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वैष्णो देवी जाने वालों के लिए खुशखबरी: तीर्थयात्रियों की यात्रा होगी और आसान

जम्मू उत्तर भारत के सबसे व्यस्त और आस्था से जुड़े रेल रूट में अब एक और बड़ा बदलाव होने जा रहा है। रेल मंत्रालय ने जम्मू से श्री माता वैष्णो देवी कटरा तक की रेल लाइन को डबल करने के लिए अंतिम स्थान सर्वे की मंजूरी दे दी है। यह सर्वे लगभग 77.96 किलोमीटर लंबी रेल लाइन को कवर करेगा, जो भविष्य में इस मार्ग की कनेक्टिविटी और गति दोनों में बड़ा सुधार लाएगा। कटरा भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मौजूदा समय में जम्मू और कटरा के बीच केवल एक सिंगल रेल लाइन है, जिसके कारण ट्रेनों की संख्या सीमित रहती है। एक ही लाइन होने के कारण ट्रेनों की रफ्तार और संचालन में बाधा आती है, साथ ही नई ट्रेनों को चलाने में भी दिक्कत होती है। अब, रेल लाइन की डबलिंग से ट्रेनों की संख्या में इजाफा, आवाजाही में तेजी और समय की बचत संभव होगी। इससे न केवल तीर्थयात्रा को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि क्षेत्र में पर्यटन और स्थानीय विकास भी गति पकड़ेगा।  12.59 करोड़ रुपये की लागत से होगा सर्वे उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु शेखर उपाध्याय ने बताया कि इस सर्वे की अनुमानित लागत करीब 12 करोड़ 59 लाख रुपये होगी। इस फाइनल लोकेशन सर्वे के जरिए निर्माण कार्य की तकनीकी योजना और व्यवहारिकता तय की जाएगी। यह प्रोजेक्ट उत्तर रेलवे के अधीन संचालित किया जाएगा।  क्यों जरूरी हो गया है डबल ट्रैक? रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, जब से कटरा से श्रीनगर तक वंदे भारत ट्रेन की शुरुआत हुई है, देश के अन्य हिस्सों से कटरा तक सीधी और बेहतर कनेक्टिविटी की मांग काफी बढ़ गई है। डबल ट्रैक के ज़रिए यात्रियों की सुविधा के साथ-साथ मालवाहक ट्रेनों का संचालन भी सुचारू रूप से किया जा सकेगा।

बलूच विद्रोही समूह का बड़ा दावा: क़्वेटा-कलक में पाक सेना के 29 सैन्य कर्मी हताहत

 क्वेटा बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) का दावा है कि उन्होंने कलात और क्वेटा में दो अलग-अलग ऑपरेशन में पाकिस्तान के 29 सुरक्षाबलों को मार गिराया है. बीएलए ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ इस जंग को बदस्तूर जारी रखने की भी बात कही है.  बलूच लिबरेशन आर्मी ने बयान जारी कर बताया कि क्वेटा में बीएलए की स्पेशल यूनिट फतह स्क्वाड ने पाकिस्तानी सैन्यकर्मियों को ले जा रही बस को निशाना बनाकर IED अटैक किया. बलूच लिबरेशन आर्मी ने यह हमला अपनी इंटेलिजेंस इकाई ZIRAB के खुफिया इनपुट के बाद किया. ZIRAB पाकिस्तानी सैन्यकर्मियों को लेकर जा रही बस को लगातार मॉनिटर कर रहा था. यह बस पाकिस्तानी सैन्यकर्मियों को कराची से क्वेटा लेकर जा रही थी. इस हमले में 27 पाकिस्तानी सैन्यकर्मियों को मौके पर ही ढेर कर दिया गया जबकि कई गंभीर रूप से घायल हो गए. इस बस में कव्वाली गायक भी थे.  बीएलए ने कहा कि ये कव्वाली कलाकार हमारे निशाने पर नहीं थे इसलिए इन्हें हाथ तक नहीं लगाया गया. इस बीच बीएलए ने कलात के हजार गांजी इलाके में एक और IED अटैक किया. यह हमला भी पाकिस्तानी सेना के वाहन को निशाना बनाकर किया गया. इस हमले में दो सैनिकों को मार गिराया गया. कलात में बीएलए के ऑपरेशन में पाकिस्तानी सेना से जुड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर को भी बड़ा नुकसान पहुंचा. बलूच लिबरेशन आर्मी ने इन हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए कहा है कि पाकिस्तानी सेना के खिलाफ हमारी जंग जारी तब तक जारी रहेगी, जब तक बलूचिस्तान को आजाद नहीं करा लिया जाता और तब तक पाकिस्तान की सेना इसकी कीमत चुकाएगी. इससे पहले बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के लड़ाकों ने 11 मार्च को क्वेटा से पेशावर जा रही जाफर एक्सप्रेस ट्रेन को हाईजैक कर लिया था. इस दौरान ट्रेन में 440 यात्री सवार थे. लड़ाकों ने अपनी मांग मंगवाने के लिए पाकिस्तान सरकार पर दबाव बना रही थी. इस घटना में लड़ाकों ने 26 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था, जिसमें 18 सुरक्षाकर्मी भी शामिल थे.

