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बंगाल चुनाव में यूपी के 54 भाजपाई लेंगे मोर्चा, 47 विधानसभा सीटों का मिलेगा जिम्मा

कलकत्ता  बिहार विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत से उत्साहित भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल के चुनावी रण में भी पूरी ताकत झोंक दी है। पार्टी ने उत्तर प्रदेश से मंत्रियों, संगठनात्मक अनुभव रखने वाले नेताओं और रणनीतिकारों की एक जंबो टीम बंगाल भेजी है, ताकि चुनावी जमीन मजबूत की जा सके। भाजपा ने चुनावी रणनीति के तहत बंगाल को छह क्षेत्रों में विभाजित किया है। इनमें से तीन क्षेत्रों की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री जेपीएस राठौर, पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेश राणा और उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत को सौंपी गई है। इनके साथ संबंधित राज्यों के संगठन महामंत्री भी तैनात किए गए हैं।  47 सीटों का दायित्व यूपी के नेताओं को पार्टी ने 244 विधानसभा सीटों में से 47 सीटों का दायित्व यूपी के नेताओं को सौंपा है। बंगाल का चुनाव भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बना हुआ है और देशभर की निगाहें यहां के नतीजों पर टिकी हैं। उत्तर प्रदेश में लंबे समय तक प्रदेश महामंत्री रह चुके जेपीएस राठौर को उनकी मजबूत संगठनात्मक पकड़ को देखते हुए अक्टूबर में ही बंगाल भेज दिया गया था। वे कोलकाता दक्षिण क्षेत्र का प्रभार संभाल रहे हैं और इससे पहले भी विधानसभा चुनाव के दौरान यहां सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। 44 जिलों में से पांच जिलों का प्रभार भी यूपी के नेताओं पूर्व गन्ना विकास मंत्री और प्रदेश उपाध्यक्ष रह चुके सुरेश राणा को कोलकाता उत्तर की जिम्मेदारी दी गई है। इससे पहले वे हरियाणा विधानसभा चुनाव में भी पार्टी के लिए अहम सीटों पर काम कर चुके हैं। राज्य के 44 जिलों में से पांच जिलों का प्रभार भी यूपी के नेताओं के पास है। इनमें राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, राज्यमंत्री दिनेश खटीक, संजय गंगवार, पूर्व सांसद अजय मिश्र टेनी और सुब्रत पाठक शामिल हैं। सुब्रत पाठक को हुगली जिले की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जहां की सात विधानसभा सीटों पर फिलहाल भाजपा का कोई विधायक नहीं है, हालांकि 2019 के लोकसभा चुनाव में यहां से भाजपा सांसद जीत दर्ज कर चुके हैं।पूर्व मंत्री स्वाति सिंह को कोलकाता दक्षिण की बिहाला सीट, उपेंद्र तिवारी को हावड़ा टाउन की संकरेल सीट और आनंद शुक्ला को हाबरा सीट का दायित्व दिया गया है। वहीं मेरठ-गाजियाबाद क्षेत्र से एमएलसी धर्मेंद्र भारद्वाज बैरकपुर जिले की जगतदल विधानसभा सीट और कानपुर से एमएलसी अरुण पाठक नईहाटी सीट पर कैंप किए हुए हैं। इसके अतिरिक्त जिला, क्षेत्र और प्रदेश स्तर के संगठनात्मक पदाधिकारियों को भी चुनावी रणनीति के तहत पश्चिम बंगाल भेजा गया है। 

कांग्रेस का बड़ा कदम: बंगाल में ममता के खिलाफ अकेले चुनाव लड़ेगी पार्टी, एजेंडा क्या होगा?

