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25% टैरिफ वार्निंग बेअसर, इंडियन ऑयल रूस से कच्चा तेल खरीदने के फैसले पर अडिग

नई दिल्ली  सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOC) ने रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर बड़ा फैसला लिया है। कंपनी ने सोमवार को कहा कि चालू तिमाही में रूस से तेल आयात जारी रहेगा। हालांकि, यह निर्णय कंपनी की आर्थिक स्थिति पर निर्भर करेगा। कंपनी ने यह भी बताया कि अब रूसी तेल पर मिलने वाली छूट घटकर केवल 1.5 से 2 डॉलर प्रति बैरल रह गई है, जो पहले की तुलना में काफी कम है। अमेरिका की चेतावनी, ट्रंप की धमकी इंडियन ऑयल का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका द्वारा भारत पर टैरिफ लगाने का खतरा बना हुआ है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि यदि भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखी, तो उसे 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है। "भारत भारी मात्रा में रूसी तेल खरीद रहा है और उसे मुनाफे पर खुले बाजार में बेच भी रहा है। भारत को इस बात की परवाह नहीं है कि रूस-यूक्रेन युद्ध में कितने लोगों की मौत हो रही है।" उन्होंने यह भी कहा कि भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने पर विचार किया जा रहा है, जिससे कुल टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। हालांकि, ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि इस पर फैसला लेने के लिए उन्हें दो से तीन हफ्ते का समय चाहिए।   रूसी तेल का आयात बढ़ा इंडियन ऑयल ने जानकारी दी कि वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में उसके कुल कच्चे तेल आयात में रूस का हिस्सा 24 प्रतिशत रहा, जबकि 2025 में यह 22 प्रतिशत था। कंपनी ने कहा कि वर्तमान तिमाही में भी वह आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए रूसी तेल की खरीद जारी रखेगी। रिफाइनिंग क्षमता में भारी निवेश इंडियन ऑयल वित्त वर्ष 2026 में अपने कारोबार पर 34,000 करोड़ रुपये का निवेश करने जा रही है। इसमें से 14,000 से 15,000 करोड़ रुपये रिफाइनरी संचालन पर और 15,000 से 16,000 करोड़ रुपये पेट्रोकेमिकल्स, मार्केटिंग, पाइपलाइन और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन पर खर्च किए जाएंगे। कंपनी देशभर में अपनी रिफाइनिंग कैपेसिटी बढ़ाने पर भी काम कर रही है: पानीपत रिफाइनरी की क्षमता को 15 MMTPA से 25 MMTPA तक बढ़ाया जा रहा है, जो साल के अंत तक चालू हो सकती है। बरौनी (बिहार) रिफाइनरी की क्षमता को 6 MMTPA से 9 MMTPA किया जाएगा। वहीं, गुजरात की कोयली रिफाइनरी का विस्तार 13.7 MMTPA से 18 MMTPA तक किया जाएगा।  

बारिश का कहर जारी, बादल फटने से जनजीवन अस्त-व्यस्त, बहा पुल और दुकानें

हिमाचल प्रदेश  हिमाचल प्रदेश में मॉनसून ने जमकर तबाही मचाई हुई है। अब राज्य के कुल्लू जिले की लग घाटी में बादल फटने से भारी नुकसान हुआ है। शुरुआती जानकारी के अनुसार इस घटना में तीन दुकानें, एक पुल और बाग-बगीचे बह गए हैं। इस आपदा के बाद कुल्लू और बंजार में सभी स्कूल और कॉलेज बंद करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। कनौण गांव में हुआ भारी नुकसान सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में एक स्थानीय निवासी ने बताया कि कनौण गांव में बूबू नाले पर बना पुल पूरी तरह बह गया है और वहां मौजूद तीन दुकानों का नामोनिशान तक मिट गया है। बादल फटने से न सिर्फ दुकानें बल्कि खेत और फसलें भी तबाह हो गई हैं। 2 नेशनल हाईवे समेत 389 सड़कें बंद रिपोर्ट के मुताबिक हिमाचल के कई हिस्सों में लगातार हो रही बारिश से भूस्खलन की घटनाएं भी बढ़ गई हैं। राज्य में कुल 389 सड़कें बंद हो गई हैं जिनमें 2 नेशनल हाईवे भी शामिल हैं। इसके अलावा कई इलाकों में बिजली और पानी की सप्लाई भी प्रभावित हुई है। इस मॉनसून सीजन में हिमाचल में बादल फटने की कई घटनाएं हो चुकी हैं। कुछ दिन पहले किन्नौर में भी बादल फटा था जहां आईटीबीपी की 17वीं बटालियन ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर 413 से ज़्यादा तीर्थयात्रियों की जान बचाई थी।  

