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देशी तकनीक से सशक्त हुई नौसेना, पहला 3D एयर रडार कमीशन — हवाई खतरे होंगे नाकाम

नई दिल्ली टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) ने स्पेन की डिफेंस कंपनी इंद्रा के साथ मिलकर भारतीय नौसेना के लिए पहला 3D एयर सर्विलांस रडार (3D-ASR) – लांजा-एन कमीशन किया है. यह रडार एक भारतीय नौसेना के युद्धपोत पर लगाया गया है. यह भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है. लांजा-एन रडार क्या है? लांजा-एन इंद्रा का लांजा 3D रडार का नौसैनिक संस्करण है, जो दुनिया के सबसे एडवांस लॉन्ग-रेंज एयर डिफेंस और एंटी-मिसाइल रडार में से एक है. यह रडार हवा और सतह दोनों के लक्ष्यों को 3D में ट्रैक करता है. इसकी रेंज 254 नॉटिकल माइल्स (लगभग 470 किमी) है. यह ड्रोन, सुपरसोनिक फाइटर जेट, एंटी-रेडिएशन मिसाइल, और नौसैनिक प्लेटफॉर्म को पकड़ सकता है. यह खराब मौसम में भी काम करता है और दुश्मन के हमलों को रोकने में माहिर है. यह पहली बार है जब लांजा-एन रडार स्पेन के बाहर काम करेगा. इंद्रा ने इसे भारतीय महासागर की नमी और गर्मी के लिए अनुकूलित किया है. रडार को युद्धपोत के सभी सिस्टम से जोड़ा गया है. सख्त समुद्री परीक्षणों के बाद इसे स्वीकार किया गया. परीक्षणों में विभिन्न नौसैनिक और हवाई प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया गया. टाटा और इंद्रा का सहयोग यह उपलब्धि टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स (TASL) और इंद्रा के बीच 2020 में हुए समझौते का नतीजा है. इस समझौते में 23 रडारों की डिलीवरी का प्रावधान है, जिनमें से तीन पूरे इंद्रा से आएंगे. बाकी 20 टाटा भारत में असेंबल करेगा. टाटा ने कर्नाटक में एक रडार असेंबली, इंटीग्रेशन और टेस्टिंग फैसिलिटी बनाई है, जो डिलीवरी को तेज करेगी. TASL के CEO और MD सुकर्ण सिंह ने कहा कि इंद्रा के साथ हमारा सहयोग भारत में रडार निर्माण क्षमता को मजबूत करने का प्रतीक है. हम स्थानीय सप्लाई चेन और तकनीकी विशेषज्ञता से उन्नत रक्षा प्रणालियों का इकोसिस्टम बना रहे हैं. इंद्रा के नेवल बिजनेस यूनिट की हेड आना बुएंडिया ने कहा कि यह प्रोजेक्ट रडार डिलीवरी से आगे है. हमने बेंगलुरु में टाटा के साथ रडार फैक्ट्री बनाई, जो हमें स्थानीय उत्पादन और सेवा प्रदान करने में मदद करेगी.  भारतीय नौसेना के लिए महत्व यह रडार भारतीय नौसेना के फ्रिगेट, डिस्ट्रॉयर और एयरक्राफ्ट कैरियर पर लगाया जाएगा. पहले कमीशंड रडार एक युद्धपोत पर लगाया गया है. बाकी जल्द ही आएंगे. यह नौसेना की निगरानी क्षमता को मजबूत करेगा. खासकर दुश्मन के ड्रोन, जेट और मिसाइलों के खिलाफ.  इंद्रा का लांजा-एन रडार मॉड्यूलर, सॉलिड-स्टेट और पल्स्ड टैक्टिकल रडार है, जो सभी प्रकार के हवाई और सतही लक्ष्यों को ट्रैक करता है. यह भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है. टाटा पहली भारतीय कंपनी बनी जो नेक्स्ट-जनरेशन नेवल सर्विलांस रडार बना और इंटीग्रेट कर रही है. 50% से ज्यादा लोकलाइजेशन होगा, जो ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देगा.

