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सरकारी कर्मचारियों को बड़ी खुशखबरी? OPS पर 8th Pay Commission ने बढ़ाई उम्मीद

नई दिल्ली  केंद्रीय और राज्य सरकारों के लाखों कर्मचारी, भारतीय सशस्त्र बलों को छोड़कर, लगातार यह मांग कर रहे हैं कि पुरानी पेंशन योजना (OPS) को दोबारा लागू किया जाए। दरअसल, जनवरी 2004 में केंद्र सरकार ने नई नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) लागू की थी, जिससे दशकों पुरानी गारंटीड और गैर-योगदान आधारित OPS को समाप्त कर दिया गया। OPS बहाली की मांगों के बीच केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल 2025 को एक नई पेंशन योजना यूनिफाइड पेंशन योजना (UPS) की शुरुआत की। यह योजना NPS और OPS दोनों की विशेषताओं का मिश्रण है। UPS में कर्मचारियों और सरकार दोनों का योगदान रहेगा, ठीक वैसे ही जैसे NPS में होता है। साथ ही, UPS न्यूनतम गारंटीड पेंशन भी प्रदान करती है, बशर्ते कर्मचारी निर्धारित सेवा अवधि पूरी करे। सरकार का कहना है कि UPS से कर्मचारियों को सुरक्षा की गारंटी भी मिलेगी और सरकारी वित्तीय ढांचे पर अत्यधिक बोझ भी नहीं पड़ेगा। OPS फिर बनी प्रमुख मांग इस साल जनवरी 2025 में केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग की घोषणा की। इसके बाद सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से जुड़े मुद्दों पर कर्मचारी संगठनों से सुझाव मांगे। इन सुझावों में पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली प्रमुख मांगों में से एक रही। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि NPS के तहत पेंशन 'बाजार पर निर्भर' है और निश्चित नहीं है, जबकि OPS में जीवनभर गारंटीड पेंशन मिलती थी। क्या है सरकार का रुख हालांकि, केंद्र सरकार ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि OPS की वापसी की कोई संभावना नहीं है। हाल ही में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक (जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की) में 8वें वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस(ToR) को मंजूरी दी गई। 8वें वेतन आयोग की शर्तों में छिपा संकेत सरकार द्वारा मंजूर किए गए Terms के अनुसार, 8वां वेतन आयोग अपनी रिपोर्ट 18 महीनों के भीतर देगा। 8वें वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस में “non-contributory pension” का ज़िक्र सरकार की यही नीति दर्शाता है कि पुरानी पेंशन योजना अब अतीत का हिस्सा बन चुकी है। आयोग को देश की आर्थिक स्थिति, राजकोषीय अनुशासन, विकास व्यय और कल्याण योजनाओं के लिए उपलब्ध संसाधन जैसे कारकों को ध्यान में रखना होगा। इसका मतलब साफ है कि आयोग उन योजनाओं पर विचार नहीं करेगा जिनसे राजकोषीय संतुलन बिगड़ सकता है और OPS ठीक वैसी ही एक योजना है। OPS अब इतिहास केंद्र सरकार ने कई बार स्पष्ट किया है कि OPS की वापसी नहीं होगी। हालांकि कुछ राज्य सरकारें जैसे राजस्थान, छत्तीसगढ़, पंजाब और झारखंड (गैर-एनडीए शासित राज्य) अपने स्तर पर OPS बहाल कर चुकी हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने इसे राजकोषीय रूप से अनुचित बताया है। वित्त मंत्रालय और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने कई मौकों पर कहा है कि OPS अब केंद्रीय कर्मचारियों के लिए लागू नहीं की जाएगी और NPS तथा UPS ही भविष्य की पेंशन प्रणाली रहेंगी।

