाव सीरिया की सरकार चाहती है कि इजरायल हवाई हमले रोके और उन सैनिकों को हटाए जो गोलान हाइट्स के बफर जोन पर काबिज हैं। असद के पतन के बाद इजरायल ने लगातार सैन्य ठिकानों पर हमले किए, ताकि सीरियाई क्षमताओं को कमजोर किया जा सके। साथ ही, दक्षिणी सीरिया में ड्रूज समुदाय पर हो रहे हमलों को रोकने के लिए भी इजरायल ने हस्तक्षेप किया। ट्रंप प्रशासन की भूमिका और बाधाएं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दोनों देशों के बीच समझौते की घोषणा इसी हफ्ते करवाना चाहते थे, लेकिन अब तक पर्याप्त प्रगति नहीं हुई है। साथ ही, यहूदी नववर्ष रोश हशाना के चलते प्रक्रिया धीमी हो गई है। ट्रंप प्रशासन के एक अधिकारी ने द टाइम्स ऑफ इजरायल को बताया कि उभरता हुआ सुरक्षा समझौता “99% तैयार” है और अगले दो हफ्तों में इसकी घोषणा की जा सकती है। इजरायल की सतर्क प्रतिक्रिया इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को कहा कि सीरिया और लेबनान दोनों के साथ शांति की संभावना का नया अवसर पैदा हुआ है, खासकर इजरायल की सैन्य कार्रवाई के बाद जब लेबनानी संगठन हिजबुल्लाह को भारी नुकसान हुआ। हालांकि नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि सीरिया के साथ किसी भी समझौते को अंतिम रूप देने में अभी समय लगेगा।

कर्फ्यू की गिरफ्त में लेह: इंटरनेट स्पीड कम, सड़कों पर CRPF और पुलिस का सख्त पहरा

लेह लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर चला शांतिपूर्ण आंदोलन बुधवार को हिंसा में तब्दील हो गया. लेह की सड़कों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हुई झड़पों ने हालात बिगाड़ दिए. उपद्रव में चार लोगों की मौत हो गई और 80 से ज्यादा घायल हुए. स्थिति काबू से बाहर होती देख प्रशासन ने लेह और करगिल में कर्फ्यू लगा दिया. इंटरनेट स्पीड घटा दी और पुलिस-सीआरपीएफ की भारी तैनाती कर दी. फिलहाल, केंद्र शासित प्रदेश में अब तनावपूर्ण शांति है. लेह पुलिस ने हिंसक प्रदर्शनकारियों पर एक्शन लिया है और 50 लोगों को गिरफ्तार किया है. पुलिस का कहना है कि मामले में जांच चल रही है. दोषियों को चिह्नित कर गिरफ्तार किया जाएगा.  इससे पहले बुधवार दोपहर उग्र प्रदर्शनकारियों ने लेह में राजनीतिक दल के कार्यालय और सरकारी इमारतों में आग लगा दी. पुलिस वाहनों को फूंक दिया और सुरक्षा बलों पर हमला कर दिया. घायलों में 40 पुलिस और सीआरपीएफ जवान भी शामिल हैं. फिलहाल, लेह में कर्फ्यू जारी है. प्रशासन की ओर से सख्त निषेधाज्ञा लागू की गई है. लोगों से शांति बहाल करने की अपील की जा रही है. शहर के संवेदनशील इलाकों में पुलिस और सीआरपीएफ की भारी तैनाती है.  जिन इलाकों में बुधवार को हिंसा हुई थी, वहां अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है. प्रशासन ने हिंसा भड़कने के लिए सोनम वांगचुक को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि उनके भड़काऊ बयानों ने युवाओं को उकसाया. ऐहतियात के तौर पर लेह में इंटरनेट स्पीड भी धीमी कर दी गई है. गृह मंत्रालय ने दावा किया है कि आंदोलन के बीच भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरणविद सोनम वांगचुक के भड़काऊ भाषणों ने भीड़ को हिंसा के लिए उकसाया. मंत्रालय ने कहा कि वांगचुक ने 'अरब स्प्रिंग' और नेपाल में Gen-Z विरोध का हवाला देकर लोगों को गुमराह किया. इसी दौरान हिंसा भड़क उठी और वांगचुक ने हड़ताल तोड़ दी. स्थिति को काबू में करने को लेकर प्रयास किए बिना वो एंबुलेंस से अपने गांव लौट गए. सरकार ने कहा कि हम लद्दाख के लोगों की उम्मीदों को पूरा करने के लिए संवैधानिक सुरक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है. मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि संवाद की प्रक्रिया से अब तक कई महत्वपूर्ण फैसले हुए हैं. इनमें अनुसूचित जनजातियों का आरक्षण 45% से बढ़ाकर 84% किया गया. परिषदों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण सुनिश्चित हुआ. भोटी और पुर्गी भाषाओं को आधिकारिक भाषा घोषित किया गया. 1800 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई. हालांकि, प्रशासन का कहना है कि कुछ राजनीतिक रूप से प्रेरित लोग उच्चाधिकार प्राप्त समिति (HPC) के जरिए हो रही बातचीत को विफल करने में लगे हैं. घटनाओं के बाद लेह और करगिल दोनों जिलों में कर्फ्यू और बीएनएसएस की धारा 163 लागू कर दी गई.  हिंसा के बाद वामपंथी दलों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता की मांगों की अनदेखी ही इस संकट का कारण है. CPI(M) और CPI(ML) ने केंद्र पर संवैधानिक अधिकार छीनने और दमन की राजनीति करने का आरोप लगाया. कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस नेताओं ने भी घटना पर संवेदनशीलता के साथ कदम उठाने की मांग की. वहीं, बीजेपी ने हिंसा को साजिश करार दिया. लद्दाख में 1989 के बाद यह सबसे गंभीर हिंसक घटना बताई जा रही है. प्रशासन ने बुधवार शाम 4 बजे तक स्थिति नियंत्रण में होने का दावा किया, लेकिन इलाके में तनाव अभी भी बरकरार है.

