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पूर्व राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे पर भ्रष्टाचार का आरोप, श्रीलंका पुलिस ने किया गिरफ्तार

कोलंबो  श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे को शुक्रवार को आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) ने गिरफ्तार कर लिया है। वे सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप को लेकर कोलंबो स्थित सीआईडी कार्यालय में बयान दर्ज कराने गए थे, जहां उनको गिरफ्तार कर लिया गया। श्रीलंकाई मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह जांच सितंबर 2023 में उनकी लंदन यात्रा से संबंधित है, जहां वे अपनी पत्नी, प्रोफेसर मैत्री विक्रमसिंघे के वॉल्वरहैम्प्टन विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए थे। जांचकर्ताओं का दावा है कि इस यात्रा और सुरक्षा खर्चों के लिए सरकारी धन का उपयोग किया गया था। पूर्व राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने इन आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि उनकी पत्नी ने अपने खर्चे खुद उठाए थे और किसी भी सार्वजनिक धन का दुरुपयोग नहीं हुआ। सीआईडी ने पहले फोर्ट मजिस्ट्रेट कोर्ट में साक्ष्य प्रस्तुत किए थे और उनके पूर्व निजी सचिव सैंड्रा परेरा और पूर्व राष्ट्रपति सचिव समन एकनायके के बयान दर्ज किए थे। शुक्रवार सुबह चार घंटे से अधिक समय तक बयान दर्ज कराने के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया और जल्द ही फोर्ट मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किए जाने की उम्मीद है। बता दें कि मंगलवार को सीआईडी अधिकारियों का उनके पास पेश होने के लिए फोन आया था। इसके बाद उन्होंने अपने वकीलों को सूचित किया था कि वह इस सप्ताह ही उपस्थित होंगे। उनके वकीलों ने सीआईडी को बताया था कि वह शुक्रवार को पेश होंगे। विक्रमसिंघे के वकीलों ने उन्हें गिरफ्तारी के लिए तैयार रहने की सलाह दी थी। पूर्व राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे की पेशी से पहले फोर्ट मजिस्ट्रेट कोर्ट के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया गया है। विक्रमसिंघे ने जुलाई 2022 में गोटाबाया राजपक्षे के इस्तीफे के बाद श्रीलंका के राष्ट्रपति का पद संभाला था, और सितंबर 2024 में वह चुनाव हार गए थे। वह श्रीलंका के इतिहास में गिरफ्तार होने वाले पहले पूर्व राष्ट्रपति हैं।

परिवारवाद पर अमित शाह की तीखी टिप्पणी, स्टालिन और सोनिया गांधी घिरे

चेन्नई केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को तमिलनाडु में बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि मैं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने एक प्रतिष्ठित तमिल नेता, सीपी राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति जैसे प्रतिष्ठित पद के लिए मनोनीत किया है। अमित शाह ने कहा कि पहलगाम में, पाकिस्तान प्रायोजित आतंकियों ने निर्दोष नागरिकों की दुखद जान ले ली। मोदी ने देश को दृढ़ता से आश्वस्त किया कि आतंकियों और उनके कृत्यों को अंजाम देने वालों, दोनों को परिणाम भुगतने होंगे। 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया गया। इसके अलावा, 'ऑपरेशन महादेव' ने पहलगाम में हुए जघन्य हमले के लिए जिम्मेदार तीन आतंकवादियों को सफलतापूर्वक मार गिराया। उन्होंने कहा कि लोकसभा में प्रधानमंत्री मोदी ने 130वां संविधान संशोधन विधेयक पेश किया। पूरा विपक्ष एकजुट होकर इस विधेयक का विरोध कर रहा है। प्रस्तावित विधेयक में कहा गया है कि अगर किसी मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री को जेल होती है, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना होगा। विपक्ष ने इस विधेयक पर सवाल उठाए। हालांकि, यह उल्लेखनीय है कि डीएमके के दो वरिष्ठ मंत्री लगभग आठ महीने जेल में रहे और इस दौरान उन्होंने अपने पदों से इस्तीफा नहीं दिया। किसी व्यक्ति का जेल से शासन करना अव्यावहारिक और अनुचित है। केंद्रीय गृह मंत्री ने आगे कहा कि यहां तक कि डीएमके इस विधेयक को 'काला विधेयक' बताकर इसकी आलोचना कर रहा है। मैं स्टालिन को याद दिलाना चाहूंगा कि अनैतिक कार्यों में लिप्त लोगों को ऐसे आरोप लगाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि डीएमके सरकार देश की सबसे भ्रष्ट सरकारों में से एक है, जो कई हाई-प्रोफाइल घोटालों में फंसी है। इनमें टीएएसएमएसी शराब घोटाला, रेत खनन घोटाला, परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार और नौकरी के बदले पैसे कांड जैसे कई अन्य घोटाले शामिल हैं। उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनावों में एनडीए को 18 प्रतिशत वोट शेयर मिला, जबकि हमारी सहयोगी पार्टी, एआईएडीएमके को 21 प्रतिशत वोट मिले। कुल मिलाकर इस गठबंधन को कुल वोट शेयर का लगभग 39 प्रतिशत हिस्सा मिला। एनडीए और एआईएडीएमके के बीच यह साझेदारी सिर्फ एक राजनीतिक सहयोग नहीं है, यह तमिलनाडु के विकास और प्रगति को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता है। अमित शाह ने परिवारवाद पर हमला करते हुए कहा कि एमके स्टालिन का एकमात्र एजेंडा अपने बेटे के लिए मुख्यमंत्री पद सुरक्षित करना है, जबकि सोनिया गांधी का प्राथमिक लक्ष्य अपने बेटे को प्रधानमंत्री बनाना है। मैं बिल्कुल स्पष्ट कर दूं कि दोनों ही अपनी महत्वाकांक्षाओं में विफल रहेंगे, क्योंकि एनडीए पूरी तरह से जीत की ओर अग्रसर है।

