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16 मार्च 2026 का राशिफल: किस राशि का होगा दिन शुभ, और कौन रहे सतर्क, जानें पूरी जानकारी

मेष राशि मेष राशि वालों को रिअल एस्टेट में निवेश करने से लाभ मिल सकता है. निवेश से लाभ होने से आर्थिक स्थिति बेहतर होगी. आप जीवनसाथी के साथ बातचीत कर सकते हैं. वृषभ राशि किसी अटके हुए काम और धन खर्च के कारण आपका मूड खराब हो सकता है. अपने साथी की छोटी-मोटी गलती को माफ करें. व्यर्थ में बहस न करें. वैवाहिक जीवन अच्छा रहेगा. मिथुन राशि आप जल्दी पैसा कमाना चाहते हैं ऐसा संभव नहीं हो सकेगा. आपका किसी प्रिय के कारण मूड खराब हो सकता है. भागदौड़ के कारण जीवनसाथी को समय न देने से रिश्ते में तनाव हो सकता है. कर्क राशि कर्क राशि वाले लोग अपना समय शौक को पूरा करने में लगा सकते हैं. आप किसी करीबी रिश्तेदार की मदद ले सकते हैं. आपको आर्थिक लाभ हो सकता है. पार्टनर के साथ समय बिता सकते हैं. सिंह राशि आप मौज-मस्ती के लिए मनपसंद काम कर सकते हैं इससे आपका दिन अच्छा बीतेगा. निवेश करने से लाभ हो सकता है. रिश्तों को अहमियत दें. कन्या राशि कन्या राशि वालों को किसी से उपहार मिल सकता है. किसी नए काम की शुरुआत करना चाहते हैं तो किसी की सलाह अवश्य लें. जीवनसाथी के सुस्त होने के कारण काम असफल हो सकते हैं. तुला राशि आप लोन लेने का सोच रहे हैं तो आपको लोन मिल सकता है. पैसे मिलने से अटके काम पूरे होंगे. कोई नया काम करने का सोच रहे हैं तो अच्छे से विचार लें. वृश्चिक राशि वृश्चिक राशि वालों के लिए आमदनी के नए स्त्रोत बनेंगे. आपके कामकाज के स्तर में सुधार होगा. आप अपना समय जीवनसाथी के साथ बिता सकते हैं. धनु राशि आप धन की बचत करने का सोच रहे हैं तो ऐसा कर सकते हैं. धन की बचत करना भविष्य में काम आएगा. किसी गलती की वजह से परिवार के साथ तनाव हो सकता है. स्थिति को बातचीत से संभालें. मकर राशि मकर राशि वालों को धनलाभ हो सकता है. धनलाभ होने से आर्थिक स्थिति मजबूत होगी. दोस्तों या परिवार की परेशानियों के कारण तनाव हो सकता है. कुंभ राशि कुंभ राशि के लोग परिवार के सदस्यों के साथ अच्छे पल बिता सकते हैं. आप पुरानों दोस्तों के साथ समय बिता सकते हैं. वैवाहिक जीवन में निजता का ध्यान रखें. मीन राशि मीन राशि वालों का बच्चों की पढ़ाई पर खर्च हो सकता है. इससे आपको नुकसान होगा. वैवाहिक लोगों के लिए दिन अच्छा रहेगा. (All Photo Credit- Social Media) डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

कौन सी मंजिल बनाती है घर को भाग्यशाली? वास्तु के अनुसार जानिए कीमती चीजें रखने की सही जगह

