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BMC चुनाव में हार के बावजूद उद्धव ठाकरे ने कैसे बचाई अपनी साख, 30 साल बाद ढहा ठाकरे का गढ़

मुंबई मुंबई की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर हुआ है. बीएमसी मेंं अब ठाकरे की बादशाहत खत्म हो गई. भाजपा ने अपने 25 साल का वनवास खत्म कर बीएमसी चुनाव में विजय पताका लहरा दिया. बीएमसी यानी बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के चुनावों में भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना वाली महायुति ने शानदार जीत दर्ज की है. देवेंद्र फडणवीस की रणनीति के आगे उद्धव ठाकरे पानी भरते नजर आए. महायुति ने बीएमसी की कुल 227 सीटों में से 118 सीटें जीतीं. यह बीएमसी में बहुमत के 114 के आंकड़े से ज्यादा है. BJP ने अकेले 89 सीटें हासिल कीं, जबकि शिंदे की शिवसेना को 29 सीटें मिलीं. यह जीत BJP के लिए बड़ी कामयाबी है, क्योंकि उन्होंने मुंबई की सबसे अमीर निकाय पर कब्जा कर लिया, जहां सालाना बजट हजारों करोड़ का होता है. मगर उद्धव ठाकरे का प्रदर्शन भी उतना बुरा नहीं है, जितना शुरू में लगा था. यह सच है कि इस चुनाव की कहानी उद्धव ठाकरे के लिए दुखद है. उद्धव ठाकरे की शिवसेना को बीएमसी में 65 सीटों से संतोष करना पड़ा. उद्धव की शिवसेना को 2017 में 84 सीटें मिली थीं. उद्धव ठाकरे ने इस चुनाव में अपने भाई राज ठाकरे के साथ हाथ मिलाया था. हालांकि, उद्धव ठाकरे को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के साथ गठबंधन का उतना फायदा नहीं मिला, क्योंकि मनसे ने महज 6 सीटें जीतीं. इस तरह उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का गठबंधन महज 71 सीटों पर समिट गया. हालांकि, उद्धव ठाकरे चाहते तो यह कहानी कुछ और हो सकती थी. अगर वह विधानसभा वाली रणनीति ही अपनाते तो शायद नतीजे कुछ और हो सकते थे. हार में भी उद्धव ने कैसे बचाई साख मराठी अस्मिता और राज-उद्धव की जोड़ी का क्या रहा असर? इस चुनाव में ठाकरे भाइयों के गठबंधन ने ‘मराठी अस्मिता’ का मुद्दा जोर-शोर से उठाया. 1980 के दशक के बाद यह पहली बार था जब ठाकरे की सेना केवल मराठी मानूस के नाम पर लड़ी. भाजपा ने इस काट के लिए एकनाथ शिंदे को साथ रखा, जिनके पास शिवसेना का मूल चुनाव चिन्ह ‘धनुष-बाण’ था. राज ठाकरे की मनसे भले ही खुद ज्यादा सीटें नहीं जीत पाई, लेकिन उनके कार्यकर्ताओं ने उद्धव गुट के साथ मिलकर जमीन पर एक मजबूत चुनावी विमर्श खड़ा किया. इसने भाजपा को मुंबई में पूर्ण बहुमत से रोक दिया. बीएमसी चुनाव के नतीजों से भविष्य के लिए क्या हैं बड़े सबक? इन नतीजों ने साफ कर दिया है कि भाजपा अब महाराष्ट्र में ‘बड़े भाई’ की भूमिका में है. लेकिन मुंबई जीतने के लिए उसे अभी भी क्षेत्रीय सहयोगियों की जरूरत पड़ेगी. एकनाथ शिंदे की प्रासंगिकता खत्म नहीं हुई है, क्योंकि भाजपा उनके बिना बीएमसी का मेयर नहीं बना सकती. वहीं, विपक्ष के लिए यह संदेश है कि केवल भावनात्मक मुद्दों से काम नहीं चलेगा. जनता को विकास का ठोस मॉडल चाहिए. उद्धव से हो गई एक चूक अब सवाल है कि आखिर उद्धव ठाकरे से कौन सी चूक हो गई, जिसने