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सब्जियों की कीमतों में बड़ा खेल! तोरई कहीं ₹6 तो कहीं ₹60, हरी सब्जियों के रेट ने चौंकाया

नईदिल्ली हरी सब्जियों के रेट कहीं आसमान पर हैं तो कहीं जमीन पर। शहर वाले जहां हैरान हैं तो वहीं गांव और छोट कस्बे के लोग मौज काट रहे हैं। छोटी मंडियों में भिंडी 3 रुपये किलो पर भी कोई नहीं पूछ रहा जबकि, तोरई 6 रुपये किलो बिक रही। हालांकि, यही सब्जियां छोटे कस्बों और गांव की फुटकर मंडियों में 10 रुपये किलो हैं तो दिल्ली और मुंबई में 40 से 80 रुपये किलो। सबसे पहले बात करते हैं कि उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले की कप्तानगंज थोक मंडी की। यहां मंगलवार को तोरई 6 रुपये किलो बिकी, भिंडी सुबह 3 रुपये बिक रही थी, लेकिन दो घंटे बाद ही इसे 2 रुपये किलो पर भी कोई नहीं पूछ रहा था। परवल इस मंडी में 100 रुपये में 5 किलो मिल रहा था। कुशीनगर के मथौली नगर पंचायत की फुटकर मंडी में हरी सब्जियों रेट जमीन पर आ गए हैं। मुंबई में हरी सब्जियों के दाम सुनकर रह जाएंगे दंग अब मुंबई का रेट भी सुन लीजिए। कुशीनगर जिले के दीनानाथ रस्तोगी एक सब्जी की दुकान मुंबई में है। उन्होंने हिन्दुस्तान को जो फुटकर रेट बताया, उन्हें सुनकर आप भी दंग रह जाएंगे। जिस भिंडी को कुशीनगर में 2 रुपये किलो पर भी कोई नहीं पूछ रहा, वही मुंबई में 60 से 80 रुपये किलो बिक रही है। 15 रुपये किलो वाला करेला मुंबई में 80 रुपये फुटकर में और थोक में 60 रुपये किलो है। यहां 10 रुपये वाला बैगन भी वहां 60 रुपये किलो है। ग्वारफली 60, नेनुआ यानी तोरई 60 रुपये बिक रहा है। जो परवल कुशीनगर में 20 रुपये किलो था, वह मुंबई में 60 रुपये किलो है। दिल्ली में हरी सब्जियों के थोक और फुटकर रेट शिवसागर दिल्ली में सब्जी की दुकान लगाते हैं। उनके मुताबिक दिल्ली की आजादपुर मंडी में मंगलवार को भिंडी 16 रुपये, करेला 4 रुपये, गोभी 20 रुपये, तोरई 40 रुपये किलो बिकी। दूसरे नंबर की तोरई 6 रुपये और एक नंबर तोरई 13 -18 रुपये किलो थी। दूसरी ओर लौकी 5 रुपये, टिंडा 13 से 15 रुपये, मटर 40 से 55 रुपये, खीरा 24 रुपये, ग्वार फली 20 रुपये, ककोड़ा 45 रुपये और मूली 10 रुपये प्रति किलो के रेट से बिकी। दिल्ली में हरी सब्जियों के थोक और फुटकर रेट दिल्ली में फुटकर में खीरा 50 रुपये किलो और गोभी 80 रुपये किलो बिक रही हैं। तोरई भी 60 रुपये और भिंडी 40 रुपये किलो बिक रही है। करेला 40 रुपये किलो और मटर 30 रुपये में 250 ग्राम यानी 120 रुपये किलो बिक रही है। टिंडा भी 100 से 120 रुपये किलो है। थोक और फुटकर रेट में क्यों है इतना अंतर सब्जी बिक्रेता शिवसागर बताते हैं कि मंडी से रेहड़ी तक सब्जियों को लाने में ढुलाई पहले की तुलना में अब अधिक लग रही है। कच्चा सौदा होने के कारण 10 प्रतिशत सब्जियां शाम तक खराब हो जाती हैं। ग्राहक को एक नंबर का माल चाहिए ऐसे में सब्जियों की छंटाई होती है। उन्होंनें बताया कि अगर 10 किलो तोरई मंडी से 13 रुपये के हिसाब से लाते हैं तो 130 रुपये पड़ती है। माल भाड़ा, दुकान का किराया और अपनी मेहनत जोड़ लें तो यह कुल 180 रुपये ही हो जाएगी। धनिया-मिर्चा जिसे मुफ्त समझते हैं, वह भी फ्री नहीं मिलते अब इसकी छंटाई करें तो मुश्किल से 6 किलो की तोरई एक नंबर की निकलेगी। यानी अब इसी खरीद रेट करीब 30 रुपये हो जाएगी। इसी तरह का नियम सभी हरी सब्जियों पर लागू होता है। वहीं, दीनानाथ रस्तोगी बताते हैं कि मुंबई में कीमतें थोक में भी बहुत अधिक हैं और मार्जिन कम है, ऊपर से मुफ्त धनिया-मिर्चा देना पड़ता है। इनका भी रेट इन्हीं सब्जियों पर रखने की मजबूरी है।