महिला ने बौद्ध भिक्षुओं से ठगे 100 करोड़, वीडियो बनाकर किया ब्लैकमेल

बैंकॉक थाईलैंड में एक बड़े सेक्स स्कैंडल का भंडाफोड़ हुआ है। यहां एक महिला को कई साधुओं के साथ यौन संबंध बनाने और बाद में उन्हें ब्लैकमेल करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। खबर है कि पहले लुभा कर सेक्स में फंसाने और ब्लैकमेल के इस खेल के जरिए करीब 385 मिलियन बाथ की उगाही की गई है। भारतीय मुद्रा में यह रकम 100 करोड़ रुपये से ज्यादा है। फिलहाल, पुलिस मामले की जांच कर रही है। रॉयल थाई पुलिस सेंट्रल इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो ने बताया कि इस कांड में शामिल कम से कम नौ बौद्ध भिक्षुओं और वरिष्ठ भिक्षुओं को भिक्षु पद से हटा दिया गया है। पुलिस ने बताया कि उत्तरी थाईलैंड स्थित एक बौद्ध मंदिर के बैंक खाते से एक वरिष्ठ भिक्षु की तरफ से विलावान एम्सावत के खाते में भेजी गई धनराशि का भी पता चला है। कौन है विलावान एम्सावत लगभग 35 वर्षीय विलावान एम्सावत को राजधानी बैंकॉक के उत्तर में नोंथबुरी प्रांत स्थित उसके घर से जबरन वसूली, धन शोधन और चोरी का सामान लेने के आरोपों में गिरफ्तार किया गया। अपनी गिरफ्तारी से पहले विलावान ने ऐसे एक संबंध की बात स्वीकारी थी और कहा था कि उसने उस बौद्ध भिक्षु को पैसे दिए थे। गिरफ्तारी के बाद से विलावान ने कोई बयान नहीं दिया है और यह स्पष्ट नहीं है कि उसका प्रतिनिधित्व करने के लिए कोई वकील है या नहीं। कैसे बनाती थी शिकार रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि विलावान ने वित्तीय लाभ के लिए जानबूझकर वरिष्ठ भिक्षुओं को निशाना बनाया। पुलिस ने पाया कि प्रेम संबंध शुरू करने के बाद कई भिक्षुओं ने बड़ी धनराशि विलावान को ट्रांसफर की थी। पुलिस ने बताया कि पिछले तीन साल में विलावान के बैंक खाते में 1.19 करोड़ अमेरिकी डॉलर की धनराशि प्राप्त हुई लेकिन इसमें से अधिकतर राशि ऑनलाइन जुए वाली वेबसाइट पर खर्च की गई। सेंट्रल इन्वेस्टीगेशन ब्यूरो के उपायुक्त जारूनकियात पंकेव ने कहा कि जांच पिछले महीने तब शुरू हुई जब बैंकॉक के एक प्रसिद्ध बौद्ध मंदिर के वरिष्ठ भिक्षु ने अचानक अपना पद छोड़ दिया। इंडिपेंडेंट की एक रिपोर्ट के अनुसार, जारूनकियात ने बताया कि जांचकर्ताओं ने पाया है कि विलावान ने एक भिक्षु से कहा था कि वह गर्भवती है और मदद के लिए 7.2 मिलियन बाथ मांगे थे। उन्होंने कहा कि पुलिस का मानना है, 'यह महिला बहुत ही खतरनाक है और हमें इसे जल्द से जल्द गिरफ्तार करना होगा।' खबरें ये भी हैं कि विलावान के फोन से हजारों फोटो और वीडियो मिले हैं। साथ ही इसमें कई चैट भी हैं, जो कई भिक्षुओं के साथ संबंधों की ओर इशारा कर रही हैं।