नरेंद्र मोदी: जीएसटी सुधारों के सूत्रधार और आधुनिक भारत के चाणक्य

जीएसटी सुधार- वर्तमान भारत के चाणक्य नरेंद्र मोदी  वस्तु एवं सेवा कर,जीएसटी,भारत के भूतो न भविष्यति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा 1 जुलाई 2017 से लागू किया गया। स्वतंत्र भारत के आर्थिक इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण सुधार है। वर्ष 2000 में भी तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने जीएसटी का प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। तब कांग्रेस ने विरोध किया।10 साल तक कांग्रेस की मनमोहन सरकार भी राज्यों को कर हानि, राजस्व हानि के विरुद्ध गारंटी नहीं दे सकी।राज्यों को एकीकृत कर प्रणाली हेतु आश्वस्त करने में विफल रही। मोदी सरकार में तत्कालीन वित्त मंत्री स्वर्गीय अरुण जेटली ने सभी राज्यों को आर्थिक गारंटी दी।फलस्वरूप राज्य सहमत हुए और 1 जुलाई 2017 से संपूर्ण देश में एक समान वस्तु एवं सेवा कर लागू हुआ।एक देश एक कर व्यवस्था आरम्भ हुई।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लाल किले से 15 अगस्त 2025 को भारत की जनता को संबोधित करते हुए जीएसटी में नई पीढ़ी के सुधारों एवं 22 सितंबर 2025 से नवरात्रि के पुण्यकाल से देश में लागू करने की घोषणा की गई थी।इस संकल्पना में मोदी सरकार का अगली पीढ़ी का सुधार एवं नागरिक देवो भव: के मंत्र का पालन स्पष्ट रूप से झलकता है।जीएसटी टैक्स स्लैब में 12 और 28 प्रतिशत के स्लैब को हटा दिया गया है। प्रमुख रूप से भारत की जनता जनार्दन की दैनिक आवश्यकता की लगभग 99 प्रतिशत वस्तुओं एवं सेवाओं पर कर, शून्य या 5 प्रतिशत या 18 प्रतिशत कर दिया गया है।सोना,चाँदी आदि मूल्यवान धातुओं पर पूर्व की भाँति 3 प्रतिशत जीएसटी रहेगा।विलासिता एवं सिन आइटम पर 40 प्रतिशत जीएसटी रहेगा।अनेक खाद्य पदार्थ,जीवन बीमा, मेडिकल स्वास्थ्य बीमा, स्वास्थ्य सेवा पर जीएसटी शून्य होने से अत्यधिक लाभ होगा।औषधियों पर टैक्स 12 से कम कर 5 प्रतिशत कर दिया है।कृषि उपकरणों पर 18 प्रतिशत से कम कर 5 प्रतिशत करने से किसानों को भी लाभ होगा।निर्माण सामग्री जैसे सीमेंट पर टैक्स 28 से कम होकर 18 प्रतिशत हो गया है ।आवास भी सस्ते होंगे ।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एस्पिरेशनल इंडिया का उल्लेख जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण कार बाजार में देखने को मिल रहा है। मारुति सुजुकी ने कार बुकिंग का पिछले 35 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। हुंडई  के शोरूम में भी 5 वर्षों का रिकॉर्ड टूटा है। जीएसटी दरों में कटौती के पहले दिन मारुति ने 25,000 कारों की डिलीवरी की। मारुति के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर ने कहा है कि यह वास्तव में एक ऐतिहासिक क्षण है, पिछले 35 वर्षों में ऐसा पहली बार देखा गया है कि पहले ही दिन 80,000 पूछताछ दर्ज हुईं और 25,000 से अधिक कारें डिलीवर कर दी गई। उन्होंने बताया कि डिलीवरी शीघ्र ही 30,000 तक पहुंच जाएगी। कंपनी को पहले ही दिन 75,000 से 85,000 बुकिंग  प्राप्त हुईं हैं।