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ईस्टर्न बॉर्डर पर जनरल लेवल वार्ता, भारत-चीन ने 10 मुद्दों पर पाया समझौता

नई दिल्ली चीन के विदेश मंत्री वांग यी का भारत दौरा काफी चर्चा में रहा. वह 18 और 19 अगस्त को भारत में थे. उन्होंने यहां भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर विशेष प्रतिनिधिमंडल स्तर की 24वें दौर की वार्ता में हिस्सा लिया. इस दौरान सीमा पर तनाव कम करने, शांति बढ़ाने और विवाद को सुलझाने पर दोनों पक्षों के बीच चर्चा हुई और 10 बिंदुओं पर सहमति बनी. चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भारत के विदेश मंत्री जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की. इस दौरान वांग यी ने कजान में दोनों देशों के प्रतिनिधियों की मुलाकात के बाद हुई प्रगति की तारीफ की और कहा कि 23वें दौर की वार्ता के बाद से सीमा क्षेत्र स्थिर रहे हैं.  दोनों पक्षों ने कजान में दोनों देशों के नेताओं की बैठक के बाद बनी सहमति के क्रियान्वयन में हुई प्रगति का मूल्यांकन किया और भी उल्लेख किया कि 23वें दौर की वार्ता के बाद से चीन और भारत के बीच सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनी हुई है. – दोनों पक्षों ने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के महत्व पर प्रतिबद्धता जताई. साथ ही चीन-भारत संबंधों के समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रासंगिक मुद्दों को मैत्रीपूर्ण परामर्श के जरिए हल करने की जरूरत पर जोर दिया.  – भारत और चीन के बीचहुई विशेष प्रतिनिधियों की 24वीं दौर की वार्ता में तीन पारंपरिक सीमा व्यापार बाजारों (Traditional Boundary Trade Markets) को फिर से खोलने पर सहमति बनी है. – दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि मौजूदा स्थिति को द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए और 2005 में दोनों देशों के बीच बनी सहमति के अनुरूप सीमा विवाद को हल करने के लिए एक न्यायसंगत, तार्किक और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य फ्रेमवर्क तलाशा जाए. – दोनों पक्षों ने चीन-भारत सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के कार्य तंत्र (WMCC) के ढांचे के तहत एक विशेषज्ञ समूह बनाने का फैसला किया है, जो उन क्षेत्रों में सीमांकन (Demarcation) की संभावनाओं को तलाशेगा, जहां परिस्थितियां अनुकूल हैं. – दोनों देशों के बीच सहमति बनी कि WMCC के तहत एक कार्यसमूह बनाया जाएगा, जो सीमा पर प्रभावी प्रबंधन और नियंत्रण को बढ़ावा देगा, ताकि शांति बनी रहे. – पश्चिमी सीमा पर पहले से चल रही सामान्य स्तर की वार्ता के अलावा, पूर्वी और मध्य सीमा क्षेत्रों में भी ऐसी वार्ता शुरू होगी.प श्चिमी क्षेत्र में जल्द ही नए दौर की वार्ता होगी.  – दोनों पक्षों ने राजनयिक और सैन्य चैनलों के माध्यम से सीमा प्रबंधन और नियंत्रण तंत्र का उपयोग करने पर सहमति जताई.  – दोनों पक्षों ने सीमा-पार नदियों पर सहयोग को लेकर विचारों का आदान-प्रदान किया और सीमा-पार नदियों के लिए विशेषज्ञ स्तरीय तंत्र का उपयोग करके बाढ़ की जानकारी साझा करने के समझौता ज्ञापन को नवीनीकरण करने पर संचार बनाए रखने पर सहमति जताई. चीनी पक्ष ने मानवीय सिद्धांतों के आधार पर संबंधित नदियों की आपातकालीन जल संबंधी जानकारी भारतीय पक्ष के साथ साझा करने पर सहमति दी. – दोनों पक्षों ने तीन पारंपरिक सीमा व्यापार बाजारों को फिर से खोलने पर सहमति जताई. – दोनों पक्षों ने 2026 में चीन में 25वें दौर की वार्ता आयोजित करने पर सहमति जताई.

उपराष्ट्रपति पद का नामांकन दाखिल, सीपी राधाकृष्णन के साथ पीएम मोदी भी बने प्रस्तावक

