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बुधवार का राशिफल: 16 सितंबर को इन राशियों पर बरसेगी कृपा, मिलेगा बड़ा फायदा

मेष आपका दिमाग नए विचारों और क्रिएटिव एनर्जी से भरा हुआ है। आप खुद को नई चीजें सीखने और अपने आस-पास के लोगों के साथ अपने अनूठे विचारों को साझा करने के लिए अधिक खुला पाएंगे। अपनी फाइनेंशियल सिचुएशन पर फोकस करें। वृषभ आज आपका दिन खास रहने वाला है। करियर लाइफ थोड़ी बिजी हो सकती है। शाम में अपने लवर के साथ अच्छा टाइम स्पेंड करेंगे। स्वास्थ्य के मामले में लापरवाही न करें। खर्च करते वक्त आपको सावधानी बरतनी जरूरी है। मिथुन आज का आपका दिन थोड़ा उतार-चढ़ाव भरा रहेगा। आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी और धन लाभ भी होगा। वहीं, खर्च की अधिकता भी रहेगी। ज्यादा तनाव न लें और काम का प्रेशर घर पर न लाएं। कर्क आज जंक फूड्स का ज्यादा सेवन न करें। आज का दिन आपके लिए लाभकारी साबित होगा। कोई नया प्रोजेक्ट हाथ लग सकता है, जिससे धन लाभ भी होगा। कॉन्फिडेंट रहेंगे आज। सिंह आज लव के मामले में पार्टनर को टाइम देना जरूरी है। आज जंक फूड्स को नो कहें। कोई गुड न्यूज भी मिल सकती है। आज का आपका दिन फायदेमंद माना जा रहा है। करियर में आपको अपने बॉस का साथ मिलेगा। कन्या आज सिंगल लोगों की लाइफ में किसी नए शख्स की एंट्री होने की संभावना है। करियर में बैलेंस मेंटेन करके चलें। आपका कैरेक्टर ही आपकी सबसे बड़ी उपलब्धी है। आज का आपका दिन मिले-जुले परिणाम लेकर आया है। तुला कुछ जरूरी जिम्मेदारियां भी मिलेंगी। आज पॉजिटिव रहने की सलाह दी जाती है। धन लाभ के योग बन रहे हैं। सेहत अच्छी रहेगी लेकिन बाहर का खाना खाने से बचें। आज का आपका दिन शानदार रहेगा। वृश्चिक आज लाइफ पार्टनर के साथ थोड़ी बहुत अनबन हो सकती है। गुस्से को काबू में रखना ही बेहतर रहेगा। परिवार के किसी सदस्य की आर्थिक सहायता करनी पड़ सकती है, जिससे फाइनेंशियल सिचुएशन पर असर पड़ेगा। धनु आज पुराने इन्वेस्टमेंट से अच्छा रिटर्न मिल सकता है। करियर तौर पर मोटिवेटेड और प्रोडक्टिव फील करेंगे। आज आपको अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की जरूरत है। बाहर का खाना खाने से बचें। मकर आज लाइफ में रोमांस बना रहेगा। आज आपका दिन नॉर्मल रहने वाला है। काम के प्रेशर से बचें और बेवजह की टेंशन न लें। 30 मिनट की एक्सरसाइज आपके लिए अच्छी रहेगी। कुम्भ अपनी फीलिंग्स को पार्टनर के साथ शेयर करना अच्छा रहता है। आर्थिक जीवन स्टेबल रहेगा। आपने खाने-पीने पर आज ध्यान दें। आज का दिन आपका रोमांचक रहेगा। खुद को हाइड्रेटेड जरूर रखें। मीन आज के दिन आपको सेल्फ लव पर फोकस करना चाहिए। स्ट्रेस फ्री रहने के लिए मेडिटेशन ट्राई करें। आर्थिक स्थिति में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। काम के सिलसिले में यात्रा करनी पड़ सकती है।

वास्तु शास्त्र में झाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है, सही दिशा में रखने से आती है सुख-समृद्धि