पिछले वर्ष की तुलना में इस बार का बाजार असाधारण रूप से मजबूत है और जीएसटी सुधार का प्रभाव भी अभूतपूर्व रूप से हुआ है।  नए सुधारों को लागू करवाने में,सभी राज्यों को सहमत करने में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन का योगदान भी अतुलनीय है।पूर्व में वर्ष 2025-26 के बजट में मोदी सरकार ने आयकर की सीमा को 12 लाख कर दिया है।इससे भी जनता को धनलाभ हो रहा है।दोनों एतिहासिक कर सुधारों से जनता जनार्दन को प्रति वर्ष 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का लाभ होगा।अर्थ व्यवस्था में खपत बढ़ेगी।अर्थव्यवस्था में प्रतिवर्ष 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक की खपत बढ़ेगी।जनता जनार्दन की क्रय शक्ति बढ़ेगी।भारत भी अर्थव्यवस्था के पथ पर तीव्र गति से कुलांचे भरेगा,दौड़ेगा।वर्तमान में भारत 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थ व्यवस्था है।विश्व में चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है।द्रुत गति से निकट भविष्य में पाँच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य अर्जित कर लेगा।विश्व की तीसरी सर्वाधिक अर्थव्यवस्था वाला देश बन जाएगा।  वर्ष 2014 में मनमोहन सरकार ने अगले 30 वर्षों में 2045 तक 5 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य को अर्जित करने का अनुमान संसद में बजट सत्र के समय बताया था।मोदी सरकार इस लक्ष्य को लगभग 20 साल पहले ही अर्जित करने जा रही है।  भारतीय स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक भारत की अर्थव्यवस्था लगभग 35 ट्रिलियन डॉलर होने का अनुमान अनेक आर्थिक रेटिंग एजेन्सी लगा रहीं हैं।सैकड़ों आर्थिक सुधारों को लागू करने से, मोदी सरकार ने अर्थ तंत्र को अविश्वसनीय, अद्वितीय, अकल्पनीय गति प्रदान कर सशक्त और समृद्ध बनाया है। भाजपा की अनेक राज्यों की सरकार भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प को कंधे से कंधा मिला कर पूर्ण कर रहे हैं। मध्य प्रदेश के पुरूषार्थी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव,भाजपा के संगठन निष्ठ,तपस्वी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल,अनुशासन प्रिय प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा,उपमुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद, विधायक और नेता, जनता जनार्दन से संवाद कर रहे हैं। व्यापारियों से संवाद कर रहे हैं। व्यापारियों को स्वदेशी वस्तुओं के विक्रय एवं जनता को स्वदेशी वस्तुओं का ही उपयोग करने का आग्रह कर रहे हैं। जिससे भारत हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो। भारत का निर्माण क्षेत्र भी तीव्र गति से समुन्नत हो ,वृद्धि करे।  महानतम अर्थशास्त्री चाणक्य के मंत्र-तस्मान्नित्योत्थितो राजा,कुर्यादर्थानुशासनम् ।अर्थस्य मूलमुत्थानम, अनर्थस्य विपर्ययः । इस मंत्र का पालन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय अर्थव्यवस्था को समुन्नत कर रहे हैं, समृद्ध बना रहे हैं।जनता जनार्दन को आर्थिक लाभ प्रदान कर रहे हैं।अतः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आधुनिक भारत के चाणक्य हैं, कौटिल्य हैं, विष्णु गुप्त हैं। इति श्री। लेखक- सत्येंद्र जैन  

