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उत्तराखंड सरकार का ऐलान: मदरसा बोर्ड होगा भंग, लागू होगा नया अल्पसंख्यक शिक्षा कानून

देहरादून उत्तराखंड सचिवालय में  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कुल पांच प्रस्तावों पर मुहर लगी है. इनमें एक फैसला उत्तराखंड अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान अधिनियम, 2025 से जुड़ा है. कैबिनेट ने इस विधेयक को मंजूरी दे दी है और इसे आज से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा. राज्य सरकार के मुताबिक, अब तक राज्य में अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान का दर्जा केवल मुस्लिम समुदाय को दिया जाता था, लेकिन प्रस्तावित अधिनियम के लागू होने के बाद सिख, जैन, ईसाई, बौद्ध और पारसी समुदायों को भी यह सुविधा मिलेगी. सरकार का दावा है कि इस कदम के साथ उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन जाएगा जिसने सभी अल्पसंख्यक समुदायों के शैक्षिक संस्थानों को मान्यता देने के लिए एकाकीकृत और पारदर्शी प्रक्रिया तैयार की है. अधिनियम लागू होने के बाद 1 जुलाई 2026 से उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड और उससे जुड़े अरबी-फारसी मदरसा मान्यता नियम, 2019 को भंग कर दिया जाएगा. बोर्ड की जगह अब उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया जाएगा. यह नया प्राधिकरण राज्य के सभी अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थानों की मान्यता और निगरानी करेगा. मदरसा बोर्ड के अंतर्गत 452 मदरसे पंजीकृत वर्तमान में राज्य में मदरसा बोर्ड के अंतर्गत 452 मदरसे पंजीकृत हैं. अधिनियम लागू होने के बाद इन्हें भी नए प्राधिकरण से मान्यता लेनी होगी. सरकार का कहना है कि यह नया ढांचा शिक्षा में क्वालिटी और ट्रांसपेरेंसी सुनिश्चित करेगा और संस्थागत अधिकारों की रक्षा करेगा. मान्यता के लिए संस्थानों का सोसाइटी एक्ट, ट्रस्ट एक्ट या कंपनी एक्ट में पंजीकरण अनिवार्य होगा. साथ ही, संबंधित भूमि और संपत्तियाँ संस्थान के नाम पर दर्ज होना जरूरी होगा. कांग्रेस ने धामी कैबिनेट के फैसले पर उठाए सवाल कांग्रेस ने इस विधेयक पर सवाल उठाए हैं. पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुजाता पॉल ने इसे लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है. उनका कहना है कि विधानसभा सत्र शुरू होने वाला है और सरकार के पास जनता से जुड़े कोई ठोस मुद्दे नहीं हैं. कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ रही है, लेकिन सरकार केवल एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने में जुटी है. सुजाता पॉल ने यह भी कहा कि हमारे संविधान में अनुच्छेद 29 और 30 अल्पसंख्यकों के शैक्षिक अधिकारों की गारंटी देते हैं. इसके अलावा, 1992 और 2004 में केंद्र सरकार ने अल्पसंख्यक शिक्षा से जुड़े कानून बनाए थे. ऐसे में यह कहना गलत है कि केवल मुसलमानों को ही अल्पसंख्यक होने का लाभ मिल रहा है. उन्होंने राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए. सुजाता पॉल के अनुसार, उत्तराखंड में आम शिक्षा व्यवस्था चरमराई हुई है. कई जगह स्कूल और शिक्षक नहीं हैं, लेकिन सरकार को इस विधेयक को लाने की इतनी जल्दी है मानो यही सबसे बड़ी प्राथमिकता हो. मदरसा बोर्ड भंग करने के प्लान पर क्या बोले एक्सपर्ट? पुष्कर सिंह धामी कैबिनेट के फैसले पर इस्लामिक मामलों के जानकार खुर्शीद अहमद का कहना है, "जो कानून बनाने की बात सरकार कर रही है वो आर्टिकल 30A का घोर उल्लंघन है. इसके साथ 2004 में लाए गए एक्ट के मुताबिक पहले से ही देश में अल्पसंख्यक आयोग मौजूद है, जो शैक्षिक संस्थानों को मान्यता देता है."

राधाकृष्णन ने पीएम मोदी से मुलाकात की, NDA का उपराष्ट्रपति पद उम्मीदवार बनाए गए

नई दिल्ली  महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. यह मुलाकात सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन द्वारा उन्हें उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाए जाने के एक दिन बाद हुई. वह एनडीए की विभिन्न बैठकों में भाग लेने के लिए यहां पहुंचे और कई नेताओं से मुलाकात की. मुलाकात के तुरंत बाद मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘सी. पी. राधाकृष्णन जी से मुलाकात की. एनडीए की तरफ से उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाए जाने पर उन्हें शुभकामनाएं दीं. जनसेवा के लंबे अनुभव और विभिन्न क्षेत्रों में उनकी विशेषज्ञता हमारे देश को समृद्ध बनाएगी. वह पहले की तरह ही समर्पण और दृढ़ निश्चय के साथ देश की सेवा करते रहें.’’ राधाकृष्णन 20 अगस्त को अपना नामांकन दाखिल कर सकते हैं. मंगलवार को एनडीए संसदीय दल की बैठक में उन्हें सम्मानित किए जाने की उम्मीद है. इससे पहले सोमवार को नई दिल्ली पहुंचने पर महाराष्ट्र के राज्यपाल और एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन का केंद्रीय मंत्री किरेन रीजिजू, राम मोहन नायडू. प्रह्लाद जोशी के अलावा दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता व अन्य ने स्वागत किया. चंद्रपुरम पोन्नुसामी राधाकृष्णन वर्तमान में 31 जुलाई, 2024 से महाराष्ट्र के 24वें राज्यपाल के रूप में कार्यरत हैं. इससे पहले उन्होंने फरवरी 2023 से जुलाई 2024 तक झारखंड के राज्यपाल के रूप में कार्य किया था. उन्होंने मार्च और जुलाई 2024 के बीच तेलंगाना के राज्यपाल और पुडुचेरी के उपराज्यपाल के रूप में अतिरिक्त प्रभार भी संभाला था. वरिष्ठ भाजपा नेता राधाकृष्णन कोयम्बटूर से दो बार लोकसभा के लिए चुने गए तथा इससे पहले तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं. कांग्रेस ने एनडीए द्वारा सीपी राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाये जाने की आलोचना की है और उन्हें "एक और आरएसएस का आदमी" कहा है. बता दें कि उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है, हालांकि, स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए 21 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन जगदीप धनखड़ के इस्तीफा देने के बाद यह पद रिक्त हो गया था. उपराष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है, जिसमें संसद के दोनों सदनों के सांसद शामिल होते हैं. उपराष्ट्रपति के चुनाव संविधान के अनुच्छेद 64 और 68 के प्रावधानों द्वारा शासित होते हैं. चुनाव आयोग राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव अधिनियम, 1952 द्वारा उपराष्ट्रपति चुनावों को अधिसूचित करता है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 66(1) के अनुसार, उपराष्ट्रपति का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली द्वारा एकल संक्रमणीय मत के माध्यम से होगा तथा ऐसे चुनाव में मतदान गुप्त मतदान द्वारा होगा.

