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GRSE बनी नवरत्न कंपनी, रेवेन्यू और प्रॉफिट में तेज़ उछाल से मजबूत प्रदर्शन

 नई दिल्ली गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (Garden Reach Shipbuilders & Engineers) को नवरत्न कंपनी का दर्जा मिला है। वित्त मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक एंटरप्राइजेज से यह स्टेटटस मिला है। स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी जानकारी के अनुसार कंपनी को 19 जून 2026 को यह दर्जा मिला था। बता दें, नवरत्न स्टेटस मिलने के बाद पब्लिक सेक्टर की कंपनी और स्वतंत्र तरीके से वित्तीय फैसले ले सकते हैं। इस कंपनी का प्रदर्शन कैसा रहा है? गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स का रेवन्यू वित्त वर्ष 2026 के दौरान 7002 करोड़ रुपये रहा था। वित्त वर्ष 2022 में कंपनी का रेवन्यू 1754 करोड़ रुपये रहा था। कंपनी का प्रॉफिट (टैक्स भुगतान के बाद) 190 करोड़ रुपये से बढ़कर 748 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। वित्त वर्ष 2026 के दौरान कंपनी ने 8 वारशिप की डिलीवरी की है। कंपनी ने अबतक 800 से अधिक मरिन प्लेटफॉर्म बनाए थे। इसके अलावा कंपनी 118 वारशिप इंडियन नेवी को दिए। जर्मनी के ग्राहक के लिए कंपनी ने 12 मल्टी पर्पज़ वेसेल्स बना रही है। कंपनी के शेयरों की स्थिति क्या है? शुक्रवार को Garden Reach Shipbuliders के शेयर बीएसई में 0.96 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2797.30 रुपये के स्तर पर बंद हुआ था। इस साल अबतक कंपनी के शेयरों का प्रदर्शन 14 प्रतिशत बढ़ा है। पिछले एक साल में स्टॉक 10 प्रतिशत गिरा है। बता दें, कंपनी का 52 वीक हाई 3535 रुपये और 52 वीक लो लेवल 1965 रुपये है। कंपनी का मार्केट कैप 32043 करोड़ रुपये का है। दो साल में गार्डन रीच शिपबिल्डर्स लिमिटेड के शेयरों की कीमतों में 57 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली है। वहीं, तीन साल में यह स्टॉक 367 प्रतिशत बढ़ा है। बता दें, 5 साल में गार्डन रीच शिपबिल्डर्स के शेयरों का भाव 1341 प्रतिशत बढ़ा है। लगातार डिविडेंड दे रही है कंपनी इसी साल के फरवरी के महीने में कंपनी ने 7.15 रुपये का डिविडेंड दिया था। 2025 में गार्डन रीच शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने तीन बार डिविडेंड दिया था। तीन बार में कंपनी ने एक शेयर पर 19 रुपये का डिविडेंड दिया था।

स्मॉलकैप स्टॉक में हलचल की तैयारी: इटली से भारत तक भारी माल ढुलाई का जिम्मा मिला टाइगर लॉजिस्टिक को

नई दिल्ली  स्मॉल कैप स्टॉक टाइगर लॉजिस्टिक (इंडिया) लिमिटेड के शेयर सोमवार को फोकस में रहेंगे। कंपनी को भारत हैवी इलेक्ट्रकिल्स लिमिटेड से एक बड़ा वर्क ऑर्डर मिला है। इस खबर के सामने आने के बाद अब सोमवार को कंपनी के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है। क्या है वर्क ऑर्डर डीटेल्स (Tiger Logistics Work order details) टाइगर लॉजिस्टिक ने दी जानकारी में बताया है कि उन्हें 13 ओवर डाइमेंशनल कार्गो को ट्रांसपोर्ट करना है। कंपनी ने कहा है कि हर एक वजह 89 मैट्रिक टन है। इस ऑर्डर के अनुसार कंपनी को इटली से इंडिया सामान को लाना है। बता दें, वर्क ऑर्डर की कुल कीमत 4 करोड़ रुपये की है। शेयरों का प्रदर्शन पिछले एक साल मे कैसा है? टाइगर लॉजिस्टिक कंपनी के शेयर बीएसई में 0.14 प्रतिशत की तेजी के साथ 35.20 रुपये के स्तर पर शुक्रवार को पहुंच गए थे। पिछले तीन महीने में कंपनी के शेयरों की कीमतों में 41 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली है। हालांकि, इसके बाद भी 6 महीने यह स्टॉक 5 प्रतिशत लुढ़क चुका है। एक साल में कंपनी के शेयरों का भाव 38 प्रतिशत गिरा है। टाइगर लॉजिस्टिक (इंडिया) लिमिटेड का 52 वीक हाई 59.84 रुपये और 52 वीक लो लेवल 22.87 रुपये है। कंपनी का मार्केट कैप 372 करोड़ रुपये का है। लॉन्ग टर्म में कैसा है प्रदर्शन दो साल में कंपनी के शेयरों का भाव 14 प्रतिशत और तीन साल में 4 प्रतिशत गिरा है। हालांकि, 5 साल में स्टॉक का दाम 714 प्रतिशत का रिटर्न देने में सफल रहा है। 10 साल में यह स्टॉक 89 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। बोनस शेयर दे चुकी है कंपनी Tiger Logistics ने निवेशकों को एक बार बोनस शेयर दिया है। 2015 में कंपनी के शेयर एक्स-बोनस ट्रेड किए थे। तब कंपनी ने 2 पर 3 शेयर बोनस के तौर पर दिए थे। 2021 में इसके बाद कंपनी ने डिविडेंड दिया था। तब हर एक शेयर पर 1 रुपये का डिविडेंड बांटा गया था। बता दें, 2024 में कंपनी के शेयरों का बंटवारा हो चुका है। जिसके बाद टाइगर लॉजिस्टिक के शेयरों की फेस वैल्यू 10 रुपये से घटकर 1 रुपये प्रति शेयर हो गई थी। कंपनी के शेयरों को 10 हिस्सों में बांटा गया था। इस कंपनी में प्रमोटर्स की कुल हिस्सेदारी 57.30 प्रतिशत है। पब्लिक के पास 42.70 प्रतिशत हिस्सा है।

