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इलेक्ट्रिक कारों की कीमत जल्द होगी पेट्रोल-डीजल कारों के बराबर, दावा देश की प्रमुख कंपनी का

मुंबई   भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार लगातार तेज़ी से बढ़ रहा है और अब यह ऑटो उद्योग के लिए एक अहम बदलाव का दौर बनता जा रहा है। खासतौर पर चार पहिया इलेक्ट्रिक वाहनों के सेगमेंट में कुछ कंपनियों ने मजबूत पकड़ बना ली है। इसी कड़ी में देश की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में इलेक्ट्रिक कारों की कीमतें पेट्रोल और डीजल से चलने वाली पारंपरिक कारों के बराबर पहुंच सकती हैं। यदि ऐसा होता है तो भारतीय ऑटो बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की रफ्तार और तेज हो सकती है।  इलेक्ट्रिक कार बाजार में तेजी से बढ़ती हिस्सेदारी भारत के इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर सेगमेंट में फिलहाल एक प्रमुख कंपनी का दबदबा बना हुआ है, जिसके पास लगभग 40 प्रतिशत तक बाजार हिस्सेदारी बताई जाती है। कंपनी की सफलता के पीछे उसके इलेक्ट्रिक मॉडल्स की लंबी श्रृंखला भी एक बड़ी वजह है। उसके पोर्टफोलियो में नेक्सन EV, पंच EV, टियागो EV, टिगोर EV, कर्व EV और हैरियर EV जैसे कई विकल्प मौजूद हैं। इन मॉडलों के कारण अलग-अलग बजट और जरूरतों वाले ग्राहकों को विकल्प मिल रहे हैं। हालांकि सबसे किफायती इलेक्ट्रिक कार का खिताब अभी किसी अन्य कंपनी के पास है, जबकि इस कंपनी की सबसे सस्ती इलेक्ट्रिक कार टियागो EV मानी जाती है, जिसकी शुरुआती कीमत करीब आठ लाख रुपये के आसपास है। तकनीक में सुधार से घट सकती है लागत कंपनी के इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार इलेक्ट्रिक वाहनों की तकनीक तेजी से विकसित हो रही है। उनका कहना है कि बैटरी तकनीक में लगातार सुधार हो रहा है और नई बैटरियां पहले के मुकाबले अधिक ऊर्जा संग्रह करने में सक्षम हैं। इसके साथ ही चार्जिंग की गति भी तेज हुई है और सुरक्षा के लिहाज से भी नई तकनीक अधिक भरोसेमंद मानी जा रही है। इन बदलावों के कारण इलेक्ट्रिक वाहनों की कुल लागत पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। प्रोपल्शन सिस्टम के इंटीग्रेशन से बढ़ेगी दक्षता वाहनों के इलेक्ट्रिक सिस्टम में भी तेजी से बदलाव हो रहे हैं। मोटर, इन्वर्टर, ऑनबोर्ड चार्जर और अन्य पावर इलेक्ट्रॉनिक्स को अब पहले की तरह अलग-अलग यूनिट के रूप में नहीं रखा जा रहा है। इन्हें एकीकृत सिस्टम के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे गाड़ी का कुल वजन कम होता है और डिजाइन अधिक प्रभावी बनता है। पहले जहां इन हिस्सों को अलग-अलग लगाया जाता था, वहीं अब इन्हें एक कॉम्पैक्ट सिस्टम में बदला जा रहा है। इससे वाहन हल्का होने के साथ-साथ बैटरी की क्षमता बढ़ाने की गुंजाइश भी बनती है और बिना बड़े ढांचे में बदलाव किए गाड़ी की ड्राइविंग रेंज को बेहतर बनाया जा सकता है। बैटरी कीमतों में नरमी से मिल सकता है फायदा वैश्विक स्तर पर बैटरी की कीमतों में धीरे-धीरे कमी आने और तकनीक के बेहतर होने से कंपनियों को उम्मीद है कि इलेक्ट्रिक कारें बेहतर रेंज और प्रदर्शन के साथ बाजार में आएंगी। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ मॉडलों में कीमत का अंतर अब पारंपरिक इंजन वाली कारों से बहुत कम रह गया है। यदि यह अंतर और घटता है तो ग्राहक इलेक्ट्रिक कारों को ज्यादा तेजी से अपनाने लगेंगे। 10 लाख रुपये से कम का सेगमेंट बना फोकस भारतीय यात्री वाहन बाजार में दस लाख रुपये से कम कीमत वाली कारों की मांग काफी अधिक है और यही वजह है कि कंपनियां इस सेगमेंट पर खास ध्यान दे रही हैं। हाल ही में एक लोकप्रिय इलेक्ट्रिक मॉडल को बैटरी-एज-ए-सर्विस विकल्प के साथ पेश किया गया, जिससे उसकी शुरुआती कीमत और कम कर दी गई। इस व्यवस्था में ग्राहक बैटरी को अलग से सेवा के रूप में ले सकते हैं, जिससे शुरुआती लागत कम हो जाती है। हालांकि बैटरी सेल अभी भी विदेशों से मंगाए जाते हैं, लेकिन बैटरी पैक का डिजाइन और असेंबली देश में ही की जा रही है और धीरे-धीरे स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाने की कोशिश भी जारी है। सस्ती और व्यावहारिक EV से बढ़ेगा अपनाने का चलन ऑटो उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सबसे बड़ा अवसर कम कीमत वाले सेगमेंट में ही है। यदि दस लाख रुपये से कम कीमत में भरोसेमंद और पर्याप्त रेंज देने वाली इलेक्ट्रिक कारें उपलब्ध होती हैं, तो परिवार इन्हें अपनी मुख्य कार के रूप में भी इस्तेमाल करना शुरू कर सकते हैं। जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक वाहन सुलभ, किफायती और रोजमर्रा के उपयोग के लिए सुविधाजनक बनेंगे, वैसे-वैसे इनके प्रति लोगों का भरोसा और बाजार में इनकी हिस्सेदारी दोनों बढ़ती जाएंगी।

