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एस जयशंकर बोले: अमेरिका के साथ मजबूत रिश्तों को प्राथमिकता, मोदी-ट्रंप के संबंध हैं शानदार

नई दिल्ली  विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को भारत-अमेरिका संबंधों की सराहना की और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के साथ साझेदारी को अत्यधिक महत्व देते हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब आज ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी के साथ अपनी दोस्ती की तारीफ की थी, लेकिन कुछ मुद्दों पर असहमति भी जताई थी।जयशंकर ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका के साथ हमारी साझेदारी को अत्यधिक महत्व देते हैं। जहां तक राष्ट्रपति ट्रंप की बात है, पीएम मोदी के उनके साथ हमेशा बहुत अच्छे व्यक्तिगत संबंध रहे हैं। फिलहाल मैं इतना ही कह सकता हूं कि हम अमेरिका के साथ निरंतर संवाद बनाए हुए हैं।” वाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा था, “मैं हमेशा प्रधानमंत्री मोदी का दोस्त रहूंगा। वे एक महान प्रधानमंत्री हैं। लेकिन मुझे इस वक्त उनकी कुछ नीतियां पसंद नहीं हैं। हालांकि भारत और अमेरिका के बीच बहुत विशेष रिश्ते हैं। चिंता की कोई बात नहीं है, कभी-कभी ऐसे पल आ जाते हैं।” प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए एक्स पर लिखा, “मैं राष्ट्रपति ट्रंप की भावनाओं और हमारे रिश्तों के सकारात्मक आकलन की गहराई से सराहना करता हूं और उसे पूरी तरह से प्रत्युत्तर देता हूं। भारत और अमेरिका के बीच एक बहुत ही सकारात्मक और भविष्य उन्मुख व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है।” टैरिफ पर तनातनी ये बयान ऐसे समय आए हैं जब दोनों देशों के बीच व्यापार को लेकर तनाव गहराया हुआ है। अमेरिका ने भारत पर 50% टैरिफ लगाया है, जिसमें 25% पारस्परिक टैरिफ और 25% अतिरिक्त शुल्क रूस से तेल खरीदने पर शामिल है। भारत ने इसे अनुचित और अव्यवहारिक बताते हुए कहा है, “किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था की तरह भारत अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।”  