जेफरीज रिपोर्ट: ग्लोबल मार्केट पर बदले हालात, ईरान की बढ़ी ताकत

नई दिल्‍ली  हाल ही में हुए अमेरिका-ईरान सीजफायर फ्रेमवर्क से ईरान को सबसे ज्‍यादा फायदा हुआ है। जेफरीज की हालिया 'ग्रीड एंड फियर' रिपोर्ट में यह बात कही गई है। इसके अनुसार, प्रस्तावित समझौता जियोपॉलिटिकल हालात में एक बड़ा बदलाव है। इसके ग्लोबल मार्केट पर दूरगामी असर हो सकते हैं। ईरान मार ले गया मैदान रिपोर्ट के मुताबिक, इस ड्राफ्ट फ्रेमवर्क में ईरान के फ्रीज किए गए 24 अरब डॉलर जारी करने की बात कही गई है। साथ ही लंबे समय से चले आ रहे प्रतिबंधों को हटाए जाने की भी संभावना है। बातचीत औपचारिक रूप से शुरू होने से पहले ही आधी रकम मिलने की उम्‍मीद है। जेफरीज ने इस घटनाक्रम को इस बात का संकेत बताया है कि बातचीत में तेहरान का पलड़ा भारी रहा है। ट्रंप को ऐसे हुआ नुकसान ब्रोकरेज के अनुसार, यह युद्धविराम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर बढ़ते राजनीतिक दबाव को भी दिखाता है। उनकी अप्रूवल रेटिंग काफी कम हो गई है। रिपोर्ट में बताए गए रॉयटर्स/इप्सोस सर्वे में 62% लोगों ने उन्हें नापसंद किया। वहीं, 63% लोगों ने अर्थव्यवस्था को संभालने के उनके तरीके को नापसंद किया। मार्केट के नजरिए से जेफरीज का मानना है कि लंबे समय तक चलने वाला सीजफायर और तेल की कम कीमतें अमेरिका के बाहर के मार्केट, खासकर साइक्लिकल सेक्टर में बेहतर परफॉर्मेंस में मदद कर सकती हैं। इन चार बड़ी कंपनियों की बल्‍ले-बल्‍ले रिपोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में निवेश की भारी तेजी पर भी जोर दिया गया है। अमेरिका की चार बड़ी हाइपरस्केलर कंपनियों का कैपिटल एक्सपेंडिचर 2026 में 680 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। यह AI की होड़ की तीव्रता को दिखाता है। इन कंपनियों में अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, अल्फाबेट और मेटा शामिल हैं। जापान में बैंक ऑफ जापान ने हाल ही में ब्याज दरें बढ़ाकर 1% कर दी हैं। ये तीन दशकों से ज्‍यादा समय में सबसे ज्‍यादा स्तर है। यील्ड बढ़ने के बावजूद जेफरीज का मानना है कि बेहतर होती नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ और महंगाई की स्थिति के कारण जापानी इक्विटी सरकारी बॉन्ड की तुलना में काफी ज्‍यादा आकर्षक बनी हुई है। अमेरिका में महंगाई की बढ़ती चिंता ब्रोकरेज के अनुसार, अमेरिका में महंगाई के जोखिमों को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। मनी मार्केट अब 2026 के अंत तक ब्याज दरों में लगभग 0.36 फीसदी की बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं। यह इस चिंता को दिखाती है कि महंगाई पहले की उम्मीद से ज्‍यादा समय तक बनी रह सकती है। जेफरीज का तर्क है कि बॉन्ड यील्ड का बढ़ना निवेशकों के लिए मुख्य जोखिमों में से एक बना हुआ है। साथ ही, कॉर्पोरेट कमाई की उम्मीदें भी मजबूत बनी हुई हैं। आम सहमति वाले अनुमानों के अनुसार, 2026 की दूसरी तिमाही में एसएंडपी 500 की कमाई में साल-दर-साल 22.8 फीसदी की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इसमें टेक्नोलॉजी कंपनियां इस बढ़त में सबसे आगे रहेंगी। इमर्जिंग मार्केट्स कंपनियों में कुछ को प्रॉफिट हालांकि, जेफरीज को इक्विटी मार्केट में सट्टेबाजी के बढ़ते संकेत दिख रहे हैं। उनका कहना है कि पिछले साल MSCI इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स में शामिल सिर्फ 24.6% शेयरों ने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन किया। यह एक रिकॉर्ड निचला स्तर है जो बताता है कि मार्केट का नेतृत्व कुछ ही शेयरों तक सीमित होता जा रहा है। रिपोर्ट में स्‍पेसएक्‍स को लेकर दिख रहे जबरदस्त उत्साह का भी जिक्र किया गया है। हाल ही में लॉन्च किए गए 11 लेवरेज्ड स्‍पेसक्‍स एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) ने सिर्फ तीन दिनों में 8.2 अरब डॉलर का ट्रेडिंग वॉल्यूम हासिल किया। वहीं, उनके पास मौजूद एसेट्स की कीमत सिर्फ 63.8 करोड़ डॉलर थी। जेफरीज इस घटनाक्रम को आम निवेशकों की तरफ से सट्टेबाजी के बढ़ते जोश का एक और संकेत मानता है। इजरायल रह गया खाली हाथ इजरायल का रिपोर्ट में जिक्र नहीं है। लेकिन, वह खाली हाथ ही रहा है। युद्धविराम से इजरायल नाराज है। ऐसा होने का मुख्य कारण यह है कि इस पूरी बातचीत में इजरायल को पूरी तरह साइडलाइन कर दिया गया। इससे उसके प्रमुख सुरक्षा हित दांव पर लग गए हैं। इजरायल का मानना है कि इस समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह नष्ट करने और लेबनान में सक्रिय हिजबुल्लाह व गाजा में हमास जैसे ईरान-समर्थित सशस्त्र समूहों के खतरों को खत्म करने का कोई ठोस रोडमैप नहीं है। इसके अलावा, ट्रंप प्रशासन की ओर से तय की गई शर्तों के तहत दक्षिणी लेबनान से इजरायली सेना की वापसी की मांग ने इजरायल के भीतर राजनीतिक और सुरक्षा स्तर पर भारी असंतोष पैदा कर दिया है। उसे डर है कि युद्ध रुकने से उसके दुश्मनों को फिर से मजबूत होने का मौका मिल जाएगा। चीन की घरेलू अर्थव्यवस्था इस बीच, चीन की घरेलू अर्थव्यवस्था संघर्ष कर रही है। रिटेल बिक्री कमजोर हुई है। क्रेडिट ग्रोथ धीमी है। प्रॉपर्टी में निवेश पर दबाव बना हुआ है। फिर भी निर्यात खासकर सेमीकंडक्टर शिपमेंट में तेजी से बढ़ोतरी जारी है। इससे आर्थिक तस्वीर काफी असमान होती जा रही है। कुल मिलाकर, जेफरीज का मानना है कि निवेशक एक ऐसी दुनिया में काम कर रहे हैं जो भू-राजनीतिक अनिश्चितता, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और AI-आधारित बाजार तेजी से आकार ले रही है। यह तेजी कुछ ही क्षेत्रों या शेयरों तक सीमित होती जा रही है।