श्रद्धालुओं की उम्मीदों पर पानी, इस साल नहीं होगी किन्नर कैलाश यात्रा

हिमाचल  खराब मौसम के चलते इस साल की किन्नर कैलाश यात्रा रद्द कर दी गई है। यह फैसला लगातार हो रही बारिश, भूस्खलन और रास्तों की खराब स्थिति को देखते हुए लिया गया है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह कदम उठाया है। इस यात्रा में देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं। यात्रा काफी कठिन मानी जाती है क्योंकि इसमें ऊंचे पहाड़ों और खतरनाक रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है। लेकिन इस साल मौसम की अप्रत्याशित स्थिति ने यात्रा को असंभव बना दिया है। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि रास्तों पर कई जगह भूस्खलन हुआ है, जिससे आगे बढ़ना जोखिम भरा हो गया है। इसके अलावा, अचानक बाढ़ और चट्टानें गिरने का भी खतरा बना हुआ है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे यात्रा करने का प्रयास न करें और सुरक्षित स्थानों पर ही रहें। यह निर्णय सभी की भलाई के लिए लिया गया है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।

भारत-चीन रिश्तों में नया मोड़, वांग यी बोले- भारत को प्रतिद्वंद्वी नहीं, सहयोगी मानें

चीन  चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा है कि भारत-चीन संबंध में सहयोग की ओर लौटने की दिशा में सकारात्मक रुझान दिख रहे हैं। यी ने साथ ही इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों को एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी के रूप में नहीं बल्कि साझेदार के रूप में देखना चाहिए। आधिकारिक मीडिया ने मंगलवार को अपनी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी। खबर के अनुसार सोमवार को नयी दिल्ली पहुंचे वांग ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बैठक के दौरान यह टिप्पणी की। उनकी यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन की प्रस्तावित यात्रा से पहले हुई है। बैठक में वांग ने जयशंकर से कहा कि चीन-भारत संबंध में सहयोग की ओर लौटने की दिशा में सकारात्मक रुझान दिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष चीन और भारत के बीच राजनयिक संबंध स्थापित होने के 75 साल पूरे हुए हैं और अतीत से सबक सीखा जा सकता है। उनका यह बयान पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध के बाद चार साल से अधिक समय में संबंधों में आई दरार की ओर स्पष्ट संकेत था। सरकारी समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ' ने बताया कि उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के लिए सही रणनीतिक धारणा रखना, एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी या खतरे के बजाय साझेदार और अवसर के रूप में देखना तथा विकास एवं पुनरुद्धार में अपने बहुमूल्य संसाधनों का निवेश करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को प्रमुख पड़ोसी देशों के लिए आपसी सम्मान और विश्वास के साथ सह-अस्तित्व, साझा विकास और अनुकूल सहयोग हासिल करने के सही तरीके तलाशने चाहिए।   वांग ने कहा कि चीन मैत्री, ईमानदारी, परस्पर लाभ और समावेशिता के सिद्धांतों को कायम रखने और भारत सहित पड़ोसी देशों के साथ मिलकर एक शांतिपूर्ण, सुरक्षित, समृद्ध, खूबसूरत और मैत्रीपूर्ण क्षेत्र बनाने के लिए काम करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को भरोसा करना चाहिए, एक दिशा में आगे बढ़ना चाहिए, बाधाओं को दूर करना चाहिए, सहयोग का विस्तार करना चाहिए। खबर के अनुसार, वांग और जयशंकर के बीच बातचीत के बाद दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों को बनाए रखने पर सहमत हुए। अमेरिका की परोक्ष रूप से आलोचना करते हुए वांग ने कहा कि दुनिया बदल रही है और एकतरफा धमकाने की प्रथा बढ़ गई है, जिससे स्थिति तेजी से बदल रही है।   