भारतीय मिसाइलों से बचने के लिए ईरान बॉर्डर पर छिपे पाकिस्तानी युद्धपोत, ऑपरेशन सिंदूर का खुलासा

नई दिल्ली 6 और 7 मई की रात को भारतीय हमलों ने पाकिस्तान और पीओजेके में नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया. इसके बाद नई दिल्ली ने इस्लामाबाद के डीजीएमओ को सूचित किया कि उसका मिशन पूरा हो गया. हालांकि, पाकिस्तान के नेतृत्व ने कड़ी जवाबी कार्रवाई की बात कही. ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) टीम द्वारा विश्लेषित कराची और ग्वादर बंदरगाहों की सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की नौसेना का रुख रक्षात्मक था. संघर्ष के चरम पर, पाक नौसेना (PN) के युद्धपोतों को कराची के नौसैनिक गोदाम से हटाकर व्यावसायिक टर्मिनलों पर लाया गया, जैसा कि सैटेलाइट तस्वीरों में दिखाई देता है. इस बीच, अन्य युद्धपोत ग्वादर के पश्चिमी बंदरगाह पर शरण लेते नजर आए, जो ईरान की सीमा से महज 100 किमी दूर है, बजाय इसके कि वे भारत की ओर पूर्व की ओर बढ़ें. 8 मई की कराची बंदरगाह की सैटेलाइट तस्वीर बताती है कि पाक नौसेना के युद्धपोत व्यावसायिक बंदरगाह और कंटेनर टर्मिनल पर खड़े थे. शीर्ष सैन्य विशेषज्ञों ने तनाव के दौरान पाकिस्तान नौसेना की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं. सेवानिवृत्त वाइस एडमिरल एस.सी. सुरेश बंगारा, जो दक्षिणी नौसेना कमान के पूर्व कमांडर-इन-चीफ रहे और 1971 में कराची बंदरगाह पर हुए साहसिक हमले में शामिल थे. उन्होंने कहा किचूंकि हमारा आतंकी ढांचे पर 7 मई को हमला हुआ था और पाकिस्तान की तीनों सेनाओं को पूरी तरह सतर्क रहना चाहिए था, फिर भी उनके अग्रिम युद्धपोत बंदरगाह पर दिखना उनकी कम ऑपरेशनल तैयारियों को दर्शाता है.  उन्होंने आगे एक पैटर्न की ओर इशारा किया, जिसमें पाक नौसेना के जहाज व्यावसायिक टर्मिनलों पर खड़े होते हैं और ऑपरेशन के दौरान व्यावसायिक विमानों की आड़ लेते हैं. उन्हें व्यावसायिक बंदरगाह क्षेत्र में लाना मिसाइल हमलों से बचने की कोशिश है.  उन्होंने इंडिया टुडे से कहा कि उनके सैन्य विमानों को व्यावसायिक उड़ानों के पास उड़ाना उनके नागरिक संसाधनों को बलि चढ़ाने की प्रवृत्ति दिखाता है. पाकिस्तानी युद्धपोत ईरान सीमा के पास शरण लेते हैं ऑपरेशन सिंदूर से ठीक छह महीने पहले, पाकिस्तान की नौसेना ने दावा किया था कि उसने एक नया हथियार-'स्वदेशी रूप से विकसित' P282 शिप-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल जोड़ लिया है. इसकी रेंज 350 किलोमीटर बताई गई थी. इसे 'उच्च सटीकता' वाले हमलों का वादा था. इस परीक्षण को एक सैन्य प्रचार वीडियो में दिखाया गया, जिसमें चीनी निर्मित जुल्फिकार-क्लास (F-22P) फ्रिगेट ने मिसाइल दागी थी. लेकिन जब मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर शुरू हुआ, तो स्थिति अलग दिखी. अंतरिक्ष कंपनी मैक्सर टेक्नोलॉजीज से मिली उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाली व्यावसायिक तस्वीरों से पता चलता है कि इसके आधे जुल्फिकार-क्लास फ्रिगेट और अन्य युद्धपोत पश्चिम में ग्वादर में खड़े थे, जो ईरान की सीमा से महज 100 किलोमीटर दूर है. चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का गहना कहे जाने वाले ग्वादर बंदरगाह को हाल ही में अस्थायी नौसैनिक शरण स्थल में बदल दिया गया. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि 10 मई तक इसके कंटेनर भंडारण क्षेत्र खाली थे, लेकिन डॉक पर सैन्य जहाजों की भीड़ थी. इसमें दो जुल्फिकार-क्लास फ्रिगेट, दो बड़े तुगरिल-क्लास फ्रिगेट, नौसेना का एकमात्र अमेरिकी निर्मित ओलिवर हेजर्ड पेरी-क्लास फ्रिगेट, और दो समुद्री गश्ती जहाज शामिल थे. सेवानिवृत्त वाइस एडमिरल बंगारा ने कहा, "ग्वादर, जहां व्यावसायिक गतिविधियां नहीं थीं, वहां अग्रिम पंक्ति के जहाजों को रखना गलत था, क्योंकि वे आसानी से नजर आते थे. ऐसा लगता है कि समुद्र में उनकी एकमात्र ताकत उनकी पनडुब्बियां थीं. भारत की ताकत और पाकिस्तान का दबाव इंटेल लैब के भू-खुफिया शोधकर्ता डेमियन साइमन ने बताया, "ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत ने अपनी पहली जंगी तैनाती की, जिसकी अरब सागर में गति को पाक नौसेना ने उजागर किया. इससे नई दिल्ली के दबाव का अंदाजा हुआ. भारत के कराची पर संभावित हमले की तैयारी से पाकिस्तान ने अपनी नौसेना को तितर-बितर कर दिया और जहाजों को नागरिक डॉक पर ले गया.  कराची के व्यावसायिक टर्मिनलों पर युद्धपोत पूर्व में, कराची के नौसैनिक गोदाम असामान्य रूप से खाली थे, जबकि 8 मई की सैटेलाइट तस्वीरों में युद्धपोत व्यावसायिक कार्गो टर्मिनलों पर खड़े दिखे. बादलों से आंशिक रूप से ढके चित्रों में कम से कम चार पाकिस्तानी नौसेना (PN) जहाज व्यावसायिक बंदरगाहों और कंटेनर टर्मिनल के पास दिखाई दिए. इसमें PNS अलमगीर, एक बाबर-क्लास कोरवेट, और एक डेमन ऑफशोर पेट्रोल वेसल (OPV) शामिल थे, जो कार्गो जहाज के पास खड़े थे, जहां कंटेनर लोड-अनलोड हो रहे थे. एक और नौसेना फ्रिगेट कंटेनर टर्मिनल पर था, न कि नौसैनिक गोदाम पर. बंगारा ने कहा, "पाक नौसेना का सेना-प्रधान ढांचे में कोई खास रोल नहीं है. भारत ने संयुक्त ऑपरेशन की शानदार योजना बनाई और ऑपरेशन सिंदूर के सभी लक्ष्य हासिल किए. हमने साफ किया कि हम दंडात्मक जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार हैं, जिससे बिना समुद्र से एक भी मिसाइल दागे ऑपरेशन खत्म हुआ. हमारे नौसेना का शक्तिशाली हमला उनके समुद्री संसाधनों को तबाह कर सकता था, जैसे 10 अगस्त को PAF के हवाई ठिकानों को नुकसान हुआ. संयुक्त ऑपरेशन युद्ध को लंबा खींचने के लिए गोला-बारूद बचाते हैं. याद रखें, ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ रुका है. ग्वादर का नया इस्तेमाल साइमन ने ग्वादर के उपयोग में बदलाव पर ध्यान दिया. "यह दबाव उस समय आया जब पाकिस्तान की पनडुब्बी शाखा की कई नौकाएं मरम्मत के लिए बाहर थीं, जिससे समुद्री डर कम हो गया. इस बढ़ते दबाव में ग्वादर—एक लंबे समय से संघर्षशील व्यावसायिक बंदरगाह नौसैनिक पीछे हटने का आधार बना. इसके 600 मीटर के डॉक में युद्धपोत और ऑफशोर टैंकरों ने इस्लामाबाद को कराची से दूर मजबूत आधार दिया. भारत की तैयारियां भारतीय नौसेना ने पहले कहा था कि अगर जरूरत पड़ी तो कराची पर हमला करने को तैयार है. मई 2025 में संयुक्त मीडिया ब्रीफिंग में वाइस एडमिरल ए.एन. प्रमोद ने कहा था कि हमारी सेनाएं अरब सागर में मजबूत स्थिति में थीं और समुद्र व जमीन पर, कराची, पर अपने चुने समय पर हमला करने की पूरी तैयारी थी.