झारसुगुड़ा दौरे पर पीएम मोदी, 27 सितंबर को युवाओं से करेंगे संवाद

झारसुगुड़ा (ओडिशा) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 सितंबर को ओडिशा के झारसुगुड़ा दौरे पर आएंगे। इस दौरान वे युवा सम्मेलन को संबोधित करेंगे। साथ ही विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी करेंगे। संबलपुर के राजस्व प्रभागीय आयुक्त (आरडीसी) सचिन रामचंद्र जाधव ने पीएम मोदी के दौरे के बारे में जानकारी दी। दरअसल, पीएम मोदी का यह दौरा मूल रूप से ब्रह्मपुर में होना था, लेकिन भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा दक्षिणी ओडिशा में भारी बारिश की संभावना के कारण इस कार्यक्रम को झारसुगुड़ा में स्थानांतरित कर दिया गया। कार्यक्रम का नया स्थान झारसुगुड़ा का अमलीपल्ली मैदान होगा। संबलपुर के राजस्व प्रभागीय आयुक्त (आरडीसी) सचिन रामचंद्र जाधव ने मीडिया से बातचीत में बताया कि 27 सितंबर को झारसुगुड़ा में एक भव्य आयोजन किया जाएगा। हमें जानकारी मिली है कि इस कार्यक्रम में पीएम मोदी भी शामिल होंगे और वे युवाओं को संबोधित भी करेंगे। उन्होंने कहा, “ये कार्यक्रम झारसुगुड़ा के अमलीपल्ली मैदान में आयोजित होगा। पीएम मोदी इस अवसर पर विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। हमें परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास से संबंधित सूचना के जल्द मिलने की उम्मीद है, जिसे मीडिया के साथ साझा किया जाएगा। साथ ही, प्रधानमंत्री के दौरे को देखते हुए सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं।” मुख्यमंत्री द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री बड़ी संख्या में युवाओं को संबोधित करेंगे। इस दौरे के दौरान वे रेलवे पर विशेष जोर देते हुए कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास करेंगे। जानकारी के अनुसार, इन परियोजनाओं की कुल लागत 1,700 करोड़ रुपए से अधिक है, जो क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी सुधारने और अर्थव्यवस्था को गति देने पर केंद्रित हैं। यह दौरा देशव्यापी ‘सेवा पर्व’ पहल का हिस्सा है। जिला प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां इस उच्च स्तरीय आयोजन के लिए जोरदार तैयारियां शुरू कर चुकी हैं।  

यात्रियों के लिए खुशखबरी, अहमदाबाद से कानपुर तक शुरू हुई दीपावली स्पेशल

कोटा,  दिवाली पर अतिरिक्त यात्रीभार को देखते कानपुर से अहमदाबाद के असारवा स्टेशन के बीच विशेष रेलगाड़ी चलाई जा रही है। कोटा रेल मंडल के वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने बुधवार को बताया कि यह रेलगाड़ी राजस्थान में कोटा मंडल के बूंदी और केशोरायपाटन स्टेशन सहित छह स्टेशनों से गुजरेगी और उदयपुर, हिम्मतनगर, ईदगाह आगरा, टुंडला और इटावा सहित 20 स्टेशन पर रुकेगी। उन्होंने बताया कि गाड़ी नंबर 01905 कानपुर सेंट्रल से असारवा तीन नवम्बर तक चलेगी। गाड़ी नंबर 01905 असारवा कानपुर सेंट्रल चार नवंबर तक चलेगी। यह गाड़ी 01905 कानपुर से सोमवार सुबह सवा आठ बजे रवाना होकर उसी दिन अपराह्न तीन बजकर 35 मिनट पर बयाना, चार बजकर 40 मिनट पर गंगापुर सिटी, शाम पांच बजकर 24 मिट पर सवाई माधोपुर, छह बजकर 33 मिनट पर केशोरायपाटन, सात बजकर आठ मिनट पर बूंदी और सात बजकर 58 मिनट पर मांडलगढ़ पहुंचेगी। यह रात 11 बजकर 40 मिनट पर उदयपुर और अगले दिन सुबह पौने छह बजे असारवा पहुंचेगी। इसी तरह गाड़ी संख्या 01906 असारवा से मंगलवार सुबह सवा नौ बजे रवाना होकर उदयपुर, मांडलगढ़, बूंदी, केशोरायपाटन, सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी होते हुए रात 12 बजकर 46 मिनट पर बयाना पहुंचेगी। अगले दिन बुधवार को सुबह सात बजे कानपुर सेंट्रल पहुंचेगी। श्री जैन ने बताया कि इसमें सामान्य के आठ, स्लीपर के आठ, थर्ड एसी का एक और सेकंड एसी के एक डिब्बे सहित 21 डिब्बे होंगे। यह रेलगाड़ी वापसी में इटावा, फिरोजाबाद, टुंडला, इदगाह आगरा, फतेहपुर सीकरी, रूपबास, बयाना, गंगापुर सिटी, सवाई माधोपुर, केशोरायपाटन, बूंदी, मांडलगढ़, चंदेरिया, मावली, उदयपुर सिटी, जावर, डूंगरपुर, हिम्मतनगर रूकेगी।  