दोबारा ऐसा ना हो: कतर संकट पर भड़के डोनाल्ड ट्रंप, नेतन्याहू को किया फोन

तेल अवीव  बीते दो सालों से गाजा में हमास और इजरायल के बीच जारी जंग पहले ही कई देशों तक पहुंच चुकी है। लेबनान, ईरान जैसे देशों से इजरायल सीधे जंग में उतर चुका है, लेकिन मंगलवार को उसने हैरान कर दिया। इजरायली सेना ने कतर की राजधानी दोहा पर ही हमले कर दिए और हमास के आतंकियों को टारगेट करने का दावा किया। यह वही कतर है, जहां पर हमास के साथ मध्यस्थता की मीटिंगें होती रही हैं। ऐसे में शांति वार्ता का मंच बने देश के अंदर ही घुसकर हमले करने से पूरे मिडल ईस्ट के ही हालात बिगड़ने की आशंका है। रविवार और सोमवार को कतर ने इस्लामिक और अरब देशों की समिट बुला ली है। इस समिट में इजरायल के हमले से पैदा हालातों पर चर्चा होगी। इस बीच खबर है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इजरायल की इस हरकत पर खफा हैं। Axios ने सूत्रों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट में कहा है कि डोनाल्ड ट्रंप ने फोन करके बेंजामिन नेतन्याहू से कहा है कि ऐसी हरकत दोबारा नहीं होनी चाहिए। ट्रंप ने कहा कि यह एकदम स्वीकार नहीं किया जा सकता। मैं कह रहा हूं कि आप ऐसी हरकत फिर नहीं करेंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि कतर की राजधानी में हमले से डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार भी भौंचक्के रह गए। इसी को लेकर जब बात हुई तो ट्रंप ने नेतन्याहू और उनके सलाहकारों के काम पर हैरानी जताई और कहा कि आखिर आप ऐसा कैसे कर सकते हैं। लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई है। डोनाल्ड ट्रंप के ऐतराज और मुस्लिम देशों के भड़कने के बाद भी बेंजामिन नेतन्याहू अपने रुख पर अडिग हैं। उन्होंने एक बार फिर दोहराया है कि कतर समेत आतंकियों को पालने वाले देशों पर हम हमले करते रहेंगे। उन्होंने कतर की सीधा और खुला चैलेंज देते हुए कहा है कि या तो वह आतंकियों को निकाल बाहर करे या फिर हमलों के लिए तैयार रहे। इस बीच लेबनान में एक बार फिर से इजरायल की सेना ने हमले किए हैं। सेना का कहना है कि हमने हिजबुल्ला के ठिकानों को तबाह किया है। ये हमले लेबनान की बेका घाटी में हुए हैं, जिसके वीडियो भी सोशल मीडिया पर चल रहे हैं। सीरिया ने खुद किए हिजबुल्ला के ठिकानों पर अटैक, इजरायल को सफलता इजरायली सेना ने कहा कि हमने बेका घाटी में हिजबुल्ला के ऐसे ठिकानों पर हमले किए हैं, जहां उसने हथियारों का जखीरा रखा है। यहां पहले भी इजरायल हमले करता रहा है। इस बीच इजरायल को एक सफलता यह मिली है कि सीरिया ने खुद ही अपने देश में स्थित हिजबुल्ला के ठिकानों को टारगेट किया है। दरअसल सीरिया के मौजूदा राष्ट्रपति अहमद अल शारा को हिजबुल्ला के खिलाफ माना जाता है। वहीं पहले के राष्ट्रपति बशर अल असद को हिजबुल्ला समर्थक माना जाता था।  

यात्रियों के लिए बड़ी खबर: त्रिभुवन हवाई अड्डा फिर से संचालन में, नेपाल में हालात सामान्य