PhonePe का नया नियम लागू, कुछ सेवाओं पर देना होगा अतिरिक्त शुल्क; चार्ज ₹100 तक पहुंच सकता है

 नई दिल्ली PhonePe चलाने वालों के लिए जरूरी खबर है. जल्द ही पेमेंट ऐप में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. कंपनी ने वॉलेट गाइडलाइंस को अपडेट किया है, जिसके बाद अगर आप लंबे समय तक वॉलेट का यूज करना छोड़ देते हैं, तो 100 की पेमेंट करनी पड़ सकती है।  कंपनी ने हाल ही में अपनी वॉलेट गाइडलाइंस को अपडेट किया है, जिसके तहत अगर कोई फोनपे यूजर 365 दिनों तक अपने PhonePe Wallet का उपयोग नहीं करता है, तो उसपर इनएक्टिविटी मेंटेनेंस फीस लगाई जाएगी. यह फीस 100 रुपये होगी।  फोनपे की नई गाइडलाइंस को लेकर कई लोगों ने नाराजगी जाहिर की है. इसको लेकर बहुत से लोगों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है।  X प्लेटफॉर्म (पुराना नाम Twitter) पर @yabhishekhd नाम के अकाउंट ने बताया कि कई यूजर्स PhonePe Wallet का इस्तेमाल नहीं करते और सीधे अपने बैंक अकाउंट से UPI पेमेंट करते हैं. कुछ  लोगों ने कहा कि ऐसे फीचर के लिए पैसे वसूलना, जो उसका इस्तेमाल नहीं करते हैं, गलत है।  आजकल लोग लोग Wallet में पैसे डालकर उसे लंबे समय तक बिना इस्तेमाल किए छोड़ देते हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि Inactive Wallet क्या होता है, किन यूजर्स पर यह शुल्क लागू हो सकता है और इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए। Inactive Wallet किसे माना जाएगा Inactive Wallet का मतलब ऐसे Wallet से है जिसका उपयोग लंबे समय तक नहीं किया गया हो। यदि कोई यूजर Wallet में पैसे रखकर उसे महीनों तक इस्तेमाल नहीं करता, न कोई ट्रांजैक्शन करता है और न ही कोई भुगतान करता है, तो उसे Inactive कैटेगरी में रखा जा सकता है। Inactive Wallet पर हर तीन महीने में 100 रुपए तक का शुल्क लगाया जा सकता है। हालांकि यह चार्ज Wallet में उपलब्ध बैलेंस और अन्य शर्तों के आधार पर भी तय किया जा सकता है। क्या सभी PhonePe यूजर्स पर लागू होगा नियम? नहीं, यह शुल्क केवल Wallet यूजर्स के लिए हो सकता है। जो लोग केवल UPI के जरिए सीधे बैंक अकाउंट से पेमेंट करते हैं, उन पर इसका असर नहीं पड़ने की संभावना है। यह मुख्य रूप से PhonePe Wallet से जुड़े अकाउंट्स के लिए हो सकता है। UPI और Wallet में क्या अंतर और शुल्क से बचने का तरीका कई लोग UPI और Wallet को एक जैसा समझते हैं, जबकि दोनों अलग-अलग सेवाएं हैं। UPI में भुगतान सीधे बैंक अकाउंट से होता है। वहीं Wallet में पहले पैसे जोड़ने पड़ते हैं और फिर उसी बैलेंस से भुगतान किया जाता है। अगर आप PhonePe Wallet का इस्तेमाल करते हैं, तो समय-समय पर उसमें कोई छोटा ट्रांजैक्शन कर सकते हैं। मोबाइल रिचार्ज, बिल भुगतान या किसी भी छोटे भुगतान के जरिए Wallet को एक्टिव रखा जा सकता है। इससे Wallet निष्क्रिय नहीं माना जाएगा। किन लोगों पर लगेगी 100 रुपये की फीस  100 रुपये की फीस सिर्फ उन लोगों पर लागू होगी, जिन्होंने एक साल तक अपने PhonePe Wallet से कोई ट्रांजैक्शन नहीं किया है. सिर्फ PhonePe ऐप खोलना या UPI के जरिए भुगतान करना वॉलेट गतिविधि नहीं माना जाएगा. शुल्क से बचने के लिए यूजर्स को वॉलेट के जरिए कम से कम एक ट्रांजैक्शन करना होगा, जिससे वॉलेट दोबारा एक्विट मान लिया जाएगा।  15 दिन पहले आएगा अलर्ट मैसेज  फोनपे की तरह से फीस काटने से पहले यूजर्स को 15 दिन पहले एक मैसेज भेजा जाएगा. अगर वॉलेट में बैलेंस है तो कंपनी सीधे 100 रुपये काट लेगी. वहीं, अगर वॉलेट में 100 रुपये से कम रकम है तो वह रकम पूरी काट ली जाएगी. हालांकि बैलेंस को नेगेटिव नहीं किया जाएगा।  क्या होता है PhonePe वॉलेट और इसका काम क्या है? जब आप पहली बार अपने मोबाइल में PhonePe ऐप डाउनलोड करते हैं, तो वॉलेट की सर्विस इसके साथ ही इन-बिल्ट (नत्थी होकर) आती है. यूजर इस वॉलेट को अपने बैंक खाते से रीचार्ज करके इसमें पैसे रख सकते हैं. वॉलेट का एकमात्र बड़ा फायदा यह है कि यह ऑफलाइन या कम नेटवर्क में भी काम कर जाता है।  अगर कभी आपके बैंक का सर्वर डाउन है और आप सीधे अकाउंट से पैसे नहीं भेज पा रहे हैं, तो वॉलेट में मौजूद पैसों से तुरंत भुगतान किया जा सकता है. आज के समय में शायद ही कोई वॉलेट में पैसे रखता है. अगर एक ऐप का यूपीआई काम नहीं करता, तो लोग तुरंत गूगल पे (Google Pay) या पेटीएम (Paytm) जैसे दूसरे ऐप का इस्तेमाल कर लेते हैं. इसलिए आम जनता के लिए यह वॉलेट लगभग बेकार ही पड़ा रहता है।  क्या PhonePe का ऐसा चार्ज वसूलना कानूनी है? कई यूजर्स के मन में यह सवाल है कि बिना इस्तेमाल किए पैसे काटना क्या बेईमानी नहीं है? लेकिन तकनीकी और कानूनी रूप से कंपनी ऐसा कर सकती है. जब हम पहली बार ऐप पर साइन-अप या लॉगिन करते हैं, तो हम बिना पढ़े ‘नियम और शर्तों’ (Terms and Conditions) को स्वीकार (Accept) कर लेते हैं. कंपनी इसी कानूनी दांवपेच का फायदा उठा रही है. हालांकि, आम उपभोक्ताओं के नजरिए से देखा जाए तो इसे एक तरह की ‘जबरदस्ती’ ही कहा जाएगा।  वॉलेट चार्ज से अपने ₹100 कैसे बचाएं ? अगर आप इस गैर-जरूरी चार्ज से बचना चाहते हैं, तो आपके पास दो आसान रास्ते हैं. अपने PhonePe वॉलेट में ₹10 या ₹50 डालकर उसे दोबारा एक्टिवेट कर लें और कभी-कभी उससे कोई छोटा-मोटा भुगतान कर दें. इससे आपका वॉलेट इनएक्टिव लिस्ट से बाहर हो जाएगा।  यदि आप इस वॉलेट झंझट को हमेशा के लिए खत्म करना चाहते हैं, तो ऐप के भीतर जाकर अपने वॉलेट की फुल केवाईसी प्रक्रिया को पूरा करें. इसके बाद आप वॉलेट को पूरी तरह बंद या हमेशा के लिए इनएक्टिवेट करने का विकल्प चुन सकते हैं।  ध्यान रहे कि इस वॉलेट चार्ज का आपकी सामान्य यूपीआई (UPI) सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा. यदि आप वॉलेट एक्टिव नहीं भी करते हैं, तो भी आप पहले की तरह बैंक-टू-बैंक यूपीआई ट्रांसफर (Scan & Pay) करते रह सकेंगे।  आखिर PhonePe ऐसा कर क्यों रहा है? बाजार के जानकारों का मानना है कि कंपनी यह कदम अपनी बैलेंस शीट को मजबूत और दमदार दिखाने के लिए उठा रही है. दरअसल, PhonePe आने वाले समय में अपना … Read more