 वास्तु शास्त्र में झाड़ू को केवल सफाई का साधन ही नहीं, बल्कि धन की देवी मां लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जिस घर में झाड़ू का आदर किया जाता है और उसे सही स्थान पर रखा जाता है, वहां सदैव सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है. इसके विपरीत, यदि झाड़ू को घर में गलत दिशा या अनुचित स्थान पर रखा जाए, तो यह भयंकर वास्तु दोष का कारण बनता है, जिससे घर की बरकत रुक जाती है और आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है. जानें घर में झाड़ू रखने के मुख्य वास्तु नियम और किन-किन स्थानों पर झाड़ू बिल्कुल नहीं रखनी चाहिए. घर में इन स्थानों पर भूलकर भी न रखें झाड़ू ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा): यह कोण देवी-देवताओं और सकारात्मक ऊर्जा का स्थान माना जाता है. यहां झाड़ू रखने से घर की सुख-शांति भंग होती है और आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है. रसोई घर (Kitchen): रसोई घर में अन्नपूर्णा का वास होता है. यहां झाड़ू रखने से अन्न और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं और घर के सदस्यों में बीमारी का कारण बन सकता है. बेडरूम (शयनकक्ष): बेडरूम में या पलंग के नीचे झाड़ू रखने से पति-पत्नी के रिश्तों में तनाव, अनबन और नकारात्मकता बढ़ती है. पूजा घर: मंदिर या पूजा स्थल के पास झाड़ू रखना बेहद अशुभ माना गया है. इससे घर की बरकत रुक जाती है. मुख्य द्वार के सामने: घर के मेन गेट के ठीक सामने झाड़ू कभी न रखें, जिससे आने-जाने वालों की नजर उस पर सीधे पड़े. इससे घर में आने वाली लक्ष्मी और सकारात्मक ऊर्जा बाधित होती है. तिजोरी या अलमारी के पास: जहां धन, गहने या पैसे रखे जाते हों, उस स्थान के पास झाड़ू रखने से धन का अपव्यय (फालतू खर्च) बढ़ता है. झाड़ू रखने की सही दिशा और नियम सही दिशा (दक्षिण-पश्चिम): वास्तु के अनुसार झाड़ू रखने के लिए सबसे शुभ दिशा दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम मानी जाती है. झाड़ू को छुपाकर रखें: झाड़ू को हमेशा ऐसे स्थान पर रखें जहां बाहर से आने वाले किसी मेहमान या घर के सदस्यों की नजर उस पर सीधे न पड़े. झाड़ू को लिटाकर रखें: झाड़ू को कभी भी खड़ा करके न रखें. खड़ी झाड़ू रखने से घर में धन की हानि और दरिद्रता आती है. झाड़ू को हमेशा जमीन पर लिटाकर रखना चाहिए. झाड़ू से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण वास्तु नियम – झाड़ू पर कभी भी पैर नहीं लगाना चाहिए और न ही इसे लांघना चाहिए. इसे लक्ष्मी जी का अनादर माना जाता है. – घर में टूटी हुई या बहुत पुरानी झाड़ू का उपयोग करने से वास्तु दोष बनता है. – सूर्यास्त के बाद घर में झाड़ू लगाने या कचरा बाहर फेंकने से घर की लक्ष्मी बाहर चली जाती है. – पुरानी झाड़ू को बदलने के लिए शनिवार या अमावस्या का दिन सबसे शुभ माना गया है.

नीम करोली बाबा के चार सरल सूत्र: बिना शर्त प्रेम, निस्वार्थ सेवा, ईश्वर का स्मरण और सत्य का मार्ग

आज की तेज-तर्रार और भागदौड़ भरी जिंदगी में जब इंसान तनाव, अविश्वास और अकेलेपन से जूझ रहा है, तब मन की शांति और सही राह पाना एक बड़ी चुनौती बन गया है. स्टीव जॉब्स और मार्क जुकरबर्ग जैसी दुनिया की बड़ी हस्तियों को दिशा देने वाले नीम करोली बाबा ने जीवन जीने का कोई बहुत जटिल दर्शन नहीं दिया, बल्कि 4 बेहद सरल बातें बताईं. अगर इन 4 सूत्रों को जीवन में उतार लिया जाए, तो किसी भी इंसान की दुनिया बदल सकती है. 1. बिना किसी शर्त के प्रेम (Unconditional Love) "हर इंसान से प्रेम करो, नफरत का बोझ मत उठाओ." बाबा नीम करोली के अनुसार, सच्चा प्रेम केवल अपनों तक सीमित नहीं होना चाहिए. इसका अर्थ है हर इंसान के प्रति अपने मन में करुणा और इंसानियत रखना.  किसी से विचार अलग हो सकते हैं या आप उनसे दूरी बना सकते हैं, लेकिन मन में दुश्मनी और कड़वाहट पालकर खुद को ही नुकसान पहुंचता है.  नफरत छोड़ना दूसरों के लिए नहीं, बल्कि खुद के मानसिक सुकून के लिए जरूरी है. 2. निस्वार्थ सेवा ही असली साधना है (Selfless Service) "सेवा के बिना प्रेम अधूरा है." सोचना आसान है, लेकिन कर्म में ढालना ही असली परीक्षा है. बाबा का मानना था कि सेवा के लिए करोड़ों रुपये या बड़े साधनों की जरूरत नहीं होती. किसी भूखे को भोजन कराना, किसी उदास व्यक्ति की बात सुन लेना, या किसी बुजुर्ग का हाथ थाम लेना. यह छोटी-छोटी मदद ही ईश्वर की असली पूजा है.  दूसरों के जीवन को आसान बनाना ही आध्यात्मिक प्रगति है. 3. हर स्थिति में ईश्वर को याद रखना (Remember God) "चाहे सुख हो या दुख, उस परमात्मा का ध्यान न छूटे." जीवन में जब सब अच्छा चल रहा होता है, तब हम अहंकार में आ जाते हैं और जब बुरा वक्त आता है, तो निराश होकर बिखर जाते हैं.  बाबा का यह सूत्र हमें याद दिलाता है कि परिस्थितियां बदलती रहती हैं, लेकिन ईश्वर का चिंतन मन को हमेशा स्थिर और शांत रखता है. यह हमें हर स्थिति में विनम्र रहना सिखाता है. 4. सत्य की राह पर चलना (Speak the Truth) सच बोलना केवल नैतिकता नहीं, मन की शांति की चाबी है." झूठ बोलने से इंसान के मन में हमेशा पकड़े जाने का डर बना रहता है, जो मानसिक शांति छीन लेता है. सच बोलने से मन हल्का, साफ और निडर रहता है. नीम करोली बाबा कहते हैं कि सत्यवादी व्यक्ति का आचरण ही उसकी सबसे बड़ी ताकत बनता है.

गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद आत्मा की यमलोक तक की होती है कठिन यात्रा

 मृत्यु हमारे जीवन का अटल सत्य है. इस पृथ्वी लोक पर जन्म लेने वाले हर व्यक्ति को एक न एक दिन इस संसार को छोड़कर जाना पड़ता है. भगवद्गीता में श्रीकृष्ण ने भी कहा है कि आत्मा एक शरीर को त्यागकर दूसरा शरीर धारण करती है. यानी शरीर नश्वर है, जबकि आत्मा को अमर माना गया है. अब आपके मन में यह सवाल जरूर उठता होगा कि अगर आत्मा अमर है, तो किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका क्या होता है? गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा का विस्तार से वर्णन मिलता है. इसमें बताया गया है कि मृत्यु के बाद आत्मा को यमलोक तक पहुंचने के लिए किस तरह की यात्रा से गुजरना पड़ता है. मृत्यु के बाद आत्मा के साथ क्या होता है? गरुड़ पुराण के अनुसार, एक बार भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ ने उनसे पूछा कि मृत्यु के बाद जीवात्मा के साथ क्या होता है और वह कितने समय बाद यमलोक पहुंचती है. तब भगवान विष्णु ने उन्हें मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा के बारे में बताया. मान्यता के अनुसार, जब किसी जीव की मृत्यु का समय करीब आता है, तो उसकी आवाज कमजोर होने लगती है. अंतिम समय में उसे कुछ समय के लिए दिव्य दृष्टि प्राप्त होती है. इस अवस्था में उसे संसार को अलग तरह से देखने का अनुभव होता है और उसकी इंद्रियां धीरे-धीरे शिथिल पड़ने लगती हैं. इसके बाद मृत्यु के समय यमराज के दूत वहां आते हैं. मान्यता है कि उन्हें देखकर जीवात्मा भयभीत हो जाती है और शरीर का त्याग कर देती है. शरीर से निकलने के बाद यमदूत जीवात्मा को अपने साथ ले जाते हैं. पवित्र आत्मा और पापी आत्मा की यात्रा गरुड़ पुराण की मान्यताओं के अनुसार, जो जीवात्मा पुण्य कर्म करती है, उसकी यात्रा अलग होती है. वहीं पाप कर्म करने वाली आत्मा को कठिन मार्ग से गुजरना पड़ता है. ऐसी आत्मा को यमलोक पहुंचने से पहले कई तरह की यातनाओं का सामना करना पड़ता है. मान्यता है कि शरीर छोड़ने के बाद आत्मा को वापस उसी घर में लाया जाता है, जहां उसने अपना शरीर छोड़ा था. आत्मा अपने शरीर में दोबारा प्रवेश करने की कोशिश करती है, लेकिन ऐसा नहीं कर पाती. इसके बाद वह अपने परिवार को अंतिम संस्कार करते हुए देखती है. इसी वजह से हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद होने वाले कर्मकांडों और पिंडदान को महत्वपूर्ण माना जाता है. मान्यता है कि इन कर्मों से मृत व्यक्ति की आत्मा की आगे की यात्रा में सहायता मिलती है. मृत्यु के बाद 13 दिनों तक क्यों किए जाते हैं कर्मकांड? हिंदू परंपरा में मृत्यु के बाद 13 दिनों तक अलग-अलग कर्मकांड किए जाते हैं. गरुड़ पुराण से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, इन कर्मों और पिंडदान से मृतक के सूक्ष्म शरीर को आगे की यात्रा के लिए शक्ति मिलती है. इसके बाद आत्मा की यमलोक की यात्रा शुरू होती है. इस यात्रा में उसे कई तरह के मार्गों और कठिनाइयों से गुजरना पड़ता है. वैतरणी नदी को पार करना पड़ता है गरुड़ पुराण में वैतरणी नदी का भी वर्णन मिलता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह नदी यमलोक की यात्रा में आने वाली सबसे कठिन बाधाओं में से एक है. कहा जाता है कि वैतरणी नदी बेहद भयानक होती है और इसे पार करना आसान नहीं होता. मान्यता है कि जिसने अपने जीवन में गौसेवा या गाय से जुड़े पुण्य कर्म किए होते हैं, उसे इस नदी को पार करने में सहायता मिलती है. वहीं पाप कर्म करने वाली आत्मा को इसे पार करते समय कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. धार्मिक ग्रंथों में वैतरणी नदी को बेहद भयावह रूप में बताया गया है. मान्यता के अनुसार, इसे पार करने के बाद आत्मा आगे की यात्रा करती हुई यमलोक पहुंचती है. यमलोक पहुंचने के बाद क्या होता है? गरुड़ पुराण की मान्यताओं के अनुसार, यमलोक पहुंचने के बाद जीवात्मा के कर्मों का लेखा-जोखा देखा जाता है. व्यक्ति ने जीवन में किस तरह के कर्म किए हैं, उसी के आधार पर उसे आगे का फल मिलता है. इसलिए हिंदू धर्म में अच्छे कर्म करने पर जोर दिया गया है. मान्यता है कि मृत्यु के बाद मनुष्य के साथ उसके धन-दौलत, रिश्ते या सांसारिक चीजें नहीं जातीं. उसके कर्म ही उसके साथ जाते हैं. इसलिए जीवन में चाहे कितनी भी कठिन परिस्थितियां क्यों न हों, हमें हमेशा अच्छे कर्म करने का प्रयास करना चाहिए. गरुड़ पुराण में जीवन और मृत्यु से जुड़ी ऐसी कई गूढ़ बातें बताई गई हैं, जो मनुष्य को अपने कर्मों और जीवन के उद्देश्य के बारे में सोचने के लिए प्रेरित करती हैं.