15 साल का सबसे बुरा वित्तीय साल, निवेशकों ने ढाई महीने में खोए 48 लाख करोड़

 नई दिल्‍ली  शेयर बाजार निवेशकों के लिए कोरोना महामारी के दौर से भी ज्यादा भयानक साल 2026 गुजरा है. इस साल अभी महज ढाई महीने ही बीते हैं, लेकिन जितना नुकसान इतने कम समय में उठाया है, उतना पिछले 15 साल में किसी भी समय नहीं उठाया. भारतीय शेयर बाजार के लिए साल 2026 की शुरुआत तो ठीक रही थी, लेकिन उसके बाद से लगातार दबाव और बिकवाली का ही समय रहा है. आलम यह रहा कि ढाई महीने से भी कम समय में निवेशकों ने 533 अरब डॉलर (48.50 लाख करोड़ रुपये) बाजार में गंवा दिए. आंकड़ों में झांकें तो पता चलता है कि साल 2011 के बाद से अब भारतीय निवेशकों को सबसे ज्‍यादा नुकसान हुआ है. इस साल अभी तक बीएसई पर लिस्‍टेड कंपनयिों का मार्केट कैप 533 अरब डॉलर नीचे आ चुका है, जो 2011 में करीब 625 अरब डॉलर गिरा था. खास बात यह है कि भारतीय शेयर बाजार को हुआ नुकसान मैक्सिको, मलेशिया, दक्षिण अफ्रीका, नॉर्वे, फिनलैंड, वियतनाम और पोलैंड के बाजारों को हुए कुल नुकसान से भी ज्‍यादा है. इतना ही नहीं, भारतीय शेयर बाजार के नुकसान का आंकड़ा चिली, ऑस्ट्रिया, फिलीपींस, कतर और कुवैत को हुए नुकसान से भी दोगुना रहा है. मार्केट कैप एक साल में सबसे कम भारतीय शेयर बाजार में लिस्‍टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप अभी करीब 4.77 ट्रिलियन डॉलर के आसपास है, जो अप्रैल 2025 के बाद से सबसे निचला स्‍तर है. यह साल 2026 की शुरुआत में करीब 5.3 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गया था. लिहाजा इसमें सीधे 10 फीसदी की गिरावट दिख रही है. यह गिरावट दिखाती है कि भारतीय शेयर बाजार में साल 2026 की शुरुआत से अब तक किस कदर बिकवाली हावी रही है. जनवरी से ही यहां लगातार उतार-चढ़ाव दिख रहा है. विदेशी निवेशकों की बेरुखी कायम भारतीय शेयर बाजार पर सबसे ज्‍यादा असर डालने वाले विदेशी निवेशकों की बेरुखी 2025 के बाद इस साल भी कायम है. साल 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों ने लगातार अपने पैसे निकाले हैं. इसके अलावा कंपनियों की कमाई और ट्रेड वॉर की वजह से भी बाजार पर खासा असर दिखा है. टैरिफ से लेकर मिसाइल तक के युद्ध ने पूरी दुनिया के बाजार को हिला दिया है, जिसका भारतीय बाजार पर कुछ ज्‍यादा ही असर दिखा. ईरान युद्ध ने आग में डाला घी. अभी अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के टैरिफ वॉर से दुनिया संभली भी नहीं थी कि ईरान के साथ-साथ खाड़ी देशों में शुरू हुए युद्ध ने ग्‍लोबल मार्केट को हिलाकर रख दिया. कच्‍चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा पहुंचा है, जिससे भारत में महंगाई और चालू खाते के घाटे के बढ़ने की आशंका भी तेज हो गई है. आयात बिल में होने वाला इजाफा देश की अर्थव्‍यवस्‍था पर भी दबाव डाल रहा है. बार्कलेस का कहना है कि क्रूड में 10 डॉलर प्रति बैरल का भी इजाफा होता है तो भारत के चालू खाते का घाटा 9 अरब डॉलर बढ़ जाता है.  