दुनिया के टॉप-10 अमीरों की लिस्ट में उतार-चढ़ाव, बेजोस-जुकरबर्ग की कमाई बढ़ी

नई दिल्ली दुनिया के सबसे अमीर इंसानों की लिस्ट (World's Richest List) पर नजर डालें, तो उनकी नेटवर्थ में बड़ा चेंज देखने को मिला है. हाल ही में इतिहास रचते हुए दुनिया के पहले ट्रिलियनर बने एलन मस्क को नुकसान (Elon Musk Loss) हुआ है, तो वहीं टॉप-10 अमीरों की लिस्ट में शामिल कई अरबपतियों की संपत्ति (Top-10 Billionaires Networth) में उछाल आया है. एलन मस्क को लगा ये झटका दुनिया के सबसे अमीर इंसान टेस्ला और स्पेसएक्स कंपनी के मालिक एलन मस्क ने बीते दिनों दुनिया के पहले ट्रिलियनर का खिताब अपने नाम किया, अब तक ये कारनामा कोई न कर सका था. इस मुकाम को छूने के बाद उनकी संपत्ति में गिरावट देखने को मिली है, हालांकि Elon Musk Trillionaire बने हुए हैं. ब्लूमबर्ग बिलेनियर्स इंडेक्स के मुताबिक, मस्क की दौलत में 32.1 अरब डॉलर की कमी आई है और इसके साथ उनकी कुल संपत्ति 1.23 ट्रिलियन डॉलर पर आ गई है. टॉप-10 में शामिल इन रईसों को घाटा बिलेनियर्स नेटवर्थ के अपडेटेड आंकड़ों पर नजर डालें, तो दुनिया के सबसे अमीरों की लिस्ट में छठे पायदान पर शामिल माइकल डेस की नेटवर्थ 868 मिलियन डॉलर की गिरावट के साथ 221 अरब डॉलर पर आ गई है. इसके अलावा नौंवे सबसे अमीर बर्नार्ड अर्नाल्ट की नेटवर्थ 2.40 अरब डॉलर गिरकर 168 अरब डॉलर, जबकि 10वें सबसे रईस वॉरेन बफे की नेटवर्थ 749 मिलियन डॉलर की कमी के साथ 146 अरब डॉलर पर आ गई. इन अमीरों ने की जोरदार कमाई वहीं Top-10 Billionaire List  में जिन रईसों की दौलत में इजाफा हुआ, उनमें लैरी पेज 314 अरब डॉलर (बढ़त 3.54 अरब डॉलर) के साथ दूसरे पायदान पर हैं. सर्ग्रेई ब्रिन 291 अरब डॉलर (बढ़त 3.22 अरब डॉलर) के साथ तीसरे अमीर हैं. चौथे सबसे अमीर जेफ बेजोस की संपत्ति में 5.80 अरब डॉलर का उछाल आया और ये 266 अरब डॉलर हो गई, जबकि पांचवें नंबर पर मौजूद लैरी एलिसन की नेटवर्थ 722 मिलियन डॉलर बढ़कर 238 अरब डॉलर पर पहुंच गई. लिस्ट में सातवें पायदान पर काबिज फेसबुक के मार्क जुकरबर्ग की संपत्ति में 3.25 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई और ये उछलकर 206 अरब डॉलर पर पहुंच गई. इसके अलावा NVIDIA के सीईओ जेन्सेन हुआंग ने भी तगड़ी कमाई की और इनकी दौलत 4.90 अरब डॉलर के इजाफे के साथ 174 अरब डॉलर हो गई. हुआंग लिस्ट में आठवें सबसे अमीर इंसान हैं. अडानी-अंबानी की संपत्ति में बदलाव दुनिया के सबसे अमीरों की लिस्ट में शामिल भारतीय अरबपतियों गौतम अडानी और मुकेश अंबानी की संपत्ति में भी बदलाव हुआ है. Gautam Adani Networth देखें, तो इसमें 3.50 अरब डॉलर की वृद्धि हुई है और ये बढ़कर 119 अरब डॉलर पर आ गई है. संपत्ति के इस आंकड़े के साथ वे 17वें सबसे अमीर इंसान बन गए हैं. दूसरी ओर रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी की दौलत घटी है. Mukesh Ambani Networth में 63.6 मिलियन डॉलर की गिरावट देखने को मिली है और इस कमी के साथ ये घटकर 88.8 अरब डॉलर रह गई है. इस आंकड़े के साथ अब अंबानी दुनिया के 25वें सबसे अमीर इंसान हैं.