इराक में आग का कहर: सुपरमार्केट हादसे में 50 लोगों की मौत, कई घायल

कूत  इराक के पूर्वी शहर कूत में एक दर्दनाक घटना घटी है. यहां 16 जुलाई, 2025 की रात एक हाइपरमार्केट और रेस्तरां में भीषण आग लग गई, जिसमें 50 लोग मारे गए और बहुत से लोग जख्मी हुए हैं. इराक की स्टेट न्यूज एजेंसी आईएनए ने वासित प्रांत के गवर्नर मोहम्मद अल-मायाही के हवाले से यह जानकारी दी. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में पांच मंजिला इमारत को आग की लपटों में घिरा हुआ देखा गया, जहां दमकलकर्मी आग बुझाने की कोशिश कर रहे थे. इलाके के गवर्नर ने बताया कि आग उस समय लगी, जब मार्केट में मौजूद रेस्तरां में बहुत से परिवार खाना खा रहे थे और लोग दुकानों में खरीदारी कर रहे थे. आपको बता दें कि ये शॉपिंग मॉल हाल ही में बना था और प्राइमरी रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि आग की वजह शॉर्ट सर्किट रही. घटना में हुई मौतों की वजह से गवर्नर ने तीन दिन के शोक की घोषणा की और हादसे की जांच शुरू कर दी, जिसके नतीजे 48 घंटे में आने की उम्मीद है. आईएनए के मुताबिक गवर्नर ने कहा कि इमारत और मॉल के मालिक के खिलाफ मुकदमे दायर किए गए हैं. उन्होंने इसे त्रासदी और आपदा करार दिया है. ये घटना कूत शहर के लिए बड़ा झटका है हालांकि इराक में इस तरह आग लगने की घटनाएं पहले भी कई बार हो चुकी हैं. साल 2021 में बगदाद के एक अस्पताल में ऑक्सीजन टैंक विस्फोट से 82 लोग मारे गए थे जबकि साल 2023 में निनेवेह के एक मैरिज हॉल में आतिशबाजी से लगी आग में 100 से अधिक लोगों की मौत हुई थी.  

आजादी के 75 साल बाद सुदूर गांव को मिली बस सेवा, गढ़चिरौली में ऐतिहासिक पहल

 गढ़चिरौली  कभी नक्सलियों का गढ़ रहे महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के एक सुदूर गांव में आजादी के बाद अब पहली बार सरकारी बस सेवा शुरू हुई है। पुलिस ने यह जानकारी दी। बुधवार को जब पहली बस मरकनार गांव पहुंची तो स्थानीय लोगों ने राष्ट्रध्वज लहराकर उसका स्वागत किया। पुलिस ने बयान जारी कर बताया कि इस सेवा से मरकनार और आसपास के गांवों के छात्रों समेत लगभग 1,200 निवासियों को लाभ होगा। पुलिस की ओर से दावा किया गया है कि गढ़चिरौली पुलिस के प्रयासों के बाद आजादी के बाद पहली बार सुदूर मरकनार गांव से अहेरी तक बस सेवा शुरू की गई है। आदिवासी आबादी और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए जाना जाने वाला गढ़चिरौली जिला खराब कनेक्टिविटी की समस्या से जूझ रहा था। मरकनार गांव गढ़चिरौली जिले के भामरागढ़ उपखंड में अबूझमाड़ की तलहटी में स्थित है, जो नक्सलियों का गढ़ था। बुधवार को ग्रामीणों ने पहली बार अपने इलाके में बस सेवा देखी। गढ़चिरौली के पुलिस अधीक्षक नीलोत्पल की पहल पर शुरू की गई राज्य परिवहन सेवा का स्वागत करने के लिए ग्रामीण तिरंगा लेकर एकत्रित हुए। इस सेवा से मरकनार, मुरुंभुशी, फुलनार, कोपरशी, पोयारकोठी और गुंडुरवाही जैसे गांवों के 1,200 से ज्यादा निवासियों, खासकर मरीजों, छात्रों और अन्य यात्रियों को लाभ होगा। गढ़चिरौली पुलिस ने दूरदराज के इलाकों में परिवहन को आसान बनाने के लिए कई बुनियादी ढांचा परियोजनाएं शुरू की हैं। कहा गया है कि एक जनवरी 2025 को गट्टा-गरदेवड़ा-वांगेतुरी मार्ग पर और 27 अप्रैल को कटेझर से गढ़चिरौली के लिए बस सेवा शुरू की गई। पिछले पांच वर्षों में, गढ़चिरौली पुलिस के संरक्षण में जिले में 420.95 किलोमीटर लंबी 20 सड़कें और 60 पुल बनाए गए हैं। बता दें कि होम मिनिस्टर अमित शाह ने 31 मार्च, 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह से खत्म करने का टारगेट रखा है।

अमरनाथ यात्रा पर बारिश का असर: एक दिन के लिए स्थगित, 18 जुलाई से फिर शुरू होने की संभावना