यूके में शर्मनाक घटना, दो बुजुर्ग सिख बने नस्लीय हिंसा का शिकार

लंदन  ब्रिटेन में वॉल्वरहैम्प्टन रेलवे स्टेशन  के पास एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां तीन युवकों ने दो बुजुर्ग सिखों पर हमला कर दिया। इस दौरान उनकी पगड़ी भी जबरन उतारी गई। पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसके बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों को हिरासत में लिया, लेकिन बाद में उन्हें जमानत पर छोड़ दिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तीनों युवकों ने अचानक बुजुर्ग सिखों को घेर लिया और बीच सड़क पर उनकी पिटाई शुरू कर दी। संघर्ष के दौरान एक सिख की पगड़ी उतर गई जिससे समुदाय में गहरा आक्रोश है।   शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल  ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मांग की है कि भारत सरकार इस मुद्दे को तुरंत ब्रिटेन की सरकार के सामने उठाए। बादल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X  पर लिखा- “यूके में दो बुजुर्ग सिखों पर हुआ हमला निंदनीय है। एक बुजुर्ग की पगड़ी उतारना नफरत और भेदभाव की मानसिकता को दर्शाता है। मैं यूके सरकार और पुलिस से सख्त कार्रवाई की अपील करता हूं।”  जांच कर रही ब्रिटिश पुलिस ने बयान जारी करते हुए कहा है- “इस तरह का व्यवहार अस्वीकार्य है। हमने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया था और उनसे पूछताछ जारी है। मामले की गहन जांच चल रही है।”इस घटना के बाद यूके और भारत में सिख समुदाय के बीच गुस्सा और चिंता बढ़ गई है। लगातार मांग उठ रही है कि  ब्रिटेन सरकार सिखों की सुरक्षा के ठोस कदम उठाए और नस्लीय हिंसा पर सख्त कानून लागू करे।

तमिलनाडु और केरल की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्णय, राष्ट्रपति रेफरेंस पर मंथन

नई दिल्ली  राष्ट्रपति की ओर से सुप्रीम कोर्ट से राय मांगे जाने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर शीर्ष अदालत ने मंगलवार को सवाल उठाया। अदालत ने केरल और तमिलनाडु सरकारों की अर्जी पर कहा कि यदि राष्ट्रपति सुप्रीम कोर्ट से राय लेना चाहें तो इसमें गलत क्या है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान के आर्टिकल 143 का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट में रेफरेंस दायर किया है। इसमें उन्होंने पूछा है कि क्या राज्यपालों और राष्ट्रपति को शीर्ष अदालत की ओर से आदेश दिया जा सकता है। इसी रेफरेंस का तमिलनाडु और केरल ने विरोध किया है। दोनों राज्यों की ओर से कहा गया कि राष्ट्रपति की ओर से दाखिल रेफरेंस सुनवाई के काबिल नहीं है। इस पर चीफ जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस सूर्यकांत समेत 5 जजों की बेंच ने कहा कि आखिर इसमें गलत क्या है। अदालत ने राज्य सरकारों से पूछा, 'यदि महामहिम राष्ट्रपति अदालत की राय जानना चाहती हैं तो फिर इसमें गलत क्या है। क्या आप अपनी बात को गंभीरता से कह भी रहे हैं।' अदालत ने यह भी कहा कि हम यहां सलाह या राय देने की स्थिति में हैं। सुप्रीम कोर्ट के ही किसी फैसले के खिलाफ हम अपीलीय प्राधिकारण के तौर पर नहीं बैठे हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोर्ट ने कोई राय दी है तो हमें उसे करेक्ट कर सकते हैं, लेकिन किसी फैसले को नहीं पलटा जा सकता। वहीं अदालत की इस दलील को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने चैलेंज किया। उन्होंने कहा कि अदालत ऐसे किसी फैसले को पलट भी सकती है, जिसमें कोई खामी लग रही हो। इस पर चीफ जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि हम राय को पलट सकते हैं, लेकिन फैसला नहीं बदल सकते। दरअसल राष्ट्रपति ने अप्रैल में दिए अदालत के उस फैसले पर सवाल उठाए हैं, जिसमें राज्यपालों और राष्ट्रपति से कहा गया था कि वे तय समय के भीतर राज्य सरकार की ओर से पारित विधेयकों पर फैसला लें। अब इसी पर समस्त राज्यपालों और राष्ट्रपति को आपत्ति है। इन लोगों का कहना है कि आखिर राज्यपालों के काम में सुप्रीम कोर्ट दखल कैसे दे सकता है। कैसे वह राष्ट्रपति को निर्देश दे सकता है कि वे तय समय के भीतर ही विधेयक पर फैसले लें।  