नेतन्याहू का हमास पर हमला: गाजा में बच्चों की हड्डियों की तस्वीरें हैं भ्रामक प्रचार

तेल अवीव हमास के झूठ पर आंखें खोलें… इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू रविवार को जब मीडिया से मुखातिब हुए. तब उन्होंने प्रेस के सामने हमास के झूठ की पोल खोलने का दावा किया. इधर गाजा भूख से बिलख रहा है और उधर नेतन्याहू ने इसी गाजापट्टी को लेकर अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं. वह बार-बार कह रहे हैं कि उनका इरादा गाजा पर पूर्ण नियंत्रण का नहीं है तो ऐसे में सवाल उठता है कि फिर आखिर उनका इरादा क्या है? नेतन्याहू ने रविवार को इंटरनेशनल मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि जितनी जल्दी हो सके, वह उतनी जल्दी गाजा में युद्ध को खत्म करना चाहते हैं. गाजा सिटी को कैप्चर करना सभी 50 इजरायली बंधकों की रिहाई सुनिश्चित करने का एकमात्र तरीका है.  इस दौरान नेतन्याहू ने कहा कि उनका लक्ष्य गाजापट्टी से हमास को पूरी तरह खत्म करना है. उनका कहना है कि हमास का पूरी तरह से खात्मा किए बिना गाजा में स्थायी शांति संभव नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि गाजा पर इजरायल का नियंत्रण स्थायी कब्जे के लिए नहीं है, बल्कि हमास के सैन्य ढांचे को नष्ट करने और क्षेत्र को सैन्यीकरण से मुक्त कराने के लिए है.  नेतन्याहू ने दावा किया कि इजरायल का इरादा गाजा पर शासन करने या उसे अपने देश में मिलाने का नहीं है. इसके बजाय गाजा में एक नागरिक प्रशासन स्थापित किया जाएगा जो ना तो इजरायल के लिए खतरा और क्षेत्र में शांति बनाए रखे. नेतन्याहू ने कहा कि गाजा को किसी ऐसी अस्थायी सरकार को सौंपा जाएगा. जो ना तो हमास हो और न ही इजरायल के लिए खतरा पैदा करने वाला कोई संगठन हो. उन्होंने गाजा में बंधकों की रिहाई को अपनी प्राथमिकता बताते हुए कहा कि हमास के साथ युद्ध और बंधकों की रिहाई के लक्ष्य आपस में जुड़े हुए हैं. हालांकि, बंधकों के परिवारों और कुछ आलोचकों का कहना है कि गाजा पर पूर्ण सैन्य नियंत्रण की उनकी योजना बंधकों की जान को खतरे में डाल सकती है. इससे पहले इजरायल की सुरक्षा कैबिनेट ने नेतन्याहू की योजना को मंजूरी दी, जिसमें गाजा और अन्य प्रमुख क्षेत्रों पर पूर्ण सैन्य नियंत्रण स्थापित करना शामिल है. इसका उद्देश्य हमास के बचे हुए ठिकानों को खत्म करना और क्षेत्र में इजरायल की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. गाजा युद्ध खत्म करने के 5 तरीके – हमास अपने हथियार डाल दे – सभी इजरायली बंधकों को रिहा किया जाए – गाजा का विसैन्यीकरण हो – गाजा में इजरायल का सैन्य प्रभुत्व – गाजा में ऐसी व्यवस्था तैयार करना, जो ना तो हमास के नियंत्रण में हो और ना हो फिलीस्तीनी प्राधिकरण के इजरायली पीएम नेतन्याहू ने बताया कि गाजापट्टी में हमास के अभी भी दो गढ़ बचे हुए हैं, जो गाजा सिटी और सेंट्रल कैंप्स ऑफ मोआसी हैं. नेतन्याहू ने कहा कि हमास को पूरी तरह खत्म करना इजरायल की सुरक्षा के लिए आवश्यक है और इसके बिना कोई समाधान टिकाऊ नहीं होगा. गाजा में भुखमरी और मानवीय संकट के सवालों पर नेतन्याहू ने इन आरोपों को खारिज करने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि मीडिया में भूख से बिलखते बच्चों की जो तस्वीरें गाजा की बताकर शेयर की जा रही है. दरअसल वो प्रोपेगैंडा है. ये तस्वीरें गाजा की नहीं हैं. उन्होंने बकायदा प्रेजेंटेशन के साथ इंटरनेशनल मीडिया में छप रही इन बच्चों की तस्वीरों का ब्योरा दिया और दावा किया कि इन्हें गाजा का बताकर इजरायल को बदनाम किया जा रहा है.  बता दें कि नेतन्याहू ने यूरोपीय देशों और संयुक्त राष्ट्र की आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहा कि इजरायल एक लोकतांत्रिक देश है जो अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करता है और उनकी कार्रवाइयां आतंकवाद के खिलाफ हैं.जर्मनी, फ्रांस, कनाडा और ब्रिटेन जैसे देशों ने गाजा पर पूर्ण सैन्य नियंत्रण की योजना की आलोचना की है. संयुक्त राष्ट्र और कई देशों ने इस मुद्दे पर सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाने की मांग की है.