वास्तुशास्त्र के प्राचीन विज्ञान में केवल दिशाओं का ही नहीं, बल्कि ऊंचाई और धरातल का भी विशेष महत्व बताया गया है। जब हम बहुमंजिला इमारतों की बात करते हैं, तो अक्सर मन में यह सवाल आता है कि कौन सा फ्लोर हमारे लिए सौभाग्य लेकर आएगा और किस मंजिल पर अपनी गाढ़ी कमाई या कीमती सामान रखना सुरक्षित और समृद्धशाली होगा। वास्तु के सिद्धांतों के अनुसार, पृथ्वी की ऊर्जा और चुंबकीय क्षेत्र का प्रभाव हर मंजिल पर अलग-अलग होता है। आइए जानते हैं मंजिलों का रहस्य और कीमती सामान रखने की सही जगह। कौन सी मंजिल है सबसे भाग्यशाली ? वास्तुशास्त्र में धरातल और प्रथम तल को सबसे अधिक ऊर्जावान माना गया है। इसका कारण यह है कि ये मंजिलें पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र और गुरुत्वाकर्षण बल के सबसे करीब होती हैं। पृथ्वी से मिलने वाली धैर्य और स्थिरता की ऊर्जा यहां रहने वालों को मानसिक शांति और आर्थिक मजबूती प्रदान करती है। हालांकि, आधुनिक वास्तु के अनुसार, यदि आप किसी ऊंची इमारत में रह रहे हैं, तो चौथी, नौवीं और ग्यारहवीं मंजिल को भी शुभ माना जाता है। लेकिन यहाँ एक महत्वपूर्ण नियम यह है कि आप जिस भी फ्लोर पर रहें, वहां की ढलान और दिशाओं का संतुलन सही होना चाहिए। यदि आप ऊंचे फ्लोर पर रहते हैं, तो आपको अपने घर में अधिक से अधिक प्राकृतिक रोशनी और हवा का प्रबंधन करना चाहिए क्योंकि ऊंचाई पर वायु तत्व प्रधान हो जाता है, जिससे कभी-कभी स्वभाव में अस्थिरता आ सकती है। कीमती सामान और धन रखने का वास्तु रहस्य दक्षिण-पश्चिम कोना अपनी कीमती ज्वेलरी, जमीन के कागजात और नकदी रखने के लिए घर का दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य कोण) हिस्सा सबसे उपयुक्त होता है। यह कोना पृथ्वी तत्व का प्रतिनिधित्व करता है, जो स्थिरता देता है। इस दिशा में रखी गई संपत्ति में फिजूलखर्ची कम होती है और संचय बढ़ता है। उत्तर दिशा उत्तर दिशा को कुबेर की दिशा माना जाता है। यदि आप अपनी तिजोरी या अलमारी को उत्तर दिशा की दीवार से सटाकर रखते हैं और उसका मुख उत्तर की ओर ही खुलता है, तो यह धन के नए अवसर पैदा करता है। ध्यान रखें कि तिजोरी के सामने कोई शीशा न हो और वह सीधे मुख्य द्वार के सामने न दिखाई दे। किस फ्लोर पर क्या रखने से बचेगा पैसा  ? यदि आप ग्राउंड फ्लोर पर रहते हैं, तो अपनी तिजोरी को फर्श से थोड़ा ऊपर स्टैंड पर रखें। जमीन से सीधे सटाकर धन रखना ऊर्जा को 'ग्राउंड' कर सकता है, जिससे पैसा टिकता नहीं है। यदि आप ऊपरी मंजिलों पर रहते हैं, तो वहां आकाश तत्व की अधिकता होती है। यहां धन को सुरक्षित रखने के लिए भारी लकड़ी की अलमारी का उपयोग करना चाहिए। भारीपन स्थिरता का प्रतीक है जो ऊपरी मंजिलों की चंचलता को संतुलित करता है। भूलकर भी न करें ये गलतियां सीढ़ियों के नीचे का स्थान: कई लोग जगह बचाने के लिए सीढ़ियों के नीचे स्टोर रूम या अलमारी बना देते हैं। वास्तु के अनुसार, यहाँ कीमती सामान रखने से कर्ज बढ़ता है और व्यापार में घाटा हो सकता है। अंधेरा कोना: जहां आप धन रखते हैं, वहां कभी भी अंधेरा नहीं होना चाहिए। वहां एक छोटा सा बल्ब या रोशनी की व्यवस्था अवश्य रखें ताकि लक्ष्मी का आगमन स्पष्ट हो सके।