विपक्ष ने उतारा उम्मीदवार, उपराष्ट्रपति चुनाव में सुदर्शन-राधाकृष्णन आमने-सामने

नई दिल्‍ली उपराष्‍ट्रपति पद के लिए विपक्ष ने अपने उम्‍मीदवार का ऐलान कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी सुदर्शन रेड्डी विपक्ष के उपराष्‍ट्रपति पद के उम्‍मीदवार होंगे. कांग्रेस अध्‍यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ये जानकारी दी. बी सुदर्शन रेड्डी  भारत के सबसे सम्मानित कानूनविदों में शामिल हैं. वह सुप्रीम कोर्ट के जज भी रहे हैं , इसके अलावा गुवाहाटी और आंध्र उच्च न्यायालय के भी जज रहे हैं.  कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने बताया कि गठबंधन ने सर्वसम्मति से बी सुदर्शन रेड्डी का नाम तय किया है. उनका मुकाबला एनडीए गठबंधन के सीपी राधाकृष्णन से होगा.  बी सुदर्शन रेड्डी आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता के प्रताप रेड्डी के अधीन सिविल और संवैधानिक मामलों पर प्रैक्टिस शुरू की थी. 8 अगस्त 1988 को रेड्डी को हाई कोर्ट में सरकारी वकील नियुक्त किया गया और वह केंद्र सरकार के अतिरिक्त स्थायी वकील बने. इंडिया गठबंधन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपराष्ट्रपति उम्मीदवार के तौर पर सुदर्शन रेड्डी के नाम का ऐलान किया. कांग्रेस प्रवक्ता ने बताया कि सभी पार्टियों ने सहमति से उनके नाम को फाइनल किया है. टीएमसी सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने बताया कि आम आदमी पार्टी भी सुदर्शन रेड्डी के नाम से सहमत है. डीएमके, टीएमसी… सभी की मांग पूरी हुई विपक्ष का कहना है, "वो (एनडीए) संघ से जुड़े व्यक्ति को लाए हैं, हम सुप्रीम कोर्ट से आए व्यक्ति को सामने ला रहे हैं." यह नाम विपक्ष की तमाम शर्तों पर खरा उतरता है – दक्षिण भारत से उम्मीदवार जिसे डीएमके चाहती थी, और राजनीति से बाहर का चेहरा जिसकी मांग टीएमसी ने उठाई थी. टीएमसी का कहना था कि ऐसे शख्स को उम्मीदवार बनाया जाए जो नॉन-पॉलिटिकल हों. वहीं डीएमके चीफ और तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने तमिलनाडु से किसी चेहरे को उम्मीदवार बनाने की मांग की थी. INDIA गठबंधन के उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी कौन हैं? बी सुदर्शन रेड्डी का जन्म 8 जुलाई 1946 को हुआ था. वे भारत के सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और गोवा के पहले लोकायुक्त रह चुके हैं. सुदर्शन रेड्डी का जन्म आंध्र प्रदेश के रंगा रेड्डी जिले के अकुला मायलारम गांव में एक कृषि परिवार में हुआ. शुरुआती पढ़ाई के बाद उन्होंने हैदराबाद के उस्मानिया यूनिवर्सिटी से 1971 में लॉ पास किया. अपने करियर की शुरुआत रेड्डी ने सिविल और संवैधानिक मामलों की प्रैक्टिस से की और आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट के. प्रताप रेड्डी के साथ काम किया. इसके बाद 8 अगस्त 1988 को उन्हें आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में गवर्नमेंट प्लीडर नियुक्त किया गया और वे केंद्र सरकार के एडिशनल स्टैंडिंग काउंसल बने. गुवाहाटी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस भी रहे सुदर्शन रेड्डी 1993 में वे आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष चुने गए और उस्मानिया यूनिवर्सिटी के लीगल एडवाइजर भी रहे. न्यायिक करियर में आगे बढ़ते हुए रेड्डी 2 मई 1993 को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के एडिशनल जज नियुक्त किए गए. इसके बाद 5 दिसंबर 2005 को वे गुवाहाटी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने. सुदर्शन रेड्डी को 12 जनवरी 2007 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट का एडिशनल जज नियुक्त किया गया और वे 8 जुलाई 2011 को रिटायर हुए. रिटायरमेंट के बाद मार्च 2013 में उन्होंने गोवा के पहले लोकायुक्त के रूप में कार्यभार संभाला, हालांकि अक्टूबर 2013 में उन्होंने निजी कारणों से इस्तीफ़ा दे दिया था. जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी का करियर      जस्टिस रेड्डी को 12 जनवरी 2007 को भारत के सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया था.      वह 8 जुलाई 2011 को इस पद से सेवानिवृत्त हुए.      बी सुदर्शन रेड्डी को 5 दिसंबर 2005 को गुवाहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था.      रेड्डी का जन्म 1946 में भारतीय राज्य आंध्र प्रदेश के रंगा रेड्डी जिले के तत्कालीन इब्राहिमपटनम तालुका के अकुला मायलाराम गांव में एक कृषक परिवार में हुआ था.     बी सुदर्शन रेड्डी ने हैदराबाद में शिक्षा प्राप्त की और 1971 में उस्मानिया विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री प्राप्त की.      बी सुदर्शन रेड्डी ने मार्च 2013 में पहले गोवा लोकायुक्त के रूप में पदभार ग्रहण किया और अक्टूबर 2013 में निजी कारणों से पद से इस्तीफा दे दिया. 8 जुलाई 1946 को जन्‍मे बी सुदर्शन रेड्डी गोवा के पहले लोकायुक्त रह चुके हैं.  सुदर्शन रेड्डी का जन्म आंध्र प्रदेश के रंगा रेड्डी जिले के अकुला मायलारम गांव में हुआ. बी सुदर्शन रेड्डी ने शुरुआती पढ़ाई के बाद हैदराबाद के उस्मानिया यूनिवर्सिटी से 1971 में लॉ में ग्रेजुएशन की थी. 1993 में बी सुदर्शन रेड्डी आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष चुने गए और उस्मानिया यूनिवर्सिटी के लीगल एडवाइजर भी रहे हैं. बी सुदर्शन रेड्डी को 12 जनवरी 2007 को सुप्रीम कोर्ट का एडिशनल जज नियुक्त किया गया था और वे 8 जुलाई 2011 को रिटायर हुए. रिटायरमेंट के बाद मार्च 2013 में उन्होंने गोवा के पहले लोकायुक्त के रूप में कार्यभार संभाला. हालांकि अक्टूबर 2013 में उन्होंने निजी कारणों से इस्तीफ़ा दे दिया था.