वीरगंज (नेपाल) नेपाल में आंदोलन के कारण बंद पड़ा काठमांडू का त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा गुरुवार की सुबह से पुनः संचालन में आ गया है। लगभग 24 घंटे के बाद उड़ानों की शुरुआत होने से यात्रियों को बड़ी राहत मिली है। जानकारी के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से प्रतिदिन लगभग 300 उड़ानों का संचालन होता है, जिसमें 200 घरेलू और 100 अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें शामिल हैं। प्रतिदिन 14-16 हजार यात्री घरेलू और 12-14 हजार यात्री अंतरराष्ट्रीय यात्रा करते हैं। हवाई अड्डा बंद होने के कारण हजारों यात्री विभिन्न गंतव्यों पर फंसे रहे। हवाई अड्डे के महाप्रबंधक हंसराज पांडे ने बताया कि संचालन शुरू होने के साथ ही पहले चरण में नेपाल एयरलाइंस कार्पोरेशन और हिमालय एयरलाइंस की चार उड़ानें रवाना हुईं। इसके बाद धीरे-धीरे अन्य सेवाएं भी बहाल की जा रही हैं। नेपाल नागरिक उड्डयन प्राधिकरण (सीएएएन) के महानिदेशक प्रदीप अधिकारी ने बताया कि यात्रियों की परेशानी और शिकायतों को देखते हुए सुरक्षा समिति के साथ बैठक के बाद परिचालन की अनुमति दी गई। सीएएएन ने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी हवाई अड्डों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। साथ ही एयरलाइंस और ट्रैवल एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि टिकट जांच और सुरक्षा प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही यात्रियों को यात्रा की अनुमति दी जाए। इस बीच, घरेलू एयरलाइंस बुद्धा, यति और श्री एयरलाइंस ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म के जरिए यात्रियों से हवाई अड्डे पर पहुंचने का आग्रह किया है। गुरुवार सुबह से उड़ानों का संचालन सामान्य रूप से शुरू हो गया है।

फ्लोरिडा में ट्रंप अटैक केस: आरोपी ने लिया फैसला, खुद लड़ेगा मुकदमा

नई दिल्ली राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे टर्म के लिए प्रचार के दौरान डोनाल्ड ट्रंप पर हुए जानलेवा हमले के आरोपी के खिलाफ अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में सुनवाई गुरुवार से शुरू हो गई। ट्रंप पर ये हमला दक्षिण फ्लोरिडा में गोल्फ खेलने के दौरान हुआ था। आरोपित रेयान रूथ ने अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज एलीन कैनन के सामने खुद ही अपनी बात रखने का फैसला किया, जिसके बाद अदालत ने नियुक्त किए वकीलों को हटाने की अनुमति दे दी। हालांकि, वे अदालत कक्ष में मौजूद रहेंगे और अगर रूथ को किसी तरह की मदद की जरूरत होगी तो वे सहायता देंगे। रूथ ने अपने ऊपर लगे आरोपों को किया खारिज रूथ ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है, जिसमें हथियार कानून का उल्लंघन करके राष्ट्रपति पद के बड़े उम्मीदवार और एक संघीय अधिकारी पर हत्या के इरादे से हमला करने की बात कही गई है। सरकारी वकीलों ने क्या लगाया आरोप? सरकारी वकीलों ने आरोप लगाया कि 59 साल के रूथ ने 15 सितंबर 2024 को घात लगाकर ट्रंप की हत्या करने की कोशिश की थी। ट्रंप अपने वेस्ट पाम बीच कंट्री क्लब में गोल्फ खेल रहे थे। उन दिनों वह राष्ट्रपति चुनाव के उम्मीदवार के तौर पर अपना प्रचार भी कर रहे थे। उस हमले से नौ हफ्ते पहले भी ट्रंप पर पेन्सिलवानिया राज्य में कातिलाना हमला हुआ था। उस दौरान बंदूकधारी ने ट्रंप पर आठ राउंड फायर किए थे, जिसमें एक गोली ट्रंप के कानों को छूकर निकल गई थी।