नवरात्रि में राशि अनुसार करें ये 9 उपाय, बदलेगी किस्मत

पंचांग के अनुसार, साल 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक चलेगी. हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की आराधना के लिए बेहद पवित्र माना जाता है. इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है और भक्त व्रत रखकर मां का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर नवरात्रि में अपनी राशि के अनुसार कुछ खास उपाय किए जाएं तो मां दुर्गा की विशेष कृपा मिलती है और जीवन की परेशानियां दूर होने लगती हैं. आइए जानते हैं मेष से मीन तक सभी राशि वालों के लिए नवरात्रि के सरल उपायों के बारे में. मेष राशि नवरात्रि के दौरान मेष राशि के जातक मां दुर्गा को लाल फूल और लाल चुनरी अर्पित करें. साथ ही ॐ दुं दुर्गायै नमः मंत्र का जाप करें. इससे साहस और सफलता में वृद्धि होती है. वृषभ राशि वृषभ राशि के लोग मां दुर्गा को सफेद मिठाई या खीर का भोग लगाएं. शुक्रवार के दिन गरीबों को भोजन कराना भी शुभ माना जाता है. इससे आर्थिक स्थिति मजबूत होती है. मिथुन राशि मिथुन राशि वाले नवरात्रि में हरे रंग के फल या हरी इलायची मां को अर्पित करें. साथ ही दुर्गा चालीसा का पाठ करें. इससे बुद्धि और निर्णय क्षमता मजबूत होती है. कर्क राशि कर्क राशि के जातक मां दुर्गा को दूध से बनी मिठाई का भोग लगाएं और कन्याओं को भोजन कराएं. इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है. सिंह राशि सिंह राशि वालों को मां दुर्गा को गुड़ और गेहूं अर्पित करना चाहिए. रविवार के दिन जरूरतमंद लोगों को दान करना लाभदायक माना जाता है. कन्या राशि कन्या राशि के लोग नवरात्रि में पीले फूल और केले मां दुर्गा को चढ़ाएं. साथ ही दुर्गा सप्तशती का पाठ करना भी शुभ माना जाता है. तुला राशि तुला राशि के जातक मां दुर्गा को सुगंधित इत्र या गुलाब के फूल अर्पित करें. इससे जीवन में संतुलन और खुशियां बढ़ती हैं. वृश्चिक राशि वृश्चिक राशि वाले नवरात्रि में लाल चंदन और गुड़ मां दुर्गा को अर्पित करें. साथ ही रोजाना दुर्गा मंत्र का जाप करें. धनु राशि धनु राशि के लोग मां दुर्गा को पीले फल और हल्दी अर्पित करें. गुरुवार के दिन गरीबों को दान करना बहुत शुभ माना जाता है. मकर राशि मकर राशि के जातक मां दुर्गा को तिल और तेल का दीपक जलाकर पूजा करें. इससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं. कुंभ राशि कुंभ राशि के लोग नवरात्रि में नीले या काले रंग के कपड़े दान करें और मां दुर्गा को नारियल अर्पित करें. मीन राशि मीन राशि के जातकों को मां दुर्गा को पीले फूल और बेसन के लड्डू चढ़ाने चाहिए. इससे घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है. नवरात्रि का महत्व नवरात्रि को शक्ति की साधना का पर्व माना जाता है. इन नौ दिनों में श्रद्धा और भक्ति से मां दुर्गा की पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा आती है. मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान किए गए छोटे-छोटे उपाय भी बड़े फल दे सकते हैं.