सेना अलर्ट पर: चीन की ओर से बढ़ाया तनाव, भेजे गए 14 जहाज और ड्रोन

मनीला दक्षिण चीन सागर में तनाव एक बार फिर चरम पर है। चीन की बढ़ती आक्रामकता को देखते हुए फिलीपींस सैन्य बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। चीन ने विवादित सेकंड थॉमस शोल के पास अपने तटरक्षक जहाजों और कई मिलिशिया पोतों को तैनात किया है। फिलीपींस के सैन्य अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि चीन ने विवादित दक्षिण चीन सागर के तटवर्ती क्षेत्र में लंबे समय से खड़े फिलीपीन युद्धपोत- बीआरपी सिएरा माद्रे के निकट तटरक्षक जहाजों और कई मिलिशिया जहाजों को तैनात किया है। उन्होंने कहा कि कम से कम 14 चीनी तटरक्षक और संदिग्ध मिलिशिया जहाज उनके युद्धपोत के आसपास निगरानी में देखे गए हैं। चीन की नेवी फोर्स बुधवार को देखी गई थी और गुरुवार को भी क्षेत्र में मौजूद बताई गई है। इनमें से कुछ हाई-कैलिबर हथियारों से लैस हैं और एक शिप पर हेलीकॉप्टर व ड्रोन भी देखे गए हैं। अधिकारी ने बताया कि चीनी सेना को करीब आने से रोकने के लिए सिएरा माद्रे से दो नावों के जरिए फिलीपीन सेना तैनात की गई थी। विवाद का केंद्र: सेकंड थॉमस शोल सेकंड थॉमस शोल को फिलीपीन में आयुंगिन शोल और चीन में रेन’आई रीफ के नाम से जाना जाता है। यह दक्षिण चीन सागर में एक प्रमुख विवादित क्षेत्र है। यह शोल फिलीपीन के 200-नॉटिकल मील विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के भीतर स्थित है, लेकिन चीन इसे अपने “नाइन-डैश लाइन” दावे के हिस्से के रूप में मानता है। 1999 में, फिलीपीन ने इस क्षेत्र में अपनी संप्रभुता को बनाए रखने के लिए बीआरपी सिएरा माद्रे नामक एक पुराने युद्धपोत को जानबूझकर इस शोल पर तैनात किया था, जो अब एक क्षेत्रीय चौकी के रूप में कार्य करता है। अतीत में, चीन ने बार-बार मांग की है कि फिलीपींस बीआरपी सिएरा माद्रे को शोल से हटा ले। फिलीपींस ने चीन की मांग को मानने से इनकार कर दिया है। फिलीपीन नौसेना के प्रवक्ता रियर एडमिरल रॉय त्रिनिदाद ने एसोसिएटेड प्रेस को टेलीफोन पर बताया, "उनकी कार्रवाइयों और संख्या में वृद्धि के कारण यह चिंताजनक है। अगर स्थिति बिगड़ती है, तो हमारे पास एक आकस्मिक योजना तैयार है। इन सभी बलपूर्वक और आक्रामक कार्रवाइयों के बीच, कमांडर-इन-चीफ का निर्देश बिल्कुल स्पष्ट है: हम अपने क्षेत्र, संप्रभुता और संप्रभु अधिकारों के विरुद्ध किसी भी खतरे से पीछे नहीं हटेंगे।" त्रिनिदाद ने बताया कि घटनास्थल पर मौजूद पांच चीनी तटरक्षक जहाजों में से एक ने बिना किसी लक्ष्य के अपनी वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसके अलावा, चीनी की छोटी नावों को उथले पानी के प्रवेश द्वार पर जाल डालते देखा गया, जहां से फिलीपीन जहाज पहले सिएरा माद्रे को आपूर्ति पहुंचाने के लिए गुजरते थे। बड़ी प्लानिंग से आई है चीनी सेना? फिलीपींस की सेना ने एक बयान में कहा, "चीनी तटरक्षक बल के जहाजों को समुद्र में पानी की बौछारों का इस्तेमाल करते हुए युद्धाभ्यास और अभ्यास करते देखा गया है, जबकि कई छोटे जहाज, जैसे कठोर पतवार वाली फुलाने वाली नावें और तेज नावें, भी उथले पानी में तैनात की गई हैं। चीनी तटरक्षक बल की कुछ तेज नावें भारी चालक दल वाले हथियारों सहित माउंटेड हथियारों से लैस देखी गईं।" हाल की घटनाएं और बढ़ गया तनाव फिलीपीन सैन्य अधिकारियों के अनुसार, चीनी बलों की इस तैनाती ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है। बीआरपी सिएरा माद्रे से दो नावों में सवार फिलीपीन सैनिकों को तैनात किया गया है ताकि चीनी जहाजों को और करीब आने से रोका जा सके। चीनी अधिकारियों ने इस सैन्य बयान पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन अतीत में वे बार-बार मांग कर चुके हैं कि फिलीपीन बीआरपी सिएरा माद्रे को शोल से हटाए। इससे पहले, जून 2024 में सेकंड थॉमस शोल पर एक हिंसक टकराव हुआ था, जिसमें फिलीपीन नौसेना के कर्मियों को चोटें आई थीं, जिसमें एक सैनिक का अंगूठा भी कट गया था। इस घटना के बाद, चीन और फिलीपीन ने टकराव को रोकने के लिए एक अस्थायी व्यवस्था की थी, जिसके तहत चीनी तटरक्षक और नौसेना बल शोल से दूरी बनाए रखते थे और फिलीपीन सैनिक बीआरपी सिएरा माद्रे को सप्लाई और सैनिकों की तैनाती बिना किसी बाधा के कर सकते थे। इस समझौते के बाद, फिलीपीन नौसेना ने कम से कम आठ बार बिना किसी घटना के आपूर्ति और सैनिकों को पहुंचाया, जिसमें केवल तीन से चार चीनी तटरक्षक जहाज दूर से निगरानी करते थे। पिछली घटनाएं और क्षेत्रीय तनाव यह ताजा तैनाती उस समय हुई है जब कुछ ही दिन पहले, 11 अगस्त को, स्कारबोरो शोल के पास एक चीनी नौसेना जहाज और तटरक्षक पोत के बीच टक्कर हुई थी। यह घटना तब हुई जब दोनों चीनी जहाज फिलीपीन तटरक्षक जहाज बीआरपी सुलुआन का पीछा कर रहे थे, जो मछुआरों को सहायता प्रदान करने के लिए एक मिशन पर था। इस टक्कर में चीनी तटरक्षक जहाज को भारी नुकसान हुआ और वह समुद्र में चलने लायक नहीं बचा था। फिलीपीन तटरक्षक ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे “खतरनाक युद्धाभ्यास” करार दिया और चीनी चालक दल को सहायता की पेशकश की, जिसे स्वीकार नहीं किया गया। 