प्रधानमंत्री का दौरा टला, आपदाग्रस्त जिलों पर निगाह बनाए रखी उच्च स्तरीय बैठक

देहरादून प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारतीय वायु सेना के विशेष विमान से जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचे। एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री का स्वागत किया। मौसम अनुकूल न होने के कारण प्रधानमंत्री मोदी का आपदा प्रभावित धराली क्षेत्र के हवाई सर्वेक्षण का कार्यक्रम टल गया। प्रधानमंत्री अभी जोलीग्रांट एयरपोर्ट स्थित गेस्ट हाउस में उच्च स्तरीय बैठक ले रहे हैं। इसके बाद वह राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से आए आपदा प्रभावितों और राहत व बचाव में लगी टीमों के सदस्यों से मुलाकात करेंगे। प्रधानमंत्री का जनपद चमोली के प्रभावित क्षेत्र का हवाई दौरा फिलहाल मौसम खराब होने से स्थगित हो गया है। यह जानकारी पुलिस चौकी प्रभारी मानवेन्द्र गुसाईं द्वारा दी गई है। वहीं एयरपोर्ट जा रहे महिला कांग्रेस अध्यक्ष ज्योति रौतेला समेत कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रायपुर स्थित महाराणा प्रताप कॉलेज चौक पर रोक लिया।

भ्रष्टाचार पर CBI का वार, EPFO अधिकारी को रिश्वत लेते पकड़ा गया

नई दिल्ली केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के क्षेत्रीय अधिकारी को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान जगदीश तांबे के रूप में हुई, जो पश्चिमी दिल्ली में ईपीएफओ के क्षेत्रीय आयुक्त के पद पर थे। सीबीआई ने जानकारी दी कि क्षेत्रीय आयुक्त जगदीश तांबे को शिकायतकर्ता से 1.50 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सीबीआई ने 9 सितंबर को आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया। क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त ने एक व्यक्ति के खिलाफ आरडीए कार्यवाही को अनुकूल तरीके से निपटाने के लिए 3 लाख रुपए की अवैध रिश्वत की मांगी थी। बातचीत के बाद आरोपी अधिकारी ने शिकायतकर्ता से डेढ़ लाख रुपए की रिश्वत लेने पर सहमति व्यक्त की। इसी बीच, व्यक्ति ने सीबीआई को मामले की जानकारी दी। सीबीआई ने बुधवार को जाल बिछाया और आरोपी क्षेत्रीय आयुक्त को शिकायतकर्ता से 1.5 लाख रुपए की रिश्वत मांगते और स्वीकार करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया।फिलहाल, सीबीआई इस मामले में आगे की कार्रवाई में जुटी हुई है। इस प्रेस विज्ञप्ति में यह भी कहा गया है कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ की गई सख्त कार्रवाई भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के प्रति उसकी दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इसके साथ ही, लोगों से अपील की गई है कि जिन नागरिकों को भ्रष्टाचार के मामले देखने को मिलते हैं या जिनसे अधिकारी रिश्वत मांगते हैं, वे सीबीआई दफ्तर पहुंचकर या मोबाइल नंबर (9650394847) पर सूचना दे सकते हैं। इससे पहले, सीबीआई ने राष्ट्रीय राजधानी में दिल्ली पुलिस के एक हेड कांस्टेबल को शिकायतकर्ता से एक लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। सीबीआई ने 25 अगस्त को दिल्ली के अशोक विहार थाने में तैनात हेड कांस्टेबल और एक अन्य अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया था। आरोप था कि सब-इंस्पेक्टर (एसआई) और आरोपी हेड कांस्टेबल ने शिकायतकर्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज न करने के लिए उससे 3 लाख रुपए की मांग की थी। बातचीत के बाद आरोपी हेड कांस्टेबल ने शिकायत को बंद करने के लिए शिकायतकर्ता से 2 लाख रुपए की रिश्वत लेने पर सहमति जताई। आरोपी हेड कांस्टेबल ने शिकायतकर्ता को 25 अगस्त को ही 1 लाख रुपए का आंशिक भुगतान करने का निर्देश दिया। इसके बाद सीबीआई ने जाल बिछाया और आरोपी हेड कांस्टेबल को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया।