अनिल अंबानी पर फिर संकट के बादल, सरकारी एजेंसियां हरकत में

मुंबई  अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस ग्रुप के लिए मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। पहले से ही ईडी, सीबीआई और सेबी की जांचों का सामना कर रहे समूह पर अब कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) ने भी शिकंजा कस दिया है। मंत्रालय ने समूह की कई प्रमुख कंपनियों में कथित फंड के दुरुपयोग और कंपनी कानून के गंभीर उल्लंघनों की जांच गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) को सौंप दी है। मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि मंत्रालय की शुरुआती जांच में बड़े पैमाने पर फंड डाइवर्जन और कंपनी एक्ट के उल्लंघन के संकेत मिले हैं। इसके बाद मामला SFIO को सौंपा गया है ताकि फंड के फ्लो और जिम्मेदारी तय करने के लिए विस्तृत जांच की जा सके। किन कंपनियों पर कार्रवाई जिन कंपनियों पर जांच का दायरा बढ़ाया गया है, उनमें रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर, रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस और CLE प्राइवेट लिमिटेड जैसी फर्में शामिल हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि समूह की कई कंपनियों के बीच पैसों का कृत्रिम लेन-देन किया गया, जिससे फंड को एक से दूसरे खाते में ट्रांसफर कर उसकी असली स्थिति छिपाई जा सके। ईडी ने जब्त की ₹7,500 करोड़ की संपत्तियां SFIO की जांच से पहले ही ईडी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रिलायंस ग्रुप से जुड़ी ₹7,500 करोड़ से अधिक की संपत्तियां जब्त की थीं। इनमें रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की करीब 30 संपत्तियां और कई रियल एस्टेट कंपनियों जैसे आधार प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी, मोहनबीर हाईटेक बिल्ड, विहान43 रियल्टी और कैंपियन प्रॉपर्टीज से जुड़ी संपत्तियां शामिल हैं। ईडी का दावा है कि यह कार्रवाई कई हजार करोड़ के बैंक धोखाधड़ी मामले से जुड़ी है, जिसमें समूह की कंपनियों ने बैंकों से लिए गए लोन का दुरुपयोग किया। कर्ज में डूबा समूह ईडी की रिपोर्ट के अनुसार, 2010 से 2012 के बीच रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) और उसकी सहयोगी कंपनियों ने भारतीय बैंकों से ₹40,000 करोड़ से अधिक के लोन लिए थे, जिनमें से ₹19,694 करोड़ अभी भी बकाया हैं। पांच बैंकों ने इन खातों को 'फ्रॉड' घोषित कर दिया है। जांच एजेंसियों का कहना है कि इस दौरान जुटाई गई रकम को बिज़नेस विस्तार में लगाने के बजाय पुराने कर्ज चुकाने और समूह की अन्य कंपनियों को ट्रांसफर करने में इस्तेमाल किया गया। ईडी का यह भी कहना है कि लगभग ₹13,600 करोड़ रुपये की राशि को कई लेयर्ड ट्रांजेक्शनों के ज़रिए समूह की अलग-अलग कंपनियों में घुमाया गया और कुछ धनराशि विदेश भेजी गई। यह पूरी गतिविधि बैंक लोन की शर्तों के उल्लंघन में की गई बताई जा रही है। SFIO की जांच से बढ़ी उम्मीदें अब जब मामला SFIO को सौंपा गया है, तो जांच का दायरा और गहराई दोनों बढ़ गए हैं। SFIO यह पता लगाएगा कि फंड डाइवर्जन का असली जिम्मेदार कौन था और समूह के शीर्ष प्रबंधन की इसमें क्या भूमिका रही। सरकारी सूत्रों का कहना है कि अगर आरोप साबित होते हैं, तो कंपनी एक्ट की धारा 447 (कॉर्पोरेट धोखाधड़ी) के तहत कड़ी सज़ा और आर्थिक दंड लगाया जा सकता है।  

भारतीय बाज़ार में चीनी पाइप का दबदबा! इस साल दोगुना हुआ आयात

नयी दिल्ली चीन से ‘सीमलेस पाइप’ और ‘ट्यूब’ का आयात वित्त वर्ष 2024-25 में सालाना आधार पर दो गुना से अधिक होकर 4.97 लाख टन रहा। घरेलू विनिर्माताओं के संगठन एसटीएमएआई ने यह जानकारी दी। उद्योग जगत के आंकड़ों के अनुसार, देश ने वित्त वर्ष 2023-24 में चीन से 2.44 लाख टन ‘सीमलेस पाइप’ व ‘ट्यूब’ का आयात किया था। वित्त वर्ष 2022-23 में आयात 1.47 लाख टन था जबकि वित्त वर्ष 2021-22 में यह 82,528 टन रहा था। सीमलेस ट्यूब मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसटीएमएआई) के अध्यक्ष शिव कुमार सिंघल ने कहा कि गत वित्त वर्ष में चीन के पाइप का आयात वित्त वर्ष 2021-22 की तुलना में लगभग पांच गुना बढ़ा है। सिंघल ने कहा, ‘‘घरेलू ‘सीमलेस पाइप’ उद्योग की सुरक्षा के लिए भारत सरकार द्वारा विभिन्न सुरक्षा उपायों के माध्यम से किए गए मजबूत समर्थन के बावजूद चीन के पाइप आयात में समय के साथ तेजी से वृद्धि हुई है। चीन से आयात पर अंकुश लगाने में ये प्रयास काफी हद तक अप्रभावी साबित हुए हैं।’’ उद्योग संगठन ने कहा कि चीन की कंपनियां भारतीय बाजार में ‘सीमलेस पाइप’ की डंपिंग कर रही हैं। साथ ही भारतीय सीमा शुल्क पर अधिक ‘बिलिंग’ के माध्यम से करों और शुल्कों की चोरी कर रही हैं। सिंघल ने कहा, ‘‘कथित तौर पर चीनी आयातक सीमा शुल्क निकासी के समय बढ़ा-चढ़ाकर ‘बिल’ मूल्य घोषित कर रहे हैं जबकि बाद में उन्हीं उत्पादों को भारतीय बाजार में घरेलू विनिर्माताओं की तुलना में काफी कम दामों पर बेच रहे हैं। यह प्रथा निष्पक्ष व्यापार को कमजोर करती है और भारतीय उत्पादकों को गंभीर नुकसान पहुंचाती है।’’ चीन न केवल बाजार में अत्यधिक सस्ते पाइप पहुंचा भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहा है बल्कि ताप विद्युत, परमाणु ऊर्जा तथा तेल एवं गैस जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को घटिया सामग्री की आपूर्ति करके गंभीर सुरक्षा चिंताएं भी उत्पन्न कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘ये गतिविधियां भारत के भविष्य के ऊर्जा व बुनियादी ढांचे के परिदृश्य के प्रमुख घटकों में घुसपैठ करने और संभावित रूप से समझौता करने के रणनीतिक प्रयास का संकेत देती हैं। ऐसे घटनाक्रमों पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है क्योंकि ये भारत की आर्थिक संप्रभुता एवं राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक जोखिम खड़ा कर सकते हैं।’’ सिंघल ने बताया कि ‘सीमलेस पाइप’ का न्यूनतम आयात मूल्य 85,000 रुपये प्रति टन है और भारतीय बाजारों में छोटी मात्रा में चीन के पाइप का बाजार मूल्य 70,000 रुपये प्रति टन है। इसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर डंपिंग के कारण स्वदेशी क्षमता का कम उपयोग हो रहा है। उन्होंने कहा कि इसके रोजगार के अवसरों में भी कमी आई है।   