गर्मी से फिलहाल राहत नहीं, 29 मई के बाद बदलेगा मौसम; आंधी-तूफान की चेतावनी

नईदिल्ली  दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में इस समय भीषण गर्मी का दौर जारी है। मौसम विभाग के अनुसार 28 मई तक उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में तापमान में कोई बड़ी कमी आने की संभावना नहीं है। इसके बाद 29 से 31 मई के बीच तापमान में छह से आठ डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। हालांकि यह राहत पूरी तरह से नहीं होगी, क्योंकि ‘नौतपा’ का असर अभी खत्म नहीं हुआ है। नौतपा अर्थात साल के वे नौ सबसे गर्म दिन होते हैं। यह अवधि मई के अंत में शुरू होकर जून के पहले सप्ताह तक की होती है। इस समय सूर्य भूमध्य रेखा के काफी करीब होता है और कर्क रेखा की ओर बढ़ता है, जिसके कारण मैदानी इलाकों का तापमान 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। दूसरी ओर एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ जारी है, साथ ही 28 मई, 2026 से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से उत्तर-पश्चिमी भारत के कई राज्यों में धूल भरी आंधी, हल्की बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना भी जताई गई है। फिलहाल 28 मई तक देश के कई राज्यों में भीषण गर्मी से राहत के आसार नहीं हैं। मौसम विभाग के अनुसार, आज, छत्तीसगढ़, तटीय आंध्र प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, झारखंड, ओडिशा, तेलंगाना, उत्तराखंड और पश्चिम मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में लू या हीटवेव चलने की आशंका जताई गई है। इन राज्यों में दिन के समय तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। वहीं पूर्वी मध्य प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश, विदर्भ और पश्चिम राजस्थान में भीषण लू चलने का अंदेशा है। विभाग ने चेतावनी दी है कि इन इलाकों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर रह सकता है। दोपहर के समय बाहर निकलना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। वहीं पश्चिम बंगाल में गंगा के तटीय इलाकों, कोंकण-गोवा, सौराष्ट्र-कच्छ और तमिलनाडु, पुडुचेरी तथा कराईकल के कुछ हिस्सों में गर्म और उमस भरा मौसम के बने रहने की आशंका है। उमस के कारण लोगों को अधिक पसीना और बेचैनी महसूस हो सकती है। समुद्री क्षेत्रों में नमी बढ़ने से गर्मी और ज्यादा परेशान करेगी। जबकि, मध्य प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और विदर्भ के कुछ इलाकों में रात के समय भी गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। मौसम विभाग ने इन राज्यों में ‘वार्म नाइट’ की स्थिति रहने की आशंका जताई है। इसका मतलब है कि रात का तापमान सामान्य से अधिक रहेगा, जिससे लोगों को नींद और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। क्या दिल्ली-एनसीआर में भीषण लू से मिलेगी राहत? दिल्ली-एनसीआर में 26 और 27 मई को भी गर्मी से राहत मिलने के आसार कम हैं। मौसम विभाग ने भीषण लू के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। अधिकतम तापमान 43 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान 29 से 32 डिग्री के बीच रहने का पूर्वानुमान है। दिनभर आसमान साफ रहेगा, जिससे धूप और ज्यादा तेज महसूस होगी। गर्म हवाओं के कारण लोगों को दोपहर के समय घर से बाहर निकलने में परेशानी हो सकती है। विभाग ने अपने पूर्वानुमान में कहा है कि पश्चिमी विक्षोभ के चलते 28 और 29 मई को पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में; 28, 30 और 31 मई को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में; और 28 तथा 31 मई को पूर्वी उत्तर प्रदेश में गरज के साथ बारिश व 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तूफानी हवाओं के 70 किमी प्रति घंटे में तब्दील होने के आसार हैं। इन राज्यों में तापमान में गिरावट आएगी और तपिश से राहत मिलने की संभावना है। कई राज्यों में आंधी और बारिश के आसार वर्तमान में एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ, चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ लाइन के असर से मौसम तेजी से बदल रहा है। बिहार, झारखंड, कर्नाटक और कई दक्षिणी राज्यों में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और बारिश होने की संभावना है। कुछ इलाकों में हवा की गति 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, केरल और पश्चिम बंगाल में भी गरज के साथ बारिश और तेज हवाओं का अनुमान है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों और पेड़ों के नीचे खड़े न होने की अपील की है। पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश का अलर्ट पूर्वोत्तर के राज्यों में भारी बारिश का सिलसिला जारी है। असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की गई है। चेरापूंजी में सात सेमी और अगरतला में आठ सेमी बारिश रिकॉर्ड की गई। वहीं आज, 26 मई, 2026 को भी असम और मेघालय के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की आशंका जताई गई है। यहां बारिश के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन राज्यों में 115.6 से 204.4 मिमी तक बारिश हो सकती है। लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी इन राज्यों में भारी बारिश की आशंका जताई है। लोगों को नदी और पहाड़ी क्षेत्रों में सतर्क रहने की सलाह दी गई है। बिजली गिरने और तेज हवाओं की चेतावनी भी जारी की गई है। दक्षिण भारत में भी बदलेगा मौसम केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। केरल और तमिलनाडु में भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। इन राज्यों में 64.5 से 115.5 मिमी तक बरस सकते हैं बादल। विभाग ने यहां बारिश के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में गर्म और उमस भरा मौसम भी बना रहेगा। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में तेज हवाएं चलने के आसार हैं। समुद्र में हवा की गति 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। विभाग ने मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी है। मानसून की आगे बढ़ने की स्थिति दक्षिण-पश्चिम मानसून धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है। … Read more