 नई दिल्ली  उपराष्ट्रपति पद के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन ने मंगलवार को अपना नामांकन दाखिल किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहे। वह उनके पहले प्रस्तावक बने। निर्वाचन अधिकारी को नामांकन पत्रों के चार सेट सौंपे गए।इस दौरान भाजपा और एनडीए के कई वरिष्ठ नेता भी संसद भवन पहुंचे और राधाकृष्णन के साथ मौजूद रहे। इस दौरान एकजुटता दिखाने की कोशिश की गई। सीपी राधाकृष्णन के नामांकन के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, नितिन गडकरी और सहयोगी दलों के वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। जेडीयू से ललन सिंह और संजय झा, लोजपा (रामविलास) से चिराग पासवान, केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी के अलावा और भी कई नेता मौजूद थे। सी.पी. राधाकृष्णन तमिलनाडु से आते हैं। वे दो बार कोयंबटूर से सांसद रह चुके हैं और भारतीय जनता पार्टी के लंबे समय से सक्रिय सदस्य रहे हैं। वह महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं। अपना नामांकन दाखिल करने से पहले संसद परिसर में स्थित प्रेरणा स्थल जा कर श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रेरणा स्थल में प्रतिष्ठित हस्तियों की प्रतिमाएं स्थापित हैं। इस दौरान उनके साथ केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत गठबंधन के अन्य नेता भी मौजूद थे। उन्होंने सबसे पहले महात्मा गांधी की विशाल प्रतिमा के समक्ष नमन किया और फिर अन्य प्रसिद्ध हस्तियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उपरराष्ट्रपति के चुनाव में संसद में संख्याबल के हिसाब से राधाकृष्णन का चुना जाना निश्चित माना जा रहा है। विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस) ने उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी को उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्षी दलों का संयुक्त उम्मीदवार बनाया है।

नई कानून पहल: 30 दिन से अधिक जेल में रहने वाले नेता खो सकते हैं अपनी कुर्सी

नई दिल्ली केंद्र सरकार बुधवार को लोकसभा में तीन विधेयक पेश करेगी, जिनका उद्देश्य प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तार या हिरासत में लिया जाता है तो उन्हें उनके पद से हटाया जा सके. दरअसल, मौजूदा वक्त में ऐसा किसी भी कानून में प्रावधान नहीं है कि गिरफ्तारी या न्यायिक हिरासत की स्थिति में नेताओं को उनके पद से हटाया जा सके. इन्हीं खामियों को दूर करने के उद्देश्य से सरकार ने तीन विधेयक तैयार किए हैं जो गंभीर आपराधिक मामलों में आरोपी नेताओं पर नकेल कसेंगे. केंद्र सरकार बुधवार को जो विधेयक पेश करेगी, उनमें संघ राज्य क्षेत्र सरकार (संशोधन) विधेयक 2025, संविधान (एक सौ तीसवां संशोधन) विधेयक 2025 और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2025 शामिल है. बताया जा रहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इन तीनों विधेयकों को संसद की संयुक्त समिति को भेजने के लिए लोकसभा में प्रस्ताव भी पेश करेंगे. क्या है केंद्र शासित संशोधन विधेयक? केंद्र शासित प्रदेश (संशोधन) विधेयक, 2025 के उद्देश्यों और कारणों के विवरण के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेश अधिनियम, 1963 (1963 का 20 ) में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत मुख्यमंत्री या मंत्री को गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तारी और हिरासत की स्थिति में हटाया जा सके. इसलिए इस कानून की धारा 45 में संशोधन कर ऐसी स्थिति के लिए कानूनी प्रावधान करना जरूरी है. ये विधेयक उपरोक्त उद्देश्यों को प्राप्त करने का प्रयास करता है. संविधान का 130वां संशोधन संविधान (एक सौ तीसवां संशोधन) विधेयक, 2025 के उद्देश्यों में कहा गया है कि संविधान में भी ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि किसी मंत्री को गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तारी और हिरासत की स्थिति में हटाया जा सके. इसलिए संविधान के अनुच्छेद 75, 164 और 239AA में संशोधन कर प्रधानमंत्री या केंद्रीय मंत्री और राज्यों व दिल्ली के मुख्यमंत्री या मंत्री को हटाने का प्रावधान करने की ज़रूरत है. वहीं, नए प्रावधानों के तहत यदि कोई मंत्री, जिसमें प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या राज्यों को मंत्री शामिल हैं को पांच साल या उससे अधिक की अवधि की सजा वाले अपराध के लिए लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रखा जाता है तो उसे पद से हटाया जा सकता है. J&K पुनर्गठन अधिनियम में जोड़ा जाएगा खंड जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 के उद्देश्यों में कहा गया है कि जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 (2019 का 34) में भी ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत मुख्यमंत्री या मंत्री को गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तारी और हिरासत की स्थिति में हटाया जा सके. इसलिए इसकी धारा 54 में संशोधन कर नया खंड (4A) जोड़ा जाएगा. 31वें दिन स्वत: हो जाएगा पदमुक्त इस खंड के अनुसार, यदि कोई मंत्री अपने कार्यकाल के दौरान लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रहता है तो उसे 31 वें दिन मुख्यमंत्री की सलाह पर उपराज्यपाल द्वारा हटा दिया जाएगा. इसी क्रम में अगर मुख्यमंत्री द्वारा इस पर संज्ञान नहीं लिया जाता है तो अगले दिन वह मंत्री स्वत: पद से हट जाएगा. इसी तरह का तंत्र केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के लिए भी प्रस्तावित है, जहां हिरासत में लिए गए मंत्री या प्रधानमंत्री को लगातार 30 दिनों की हिरासत के 31वें दिन हटा दिया जाएगा. प्रतिनिधियों में जनता के विश्वास पर जोर विधेयक के उद्देश्य और कारणों के विवरण में संवैधानिक नैतिकता की रक्षा और निर्वाचित प्रतिनिधियों में जनता के विश्वास को बनाए रखने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया गया है. इसमें कहा गया है कि निर्वाचित नेता लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतीक हैं, लेकिन वर्तमान में संविधान में किसी ऐसे प्रधानमंत्री या मंत्री को हटाने का कोई प्रावधान नहीं है जो गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार और हिरासत में हो. विवरण में ये भी कहा गया है कि ये अपेक्षा की जाती है कि पद पर आसीन मंत्रियों का चरित्र और आचरण किसी भी संदेह से परे हो.गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे, गिरफ्तार और हिरासत में लिए गए मंत्री संवैधानिक नैतिकता और सुशासन के सिद्धांतों को बाधित या अवरुद्ध कर सकते हैं, जिससे जनता द्वारा उनमें रखा गया संवैधानिक विश्वास कमजोर हो सकता है.