कलकत्ता  पश्चिम बंगाल में विधानसभा के चुनाव अप्रैल-मई में होने वाले हैं. लेकिन, अभी से ही संकेत मिलने लगे हैं कि बंगाल की लड़ाई भी लगभग दिल्ली और बिहार जैसी ही हो सकती है – बंगाल में भी कांग्रेस करीब करीब उसी भूमिका में नजर आ सकती है, जैसा कांग्रेस का रवैया दिल्ली और बिहार में देखा जा चुका है. पश्चिम बंगाल में चल रहे SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ अपनी मुहिम को धार देने के लिए ममता बनर्जी दिल्ली में हैं. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिल चुकी हैं, और सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की बेंच के सामने अपने केस की पैरवी भी कर चुकी हैं. साथ ही, ममता बनर्जी चाहती हैं कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कांग्रेस संसद में महाभियोग का प्रस्ताव लाए, और तृणमूल कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दल उसको सपोर्ट करें – लेकिन, सपोर्ट के बदले में वो कुछ भी शेयर नहीं करना चाहती हैं.  मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तो पहले से ही तृणमूल कांग्रेस के पश्चिम बंगाल चुनाव अकेले लड़ने का ऐलान कर रखा है. अब तो कांग्रेस ने भी पश्चिम बंगाल की सभी 294 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है – ऐसी सूरत में बंगाल के चुनाव नतीजे दिल्ली और बिहार से कितने अलग होंगे, देखना महत्वपूर्ण होगा. पश्चिम बंगाल की संभावित चुनावी जंग ये तो अब पूरी तरह साफ हो गया है कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को चुनावी लड़ाई सिर्फ बीजेपी के खिलाफ नहीं लड़ना है. 2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी बहुत ज्यादा सीटें तो नहीं जीत पाई थी, लेकिन मुख्य विपक्षी दल तो बन ही गई. कांग्रेस का तो खाता भी नहीं खुल पाया था.  मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग के मुद्दे पर विपक्ष का साथ चाह रहीं ममता बनर्जी से दिल्ली में जब कांग्रेस के बारे पूछा गया तो उनका जवाब था कि उनकी पार्टी विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी. कांग्रेस के साथ किसी भी तरह के चुनावी गठबंधन की संभावना को नकारते हुए ममता बनर्जी पहले भी कह चुकी हैं, तृणमूल कांग्रेस की रणनीति साफ है, जबकि बाकी पार्टियां टीएमसी के खिलाफ लड़ने की रणनीति बनाती हैं. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर अब कांग्रेस का रुख भी सामने आ गया है. कांग्रेस का कहना है, प्रदेश संगठन और कार्यकर्ताओं की लंबे समय से मांग रही है कि पार्टी राज्य में अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान के साथ चुनावी मैदान में उतरे. पश्चिम बंगाल कांग्रेस ने आलाकमान के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा है कि केंद्रीय नेतृत्व ने बंगाल कांग्रेस की भावनाओं का सम्मान किया और अकेले चुनाव लड़ने के फैसले को मंजूरी दी. बंगाल कांग्रेस की तरफ से एक बयान में कहा गया है, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल प्रभारी गुलाम अहमद मीर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी, सांसद ईशा खान चौधरी सहित सूबे के सीनियर नेताओं की मौजूदगी में व्यापक विमर्श हुआ – और तय हुआ कि पार्टी 2026 का विधानसभा चुनाव अकेले दम पर लड़ेगी. बीजेपी के खिलाफ ममता बनर्जी की लड़ाई में कांग्रेस की ही तरह एक और मोर्चा खड़ा हो रहा है. सीपीएम की पश्चिम बंगाल इकाई के सचिव मोहम्मद सलीम ने हाल ही में टीएमसी से सस्पेंड विधायक हुमायूं कबीर से मुलाकात की थी. मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद बनवाने की घोषणा करके चर्चा में आए हुमायूं कबीर ने जनता उन्नयन पार्टी बनाई है, और ममता बनर्जी को सत्ता से बेदखल करने का दावा कर रहे हैं.  बंगाल चुनाव में कांग्रेस की भूमिका 2025 के शुरू में दिल्ली विधानसभा चुनाव और आखिर में बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही. पश्चिम बंगाल के 2021 के चुनाव में तो राहुल गांधी की भूमिका रस्मअदायगी जैसी थी. राहुल गांधी एक दिन के लिए पश्चिम बंगाल में कैंपेन करने गए थे, और कोविड के कारण आगे के कार्यक्रम रद्द कर दिए गए थे.  2025 के पश्चिम बंगाल चुनाव में कांग्रेस की भूमिका का अंदाजा कैसे लगाया जाए? क्या राहुल गांधी दिल्ली और बिहार की तरह बंगाल में भी कांग्रेस को चुनाव लड़ाने वाले हैं या 2021 की ही तरह रस्मअदायगी निभाने की तैयारी है?  दिल्ली में हुई कांग्रेस की मीटिंग में ममता बनर्जी के सबसे बड़े विरोधी अधीर रंजन चौधरी भी शामिल थे, जो 2024 का लोकसभा चुनाव हारने के बाद से हाशिये पर भेजे जा चुके हैं. और, ये भी ममता बनर्जी के फेवर में ही जाता है. 2024 के चुनाव से पहले ही ममता बनर्जी ने घोषणा कर डाली थी कि वो अकेले चुनाव लड़ेंगी. पहले तो सुनने में आया था कि वो कांग्रेस को दो सीटें गठबंधन के तहत देने के तैयार भी थीं, लेकिन बाद में मना कर दिया. और, भारत जोड़ो न्याय यात्रा के साथ राहुल गांधी के पश्चिम बंगाल में प्रवेश की पूर्व संध्या पर ही 'एकला चलो रे' घोषणा कर दी थी. फिर कांग्रेस नेतृत्व की तरफ से ममता बनर्जी के प्रति बयानों में सम्मान के भाव ही प्रकट किए जा रहे थे.  दिल्ली और बिहार चुनावों में राहुल गांधी के तेवर को देखें तो अंदाज बिल्कुल अलग था. दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी नेता अरविंद केजरीवाल के खिलाफ राहुल गांधी उतने ही आक्रामक नजर आते थे, जितना बीजेपी के नेता. शीशमहल से लेकर दिल्ली शराब घोटाले तक, राहुल गांधी ने एक एक मामला गिनाकर अरविंद केजरीवाल को कठघरे में खड़ा कर दिया था.  ये भी था कि अरविंद केजरीवाल का भी कांग्रेस के प्रति ममता बनर्जी जैसा ही रवैया था. ममता बनर्जी ने तो विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक में रहते हुए भी अरविंद केजरीवाल का समर्थन किया था. मतलब, कांग्रेस के खिलाफ. जैसे समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव ने चुनाव कैंपेन भी किया था.  बिहार चुनाव राहुल गांधी दिल्ली की तरह तो नहीं लड़ रहे थे, लेकिन कोई कमी भी नहीं छोड़ी थी. आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के साथ वोटर अधिकार यात्रा करते हुए उनको मुख्यमंत्री पद का चेहरा नहीं बताया. तेजस्वी यादव के बड़े भाई और प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बता देने के बाद भी. बाद में जो हुआ, न होता तो भी नतीजे शायद ही अलग होते.  तृणमूल कांग्रेस के लिए बंगाल … Read more