केतु गोचर से 6 राशियों की चमकेगी किस्मत, 90 दिनों तक धन-करियर में मिलेंगे बड़े लाभ

 वैदिक ज्योतिष में केतु को एक छाया, रहस्यमयी और शोध-अध्यात्म का कारक ग्रह माना जाता है. यद्यपि केतु को सामान्यतः क्रूर ग्रह की श्रेणी में रखा जाता है, लेकिन जब यह शुभ स्थिति में गोचर करता है, तो जातक को अचानक धन लाभ, मानसिक स्पष्टता और बड़ी व्यावसायिक सफलता प्रदान करता है. हाल ही में केतु का सिंह राशि में प्रवेश हुआ है, और आने वाले 90 दिनों तक केतु इसी स्थिति में विराजमान रहकर कई राशियों के जीवन में सकारात्मक हलचल मचाने वाले हैं. सूर्य के स्वामित्व वाली सिंह राशि में केतु का यह प्रभाव कुछ राशियों के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं होगा. अचानक रुक-रुक कर बन रहे काम रफ्तार पकड़ेंगे और आर्थिक मोर्चे पर बड़ी राहत मिलेगी. आइए जानते हैं कि केतु के इस गोचर से किन 6 राशियों को अगले तीन महीनों तक बंपर लाभ मिलने जा रहा है: मेष राशि: अचानक धन लाभ और बौद्धिक क्षमता में वृद्धि मेष राशि के जातकों के लिए केतु का यह गोचर अत्यंत शुभ रहने वाला है. आपके पांचवें भाव से जुड़ा प्रभाव मिलने से शोध, शिक्षा और रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े लोगों को बड़ी सफलता मिलेगी. लंबे समय से अटका हुआ पैसा वापस मिल सकता है और शेयर बाजार या लॉटरी जैसे अप्रत्याशित स्रोतों से अचानक धन लाभ के योग बनेंगे. मिथुन राशि: पराक्रम में वृद्धि और करियर में बड़ी छलांग केतु का यह गोचर आपके तीसरे भाव में होने से आपके साहस और निर्णय लेने की क्षमता में जबरदस्त वृद्धि होगी. कार्यक्षेत्र में आपके विरोधी शांत रहेंगे और आपकी रणनीतियां सटीक बैठेंगी. यदि आप नया व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं या नौकरी बदलना चाहते हैं, तो अगले 90 दिन आपके लिए सर्वश्रेष्ठ अवसर लेकर आ रहे हैं. सिंह राशि: व्यक्तित्व में निखार और नेतृत्व क्षमता का विकास चूंकि केतु आपकी ही राशि (प्रथम भाव) में गोचर कर रहे हैं, इसलिए यह समय आपके आत्म-विश्लेषण और अध्यात्म की दिशा में एक नया मोड़ लाएगा. आपकी नेतृत्व क्षमता मजबूत होगी. हालांकि आपको सेहत को लेकर थोड़ा सतर्क रहना होगा, लेकिन करियर और सामाजिक प्रतिष्ठा के मामले में आपको जबरदस्त बढ़त मिलेगी. तुला राशि: आय के नए स्रोत और इच्छाओं की पूर्ति ग्यारहवें (लाभ) भाव में केतु की उपस्थिति को ज्योतिष में बेहद शुभ माना गया है. तुला राशि वालों की आर्थिक स्थिति में अभूतपूर्व सुधार देखने को मिलेगा. आपकी जमा पूंजी में वृद्धि होगी और बड़े भाइयों या वरिष्ठ अधिकारियों के सहयोग से आपके बड़े प्रोजेक्ट्स पूरे होंगे. इच्छाओं की पूर्ति का यह स्वर्णिम काल साबित होगा. धनु राशि: भाग्योदय और आध्यात्मिक यात्राओं का योग धनु राशि के नौवें (भाग्य) भाव में केतु का गोचर आपके सोए हुए भाग्य को जगाने का काम करेगा. धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रुचि बढ़ेगी. लंबी दूरी की यात्राएं लाभदायक साबित होंगी. जो लोग विदेश जाकर पढ़ाई या नौकरी करने का सपना देख रहे हैं, उनके लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल होंगी. कुंभ राशि: व्यापार में विस्तार और पार्टनरशिप से फायदा सातवें भाव पर केतु का प्रभाव आपके व्यापारिक रिश्तों में एक नई दिशा देगा. पुराने मतभेद सुलझेंगे और बिजनेस में नए सौदे तय होंगे. जो लोग आयात-निर्यात या विदेशी कंपनियों से जुड़कर काम करते हैं, उन्हें उम्मीद से ज्यादा मुनाफा होगा. जीवनसाथी के साथ सामंजस्य बिठाकर चलने से पारिवारिक जीवन भी सुखद रहेगा.