PM-CM से जुड़े नए बिल पर बोले अमित शाह, केजरीवाल पर भी की कटाक्ष

तिरुवनंतपुरम केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह इन दिनों केरल के दौरे पर हैं. इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार के उस बिल का भी जिक्र किया जिसके तहत प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री अगर गंभीर आपराधिक आरोपों में 30 दिन से ज्यादा हिरासत में रहते हैं तो पद से हटा दिए जाएंगे. अमित शाह ने एक निजी चैनल से बातचीत करते हुए कहा कि  दिल्ली के (पूर्व) मुख्यमंत्री जेल जाने के बाद भी सरकार चला रहे थे, अगर जेल जाने के बाद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया होता, तो आज इस बिल की जरूरत ही नहीं होती. अमित शाह ने कहा कि क्या देश की जनता चाहती है कि कोई भी मुख्यमंत्री जेल में रहकर सरकार चलाए? अब ये लोग (विपक्षी दल) कहते हैं कि संविधान में ऐसा कोई प्रावधान पहले क्यों नहीं हुआ? अरे, जब संविधान बना था, तब ऐसे निर्लज्ज लोगों की कल्पना ही नहीं की गई थी कि जेल जाने के बाद भी इस्तीफा नहीं देंगे. साथ ही कहा कि ये बिल किसी पार्टी के लिए नहीं है, ये बिल भाजपा के मुख्यमंत्रियों पर भी लागू होगा और प्रधानमंत्री पर भी लागू ​होगा.  केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि 70 साल पहले एक ऐसी घटना हुई थी, जिसमें कई मंत्री और मुख्यमंत्री जेल गए थे और जेल जाने से पहले सबने इस्तीफा दे दिया था. लेकिन कुछ समय पहले एक घटना हुई, जिसमें दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री जेल जाने के बाद भी सरकार चला रहे थे. तो सवाल उठता है कि संविधान बदलना चाहिए या नहीं बदलना चाहिए? लोकतंत्र में नैतिकता का स्तर बनाए रखने की जिम्मेदारी सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों की है. बिल में क्या प्रावधान है? केंद्र सरकार ने लोकसभा में एक बिल पेश किया है, इस पर काफी विवाद हो रहा है. प्रस्तावित बिल में लिखा है कि अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या किसी मंत्री पर ऐसी धाराओं में आपराधिक मुकदमा दर्ज होता है, जिनमें 5 साल या उससे ज्यादा सज़ा का प्रावधान है, तो ऐसी स्थिति में गिरफ्तार होने के 31वें दिन उन्हें अपना पद छोड़ना होगा और अगर वो ऐसा नहीं करेंगे. तो गिरफ्तारी के 31वें दिन खुद-ब-खुद इस पद से उन्हें हटा दिया जाएगा. ऐसी स्थिति में भारत के राष्ट्रपति देश के प्रधानमंत्री की सलाह पर उस केन्द्रीय मंत्री को उसकी गिरफ्तारी के 31वें दिन तक उसके पद से हटा सकते हैं. अगर किसी वजह से देश का प्रधानमंत्री इस पर कोई फैसला नहीं लेता और वो केन्द्रीय मंत्री को बचाने की कोशिश करते हैं, तो ऐसी स्थिति में वो केन्द्रीय मंत्री अपनी गिरफ्तारी के 31वें दिन खुद इस पद से हट जाएगा और उनसे सारी ज़िम्मेदारी वापस ले ली जाएगी. इसी तरह अगर प्रधानमंत्री को किसी आपराधिक मुकदमे में गिरफ्तार किया जाता है, तो प्रधानमंत्री को भी गिरफ्तारी के 31वें दिन तक इस्तीफा देना होगा और अगर वो ऐसा नहीं करते तो वो भी खुद-ब-खुद इस पद से हटा दिए जाएंगे. यहां दोनों मामलों में छूट ये होगी कि कोर्ट से ज़मानत मिलने के बाद सत्तारूढ़ पार्टी चाहे तो वो उस नेता को फिर से प्रधानमंत्री या केन्द्रीय मंत्री चुन सकती है.  इसी तरह के प्रावधान राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों पर भी लागू होंगे, जिसके लिए अनुच्छेद 164 में एक नया भाग जोड़ा जाएगा. इसके तहत राज्य सरकार में कोई मंत्री गिरफ्तार होता है तो राज्यपाल, मुख्यमंत्री की सलाह पर 31वें दिन तक उस मंत्री को उसके पद से हटा सकते हैं और अगर खुद मुख्यमंत्री ही गिरफ्तार हो जाएं तो उन्हें भी 30 दिनों तक जेल में रहने के बाद 31वें दिन इस पद से हटा दिया जाएगा या उन्हें भी इससे पहले इस्तीफा देना होगा.  

अमित शाह बोले, राहुल गांधी कर रहे हैं संस्थाओं पर विश्वास कम करने का प्रयास

कोच्चि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कोच्चि में कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर संवैधानिक संस्थाओं को मान न दिए जाने का आरोप लगाया। शाह आगामी महत्वपूर्ण स्थानीय निकाय चुनावों के मद्देनजर भाजपा के राज्य नेतृत्व को तैयार करने हेतु शुक्रवार को केरल की वाणिज्यिक राजधानी कोच्चि के एक दिवसीय दौरे पर हैं। एक कार्यक्रम में शाह ने बताया कि देश को नुकसान पहुंचाने वाली स्थितियां पिछली सत्ता की देन है। उन्होंने कहा, “जातिवाद, परिवारवाद और तुष्टिकरण देश के लिए नासूर जैसा है। 2014 में नरेंद्र मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद इन तीनों की जगह ‘पॉलिटिक्स ऑफ परफॉर्मेंस’ की शुरुआत हुई है और जिसे पूरा देश अनुभव कर रहा है। करप्शन को दूर करने का प्रयास देश के पीएम ने किया है। चूंकि स्थिरता है, इसलिए लंबे समय तक नीतियां चल रही हैं। इस 11 साल के कालखंड को जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं तो पाते हैं कि जनता के देश में पहले जो सवाल था कि भविष्य कैसा होगा, वो अब नहीं है। आज 140 करोड़ लोग मानते हैं कि 2047 में भारत टॉप पर होगा और इसे लेकर कोई कंफ्यूजन नहीं है। वहीं, राहुल गांधी को लेकर पूछे गए सवाल पर बोले, जब से वो मुखिया बने हैं तब से संवैधानिक संस्थाओं को शक की नजर से देख रहे हैं। अभी जो एसआईआर हो रहा है, वो 2003 में भी हुआ था, 1961 में भी हुआ था और 1970 में भी हुआ था। तो अब समस्या क्या है? अगर एसआईआर से कोई भी नागरिक या राजनीतिक पार्टी संतुष्ट नहीं है, तो वह असेंबली के रिटर्निंग ऑफिसर, जिला कलेक्टर और राज्य के चीफ इलेक्शन ऑफिसर के सामने अपील कर सकता है। शाह ने सदन में पेश तीन विधेयकों को लेकर कहा कि लोकतंत्र में नैतिकता का स्तर बनाए रखने की जिम्मेदारी सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों की है। ये बिल किसी पार्टी के लिए नहीं है। ये बिल भाजपा के मुख्यमंत्रियों पर भी लागू होगा और प्रधानमंत्री पर भी लागू होगा। बता दें कि मानसून सत्र के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संघ राज्यक्षेत्र शासन (संशोधन) बिल 2025, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) बिल 2025 और संविधान (130वां संशोधन) बिल 2025 पेश किए थे। जिसमें प्रावधान है कि कोई भी व्यक्ति गिरफ्तार होकर जेल से प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, केन्द्र या राज्य सरकार के मंत्री के रूप में शासन नहीं चला सकता है। विपक्ष ने इन बिलों का विरोध किया।  