पीयूष गोयल का बड़ा बयान: भारत और अमेरिका की ट्रेड डील की बातचीत सफल, नवंबर में पहला फाइनल चरण

नई दिल्ली केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील का पहला चरण नवंबर तक फाइनल हो सकता है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच चर्चा सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और दोनों पक्ष अब तक की प्रगति से संतुष्ट हैं। पत्रकारों से बातचीत के दौरान गोयल ने कहा कि फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने मंत्रियों को इस समझौते पर काम करने और इस साल नवंबर तक पहले चरण को अंतिम रूप देने का निर्देश दिया था। गोयल ने आगे कहा कि इस ट्रेड डील का पहला चरण नवंबर 2025 तक पूरा हो जाना चाहिए, और मार्च से ही इस विषय पर बहुत अच्छे माहौल में बहुत गंभीरता से चर्चा चल रही है और प्रगति हो रही है। साथ ही कहा कि इस प्रगति से दोनों पक्ष संतुष्ट हैं। गोयल का यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब सोशल मीडिया पर डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच ट्रेड डील को लेकर सकारात्मक संवाद हुआ है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि वह दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत से खुश हैं और उन्हें विश्वास है कि दोनों देश एक सफल निष्कर्ष पर पहुंचेंगे। ट्रंप ने आगे कहा, "मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि भारत और अमेरिका, दोनों देशों के बीच व्यापार बाधाओं को दूर करने के लिए बातचीत जारी रखे हुए हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि वह आने वाले हफ्तों में अपने "बहुत अच्छे दोस्त" प्रधानमंत्री मोदी से बात करने के लिए उत्सुक हैं। एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका को अपना घनिष्ठ मित्र और स्वाभाविक साझेदार बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि ट्रेड डील भारत-अमेरिका साझेदारी की असीम संभावनाओं को उजागर करने में मदद करेगी और आश्वासन दिया कि दोनों टीमें चर्चाओं को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए काम कर रही हैं। बाद में ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी के पोस्ट को फिर से शेयर किया, जो दिखाता है कि ट्रेड डील को लेकर दोनों देशों में सकारात्मक रुख बना हुआ है।

व्यापार बाधाओं को खत्म करने के लिए मणिपुर सरकार ने यूनाइटेड नगा काउंसिल से की अपील