सरकारी केंद्रीय कर्मचारियों-पेंशनर्स के लिए खुशखबरी: दिवाली से पहले सैलरी में बड़ा इजाफा

    नई दिल्ली सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए इस बार की दिवाली बेहद खास हो सकती है. बता दें कि केंद्र सरकार उनके लिए एक बड़ा तोहफा लेकर आने की तैयारी कर रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार दिवाली से पहले महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी का ऐलान कर सकती है. DA में बढ़त का ऐलान सितंबर के अंत या अक्टूबर की शुरुआत में हो सकता है. खास बात ये है कि इस बार महंगाई भत्ते में जो बढ़ोतरी होगी, वो 7वें वेतन आयोग के तहत आखिरी हो सकती है, क्योंकि 1 जनवरी 2026 से 8वां वेतन आयोग लागू होने की संभावना है. 1 करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए खुशखबरी है।जुलाई में श्रम मंत्रालय ने अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के जनवरी से जून के आंकड़ें जारी कर दिए है, ऐसे में संभावना है कि दिवाली से पहले केन्द्र की मोदी सरकार कर्मचारियों पेंशनरों का महंगाई भत्ता बढ़ा सकती है। इसका लाभ 50 लाख कर्मचारियों और 67 लाख पेंशनरों को मिलेगा।यह 7वें वेतन आयोग के तहत महंगाई भत्‍ते में आखिरी वृद्धि हो सकती है, क्योंकि 1 जनवरी 2026 से 8वां वेतन आयोग लागू होने की उम्मीद है। जुलाई 2025 से फिर बढ़ेगा महंगाई भत्ता केन्द्र सरकार द्वारा महंगाई की दर को देखते हुए हर साल 2 बार जनवरी और जुलाई में केन्द्रीय कर्मचारियों व पेंशनरों का महंगाई भत्ता/महंगाई राहत की दरों में संशोधन किया जाता है, जो अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक इंडेक्स के छमाही आंकड़ों पर निर्भर करता है। यह आंकड़े जनवरी से जून और जुलाई से दिसंबर के बीच जारी किए जाते है। 7वें वेतन आयोग के तहत आने वाले कर्मचारियों पेंशनरों का जनवरी 2025 से 2% डीए बढ़ाया गया था, जिसका ऐलान मार्च में हुआ था, जिसके बाद डीए 53% से बढ़कर 55% पहुंच गया है और अब जुलाई 2025 से फिर डीए की दरों में बदलाव होना है जो जनवरी से जून के छमाही आंकड़ों पर निर्भर करेगा। कितना बढ़ सकता है DA? फिलहाल केंद्र सरकार के कर्मचारियों को 55% DA मिल रहा है लेकिन अब इसमें 3 से 4 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है. अगर सरकार 4% DA बढ़ाती है, तो यह बढ़कर 59% हो जाएगा. वहीं अगर 3% बढ़ोतरी होती है, तो DA 58% तक पहुंचेगा. कितनी बढ़ेगी सैलरी? अगर DA 3% बढ़ता है, तो जिन कर्मचारियों का बेसिक वेतन ₹18,000 है, उन्हें हर महीने ₹540 ज्यादा मिलेंगे. वहीं जिन पेंशनर्स की बेसिक पेंशन ₹9,000 है, उन्हें ₹270 प्रति माह का फायदा होगा. यानी दिवाली से पहले उनकी जेब में अतिरिक्त पैसा आ सकता है. हालांकि DA की नई दरें 1 जुलाई से लागू मानी जाएंगी, लेकिन सरकार इसका ऐलान सितंबरअक्टूबर में करती है. ऐसे में कर्मचारियों और पेंशनर्स को जुलाई, अगस्त और सितंबर के तीन महीनों का एरियर भी मिलेगा. साल में दो बार होता है DA का संशोधन सरकार साल में दो बार महंगाई भत्ते में संशोधन करती है. पहली बार जनवरी में और दूसरी बार जुलाई में. हर बार इसका ऐलान कुछ महीनों बाद किया जाता है, ताकि CPI-IW यानी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स का डेटा पूरा मिल सके और इसी आधार पर सरकार DA की दरें तय करती है. DA बढ़ाने के लिए सरकार श्रम ब्यूरो द्वारा जारी किए जाने वाले CPI-IW आंकड़ों का इस्तेमाल करती है. बीते 12 महीनों के औसत CPI-IW के आधार पर सरकार DA में बदलाव करती है और ये पूरी प्रक्रिया 7वें वेतन आयोग के नियमों के अनुसार होती है. इस बार 3 फीसदी डीए वृद्धि संभव, एरियर भी मिलेगा अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक इंडेक्स के छमाही आंकड़ों पर गौर करें तो अंक 145 पर रहा और डीए स्कोर 58.18% के आसपास आ गया ,जो 3 % वृद्धि की ओर संकेत दे रहा है।संभावना है कि जुलाई 2025 से केन्द्र सरकार 3% डीए बढ़ा सकती है जिसके बाद डीए 55% से बढ़कर 58% पहुंच जाएगा।नई दरें जुलाई 2025 से लागू होंगी ऐसे में एरियर का भी भुगतान होगा। कयास लगाए जा रहे है कि दिवाली से पहले होने वाली कैबिनेट बैठक में वित्त मंत्रालय द्वारा डीए वृद्धि का प्रस्ताव रखा सकता है, जिसमें मंजूरी मिलने के बाद आदेश जारी किए जाएंगे। यह दर जुलाई-दिसंबर के लिए होगी।अगर सितंबर में नई दरों का ऐलान होता है तो अक्टूबर में खाते में सैलरी बढ़कर आएगी और अगर अक्टूबर में लाभ मिलता है तो नवंबर में सैलरी बढ़कर मिलेगी। आईए जानते है कैसे होती है महंगाई भत्ते की गणना     केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते की गणना करने का एक फॉर्मूला है। फॉर्मूला है: 7वां सीपीसी डीए% = [{पिछले 12 महीनों के लिए एआईसीपीआई-आईडब्ल्यू (आधार वर्ष 2001=100) का 12 महीने का औसत – 261.42}/261.42×100]     यह फॉर्मूला उन केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर लागू होगा जिन्हें सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर वेतन मिलता है। डीए%= (392.83-261.42)/261.42×100 = 50.26     पिछले 12 महीनों का औसत सीपीआई-आईडब्ल्यू 392.83 है। फॉर्मूले के मुताबिक, डीए मूल वेतन का 50.28 फीसदी आ रहा है। इसलिए, केंद्र सरकार महंगाई भत्ते को 50% (दशमलव बिंदुओं को नजरअंदाज करते हुए) तक बढ़ा सकती है।  