श्रीनगर  जम्मू और कश्मीर सूचना विभाग ने बताया है कि पिछले दो दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश के कारण अमरनाथ यात्रा गुरुवार को पहलगाम और बालटाल आधार शिविरों से रोक दी गई है। यात्रा मार्गों पर बारिश से हुए नुकसान की तुरंत मरम्मत का काम चल रहा है। जम्मू और कश्मीर जनसंपर्क विभाग के एक बयान के अनुसार, "पिछले दो दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश के कारण दोनों रास्तों पर ट्रैक्स की मरम्मत का काम बहुत ज़रूरी हो गया है।" सीमा सड़क संगठन ने 18.07.2025 को दोनों आधार शिविरों से यात्रा फिर से शुरू होने से पहले काम पूरा करने के लिए अपने कर्मचारियों और मशीनों को बड़ी संख्या में तैनात किया है। कश्मीर के संभागीय आयुक्त विजय कुमार बिधूड़ी ने भी यात्रा के स्थगित होने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि मौसम की स्थिति ठीक होने पर 18 जुलाई को तीर्थयात्रा फिर से शुरू होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, "पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश के कारण ट्रैक्स पर तुरंत मरम्मत और रखरखाव का काम करना ज़रूरी है। इसलिए, यह फैसला लिया गया है कि आज दोनों आधार शिविरों से पवित्र गुफा की ओर किसी भी यात्री को जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।" बिधूड़ी ने आगे बताया कि जो यात्री पिछली रात पंजतरणी शिविर में रुके थे, उन्हें BRO और पर्वतीय बचाव दलों की मदद से बालटाल जाने की अनुमति दी जा रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दिन के मौसम को देखते हुए, कल यात्रा फिर से शुरू होने की पूरी संभावना है। यात्रा के आंकड़े और आगे की जानकारी 2025 की अमरनाथ यात्रा के दौरान अब तक 2.47 लाख से ज़्यादा तीर्थयात्री 3,880 मीटर ऊंची पवित्र गुफा में दर्शन कर चुके हैं। इस साल यह पहला मौका है जब जम्मू से तीर्थयात्रा को एक दिन के लिए रोका गया है। आपको बता दें, 3 जुलाई को तीर्थयात्रा शुरू होने के बाद से, 2.35 लाख से ज़्यादा तीर्थयात्री बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। अब तक 4 लाख से ज़्यादा श्रद्धालुओं ने इस तीर्थयात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराया है। यह 38 दिनों तक चलने वाली तीर्थयात्रा 9 अगस्त को समाप्त होगी।    

UIDAI की सख्ती: आधार सक्रिय रखना है तो तुरंत कर लें यह जरूरी प्रक्रिया

नई दिल्ली आधार कार्ड (Aadhaar Card) आज के समय में सबसे जरूरी डॉक्यूमेंट है, जो न सिर्फ आपकी पहचान और नागरिकता का प्रमाण है, बल्कि स्कूल में एडमिशन से लेकर सरकारी योजनाओं के लाभ लेने के लिए भी जरूरी होता है. ऐसे में इसमें आपकी जानकारी का अपडेटेड होना बेहद जरूरी है और इसे लेकर UIDAI ने अलर्ट किया है. दरअसल, यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने ये अलर्ट बच्चों के आधार कार्ड यानी बाल आधार (Baal Aadhaar) के लिए किया है. इसमें कहा गया है कि 5 से 7 साल के बच्चों के आधार के आधार कार्ड का बायोमैट्रिक अपडेट जरूर कराएं, ये काम अभी बिल्कुल फ्री में हो सकता है.  बंद हो सकता है आधार कार्ड UIDAI ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अलर्ट करते हुए अभिभावकों से कहा है कि अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट से स्कूल एडमिशन, प्रवेश परीक्षा, स्कॉलरशिप और DBT Benefits तक आसान पहुंच संभव होगी. इसके साथ ही अथॉरिटी ने हिदायत देते हुए कहा कि समय पर 7 साल से बड़े बच्चे का Aadhaar Biometric Update अपडेट न होने की स्थिति में उसका आधार डिएक्टिवेट किया जा सकता है और वो तमाम लाभों से वंचित रह सकता है.  अभी Free… बाद में लगेगा ₹100 चार्ज  आधार नियामक द्वारा सोशल मीडिया अलर्ट (Social Media Alert) के साथ ही ऐसे बच्चों के आधार में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबरों पर SMS के जरिए भी इसकी अपील की जा रही है. यूआईडीएआई ने साफ कहा है कि 5-7 साल के बच्चों के आधार का बायोमैट्रिक अपडेट या एमबीयू प्रोसेस अभी प्रोसेस फ्री है यानी इसके लिए कोई चार्ज नहीं लिया जाता है. वहीं तो कोई शुल्क नहीं लिया जाता. 7 साल के बाद इस काम को कराने के लिए 100 रुपये का शुल्क देना होता है.  बाल आधार के लिए क्या है नियम?  Baal Aadhaar बनवाने से जुड़े नियमों की बात करें, तो 0–5 साल तक के बच्चों का आधार कार्ड बिना बायोमैट्रिक के बन जाता है और इसे बनवाने के लिए महज बच्चे की फोटो, नाम, जन्मतिथि, पता और माता-पिता के दस्तावेजों की जरूरत होती है, जबकि इस ऐज लिमिट तक कोई भी बायोमैट्रिक जरूरी नहीं होता है. हालांकि, जब बच्चा 5 साल की उम्र पूरी कर लेता है, तो पहले बायोमैट्रिक अपडेट के तौर पर उसके फिंगरप्रिंट, आइरिस स्कैन और लेटेस्ट फोटो को अपडेट कराना जरूरी होता है.  नीले रंग का होता है बच्चों का आधार  बता दें कि बच्चों का आधार कार्ड वयस्कों से अलग होता है. दरअसल, जब बच्चों के लिए आधार कार्ड जारी किया जाता है, तो उसका रंग नीला होता है. नीले रंग वाले आधार कार्ड (Blue Aadhaar Card) को 'बाल आधार' भी कहते हैं. UIDAI के मुताबिक नवजात बच्चे का आधार कार्ड बर्थ डिस्चार्ज सर्टिफिकेट और माता-पिता के आधार कार्ड के जरिये बनाए जाते हैं.  UIDAI ने कहा- 'इसे लेकर न बरतें लापरवाही' बाल आधार में बायोमैट्रिक अपडेट आप अपने नजदीकी आधार सेवा केंद्र (Aadhaar Center) पर जाकर करा सकते हैं. यूआईडीएआई की ओर से साफ शब्दों में हिदायत देते हुए कहा गया है कि आधार आज के समय में सबसे जरूरी दस्तावेज है, जो जीवन को आसान बनाने में सहायक है. ऐसे में माता-पिता और अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने बच्चों के बायोमेट्रिक्स को आधार में प्राथमिकता के तौर पर अपडेट कराएं.

