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जम्मू-कश्मीर: उधमपुर में मुठभेड़ जारी, चार जैश आतंकी घेरे में, एक जवान शहीद

उधमपुर जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में शुक्रवार देर रात से ही सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ जारी है. बताया जाता है कि दूदू बसंतगढ़ की पहाड़ियों पर जैश के 3 से 4 आतंकवादियों को संयुक्त बलों ने घेर लिया. जिसके बाद से लगातार गोलीबारी जारी है. इस गोलीबारी में एक जवान घायल हो गया था. जिसके बाद जवान को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. लेकिन बचाया नहीं जा सका. शुक्रवार रात 8 बजे से ही जारी है मुठभेड़ अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के उधमपुर ज़िले में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में सेना का एक जवान शहीद हो गया. विशिष्ट सूचना के आधार पर, सेना, विशेष अभियान समूह (एसओजी) और पुलिस ने सोजधार के ऊंचाई वाले इलाके से लगे दूदू पुलिस थाना क्षेत्र में एक अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप मुठभेड़ हुई. जम्मू के पुलिस महानिरीक्षक ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "मुठभेड़ जारी है. एसओजी, पुलिस और भारतीय सेना की संयुक्त टीमें मौके पर मौजूद हैं. इससे पहले, व्हाइट नाइट कोर ने एक्स पर कहा था कि "किश्तवाड़ के सामान्य इलाके में एक खुफिया-आधारित अभियान में, व्हाइट नाइट कोर के सैनिकों ने रात लगभग 8 बजे आतंकवादियों से संपर्क स्थापित किया". एक साल में इस इलाके में हुई हैं कई मुठभेड़ पिछले एक साल में इस इलाके में कई मुठभेड़ें हुई हैं. बीते 26 जून को दूदू-बसंतगढ़ के जंगल में हुई मुठभेड़ में आतंकवादी हैदर को मार गिराया था. हैदर पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद (JeM) का एक शीर्ष कमांडर था, जो पिछले चार वर्षों से इस क्षेत्र में सक्रिय था. इससे पहले 25 अप्रैल को बसंतगढ़ क्षेत्र में छिपे हुए आतंकवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में सेना का एक जवान शहीद हो गया था.   

मौसम विभाग की चेतावनी: 20-24 सितंबर तक इन राज्यों में मूसलधार बारिश के आसार

नई दिल्ली  मानसून का यह सीज़न काफी शानदार रहा है क्योंकि इस दौरान देशभर में अच्छी बारिश हुई है। मानसून की दस्तक से अब तक करीब ढाई महीने में देशभर में जमकर बादल बरसे हैं। कई राज्यों में तो इस बार रिकॉर्ड बारिश देखने को मिली है। हालांकि अब कई जगह मानसून की रफ्तार कम हुई है, लेकिन अभी मानसून की विदाई नहीं हुई है। कुछ राज्यों में मानसून की रफ्तार अभी भी बरकरार है जिससे बारिश का सिलसिला भी जारी है। इसी बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department – IMD) ने जानकारी दी है कि मानसून की वापसी हो गई है। इससे 20, 21, 22, 23 और 24 सितंबर को देश के कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट (Heavy Rain Alert) है। उत्तरपश्चिम भारत उत्तरपश्चिम भारत में पिछले कुछ दिनों में मानसून की रफ्तार धीमी हुई है, लेकिन मानसून की वापसी हो गई है। ऐसे में मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है कि 20, 21, 22, 23 और 24 सितंबर को राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के कुछ जिलों में भारी बारिश हो सकती है, तो कुछ जिलों में हल्की बारिश की भी संभावना है। उत्तरीपूर्व भारत उत्तरीपूर्व भारत में कई राज्यों में मानसून की रफ्तार अभी बरकरार है। मौसम विभाग के अलर्ट के अनुसार मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा और नागालैंड में कुछ जगह 20-24 सितंबर को भारी बारिश का अलर्ट है। इस दौरान कुछ जगह रिमझिम बारिश और तेज़ हवाओं का अलर्ट भी है। पूर्वी और मध्य भारत 20-24 सितंबर को पूर्वी और मध्य भारत के कई राज्यों में मानसून की वापसी हो गई है। ऐसे में मौसम विभाग ने मध्य प्रदेश, अंडमान-निकोबार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, सिक्किम, विदर्भ और ओडिशा में कुछ जगह रुक-रूककर भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। कई इलाकों में अगले 5 दिन रिमझिम बारिश भी होगी। इस दौरान 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का भी अलर्ट है। पश्चिम भारत पश्चिम भारत में कई जगह मानसून का असर अभी भी बरकरार है। मौसम विभाग के अनुसार महाराष्ट्र और गोवा के कुछ जिलों में 20, 21, 22, 23 और 24 सितंबर को जमकर बादल बरसेंगे। इस दौरान कुछ जिलों में हल्की बारिश का भी अलर्ट है। दक्षिण भारत दक्षिण भारत में अभी भी मानसून की रफ्तार बरकरार है। मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है कि तमिलनाडु, यनम, तेलंगाना, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, कर्नाटक और केरल में 20, 21, 22, 23 और 24 सितंबर को कुछ जिलों में तेज़ बारिश होगी। इस दौरान कुछ जिलों में हल्की बारिश की भी संभावना है। इस दौरान 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का भी अलर्ट है।