कोकिला बेन की तबीयत अचानक बिगड़ी, मुंबई अस्पताल में भर्ती

मुंबई  भारत के दिग्गज उद्योगपति मुकेश अंबानी की मां कोकिला बेन की तबीयत बिगड़ गई है। मुकेश और अनिल अंबानी की मां कोकिलाबेन अंबानी को एयरलिफ्ट करके मुंबई के HN रिलायंस हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया है। उनकी सेहत को लेकर अभी पूरी जानकारी नहीं मिल पाई है। हालांकि, बढ़ती उम्र के चलते स्थिति गंभीर होने की आशंकाएं जताई जा रही हैं। अभी तक, अंबानी परिवार की तरफ से उनकी सेहत को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सोशल मीडिया पर इस दौरान कई तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें अंबानी परिवार के सदस्यों को दक्षिण मुंबई में स्थित रिलायंस हॉस्पिटल पहुंचते हुए नजर आ रहे हैं। इसी के साथ उनकी सेहत को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं। ताया जा रहा है कि वह इस वक्त डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में हैं। गुजरात के जामनगर में हुआ था जन्म 24 फरवरी, 1934 को गुजरात के जामनगर में पैदा हुईं कोकिलाबेन अंबानी को अंबानी परिवार की कुलमाता माना जाता है। उन्हें न केवल रिलायंस इंडस्ट्रीज के फाउंडर दिवंगत धीरूभाई अंबानी की पत्नी के रूप में, बल्कि तेजी से बदलते इस दौर में परिवार का मार्गदर्शन और समर्थन करने में उनकी भूमिका के लिए भी सम्मान दिया जाता है। परिवार को एकजुट रखने में भी उनकी भूमिका है। मुश्किल घड़ी में भी परिवार को संभाला साल 2002 में धीरूभाई अंबानी के निधन के बाद उनके दोनों बेटों मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी के रास्ते अलग हो गए। बिना वसीयत छोड़े धीरूभाई अंबानी दुनिया से चल बसे, तो दोनों भाइयों के रिश्ते में खटास आ गई। जबकि कभी ये दोनों एक-दूसरे जान छिड़कते थे। उस दौरान भी कोकिलाबेन ने स्थिति को संभाला और समाधान निकालते हुए कारोबार का बंटवारा किया। फिर बाद में चलकर दोनों भाइयों के रिश्ते फिर पटरी पर आने लगे। बंटवारे में मुकेश अंबानी के हिस्‍से में पेट्रोकेमिकल्‍स सहित तेल और गैस, रिफाइनिंग और टेक्‍सटाइल्‍स आए। वहीं अनिल अंबानी को फाइनेंशियल सर्विसेज, पावर, एंटरटेनमेंट और टेलीकॉम का कारोबार संभालने के लिए दिया गया। समाज सेवा से जुड़ी कोकिलाबेन कोकिलाबेन बड़े पैमाने पर समाज सेवा के कार्यों से भी जुड़ी हुई हैं। मुंबई स्थित कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल का नाम उनके सम्मान में उनके नाम पर रखा गया है, जो एक मल्टी-स्पेशलिटी हॉस्पिटल है। यह सामाजिक कल्याण के प्रति उनकी जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता का ही एक सबूत है।