बीएमसी की गद्दी छीन ली? अगर उद्धव ठाकरे वह चूक नहीं करते तो क्या उनकी बादशाहत कायम रहती? अगर मौजूदा रिजल्ट को देखेंगे तो यह लगेगा कि उद्धव ठाकरे ही नहीं, कांग्रेस से भी चूक हुई है. जी हां, अगर उद्धव ठाकरे कांग्रेस के साथ गठबंधन करते तो नतीजे अलग हो सकते थे. कांग्रेस ने इस चुनाव में अकेले लड़ने का फैसला किया और 24 सीटें जीतीं. अगर उद्धव ठाकरे कांग्रेस को मनाने में कामयाब रहते और एमवीए यानी महा विकास अघाड़ी को फिर से एकजुट करते, तो शायद वोटों का बंटवारा कम होता और बीएमसी में सीटें ज्यादा मिल सकती थीं.   डेटा से समझिए कैसे बदल सकता था खेल आइए बीएमसी चुनाव 2026 के फाइनल रिजल्ट्स के डेटा से इसे समझते हैं. बीएमसी कुल वोटों की बात करें तो भाजपा को 1,179,273 वोट मिले, जो 45.22% हैं. उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) को 717,736 वोट (27.52%) और कांग्रेस को 242,646 वोट (4.44 फीसदी) मिले. अगर उद्धव ठाकरे और कांग्रेस साथ होते तो उनके वोट कुल 960,382 हो जाते, जो भाजपा के करीब पहुंचते. नतीजों से पता चलता है कि कई वार्डों में जहां महायुति जीती, वहां उद्धव ठाकरे और कांग्रेस के वोट अलग-अलग पड़ने से फायदा महायुति को हुआ. अगर उद्धव ठाकरे अपने भाई राज ठाकरे के साथ भी कांग्रेस को मिला लेते तो भी स्थिति मौजूदा से बेहतर हो सकती थी. बीएमसी चुनाव रिजल्ट में सीटों की संख्या से भी इसे समझ सकते हैं.     भाजपा-89     शिवसेना (उद्धव)-65     शिवसेना (शिंदे)-29     कांग्रेस-24     मनसे-6     एनसीपी (अजित)-3     एआईएमआईएम-8 तो बदल सकती थी हार-जीत की तस्वीर इसे एक उदाहरण से भी समझ सकते हैं. मुंबई में कांग्रेस हो या उद्धव की शिवसेना, सबके दबदबा वाले अलग-अलग जोन-वार्ड रहे हैं. अंधेरी ईस्ट और गोरेगांव जैसे इलाकों में कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक रहा. यहां पर उद्धव के उम्मीदवारों को हार मिली क्योंकि वोट बंट गए. अगर गठबंधन होता तो शायद तस्वीर कुछ और होती और हो सकता था कि 20-30 अतिरिक्त सीटें मिल जातीं. साल 2019 के चुनावों में एमवीए ने साथ लड़ा तो बेहतर प्रदर्शन दिखा था. मगर अब टूटने से सब कमजोर हो गए. उद्धव ठाकरे ने मनसे के साथ गठबंधन करके मराठी वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश की, क्योंकि राज ठाकरे मराठी अस्मिता की बात करते हैं. मगर उद्धव को इससे फायदा नहीं हुआ, कारण कि मनसे का वोट शेयर केवल 5% के आसपास रहा और उसे केवल 6 सीटें मिलीं. वहीं, कांग्रेस के 24 सीटें और 4.44 फीसदी वोट उद्धव ठाकरे के लिए बड़ा मौका थे. अगर वे साथ होते तो बीएमसी चुनाव कुल सीटें उद्धव ठाकरे की 65 + कांग्रेस की 24 + मनसे की 6 से ज्यादा होतीं, क्योंकि वोट ट्रांसफर से क्लोज फाइट वाले 40-50 वार्डों में जीत मिल सकती थी. बीएमसी चुनाव परिणाम: उद्धव ठाकरे को मनसे से गठबंधन का फायता नहीं मिला. उद्धव के साथ कांग्रेस की भी गलती इसलिए उद्धव ठाकरे की गलती बस यही है कि वे कांग्रेस को मनाने में नाकाम रहे. हालांकि, फैक्ट यह है कि कांग्रेस ने ही पहले एकला चलो रे नीति का ऐलान किया था. कांग्रेस की भी यह … Read more

बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव: नियम, प्रक्रिया और टाइमलाइन पर एक नजर

 नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी ने अपने अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है. यह पूरी प्रक्रिया पार्टी के देशव्यापी संगठनात्मक अभियान ‘संगठन पर्व-2024’ के तहत कराई जा रही है. चुनाव कार्यक्रम को शुक्रवार को बीजेपी के राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी डॉ. के. लक्ष्मण ने अधिसूचित कर दिया है. पार्टी संविधान के तहत राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव एक तय प्रक्रिया के अनुसार होता है, जिसमें इलेक्टोरल कॉलेज, नामांकन, जांच, नाम वापसी और जरूरत पड़ने पर मतदान शामिल है. स्टेप 1: इलेक्टोरल कॉलेज की सूची जारी राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव की प्रक्रिया की शुरुआत 16 जनवरी 2026 को हुई. दोपहर 12 बजे इलेक्टोरल कॉलेज की सूची प्रकाशित की गई. बीजेपी के संविधान के अनुसार, इलेक्टोरल कॉलेज में पार्टी की राष्ट्रीय परिषद (नेशनल काउंसिल) के सदस्य और राज्यों की परिषदों से चुने गए प्रतिनिधि शामिल होते हैं. सिर्फ यही सदस्य राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में मतदान के पात्र होते हैं. स्टेप 2: नामांकन प्रक्रिया अगला अहम चरण नामांकन का होता है. 19 जनवरी 2026 को दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक नई दिल्ली स्थित बीजेपी के केंद्रीय कार्यालय में नामांकन दाखिल किए जाएंगे. पार्टी नियमों के मुताबिक, उम्मीदवार का कम से कम चार कार्यकाल या 15 साल तक सक्रिय सदस्य होना अनिवार्य है. नामांकन के लिए किसी एक राज्य के इलेक्टोरल कॉलेज के कम से कम 20 सदस्यों का प्रस्ताव जरूरी है. इसके साथ ही समर्थन ऐसे कम से कम 5 राज्यों से होना चाहिए, जहां नेशनल काउंसिल के चुनाव पूरे हो चुके हों. स्टेप 3: जांच और नाम वापसी नामांकन की समय-सीमा समाप्त होते ही उसी दिन शाम 4 बजे से 5 बजे तक नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी. इसके बाद उम्मीदवारों को शाम 5 बजे से 6 बजे तक नाम वापस लेने का अवसर मिलेगा. शाम 6:30 बजे राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी की ओर से प्रेस विज्ञप्ति जारी की जाएगी, जिसमें यह स्पष्ट किया जाएगा कि चुनाव सर्वसम्मति से हो रहा है या मतदान की जरूरत पड़ेगी. स्टेप 4: मतदान और नतीजे यदि नाम वापसी के बाद एक से ज्यादा वैध उम्मीदवार मैदान में रहते हैं तो 20 जनवरी 2026 को सुबह 11:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक मतदान होगा और उसी दिन नतीजों की घोषणा की जाएगी. हालांकि, यदि नाम वापसी के बाद सिर्फ एक ही उम्मीदवार बचता है तो उसे निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया जाएगा. संभावित उम्मीदवार का प्रस्तावक कौन-कौन? सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन तीन अलग-अलग सेट में नामांकन दाखिल कर सकते हैं.  एक नामांकन पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और जेपी नड्डा प्रस्तावक होंगे. दूसरे सेट में 20 से ज्यादा निर्वाचित बीजेपी प्रदेश अध्यक्षों के नाम हो सकते हैं. तीसरे सेट में बीजेपी नेशनल काउंसिल के सदस्यों का समर्थन होने की बात कही जा रही है. अंतिम चरण में पदभार ग्रहण यदि नितिन नबीन पूर्णकालिक बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाते हैं तो पार्टी मुख्यालय में औपचारिक कार्यक्रम होगा. उन्हें दीनदयाल उपाध्याय मार्ग स्थित राष्ट्रीय अध्यक्ष कार्यालय तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में ले जाया जाएगा. इसके साथ ही बीजेपी में राष्ट्रीय नेतृत्व का औपचारिक हस्तांतरण पूरा होगा. इसके अलावा, संगठन पर्व-2024 का समापन और पार्टी के अगले संगठनात्मक और चुनावी चरण की शुरुआत मानी जाएगी. बीजेपी के नए अध्यक्ष का चुनाव आने वाले वर्षों की राजनीतिक और चुनावी रणनीति तय करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है.