आज का राशिफल 15 सितंबर: इन राशियों पर बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा, धन लाभ के योग

मेष मेष राशि के जातकों आप अपनी लाइफ में बैलेंस बनाएं। चाहे लव लाइफ हो, करियर, सेहत या फाइनेंशियल लाइफ हो, जीवन में संतुलन बनाने से लाभ होगा। नए अवसरों के लिए खुले रहें। वृषभ आज का दिन वृषभ राशि के लोगों के लिए ग्रोथ और बदलावों के बारे में है। लव के मामले में आपको बातचीत पर ध्यान देने की जरूरत है। जबकि करियर के अवसर खुद ही सामने आ सकते हैं। मिथुन आज की एनर्जी का पूरा लाभ उठाने के लिए फाइनेंशियली स्टेबल रहें। खुद की देखभाल करें। आज का दिन परिवर्तन और विकास लेकर आया है। रिश्तों और करियर पर ध्यान दें और एक संपूर्ण दिन के लिए खुद की देखभाल को प्राथमिकता दें। कर्क कर्क राशि वालों प्रेम जीवन में दिन रोमांटिक साबित हो सकता है। किसी मेहमान के घर आने की संभावना है। सुस्ती के कारण आपकी फिटनेस रूटीन प्रभावित हो सकती है। सेहत को लेकर बेवजह चिंता करने की सलाह नहीं दी जाती है। सिंह आज कार्यस्थल पर आपने जो सोच रखा है, उसे हासिल करने से आपको कोई नहीं रोक सकता। कुछ लोगों के लिए शहर से बाहर की यात्रा के योग हैं। कुछ लोगों को कमाई बढ़ाने के नए रास्ते मिलेंगे। कन्या आज हो सकता है किसी मुद्दे पर परिवार आपके साथ न हो। कोई प्रोजेक्ट आपको प्रतिष्ठा के पद पर पहुंचा देगा। अपने साथी को खुश करने के लिए आपको रोमांटिक शाम बिताने का मौका मिल सकता है। तुला तुला राशि वालों को आज सेहत को लेकर चिंता हो सकती है, लेकिन कोई गंभीर बात नहीं होगी। लोगों को खुश करने की कोशिश में खुद पर तनाव नहीं डालना चाहिए। आप अपने पार्टनर को खुश करने की पूरी कोशिश कर सकते हैं। वृश्चिक वृश्चिक राशि वालों जातकों ज्यादा टेंशन न लें। अब कुछ नया करने का समय है। आज का दिन आपको समझने में मदद करेगा कि आप किन टॉक्सिक चीजों से छुटकारा पा चुके हैं। धनु आज के दिन ऑफिस में आपका सामना किसी ऐसे व्यक्ति से हो सकता है, जो काफी चालाक है। अगर पार्टनर ने तय कर लिया है कि वे टाइम स्पेन्ड नहीं करेंगे, तो आप उनका मन बदलने के लिए ज्यादा कुछ नहीं कर सकते। मकर मकर राशि के कुछ स्टूडेंट्स के लिए पढ़ाई के मामले में सुधार होने की संभावना है। रूटीन से ब्रेक लेने से आपको प्रॉफिट होगा। अगर आपने बिजनेस में पैसा खो दिया है, तो फिर से मेहनत करने के लिए तैयार रहें। कुम्भ आज अपने ऊपर किसी भी चीज का ज्यादा दबाव न डालें। भरोसा रखें कि सबकुछ समय के हिसाब से काम करेगा। एक नया सफर आपका इंतजार कर रहा है। काम का बोझ शेयर करने से मेंटल हेल्थ को फायदा होगा। मीन कभी-कभी उदास होना नॉर्मल है। आपको सारी जिम्मेदारियां अकेले मैनेज की जरूरत नहीं है। कुछ वक्त अपनी हॉबी को दें, जिससे आपको खुशी मिलती है। आपके पास दूसरा कोई ऑप्शन नहीं है, यह मानना सही नहीं है।