ऑपरेशन सिंदूर का असर: दहशत में आतंकी सरगना, PoK से बदल रहे ठिकाने

नई दिल्ली भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में 9 बड़े आतंकवादी ठिकाने ध्वस्त कर दिए गए थे. भारत के इस प्रहार से आतंक के आका डरे हुए हैं. लिहाजा पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी संगठन विशेषकर जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और हिज्बुल मुजाहिदीन (HM) ने अपनी गतिविधियों का केंद्र बदलकर PAK के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में शिफ्ट करना शुरू कर दिया है. ये बदलाव दिखाता है कि अब वे पीओके को असुरक्षित मानते हैं. जबकि, खैबर पख्तूनख्वा उन्हें बेहतर सुरक्षा देता है, क्योंकि ये अफगान सीमा के नज़दीक है और यहां अफगान युद्ध से जुड़े पुराने जिहादी ठिकाने मौजूद हैं. जैश-ए-मोहम्मद का भर्ती अभियान खुला  14 सितंबर 2025 को भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच शुरू होने से करीब 7 घंटे पहले जैश-ए-मोहम्मद ने खैबर पख्तूनख्वा के मनसेहरा ज़िले के गढ़ी हबीबुल्लाह कस्बे में खुलेआम भर्ती अभियान चलाया था. ये आयोजन दिखावे में तो देवबंदी धार्मिक सभा था, लेकिन असल में इसे जैश-ए-मोहम्मद और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (जेयूआई) ने मिलकर आयोजित किया था. इसका असल मकसद लोगों को कट्टरपंथ की तरफ खींचना और भर्ती करना था, यानी कट्टरपंथी स्पीच देकर उनका ब्रेनवॉश करना था. मसूद इलियास कश्मीरी का भड़काऊ भाषण भारत में वांछित आतंकवादी और जैश-ए-मोहम्मद का बड़ा चेहरा मसूद इलियास कश्मीरी, जो संगठन के संस्थापक मौलाना मसूद अजहर का करीबी माना जाता है, उसने सभा में भड़काऊ भाषण दिया. उसने ओसामा बिन लादेन की तारीफ करते हुए उसे 'शोहदा-ए-इस्लाम' और 'अरब का राजकुमार' बताया. कश्मीरी ने जैश-ए-मोहम्मद की विचारधारा को अल-कायदा की विरासत से जोड़ते हुए खैबर पख्तूनख्वा को मुजाहिदीन की स्थायी पनाहगाह बताया. जैश का अगला ठिकाना बना पेशावर जैश अब 25 सितम्बर को पेशावर में एक बड़ा कार्यक्रम करने जा रहा है. इस बार जैश नए नाम अल-मुराबितून का इस्तेमाल करेगा, ताकि दुनिया की नजरों से बचा जा सके. 'अल-मुराबितून' का मतलब है इस्लाम की जमीन के रक्षक. नए ट्रेनिंग सेंटर्स का निर्माण सूत्रों ने बताया कि जैश-ए-मोहम्मद मनसेहरा में एक नया ट्रेनिंग सेंटर बना रहा है, जिसका नाम मरकाज़ शोहदा-ए-इस्लाम रखा गया है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद इस कैंप का दायरा बढ़ा है, इसका मकसद इस इलाके में जैश की भर्ती और ट्रेनिंग के कामों को सुगम बनाना है. रिपोर्ट्स के मुताबिक हिज्बुल मुजाहिदीन के पूर्व पाकिस्तानी कमांडो खालिद खान के नेतृत्व में खैबर पख्तूनख्वा के निचले दीर के बंदाई इलाके में 'HM313' नाम से नया प्रशिक्षण केंद्र बन रहा है. ये कैंप पीओके में तबाह हुए शिविरों की जगह लेना चाहता है. साथ ही कश्मीर में विचारधारा और सीमा पार योजना बनाने का एक मंच बनेगा. जिहादी नेटवर्क का फायदा उठा रहे आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन का खैबर पख्तूनख्वा में एक्टिव होना क्षेत्र की शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है. ये दिखाता है कि ये आतंकी संगठन धार्मिक और राजनीतिक सभाओं के बहाने लोगों की भर्ती को सामान्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं और इलाके में पहले से मौजूद जिहादी नेटवर्क का फायदा उठा रहे हैं, इन गतिविधियों से यह सवाल भी उठता है कि क्या पाकिस्तानी सरकार सच में आतंकवाद के खिलाफ सख्त है और क्या वह क्षेत्रीय स्थिरता लाने में ईमानदारी से काम कर रही है. पाकिस्तान पर लगातार दबाव बनाना जरूरी पाकिस्तान में आतंकवादी संगठनों का ये रणनीतिक बदलाव भारत और पूरी दुनिया के लिए बड़ी चिंता है. जैश-ए-मोहम्मद के खुलेआम भर्ती अभियान और हिज्बुल मुजाहिदीन के नए शिविर साफ दिखाते हैं कि पाकिस्तान अपनी जमीन पर पल रहे आतंकियों के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठा रहा. इसलिए, पाकिस्तान पर लगातार दबाव बनाए रखना जरूरी है, ताकि वह इन संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करे. अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी पाकिस्तान को उसके कामों के लिए जिम्मेदार ठहराना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह आतंकवाद रोकने और क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए गंभीर कदम उठाए. खैबर पख्तूनख्वा (KPK) क्यों चुना गया? – PoK पर अब भारत की सीधी मार पड़ रही है. – KPK पहाड़ी इलाका है, अफगानिस्तान के पास है और पहले से आतंकी छिपने की जगहें हैं. – यहां आतंकियों को ज़्यादा सुरक्षित महसूस होता है.