MCX पर धातुओं की कीमतों में भारी नरमी, निवेशकों के सामने बढ़ी दुविधा

नई दिल्ली  इस महीने सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होने के बाद निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश वाली धातुओं से थोड़ा कम हुआ, जिसका असर कीमतों पर पड़ा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) के आंकड़ों के अनुसार, जून की शुरुआत से अब तक सोने की कीमत में करीब 6.50% और चांदी में 11.56% तक की गिरावट आई है। एमसीएक्स पर 1 जून को सोने का भाव 1,54,908 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो 19 जून तक गिरकर करीब 1,44,938 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। यानी सोने में 10,070 रुपये प्रति 10 ग्राम की कमी आई। वहीं, चांदी 2,63,458 रुपये प्रति किलो से गिरकर 2,33,010 रुपये प्रति किलो पर आ गई। चांदी में करीब 30,448 रुपये प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई। क्यों लुढ़की सोने-चांदी की कीमत?     विशेषज्ञों के मुताबिक सोने और चांदी में गिरावट के पीछे कई वैश्विक कारण हैं।     इनमें कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, महंगाई की चिंता, ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें, मजबूत अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी प्रमुख हैं।     इसके अलावा गोल्ड और सिल्वर ETF से निकासी ने भी निवेशकों की धारणा को कमजोर किया है।     हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि में सोने और चांदी की मांग बनी रह सकती है। क्या पुराने निवेशकों को घबराना चाहिए? पिछले डेढ़ साल में सोने और चांदी में तेज तेजी के कारण कई निवेशकों ने ऊंचे भाव पर खरीदारी की थी। ऐसे निवेशक अब असमंजस में हैं कि नुकसान में बेचें या इंतजार करें। विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को भावनात्मक फैसला लेने से बचना चाहिए। मास्टर कैपिटल सर्विसेज के निदेशक पुनीत सिंघानिया के अनुसार, तेजी के बाद आने वाली गिरावट हमेशा ट्रेंड बदलने का संकेत नहीं होती। उनका कहना है कि अगर लंबे समय के नजरिए से निवेश किया गया है, तो केवल कीमतों में गिरावट देखकर जल्दबाजी में निकलना सही फैसला नहीं हो सकता। नए निवेशकों के लिए क्या है सलाह? विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट नए निवेशकों के लिए मौका हो सकती है, लेकिन एक साथ बड़ी रकम लगाने से बचना चाहिए। रिद्धिसिद्धि बुलियंस के एमडी पृथ्वीराज कोठारी ने सलाह दी है कि निवेशक 6 से 12 महीने में धीरे-धीरे निवेश करें। गोल्ड ETF और सिल्वर ETF के जरिए SIP जैसा तरीका अपनाया जा सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो का करीब 10-15% हिस्सा ही सोने और चांदी में रखना चाहिए। साल की आखिरी तिमाही में सोना और चांदी फिर से रिकवरी कर सकते हैं। इसकी वजह केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और ETF निवेश में दोबारा बढ़ोतरी हो सकती है। खरीदारी का बेहतर तरीका कौन सा? विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय के निवेश के लिए फिजिकल सोना-चांदी खरीदने की बजाय डिजिटल विकल्प बेहतर हो सकते हैं। गोल्ड ETF, सिल्वर ETF और म्यूचुअल फंड जैसे विकल्पों में स्टोरेज की चिंता नहीं होती। साथ ही सुरक्षा और बीमा का खर्च बचता है और खरीद-बिक्री आसान होती है।कीमतों में भी पारदर्शिता रहती है। वहीं, ज्वेलरी या फिजिकल सोना मुख्य रूप से इस्तेमाल, शादी या गिफ्ट के लिए ज्यादा उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि इसमें मेकिंग चार्ज और अन्य खर्च जुड़े होते हैं। आगे क्या उम्मीद है? विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर वैश्विक तनाव कम होता है, महंगाई नियंत्रित होती है और ब्याज दरों में कटौती शुरू होती है तो सोना-चांदी फिर तेजी पकड़ सकते हैं। फिलहाल निवेशकों के लिए रणनीति यही है कि गिरावट में घबराने के बजाय धीरे-धीरे और सोच-समझकर निवेश किया जाए।  

Jio IPO पर बड़ा ऐलान, आकाश-ईशा और अनंत अंबानी संभालेंगे जिम्मेदारी; SEBI में आज होगी फाइलिंग