घर में इन 5 जगहों पर रखें नमक, वास्तु के अनुसार दूर हो सकती है नेगेटिविटी

 नमक हर किचन में आसानी से मिल जाता है. खाने में इसका इस्तेमाल तो रोज होता ही है, लेकिन वास्तु और पुरानी मान्यताओं में भी नमक को खास माना गया है. ऐसा माना जाता है कि नमक घर के माहौल से नेगेटिव चीजों को कम करने में मदद कर सकता है. वास्तु विशेषज्ञ बाबा बिमलेश के अनुसार, घर में नमक रखने की जगह को लेकर कई तरह की मान्यताएं हैं. कुछ लोग इन्हें घर में पॉजिटिव माहौल और सुख-समृद्धि से जोड़कर देखते हैं. मुख्य दरवाजे के पास रख सकते हैं नमक वास्तु की कुछ मान्यताओं में घर के मुख्य दरवाजे के पास नमक रखने की बात कही गई है. इसके लिए कांच की छोटी कटोरी में थोड़ा सेंधा नमक रखा जा सकता है. माना जाता है कि इससे बाहर से घर में आने वाली नेगेटिव चीजों को कम करने में मदद मिल सकती है. नमक की कटोरी ऐसी जगह रखें जहां किसी का पैर न लगे और वह आसानी से गिरे भी नहीं. बाथरूम में नमक रखने की भी मान्यता बाथरूम में पानी और नमी ज्यादा होती है. वास्तु के कुछ उपायों में यहां नमक रखने की बात भी कही जाती है. इसके लिए एक छोटी कांच की कटोरी में थोड़ा नमक रख सकते हैं. अगर नमक गीला हो जाए तो उसे बदल दें. कटोरी में रखा नमक लंबे समय तक छोड़ने के बजाय समय-समय पर नया नमक रखना बेहतर माना जाता है. लिविंग रूम में भी रख सकते हैं नमक लिविंग रूम में परिवार के लोग साथ बैठते हैं और मेहमान भी आते हैं. वास्तु की कुछ मान्यताओं के अनुसार यहां नमक रखने से घर का माहौल पॉजिटिव रखने में मदद मिल सकती है. इसके लिए छोटी कटोरी में थोड़ा नमक रख सकते हैं. कटोरी को साफ जगह पर रखें और नमक को समय-समय पर बदलते रहें. उत्तर-पूर्व दिशा में नमक रखना वास्तु में उत्तर-पूर्व दिशा को खास माना जाता है. कुछ मान्यताओं के अनुसार इस दिशा में नमक रखने से घर में पॉजिटिव माहौल और सुख-समृद्धि बनाए रखने में मदद मिल सकती है. अगर आप यह उपाय करना चाहती हैं तो नमक को साफ कांच के बर्तन में रख सकती हैं. जगह भी साफ और सूखी होनी चाहिए. बेडरूम में नमक रखने का उपाय से कमरे में मौजूद नेगेटिव माहौल को कम करने में मदद मिल सकती है. अगर आप यह उपाय करती हैं तो नमक को खुले में रखने के बजाय छोटी कटोरी या किसी साफ बर्तन में रखें. किचन में नमक कहां रखें? नमक का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किचन में ही होता है. इसलिए इसे ऐसी जगह रखना चाहिए जहां पानी और भाप कम पहुंचे. नमक को हमेशा साफ और सूखे डिब्बे में बंद करके रखना बेहतर है. वास्तु की मान्यताओं में भी किचन में नमक को साफ और सही तरीके से रखने की बात कही जाती है. गीली जगह पर नमक रखने से वह जल्दी गीला हो सकता है. खिड़की के पास नमक रखने की मान्यता कुछ वास्तु उपायों में खिड़की के पास नमक रखने की बात भी कही जाती है. मान्यता है कि इससे बाहर से आने वाली नेगेटिव चीजों को कम करने में मदद मिल सकती है. हालांकि, खिड़की के पास नमक रखते समय बारिश और नमी का ध्यान रखें. अगर नमक गीला हो जाए तो उसे बदल दें. पोछे के पानी में नमक डालने का उपाय घर की सफाई से जुड़ा एक वास्तु उपाय पोछे के पानी में थोड़ा नमक मिलाना भी है. इसे घर के माहौल से नेगेटिव चीजों को कम करने से जोड़कर देखा जाता है. लेकिन ऐसा करने से पहले फर्श की सतह जरूर देख लें. हर तरह के फर्श पर नमक डालकर सफाई करना सही नहीं होता. ऑफिस डेस्क पर भी रख सकते हैं नमक कुछ वास्तु मान्यताओं में ऑफिस या काम करने वाली जगह पर नमक रखने की बात भी कही जाती है. इसके लिए डेस्क पर छोटी कटोरी में थोड़ा नमक रखा जा सकता है. इसे ऐसी जगह रखें जहां काम करते समय हाथ न लगे और नमक गिरे नहीं. कटोरी में रखा नमक भी समय-समय पर बदलते रहें. नमक रखते समय इन बातों का रखें ध्यान नमक को हमेशा साफ और सूखी जगह पर रखना बेहतर होता है. अगर किसी कटोरी में रखा नमक गीला हो गया है तो उसे बदल दें. नमक को गंदी या बहुत ज्यादा नमी वाली जगह पर रखने से बचें. सबसे जरूरी बात यह है कि नमक से जुड़े इन उपायों को सिर्फ वास्तु और पारंपरिक मान्यता के तौर पर ही देखें. नमक रखने से पैसा टिकेगा या घर की नेगेटिव चीजें पूरी तरह खत्म हो जाएंगी, ऐसा कोई पक्का दावा नहीं किया जा सकता.

गणेश चतुर्थी पर कैसी मूर्ति लाएं? जानें बप्पा की सूंड किस दिशा में होना माना जाता है शुभ