अमेरिका में वीजा धारकों पर शिकंजा, ट्रंप प्रशासन ने बनाए कड़े नियम

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने वीजा नियमों को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। ट्रंप प्रशासन ने करीब 5.5 करोड़ (55 मिलियन) वीजा धारकों की संपूर्ण समीक्षा (Review) शुरू की है। इस समीक्षा का उद्देश्य है यह देखना कि किसी ने वीजा की शर्तों का उल्लंघन तो नहीं किया है और अगर किया है तो उस पर डिपोर्टेशन (देश से निकाला जाना) की कार्रवाई की जा सके। किन-किन पर पड़ेगा असर? इस फैसले का असर अमेरिका में रह रहे सभी वीजा होल्डर्स पर पड़ सकता है, जैसे:     छात्र (Student Visa)     वर्क वीजा वाले कर्मचारी (H1-B, L1 वीजा आदि)     फैमिली वीजा धारक (Spouse/Dependent Visa)     पर्यटक या विज़िटर वीजा पर आए लोग     ग्रीन कार्ड के लिए अप्लाई कर चुके लोग सरकार की दलील क्या है? एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार:"अगर किसी व्यक्ति के वीजा रिकॉर्ड में ओवरस्टे (यानी तय समय से ज्यादा रुकना), आपराधिक गतिविधि, सुरक्षा के लिए खतरा, या आतंकवाद से जुड़ी किसी भी प्रकार की जानकारी मिलती है, तो उसका वीजा कभी भी रद्द किया जा सकता है।" यानी कि अगर कोई वीजा धारक नियमों के उल्लंघन में पकड़ा जाता है तो बिना किसी पूर्व चेतावनी के उनका वीजा सस्पेंड या रद्द किया जा सकता है। कौन कर रहा है यह जांच? यह जांच अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट और होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की ओर से की जा रही है। सभी वीजा धारकों की पृष्ठभूमि (Background) की जांच की जा रही है। इसमें पुलिस रिकॉर्ड, इमिग्रेशन हिस्ट्री, और कोर्ट केस तक की जानकारी शामिल होगी। क्यों हो रही है चिंता? इमिग्रेंट एडवोकेसी ग्रुप्स (प्रवासी अधिकार संगठनों) ने इस फैसले पर चिंता जताई है। उनके मुताबिक:     यह प्रक्रिया अत्यधिक कठोर और भेदभावपूर्ण हो सकती है।     बिना स्पष्ट वजह के भी कई लोगों का वीजा रद्द किया जा सकता है।     ऐसे फैसलों से विदेशी छात्रों और कुशल कामगारों में डर का माहौल बन सकता है। पहले भी ट्रंप प्रशासन ने किए थे सख्त फैसले डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल में इमिग्रेशन नीति पहले से ही काफी सख्त रही है। इससे पहले उन्होंने मुस्लिम बैन लगाया था, जिसमें कुछ देशों के नागरिकों को अमेरिका आने से रोका गया था। H1-B वीजा की प्रक्रिया को कड़ा किया था और डीएसीए (DACA) जैसे कार्यक्रमों को खत्म करने की कोशिश की थी, जिससे लाखों युवा अप्रवासी प्रभावित हुए थे। भारतीयों पर क्या असर? अमेरिका में लाखों भारतीय छात्र और आईटी प्रोफेशनल्स H1-B, F1 और अन्य वीजा पर रहते हैं। ऐसे में इस फैसले से भारत के हजारों परिवारों और पेशेवरों पर असर पड़ सकता है। खासतौर पर वे लोग जिनकी वीजा वैधता को लेकर कोई पेचीदगी है — उन्हें डिपोर्टेशन का नोटिस मिल सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने कुत्तों को वापस छोड़ने पर लगी रोक हटाई, लेकिन खाना हर जगह न देने की शर्त रखी

नई दिल्ली दिल्ली-एनसीआर से आवारा कुत्तों को हटाकर उन्हें शेल्टर होम में स्थायी रूप से रखने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि हम पिछले आदेश में कुछ संशोधन कर रहे हैं. जस्टिस विक्रम नाथ ने आदेश पढ़ते हुए कहा कि हमने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पक्ष बनाया है ताकि राष्ट्रीय पॉलिसी पर बात हो सके. सुप्रीम कोर्ट ने पिछले आदेश में संशोधन करते हुए कहा कि कुत्तों को वापस छोड़ने पर लगी रोक को हटा दिया है. कोर्ट ने कहा कि रेबीज और खतरनाक कुत्तों को न छोड़ा जाए. अदालत ने ये भी कहा कि जिन कुत्तों को पकड़ा गया था उन्हें वैक्सिनेट कर वापस छोड़ा जाए. इसके अलावा बीमार और आक्रामक कुत्तों को शेल्टर होम में ही रखा जाएगा. कोर्ट ने कहा कि कहीं भी कुत्तों को खाना न दें इसके लिए हर इलाके में एक तय जगह बने. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों को खाना खिलाने पर कार्रवाई की जाएगी. कुत्तों को पकड़ने वाली टीम के काम में बाधा डालने वाले व्यक्ति पर 25 हजार और एनजीओ पर 2 लाख जुर्माना लगेगा. कोर्ट ने नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ शिकायत दर्ज करने के लिए हेल्पलाइन शुरू करने का निर्देश दिया. पशु प्रेमी कुत्तों को गोद लेने के लिए एमसीडी के समक्ष आवेदन कर सकते हैं. ये जिम्मेदारी उनकी होगी कि एक बार गोद लिए गए कुत्तों को दोबारा सड़कों पर नहीं छोड़ा जाए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आवारा कुत्तों को लेकर नेशनल पॉलिसी बनाई जाएगी. कोर्ट ने आदेश का दायरा बढाते हुए कहा कि अब जो भी निर्देश दिए जाएंगे वो पूरे देश के लिए लागू होगा. सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त 2025 को दिल्ली-NCR के आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में रखने का निर्देश पारित किया था, जिसके खिलाफ कई याचिकाएं दायर हईं थी. इंडिया गेट पर पशु प्रेमियों ने कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ कैंडल मार्च भी निकाला था. करीब 2 दशक से सुप्रीम कोर्ट के गलियारों का एक जाना-पहचाना चेहरा. पत्रकारिता में बिताया समय उससे भी अधिक. कानूनी ख़बरों की जटिलता को सरलता में बदलने का कौशल. खाली समय में सिनेमा, संगीत और इतिहास में रुचि.  आवारा कुत्तों पर क्या फंसा है पेंच? कुत्तों को छोड़ने पर प्रतिबंध स्थगित कर दिया गया है। नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों को छोड़ा जा सकता है, सिवाय उन कुत्तों के जिनमें रेबीज होने का संदेह है या जो आक्रामक व्यवहार दिखा रहे हैं। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने स्पष्ट किया कि जिन आवारा कुत्तों को पकड़ा जाता है, उन्हें नसबंदी, कृमिनाशक और टीकाकरण के बाद उसी क्षेत्र में वापस छोड़ दिया जाना चाहिए, जहां से उन्हें उठाया गया था। पूरे देश में लागू होगा यह फैसला अदालत ने मामले का दायरा दिल्ली-एनसीआर से आगे बढ़ाकर पूरे भारत में लागू कर दिया। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पक्षकार बनाया गया। न्यायालय ने यह भी कहा कि वह इस मुद्दे पर राष्ट्रीय नीति बनाने के लिए उच्च न्यायालयों में लंबित इसी तरह की याचिकाओं को सर्वोच्च न्यायालय में स्थानांतरित करेगा। सुप्रीम कोर्ट का पुराना फैसला 11 अगस्त को जस्टिस जेबी पारदीवाला और आर महादेवन की बेंच ने अधिकारियों को आदेश दिया था कि वे तुरंत सड़कों से कुत्ते उठाकर शेल्टर होम्स में रखें और शुरुआती तौर पर कम से कम 5000 कुत्तों के लिए आश्रय गृह बनाएं. अदालत ने चेतावनी भी दी थी कि इस काम में बाधा डालने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी. देशभर में हुआ व्यापक विरोध कोर्ट ने ये आदेश एक मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लेते हुए पारित किया. इस रिपोर्ट में बताया गया था कि दिल्ली में आवारा कुत्तों के काटने से, खासकर बच्चों में रेबीज के मामले बढ़ रहे हैं. अदालत ने इस मामले की सुनवाई 28 जुलाई को शुरू की थी. हालांकि देशभर में इस आदेश का व्यापक विरोध हुआ और कई संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट से इसे रोकने की अपील की. अब 22 अगस्त को विशेष पीठ इस मामले पर अपना आदेश सुनाएगी.  