मुंबई   रिलायंस इंडस्‍ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के चेयरमैन और एमडी मुकेश अंबानी ने शुक्रवार को रिलायांस की 49वीं सालाना महासभा में जियो के आईपीओ पर सबसे बड़ा अपडेट दिया. उन्‍होंने बताया कि आकाश, ईशा और अनंत मिलकर जियो के आईपीओ की जिम्‍मेदारी संभालेंगे. इसका DRHP आज सेबी के पास जमा करा दिया जाएगा. मुकेश अंबानी ने कहा कि 10 साल पहले जियो की शुरुआत ऐसे माहौल में हुई थी, जब डाटा महंगा था और इंटरनेट की स्‍पीड काफी खराब. आज डाटा तो सस्‍ता हुआ ही है, स्‍पीड भी दुनिया के अन्‍य देशों को टक्‍कर दे रही है।  मुकेश अंबानी ने कहा कि जियो प्‍लेटफॉर्म के आईपीओ को बोर्ड की मंजूरी मिल चुकी है और इसका DRHP बाजार नियामक सेबी के पास 19 जून को ही जमा भी कर दिया जाएगा. उन्‍होंने कहा कि जियो को आईपीओ रिलायंस की मूल्‍य वृद्धि के लिहाज से इस साल का सबसे बड़ा कदम होगा. यह रिलायंस के शेयरधारकों के लिए भी काफी महत्‍वपूर्ण साबित होने वाला है, जो हमारे निवेशकों को बेहतरीन निवेशक का अवसर दिलाएगा।  इस बार की रिलायंस एजीएम को लेकर निवेशकों और जानकारों के बीच भारी उत्सुकता है. माना जा रहा है कि इस बैठक में मुकेश अंबानी कई बड़े ऐलान कर सकते हैं. इस बैठक के दौरान निवेशकों और शेयर होल्डर्स की नजर जिन सबसे बड़े ऐलानों पर रहेगी, उनमें जियो आईपीओ समेत रिलायंस का एआई प्लान शामिल हैं. अपने संबोधन में उन्होंने कहा रिलायंस बोर्ड की ओर से Jio IPO को मंजूरी दे दी गई है और इसके दस्तावेज सेबी के पास आज जमा कराए जाएंगे।  Jio Platforms का IPO: बाजार को सबसे बड़ी उम्मीद जियो के लगभग 4 बिलियन डॉलर (33,000 करोड़ रुपये से अधिक) के मेगा आईपीओ की डिटेल्स को लेकर है. यह भारत के अब तक के सबसे बड़े आईपीओ में से एक हो सकता है।  5G नेटवर्क और सब्सक्राइबर बेस: जियो के 50 करोड़ से अधिक के मजबूत यूजर बेस और देशव्यापी 5G नेटवर्क के विस्तार पर बड़ा अपडेट मिल सकता है. दिग्गज टेक कंपनी मेटा (Meta) के साथ डेटा सेंटर पार्टनरशिप को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रगति साझा होने की उम्मीद है।  रिटेल और ग्रीन एनर्जी: रिलायंस रिटेल के भविष्य के प्लान और कंपनी के महत्वाकांक्षी ग्रीन एनर्जी बिजनेस को लेकर नए रोडमैप की घोषणा हो सकती है।  डिविडेंड की मंजूरी: 49वीं आम बैठक में मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज 2026 के लिए अपने शेयर होल्डर्स के लिए 6 रुपये प्रति शेयर के डिविडेंड की मंजूरी को औपचारिक रूप दे सकती है।  Reliance Retail Listing: शेयरधारक रिलायंस रिटेल की संभावित लिस्टिंग को लेकर चेयरमैन अंबानी द्वारा किए जाने वाले ऐलानों पर भी रिलायंस एजीएम 2026 के दौरान बारीकी से नजर रखेंगे, जो समूह के लिए एक बड़ा ग्रोथ इंजन बना हुआ है।  AGM से रिलायंस शेयर का हाल :सालाना आम बैठक की शुरुआत से पहले देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर पर नजर डालें, तो ये मामूली गिरावट के साथ रेड जोन में कारोबार कर रहा है. शुक्रवार को Reliance Share 1328 रुपये पर ओपन हुआ था और खबर लिखे जाने तक 1323 रुपये के लेवल पर कारोबार कर रहा था. कंपनी के मार्केट कैप की बात करें, तो ये 17.93 लाख करोड़ रुपये है।  Jio IPO: रिलायंस जियो का आईपीओ निवेशकों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण है. इससे पिछली यानी 48वीं एजीएम में के दौरान, मुकेश अंबानी ने 2026 की पहली छमाही इस आईपीओ की शेयर मार्केट में लिस्टिंग का टारगेट तय किया था।  ग्लोबल टेक एलीट में शामिल: Reliance Jio की ओर से हाल ही में ऐलान किया गया था कि वह ग्लोबल टेक एलीट में शामिल हो गया है और WIPO के टॉप-20 में भारत की एकमात्र कंपनी बन गई है. जियो प्लेटफॉर्म्स ने ग्लोबल इनोवेशंस रैंकिंग में सबसे बड़ी छलांगों में से एक लगाई है।  मुकेश अंबानी AGM की शुरुआत की. मुकेश अंबानी ने अपने शेयरधारकों को 'नमस्ते' करते हुए उनका 49वीं सालाना आम बैठक में स्वागत किया. इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सबसे लंबे समय तक देश का पीएम होने पर बधाई दी।  चुनौतियों से भरे रहे छह साल: बीते 6 साल कोविड, जियो पॉलिटिकल तनाव और सप्लाई चेन में रुकावट, एनर्जी प्राइस में उछाल से चुनौतियों भरे रहे हैं. वेस्ट एशिया में जंग ने इसे और बढ़ाने का काम किया, लेकिन भारत इन चुनौतियों के बीच भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व आगे बढ़ता रहा।  Jio IPO के डॉक्युमेंट जमा : मुकेश अंबानी ने कहा कि जियो आईपीओ के लिए ड्राफ्ट रेड हियरिंग पेपर  आज ही मार्केट रेग्युलेटर सेबी के पास जमा कराए गए हैं. उन्होंने कहा जियो प्लेटफॉर्म बोर्ड की ओर से Jio IPO को मंजूरी दे दी गई है. रिलायंस चेयरमैन ने कहा कि 19 जून को रिलायंस जियो सेबी के पास अपने आईपीओ के लिए ड्राफ्ट पेपर्स को फाइल करेगा. ये डिजिटल सर्विस सेक्टर के लिए माइलस्टोन बनेगा।  मुकेश अंबानी ने कहा कि ईशा अंबानी, आकाश अंबानी और अनंत अंबानी जियो आईपीओ प्रोसेस को लीड कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि Jio IPO की मार्केट लिस्टिंग भारत की ताकत दिखाएगा।  आकाश अंबानी बोले- Jio आगे बढ़ रहा: जियो प्लेटफॉर्म के एमडी आकाश अंबानी ने शेयरधारकों को संबोधित करते हुए कहा कि जियो लगातार आगे बढ़ रहा है और अब इसका यूजर बेस 534 मिलियन के पार निकल चुका है. जियो का 5जी सब्सक्राइबर बेस 268 मिलियन से ज्यादा हो गया है. उन्होंने Jio का टागरेट बताते हुए कहा कि ये 2030 तक सभी सब्सक्राइबर्स को 5 जी में माइग्रेट करना है।  Jio प्लेटफॉर्म का प्रॉफिट: आकाश अंबानी ने बताया की जियो प्लेटफॉर्म्स का टैक्स के बाद प्रॉफिट पहली बार 30,000 करोड़ रुपये के पार निकला है, जो 15 फीसदी का सालाना उछाल है. कंपनी का रेवेन्यू वित्त वर्ष 2026 में 1,46,885 करोड़ रुपये रहा है।  दुनिया के लिए नजीर होगा आईपीओ मुकेश अंबानी ने कहा कि जियो का आईपीओ दुनिया के लिए नजीर साबित होगा. यह दुनिया को दिखा देगा कि भारत विश्‍व स्‍तरीय और वैश्विक क्षमता वाली तकनीक कंपनी बनाने में सक्षम है. इस आईपीओ की अगुवाई आकाश, ईशा और अनंत अंबानी करेंगे, जबकि तीनों ही नेक्‍स जेनरेशन के तौर पर कंपनी को आगे बढ़ाने का भी … Read more