इंफाल  मणिपुर सरकार ने राज्य में नगा समुदाय की शीर्ष संस्था यूनाइटेड नगा काउंसिल (यूएनसी) से नगा बहुल क्षेत्रों में राष्ट्रीय राजमार्गों पर अनिश्चितकालीन 'व्यापार प्रतिबंध' हटाने का अनुरोध किया है। अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी। यूएनसी और अन्य नगा संगठनों ने भारत-म्यांमार अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर बाड़ लगाने और मुक्त आवागमन व्यवस्था (एफएमआर) को समाप्त करने का विरोध करते हुए 8 सितंबर की मध्यरात्रि से सभी नगा आबादी वाले क्षेत्रों में व्यापार प्रतिबंध लागू कर दिया। इंफाल में एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इंफाल-जिरीबाम राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-37) और इंफाल-दीमापुर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-2) पर विभिन्न स्थानों पर सैकड़ों माल से लदे और खाली ट्रक, साथ ही परिवहन ईंधन ले जाने वाले टैंकर फंसे हुए हैं। अधिकारी ने बताया कि मणिपुर के मुख्य सचिव पुनीत कुमार गोयल ने यूएनसी अध्यक्ष एनजी लोरहो को लिखे एक पत्र में अनुरोध किया कि जनहित में अपना आंदोलन वापस ले लें और गृह मंत्रालय (एमएचए) ने नगा संगठनों के साथ अपनी बातचीत जारी रखी। मुख्य सचिव ने यूएनसी अध्यक्ष को लिखे अपने पत्र में कहा: "गृह मंत्रालय, नगा बहुल क्षेत्रों में भारत और म्यांमार के बीच अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर बाड़ लगाने के मुद्दे पर यूएनसी के साथ बातचीत कर रहा है। राज्य सरकार को इस विषय पर आपके ज्ञापन और अभ्यावेदन भी प्राप्त हुए हैं।" पत्र में आगे कहा गया है, "यह सूचित किया जाता है कि केंद्र सरकार ने यूएनसी और अन्य हितधारकों द्वारा उठाई गई चिंताओं पर ध्यान दिया है। तदनुसार, केंद्र सरकार बाड़ लगाने का काम शुरू करने से पहले यूएनसी और अन्य हितधारकों के साथ पूर्व परामर्श के लिए बातचीत कर रही है और करती रहेगी। यूएनसी के साथ अगली त्रिपक्षीय बैठक पारस्परिक रूप से तय की गई तिथि और स्थान पर होगी।" इस बीच, गृह मंत्रालय के अधिकारियों और मणिपुर के तीन नगा समूहों के नेताओं ने 26 अगस्त को दिल्ली में पुरानी एफएमआर को बहाल करने और भारत-म्यांमार सीमा पर चल रही बाड़ लगाने की कार्रवाई को रोकने की मांग पर एक बैठक की थी। ये बैठक बेनतीजा रही। गृह मंत्रालय की आधिकारिक टीम का नेतृत्व डॉ. के.पी. मिश्रा कर रहे हैं, जो पूर्वोत्तर मामलों पर गृह मंत्रालय के सलाहकार हैं, जबकि 11 सदस्यीय नागा प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व यूएनसी अध्यक्ष एनजी लोरहो ने किया और इसमें यूएनसी, ऑल नागा स्टूडेंट्स एसोसिएशन, मणिपुर (एएनएसएएम) और नागा महिला संघ (एनडब्ल्यूयू) के प्रतिनिधि शामिल थे। यूएनसी ने पहले केंद्र सरकार को एक अल्टीमेटम दिया था और 16 अगस्त को मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला के साथ बैठक की थी, जिसमें पुराने एफएमआर को बहाल करने और मणिपुर से लगी भारत-म्यांमार सीमा के 398 किलोमीटर पर बाड़ लगाने पर रोक लगाने पर चर्चा की गई थी। यूएनसी और अन्य नागा संगठन पिछले साल से अपनी मांगों के समर्थन में आंदोलन कर रहे हैं और "एफएमआर को एकतरफा रूप से रद्द करने और भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने" का विरोध कर रहे हैं। व्यापार प्रतिबंध और मालवाहक वाहनों के रोके जाने के कारण, सोमवार से इस पूर्वोत्तर राज्य में राज्य के बाहर से आवश्यक वस्तुओं और खाद्यान्नों की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। आर्थिक नाकेबंदी ने राज्य के कई हिस्सों में आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित कर दिया है, जिससे इंफाल घाटी और दक्षिणी कुकी-बहुल पहाड़ी जिलों पर असर पड़ा है। व्यापार प्रतिबंध का सेनापति, उखरुल और तामेंगलोंग जिलों पर गहरा प्रभाव पड़ा है, जहां आवश्यक वस्तुओं से लदे ट्रक विभिन्न चौकियों पर फंसे हुए हैं। नगा संगठनों के अनुसार, सीमा पर बाड़ लगाने और एफएमआर को निरस्त करने के सरकार के फैसले से मणिपुर, नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश और म्यांमार में रहने वाली नगा जनजातियां भौतिक रूप से विभाजित हो जाएंगी, जिससे उनकी सांस्कृतिक पहचान, पारंपरिक और पैतृक संबंधों को खतरा होगा। पिछले साल गृह मंत्रालय ने घोषणा की थी कि एफएमआर, जो पहले भारत-म्यांमार सीमा पर रहने वाले लोगों को बिना पासपोर्ट और वीजा के एक-दूसरे के क्षेत्र में 16 किलोमीटर तक यात्रा करने की अनुमति देता था, को समाप्त कर दिया जाएगा। इसके बजाय, गृह मंत्रालय ने सीमा पार आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए सीमा के दोनों ओर 10 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले भारत और म्यांमार दोनों के सीमावर्ती निवासियों को पास जारी करने की एक नई योजना अपनाने का फैसला किया था। नागालैंड और मिजोरम की सरकारें और दोनों पूर्वोत्तर राज्यों के कई राजनीतिक दल और नागरिक समाज सीमा पर बाड़ लगाने और पुराने एफएमआर को खत्म करने का कड़ा विरोध कर रहे हैं। चार पूर्वोत्तर राज्य—अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, नागालैंड और मिजोरम – म्यांमार के साथ 1,643 किलोमीटर लंबी बिना बाड़ वाली सीमा साझा करते हैं। गृह मंत्रालय ने पहले 31,000 करोड़ रुपये की लागत से हथियारों, गोला-बारूद, नशीले पदार्थों और अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी के लिए जानी जाने वाली पूरी सीमा पर बाड़ लगाने का फैसला किया था।