बांग्लादेश में रैली के दौरान खूनी संघर्ष, 4 की मौत, कई घायल, अवामी लीग ने कहा- सेना ने निहत्थों पर चलाई गोलियां

ढाका  लंबे वक्त से अशांत चल रहे बांग्लादेश में एक बार फिर हिंसा और झड़प की घटनाएं हुई हैं। बुधवार को गोपालगंज में National Citizen Party (NCP) नेशनल सिटीजन पार्टी की एक रैली में हिंसा भड़क उठी। इसमें चार लोगों की मौत हो गई। गोपालगंज बांग्लादेश की निर्वासित प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनके पिता शेख मुजीबुर रहमान का होमटाउन भी है। ढाका ट्रिब्यून के मुताबिक, मृतकों की पहचान गोपालगंज शहर के उदयन रोड के संतोष साहा के 25 वर्षीय पुत्र दीप्तो साहा, रमज़ान काज़ी, 18, 30 साल के सोहेल राणा और 24 साल के इमोन हैं।  ये हिंसा गोपालगंज में शेख हसीना को सत्ता से हटाने वाली छात्रों की पार्टी एनसीपी के आंदोलन से पहले हुई है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बुधवार को गोपालगंज वर्चुअल रणक्षेत्र में तब्दील रहा. यहां दिन भर आगजनी, हिंसा और फायरिंग होती रही. डॉक्टरों ने बताया कि मृतकों को गोली लगने के बाद घायल अवस्था में गोपालगंज जनरल अस्पताल लाया गया था. उन्होंने बताया कि गोली लगने से घायल नौ और लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है.  गोपालगंज में बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) की चार अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात कर दी गई हैं. यहां सड़कों पर टैंक गश्त लगा रही हैं. अधिकारियों ने उपद्रवियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का भरोसा दिया है.  बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने कहा है कि गोपालगंज में बुधवार रात 8 बजे से 22 घंटे का कर्फ्यू लगाने का आदेश दिया गया है. उन्होंने कहा है कि एनसीपी पर हमले के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा. मीडिया रिपोर्टों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बांस के डंडों और ईंट-पत्थरों से लैस प्रदर्शनकारियों की पुलिस और सेना और अर्धसैनिक बल बीजीबी सहित सुरक्षा बलों के साथ झड़प हुई. ढाका ट्रिब्यून के अनुसार एनसीपी गोपालगंज में म्यूनिसिपल पार्क में एक जनसभा कर रही थी, तभी कथित तौर पर अवामी लीग और उसकी प्रतिबंधित छात्र शाखा के कार्यकर्ताओं ने भीड़ पर हमला कर दिया.  बता दें कि बाग्लादेश में नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) एक नई राजनीतिक पार्टी है, जिसका गठन 28 फरवरी 2025 को हुआ. यह पार्टी अगस्त 2024 में अवामी लीग सरकार के पतन के बाद शुरू हुए छात्र-नेतृत्व वाले "मॉनसून क्रांति" और एंटी-डिस्क्रिमिनेशन स्टूडेंट मूवमेंट (ADSM) से उभरी. NCP का नेतृत्व नाहिद इस्लाम नाम का छात्र नेता कर रहा है. नाहिद इस्लाम और उसकी पार्टी बांग्लादेश को मुजीबवाद से मुक्ति का नारा देते हैं.  एनसीपी नेता ने दावा किया कि उन्हें बताया गया था कि गोपालंगज में सब कुछ नियंत्रण में है, हालांकि कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने पर उन्हें एहसास हुआ कि ऐसा नहीं था. इससे पहले दोपहर करीब 1:45 बजे लगभग 200-300 स्थानीय अवामी लीग समर्थक लाठी-डंडों के साथ सीएनपी रैली स्थल पर पहुंचे. जब हमला शुरू हुआ तो ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी पास के अदालत परिसर में शरण लेते देखे गए. कार्यक्रम स्थल पर मौजूद एनसीपी नेता और कार्यकर्ता भी तुरंत वहां से चले गए. एनसीपी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि हमला करने वाले अवामी लीग के समर्थक हैं. हिंसा पर अवामी लीग ने क्या कहा? वहीं अवामी लीग का आरोप है कि इस हिंसा को बांग्लादेश की सेना और एनसीपी के कार्यकर्ताओं ने अंजाम दिया है. अवामी लीग ने एक्स पर लिखा है, "बिना किसी डर के बांग्लादेशी सेना ने गोपालगंज में एक नागरिक को प्रताड़ित किया. तस्वीर में उसे घसीटते हुए लेते जाया देखा जा सकता है, ताकि पूरे देश में भय का माहौल पैदा किया जा सके.  