सोना-चांदी खरीदने वालों की बल्ले-बल्ले, चांदी ₹22,000 लुढ़की; गोल्ड रेट में भी बड़ी गिरावट

नई दिल्ली सोना-चांदी की कीमतों में एक बार फिर से बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है और दोनों कीमती धातुएं दो दिनों से क्रैश (Gold-Silver Price Crash) हो रही हैं. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर शुक्रवार को कारोबार की शुरुआत होने के साथ ही अचानक चांदी की वायदा कीमत में फिर बड़ी गिरावट आ गई. महज दो दिनों में ही ये कीमती धातु 22000 रुपये सस्ती हो गई है. दूसरी ओर से सोना भी काफी सस्ता हो गया है और 10 Gram 24 Karat Gold Rate गिरकर 1.46 लाख रुपये पर आ गया है।  खुलते ही 8000 रुपये टूटी चांदी MCX पर चांदी की कीमत में आई गिरावट पर नजर डालें, तो 3 जुलाई की एक्सपायरी वाली सिल्वर का प्राइस बीते कारोबारी दिन टूटते हुए 2,37,572 रुपये प्रति किलो पर क्लोज हुआ था और शुक्रवार को कारोबार की ओपनिंग के साथ ही ये फिसलकर 2,29,561 रुपये प्रति किलो पर आ गया. ऐसे में एक झटके में 1 Kg Silver 8,011 रुपये सस्ती हो गई।  Silver दो दिन में 22000 रुपये सस्ती  चांदी की वायदा कीमत में बीते कारोबारी दिन गुरुवार को भी बड़ी गिरावट आई थी और ये कारोबार के अंत तक फिसलती रही थी. इस हिसाब से अगर दो दिनों में आई गिरावट को देखें, तो चांदी की कीमत बुधवार को 2,51,807 रुपये पर क्लोज हुई थी और ये गुरुवार को 2,37,572 रुपये, जबकि शुक्रवार को 2,29,561 रुपये पर आ गई. ऐसे में चांदी दो दिन में ही 22,246 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती हो गई है।  Gold Rate में इतनी गिरावट चांदी के बाद बात करें सोने की वायदा कीमत के बारे में, तो ये भी Silver Price के कदम से कदम मिलाकर चल रही है और लगातार टूटती नजर आई है. 5 अगस्त की एक्सपायरी वाला 10 Gram 24 Karat Gold का भाव खुलने के साथ ही गिरकर 1,46,252 रुपये के लेवल पर आ गया, जो बीते कारोबारी दिन 1,49,309 रुपये प्रति 10 ग्राम पर क्लोज हुआ था. यानी सोना अचानक 3,057 रुपये सस्ता हो गया।  हाई से कितना टूट गया सोना?  बीते दो कारोबारी दिनों में सोने की कीमत में आई गिरावट की बात करें, तो 17 जून को 10 ग्राम सोने का भाव 1,53,879 रुपये था और यहां से ये कीमती पीली धातु 7,627 कमजोर हो गई है. वहीं अगर हाई लेवल से तुलना करें, तो बीते जनवरी महीने में वायदा सोने की कीमत पहली बार 2 लाख रुपये के पार निकली थी और इस एक्सपायरी वाले वायदा सोना का हाई 2,04,375 रुपये है, जिससे अब गोल्ड 58,123 रुपये सस्ता मिल रहा है।  अचानक क्यों बिखरने लगे सोना-चांदी?  Gold Silver Rate Crash के पीछे के कारणों की बात करें, तो ये अमेरिका से जुड़ा हुआ है. दरअसल, US Fed ने जून 2026 की बैठक रेपो रेट को स्थिर रखने का ऐलान किया है यानी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया और ये 3.50% से 3.75% के दायरे में हैं. ही बरकरार रखा है, लेकिन फेड अधिकारियों ने महंगाई बढ़ने की चिंता जताते हुए आगे ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका जताई है, जिसका असर सोने चांदी की कीमतों पर भी देखने को मिला है।  (नोट- सोना-चांदी या गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ में निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.)

शेयर बाजार में मचा हड़कंप, IT स्टॉक्स की गिरावट से सेंसेक्स 800 अंक लुढ़का

मुंबई  शेयर मार्केट में सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली. ओपनिंग के साथ ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 800 अंक से ज्यादा का गोता लगा गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी इंडेक्स भी करीब 200 अंक की बड़ी गिरावट लेकर ओपन हुआ. बाजार में इस गिरावट के बीच सबसे बुरा हाल आईटी और टेक कंपनियों के शेयरों का रहा. Infosys, Tech Mahindra, TCS से लेकर HCL Tech तक के शेयर खुलते ही धड़ाम हो गए।  खुलते ही धड़ाम हुए Sensex-Nifty शुक्रवार को शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत होने के साथ ही दोनों इंडेक्स बिखर गए. BSE Sensex अपने पिछले बंद 77,409 की तुलना में बड़ी गिरावट लेकर 76,852 पर खुला और फिर अचानक ये गिरावट तेज हो गई और 30 शेयरों वाला इंडेक्स गिरकर 76,605 के लेवल पर आ गया. इस हिसाब से सेंसेक्स में 804 अंक से ज्यादा की गिरावट आई।  सेंसेक्स के जैसा ही हाल NSE Nifty का रहा और ये 50 शेयरों वाला इंडेक्स अपने पिछले कारोबारी बंद 24,168 की तुलवा में गिरावट लेकर 23,991 पर खुला और फिर करीब 220 अंक की गिरावट लेकर 23,939 पर आ गया।  IT शेयरों में मचा कोहराम शेयर मार्केट में इस गिरावट को सपोर्ट करने में सबसे बड़ा रोल आईटी और टेक शेयरों का रहा, जो ओपनिंग के साथ ही धराशायी हो गए. बीएसई की लार्जकैप कैटेगरी में शामिल Infosys Share (8.50%), TCS Share (6.20%), Tech Mahindra Share (5.60%), HCL Tech Share (5.40%) की बड़ी गिरावट लेकर कारोबार कर रहे थे।  गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत करने वाले अन्य बड़े शेयरों की बात करें, तो HDFC Bank Share (2.30%), Mphasis Share (6.60%), Presistent Share (5%), Coforge Share (4.20%), Dixon Share (2.20%) फिसलकर ट्रेड करता नजर आया।  1324 शेयर बड़ी गिरावट लेकर खुले ग्लोबल मार्केट से मिले-जुले संकेतों के बीच शुक्रवार को खुलते ही निफ्टी 24,000 के नीचे आ गया. मार्केट की ओपनिंग के दौरान करीब 956 कंपनियों के शेयरों ने तेजी के साथ ट्रेड शुरू किया, तो वहीं 1324 कंपनियों के स्टॉक्स ऐसे थे, जो बड़ी गिरावट के साथ रेड जोन में ओपन हुए. इसके अलावा 178 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।  शेयर बाजार में यह गिरावट ग्लोबल आईटी सर्विस कंपनी एक्सेंचर की ओर से FY2026 के लिए अपने रेवेन्यू ग्रोथ के अनुमान में कटौती के बाद देखने को मिली है, जो वेस्ट एशिया से से राजस्व से जुड़ी चुनौतियों के चलते हैं. इसका शेयर रातोरात करीब 18 फीसदी टूट गया था, तो वहीं Infosys ADR में करीब 10 फीसदी, तो Wipro ADR में 3.6 फीसदी की गिरावट आई। 