BMC चुनाव नतीजे के बाद शिंदे सेना सताए ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ का डर, पार्षदों को 5 स्टार होटल में किया शिफ्ट

मुंबई बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के चुनाव नतीजों के बाद मुंबई की सियासत में जबरदस्त खींचतान शुरू हो गई है. सत्ता के इस संग्राम के बीच महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है. शिंदे गुट की शिवसेना ने अपने सभी नवनिर्वाचित पार्षदों को मुंबई के बांद्रा स्थित ताज लैंड्स एंड होटल में एकत्रित होने का आदेश दिया है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, शिंदे सेना के सभी पार्षदों को आज दोपहर 3 बजे तक होटल पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं. इन्हें अगले तीन दिनों तक होटल में ही ठहराया जाएगा, ताकि किसी भी तरह की हॉर्स ट्रेडिंग या टूट की कोशिश को नाकाम किया जा सके. 29 सीटों के साथ शिंदे गुट बना 'किंगमेकर' BMC चुनाव में शिंदे गुट की शिवसेना ने 29 सीटें जीती हैं. मौजूदा गणित के मुताबिक बीजेपी अपने दम पर बीएमसी में बहुमत का आंकड़ा नहीं छू पाई है. ऐसे में शिंदे गुट की भूमिका निर्णायक हो गई है और वही अब सत्ता की चाबी माना जा रहा है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बीजेपी के लिए बीएमसी में सरकार बनाना शिंदे सेना के समर्थन के बिना संभव नहीं है. यही वजह है कि शिंदे गुट किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठाना चाहता है. 'No Risk' के मूड में एकनाथ शिंदे सूत्रों के अनुसार, एकनाथ शिंदे खुद पूरे हालात पर नजर बनाए हुए हैं. उनका मानना है कि जब तक बीएमसी में सत्ता का औपचारिक दावा नहीं हो जाता, तब तक पार्षदों को एकजुट रखना बेहद जरूरी है. इसी रणनीति के तहत सभी पार्षदों को 5-स्टार होटल में ठहराने का फैसला किया गया है. शिंदे गुट को आशंका है कि विपक्षी दल या दूसरे राजनीतिक खिलाड़ी उनके पार्षदों को तोड़ने की कोशिश कर सकते हैं, जिससे सत्ता का समीकरण बिगड़ सकता है. कांग्रेस सांसद नसीर हुसैन का तंज इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस सांसद नसीर हुसैन ने एकनाथ शिंदे पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, उन्हें डर किससे है? कौन उनके पार्षदों को तोड़ सकता है? और किसे पार्षद तोड़ने का सबसे ज्यादा अनुभव है, यह सब जानते हैं. नसीर हुसैन ने आगे कहा कि बीजेपी हमेशा अपने सहयोगी दलों और टूटे हुए गुटों की कीमत पर बढ़ी है. उन्होंने सवाल उठाया कि महाराष्ट्र और बिहार में किस पार्टी का स्ट्राइक रेट सबसे ज्यादा रहा है. उन्होंने कहा, एकनाथ शिंदे जितनी जल्दी यह समझ लें, उतना ही उनके लिए बेहतर होगा. बीएमसी में सस्पेंस बरकरार फिलहाल, बीएमसी में मेयर और सत्ता गठन को लेकर सस्पेंस बना हुआ है. एक तरफ बीजेपी बहुमत के लिए जोड़-तोड़ में जुटी है तो दूसरी तरफ शिंदे गुट अपने पत्ते खोलने से पहले पूरी तरह सुरक्षित रणनीति के तहत आगे बढ़ रहा है. आने वाले कुछ दिन तय करेंगे कि मुंबई की सत्ता किसके हाथ जाएगी.