अवामी लीग का कहना है यह बदकिस्मत नागरिक उन हजारों लोगों में शामिल था जो यूनुस शासन द्वारा राज्य प्रायोजित दमन के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे, जिसमें हत्या, मनमानी गिरफ़्तारियां, नजरबंदी, अपराध की बढ़ती लहर और देश के संस्थापक पिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान से जुड़े प्रतीकों को उनके जन्मस्थान गोपालगंज से मिटाने की नवीनतम साजिश शामिल थी.  शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग ने कहा कि यूनुस और इस्लामिक उपद्रवियों द्वारा समर्थित भीड़ द्वारा फैलाई गई अपराध की लहर के सामने सशस्त्र बलों की पूर्ण निष्क्रियता की वे कड़े शब्दों में निंदा करते हैं. हम जोर देकर कहते हैं कि इस क्रूर कार्रवाई के साथ बांग्लादेशी सेना ने दिखा दिया है कि उसने अपनी तटस्थता त्याग दी है. अवामी लीग ने कहा कि सरकारी एजेंसियों और सेना द्वारा निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी करने और बंगबंधु की विरासत की रक्षा के लिए खड़े हुए नागरिकों की हत्या करने के बाद एनसीपी नेताओं ने एक कदम और आगे बढ़कर "अवामी लीग" कहे जाने वाले किसी भी व्यक्ति का सफाया करने का आह्वान किया. अवामी लीग ने सेना द्वारा फायरिंग और हमले का वीडियो भी सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है. 'मुजीबवाद से मुक्ति दिलाएंगे' इस हमले के बाद एनसीपी नेता नाहिद इस्लाम और एनसीपी के दूसरे नेता हसनत अब्दुल्ला ने "मुजीब की विरासत" के अवशेषों को मिटाने का वादा किया. एनसीपी संयोजक नाहिद इस्लाम ने घोषणा की कि अगर उनके रैली स्थल पर हुए हमले के लिए तुरंत न्याय नहीं मिला, तो उनकी पार्टी अपने हाथों से "गोपालगंज को मुजीबवाद से मुक्त" कराने के लिए वापस आएगी. इस्लाम ने कहा, "अगर पुलिस बल विफल रहे तो हम न्याय ज़रूर दिलाएंगे" एनसीपी के एक दूसरे नेता ने कहा एक फेसबुक पोस्ट में कहा, "गोपालगंज में हत्यारी हसीना के एजेंटों ने हम पर हमला किया है. पुलिस बस खड़ी है, तमाशा देख रही है और पीछे हट रही है." बेशक कोई नहीं बख्शे जाएंगे बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने कहा है कि गोपालगंज में की हिंसा पूरी तरह से अक्षम्य है. युवा नागरिकों को उनके क्रांतिकारी आंदोलन की पहली वर्षगांठ मनाने के लिए शांतिपूर्ण रैली आयोजित करने से रोकना उनके मौलिक अधिकारों का शर्मनाक उल्लंघन है. मोहम्मद यूनुस के कार्यालय से जारी बयान में कहा गया है कि, "यह जघन्य कृत्य जिसे कथित तौर पर प्रतिबंधित अवामी लीग के छात्र लीग के सदस्यों और एएल कार्यकर्ताओं ने अंजाम दिया है, बेशक बख्शे नहीं जाएंगे. अपराधियों की शीघ्र पहचान की जानी चाहिए और उन्हें पूरी तरह से जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए. बांग्लादेश के किसी भी नागरिक के खिलाफ इस तरह की हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है." बता दें कि बांग्लादेश में शेख हसीना को सत्ता से अपदस्थ किए जाने के एक साल पूरे होने … Read more

इजरायली एयरस्ट्राइक से स्वेदा में सैन्य ठिकानों पर कहर, स्वेदा में एयरस्ट्राइक से भारी तबाही,कई हथियार डिपो ध्वस्त