पीएम मोदी ने सांसदों को दिए नए आवास, नई दिल्ली में किया लोकार्पण

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज नई दिल्ली में बाबा खड़क सिंह मार्ग पर बने 184 नए टाइप-7 बहुमंजिला फ्लैट्स का उद्घाटन किया। उद्घाटन कार्यक्रम सुबह 10 बजे हुआ। इस दौरान पीएम मोदी ने सिंदूर का पौधा भी लगाया। यह परिसर सांसदों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। प्रत्येक फ्लैट में 5,000 वर्ग फुट क्षेत्रफल है, जिसमें कार्यालय और स्टाफ के लिए जगह भी है। यह परियोजना गृह 3-स्टार रेटिंग और राष्ट्रीय भवन संहिता के अनुरूप है। इमारतें भूकंपरोधी हैं और दिव्यांगों के लिए अनुकूलित हैं।   जानकारी के अनुसार इस परिसर को आत्मनिर्भर बनाने के लिए डिजाइन किया गया है और यह संसद सदस्यों की कार्यात्मक जरूरतों को पूरा करने के लिए आधुनिक सुविधाओं की पूरी श्रृंखला से सुसज्जित है। हरित प्रौद्योगिकी को सम्मिलित करते हुए, यह परियोजना जीआरआईएचए 3-स्टार रेटिंग के मानकों का पालन करती है और राष्ट्रीय भवन संहिता (एनबीसी) 2016 का अनुपालन करती है। इन पर्यावरणीय रूप से स्थायी विशेषताओं से ऊर्जा संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन और प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन में योगदान मिलने की आशा है। उन्नत निर्माण तकनीक (विशेष रूप से, एल्युमीनियम शटरिंग के साथ मोनोलिथिक कंक्रीट) के उपयोग ने संरचनात्मक स्थायित्व सुनिश्चित करते हुए परियोजना को समय पर पूरा करना संभव बनाया। यह परिसर दिव्यांगजनों के अनुकूल भी है, जो समावेशी डिज़ाइन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। संसद सदस्यों के लिए अनुकूल आवास की कमी के कारण इस परियोजना का विकास आवश्यक हो गया था। भूमि की सीमित उपलब्धता के कारण, भूमि उपयोग को अनुकूलित करने और रखरखाव लागत को न्यूनतम करने के ध्येय से ऊर्ध्वाधर आवास विकास पर लगातार बल दिया गया है। प्रत्येक आवासीय इकाई में लगभग 5,000 वर्ग फुट का कार्पेट क्षेत्र है, जो आवासीय और आधिकारिक दोनों कार्यों के लिए पर्याप्त जगह प्रदान करता है। कार्यालयों, कर्मचारियों के आवास और एक सामुदायिक केंद्र के लिए समर्पित क्षेत्रों को शामिल करने से संसद सदस्यों को जन प्रतिनिधि के रूप में अपनी उत्तरदायित्वों को पूरा करने में मदद मिलेगी। परिसर के सभी भवनों का निर्माण आधुनिक संरचनात्मक डिज़ाइन मानदंडों के अनुरूप भूकंपरोधी बनाया गया है। सभी निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक और सुदृढ़ सुरक्षा तंत्र कार्यान्वित किया गया है।

रनवे पर विमान मौजूद था फिर भी इमरजेंसी लैंडिंग, एयर इंडिया ने कांग्रेस सांसदों के आरोपों को किया खारिज