शादी से पहले अफेयर से जन्मे नॉर्वेजियन प्रिंस पर लगे 32 गंभीर आरोप

ओस्लो नॉर्वे की राजकुमारी के बेटे पर चार बलात्कार समेत 32 अपराधों का आरोप लगा है. एक सरकारी वकील ने बताया कि राजकुमारी के बेटे पर हिंसा और हमले से जुड़े अपराध के आरोप भी लगे हैं. नॉर्वे की क्राउन प्रिंसेस मेटे-मैरिट के बेटे मारियस बोर्ग होइबी पिछले साल 4 अगस्त को अपनी गर्लफ्रेंड पर हमला करने के शक में गिरफ्तार हुए थे जिसके बाद से ही वो जांच के दायरे में हैं. मारियस का जन्म प्रिंसेस मैरिट की क्राउन प्रिंस हाकोन से शादी से पहले के रिश्ते से हुआ था. राजकुमारी के बेटे मारियस पर बलात्कार के चार मामलों के अलावा कई आरोप हैं जिसमें एक एक्स गर्लफ्रेंड के खिलाफ घरेलू हिंसा और एक अन्य एक्स गर्लफ्रेंड के साथ हिंसा, उसके जीवन में अशांति लाने, बर्बरता करने कई कानूनों के उल्लंघन के मामले शामिल हैं. सरकारी वकील स्टर्ला हेनरिक्सबो ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन पर कई महिलाओं के गुप्तांगों की उनकी जानकारी या सहमति के बिना वीडियो बनाने का भी आरोप है. उन्होंने कहा, 'उनके खिलाफ जो आरोप लगे हैं, उनमें उन्हें अधिकतम 10 साल की कैद हो सकती है. ये बहुत गंभीर अपराध है जिसके स्थायी परिणाम हो सकते हैं और जो जिंदगियां बर्बाद कर सकते हैं.' 'राजकुमारी के बेटे के साथ आम लोगों जैसा बर्ताव होगा' हेनरिक्सबो ने जोर देकर कहा, 'यह तथ्य कि मारियस बोर्ग होइबी शाही परिवार के सदस्य हैं, इसका यह मतलब नहीं है कि उनके साथ अधिक हल्के या अधिक कठोर बर्ताव किया जाना चाहिए. जैसा किसी आम इंसान के साथ बर्ताव होता, उनके साथ भी वैसा ही किया जाएगा.' जिन चार बलात्कारों के लिए मारियस पर आरोप लगाया गया है, वे कथित तौर पर 2018, 2023 और 2024 में हुए थे, जिनमें से आखिरी बलात्कार पुलिस जांच शुरू होने के बाद हुआ था. मारियस ने अगस्त 2024 की घटना में हमला और तोड़फोड़ की बात पहले ही स्वीकार कर ली है, जिसके लिए उन्हें गिरफ्तार किया गया था. अपनी गिरफ्तारी के 10 दिन बाद एक सार्वजनिक बयान में उन्होंने कहा कि उन्होंने 'एक विवाद के बाद शराब और कोकीन के नशे में यह काम किया था. उन्होंने कहा कि वो मानसिक परेशानियों से पीड़ित थे और लंबे समय से ड्रग्स की लत से जूझ रहे थे. मारियस चार साल की उम्र से ही सुर्खियों में आ गए थे जब उनकी मां ने नॉर्वे के युवराज से शादी किया. युवराज के पहले से ही दो बच्चे थे. मारियस का पालन-पोषण शाही दम्पति ने उनके सौतेले भाई-बहनों राजकुमारी इंग्रिड एलेक्जेंड्रा और राजकुमार स्वेरे मैग्नस के साथ मिलकर किया, जिनकी आयु क्रमशः 21 और 19 वर्ष थी. सौतेले भाई-बहनों के उलट, मारियस किसी सार्वजनिक पद पर नहीं हैं.