भारत-अमेरिका समझौते की संभावना बढ़ी, ट्रंप के प्रतिनिधि ने साझा की सकारात्मक जानकारी

नई दिल्ली भारत और अमेरिका एक और समझौते पर मुहर लगाने के बेहद करीब हैं। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने शुक्रवार को यह खुशखबरी देते हुए कहा है कि दोनों देश क्रिटिकल मिनरल्स से जुड़े अहम समझौते को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और आने वाले कुछ महीनों में इस पर बड़ी घोषणा हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा है कि दोनों देश मैन्युफैक्चरिंग और नई तकनीकों के लिए जरूरी दुर्लभ खनिज की सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए इस समझौते पर तेजी से काम कर रहे हैं। सर्जियो गोर ने इस पर खुशी जताते हुए कहा, “मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि हम क्रिटिकल मिनरल्स समझौते को अंतिम रूप देने के बहुत करीब पहुंच गए हैं। यह समझौता एडवांस मैन्युफैक्चरिंग, एनर्जी सिस्टम और उभरती तकनीकों के लिए जरूरी सप्लाई चेन को सुरक्षित करने में मदद करेगा। अगले कुछ महीनों में इस पर बड़ी घोषणा होने की उम्मीद है।” सर्जियो गोर ने कहा कि आने वाले महीनों में दोनों देश ठोस नतीजे दिखा सकते हैं। उन्होंने बताया कि दोनों सरकारों में इस साझेदारी को आगे बढ़ाने की मजबूत राजनीतिक इच्छा दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा, “हम कुछ अलग देख रहे हैं। जहां पहले रुकावटें होती थीं, अब वहां प्रगति दिखाई दे रही है। अमेरिका और भारत की साझेदारी की ताकत और गति को बढ़ाने वाली कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां सामने आई हैं।” भारत-अमेरिका के रिश्तों पर क्या बोले? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत ने यह भी कहा है कि भारत और अमेरिका के रिश्ते ऐतिहासिक ऊंचाइयों तक पहुंचने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने हाल में हुए कई महत्वपूर्ण समझौतों और प्रगति का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस साझेदारी में तीन बड़ी प्रगति हुई है। पहली व्यापार के क्षेत्र में, दूसरी भरोसे और तकनीक के क्षेत्र में और तीसरी रणनीतिक समन्वय के क्षेत्र में। उनके अनुसार यह तीनों पहलू दिखाते हैं कि अमेरिका और भारत की साझेदारी किस दिशा में आगे बढ़ रही है। अंतरिम समझौते पर सहमति इस दौरान अमेरिका-भारत अंतरिम व्यापार समझौते के बारे में बोलते हुए गोर ने कहा कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्था का आकार, लोगों की प्रतिभा और समाज में मौजूद उद्यमशीलता की ऊर्जा यह साफ दिखाती है कि सहयोग की संभावनाएं बहुत बड़ी हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत सिर्फ गति और राजनीतिक इच्छाशक्ति की थी, ताकि इन अवसरों को ठोस परिणामों में बदला जा सके। गौरतलब है कि भारत और अमेरिका ने बीते 7 फरवरी को एक अंतरिम समझौते पर सहमति जताई थी।