ब्रिटेन पीएम की कार्रवाई: एपस्टीन कनेक्शन के कारण अमेरिका में राजदूत मैंडेलसन हटाए गए

ब्रिटेन  ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने गुरुवार को जेफरी एपस्टीन से संबंधों के कारण अमेरिका में ब्रिटिश राजदूत पीटर मैंडेलसन को पद से हटा दिया। 'हाउस ऑफ कॉमन्स' में विदेश कार्यालय मंत्री स्टीफन डौटी ने एक बयान में कहा कि यह निर्णय मैंडेलसन द्वारा एपस्टीन को भेजे गए ईमेल के सामने आने के बाद लिया गया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि मैंडेलसन द्वारा लिखे गए ईमेल में नई जानकारी के आधार पर, प्रधानमंत्री ने विदेश सचिव से उन्हें राजदूत पद से हटाने का अनुरोध किया। बयान में कहा गया कि ईमेल से पता चलता है कि मैंडेलसन और एपस्टीन के बीच संबंध उनकी नियुक्ति के समय ज्ञात जानकारी से कहीं अधिक गहरे थे। मैंडेलसन और एपस्टीन के गहरे संबंध गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर की सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले लेबर नेता मैंडेलसन को एपस्टीन के साथ अपने संबंधों को लेकर सवालों का सामना करना पड़ा था। एक जन्मदिन पर लिखी गई पुस्तक के विमोचन के दौरान उनका एक पत्र सामने आया, जिसमें उन्होंने एपस्टीन को 'मेरा सबसे अच्छा दोस्त' कहा था। ब्रिटिश विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को घोषणा की कि नए ईमेल, जो मैंडेलसन और एपस्टीन के गहरे संबंधों को दर्शाते हैं, के आधार पर प्रधानमंत्री स्टार्मर ने विदेश सचिव जेम्स क्लेवरली को उन्हें पद से हटाने का निर्देश दिया। 'द सन' का चौंकाने वाला खुलासा मंत्रालय ने कहा कि ये ईमेल मैंडेलसन के राजदूत नियुक्ति के समय ज्ञात संबंधों से कहीं अधिक घनिष्ठता दर्शाते हैं। सबसे चौंकाने वाला खुलासा 'द सन' अखबार की रिपोर्ट से आया, जिसमें प्रकाशित ईमेल में दिखाया गया कि मैंडेलसन एपस्टीन को 'शीघ्र रिहाई के लिए लड़ने' के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे। एक ईमेल में मैंडेलसन ने एपस्टीन से कहा था कि मैं तुम्हारे बारे में बहुत सोचता हूं। एपस्टीन मामला क्या है? जेफरी एपस्टीन एक करोड़पति फाइनेंसर था। उस पर किशोरियों के यौन शोषण और तस्करी के आरोप थे। 2019 में उसे गिरफ्तार किया गया, लेकिन मैनहटन जेल में मुकदमे से पहले उसने आत्महत्या कर ली। इससे पहले 2008 में उसे एक नाबालिग से वेश्यावृत्ति कराने के लिए 18 महीने की जेल की सजा सुनाई गई थी। उस पर नाबालिग लड़कियों को मसाज के बहाने पैसे देकर यौन शोषण करने का आरोप था।