नई दिल्ली कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल समेत कई सांसदों को तिरुवनंतपुरम से नई दिल्ली लेकर आ रही एयर इंडिया की एक उड़ान तब हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बच गई, जब रविवार रात अचानक उसे चेन्नई डायवर्ट कर दिया गया। दरअसल, जब चालक दल को रास्ते में खराब मौसम के कारण एक संदिग्ध तकनीकी खराबी का पता चला, तब उसे चेन्नई डायवर्ट कर दिया गया लेकिन वहां कथित तौर पर एक ही रनवे पर दो विमान आ गए। इसके बाद इस उड़ान को फिर से ऊपर हवा में उठा लिया गया। एयरलाइन ने पुष्टि की है कि उड़ान संख्या AI2455 चेन्नई में सुरक्षित उतर गई और विमान की जरूरी जांच की जाएगी। विमान ने जैसे ही तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे से उड़ान भरी, उसके कुछ देर बाद ही वह टर्बुलेंस की चपेट में आ गया। इसके बाद उसे चेन्नई की ओर डायवर्ट कर दिया गया।  इस विमान ने रात 8 बजे तिरुवनंतपुरम से उड़ान भरी थी लेकिन रात 10.35 पर चेन्नई में उतार दिया गया। एयर इंडिया के एक प्रवक्ता ने कहा, "10 अगस्त को तिरुवनंतपुरम से दिल्ली के लिए उड़ान भरने वाली AI2455 के चालक दल ने संदिग्ध तकनीकी समस्या और रास्ते में खराब मौसम के कारण एहतियातन चेन्नई की ओर अपना मार्ग बदल लिया। विमान चेन्नई में सुरक्षित उतर गया, जहाँ विमान की जरूरी जाँच की जाएगी। हमें प्रभावित यात्रियों को हुई असुविधा के लिए खेद है। चेन्नई में हमारे सहयोगी यात्रियों की परेशानी कम करने के लिए सहायता प्रदान कर रहे हैं और यात्रियों को जल्द से जल्द उनके गंतव्य तक पहुँचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था कर रहे हैं।" वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर दावा किया कि यह यात्रा भयावह रूप से त्रासदी के करीब पहुंच गई थी. उन्होंने कहा कि फ्लाइट पहले से ही लेट थी और उड़ान भरने के बाद तेज और अप्रत्याशित टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा. करीब एक घंटे बाद कैप्टन ने फ्लाइट सिग्नल फॉल्ट की जानकारी दी और विमान को चेन्नई डाइवर्ट कर दिया. कांग्रेस सांसद के मुताबिक, लगभग दो घंटे तक फ्लाइट चेन्नई एयरपोर्ट के ऊपर क्लियरेंस का इंतजार करती रही. पहली कोशिश में लैंडिंग के दौरान रनवे पर पहले से ही एक अन्य विमान मौजूद था. उस समय कैप्टन के त्वरित निर्णय से विमान को ऊपर खींच लिया गया और सभी यात्रियों की जान बच गई. फ्लाइट दूसरी कोशिश में सुरक्षित उतरी. वेणुगोपाल ने कहा, "हमें स्किल और किस्मत दोनों ने बचाया, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा किस्मत पर निर्भर नहीं हो सकती." कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने भी किया शेयर कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने भी वेणुगोपाल की पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा कि वह "शॉक्ड और डरे हुए" हैं. उन्होंने कहा कि AI 2455 फ्लाइट में टर्बुलेंस, फ्लाइट सिग्नल फॉल्ट और चेन्नई में रनवे पर लगभग टक्कर जैसी स्थिति बनी. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू को टैग करते हुए कहा कि यात्री सुरक्षा किस्मत पर नहीं छोड़ी जा सकती और तुरंत जवाब और कार्रवाई की मांग की. एअर इंडिया ने दी कांग्रेस सांसदों के दावे पर सफाई इस पूरे मामले पर एअर इंडिया ने बयान जारी कर दोनों सांसदों के दावों को खारिज किया है. एयरलाइन ने कहा, "चेन्नई डाइवर्जन एक प्रीकॉशनरी कदम था, जो संदिग्ध टेक्निकल इश्यू और खराब मौसम की वजह से लिया गया. पहली कोशिश में लैंडिंग के समय चेन्नई ATC ने गो-अराउंड का निर्देश दिया, लेकिन इसका कारण रनवे पर कोई अन्य विमान होना नहीं था." एअर इंडिया ने आगे कहा कि उनके पायलट ऐसे हालात से निपटने के लिए प्रशिक्षित होते हैं और इस फ्लाइट में भी सभी मानक प्रक्रियाओं का पालन किया गया. कंपनी ने इस घटना को यात्रियों के लिए असहज अनुभव बताते हुए खेद जताया और कहा कि सुरक्षा हमेशा उनकी पहली प्राथमिकता है. कांग्रेस महासचिव ने यात्रा को कष्टप्रद बताया विमान में सवार कांग्रेस महासचिव और सांसद केसी वेणुगोपाल ने इस घटना को एक कष्टप्रद यात्रा बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “तिरुवनंतपुरम से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान संख्या AI 2455 – जिसमें मैं, कई सांसद और सैकड़ों यात्री सवार थे -एक भयावह त्रासदी के करीब पहुँच गई। देरी से शुरू हुई उड़ान एक कष्टदायक यात्रा में बदल गई। उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद, हमें अभूतपूर्व गड़बड़ी का सामना करना पड़ा। लगभग एक घंटे बाद, कैप्टन ने उड़ान सिग्नल में खराबी की घोषणा की और विमान को चेन्नई की ओर मोड़ दिया। लगभग दो घंटे तक, हम उतरने की अनुमति का इंतज़ार करते हुए हवाई अड्डे के चक्कर लगाते रहे, जब तक कि हमारे पहले प्रयास के दौरान एक दिल दहला देने वाला क्षण नहीं आ गया – बताया जाता है कि उसी रनवे पर एक और विमान था। उस क्षण, कैप्टन के तुरंत रुकने के फैसले ने विमान में सवार सभी लोगों की जान बचा ली। दूसरे प्रयास में विमान सुरक्षित उतर गया।” भाग्य और पायलट की कुशलता से बचे केसी वेणुगोपाल के मुताबिक, यह विमान सब के भाग्य और पायलट की कुशलता और सूझबूझ से बच सका। उन्होंने मामले में जवाबदेही तय करने के लिए घटना की जाँच की माँग की है। उन्होंने आगे कहा, "हम पायलट की कुशलता और भाग्य से बच गए। यात्रियों की सुरक्षा भाग्य पर निर्भर नहीं हो सकती। मैं @DGCAIndia और @MoCA_GoI से आग्रह करता हूँ कि इस घटना की तत्काल जाँच करें, जवाबदेही तय करें और सुनिश्चित करें कि ऐसी चूक फिर कभी न हो।" रनवे पर दो विमान के आरोप खारिज केसी वेणुगोपाल की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए, एयर इंडिया ने टिप्पणी की, "डियर मिस्टर वेणुगोपाल, हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि चेन्नई की ओर फ्लाइट को मोड़ना एक संदिग्ध तकनीकी समस्या और खराब मौसम की स्थिति के कारण एहतियाती था। चेन्नई हवाई अड्डे पर पहली बार उतरने के प्रयास के दौरान चेन्नई एटीसी द्वारा गो-अराउंड का निर्देश दिया गया था, न कि रनवे पर किसी अन्य विमान की मौजूदगी के कारण ऐसा हुआ।"

गाजा संघर्ष: अल जज़ीरा के 5 पत्रकारों की जान गई, IDF की एक पत्रकार को आतंकी कहने वाली प्रतिक्रिया