24 परगना से मालदा तक कार्रवाई, बकरीद से पहले घुसपैठियों पर शिकंजा

कलकत्ता एक ओर जहां पूरे देश में बकरीद की तैयारियां जोरों पर हैं तो दूसरी ओर बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों में हलचल मची हुई है. कई स्टेट बॉर्डर के पॉइंट्स पर कथित तौर पर अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के बड़े-बड़े ग्रुप इकट्ठा होने लगे हैं जो अपने वतन वापस जा रहे हैं।  अपने वतन लौट रहे अवैध बांग्लादेशी प्रवासी            एक बांग्लादेशी प्रवासी महिला रोजीना बीबी ने बताया कि वो डरी हुई हैं. उन्हें कहा, 'हम सात साल पहले अपने पति सैदुल के कैंसर के इलाज के लिए भारत आए थे, क्योंकि इलाज की प्रक्रिया लंबी चली, इसलिए परिवार गैर-कानूनी तौर पर यहीं रह गया. लेकिन नए कानूनी आदेश ने पूरी स्थिति ही बदल दी है. नए निर्देशों के तहत सरकारी कार्रवाई के डर से उनके मकान मालिक ने हाल ही में उनसे घर खाली करने को कहा जिससे उनके पास वापस जाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा।    बंगाल सरकार का सख्त एक्शन पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने कहा, 'बांग्लादेशी यहां क्यों रहें? वो केंद्र सरकार द्वारा दी गई हर सुविधा का लाभ उठा रहे हैं. वो गरीबों के लिए बनाई गई कल्याणकारी योजनाओं से फायदा उठा रहे हैं. उन्हें नागरिकता देकर, वोटर आईडी और आधार कार्ड जारी करके और मतदाता के रूप में पंजीकृत करके, यहां उनके वोट मांगे जा रहे थे… ऐसे लोगों की पहचान करके उन्हें अलग किया जाएगा. गृह मंत्री पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि उन्हें वापस भेज दिया जाएगा. बेहतर होगा यदि वो स्वेच्छा से अपने देश लौट जाएं… अन्यथा सरकार को आवश्यक कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।  हकीमपुर चेक पॉइंट पर प्रवासियों की भीड़                     उत्तरी 24 परगना के बशीरहाट सब-डिवीजन में स्थित हकीमपुर चेकपॉइंट पर, मंगलवार सुबह सौ से ज्यादा बांग्लादेशी पुरुष और महिलाएं इकट्ठा हुए. ये सभी अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके वापस अपने देश लौटना चाहते है।  दलाल की मदद से आए भारत              हकीमपुर चेकपॉइंट के पास अपने दो बच्चों के साथ बैठीं 36 वर्षीय सबीना खातून ने बताया कि सालों पहले वह दलालों के जरिए गैर-कानूनी तौर पर भारत में दाखिल हुई थी और बाद में एक भारतीय नागरिक से शादी कर ली. और उसने अपने पति के पहचान पत्रों का इस्तेमाल करके RG कर अस्पताल में अपने बच्चों को जन्म दिया था. अब नए कानून ने उन्हें एक दिल तोड़ने वाले मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है. क्योंकि उसका पति एक भारतीय नागरिक है, इसलिए वह उनके साथ नहीं जा सकता. सबीना और उसके बेबस बच्चे सीमा पर अकेले इंतजार कर रहे हैं. "सतखिरा में मेरा परिवार तो है, लेकिन मुझे नहीं पता कि हम दोबारा कैसे मिल पाएंगे," सबीना अपने बच्चों की ओर देखते हुए आंखों में आंसू भरकर कहती है. उसका सवाल है, 'क्या मेरे बच्चे कभी अपने पिता को दोबारा देख पाएंगे?' बॉर्डर चेकपॉइंट के पास जमा हुई भारी भीड़ बंगाल में जैसे-जैसे सीमा चौकियों के पास भीड़ जमा होती जा रही है. इसके साथ ही होल्डिंग सेंटर कड़ी सुरक्षा के बीच काम करना शुरू कर रहे हैं, पश्चिम बंगाल का घुसपैठ-रोधी अभियान अब सख़्त कार्रवाई वाले चरण में पहुंचती नजर आ रही है. आने वाले हफ्तों में और भी लोगों को हिरासत में लिए जाने, उनकी पहचान की जांच और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।  1. अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों पर सख्त कार्रवाई: मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अवैध घुसपैठियों के खिलाफ कड़े निर्देश दिए हैं. मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे इलाकों में 'होल्डिंग सेंटर' बनाए गए हैं. पकड़े गए संदिग्ध घुसपैठियों को जेल भेजने के बजाय 30 दिनों तक इन सेंटर्स में रखकर उनकी पहचान और बायोमेट्रिक जांच की जाएगी. इसके बाद उन्हें बीएसएफ (BSF) को सौंपकर उनके देश वापस भेजा जाएगा. डर के कारण कई घुसपैठिए वापस बांग्लादेश भागने की कोशिश कर रहे हैं।  2. सीएए (CAA) के तहत नागरिकता: बांग्लादेश से आए हिंदू शरणार्थियों के लिए सीएए (CAA) सेंटर बनाए गए हैं, जहाँ बड़ी संख्या में लोग पहुँच रहे हैं. इन सेंटर्स के माध्यम से उन्हें भारत की नागरिकता दी जाएगी।  3. 5 रुपये में 'माछ-भात' योजना और नई पाबंदियां: चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा करते हुए, नई सरकार ने पूरे राज्य में 400 कैंटीन खोलने का फैसला किया है, जहाँ 5 रुपये में मछली-चावल (माछ-भात) मिलेगा. इसके अलावा, स्कूल, कॉलेज और मंदिरों के 1 किलोमीटर के दायरे में शराब की दुकानों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।  4. टीएमसी (TMC) नेताओं पर जनता का आक्रोश: वसूली, भ्रष्टाचार और बाहुबल के आरोपों के चलते टीएमसी नेताओं के खिलाफ आम लोगों में भारी गुस्सा है. कुछ नेताओं के घरों से भारी मात्रा में कैश मिला है, तो कई नेताओं को जनता द्वारा पीटे जाने और कोर्ट में 'चोर-चोर' के नारे लगने की खबरें हैं।  5. टीएमसी में भारी टूट और बगावत की अटकलें: टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार और पार्टी के दो विधायक मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की समीक्षा बैठक में शामिल हुए, जिससे टीएमसी में बड़ी बगावत की अटकलें तेज हो गई हैं. बताया जा रहा है कि 60 से ज्यादा पार्षद इस्तीफा दे चुके हैं और टीएमसी के 12 से 20 सांसद एक साथ बीजेपी में जाने की तैयारी कर रहे हैं ताकि दल-बदल कानून (Anti-Defection Law) से बचा जा सके।  जो CAA के दायरे से बाहर हैं, उन्हें माना जाएगा घुसपैठिया     बीएसएफ के सीनियर अधिकारियों के साथ हाल ही में हुई एक मीटिंग में बोलते हुए सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि जो लोग नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के दायरे से बाहर हैं, उन्हें अवैध घुसपैठिया माना जाएगा. उन्हें पुलिस गिरफ्तार करके बीएसएफ को सौंप देगी.  इसके साथ ही राज्य सरकार ने जिलों में होल्डिंग सेंटर बनाने की पहल शुरू कर दी है, जिससे संदिग्ध अवैध प्रवासियों को कुछ वक्त के लिए वहां रखा जा सके और उन विदेशी कैदियों को रिहा किया जा सके, जो देश-निकाला या अपने देश वापसी का इंतजार कर रहे हैं। 