दुश्मनों के सीने में हलचल: ₹200000 करोड़ की डिफेंस डील में शामिल हुंकार भरे फाइटर जेट

नई दिल्ली दुनियाभर में सामरिक हालात तेजी से बदल रहे हैं. भारत के दो कट्टर दुश्‍मनों (चीन और पाकिस्‍तान) के बीच रक्षा सहयोग लगातार बढ़ रहा है. इसे देखते हुए राष्‍ट्रीय सुरक्षा को दुरुस्‍त और अपग्रेड करना समय की मांग है. सेना के तीनों अंगों (आर्मी, नेवी और एयरफोर्स) को मॉडर्न टेक्‍नोलॉजी से लैस करने के लिए हजारों करोड़ का इन्‍वेस्‍टमेंट किया जा रहा है. इसी रणनीति के तहत ही इंडियन एयरफोर्स ने 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने के प्रस्‍ताव को रफ्तार देना शुरू कर दिया है. सबकुछ ठीक रहा तो अगले साल इस मेगा डिफेंस डील को अंतिम रूप दे दिया जाएगा. तकरीबन 2 लाख करोड़ की इस डील के तहत राफेल जेट का एक स्‍क्‍वाड्रन फ्लाई-अवे कंडीशन में भारत को मिलेगा. यानी 18 राफेल जेट पूरी तरह से ऑपरेशनल फेज में इंडियन एयरफोर्स को मिलेगा. भारत और फ्रांस के बीच बड़ी डिफेंस डील का स्‍ट्रक्‍चर पहली बार सामने आया है. बता दें कि इंडियन एयरफोर्स के बेड़े में पहले से ही 36 राफेल जेट शामिल हैं. ये फाइटर जेट विभिन्‍न एयरबेस पर तैनात हैं. दरअसल, भारतीय वायुसेना (IAF) अपनी कॉम्‍बैट कैपेबिलिटी को मजबूती देने के लिए 114 राफेल विमानों की ऐतिहासिक खरीद प्रक्रिया को तेज कर रही है. अनुमानित 2 लाख करोड़ रुपये (23.8 अरब डॉलर) से अधिक के इस सौदे को अगले फाइनेंशियल ईयर तक अंतिम रूप देने का लक्ष्य है. समझौते के तहत पहले चरण में 18 विमान सीधे फ्रांस से ऑफ-द-शेल्फ मिलेंगे, जबकि 90 से अधिक विमानों का असेंबली भारत में होगी, जिनमें कम से कम 60% स्वदेशी योगदान सुनिश्चित किया जाएगा. IAF की योजना है कि शुरुआती 18 राफेल लड़ाकू विमान फ्रांस की प्रोडक्‍शन लाइन से सीधे उड़ान भरकर भारत आएंगे. इन्हें तेजी से वायुसेना की अग्रिम पंक्ति में तैनात किया जाएगा. यह रणनीति पारंपरिक रक्षा खरीद प्रक्रिया की देरी को टालकर वायुसेना को तत्काल शक्ति प्रदान करेगी. खासियत है बेमिसाल भारत सरकार ने फ्रांस के साथ सीधा करार करने का निर्णय लिया है. इससे MRFA टेंडर प्रक्रिया को दरकिनार कर दिया गया है. शुरुआती विमान डिलीवरी के साथ ही पायलटों और ग्राउंड स्टाफ को निर्माता कंपनी की ओर से प्रशिक्षण मिलेगा, ताकि जल्द से जल्द इन विमानों को ऑपरेशनल क्षमता में शामिल किया जा