जब रिश्ता और आत्मसम्मान में चुनना पड़े… प्रेमानंद जी महाराज ने बताया सही रास्ता

जीवन में कई बार ऐसा मोड़ आ जाता है, जब समझ ही नहीं आता कि क्या करना सही रहेगा। खासतौर से जब बात उन रिश्तों की हो, जो हमारे दिल के बेहद करीब होते हैं। कई बार हम रिश्ता बचाना भी चाहते हैं, फिर हमें कहीं ना कहीं ये भी लगने लगता है कि अपना आत्मसम्मान बचाना ज्यादा जरूरी है। रिश्ते और आत्मसम्मान के बीच की ये कश्मकश चलती रहती है और कुछ हाथ नहीं लगता। प्रेमानंद जी महाराज के सत्संग में उनसे किसी ने यही सवाल किया कि रिश्ता अगर बिखर रहा हो तो आत्मसम्मान ज्यादा जरूरी है या फिर उस रिश्ते को बचाना। महाराज ने इसका जो उत्तर दिया है, वो वाकई हर किसी को जरूर सुनना चाहिए। रिश्ता या आत्मसम्मान, क्या जरूरी है? प्रेमानंद जी महाराज इस प्रश्न का उत्तर देते हुए कहते हैं कि आप जिस आत्म सम्मान की बात कर रहे हैं, वो कुछ नहीं बल्कि देहाभिमान है। इस अभिमान को मिटाकर ही रिश्तों का पोषण किया जा सकता है। अगर आप रिश्ते के बीच में इसे ले कर आते हैं, तो कभी ना कभी खटास होना तय है। आत्मसम्मान देव स्वरूप है लेकिन जो हमें आत्मसम्मान लगता है, वो ज्यादातर देहाभिमान होता है, जिसे सही नहीं माना गया है।इस देहाभिमान को मिटाकर हमें रिश्ता बचाना चाहिए। मान रहित हो कर सबका मान करें महाराज जी शास्त्रों में कहे गए एक श्लोक को दोहराते हुए बताते हैं कि जब आप मान रहित हो कर सबका मान करेंगे, तो रिश्ते अपने आप उज्ज्वल हो जाएंगे। वहीं जब हम अपने सम्मान की बात रखेंगे, तो रिश्ते में कहीं ना कहीं खटास आ ही जाएगी। इससे बेवजह आपका मन अशांत रहेगा और बेचैनी भी होगी। इसलिए शास्त्रों की सिद्धांत के अनुसार आपको अमानी यानी मान रहित होना चाहिए। ये होता है असली आत्मसम्मान प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि असली आत्मसम्मान वो होता है, जब सामने वाला आपसे कटु वचन कहे और आप फिर भी उसे प्यार से ही जवाब दें। ऐसे में आप खुद को किसी और के लिए नहीं बदलते हैं। ऐसे लोगों को भले ही कोई ना देख रहा हो लेकिन भगवान देख रहे होते हैं और जिससे भगवान प्रेम करें उससे दुनिया प्रेम करती है।

आपके घर का मेन डोर तय करता है पॉजिटिविटी – ऐसे रखें इसे सही

फेंगशुई एक चीनी वास्तु शास्त्र है, जिसमें ऊर्जा (Chi) को संतुलित रखने के बारे में बताया गया है। अगर आप अपने घर में सुख-समृद्धि और बरकत चाहते हैं, तो फेंगशुई नियमों का ध्यान जरूर रखें। इससे पॉजिटिव एनर्जी का फ्लो भी बरकरार रहता है। चलिए जानते हैं घर के मुख्य द्वार से जुड़े कुछ फेंगशुई टिप्स। जरूर रखें इन बातों का ध्यान फेंगशुई के अनुसार, मुख्य द्वार घर की उत्तर, पूर्व या दक्षिण-पूर्व दिशा में होना सबसे शुभ माना जाता है। आपको अपने घर के मुख्य दरवाजे पर साफ-सफाई का ध्यान जरूर रखना चाहिए। साथ ही आपका मुख्य द्वार खुला होना चाहिए, यानी यहां पर रोशनी व हवा पर्याप्त मात्रा में हो। साथ ही मुख्य द्वार पर चौखट बनवाना भी शुभ माना गया है। इन चीजों से करें सजावट फेंगशुई के मुताबिक घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बनाए रखने के लिए आप दरवाजे पर या खिड़कियों के पास विंड चाइम लगा सकते हैं। इससे नेगेटिविटी कम होती है। साथ ही आप द्वार के दोनों तरफ तुलसी का पौधा या मनी प्लांट रख सकते हैं। फेंगशुई में लाल, भूरे या सुनहरे रंग का मुख्य द्वार शुभ माना गया है। भूल से भी न करें ये गलतियां फेंगशुई के नियमों के मुताबित आपका मेन गेट जर्जर हालात में नहीं होना चाहिए और न ही मेन गेट टूटी हुई होनी चाहिए। मुख्य द्वार पर फालतू का सामान जैसे जूते-चप्पलों का ढेर और कबाड़ आदि इकट्ठा करने बचें। क्योंकि ये चीजें सकारात्मक ऊर्जा को घर में प्रवेश होने से रोकती हैं। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि आपका दरवाजा खुलते व बंद होते समय आवाज न करे। इन सभी नियमों का पालन करने से आपके घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है, जिससे घर में सुख-समृद्धि आती है।  