CM बनने के बाद पहली बार PM मोदी से मिले विजय, सियासी गलियारों में बढ़ी चर्चा

 नई दिल्ली तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री, जोसेफ विजय अपनी कुर्सी संभालने के बाद पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने दिल्ली पहुंचे हैं. इस मुलाकात में उन्होंने प्रधानमंत्री से तमिलनाडु की उन मांगों को लेकर बात की जो केंद्र सरकार के सामने काफी लंबे समय से पेंडिंग हैं. विजय, तमिलनाडु के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर दिल्ली पहुंचे हैं. उनकी मुलाकात का पूरा एजेंडा तो सामने नहीं आया है लेकिन माना जा रहा है कि वो प्रधानमंत्री के अलावा और भी कई राजनीतिक हस्तियों से मिल सकते हैं। तमिलनाडु हाउस पहुंचे विजय दिल्ली पहुंचने के बाद विजय सबसे पहले, सेंट्रल दिल्ली में तमिलनाडु हाउस पहुंचे. प्रधानमंत्री मोदी से उनकी मुलाकात शाम 4 बजकर 30 मिनट के लिए शिड्यूल थी. शाम को प्रधानमंत्री से मिलने विजय सेवा तीर्थ पहुंचे. वहां करीब 25 मिनट तक दोनों की मीटिंग चली. इस मीटिंग में विजय और पीएम मोदी की बातचीत के बारे में डिटेल्स सामने आने का अभी इंतजार किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने विजय को मुख्यमंत्री बनने पर दी थी बधाई विजय का सिनेमा सुपरस्टार से, पॉलिटिक्स का हीरो बनना बड़ी खबर थी. जब उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें बधाई दी थी. पीएम के एक्स हैन्डल से शेयर हुए पोस्ट में लिखा था, 'थिरु सी. जोसेफ विजय को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की बधाई. उनके आगामी कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं. केंद्र सरकार लोगों का जीवन बेहतर करने के लिए तमिलनाडु सरकार के साथ मिलकर काम करती रहेगी। दो साल पहले ही अपनी पार्टी TVK के साथ विजय ने राजनीति में एंट्री ली थी. तमिलनाडु चुनावों में शानदार जीत के बावजूद उनके पास बहुमत की कमी थी जिसके चलते उनका मुख्यमंत्री बन पाना लगातार खबरों में था. लेकिन की दशकों के बाद राज्य में तमिलनाडु में पहली बार गठबंधन की सरकार चला रहे विजय, मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से ही लगातार एक्शन में नजर आ रहे हैं।

समान नागरिक संहिता पर असम ने उठाया बड़ा कदम, विधानसभा में बिल पास

गुवाहाटी असम विधानसभा चुनाव ने यूनिफॉर्म सिविल कोड ( समान नागरिक संहिता ) बिल को पास कर दिया है। इसी के साथ देश में उत्तराखंड और गुजरात के बाद असम तीसरा राज्य बन गया है। जहां की विधानसभा ने यूनिफॉर्म सिविल काेड बिल को पास किया है। बीजेपी ने असम विधानसभा चुनाव 2026 में यूनिफॉर्म सिविल काेड लागू करने का वादा किया था। बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद सीएम बने हिमंत बिस्वा सरमा ने पहली कैबिनेट में यूसीसी बिल के ड्राफ्ट को मंजूरी दी थी। असम में बहुविवाह के साथ लिव इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन का प्रवाधान किया गया है। UCC संविधान के अनुच्छेद 44 की नींव पर आधारित है : सीएम हिमंता ‘समान नागरिक संहिता, असम, 2026 विधेयक’ पर चर्चा के दौरान सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा- प्रस्तावित कानून विपक्ष के बीजेपी या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा पर नहीं, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 44 की नींव पर आधारित है. हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, समान नागरिक संहिता का लंबा इतिहास है. इसकी मांग सबसे पहले कांग्रेस ने 1925 में की थी. 1937 में जवाहरलाल नेहरू ने भी इसका सुझाव दिया था. वही कांग्रेस आज इसका विरोध कुरान और शरीयत के नजरिए से कर रही है, न कि हिंदू, ईसाई या आदिवासी दृष्टिकोण से। कांग्रेस केवल एक विशेष समुदाय का प्रतिनिधित्व करती है : सीएम हिमंता हिमंता ने कहा- कांग्रेस समान नागरिक संहिता का विरोध कर रही है. वह सभी जातियों, पंथों और धर्मों का प्रतिनिधित्व नहीं करती, बल्कि केवल एक विशेष समुदाय का प्रतिनिधित्व करती है. कांग्रेस असम की भौगोलिक विविधता का प्रतिनिधित्व नहीं करती. मुख्यमंत्री ने कहा, आज की कांग्रेस को देखकर बहुत दुख और पीड़ा होती है. हमारे वक्तव्यों में सभी धर्मों और सभी लोगों का प्रतिनिधित्व होना चाहिए. मुझे लगता है कि कांग्रेस को सांप्रदायिक पार्टी में बदलने के बजाय भारत की धर्मनिरपेक्ष परंपरा का पालन करना चाहिए। असम यूसीसी बिल की बड़ी बातें:     शादी-तलाक का अनिवार्य पंजीकरण: सभी शादियों और तलाक का रजिस्ट्रेशन 60 दिनों के भीतर कराना अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसा न करने पर जुर्माने का प्रावधान है     विवाह की न्यूनतम आयु: आदिवासियों को छोड़कर सभी धर्मों के लिए लड़के की शादी की न्यूनतम उम्र 21 साल और लड़की की 18 साल तय की गई है।     धोखे से शादी पर सजा: पहचान छिपाकर, धोखे या जबरदस्ती से शादी करने पर 7 साल तक की जेल हो सकती है।     बहुविवाह पर प्रतिबंध: सभी धर्मों में एक से अधिक शादियां करने पर पूरी तरह से पाबंदी लगाई गई है। विवाहित रहते हुए दूसरी शादी करने पर 7 साल तक की सजा का प्रावधान है।     लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन: लिव-इन में रहने वाले जोड़ों के लिए अपना पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, संबंध टूटने पर भी सरकार को जानकारी देनी होगी। लिव-इन से पैदा हुए बच्चों को संपत्ति का कानूनी अधिकार मिलेगा।     महिलाओं को समान अधिकार: सभी महिलाओं को संपत्ति में समान अधिकार मिलेगा और माता-पिता की संपत्ति में बेटी का भी पूरा हक होगा। इसके अलावा, छोटे बच्चों (5 वर्ष से कम) की कस्टडी का अधिकार आमतौर पर मां को दिया गया है।     आदिवासी समुदायों (ST) को छूट: राज्य की अनुसूचित जनजाति (ST) समुदायों को इन नए यूसीसी नियमों के दायरे से बाहर रखा गया है। वे अपनी पारंपरिक रूढ़ियों और सामुदायिक कानूनों का पालन करना जारी रख सकते हैं। (नोट: उत्तराखंड और गुजरात ने भी इसी तरह के नियम बनाए हैं। असम तीसरा राज्य है जिसकी विधानसभा में यूसीसी पास हुआ है।) यूसीसी विधेयक की मूल बातें 154 पन्नों के इस बिल में कहा गया है कि इसका उद्देश्य विवाह और तलाक़, उत्तराधिकार, लिव-इन रिश्तों से संबंधित क़ानूनों को नियंत्रित और विनियमित करना है और इससे जुड़े मामलों का संचालन करना है। असम सरकार ने इस बिल के संदर्भ में एक बयान जारी कर कहा, "अगर यह बिल पास हो जाता है, तो धोखाधड़ी को रोकने के लिए सभी शादियों और तलाक़ का रजिस्ट्रेशन ज़रूरी हो जाएगा. जोड़ों को समारोह के 60 दिनों के भीतर उप-रजिस्ट्रार के समक्ष विवाह ज्ञापन प्रस्तुत करना होगा। विवाह संबंधी प्रावधानों के तहत, यह विधेयक एक विवाह को अनिवार्य बनाता है और दूल्हों के लिए 21 वर्ष और दुल्हनों के लिए 18 वर्ष की एक समान क़ानूनी आयु निर्धारित करता है। विधेयक में कहा गया है, "यह प्रस्तावित क़ानून रीति-रिवाजों की पूरी आज़ादी देकर सांस्कृतिक विविधता की रक्षा करता है. इसके तहत शादियाँ किसी भी मौजूदा धार्मिक समारोह या रीति-रिवाज के अनुसार संपन्न की जा सकती हैं. इनमें वैदिक विवाह, अहोम चकलोंग, सप्तपदी, आशीर्वाद, निकाह, पवित्र मिलन और आनंद कारज शामिल हैं। अतुल बोरा ने पेश किया था बिल असम की विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल को संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा ने पेश किया था। यूसीसी में अनुसूचित जनजातियां (पहाड़ी) और अनुसूचित जनजातियां (मैदानी) UCC के दायरे से बाहर रखा गया है। वे 'पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों, प्रथाओं और अनुष्ठानों' को करती रहेंगी। यूनिफॉर्म सिविल कोड चार विषयों को कवर करेगा। इसमें शादी की न्यूनतम उम्र, बहुविवाह पर रोक, माता-पिता की संपत्ति में बेटियों को समान अधिकार, और लिव-इन संबंधों से जुड़े मामले शामिल हैं। यह सभी धर्मों पर लागू होगा। जब हिमंता बिस्वा सरमा की अगुवाई वाली सरकार ने इस बिल को पेश किया था तो विपक्ष ने विरोध किया था। यूसीसी बीजेपी का बड़ा वादा था, जिस सीएम सरमा ने पूरा कर दिया है।  