IDFC First Bank घोटाले में जांच तेज: 19 लोकेशन पर रेड, 90+ बैंक खाते सीज

नई दिल्ली आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में 597 करोड़ रुपये के फ्रॉड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। दरअसल, ईडी ने चंडीगढ़, मोहाली, पंचकुला, गुरुग्राम और बेंगलुरु में 19 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। वहीं, एजेंसी ने फ्रॉड से जुड़े 90 से अधिक बैंक खाते फ्रीज कर दिए हैं। आइए डिटेल जान लेते हैं कि ईडी की जांच कहां तक पहुंची है। कहां-कहां पर छापेमारी ईडी के चंडीगढ़ क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा 12 मार्च को चलाए गए इन तलाशी अभियानों में बैंक के पूर्व कर्मचारियों रिभव ऋषि और अभय कुमार, उनके परिवार के सदस्यों से जुडे परिसर शामिल हैं। इसके अलावा, फ्रॉड से जुड़े कई लाभार्थी फर्जी कंपनी से जुड़े परिसरों में भी छापेमारी की गई। इन कंपनियों में स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स, कैपको फिनटेक सर्विसेज, मां वैभव लक्ष्मी इंटीरियर्स और एसआरआर प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। सावन ज्वैलर्स जैसे ज्वैलर्स और रियल एस्टेट डेवलपर विक्रम वधवा और उनकी व्यावसायिक संस्थाओं के परिसरों की भी तलाशी ली गई। क्या कहा जांच एजेंसी ने? जांच एजेंसी के अनुसार, इस घोटाले में हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ नगर निगम और अन्य सरकारी खातों से संबंधित लगभग 597 करोड़ रुपये की सरकारी धनराशि का गबन शामिल था। यह धनराशि बैंक में सावधि जमा के रूप में रखी जानी थी लेकिन आरोपियों ने कथित तौर पर बिना अनुमति के इसे हड़प लिया। ईडी के मुताबिक उसने इस साल फरवरी में पंचकुला में राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो द्वारा आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में हरियाणा के विकास और पंचायत विभाग के बैंक खातों में शेष राशि के मिलान में विसंगति के संबंध में दर्ज एफआईआर के आधार पर धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत अपनी जांच शुरू की। जांच में पता चला कि गबन की गई रकम को कई फर्जी कंपनियों के माध्यम से इधर-उधर भेजा गया था। जांचकर्ताओं ने बताया कि कथित तौर पर इस प्रक्रिया में स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड नामक एक फर्जी कंपनी का गठन शामिल था, जिसके जरिए सरकारी धन की बड़ी रकम को शुरू में गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया था। इस कंपनी के साझेदार स्वाति सिंगला और अभिषेक सिंगला हैं। एक साल से चल रहा था खेल ईडी ने बताया कि बाद में अधिकांश रकम ज्वैलर्स के बैंक खातों के माध्यम से फर्जी बिलों द्वारा सोने की खरीद का दिखावा करने के लिए भेजी गई। जांचकर्ताओं के अनुसार यह धोखाधड़ी पिछले लगभग एक वर्ष से बैंक के पूर्व कर्मचारियों की मदद से की जा रही थी। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के पूर्व कर्मचारी रिभव ऋषि पर आरोप है कि उन्होंने कई फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल करके धनराशि को गबन किया। एजेंसी के मुताबिक अपराध की कुछ धनराशि ऋषि और उनकी पत्नी दिव्या अरोरा के बैंक खातों में स्थानांतरित की गई थी। बता दें कि रिभव ने जून 2025 में इस्तीफा दे दिया था। ईडी का दावा है कि मोहाली में परियोजनाओं के मालिक होटल व्यवसायी और रियल एस्टेट डेवलपर विक्रम वधवा ने भी बड़ी मात्रा में धनराशि का गबन किया। वधवा ने कथित तौर पर अपराध की धनराशि सीधे अपने बैंक खातों में प्राप्त की और फिर उसे प्रिस्मा रेजिडेंसी एलएलपी, किंसपायर रियल्टी एलएलपी और मार्टेल बिल्डवेल एलएलपी सहित रियल एस्टेट फर्मों में स्थानांतरित कर दिया।

सोना-चांदी के दाम गिरे, अचानक सस्ती हुई धातुएँ, बाजार में दिखी उत्सुकता

भोपाल  मध्य प्रदेश के सर्राफा बाजार से शुक्रवार सुबह बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे खरीदारी की योजना बना रहे ग्राहकों में उत्साह देखने को मिल रहा है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे प्रमुख शहरों में आज दोनों कीमती धातुओं के दाम कम हुए हैं। जानकारी के अनुसार 13 मार्च को बाजार खुलते ही सोने और चांदी की नई दरें जारी की गईं। कीमतों में आई इस गिरावट को ग्राहकों के लिए अच्छा मौका माना जा रहा है। सोने के ताज़ा रेट (13 मार्च 2026) आज 24 कैरेट सोने की कीमत घटकर लगभग ₹15,666 प्रति ग्राम हो गई है, जबकि 10 ग्राम 24 कैरेट सोना ₹1,56,660 पर पहुंच गया है। वहीं 22 कैरेट सोने की कीमत ₹14,920 प्रति ग्राम है और 10 ग्राम 22 कैरेट सोना ₹1,49,200 में मिल रहा है। अगर 8 ग्राम सोने की बात करें तो 22 कैरेट सोना ₹1,19,360 में मिल रहा है, जो कल के मुकाबले सस्ता हुआ है। इसी तरह 24 कैरेट के 8 ग्राम सोने की कीमत ₹1,25,328 दर्ज की गई है। चांदी भी हुई सस्ती सोने के साथ-साथ चांदी के दामों में भी गिरावट देखने को मिली है। शुक्रवार को चांदी की कीमत ₹290 प्रति ग्राम हो गई है, जबकि 1 किलो चांदी ₹2,90,000 में बिक रही है। गुरुवार को यह कीमत करीब ₹3,00,000 प्रति किलो थी। क्यों घटे सोने-चांदी के दाम? बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव और वैश्विक तनाव की वजह से सोने और चांदी की कीमतों में लगातार बदलाव हो रहा है। मार्च महीने में अब तक इन धातुओं के दामों में कभी तेजी तो कभी गिरावट देखने को मिल रही है। फिलहाल आज आई गिरावट उन लोगों के लिए राहत लेकर आई है जो शादी-ब्याह या निवेश के लिए सोना-चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं..