कर्नाटक में राजनीति के जाल में उलझे डीके शिवकुमार, दावोस दौरा रद्द

 बेंगलुरु कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने स्विट्ज़रलैंड के दावोस में होने वाले वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में शामिल होने के लिए प्रस्तावित आधिकारिक दौरा रद्द कर दिया है. वह 18 जनवरी से शुरू होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले थे, लेकिन ऐन वक्त पर उनका कार्यक्रम बदल गया. सूत्रों के मुताबिक, दावोस दौरा रद्द करने के पीछे दिल्ली और बेंगलुरु में बढ़ती राजनीतिक और आधिकारिक व्यस्तताएं बड़ी वजह हैं. आने वाले दिनों में डीके शिवकुमार की AICC के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ कई अहम बैठकें प्रस्तावित हैं, जिन्हें देखते हुए यह फैसला लिया गया. जानकारी के अनुसार, डीके शिवकुमार इस समय केंद्र सरकार के खिलाफ MNREGA (मनरेगा) को लेकर राज्य सरकार के अभियान की अगुवाई भी कर रहे हैं. इसी मुद्दे पर कर्नाटक विधानसभा का पांच दिवसीय विशेष सत्र 22 जनवरी से शुरू होने वाला है, जिसमें सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस के आसार हैं. राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि कर्नाटक की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और अंदरूनी समीकरणों ने भी दावोस यात्रा रद्द करने में अहम भूमिका निभाई. राज्य की राजनीति में चल रही हलचल के बीच डीके शिवकुमार का बेंगलुरु और दिल्ली में मौजूद रहना पार्टी और सरकार दोनों के लिहाज से जरूरी माना जा रहा है. हालांकि आधिकारिक तौर पर सरकार की ओर से दावोस दौरा रद्द करने की कोई विस्तृत वजह नहीं बताई गई है, लेकिन संकेत साफ हैं कि अंतरराष्ट्रीय मंच से ज्यादा प्राथमिकता इस वक्त घरेलू राजनीति और प्रशासनिक चुनौतियों को दी जा रही है.

MLA बरैया की विवादित टिप्पणी, मोहन यादव ने उठाया सवाल: क्या राहुल गांधी उन्हें पार्टी से बाहर करेंगे?

भोपाल  अपने बयानों के चलते हमेशा चर्चाओं में रहने वाले कांग्रेस नेता और भांडेर विधायक फूल सिंह बरैया ने एक बार फिर अपने विवादित बयान से भूचाल ला दिया है. इस बार उन्होंने ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासत के साथ-साथ समाज को भी झकझोर दिया है. विधायक बरैया का कथित बयान था कि अगर खूबसूरत लड़की दिख जाए तो दिमाग विचलित हो सकता है और दुष्कर्म हो सकता है. बरैया यहीं नहीं रूके आगे वे एक समुदाय विशेष को लेकर कहते हैं कि फिर उन समुदायों में क्यों होता है दुष्कर्म, क्योंकि धर्म ग्रंथों में इस तरह के निर्देश दिए गए हैं. इस मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव का भी बयान आया है. बरैया के विवादित बयान पर सीएम ने दी प्रतिक्रिया सीएम मोहन यादव ने कहा, "कांग्रेस नेता राहुल गांधी को अपने विधायक को पार्टी से बाहर करना चाहिए. बरैया ने इस तरह का बयान देकर समाज में जहर घोलने का प्रयास किया है." हालांकि, जब राहुल गांधी इंदौर पहुंचे तो कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया उनके साथ चलते दिखाई दिए. ये पूरा बवाल फूल सिंह बरैया के उस बयान के बाद उठा है जिसमें उन्होंने कहा कि एक समुदाय विशेष के धर्म ग्रंथों में ऐसा लिखा है कि खास वर्ग की महिलाओं से दुष्कर्म करने पर तीर्थ यात्रा का फल मिलता है." उनके इस बयान के बाद पूरे प्रदेश में सियासी घमासान मचा हुआ है. उनका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से सर्कुलेट हो रहा है. मोहन यादव ने कहा बरैया को बाहर करें राहुल भोपाल में यूनियन कार्बाइड कारखाने का निरीक्षण करने के बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने मीडिया से बातचीत की. इस दौरान सीएम मोहन यादव ने कहा, "कांग्रेस के विधायक फूल सिंह बरैया ने इस तरह का बयान देकर समाज में जहर घोलने का काम किया है. राहुल गांधी के मन में अगर सभी समाजों के लिए सम्मान है, तो मैं उम्मीद करूंगा कि वे (राहुल गांधी) अपने विधायक को सस्पेंड करेंगे. उन्हें पार्टी से बाहर निकालेंगे. मैं इस बयान की निंदा करता हूं. फूल सिंह बरैया के पास एक विधायक का उत्तरदायित्व है. उन्हें इस तरह के बयानों से बचना चाहिए था." शिवराज बोले ये शर्मनाक, बेटियां तो देवियां हैं कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया के कथित बयान को केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अशोभनीय बताया है. उन्होंने कहा कि "हम बेटियों को जाति समाज में बांटकर नहीं देख सकते. हमारे यहां तो बेटियां दुर्गा लक्ष्मी का स्वरूप होती हैं. अब क्या बेटियों को भी बांटोगे? कोई भी नेता हो या अन्य कोई व्यक्ति, उसे ऐसी अशोभनीय टिप्पणी बिल्कुल नहीं करनी चाहिए." शिवराज सिंह ने कहा, "ये मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से बेहद दुखद है." बरैया के बयान पर बीजेपी ने उठाया सवाल उधर इंदौर में राहुल गांधी के साथ कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया दिखाई दिए तो उस पर बीजेपी ने सवाल उठाया कि बरैया के इस बयान से क्या राहुल गांधी की सहमति और स्वीकारोक्ति मानी जाए." बीजेपी के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने कहा, "अब स्पष्ट है कि महिलाओं और एससी-एसटी समाज के प्रति दूषित, विकृत और कुंठित मानसिकता सिर्फ बरैया की नहीं, बल्कि राहुल गांधी के नेतृत्व वाली पूरी कांग्रेस की सोच है. अगर आपत्ति होती, तो मंच साझा नहीं किया जाता. शर्म आनी चाहिए कांग्रेस को और विशेषकर सोनिया गांधी व प्रियंका गांधी को, जो महिला सम्मान की बातें तो करती हैं, लेकिन अपनी ही पार्टी की अपराधी मानसिकता पर चुप हैं. यह चुप्पी अब मौन नहीं, समर्थन है. नारी देवी है, राजनीतिक औजार नहीं. अपमान बर्दाश्त नहीं. धिक्कार है ऐसी कांग्रेस पर." 'शिकायत मिलती है, तो पार्टी एक्शन लेगी' कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया के विवादित बयान को लेकर सियासी गलियारों में बहस छिड़ गई है. एक तरफ जहां, हिंदू संगठन और बीजेपी के नेता कार्यकर्ता फूल सिंह बरैया का जमकर विरोध कर रहे हैं. माना जा रहा है कि वहीं अब कांग्रेस संगठन भी एक्शन ले सकता है. मध्य प्रदेश कांग्रेस के संगठन प्रभारी संजय कामले ने कहा है कि "यह उनका व्यक्तिगत बयान है कांग्रेस इससे सहमति नहीं रखती, दुष्कर्म एक मानसिक सोच होती है. कोई जाती धर्म देखकर दुष्कर्म नहीं होता व्यक्तिगत नहीं यह अपराधी प्रवर्ती के लोग करते हैं. खूबसूरती आंखों में बसती है हर बच्चा अपने मां बाप के लिए सबसे सुंदर होता है. यदि कोई शिकायत मिलती है तो पार्टी में अनुशान समिति है जो एक्शन लेगी."