पुतिन की नीति ने पलटा खेल, रूस को हुआ आर्थिक लाभ – ट्रंप रह गए पीछे

नई दिल्ली  यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के दबाव में अमेरिका और यूरोप लगातार रूस पर नए-नए प्रतिबंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तो यहां तक कह चुके हैं कि यूरोपीय संघ पूरी तरह से रूसी तेल खरीदना बंद करे. लेकिन उनकी ये चाल कामयाब नहीं हो पाई. इसके उलट, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ऐसा खेल रचा कि देश का खजाना कच्चे तेल की कमाई से भर गया. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस का समुद्री कच्चा तेल निर्यात 21 सितंबर तक के 28 दिनों में औसतन 36.2 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया. यह मई 2024 के बाद का सबसे बड़ा आंकड़ा है. यानी पश्चिमी देशों की सख्ती और लगातार हमलों के बावजूद रूस ने तेल बेचने का नया रिकॉर्ड बना डाला. यूक्रेन की तरफ से किए गए ड्रोन हमलों ने रूस की कई तेल रिफाइनरियों को नुकसान पहुंचाया. इसके कारण उत्पादन घटकर 50 लाख बैरल प्रतिदिन से नीचे चला गया, जो अप्रैल 2022 के बाद का सबसे कम स्तर है. जेपी मॉर्गन चेस एंड कंपनी के अनुमान के अनुसार, अगस्त और सितंबर में रूस सामान्य रूप से 54 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का प्रोसेस करता था. यूक्रेनी ड्रोन हमलों का शोर ज्‍यादा, असर कम यूक्रेन द्वारा रूस की रिफाइनरियों और अन्‍य रणनीतिक ठिकानों पर ड्रोन हमले में बड़े नुकसान के दावे किए गए हैं. लेकिन, असल में उतनी हानि हुई नहीं है. रूस ने पिछले हफ्ते बाल्टिक पोर्ट प्रिमोर्स्क से रिकॉर्ड 12 टैंकर कच्चा तेल लेकर निकले. यह दिखाता है कि पंपिंग स्टेशनों पर हमलों के बावजूद रूस की सप्लाई लाइन मजबूत बनी हुई है. बंदरगाहों पर मौजूद स्टोरेज टैंकों ने भी काम आसान कर दिया. पंप स्टेशनों की मरम्मत होने तक इन टैंकों से तेल की आपूर्ति बिना रुकावट जारी रही. रूस ने अपनी रणनीति में भी बदलाव किया. रिफाइनिंग कम होने के बाद भी रूस ने कच्चे तेल को घरेलू खपत में लगाने के बजाय सीधे निर्यात टर्मिनलों पर भेज दिया. इससे विदेशों में कच्चे तेल की आपूर्ति और बढ़ गई और रूस की जेब भी भर गई. यूरोपीय संघ की दुविधा यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के लिए रूस पर नए प्रतिबंधों की संभावना अभी दूर दिखती है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि आगे कोई नया कदम तभी उठाया जाएगा जब यूरोपीय संघ पूरी तरह रूसी तेल की खरीद बंद करे. डोनाल्ड ट्रंप बार-बार दबाव बना रहे हैं कि यूरोपीय संघ पूरी तरह से रूसी तेल खरीद बंद करे. लेकिन ऐसा होना अभी मुश्किल है. हंगरी और स्लोवाकिया जैसे देश रूस के तेल पर निर्भर हैं और वे इस फैसले का विरोध कर रहे हैं. इसी कारण यूरोपीय संघ प्रतिबंध लगाने के बजाय अब टैरिफ जैसे व्यापारिक उपायों पर विचार कर रहा है. यह भी पुतिन के लिए राहत की बात है क्योंकि इसका असर सीमित होगा.