32 साल का पहला झटका: अमेरिका की रूस नीति फेल, विदेश से अंडे खरीदने पर विवश

वाशिंगटन  रूस की अर्थव्यवस्था को पंगु बनाने की कोशिश में जुटा अमेरिका अब खुद ही उसके साथ व्यापार करने के लिए मजबूर है। दरअसल अमेरिका ने इसी साल जुलाई में रूस से पहली बार मुर्गी के अंडों की खेप आयात की है। यह जानकारी रूस की सरकारी समाचार एजेंसी RIA नोवोस्ती ने अमेरिकी सांख्यिकीय सेवा के आंकड़ों का हवाला देते हुए दी। बताया जा रहा है कि यह आयात 32 वर्षों में पहली बार हुआ है। आखिरी बार अमेरिका ने 1992 में रूस से अंडे खरीदे थे। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने जुलाई महीने में रूस से ताजा मुर्गी के अंडों पर 4.55 लाख डॉलर (करीब 3.8 करोड़ रुपये) खर्च किए। यह कदम उस समय उठाया गया जब देश में बर्ड फ्लू महामारी के चलते पोल्ट्री उद्योग को भारी नुकसान हुआ और अंडों की आपूर्ति संकट पैदा हो गया। बर्ड फ्लू से संकट और महंगाई साल 2025 की शुरुआत में फैले बर्ड फ्लू प्रकोप से लाखों मुर्गियां प्रभावित हुईं। जनवरी में सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हालात इतने गंभीर थे कि कई स्टोर्स को अंडों पर खरीद की सीमा लगानी पड़ी। फरवरी तक एक दर्जन अंडों की कीमत 7 डॉलर तक पहुंच गई। हालांकि पिछले महीनों में दामों में कुछ कमी आई है, लेकिन जुलाई 2025 में अंडे पिछले साल की तुलना में अब भी 16.4% महंगे रहे। वाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने इस संकट के लिए पूर्व बाइडेन प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने पद छोड़ने से पहले करीब 80 लाख मुर्गियों की अकारण कुरबानी दी, जिससे स्थिति और बिगड़ी। पाबंदियों के बीच व्यापार फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने पर हमले के बाद अमेरिका और पश्चिमी देशों ने मॉस्को पर कड़े प्रतिबंध लगाए। अमेरिका ने रूस की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने, उसकी सैन्य क्षमताओं को सीमित करने और उसे वित्तीय व कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने के लिए ये व्यापक प्रतिबंध लगाए हैं। इनमें रूसी सेंट्रल बैंक की अरबों डॉलर की संपत्ति को फ्रीज करना, प्रमुख रूसी बैंकों को स्विफ्ट सिस्टम से बाहर करना, रूस के ऊर्जा क्षेत्र में व्यापार और निवेश पर भारी प्रतिबंध लगाना, और प्रमुख रूसी अधिकारियों पर प्रतिबंध शामिल हैं। इन पाबंदियों के बावजूद, 2024 में अमेरिका ने रूस से करीब 3 अरब डॉलर के सामान आयात किए। इनमें उर्वरक (2025 की पहली छमाही में 927 मिलियन डॉलर), यूरेनियम व प्लूटोनियम (755 मिलियन डॉलर) और पैलेडियम जैसे कीमती धातु शामिल हैं। पिछले तीन वर्षों में अमेरिका-रूस व्यापार लगभग 90% तक गिर चुका है। लेकिन अगस्त 2025 में अलास्का में हुए ट्रंप-पुतिन शिखर सम्मेलन के बाद दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग की संभावना के संकेत मिले।  

अफगानिस्तान :शरिया कानून की पाबंदी बनी संकट, मलबे में फंसी महिलाओं को नहीं बचा पा रहे राहतकर्मी

 काबुल अफगानिस्तान में भूकंप के बाद हालात बदहाल हैं। हजारों लोगों की जान जा चुकी है। इसमें सबसे ज्यादा मुसीबत महिलाओं के लिए हो रही है। असल में अफगानिस्तान में कानून है कि गैर पुरुष महिलाओं को छू नहीं सकते। इसके चलते बचाव कार्य के दौरान महिलाओं को मलबे में ही छोड़ दिया जा रहा है। तालिबान शासन में जेंडर रूल महिलाओं की जान के लिए मुसीबत बन गया है। बता दें कि अफगानिस्तान भूकंप के चलते करीब 2200 लोग मारे जा चुके हैं। हर तरफ मलबा फैला हुआ है और लोग जिंदगी के लिए जूझ रहे हैं। नहीं हैं महिला बचावकर्मी अफगानिस्तान में महिला बचावकर्मियों की कमी है। इसके चलते महिला पीड़ितों के सामने खासी मुसीबत हो गई है। जो महिलाएं मलबे में फंसी हुई हैं, उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। वहीं, जिन महिलाओं की मौत हो गई है, उन्हें भी कपड़ों से पकड़कर खींचा जा रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक भूकंप पीड़ितों में से एक बीबी आयशा हैं। उनका गांव कुनार प्रांत में हैं। आयशा ने कहा कि बचावकर्मी हमें जुटाकर किसी कोने में छोड़ देते हैं। इसके बाद हमें भुला दिया जाता है। महिलाओं की मदद करना तो दूर, कोई उन्हें पूछ तक नहीं रहा। जैसे महिलाएं अदृश्य हैं तहजीबुल्ला महजेब वॉलंटियर टीम के सदस्य हैं। बचाव कार्य को लेकर उन्होंने कहा कि जैसे महिलाएं अदृश्य हैं। बचाव कार्य करने वाली टीम में लोग महिलाओं को बचा ही नहीं रहे हैं। सबसे पहले पुरुषों और बच्चों को बचाया जा रहा है। वहीं, महिलाएं एक तरफ बैठी रहती हैं और अपने लिए मदद का इंतजार करती हैं। तहजीबुल्ला ने कहा कि पुरुष रिश्तेदारों के नहीं होने के चलते अजनबी बचावकर्मी उन्हें कपड़ों से पकड़कर खींच रहे हैं, ताकि स्किन टच न हो। महिलाओं की हालत है खराब गौरतलब है कि अफगानिस्तान में तालिबान शासन के दौरान महिलाएं मूल अधिकारों तक से वंचित हैं। तालिबान ने दूसरी बार जब अफगानिस्तान में शासन शुरू किया तो महिलाओं को ज्यादा अधिकार देने की बात कही थी। हालांकि अभी तक वह अपनी इस बात पर खरा नहीं उतरा है। यहां पर छठवीं क्लास के बाद लड़कियां स्कूल नहीं जा सकती हैं। वहीं, पुरुष साथी के बिना बहुत दूर तक की यात्रा करने की इजाजत भी महिलाओं को नहीं है। बहुत सारी नौकरियों में भी उन्हें मौका नहीं मिल रहा है।