गाजा पर कब्जे को लेकर नेतन्याहू का सख्त रुख, कहा- बंधक समझौते से फर्क नहीं पड़ता

येरुशेलम इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दो टूक कहा है कि अगर हमास बंधकों को रिहा करने वाली शर्तों के साथ युद्धविराम समझौते पर सहमत हो जाता है, तब भी उनकी सेना पूरे गाजा पट्टी पर कब्जा करेगी। नेतन्याहू की यह टिप्पणी तब आई है, जब गाजा पर कब्जा करने के लिए इजरायली सुरक्षा बल आगे बढ़ रहे हैं और उनके इस कदम की अंतरराष्ट्रीय जगत में भारी आलोचना हो रही है।  स्काई न्यूज ऑस्ट्रेलिया से बात करते हुए, नेतन्याहू ने जोर देकर कहा कि हमास को खदेड़ने का उनका लक्ष्य अपरिवर्तित है। उन्होंने कहा, "हम ऐसा वैसे भी करेंगे। ऐसा कभी नहीं था कि हम हमास को वहाँ छोड़ देंगे।" नेतन्याहू ने कहा कि हम हर हाल में गाजा पर भी कब्जा करेंगे। ट्रंप के बयान का भी किया जिक्र उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस समर्थन का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि हमास गाजा में नहीं रह सकता है। नेतन्याहू ने कहा, “मुझे लगता है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने सबसे सही कहा है, उनका कहना है कि हमास को गाजा से जाना ही होगा। यह SS (शुट्ज़स्टाफ़ेल) को जर्मनी में ही छोड़ देने जैसा है। आप जानते हैं, जर्मनी के ज़्यादातर हिस्से को तो SS से मुक्त करा लिया गया था लेकिन बर्लिन को एसएस और नाज़ी कोर के साथ छोड़ दिया गया था।” आलोचनाओं को कहा- यहूदी-विरोधी सुनामी बता दें कि 1925 में हिटलर ने शुट्ज़स्टाफ़ेल की स्थापना की थी, जिसे एसएस के नाम से भी जाना जाता है। एसएस को शुरू में हिटलर के निजी अंगरक्षकों के रूप में बनाया गया था, बाद में इसने बड़ा रूप ले लिया था और नाजियों पर कब्जा कर लिया था। नेतन्याहू ने तर्क दिया कि अगर हमास शेष बंधकों को रिहा करने, निरस्त्रीकरण करने और "गाज़ा का विसैन्यीकरण" करने पर सहमत हो जाए, तो युद्ध आज ही समाप्त हो सकता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय आलोचना को यहूदी-विरोधी सुनामी कहकर खारिज कर दिया। UN महासचिव बोले तुरंत हो युद्धविराम बता दें कि इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने घनी आबादी वाले फ़िलिस्तीनी क्षेत्र के उत्तरी भाग में स्थित गाज़ा शहर पर कब्ज़ा करने की अपनी अहम रणनीति के तहत बुधवार को युद्ध का अगला चरण शुरू कर दिया है। नेतन्याहू ने इसे हमास का गढ़ बतलाया है। इसके साथ ही इजरायली सेना के जवान गाजा पट्टी में अंदर घुस गए। दूसरी तरफ संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने नेतन्याहू से तुरंत अपने सैनिकों को गाजा से बुलाने और युद्धविराम का आह्वान किया है। उन्होंने कहा है कि IDF के आक्रमण से गाजा पट्टी में भूख से तड़प रहे लोगों का बड़े पैमाने पर विनाश हो जाएगा। अक्टूबर 2023 से अब तक गाजा में फ़िलिस्तीनियों की आधिकारिक मौत के आंकड़े इस सप्ताह बढ़कर 62,000 को पार कर गए हैं।