निफ्टी 23,500 से नीचे फिसला, बाजार ने कमजोर शुरुआत की लगातार तीसरे दिन

मुंबई शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन कमजोर शुरुआत हुई है. सुबह 9:15 बजे पर सेंसेक्स 530 अंक फिसलकर 75504 के लेवल पर खुला है. निफ्टी 159 अंक गिरकर 34,480 पर ओपन हुआ है.  आपको बता दें कि 17 अप्रैल 2025 के बाद निफ्टी 23,500 के नीचे गिरा है. आज निफ्टी आईटी 0.78%, निफ्टी बैंक, 0.86 फीसदी और निफ्टी ऑटो में 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट और निफ्टी मेटल और फाइनेंशियल में भी बिकवाली है. वहीं, एनर्जी और फार्मा सेक्टर में खरीदारी है।  निफ्टी लूजर्स में एम एंड एम, एचडीएफसी बैंक, एल एंड टी, अल्ट्राटेक सीमेंट, टाटा स्टील शामिल हैं. इनके शेयर्स 1 फीसदी से ज्यादा फिसले हैं. वहीं, निफ्टी टॉप गेनर्स में रिलायंस, इटरनल, पॉवर ग्रिड शामिल हैं. निफ्टी के 50 में से 45 शेयर्स में गिरावट देखी गई. साथ ही, निफ्टी बैंक के सारे शेयर्स में बिकवाली नजर आई है. आपको बता दें कि ईरान और इजराल के बीच चल रहे तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के ऊपर रहने से रुपये पर दबाव बढ़ गया है. इसी कारण रुपया डॉलर के मुकाबले 16 पैसे गिरकर 92.35 पर पहुंच गया।  अमेरिकी बाजारों से कमजोरी के संकेत मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, V. K. Vijayakumar के अनुसार पश्चिम एशिया के युद्ध को लेकर बढ़ती अनिश्चितता से वैश्विक बाजारों में कमजोरी बनी हुई है और बाजार फिलहाल अस्थिर स्थिति में हैं. अमेरिकी बाजारों से कमजोरी के संकेत मिल रहा है कि बाजार में तेजी आने में अभी समय लग सकता है. ब्रेंट क्रूड करीब 100 डॉलर के आसपास रहने से निवेशक सतर्क हैं और विदेशी निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली के कारण बड़े ब्लूचिप शेयरों पर भी दबाव बना हुआ है. हालांकि, फार्मा सेक्टर बाकि के मजबूत बना हुआ है क्योंकि इस पर बाहरी दबाव कम है. रुपये की कमजोरी निर्यात करने वाली फार्मा कंपनियों के लिए फायदेमंद होती है. उनका कहना है कि मौजूदा चुनौतीपूर्ण माहौल में निवेशकों को घबराने की बजाय शांत रहकर नियमित निवेश जारी रखना चाहिए।  शेयर बाजार का कुल मार्केट कैप 533 अरब डॉलर से ज्यादा घटा साल 2026 में अब तक भारत के शेयर बाजार का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन (MCAP) 533 अरब डॉलर से ज्यादा घट चुका है, जो 2011 के बाद सबसे बड़ी गिरावट है. 2011 में पूरे साल के दौरान करीब 625 अरब डॉलर की मार्केट वैल्यू कम हुई थी. दिलचस्प बात यह है कि भारत के बाजार में आई यह गिरावट कई देशों जैसे Mexico, Malaysia, South Africa, Norway, Finland, Vietnam और Poland के पूरे मार्केट वैल्यू से भी ज्यादा है. वहीं यह गिरावट Chile, Austria, Philippines, Qatar और Kuwait जैसे देशों के मार्केट वैल्यू से लगभग दोगुनी है।  अमेरिकी बाजारों का हाल डाउ जोन्स, S&P 500 और नैस्डैक कम्पोजिट गुरुवार को 1.5% से ज्यादा गिरकर बंद हुए, क्योंकि ईरान द्वारा दो तेल टैंकरों पर हमले के बाद कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गईं थी. इससे महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई और निवेशकों ने शेयर बाजार से दूरी बनानी शुरू कर दी. डाउ जोन्स 739.42 अंक (1.56%) गिरकर 46,677.85 पर बंद हुआ, जबकि S&P 500 में 103.22 अंक (1.52%) और नैस्डैक में 404.15 अंक (1.78%) की गिरावट दर्ज की गई. बड़ी बिकवाली के बीच एनर्जी और कुछ डिफेंस शेयरों को छोड़कर ज्यादातर सेक्टर्स में तेज गिरावट देखी गई। 

X पर ‘Ask Grok’ का फ्री वर्शन खत्म, थ्रेड्स में AI से सवाल पूछने के लिए अब पेमेंट जरूरी