सके. पहले 18 राफेल अत्याधुनिक हथियारों से लैस होंगे. ‘इंडिया डिफेंस न्‍यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, नए राफेल फाइटर जेट में मीटियोर एयर-टू-एयर मिसाइल और SCALP क्रूज़ मिसाइल शामिल हैं. इनमें भारतीय हार्डवेयर अपग्रेड और कुछ स्वदेशी उपकरणों को भी इंटीग्रेट किया जाएगा. एयरफोर्स की जरूरत वर्तमान में IAF के पास सिर्फ 29 लड़ाकू स्क्वाड्रन हैं, जबकि दो मोर्चों (पाकिस्तान और चीन) पर एक साथ निपटने के लिए 42.5 स्क्वाड्रन की आवश्यकता है. हाल ही में राफेल ने ऑपरेशन सिंदूर में अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन कर चीन के PL-15 मिसाइल को मात दी थी और स्कैल्प मिसाइल से सफल वार किए थे. इससे इन विमानों की तात्कालिक ज़रूरत और भी स्पष्ट हो गई है. बता दें कि डसॉल्ट एविएशन भारतीय साझेदारों (खासकर टाटा) के साथ मिलकर भारत में असेंबली लाइन स्थापित करेगा. भविष्य में बनने वाले राफेल विमानों में मौजूदा F4 स्टैंडर्ड से भी उन्नत क्षमताएं होंगी. साथ ही हैदराबाद में M-88 इंजनों के लिए मरम्मत और मेंटेनेंस सुविधा (MRO) स्थापित की जाएगी. राफेल का देसीकरण नई डील के तहत पहले 18 विमान फ्रांस में निर्मित होंगे, लेकिन आगे आने वाले बैचों में लगभग 60% स्वदेशी सामग्री का लक्ष्य रखा गया है. भारत में बनने वाले विमानों में लंबी दूरी की मारक क्षमता वाले हथियार और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम शामिल होंगे. इस सौदे से भारतीय वायुसेना के पास कुल 176 राफेल होंगे, जिनमें पहले से खरीदे गए 36 विमान और नौसेना के लिए ऑर्डर किए गए 36 विमान भी शामिल हैं. इससे वायुसेना के अंबाला और हाशिमारा जैसे प्रमुख बेसों की ताकत बढ़ेगी. बता दें कि फ्रांस सरकार की ओर से सॉवरेन गारंटी दी जाएगी, जिससे डिलीवरी समय पर सुनिश्चित होगी और वाणिज्यिक जोखिमों से बचाव मिलेगा. कॉन्‍ट्रैक्‍ट पर हस्ताक्षर अगले वित्त वर्ष में होने की उम्मीद है. 5 से 6 साल में बदलेगी तस्‍वीर राफेल सौदा न केवल वायुसेना की मौजूदा क्षमताओं को तुरंत मजबूत करेगा, बल्कि लंबे समय तक स्वदेशी रक्षा उत्पादन को गति देगा. स्थानीय असेंबली 2029-30 तक पूरी तरह सक्रिय हो जाएगी. इस बीच, तेजस MK-1A और आने वाले पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों से भारत की आत्मनिर्भरता और सामरिक ताकत को नई ऊंचाई मिलने की उम्मीद है.