एमपी बीजेपी के बड़े नेता दिल्ली पहुंचे, पार्टी में बड़े बदलाव की योजना, हेमंत खंडेलवाल की अगुवाई

भोपाल  भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल इन दिनों दिल्ली दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने डिनर डिप्लोमेसी का फॉर्मूला अपनाते हुए प्रदेश के सभी सांसदों को सहभोज पर बुलाया। यहां उन्होंने सांसदों से संगठनात्मक विषय व आगामी रणनीति पर वन-टू-वन चर्चा भी की। माना जा रहा है कि यह डिनर केवल आपसी संवाद तक सीमित नहीं था। बल्कि आने वाले समय की राजनीतिक और संगठनात्मक रणनीति की नींव रखने की कोशिश भी थी। सांसदों से एमपी बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष ने किया आग्रह भाजपा के दोनों सदनों के सांसदों से खंडेलवाल ने आग्रह किया कि वे प्रदेश से जुड़े विषयों और विकास आवश्यकताओं के समाधान के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने में सक्रिय सहयोग करें, ताकि केंद्र की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह संवाद आने वाले समय में संगठात्मक निर्णयों और कार्ययोजनाओं में अहम भूमिका निभाएगा। केंद्र के साथ मिलकर काम कर रही है भाजपा की सरकार उन्होंने कहा, भाजपा सरकारमध्यप्रदेश की प्रगति और जन कल्याण के लिए हर स्तर पर केंद्र के साथ मिलकर कार्य कर रही है। इस सहभोज में केंद्रीय राज्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद एम. मुरुगन, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं खजुराहो सांसद वीडी शर्मा, भोपाल सांसद आलोक शर्मा, इंदौर शंकर लालवानी सहित प्रदेशभर के सांसद शामिल हुए। इन मुद्दों पर हुई चर्चा सूत्रों के मुताबिक बैठक में चर्चा के दौरान बुनियादी ढ़ांचा, सड़क-रेल कनेक्टिविटी, औद्योगिक निवेश, क्षेत्रीय विकास और केंद्र प्रायोजित योजनाओं से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए हैं। 'डिनर' से साफ संदेश राजनीतिक जानकारों के मुताबिक दिल्ली में आयोजित यह सहभोज भाजपा के नेतृत्व की ओर से एकजुटता और सक्रियता का बड़ा संदेश देता है। विपक्ष के लिए भी संदेश साफ है कि एमपी प्रदेश संगठन पूरी तरह सक्रिय और समन्वित है। वहीं आने वाली राजनीतिक चुनौतियों को लेकर गंभीर और तैयार है। अब आगे क्या बड़े परिवर्तन की है तैयारी? एक्सपर्ट का मानना है कि दिल्ली दौरे के बाद भाजपा प्रदेश संगठन भोपाल में भी समीक्षा बैठकों का दौर शुरू हो सकता है। इसमें सांसदों से मिले फीडबैक के आधार पर रणनीति को अंतिम रूप दिया जा सकता है। यानी पार्टी की ये कवायद काफी कुछ बदलने की तैयारी मानी जा सकती है।