कैसे मोदी के तीसरे कार्यकाल में और मजबूत हुए बीजेपी-संघ के रिश्ते

नई दिल्ली आम तौर पर भारतीय जनमानस में यह मान लिया गया है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बीजेपी एक ही है. इसके पीछे विपक्ष का दुष्प्रचार भी रहा है. पर इससे इनकार भी नहीं किया जा सकता है कि बीजेपी और संघ आपस में इस तरह घुल मिले हैं कि ये कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि ये दो जिस्म एक जान हैं. पर ऐसा भी नहीं है कि दोनों में मतभेद नहीं होते रहे हैं. संघ और बीजेपी के रिश्ते साल दर साल बनते बिगड़ते रहे हैं. बहुत ऊंचे दर्जे के मतभेद दोनों ही संगठनों के बीच पैदा होते रहे हैं . पर खासियत यह रही है कि बहुत जल्दी दोनों ही संगठनों के नेता आपस में मेल मिलाप भी करते रहे हैं. 2024 में भी दोनों के बीच रिश्ते बहुत हद तक बिगड़ गए. लोकसभा चुनावों के परिणामों के बाद  बीजीपी और संघ के रिश्तों की तल्खी खुल कर जनता के सामने आ गई थी. पर नरेंद्र मोदी का तीसरा कार्यकाल, जो जून 2024 में शुरू हुआ, अप्रत्याशित रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के रिश्तों का स्वर्णकाल बन गया. 30 मार्च 2025 को मोदी का नागपुर दौरा इस पुनर्मिलन का प्रतीक बना, जहां उन्होंने RSS संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार को श्रद्धांजलि दी और मोहन भागवत के साथ भविष्य की रणनीति तैयार की. उसके बाद से लगातार यह देखा गया कि बीजेपी और आरएसएस का रिश्ता और मजबूत होता जा रहा है. लाल किले की प्राचीर से संघ की उपलब्धियों की बखान हो या उपराष्ट्रपति पद के लिए संघ बैकग्राउंड वाले सीपी राधाकृष्णन का चयन हो, ऐसा लगता है कि आरएसएस-बीजेपी के रिश्तों का स्वर्ण काल चल रहा हो.   1-मोदी और संघ का संदेश, ताली दोनों हाथ से बजती  जनता में ऐसा समझा जाता है कि संघ बीजेपी का अभिभावक है. इसलिए स्वाभाविक तौर पर यह सवाल बनता है कि पिछले क़रीब ग्यारह साल से केंद्र में काम कर रही बीजेपी सरकार के प्रदर्शन को संघ कैसे आंकता है? इसी साल मार्च में बेंगलुरु में अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा बैठक की तीसरी और आख़िरी पत्रकार वार्ता में संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि बीजेपी का आंकलन देश के लोगों ने किया है. संघ देश से अलग नहीं है. और अभिभावक की बात है तो हम किसी भी सरकार के अभिभावक बनने को तैयार हैं, सिर्फ़ भाजपा के नहीं. होसबाले ने स्पष्ट कहा कि कोई भी पार्टी आए और हमारे विचार मिलें तो हम अभिभावक बन सकते हैं. कोई आता नहीं है वो अलग बात है. होसबाले की बातों से हम समझ सकते हैं कि बीजेपी और संघ के बारे में हम जितना समझते हैं, वास्तविकता उससे कहीं अलग है. कहा जाता है कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी कई मौकों पर आरएसएस से सलाह लिया करतीं थीं. वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी ने अपनी एक किताब में इंदिरा गांधी के करीबी सहयोगी अनिल बाली के हवाले से लिखा है कि, आरएसएस ने 1980 में इंदिरा गांधी को सत्ता में आने में मदद की थी. नीरजा चौधरी ने पुस्तक में लिखा है कि कांग्रेस के प्रति