खरमास की शुरुआत: अगले 30 दिन इन कामों से बचें, वरना पड़ सकता है नुकसान

  पंचांग के अनुसार, साल में कुछ ऐसे समय आते हैं जब मांगलिक और शुभ कार्यों को करने से परहेज किया जाता है. ऐसा ही एक विशेष समय खरमास होता है, जिसे कई जगहों पर मलमास भी कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है. पंचांग के अनुसार साल 2026 में खरमास की शुरुआत 15 मार्च से हो चुकी है, जो 14 अप्रैल 2026 तक रहेगा. इस पूरे एक महीने के दौरान धार्मिक रूप से कुछ नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है. क्या होता है खरमास? ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य देव गुरु ग्रह की राशियों यानी धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तब खरमास लगता है. इस समय सूर्य की स्थिति ऐसी मानी जाती है कि मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त नहीं बन पाता. इसलिए इस अवधि में विवाह, सगाई, गृह प्रवेश जैसे बड़े और शुभ कार्यों को टाल दिया जाता है. हालांकि खरमास भले ही मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल न माना जाता हो, लेकिन यह समय भक्ति, साधना और दान-पुण्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना गया है. खरमास में क्यों नहीं किए जाते मांगलिक कार्य? धार्मिक मान्यता के अनुसार इस समय सूर्य की गति और स्थिति ऐसी होती है कि शुभ कार्यों के लिए ग्रहों का पूर्ण सहयोग नहीं मिल पाता. इसी कारण से शास्त्रों में कहा गया है कि इस अवधि में नए और बड़े कार्य शुरू करने से अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते. इसलिए परंपरा के अनुसार लोग इन कार्यों को खरमास खत्म होने के बाद ही करते हैं. खरमास में कौन-कौन से काम करने से बचें? खरमास के दौरान कुछ मांगलिक कार्यों को करने से परहेज करने की सलाह दी जाती है.     विवाह और सगाई     गृह प्रवेश     नए घर का निर्माण शुरू करना     नया व्यवसाय या दुकान शुरू करना     मुंडन और नामकरण जैसे संस्कार     बड़े शुभ आयोजन  

Ram Navami 2026: राम नवमी कब है—26 या 27 मार्च, जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

इंदौर हिंदू धर्म में राम नवमी का पर्व भगवान राम के जन्मोत्सव के रूप में जाना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार त्रेता युग में चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अयोध्या में भगवान राम का जन्म हुआ था. तभी से इस तिथि पर देशभर में राम नवमी का पर्व मनाने की परंपरा चली आ रही है. इस दिन भक्त व्रत रखते हैं, मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. भगवान राम की कथा व भजन-कीर्तन किए जाते हैं. माना जाता है कि इस दिन श्रीराम की सच्चे मन से पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।  राम नवमी 2026 कब है? पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि का आरंभ 26 मार्च 2026 को सुबह 11 बजकर 48 मिनट पर होगा. इसका समापन 27 मार्च 2026 को सुबह 10 बजकर 6 मिनट पर होगा. धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान राम का जन्म मध्याह्न काल में हुआ था. इसलिए वर्ष 2026 में 26 मार्च 2026 को राम नवमी का पर्व मनाना अधिक शुभ माना जा रहा है. हालांकि जो लोग उदयातिथि के आधार पर पर्व मनाते हैं, वे 27 मार्च 2026 को भी राम नवमी मना सकते हैं।  26 मार्च 2026 का शुभ मुहूर्त सूर्योदय: सुबह 06:18 बजे मध्याह्न मुहूर्त: सुबह 11:13 से दोपहर 01:40 बजे तक मध्याह्न का क्षण: दोपहर 12:26 बजे 27 मार्च 2026 का शुभ मुहूर्त सूर्योदय: सुबह 06:17 बजे     मध्याह्न मुहूर्त: सुबह 11:12 से दोपहर 01:40 बजे तक     मध्याह्न का क्षण: दोपहर 12:26 बजे राम नवमी की पूजा विधि सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ या पीले रंग के वस्त्र धारण करें. भगवान राम का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें. गंगाजल या पंचामृत से भगवान राम,  सीता और लक्ष्मण की प्रतिमाओं का अभिषेक करें.पूजा में चंदन, अक्षत, फूल, फल और मिठाई अर्पित करें. देसी घी का दीपक जलाकर मंत्र जाप और राम नाम का कीर्तन करें. अंत में आरती करके भगवान से सुख-समृद्धि की कामना करें।   व्रत का पारण कब करें? राम नवमी के दिन व्रत रखने वाले भक्त अगले दिन नवमी तिथि समाप्त होने के बाद भगवान राम को अर्पित किए गए प्रसाद को ग्रहण करके व्रत का पारण कर सकते हैं. मान्यता है कि राम नवमी के दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान राम की पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं. धर्म व सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। 