PF बैलेंस चेक करना हुआ आसान, 99% लोग नहीं जानते ये तरीका

नई दिल्ली अगर आपकी तनख्वा से PF कटता है, तो जाहिर तौर पर आप जानना भी चाहते होंगे कि आपके PF अकाउंट का बैलेंस क्या है? इसके लिए अगर आप EPFO की साइट पर जाकर, लॉग इन करके पासबुक चेक करते हैं, तो जान लें कि यही काम फोन का एक बटन दबाते ही हो सकता है। दरअसल कई बार तकनीकी या किन्हीं अन्य वजहों से आपके PF खाते में सैलरी से कटी रकम पहुंच नहीं पाती। ऐसे में समय रहते यह चेक करना बेहद जरूरी हो जाता है कि आपके PF का अकाउंट में तनख्वा से कटने वाली रकम पहुंच रही है या नहीं। इस नंबर को सेव कर लें आप अपने फोन का एक बटन दबाकर भी अपने PF बैलेंस का पता लगा सकते हैं। इसके लिए आपको 9966044425 इस नंबर को सेव करना होगा। इस नबंर पर अपने फोन से मिस कॉल देने के बाद आपको एक SMS प्राप्त होगा। इस SMS में आपको आपके PF बैलेंस की डिटेल मिल जाएगी। ध्यान रखें कि इस नंबर पर कॉल करने के बाद कॉल आपको नहीं काटना है। दरअसल आपके कॉल करने के बाद दो बार बेल बजने के बाद कॉल खुद ब खुद कट जाएगी। इसके बाद आपको अपने PF अकाउंट बैलेंस की जानकारी के साथ एक SMS मिल जाएगा। SMS से भी मिलेगा बैलेंस अगर किसी वजह से आप कॉल की जगह SMS भेज कर अपने PF अकाउंट बैलेंस की जानकारी पाना चाहते हैं, तो आप ऐसा भी कर सकते हैं। एक सेट फॉर्मेंट में SMS भेज कर भी आप अपने PF अकाउंट बैलेंस की डिटेल्स प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए आपको 7738299899 इस नंबर को फोन में सेव कर लेना चाहिए। EPFO की वेबसाइट के मुताबिक आपको अपने फोन की मैसेज ऐप में जाकर एक नया मैसेज क्रिएट करना होगा। उस मैसेज में आपको “EPFOHO UAN No.” लिख कर उसे 7738299899 पर भेज देना होगा। कुछ देर बाद आपको एक SMS के तौर पर अपने PF अकाउंट बैलेंस की सारी डिटेल मिल जाएगी। इस मैसेज को भेजते हुए याद रखें कि EPFOHO लिखने के बाद आपको एक स्पेस देना होगा और उसके बाद अपना UAN नंबर लिखना होगा। ध्यान देने वाली बात अगर आप मिस कॉल के जरिए अपना PF बैलेंस पता करना चाह रहे हैं, तो आपके UAN में बैंक खाता नंबर, आधार या PAN में से कोई भी एक चीज लिंक होनी चाहिए। इसके अलावा आपका मोबाइल नंबर यूनिफाइड पोर्टल पर UAN के साथ एक्टिवेट होना चाहिए। साथ ही आपके UAN के साथ बैंक खाता नंबर, आधार या PAN में से कम से कम एक KYC डॉक्यूमेंट लिंक होना जरूरी है। अगर आप SMS भेजकर अपना PF बैलेंस पता करना चाहते हैं, तो बता दें कि यह सर्विस10 भाषाओं में उपलब्ध है। अगर आप अंग्रेजी के अलावा किसी और भाषा में SMS प्राप्त करना चाहते हैं, तो UAN के बाद उस भाषा के पहले तीन अक्षर जोड़ने होंगे। उदाहरण के लिए, तेलुगु में जानकारी पाने के लिए "EPFOHO UAN TEL" भेजना होगा। इस तरह आप आसानी से अपने PF अकाउंट बैलेंस के बारे में जान सकते हैं।