कार खरीदारों के लिए खुशखबरी, 15 जुलाई से लागू होगा नया नियम, टैरिफ सिर्फ 10%

 नई दिल्ली 15 जुलाई से भारत-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट प्रभाव में आएगा. इस एफटीए (FTA) के तहत भारत और यूके के बीच कई सामानों पर टैरिफ कम या जीरो होगा. ऑटोमोबाइल वर्ल्ड के लिए भी ये ट्रेड एग्रीमेंट बहुत मायने रखता है. क्योंकि इस एफटीए के बाद कई प्रीमियम कारों पर भारत में टैरिफ कम हो जाएगा।  इसका सीधा का मतलब है कि भारत में प्रीमियम कारें सस्ती होंगी. यूनाइटेड किंगडम के डिपार्टमेंट ऑफ बिजनेस एंड ट्रेड के मुताबिक ब्रिटिश ऑटोमोबाइल कंपनियों की भारत में पहुंच आसान हो जाएगी. इन कारों पर कोटा के तहत टैरिफ 100 फीसदी से घटकर 10 फीसदी पहुंच जाएगी।  इस एग्रीमेंट के बाद ब्रिटिश कार कंपनियों को भारत में बेहतर एक्सेस मिलेगा. वहीं कई भारतीय कंपनियों के लिए यूके में तमाम मौके खुल जाएंगे. भारतीय कंपनियों के लिए टेक्सटाइल, लेदर, फुटवियर, इलेक्ट्ऱ़ॉनिक्स, फार्मा और दूसरे सेक्टर में एक बड़ा बाजार मिलेगा।  सस्ती होंगी कारें फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लागू करने का ऐलान 17 जून को किया गया है और बिजनेसेस को 28 दिनों का वक्त तैयारी करने के लिए दिया गया है, जिससे वे अपने सिस्टम को तैयार कर लें और जरूरी रजिस्ट्रेशन कर लें. यूके सरकार इसको भारत का अब तक का सबसे व्यापक व्यापार समझौता बता रही है।  यूके सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक ऑटोमोबाइल टैरिफ कोटा के तहत 100 फीसदी से घटकर 10 फीसदी आएगा. हालांकि, ये कोटा क्या और कितना होगा, इसके बारे में जानकारी नहीं दी गई है. यानी इस टैरिफ कटौती के साथ ब्रिटिश कंपनियां कितनी गाड़ियां एक साल में भारत ला  भारत और यूके की इस डील का असर काफी पहले से दिखने लगा है. कंपनियों ने अपनी गाड़ियों की कीमतें कम करनी शुरू कर दी हैं. जगुआर लैंड रोवर (JLR) ने 5 मई को दो रेंज रोवर मॉडल्स की कीमतों में कटौती का ऐलान किया था, जो यूके से इंपोर्ट की जाती हैं।  कई कारें हुईं सस्ती कंपनी ने रेंज रोवर एसवी (Range Rover SV) की कीमत 75 लाख रुपये घटाकर 3.50 करोड़ रुपये कर दी है. पहले ये कार 4.25 करोड़ रुपये की कीमत पर आती थी. वहीं रेंज रोवर स्पोर्ट एसवी की कीमतों में 40 लाख रुपये की कटौती की गई थी. इस कार की कीमत 2.75 करोड़ रुपये से घटाकर 2.35 करोड़ रुपये कर दी गई है।  इसके अलावा ब्रिटिश सुपरकार निर्माता कंपनी मैकलारेन (McLaren) भी अपनी कारों की कीमतों को 38 फीसदी तक कम करने की तैयारी कर रही है. मैकलारेन 750एस कूपे की कीमत 3 करोड़ रुपये कम होने की उम्मीद है. ये कार पहले 7.94 करोड़ रुपये की कीमत पर आती थी, जो घटकर 4.94 करोड़ रुपये हो सकती है।  इसके अलावा 750एस स्पाइडर की कीमत 3.32 करोड़ रुपये घटकर 5.46 करोड़ रुपये हो सकती है. दूसरी कंपनियों ने अभी कीमतों में कटौती का ऐलान नहीं किया है. आने वाले दिनों में हमें इनके बारे में भी जानकारी मिल सकती है।  टैक्स कटौती और कोटा एफटीए के तहत पहले साल 3000सीसी के ऊपर के इंजन वाली पेट्रोल और 2500सीसी के ऊपर वाली डीजल कारों पर टैरिफ को 110 परसेंट से घटाकर 30 परसेंट किया जाएगा. ये रेट 10 हजार गाड़ियों के लिए होगा।  वहीं 1500सीसी से 3000सीसी तक वाली पेट्रोल और 2500सीसी तक इंजन वाली डीजल कारों पर टैरिफ 66 फीसदी से घटकर 50 फीसदी हो जाएगा. इसके लिए 5000 कारों का कोटा होगा. 1500सीसी इंजन तक वाली कारों पर भी 50 परसेंट टैरिफ पहले साल होगा. इसमें भी 5000 कारों का कोटा होगा।