Make in India को नई गति: रोमानियाई फ़र्मों को सहयोग के लिए भारत का आमंत्रण

नई दिल्ली भारत के वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि भारत इस समय दुनिया की तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। उन्होंने रोमानिया की कंपनियों को आमंत्रित किया कि वे भारत के निर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और नवाचार से जुड़े बढ़ते उद्योग क्षेत्र का हिस्सा बनें। इसके लिए उन्होंने मेक इन इंडिया और पीएलआई (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) योजनाओं का उल्लेख किया। मंत्री प्रसाद ने भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ब्रासोव में आयोजित भारत–रोमानिया व्यापार सम्मेलन में किया। यह कार्यक्रम ब्रासोव चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, भारत के बुकारेस्ट स्थित दूतावास और डीपीआईआईटी की साझेदारी में हुआ। इस बैठक का उद्देश्य दोनों देशों के बीच निवेश और औद्योगिक सहयोग को बढ़ाना था। इसमें ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस, रक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, इंजीनियरिंग सेवाओं और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों की कंपनियों ने भाग लिया। बैठक में भारत के हाल के नीतिगत सुधारों, व्यवसाय करने में आसानी से जुड़े कदमों और उद्योग क्षेत्रों में राज्यों द्वारा दिए जा रहे प्रोत्साहनों की जानकारी साझा की गई। इस अवसर पर भारतीय और रोमानियाई कंपनियों के बीच आपसी सहयोग के लिए कई समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर हुए और नई तकनीकी साझेदारी तथा संयुक्त उपक्रम पर चर्चा हुई। मंत्रालय के अनुसार, ब्रासोव में हुआ यह सम्मेलन मध्य और पूर्वी यूरोप के साथ भारत के व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। दोनों देशों ने लंबे समय तक टिकाऊ विनिर्माण, हरित ऊर्जा और उच्च तकनीकी क्षेत्रों में साथ मिलकर आगे बढ़ने की इच्छा जताई। इससे पहले, मंत्री प्रसाद ने बुकारेस्ट में रोमानिया की विदेश मंत्री ओआना-सिल्विया सोयू से द्विपक्षीय बैठक की। दोनों पक्षों ने व्यापार बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखलाएं मजबूत करने पर चर्चा की। वाणिज्य मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, दोनों पक्ष इस वर्ष के भीतर, चल रही वार्ताओं के लिए निर्धारित राजनीतिक दिशा के अनुरूप, एक निष्पक्ष, संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम रूप देने की दिशा में काम करने पर सहमत हुए। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2024–25 में भारत का रोमानिया को निर्यात 1.03 अरब डॉलर से अधिक रहा, जबकि दोनों देशों के बीच कुल व्यापार लगभग 2.98 अरब डॉलर तक पहुंच गया।  

सोना हुआ सस्ता! भारत में 10 दिन में ₹10,000 की गिरावट, लेकिन पाकिस्तान में अब भी आसमान छू रहे दाम