राशन कार्ड धारकों को बड़ा फायदा: सरकार ने स्कीम में किए अहम सुधार, करोड़ों परिवारों को राहत

 नई दिल्‍ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में अहम फैसला हुआ है. कैबिनेट के इस फैसले से राशन लेने वाले 80 करोड़ लोगों पर सीधा असर पड़ेगा.  सरकार ने राशन व्यवस्था (PDS- पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम) को लेकर एक बहुत बड़ा फैसला किया.  इसके लिए 'सार्थक-पीडीएस' (SARTHAK-PDS) योजना शुरू की गई है.  इस पूरी योजना पर करीब 25,530 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। प्रधानमंत्री गरीब कल्‍याण योजना के तहत सरकार हर महीने 80 करोड़ लोगों को राशन दे रही है. अब इस स्‍कीम को सही से चलाने के लिए कैबिनेट ने SARTHAK PDS योजना जारी रखने की मंजूरी दी है और इसके तहत कुछ बड़े सुधार किए हैं, जिसका लाभ गरीब परिवारों को मिलेगा. इन सुधारों से राज्‍यों को सपोर्ट देने से लेकर राशन की चोरी रोकने जैसी चीजें शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने बताया कि इस योजना का मकसद देश की पब्लिक डिस्‍ट्रीब्‍यूशन सिस्‍टम (PDS) यानी राशन व्यवस्था को ज्यादा मजबूत, आधुनिक और पारदर्शी बनाना है. इसके लिए केंद्र सरकार ने ₹25,530 करोड़ का केंद्रीय आवंटन मंजूर किया है. इस स्‍कीम के तहत तीन खास बदलाव करने की बात कही गई है। योजना के तहत तीन खास बदलाव राज्‍यों की राशन ढुलाई में मदद करना: केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कैबिनेट में बड़ा फैसला लेते हुए कहा गया है कि राज्‍यों की आर्थिक मदद की जाएगी. सरकार राज्‍यों की एजेंसियों को खाद्यान को एक राज्‍य के भीतर गोदामों से दुकानों तक पहुंचाने के लिए आर्थिक सहायता देगी. इससे ट्रांसपोर्ट कॉस्‍ट कम होगी और गरीबों तक राश समय पर पहुंच सकेगा. दूरदराज के इलाकों में इसका सबसे ज्‍यादा लाभ होगा। फेयर प्राइस शॉप: इसका मतलब है कि सरकार राशन की दुकानों को भी सपोर्ट देगी. अश्विनी वैष्‍णव ने कहा कि लंबे समय से इसकी मांग की जा रही थी, जो काफी कम थी और अब राशन डीलरों को डिजिटल उपकरण, बेहतर स्‍टोरेज और संचालन के लिए सहायता मिलेगी. इससे दुकानों की वर्क सिस्‍टम मजबूत होगा और राशन डिस्‍ट्रीब्‍यूशन में गड़बड़ी कम होगी. राशन दुकानदारों को आर्थिक राहत भी मिल सकती है। तीसरा बड़ा बदलाव: कैबिनेट में तीसरा सुधार पब्लिक डिस्‍ट्रीब्‍यूशन सिस्‍टम (PDS) का मॉर्डनाइजेशन है. सरकार राशन की व्‍यवस्‍था को मॉर्डनाइज करने जा रही है और इसे टेक्‍नोलॉजी बेस्‍ड बनाने जा रही है. इसमें ऑटोमेशन, डिजिटल ट्रैकिंग, ऑनलाइन मॉनिटरिंग, स्‍मार्ट डिवाइस और ट्रांसपैरेंसी टूल शामिल है. इससे चोरी, ब्‍लैकमार्केटिंग कम होगी और जरूरतमंदों तक इसका सीधा लाभ मिलेगा। बता दें सरकार का उद्देश्य वन नेशन-वन राशन कार्ड जैसी व्यवस्थाओं को भी ज्यादा प्रभावी बनाना है, ताकि देशभर में राशन वितरण अधिक सीमलेस और ट्रांसपैरेंसी हो सके. इसका करोड़ों लाभार्थियों को लाभ मिलेगा। 