स्वदेशी तकनीक ने दिखाई ताकत: ऑपरेशन सिंदूर में ‘संभव’ फोन से आतंकवादियों को मात

नई दिल्ली  भारतीय सेना ने हाल ही में एक खुफिया और सफल मिशन 'ऑपरेशन सिंदूर' को अंजाम दिया है, जिसने भारत की सुरक्षा क्षमताओं में एक नया मील का पत्थर जोड़ा है। इस ऑपरेशन में, जवानों ने विदेशी ऐप्स जैसे व्हाट्सएप (WhatsApp) की जगह स्वदेशी और पूरी तरह से सुरक्षित 'संभव' फोन का इस्तेमाल किया। यह कदम भारत की सुरक्षा के लिए आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा बदलाव है। 'ऑपरेशन सिंदूर' क्या था? मई 2025 में हुए इस ऑपरेशन का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का बदला लेना था। इस हमले में 26 पर्यटक मारे गए थे। भारतीय सेना ने पाकिस्तान और गुलाम कश्मीर में घुसकर 9 आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया, जिसमें 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने इस ऑपरेशन को 'ग्रे जोन' ऑपरेशन बताया, जिसमें थल सेना, वायु सेना और नौसेना ने मिलकर काम किया। 'संभव' फोन क्यों बना हीरो? किसी भी खुफिया ऑपरेशन में सबसे बड़ी चुनौती होती है, संचार को सुरक्षित रखना। पहले भारतीय सेना के अधिकारी बातचीत के लिए व्हाट्सएप जैसे विदेशी ऐप्स का इस्तेमाल करते थे, जिससे जासूसी और डेटा लीक होने का खतरा बना रहता था। 'संभव' (Secure Army Mobile Bharat Version) फोन ने इस खतरे को खत्म कर दिया। यह फोन पूरी तरह से भारत में बनाया गया है और इसकी सुरक्षा इतनी मजबूत है कि इसे हैक करना लगभग नामुमकिन है। 'एम-सिग्मा' (M-Sigma) ऐप: इस फोन में एक खास ऐप है, जो बिल्कुल व्हाट्सएप की तरह काम करता है, लेकिन यह पूरी तरह से सुरक्षित है। जवान इसके जरिए बिना किसी डर के मैसेज, फोटो और वीडियो भेज सकते हैं। अटूट कनेक्शन: यह 5G टेक्नोलॉजी पर काम करता है और किसी भी नेटवर्क पर बिना रुकावट के चलता है। मल्टी-लेयर एन्क्रिप्शन: इसमें कई स्तरों की सुरक्षा कोडिंग है, जो बातचीत को पूरी तरह से गोपनीय रखती है। सेना प्रमुख ने बताया कि इस ऑपरेशन के दौरान कमांडरों से लेकर जवानों तक, सभी ने बातचीत और खुफिया जानकारी साझा करने के लिए केवल 'संभव' फोन का ही इस्तेमाल किया, जिससे ऑपरेशन को गुप्त रखने और तेजी से काम करने में मदद मिली।