इंदौर  सोना-चांदी की कीमत भारत में बीते कुछ दिनों से तेजी से क्रैश (Gold-Silver Price Crash) हुई है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि घरेलू मार्केट में 10 ग्राम 24 कैरेट गोल्ड रेट महज 10 कारोबारी दिनों में ही 10,000 रुपये से ज्यादा कम हो चुका है. न सिर्फ भारत, बल्कि दुनिया भर में सोने का दाम फिसला है. पाकिस्तान में तगड़ी गिरावट के बाद भी सिर्फ एक तोला गोल्ड की कीमत (Pakistan Gold Rate) इतनी है, जिसमें भारत में एक ऑल्टो कार खरीदी जा सकती है.  भारत में ऐसे फिसल रहा सोना सबसे पहले बताते हैं भारत में Gold-Silver Rate के बारे में, तो बुधवार को कमोडिटी मार्केट से लेकर शेयर बाजार तक बंद हैं, लेकिन बीते कारोबारी दिन मंगलवार को सोना-चांदी तेजी से फिसले थे. MCX पर 5 दिसंबर की एक्सपायरी वाला सोना कारोबार के दौरान 1600 रुपये फिसलने के बाद सुधार के बावजूद 500 रुपये टूटकर 1,19,749 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था. वहीं चांदी 3000 रुपये से ज्यादा फिसलकर 1.44 लाख रुपये तक पहुंच गई थी.  घरेलू मार्केट में 11 दिन में ₹10000 सस्ता बात घरेलू मार्केट की करें, तो साप्ताहिक अवकाश और दीवाली की छुट्टी को हटा दें, तो इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट पर अपडेट रेट्स के मुताबिक सिर्फ 10 दिन में ही सोना 10,455 रुपये सस्ता हुआ है. दरअसल, बीते 17 अक्टूबर की सुबह कारोबार शुरू होने पर 24 कैरेट सोना 1,30,874 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो बीते कारोबारी दिन मंगलवार की शाम को 1,20,419 रुपये पर बंद हुआ था.  चांदी की कीमतों में आए बदलाव पर गौर करें, तो इस अवधि में Silver Price में 25,125 रुपये की तगड़ी गिरावट दर्ज की गई है. इसका भाव इन कारोबारी दिनों में 1,71,275 से कम होकर 1,46,150 रुपये पर आ गया है.     पाकिस्तान में 1 तोला Gold कितने का?  अब बताते हैं पाकिस्तान में सोने की कीमत के बारे में, तो 5 नवंबर को देश में 10 ग्राम 24 कैरेट गोल्ड का रेट बीते कुछ दिनों में आई गिरावट के बावजूद 3,60,645 पाकिस्तानी रुपये है. जबकि चंद दिन पहले पाकिस्तान 1 तोला सोने का भाव 4,20,650 रुपये था. वहीं चांदी का लेटेस्ट रेट देखें, तो ये 4,41,000 रुपये प्रति किलो चल रही है.  मतलब जितनी पाकिस्तान में एक तोला Gold और एक किलो Silver का रेट है, उतने रुपये में तो भारत में एक ऑल्टो कार खरीद सकते हैं और पैसे भी बचेंगे. बता दें कि भारत में इस पॉपुलर हैचबैक कार Alto K10 की शुरुआती कीमत 3.70 लाख रुपये है. हालांकि, दोनों देशों की मुद्राओं में बड़ा अंतर है. Pakistan Currency (PKR) में चांदी का भाव 4.41 लाख रुपये, भारतीय करेंसी में 1.40 लाख रुपये होता है, जबकि एक तोला सोने का भाव Indian Currency में 1.32 लाख रुपये के आस-पास होता है. 

PPF निकालने का आसान रास्ता — नियम, शर्तें और झटपट प्रोसेस

नई दिल्ली  पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) भारत की सबसे लोकप्रिय दीर्घकालिक बचत योजनाओं में से एक है जो अपनी सुरक्षा, टैक्स लाभ और सुनिश्चित रिटर्न के लिए पहचानी जाती है। हालांकि PPF में 15 साल की लॉक-इन अवधि होती है जिसका मतलब है कि आप अपनी इच्छा के अनुसार पूरी राशि नहीं निकाल सकते। आज हम जानेंगे कि PPF में मैच्योरिटी के बाद आंशिक निकासी (Partial Withdrawal) और समय पूर्व बंद (Premature Closure) करने के नियम क्या हैं। 1. मैच्योरिटी के बाद निकासी  PPF खाते का मैच्योरिटी पीरियड 15 साल पूरा होने के बाद आप बिना किसी जुर्माने के संचित ब्याज के साथ-साथ पूरी राशि निकाल सकते हैं। यह निकासी पूरी तरह से टैक्स फ्री (Tax Free) होती है जो इस योजना की सबसे आकर्षक विशेषता है। यदि आप ब्याज जारी रखना चाहते हैं तो आप खाते को पांच-पांच सालों के ब्लॉक में बढ़ाकर मैच्योरिटी राशि को वापस से निवेश कर सकते हैं।   2. मैच्योरिटी से पहले आंशिक निकासी   अगर आपको मैच्योरिटी से पहले धन की आवश्यकता है तो आंशिक निकासी की अनुमति है लेकिन इसके कुछ सख्त नियम हैं: निकासी की अवधि: खाता खोलने की तारीख से 6 वित्तीय वर्ष पूरे होने के बाद ही आंशिक निकासी की जा सकती है (यानी सातवें वित्तीय वर्ष से)। निकासी की सीमा (Limit): आप निम्नलिखित में से जो भी कम हो उस पूरे बैलेंस का 50% तक निकाल सकते हैं: : निकासी के साल से ठीक पहले चौथे वित्तीय वर्ष के अंत में उपलब्ध शेष राशि। : निकासी से ठीक पहले के वित्तीय वर्ष के अंत में उपलब्ध शेष राशि। : यह आंशिक निकासी हर वित्तीय वर्ष में सिर्फ एक बार ही की जा सकती है। इसके लिए आपको बैंक या डाकघर में उपलब्ध फॉर्म C भरना होगा।   3. समय पूर्व बंद होना  PPF खाता कुछ खास और गंभीर परिस्थितियों में ही समय से पहले बंद किया जा सकता है। यह सुविधा खाता खोलने की तारीख से 5 साल बाद ही उपलब्ध होती है: अनुमति के कारण: : खाताधारक, पति-पत्नी या आश्रित बच्चों को जानलेवा या गंभीर बीमारी होने पर। : खाताधारक या आश्रित बच्चों की उच्च शिक्षा के खर्च के लिए। : निवास स्थिति में स्थायी परिवर्तन होने पर (जैसे NRI बनना)। खाता खोलने की तारीख या विस्तार अवधि की शुरुआत से मिलने वाली जमा राशि पर ब्याज दर में से 1% की कटौती की जाती है। इस प्रक्रिया के लिए आपको ज़रूरी दस्तावेजों के साथ फॉर्म 5 जमा करना होगा।   4. खाताधारक की मृत्यु की स्थिति में  यदि खाता धारक की मैच्योरिटी पीरियड से पहले ही मृत्यु हो जाती है तो नियम बदल जाते हैं। इस मामले में 15 साल की लॉक-इन अवधि लागू नहीं होती है।नामित व्यक्ति (Nominee) या कानूनी उत्तराधिकारी को तुरंत ही पूरी राशि (ब्याज सहित) मिल सकती है।  