पीएम मोदी का बड़ा फैसला, अब नहीं जाएंगे अमेरिका की यूनाइटेड नेशंस मीटिंग में

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस साल के अंत में होने जा रही संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे. उनकी जगह विदेश मंत्री एस. जयशंकर अमेरिका जाएंगे. बैठक के वक्ताओं की संशोधित सूची जारी होने के बाद यह जानकारी सामने आई है. इस फैसले से भारत ने राष्ट्रपति ट्रंप को एक और बड़ा मैसेज देने की कोशिश की है. पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की सालाना बैठक से किनारा कर लिया है. संयुक्त राष्ट्र महासभा का 80वां सत्र नौ सितंबर से शुरू होगा. इसके बाद उच्चस्तरीय बैठक 23 से 29 सितंबर तक चलेगी. इस बैठक में पहला वक्ता ब्राजील होगा जबकि इसके बाद अमेरिका महासभा को संबोधित करेगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 23 सितंबर को यूएनजीए पोडियम से वैश्विक नेताओं को संबोधित करेंगे. राष्ट्रपति के तौर पर उनके दूसरे कार्यकाल में वह पहली बार संयुक्त राष्ट्र सत्र को संबोधित करेंगे.  भारत की ओर से विदेश मंत्री जयशंकर 27 सितंबर को सत्र को संबोधित करेंगे. लेकिन इससे पहले जुलाई में जारी की गई वक्ताओं की सूची में पीएम मोदी का नाम शामिल था. उस लिस्ट के मुताबिक पीएम मोदी 26 सितंबर को यूएनजीए को संबोधित करने वाले थे. हालांकि, वक्ताओं की इस सूची में आगे भी संशोधन हो सकता है.  बता दें कि चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश और इजरायल के राष्ट्राध्यक्ष 26 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे. यह सत्र 22 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र की 80वीं वर्षगांठ के मौके पर एक बैठक के साथ शुरू होगा. संयुक्त राष्ट्र की ओर से बताया गया है कि यह बैठक बीजिंग में 1995 के ऐतिहासिक सम्मेलन के बाद से हुई प्रगति पर भी विचार करेगी. इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस 24 सितंबर को जलवायु शिखर सम्मेलन आयोजित करेंगे, जो वैश्विक नेताओं के लिए अपनी नई राष्ट्रीय जलवायु कार्य योजनाओं को पेश करने का मंच होगा. बता दें कि यह सत्र ऐसे समय में हो रहा है, जब दुनिया के कई मुल्क ट्रंप के टैरिफ वॉर, रूस-यूक्रेन युद्ध और मिडिल ईस्ट में तनाव जैसे हालात से जूझ रही है.