मुसलमानों की नाराजगी को देखते हुए वह अपनी राजनीति का हिंदूकरण करना चाहती थीं, क्योंकि उन्हें पता था कि आरएसएस की ओर से एक मौन संकेत या यहां तक कि उनके प्रति मुसलमानों का एक तटस्थ रुख भी इसमें मददगार हो सकता है. उपरोक्त बातें लिखने का मतलब सिर्फ इतना है कि संघ और बीजेपी किसी कानून से बंधे हुए नहीं हैं. दोनों अपने रास्ते कभी भी अलग करने के लिए स्वतंत्र हैं. पर नरेंद्र मोदी दूरदर्शी राजनीतिज्ञ हैं. वो बीजेपी को आगे ले जाने के लिए दूसरी विचारधारा वालों से समझौते करते रहे हैं. आरएसएस की विचारधारा तो उनके रगों में दौड़ रहा है. जाहिर है कि मोदी ने यही सोचकर संघ के साथ बीजेपी के रिश्तों को उस ऊंचाई पर ले जाने की कोशिश की है, जहां तक दोनों आज तक नहीं पहुंचे थे.  2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला, और उसे एनडीए सहयोगियों पर निर्भर रहना पड़ा. इससे पार्टी को अपनी संगठनात्मक ताकत को मजबूत करने की जरूरत महसूस हुई है. हरियाणा और महाराष्ट्र और दिल्ली विधानसभा चुनावों में संघ ने बीजेपी के पक्ष में माहौल बनाने के लिए छोटी-छोटी बैठकों का आयोजन किया, जिससे दोनों के बीच सहयोग बढ़ा.  शायद यही कारण है कि बीजेपी के संगठनात्मक चुनावों में संघ की पृष्ठभूमि वाले नेताओं को प्राथमिकता दी जा रही है. कई राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) या संघ से जुड़े नेताओं को चुना गया. यह कदम दोनों संगठनों के बीच समन्वय को दर्शाता है.  उपराष्ट्रुपति पद के लिए कैंडिडेट के चयन में भी संघ बैकग्राउंड वाले सीपी राधाकृष्‍णन को प्राथमिकता और लालकिले के प्राचीर से तारीफ ने इस संबंध को और मजबूती प्रदान की है. उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में बीजेपी का अध्यक्ष भी कोई संघ बैकग्राउंड वाला व्यक्ति ही आएगा. 2-पिछले 2 सालों में संघ और बीजेपी के रिश्ते 30 मार्च 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का RSS मुख्यालय, नागपुर में मोदी ने RSS संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार को श्रद्धांजलि दी और मोहन भागवत से मुलाकात की. इसी तरह, 15 अगस्त 2024 को लाल किले से स्वतंत्रता दिवस भाषण में मोदी ने राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक संगठनों की तारीफ की, जिसे अप्रत्यक्ष रूप से RSS के प्रति संकेत माना गया. 15 अगस्त 2025 के अपने भाषण में पीएम मोदी ने आरएसएस की भूरि-भूरि तारीफ की.  हालांकि, इस अवधि में कई मौकों पर RSS और बीजेपी के बीच दूरी बढ़ती नजर आई. नवंबर 2024 में मोहन भागवत का 75 साल की उम्र में रिटायरमेंट बयान को मोदी और शाह पर निशाना माना गया. फरवरी 2025 में बीजेपी अध्यक्ष के चयन में देरी और RSS के पसंदीदा उम्मीदवारों को नजरअंदाज करना भी तनाव को बढ़ाने वाला समझा गया. RSS बीजेपी को अपनी वैचारिक संतान मानता है, लेकिन वह अपनी स्वतंत्र पहचान और प्रभाव बनाए रखना चाहता है. बीजेपी, विशेषकर मोदी-शाह युग में, केंद्रीकृत शक्ति और चुनावी रणनीति पर जोर देती है, जो कभी-कभी RSS की सांस्कृतिक और संगठनात्मक प्राथमिकताओं से टकराती है.  3-नड्डा के एक बयान के चलते … Read more