TESLA कार में कैद होकर 5 लोगों की मौत, मामले में दायर हुई शिकायत

न्यूयॉर्क अमेरिकी इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनी टेस्ला (TESLA) पर विस्कॉन्सिन में हुए एक भीषण सड़क हादसे के बाद मुकदमा दायर किया गया है. यह हादसा पिछले साल वेरोना (मैडिसन) में हुआ था, जिसमें Model S कार सवार सभी 5 लोगों की मौत हो गई थी. आरोप है कि कार के डिज़ाइन में खामी के कारण उसमें बैठे पैसेंजर आग लगने के बाद दरवाजा नहीं खोल पाए और अंदर ही फंसकर जल गए. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ये हादसा 1 नवंबर 2024 की रात का है. जब वेरोना (विस्कॉन्सिन) में टेस्ला मॉडल एस कार सड़क से स्किड होकर एक पेड़ से जा टकराई. कार में सवार जेफ़्री बाउर (54) और मिशेल बाउर (55) अपने दोस्तों के साथ यात्रा कर रहे थे. टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कुछ ही क्षणों में कार में आग लग गई. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के बाद कार के भीतर से चीखें सुनाई दीं, लेकिन कोई भी दरवाज़ा खोल नहीं सका.  टेस्ला पर मुकदमा बीते 31 अक्टूबर, शुक्रवार को बाउर दंपत्ति के चार बच्चों ने टेस्ला पर मुकदमा दायर किया है. उनका आरोप है कि कार के इलेक्ट्रॉनिक डोर सिस्टम में ऐसी खामी थी, जिसने उनके माता-पिता को बाहर निकलने का कोई मौका नहीं दिया. शिकायत में कहा गया है कि आग लगने के बाद लिथियम-आयन बैटरी पैक ने इलेक्ट्रॉनिक डोर सिस्टम को निष्क्रिय कर दिया, जिससे दरवाज़े खुल ही नहीं सके. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों का कहना है कि टेस्ला को इस खामी की जानकारी पहले से थी, क्योंकि ऐसे हादसे पहले भी हो चुके थे. इसके बावजूद कंपनी ने “सुरक्षा उपायों को नज़रअंदाज़ करते हुए” कार के डिज़ाइन में कोई बदलाव नहीं किया. साइबरट्रक हादसे में दो छात्रों की मौत  यह पहली बार नहीं है जब टेस्ला की इलेक्ट्रिक कारों के सेफ्टी सिस्टम और डिज़ाइन फीचर्स पर सवाल उठे हों. कंपनी पहले भी अपनी ऑटोपायलट तकनीक और दरवाजे के ऑटोमैटिक सिस्टम को लेकर आलोचनाओं का सामना कर चुकी है. पिछले साल नवंबर में कैलिफोर्निया के सैन फ्रांसिस्को उपनगर में साइबरट्रक हादसे में दो कॉलेज छात्रों की मौत हुई थी. तब भी परिवारों ने दावा किया था कि आग लगने के बाद वाहन के हैंडल डिज़ाइन के कारण छात्र बाहर नहीं निकल सके. NHTSA कर रही है जांच अमेरिकी नेशनल हाईवे ट्रैफिक सेफ्टी एडमिनिस्ट्रेशन (NHTSA) ने सितंबर 2025 में टेस्ला के डोर डिज़ाइन की जांच शुरू की थी. कई रिपोर्टों में सामने आया कि एक्सीडेंट के समय टेस्ला कार के डोर हैंडल्स फेल हो सकते हैं. बाउर परिवार की याचिका में यह भी कहा गया है कि, पीछे की सीट पर बैठे यात्रियों को बच निकलने के लिए कार के फ्लोर मैट को हटाकर एक मेटेल के टैब को खोजना पड़ता है, जो हादसे के वक्त किसी आम व्यक्ति के लिए असंभव है. बाउर दंपत्ति के मौत के मामले वाली रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि, स्थानीय निवासी ने 911 पर कॉल कर बताया कि उसने कार के भीतर से मदद की चीखें सुनीं, लेकिन कोई दरवाज़ा नहीं खुल रहा था. शिकायत में लिखा गया है, “टेस्ला के डिज़ाइन ने एक ऐसा जोखिम पैदा किया जो पूरी तरह से अनुमानित था. कि दुर्घटना में बच जाने वाले लोग जलती हुई कार में फंस जाएंगे.” इस मुकदमे में ड्राइवर को भी प्रतिवादी बनाया गया है, बाउर दंपत्ति के बच्चों का आरोप है कि चालक ने लापरवाही से वाहन चलाया, जिससे यह भयानक हादसा हुआ. यह मुकदमा डेन काउंटी की राज्य अदालत में दायर किया गया है.