नई दिल्ली सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले Twitter) ने अपने AI फीचर ‘Ask Grok’ को लेकर बड़ा बदलाव किया है। अब यह सुविधा सभी यूजर्स के लिए फ्री में उपलब्ध नहीं रहेगी। कंपनी ने इसे पेड फीचर बना दिया है, जिसका मतलब है कि अब केवल प्रीमियम सब्सक्रिप्शन लेने वाले यूजर्स ही X थ्रेड्स में ‘Ask Grok’ का इस्तेमाल कर सकेंगे। ‘Ask Grok’ फीचर दरअसल xAI द्वारा बनाए गए AI चैटबॉट Grok AI पर बेस्ड है। यह फीचर यूजर्स को X पर चल रही किसी भी चर्चा या लंबे थ्रेड के बारे में तुरंत जानकारी लेने की सुविधा देता है। पहले यूजर किसी पोस्ट या थ्रेड में @grok टैग करके सवाल पूछ सकते थे और AI उससे जुड़ी जानकारी तुरंत दे देता था। अब कंपनी ने इस सुविधा को सीमित कर दिया है। नई नीति के अनुसार, केवल X Premium या उससे ऊपर के सब्सक्रिप्शन वाले यूजर्स ही थ्रेड्स में सीधे Grok से सवाल पूछ पाएंगे। फ्री यूजर्स के लिए यह फीचर उपलब्ध नहीं रहेगा। कैसे काम करता है ‘Ask Grok’ ‘Ask Grok’ खास तौर पर उन यूजर्स के लिए काम का था जो लंबे और मुश्किल थ्रेड्स को जल्दी समझना चाहते हैं। अगर किसी पोस्ट के नीचे सैकड़ों कमेंट या रिप्लाई होते थे, तो यूजर Grok से पूछ सकते थे कि ‘इस थ्रेड की समरी क्या है?’ या किसी टॉपिक से जुड़ी एक्सट्रा जानकारी क्या है। AI चैटबॉट पूरी बातचीत का एनालिसिस करके कुछ ही सेकेंड में छोटा और साफ जवाब देता था। इससे यूजर्स को लंबी चर्चा पढ़ने की जरूरत नहीं पड़ती थी और जानकारी जल्दी मिल जाती थी। X के मौजूदा सब्सक्रिप्शन प्लान और कीमत फिलहाल X भारत में तीन तरह के पेड सब्सक्रिप्शन प्लान ऑफर करता है। Basic प्लान: लगभग 170 रुपये प्रति माह। इसमें पोस्ट एडिट करने, लंबी पोस्ट लिखने और कुछ अतिरिक्त फीचर्स मिलते हैं, लेकिन इसमें ब्लू टिक नहीं मिलता। Premium प्लान: करीब 427 रुपये प्रति माह (वेब) और 470 रुपये प्रति माह (मोबाइल)। इस प्लान में ब्लू टिक, कम विज्ञापन, बेहतर रीप्लाई बूस्ट और Grok AI जैसी सुविधाओं का एक्सेस मिलता है। Premium+ प्लान: लगभग 2,570 रुपये प्रति माह। इसमें लगभग एड-फ्री एक्सपीरियंस, आर्टिकल पब्लिश करने की सुविधा और एडवांस AI टूल्स जैसे SuperGrok का एक्सेस मिलता है। AI पर बढ़ता फोकस आप जानते होंगे कि X के मालिक Elon Musk लंबे समय से प्लेटफॉर्म को AI-पावर्ड बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। Grok इसी स्ट्रेटजी का हिस्सा है, जिसके जरिए X को केवल एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म नहीं बल्कि AI-बेस्ड इन्फॉर्मेशन और डिस्कशन सेंटर बनाने की कोशिश की जा रही है। यूजर्स के लिए क्या बदलेगा ‘Ask Grok’ को पेड फीचर बनाने से अब फ्री यूजर्स के लिए AI-बेस्ड यह सुविधा उपलब्ध नहीं रहेगी। हालांकि, प्रीमियम सब्सक्राइबर्स पहले की तरह इसका इस्तेमाल कर पाएंगे और आने वाले समय में इसमें और भी नए AI फीचर्स जोड़े जा सकते हैं।

“TVS Orbiter V1 स्कूटर की लॉन्चिंग, 50 हजार से कम कीमत और शानदार फीचर्स”