 गणेश चतुर्थी पर घर में गणपति बप्पा की मूर्ति लाने की तैयारी कर रहे हैं, तो मूर्ति खरीदते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है. खासकर गणेश जी की सूंड किस तरफ होनी चाहिए, इसे लेकर अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है. वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मूर्ति का स्वरूप और उसकी दिशा घर के माहौल से जुड़ी मानी जाती है. ऐसे में बप्पा की मूर्ति खरीदने से पहले इन बातों को जान लेना आपके काम आ सकता है. किस दिशा में होनी चाहिए गणेश जी की सूंड? वास्तु से जुड़ी पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, घर में गणेश जी की बाईं ओर मुड़ी सूंड वाली मूर्ति (Ganesh Idol Trunk Direction) रखना शुभ माना जाता है. इसे सामान्य गृहस्थ जीवन के लिए उपयुक्त माना जाता है. मान्यता है कि बाईं ओर मुड़ी सूंड वाला स्वरूप सौम्यता और शांति से जुड़ा होता है. मूर्ति खरीदते समय यह जरूर देखें कि सूंड साफ और सही आकार में हो. केवल सूंड की दिशा देखकर ही मूर्ति को शुभ या अशुभ मानना जरूरी नहीं है, क्योंकि अलग-अलग परंपराओं में इसके अलग अर्थ बताए गए हैं. दाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणेश जी को लेकर क्या मान्यता है? अगर गणेश जी की सूंड उनकी दाईं ओर मुड़ी हुई है, तो इसे दक्षिणाभिमुखी गणेश कहा जाता है. वास्तु और धार्मिक मान्यताओं में इस स्वरूप को विशेष (Ganesh Idol Trunk Direction) माना जाता है. ऐसी प्रतिमा के साथ पूजा के कुछ खास नियमों का पालन करने की बात कही जाती है. इसलिए सामान्य घर की पूजा के लिए लोग अक्सर बाईं ओर मुड़ी सूंड वाली प्रतिमा को प्राथमिकता देते हैं. बैठी हुई गणेश जी की मूर्ति क्यों मानी जाती है शुभ? वास्तु की मान्यताओं में घर के लिए बैठे हुए गणेश जी की मूर्ति को अच्छा माना जाता है. इसे स्थिरता और शांति का प्रतीक माना जाता है. खासकर अगर मूर्ति घर के पूजा स्थान के लिए ली जा रही है, तो बैठे हुए गणेश जी की प्रतिमा एक सामान्य विकल्प हो सकती है. मूर्ति खरीदते समय यह भी देखें कि गणेश जी का चेहरा प्रसन्न और शांत दिखाई दे. गणेश जी की मूर्ति किस दिशा में रखें? वास्तु की मान्यताओं के अनुसार, घर में गणेश जी की मूर्ति को उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण में रखना शुभ माना जाता है. अगर वहां पूजा स्थान बनाना संभव न हो, तो घर की स्थिति के अनुसार किसी साफ और शांत जगह पर पूजा स्थान बनाया जा सकता है. गणेश जी की मूर्ति को सीधे जमीन पर रखने के बजाय किसी साफ चौकी या पूजा स्थान पर रखना बेहतर माना जाता है.

लंदन के टेम्स किनारे पहली बार गूंजे मंत्र और शंख, दिखा गंगा आरती का अद्भुत नजारा

भारत में गंगा आरती का नाम आते ही वाराणसी, हरिद्वार और ऋषिकेश के घाट याद आते हैं. लेकिन रविवार को हजारों किलोमीटर दूर लंदन में भी ऐसा ही आध्यात्मिक नजारा देखने को मिला. यहां पहली बार टेम्स नदी के किनारे गंगा आरती की गई. मंत्रों, संगीत, शंख और दीपों के बीच पूरा माहौल भक्तिमय हो गया. यह आयोजन लंदन के ग्रीनविच में स्थित ओल्ड रॉयल नेवल कॉलेज में हुआ. चिन्मय मिशन यूके ने इसे 'टोटली टेम्स' फेस्टिवल के साथ मिलकर आयोजित किया था. इस कार्यक्रम में हजारों लोग शामिल हुए. दीप, मंत्र और प्रार्थना से सजा किनारा गंगा आरती में बड़े बहु-स्तरीय तेल के दीप जलाए गए. इसके साथ प्रार्थना, संगीत और मंत्रों का जाप हुआ. भारत में होने वाली गंगा आरती की तरह यहां भी नदी के प्रति सम्मान और आभार जताया गया. आयोजकों के मुताबिक, गंगा आरती सिर्फ एक धार्मिक रस्म नहीं है. यह प्रकृति और जीवन को बनाए रखने वाली चीजों के प्रति आभार जताने का एक तरीका भी है. गंगा सिर्फ नदी नहीं, ज्ञान का भी प्रतीक इस आयोजन का एक खास पहलू गंगा से जुड़ा आध्यात्मिक अर्थ भी रहा. चिन्मय मिशन यूके की रेजिडेंट टीचर ब्रह्मचारिणी श्रीप्रिया चैतन्य ने बताया कि चिन्मय मिशन की परंपरा में गंगा ज्ञान के प्रवाह का भी प्रतीक है.  बता दें कि चिन्मय मिशन एक ऐसा संगठन है जो भारतीय आध्यात्मिक ज्ञान और वेदांत की शिक्षाओं को भारत के साथ-साथ विदेशों में भी लोगों तक पहुंचाता है. 75 साल पूरे होने का जश्न भी चिन्मय मिशन के संस्थापक स्वामी चिन्मयानंद ने वेदांत के ज्ञान को लोगों तक पहुंचाने के लिए अपना जीवन समर्पित किया था. इसलिए मिशन के 75 साल पूरे होने के मौके पर हुआ यह आयोजन ज्ञान, सेवा और कृतज्ञता की परंपरा से भी जोड़ा गया. मिशन की ओर से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में इस मौके पर कई कार्यक्रम किए जा रहे हैं. सिर्फ भारतीयों के लिए नहीं था कार्यक्रम यह आयोजन ब्रिटेन के हिंदू और दक्षिण एशियाई समुदाय के साथ-साथ सभी पृष्ठभूमि के लोगों के लिए खुला था. यानी जो लोग भारतीय परंपराओं को समझना चाहते हैं, वे भी इसमें शामिल हुए. इससे गंगा आरती को सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम के बजाय लोगों को साथ जोड़ने वाले आयोजन के रूप में भी पेश किया गया. टेम्स में नहीं डाली गई पूजा सामग्री आयोजन की एक खास बात पर्यावरण को लेकर भी रही. पूरी आरती नदी के किनारे जमीन पर हुई. कार्यक्रम से जुड़ी कोई भी चीज नदी में नहीं डाली गई और दीपों को पानी में बहाने के बजाय नदी किनारे ही रखा गया. इसका मकसद परंपरा की भावना को बनाए रखते हुए टेम्स नदी को साफ और सुरक्षित रखना था. भारतीय संस्कृति की भी दिखी झलक मुख्य आरती से पहले कार्यक्रम में भारतीय संगीत, डांस, खाने और दूसरी सांस्कृतिक गतिविधियां भी हुईं. बच्चों के लिए भी कार्यक्रम रखे गए थे. इससे यह आयोजन सिर्फ पूजा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारतीय संस्कृति और समुदाय को जोड़ने वाला एक बड़ा कार्यक्रम बन गया. लंदन में पहली बार हुई यह गंगा आरती इस मायने में खास रही कि भारत की सदियों पुरानी नदी पूजा की परंपरा को एक नए देश और नई नदी के किनारे पेश किया गया. गंगा और थेम्स के किनारे हुए इस आयोजन में धर्म के साथ प्रकृति, संस्कृति, ज्ञान और भारतीय समुदाय से जुड़ाव का संदेश भी देखने को मिला.