बड़ी खबर! ChatGPT का महंगा प्लान अब फ्री में, आज से शुरू ऑफर — बचाएं ₹4788

आज से ChatGPT का प्रीमियम प्लान फ्री! यूज़र्स को मिलेगा ₹4788 की बचत का मौका बड़ी खबर! ChatGPT का महंगा प्लान अब फ्री में, आज से शुरू ऑफर — बचाएं ₹4788 ChatGPT यूज़र्स के लिए खुशखबरी — आज से फ्री मिलेगा पेड प्लान, जानें कैसे करें ₹4788 की सेविंग मुंबई  भारत में AI का यूज तेजी से बढ़ रहा है और अब कंपनियां इसमें और तेजी लाने का कोशिश कर रही हैं. ChatGPT मेकर OpenAI एक बड़ा ऐलान कर चुकी है. कंपनी ने बेंगलुरू में आयोजित एक इवेंट में बताया है कि 4 नवंबर यानी आज  से सभी को 399 रुपये का प्लान अब मुफ्त में एक्सेस करने को मिलेगा. सभी भारतीय यूजर्स को पूरे एक साल के लिए ये एक्सेस मुफ्त में मिलेगा. डेवडे एक्सचेंज इवेंट के दिन कंपनी बेंगलुरु में ये ऐलान कर चुकी है और बता चुकी कि सभी भारतीयों को पूरे एक साल तक ChatGPT GO का एक्सेस मुफ्त में मिलेगा. भारत चैटजीपीटी का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है. फ्री में मिलेगा रहा है 17 हजार का परप्लेक्सिटी कंपनी का यह ऐलान ऐसे समय सामने आया है, जब कुछ सप्ताह पहले Perplexity AI का प्रो सब्सक्रिप्शन सभी एयरटेल यूजर्स को मुफ्त में मिलता है. इसके एनुअल प्लान की कीमत 17 हजार रुपये है.  ChatGPT GO इस साल की शुरुआत में हुआ लॉन्च  ChatGPT GO प्लान को कंपनी ने इस साल की शुरुआत में लॉन्च किया था और भारत में यह प्लान अगस्त में लॉन्च हुआ है. यह एक ऐसा प्लान है, जिसकी मदद से कंपनी अपने यूजर्स को कम कीमत में प्रीमियम फीचर्स का एक्सेस देना चाहती है.  ChatGPT GO के फीचर्स  ChatGPT GO प्लान के तहत सबसे एडवांस्ड AI मॉडल, GPT 5 का सपोर्ट, ज्यादा मैसेज लिमिट और डेली ज्यादा इमेज तैयार कर सकेंगे. साथ ही बड़ी पाइलों और इमेज को अपलोड कर सकेंगे और उनके कंटेंट की समरी को जनरेट कर सकेंगे.      एडवांस्ड मॉडल एक्सेस (GPT‑5) : चैटजीपीटी गो प्लान के तहत यूजर्स आसानी से एडवांस्ड मॉडल का एक्सेस कर सकेंगे. इसके तहत ट्रांसलेशन में बेहतर रिजल्ट नजर आएंगे.  साथ ही टेक्नोलॉजी या रिसर्च आदि में इसका यूज किया जा सकेगा.      मैसेज, इमेज और अपलोड लिमिट में होगा इजाफा : ChatGPT Go के प्लान के तहत यूजर्स को फ्री वर्जन की तुलना में करीब 10× अधिक मैसेज का एक्सेस करने को मिलता है. साथ ही वे ज्यादा मैसेज कर सकेंगे और ज्यादा इमेज अपलोड कर सकेंगे.  चैटजीपीटी के हेड निक टर्ली ने किया ऐलान    ओपन AI के वाइस प्रेसिडेंट और चैटजीपीटी के हेड निक टर्ली ने इवेंट के दौरान इस मुफ्त सर्विस का ऐलान किया था. साथ ही एडवांस्ड फीचर्स का एक्सेस सभी भारतीय यूजर्स को एक्सेस करने को मिलेगा. इसके लिए यूजर्स को चैटजीपीटी में लॉगइन करके एक्सेस करने होगा.  