दिग्विजय सिंह की RSS पर टिप्पणी, मानहानि केस खारिज करने से कोर्ट का इनकार

भोपाल  कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और दूसरे सरसंघचालक एमएस गोलवलकर से जुड़ी एक टिप्पणी के चक्कर में फंसते नजर आ रहे हैं। इस मामले में उनके खिलाफ दायर एक मानहानि याचिका को कोर्ट ने खारिज करने से इनकार कर दिया है। 8 जुलाई 2023 को सोशल मीडिया साइट पर किए गए एक पोस्ट में दिग्विजय सिंह ने दूसरे सरसंघचालक गोलवलकर की एक तस्वीर साझा करके उसके कैप्शन में लोगों से सवाल पूछा था कि क्या वह दलितों, पिछड़े वर्गों, मुसलमानों और भूमि, जल व जंगल से जुड़े मुद्दों पर गोलवलकर के विचारों से परिचित हैं? इस पोस्ट को लेकर ठाणे निवासी और संघ के स्वयंसेवक शशिकांत चंपानेकर ने कांग्रेस नेता के खिलाफ मामला दायर कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे संघ की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। याचिका के दाखिल होने के बाद कोर्ट ने सुनवाई शुरू कर दी। राज्यसभा सांसद ने इस याचिका को खारिज करने की अपील करते हुए तर्क दिया कि यह मामला कानूनन विचारणीय नहीं है। इस पर सिविल जज राजेश बी. खंडारे ने कहा कि दिग्विजय सिंह के खिलाफ दायर मानहानि याचिका में वैध कारण बनता है। इसी वजह से इसे प्रारंभिक स्तर पर खारिज नहीं किया जा सकता है। कांग्रेस नेता की तरफ से दलील दी गई कि याचिका कर्ता को यह मुकदमा दायर करने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि संघ न तो कोई पंजीकृत संस्था है और न ही कानूनी व्यक्ति है। ऐसे में वह मुकदमा दायर नहीं कर सकता। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आखिर कोई व्यक्तिगत सदस्य संघ और गोलवलकर की ओर से हर्जाना कैसे मांग सकता है? इस पर याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया कि आपराधिक मानहानि कानून के तहत किसी पहचाने जाने योग्य समूह की मानहानि की जा सकती है और उस समूह का कोई आहत सदस्य कानूनी कार्रवाई कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े गंभीर और विचारणीय मुद्दे हैं, जिनका फैसला केवल साक्ष्य दर्ज होने के बाद ही किया जा सकता है, न कि वाद खारिज करने के चरण पर। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि इस वाद को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि याचिका में कारण बनता है, संघ सदस्य के मुकदमा दायर करने के अधिकार को इस चरण पर कानून द्वारा प्रतिबंधित नहीं कहा जा सकता और वाद के मूल्यांकन या कोर्ट फीस की पर्याप्तता जैसे मुद्दे बिना सुधार का अवसर दिए वाद खारिज करने का आधार नहीं बन सकते।

सिद्धारमैया और DK की अनबन के बीच कांग्रेस में तीसरे मोर्चे की तैयारी, विधायक कर रहे बैठकें

बेंगलुरु कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के खेमों के बीच रस्साकशी करीब एक साल से चल रही है। शिवकुमार गुट का कहना है कि सिद्धारमैया ने सीएम बनने से पहले आधे कार्यकाल को लेकर वादा किया था और बाद में वह कुर्सी छोड़ने वाले थे। लेकिन सिद्धारमैया गुट इससे इनकार करता रहा है। इसे लेकर मामला हाईकमान तक भी पहुंच चुका है और हालात संभालने के कई बार प्रयास हो चुके हैं। यही नहीं कई बार ऐसी चर्चाएं भी छिड़ी हैं कि सिद्धारमैया अपने किसी करीबी नेता को मुख्यमंत्री बनाकर हट सकते हैं। इस बीच कांग्रेस में सत्ता के लिए तीसरा मोर्चा खुलता दिख रहा है। बेंगलुरु में एससी, एसटी और लिंगायत समुदाय के विधायकों की बैठकें हुई हैं। इन लोगों की इच्छा है कि उनके समुदाय के किसी नेता को सीएम का पद मिले या फिर कैबिनेट में फेरबदल की स्थिति में ज्यादा से ज्यादा मंत्री पद मिल जाएं। लिंगायत विधायकों की बैठक सोमवार रात को उद्योग मंत्री एमबी पाटिल की लीडरशिप में हुई। इसके अलावा एससी-एसटी वर्ग के विधायकों की बैठक होम मिनिस्टर जी. परमेश्वर के घर पर मंगलवार की शाम को हुई। नवंबर और दिसंबर में सिद्धारमैया एवं शिवकुमार खेमे के बीच कई बैठकें हुई थीं। तब से फिलहाल स्थिति जस की तस थी, लेकिन विधायकों की फिर से शुरू हुई बैठकों ने हलचल मचा दी है। कुछ सूत्रों का कहना है कि ये मीटिंगें इसलिए हुई हैं ताकि अपने समुदाय की ताकत दिखाकर हाईकमान को दबाव में लाया जा सके। वहीं कांग्रेस के ही कुछ सूत्रों का कहना है कि एमबी पाटिल और जी. परमेश्वर दोनों ही सिद्धारमैया खेमे के ही हैं। ऐसी स्थिति में यह बैठकें शायद शिवकुमार खेमे को जवाब के तौर पर भी हो सकती हैं ताकि उनके दबाव को कम किया जा सके। दरअसल शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय के नेता हैं, जो राज्य की दूसरी सबसे बड़ी आबादी है। लेकिन सबसे बड़ी संख्या लिंगायतों की है और एक समूह के तौर पर देखा जाए तो एससी और एसटी समुदाय की भी अच्छी संख्या है। ऐसे में इन दोनों वर्गों के विधायकों की बैठकें करके शिवकुमार को बैकफुट पर लाने की कोशिश है। एमबी पाटिल ने कहा कि हमारी यह बैठक किसी मकसद से नहीं थी बल्कि रूटीन बैठक थी। उन्होंने कहा कि इस बैठक का मतलब सत्ता परिवर्तन या फिर पर्सनल एजेंडा नहीं था। उन्होंने कहा कि लिंगायत तो राज्य का सबसे बड़ा वर्ग हैं। उनके 34 विधायक हैं। विधायकों का कहना था कि सरकार में लिंगायत समुदाय को उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। चर्चाएं इस बात की भी तेज हैं कि सिद्धारमैया खुद हटने की स्थिति में अपने किसी करीबी को कमान देना चाहते हैं। ऐसे में ये बैठकें उसके लिए शक्ति प्रदर्शन या फिर सहमति बनाने की कोशिश है।