खालिस्तानी संगठनों को फंडिंग पर खुलासा, कनाडा की रिपोर्ट से हुआ बड़ा पर्दाफाश

ओटावा खालिस्तानी आतंकियों की फंडिंग को लेकर कनाडा सरकार की अपनी ही नई रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। इसमें कहा गया है कि खालिस्तानी हिंसक उग्रवादी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल और इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन समेत कई आतंकी संगठनों को कनाडा से आर्थिक सहायता मिल रही है। यह जानकारी हाल ही में जारी की गई रिपोर्ट “2025 असेसमेंट ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एंड टेररिस्ट फाइनेंसिंग रिस्क्स इन कनाडा” में सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, कनाडा में आपराधिक संहिता के अंतर्गत सूचीबद्ध कुछ आतंकवादी संगठन जैसे हमास, हिजबुल्लाह और खालिस्तानी चरमपंथी संगठन, राजनीतिक रूप से प्रेरित हिंसक उग्रवाद (PMVE) श्रेणी में आते हैं और इन्हें कनाडा से वित्तीय सहयोग प्राप्त होता रहा है। खालिस्तानी नेटवर्क और फंडिंग के तरीके रिपोर्ट में कहा गया है कि खालिस्तानी संगठन भारत के पंजाब में स्वतंत्र राज्य बनाने के लिए हिंसक तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन्हें कनाडा समेत विभिन्न देशों में मौजूद समर्थकों से धन जुटाने में मदद मिलती है। रिपोर्ट ने यह भी स्वीकार किया कि पहले कनाडा में इनका बड़ा फंडिंग नेटवर्क सक्रिय था, लेकिन अब यह ऐसे छोटे-छोटे समूहों और व्यक्तियों के माध्यम से संचालित हो रहा है, जिनकी निष्ठा खालिस्तान आंदोलन के प्रति है, भले ही वे किसी विशेष संगठन से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े न हों। एनपीओ और चैरिटेबल संगठनों के जरिए धन जुटाना जांच में पाया गया है कि इन आतंकी संगठनों ने धन जुटाने के लिए गैर-लाभकारी संस्थाओं (NPOs) और चैरिटेबल संगठनों का भी इस्तेमाल किया है। रिपोर्ट के अनुसार, “हमास और हिजबुल्लाह लंबे समय से चैरिटेबल और NPO सेक्टर के दुरुपयोग के लिए कुख्यात रहे हैं। इसी तरह खालिस्तानी चरमपंथी संगठनों ने भी प्रवासी समुदायों से चंदा के जरिए धन इकट्ठा करने और उसे ट्रांसफर करने के लिए ऐसे नेटवर्क का सहारा लिया है।” हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कनाडा में अधिकांश NPOs में मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग का खतरा शून्य है, लेकिन कुछ संस्थाओं के मामले में यह जोखिम अधिक हो सकता है। भारत-कनाडा संबंध खालिस्तानी उग्रवाद का उल्लेख ऐसे समय पर हुआ है जब भारत और कनाडा के रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल रहा है। मार्क कार्नी की सरकार के सत्ता में आने के बाद दोनों देशों ने हाल ही में एक-दूसरे के लिए नए उच्चायुक्तों की नियुक्ति की है। गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में रिश्ते गहरे संकट में आ गए थे, जब उन्होंने भारत पर कनाडा में खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में संलिप्त होने का आरोप लगाया था। इसके बाद भारत और कनाडा के बीच कई उच्च-स्तरीय राजनयिकों को निष्कासित कर दिया गया था। नई रिपोर्ट से यह साफ हो गया है कि कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी तत्व अब भी प्रवासी सिख समुदाय और गैर-लाभकारी संगठनों के जरिए अपनी गतिविधियों को जारी रखे हुए हैं।