भारत-यूरोपीय संघ FTA को लेकर ग्रीस ने दिया समर्थन, PM मोदी से हुई चर्चा

नई दिल्ली  ग्रीस के प्रधानमंत्री क्यारीकोस मित्सोताकिस ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत की। इस दौरान, उन्होंने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के शीघ्र और पारस्परिक लाभकारी निष्कर्ष के लिए ग्रीस के समर्थन को दोहराया। साथ ही उन्होंने अगले वर्ष होने वाले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इम्पैक्ट समिट की सफलता की भी शुभकामनाएं दीं। मित्सोताकिस ने प्रधानमंत्री मोदी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं भी दीं, जिस पर पीएम मोदी ने उन्हें धन्यवाद दिया था। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) द्वारा जारी बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, शिपिंग, रक्षा, सुरक्षा, कनेक्टिविटी और जन-से-जन संपर्क जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों में हो रही प्रगति का स्वागत किया और भारत-ग्रीस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। बयान में कहा गया, “प्रधानमंत्री मित्सोताकिस ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के शीघ्र संपन्न होने और 2026 में भारत द्वारा आयोजित किए जाने वाले एआई इम्पैक्ट समिट की सफलता के लिए ग्रीस का समर्थन व्यक्त किया। दोनों नेताओं ने परस्पर हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार साझा किए और संपर्क में बने रहने पर सहमति जताई।” गौरतलब है कि अगस्त 2023 में प्रधानमंत्री मोदी की ग्रीस यात्रा के दौरान दोनों देशों के संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर पर ले जाया गया था। फरवरी 2024 में मित्सोताकिस ने भारत का राजकीय दौरा किया था, जो 15 साल बाद ग्रीस से भारत में किसी राष्ट्राध्यक्ष/सरकार प्रमुख का पहला दौरा था। इस दौरान दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत और गहरा किया था। दोनों नेताओं ने तब साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, स्वतंत्रता, अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा, नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय कानून (यूएनसीएलओएस सहित) के प्रति सम्मान, मानवाधिकारों, ऐतिहासिक संबंधों और लंबे समय से चले आ रहे रिश्तों को भारत-ग्रीस रणनीतिक संबंधों की नींव बताया था। प्रधानमंत्री मोदी और मित्सोताकिस ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (आईएमईईसी) पर भी चर्चा की थी, जिसका उद्देश्य भारत और यूरोप के बीच कनेक्टिविटी को बढ़ाना है। इसके तहत व्यापार, वाणिज्य, निवेश, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, बंदरगाह और अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर बल दिया गया।