15 मार्च 2026 का राशिफल: किसे मिलेगा भाग्य का साथ, और किसे रहना होगा सावधान

मेष कामकाज में व्यस्तता बनी रह सकती है। कुछ जिम्मेदारियां अचानक बढ़ सकती हैं, इसलिए समय को संभालकर चलना बेहतर रहेगा। किसी पुराने काम को आगे बढ़ाने का मौका मिल सकता है। पैसों से जुड़ा फैसला सोच-समझकर लें। घर के लोगों से बातचीत करने से मन हल्का रहेगा। वृषभ दिन सामान्य तरीके से आगे बढ़ सकता है। काम में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल सकता है। किसी जान-पहचान वाले से मदद मिल सकती है। खर्च को लेकर थोड़ा ध्यान रखना जरूरी रहेगा। परिवार के साथ बैठकर समय बिताने से अच्छा महसूस होगा। मिथुन मन थोड़ा इधर-उधर भटक सकता है। कई बातें एक साथ दिमाग में चल सकती हैं। ऐसे में जरूरी काम पहले निपटाना बेहतर रहेगा। किसी पुराने दोस्त से बात हो सकती है। दिन के अंत में थोड़ा आराम करने का समय मिल सकता है। कर्क काम में स्थिरता बनी रह सकती है। कुछ मामलों में धैर्य रखने की जरूरत पड़ेगी। घर से जुड़ी कोई बात ध्यान मांग सकती है। किसी करीबी की सलाह काम आ सकती है। जल्दबाजी में फैसला लेने से बचना बेहतर रहेगा। सिंह आत्मविश्वास बना रहेगा। काम में मेहनत करने का मन रहेगा और उसका फायदा भी धीरे-धीरे दिख सकता है। किसी नई योजना के बारे में सोच सकते हैं। दोस्तों या परिवार के साथ बातचीत अच्छी रह सकती है। कन्या काम की जिम्मेदारियां थोड़ी ज्यादा महसूस हो सकती हैं। अगर आप धैर्य से काम करेंगे तो धीरे-धीरे सब ठीक होता जाएगा। किसी करीबी की मदद मिल सकती है। सेहत को लेकर थोड़ा ध्यान रखें। तुला कुछ काम उम्मीद से धीमे चल सकते हैं। ऐसे में परेशान होने के बजाय शांत रहकर काम करना बेहतर रहेगा। छोटी बातों को ज्यादा बड़ा न बनाएं। पैसों के मामले में सावधानी रखें। घर के लोगों का साथ मिलेगा। वृश्चिक मन में कुछ नया करने की इच्छा हो सकती है। नई चीजें सीखने या समझने का मौका मिल सकता है। दोस्तों से बातचीत अच्छी रहेगी। काम में धीरे-धीरे चीजें साफ होती नजर आएंगी। धनु दिन मिलाजुला रह सकता है। कुछ काम आसानी से पूरे होंगे तो कुछ में थोड़ा समय लग सकता है। किसी पुराने मामले को सुलझाने का मौका मिल सकता है। दोस्तों के साथ बातचीत अच्छी रहेगी। मकर किसी जरूरी काम में धीरे-धीरे प्रगति हो सकती है। लंबे समय से अटका हुआ काम आगे बढ़ सकता है। मन में चल रही उलझन कम हो सकती है। परिवार के साथ समय बिताने से अच्छा लगेगा। कुंभ नई योजनाओं के बारे में सोच सकते हैं। किसी काम में बदलाव करने का मन बन सकता है। किसी अनुभवी व्यक्ति की सलाह फायदेमंद रह सकती है। घर का माहौल सामान्य रहेगा। मीन भावनाओं में आकर कोई बड़ा फैसला लेने से बचें। शांत रहकर सोचेंगे तो बेहतर रास्ता मिल सकता है। काम में ज्यादा परेशानी नहीं आएगी। परिवार का साथ बना रहेगा और मन थोड़ा हल्का महसूस होगा।