MP कांग्रेस में बड़ा बदलाव, जंबो कार्यकारिणी को खत्म करने का संगठन का ऐलान

भोपाल  कांग्रेस संगठन के ताज़ा निर्देशों ने मध्य प्रदेश कांग्रेस की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल के सख्त आदेश के बाद प्रदेश कांग्रेस में टेंशन का माहौल बन गया है। अब जिलों में मनमाने तरीके से बड़ी कार्यकारिणी बनाने पर रोक लगा दी गई है। जिला अध्यक्षों को मिला सीधा आदेश कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सभी राज्यों की इकाइयों और जिला अध्यक्षों को पत्र लिखकर साफ निर्देश दिए हैं कि — बड़े जिलों में अधिकतम 55 सदस्य छोटे जिलों में सिर्फ 35 सदस्य ही जिला कार्यकारिणी में शामिल किए जाएंगे। यह फैसला AICC अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में हुई बैठक में लिया गया। 15 दिन में कार्यकारिणी गठन के निर्देश वेणुगोपाल ने यह भी साफ कर दिया है कि सभी जिलों को 15 दिन के भीतर नई गाइडलाइन के अनुसार जिला कार्यकारिणी का गठन करना होगा। MP में पहले ही तोड़ी जा चुकी है गाइडलाइन मध्य प्रदेश में गुटबाजी को साधने के लिए लंबे समय से जम्बो कार्यकारिणी बनाने की परंपरा रही है। लेकिन नए निर्देश आने से पहले ही 30 जनवरी को कांग्रेस ने तीन जिलों की कार्यकारिणी जारी कर दी, जिनमें तय सीमा से कहीं ज्यादा पदाधिकारी बना दिए गए। आंकड़े जो बढ़ा रहे हैं संगठन की मुश्किल छिंदवाड़ा: 240 सदस्य सागर: 150 से ज्यादा पदाधिकारी मऊगंज (छोटा जिला): 40 सदस्य भोपाल शहर: 106 नामों की सूची भोपाल ग्रामीण: 85 सदस्यों की सूची तैयार इन आंकड़ों ने अब कांग्रेस संगठन को असमंजस में डाल दिया है।  अब क्या बदलेगी MP कांग्रेस की रणनीति? राष्ट्रीय नेतृत्व के सख्त रुख के बाद सवाल यह है कि— क्या जारी की गई जम्बो कार्यकारिणियों में कटौती होगी? या फिर संगठन और प्रदेश नेतृत्व के बीच टकराव बढ़ेगा? फिलहाल, कांग्रेस के नए फरमान ने मध्य प्रदेश की सियासत में नई बेचैनी और सियासी हलचल जरूर पैदा कर दी है।

खाने में मिलावट पर संसद में हंगामा: राघव चड्ढा ने उठाए कड़े सवाल, सरकार से मांगा जवाब