गाजा  गाजा में इजरायल की तरफ से लगातार हवाई हमले जारी हैं. इस बीच, गाजा शहर में पत्रकारों द्वारा उपयोग किए जा रहे एक तंबू पर इजरायली हमले में कतर के मीडिया चैनल अल जजीरा अरबी के रिपोर्टर अनस अल-शरीफ की जान चली गई. इससे पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर IDF की बमबारी का वीडियो शेयर किया था. उनके आखिरी पोस्ट में लिखा था, "लगातार बमबारी हो रही है, दो घंटे से गाजा शहर पर इजरायली आक्रमण तेज हो गया है." अल जज़ीरा के मुताबिक, 28 साल के अल-शरीफ की मौत तब हुई, जब गाजा शहर में अल-शिफा अस्पताल के मेन गेट के बाहर पत्रकारों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे एक तंबू पर इज़राइली हवाई हमला हुआ. अल-शिफा अस्पताल के एक अधिकारी ने बताया कि अस्पताल के बाहर एक तंबू को निशाना बनाकर किए गए इस हमले में कुल सात लोगों की मौत हो गई. अल जज़ीरा ने इसी हमले में संवाददाता मोहम्मद क़ेरीकेह, कैमरा ऑपरेटर इब्राहिम ज़हेर, मोहम्मद नौफ़ल और मोआमेन अलीवा के साथ-साथ उनके असिस्टेंट मोहम्मद नौफ़ल की मौत की पुष्टि की है. इज़राइली सेना ने एक बयान जारी करते हुए अल-शरीफ पर हमास सेल का नेतृत्व करने का आरोप लगाया है.  इजरायल की सेना ने कहा, "अनस अल शरीफ हमास आतंकवादी संगठन में एक आतंकवादी सेल के प्रमुख के रूप में काम करता था और इजरायली नागरिकों और आईडीएफ सैनिकों के खिलाफ रॉकेट हमलों को आगे बढ़ाने के लिए जिम्मेदार था." अनस अल-शरीफ़ कौन थे? अनस अल-शरीफ़ गाज़ा के एक जाने-माने पत्रकार थे, जिन्होंने अल जज़ीरा अरबी के लिए नॉर्थ स्ट्रिप से बड़े स्तर पर रिपोर्टिंग की थी. गाज़ा शहर स्थित अल-अक्सा यूनिवर्सिटी के मीडिया डिपार्टमेंट से ग्रेजुएट अनस अल-शरीफ की रिपोर्टिंग के लिए 2018 में फ़िलिस्तीन में उन्हें बेस्ट यंग जर्नलिस्ट अवार्ड मिला.  जुलाई में, इज़राइली सैन्य प्रवक्ता अविचाय अद्राई ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें अल-शरीफ़ पर हमास की सशस्त्र शाखा का सदस्य होने का आरोप लगाया गया था. वहीं, अल जज़ीरा मीडिया नेटवर्क ने इस दावे को खारिज कर दिया और इज़राइल पर पत्रकारों के खिलाफ 'उकसाने का अभियान' चलाने का आरोप लगाया. अल जज़ीरा ने कहा, "नेटवर्क इसकी कड़ी निंदा करता है. गाजा पर चल रहे इज़राइली युद्ध की कवरेज की शुरुआत से ही हमारे कर्मचारियों के खिलाफ लगातार उकसावे की कोशिश हो रही है. नेटवर्क इस उकसावे को इलाके में अपने पत्रकारों को निशाना बनाने को सही ठहराने का एक खतरनाक प्रयास मानता है." पत्रकारों की सुरक्षा समिति (CPJ) ने पिछले महीने अद्राई की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अल-शरीफ़ की सुरक्षा का आह्वान किया था. सीपीजे की क्षेत्रीय निदेशक सारा कुदाह ने एक बयान में कहा, "यह पहली बार नहीं है, जब अल-शरीफ़ को इज़राइली सेना ने निशाना बनाया है, लेकिन अब उनकी जान को गंभीर ख़तरा है."

पाकिस्तान कबाड़ से भरा डंपिंग ट्रक… नफरत के बीच सच बयां करते पाक सेना प्रमुख आसिम मुनीर के तीखे शब्द