हरतालिका तीज आज, सुबह 6:05 से पूजा का शुभ समय; शाम को भी कर सकते हैं पूजन

 हरतालिका तीज का व्रत आज यानी 14 सितंबर को रखा जा रहा है. यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए खास माना जाता है.  सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से यह व्रत रखती हैं. वहीं अविवाहित लड़कियां मनचाहा जीवनसाथी पाने की इच्छा से हरतालिका तीज का व्रत करती हैं. हरतालिका तीज की पूजा कब करें? पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर की सुबह 7:08 बजे शुरू होकर 14 सितंबर की सुबह 7:06 बजे खत्म हो रही है. उदया तिथि के हिसाब से इस साल हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर को रखा जा रहा है. पंचांग के अनुसार सुबह पूजा का शुभ समय 6:05 बजे से 7:06 बजे तक है. यानी सुबह पूजा के लिए करीब एक घंटे का समय है.  अलग-अलग शहरों में सूर्योदय के समय के अंतर के कारण मुहूर्त में थोड़ा बदलाव हो सकता है. सुबह पूजा नहीं कर पाईं तो शाम को ये समय रहेगा अगर किसी वजह से सुबह पूजा नहीं हो पाई है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है.  शाम के समय भी भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जा सकती है. 14 सितंबर को प्रदोष काल शाम 5:43 बजे से 7:13 बजे तक रहेगा. इस दौरान शिव-पार्वती की पूजा करना शुभ माना जाता है. पूजा में क्या चढ़ाएं? हरतालिका तीज की पूजा में भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा की जाती है. परंपरा के अनुसार मिट्टी या बालू से शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर भी पूजा की जाती है. भगवान शिव को जल, बेलपत्र, फूल और धतूरा चढ़ाया जा सकता है. माता पार्वती को फूल, फल और सुहाग की चीजें अर्पित की जाती हैं. पूजा के बाद हरतालिका तीज की कथा सुनने या पढ़ने और आरती करने की परंपरा है. पूजा की थाली में रखें ये चीजें पूजा के लिए शिव-पार्वती की प्रतिमा, गणेश जी की प्रतिमा, कलश, जल, गंगाजल, अक्षत, रोली, मौली, चंदन, फूल, बेलपत्र, धतूरा, फल, मिठाई, धूप, दीपक और कपूर रख सकते हैं. माता पार्वती को सुहाग की सामग्री चढ़ाने की भी परंपरा है. इसमें सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, मेहंदी और चुनरी जैसी चीजें शामिल की जा सकती हैं. क्यों रखा जाता है हरतालिका तीज का व्रत? हरतालिका तीज का संबंध माता पार्वती की तपस्या से बताया जाता है. मान्यता है कि माता पार्वती भगवान शिव को पति के रूप में पाना चाहती थीं. इसके लिए उन्होंने कठोर तप किया था. कहा जाता है कि माता पार्वती की सखी उन्हें वन में ले गई थीं, जहां उन्होंने भगवान शिव को पाने के लिए तपस्या की.  इसी कथा से हरतालिका तीज की परंपरा जुड़ी मानी जाती है. निर्जला रखा जाता है व्रत हरतालिका तीज का व्रत कठिन व्रतों में माना जाता है.  कई महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं, यानी पूरे दिन कुछ खाती-पीती नहीं हैं.  रात में पूजा और कथा के बाद भी व्रत जारी रहता है. हालांकि हर किसी के लिए निर्जला व्रत रखना जरूरी नहीं माना जाना चाहिए.  स्वास्थ्य संबंधी परेशानी, गर्भावस्था या दवाइयां चल रही हों तो व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है. कब खुलेगा व्रत? हरतालिका तीज का व्रत अगले दिन यानी 15 सितंबर को सूर्योदय के बाद पूजा-पाठ करके खोला जाएगा.  पारण से पहले भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर उन्हें जल और नैवेद्य अर्पित करने की परंपरा है.  इसके बाद व्रत खोला जाता है.  स्थानीय पंचांग के अनुसार पारण का समय देखना बेहतर रहेगा.