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने बुधवार को सदन में देश में खाने में मिलावट जैसे गंभीर मुद्दे को उठाया। उन्होंने इसे एक बड़ा स्वास्थ्य संकट बताया जो खासकर बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए गंभीर खतरा पैदा करता जा रहा है। आप सांसद राघव चड्ढा ने संसद में बोलते हुए कंपनियों पर सेहतमंद और एनर्जी बढ़ाने वाले झूठे दावों के तहत हानिकारक उत्पाद बेचने का आरोप लगाया। उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे रोजमर्रा की जरूरी चीजों में खतरनाक पदार्थ मिलाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि दूध खरीदिए, उसमें यूरिया मिलता है, सब्जियों में ऑक्सीटोसिन है, पनीर में स्टार्च और कास्टिक सोडा होता है, आइसक्रीम में डिटर्जेंट पाउडर मिलता है, फलों के जूस में सिंथेटिक फ्लेवर और आर्टिफिशियल रंग होते हैं, खाने के तेल में मशीन का तेल मिलाया जाता है, मसालों में ईंट का पाउडर और लकड़ी का बुरादा होता है, चाय में सिंथेटिक रंग मिलाए जाते हैं और पोल्ट्री उत्पादों में एनाबॉलिक स्टेरॉयड मिलाए जाते हैं। यहां तक ​​कि देशी घी में जो मिठाइयां बनानी चाहिए, वो भी वनस्पति तेल और डालडा से बनाया जाता है। आप सांसद राघव चड्ढा ने आगे बताया कि एक मां अपने बच्चे को दूध का गिलास देती है, ये सोचकर कि उसके सेहत के लिए कैल्शियम और प्रोटीन मिलेगा और मेरा बच्चा दुरुस्त बनेगा। लेकिन उसे इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं है कि वह अपने बच्चे को यूरिया और डिटर्जेंट मिला हुआ दूध पिला रही है। उन्होंने एक रिसर्च स्टडी का हवाला दिया, जिसमें दिखाया गया कि दूध के सैंपल में 71 प्रतिशत यूरिया और 64 प्रतिशत में न्यूट्रलाइजर जैसे सोडियम बाइकार्बोनेट पाए गए। उन्होंने कहा कि देश में दूध का इतना उत्पादन नहीं है, जितना बेचा जा रहा है। सब्जियां जिन्हें हम सेहत का खजाना समझकर खरीदते हैं, उनमें ऑक्सीटोसिन का इंजेक्शन लगाकर फ्रेश करके बेचा जाता है। ऑक्सीटोसिन वह खतरनाक केमिकल है, जिससे चक्कर आना, सिरदर्द, हार्ट फेलियर, बांझपन और कैंसर जैसी बीमारियां होती हैं। उन्होंने बताया कि 2014-15 और 2025-26 के बीच जितने भी सैंपल की जांच हुई, उनमें से 25 प्रतिशत सैंपल में मिलावट पाई गई, जिसका मतलब है कि हर चार में से एक सैंपल में मिलावट पाई गई। उन्होंने आगे कहा कि जो प्रोडक्ट भारत में बनते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बैन हो गए हैं, दो बड़ी भारतीय मसाला कंपनियों के उत्पादों पर कैंसर पैदा करने वाले कीटनाशकों के कारण यूके और पूरे यूरोप में बैन लगा दिया गया था, फिर भी वही उत्पाद भारत में खुलेआम बेचे जा रहे हैं। उन्होंने दुख जताया कि जो चीजें विदेशों में पालतू जानवरों के लिए भी ठीक नहीं हैं, उनका यहां बिना सोचे-समझे सेवन किया जा रहा है। उन्होंने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) को पर्याप्त कर्मचारियों और प्रयोगशाला सुविधाओं के साथ मजबूत करने, उल्लंघन करने वालों पर वित्तीय जुर्माना बढ़ाने, मिलावटी उत्पादों का नाम बताने और उन्हें शर्मिंदा करने के लिए एक सार्वजनिक रिकॉल सिस्टम शुरू करने और विज्ञापनों में गुमराह करने वाले स्वास्थ्य दावों पर बैन लगाने का प्रस्ताव दिया।

राहुल गांधी के ‘गद्दार’ बयान पर गरजे रवनीत सिंह बिट्टू, बोले– उस खानदान से कोई रिश्ता नहीं

नई दिल्ली केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने 'गद्दार' टिप्पणी पर चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी खुद को ही सबसे देशभक्त समझते हैं। उन्होंने कांग्रेस पर पंजाब में हिंसा कराने और कत्ल कराने के आरोप लगाए हैं। बिट्टू ने कहा कि वह कभी भी गांधी परिवार के वारिस से हाथ नहीं मिलाएंगे। बुधवार को संसद परिसर में प्रदर्शन के दौरान राहुल ने कई सांसदों के बीच बिट्टू को गद्दार दोस्त कह दिया था। 'गांधी परिवार ने पंजाब में आग लगाई' बिट्टू ने कहा, 'वह समझते हैं कि सबसे बड़े देशभक्त हम ही हैं। पिताजी ने शहादत दी। तो मेरी पार्टी में यही लड़ाई थी कि मेरे दादाजी सरदार बेअंत सिंह। जो आपने आग लगाई थी पंजाब में, ये कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार ने ही आग लगाई। हमारे सबसे बड़े गुरुद्वारा, स्वर्ण मंदिर में गोली लगी। हजारों सिखों को पंजाबियों को इन्होंने निशाना बना बना के कत्ल करवाया। मर्डर कराया।' उन्होंने कहा, 'अगर राजीव गांधी जी का नाम शहीद लेना पड़ता है, तो शहीद-ए-आजम सरदार बेअंत सिंह भी कहना चाहिए। मैं भी उस परिवार से आता हूं, ये तकलीफ है।' केंद्रीय रेल राज्य मंत्री ने कहा, 'जितनी देर मैं आपके साथ था तो ठीक था। अब अगर मैं बीजेपी में हूं तो आप मेरे लिए इन शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं। और उसके बाद देखो ये अपने आप को समझते क्या हैं। ये चीज कहकर मुझे हाथ आगे कर रहे हैं। जैसे कोई शहंशाह हों। वह समझते हैं कि मैं मालिक ही हूं इस दुनिया देश का।' हाथ नहीं मिलाऊंगा, बिट्टू बोले उन्होंने कहा, ' मैं गांधी परिवार का न हूं, लेकिन मेरे सिर पर पगड़ी है सरदार की। तो हाथ मिलाने जब बढ़ाया, तो मैंने कहा कि आप देश के गद्दार हो, देश के दुश्मन हो। जो रोज देश और सेना के खिलाफ बात करते हो। पंजाब का हाथ, गांधी परिवार जो सिखों को कातिल है। उस गांधी परिवार के वारिस के साथ मेरा हाथ नहीं मिलेगा।' भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी पर पूरे सिख समुदाय का अपमान करने के आरोप लगाए हैं। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने लिखा कि जिस तरह राहुल गांधी ने सम्मानित सिख नेता रवनीत सिंह बिट्टू को संबोधित किया, वो शालीनता और सभ्यता की सारी हदें पार करता है।  