स्वेदा  इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने दावा किया है कि उसने सीरिया के स्वेदा क्षेत्र में सीरियाई सरकारी बलों पर अपने हमले जारी रखे हैं. शनिवार को जारी एक बयान में आईडीएफ ने इन हमलों का ताज़ा वीडियो भी जारी किया है, जिसमें सैन्य ठिकानों और वाहनों को निशाना बनाते हुए देखा जा सकता है.  सूत्रों के मुताबिक, इजरायली वायुसेना ने अपने इन ताजा हमलों में बख्तरबंद गाड़ियों और भारी मशीनगनों से लैस पिकअप ट्रकों को निशाना बनाया, जो स्वेदा शहर की ओर बढ़ रहे थे. यह शहर बहुसंख्यक द्रूज़ समुदाय का गढ़ माना जाता है और वहां इन दिनों गंभीर झड़पें हो रही हैं. आईडीएफ ने बताया कि केवल सैन्य वाहनों को ही नहीं, बल्कि सीरियाई सेना की चौकियों, हथियार डिपो और अन्य रणनीतिक ठिकानों को भी दक्षिणी सीरिया में निशाना बनाया गया है. यह हमले ऐसे समय हो रहे हैं जब सीरियाई सरकार विरोधी गतिविधियों में इजाफा देखा जा रहा है और क्षेत्र में ईरानी समर्थक गुटों की मौजूदगी को लेकर इजरायल पहले से ही सतर्क है. स्वेदा में हालात गंभीर स्वेदा में द्रूज़ समुदाय के नागरिकों और सरकारी बलों के बीच हाल ही में तनाव और झड़पें बढ़ी हैं. इजरायल का कहना है कि उसने हमले आत्मरक्षा में किए हैं क्योंकि उसकी सीमाओं के पास सीरियाई और ईरानी गतिविधियां खतरा बन रही थीं. वीडियो किया जारी इससे पहले जब इजरायल ने मिसाइल के जरिए हमला किया था तो उसका वीडियो भी जारी किया था.  वीडियो में दिख रहा है कि जैसे ही इजरायली मिसाइल सैन्य मुख्यालय में गिरी तो उसके परखच्चे उड़ गए. मिसाइल का पेलोड कितना रहा होगा, इसका अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि कुछ सेकेंड्स में पूरी इमारत धुएं का गुबार बन जाती है. जो इंपैक्ट साइट है वहां मलबा कई फीट ऊपर बिखर जाता है. इजरायल ने क्यों किया हमला? इसे लेकर इजरायल का कहना है कि सीरिया में द्रूज समुदाय के साथ वहां की फौज अमानवीय हरकत कर रही है. सीरियन फौज से लड़ाई में द्रूज समुदाय के 300 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है. उसी का बदला लेने के लिए या यूं कहिए सीरिया की फौज को रोकने के लए इजरायल ने ये हमला किया है. इस बीच आज यूएन सिक्योरिटी काउंसिल की बैठक भी आज बुलाई गई है.

हद से ज्यादा नमक खा रहे भारतीय …ICMR ने बताया कितना है सुरक्षित सेवन, जानें कितनी मात्रा सुरक्षित