नई दिल्ली पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने भारत को धमकी देते देते कई कड़वी सच्चाइयां भी स्वीकार की है. आसिम मुनीर ने भारत की तुलना चमचमाती मर्सडीज कार से की है जो हाईवे पर फर्राटा भर रही है, जबिक मुनीर ने पाकिस्तान को कबाड़ ढोने वाली ट्रक कहा है. उन्होंने भारत को धमकी देते हुए कहा है कि सोचिए अगर इन दोनों गाड़ियों की टक्कर हो जाए तो नुकसान किसका होगा?  मुनीर ने ये बयान अमेरिका में दिया है. आसिम मुनीर ने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान की हुई पिटाई के बाद जमकर अपनी भड़ास निकाली. पाकिस्तान के आर्मी चीफ ने बचकानी धमकी देते हुए कहा कि अगर भारत की वजह से पाकिस्तान के अस्तित्व पर संकट आता है तो पाकिस्तान आधी दुनिया को अपने साथ ले डूबेगा. आसिम मुनीर का ये बयान किसी तीसरे देश से भारत के खिलाफ पाकिस्तान द्वारा दी गई पहली धमकी है.  आसिम मुनीर अमेरिका के टैम्पा में एक ब्लैक टाई डिनर पार्टी में शामिल हो रहे था. इस पार्टी को पाकिस्तानी बिजनेसमैन अदनान असद ने आयोजित किया था. अदनान असद टैम्पा में पाकिस्तान के मानद काउंसल हैं.  10 मिसाइल से फारिग कर देंगे.. इस साल मई में हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद आसिम मुनीर का ये दूसरा पाकिस्तान दौरा है. पाकिस्तान में मुल्ला जनरल का टाइटल पाने वाला आसिम मुनीर ने सिंधु जल समझौते को सस्पेंड करने पर भारत को धमकी दी. अंग्रेजी वेबसाइट द प्रिंट ने वहां मौजूद सूत्रों के आधार पर लिखा है, ''आसिम मुनीर ने कहा- हम भारत द्वारा डैम बनाए जाने का इंतजार करेंगे, और भारत जब ऐसा कर लेगा तो फिर 10 मिसाइल से फारिग कर देंगे, सिंधु नदी भारत की फैमिली प्रोपर्टी नहीं है, हमें मिसाइलों की कमी नहीं है.'' बता दें कि ब्लैक टाई डिनर एक औपचारिक सोशल पार्टी होती है. इसमें मेजबान मेहमानों से अपेक्षा करता है कि  ब्लैक टाई ड्रेस कोड का पालन करेंगे. यह ड्रेस कोड उच्च स्तर की औपचारिकता को दर्शाता है और आमतौर पर रात के समय आयोजित होने वाले विशेष अवसरों, जैसे गाला, पुरस्कार समारोह, शादी, या उच्च-स्तरीय डिनर पार्टियों में देखा जाता है. इस पार्टी में पुरुषों को काला टक्सीडो, सफेद शर्ट, काला बो टाई, काला वेस्ट या कमरबैंड और पॉलिश किए हुए औपचारिक जूते पहनने की अपेक्षा की जाती है. इस पार्टी में जिन मेहमानों को बुलाया गया था तो उन्हें मोबाइल फोन या फिर दूसरे डिजिटल डिवाइस लाने की अनुमति नहीं थी.  फ्लोरिडा के टैम्पा में आयोजित इस डिनर के हर निवाले में भारत के प्रति नफरत, मजहबी कट्टरवाद भरा हुआ था.  फील्ड मार्शल मुनीर ने कहा, "हम भारत के पूर्व से शुरुआत करेंगे जहां उन्होंने अपने सबसे मूल्यवान संसाधन स्थापित किए हैं और फिर पश्चिम की ओर बढ़ेंगे." बता दें कि फील्ड मार्शल मुनीर की छवि धार्मिक रूप से कट्टर जनरल की है. मुनीर पाकिस्तान का पहला आर्मी चीफ है जिसने अपनी पढ़ाई मदरसे से की है. आसिम मुनीर अक्सर अपने तर्कों के समर्थन में मजहबी उदाहरणों का इस्तेमाल करते हैं.  भारत मर्सडीज की तरह चमचमाती कार, पाकिस्तान डंप ट्रक पाकिस्तान भारत को कैसे नुकसान कर पहुंचा सकता है ये बताने के लिए मुनीर ने एक उदाहरण दिया. जहां उसने भारत को एक चमचमाती मर्सिडीज बताया और पाकिस्तान को बजरी से भरा एक डंप ट्रक कहा.  फील्ड मार्शल मुनीर ने कहा, "मैं स्थिति को समझाने के लिए एक साधारण सा उदाहरण इस्तेमाल करूंगा. भारत फेरारी की तरह हाईवे पर आती हुई एक चमचमाती मर्सिडीज है, लेकिन हम कबाड़, ईंट-पत्थर से भरा एक डंप ट्रक हैं. अगर ये ट्रक उस कार से टकराता है, तो नुकसान किसका होगा?" फील्ड मार्शल मुनीर ने इस अवसर का उपयोग पाकिस्तानी राजनीति और रणनीतिक निर्णय लेने में सेना की भागीदारी का पक्ष रखने के लिए भी किया.  मुनीर ने पाकिस्तान के मंत्री बाबर खान गौरी के बयान की चर्चा करते हुए कहा कि वे कहते हैं कि युद्ध इतना गंभीर है कि उसे जनरलों पर नहीं छोड़ा जा सकता, लेकिन राजनीति भी इतनी गंभीर है कि उसे राजनेताओं पर नहीं छोड़ा जा सकता." ट्रंप की तारीफ में मस्का लगाया फील्ड मार्शल मुनीर ने भारत और अमेरिका के बीच हालिया कूटनीतिक तनाव का भी ज़िक्र किया. मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान को प्रतिद्वंद्वी शक्तियों के बीच संतुलन बनाने के लिए मास्टरक्लास देना शुरू कर देना चाहिए. मुनीर ने कहा, "हमारी सफलता का असली कारण यह है कि हम कंजूस नहीं हैं. अगर कोई अच्छा काम करता है, तो हम उसकी प्रशंसा करते हैं और उसे महत्व देते हैं. इसीलिए हमने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकित किया है." मुनीर ने इस दौरे में  वरिष्ठ अमेरिकी राजनीतिक और सैन्य हस्तियों के साथ-साथ पाकिस्तानी प्रवासी समुदाय के सदस्यों से भी मुलाकात की. टैम्पा में मुनीर ने निवर्तमान अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) कमांडर जनरल माइकल कुरिल्ला के सेवानिवृत्ति समारोह और एडमिरल ब्रैड कूपर, जिन्होंने CENTCOM प्रमुख का पदभार संभाला, के कमान परिवर्तन समारोह में भाग लिया. मुनीर ने कुरिल्ला के नेतृत्व और अमेरिका-पाकिस्तान सैन्य संबंधों में उनके योगदान की प्रशंसा की. साथ ही कूपर को साझा सुरक्षा मुद्दों से निपटने में सफलता की कामना की. मुनीर ने ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन से भी बातचीत की और उन्हें पाकिस्तान आने का निमंत्रण दिया. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार मुनीर ने इस अवसर पर कुछ देशों के डिफेंस चीफ से भी मुलाकात की.   