कार बाजार में धमाका! अक्टूबर में सबसे ज्यादा बिकी इस कंपनी की गाड़ियां, बाकी सब पीछे

नई दिल्ली भारत का ऑटो सेक्टर अक्टूबर 2025 में त्योहारी जोश और GST 2.0 के असर से पूरी तरह चमक उठा है। देश की बड़ी कंपनियां मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki), टाटा मोटर्स (Tata Motors), महिंद्रा (Mahindra), किआ (Kia) और टोयोटा (Toyota) ने इस महीने अब तक की सबसे ज्यादा सेल्स दर्ज की हैं। त्योहारी सीजन (नवरात्रि से दिवाली तक) में गाड़ियों की डिमांड इतनी जबरदस्त रही कि शोरूम पर बुकिंग और डिलीवरी दोनों के रिकॉर्ड टूट गए। पसंदीदा मॉडल्स पर सीमित समय की शानदार डील भारत की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) ने अक्टूबर 2025 में 2.42 लाख यूनिट्स की डिलीवरी की, जो कि इसका अब तक का सबसे बड़ा रिटेल रिकॉर्ड है। कंपनी के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (सेल्स और मार्केटिंग) पार्थो बनर्जी ने बताया कि हमने 40 दिनों के फेस्टिव सीजन में 5 लाख से ज्यादा बुकिंग्स दर्ज कीं, जिनमें से 4.1 लाख कारें हमने ग्राहकों को डिलीवर कीं। ये पिछले साल की तुलना में दोगुना प्रदर्शन है। मारुति स्विफ्ट (Swift), ब्रेजा (Brezza), बलेनो (Baleno) और फ्रोंक्स (Fronx) जैसी कारों की डिमांड अब भी टॉप पर बनी हुई है। SUV सेगमेंट में महिंद्रा (Mahindra) का राज कायम है। अक्टूबर 2025 में कंपनी ने 71,624 SUVs बेचीं, जो महिंद्रा (Mahindra) के इतिहास की सबसे ज्यादा मासिक बिक्री है। कंपनी के ऑटो डिविजन के CEO नलिनीकांत गोंलगुंटा ने कहा कि स्कॉर्पियो-N और XUV700 की डिमांड अब भी सप्लाई से आगे चल रही है। हर महीने बुकिंग बढ़ती जा रही है। टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल (Tata Motors Passenger Vehicles) ने भी अपना अब तक का सबसे शानदार महीना दर्ज किया है। कंपनी ने 61,295 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की, जो पिछले साल की तुलना में 26.6% ज्यादा है। किआ (Kia) ने भी अक्टूबर 2025 में अपनी इंडिया जर्नी का सबसे अच्छा प्रदर्शन किया। कंपनी ने 29,556 यूनिट्स बेचीं। यह किआ (Kia) के लिए अब तक का बेस्ट मंथली सेल्स रिकॉर्ड है। सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अतुल सूद ने कहा कि हमारी प्रोडक्ट रेंज भारतीय ग्राहकों की बदलती जरूरतों से पूरी तरह मेल खाती है। EV सेगमेंट में बढ़ता योगदान हमारे फ्यूचर रेडी फोकस को साबित करता है। टोयोटा (Toyota Kirloskar Motor- TKM) ने भी जबरदस्त 39% की ग्रोथ दिखाई। अक्टूबर में कंपनी ने 42,892 यूनिट्स बेचीं, जो पिछले साल की तुलना में काफी बेहतर है। फेस्टिव सीजन में इनोवा हाईक्रॉस (Innova Hycross) और अर्बन क्रूजर टेजर (Urban Cruiser Taisor) की डिमांड सबसे ज्यादा रही। वहीं, स्कोडा ऑटो इंडिया (Skoda Auto India) ने भी नया रिकॉर्ड बनाया। इस कंपनी ने अक्टूबर में 8,252 यूनिट सेल की, जो कंपनी की अब तक की सबसे ज्यादा मासिक बिक्री है। जनवरी से अक्टूबर 2025 के बीच स्कोडा (Skoda) ने पहले ही 2022 के पूरे साल का रिकॉर्ड पार कर लिया है। हुंडई (Hyundai Motor India) की बिक्री में मामूली 3% की गिरावट रही, लेकिन फिर भी यह कंपनी के लिए क्रेटा (Creta) और वेन्यू (Venue) की दूसरी सबसे बड़ी बिक्री वाला महीना रहा। दोनों SUVs की लगातार मजबूत डिमांड यह साबित करती है कि हुंडई (Hyundai) की पकड़ अब भी SUV मार्केट में बनी हुई है। इस महीने के आंकड़े साफ बताते हैं कि SUV सेगमेंट भारत के कार बाजार पर पूरी तरह हावी है। त्योहारी मांग और GST 2.0 के असर ने ग्राहकों को खरीदारी के लिए प्रेरित किया है। ग्रामीण इलाकों में रिकवरी और नई लॉन्चेज ने भी ऑटो इंडस्ट्री में जान फूंक दी है।