एक हफ्ते धूप ही धूप, हिमाचल से मानसून अलविदा – 454 मौतों का दर्दनाक आंकड़ा

शिमला,  हिमाचल प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून जल्द ही विदा होने वाला है। मौसम विभाग ने बताया कि राज्य से मॉनसून की विदाई के लिए परिस्थितियाँ पूरी तरह अनुकूल हो गई हैं और अगले 24 घंटों में मानसून हिमाचल से विदा हो जाएगा। विभाग ने अनुमान जताया है कि राज्य भर में 30 सितम्बर तक मौसम पूरी तरह साफ रहेगा और लोगों को अगले एक हफ्ते तक गुनगुनी धूप का आनंद मिलेगा। बीते 24 घंटों के दौरान पूरे प्रदेश में कहीं भी बारिश नहीं हुई है और आज सुबह से ही धूप खिली हुई है। इस तरह सितंबर के अंत तक राज्य में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। इधर, बीते दिनों हुई भारी बारिश से प्रभावित इलाकों में बंद पड़ी सड़कों को खोलने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार फिलहाल प्रदेश में 2 नेशनल हाइवे और 320 सड़कें अभी भी अवरुद्ध हैं। ऊना और कुल्लू जिले में एक-एक नेशनल हाइवे बंद है, जबकि मंडी में 105, कुल्लू में 100, कांगड़ा में 40 और शिमला में 21 सड़कें बंद पड़ी हैं। इसके अलावा 46 बिजली ट्रांसफार्मर और 69 पेयजल योजनाएं भी ठप पड़ी हैं, जिससे स्थानीय लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस मानसून सीजन ने हिमाचल को गहरे जख्म दिए हैं। राज्य आपदा प्रबंधन केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार अब तक 454 लोगों की मौत हुई है और 50 लोग अब भी लापता हैं। मृतकों में सर्वाधिक 68 लोग चंबा जिले में मारे गए हैं, जबकि मंडी में 67, कांगड़ा में 57, कुल्लू में 49, शिमला में 48, सोलन में 32, किन्नौर में 30, ऊना में 29, बिलासपुर में 24, सिरमौर में 23, हमीरपुर में 17 और लाहौल-स्पीति में 10 लोगों की मौत दर्ज की गई है। लापता लोगों में 30 मंडी से हैं, जबकि चंबा से 5, सिरमौर से 4, शिमला और किन्नौर से 3-3, कुल्लू और कांगड़ा से 2-2 तथा लाहौल-स्पीति से एक व्यक्ति लापता है। इस दौरान 498 लोग घायल भी हुए हैं। प्राकृतिक आपदाओं ने न केवल इंसानों की जान ली बल्कि हजारों परिवारों को बेघर भी किया है। अब तक 1,736 मकान पूरी तरह जमींदोज हो चुके हैं जबकि 7,494 मकानों को आंशिक क्षति पहुँची है। इसके अलावा 496 दुकानें और 7,399 गौशालाएं भी ध्वस्त हुई हैं। पशुधन में 2,519 मवेशियों और 26 हजार से अधिक पोल्ट्री पक्षियों की मौत दर्ज की गई है। सरकार द्वारा किए गए प्रारंभिक आकलन के अनुसार इस मानसून सीजन में अब तक कुल 4,881 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है। इनमें सबसे अधिक क्षति लोक निर्माण विभाग को हुई है, जहां सड़कों और पुलों को 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान पहुंचा है। जलशक्ति विभाग को 1,476 करोड़ और ऊर्जा विभाग को 1,394 करोड़ रुपये की क्षति दर्ज की गई है। प्राकृतिक आपदाओं के रूप में इस मानसून ने 148 बार भूस्खलन, 98 बार फ्लैश फ्लड और 47 बार बादल फटने की घटनाएं दीं। लाहौल-स्पीति में सबसे ज्यादा 30 बार भूस्खलन हुआ, जबकि शिमला में 29 बार। फ्लैश फ्लड की सबसे अधिक 57 घटनाएं भी लाहौल-स्पीति में दर्ज की गईं। बादल फटने की घटनाएं मंडी जिले में सबसे ज्यादा 19 बार हुईं, जबकि कुल्लू में 12 और चंबा में 6 बार बादल फटे। गौरतलब है कि इस साल मानसून 20 जून को हिमाचल पहुँचा था और सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश से मानसून की सामान्य विदाई तिथि 25 सितम्बर मानी जाती है, लेकिन बीते दस वर्षों में केवल तीन बार ही यह सितम्बर में विदा हुआ है, जबकि सात बार अक्टूबर में विदाई हुई। वर्ष 2024 में मानसून 2 अक्टूबर, 2023 में 6 अक्टूबर और 2022 में 3 अक्टूबर को विदा हुआ था। इस बार इसके समय से पहले लौटने की संभावना है।    