‘ट्रंप की भावनाओं का सम्मान…’ पीएम मोदी का संदेश, दोनों नेताओं के रिश्तों में दिखी गर्माहट

नई दिल्ली भारत और अमेरिका के तनावपूर्ण संबंधों के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान पर अब प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने दोनों देशों की साझेदारी को महत्वपूर्ण बताया है. पीएम मोदी ने भारत और अमेरिका के संबंधों पर पोस्ट करते हुए कहा कि मैं राष्ट्रपति ट्रंप की भावनाओं और दोनों देशों के संबंधों के प्रति उनके सकारात्मक आकलन की सराहना करता हूं. भारत और अमेरिका के बीच बहुत ही सकारात्मक, दूरदर्शी एवं वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है. बता दें कि पीएम मोदी का यह बयान ट्रंप को लेकर दिए गए उनके हालिया बयान के बाद आया है. ट्रंप ने कहा था कि भारत और अमेरिका के संबंध बहुत स्पेशल हैं. उन्होंने कहा था कि मौजूदा तनाव के बावजूद पीएम मोदी मेरे दोस्त रहेंगे. हमारी दोस्ती बनी रहेगी. वह बेहतरीन प्रधानमंत्री हैं. ग्रेट हैं. ट्रंप ने ये भी कहा था पीएम मोदी एक महान प्रधानमंत्री हैं. लेकिन वह फिलहाल जो कर रहे हैं, मुझे वह पसंद नहीं है. राष्ट्रपति ट्रंप से यह सवाल पूछा गया था कि क्या वह भारत के साथ फिर से संबंधों को सुधारने के लिए तैयार हैं? क्योंकि टैरिफ की वजह से दोनों देशों के संबंध बीते दो दशकों में सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं.  ट्रंप कह चुके हैं कि वह बेहद निराश हैं कि रूस से भारत बहुत तेल खरीद रहा है. हमने भारत पर बहुत टैरिफ लगाया है, पचास फीसदी टैरिफ. पीएम मोदी से मेरे रिलेशन अच्छे हैं. वह महान पीएम हैं. वह यहां कुछ महीने पहले आए थे. अमेरिकी राष्ट्रपति ने इससे पहले कहा था कि लगता है कि हमने भारत और रूस को चीन के हाथों खो दिया है. 

हिमाचल आपदा रिपोर्ट: बादल फटना और बारिश से 3787 करोड़ का नुकसान, तापमान 1.5°C बढ़ा