सुरक्षा एजेंसियों का बड़ा कदम: आतंकियों के मददगारों का रिमांड बढ़ा, कई खुलासे तय

जम्मू-कश्मीर पहलगाम हमले के मामले में आतंकवादियों की मदद करने के आरोप में दो आरोपियों की रिमांड अदालत ने फिर बढ़ा दी है। जम्मू की एनआईए की विशेष अदालत ने पहलगाम आतंकी हमले से जुड़े दो आरोपियों की हिरासत और जांच की अवधि 90 दिन से बढ़ाकर अब 45 दिन और कर दी है। यह आदेश विशेष न्यायाधीश संदीप गंडोत्रा ने 18 सितंबर को दिया। आरोपी बशीर अहमद जोठट (बैसरन, पहलगाम) और परवेज़ अहमद (बटकूट, पहलगाम) पर आरोप है कि उन्होंने पाकिस्तानी आतंकियों को छिपने की जगह उपलब्ध कराई। अदालत ने कहा कि जांच अभी अहम दौर में है, क्योंकि गवाहों के बयान, फॉरेंसिक रिपोर्ट और डीएनए परीक्षण जैसी रिपोर्टें लंबित हैं। इसलिए हिरासत बढ़ाने की मांग उचित है। सरकारी वकील चंदन कुमार सिंह ने अदालत में बताया कि आरोपियों के मोबाइल फोन से पाकिस्तानी नंबर मिले हैं, जिनकी जांच अभी जारी है। इसके अलावा, 28 जुलाई को मुठभेड़ में मारे गए तीन आतंकियों से बरामद हथियार और सामान की रिपोर्ट भी लंबित है। एनआईए ने कहा कि आरोपियों के बताए ठिकानों से मिले कंबल, शॉल और बिस्तर डीएनए परीक्षण के लिए भेजे गए हैं, ताकि उन्हें आतंकियों से जोड़ा जा सके। यह मामला 22 अप्रैल 2025 को बैसरन, पहलगाम में हुए आतंकी हमले से जुड़ा है। इस हमले में 26 पर्यटकों की मौत हुई थी। एनआईए के अनुसार, आरोपियों ने लश्कर-ए-तैयबा के तीन पाकिस्तानी आतंकियों को हमले से पहले छिपने की जगह उपलब्ध कराई थी। दोनों आरोपी 22 जून से जम्मू की अंपल्ला जेल में बंद हैं।

अहमदाबाद क्रैश की जांच में बड़ा खुलासा, फ्यूल सिस्टम में तकनीकी गड़बड़ी पाई गई

नई दिल्ली अहमदाबाद हवाई दुर्घटना की जांच में एक चौंकाने वाला नया खुलासा सामने आया है, जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। 260 लोगों की दर्दनाक मौत से जुड़ी इस हादसे के पीछे की वजहें अब तक जो समझी जा रही थीं, उनसे कहीं अधिक गहरे और गंभीर तथ्य उजागर हुए हैं। इस घटना की सच्चाई जानकर हर किसी के होश उड़ जाएंगे। क्या वजह थी इस भीषण दुर्घटना की? किस तरह की लापरवाही और चूक ने इतना बड़ा हादसा कर दिया? आइए जानते हैं इस मामले से जुड़ी अब तक की सबसे महत्वपूर्ण और हैरान करने वाली जानकारी। घटना के बारे में बात करें तो इस साल 12 जून 2025 को हुए अहमदाबाद विमान हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। एयर इंडिया के बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान का यह हादसा तब हुआ था जब यह अहमदाबाद से लंदन के लिए उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद मेडिकल हॉस्टल की बिल्डिंग से टकरा गया। इस त्रासदी में विमान में सवार 242 लोगों में से 241 की मौत हो गई, साथ ही टक्कर से प्रभावित मेडिकल हॉस्टल के 19 लोगों की भी जान चली गई। कुल मिलाकर इस हादसे में 260 लोग अपनी जिंदगी गंवा बैठे। हादसे में केवल एक व्यक्ति ही गंभीर रूप से घायल होकर जिंदा बचा था। वहीं, अस्पताल के 67 लोग भी घायल हुए थे। अब इस दर्दनाक घटना को लेकर मारे गए चार यात्रियों के परिवारों ने अमेरिका में विमान निर्माता कंपनी बोइंग और उसके पार्ट्स बनाने वाली कंपनी हनीवेल के खिलाफ कानूनी कदम उठाया है। यह मुकदमा टेक्सास स्थित लैनियर लॉ फर्म के माध्यम से दायर किया गया है। हादसे की वजह बनी तकनीकी खामी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के मुताबिक, विमान के फ्यूल स्विच में खराबी आ गई थी, जिसके कारण विमान 'रन' से 'कटऑफ' स्थिति में चला गया था। इस तकनीकी खराबी ने पायलट के नियंत्रण को प्रभावित किया और विमान अनियंत्रित होकर अस्पताल की इमारत से टकरा गया। मृतकों के परिवारों का आरोप है कि बोइंग और हनीवेल दोनों कंपनियां इस फ्यूल स्विच की समस्या को अच्छी तरह से जानती थीं, लेकिन जानबूझकर इस खतरे को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने कहा कि दोनों कंपनियों की लापरवाही और उचित सावधानी न बरतने के कारण यह हादसा हुआ है। जांच प्रक्रिया जारी, कंपनियों की चुप्पी हालांकि बोइंग और हनीवेल की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। बोइंग ने केवल इतना कहा है कि भारतीय विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) इस हादसे की विस्तृत जांच कर रहा है। इस जांच की अंतिम रिपोर्ट आने की उम्मीद 2026 में है। हादसे का असर और भविष्य की तैयारी यह हादसा भारतीय हवाई सेवा के इतिहास में एक काला दिन माना जा रहा है, जिसने देश के नागरिकों को विमान सुरक्षा के प्रति चिंता में डाल दिया है। विमान निर्माण और उसके पार्ट्स की गुणवत्ता पर उठ रहे सवालों के बीच यह मुकदमा एक नई चुनौतियों को सामने लाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले में जांच पूरी होने पर विमानन सुरक्षा मानकों में कड़ा सुधार हो सकता है।  