हिमाचल प्रदेश के नैना देवी में भक्तों का सैलाब, हरियाणा डिप्टी स्पीकर ने भी टेका माथा

बिलासपुर,  हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री नैना देवी में नवरात्रि के तीसरे दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली। भक्त माता के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा अर्चना कर रहे हैं। इस अवसर पर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु नैना देवी मंदिर पहुंच रहे हैं। मंदिर के बाहर श्रद्धालु सुबह से ही कतारों में खड़े होकर मां नैना देवी के दर्शन और आशीर्वाद लेने पहुंचे। मंदिर न्यास ने हिमाचल प्रदेश सरकार के दिशानिर्देशों के तहत श्रद्धालुओं की सुविधा की व्यवस्था की है। श्रद्धालुओं के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में गूंज उठा। हरियाणा सरकार के डिप्टी स्पीकर कृष्ण लाल ने भी शक्तिपीठ श्री नैना देवी मंदिर में पूजा-अर्चना कर माता का आशीर्वाद लिया। पुजारी हरीश शर्मा ने बताया कि मंदिर में नवरात्रि के तीसरे दिन काफी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। सरकार के आदेशानुसार सारे कार्य किए जा रहे हैं। महिला सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बारिश और भूस्खलन की वजह से जो रास्ते बंद हो गए थे, उन्हें खोल दिया गया है और अन्य रास्तों को सही कराया जा रहा है। मैं सभी भक्तों से अनुरोध करता हूं कि इन शुभ नवरात्रि के दिनों में आकर माता का आशीर्वाद प्राप्त करें। श्रद्धालुओं ने बताया, “आज का दर्शन बहुत शुभ था, यह एक बहुत ही सकारात्मक और संतोषजनक अनुभव था। आज के दिन ज्यादा भीड़ देखने को मिल रही है। माता भक्तों की मनोकामना जल्दी पूरी करती है।” श्रद्धालुओं ने बताया कि सरकार के दिशा-निर्देशों पर जिला प्रशासन एवं मंदिर ट्रस्ट द्वारा सभी व्यवस्थाएं की गई हैं। मंदिर और रास्तों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और जगह-जगह सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए हैं। श्रद्धालु लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।  

लेह में हिंसक हुआ प्रदर्शन, BJP कार्यालय और CRPF वाहन जलाए; सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल से क्यों सुलग रहा लद्दाख?