राहुल गांधी पर रिजिजू का कटाक्ष: सुनते-सुनते थक गए, लेकिन वो बोलते नहीं

नई दिल्ली लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा बोलने की अनुमति न मिलने को लेकर लिखे गए पत्र के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। इस मामले पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि संसद नियमों से चलती है, किसी की मनमर्जी से नहीं।   संसद के मौजूदा बजट सत्र के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि सदन में महत्वपूर्ण मुद्दों पर बोलते समय उन्हें रोका जा रहा है या पर्याप्त समय नहीं दिया जा रहा है। राहुल गांधी का तर्क है कि विपक्ष के नेता के नाते उन्हें अपनी बात रखने का लोकतांत्रिक अधिकार है, जिसे दबाया जा रहा है। किरेन रिजिजू का पलटवार राहुल गांधी के आरोपों पर जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार ने उनके पत्र का उत्तर दे दिया है। रिजिजू ने राहुल गांधी के रवैये पर सवाल उठाते हुए करारा तंज कसा। संसद के बाहर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा- 'हम लोग भी रुक-रुक के थक गए हैं। वो बोलते ही नहीं हैं। वे नियम से बाहर बोलते हैं। हम लोगों ने दो दिन इंतजार किया। बाकी लोगों को भी तो बोलने का मौका मिलना चाहिए न। वे (राहुल गांधी) अपनी मर्जी से थोड़ी न बोलेंगे…ये भारत की संसद है। यहां नियम से बोलना पड़ता है।' केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए कहा- कांग्रेस पार्टी 'थेथरोलॉजी' का जमात हो गया है। राहुल गांधी और उनके लोग झूठ और गलत जानकारी फैलाते हैं। वे लोकतंत्र को शर्मसार करते हैं। वे संसद को कांग्रेस पार्टी का ऑफिस समझते हैं। वे संसद के खिलाफ बोलते हैं और कभी भी सकारात्मक नहीं सोचते। राहुल गांधी के नेतृत्व में, वे एक साज़िश के तहत देश के खिलाफ काम करते हैं… राहुल गांधी झूठ बोलते हैं।   प्रियंका का रिएक्शन, सांसदों का प्रदर्शन इससे पहले जब कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा से पूछा गया कि क्या विपक्ष आज संसद में PM को बोलने देगा तो उन्होंने कहा- देखते हैं क्या होता है।' इस बीच कांग्रेस सांसदों ने 'PM समझौता कर चुके हैं' वाला पोस्टर लेकर संसद की सीढ़ियों पर विरोध प्रदर्शन किया। कल, विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर मीडिया से बात करते हुए यही आरोप लगाया था। लोकसभा सांसद गुरजीत सिंह औजला, हिबी ईडन, डीन कुरियाकोस, अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, बी. मणिक्कम टैगोर, डॉ. प्रशांत यादवराव पाडोले, चमाला किरण कुमार रेड्डी और एस. वेंकटेशन को कल सदन में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा चीन का मुद्दा उठाने के दौरान सदन के नियमों का उल्लंघन करने के लिए संसद के बाकी सत्र के लिए सस्पेंड कर दिया गया है। सस्पेंड किए गए लोकसभा सांसद गुरजीत सिंह औजला, हिबी ईडन, डीन कुरियाकोस, अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, बी. मणिक्कम टैगोर, डॉ. प्रशांत यादवराव पाडोले, चमाला किरण कुमार रेड्डी और एस. वेंकटेशन ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। राहुल गांधी का बड़ा आरोप इससे पहले राहुल गांधी ने अपने पत्र में सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सोमवार को जिस तथ्य को प्रमाणित करने के बहाने उन्हें बोलने से रोका गया है उसकी प्रमाणिकता के संदर्भ में उन्होंने सदन के पटल पर दस्तावेज पेश कर दिया है। उन्होंने लिखा- आपने जिस दस्तावेज को प्रमाणित करने का निर्देश दिया था आज मैंने अपनी बातचीत को पुनः शुरू करते हुए उस को प्रमाणित कर दिया। सदन की लंबी परंपरा में पूर्ववर्ती अध्यक्षों के ऐसे मामलों में समय समय पर दिए गए निर्णय भी शामिल हैं। सदन में किसी दस्तावेज का उल्लेख करने वाला सदस्य प्रस्तुत तथ्यों को प्रमाणित करने के लिए बाध्य होता है और इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद अध्यक्ष उस सदस्य को दस्तावेज का उद्धरण देने या उसका उल्लेख करने की अनुमति देते हैं। इसके बाद उस दस्तावेज पर प्रतिक्रिया देने का काम सरकार का हो जाता है और अध्यक्ष की भूमिका समाप्त हो जाती है। राहुल गांधी ने आगे लिखा- आज मुझे लोकसभा में बोलने से रोका जाना न केवल इस परंपरा का उल्लंघन है, बल्कि यह एक गंभीर चिंता भी पैदा करता है कि विपक्ष के नेता के रूप में राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मामलों पर मुझे जानबूझकर बोलने से रोका जा रहा है। यह दोहराना उचित होगा कि राष्ट्रीय सुरक्षा राष्ट्रपति के अभिभाषण का एक प्रमुख हिस्सा थी, जिस पर संसद में चर्चा आवश्यक है।  