रेलवे का नया नियम: ट्रेन में अनलिमिटेड सामान ले जाने पर रोक, क्लासवार तय हुई सीमा

 नई दिल्ली रेल यात्रा में अकसर आपने लोगों को भारी सामान लाते ले जाते देखा होगा, लेकिन जल्दी ही यह पुरानी बात हो जाएगी। रेलवे अब हवाई यात्रा की तरह सामान को लेकर सख्त नीति अपनाने जा रहा है। इसके तहत एक निश्चित वजन या आकार से ज्यादा सामान लेकर जाने पर पेनल्टी भी देनी पड़ सकती है। इसके लिए रेलवे स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक मशीनें लगाई जाएंगी। इनसे होकर जब सामान गुजरेगा तो पता चल जाएगा कि वजन और माप तय सीमा के भीतर ही है या नहीं। यदि माप और वजन तय लिमिट से ज्यादा हुआ तो फिर जुर्माना या अतिरिक्त चार्ज चुकाना होगा। यही नहीं रेलवे स्टेशनों पर भी अब लोगों का अनुभव बदलने की तैयारी पूरी हो गई है। अब रेलवे स्टेशनों पर बड़े ब्रांड्स की दुकानें दिख सकती हैं। रेलवे स्टेशनों पर कपड़े, ट्रैवल, इलेक्ट्रॉनिक्स सामान आदि आप आसानी से खरीद पाएंगे। इसके लिए शानदार दुकानें होंगी, जिनका रेलवे की ओर से टेंडर जारी किया जाएगा। इससे रेलवे स्टेशनों पर पहुंचकर लोग एयरपोर्ट जैसे माहौल का अनुभव करेंगे। इसके अलावा रेलवे के रेवेन्यू में भी इजाफा होगा। दुकानें टेंडर से आवंटित की जाएंगी, जिनके शुल्क से रेलवे को अच्छी आय होने की उम्मीद है। रेलवे सूत्रों का कहना है कि सामान की वजन सीमा श्रेणी के अनुसार तय होगी। जैसे सामान्य श्रेणी का टिकट लेकर यदि कोई सफर कर रहा है तो उसे अपने साथ 35 किलो सामान से ज्यादा ले जाने की परमिशन नहीं होगी। यदि एक से ज्यादा लोग सफर कर रहे हैं तो तय लिमिट प्रति यात्री के अनुसार होगी। जैसे एक व्यक्ति पर 35 किलो की परमिशन है तो दो लोग साथ होंगे तो 70 किलो वजन तक का सामान ले जा सकते हैं। अब श्रेणी वार लिमिट की बात करें तो स्लीपर और थर्ड एसी में यह 40 किलो प्रति व्यक्ति होगी। इसके अलावा सेकेंड एसी में एक व्यक्ति को 50 किलो तक सामान ले जाने की परमिशन रहेगी। वहीं फर्स्ट एसी में यह लिमिट 70 किलोग्राम रहेगी। रेलवे सूत्रों का कहना है कि यह लिमिट इसलिए तय की गई है ताकि सभी यात्रियों का सफर सुखद और सुगम रहे। अब श्रेणीवार लिमिट की बात करें तो ऐसा इसलिए तय किया गया है ताकि सीटों की व्यवस्था के अनुसार ही सामान रखा जा सके। जैसे जनरल में जगह सबसे कम बचती है, ऐसे में उसके लिए लिमिट कम है। इसी प्रकार स्लीपर और थर्ड एसी का सीटिंग पैटर्न एक जैसा है। इसलिए वहां सामान की लिमिट एक समान रखी गई है। वहीं सेकेंड में एसी में एक लाइन में दो सीटें ही रहती हैं। इसलिए सामान की परमिशन थोड़ी ज्यादा है। फिलहाल इस लिमिट के तहत प्रयागराज जोन में काम शुरू होने वाला है। इसके बाद पूरे देश में ही रेलवे का यह फॉर्मूला लागू होगा।