 लद्दाख केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख में छात्रों और पुलिस के बीच बुधवार को झड़प हो गई. लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग को लेकर पर्यावरणविद सोनम वांगुचक भूख हड़ताल पर हैं. सोनम वांगचुक के समर्थन में बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतर आए हैं. इस बीच प्रदर्शनकारियों की पुलिस से झड़प हो गई. पुलिस पर पथराव किया गया. सीआरपीएफ की गाड़ी भी फूंक दी गई. इस दौरान प्रदर्शनकारी बीजेपी के दफ्तर के बाहर भी प्रदर्शन कर रही है. बीजेपी के दफ्तर में आग लगा दी गई. प्रदर्शनकारियों ने कई वाहनों में आग लगा दी. साथ ही अन्य सार्वजनिक संपत्तियों को भी फूंक डाला. पुलिस एक तरफ भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दाग रही है और लाठीचार्ज कर रही है जबकि प्रदर्शनकारी पुलिस पर पथराव कर रहे हैं. प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच पत्थरबाजी शुरू हो गई, जिससे हालात तनावपूर्ण हो गए. गुस्साई भीड़ ने CRPF की गाड़ी, पुलिस वैन और कई अन्य वाहनों को आग के हवाले कर दिया. इतना ही नहीं, भीड़ ने लेह स्थित बीजेपी दफ्तर को भी निशाना बनाया और वहां आगजनी की. सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कार्यालय से धुएं का गुबार उठता दिखाई दिया. आंदोलन की वजह क्या है? यह विरोध लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर तेज हुआ है. आंदोलन का नेतृत्व लेह एपेक्स बॉडी कर रही है. LAB की युवा इकाई ने प्रदर्शन और बंद का आह्वान किया, खासकर तब जब मंगलवार शाम 35 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे 15 लोगों में से दो की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. सोनम वांगचुक का समर्थन इस आंदोलन की सबसे बड़ी आवाज़ बनकर सामने आए हैं पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक, जिनका अनशन 15वें दिन में पहुंच चुका है. वांगचुक का कहना है कि बीजेपीने वादा किया था कि लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल किया जाएगा, लेकिन पांच साल बीत जाने के बाद भी वादा अधूरा है. उनका कहना है, ‘हमारी मांगें पांच साल से लंबित हैं. संविधान दो साल में बन गया था लेकिन हमारी बात पर अब तक चर्चा पूरी नहीं हुई. लोगों का सब्र टूट रहा है. हम नहीं चाहते कि कुछ ऐसा हो जिससे भारत की छवि को धक्का लगे.ट केंद्र से बातचीत की तैयारी लगातार बढ़ते गुस्से के बीच गृह मंत्रालय ने घोषणा की है कि 6 अक्टूबर को लद्दाख के प्रतिनिधिमंडल के साथ अगला दौर की बातचीत होगी. लेकिन LAB ने साफ कर दिया है कि जब तक राज्य का दर्जा और संवैधानिक अधिकार सुनिश्चित नहीं होते, आंदोलन जारी रहेगा. उधर लद्दाख के लोगों का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध से अब तक कुछ हासिल नहीं हुआ, और अब वे जल्द से जल्द ठोस समाधान चाहते हैं. यही वजह है कि लेह में गुस्से की आग सड़कों तक फैल गई और हालात हिंसा में बदल गए. वांगचुक की अगुवाई में लद्दाख की एपेक्स बॉडी लद्दाख के लिए पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग कर रही है. सोनम वांगचुक 15 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं. आज लद्दाख बंद के बीच बड़ी संख्या में लोग लेह में इकट्ठा हुए. फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है. वांगचुक की अगुवाई में छात्रों की चार मांगें हैं. इस दौरान रैली भी निकाली गई. दरअसल पांच अगस्त 2019 को आर्टिकल 370 हटने के बाद जम्मू कश्मीर को दो हिस्सों में बांट दिया गया था. जम्मू-कश्मीर एक अलग केंद्र शासित प्रदेश बना जबकि लेह और कारगिल को मिलाकर लद्दाख अलग केंद्रशासित प्रदेश बना था. अब इसी लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग की जा रही है.  कौन सी हैं चार मांगें:- 1) लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए. 2) लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किया जाए. 3) लद्दाख में दो लोकसभा सीटों की मांग की गई है. 4) लद्दाख की जनजातियों को आदिवासी का दर्जा.

गोलियों की तड़तड़ाहट और धमाकों से दहली जेल, इक्वाडोर में 14 कैदियों की गई जान

क्विटो दक्षिण-पश्चिमी इक्वाडोर की एक जेल में हुए दंगों में कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई जबकि 14 अन्य घायल हो गए। यह जानकारी इक्वाडोर की राष्ट्रीय पुलिस ने दी। उन्होंने बताया कि एल ओरो प्रांत की राजधानी मचाला शहर स्थित जेल में सोमवार तड़के दंगों के बीच गोलीबारी एवं विस्फोट की सूचना मिली। एल ओरो के पुलिस प्रमुख विलियम कैले ने स्थानीय टीवी नेटवकर् इक्वाविसा को बताया कि घटना में 13 कैदियों और एक गार्ड की मौत हो गई तथा 14 अन्य घायल हुए हैं। घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती किया गया। कैले ने कहा कि मारे गए अधिकतर लोग इक्वाडोर के सबसे हिंसक समूहों में से एक लॉस चोनेरोस से संबंधित थे। उन्होंने बताया कि झड़पों के दौरान कई कैदी भाग निकले। जेल अधिकारी फरार कैदियों की सही संख्या का पता लगाने का काम कर रहे हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इक्वाडोर में फरवरी 2021 से अब तक गिरोह-संबंधी दंगों में लगभग 600 कैदी मारे गए हैं।