मुंबई बंगले से लेकर दिल्ली-नोएडा की प्रॉपर्टी तक, अनिल अंबानी ग्रुप की 3084 करोड़ की संपत्तियां जब्त

मुंबई  प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप (Anil Ambani Reliance Group) पर बड़ा एक्शन लिया है. इसके तहत समूह की तमाम संस्थाओं से जुड़ी करीब 3,084 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां कुर्क की गई हैं. कुर्की के ये आदेश बीते 31 अक्टूबर 2025 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 5(1) के तहत जारी किए गए थे. जिन संपत्तियों को कुर्क किया गया है, उनमें मुंबई के बांद्रा वेस्ट, पाली हिल में स्थित उनका आवास भी शामिल है.  दिल्ली, मुंबई से नोएडा तक कार्रवाई प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई कार्रवाई के दौरान अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप से संबंधित जिन संपत्तियों को कुर्क किया गया है. उनमें मुंबई के पाली हिल स्थित आवास, नई दिल्ली स्थित रिलायंस सेंटर की संपत्ति और दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, मुंबई, पुणे, ठाणे, हैदराबाद, चेन्नई (कांचीपुरम समेत) और पूर्वी गोदावरी में स्थित कई अन्य इन संपत्तियों में कार्यालय परिसर, आवासीय इकाइयां और प्लॉट शामिल हैं. पीएमएलए के तहत जारी चार आदेशों के तहत इन सभी संपत्तियों की कुर्की की गई है. गौरतलब है कि मुंबई के बांद्रा वेस्ट के पाली हिल में स्थित अनिल अंबानी का आवास खासा लोकप्रिय है. 40 से ज्यादा संपत्तिया जब्त रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप पर ये बड़ी कार्रवाई करते हुए, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) द्वारा जुटाए गए सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में 40 से ज्यादा संपत्तियां अस्थायी रूप से जब्त कर ली हैं. यह मामला उन आरोपों से जुड़ा है जिनमें कहा गया कि आरएचएफएल और आरसीएफएल के माध्यम से जुटाए गए सार्वजनिक धन को अनिल अंबानी समूह से जुड़ी संस्थाओं से जुड़े लेन-देन के दौरान डायवर्ट और लॉन्ड्रिंग किया गया था. ये यस बैंक के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से भेजा गया. 2017-2019 के दौरान, यस बैंक ने RHFL के उपक्रमों में 2,965 करोड़ रुपये और RCFL के उपक्रमों में 2,045 करोड़ रुपये का निवेश किया. दिसंबर 2019 तक, ये निवेश नॉन-परफॉर्मिंग हो गए थे, जिसमें आरएचएफएल के लिए 1,353.50 करोड़ और आरसीएफएल के लिए 1,984 करोड़ बकाया थे. रिलायंस कम्युनिकेशंस भी निशाने पर  ईडी ने अनिल अंबानी के रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCom) और उससे जुड़ी संस्थाओं में भी अपनी जांच का दायरा बढ़ाया है. इसमें 13,600 करोड़ रुपये से ज्यादा की ऋण धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है. इसमें से 12,600 करोड़ रुपये से ज्यादा कथित तौर पर संबंधित पक्षों को ट्रांसफर किए गए, जबकि 1,800 करोड़ रुपये समूह की अन्य कंपनियों तक पहुंचाने से पहले सावधि जमा और म्यूचुअल फंड के माध्यम से ट्रांसफर हुए. प्रवर्तन निदेशालय ने कहा है कि वैध लेनदेन की आड़ में संबंधित संस्थाओं को धन पहुंचाने के लिए बिल डिस्काउंटिंग के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग का पता लगाया गया है. ईडी के मुताबिक, वह दागी संपत्तियों की कुर्की सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रहा है. इन कार्रवाइयों के माध्यम से की गई वसूली से आम जनता को लाभ होगा. लगातार कस रहा ईडी का शिकंजा ईडी की जांच लंबे समय से चल रही है और इससे पहले 5 अगस्ता को ED ने रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन और एमडी अनिल अंबानी को कथित लोन फ्रॉड केस की चल रही जांच के सिलसिले में पूछताछ के लिए बुलाया था. उससे भी पहले ईडी ने अनिल अंबानी से जुड़ी व्यावसायिक संस्थाओं पर छापेमारी की थी. ईडी ने Anil Ambani के रिलायंस ग्रुप से जुड़ी 50 व्यावसायिक संस्थाओं और 25 व्यक्तियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी. ये छापे 24 जुलाई को मुंबई में कम से कम 35 जगहों पर मारे गए थे.  अनिल अंबानी के रिलायंस समह पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) बीते कुछ समय में लगातार अपना शिकंजा कसती हुई नजर आई है. बीते अक्टूबर महीने में ईडी ने रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप ऑफ कंपनीज के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) और कार्यकारी निदेशक अशोक कुमार पाल को गिरफ्तार कर लिया है. यह गिरफ्तारी फर्जी बैंक गारंटी मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के तहत की गई है.