BJP कार्यकर्ताओं के लिए हेमंत खंडेलवाल ने शुरू की ‘सहयोग सेल’, समस्याओं का होगा समाधान

भोपाल  मध्य प्रदेश में भाजपा ने पार्टी कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों की समस्याओं को सुनने और हल करने के लिए एक नया तंत्र ‘सहयोग सेल’ तैयार किया है। यह पहल प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के निर्देश पर शुरू की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, यदि जिले स्तर पर किसी कार्यकर्ता या नागरिक की समस्या का समाधान नहीं हो पाता है, तो मामला सीधे प्रदेश संगठन तक पहुंचेगा। प्रदेश भर में इस सेल की स्थापना की प्रक्रिया जारी है, जिसमें प्रदेश संयोजक और जिला संयोजक नियुक्त किए जाएंगे। साथ ही, रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों को शामिल करने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि प्रशासनिक अनुभव का लाभ लिया जा सके। पदाधिकारियों के बैठने के दिन अब निर्धारित कर दिए गए इसके अलावा, पार्टी के जिला कार्यालयों में पदाधिकारियों के बैठने के दिन अब निर्धारित कर दिए गए हैं, ताकि कार्यकर्ताओं और आम लोगों की समस्याओं का समय पर और व्यवस्थित समाधान सुनिश्चित किया जा सके। 'सहयोग सेल' में रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों किया जाएगा शामिल  इस सेल में प्रदेश संयोजक और जिला संयोजक की नियुक्ति की जाएगी, ताकि संगठनात्मक स्तर पर बेहतर समन्वय बनाया जा सके. सहयोग सेल में प्रशासनिक अनुभव का लाभ लेने के लिए रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों को शामिल करने पर भी विचार किया जा रहा है. वहीं जिला कार्यालयों में पदाधिकारियों के बैठने के दिन भी तय किए जाएंगे. इन निर्धारित दिनों में पदाधिकारी कार्यालय में मौजूद रहकर आम जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनेंगे और उनके निराकरण की दिशा में कार्रवाई करेंगे. सेल कैसे करेगा काम जिला कार्यालय  में आने वाली जो समस्याएं अगल प्रशासन से संबंधित हैं तो उन्हें समाधान के लिए जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को भेजा जाएगा. अगर किसी पार्टी कार्यकर्ता की समस्या पार्टी संगठन से जुड़ी है, तो जिला अध्यक्ष और जिला प्रभारी उसे देखेंगे. जो मामले जिला स्तर पर हल नहीं हो पाएंगे, उन्हें प्रदेश कार्यालय के सपोर्ट सेल में भेजा जाएगा. यह सेल प्रशासनिक और संगठनात्मक दोनों तरह के मामलों को देखेगा. ऐसे काम करेगी सहयोग सेल जिला कार्यालय में आने वाली समस्याएं यदि प्रशासनिक हैं तो उन्हें जिला प्रशासन और संबंधित विभागों में भेजकर समाधान कराया जाएगा। यदि किसी कार्यकर्ता की समस्या पार्टी संगठन से संबंधित है तो जिला अध्यक्ष, जिला प्रभारी उसका समाधान कराएंगे। जिन मामलों का निराकरण जिला स्तर पर नहीं हो पा रहा है तो ऐसे मामलों को प्रदेश कार्यालय की सहयोग सेल के पास भेजा जाएगा। इनमें प्रशासनिक समस्याएं और संगठन दोनों तरह के मामलों का निराकरण किया जाएगा। प्रदेश कार्यालय में रोज बैठ दो घंटे बैठ रहे मंत्री बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने मप्र सरकार के मंत्रियों के प्रदेश कार्यालय में बैठने का रोस्टर बनाया है। इस व्यवस्था में सोमवार से शुक्रवार तक एक मंत्री दोपहर एक बजे से तीन बजे तक प्रदेश कार्यालय में बैठकर कार्यकर्ताओं से संवाद करके उनकी समस्याएं सुन रहे हैं। अब सहयोग सेल के जरिए आने वाले मामलों को सुलझाने के लिए संबंधित विभागों के मंत्रियों और प्रदेश पदाधिकारियों की जवाबदारी तय की जाएगी। पार्टी नेतृत्व और कार्यकर्ताओं के बीच का माध्यम बनेगी सहयोग सेल प्रदेश कार्यालय मंत्री श्याम महाजन द्वारा इस संबंध में सभी भाजपा जिला अध्यक्षों को पत्र जारी कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यह सहयोग सेल पार्टी नेतृत्व और कार्यकर्ताओं के बीच संवाद, समन्वय एवं समस्याओं के समाधान का एक स्थायी माध्यम बनेगा। किन मामलों को मिलेगा सहयोग सेल के माध्यम से समाधान पत्र के अनुसार, सहयोग सेल के अंतर्गत वही विषय प्रस्तुत किए जाएंगे जिनका समाधान जिला अथवा संभाग स्तर पर संभव न हो और जिनमें मंत्रीगण अथवा प्रदेश पदाधिकारियों के हस्तक्षेप की आवश्यकता हो। भोपाल आने वाले आगंतुकों के प्रशासनिक, विभागीय, जनहित से जुड़े एवं संगठनात्मक विषयों को निर्धारित प्रारूप, संक्षिप्त और तथ्यपरक रूप में संकलित किया जाएगा। समय-सारणी और अनुशासन पर जोर निर्देशों में कहा है कि मंत्रीगण एवं प्रदेश पदाधिकारी प्रदेश कार्यालय में अपनी घोषित उपलब्धता, दिन और समय का अनिवार्य रूप से पालन करेंगे। किसी कार्यक्रम की तिथि या समय में परिवर्तन होने की स्थिति में पार्टी द्वारा सोशल मीडिया माध्यम से सूचना दी जाएगी। जिला स्तर पर समन्वय की नई व्यवस्था सभी जिला अध्यक्षों को निर्देशित किया गया है कि वे “सहयोग सेल” से संबंधित संपूर्ण जानकारी जिला पदाधिकारियों, मंडल अध्यक्षों, मोर्चा एवं प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों तथा सक्रिय कार्यकर्ताओं तक सुनिश्चित रूप से पहुंचाएं। इसके साथ ही प्रत्येक जिला अध्यक्ष अपने जिले से एक जिला सहयोग समन्वयक नामांकित करेंगे, जो प्रदेश कार्यालय से संपर्क, विषय निर्धारण, समन्वय एवं अनुवर्ती कार्यवाही का दायित्व निभाएगा। इस दिन प्रदेश कार्यालय में बैठेगे मंत्री  बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने मध्य प्रदेश सरकार के मंत्रियों के लिए प्रदेश पार्टी ऑफिस में बैठने का एक रोस्टर बनाया है. इस व्यवस्था के तहत, सोमवार से शुक्रवार तक, एक मंत्री दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक राज्य ऑफिस में बैठकर पार्टी कार्यकर्ताओं से बात कर उनकी समस्याएं सुन रहे हैं. अब सहयोग सेल के जरिए आने वाली समस्याओं को हल करने की जिम्मेदारी संबंधित विभागों के मंत्रियों और राज्य पार्टी अधिकारियों को सौंपी जाएगी.   

कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया का शर्मनाक बयान,

भांडेर  मध्य प्रदेश के दतिया जिले की भांडेर सीट से कांग्रेस एमएलए फूल सिंह बरैया ने महिलाओं और धर्मग्रंथों पर विवादित बयान दिया है। बरैया का कथित बयान है कि अगर खूबसूरत लड़की दिख जाए तो दिमाग विचलित हो सकता है, रेप हो सकता है। बरैया ने कहा है कि अगर कोई तीर्थ पर नहीं जा पा रहा है तो वह दलित आदिवासी वर्ग की महिला या बच्ची के साथ रेप करने पर वहीं फल पा सकता है। बरैया के इस बयान के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हंगामा मच गया है। 'ब्रेन विचलित हो सकता है' रिपोर्ट्स के मुताबिक कांग्रेस एमएलए सोशल मीडिया पर दिए एक इंटरव्यू में कहते नजर आ रहे हैं कि 'इंडिया में सबसे ज्यादा रेप शेड्यूल कास्ट, शेड्यूल ट्राइब और मोस्ट ओबीसी से होता है। रेप की थ्योरी ये है कि कोई भी, कैसे भी दिमाग का व्यक्ति रास्ते में जा रहा है, उसे खूबसूरत अति सुंदर लड़की यदि दिखी तो उसका ब्रेन विचलित हो सकता है तो रेप हो सकता है। आदिवासियों में, एससी में कौन-सी अति सुंदर स्त्री? मोस्ट ओबीसी में ऐसी स्त्रियां, सुंदरियां हैं? क्यों होता है बलात्कार, क्योंकि उनके धर्म ग्रंथों में इस तरह के निर्देश दिए गए हैं?' 'सहवास करने से यह तीर्थ का फल' बरैया यही नहीं रुकते और फिर कुछ जातिसूचक नामों का जिक्र करते हुए कहते हैं कि धर्मग्रंथों में लिखा है कि इन जातियों के साथ सहवास करने से यह तीर्थ का फल मिलेगा। बीजेपी नेता ने कहा- धिक्कार है बरैया के इस कथित बयान के बाद बीजेपी ने उनकी कड़े शब्दों में आलोचना की है। बीजेपी के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष ऊषा अग्रवाल ने कहा है कि बरैया का बयान कोई जुबानी फिसलन नहीं, बल्कि बीमार, विकृत और आपराधिक सोच का सार्वजनिक प्रदर्शन है। अग्रवाल ने एक्स पर बरैया के बयान का वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि ‘महिलाओं को “खूबसूरती” के तराजू पर तौलना और एससी-एसटी समाज की महिलाओं के साथ बलात्कार जैसे जघन्य अपराध को “तीर्थ फल” कहना, यह बयान नहीं, अपराधी मानसिकता की स्वीकारोक्ति है। धिक्कार है! यह स्त्री-द्वेष, दलित-विरोध और मानवता पर सीधा हमला है।’ अग्रवाल ने पोस्ट में आगे कांग्रेस नेतृत्व से इस तरह की बेशर्म टिप्पणियों के लिए माफी मांगने की मांग करते हुए पार्टी के हालिया "संविधान बचाओ" नारे के पीछे छिपे पाखंड पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आलाकमान स्वीकार करें कि कांग्रेस महिला-विरोधी और दलित-विरोधी मानसिकता के साथ खड़ी है। उन्होंने आगे ये भी कहा कि नारी देवी है, प्रयोग की वस्तु नहीं। महिलाओं का अपमान कभी स्वीकार नहीं। अपमान बर्दाश्त नहीं।

क्या फडणवीस सरकार से इस्तीफा देंगे अजीत पवार? BJP की हार के बाद उठे सवाल

 मुंबई महाराष्ट्र के सभी नगर निकाय चुनावों के परिणाम आ चुके हैं और भारतीय जनता पार्टी ने पुणे (PMC) और पिंपरी-चिंचवाड़ (PCMC) में अपना दबदबा न केवल बरकरार रखा है, बल्कि उसे और मजबूत किया है। अजीत पवार और शरद पवार की एकजुटता का दांव भाजपा के विजय रथ को रोकने में नाकाम रहा। भाजपा ने दोनों नगर निगमों में पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है। पुणे में भाजपा को 165 में से 110 सीटें मिली हैं। वहीं, एनसीपी और शरद पवार कैंप को मात्र 2 सीटें मिली हैं। पिंपरी-चिंचवाड़ (PCMC) की 128 सीटों में से भाजपा को 81 और अजीत गुट को सिर्फ 36 सीटें मिली हैं। भाजपा ने पहली बार इन दोनों नगर निगमों में अपने दम पर सत्ता हासिल की है। इससे पहले वह गठबंधन का हिस्सा रही थी। पवार फैमिली का भविष्य क्या है? अजीत पवार और शरद पवार के फिर से साथ आने के बावजूद मिली इस करारी हार ने दोनों गुटों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है। महायुति सरकार में रहते हुए भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ना और भ्रष्टाचार के आरोप लगाना उनके लिए उल्टा पड़ गया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने यहां तक कह दिया कि पार्टी को अजीत पवार को साथ लेने पर पछतावा है। अब अजीत पवार को या तो भाजपा के सामने झुककर रहना होगा या फिर पूरी तरह अपने चाचा के साथ विलय की संभावना तलाशनी होगी। महाराष्ट्र शरद पवार की पार्टी 24 नगर निकायों में अपना खाता तक नहीं खोल पाई है। पुणे जैसे अपने गढ़ में मात्र 2 सीटें जीतना पार्टी के संगठनात्मक ढांचे के चरमराने का संकेत है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए दोनों NCP गुटों का स्थायी रूप से मिल जाना ही उनके बचने का एकमात्र रास्ता हो सकता है। कार्यकर्ताओं में भी अब स्थिरता की मांग बढ़ रही है। भाजपा की जीत के 4 कारण 1. परिवारवाद पर प्रहार: भाजपा ने नीति बनाई कि किसी भी मौजूदा विधायक या सांसद के रिश्तेदार को टिकट नहीं दिया जाएगा। इससे मुरलीधर मोहोल और मेधा कुलकर्णी जैसे बड़े नेताओं के रिश्तेदारों को भी टिकट नहीं मिला, जिससे आम कार्यकर्ताओं में सकारात्मक संदेश गया। 2. नए चेहरों को मौका: पुणे में भाजपा ने अपने 97 में से 30 मौजूदा पार्षदों के टिकट काटकर नए और जमीनी कार्यकर्ताओं को मैदान में उतारा। 3. विपक्ष के मजबूत चेहरों को तोड़ा: चुनाव से ठीक पहले भाजपा ने बापू पठारे के परिवार (NCP-SP) और अभिजीत शिवरकर (कांग्रेस) जैसे प्रभावी स्थानीय नेताओं को अपने पाले में कर लिया। 4. इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस: मेट्रो विस्तार, रिंग रोड और कोस्टल रोड जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स ने शहरी मतदाताओं को भाजपा की ओर आकर्षित किया। इस जीत के साथ देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है। अब सबकी नजरें जिला परिषद चुनावों पर हैं, जहां यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अजीत पवार और शरद पवार का गठबंधन जारी रहता है या हार के बाद वे फिर से अलग रास्ते चुनते हैं।