शिमला हिमाचल प्रदेश मे भारी बारिश के चलते इस बार भी भीषण तबाही हुई है और इस तबाही की गवाही आंकड़े दे रहे हैं. तबाही के लिए अलग-अलग कारण गिनवाए जा रहे हैं लेकिन सबसे बड़ा कारण मानवीय चूक माना जा रहा है. जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वॉर्मिंग का असर साफ तौर पर हिमाचल में देखा जा रहा है. मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार अब तक के तापमान के अध्ययन से पता चला है कि बीते 100 सालों में हिमाचल प्रदेश में तापमान में औसतन 1.5 डिग्री सेल्सियस की बढ़ौतरी हुई है. इसी का परिणाम है कि हिमाचल में लगातार प्राकृतिक आपदाओं की घटनाओं में बढ़ौतरी हुई है. साल 2023 की त्रासदी के जख्म अभी तक भरे नहीं हैं और 2025 में लगातार जख्म पर जख्म मिल रहे हैं. राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश में इस मॉनसून सीजन में 20 जून से 5 सितंबर की सुबह 10 बजे तक 355 लोगों की मौत हो चुकी है  और 49 लोग लापता हैं. इसी तरह 416 घायल हुए हैं. आपदा में 5194 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं. साथ ही 1945 मवेशियों की मौत और 25 हजार 755 पोल्ट्री वर्ड्स की भी जान गई है. आपदा से अब तक प्रदेश को 3787 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो चुका है. बीते 2 सालों में हुए नुकसान की बात करें तो आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट के अनुसार साल 2023 में आई भीषण आपदा में हिमाचल में 509 लोगों मौत हुई थी और 12 हजार 034 घरों को नुकसान हुआ था, जिनमें  2944 घर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए थे. 2023 में 528 घायल हुए थे और 38 लोग लापता हो गए थे. हिमाचल को  9 हजार 712 करोड़ की संपत्ति का नुकसान हुआ था.  वर्ष 2024 में हिमाचल में आई आपदा में 174 लोगों की जान गई थी, 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे और 31 लोग लापता हुए थे. प्रदेश में 1613 करोड़ की सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचा था. आठ साल में कितनी बार बादल फटे इस वर्ष जुलाई माह से पहले राज्य आपदा प्रबंधन की ओर से केंद्रीय गृह मंत्रालय को सौंपी गई एक रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश में साल 2018 से लेकर जुलाई 2025 बादल फटने की 148 घटनाएं हो चुकी हैं. इसके अचानक बाढ़ आने की 294 और भूस्खलन की 5 हजार से ज्यादा घटनाएं हो चुकी है. इस बार 20 जून से अब तक 45 बार बादल फटने की घटनाएं दर्ज की गई हैं. वहीं, 105 बड़े भूस्खलन, 91 फ्लैश फ्लड आए हैं. फ्लैश और लैंडस्लाइड में 161 लोगों की मौत और 154 लोगों की सड़क हादसों में जान गई है. मौसम में आए इस बदलाव को लेकर टीम ने शिमला स्थित मौसम विज्ञान केंद्र में कार्यरत मौसम विज्ञानी संदीप शर्मा से बात की. प्रदेश में इस वक्त हो रही लगातार बारिश को लेकर संदीप शर्मा ने बताया कि 8 सितंबर तक मॉनसून थोड़ा कमजोर पड़ेगा. उन्होंने कहा कि इस वर्ष इतनी ज्यादा बारिश होने का कारण यही है कि मॉनसून पूरा समय सक्रिय रहा है. संदीप शर्मा ने कहा कि इस वर्ष जून माह में सामान्य से 34 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है, जुलाई में सामान्य बारिश हुई है जबकि अगस्त में रिकार्ड 68 प्रतिशत अधिकत बारिश हुई है. बीते 100 सालों में 9वीं बार सबसे अधिक हुई बारिश संदीप सिहं बताते हैं कि 1901 से लेकर अब तक के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष अगस्त महीने में हुई बारिश बीते 100 सालों में 9वीं बार सबसे अधिक हुई बारिशों में से एक है. इससे पहले 1948 में अगस्त में हिमाचल में 456.5 मिलीमीटर बारिश हुई थी औऱ इस वर्ष 431 मिलीमीटर बारिश हुई है. संदीप शर्मा ने बताया कि तापमान में अप्रत्याशित बढ़ौतरी हुई है, पिछले 100 सालों में हिमाचल में तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस की बढ़ौतरी हुई है. उन्होंने कहा कि जलवायु में लगातार हो रहे परिवर्तन के लिए बहुत से कारण जिम्मेदार हैं, अब पर्यावरण और पारिस्थितिकी को ध्यान में रख कर हर कार्य करने की जरूरत है.