Middle East में नया तनाव, ट्रंप की मांग पर अमेरिका और सऊदी आमने-सामने

वाशिंगटन अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अब एक नई जंग पर्दे के पीछे शुरू होती दिख रही है. इस बार मामला सीधे वॉशिंगटन और उसके सबसे पुराने अरब सहयोगी सऊदी अरब के बीच का है. वजह बनी है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वह नई रणनीति, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ संभावित शांति समझौते को अब्राहम अकॉर्ड्स से जोड़ दिया। 25 मई को ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए एक बड़ा संदेश दिया. उन्होंने कहा कि ईरान के साथ किसी भी शांति समझौते का हिस्सा बनने के लिए मुस्लिम देशों को एक साथ अब्राहम अकॉर्ड्स पर हस्ताक्षर करने होंगे. ट्रंप ने खास तौर पर सऊदी अरब, कतर और पाकिस्तान का नाम लेते हुए इजरायल के साथ रिश्ते सामान्य करने की बात कही। लेकिन ट्रंप की यह अपील खाड़ी देशों, खासकर सऊदी अरब को बिल्कुल पसंद नहीं आई. कुछ ही घंटों बाद रियाद की तरफ से संकेत दिया गया कि सऊदी का पुराना रुख नहीं बदला है. सऊदी अधिकारियों ने साफ कहा कि जब तक फिलिस्तीनी राष्ट्र के गठन के लिए "स्पष्ट रास्ता" तय नहीं होता, तब तक इजरायल के साथ सामान्य संबंध संभव नहीं हैं। कई अरब देशों ने इजरायल संग स्थापित किए रिश्ते इस प्रतिक्रिया ने साफ कर दिया कि गाजा युद्ध के बाद पश्चिम एशिया की राजनीति पहले जैसी नहीं रही. 2020 में जब अब्राहम अकॉर्ड्स हुए थे, तब कई अरब देशों ने इजरायल के साथ संबंध सामान्य किए थे. बाद के दौर में सऊदी अरब ने भी इजरायल के साथ संबंध स्थापित करने की कोशिश की। हालांकि, इस बीच गाजा से हमास ने इजरायल पर हमला कर दिया और फिर एक बड़ी जंग शुरू हो गई. यही वजह रही कि सऊदी-इजरायल के बीच रिश्ते स्थापित नहीं हो पाए, लेकिन मौजूदा हालात में सऊदी अरब किसी जल्दबाजी में कदम उठाने के मूड में नहीं दिख रहा। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर सऊदी की नाराजगी यह विवाद सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं है. इसके पीछे होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ता तनाव भी बड़ा कारण है. मई की शुरुआत में ट्रंप प्रशासन ने "प्रोजेक्ट फ्रीडम" नाम से एक सैन्य मिशन शुरू करने की कोशिश की थी. इसका मकसद होर्मुज स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था, क्योंकि ईरान वहां अपनी पकड़ मजबूत कर चुका है। लेकिन अमेरिकी प्रशासन की सबसे बड़ी गलती यह रही कि उसने इस ऑपरेशन की घोषणा खाड़ी सहयोगियों से पूरी सहमति लिए बिना कर दी. इससे सऊदी नेतृत्व नाराज हो गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी सेना को अपने एयरस्पेस और सैन्य अड्डों के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया. प्रिंस सुल्तान एयरबेस से अमेरिकी उड़ानों पर रोक लगा दी गई. इसके बाद अमेरिकी ऑपरेशन को भारी झटका लगा और "प्रोजेक्ट फ्रीडम" सिर्फ 36 घंटे के भीतर ठप पड़ गया। अब सोच-समझकर फैसला लेगा सऊदी अरब! सऊदी अरब अब अमेरिका की हर रणनीति का आंख बंद करके समर्थन नहीं करना चाहता. इसकी सबसे बड़ी वजह ईरान का सीधा खतरा है. तेहरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि अगर किसी खाड़ी देश ने अमेरिकी या इजरायली सैन्य कार्रवाई के लिए अपना एयरस्पेस इस्तेमाल करने दिया, तो उसे भी जवाबी हमले का सामना करना पड़ेगा। 2019 में सऊदी अरब के अबकैक और खुरैस तेल प्लांट्स पर हुए ड्रोन और मिसाइल हमले अब भी रियाद के लिए बड़ी चेतावनी बने हुए हैं. यही कारण है कि सऊदी नेतृत्व किसी सीधे सैन्य टकराव से बचना चाहता है. इसके अलावा सऊदी अरब खुद को इस्लाम की सबसे पवित्र जगहों मक्का और मदीना का संरक्षक मानता है. ऐसे में फिलिस्तीन मुद्दे को नजरअंदाज करके इजरायल के साथ रिश्ते सामान्य करना उसके लिए आसान नहीं है. गाजा युद्ध के बाद अरब देशों की जनता में इजरायल के खिलाफ गुस्सा भी काफी बढ़ा है। उधर ईरान इस पूरी घटना को अपने लिए रणनीतिक मौके की तरह देख रहा है. अमेरिका जहां एक बड़ा एंटी-ईरान गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहा है, वहीं ईरान खाड़ी देशों और वॉशिंगटन के बीच बढ़ती दूरी का फायदा उठाने में लगा है. विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की "अब्राहम अकॉर्ड्स फर्स्ट" वाली रणनीति ने उल्टा असर किया है. इससे अमेरिका के सहयोगी देश ही असहज हो गए हैं और वे अब अपने सुरक्षा हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं।  

पाकिस्तान में इतिहास पर बवाल: ख्वाजा आसिफ ने माना- हिंदू थे हमारे पूर्वज, किताबों में फैलाया गया झूठ