भारत सरकार का रुख साफ, सऊदी अरब-पाकिस्तान समझौते पर जताई अपनी चिंता

नई दिल्ली  सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुए रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते पर शुक्रवार को भारत की प्रतिक्रिया आई है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत और सऊदी अरब के बीच रणनीतिक साझेदारी है, जो लगातार गहरी हो रही है। भारत ने उम्मीद जताई है कि रणनीतिक साझेदारी में आपसी हितों का ध्यान रखा जाएगा। पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए डील के तहत यदि दोनों देशों में किसी भी एक देश पर हमला होता है तो यह अटैक दोनों के खिलाफ आक्रमण माना जाएगा। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान के कई ठिकानों पर बड़े हवाई हमले किए थे, जिसके बाद सऊदी और पाकिस्तान के बीच हुआ यह समझौता अहम माना जा रहा है। सऊदी अरब-पाकिस्तान समझौते पर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "भारत और सऊदी अरब के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी है जो पिछले कई वर्षों में काफी गहरी हुई है। हम उम्मीद करते हैं कि इस रणनीतिक साझेदारी में आपसी हितों और संवेदनशीलताओं का ध्यान रखा जाएगा।" इससे पहले, रणधीर जायसवाल ने कहा था कि भारत इस कदम के अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करेगा। जायसवाल ने कहा, "सरकार भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा और सभी क्षेत्रों में व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।" पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। पाकिस्तान-सऊदी संयुक्त वक्तव्य के अनुसार, यह समझौता सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच लगभग आठ दशकों से चली आ रही ऐतिहासिक साझेदारी पर आधारित है और भाईचारे व इस्लामी एकजुटता के बंधनों के साथ-साथ दोनों देशों के बीच साझा रणनीतिक हितों और घनिष्ठ रक्षा सहयोग पर आधारित है। दोनों पक्षों ने दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों और साझा हितों के कई विषयों की भी समीक्षा की। शरीफ ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि उनकी बातचीत में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई, क्षेत्रीय चुनौतियों की समीक्षा की गई और द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ाया गया। शरीफ ने यह भी कहा कि वह सऊदी क्राउन प्रिंस के लगातार समर्थन और दोनों देशों के बीच सऊदी निवेश, व्यापार और व्यावसायिक संबंधों को बढ़ाने में उनकी गहरी रुचि की बहुत सराहना करते हैं।