क्या सोनिया गांधी बिना भारतीय नागरिक बने वोटर बनीं? कोर्ट में उठा विवाद

नईदिल्ली   दिल्ली की एक अदालत में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में आरोप है कि सोनिया गांधी ने भारतीय नागरिक बनने से पहले ही खुद को मतदाता सूची में शामिल करवा लिया था, जो कानूनन अपराध है। याचिकाकर्ता की मांग है कि इस मामले में सोनिया गांधी के खिलाफ FIR दर्ज की जाए। शिकायत एक वकील की ओर से दर्ज कराई गई है, जिसमें यह आरोप लगाया गया है कि सोनिया गांधी का नाम वर्ष 1980 में नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल किया गया था, जबकि उन्होंने भारतीय नागरिकता वर्ष 1983 में प्राप्त की थी। यानी उनके भारतीय नागरिक बनने से तीन साल पहले ही उनका नाम वोटर लिस्ट में दर्ज हो चुका था।  वकील का कहना है कि 1982 में उनका नाम सूची से हटा दिया गया था, लेकिन 1983 में नागरिकता प्राप्त करने के बाद फिर से उनका नाम वोटर लिस्ट में जोड़ दिया गया। वकील के अनुसार 1980 में भारत की नागरिक न होने के बावजूद उनका नाम मतदाता सूची में शामिल होना साफ तौर पर कानून का उल्लंघन है और यह एक प्रकार की जालसाजी मानी जानी चाहिए। वकील ने क्या मांग की? वकील ने कोर्ट से आग्रह करते हुए कहा कि यदि सोनिया गांधी ने भारतीय नागरिकता प्राप्त करने से पहले ही वोटर लिस्ट में अपना नाम जुड़वाया था तो यह तभी संभव हो सकता है जब उन्होंने नकली या फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया हो। वकील का तर्क है कि इससे यह स्पष्ट होता है कि सोनिया गांधी ने जानबूझकर गलत जानकारी दी या फिर जालसाजी करते हुए फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किए, जो कि भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत एक संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर वकील ने अदालत से मांग की कि वह दिल्ली पुलिस को निर्देश दे कि सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। कोर्ट की प्रतिक्रिया क्या रही? यह मामला दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में विचाराधीन है, जहां अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट वैभव चौरसिया ने गुरुवार को इस याचिका पर कुछ समय तक सुनवाई की। फिलहाल अदालत ने न तो सोनिया गांधी को और न ही दिल्ली पुलिस को कोई नोटिस जारी किया है, लेकिन मामले की अगली सुनवाई की तारीख 10 सितंबर 2025 तय की गई है। इसी दिन यह तय होगा कि कोर्ट इस याचिका पर क्या अगला कदम उठाता है और क्या एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए जाएंगे। सोनिया गांधी की नागरिकता का इतिहास सोनिया गांधी का जन्म इटली में हुआ था और उन्होंने वर्ष 1968 में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से विवाह किया था। विवाह के बाद वह लंबे समय तक भारत में रहीं, लेकिन भारतीय नागरिकता उन्होंने अप्रैल 1983 में प्राप्त की। भारतीय कानून के अनुसार, किसी भी व्यक्ति का मतदाता बनने के लिए भारतीय नागरिक होना आवश्यक है। ऐसे में नागरिकता प्राप्त करने से पहले वोटर लिस्ट में नाम दर्ज होना कानूनन उचित नहीं माना जा सकता।

शनिवार से शुरू होगी बदरीनाथ यात्रा, हाईवे पर यातायात रहेगा सामान्य

गोपेश्वर पांच दिनों से हेमकुंड व बदरीनाथ धाम की यात्रा पर मानसून के चलते लगाई गई रोक हटा दी गई है। कल,आज से विधिवत्त हेमकुंड व श्री बदरीनाथ धाम की यात्रा शुरु हो जाएगी। हालांकि प्रशासन ने चमोली के पडावों में मौजूद यात्रियों को शुक्रवार को बदरीनाथ धाम भेजा है। सुबह से चमोली जिले में मौसम साफ होने के साथ धूप खिली हुई थी। बदरीनाथ हाईवे भी सुचारु था। यात्रा पडाव ज्योतिर्मठ,चमोली ,पीपलकोटी सहित आस पास के क्षेत्र में लगभग 500 से अधिक यात्रियों को बदरीनाथ भेजा गया,हालांकि उनको वर्षा के दौरान सुरक्षित स्थानों पर ठहरने की हिदायदी दी गई लेकिन दिनभर मौसम साफ होने के चलते यात्रियों ने राहत की सांस ली है। हेमकुंड साहिब में स्थानीय लोगों को छोड यात्री नहीं गए हैं। बताया गया कि क्षेत्र के स्थानीय लोग हेमकुंड यात्रा पर गए जिन्होंने हेमकुंड ,लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के दर्शन किए। गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब ट्रस्ट के सीईओ सरदार सेवा सिंह ने कहा कि हेमकुंड यात्रा पर यात्रियों को नहीं भेजा गया है। कहा कि स्थानीय लोग हेमकुंड यात्रा पर गए हैं। पांच दिनाें से बंद यात्रा कल,आज से सुचारु कर दी गई है।  