इस्लामाबाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने पाकिस्तान में पहचान और इतिहास को लेकर नई बहस छेड़ दी है. आसिफ ने खुलकर स्वीकार किया कि पाकिस्तान के बच्चों को "गलत इतिहास" पढ़ाया जा रहा है और देश के लोग अपनी असली जड़ों से दूर होते जा रहे हैं। एक इंटरव्यू में ख्वाजा आसिफ ने कहा, "हम पाकिस्तानी मुसलमान अपने हिंदू पूर्वजों से नफरत करते हैं. पाकिस्तान के आधे लोग झूठा दावा करते हैं कि उनके पूर्वज सऊदी अरब या ईरान से आए थे." उन्होंने कहा कि यह सोच जानबूझकर तैयार की गई ताकि पाकिस्तान की नई पीढ़ी अपनी सभ्यता की पहचान से कट जाए। ख्वाजा आसिफ ने इतिहास की किताबों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पाकिस्तान में हिंदू शासकों को इतिहास से लगभग मिटा दिया गया. उन्होंने कहा, "हमने चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक को इतिहास की किताबों से हटा दिया क्योंकि वे हिंदू थे." उन्होंने आगे कहा, "मेरे पूर्वज हिंदू थे. क्या इससे मैं कम पाकिस्तानी हो जाता हूं?" आसिफ के मुताबिक पाकिस्तान में पढ़ाई जाने वाली किताबें ऐसे लोगों ने लिखीं जिन्होंने आने वाली पीढ़ियों को एक खास मानसिकता में ढालने की कोशिश की। पाकिस्तानी समाज की सोच बदली गई! ख्वाजा आसिफ ने कहा कि अमेरिका की लड़ाइयों में पाकिस्तान को इस्तेमाल करने के लिए समाज की सोच बदली गई और उसी हिसाब से इतिहास को पेश किया गया. उन्होंने कहा, "हमारे बच्चे तथ्यात्मक इतिहास नहीं पढ़ रहे. आज पाकिस्तान में कई लोगों को यह तक नहीं पता कि चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक कौन थे। ख्वाजा आसिफ का यह बयान ऐसे समय आया है जब वह पहले से ही अमेरिका और इजरायल के मुद्दे पर विवादों में घिरे हुए हैं. हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान समेत कई मुस्लिम देशों से अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने और इजरायल को मान्यता देने की अपील की थी। पाकिस्तान इजरायल को मान्यता नहीं देगा- आसिफ इस पर प्रतिक्रिया देते हुए आसिफ ने कहा था, "मुझे निजी तौर पर नहीं लगता कि हमें ऐसे किसी समझौते में शामिल होना चाहिए जो हमारी बुनियादी सोच से टकराता हो." उन्होंने दोहराया कि पाकिस्तान का पुराना रुख आज भी कायम है और जब तक 1967 की सीमाओं के आधार पर पूर्वी यरुशलम को राजधानी बनाकर स्वतंत्र फिलिस्तीनी देश नहीं बनता, तब तक इस्लामाबाद इजरायल को मान्यता नहीं देगा। पाकिस्तान ने अपने 78 साल के इतिहास में कभी इजरायल को आधिकारिक मान्यता नहीं दी है. यहां तक कि पाकिस्तानी पासपोर्ट पर भी साफ लिखा होता है कि यह इजरायल की यात्रा के लिए मान्य नहीं है. आसिफ के बयान के बाद अमेरिका में भी प्रतिक्रिया देखने को मिली. अमेरिकी रिपब्लिकन सांसद लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि इजरायल के प्रति पाकिस्तान की सोच लंबे समय से नकारात्मक रही है और ऐसे में अमेरिका-ईरान या इजरायल से जुड़े मामलों में उसकी मध्यस्थता "समस्याओं से भरी" हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण संवैधानिक करार

नई दिल्ली मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण कार्य (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला सामने आया है. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव आयोग के पास SIR का अधिकार है. एसआईआर पर दायर यायिकाओं से जुड़े मामले में सर्वोच्च अदालत ने मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) करने के भारत निर्वाचन आयोग के अधिकार को बरकरार रखा है. अदालत ने कहा कि यह नहीं कहा जा सकता कि ECI ने SIR का प्रयोग करके अपनी वैधानिक शक्तियों के बाहर जाकर कार्य किया है. इसे 'अल्ट्रा वायर्स' भी नहीं कहा जा सकता, क्योंकि यह कार्य-प्रणाली उस सामान्य प्रक्रिया से भिन्न है जो आमतौर पर अपनाई जाती है।  SIR पर सीजेआई ने क्या कुछ कहा? SIR पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि सभी पक्षों की अलग-अलग दलीलों पर गौर करने के बाद, और घटनाओं के क्रम को देखने के बाद, पार्टियों की ओर से पेश की गई दलीलों और रिकॉर्ड में रखी गई सामग्री को देखने के बाद, हमारा मानना ​​है कि इन मुद्दों का एनालिसिस करने की ज़रूरत है. सीजेआई ने तीन सवालों के जरिए अपनी बात रखीं।  SIR पर सीजेआई के तीन सवाल     क्या भारत के इलेक्शन कमीशन के पास SIR जैसी कार्रवाई करने का अधिकार है?     क्या SIR के तहत जांच किसी जायज़ मकसद पर आधारित है और अगर ऐसा है, तो क्या इलेक्शन कमीशन द्वारा अपनाए गए उपाय, हासिल किए जाने वाले लक्ष्यों के हिसाब से सही हैं?     क्या SIR के तहत जांच करने में इलेक्शन कमीशन द्वारा अपनाया गया तरीका रिप्रेजेंटेशन ऑफ़ द पीपल एक्ट, 1950 के नियमों के खिलाफ़ है या उनका उल्लंघन करता है? मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अगर चुनाव आयोग को एसआईआर कराने का अधिकार है, तो यह भी देखना होगा कि उसकी प्रक्रिया क्या होगी। हालांकि, केवल प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों के आधार पर पूरे एसआईआर को अवैधानिक नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी हैं। पीठ ने यह भी कहा कि यह सवाल उठाया गया कि क्या इस समय एसआईआर कराने की कोई वैध आवश्यकता है। अदालत की राय में एसआईआर के दौरान उठाए गए कदम जरूरत के मुताबिक थे। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि एसआईआर बिहार में चुनाव प्रक्रिया और स्वतंत्र तथा निष्पक्ष चुनाव के संवैधानिक दायित्व से ध्यान नहीं भटकाता। उन्होंने मतदाताओं पर खुद को साबित करने का बोझ डालने वाली दलील को भी खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपने पुराने निवास स्थान से कहीं और रहने लगा है, तब भी वह पुरानी एसआईआर प्रक्रिया से बाहर नहीं हो जाता। उसका या उसके परिवार का नाम पुराने रिकॉर्ड में मौजूद होगा। अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग ने दस्तावेजों की विश्वसनीयता के आधार पर उन्हें सूची में शामिल किया है और इसे मनमाना नहीं कहा जा सकता मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह नहीं माना जा सकता कि एसआईआर का उद्देश्य लोगों को मतदाता सूची से बाहर करना था। अगर कोई दस्तावेज सही नहीं पाया जाता है, तो चुनाव आयोग मतदाता सूची में नाम शामिल करने से इनकार कर सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आयोग नागरिकता तय कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए क्या-क्या टिप्पणी की, उन्हें बिंदुवार जानते हैं- 1. चुनाव आयोग की शक्तियां बरकरार सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसे निष्पक्ष और शुद्ध मतदाता सूची तय करने का अधिकार है. अदालत ने यह भी माना कि विशेष परिस्थितियों में अलग प्रक्रिया अपनाना संविधान और कानून के खिलाफ नहीं है. इसलिए SIR पूरी तरह वैध है और इसे प्रोसेस करने का अधिकार चुनाव आयोग के पास है. आयोग इसकी शक्ति रखता है. 2. कोई प्रक्रिया थोड़ी अलग हो तो अवैध नहीं हो जाती है- सुप्रीम कोर्ट बिहार में यह प्रक्रिया शुरू होने के बाद इसे चुनौती दी गई थी. याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह सामान्य संशोधन प्रक्रिया से अलग है और मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित कर सकती है. अदालत ने कहा, 'यह प्रक्रिया कानूनी रूप से मान्य है. 11 दस्तावेजों पर विचार करने और हमारे आदेश के माध्यम से आधार कार्ड को शामिल किए जाने के बाद हम इस तर्क को स्वीकार नहीं कर सकते कि चुनाव द्वारा मांगे गए दस्तावेजों का समूह मनमाना है." सुप्रीम कोर्ट की खास टिप्पणी- सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि SIR प्रक्रिया को केवल इसलिए 'अल्ट्रा वायर्स' (अवैध) करार देकर रद्द नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह मतदाता सूचियों के संशोधन की सामान्य प्रोसेस से अलग है. 3. वोटर लिस्ट से नाम हटना, नागरिकता जाना नहीं- सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने SIR की प्रक्रिया को वैध ठहराते हुए कहा कि इस प्रक्रिया के तहत वोटर लिस्ट से नाम हटाने का मतलब यह नहीं है कि किसी की नागरिकता खत्म हो गई. यह फैसला इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि याचिकाकर्ताओं और विपक्षी दलों का कहना था कि चुनाव आयोग का SIR अभियान 'पिछले दरवाजे से नागरिकता जांच' जैसा है. 4. नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का काम नहीं- सुप्रीम कोर्ट चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि चुनाव आयोग नागरिकता के सवाल को सिर्फ इस सीमित दायरे में देख सकता है कि किसी व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट में शामिल किया जाए या हटाया जाए. अदालत ने साफ कहा कि चुनाव आयोग किसी का नाम वोटर लिस्ट से हटा सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है वह व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं रहा. नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का काम नहीं है. 5.  SIR 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम' और संबंधित नियमों के विपरीत नहीं सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि SIR कानूनी रूप से मान्य और उचित है इसलिए यह 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम' (RP Act) का उल्लंघन भी नहीं करता है. पीठ ने कहा कि अदालत का निष्कर्ष है कि एसआईआर संविधान और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की कसौटी पर खरा उतरता है। मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि इतने विस्तृत कार्य को देखते हुए चुनाव आयोग को नियम और प्रक्रिया तय करने का अधिकार है। चुनाव आयोग नागरिकता तय नहीं करता। हालांकि, वह संदिग्ध लोगों के मामलों को … Read more