राहुल गांधी का इंदौर दौरा: भागीरथपुरा पीड़ितों से संवाद, प्रशासन ने कॉन्फ्रेंस पर लगाई रोक

 इंदौर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी शनिवार को मध्य प्रदेश के इंदौर पर रहेंगे और दूषित पानी की वजह से अस्पतालों में भर्ती मरीजों से मिलेंगे. वह भागीरथपुरा भी जाएंगे और प्रभावित परिवारों से मिलकर संवेदना व्यक्त करेंगे. MP कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का दावा है कि शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से 24 लोगों की मौत हो गई है और आठ से 10 मरीज गंभीर हालत में हैं. हालांकि, राज्य सरकार ने इस त्रासदी में मरने वालों की संख्या सात बताई है, जिसमें एक पांच महीने का बच्चा भी शामिल है. उन्होंने आगे दावा किया कि राज्य में सप्लाई होने वाला 70 प्रतिशत पानी दूषित और पीने लायक नहीं है और प्रदूषित पानी को 'धीमा जहर' बताया जो किडनी और दूसरे अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है. एक न्यूज एजेंसी के मुताबिक, भागीरथपुरा के निवासियों ने भी दावा किया है कि पिछले महीने इलाके में फैली उल्टी और दस्त की बीमारी से अब तक 24 लोगों की मौत हो चुकी है. सत्ताधारी बीजेपी पर निशाना साधते हुए पटवारी ने आरोप लगाया, "इंदौर में दूषित पानी पीने से कई मौतों के बावजूद राज्य के मंत्री बड़े-बड़े कार्यक्रमों में व्यस्त हैं और हमें गालियां दे रहे हैं, पूछ रहे हैं कि हम इस घटना के बारे में सवाल क्यों उठा रहे हैं?" पटवारी ने बताया कि कांग्रेस गांधी की मौजूदगी में दूषित पीने के पानी की समस्या के समाधान पर चर्चा करने के लिए एक कॉन्फ्रेंस आयोजित करना चाहती थी, जिसमें राज्य भर के बुद्धिजीवी, पर्यावरणविद और नगर निगम पार्षद शामिल होते, लेकिन प्रशासन ने इसकी इजाज़त नहीं दी. अब हम यह कॉन्फ्रेंस बाद में आयोजित करेंगे." राज्य सरकार ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच के सामने एक स्टेटस रिपोर्ट पेश की, जिसमें कहा गया कि इस बीमारी से सात लोगों की मौत हुई है, जिसमें एक पांच महीने का बच्चा भी शामिल है. इस बीच, सरकारी महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की एक समिति की 'डेथ ऑडिट' रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि भागीरथपुरा में 15 लोगों की मौत किसी न किसी तरह से इस बीमारी से जुड़ी हो सकती है. राहुल गांधी के दौरे के बारे में पूछे जाने पर, पूर्व लोकसभा स्पीकर और वरिष्ठ बीजेपी नेता सुमित्रा महाजन ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष को अपनी भूमिका पूरी ताकत से निभानी चाहिए. महाजन ने कहा, "लोकतंत्र में विपक्ष को पूरी ताकत से अपना काम करना चाहिए. उन्हें (गांधी) आने दीजिए. अगर वे कुछ अच्छे सुझाव देते हैं, तो संबंधित लोगों को उन पर विचार करना चाहिए."

BJP का विपक्ष पर हमला, सुधांशु त्रिवेदी बोले – महाराष्ट्र निकाय चुनाव में INDIA गठबंधन का अंत

मुंबई महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों के चुनाव परिणामों में भारतीय जनता पार्टी और महायुति गठबंधन की बड़ी जीत पर पार्टी की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने विपक्षी 'INDIA' गठबंधन पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने कहा कि इन नतीजों ने साबित कर दिया है कि महाराष्ट्र की जनता ने नकारात्मक राजनीति को पूरी तरह नकार दिया है।   गठबंधन की एकजुटता पर सवाल सुधांशु त्रिवेदी ने विपक्षी खेमे की कमजोरी पर तंज कसते हुए पूछा, "क्या अब INDIA गठबंधन का कोई वजूद बचा भी है?" उन्होंने तर्क दिया कि केरल, दिल्ली और अब महाराष्ट्र के चुनावी मैदान में यह गठबंधन पूरी तरह बिखर चुका है। त्रिवेदी के अनुसार, जनता अब केवल विकास और स्थिरता के एजेंडे को चुन रही है, जिसे महायुति सरकार ने जमीन पर उतारा है।   युवा वोटरों (Gen-Z) ने बदला खेल भाजपा नेता ने इस जीत का श्रेय खास तौर से 'Gen-Z' यानी पहली बार वोट देने वाले युवाओं को दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं ने प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों और राज्य सरकार के विजन पर भरोसा जताया है। त्रिवेदी ने दावा किया कि युवाओं का बीजेपी के पक्ष में आना इस बात का प्रमाण है कि नई पीढ़ी विकसित भारत के संकल्प के साथ मजबूती से खड़ी है।