दल-बदल पर गरमाई सियासत: BJP जॉइन करने वाले मंत्री को राहुल गांधी ने कहा ‘गद्दार’

नई दिल्ली संसद भवन परिसर में प्रदर्शन के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू में नोक झोंक की स्थिति बन गई। मामला का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। वीडियो में सुनाई दे रहा है कि एक ओर जहां राहुल ने बिट्टू को गद्दार कहा। वहीं, बिट्टू ने उन्हें देश का दुश्मन करार दिया। खास बात है कि बिट्टू कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे। वीडियो में देखा जा सकता है कि सत्र से पहले विपक्षी सांसद प्रदर्शन कर रहे हैं। इनमें राहुल गांधी भी शामिल हैं। इस बीच वह बिट्टू को देखते हुए कहते हैं, 'यहां एक गद्दार चला आ रहा है। इसके चेहरे को देखिए।' इसपर वहां मौजूद सांसद हंसने लगते हैं और बिट्टू उनके सामने जाकर रुक जाते हैं। वह राहुल समेत सभी की ओर इशारा कर कहते हैं, 'देश के दुश्मन' और आगे बढ़ जाते हैं। हाथ मिलाने से इनकार किया गद्दार कहने के बाद राहुल ने बिट्टू से हाथ मिलाने की कोशिश की। उन्हें कहते हुए सुना जा सकता है, 'हैलो ब्रदर। मेरे गद्दार दोस्त। चिंता मत करो। यहीं वापस आओगे।' वीडियो में नजर आ रहा है कि केंद्रीय मंत्री ने उनके साथ हाथ मिलाने से इनकार कर दिया। राहुल के साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल भी मौजूद हैं। यह मामला संसद के मकर द्वार के पास का है। वहां बजट सत्र से की शेष अवधि से निलंबित किए गए आठ विपक्षी सांसद प्रदर्शन कर रहे थे। विपक्ष लगातार अमेरिका के साथ डील को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। यह मामला संसद के मकर द्वार के पास का है। वहां बजट सत्र से की शेष अवधि से निलंबित किए गए आठ विपक्षी सांसद प्रदर्शन कर रहे थे। विपक्ष लगातार अमेरिका के साथ डील को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी में विवाद का किया था दावा दिसंबर में बिट्टू ने दावा किया था कि राहुल और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा में विवाद चल रहा है। एनडीटीवी से बातचीत में बिट्टू ने वीबी जी राम जी बिल पर कांग्रेस के प्रदर्शन की तैयारी पर सवाल पूछा गया। इसपर उन्होंने कहा, 'उनके पास लोग हैं प्रदर्शन करने के लिए? उनको महात्मा गांधी से कोई लेना देना नहीं है। उन्हें जो उनका गांधी है, प्रियंका गांधी, राहुल गांधी, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, संजय गांधी, उनको उस गांधी से दिक्कत है कि वो कहां जा रहा है।' उन्होंने कहा था, 'दूसरी तरफ दोनों गांधी में लड़ाई चल रही है, बड़ी भारी लड़ाई चल रही है। जो मुझे पता लगा है… सदन में जो दो तीन बार जो भाषण हुआ है, उसे भी लोगों ने प्रियंका गांधी का जो भाषण है, उसकी तुलना की है। और राहुल गांधी इस चीज से नाराज होकर परिवार और पार्टी से लड़कर यहां से चले गए हैं।' उन्होंने कहा, 'उनकी पार्टी और फैमिली में जो प्रॉब्लम है। इसलिए राहुल गांधी छोड़कर चले गए हैं।'