वित्त मंत्री आज लोकसभा में पेश करेंगी नया आयकर विधेयक, प्रमुख बदलावों पर चर्चा

नई दिल्ली इंडियन टैक्स (TAX) इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलाव की प्रक्रिया के तहत नए आयकर विधेयक, 2025 (New Income Tax Bill) को तमाम संशोधनों के साथ आज लोकसभा (Lok Sabha) में पेश किया जाएगा. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) इसे पेश करेंगी. इस नए विधेयक में प्रवर समिति के सुझाए गए 285 संशोधनों को शामिल किया जाएगा. भाजपा सांसद बैजयंत पांडा की अध्यक्षता वाली प्रवर समिति ने इन संशोधनों को मंजूरी दी थी. बता दें यह नया विधेयक करीब 63 साल पुराने आयकर अधिनियम, 1961 की जगह लेगा. आइए जानते हैं उससे कैसे और कितना अलग है ये नया विधेयक…  285 सिफारिशें, 32 बड़े बदलाव वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने कहा कि नए आयकर विधेयक में कई परिवर्तन हैं, जिनमें तकनीकी सुधार और बेहतर क्रॉस-रेफरेंसिंग शामिल हैं. इसके मसौदे पर खर्च हुए समय और मेहनत को लेकर की जा रही आलोचना के जबाव में केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने कहा कि इसे लेकर पहले किया गया काम व्यर्थ नहीं जाएगा. बता दें कि इस प्रस्ताव में देरी का एक प्रमुख कारण भाजपा सांसद बैजयंत पांडा की अध्यक्षता वाली संसदीय प्रवर समिति के व्यापक सुझाव थे.  केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने कहा कि जब कोई संसदीय समिति कई प्रस्तावित संशोधनों के साथ एक रिपोर्ट प्रस्तुत करती है और उनमें से कई को स्वीकार कर लिया जाता है, तो मानक प्रक्रिया यह होती है कि मूल विधेयक को वापस ले लिया जाए और उसका संशोधित संस्करण पेश किया जाए. उन्होंने बताया कि प्रत्येक संशोधन के लिए तीन अलग-अलग प्रस्तावों की जरूरत होती है, जो तब अव्यावहारिक है जब 285 से ज्यादा बदलावों की सिफारिश मिले, इनमें 32 बड़े बदलाव भी शामिल हैं. उन्होंने कहा, 'विधेयक को वापस लेने और फिर से पेश करने का उद्देश्य समय की बचत, विधायी स्पष्टता और दक्षता सुनिश्चित करना है.' पहले की तुलना में सरल और कम धाराएं गौरतलब है कि आयकर विधेयक 2025 को बीते 13 फरवरी 2025 को लोकसभा में पेश किया गया था और इसके बाद इसकी जांच के लिए भाजपा सांसद बैजयंत पांडा की अध्यक्षता में 31 सदस्यीय प्रवर समिति गठित की गई थी. इसने 285 सुझाव दिए थे और पिछले महीने 21 जुलाई 2025 को अपनी रिपोर्ट पेश की थी. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अब संशोधित New Tax Bill, 2025 पेश करने जा रही हैं, जो 1961 के आयकर विधेयक की जगह लेगा. इसमें पहले की तुलना में कम धाराएं होंगी और ये पहले से बेहद आसान भाषा में होगा.  नए विधेयक में जिन प्रावधानों को शामिल किए जाने की उम्मीद है, उनमें गुमनाम दान को सामाजिक सेवाएं देने वालेट्रस्टों को छोड़कर, केवल विशुद्ध धार्मिक ट्रस्टों तक सीमित रखना,  Taxpayers को इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की डेडलाइन के बाद बिना किसी जुर्माने के टीडीएस रिफंड का दावा करने की अनुमति देना भी शामिल है.  नए टैक्स बिल में ये बड़े बदलाव अन्य बड़े बदलावों पर नजर डालें, तो New Tax Bill, अब तक लागू 1961 के आयकर अधिनियम के साइज की तुलना में आधा है. 816 की जगह अब बिल में 536 धाराएं हैं और इसे सरल भाषा में खासतौर पर मुकदमेबाजी को कम करने के लिए डिजाइन किया गया है. बीते दिनों आयकर विभाग (Income Tax Department) द्वारा जारी FAQ के मुताबिक, इस नए विधेयक में शब्दों की संख्या मौजूदा कानून के 5.12 लाख की तुलना में अब घटकर 2.6 लाख रह गई हैं. इसके अलावा धाराओं की बात करें, तो इनकी संख्या भी पहले के 819 से घटाकर 536 कर दी गई है, जबकि अध्याय भी 47 से 23 कर दिए गए हैं. एसेसमेंट ईयर नहीं, अब Tax Year नए Tax Bill-2025 में 1,200 प्रावधान और 900 स्पष्टीकरण हटाए गए हैं. एक और बड़ा बदलाव ये है कि टैक्सपेयर्स के लिए ये विधेयक अब तक अपनाए जाने वाले 'एसेसमेंट ईयर' और 'प्रीवियस ईयर' की अवधारणा को एक यूनिफाइड 'कर वर्ष' (Tax Year) से बदलने का प्रस्ताव करता है. बता दें कि फिलहाल, पिछले वर्ष की इनकम पर टैक्स पेमेंट Assessment Year में किया जाता है. जैसे 2023-24 में अर्जित आय पर 2024-25 में कर लगाया जाता है. 

ऑपरेशनल वंदे भारत ट्रेनें हुईं 144, भारत का रेल यातायात बना और प्रभावशाली

नई दिल्ली भारतीय रेलवे लगातार अपने नेटवर्क में तेज गति वाली आधुनिक ट्रेनों को जोड़ रहा है और इस कारण देश में ऑपरेशनल वंदे भारत ट्रेनों की संख्या बढ़कर 144 हो गई है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में कहा कि सरकार का ध्यान देश के रेल इन्फ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने पर है। वंदे भारत सेमी हाई-स्पीड ट्रेनें हैं जिन्हें भारतीय रेलवे द्वारा यात्रियों को तेज, सुरक्षित और अधिक आरामदायक यात्रा अनुभव प्रदान करने के लिए डिजाइन और विकसित किया गया है। इन ट्रेनों में तेज एक्सीलरेशन, कवच सिस्टम, पूरी तरह से सीलबंद गैंगवे, ऑटोमेटिक डोर और आरामदायक सीटों की सुविधाएं हैं। ट्रेन में उपलब्ध सुविधाओं में हॉट केस वाली मिनी पैंट्री, बॉटल कूलर, डीप फ्रीजर और गर्म पानी के बॉयलर शामिल हैं। यात्रियों को रिक्लाइनिंग एर्गोनॉमिक सीटें, एग्जीक्यूटिव क्लास में घूमने वाली सीटें, हर सीट पर मोबाइल चार्जिंग सॉकेट, दिव्यांगजन यात्रियों के लिए विशेष शौचालय और बेहतर सुरक्षा के लिए सीसीटीवी निगरानी की सुविधा भी मिलती है। रेल मंत्री ने कहा कि इन सेवाओं का उद्देश्य यात्रा को सुरक्षित और किफायती रखते हुए उच्च मांग वाले मार्गों पर भीड़भाड़ को कम करना है। उन्होंने आगे कहा कि ये ट्रेनें यात्रियों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। 2024-25 में, लगभग 3 करोड़ यात्रियों ने वंदे भारत एक्सप्रेस का इस्तेमाल किया, जबकि अप्रैल और जून 2025 के बीच 93 लाख लोगों ने इस ट्रेन से यात्रा की है। वंदे भारत सेवाओं का तेजी से विस्तार भारत में यात्री यात्रा को बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो देश के कुछ सबसे व्यस्त रेल मार्गों पर गति, आराम और सुरक्षा का संयोजन प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को बेंगलुरु और कर्नाटक के बेलगावी के बीच वंदे भारत ट्रेन सेवा का उद्घाटन किया। उन्होंने ट्रेन में सवार होकर यात्रा के दौरान छात्रों और बच्चों से बातचीत की। प्रधानमंत्री ने रेलवे स्टेशन पर वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाने से पहले कर्मचारियों का अभिवादन किया। उन्होंने दो अन्य वंदे भारत रूटों का भी शुभारंभ किया , जिसमें अमृतसर – श्री माता वैष्णो देवी कटरा के बीच नई वंदे भारत, और नागपुर (अजनी) और पुणे के बीच वंदे भारत शामिल हैं।