क्यों रखा जाता है गणगौर का व्रत? माता पार्वती को मिला था यह विशेष वरदान

हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन गणगौर का व्रत रखा जाता है. इस साल 21 मार्च को ये व्रत रखा जाएगा. गणगौर दो शब्दों गण और गौर से मिलकर बना है. गण का अर्थ भगवान शिव है और गौर माता पार्वती को कहा जाता है. ये व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित किया गया है. सुहागिन महिलाएं गणगौर का व्रत करती हैं. प्रमुख तौर पर राजस्थान और हरियाणा समेत उत्तर भारतीय राज्यों में गणगौर व्रत किया जाता है. हिंदू मान्यता है कि गणगौर का व्रत रखने और विधि-विधान से शिव और पार्वती की पूजा करने से पति की उम्र लंबी होती है और वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है. अविवाहित कन्याएं भी गणगौर का व्रत रखती हैं. मान्यता ये भी है कि इस व्रत को रखने से मनचाहा वर प्राप्त होता है, लेकिन आइए जानते हैं कि गणगौर का व्रत करने से माता पार्वती को कौन सा फल मिला था? साथ ही जानते हैं इस व्रत की कथा. पार्वती को शिव मिले पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवी पार्वती ने गणगौर का व्रत किया था. उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी. तप के साथ-साथ उन्होंने ये व्रत भी किया था. तभी से गणगौर व्रत रखने की परंपरा चली आ रही है. माना जाता है कि गणगौर व्रत के फल स्वरूप से ही देवों के देव महादेव देवी पार्वती को पति रूप में प्राप्त हुए. गणगौर व्रत की कथा पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान शिव और माता पार्वती नारद मुनि के साथ भ्रमण पर निकले. चलते-चलते वे चैत्र शुक्ल तृतीया तिथि के दिन एक गांव में पहुंचे. वहां की गरीब महिलाओं ने श्रद्धा के साथ माता पार्वती का पूजन किया. माता पार्वती ने उनकी भक्ति और पूजन से प्रसन्न होकर उनको अटल सौभाग्य का आशीर्वाद दिया. इसके बाद गांव की अमीर महिलाएं सोने-चांदी की थालियों में पकवान लेकर आईं. उस समय माता ने उन महिलाओं पर प्रसन्न होकर अपनी उंगली से रक्त की कुछ बूंदें उन पर छिड़ दीं और उनको स्वयं जैसी सौभाग्यवती बनने का आशीर्वाद दे दिया. इसके बाद पार्वती जी नदी में स्नान करने चली गईं. वहां उन्होंने बालू मिट्टी से शिव जी की प्रतिमा बनाई और पूजा की. तब शिव जी प्रकट हुए और माता पार्वती से कहा कि जो स्त्री इस दिन तुम्हारी तरह मेरा पूजन और व्रत करेगी, उसके पति की आयु लंबी होगी. पूजा करते हुए माता पार्वती को आने में देरी हो गई. जब वो शिव जी के पास पहुंची तो उन्होंने माता से देरी की वजह पूछी. इस पर माता पार्वती ने बताया कि उनको उनके भाई-भाभी मिले और दूध-भात खाने के लिए दिया, जिसमें समय लग गया. यह सुनकर शिव जी को भी वहां जाने का मन हुआ. फिरपार्वती जी ने मन ही मन भगवान शिव से उनकी लाज बचाने की प्रार्थना की. इसके बाद जब वे नदी तट पर पहुंचे, तो वहां एक मायावी महल नजर आया. वहां शिव-पार्वती का खूब आदर-सत्कार हुआ. वो तीन दिन महल में रहे. शिव जी का मन महल में ही रहने का था, लेकिन पार्वती जी चल पड़ीं तो उनको भी माता के पीछे आना पड़ा. रास्ते में भगवान शिव को याद आया कि वो महल में अपनी माला भूल आए हैं. माला लाने के लिए उन्होंने नारद जी को भेजा. नारद जी ने वहां जाकर देखा तो कोई महल नहीं था. बस पेड़ पर एक माला लटकी पड़ी थी. यह देखकर नारद जी हैरान रह गए.फिर नारद जी माला लेकर शिवजी के पास गए. माला देकर उन्होंने शिव जी से कहा कि प्रभु यह कैसी माया है जब मैं माला लेने गया तो वहां पर भवन नहीं था. इस पर शिव पार्वती मुस्कुराए और बोले कि यह सब तो देवी पार्वती की माया थी. इस पर देवी पार्वती ने कहा कि यह मेरी नहीं भोलेनाथ की माया थी. इसके बाद नारद जी ने कहा कि आप दोनों की माया को आपके अलावा को दूसरा नहीं समझ सकता. आप दोनों की जो भक्ति भाव से पूजा करेगा, उसके जीवन में भी आपकी तरह प्रेम बना रहेगा.