पुतिन का ऐलान: मैं जेलेंस्की से जरूर मिलूंगा, युद्ध की पृष्ठभूमि में बातचीत

नई दिल्ली रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि वो यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से मिलने के लिए तैयार हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दावा किया है कि डोनाल्ड ट्रंप ने पुतिन से फोन पर बात करते हुए यह बात कही है। रुबियो ने कहा कि तीन साल से चल रहे युद्ध के बाद पुतिन का जेलेंस्की से मिलने के तैयार होना एक बड़ी बात है। रुबियो ने कहा कि मैं यह नहीं कह रहा कि दोनों की मुलाकात के बाद युद्ध खत्म हो जाएगा, लेकिन कम से कम दोनों नेता एक दूसरे के साथ बात तो कर रहे हैं। यह एक बड़ी बात है। रुबियो ने आगे कहा कि हम पुतिन और जेलेंस्की की बैठक की दिशा में काम कर रहे हैं। अगर दोनों नेता एक दूसरे से बात करने के लिए तैयार हो जाते हैं तो यह त्रिपक्षीय बैठक भी हो सकती है जहां दोनों नेताओं के साथ ट्रंप भी बैठ सकते हैं। जल्द ही तीनों नेताओं की होगी मुलाकात: ट्रंप जेलेंस्की से मुलाकात के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा कि जेलेंस्की से मिलने के बाद मैंने राष्ट्रपति पुतिन को फोन किया और राष्ट्रपति पुतिन और राष्ट्रपति जेलेंस्की के बीच एक निर्धारित स्थान पर बैठक की व्यवस्था शुरू कर दी। उम्मीद है कि हम तीनों जल्द मिलेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उन्होंने रूस के साथ शांति समझौते के तहत यूक्रेन के लिए सुरक्षा गारंटी पर चर्चा की है, जिसमें यूरोप अग्रणी भूमिका निभा रहा है और वाशिंगटन के साथ समन्वय कर रहा है। जेलेंस्की ने ओवल ऑफिस में ट्रंप से आमने-सामने की मुलाकात भी की।  

महायुति में उठे सवाल: बारिश संकट पर मीटिंग में क्यों नहीं आए एकनाथ शिंदे?

मुंबई  महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई इस समय बादलों से घिरा हुआ और तापमान में गिरावट आई है. वहीं प्रदेश का राजनीतिक तापमान तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है. डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे एक बार फिर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग से नदारद रहे. यह मीटिंग मुंबई में हो रही बारिश से संभावित परेशानियों से निपटने के लिए मंगलवार को बुलाई गई थी.  इससे पहले भी फडणवीस ने कैबिनेट की बैठक बुलाई थी. उस समय भी शिंदे उस बैठक में शामिल नहीं हुए थे. जिससे ये अटकलें तेज हो गईं कि महायुति गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. इस बार जब आज कैबिनेट की बैठक बुलाई गई उस समय शिंदे ठाणे में जमीनी हालात का जायजा ले रहे थे. बाद में उन्होंने बीएमसी हेडक्वार्टर जाकर हालात पर निगरानी भी की.   इन दिनों एकनाथ शिंदे की दिल्ली दौरा भी काफी बढ़ गया और चर्चा में रहा. 6 अगस्त को वह अपने परिवार के साथ दिल्ली गए थे. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की थी. इसकी तस्वीरें भी सामने आई थी.  वहीं शिंदे ने बार-बार दिल्ली के दौर पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि संसद में मानसून सत्र चल रहा है और उनकी पार्टी भी एनडीए का हिस्सा है. इसलिए वह कई मुद्दों पर चर्चा करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी आए. दूसरी ओर शिंदे की स्वतंत्रता दिवस पर महाराष्ट्र में न रहकर, कश्मीर चले जाने को भी कई लोग बड़ा संकेत मान रहे हैं. कई लोगों ने अटकलें लगाना शुरू कर दिया है कि गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. शिंदे गुट के शिवसेना नेता संजय शिरसाट का इस पूरे मुद्दे पर कहना है कि एकनाथ शिंदे प्रदेश के डिप्टी सीएम हैं, ऐसे में उनका दिल्ली जाना स्वाभाविक (नेचुरल) है.  