नई दिल्ली TVS Orbiter EV का नया बेस वेरिएंट लॉन्च हुआ है, जो BaaS सर्विस के साथ आएगा. कंपनी ने इस इलेक्ट्रिक स्कूटर को पिछले साल के अंत में लॉन्च किया था. अब इसका नया वेरिएंट लॉन्च किया गया है, जो ज्यादा आकर्षक कीमत पर आता है. कंपनी ने नया वेरिएंट Orbiter V1 लॉन्च किया है। BaaS यानी बैटरी-एज-ए-सर्विस के तहत स्कूटर को खरीदना सस्ता हो जाता है. इसकी वजह से स्कूटर को ओरिजनल प्राइस से कई हजार रुपये कम कीमत पर खरीदा जाता है. आइए जानते हैं इस स्कूटर की कीमत और दूसरी खास बातें। कितनी है कीमत?  TVS Orbiter V1 इलेक्ट्रिक स्कूटर की कीमत 84,500 रुपये (सब्सिडी के साथ) एक्स शोरूम रखी गई है. हालांकि, BaaS सर्विस के तहत इसकी कीमत 49,999 रुपये एक्स शोरूम हो जाती है. इस सर्विस के तहत कंज्यूमर्स को सिर्फ स्कूटर की कीमत अदा करनी होती है, जबकि बैटरी सब्सक्रिप्शन के तहत मिलती है। BaaS सर्विस के साथ ही TVS Orbiter V2 वेरिएंट को भी खरीदा जा सकता है, जिसकी कीमत 59,664 रुपये एक्स शोरूम है. सब्सक्रिप्शन प्राइस TVS Orbiter V1 के लिए 862 रुपये है. कंपनी ने कोई मिनिमम डिस्टेंस तय नहीं की है, तो आप निश्चित होकर स्टूकर को चला सकते हैं। सिंगल चार्ज में कितना चलेगा स्कूटर? TVS Orbiter V1 कंपनी का सबसे सस्ता इलेक्ट्रिक स्कूटर बन गया है. इसमें 18kWh की बैटरी दी गई है. कंपनी की मानें तो सिंगल चार्ज में ये स्कूटर 86 किलोमीटर का सफर तय कर सकता है. इसे 0 से 80 परसेंट तक चार्ज होने में सिर्फ 2 घंटे 20 मिनट का वक्त लगता है। स्कूटर में ईको और पावर मोड्स मिलते हैं. इसमें रिजनरेटिव ब्रेकिंग का फीचर भी दिया गया है. इसके अलावा हिल होल्ड असिस्ट, क्रूज कंट्रोल और पार्किंग असिस्ट जैसे फीचर्स मिलते हैं. इसे दो कलर ऑप्शन- मार्टेन कॉपर और स्टेलर सिल्वर में खरीदा जा सकता है।  Orbiter V1 में लगभग सभी इक्विपमेंट Orbiter V2 वाले ही मिलते हैं. इसमें क्रूज कंट्रोल के अलावा LED लाइटिंग, कलर LCD कल्स्टर, ब्लूटूथ और नेविगेशन जैसे फीचर्स मिलते हैं. हालांकि, Orbiter V1 की कीमत V2 के मुकाबले कम है।

सोने-चांदी के दामों में दूसरी दिन गिरावट, महंगाई और युद्ध की छाया, क्या वजह है इस गिरावट की?

इंदौर  अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों ने ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को कमजोर कर दिया है। वहीं, मध्य पूर्व में जारी युद्ध ने तेल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है। इन दोनों वजहों ने मिलकर सोने (Gold) की कीमतों पर दबाव बनाया है। सुबह 9:15 बजे के आसपास एमसीएक्स पर सोना अप्रैल वायदा 0.10% गिरकर 1,61,660 रुपये प्रति 10 ग्राम पर था। उस समय एमसीएक्स चांदी मई वायदा 0.57% गिरकर ₹2,66,969 प्रति किलोग्राम पर थी। दूसरी ओर ब्लूमबर्ग के मुताबिक सिंगापुर में सुबह 8:05 बजे सोने की कीमत (स्पॉट गोल्ड) 0.9% गिरकर 5,132.76 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। वहीं, चांदी 1.5% गिरकर 84.44 डॉलर पर आ गई। दूसरी ओर, प्लैटिनम में 1% और पैलेडियम में 0.8% की गिरावट दर्ज की गई। ब्लूमबर्ग डॉलर स्पॉट इंडेक्स भी 0.2% की मजबूती के साथ बढ़त पर रहा। महंगाई और मजबूत डॉलर ने बढ़ाई सोने की मुश्किलें हालांकि, साल की शुरुआत में अमेरिका का मुख्य महंगाई आंकड़ा नियंत्रित दिख रहा था, लेकिन अब भविष्य को लेकर बढ़ती महंगाई की आशंकाओं ने फेडरल रिजर्व के लिए ब्याज दरों में कटौती की संभावना को कम कर दिया है। इस उम्मीद से डॉलर को मजबूती मिली है और डॉलर इंडेक्स में 0.3% की बढ़त देखी गई। वहीं, यूरोपीय यूनियन ने भी आगाह किया है कि इस साल उसकी महंगाई दर 3% के पार जा सकती है, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई की चिंता और गहरा गई है। क्या सोने की रैली ने लिया है अस्थायी ब्रेक? ब्लूमबर्ग ने मेलबर्न की वैंटेज मार्केट्स की विश्लेषक हेबे चेन के हवाले से बताया है कि सोने का यह गिरना 'हार मानने' की तरह नहीं, बल्कि एक 'ठहराव' की तरह लग रहा है। उनका कहना है, "बढ़ती महंगाई की उम्मीदों ने डॉलर को फिर से मजबूत किया है और निकट भविष्य में फेड द्वारा दरों में कटौती की संभावनाओं को टाल दिया है। ऐसे में निवेशकों ने फिलहाल सोने से किनारा कर लिया है, क्योंकि बाजार एक समय में सिर्फ एक ही सुरक्षित निवेश को जगह दे सकता है।" सोना: सुरक्षित निवेश की चमक बरकरार, लेकिन राह आसान नहीं सोने के लिए ब्याज दरों का बढ़ना एक बाधा है, क्योंकि यह खुद कोई ब्याज नहीं देता। इसके अलावा, निवेशक जरूरत पड़ने पर अपने पोर्टफोलियो के दूसरे हिस्सों को मजबूत करने के लिए सोने को नकदी में बदल लेते हैं। युद्ध शुरू होने के बाद से एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETF) में सोने की मात्रा में गिरावट आई है। हालांकि, पिछले हफ्ते दो साल से ज्यादा की सबसे बड़ी गिरावट के बाद, मंगलवार को इसमें कुछ निवेश दर्ज किया गया। सुरक्षित निवेश का यह दौर खत्म नहीं हुआ है इस साल सोने की कीमतों में अब तक करीब 20% की बढ़ोतरी हुई है। भू-राजनीतिक उथल-पुथल के समय एक सुरक्षित निवेश होने के कारण इसे लगातार समर्थन मिल रहा है। हालांकि, 24 फरवरी से शुरू हुए युद्ध के बाद से इसका कारोबार काफी अस्थिर रहा है और ऊपर जाने की रफ्तार थम गई है। चेन का कहना है, "सुरक्षित निवेश का यह दौर खत्म नहीं हुआ है। यह बस सांस ले रहा है।"