चैत्र नवरात्र अष्टमी 2026: तिथि, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त की पूरी जानकारी

इंदौर नवरात्र में पूरे 9 दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है. खासतौर से चैत्र नवरात्रि को बहुत अहम माना जाता है. चैत्र नवरात्र से ही हिंदू नववर्ष की शुरुआत  मानी जाती है. साल 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाई जाएंगी. इन नौ दिनों में देवी के नौ रूपों की आराधना की जाती है. नवरात्रि के दौरान अष्टमी और नवमी तिथि बेहद खास होती है. जानते हैं कि चैत्र नवरात्र 2026 में महाअष्टमी की तारीख और इस दिन पूजा के शुभ मुहूर्त क्या रहेंगे।  अष्टमी का महत्व नवरात्रि के आठवें दिन को अष्टमी कहा जाता है और यह दिन देवी पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. धार्मिक ग्रंथों जैसे देवी भागवत पुराण और मार्कंडेय पुराण में अष्टमी और नवमी तिथि को विशेष फलदायी बताया गया है. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से मां दुर्गा की आराधना करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. कई लोग इस दिन कन्या पूजन भी करते हैं, जिसमें छोटी बालिकाओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है।  कब शुरू होंगे चैत्र नवरात्रि 2026 ज्योतिषियों के अनुसार, चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 06 बजकर 52 मिनट पर प्रारंभ होगी और 20 मार्च को सुबह 04 बजकर 52 मिनट पर यह तिथि समाप्त हो रही है। ऐसे में 19 मार्च 2026 को चैत्र नवरात्रि का त्योहार प्रारंभ होगा। क्या है कलश स्थापना का शुभ समय  नवरात्रि के पहले दिन देवी की पूजा के साथ-साथ कलश स्थापित भी किया जाता है। यह बेहद शुभ और सुख-सौभाग्य लेकर आता है। इस दिन पहला शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 52 मिनट से सुबह 07 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। दूसरा मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। नौ दिनों की होगी नवरात्रि 19 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 1-  अमावस्या, प्रतिपदा मां शैलपुत्री पूजा और घटस्थापना 20 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 2- मां ब्रह्मचारिणी पूजा 21 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 3- मां चंद्रघंटा पूजा 22 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 4- मां कुष्मांडा पूजा 23 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 5-  मां स्कंदमाता पूजा 24 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 6- मां कात्यायनी पूजा 25 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 7- मां कालरात्रि पूजा 26 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 8- मां महागौरी पूजा ( इस दिन अष्टमी होगी। आप कन्या पूजन कर सकते हैं। ) 27  मार्च 2026- नवरात्रि दिन 9- मां सिद्धिदात्री पूजा ( इस दिन नवमी मनाई जाएगी। कन्या पूजन किया जाएगा )  पूजा विधि     नवरात्रि के पहले दिन आप एक साफ चौकी पर माता रानी की मूर्ति स्थापित करें।     देवी को लाल रंग की नई चुनरी पहनाएं।     इस दौरान देवी को अन्य श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें और उन्हें इत्र लगाएं।     एक साफ थाली में रोली और अक्षत का टीका बनाकर माता रानी को लगाएं।     इसके बाद साफ लोटे में जल भरकर उसपर नारियर चुनरी में बांधकर रखें और कलश स्थापित करें।     इस दौरान कलश को भी टिका लगाएं।     देवी को फूलों की माला पहनाएं और सूखे मेवे पूजा में भोग के रूप में शामिल कर लें।     अब आप धूप उठाकर देवी के नामों का जाप करें और फिर दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।     देवी की परिवार संग आरती कर लें और कुछ फल मिठाई भोग लगाकर प्रसाद के रूप में बांट दें।