लगघाटी में बादल फटने से दुकानों और पुल को नुकसान, कुल्लू-बंजार के स्कूल बंद

कुल्लू.  हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले की लगघाटी के कनौण की ऊंची पहाड़ी पर रात ढाई बजे बादल फटने के बाद फ्लेश फ्लड आया है. बादल फटने से आई बाढ़ की चपेट में आकर कनौण में तीन दुकानें बह गईं और बाढ़ से लोगों की ज़मीनों, बाग–बगीचों और फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है. उधर, सरवरी खड्ड में जलस्तर में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. बाढ़ के कारण एक पुल क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है. एक युवक ने बताया कि कनौण गांव में बूबू नाले पर बना पुल बह गया और तीन दुकानों का नामोनिशान मिट गया. युवक ने बताया कि वह पूरी रात सोए नहीं हैं. युवक ने बताया कि गांव का संपर्क कट गया है और बादल फटने के बाद काफी नुकसान हुआ है और सड़क पर बड़े बड़े पत्थर आ गए थे. इसी तरह आपदा की मार झेल रहे मंडी जिले की पद्दर उपमण्डल की चौहारघाटी में बीती रात और आज सुबह हुई भारी बारिश ने तबाही मचा दी। घाटी की दो पंचायतों शिल्हबुधाणी और तरस्वाण में सबसे अधिक नुकसान हुआ है। यहां 6 फुट ब्रिज, एक वाहन, एक दुकान और सैकड़ों बीघा निजी भूमि तेज बहाव में बह गई। गनीमत रही कि किसी प्रकार का जानी नुकसान नहीं हुआ है। ग्राम पंचायतों के प्रधानों ने बताया कि भारी बारिश से नाले उफान पर आ गए थे और लोगों ने सुरक्षित स्थानों में शरण लेकर अपनी जान बचाई। सैकड़ों बीघा भूमि बह जाने से किसानों और बागवानों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। एसडीएम पधर सुरजीत सिंह और लोक निर्माण विभाग सहित राजस्व विभाग की टीमें मौके पर भेज दी गई हैं। हालात को देखते हुए पधर उपमंडल के शिक्षण संस्थानों में आज अवकाश घोषित कर दिया गया है। कुल्लू जिले की लगघाटी में मंगलवार सुबह बादल फटने से दो दुकानों और एक बाइक को नुकसान पहुंचा है। सरवरी क्षेत्र में एक पैदल पुल भी क्षतिग्रस्त हो गया। प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए हैं। हालात को देखते हुए कुल्लू और बंजार उपमंडल के सभी शिक्षण संस्थान आज बंद रखे गए हैं। कुल्लू जिले में भारी बारिश के कारण ब्यास नदी पर बने भूतनाथ पुल के पास सड़क बह गई। स्थानीय निवासी, ईश्वर दास शर्मा, ने कहा, "नदी में उफान आया हुआ है, और इसने नदी के किनारे के हिस्सों को नुकसान पहुंचाया है। मैं सरकार से इस ओर ध्यान देने का आग्रह करता हूं।" भारी बारिश के बीच कांगड़ा जिले में पौंग डैम से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। मंगलवार सुबह 8 बजे तक डैम का जलस्तर 1383.02 फुट दर्ज किया गया। बीबीएमबी प्रशासन के अनुसार सभी छह टर्बाइनें चालू हैं, जिनसे 17,456 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जबकि स्पिलवे गेट्स से 42,379 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया। इस तरह कुल 59,835 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। बुधवार से यह मात्रा बढ़ाकर 75 हजार क्यूसेक कर दी