बेस्ट महाप्रबंधक नियुक्ति पर हुआ था टकराव इसी महीने बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट (BEST) के महाप्रबंधक पद पर नियुक्ति को लेकर महाराष्ट्र सरकार में बड़ा टकराव सामने आया था. एक ही पोस्ट के लिए एक ही दिन में दो अलग-अलग नामों की नियुक्ति कर दी गईं थी. एक ओर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के विभाग ने अश्विनी जोशी को महाप्रबंधक नियुक्त किया, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने उसी दिन आदेश पलटते हुए आशीष शर्मा की नियुक्ति कर दी. इस घटनाक्रम से साफ हो गया कि सरकार के शीर्ष नेताओं के बीच नियुक्तियों को लेकर सामंजस्य की भारी कमी है. नाराजगी की वजहें महाराष्ट्र सरकार में शिवसेना (शिंदे गुट) और भाजपा के बीच खटास गहराती जा रही है. शिंदे और उनके समर्थकों को लग रहा है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार में एनसीपी को अधिक तवज्जो दी जा रही है, जबकि शिवसेना (शिंदे गुट) को काफी हद तक नजरअंदाज किया जा रहा है. सिर्फ सत्ता संतुलन ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक नियुक्तियों और स्थानांतरण (ट्रांसफर) में समन्वय की कमी ने भी तनाव को और बढ़ा दिया हैय कई मौकों पर नियुक्तियों को लेकर सरकार के शीर्ष नेताओं के बीच स्पष्ट टकराव देखा गया है. इसके अलावा, कुछ जिलों में संरक्षक मंत्री चुनने के मुद्दे पर विवाद भी सामने आए हैं. इन विवादों ने शिंदे और बीजेपी के बीच संबंधों को और बिगाड़ दिया है. फरवरी में शिंदे ने दी थी चेतावनी फरवरी में भी महाराष्ट्र की महायुति सरकार में सब कुछ ठीक नहीं चलने की खबरें सामने आई थी. इस पर और मुहर तब लग गई थी जब शिंदे ने नागपुर में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा था, 'मुझे हल्के में मत लेना, जिन्होंने मुझे हल्के में लिया…' मुंबई में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने हालात मुश्किल बना दिए हैं. शहर का शायद ही कोई इलाका ऐसा हो जो इस बारिश से प्रभावित न हो. कई जगहों पर जलभराव है और यातायात पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है. कुर्ला में NDRF की टीम तैनात मुंबई के कुर्ला इलाके के क्रांतिनगर में मीठी नदी का जलस्तर बढ़ गया है. खतरे को देखते हुए यहाँ रहने वाले लगभग 350 लोगों को पास के बीएमसी स्कूल में शिफ्ट किया गया है. NDRF इंस्पेक्टर और टीम कमांडर राजू प्रसाद ने बताया कि सुबह 9 बजे से रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है और अब तक करीब 250 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है. महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे भी मौके पर पहुंचे और टीम के काम की सराहना की. अधिकारियों ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे अलर्ट रहें और सुरक्षित स्थानों पर रहें. लोकल ट्रेन सेवाएं ठप भारी बारिश से मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. कई जगह पटरियों पर पानी भर गया है जिसके कारण ट्रेनें एक से डेढ़ घंटे की देरी से चल रही हैं. घाटकोपर स्टेशन पर यात्री पटरियों पर उतरकर पैदल ही आगे बढ़ते दिखाई दिए. यही हाल सेंट्रल, हार्बर और वेस्टर्न लाइन के कई हिस्सों में भी देखने को मिला. सरकारी छुट्टी, फिर भी परेशानी हालात को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने आज छुट्टी घोषित कर दी है. सभी स्कूल-कॉलेज और सरकारी संस्थान बंद हैं. हालांकि, कई निजी कंपनियों ने दफ्तर खोले हैं, जिसके चलते कामकाजी लोग किसी तरह ऑफिस पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं. लगातार तीन दिन से हो रही बारिश थमने का नाम नहीं ले रही और प्रशासन हालात पर नज़र बनाए हुए है.