शेयर बाजार में ‘Oil Strike’ का असर, खुलते ही ध्वस्त हुए ये 10 प्रमुख स्टॉक

मुंबई शेयर बाजार में एक बार फिर कोहराम (Stock Market Crash) मचा है. गुरुवार को खुलने के साथ ही सेंसेक्स-निफ्टी दोनों इंडेक्स धड़ाम हो गए. अमेरिका-इजरायल के साथ ईरान युद्ध के चलते पैदा हुआ तेल संकट और भारत में एलपीजी संकंट (LPG Crisis In India) का सीधा असर मार्केट पर देखने को मिला है. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला Sensex खुलने के साथ ही 978 अंक फिसल गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का Nifty 275 अंक से ज्यादा की गिरावट लेकर ट्रेड कर रहा था. इस बीच जोमैटो, इंडिगो, आईसीआईसीआई बैंक समेत कई दिग्गज स्टॉक धड़ाम नजर आए. बता दें कि गुरुवार को अचानक फिर क्रूड के दाम (Crude Oil Price Surge) में 9 फीसदी के आसपास का उछाल आया।  सेंसेक्स-निफ्टी में फिर हाहाकार मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच तेल संकट के चलते शेयर बाजार पर भी Oil Strike जारी है और ये संभलने का नाम नहीं ले रहा है, सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन बाजार में कारोबार की शुरुआत होने पर बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 76,863 के लेवल से टूटकर 76,369 पर ओपन हुआ और फिर कुछ ही मिनटों में बिखरते हुए 978 अंक फिसकर 75,871 पर आ गया. बात एनएसई निफ्टी की करें, तो इसमें भी खुलने के साथ ही हाहाकार मचा नजर आया है. ये 50 शेयरों वाला इंडेक्स अपने पिछले कारोबारी बंद 23,866 के मुकाबले गिरकर 23,674 पर ओपन हुआ और फिर सेंसेक्स की तरह ही फिसलते हुए 23,556 पर आ गया।  विदेशों से मिले थे खराब सिग्नल  शेयर बाजार में गिरावट के संकेत पहले से ही विदेशी बाजारों से मिल रहे थे. जहां बीते कारोबारी दिन अमेरिका शेयर बाजारों में तगड़ी गिरावट देखने को मिली थी, तो वहीं गुरुवार को एशियाई शेयर मार्केट भी क्रैश नजर आए थे. गिफ्ट निफ्टी भी 180 अंक से ज्यादा की गिरावट लेकर कारोबार कर रहा था. इन ग्लोबल निगेटिव संकेतों के भारतीय शेयर बाजार खुलने के साथ ही धराशायी हो गया।   1597 शेयर खुलते ही धड़ाम कमजोर ग्लोबल संकेतों के बीच आई Indian Stock Market में गिरावट के चलते Nifty 23,700 से नीचे आ गया. शुरुआती कारोबार में जहां 643 शेयरों ने मामूली बढ़त के साथ कारोबार शुरू किया, तो वहीं 1597 कंपनियों के शेयर खुलने के साथ ही धड़ाम हो गए. इसके अलावा 159 शेयरों की फ्लैट ओपनिंग हुई, यानी इनकी स्थिति में कोई चेंज नहीं दिखा।  शुरुआती कारोबार में Interglobe Aviation, ICICI Bank, LT, Kotak Mahindra Bank, TMPV, Eternal, IndiGo, ICICI Bank जैसे शेयर सबसे ज्यादा गिरावट में कारोबार कर रहे थे।  सबसे ज्यादा टूटे ये 10 शेयर  बात करें, बाजार में गिरावट के बीच सबसे ज्यादा टूटने वाले 10 शेयरों के बारे में, तो बीएसई की लार्जकैप कैटेगरी में शामिल Eternal (Zomato) Share 4.30%, M&M Share 3.20%, Maruti Share 2.25%, Trent Share 2.10%, IndiGo Share 2% और ICICI Bank Share 1.90% की गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे.  इसके अलावा मिडकैप में शामिल Bharat Forge Share 4%, APL Apollo Share 2.90%, Supreme India Share 2.74% और Ashok Leyland Share 2.60% टूटकर ट्रेड कर रहे थे।