सदी पुरानी लाइसेंसी बंदूक की दुकान में गिरफ्तार तीन आरोपी, अवैध हथियारों का हुआ खुलासा

कोलकाता बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने शुक्रवार को सौ साल पुरानी लाइसेंसी बंदूक की दुकान एनसी डाव एंड कंपनी के तीन मालिकों को अवैध हथियारों की तस्करी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। जानकारी के मुताबिक,  उत्तर 24 परगना जिले के रहारा के रीजेंट पार्क इलाके की एक बहुमंजिला इमारत से 4 अगस्त को 15 आग्नेयास्त्रों, 1,000 कारतूस और भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई थी। इसके बाद अबीर डाव, सुबीर डाव और सुब्रत डाव और इमारत में रहने वाला मधुसूदन मुखर्जी उर्फ लिटन  को गिरफ्तार किया गया है। खरदाह इलाके में हथियारों की कथित जब्ती के बाद पुलिस मुंगेर के एक हथियार विक्रेता तक पहुंची। विक्रेता ने पूछताछ में मुखर्जी का नाम लिया था। इससे पहले फरवरी में  दक्षिण 24 परगना में मिले गोला-बारूद बरामदगी के एक मामले में दुकान के दो कर्मचारियों- जयंत दत्ता और शांतनु सरकार को गिरफ्तार किया गया था। कोलकाता पुलिस मुख्‍यालय से  100 मीटर के दायरे में स्थित दुकान की फरवरी में तलाशी ली गई थी और सील कर दिया गया था। बैरकपुर कमिश्नरेट के खुफिया विभाग और स्थानीय पुलिस ने मधुसूदन मुखर्जी उर्फ लिटन के आवास पर छापा मारा था। शुरुआती जांच से पता चला कि मुखर्जी ने पुरुलिया से कुछ हथियार मंगवाए थे और उनको बेचने के इरादे से हथियार और कारतूस जमा कर रहा था। लाइसेंसी बंदूक की दुकान में बेचे जा रहे थे अवैध हथियार इस बरामदगी के बाद एसटीएफ ने मामले को अपने हाथ में ले लिया। टास्क फोर्स को पता चला कि उक्त लाइसेंसी बंदूक की दुकान अवैध हथियारों के व्यापार में पूरी तरह से शामिल है। एक एसटीएफ अधिकारी ने कहा कि दुकान के स्‍टॉक रजिस्टरों की जांच हथियारों और गोला-बारूद की खरीद और बिक्री में कई गंभीर विसंगतियां मिली। चार आरोपियों को फरवरी में किया था गिरफ्तार फरवरी के मामले में दक्षिण 24 परगना जिले के जिवनतल्ला में रहने वाले एक व्यापारी हाजी राशिद मोल्ला के घर पर छापा मारा गया। टीम को वहां से  भारतीय आयुध कारखाने द्वारा निर्मित 7.65 मिमी पिस्तौल के 190 राउंड कारतूस, एक 12 बोर की बंदूक और हथियार के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले नौ खोखे बरामद किए गए। दत्ता और सरकार के अलावा मोल्ला और तीन अन्य को गिरफ्तार किया गया था।