बयान से सनसनी: किस पर भड़के इजरायली रक्षा मंत्री, धमकी में कही ये बात

गाजा  गाजा में इजरायल हमास पर कहर बरपा रहा है। स्थानीय लोग शहर छोड़कर अन्य स्थानों पर जा रहे हैं। इजरायल कई समूहों से एक साथ संघर्ष कर रहा है और किसी से भी टकराव से पीछे नहीं हट रहा। इस बीच, यमन और इजरायल के बीच तनाव भी बढ़ता जा रहा है। हूती विद्रोहियों के खिलाफ भी इजरायल कार्रवाई कर रहा है। हूती विद्रोहियों के ड्रोन और मिसाइल हमलों के जवाब में अब इजरायल बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। इजरायली रक्षा मंत्री ने दी जान से मारने की धमकी इजरायली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने हूती नेता अब्दुल-मलिक अल-हूती को जान से मारने की धमकी दी है। काट्ज ने कहा है कि जल्द ही तुम्हारा नंबर आएगा। इससे पहले 28 अगस्त को इजरायल ने यमन में हवाई हमला कर हूती सरकार के प्रधानमंत्री और कई महत्वपूर्ण सदस्यों को मार दिया था। अब इजरायल ने फिर से ऐसे हमले की धमकी दी है। दरअसल, गुरुवार को इजरायल के दक्षिणी शहर ऐलात के एक होटल पर हूती विस्फोटक ड्रोन से हमला हुआ था। इस दौरान एक बैलिस्टिक मिसाइल और दो अन्य ड्रोनों को भी रोका गया। इस हमले के बाद काट्ज ने एक्स पर लिखा कि अब्दुल-मलिक अल-हूती… तुम्हारा समय आ गया है। तुम्हें अपनी सरकार के अन्य लोगों के पास भेजा जाएगा। हूती झंडे पर लिखे नारे 'इजरायल की मौत, यहूदियों पर अभिशाप' की जगह इजरायली नीला-सफेद झंडा यमन की एकीकृत राजधानी पर लहराएगा। अब्दुल-मलिक कौन है? अब्दुल-मलिक हूती आंदोलन के संस्थापक हुसैन अल-हूती के भाई हैं। 2004 में हुसैन की मौत के बाद अब्दुल-मलिक ने संगठन की कमान संभाली। 2015 में हूतियों ने यमन की सरकार को उखाड़ फेंका और राजधानी सना सहित बड़े क्षेत्र पर कब्जा कर लिया। इस संघर्ष में मलिक ने एक मजबूत नेता और कमांडर के रूप में पहचान बनाई। अब्दुल-मलिक के बारे में कहा जाता है कि वह लंबे समय तक एक जगह नहीं ठहरता और बार-बार अपनी लोकेशन बदलता रहता है। वह सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा नहीं लेता। यह भी कहा जाता है कि उसके अपने लोगों को भी उसकी सटीक जानकारी नहीं होती कि वह कहां है और क्या कर रहा है। हालांकि, वह समय-समय पर वीडियो संदेश जारी करता रहता है। बढ़ रही हूतियों की लगातार ताकत बताया जाता है कि अब्दुल-मलिक के नेतृत्व में हूतियों की ताकत लगातार बढ़ी है। खासकर लाल सागर में उसने इजरायल, अमेरिका और उनके सहयोगियों को कड़ी चुनौती दी है। हूती विद्रोही अक्सर इजरायल के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हैं और लाल सागर में इजरायल से जुड़े जहाजों को निशाना बनाते रहते हैं। वे आए दिन इजरायल पर ड्रोन और मिसाइल हमले करते रहते हैं।  

सड़क पर ही विरोध! 20 रुपये में 6 नहीं, सिर्फ 4 गोलगप्पे पर महिला ने किया हंगामा

वडोदरा  बीच सड़क बैठकर रोती हुई महिला, स्पीड कम करके महिला को बचाकर निकलते वाहन। सोशल मीडिया पर ऐसा एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है। वीडियो के वायरल होने की असली वजह वह कारण है जिसके लिए महिला इस तरह अपनी आवाज उठाने को मजबूर हुई। दावा किया जा रहा है कि 20 रुपये में 6 की जगह महज 4 गोलगप्पे दिए जाने से नाराज होकर महिला धरने पर बैठ गई। बताया जा रहा है कि वीडियो वडोदरा के सुरसागर झील इलाके का है। हाल ही में महिला सड़क किनारे एक गोलगप्पे वाले ठेले पर पहुंची थी। उसका आरोप था कि गोलगप्पे वाला 20 रुपये में 6 देता है लेकिन उसे केवल चार ही दिए। न्याय पाने के लिए महिला बीच सड़क धरने पर बैठ गई। महिला रोने लगी। महिला ने रोते हुए लोगों को अपना दुख बताया और कहा कि गोलगप्पे वाला दादागिरी करता है। महिला ने कहा कि वह उसका ठेला हटवाना चाहती है। ट्रैफिक बाधित होने पर पुलिस भी मौके पर पहुंची और किसी तरह उसे समझा-बुझाकर रास्ते से हटाया। वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। लोग तरह-तरह के कॉमेंट कर रहे है। कुछ लोगों ने महिला के साथ सहानुभूति जताई और एक उपभोक्ता के रूप में उसके प्रदर्शन को सही बताया।