नई दिल्ली  नमक खाने का स्वाद ही नहीं बढ़ाता बल्कि यह शरीर के लिए भी काफी जरूरी होता है. बिना नमक के खाना फीका लगता है, चाहे वह कितना भी अच्छा पकाया गया हो. लेकिन नमक के सेवन की भी एक लिमिट होती है. हाल ही में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने कहा है कि भारतीय नमक का अत्यधिक सेवन कर रहे हैं और ऐसे में साइलेंट महामारी को बढ़ावा मिल रहा है जिससे लोगों में हाई ब्लड प्रेशर, स्ट्रोक, हृदय रोग और किडनी की बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है. वैज्ञानिकों ने इस समस्या के समाधान के लिए नमक के कम सेवन और कम सोडियम वाले नमक का प्रयोग करने की सलाह दी है. नमक की कितनी मात्रा लोगों के लिए सुरक्षित होती है और नमक के और कौन से ऐसे सोर्स हैं जिनके माध्यम से नमक आपके शरीर में जा रहा है, इस बारे में भी जान लीजिए ताकि नमक के सेवन को कंट्रोल किया जा सके. नमक की कितनी मात्रा सुरक्षित? विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) प्रति व्यक्ति प्रति दिन 5 ग्राम से कम नमक लेने की सिफारिश करता है. लेकिन वैज्ञानिकों ने पाया कि भारतीय की शहरी आबादी रोजाना लगभग 9.2 ग्राम और ग्रामीण आबादी लगभग 5.6 ग्राम नमक का सेवन करती है. यानी कि दोनों आबादी नमक का सेवन तय सीमा से अधिक कर रहा है. राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान (एनआईई) के सीनियर साइंटिस्ट और रिसर्च हेड डॉ. शरण मुरली ने कहा, 'सोडियम का कम सेवन ब्लडप्रेशर कम करने और ओवरऑल हार्ट हेल्थ में सुधार करने में मदद करता है, जिससे कम सोडियम वाले ऑपशंस हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों के लिए अच्छे साबित हो सकते हैं. सिर्फ कम सोडियम वाले नमक पर स्विच करने से ब्लडप्रेशर औसतन 7/4 mmHg तक कम हो सकता है. यह एक छोटा सा बदलाव है जिसका बड़ा असर होता है.' 'यह सिर्फ नमक कम करने की बात नहीं है. यह हमारी डाइट, हमारे शरीर और हमारे हृदय में संतुलन को बैलेंस करने के बारे में है. कम नमक के सेवन से ब्लडप्रेशर संबंधी समस्याओं में भी कमी देखी जा सकती है.' सोडियम और नमक में क्या अंतर है? सोडियम और नमक को अक्सर एक ही माना जाता है. लेकिन ये दोनों एक जैसे नहीं हैं. सोडियम एक मिनरल है जो खाने में प्राकृतिक रूप से पाया जा सकता है या खाने के दौरान उसमें मिलाया जा सकता है. खाने का नमक लगभग 40 प्रतिशत सोडियम और 60 प्रतिशत क्लोराइड होता है. टेबल नमक में सोडियम की मात्रा मोटे तौर पर इस प्रकार है. 1/4 चम्मच नमक = 600 मिलीग्राम (मिलीग्राम) सोडियम 1/2 चम्मच नमक = 1,200 मिलीग्राम सोडियम 3/4 चम्मच नमक = 1,800 मिलीग्राम सोडियम 1 चम्मच नमक = 2,400 मिलीग्राम सोडियम सोडियम को किन नामों से पहचान सकते हैं? सोडियम कई रूपों में पाया जाता है. खाने वाली पैकेज्ड चीजों पर कंपनियों सीधे सोडियम न लिखने की जगह नीचे बताए हुए नाम लिख सकती हैं. आप उन्हें देखकर सोडियम का पता लगा सकते हैं.     डिसोडियम ग्वानिलेट     डिसोडियम इनोसिनेट     मोनोसोडियम ग्लूटामेट (MSG)     सोडियम बाईकारबोनेट     सोडियम नाइट्रेट     सोडियम सिट्रट     सोडियम क्लोराइड (नमक)     सोडियम डायएसीटेट     सोडियम एरिथोर्बेट     सोडियम लैक्टेट     सोडियम मेटाबाइसल्फाइट     सोडियम फास्फेट     ट्राइसोडियम फॉस्फेट भोजन में इतना सोडियम क्यों होता है? सोडियम हमारे भोजन में कई भूमिकाएं निभाता है. स्वाद बढ़ाना इसका सबसे आम काम है. सोडियम भोजन को एक संरक्षक के रूप में सुरक्षित भी रख सकता है, खाने की बनावट में सुधार कर सकता है. उदाहरण के लिए, बेकिंग सोडा (सोडियम बाइकार्बोनेट) ब्रेड और अन्य बेक्ड खाद्य पदार्थों को फूलने में मदद करता है. लेकिन अक्सर, जरूरत से अधिक नमक डालने के कारण कुछ समस्याएं भी हो सकती हैं. सोडियम के इनडायरेक्ट सोर्स क्या हैं? अमेरिकी रिसर्च से पता चलता है कि लोगों की डाइट में लगभग 14 प्रतिशत सोडियम कुछ खाद्य पदार्थों में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है. इसके अलावा, कई लोग खाना बनाते और खाते समय नमक डालते हैं. यह कुल सोडियम सेवन का केवल लगभग 11 प्रतिशत होता है. भले ही आप खाने में नमक कम डाल रहे हों लेकिन फिर भी आप शायद बहुत ज़्यादा सोडियम ले रहे हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि सोडियम अक्सर पैकेज्ड और तैयार की गई चीजों जैसे डिब्बाबंद सूप, लंच मीट और फ्रोजन चीजों में अधिक मात्रा में पाया जाता है. इसे नमक के रूप में या बेकिंग सोडा जैसे सोडियम के अन्य सामान्य रूपों के रूप में मिलाया जा सकता है. अमेरिका में जो लोग सोडियम खाते हैं, उसका 70 प्रतिशत से ज़्यादा हिस्सा पैकेज्ड या रेस्टोरेंट के खाने से आता है. वहीं जब हम जो पैकेज्ड या बना हुआ खाना खरीदते हैं, उसमें सोडियम पहले से ही मिला हुआ होता है जिससे हमारी दैनिक सोडियम की मात्रा बढ़ जाती है. सोडियम का सेवन कम करने के लिए हमेशा प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से दूर रहें और घर पर ही खाना बनाएं. दवाइयां भी सोडियम का सोर्स होती हैं. बिना डॉक्टर के पर्चे के मिलने वाली दवाओं के लेबल पर एक्टिव और निष्क्रिय अवयवों की जांच करें और डॉक्टर से पूछें कि आपकी दवाई में कितना नमक है.