कैबिनेट ने दी हरी झंडी, ऑनलाइन गेमिंग विधेयक लोकसभा में पेश होगा

नई दिल्ली ऑनलाइन गेमिंग को विनियमित करने वाले एक विधेयक को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है और कल इसे लोकसभा में पेश किए जाने की संभावना है। इस विधेयक का उद्देश्य ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म को एक कानूनी ढांचे के अंतर्गत लाना और डिजिटल ऐप्स के जरिए जुआ खेलने पर दंड का प्रावधान करना है। प्रस्तावित कानून में धोखाधड़ी और राज्य के कानूनों में विसंगतियों पर चिंता जताई गई है और इसमें दंड और सजा के प्रावधान हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय या MeitY को ऑनलाइन गेमिंग के लिए केंद्रीय नियामक नियुक्त किया जा सकता है। इस विधेयक का उद्देश्य ऑनलाइन सट्टेबाजी पर भी रोक लगाना है। नई दंड संहिता, भारतीय न्याय संहिता के तहत अनधिकृत सट्टेबाजी पर पहले से ही जुर्माना और सात साल की जेल की सजा का प्रावधान है।

मौसम अपडेट: महाराष्ट्र में जोरदार बारिश, ट्रेनों पर असर और 12 की मौत

मुंबई महाराष्ट्र में पिछले दो दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। राज्यभर में अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है। कई जिलों में नदियां खतरे के निशान पर हैं। आपदा प्रबंधन मंत्री गिरीश महाजन ने बताया कि अकेले नांदेड जिले में ही बाढ़ जैसे हालात के कारण 9 लोगों ने अपनी जान गंवाई। मुंबई में 8 घंटे में 170 मिमी बारिश दर्ज हुई है। मराठवाड़ा और विदर्भ में भारी तबाही मराठवाड़ा, विदर्भ और कोकण क्षेत्र में भारी बारिश से हालात बिगड़ गए। मराठवाड़ा के पानलोट क्षेत्र में कई गांव पानी में डूब गए। बादल फटने जैसी बारिश ने सैकड़ों मवेशों की जान ले ली और कई लोगों के घर जलमग्न हो गए। बड़ी संख्या में ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है। नांदेड जिले में हालात सबसे ज्यादा गंभीर रही और 9 लोगों की मौत हुई। हालांकि अब बारिश थम गई है और स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। सरकार ने प्रभावित परिवारों को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाया है और भोजन-पानी की व्यवस्था की है। मंत्री महाजन ने बताया कि जरूरत पड़ने पर सेना की मदद भी ली गई। नांदेड़ जिला कलेक्टर राहुल कार्डिले ने बताया कि सोमवार को हुई भारी बारिश के कारण मुखेड़ तालुका के 4 गांवों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। SDRF की टीम ने 300 लोगों को बचाया, लेकिन दुर्भाग्य से हसनद गांव में 5-6 लोगों की मौत हो गई। उनके शव आज बरामद किए गए…बारिश कम होने के बाद जलस्तर कम हो रहा है और स्थिति अभी नियंत्रण में है… लेकिन पैनगंगा और गोदावरी का बहाव अभी भी तेज है। हम स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। मुंबई में रेल और सड़क यातायात बाधित भारी बारिश का असर मुंबई पर भी पड़ा है। यहां लोकल ट्रेन सेवाएं प्रभावित रहीं। मध्य और हार्बर लाइन पर पटरियों पर पानी भर जाने से सेवाएं ठप हो गईं। जबकि पश्चिम रेलवे की उपनगरीय सेवाएं भी प्रभावित हुई और लोकल ट्रेनें धीमी गति से चलीं। मध्य और पश्चिम रेलवे की कुल 16 लंबी दूरी की ट्रनों को रद्द कर दिया गया। भारी बारिश और जलभराव के कारण मध्य रेलवे ने 14 लंबी दूरी की ट्रेनें (7 जोड़ी) रद्द कर दी हैं। जबकि पश्चिम रेलवे ने दो पैसेंजर ट्रेनों को रद्द किया है। मुंबई की सड़कों पर भी भीषण जलभराव हुआ, जिसके कारण जगह-जगह ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रही। मिलन सबवे समेत कई अहम मार्गों पर वाहनों की आवाजाही घंटों तक रोकनी पड़ी। हालात को देखते हुए प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे सावधानी बरतें और बिना जरूरत घरों से बाहर न निकलें। मुंबई (महाराष्ट्र) में लगातार बारिश से मीठी नदी का जलस्तर 3.9 मीटर तक बढ़ गया है। एहतियात के तौर पर कुर्ला के क्रांतीनगर इलाके से 350 लोगों को बीएमसी के स्कूल में शिफ्ट किया गया है। यहां उनके लिए खाने-पीने की व्यवस्था की गई है। हालांकि अब पानी का स्तर घट रहा है। मौसम विभाग ने मुंबई समेत कोंकण के लिए 20 अगस्त को ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी किया है।

राजस्थान के कोटा में नए एयरपोर्ट का निर्माण शुरू, कैबिनेट ने दी हरी झंडी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने मंगलवार को 1,507 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से कोटा-बूंदी (राजस्थान) में ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट विकसित करने के भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। राजस्थान सरकार ने ए-321 श्रेणी के विमानों के संचालन के लिए उपयुक्त ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट विकसित करने के उद्देश्य से एएआई को 440.06 हेक्टेयर भूमि ट्रांसफर की है। सरकार के द्वारा जारी बयान के मुताबिक, इस परियोजना में 20,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में एक टर्मिनल भवन का निर्माण किया जाएगा, जो व्यस्त समय के दौरान 1,000 यात्रियों को संभालने में सक्षम होगा और जिसकी कुल क्षमता बीस लाख यात्री प्रति वर्ष होगी। इसमें 3200 मीटर x 45 मीटर आकार का रनवे (हवाई पट्टी), ए-321 प्रकार के विमानों के लिए 07 पार्किंग बे (विमान पार्किंग क्षेत्र) के साथ एक एप्रन (विमान में ईंधन भरने और उनके रखरखाव का स्थान), दो लिंक टैक्सीवे, एटीसी-कम- टेक्निकल ब्लॉक, फायर स्टेशन, कार पार्किंग और संबंधित कार्य शामिल हैं। चंबल नदी के तट पर स्थित कोटा, राजस्थान की औद्योगिक राजधानी मानी जाती है। इसके अतिरिक्त, कोटा भारत के शैक्षिक कोचिंग केंद्र के रूप में भी प्रसिद्ध है। सरकार के मुताबिक, शैक्षिक और औद्योगिक क्षेत्रों की प्रमुखता के कारण कोटा में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में अनुमानित यातायात वृद्धि का समाधान करना है। कोटा में अभी एएआई के स्वामित्व वाला एयरपोर्ट मौजूद है, जहां 1220 मीटर x 38 मीटर आकार का एक रनवे है, जो कोड 'बी' विमानों (जैसे डीओ-228) के लिए उपयुक्त है। इसके अतिरिक्त मौजूदा एप्रन केवल दो विमानों के लिए उपयुक्त है। वर्तमान टर्मिनल भवन 400 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला है, जिसकी व्यस्त समय में 50 यात्रियों को संभालने की क्षमता है। सरकार ने बताया कि मौजूदा एयरपोर्ट को अपर्याप्त भूमि उपलब्धता और एयरपोर्ट के आसपास बढ़ते शहरीकरण के कारण वाणिज्यिक संचालन के लिए विकसित नहीं किया जा सकता है।