मौसम का बड़ा यू-टर्न! कल से आंधी-तूफान और तेज बारिश की चेतावनी

नई दिल्ली देश के अलग-अलग राज्यों में अगले 24 से 48 घंटों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिल सकती है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपने पूर्वानुमान में इसकी जानकारी दी है। आईएमडी ने कहा है कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके अगले 2-3 दिनों में अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों में दस्तक देने की संभावना है। इसके लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। मौसम विभाग ने देश के कई राज्यों में 28 मई से आंधी-बारिश की चेतावनी जारी की है। इस दौरान 60-80 किमी/घंटे की रफ्तार से चक्रवाती तूफान भी आ सकता है। आईएमडी के मुताबिक, अगले 24 घंटे के दौरान उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में लू और रात में उमस वाली गर्मी का प्रकोप रहेगा। हालांकि, इसके बाद राहत मिल सकती है। 28 और 29 मई को पूरे उत्तर प्रदेश में धूल भरी आंधी चलने की आशंका है। इस दौरान 60 से 80 किमी/घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है। अलग-अलग हिस्सों में ओलावृष्टि की भी चेतावनी है। इसके बाद तापमान में 6 से 8 डिग्री सेल्सियस की भारी गिरावट दर्ज की जाएगी। बिहार में आंधी-तूफान का अलर्ट 27 से 30 मई के दौरान बिहार में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होगी। 27 और 29 मई को बिहार में कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है। सबसे गंभीर चेतावनी 29 मई के लिए है। इस दिन 80 किमी/घंटे की रफ्तार से विनाशकारी आंधी और तूफान आने की आशंका है। दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ में भीषण लू की स्थिति बनी रहेगी। 28-29 मई को इन राज्यों में मौसम पूरी तरह पलट जाएगा। दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा में ओलावृष्टि के साथ 60 से 80 किमी/घंटे की रफ्तार से तेज आंधी की संभावना है, जिससे तपती गर्मी से भारी राहत मिलेगी। पहाड़ों की बात करें तो जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में छिटपुट स्थानों पर लू चलेगी। गरज-चमक के साथ अलग-अलग जगहों पर बारिश होगी। 28 और 29 मई को इन तीनों पहाड़ी राज्यों में ओलावृष्टि की संभावना है। इस दौरान हवा की रफ्तार 50 से 70 किमी/घंटे रहने की संभावना है। आईएमडी ने इसके लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। कैसा रहेगा बंगाल का मौसम पश्चिम बंगाल में 27 से 29 मई के दौरान 50 से 70 किमी/घंटे की रफ्तार से आंधी-तूफान की संभावना है। 27 मई को भारी बारिश हो सकती है। वहीं, झारखंड में अगले 7 दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रहेगा। 27 से 29 मई के बीच यहां 50-70 किमी/घंटे की रफ्तार से तेज अंधड़ चलने की संभावना है। 27 मई को यहां लू का भी असर रहेगा। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ का मौसम मध्य प्रदेश में 27 मई को भीषण लू की स्थिति रहेगी। 28 से 30 मई के बीच 40-50 किमी/घंटे की तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश शुरू होगी, जिससे तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आएगी। छत्तीसगढ़ में 27 और 28 मई को लू चलने के बाद 27 से 30 मई के दौरान राज्य के कई हिस्सों में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बौछारें पड़ेंगी, जिससे गर्मी से राहत मिलेगी।