जाएगी। निचले क्षेत्रों के प्रशासन को अलर्ट कर दिया गया है और लोगों से अपील की गई है कि वे नदी किनारों की ओर न जाएं। मौसम विभाग ने राज्य में 25 अगस्त तक भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। लगातार हो रही वर्षा से भूस्खलन, बादल फटने और नदियों-नालों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। प्रशासन ने जनता से सतर्क रहने और किसी भी आपदा की स्थिति में तुरंत स्थानीय प्रशासन से संपर्क करने की अपील की है। सरवरी में भी नुकसान की खबर अहम बात है कि कुल्लू के पास सरवरी में भी फ्लेश फ्लड से खासा नुकसान हुआ है और सड़क का एक हिस्सा टूट गया है. वहीं,  भूतनाथ मंदिर के पास बस स्टैंड को जोड़ने वाली सड़क पर गहरी दरारें पड़ गई हैं और सुरक्षा के लिए बनाया गया डंगा बह गया है. इसके अलावा, हनुमानी बाग को जोड़ने वाला पैदल पुल भी टूटने की कगार पर है, जिससे स्थानीय लोगों की आवाजाही पर संकट खड़ा हो गया है.प्रशासन ने लोगों से नदी किनारे जाने से परहेज करने और सतर्क रहने की अपील की है. कुल्लू जिला प्रशासन ने बीती रात से हो रही बारिश के चलते बंजार और कुल्लू सदर में स्कूल और कॉलेजों को बंद करने के आदेश दिए हैं. डीसी कुल्लू, एस. रवीश (IAS) ने आदेश जारी करते हुए बताया कि क्लाउडबर्स्ट, फ्लैश फ्लड और भूस्खलन की वजह से जगह-जगह सड़कों के बाधित होने, पुल बह जाने और नुकसान की सूचनाएं मिल रही हैं. भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 19 अगस्त 2025 के लिए कुल्लू जिला में येलो अलर्ट जारी किया है. सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने आदेश दिया है कि कुल्लू और बंजार उपमंडल के सभी शैक्षणिक संस्थान, जिनमें स्कूल, कॉलेज, आईटीआई, पॉलिटेक्निक, इंजीनियरिंग व फार्मेसी कॉलेज (सरकारी व निजी), आंगनबाड़ी केंद्र और DIET शामिल हैं, 19 अगस्त 2025 को बंद रहेंगे. प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को छात्रों और स्टाफ की सुरक्षा व कल्याण सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं. अब तक प्रदेश में 268 लोगों की मौत मॉनसून सीजन के दौरान हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश और आपदाओं ने अब तक भारी तबाही मचाई है. राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक, 20 जून से अब तक 268 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 37 लोग अभी भी लापता हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि 336 लोग घायल हुए, 2540 घर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए, 2274 पशुशालाएं और 362 दुकानें जमींदोज हो गईं. इसके अलावा, 1630 मवेशियों और 25,755 पोल्ट्री बर्ड्स की मौत हो चुकी है. बारिश और भूस्खलन के कारण प्रदेश में 2 राष्ट्रीय राजमार्ग और 387 सड़कें बंद हैं. वहीं, 760 ट्रांसफार्मर ठप होने से विद्युत आपूर्ति बाधित है और 186 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं. राज्य को अब तक इस आपदा से 2194 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो चुका है.